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गुजरात के मोरबी में तेज रफ्तार का कहर, भीषण टक्कर में पांच की गई जान

 मोरबी मोरबी में हलवद क्षेत्र के चराडवा गांव के पास एक दर्दनाक हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया. यह घटना उस समय हुई, जब एक कार वाहन से टकरा गई. हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही चीख-पुकार मच गई। जानकारी के अनुसार, कार में कुल सात लोग सवार थे, जो सभी हलवद के रणछोड़गढ़ गांव के रहने वाले थे. यह सभी किसी काम से जा रहे थे, तभी चराडवा गांव के पास उनकी कार आगे चल रही एक अज्ञात गाड़ी के पिछले हिस्से से जा टकराई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।  इस हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. बाकी घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है. सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जायजा लिया. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं. वहीं मामले की जांच शुरू कर दी है।  इसी बीच एक और दर्दनाक घटना भी सामने आई, जिसमें परेश नाम का एक युवक बाइक से हलवद की ओर जा रहा था. मानसर गांव के पास उसकी बाइक फिसल गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. घायल हालत में उसे अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी वही कार, जो पहले से हादसे में शामिल थी, एक अज्ञात वाहन के पीछे से टकरा गई। लगातार हुए इन हादसों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनता है. पुलिस ने दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. गांव में मातम का माहौल है और हर तरफ गम का सन्नाटा पसरा हुआ है। 

ज्वेरेव ने मेंसिक को हराकर लगातार दूसरे फ्रेंच ओपन फाइनल में बनाई जगह

पेरिस  जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव अपने पहले ग्रैंड स्लैम खिताब से अब सिर्फ एक जीत दूर हैं। उन्होंने शुक्रवार को 26वीं वरीयता प्राप्त जाकुब मेंसिक को 7-5, 6-2, 3-6, 6-3 से हराकर एक बार फिर फ्रेंच ओपन के फाइनल में प्रवेश कर लिया। 29 वर्षीय ज्वेरेव इससे पहले तीन ग्रैंड स्लैम फाइनल हार चुके हैं, जिनमें दो साल पहले फ्रेंच ओपन का फाइनल भी शामिल है। पेरिस में इस बार उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। अब रविवार को फाइनल में उनका सामना 10वीं वरीयता प्राप्त फ्लेवियो कोबोली से होगा। दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में कोबोली का सामना इटली के ही खिलाड़ी मत्तेओ अर्नाल्डी से होना था, लेकिन अर्नाल्डी बीमार होने की वजह से मैच से हट गए और कोबोली फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहुंच गए। पहला सेट रहा बेहद कड़ा कोर्ट फिलिप शैट्रियर पर खेले गए मुकाबले का पहला सेट बेहद कड़ा रहा। 11वें गेम में ज्वेरेव ने बैकहैंड क्रांसकोर्ट विनर लगाकर ब्रेक प्वाइंट हासिल किया और फिर एक शानदार शॉट के जरिए बढ़त बना ली, जिसे मेंसिक नेट में मार बैठे। ज्वेरेव ने एक दमदार ऐस के साथ पहला सेट अपने नाम किया। दूसरे सेट की शुरुआत में ही उन्होंने सर्विस ब्रेक हासिल कर लिया, जबकि मेंसिक का खेल कुछ समय के लिए बिखर गया। एक ब्रेक के दौरान मेंसिक सिर पर तौलिया रखे बैठे नजर आए। वापसी के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं, क्योंकि ज्वेरेव ने अपना स्तर और ऊंचा कर लिया तथा डबल ब्रेक हासिल करते हुए मैच में 2-0 की बढ़त बना ली। हालांकि गर्दन की समस्या के कारण लंबा मेडिकल टाइमआउट लेने के बाद मेंसिक ने जोरदार वापसी की तीसरे सेट में हासिल की जीत उन्होंने अपनी तेज सर्विस और शानदार ड्रॉप शॉट्स की मदद से 4-2 की बढ़त बनाई और तीसरा सेट जीत लिया लेकिन चौथे सेट में ज्वेरेव ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने दमदार खेल दिखाते हुए सेट और मैच दोनों अपने नाम कर लिए तथा लगातार दूसरे फ्रेंच ओपन फाइनल में जगह पक्की कर ली।  

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में प्रयागराज महाकुंभ 2025 का जलवा, मिलेगा स्वर्ण सम्मान

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में चमका प्रयागराज महाकुंभ 2025, मिलेगा स्वर्ण सम्मान तकनीक और परंपरा का अद्भुत संगम, महाकुंभ ने दिलाया यूपी को राष्ट्रीय गौरव योगी सरकार के डिजिटल सुशासन का भी बजा डंका, करोड़ों श्रद्धालुओं का सफल प्रबंधन बना उपलब्धि महाकुंभ 2025 ने देशभर में बड़े आयोजनों के लिए पेश किया सबसे बढ़िया और सफल मॉडल लखनऊ, यूपी में योगी सरकार की योजनाओं और उसे बेहतर तरीके से लागू करने की इच्छाशक्ति को देशभर में सम्मान मिलने जा रहा है। इसका प्रमाण राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के तहत प्रयागराज महाकुंभ 2025 को मिलने जा रहा स्वर्ण पुरस्कार होगा। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में महाकुंभ 2025 आयोजन (परियोजना) को देश के सर्वश्रेष्ठ ई-गवर्नेंस नवाचारों में शामिल किया गया है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा संचालित इस परियोजना को प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है, जिससे उत्तर प्रदेश और प्रयागराज का गौरव राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ गया है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा हर वर्ष दिए जाने वाले राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों का उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से जनसेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने वाली परियोजनाओं को सम्मानित करना है। वर्ष 2026 के लिए सात विभिन्न श्रेणियों में कुल 17 परियोजनाओं और पहलों का चयन किया गया है, जिनमें महाकुंभ 2025 भी शामिल है। दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन महाकुंभ 2025 को सम्मानित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को आधुनिक तकनीक के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, डिजिटल सूचना सेवाओं, निगरानी व्यवस्था और विभिन्न नागरिक सुविधाओं के संचालन में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया था। इसी प्रभावी डिजिटल प्रबंधन ने महाकुंभ 2025 को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई। पुरस्कारों की सूची में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एग्री स्टैक, उपभोक्ता मामले मंत्रालय की ई-जागृति, स्वास्थ्य मंत्रालय की ई-संजीवनी एआई आधारित क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, बैंक ऑफ बड़ौदा का इंटीग्रेटेड साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क और इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर की साइबर सुरक्षा परियोजना समेत कई महत्वपूर्ण पहलें शामिल हैं। इन प्रतिष्ठित परियोजनाओं के बीच महाकुंभ 2025 का चयन उत्तर प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि माना जा रहा है। बड़े आयोजनों का नया मॉडल बना महाकुंभ 2025 महाकुंभ 2025 के सफल डिजिटल प्रबंधन ने बड़े आयोजनों के संचालन का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सूचना उपलब्धता को तकनीक के माध्यम से बेहतर बनाने के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। पुरस्कार विजेताओं को मिलेगी प्रोत्साहन राशि केंद्र सरकार ने इस वर्ष 10 गोल्ड अवॉर्ड, 6 सिल्वर अवॉर्ड और एक जूरी अवॉर्ड की घोषणा की है। पुरस्कार विजेताओं को ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। गोल्ड अवॉर्ड प्राप्त करने वाले संस्थानों को 10 लाख रुपये तथा सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त करने वालों को 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जिसका उपयोग जनकल्याणकारी परियोजनाओं के विस्तार और संसाधनों की कमी को दूर करने में किया जाएगा। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 का औपचारिक वितरण समारोह राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित होने वाले 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दौरान किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर की उत्कृष्ट डिजिटल गवर्नेंस परियोजनाओं को सम्मानित किया जाएगा।

चंद्रेसल गांव में महंत देवानंद की हत्या, पुलिस ने कई एंगल से शुरू की जांच

कोटा कोटा जिले के चंद्रेसल (बोरखेड़ा) गांव में मठ के महंत देवानंद की हत्या कर दी गई. अज्ञात बदमाशों ने देर रात धारदार हथियार से महंत का मर्डर किया. जानकारी के अनुसार, वारदात को तब अंजाम दिया गया, जब महंत कक्ष में विश्राम कर रहे थे. तभी हमलावर मठ में घुस आए और उन पर ताबड़तोड़ हमला कर फरार हो गए. शोर सुनकर सेवादारों और ग्रामीण पहुंचे तो जो देखा उनकी आंखे फटी रह गई. महंत जमीन पर लहूलुहान हालत में थे. उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. रंजिश, संपत्ति विवाद या कुछ और वजह? देर रात को शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम और अन्य अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने मामले की जानकारी ली. घटना की सूचना पर बोरखेड़ा थाना पुलिस, एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे. पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू कर दी है. हत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है. पुलिस रंजिश, संपत्ति विवाद और चोरी के एंगल सहित विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमों का गठन किया गया है. घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है. एडिशनल एसपी सुभाष चंद्र मिश्रा ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि स्पेशल टीम पूरे मामले की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी गिरफ़्त में होंगे. इलाके में आक्रोश, बीजेपी नेता ने दिया रिएक्शन घटनाक्रम के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है. भाजपा के पूर्व देहात अध्यक्ष और चंद्रसल मठ के सदस्य मुकुट नगर ने मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए घटनाक्रम की निंदा की है.  उन्होंने बताया कि महंत करीब 4 साल से यहां रह रहे थे. उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी.

हरियाली की ओर ऐतिहासिक कदम, पर्यावरण दिवस पर उत्तर प्रदेश ने लगाए 5 करोड़ पौधे

पर्यावरण दिवस पर यूपी ने पूरा किया 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य पीएम मोदी की प्रेरणा से जारी है यूपी में पौधरोपण अभियान, जुलाई में एक दिन में जन-सहभागिता से लगाएंगे 35 करोड़ पौधेः सीएम योगी लखनऊ,  विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में 5 करोड़ पौधे लगाए गए। इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने तीन वर्ष पहले ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का आह्वान किया था। उन्हीं की प्रेरणा से 9 वर्ष में प्रदेश में पौधरोपण के वृहद कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। पीएम ने वसुधैव कुटुम्बकम के अनुरूप ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ का संदेश दुनिया को दिया है। उनके आहवान पर हम सब भारतवासी पर्यावरण की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के साथ खड़े हैं। जुलाई में एक दिन में लगाएंगे 35 करोड़ पौधे सीएम ने कहा कि मार्च 2017 में पौधरोपण के लिए वन विभाग की नर्सरी में बमुश्किल 5 लाख पौधे मिल पाए थे, लेकिन आज सरकारी व निजी नर्सरी में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। आज प्रदेश भर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पांच करोड़ पौधे लग रहे हैं। अब जुलाई में महाभियान चलाएंगे और एक दिन में नागरिकों के साथ मिलकर 35 करोड़ पौधे लगाएंगे।  प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वालों से सजग रहें सीएम योगी ने नागरिकों से प्रकृति व जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया व स्मगलरों के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सजग नागरिकों का दायित्व है कि मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करें। सीएम ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशवासियों को पांच संकल्प भी दिलाए। इसमें एक पेड़ मां के नाम लगाना, शरारती तत्वों व जीव-जंतुओं से पेड़ों की सुरक्षा, जल संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करना और प्रकृति के अनुरूप जीवन शैली अपनाना शामिल है। सीएम ने कटाक्ष किया कोई टोंटी चोरी कर रहा है, कोई पानी बर्बाद कर रहा है, ऐसे लोगों को टोकें। जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं, कोशिश हो कि पानी व्यर्थ न हो। सीएम योगी ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बच्चों को चॉकलेट दीं और आमजन को कपड़े के झोले देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। सीएम ने बच्चों के साथ सेल्फी ली और वृक्ष कलश में जल भी अर्पित किया।   जल है तो कल है, वन है तो जीवन है अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि जल है तो कल है, वन है तो जीवन है यानी जीवन चक्र एक-दूसरे के साथ जुड़ा है। फिर भी हमने इसकी सर्वाधिक उपेक्षा की। 40 से ऊपर हर व्यक्ति महसूस करता है कि पर्यावरण के साथ हुए खिलवाड़ की कीमत को दुनिया किस रूप में चुका रही है। 25 वर्ष पहले और वर्तमान मौसम चक्र में एक से डेढ़ महीने का अंतर आ गया। भारत व उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है। मौसम चक्र में अंतर से सर्वाधिक प्रभावित किसान होगा। उसकी आमदनी प्रभावित होगी, अतिवृष्टि-अनावृष्टि का सामना करना पड़ेगा। खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। असमय घटित होने वाली आपदाएं चेतावनी भी हैं। मां व मातृभूमि के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करें  सीएम योगी ने कहा कि हमारे पूर्वजों व ऋषि परंपरा ने पर्यावरण के प्रति आगाह किया था। हम खुद को धरती मां का पुत्र कहते हैं। लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण जी से कहा “अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”। अर्थात लंका भले ही सोने की क्यों न हो, लेकिन मुझे यह अच्छी नहीं लगती। जिस मां ने जन्म दिया है, जहां हमने जन्म लिया है, उसके प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन और कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारा दायित्व होना चाहिए। मां व मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। भगवान राम की कही गई बातें आज भी हर भारतीय के लिए प्रासंगिक हैं। पर्यावरण के प्रति सरकार ने अपने उत्तरदायित्वों का किया निर्वहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने पर्यावरण व प्रकृति के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए 9 वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 2017 में शासन संभालते ही डबल इंजन सरकार ने वन महोत्सव के अवसर पर 5 करोड़ पौधरोपण कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया था। उस समय हमारे सामने तमाम चुनौतियां थीं। न नर्सरी थी और न ही इतने बड़े कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अनुभव था, लेकिन वन एवं अन्य विभागों ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया।  9 वर्ष में प्रदेश में लगे 242 करोड़ से अधिक पौधे सीएम योगी ने कहा कि 9 वर्ष के अंदर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया, जिससे प्रदेश का फॉरेस्ट कवर भी बढ़ा। पीएम मोदी ने प्रकृति व मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करते हुए कृतज्ञता स्वरूप तीन वर्ष पहले ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का शुभारंभ किया था। इस अभियान के क्रम में आज पौधरोपण महाभियान प्रारंभ होने जा रहा है और एक दिन में 5 करोड़ पैधे लगाने का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है।  सीएम की अपील- सभी लोग पौधे लगाएं और उनका संरक्षण करें  मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के लिए भी प्रदेश में अनेक कदम उठाए गए और अनेक मॉडल प्रस्तुत किए गए। विकास प्राधिकरण ने निश्चित क्षेत्रफल से बड़े एरिया में बनने वाले आवासीय भवनों तथा कमर्शियल परिसरों के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया है। मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत सभी लोगों से पौधे लगाने और उनका संरक्षण किए जाने की अपील की।

हरित क्रांति के बाद अब एग्री-बिजनेस क्रांति की बारी, हरियाणा करेगा देश का नेतृत्व: सीएम सैनी

हरित क्रांति की तरह बागवानी एवं एग्री-बिजनेस क्रांति का अब नेतृत्व करेगा हरियाणा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री ने 2,738 करोड़ रुपये की सतत बागवानी संवर्धन परियोजना का किया शुभारंभ, हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर की रखी आधारशिला हरियाणा में 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस बनेंगे, बागवानी के किसान होंगे मालामाल जापान के कोची विश्वविद्यालय से हरियाणा के किसानों को मिलेगी अनुसंधान की विश्वस्तरीय तकनीक विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण चंडीगढ़, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में किसान, युवा, महिलाएं और आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। हरियाणा को बागवानी, एग्री-बिजनेस, कोल्ड चेन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि निर्यात के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी मिलकर कृषि को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और लाभकारी बनाने, जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लें। मुख्यमंत्री शुक्रवार को पंचकूला में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 2,738 करोड़ रुपये की लागत से जाईका वित्तपोषित सतत बागवानी संवर्धन परियोजना का शुभारंभ तथा हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर का शिलान्यास के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ये दोनों परियोजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, बल्कि हरियाणा की कृषि व्यवस्था को आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ इस दौरान प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद थे। दोनों ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया, साथ ही बागवानी विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जीआईसीए के मुख्य प्रतिनिधि टाकेची टकूरो, फर्स्ट सेकेरट्री फूड एंड एग्रीकल्चर टाकेहिको हयासे तथा ब्रिटिश डिप्टी हाईकमीश्नर ऐलबा स्मीरिग्लयो मौजूद थे। तीनों ने अपने संबोधन में हरियाणा सरकार द्वारा किसान हित में उठाये गये कदमों की तारीफ की। उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज का दिन केवल दो परियोजनाओं के शुभारंभ का नहीं, बल्कि हरियाणा के कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नई दिशा तय करने का दिन है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हरियाणा एक बार फिर देश को नई राह दिखाएगा और हरित क्रांति की तरह बागवानी एवं एग्री-बिजनेस क्रांति का नेतृत्व भी करेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने देश को हरित क्रांति दी थी, लेकिन बदलती जलवायु, गिरते भूजल स्तर, बढ़ती कृषि लागत और छोटी जोत जैसी चुनौतियों को देखते हुए अब कृषि क्षेत्र में नए विकल्प अपनाने की आवश्यकता है। बागवानी, फल, सब्जियां, मसाले, औषधीय पौधे, फूल, मशरूम और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में किसानों के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों में जलभराव एवं सेम की समस्या के समाधान के लिए बायोड्रेनेज तकनीक का उपयोग करते हुए इस वर्ष 1,000 हेक्टेयर जलभराव प्रभावित भूमि पर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे भूमि पुनः कृषि योग्य बन सकेगी। इसके साथ ही भूमिगत जल संरक्षण के लिए शिवालिक एवं अरावली क्षेत्रों में 25 नए जल भंडारण बांध बनाए जाएंगे तथा 25 पुराने बांधों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। हरियाणा में 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस बनेंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में फलों और सब्जियों का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा खेत से बाजार तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है। इस चुनौती का समाधान सतत बागवानी संवर्धन परियोजना के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना के तहत 400 बागवानी क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, 500 उत्पादक समूहों को संगठित एवं सशक्त बनाया जाएगा, 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस, 3 फुलफिलमेंट सेंटर तथा 44 रिटेल आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1,000 वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा तथा 65,000 एकड़ क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना खेत से बाजार तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी तथा आधुनिक कोल्ड चेन नेटवर्क किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक होगा। परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वास्तविक समय निगरानी प्रणाली, मिट्टी एवं जल विश्लेषण, डिजिटल कृषि सलाह, इंटरनेट ऑफ प्लांट्स, भू-स्थानिक तकनीक, ई-मार्केटिंग और आधुनिक पैकेजिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल तथा जापान के कोची विश्वविद्यालय के बीच ज्ञान एवं अनुसंधान के आदान-प्रदान से किसानों को विश्वस्तरीय तकनीकी सहायता उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि कृषि अब केवल खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक बड़ा व्यवसाय बन चुकी है, जिसमें ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट सेंसर, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स जैसी तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नौकरी देने वाले बने युवां उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे नौकरी मांगने के बजाय एग्री-बिजनेस, कृषि प्रसंस्करण, खाद्य उद्योग और निर्यात आधारित उद्यमों के माध्यम से रोजगार सृजनकर्ता बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बागवानी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हरियाणा के निर्माण में महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर किसानों, एफपीओ, उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कृषि विशेषज्ञों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे 3 लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में 75 प्रतिशत से अधिक सुधार होगा तथा कटाई के बाद होने वाले नुकसान में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आएगी। जीएपी, जीएमपी, जीएचपी तथा एचएसीसीपी जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाकर कृषि निर्यात को भी नई गति मिलेगी। जापान और भारत के संबंधों का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने भारत-जापान संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध सदियों पुराने हैं। हरियाणा में वर्तमान में 394 जापानी उद्योग एवं 600 से अधिक जापानी व्यावसायिक प्रतिष्ठान कार्यरत हैं, जो दोनों देशों की मजबूत मित्रता का प्रमाण हैं। उन्होंने जापान सरकार और जीआईसीए का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।  पर्यावरण दिवस को लेकर दिया विशेष … Read more

6 जून 2026 से शुरू हुआ मृत्यु पंचक, 11 जून तक रहेगा प्रभाव

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय की गणना का विशेष महत्व है.  इनमें से एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील अवधि पंचक की होती है, जो आज से शुरू हो रही है. जब चंद्रमा धनिष्ठा से लेकर रेवती नक्षत्र तक का संचार करता है, तो उस पांच दिनों की अवधि को पंचक कहा जाता है. ज्योतिष में इस समय को चुनौतीपूर्ण माना जाता है, इसलिए इन दिनों में कुछ विशेष कार्यों को करने की मनाही होती है. आज से शुरू हुआ मृत्यु पंचक जून 2026 में पंचक की शुरुआत आज, 6 जून, शनिवार की शाम 07:03 बजे से हो रही है.  यह अवधि 11 जून 2026, गुरुवार की सुबह 08:16 बजे तक रहेगी.  चूंकि पंचक शनिवार के दिन शुरू हो रहा है, इसलिए इसे मृत्यु पंचक की श्रेणी में रखा गया है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टिकोण से काफी अशुभ माना जाता है. पंचक के दौरान इन 5 कार्यों से बचें ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक के पांच दिनों में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए इन कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है: पंचक के दौरान घर का निर्माण शुरू करना या छत डलवाना शुभ नहीं माना जाता. लकड़ी का काम: घर के लिए नया फर्नीचर बनवाना या लकड़ी इकट्ठा करने जैसे कार्यों से बचें. दक्षिण दिशा की यात्रा: इन पांच दिनों में विशेष रूप से दक्षिण दिशा में यात्रा करने से मना किया जाता है. निर्माण कार्य:चारपाई का निर्माण: पंचक के दौरान नई चारपाई का निर्माण करवाना अशुभ माना गया है. अंतिम संस्कार: मान्यता है कि पंचक काल में किसी की मृत्यु होने पर दोष लगता है, जिसके निवारण के लिए पांच पुतले बनाकर दाह-संस्कार करने का विधान है. क्यों खास हैं ये दिन? इस दौरान मन में नकारात्मकता न आने दें और सात्विक विचारों का पालन करें. चूंकि यह मृत्यु पंचक है, इसलिए विवादों से दूर रहना और शांति बनाए रखना आपके लिए श्रेष्ठ रहेगा. माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति नकारात्मक प्रभावों से बच सकता है.

अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बन सकेंगे क्लर्क, सरकार ने लागू किए नए सेवा नियम

 चंडीगढ़ हरियाणा में लिपिक के 30 प्रतिशत पदों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पदोन्नत होंगे। 65 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। पांच प्रतिशत पद अनुकंपा नियुक्ति के लिए रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर ट्रांसफर या डेपुटेशन का भी विकल्प रखा गया है। प्रदेश सरकार ने बदले नियम लागू कर दिये हैं। जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लिपिक बनना चाहते हैं, उन्हें कम से कम 10+2 पास होना जरूरी रहेगा। ग्रुप-डी में न्यूनतम पांच साल सेवा जरूरी है। 70 प्रतिशत या उससे अधिक वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट अच्छी या बहुत अच्छी होनी चाहिए। कोई विभागीय या न्यायिक मामला लंबित न हो। न ही कोई प्रतिकूल टिप्पणी हो। लिपिकों की भर्ती, प्रमोशन, सेवा शर्तें, वरिष्ठता, प्रोबेशन और कंप्यूटर योग्यता एक समान नियमों के तहत तय होंगी। विभागों में नियुक्त होने वाले सभी लिपिक कामन काडर का हिस्सा होंगे। इसमें केवल नई नियमित नियुक्तियां शामिल होंगी। पहले से कार्यरत लिपिकों पर यह कानून लागू विभागों में नियुक्त होने वाले सभी लिपिक कॉमन काडर का हिस्सा होंगे, पहले से कार्यरत लिपिकों पर नया कानून लागू नहीं होगा। संवैधानिक संस्थाएं, राजभवन और कानून लागू होने से पहले नियुक्त कर्मचारी भी इससे बाहर रहेंगे। अब क्लर्क-कम-टाइपिस्ट, टाइपिस्ट, डाटा एंट्री आपरेटर, कंप्यूटर आपरेटर, डिस्पेचर, रिकार्ड कीपर, कैशियर, केयर टेकर, स्टोर कीपर और पीबीएक्स क्लर्क जैसे पद भी लिपिक की श्रेणी में शामिल होंगे। कंप्यूटर ज्ञान एवं अनुप्रयोग की राज्य पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है। परीक्षा दो हिस्सों में होगी। पहले पार्ट में बेसिक कंप्यूटर नॉलेज टेस्ट और दूसरे पार्ट में कंप्यूटर आधारित टाइपिंग टेस्ट होगा। दोनों टेस्ट पास नहीं किए तो वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति नहीं मिलेगी। सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम उम्र 18 और अधिकतम उम्र 42 वर्ष तय की गई है।

रामकथा पार्क के नजदीक 93.75 करोड़ की लागत से तेजी से बन रहा अति विशिष्ट अतिथि गृह

अयोध्या में आधुनिक आतिथ्य का बेहतरीन उदाहरण बनेगा अति विशिष्ट अतिथि गृह  -रामकथा पार्क के नजदीक 93.75 करोड़ की लागत से तेजी से बन रहा अति विशिष्ट अतिथि गृह -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अयोध्या को मिलेगा आधुनिक वीवीआईपी गेस्ट हाउस -14510.00 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विकसित हो रहा अत्याधुनिक अतिथि गृह परिसर -सीएम ब्लॉक, आवासीय ब्लॉक और डारमैट्री सहित कई सुविधाओं से सुसज्जित होगा प्रोजेक्ट -अयोध्या में वीवीआईपी आवागमन के लिए तैयार हो रहा भव्य राज्य अतिथि गृह अयोध्या,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पावन नगरी अयोध्या में राम कथा पार्क के निकट एक भव्य और अत्याधुनिक अति विशिष्ट अतिथि गृह का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। यह परिसर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ आधुनिक आतिथ्य का बेहतरीन उदाहरण बनेगा। राज्य सम्पत्ति विभाग के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कुल लागत 93.75 करोड़ रुपये है। इसका निर्माण नवंबर 2027 तक पूरा होने की संभावना है।       14510.00 वर्गमीटर में फैले इस अतिथि गृह परिसर में कई आधुनिक ब्लॉक शामिल हैं। इनमें मुख्यमंत्री ब्लॉक (जी+4) 7155 वर्गमीटर, आवासीय ब्लॉक (बी+जी+5) 9496 वर्गमीटर, डार्मेट्री ब्लॉक (जी+5) 2371.50 वर्गमीटर, सर्विस ब्लॉक (जी+1) 26050 वर्गमीटर शामिल हैं। इसके अलावा गार्ड रूम, टाइम ऑफिस एवं पास ऑफिस, इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन (14800 वर्गमीटर) और सेंट्रल लॉन, वॉटर फाउंटेन, स्टाफ पार्किंग, विजिटर पार्किंग, विद्युतीकरण एवं वॉटर सप्लाई जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। लोक निर्माण विभाग सीडी-2 के अधिशासी अभियंता उमेश चंद्र ने बताया कि इस समय मुख्यमंत्री ब्लॉक में चतुर्थ तल पर प्लास्टर एवं तीसरे/चतुर्थ तल पर एमईपी एवं लिफ्ट का कार्य प्रगति पर है। वहीं रेजीडेंशियल ब्लॉक में बेसमेंट के स्लैब का कार्य पूर्ण हो चुका है। डार्मेट्री ब्लॉक में पेंटिंग एवं बाहर प्लास्टर का कार्य चल रहा है। परियोजना में सीएम ब्लॉक, आवासीय ब्लॉक, डार्मेट्री ब्लॉक, सर्विस ब्लॉक सहित आधुनिक सुविधाओं से लैस वीवीआईपी आवास की व्यवस्था होगी। निर्माण कार्य की हो रही नियमित निगरानी अयोध्या में बढ़ते वीवीआईपी आवागमन को देखते हुए यह गेस्ट हाउस शहर की आतिथ्य क्षमता को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। परिसर में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, सुंदर सेंट्रल लॉन, आकर्षक वॉटर फाउंटेन, ग्रीनरी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। यह परिसर न केवल राम मंदिर आने वाले उच्च पदाधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि अयोध्या के समग्र विकास को भी नई गति प्रदान करेगा। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों सुनिश्चित हो सकें। परियोजना अयोध्या की भव्य छवि में लाएगी और निखार : डीएम जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने भी हाल ही में परियोजना का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यदायी एजेंसी के अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखते हुए समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए थे। शशांक त्रिपाठी बताते हैं कि परियोजना पूरी होने के बाद यह अति विशिष्ट अतिथि गृह अयोध्या की भव्य छवि को और निखारेगा।

15 जून को बनेगा बुधादित्य योग, मेष से सिंह राशि तक के जातकों को मिलेगा लाभ

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का गोचर और उनका मिलन मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है.  जून माह में ग्रहों की स्थिति में एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली परिवर्तन होने जा रहा है. 15 जून को सूर्य देव अपनी राशि परिवर्तित कर रहे हैं, जहां पहले से ही बुद्धि के कारक बुध ग्रह विराजमान हैं. सूर्य और बुध की इस युति से बुधादित्य योग का निर्माण होगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद प्रभावशाली और सौभाग्यशाली माना गया है. क्या है बुधादित्य योग का महत्व? वैदिक ज्योतिष के अनुसार, बुधादित्य शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—बुध और आदित्य (सूर्य). जब भी बुद्धि के देवता बुध और ग्रहों के राजा सूर्य एक ही भाव में मिलते हैं, तो यह व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि करता है. यह योग करियर में सफलता, सरकारी कार्यों में लाभ और धन-धान्य की प्राप्ति का होता है.  इस बार 15 जून से बनने वाला यह शुभ संयोग ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 4 विशेष राशियों के लिए राजयोग की तरह होगा. मेष/वृषभ/मिथुन/सिंह – इन राशियों के जातकों के लिए यह समय करियर के मोर्चे पर क्रांतिकारी साबित हो सकता है.  नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति (Promotion) और वेतन वृद्धि के योग बनेंगे. व्यवसाय करने वाले जातकों को नई व्यावसायिक डील मिल सकती है, जिससे आर्थिक स्थिति में भारी सुधार होगा. आत्मविश्वास में वृद्धि: सूर्य के प्रभाव से इन जातकों के भीतर गजब का आत्मविश्वास देखने को मिलेगा. आप कठिन से कठिन चुनौतियों को भी अपनी सूझबूझ से हल करने में सक्षम होंगे. समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा . आर्थिक लाभ और बचत: इस अवधि में धन आने के नए स्रोत खुलेंगे.  यदि आप निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह समय अनुकूल है. लंबे समय से अटके हुए सरकारी कार्य भी इस अवधि में आसानी से पूरे हो सकते हैं. पारिवारिक सुख: घर-परिवार में मांगलिक कार्यों की योजना बन सकती है. दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी. जीवनसाथी के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता बढ़ेगी. शुभ फल पाने के लिए क्या करें? इस विशेष योग का लाभ उठाने के लिए जातकों को कुछ छोटे उपाय भी करने चाहिए.  सूर्य देव को प्रतिदिन प्रातः काल जल चढ़ाएं.आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें. बुध की अनुकूलता के लिए हरी वस्तुओं का दान करें या भगवान गणेश की पूजा करें.  इससे बुधादित्य योग का फल कई गुना बढ़ जाता है.