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अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रहे दुष्प्रचार का किया खंडन, कहा- नियमों का पूरी तरह किया गया पालन

लेखा परीक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों के उल्लंघन के दावों को आयोग ने बताया भ्रामक और तथ्यहीन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रहे दुष्प्रचार का किया खंडन, कहा- नियमों का पूरी तरह किया गया पालन  लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 पदों के लिए जारी हुआ है विज्ञापन, 609 पदों के आरक्षण निर्धारण की विभाग ने स्वयं की थी पुष्टि आयोग ने कहा, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का किया जा रहा प्रयास आयोग की अभ्यर्थियों से अपील, भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें लखनऊ  उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 पदों पर भर्ती को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में प्रसारित किए जा रहे दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी सभी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन किया गया है तथा पदों का विज्ञापन संबंधित विभागों से प्राप्त अधियाचन और उनकी पुष्टि के आधार पर जारी किया गया है। आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार विभिन्न विभागों के नियंत्रणाधीन लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार के 1829 रिक्त पदों पर चयन के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। विज्ञापन जारी होने के बाद कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया पर आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय के सहायक लेखाकार के आरक्षित पदों को लेकर आरक्षण नीति के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसे आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय से सहायक लेखाकार के 609 पदों का अधियाचन प्राप्त हुआ था। इन पदों के संबंध में आरक्षण की गणना और श्रेणीवार वर्गीकरण शासन के प्रचलित नियमों एवं आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप किए जाने की पुष्टि स्वयं निदेशालय द्वारा की गई थी। विभाग ने यह भी अवगत कराया था कि पदों की श्रेणीवार गणना संवर्ग में सृजित कुल पदों के आधार पर की गई है, जो पूरी तरह नियमसम्मत है। आयोग ने बताया कि कुल 22 अधियाचनों के आधार पर 1829 पदों का विज्ञापन जारी किया गया है, जिसमें आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय के 609 पद भी शामिल हैं। आयोग को प्राप्त प्रत्येक अधियाचन में आरक्षण संबंधी गणना की पुष्टि संबंधित विभागों और निदेशालयों से प्राप्त होने के बाद ही विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है। आयोग ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध है तथा आरक्षण नीति के उल्लंघन संबंधी दावे निराधार हैं। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

पेड़ लगाकर मनाया पर्यावरण दिवस, जिंदल स्टील मशीनरी डिवीजन रायपुर ने दिखाई हरियाली के प्रति प्रतिबद्धता

जिंदल स्टील लिमिटेड, मशीनरी डिवीजन, रायपुर ने वृक्षारोपण अभियान के साथ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया रायपुर,  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिंदल स्टील लिमिटेड, मशीनरी डिवीजन, रायपुर द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए परिसर में पौधारोपण किया। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्रकृति की रक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री निलेश शाह, प्रमुख – मशीनरी डिवीजन ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कर्मचारियों से अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का आह्वान किया। श्री सूर्योदय दुबे, प्रमुख – मानव संसाधन (एचआर), रायपुर ने कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए संगठन की सतत विकास एवं सामुदायिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देती है, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की संस्कृति को भी बढ़ावा देती है। वृक्षारोपण अभियान में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम का समापन स्वच्छ, स्वस्थ एवं हरित पर्यावरण के निर्माण हेतु निरंतर हरित पहलों का समर्थन करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

यूपी बोर्ड छात्रों के लिए सुनहरा मौका, इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट परीक्षा के आवेदन 27 जून तक

यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को एक और अवसर, इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिए 27 जून तक आवेदन -योगी सरकार ने दिया असफलता को सफलता में बदलने का मौका, हजारों विद्यार्थियों को मिलेगा दूसरा अवसर – हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षार्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू – 6 जून से 27 जून की मध्यरात्रि तक किए जा सकेंगे आवेदन प्रयागराज/लखनऊ शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने और किसी एक परीक्षा परिणाम को उनके भविष्य की बाधा न बनने देने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट तथा इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ करने की घोषणा की है। पात्र परीक्षार्थी 6 जून से 27 जून की मध्यरात्रि तक परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकेंगे। पारदर्शी, तकनीक आधारित और विद्यार्थी हितैषी व्यवस्था के माध्यम से योगी सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिससे प्रत्येक छात्र को अपनी क्षमता सिद्ध करने का अवसर मिल सके और उसका शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके। यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट परीक्षा के अंतर्गत एक विषय में अनुत्तीर्ण विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे, जबकि कम्पार्टमेंट परीक्षा के अंतर्गत दो विषयों में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थी किसी एक विषय की परीक्षा देने के पात्र होंगे। इसके लिए परीक्षा शुल्क 256.50 रुपये निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा में मानविकी, विज्ञान एवं वाणिज्य वर्ग के ऐसे विद्यार्थी, जो किसी एक विषय के किसी एक प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण हैं, आवेदन कर सकेंगे। व्यावसायिक वर्ग के ट्रेड विषयों के ऐसे परीक्षार्थी भी पात्र होंगे, जो किसी एक प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण रहे हैं। इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा का शुल्क 306 रुपये निर्धारित किया गया है। योगी सरकार की मंशा है कि किसी भी विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति केवल एक परीक्षा परिणाम के कारण बाधित न हो। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को अपनी त्रुटियों को सुधारने और बेहतर प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जो न्यूनतम अंतर से सफलता से वंचित रह गए हैं। परीक्षार्थियों को निर्धारित शुल्क कोषागार चालान के माध्यम से जमा करना होगा। ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के बाद उसकी प्रति तथा शुल्क जमा करने के चालान की मूल प्रति डाउनलोड कर अंतिम तिथि के बाद तीन दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को पंजीकृत डाक से भेजना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन विषयों में लिखित, प्रायोगिक अथवा प्रोजेक्ट कार्य शामिल हैं, उनके लिए निर्धारित नियमों के अनुसार परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो परीक्षार्थी किसी विषय के केवल एक भाग में अनुत्तीर्ण हैं, उन्हें उसी भाग की परीक्षा देने की सुविधा होगी। लिखित, प्रायोगिक एवं प्रोजेक्ट परीक्षाओं की तिथियां अलग से घोषित की जाएंगी।

मध्यप्रदेश में तबादलों की आंधी: 74 पुलिस अफसरों के बदले ठिकाने, अनु बेनिवाल जबलपुर रवाना

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए कई IPS अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला और नई जगहों पर तैनाती का आदेश जारी कर दिया। इस दौरान राज्यपाल के नाम और निर्देश पर गृह विभाग के अपर सचिव आशीष भार्गव ने भारतीय पुलिस सेवा के 8 अधिकारियों का नवीन पदस्थापना से जुड़ा आदेश जारी किया। जिसमें उन्होंने बताया कि राज्य शासन निम्नलिखित भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक बताए गए पद एवं स्थान पर पदस्थ किया जाता है। नए आदेश के अनुसार अनु बेनीवाल को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) ग्वालियर से हटाकर ASP जबलपुर बनाया गया है। जबकि मिनी शुक्ला को अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) नरसिंहगढ़ से हटाकर ADCP (अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त), जोन-2, भोपाल पुलिस बनाया गया है। IPS अधिकारी करणदीप को बालाघाट जिले के बैहर से हटाकर उज्जैन भेजा गया है, वहीं सुजावल जग्गा को धार से हटाकर ग्वालियर भेजा गया है। तबादला सूची में सबसे ज्यादा चर्चित नाम IPS दम्पति अनु बेनीवाल और आयुष जाखड़ का रहा। दोनों अफसरों को शिवपुरी से एएसपी के पद पर जबलपुर ट्रांसफर किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा पुलिस तंत्र में बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। बड़ी संख्या में अधिकारियों के स्थानांतरण को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजगढ़ एसडीओपी को मिला प्रमोशन राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में पदस्थ एसडीओपी मिनी शुक्ला को प्रमोट कर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (जोन-2) भोपाल नगरीय पुलिस बनाया गया है। मिनी शुक्ला का विवाह पिछले वर्ष आईएएस अधिकारी सुमित पांडेय से हुआ था। सुमित पांडेय वर्तमान में भोपाल में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। नई पोस्टिंग के बाद दोनों अधिकारी अब भोपाल में साथ सेवाएं देंगे। 66 पुलिस अधिकारियों के हुए तबादले गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के 66 अधिकारियों के भी तबादले किए हैं। इन्हें विभिन्न जिलों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस इकाइयों में एसपी और उप सेनानी के पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस पूरी सूची में विंध्य क्षेत्र से सबसे प्रमुख नाम आरती सिंह महाजन (SPS 2008 बैच) का है। रीवा जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर लंबे समय से अपनी सशक्त सेवाएं दे रहीं। आरती सिंह महाजन का तबादला अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पी.टी.सी. (पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज), इंदौर के पद पर कर दिया गया है। 1. सुश्री अनु बेनिवाल, भापुसे (आर.आर.-2022) वर्तमान पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-ग्वालियर नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-जबलपुर 2. श्री ओमप्रकाश, भापुसे (आर.आर.-2022) वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) लांजी, बालाघाट नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, जोन-3, इंदौर नगरीय पुलिस 3. श्री करणदीप, भापुसे (आर.आर.-2022) वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) बैहर, जिला-बालाघाट नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-उज्जैन 4. श्री आयुष जाखड, भापुसे (आर.आर.-2022) वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) करैरा, जिला-शिवपुरी नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-जबलपुर 5. श्री गौरव पाण्डेय, भापुसे (आर.आर.-2022) वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) जिला-सिंगरौली नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-सतना 6. सुश्री मिनी शुक्ला, भापुसे (आर.आर.-2022) वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) नरसिंहगढ़, जिला-राजगढ नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, जोन-2, भोपाल नगरीय पुलिस 7. श्री राज कृष्णा, भापुसे (आर.आर.-2022) वर्तमान पोस्टिंग- अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) सबलगढ, जिला-मुरैना नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, महू इंदौर ग्रामीण 8. श्री सुजावल जग्गा, भापुसे (आर.आर.-2022) वर्तमान पोस्टिंग- नगर पुलिस अधीक्षक, जिला-धार नई पोस्टिंग- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-ग्वालियर

अटल पेंशन योजना को बड़ा झटका? RTI रिपोर्ट में सामने आया 1.49 करोड़ एग्जिट का आंकड़ा

नई दिल्ली सरकारी पेंशन स्कीम 'अटल पेंशन योजना' की खूब चर्चा होती है. अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. दरअसल, देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कीम की शुरुआत की गई है. RTI के जरिये APY को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।   सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में पता चला है कि साल 2015 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 1.49 करोड़ लोग इस स्कीम से बाहर हो चुके हैं. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के आंकड़ों के मुताबिक योजना में हर साल रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं. लेकिन साथ ही समय से पहले खाता बंद करने या मृत्यु के कारण स्कीम से बाहर होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।  RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल रजिस्ट्रेशन 8.96 करोड़ तक पहुंच चुका था. लेकिन इनमें से केवल 7.45 करोड़ सब्सक्राइबर ही फिलहाल एक्टिव हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बहुत बड़ा हिस्सा अब इस योजना का सक्रिय रूप से लाभ नहीं उठा रहा है।  साल-दर-साल बढ़ता एग्जिट का ग्राफ योजना के शुरुआती साल 2015-16 के दौरान केवल 2 लोगों ने स्कीम छोड़ी थी. लेकिन हालिया वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा सालाना 30.24 लाख से अधिक को पार कर गया. एक तरफ जहां एग्जिट करने वालों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ नए रजिस्ट्रेशन के मामले में योजना ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ से अधिक नए सब्सक्राइबर्स इस योजना से जुड़े, जो इसके लॉन्च के बाद से किसी भी एक साल में सबसे बड़ी संख्या है।  जब RTI के जरिए यह पूछा गया कि कितने सब्सक्राइबर्स ने रजिस्ट्रेशन के 1 साल, 3 साल या 5 साल के भीतर योगदान देना बंद कर दिया, तो PFRDA ने साफ कर दिया कि अटल पेंशन योजना के तहत 'डिसकंटिन्यूएशन' जैसी कोई अवधारणा नहीं है. इसलिए अगर किसी कारणवश कोई सब्सक्राइबर योगदान देना बंद कर देता है, तो वह बाद में बकाया ब्याज और देरी से किए गए योगदान का भुगतान करके अपने खाते को फिर से चालू कर सकता है।  क्या है अटल पेंशन योजना? अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, मजदूर, कारपेंटर, घरेलू सहायक   के लिए की गई थी. इसके तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं. 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सब्सक्राइबर्स को उनके योगदान के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मिलती है। 

पति की जिम्मेदारी बरकरार: पत्नी ज्यादा कमाती हो तब भी कानूनी और यात्रा खर्च देना होगा

 बिलासपुर  हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पत्नी सरकारी नौकरी में हो और उसकी आय पति से अधिक हो, तब भी उसे अदालती कार्यवाही में शामिल होने के लिए आवश्यक यात्रा, भोजन और मुकदमे का खर्च पाने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने सूरजपुर कुटुंब न्यायालय के आदेश को सही ठहराते हुए पति आशीष राय की अपील खारिज कर दी। क्या है पूरा मामला? मामले के अनुसार अंबिकापुर निवासी आशीष राय और विश्रामपुर निवासी अंजलि राय के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। पति ने सूरजपुर कुटुंब न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च की मांग की।  

भोपाल दौड़ेगा रातभर: रवीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की पहली ‘वेलोसिटी नाइट रन 2026’ 6 जून को

 रबिन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा भोपाल में 6 जून को पहली बार होगा वेलोसिटी नाइट रन 2026 का आयोजन  टीटी नगर स्टेडियम में दौड़ेगी फिटनेस, जुनून और ऊर्जा की नई रफ्तार भोपाल  रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा भोपाल में पहली बार “वेलोसिटी नाइट रन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह अनोखा नाइट रन 6 जून 2026 को टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में आयोजित होगा, जिसमें शहर सहित प्रदेशभर के रनर्स, फिटनेस प्रेमी एवं युवा प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में फिटनेस, अनुशासन, स्वास्थ्य जागरूकता एवं खेल भावना को प्रोत्साहित करना है। रात्रिकालीन वातावरण में आयोजित होने वाला यह रन प्रतिभागियों को स्टेडियम की रोशनी के बीच ऊर्जा, उत्साह और रोमांच से भरपूर अनुभव प्रदान करेगा। प्रतियोगिता में 1 घंटे, 2 घंटे एवं 3 घंटे की विभिन्न श्रेणियां रखी गई हैं, जिनमें प्रतिभागी अपनी क्षमता के अनुसार हिस्सा ले सकेंगे। सभी प्रतिभागी रन शुरू होने के समय से 30 मिनट पूर्व रिपोर्टिंग करें। लेट एंट्री मान्य नहीं होगी। रन के दौरान प्रतिभागियों के लिए विभिन्न रंगों की ट्रैक लेन निर्धारित की गई हैं, ताकि प्रतियोगिता का संचालन व्यवस्थित एवं सुरक्षित रूप से किया जा सके। स्टेडियम परिसर में विशेष फिटनेस एवं रनिंग जोन भी तैयार किए जाएंगे। इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की प्रो चांसलर डॉ अदिति चतुर्वेदी वत्स ने कहा कि वेलोसिटी नाइट रन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं में स्वास्थ्य, फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने की एक प्रेरणादायी पहल है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर आत्मविश्वास एवं अनुशासन विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। वहीं रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की कुलसचिव डॉ संगीता जौहरी ने कहा कि विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों एवं युवाओं के समग्र विकास के लिए खेल, स्वास्थ्य एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहा है। वेलोसिटी नाइट रन 2026 युवाओं को फिटनेस के साथ सकारात्मक ऊर्जा एवं टीम स्पिरिट का अनुभव प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अधिक से अधिक युवाओं, खिलाड़ियों एवं फिटनेस प्रेमियों से इस विशेष नाइट रन में सहभागिता करने की अपील की है।

यात्री के साथ लापरवाही पड़ी भारी, सीट न देने पर रेलवे पर लगा हजारों का जुर्माना

पटना  भारतीय रेलवे में लाखों यात्री हर दिन रिजर्वेशन कर सफर करते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि कंफर्म टिकट मिलने के बाद उनकी सीट सुरक्षित होगी। बिहार में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां पर कंफर्म टिकट होने के बावजूद भी चार यात्रियों को रिजर्व्ड सीट नहीं मिली। उन्हें पूरा सफर खड़े होकर करना पड़ा। इस मामले के सामने आने के बाद यात्रियों के अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई थी और अब उपभोक्ता आयोग ने इस पर बड़ा फैसला दे दिया है। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में रेलवे की गलती मानी है और चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा है।  यह मामला उस समय सामने आया जब चार यात्री उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से बिहार के आरा के लिए LTT-पटना एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे। यात्रियों के पास पहले से कंफर्म रिजर्व टिकट था लेकिन ट्रेन में चढ़ने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी निर्धारित बर्थ पर दूसरे लोग बैठे हुए हैं। शिकायत में दावा किया गया कि सीटों पर रेलवे स्टाफ मौजूद था और कई बार अनुरोध के बावजूद सीट खाली नहीं कराई गई।  रेलवे अधिकारियों ने नहीं की मदद यात्रियों ने मौके पर अपनी समस्या हल कराने की कोशिश की। उन्होंने रेलवे हेल्पलाइन, रेलवे सेवा पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद उन्हें शिकायत संख्या भी जारी हुई, लेकिन यात्रा के दौरान उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। बाद में यात्रियों ने टीटीई से भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें भीड़ का हवाला देकर किसी तरह यात्रा पूरी करने को कहा गया। नतीजा यह हुआ कि चारों यात्रियों को पूरा सफर खड़े होकर तय करना पड़ा।  कोर्ट ने क्या कहा? मामला भोजपुर कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन पहुंचा। सुनवाई के दौरान आयोग ने यात्रियों की ओर से पेश किए गए टिकट, शिकायत रिकॉर्ड और अन्य सबूतों पर विचार किया। आयोग ने माना कि यात्रियों ने वैध आरक्षण कराया था लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार रिजर्व्ड सीट नहीं दी गई। इसे रेलवे की सेवा में गंभीर कमी माना गया।  आयोग ने कहा कि यात्रियों को सिर्फ असुविधा नहीं हुई बल्कि उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ी। आयोग ने यह भी माना कि किसी यात्री को कंफर्म सीट के बावजूद खड़े होकर यात्रा करने के लिए मजबूर करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बाद रेलवे को चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा गया।  रेलवे को कितना भुगतान करना होगा? फैसले में रेलवे को निर्देश दिया गया कि यात्रियों की टिकट राशि 1,876.80 रुपये ब्याज सहित वापस की जाए। इसके अलावा यात्रियों को 20 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी दिया जाए। आयोग ने आदेश दिया कि यह भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए। तय समय में भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ सकता है।  सभी को पता होना चाहिए नियम भारत में रोजाना लाखों लोग रेल से सफर करते हैं। ज्यादातर लोगों को अपने अधिकारों के बारे में नहीं पता होता और उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। अगर आपका टिकट कंफर्म है और सीट रिजर्व है तो ट्रेन में आपको आरक्षित सीट मिलनी चाहिए। अगर आपकी सीट पर कोई और बैठा हो तो आप रेलवे कर्मचारियों से कहकर सीट खाली करवा सकते हैं। अगर रेलवे मदद नहीं करता है तो कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन या कंज्यूमर कोर्ट में अपील कर सकते हैं।   

WhatsApp यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी, गुप्त मैसेजिंग को मिलेगा नया सुरक्षा कवच

नई दिल्ली  इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp एक नया फीचर लेकर आ रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स को सीक्रेट मैसेज भेजने में मदद मिलेगी. दरअसल, अब टेक्स्ट मैसेज के साथ View Once फीचर का सपोर्ट शामिल किया जा रहा है. इसकी जानकारी WhatsApp के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Wabetainfo ने दी है।  रिपोर्ट्स में बताया है कि अभी View Once फीचर डेवलपमेंट स्टेज में है. अभी इसको बीटा वर्जन के लिए भी पेश नहीं किया गया है. पहले यह फीचर फोटो और वीडियो आदि को सपोर्ट करता था. अब कंपनी इसको टेक्स्ट मैसेज के अंदर शामिल करने जा रही है।  एक बार मैसेज में View Once सपोर्ट आने के बाद यूजर्स किसी भी शख्स को सीक्रेट मैसेज भेजते हैं, उसके बाद जैसे ही रिसीवर उस मैसेज को पढ़ता है, फिर वह मैसेज ऑटोमेटिक डिलीट हो जाएगा. हालांकि इसके लिए  मैसेज भेजते समय View Once को इनेबल करना होगा।  मैसेज का स्क्रीनशॉट्स भी नहीं ले पाएंगे  WhatsApp पर View Once फीचर के तहत रिसीव होने वाले मैसेज का ना तो स्क्रीनशॉट्स लिया जा सकता है ना ही उसको एक से ज्यादा बार देखा जा सकता है. यह अपने आप में बेहद ही खास है. इस फीचर का इंतजार WhatsApp के टेक्स्ट मैसेज के लिए लंबे समय से किया जा रहा है और अब लेटेस्ट रिपोर्ट् में बताया गया है कि यह अभी डेवलपमेंट फेज में है।  WhatsApp का View Once फीचर कैसे काम करेंगे Wabetainfo की तरफ से एक स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया है, जिसमें दिखाया है कि View Once नाम का ये फीचर कैसे काम करेगा. एक बार सेंडर की तरफ से View Once मैसेज भेजा जाएगा, जिसके बाद जैसे ही मैसेज रिसीवर द्वारा पढ़ लिया जाता है, उसके बाद मैसेज खुद ब खुद डिलीट हो जाता है।  WhatsApp लगातार अपने प्लेटफॉर्म में नए-नए फीचर्स को शामिल करता है. मेटा ने सिंपल से यूजर इंटरफेस में ढेरों फीचर्स को शामिल किया है.  हालांकि रिपोर्ट में WhatsApp के टेक्स्ट मैसेज के साथ मिलने वाले View Once की लॉन्चिंग टाइम लाइन का जिक्र नहीं किया है।  

मिलेट से बढ़ी आय, किसानों के जीवन में आई खुशहाली श्री अन्न की खेती बन रही लाभ का नया माध्यम

रायपुर  छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम लागत, कम पानी और बंजर भूमि में भी बेहतरीन पैदावार देने के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ा रहे हैं और उनके जीवन में खुशहाली ला रहे हैं । कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज आज पूरी दुनिया में ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान बना चुके हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर ये अनाज अब घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंटों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य ने किसानों के लिए मिलेट (श्री अन्न) की खेती को लाभकारी बना दिया है। शासन की पहल से बढ़ा श्री अन्न का महत्व         केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि और बाजार उपलब्धता के कारण अब अधिक किसान श्री अन्न की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि उन्नति योजना से मिली नई दिशा          जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के दो युवा किसानों ने कृषक उन्नति योजना का लाभ लेकर मिलेट उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और योजना से मिली सहायता ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है। दिलीप मरकाम ने कोदो-कुटकी से कमाए डेढ़ लाख रुपये          ग्राम पोटाली के धुरवा पारा निवासी किसान दिलीप मरकाम ने इस वर्ष अपने खेत में कोदो-कुटकी की खेती कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। वे अपने 17 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कोदो-कुटकी के साथ धान और सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88 क्विंटल धान बेचकर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपये की आय प्राप्त की। खेती को आधुनिक बनाने के लिए उनके पास पावर टिलर जैसे कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। वे अपनी आय का एक हिस्सा खेती के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में निवेश करना चाहते हैं। हलदर हेमला की मेहनत भी लाई रंग          ग्राम नहाड़ी के किसान हलदर हेमला ने भी कोदो-कुटकी की खेती से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस फसल से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ कमाया। उनका कहना है कि मिलेट की खेती कम लागत में बेहतर आय देने वाली फसल साबित हो रही है। किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही योजना         दिलीप मरकाम और हलदर हेमला का मानना है कि कृषक उन्नति योजना मोटे अनाज उत्पादक किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। योजना के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन मिलने से श्री अन्न की खेती का रकबा बढ़ रहा है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। स्वास्थ्य और समृद्धि का संगम है श्री अन्न कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन मुक्त होने के कारण आसानी से पच जाते हैं तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। यही कारण है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। सफलता की सीख      पारंपरिक फसलों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं और मेहनत के साथ श्री अन्न की खेती ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है।