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TMC में अनुशासनहीनता पर सख्ती, ममता ने दो नेताओं को पार्टी से निकाला

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद टीएमसी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक के बाद एक पार्टी को उसके ही नेता छोड़ रहे हैं। वहीं अब ममता बनर्जी ने ही अपने दो विधायकों पर सख्त एक्शन लिया है। TMC ने अपने दो विधायकों, रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया है। बता दें कि इससे पहले टीएमसी सांसद काकोली घोष ने हाल ही में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया था। संदीपन साहा भी बैठक में नहीं आए थे टीएमसी के इस फैसले को राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है. हालांकि पार्टी की ओर से निष्कासन के पीछे आधिकारिक कारणों का विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है. बता दें कि संदीपन साहा भी उन साठ विधायकों में शामिल हैं जो ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर होने वाली बैठक में नहीं पहुंचे थे और बैठक को रद्द कर दिया गया था।  ममता बनर्जी के आवास पर होनी थी बैठक बता दें कि सोमवार को ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर सभी विधायकों की बैठक बुलाई थी, जिसमें ज्यादातर विधायक शामिल नहीं हुए. बताया जा रहा है कि करीब 60 विधायक इस मीटिंग में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद बैठक को कैंसिल करना पड़ा. उधर TMC प्रवक्ता कुणाल घोष का दावा है कि ज्यादातर विधायकों ने फोन कर बता दिया था की मीटिंग में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि वो अपने इलाकों में हिंसा के विरोध में लड़ाई लड़ रहे हैं।  संदीपन साहा ने लगाए ये आरोप लेकिन इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब TMC विधायक संदीपन साहा ने ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल न होने की वजह सार्वजनिक रूप से बताई. संदीपन साहा उन करीब 60 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के आवास पर आयोजित पूर्व निर्धारित बैठक में हिस्सा नहीं लिया था. मीडिया से बातचीत के दौरान साहा ने कहा कि विधानसभा में पार्टी नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) की नियुक्ति को लेकर पहले ही एक बैठक आयोजित की जा चुकी थी. उस बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया गया था. उनके अनुसार, बाद में यह मामला इसलिए जांच के दायरे में आया क्योंकि प्रस्ताव को विधानसभा में भेजने से पहले जरूरी प्रोसेस फॉलो नहीं की गई थी।  संदीपन साहा ने कहा कि जब एक बार इस विषय पर बैठक हो चुकी थी और प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया था, तब दोबारा बैठक बुलाने की जरूरत को लेकर उनके मन में सवाल थे. उन्होंने पूछा कि क्या नई बैठक बुलाने से पहले सभी प्रक्रियाओं और नियमों की समीक्षा की गई थी या नहीं।  बैठक का कोई औचित्य नहीं था- संदीपन साहा टीएमसी विधायक ने कहा, "इस मुद्दे पर पहले ही बैठक हो चुकी थी. उस बैठक में तय किया गया था कि पार्टी नेता, उपनेता और चीफ व्हिप कौन होंगे. लेकिन बाद में यह सामने आया कि प्रस्ताव को विधानसभा में जमा करने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार नहीं अपनाई गई थी. इसके बाद मामले की जांच हुई. अब फिर से बैठक बुलाई गई. ऐसे में मेरे मन में सवाल था कि क्या इस बार सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा कर ली गई है।  उन्होंने आगे कहा कि इन्हीं कारणों से उन्हें लगा कि बैठक में शामिल होने का कोई विशेष औचित्य नहीं है. इसलिए उन्होंने उसमें हिस्सा नहीं लिया. संदीपन साहा के बयान को टीएमसी के भीतर से सामने आई एक बड़ी असहमति के रूप में देखा जा रहा है. आमतौर पर पार्टी के विधायक सार्वजनिक मंचों पर संगठनात्मक निर्णयों या नेतृत्व की प्रक्रिया पर सवाल उठाने से बचते रहे हैं. ऐसे में साहा की टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।  TMC विधायक अरूप राय भी हैं नाराज उधर, पूर्व मंत्री और सेंट्रल हावड़ा विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी विधायक अरूप राय ने भी अपनी ही पार्टी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसद, विधायक और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता लगातार हमलों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व उनकी कोई सुध नहीं ले रहा है. यहां तक कि हाल ही में उनके घर पर हुए हमले के बाद भी पार्टी की ओर से किसी ने उन्हें फोन कर हालचाल तक नहीं पूछा।  गौरतलब है कि पिछले शनिवार को सेंट्रल हावड़ा के कासुंदिया फास्ट बाई लेन स्थित अरूप राय के आवास के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था. उनके घर के सामने स्थित एक गोदाम से बड़ी मात्रा में सरकारी राहत सामग्री, जिनमें तिरपाल, कंबल, साड़ियां, धोती और अन्य सामान शामिल थे, बरामद होने का दावा किया गया था. इस घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके घर के सामने "चोर-चोर" के नारे लगाए थे।  इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अरूप राय ने अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि विधायक समीर पांजा पर हमला हुआ और उन्हें घर छोड़ना पड़ा. सांसद कल्याण बनर्जी पर भी हमला हुआ. इसके अलावा विभिन्न जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन पार्टी नेतृत्व पूरी तरह चुप है।  पार्टी की ओर से नहीं मिल रहा साथ और समर्थन उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी की ओर से कोई समर्थन नहीं मिल रहा है. शनिवार को उनके साथ हुई घटना के बाद भी पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता ने उनसे संपर्क नहीं किया. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पहले भी चुनाव हारी है, लेकिन उस समय कार्यकर्ता और नेता पूरे आत्मविश्वास के साथ राजनीति करते रहे, रैलियां और सभाएं आयोजित करते रहे. मगर वर्तमान जैसी स्थिति उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पहले कभी नहीं देखी।  उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वह पार्टी के आगामी कार्यक्रमों में शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी विचार कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने घोषणा की कि शनिवार को हुई घटना को लेकर वह थाने में एफआईआर दर्ज कराएंगे। 

हरियाणा के झज्जर के मुक्केबाजों ने किया कमाल, एशियन चैंपियनशिप के लिए बनाई जगह

झज्जर. खेलों की धरती झज्जर के लिए एक बार फिर गर्व का क्षण आया है। पटियाला में 28 मई से 1 जून तक आयोजित अंडर-23 राष्ट्रीय चयन ट्रायल में झज्जर जिले के चार प्रतिभाशाली मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की है। ये सभी खिलाड़ी आगामी 3 जुलाई से 16 जुलाई तक जकार्ता (इंडोनेशिया) में आयोजित होने वाली एशियन अंडर-23 बाक्सिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। कोच हितेश देशवाल ने बताया कि चयनित खिलाड़ियों में सागर जाखड़ (60 किग्रा), हितेश गुलिया (70 किग्रा), हेमंत सांगवान (90 किग्रा) तथा महिला वर्ग में प्राची धनखड़ (57 किग्रा) शामिल हैं। ये सभी मुक्केबाज इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीत चुके हैं। वर्तमान में ये खिलाड़ी झज्जर के महर्षि दयानंद सरस्वती स्टेडियम में कोच हितेश देशवाल की देखरेख में कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपनी सफलता का श्रेय कोच और परिजनों को दिया। इस उपलब्धि पर खेल प्रेमी शमशेर जाखड़, योगेंद्र धनखड़, सत्यवान गुलिया, विनोद सांगवान, हरियाणा मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष मेजर सतपाल संधू व महासचिव ओमबीर हुड्डा ने खिलाड़ियों तथा कोच को बधाई दी और एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश व प्रदेश का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दीं।

पंजाब निकाय चुनाव में BJP को बढ़त, लेकिन शहरों में मजबूत पकड़ अब भी दूर

चंडीगढ़. पंजाब के हालिया निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। हालांकि सीटों और वार्डों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद पार्टी शहरी क्षेत्रों में वह राजनीतिक सफलता हासिल नहीं कर सकी जिसकी उससे अपेक्षा की जा रही थी। चुनाव परिणामों ने यह संकेत जरूर दिया है कि पार्टी का जनाधार बढ़ रहा है, लेकिन अभी उसे राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाने के लिए लंबा सफर तय करना होगा। निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 103 निकायों के कुल 1977 वार्डों में से 172 वार्डों पर जीत दर्ज की। वर्ष 2021 के निकाय चुनावों में पार्टी को केवल 49 वार्डों में सफलता मिली थी। इस लिहाज से पार्टी ने अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार किया है। इसके बावजूद वह कुल वार्डों के आंकड़े में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, निर्दलीय उम्मीदवारों और शिरोमणि अकाली दल से पीछे रही। चुनाव परिणामों के अनुसार भाजपा केवल दो स्थानीय निकायों पर नियंत्रण स्थापित कर सकी। इनमें अबोहर नगर निगम और नया गांव नगर परिषद शामिल हैं। पार्टी का सबसे मजबूत प्रदर्शन नगर निगम चुनावों में देखने को मिला, जहां उसने 400 में से 69 वार्डों में जीत हासिल की। अबोहर में 28 और पठानकोट में 22 वार्ड जीतकर भाजपा इन दोनों शहरों में प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी। हालांकि अन्य प्रमुख शहरों में पार्टी का प्रदर्शन सीमित रहा। बठिंडा में उसे केवल एक सीट मिली, जबकि बटाला में दो सीटों पर सफलता मिली। मोहाली, कपूरथला और मोगा में पार्टी तीन-तीन वार्डों तक ही सिमट गई। इससे स्पष्ट है कि कुछ चुनिंदा शहरी क्षेत्रों को छोड़कर भाजपा अभी भी व्यापक स्तर पर मतदाताओं का विश्वास हासिल नहीं कर सकी है। नगर परिषद में 103 वार्डें जीतीं नगर परिषद चुनावों में भी भाजपा को 1331 वार्डों में से 103 वार्डों पर जीत मिली। वहीं 20 नगर पंचायतों के 246 वार्डों में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम भाजपा की उन चुनौतियों को उजागर करता है, जिनका सामना उसे राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए करना पड़ रहा है। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी की सफलता का मूल्यांकन पिछले चुनावों के मुकाबले किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने वार्डों की संख्या 49 से बढ़ाकर 172 कर ली है। उनके अनुसार वास्तविक राजनीतिक तस्वीर आगामी विधानसभा चुनाव में स्पष्ट होगी।

आरंग नगर पालिका में आरोप-प्रत्यारोप तेज, अध्यक्ष ने कलेक्टर से की शिकायत

आरंग/रायपुर. नगर पालिका परिषद आरंग में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी अब एक बड़े राजनैतिक-प्रशासनिक विवाद के रूप में सामने आई है। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। वहीं दूसरी ओर सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए धरातल पर काम होने का दावा किया है। इस खींचतान के बाद आरंग की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में सीएमओ पर शासन के निर्देशों की अनदेखी और निर्वाचित परिषद को दरकिनार करने के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अध्यक्ष का कहना है कि 08 मई को ‘सुशासन तिहार’ के तहत आयोजित समाधान शिविर में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने वार्ड क्रमांक 13 में अधूरे पड़े मिनी माता स्मृति भवन की समीक्षा की थी। मंत्री ने मंच से निर्देश दिए थे कि यदि ठेकेदार 2 दिनों में काम शुरू नहीं करता तो टेंडर निरस्त कर नया टेंडर जारी किया जाए। डॉ. जैन का आरोप है कि कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी न काम शुरू हुआ और न ठेकेदार पर कार्रवाई की गई, जिससे जनता में शासन की छवि धूमिल हो रही है। बजट प्रस्तुतिकरण में देरी नियमानुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट 31 मार्च 2026 तक प्रस्तुत होना था, जिसके लिए उन्होंने 16 मार्च को ही लिखित निर्देश दिए थे, परंतु प्रशासन की ढिलाई के कारण यह बजट देरी से 27 अप्रैल की सामान्य सभा में पेश हो सका। आवास आवंटन में प्रोटोकॉल का उल्लंघन अध्यक्ष का आरोप है कि एएचपी (अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप) योजना के तहत आवास आवंटन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को उनकी अनुपस्थिति में पूरा किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रोटोकॉल के लिहाज से अनुचित है। आरोप पूरी तरह निराधार, काम धरातल पर जारी है : शीतल चंद्रवंशी इस पूरे विवाद पर जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शीतल चंद्रवंशी से बात की गई तो उन्होंने अध्यक्ष के तेवरों और आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रशासनिक व तकनीकी पक्ष सामने रखा। सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने साफ किया कि मिनीमाता स्मृति भवन को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत है। धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है और वर्तमान में वहां सेप्टिक टैंक का स्लैब डालने का कार्य भी पूरा होने जा रहा है। वैधानिक प्रक्रियाओं की बाध्यता प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किसी भी चालू ठेके को अचानक निरस्त करने की एक लंबी कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया होती है। इसमें एस्टीमेट का पुनर्मूल्यांकन और नियमानुसार नोटिस अवधि देना अनिवार्य होता है, ताकि मामला अदालती दांव-पेच में न फंसे। प्रशासन ने नियमों के दायरे में रहकर ठेकेदार से काम शुरू करवाया है। बजट और आवास आवंटन जैसे बड़े कार्यों में विभागीय स्वीकृतियों, कड़े सरकारी नियमों, स्क्रूटनी (दस्तावेजों की जांच) और प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते कई बार समय-सीमा में व्यावहारिक बदलाव आ जाते हैं। इसमें किसी भी जनप्रतिनिधि की उपेक्षा करने का कोई उद्देश्य नहीं था, बल्कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है। अब जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरें आरंग नगर पालिका का यह विवाद यह साफ करता है कि जहां एक तरफ जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेही के कारण कार्यों में तेजी चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं की सीमाओं से बंधे होते हैं। विकास कार्यों को गति देने के लिए इन दोनों स्तंभों के बीच समन्वय होना अनिवार्य है। अब देखना होगा कि कलेक्टर इस शिकायत के बाद दोनों पक्षों के बीच के इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। नगर पालिका में चल रहे गतिरोध से नगर के मूलभूत कार्य जरूर प्रभावित हो सकते हैं।

BJP ने अजेय कुमार को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, राजस्थान की राजनीति में बढ़ी हलचल

जयपुर  राजस्थान भाजपा को आखिरकार नया संगठन महामंत्री मिल गया है और इस जिम्मेदारी के लिए जिस नाम की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, वह है अजेय कुमार. आम लोगों के बीच भले ही उनका चेहरा बहुत ज्यादा परिचित न हो, लेकिन भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनात्मक ढांचे में उन्हें लंबे समय से एक मजबूत रणनीतिकार माना जाता रहा है. यही वजह है कि राजस्थान जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से अहम राज्य में उनकी संभावित भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा तेज हो गई है. राजस्थान भाजपा में यह पद लंबे समय से खाली चल रहा था. इससे पहले चंद्रशेखर अगस्त 2017 में राजस्थान भाजपा के संगठन महामंत्री बनाए गए थे और जनवरी 2024 तक करीब 6 साल 5 महीने इस जिम्मेदारी को संभालते रहे. बाद में उन्हें राजस्थान से हटाकर तेलंगाना भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दे दी गई थी. तब से संगठन स्तर पर नए चेहरे को लेकर चर्चाएं चल रही थीं. संघ की पृष्ठभूमि से निकला संगठन का चेहरा अजेय कुमार उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पहचान मंचों और भाषणों से कम, संगठन और रणनीति से ज्यादा रही है. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और लंबे समय तक संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे हैं. भाजपा में संगठन महामंत्री का पद वैसे भी बेहद अहम माना जाता है. यह केवल राजनीतिक पद नहीं होता, बल्कि संघ और भाजपा के बीच समन्वय का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है. उनकी जिम्मेदारियों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, चुनावी रणनीति में समन्वय स्थापित करना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना, सदस्यता अभियान को आगे बढ़ाना और प्रदेश नेतृत्व व केंद्रीय नेतृत्व के बीच संवाद बनाए रखना शामिल रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ बड़ा सफर उत्तराखंड जाने से पहले अजेय कुमार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक काम किया. मेरठ, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में उन्होंने संगठन को मजबूत करने का काम संभाला. बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और चुनावी नेटवर्क तैयार करने में उनकी खास भूमिका रही. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में काम करने का अनुभव बाद में उनके लिए बड़ी ताकत साबित हुआ. यही अनुभव उन्हें आगे बड़े राज्यों की जिम्मेदारी तक ले गया. 2019 में मिला सबसे बड़ा मौका वर्ष 2018 में उत्तराखंड भाजपा के तत्कालीन संगठन महामंत्री संजय कुमार को पद से हटाए जाने के बाद यह पद कुछ समय तक खाली रहा. भाजपा और संघ दोनों संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश में जुटे थे. इसी क्रम में सितंबर 2019 में अजेय कुमार को उत्तराखंड भाजपा का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया. इसे उनके राजनीतिक और संगठनात्मक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ माना जाता है. उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई थी. इससे पहले वे मेरठ क्षेत्र में भाजपा के संगठन मंत्री के रूप में काम कर रहे थे. बूथ से लेकर चुनाव तक दिखाई पकड़ 2020 और 2021 के दौरान उन्होंने उत्तराखंड में बूथ समितियों के पुनर्गठन, मंडल स्तर की सक्रियता, युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने और सोशल मीडिया नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया. उनकी कार्यशैली का सबसे खास पहलू यह माना गया कि वे बिना ज्यादा प्रचार के जमीन पर संगठन को मजबूत करने में विश्वास रखते हैं. भाजपा के भीतर उन्हें लो-प्रोफाइल लेकिन प्रभावशाली संगठनकर्ता कहा जाने लगा. 2022 चुनाव बना सबसे बड़ी परीक्षा अजेय कुमार के संगठनात्मक कौशल की सबसे बड़ी परीक्षा 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हुई. उस समय राज्य में राजनीतिक चुनौतियां थीं और मुख्यमंत्री बदलने जैसी परिस्थितियां भी सामने आई थीं. इसके बावजूद भाजपा ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की. हालांकि तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट हार गए थे, लेकिन पार्टी ने बहुमत बरकरार रखा. राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे भाजपा संगठन की बड़ी उपलब्धि माना. इस चुनाव के बाद अजेय कुमार की पकड़ और प्रभाव दोनों बढ़ते हुए दिखाई दिए. 2024 के बाद भी बनी रही चर्चा 2023 और 2024 के दौरान उन्हें भाजपा के रणनीतिक संगठनकर्ताओं में गिना जाने लगा. इस दौरान कुछ राजनीतिक विवादों और मीडिया चर्चाओं में उनका नाम भी सामने आया, लेकिन आधिकारिक स्तर पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ और न ही कोई कार्रवाई हुई. इसी समय भाजपा और संघ के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी उनकी भूमिका की चर्चा होती रही. संगठन के भीतर उन्हें शांत स्वभाव लेकिन मजबूत निर्णय क्षमता वाले नेता के रूप में देखा जाता है. क्यों कहा जाता है पर्दे के पीछे का रणनीतिकार अजेय कुमार की पहचान उन नेताओं में है जो सुर्खियों से दूर रहकर काम करना पसंद करते हैं. उनकी कार्यशैली में अनुशासन, बूथ आधारित राजनीति, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और माइक्रो लेवल प्लानिंग को खास महत्व दिया जाता है. हाल के वर्षों में कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें भाजपा का “राइजिंग चाणक्य” तक कहा गया. इसकी वजह उत्तराखंड में संगठनात्मक सफलता, चुनावी प्रबंधन और बिना शोर किए परिणाम देने वाली कार्यशैली को माना गया. अब अगर राजस्थान जैसे बड़े राज्य में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलती है तो उनकी अगली परीक्षा भी कम बड़ी नहीं होगी. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड में संगठन को मजबूत करने वाले अजेय कुमार राजस्थान भाजपा के लिए किस तरह की नई रणनीति लेकर आते हैं.  

गोल्ड-सिल्वर की कीमतों में गिरावट, खरीदारी से पहले चेक करें लेटेस्ट भाव

मुंबई  भारतीय सर्राफा बाजार में 01 जून को सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की आधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com के मुताबिक, हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को बाजार खुलने के साथ 999 शुद्धता वाले यानी 24 कैरेट सोने का रेट 1 लाख 56 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब है, जो बीते कारोबारी दिन यानी शुक्रवार शाम को 1 लाख 56 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार था. वहीं, चांदी की कीमत भी अब गिरावट के साथ 2 लाख 63 हजार रुपये प्रति किलो तक आ गई है।  ibjarates.com पर 01 जून को सुबह जारी किए गए रेट्स के मुताबिक, 995 शुद्धता वाले यानी 23 कैरेट सोने का रेट 1 लाख 54 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार है. वहीं, 22 कैरेट सोने का रेट 1 लाख 42 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक है।  बता दें कि केंद्रीय सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों के अलावा ibjarates.com पर सोमवार से शुक्रवार रोज सुबह और शाम रेट जारी नहीं किए जाते हैं. आइए देखते हैं बीते कारोबारी दिन, शुक्रवार 29 मई की शाम की तुलना में आज कितना सस्ता हुआ सोना और चांदी।  01 जून 2026 को कितने रुपये सस्ता हुआ 22-24 कैरेट सोना और चांदी?   शुद्धता शुक्रवार, 29 मई शाम का भाव सोमवार, 01 जून का भाव रेट में कितना बदलाव सोना (प्रति 10 ग्राम) 999   (24 कैरेट) 156463 155599  864 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 995   (23 कैरेट) 155836 154976  860 रुपये सस्ता  सोना (प्रति 10 ग्राम) 916  (22 कैरेट)  143320 142529  791 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 750   (18 कैरेट) 117347 116699  648 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 585    (14 कैरेट) 91531 91025  506 रुपये सस्ता चांदी (प्रति 1 किलो) 999      263350 262900 Advertisement    450 रुपये सस्ती शुक्रवार, 29 मई को सुबह-शाम क्या था 22-24 कैरेट सोने का रेट?      450 रुपये सस्ती शुक्रवार, 29 मई को सुबह-शाम क्या था 22-24 कैरेट सोने का रेट? 24 कैरेट गोल्ड     सुबह का रेट- 157043     शाम का रेट-  156463 22 कैरेट गोल्ड     सुबह का रेट-  143851     शाम का रेट-  143320 इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए दाम पूरे देश में मान्य होते हैं. गोल्ड-सिल्वर की इन कीमतों में जीएसटी शामिल नहीं होता और ज्वैलरी खरीदने पर मेकिंग चार्ज अलग से देने होते हैं.

फुटबॉल फैंस के लिए खुशखबरी! FIFA World Cup अब भारत में इस नए चैनल पर होगा टेलीकास्ट

मुंबई  FIFA World Cup 2026 की शुरुआत 11 जून से हो रही है, लेकिन 31 मई 2026 तक भारत में इस मेगा इवेंट के भारत में टेलीकास्ट पर संशय के बादल थे, लेकिन एक जून 2026 को आधिकारिक तौर पर भारत में इस फुटबॉल विश्व कप को ब्रॉडकास्टर मिल गया है। एक नए स्पोर्ट्स चैनल पर फुटबॉल विश्व कप के मैचों का प्रसारण होगा। जी एंटरटेनमेंट ने Unite8 Sports चैनल पर इन मैचों को टेलीकास्ट करने के लिए राइट्स खरीदे हैं। दरअसल, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड यानी ZEEL ने फीफा वर्ल्ड कप के राइट्स खरीद लिए हैं। नए लॉन्च हुए Unite8 Sports टीवी चैनल्स पर फुटबॉल विश्व कप के मैचों का प्रसारण होगा। वहीं, 48 टीमों वाले इस विशाल टूर्नामेंट की लाइव स्ट्रीमिंग आपको Zee5 पर देखने को मिलेगी। 11 जून से इस टूर्नामेंट की शुरुआत हो रही है, जिसकी मेजबानी यूएसए, मेक्सिको और कनाडा मिलकर कर रहे हैं। कंपनी ने इस बात की भी घोषणा की है कि वह भारतीय बाजार में 2026 ही नहीं, बल्कि 2030 फीफा विश्व कप, 2027 फीफा महिला विश्व कप और 2034 तक अन्य प्रमुख फीफा कार्यक्रमों का प्रसारण करेगी। इसमें डॉक्यू-सीरीज कंटेंट भी शामिल है। फीफा विश्व कप (पुरुष और महिला) के अलावा 'जेड' यू-17 विश्व कप, महिला यू-17 विश्व कप, यू-20 विश्व कप, महिला यू-20 विश्व कप, फुटसल विश्व कप, फुटसल महिला विश्व कप और इंटरकांटिनेंटल कप भी जी के नए स्पोर्ट्स चैनल्स पर दिखाया जाएगा। ZEEL के CEO पुनीत गोयनका ने कहा, "हम दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स में से एक को भारतीय दर्शकों के लिए लाने के लिए उत्साहित हैं। फुटबॉल अलग-अलग इलाकों और डेमोग्राफिक्स में फैला हुआ है और मीडिया राइट्स हासिल करने और खास स्पोर्ट्स चैनल लॉन्च करने में किया गया इन्वेस्टमेंट, इसके लंबे समय के पोटेंशियल में हमारे पक्के यकीन को दिखाता है।" आपको बता दें, फीफा को इसलिए भी जून के दूसरे सप्ताह से शुरू होने वाले विश्व कप के लिए भारत में ब्रॉडकास्टर नहीं मिला था, क्योंकि टाइमिंग एक सबसे बड़ी समस्या है। यही कारण है कि जियोहॉटस्टार और सोनी स्पोर्ट्स जैसे बड़े खिलाड़ी मीडिया राइट्स खरीदने से पीछे हट गए। इसके अलावा 2026 और 2030 वर्ल्ड कप के लिए FIFA की 100 मिलियन डॉलर की भारी मांग ने बातचीत को और भी ज्यादा मुश्किल बना दिया। हालांकि, बाद में इस डिमांड को 60 मिलियन फीफा ने कर दिया था, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें को सिर्फ $20 मिलियन का ऑफर ही उन्हें मिला, लेकिन पिछले जी के नए स्पोर्ट्स चैनल्स के आने से चीजें बदल गईं।

भारत विरोधी आतंकी मॉड्यूल बेनकाब, ISI और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन से जांच एजेंसियां अलर्ट

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियों की जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है. हाल ही में एजेंसियों ने इस मॉड्यूल से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया था. इनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार और हैंड ग्रेनेड भी बरामद किए गए. जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क भारत में बड़े आतंकी हमलों की तैयारी कर रहा था. एजेंसियां अब इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही हैं।  जांच एजेंसियों को पता चला है कि इस मॉड्यूल का मुख्य निशाना दिल्ली और मुंबई थे. गिरफ्तार आरोपियों ने इन दोनों महानगरों की रेकी भी की थी. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हमलों के लिए संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाई जा रही थी. आरोपियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं ताकि साजिश को अंजाम दिया जा सके. समय रहते गिरफ्तारी होने से एक बड़ी आतंकी योजना नाकाम हो गई।  पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि पूरे मॉड्यूल का हैंडलर सैयद मुदस्सर हुसैन उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा था. मुन्ना झिंगाड़ा को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके करीबी छोटा शकील का बेहद भरोसेमंद माना जाता है. जांच में सामने आया कि वही इस नेटवर्क का ऑपरेशन हेड था और पाकिस्तान से पूरे मॉड्यूल को संचालित कर रहा था. एजेंसियों के मुताबिक, भारत में सक्रिय गुर्गों को सीधे उसी से निर्देश मिल रहे थे।  जांच में यह भी सामने आया कि ISI ने एक बार फिर कराची के क्लिफटन रोड इलाके को सक्रिय किया है. इसी इलाके में दाऊद इब्राहिम का ठिकाना भी बताया जाता है. सूत्रों के अनुसार, मुन्ना झिंगाड़ा ने दाऊद के कराची स्थित कथित 'व्हाइट हाउस' से करीब 4 किलोमीटर दूर एक फाइव स्टार होटल के पास अपना सेफ हाउस बना रखा था. यहीं से वह भारत में सक्रिय गुर्गों के संपर्क में रहता था और पूरी गतिविधियों पर नजर रखता था।  भारत के अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि मुन्ना झिंगाड़ा अपने कराची स्थित सेफ हाउस से वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क में रहता था. वह भारत में अंडरवर्ल्ड से जुड़ी नई जेहादी ब्रिगेड तैयार करने की कोशिश कर रहा था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूरा मॉड्यूल ISI के इशारों पर तैयार किया गया था. इतना ही नहीं, मुन्ना ने अपने गुर्गों को अपनी ताजा तस्वीरें भी भेजी थीं ताकि संपर्क और भरोसा बना रहे।  जांच में यह भी सामने आया कि मॉड्यूल से जुड़े कई गुर्गे नशे, खासकर 'चिट्टा' के आदी थे. आरोप है कि उनकी इस लत को बनाए रखने के लिए मुन्ना झिंगाड़ा की तरफ से हेरोइन का इंतजाम भी कराया जाता था. वहीं, भारत में बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए गुर्गों ने 20 लाख रुपये की मांग भी रखी थी. एजेंसियों के अनुसार, इसके बाद कुछ टोकन मनी दी गई और पाकिस्तान से भेजे गए हथियार तथा हैंड ग्रेनेड पंजाब के गुरदासपुर क्षेत्र में गिराए गए।  जांच एजेंसियों के हाथ लगी चैट्स ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं. एक चैट में मुन्ना झिंगाड़ा ने अपने गुर्गों से कहा था, 'माशाल्लाह करके आना काम.' वहीं उसने यह भी भरोसा दिलाया कि काम पूरा होने के बाद उन्हें नेपाल के रास्ते दुबई बुला लिया जाएगा. दूसरी तरफ गुर्गों ने जवाब में पहले 'चिट्टा' और फिर 20 लाख रुपये की मांग रखी थी. इन चैट्स से साफ संकेत मिले हैं कि ये आतंकी मॉड्यूल अंडरवर्ल्ड, नशे और पैसों के नेटवर्क को एक साथ जोड़कर भारत में बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। 

JSSC ने जारी किया एग्जाम शेड्यूल, 510 भर्तियों के साथ JPSC और JET पर भी अहम खबर

रांची. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024 की तिथि घोषित कर दी है। यह लिखित परीक्षा पांच जुलाई केा राज्य के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित होगी। आयोग के अनुसार, परीक्षा से संबंधित प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए लिंक आयोग के वेबसाइट पर जून माह के अंतिम सप्ताह में उपलब्ध कराया जाएगा। अभ्यर्थी उक्त लिंक के माध्यम से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र डाक अथवा किसी भी अन्य माध्यम से उपलब्ध नही कराया जाएगा। आयोग ने परीक्षा में सम्मिलित होनेवाले अभ्यर्थियों को सुझाव दिया है कि परीक्षा से संबंधित सुचिता को बरकरार रखेंगे तथा किसी प्रकार के कदाचार संबंधी प्रयास में शामिल नहीं होंगे। अन्यथा दोषी पाए जाने पर झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि इस परीक्षा के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यकर्ता के कुल 510 पदों पर नियुक्ति होनी है। 14 जून को होगी जेट व उड़िया की परीक्षा झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) के तहत शिक्षा तथा उड़िया विषय की परीक्षा 14 जून होगी। झारखंड लोक सेवा आयाेग ने साेमवार को परीक्षा की तिथि की घोषणा कर दी। यह परीक्षा उक्त तिथि को सुबह 10 बजे से अपराह्न एक बजे तक रांची में आयोजित की जाएगी। आयोग के अनुसार, उक्त दोनों विषयों के लिए अभ्यर्थी प्रवेश पत्र एवं उपस्थिति पत्रक 10 जून से आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। बता दें कि पूर्व में इन दोनों की परीक्षा निर्धारित तिथि 26 अप्रैल को नहीं हो सकी थी।

मरीजों के लिए राहतभरी खबर, बठिंडा अस्पताल में लगी आधुनिक एक्स-रे और OPG मशीनें

बठिंडा. शहीद भाई मनी सिंह सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने बड़ा कदम उठाया गया है। अस्पताल प्रशासन ने करीब 50 लाख की लागत से अत्याधुनिक डिजिटल रेडियोग्राफी (डीआर) एक्स-रे मशीन और आर्थोपेंटोमोग्राम (ओपीजी) मशीन खरीदी है। दोनों मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं और इन्हें स्थापित कर शुरू कर दिया गया है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1800 से 2000 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें से लगभग 400 से 500 मरीजों को एक्स-रे जांच की आवश्यकता होती है। मौजूदा समय में अस्पताल में उपलब्ध एकमात्र डिजिटल एक्स-रे मशीन पर अत्यधिक दबाव होने के कारण प्रतिदिन केवल 350 मरीजों की ही जांच हो पाती है। इसके चलते कई मरीजों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है, जबकि कई बार उन्हें अगले दिन आने की सलाह भी दी जाती है। सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. अरूण बांसल का कहना है कि नई डीआर मशीन लगने के बाद अस्पताल में दो डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध होगी है। इससे जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सकेगी। नई मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिससे शरीर के अंदरूनी हिस्सों की उच्च गुणवत्ता वाली और स्पष्ट तस्वीरें प्राप्त होंगी। इससे हड्डियों के सूक्ष्म फ्रैक्चर समेत कई अन्य बीमारियों की पहचान पहले से अधिक सटीकता के साथ की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि नई डीआर मशीन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि इसमें रेडिएशन का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। इससे मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी और जांच प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी। साथ ही डिजिटल तकनीक के कारण रिपोर्ट तैयार होने में भी कम समय लगेगा। पहली बार मिलेगी ओपीजी जांच की सुविधा अस्पताल में पहली बार ओपीजी मशीन की स्थापना की गई है। दंत चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह सुविधा दांतों और जबड़ों से संबंधित बीमारियों के निदान में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब तक सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ता था। निजी संस्थानों में ओपीजी जांच के लिए मरीजों को 800 से 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। नई मशीन शुरू होने के बाद यह सुविधा सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध होगी, जिससे मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा। साथ ही जांच रिपोर्ट भी महज पांच से दस मिनट में प्राप्त हो सकेगी। ओपीजी मशीन के माध्यम से दांतों की सड़न, संक्रमण, जबड़े की हड्डियों की स्थिति, ट्यूमर, अक्ल दाढ़ की समस्या, टेढ़े-मेढ़े दांतों तथा रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) से जुड़ी जटिलताओं का सटीक आकलन किया जा सकेगा। इससे दंत रोगों के उपचार में तेजी आएगी और चिकित्सकों को बेहतर उपचार योजना बनाने में मदद मिलेगी। रोजाना 120 तक मरीजों को होगा लाभ अस्पताल के डेंटल विभाग में प्रतिदिन 100 से 120 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओपीजी मशीन शुरू होने के बाद इन मरीजों को जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। समय और धन दोनों की बचत होगी तथा एक ही परिसर में जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नई मशीनों के संचालन से रेडियोलॉजी और डेंटल विभाग की सेवाओं में गुणात्मक सुधार आएगा। मरीजों की लंबी कतारें कम होंगी, जांच रिपोर्ट जल्दी उपलब्ध होगी और गंभीर रोगों की पहचान समय रहते संभव हो सकेगी। इससे सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों का भरोसा दोनों मजबूत होंगे।