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जनसंख्या बदलाव का असर: असम के 11 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक, मुस्लिम बहुल इलाके बढ़े

दिसपुर  उत्तर प्रदेश के संभल की डेमोग्राफी बदल गई है. संभल हिंसा पर बनी कमेटी की रिपोर्ट चौंकाने वाली है. संभल में हिंदू आबादी घट गई है. रिपोर्ट की मानें तो संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू आबादी आजादी के समय 45 फीसदी थी. अब यह घटकर 15 फीसदी रह गई है. इस पर अब सियासत भी तेज हो चुकी है. हालांकि, हकीकत देखें तो संभल तो अभी झांकी है. इससे अधिक तो असम चौंकाता है. असम में ऐसे कम से कम 11 जिले हैं, जहां की डेमोग्राफी में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है. असम में कम से कम 11 जिलों में हिंदू बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक हो चुके हैं. खुद असम के मुख्यमंत्री का कहना है कि 2041 तक राज्य में मुस्लिमों और हिंदुओं की आबादी 50-50 हो सकती है. दरअसल, साल 2011 की जनगणना के अनुसार दावा किया जा रहा है कि असम के 11 जिलों में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक हो गई है, जहां हिंदू अब अल्पसंख्यक हैं. इन जिलों में अवैध घुसपैठ, जन्म दर में अंतर और प्रवासन को मुख्य कारण माना जा रहा है. यह स्थिति उत्तर प्रदेश के संभल जिले की हालिया जांच रिपोर्ट से काफी मिलती-जुलती है, जहां भी डेमोग्राफिक शिफ्ट में हिंदू आबादी घट गई है. असम के ये 11 जिले, जहां मुस्लिम हो गए बहुसंख्यक     धुबरी- 79.67% मुस्लिम     गोलपारा- 57.52% मुस्लिम     बरपेटा- 70.74% मुस्लिम     मोरीगांव- 52.56% मुस्लिम     नागांव- 55.36% मुस्लिम     दरांग-64.34% मुस्लिम     हैलाकांडी- 60.31% मुस्लिम     करीमगंज-56.36% मुस्लिम     बोंगाईगांव – 50.22% मुस्लिम     साउथ सलमारा-मानकाचार- डेटा उपलब्ध नहीं     होजाई- डेटा उपलब्ध नहीं राज्य में कैसे घटते गए हिंदू? दरअसल, 2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल मुस्लिम आबादी 1.07 करोड़ थी. यह राज्य के कुल 3.12 करोड़ निवासियों का 34.22 प्रतिशत थी. राज्य में 1.92 करोड़ हिंदू थे, जो कुल जनसंख्या का करीब 61.47 प्रतिशत था. 2011 की जनगणना के अनुसार कम से कम नौ जिले मुस्लिम बहुल थे. जबकि 2001 में यह संख्या महज छह थी . अभी मौजूदा समय में यह संख्या बढ़कर कम से कम 11 हो गई है. 2001 में कितने जिले मुस्लिम बहुल? 2001 में जब असम में 23 जिले थे, तब छह जिलों में मुस्लिम बहुल थे. धुबरी (74.29), गोलपाड़ा (53.71), बारपेटा (59.37), नागांव (51), करीमगंज (52.3) और हैलाकांडी (57.63). क्या है कारण? असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का मानना है कि हिंदुओं की घटती आबादी की वजह बांग्लादेशी घुसपैठ है. इसके अलावा विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च जन्म दर, प्रवासन और भूमि अतिक्रमण जैसे कारक भी जिम्मेदार हैं. अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ सालों में राज्य में हिंदू आबादी 61% से घटकर अनुमानित 50% के करीब पहुंच सकती है, जबकि मुस्लिम 34% से बढ़कर 40% से अधिक हो सकती है. अगर सीएम की मानें तो 2041 तक दोनों की आबादी बराबर हो जाएगी, अगर इसी अनुपात से डेमोग्राफी में बदलाव होते रहे तो. संभल से जैसा असम में हाल? असम में यह डेमोग्राफिक बदलाव, उत्तर प्रदेश के संभल से मिलती जुलती है. संभल की रिपोर्ट में डेमोग्राफिक बदलाव को ‘साजिश’ बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 1947 में संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू 45% थे, जबकि मुस्लिम 55%. आज हिंदू घटकर 15 फीसदी रह गए हैं. मुस्लिम 85% हो गए हैं. जांच समिति ने इसे ‘व्यवस्थित परिवर्तन’ माना, जिसमें हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया और आबादी का ‘एथनिक क्लीनिंग’ जैसा असर हुआ.

शिक्षा का अजीब हाल: 8 हजार स्कूलों में स्टूडेंट ही नहीं, 1 लाख में सिर्फ 1 टीचर

नई दिल्ली शिक्षा मंत्रालय की नई UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, भारत में पहली बार स्कूल शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच गई है. यह उपलब्धि देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव मानी जा रही है क्योंकि इससे न केवल शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और स्टूडेंट-टीचर अनुपात (Student-Teacher Ratio) में भी सुधार हुआ है. महिला शिक्षकों की संख्या बढ़ी  देश में महिला शिक्षकों की संख्या में भी साल 2014 के तुलना में इजाफा हुआ है. शिक्षा मंत्रालय के रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 से अभी तक 51.36 लाख शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है, जिनमें से 61 प्रतिशत महिलाएं हैं. मौजूदा समय में जहां पुरुष शिक्षकों की संख्या 46.41 लाख हैं. वहीं, महिला शिक्षकों की संख्या 54.81 लाख हैं.  भारत में कुल स्कूलों की संख्या 14.71 लाख है, जिसमें 69 प्रतिशत सरकारी हैं और इनमें कुल छात्रों के नामांकन का दर 49 प्रतिशत है. वहीं, देश में कुल प्राइवेट स्कूलों की संख्या 26 प्रतिशत है, लेकिन ये देश के 41 प्रतिशत छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं. वहीं, देश के कुल शिक्षकों में से 51 प्रतिशत शिक्षक सरकारी स्कूलों में और 42 प्रतिशत शिक्षक प्राइवेट स्कूलों में हैं.  UDISE Report: शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-23 की तुलना में 2024-25 में शिक्षकों की संख्या में 6.7% की वृद्धि हुई है. अब देश में अलग-अलग स्तरों पर स्टूडेंट-टीचर अनुपात अलग-अलग है. शिक्षकों की संख्या में वृद्धि छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षकों की उपलब्धता में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.      क्या है डेमोग्राफिक चेंज? 3 प्वाइंट में समझें, संभल हिंसा पर सौंपी गई रिपोर्ट में इसपर क्यों हुई है चर्चा     ट्रंप टैरिफ जारी रहा, तो भारत के निर्यात पर पड़ेगा भारी असर; विशेषज्ञों ने बताया स्थिति से निपटने का तरीका     शरीर पर 36 जख्म और पोस्टमार्टम में निकली 17 गोलियां, झारखंड के चर्चित नीरज सिंह हत्याकांड को जानिए स्टूडेंट-टीचर रेशियो (PTR) और बेहतर परिणाम यूडीआईएसई प्लस (UDISE Plus) की रिपोर्ट के अनुसार आधारभूत, प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात क्रमशः 10, 13, 17 और 21 है. यह अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में सुझाए गए 1:30 से कहीं बेहतर है. रिपोर्ट बताती है कि कम अनुपात होने से शिक्षक और छात्रों के बीच संवाद बेहतर होता है, जिससे पढ़ाई आसान बनती है और परिणाम भी अच्छे आते हैं. छात्रों के स्कूल छोड़ने के दर में गिरावट  शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के स्कूल छोड़ने के दर में भी गिरावट आई है. प्राइमरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या एक साल में 3.7 प्रतिशत से घटकर 2.3 प्रतिशत हो गई है. मिडिल लेवल पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या 1 साल में 5.2 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत और सेकेंडरी लेवर पर 10.9 प्रतिशत से घटकर 8.2 प्रतिशत हो गई है. इसी प्रकार छात्रों के स्कूल में बने रहने के दर में भी वृद्धि हुई है. प्राइमरी लेवल पर बच्चों के स्कूल में बने रहने का दर एक साल में 85.4 प्रतिशत से बढ़कर 92.4 प्रतिशत हो गई है. वहीं, मिडिल लेवल पर एक साल में 78 प्रतिशत से बढ़कर 82.8 प्रतिशत और सेकेंडरी लेवल पर यह एक साल पहले में 45.6 प्रतिशत से बढ़कर 47.2 प्रतिशत हो गई है.  महिला शिक्षकों की संख्या तेजी से बढ़ी ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 के सत्र में कुल शिक्षक 98.83 लाख थे, जो अब 1 करोड़ 1 लाख 22 हजार 420 हो गए हैं। इनमें से 51% (51.47 लाख) शिक्षक सरकारी स्कूलों में हैं। एक दशक में महिला शिक्षकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2014-15 में पुरुष शिक्षक 45.46 लाख और महिला 40.16 लाख थीं, जो 2024-25 में बढ़कर क्रमश: 46.41 लाख और 54.81 लाख हो गई हैं। बीते दशक में महिला शिक्षकों की संख्या करीब 8% बढ़ने की बड़ी वजह इनकी भर्तियां हैं। 2014 से अब तक 51.36 लाख भर्तियों में से 61% महिला शिक्षकों की हुई हैं। पीपुल-टीचर रेश्यो: अब 21 छात्रों पर एक शिक्षक, पहले 31 पर थे     मिडिल स्तर पर 10 साल पहले एक शिक्षक के पास 26 छात्र थे, जो घटकर 17 रह गए हैं। सेकंडरी स्तर पर यह 31 से घटकर 21 रह गया है। यानी छात्र व शिक्षकों के बीच संवाद बेहतर हो रहा है। शिक्षकों के पास जितने कम छात्र होंगे, वे उन्हें ज्यादा समय दे पाएंगे।     ड्रॉपआउट रेट घटा है। सेकंडरी पर 2023-24 में यह 10.9% था, जो 2024-25 में 8.2% बचा है। मिडिल स्तर पर यह 5.2% की तुलना में 3.5% और प्राथमिक पर 3.7% से घटकर 2.3% रह गई है।     प्राथमिक पर रिटेंशन रेट 2023-24 में 85.4% से बढ़कर अब 92.4 % हो गया है। मिडिल पर 78% से बढ़कर 82.8%, तो सेकंडरी पर यह 45.6% से बढ़कर 47.2% हो गया है। सेकंडरी स्तर पर नामांकन दर बढ़कर 68.5% हो गई है। डिजिटल सुविधा और इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ी  डिजिटल सुविधा और इंटरनेट कनेक्टिविटी की बात करें तो स्कूलों में डिजिटल सुविधाएं भी लगातार बढ़ रही है. पिछले साल तक 57.2 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर थे, जो अब 64.7 प्रतिशत स्कूलों में हो गए हैं. वहीं, स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की बात करें, जो पिछले साल तक 53.9 प्रतिशत स्कूलों में थी, वो अब लगभग 63.5 प्रतिशत हो गई है.  बुनियादी सुविधाएं बेहतर इन सभी के साथ स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है. अब 99.3 प्रतिशत स्कूलों में पीने का पानी, 93.6 प्रतिशत स्कूलों में बिजली, 97.3 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय और 96.2 प्रतिशत स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय हैं. इसी के साथ स्कूलों अन्य सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब 55 प्रतिशत स्कूलों में रैंप और रेलिंग, 89.5 प्रतिशत स्कूलों में लाइब्रेरी और 83 प्रतिशत स्कूलों में खेल के मैदान हैं.   ड्रॉपआउट दर और नामांकन में सुधार रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 6% की कमी आई है और शून्य नामांकन वाले स्कूलों में करीब 38% की … Read more

भारत में जल्द दौड़ेगी सुपरफास्ट ट्रेन, दिल्ली- पटना का सफर सिर्फ ढाई घंटे में

नई दिल्ली भारत में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को दुरुस्‍त करने पर लगातार काम चल रहा है. खासकर रेल और रोड प्रोजेक्‍ट्स पर लाखों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट उनमें से एक है. इसका काम तेजी से चल रहा है और आनेवाले कुछ महीनों में देश की पहली बुलेट ट्रेन पटरियों पर दौड़ सकती है. इस बीच, हाईस्‍पीड ट्रेन को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है. सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो भारत में नेक्‍स्‍ट जेनरेशन बुलेट ट्रेन का प्रोडक्‍शन शुरू हो सकता है. भारत इस बाबत जापान के साथ करार कर सकता है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान की यात्रा पर हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच ई-10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन (E10 Shinkansen Bullet Train) की भारत में मैन्‍यूफैक्‍चरिंग पर समझौता होने की उम्‍मीद है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत और जापान जल्द ही मिलकर अगली पीढ़ी की ई-10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन का निर्माण कर सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय जापान यात्रा के दौरान इसका औपचारिक ऐलान किया जा सकता है. मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि दोनों देशों के बीच इस साझेदारी पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है. ई-10 शिंकानसेन को जापान की ALFA-X से विकसित किया गया है और इसे भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से विशेष रूप से तैयार किया जाएगा. यह पहल भारत-जापान के बीच पहले से चल रहे अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट को और मजबूती देगी. यह प्रोजेक्ट कुल 508 किलोमीटर लंबा है और इसका पहला 50 किलोमीटर का खंड 2027 तक गुजरात में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूरा प्रोजेक्ट 2029 तक पूरा होगा. 400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार ‘हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह साझेदारी लगभग चार दशक पहले शुरू हुई मारुति-सुजुकी जॉइंट वेंचर की तरह ऐतिहासिक साबित हो सकती है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस प्रोजेक्ट का पैमाना और रणनीतिक महत्व कहीं ज्यादा है. पीएम मोदी की पहल और जापान से उनकी गहरी दोस्ती का नतीजा है कि बुलेट ट्रेनें अब भारत में ही बनने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है. ई-10 शिंकानसेन की अधिकतम रफ्तार 400 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि भारत के लिए पहले ई-5 शिंकानसेन (320 किमी/घंटा) का विकल्प तय था. पीएम मोदी की विशेष दिलचस्पी और जापानी नेतृत्व से उनके घनिष्ठ संबंधों के चलते भारत को नवीनतम तकनीक का लाभ मिलने जा रहा है. दुनिया की सबसे सुरक्षित ट्रेन इस प्रोजेक्ट से न केवल भारत की तेज़ी से बढ़ती परिवहन ज़रूरतों को पूरा किया जाएगा, बल्कि यहां बनी ट्रेनों की आपूर्ति अन्‍य देशों को भी की जा सकती है. भारत की किफायती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और जापान की विश्वस्तरीय तकनीक और गुणवत्ता इसे एक्सीलेंस प्रोजेक्ट बना सकता है. पीएम मोदी अपने जापानी समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन और बिज़नेस फोरम में शामिल होंगे. अगले दिन दोनों प्रधानमंत्री शिंकानसेन से यात्रा कर सेनदाई जाएंगे, जहां वे एक सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का दौरा करेंगे और जापानी प्रांतों के गवर्नरों से मुलाकात करेंगे. जापानी पक्ष का मानना है कि भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बनाते समय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी. गौरतलब है कि 1964 में शुरू होने के बाद से शिंकानसेन का सुरक्षा रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है. अभी तक किसी यात्री की ट्रेन हादसे में जान नहीं गई है.

इस साल का पहला और आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, तारीख 7-8 सितंबर तय

इंदौर  साल 2025 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण, जिसे 'ब्लड मून' के नाम से भी जाना जाता है, अगले महीने दिखने वाला है। सितंबर  महीने में यह खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। यह चंद्र ग्रहण कई देशों के साथ-साथ भारत में भी नजर आएगा। ऐसे में सूतक  काल भी मान्य होगा। जो जानते हैं यह खगोलीय घटना कब होगी और सूतक काल का समय क्या होगा? साल का आखिरी और दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में 7 सितंबर को दिखेगा। इसी दिन पितृपक्ष की भी शुरुआत होगी। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।  इस दौरान चंद्रमा पूर्ण से गुजरेगा और एक चमकदार लाल रंग के गोले में बदल जाएगा। यानि इस दिन चंद्रमा लाल रंग का होगा, जिसे बल्ड मून कहा जाता है, जो कई सालों में एक बार दिखाई देता है। चंद्र ग्रहण करीब चार घंटे तक रहेगा। उज्जैन की जीवाजी वैधशाला के अधीक्षक राजेंद्र गुप्त ने बताया कि दिनांक 7-8 सितंबर 2025 को पूर्ण चन्द्र ग्रहण की खगोलीय घटना हो रही है। भारतीय समय के अनुसार पूर्ण चन्द्र ग्रहण का प्रारंभ 7 सितंबर 2025 को रात्रि 09:56:08 बजे से शुरू होगा। मध्य की स्थिति मध्यरात्रि 11:41:08 बजे पर होगी। इस समय चन्द्रमा का 136.8 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया से ढका हुआ दृष्टिगोचर होगा अर्थात् पूर्ण चन्द्र ग्रहण की स्थिति दृष्टिगोचर होगी। ग्रहण के मोक्ष की स्थिति दिनांक 8 सितंबर 2025 को रात्रि 01:26:08 बजे पर होगी। यह ग्रहण भारत में पुराण रूप से दिखाई देगा। यह पूर्ण चन्द्र ग्रहण अंटार्कटिका, पश्चिमी प्रशांत महासागर, आस्ट्रेलिया, एशिया, हिन्द महासागर व यूरोप में भी दिखेगा। चन्द्र ग्रहण की स्थिति में पृथ्वी, सूर्य तथा चन्द्रमा के मध्य में होती है तथा पूर्ण ग्रहण की स्थिति में पृथ्वी की छाया से चन्द्रमा का पूर्ण भाग ढकता है। इसीलिए इसे पूर्ण चन्द्र ग्रहण कहते हैं। कब और कितने बजे लगेगा पूर्ण चंद्रग्रहण भारतीय समय के अनुसार, 7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण रात 9:57 बजे शुरू होगा और 8 सितंबर को 1:26 बजे तक रहेगा। ग्रहण का स्पर्श रात 11:09 बजे होगा, जबकि मध्यकाल रात 11:42 बजे होगा। इसका मोक्ष काल रात 12:23 बजे से शुरू होगा। कुल मिलाकर, यह चंद्र ग्रहण लगभग 4 घंटे तक चलेगा। एक घंटे से ज्यादा समय तक चलने वाला चरम चरण तब होगा जब चंद्रमा अपने सबसे गहरे लाल रंग में दिखाई देगा। सूतक काल का समय चंद्र ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा। दरअसल, चंद्र ग्रहण के शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों को नहीं किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण में मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं। साल का आखिरी और पूर्ण चंद्रग्रहण भारत के कई शहरों में दिखाई देगा। यह ग्रहण दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, बेंगलुरु समेत कुछ और शहरों में दिखाई देगा। भारत के अलावा ये ऑस्ट्रेलिया, अमेरिकी, फिजी और न्यूजीलैंड में भी दिखाया देगा।  क्या होता है 'ब्लड मून'?  खगोलीय वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह ढक जाएगा, जिससे वह लाल रंग का दिखाई देगा। यह नजारा भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। खगोलशास्त्रियों ने इसे साल की सबसे खास खगोलीय घटनाओं में से एक बताया है। बता दें कि ब्लड मून पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के ठीक बीच में आ जाती है।  

आज का राशिफल (30 अगस्त 2025): कुछ राशियों के लिए भाग्यवृद्धि का दिन, देखें क्या कहता है ज्योतिष

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए आज का दिन सुखमय रहेगा। आर्थिक स्थिती अच्छी होगी। करियर के लिए समय अच्छा रहेगा। लाइफ में कुछ नया ट्राई कर सकते हैं। निवेश करने से लाभ होगा। व्यापार में विस्तार का प्लान बना सकता है। आज किए गए कार्य आपको भविष्य में शुभ फल देंगे। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को जीवन में नए मौके मिलेंगे। लव लाइफ में नए रोमांचक मोड़ आएंगे। नए कनेक्शन बनेंगे। प्रेमी और प्रेमिका के लिए ये समय वरदान के समान कहा जा सकता है। किसी नए दिलचस्प व्यक्ति से मुलाकात संभव है। धन लाभ हो सकता है। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के जीवन में बड़े बदलाव हो सकते हैं। आपके लिए यह समय पॉजिटिव रहेगा। लव लाइफ अच्छी रहेगी। जीवनसाथी के साथ समय व्यतीत करेंगे। आज के दिन धन की समस्या भी नहीं होगी।पुराने निवेश से फायदा होगा। कर्क राशि- कर्क राशि वालों को आज जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। धैर्य से काम करने से सभी बाधाओं से पार हो जाएंगे। अपने लक्ष्यों पर फोकस करें और यह न भूलें कि कई बार कड़ी मेहनत और लगन से बड़े रिजल्ट पाए जा सकते हैं। खुद पर भरोसा रखें और कोई भी फैसला बड़ी सावधानी से लें। सिंह राशि- सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन वरदान के समान रह सकता है। कार्यों के अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। नए प्रोजेक्ट या लक्ष्यों को हासिल करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। आपके मेहनत और लगन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अपने उपलब्धियों को स्वीकार करें। खुद पर भरोसा रखें और अधिक बेहतर करने का प्रयास करें। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के जीवन में नई पॉजिटिव एनर्जी आएगी। जिससे आप कोई भी फैसला बुद्धिमानी से लेने में सक्षम होंगे। बेकार के वाद-विवाद से बचें। आज आप चुनौतियों को पार करने में सक्षम होंगे। तुला राशि- तुला राशि वालों को आज मिलेजुले परिणाम मिलेंगे। आपको अपने रिश्तों पर अधिक ध्यान दें। रिश्तों को बेहतर बनाने की जरुरत है। रिलेशनशिप की दिक्कतों को धैर्य और समझदारी से सुलझाएं। प्रोफेशनल लाइफ में कार्यों को लेकर ज्यादा स्ट्रेस लिए बिना उसे पूरा करने की कोशिश करें। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रह सकता है। पारिवारिक जीवन में खुशियां आएंगी। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा। नौकरी और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं। इस समय निवेश करना आपके लिए अच्छा होगा। आय के विभिन्न स्तोत्रों से धन लाभ हो सकता है। धनु राशि- धनु राशि वाले आज थोड़ा सावधान रहें। जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव है। आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। धन हानि के संकेत हैं। बजट पर ध्यान दें। आय और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखें। ऑफिस पॉलिटिक्स से दूरी बनाएं। मकर राशि- मकर राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रह सकता है। जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। कार्यों में सफलता मिलेगी। नए अवसरों का लाभ उठाने के मौकों को न गवाएं। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में लक्ष्यों पर फोकस करें और उन्हें प्राप्त करने के लिए भरपूर कोशिश करें। कुंभ राशि- कुंभ राशि वाले आज नए बदलावों के लिए तैयार रहें। आज आपको कड़ी मेहनत का फल मिलेगा। कार्यों के प्रति लगन और समर्पण से करियर में नई उपलब्धियां हासिल करेंगे। करियर में अपार सफलता मिलेगी। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। आपके प्रयासों से करियर में तरक्की के नए मार्ग बनेंगे। मीन राशि- मीन राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। धन खर्च सोच-समझकर ही करें। कन्फ्यूजन रहेगी। मानसिक तनाव रहेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी नही कही जा सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें। किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत डॅाक्टर से सलाह लें।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं को हटाने के मामले में सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें बेदखल करने पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के 30 मई के फैसले पर रोक लगाते हुए दिया गया, जिसमें शरणार्थियों की याचिका को खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शरणार्थियों की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और एक-पक्षीय अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। विष्णु शंकर जैन के मुताबिक, दिल्ली के 'मजनू का टीला' इलाके में एक हजार से अधिक पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी रह रहे थे। डीडीए ने इन परिवारों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था। शरणार्थियों ने डीडीए के नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी, लेकिन राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने शरणार्थियों की याचिका को खारिज कर दिया था। उन्होंने बताया, "पहले सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार इस मामले में कोई स्पष्ट नीति नहीं बना पा रही है और नीति निर्माण कोर्ट का कार्यक्षेत्र नहीं है, इसलिए अदालत कोई प्रभावी आदेश पारित नहीं कर सकती।" अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि यह सबसे अहम है कि जब यह मामला पहली बार हाईकोर्ट पहुंचा था, तो कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। अब केंद्र सरकार की नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत यह स्पष्ट नीति है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान से भारत आए सभी विस्थापित हिंदुओं को भारतीय नागरिकता दी जाएगी। जैसे ही किसी को नागरिकता मिलती है, संविधान का अनुच्छेद 21, जीवन और सम्मान का अधिकार, उन पर लागू हो जाता है।

राज्यों को मिला 4.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर राजस्व, केंद्र ने किया ट्रांसफर

नई दिल्ली केंद्र सरकार को चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जुलाई की अवधि में 10,95,209 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान का 31.3 प्रतिशत है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को दी गई। सरकार ने बताया कि इसमें से शुद्ध कर राजस्व 6,61,812 करोड़ रुपए, गैर-कर राजस्व 4,03,608 करोड़ रुपए और गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां 29,789 करोड़ रुपए हैं। वित्त मंत्रालय ने कहा कि केंद्र ने इस अवधि के दौरान कर राजस्व के रूप में राज्य सरकारों को 4,28,544 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 61,914 करोड़ रुपए अधिक है। इस अवधि के दौरान केंद्र द्वारा किया गया कुल व्यय 15,63,625 करोड़ रुपए है, जो 2025-26 के संबंधित बजट अनुमान का 30.9 प्रतिशत है। इसमें से 12,16,699 करोड़ रुपए राजस्व खाते में से और 3,46,926 करोड़ रुपए पूंजी खाते में से खर्च किए गए हैं। कुल राजस्व व्यय में ब्याज भुगतान 4,46,690 करोड़ रुपए है, जबकि सब्सिडी 1,13,592 करोड़ रुपए है। समीक्षा अवधि में राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और बिजली क्षेत्रों में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सरकार का पूंजीगत व्यय एक साल पहले के 2.6 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 3.5 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है। यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है क्योंकि ये बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकास दर को बढ़ावा देती हैं और अधिक रोजगार और आय सृजन पर गुणक प्रभाव डालती हैं। सरकार का राजकोषीय घाटा भी पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित बजट अनुमान के 29.9 प्रतिशत पर नियंत्रण में है। राजकोषीय घाटे में कमी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। इससे सरकार की उधारी में कमी आती है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में कॉर्पोरेट और उपभोक्ताओं को ऋण देने के लिए अधिक धनराशि बचती है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। कम राजकोषीय घाटा मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में भी मदद करता है।

LG मनोज सिन्हा ने वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन जांच के लिए गठित की कमेटी, 2 हफ्ते में रिपोर्ट

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्री माता वैष्णो देवी मार्ग पर हुई भूस्खलन की घटना को लेकर बड़ा आदेश दिया है। उन्होंने हादसे के कारणों की जाँच के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित करने के निर्देष दिए हैं। एलजी मनोज सिन्हा ने जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया है। जम्मू के संभागीय आयुक्त और जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक इस समिति के दो अन्य सदस्य हैं। समिति को घटना के कारणों की विस्तार से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी भूस्खलन की वजहों की विस्तार से जाँच करने के साथ-साथ और अन्य चूक को इंगित करेगी। कमेटी को भूस्खलन के दौरान किए गए बचाव और राहत उपायों के रूप में प्रतिक्रियाओं का आकलन भी करना होगा। इसके अलावा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उपयुक्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और उपाय भी सुझाने होंगे। समिति दो हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट उपराज्यपाल को सौंपेगी। दरअसल, 27 अगस्त 2025 को श्री माता वैष्णो देवी मार्ग के पास अर्द्धकुंवारी मार्ग पर स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास श्रद्धालुओं का बड़ा दल चल रहा था। उसी समय भूस्खलन हुआ और पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर टिन के शेड को चीरते हुए गिरे। इस दौरान वहां से गुजर रहे श्रद्धालु इसकी की चपेट में आ गए और मलबे में दब गए। इसमें 35 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी. 15 के शव उनके घरों में भेज दिए गए हैं। वहीं सात शवों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है।

एसआरएस ग्रुप घोटाला: भगोड़े प्रमोटरों पर गुरुग्राम कोर्ट की बड़ी कार्रवाई

गुरुग्राम गुरुग्राम की विशेष अदालत (पीएमएलए) ने एसआरएस ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के प्रमोटरों और निदेशकों (जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर) को नोटिस जारी किया है। विशेष अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए), 2018 के तहत एसआरएस ग्रुप की कंपनियों के प्रमोटरों और निदेशकों को यह नोटिस जारी किया है। ईडी के अनुसार, यह नोटिस धारा 4, एफईओए, 2018 के तहत दायर एक आवेदन के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें इन आरोपियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उनके द्वारा नियंत्रित कंपनियों, सहयोगियों और उनकी 212.73 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने की मांग की गई है। एसआरएस ग्रुप रियल एस्टेट और वित्तीय व्यवसाय में सक्रिय था। इन प्रमोटरों पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति का आपराधिक दुरुपयोग और आपराधिक साजिश जैसे अपराधों का आरोप है, जिसमें उन्होंने होमबायर्स, प्लॉट खरीदारों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को ठगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली ईओडब्ल्यू और सीबीआई, नई दिल्ली द्वारा दर्ज लगभग 81 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। इन एफआईआर में भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत अनिल जिंदल, जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल, प्रवीण कुमार कपूर और एसआरएस ग्रुप के अन्य निदेशकों तथा प्रमुख कर्मचारियों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। इन लोगों ने निवेश के नाम पर जनता और बैंकों से लगभग 2200 करोड़ रुपए की भारी राशि इकट्ठा की और हाई रिटर्न का वादा करके निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की। ईडी की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल व्यक्तियों और कंपनियों की पहचान की गई। जांच में पाया गया कि जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे, जिसके बाद 2022 में इस मामले में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई। ईडी ने अपराध से प्राप्त संपत्तियों की पहचान की और अब तक इस मामले में 2215.98 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया गया है। ईडी की जांच से पता चला है कि तीनों आरोपी (जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार) भारत छोड़ चुके हैं, जो जॉर्जिया, दुबई और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रह रहे हैं। ये आरोपी आपराधिक मुकदमे का सामना न करने के लिए भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर कानूनी प्रक्रिया से बच रहे हैं। सभी भगोड़ों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट, लुकआउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। इससे पहले, 6 जून 2025 को विशेष अदालत ने उन्हें भगोड़ा अपराधी घोषित किया था। वर्तमान में जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया गुरुग्राम की विशेष अदालत में चल रही है।

बाढ़ पीड़ितों को राहत, मान सरकार ने की विशेष घोषणा

चंडीगढ़  पंजाब के कई जिले इस समय भारी बारिश और बाढ़ की चपेट में हैं। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने राहत कार्यों को तेज़ करते हुए बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में मिलेगा सुरक्षित आश्रय सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने जानकारी दी कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे बुजुर्गों को तत्काल बचाकर पास के वृद्धाश्रमों में पहुँचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल 41 वृद्धाश्रम हैं, जिनमें 572 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था है और इस क्षमता को 700 तक बढ़ाया जा सकता है। मानसा में तैयार हुआ नया वृद्धाश्रम पहले से ही चालू कर दिया गया है, जिससे राहत कार्यों में तेजी आ सके। बच्चों के लिए अनाथालय और आंगनवाड़ी केंद्र तैयार सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के बच्चों को अस्थायी रूप से अनाथालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में रखा जाएगा। यदि कोई बच्चा अपनी माँ के साथ रहना चाहे तो उसके लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खिचड़ी और दलिया जैसी आसान पचने वाली खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है। गर्भवती महिलाओं के लिए 'सखी' सेंटर खुलेंगे डॉ. कौर ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में चल रहे 'सखी – वन स्टॉप सेंटर' को गर्भवती महिलाओं के लिए खोला जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थान मिल सके। साथ ही, महिलाओं को सैनिटरी पैड जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार की अपील राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे राहत कार्यों में सहयोग करें और जरूरत पड़ने पर प्रशासन से संपर्क करें। राहत टीमों को 24 घंटे के लिए सक्रिय रखा गया है।