samacharsecretary.com

आतंकियों के लिए बनेगी ‘काला पानी’ जैसी जेल! सम्राट चौधरी ने लोकेशन का किया खुलासा

पटना बिहार सरकार 'काला पानी' जैसी नई हाई सिक्योरिटी जेल बनाने जा रही है। इसमें आतंकियों और दुर्दांत अपराधियों को कैद रखा जाएगा। इस जेल की जगह फाइनल कर दी गई है। राज्य के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि इसका निर्माण कैमूर जिले में स्थित अधौरा पहाड़ पर किया जाएगा। इस जेल में बंद खूंखार अपराधी बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को समृद्धि यात्रा के तहत कैमूर जिले के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सम्राट ने कहा कि कैमूर को जंगल और पहाड़ वाला इलाका माना जाता है। पिछले साल जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रगति यात्रा पर आए थे, तब उन्होंने उस पहाड़ पर डिग्री कॉलेज खोलने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि अब नीतीश सरकार ने तय किया है कि कैमूर के अधौरा पहाड़ पर हाई सिक्योरिटी जेल बनाई जाएगी। सबसे खूंखार आतंकवादी होंगे, उन्हें यहां बंद किया जाएगा। पहाड़ी पर इस तरह की जेल बनाने की घोषणा सम्राट ने ही पिछले दिनों बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में की थी। हालांकि, उस समय यह नहीं बताया गया था कि यह जेल कहां बनाई जाएगी। अब इसकी जगह फाइनल कर दी गई है। कैसी होगी हाई सिक्योरिटी जेल सम्राट चौधरी ने पिछले महीने सदन में कहा था कि नई हाई सिक्योरिटी जेल में खूंखार अपराधियों को रखा जाएगा। इसे ऐसी पहाड़ी पर बनाया जाएगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं आएगा और इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं होगी। इस जेल तक आने-जाने का बस एक ही रास्ता होगा, उस पर भी कड़ा पहरा होगा। गृह मंत्री ने बताया था कि इस जेल में बाहर से किसी भी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं होगी। इसमें कैद अपराधी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए रहेंगे। यहां से ना तो कोई शख्स बाहर जा पाएगा और ना ही अंदर आ पाएगा। जेल के अंदर से आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर और माफिया को भी यहां रखा जाएगा। काला पानी जैसी होगी नई जेल? अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में स्थित सेलुलर जेल को काला पानी जेल कहा जाता है। अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को इसमें कैद रखा जाता था और उन्हें बहुत कठोर यातनाएं दी जाती थीं। यहां कैद लोग बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग हो जाते थे। उन्हें काल कोठरियों में बंद रखा जाता था। कोल्हू से तेल निकालने जैसे कठिन काम कराए जाते थे। इसी वजह से इसे काला पानी की सजा कहा जाता था।  

पंजाब में बड़ा विभागीय फेरबदल: चीमा को ट्रांसपोर्ट, भुल्लर से जेल विभाग लेकर डॉ. रवजोत को दिया

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के पोर्टफोलियो में फेरबदल किया है। पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के इस्तीफे और गिरफ्तारी के बाद उनके दोनों विभाग दूसरे मंत्रियों को दिए गए हैं। पंजाब वेयरहाउस के जिला मैनेजर रहे गगनदीप सिंह रंधावा के खुदकुशी मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के विभागों का बंटवारा किया गया है। पंजाब सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के पोर्टफोलियो में फेरबदल किया है। पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के इस्तीफे और गिरफ्तारी के बाद उनके दोनों विभाग दूसरे मंत्रियों को दिए गए हैं। वित्त मंत्री हरपाल चीमा को ट्रांसपोर्ट विभाग दिया गया है। वहीं जेल विभाग की जिम्मेदारी डॉ. रवजोत को दी गई है। उक्त दोनों विभाग पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के पास थे।   कोर्ट में भुल्लर की पेशी आज इस मामले में पूर्व मंत्री लाल सिंह भुल्लर को पुलिस ने सोमवार देर शाम गिरफ्तार कर लिया है। भुल्लर को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। आज उनके शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। भुल्लर की पोस्ट पर क्या बोली रंधावा की बेटी वहीं भुल्लर की खुद को निर्दोष बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट पर रंधावा की बेटी ने मीडिया के सामने बयान दिया है। रंधावा की बेटी ने कहा कि भुल्लर की ओर से खुद को निर्दोष बताए जाने के दावे बेबुनियाद हैं। उनके मुताबिक, उनके पिता को लगातार फोन कॉल के जरिए दबाव डाला जाता था। उन्होंने कहा कि इन कॉल्स की संख्या काफी है और इसकी जांच साइबर सेल से कराई जानी चाहिए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित सरकारी कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि वीडियो में उनके पिता यह कहते दिखाई देते हैं कि उन पर दबाव बनाया जा रहा था। परिवार की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, इस मामले में पुलिस और अन्य एजेंसियों की कार्रवाई की ओर से बनती कार्रवाई की जा रहीं है। यह है मामला गगनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार रात को जहरीला पदार्थ निगल लिया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने मरने से पहले बनाए वीडियो में पंजाब के मंत्री लालजीत भुल्लर का नाम लिया था। वीडियो सामने आने के बाद सीएम ने तुरंत मंत्री का इस्तीफा ले लिया था। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और परिवार का दबाव बढ़ा तो भुल्लर, उसके पिता और उसके पीए के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मोबाइल यूजर्स से बड़ा झटका: 12 नहीं 13 रिचार्ज का खेल, संसद में गूंजा 28 दिन प्लान विवाद

नई दिल्ली भारत में मोबाइल रीचार्ज प्लान्स को लेकर एक बड़े सच पर चर्चा तेज हो गई है। जिन प्लान्स को कंपनियां ‘मंथली प्लान’ कहकर बेचती हैं, वे असल में पूरे 30 दिन नहीं बल्कि सिर्फ 28 दिन तक ही चलते हैं। इस मुद्दे को हाल ही में संसद में राघव चड्ढा ने उठाया, जहां उन्होंने बताया कि यह सिस्टम सीधे-सीधे सब्सक्राइबर्स की जेब पर एक्सट्रा बोझ डालता है। सांसद ने तर्क दिया कि 28 दिन का प्लान हर महीने 2-3 दिन कम पड़ जाता है। इस वजह से साल के 365 दिन पूरे करने के लिए यूजर्स को 12 की जगह 13 बार रीचार्ज करना पड़ता है। यानी बिना ध्यान दिए ही लोग हर साल एक एक्सट्रा रीचार्ज के पैसे चुका रहे हैं। यह मॉडल टेलिकॉम कंपनियों के लिए फायदे का सौदा है, लेकिन आम यूजर्स के लिए महंगा साबित होता है। टेलिकॉम मंत्री ने दिया जवाब मुद्दे पर जवाब देते हुए टेलिकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार इस स्थिति को जानती है और टेलिकॉम कंपनियों को 30 दिन वाले प्लान्स को ज्यादा प्रमोट करने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस दिशा में पहले ही नियम बनाए जा चुके हैं। दरअसल, Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने 2022 में एक बड़ा नियम लागू किया था। इस नियम के तहत हर टेलिकॉम कंपनी को अपने प्रीपेड प्लान्स में कम से कम एक 30 दिन की वैलिडिटी वाला प्लान देना अनिवार्य किया गया। इसका मकसद यूजर्स को 28 दिन वाले प्लान्स के अलावा एक सही ‘मंथली’ विकल्प देना था, जिससे उन्हें बार-बार रिचार्ज करने की जरूरत ना पड़े। ऑफर किए जा रहे हैं बेहद कम प्लान हालांकि, हकीकत कुछ और ही है। Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसी बड़ी कंपनियां 30 दिन वाले प्लान्स तो देती हैं, लेकिन उनकी संख्या काफी कम है। जियो के पास 2-3, एयरटेल के पास 2-4 और Vi के पास 2-3 प्लान ऐसे हैं, जो 30 दिनों की वैलिडिटी के साथ आते हैं। ज्यादातर प्लान्स आज भी 28 दिन की वैलिडिटी के साथ आते हैं। वहीं, Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) इस मामले में थोड़ा अलग नजर आता है, जहां करीब आधा दर्जन प्लान्स कैलेंडर मंथ के हिसाब से भी चलते हैं। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कंपनियों को ‘मंथली प्लान’ शब्द का इस्तेमाल करने की परमिशन होनी चाहिए, जब वे पूरे महीने की सेवा ही नहीं दे रही हैं। सब्सक्राइबर्स के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे रीचार्ज करते वक्त सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि वैलिडिटी पर भी ध्यान दें। अगर सरकार इस पर सख्ती दिखाती है, तो संभव है कि 30 दिन वाले प्लान्स की संख्या बढ़े और यूजर्स को राहत मिले।  

ईरान संकट गहराया: भारत में बढ़ी हलचल, केंद्र ने बुलाई सर्वदलीय मीटिंग

नई दिल्ली मध्य एशिया में जारी तनाव का असर भारत पर भी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले ही कहा है कि हमें भी तैयार रहने की जरूरत है। वहीं अब सूत्रों का कहना है कि सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। जानकारी के मुताबिक बुधवार को शाम पांच बजे सर्वदलीय बैठक होगी। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बैठक करके क्षेत्रीय सुरक्षा की समीक्षा की थी। उन्होंने सीडीएस जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जनरल उपेंद्र द्विवेदी व ऐडमिरल डिनेश के त्रिपाठी के अलावा डीआरडीओ चेयरमैन के साथ बैठक करके तैयारियों की जानकारी ली। ईरान और इजरायल-ईरान के बीच जारी युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। वहीं होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझने लगी है। बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने अचानक ईरान पर हमला करके उसेक सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या कर दी थी। इसी के बाद से तनाव बढ़ता ही चला गया और ईरान ने खाड़ी देशों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। राज्यसभा में भी बयान दे सकते हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में इस संकट को लेकर बयान दिया था। वहीं जानकारी के मुताबिक आज वह राज्यसभा में भी अपनी बात रख सकते हैं। पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा था कि मध्य एशिया में जारी इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत जिस तरह से कोरोना संकट के दौरान तैयार था, वैसे ही तैयार रहने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा था कि पश्चिमी एशिया में जो कुछ भी हो रहा है वह बहुत ही दुखद और चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ ही आम आदमी के जीवन पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सारा विश्व यही चाहता है कि युद्ध जल्द रुके। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में तेल और गैस की आपूर्ति ज्यादातर उन्हीं देशों से होती है जो कि युद्ध के चपेट में हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर लोकसभा में वक्तव्य देते हुए यह भी कहा था कि इस संकट का सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा था कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है तथा भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।  

सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल को फटकार: हर चीज में ED मत घसीटिए, CM केस में जज सख्त

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या किसी सरकारी अधिकारी के मौलिक अधिकार नहीं होते हैं या केवल अधिकारी होने के कारण वे अपने मौलिक अधिकार खो देते हैं? जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि ED के कुछ अधिकारियों ने इस मामले में व्यक्तिगत रूप से भी याचिका दायर की है। ऐसे में यह तर्क देना कि प्रवर्तन निदेशालय अनुच्छेद 32 के तहत याचिका नहीं दायर कर सकती। यह याचिका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर एक राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के खिलाफ की गई तलाशी अभियानों में कथित हस्तक्षेप के आरोप में दायर की गई थी। कोर्ट ने साफ कहा, “क्या ED के अधिकारी अधिकारी हो जाने की वजह से इस देश के नागरिक नहीं रह जाते? उनके मौलिक अधिकारों का क्या?” पीठ ने कहा कि ED के कुछ अधिकारियों ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में अदालत में याचिका दायर की है। पीठ ने यह भी चेताया कि केवल “ED, ED, ED” कहकर मामले को नहीं देखा जा सकता, बल्कि उन अधिकारियों के अधिकारों पर ध्यान देना जरूरी है जो कथित रूप से प्रभावित हुए हैं। सिर्फ 'ED, ED, ED' की रट न लगाएं बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस मिश्रा ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा, "कृपया ED के उन अधिकारियों के मौलिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करें, जिनके संबंध में अपराध किया गया है। अन्यथा, आप मुख्य मुद्दे से भटक जाएंगे। आप उस दूसरी याचिका को नहीं भूल सकते, जिसे उन व्यक्तिगत अधिकारियों ने दायर किया है, जो इस अपराध के पीड़ित हैं। मैं आपको बता रहा हूं, आप मुश्किल में पड़ जाएंगे। सिर्फ 'ED, ED, ED' की रट न लगाएं।" राज्य सरकार का पक्ष पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जांच करना कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक वैधानिक (statutory) अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर जांच में बाधा आती है, तो उसका समाधान कानून के तहत है, न कि अनुच्छेद 32 के जरिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम किसी कानून की व्याख्या किसी विशेष परिस्थिति के संदर्भ में करके, आपराधिक कानून की मूल विशेषताओं के विपरीत जाकर 'मुसीबतों का पिटारा' (Pandora’s box) नहीं खोल सकते।" सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख कोर्ट ने चुनावी समय का हवाला देकर सुनवाई टालने की मांग भी खारिज कर दी। जस्टिस मिश्रा ने कहा, “हम न चुनाव का हिस्सा बनना चाहते हैं, न किसी अपराध का।” यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि कोर्ट इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और इसे टालने के पक्ष में नहीं है। पूरा मामला क्या है? यह विवाद जनवरी में तब शुरू हुआ, जब ED ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ठिकानों पर छापेमारी की। आरोप है कि उस दौरान सीएम ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं थी और उन्होंने कुछ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण वहां से हटा लिए थे। ED का दावा है कि इससे उनकी जांच प्रभावित हुई। यह जांच कथित कोयला तस्करी मामले से जुड़ी है, जिसमें कारोबारी अनूप माजी पर आरोप हैं। कानूनी पेच: अनुच्छेद 32 बनाम वैधानिक अधिकार इस केस का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोई सरकारी एजेंसी या उसके अधिकारी मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देकर सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं? या उन्हें केवल सामान्य कानूनी प्रक्रिया (जैसे FIR, पुलिस कार्रवाई) का सहारा लेना चाहिए? यह मामला सिर्फ एक जांच एजेंसी और राज्य सरकार के टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र बनाम राज्य की शक्तियों, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और अधिकारियों के मौलिक अधिकार जैसे बड़े मुद्दों को भी छू रहा है। ऐसे में ED बनाम ममता बनर्जी का मामला अब एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बहस में बदल चुका है। सुप्रीम कोर्ट का यह सवाल “क्या अधिकारी नागरिक नहीं हैं?” आने वाले समय में कानून की व्याख्या और जांच एजेंसियों की भूमिका दोनों को नई दिशा दे सकता है।

45 लाख रूपये की लागत के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंगलवार को 45 लाख रुपये से अधिक की लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि जनता की सेवा और क्षेत्र का समग्र विकास ही हमारा मूल मंत्र है। यही कारण है कि क्षेत्र में विकास के कार्य अनवरत जारी हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार विकास कार्यों और जन-कल्याण के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राज्यमंत्री गौर ने 23 लाख रुपये की लागत से विवेकानंद कॉलोनी के पार्क में बाउंड्री वॉल एवं पाथवे का निर्माण और रजत नगर में सड़क के डामरीकरण कार्य का भूमि-पूजन किया। वहीं राजीव नगर 'ए' सेक्टर में 22 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क निर्माण, शेड निर्माण और पेवर ब्लॉक लगाने के कार्यों का भी भूमि-पूजन किया गया। भूमि-पूजन के इस भव्य कार्यक्रम में पार्षद ममता विश्वकर्मा, छाया ठाकुर, श्री संतोष ग्वाला, श्री मनोज विश्वकर्मा, श्री बृजेश व्यास, श्री प्रदीप लोधी, श्री दलजीत सिंह, श्री संजय जी, श्री प्रतीक पाराशर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

वन मंत्री कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात

रायपुर वन मंत्री  कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने विकास की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि बस्तर का समग्र विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की राह में आने वाली हर बाधा को दूर करना उनका लक्ष्य है।  मंत्री  केदार कश्यप ने आज नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बस्तर विकासखंड में विकास की नई इबारत लिखी। उन्होंने क्षेत्र के सघन दौरे के दौरान मुरकुची और पखना कोंगेरा में आयोजित भव्य कार्यक्रमों मंस शिरकत की, जहाँ उन्होंने विधायक निधि से स्वीकृत कुल 56 लाख रूपए की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन कर ग्रामीणों को बड़ी सौगात दी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर आवागमन और सामुदायिक सुविधाओं में व्यापक सुधार सुनिश्चित होगा। जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुलियाओं का निर्माण केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। उन्होंने पूर्ववर्ती कठिनाईयों का स्मरण कराते हुए कहा कि बरसात के दिनों में छोटे-छोटे नालों के उफान पर होने के कारण ग्रामीणों, विशेषकर स्कूली बच्चों और मरीजों को जो परेशानियां झेलनी पड़ती थीं, अब ये नई पुलियाएं उन समस्याओं का स्थायी समाधान बनेंगी। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाना ही सुशासन की असली पहचान है। उन्होंने पुल-पुलिया के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ये निर्माण कार्य स्थानीय परिवहन को सुगम बनाएंगे और कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में किसानों की मदद करेंगे। साथ ही तारागांव में सामुदायिक भवन के निर्माण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए गांवों में सुरक्षित और पक्के भवनों का होना अनिवार्य है, ताकि ग्रामीण समाज एकजुट होकर अपनी परंपराओं का निर्वहन कर सके। मंत्री  कश्यप ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए अपील की कि वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर स्वयं भी नजर रखें, क्योंकि यह संपत्ति उनकी अपनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारायणपुर विधानसभा के हर कोने में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार निरंतर जारी रहेगा और धन की कमी को कभी विकास में बाधक नहीं बनने दिया जाएगा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष  संतोष बघेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।    

सफलता की मिसाल बनीं मानसी पारेख, शेयर किया अपना सीक्रेट

  मुंबई,  टेलीविजन से फिल्मी दुनिया तक अपनी मेहनत और प्रतिभा का परचम लहरा चुकी अभिनेत्री मानसी पारेख को हाल ही में एंटरटेनमेंट कैटेगरी में फेमिना गेम चेंजर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। अभिनेत्री ने मंगलवार को सम्मान को प्राप्त करने की खुशी जाहिर की और सभी का शुक्रिया भी अदा किया। मानसी ने इंस्टाग्राम पर एक खास वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में वे अवॉर्ड हाथ में लिए हुए हैं। मानसी ने लिखा, “हम अपनी नई राह खुद बनाते हैं। यही हमेशा मेरा मंत्र रहा है, चाहे जिंदगी हो या करियर। मैंने कभी भी लोगों की उम्मीद के मुताबिक रास्ता नहीं चुना। अपना खुद का रास्ता बनाया, भले ही वह कभी-कभी अनिश्चित लगे, हमेशा फायदेमंद साबित हुआ है। अभिनेत्री ने आगे बताया कि वे एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं और इंडस्ट्री में बिना किसी कनेक्शन के शुरुआत करना उनके लिए आसान नहीं था। मानसी ने लिखा, “बिना किसी मदद के शुरुआत करके आज अपने सपनों को जीना और दूसरों के लिए भी नए मौके बनाना बहुत संतोषजनक है। उन्होंने फेमिना इंडिया को विशेष धन्यवाद देते हुए लिखा, “धन्यवाद फेमिना इंडिया मुझे एंटरटेनमेंट में ‘गेम चेंजर’ अवॉर्ड देने के लिए। आशा है कि और भी महिलाएं खुद पर भरोसा करें और अपने तरीके से खेल बदलें। मानसी पारेख टीवी इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में आती हैं। उन्होंने एमटीवी के सीरियल ‘कितनी मस्त है जिंदगी’ से करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद अभिनेत्री कई टीवी सीरियलों में नजर आई थी। उन्होंने ‘जिंदगी का हर रंग गुलाल’, ‘सुमित संभाल लेगा’, ‘कसौटी जिंदगी की’, और ‘सरस्वतीचंद्र’ जैसे कई सीरियलों में काम किया। इसके बाद मानसी ने फिल्मों की ओर रुख किया और तमिल, गुजराती, और हिंदी फिल्मों में काम किया। उन्होंने कई गुजराती फिल्मों में अभिनय करने के साथ-साथ कुछ फिल्मों को प्रोड्यूस भी किया है। साल 2024 में नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म “कच्छ एक्सप्रेस” में उन्होंने न सिर्फ एक्टिंग की, बल्कि उसे प्रोड्यूस भी किया।  

हरीश राणा ने 13 साल बाद ली अंतिम सांस, इच्छामृत्यु से मिली पीड़ा से मुक्ति

नई दिल्ली 13 साल तक कोमा में रहने के बाद आखिरकर हरीश राणा को कष्ट से मुक्ति मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद एम्स में हरीश राणा ने मंगलवार को अंतिम सांस ली। हरीश 14 मार्च से एम्स के आईआरसीएच के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती थे। यह देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु का पहला मामला है। माता-पिता की ओर से गुहार लगाए जाने के बाद 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों की देखरेख में हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। इसके बाद एम्स ने डॉक्टरों की एक कमेटी गठित की थी। यहां धीरे-धीरे हरीण राणा का भोजन और पानी बंद कर दिया गया। क्या हुआ था हरीश के साथ हरीश राणा चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में बीटेक के छात्र थे। वह 2013 में चौथी मंजिल की बालकनी से गिर गए थे और सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद वह कोमा में चले गए थे। परिवार और डॉक्टरों की ओर से हर संभव कोशिश की गई। उन्हें फूड पाइप के सहारे भोजन दिया जा रहा था। कभी-कभी ऑक्सीजन सहायता दी जाती थी। निष्क्रिय इच्छा मृत्यु को कैसे अंजाम दिया जाता है एम्स-दिल्ली की ऑन्को-एनेस्थीसिया, दर्द एवं प्रशामक देखभाल विभाग की पूर्व प्रमुख डॉक्टर सुषमा भटनागर कहते हैं, 'इस प्रक्रिया में आम तौर पर दर्द से पर्याप्त राहत सुनिश्चित करते हुए धीरे-धीरे पोषण संबंधी सहायता को रोकना या वापस लेना शामिल होता है। रोगी को प्रशामक बेहोशी दी जाती है ताकि उसे परेशानी न हो। कृत्रिम पोषण, ऑक्सीजन और दवाएं जैसे जीवन सहायता उपाय धीरे-धीरे वापस ले लिए जाते हैं। इसका उद्देश्य मृत्यु को लंबा खींचना या जल्दी करना नहीं होता।'

सरोजिनी नायडू महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव में हुए शामिल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव समारोह स्वयंप्रभा-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने कहा, "ट्राय फॉर द बेस्ट, प्रीपेयर फॉर द वर्स्ट " और समझाया कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि निरंतर प्रयास, आत्मविश्लेषण और धैर्य से ही लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि इस ऊँचाई को बनाए रखने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि यही किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास का आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि देश की अधिकांश आबादी युवा है, जो भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की ऊर्जा, शिक्षा और सही दिशा का समन्वय हो जाए, तो भारत विश्व गुरु बनकर विश्व में शांति और स्थिरता स्थापित कर सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से 21वीं सदी भारत की सदी होगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रतिष्ठा वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण से बनती है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. श्याम बिहारी गोस्वामी के कार्यों और उनके प्रभावशाली वक्तृत्व कौशल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि टीम वर्क और योग्य कर्मचारियों का सम्मान करना संस्थान की सफलता की कुंजी है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत किया। पं. शंकरदयाल शर्मा स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत कु. हिमानी पांडेय को ऑल राउंडर पुरस्कार एवं कु. अर्पणा चौबे को बेस्ट डिबेटर पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त 10 विशिष्ट पुरस्कार भी दिए गए। प्रावीण्य सूची की छात्राओं को पारितोषिक वितरण किया गया एवं एनसीसी व एनएसएस की छात्राओं को भी पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सम्मानित छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षित, आत्मविश्वासी और संस्कारित युवा ही देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आयोजन के लिए कॉलेज प्रबंधन को शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों, एनसीसी कैडेट्स एवं छात्राओं की उपस्थिति रही।