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पेट्रोल-एथेनॉल दोनों पर चलेगी Maruti की नई कार, 5 जून को लॉन्च संभव

मुंबई  केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी है कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki 5 जून, 2026 को वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे पर भारत में एक फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल को लॉन्च कर सकती है. सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री ने महाराष्ट्र के नागपुर में एक इवेंट के दौरान इसकी घोषणा की, जिसमें गडकरी ने कहा कि यह गाड़ी E100 फ्यूल ग्रेड पर चल सकेगी।  इस इवेंट में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि, "ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां जल्द ही बड़े पैमाने पर आने वाली हैं. इस साल पर्यावरण दिवस के मौके पर, दिल्ली में एक प्रोग्राम है, जहां Maruti Suzuki 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां लॉन्च करेगी।  बता दें कि Maruti Suzuki की पेरेंट कंपनी Suzuki जापान ने पिछले साल Japan Mobility Show 2025 में Maruti Fronx सबकॉम्पैक्ट SUV का फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन प्रदर्शित किया था. इसके साथ ही, कम्प्रेस्ड बायोगैस से चलने वाली Maruti Victoris समेत कई दूसरी दो-पहिया और चार-पहिया गाड़ियां भी दिखाई गई थीं।  Suzuki ने उस समय Maruti Fronx फ्लैक्स-फ्यूल के बारे में गाड़ी के साइज़ के अलावा कुछ ही जानकारी दी थी. इंडिया-स्पेक मॉडल के मुकाबले, जापान में बिकने वाली Maruti Fronx में बड़ा नैचुरली एस्पिरेटेड 1.5-लीटर K-सीरीज़ पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया जाता है, जिसके साथ मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है।  भारतीय बाजार में, यह सबकॉम्पैक्ट SUV या तो 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल या 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन ऑप्शन के साथ आ सकती है, जिसके साथ मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों (1.2 पेट्रोल पर AMT) मिलते हैं. उस समय Suzuki ने Fronx फ्लेक्स फ्यूल के लिए इथेनॉल ब्लेंड रेटिंग के बारे में कभी नहीं बताया, हालांकि इसके साथ दिखाया गया दूसरा मॉडल, Suzuki Gixxer 250 का फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट, E85 तक सपोर्ट करने वाला था। 

मध्य प्रदेश में टाउनशिप परियोजनाओं पर बड़ा फैसला, अब नियमों के तहत होगा विकास

भोपाल  मध्यप्रदेश में टाउनशिप और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स के विकास को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव कर दिए हैं। अब मास्टर प्लान में लैंड यूज परिवर्तन करवाकर छोटे क्षेत्र में टाउनशिप विकसित करना आसान नहीं रहेगा। नगरीय विकास विभाग ने नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि टाउनशिप विकास के मामलों में अब इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के प्रावधान प्रभावी होंगे। इसके बाद प्रदेश में 10 हेक्टेयर से कम क्षेत्र में टाउनशिप विकसित नहीं की जा सकेगी। अब नहीं टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड नियम ही मान्य अभी तक एमपी के कई शहरों में मास्टर प्लान के तहत लैंड यूज बदलवाकर 2 हेक्टेयर जैसी छोटी जमीन पर भी आवासीय कॉलोनियां और टाउनशिप विकसित की जा रही थीं। सरकार ने फरवरी 2026 में इस संशोधन का प्रारूप जारी किया था। दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद मई से इसे अधिसूचित कर प्रभावी कर दिया गया है। संशोधन में नई धारा जोड़कर यह स्पष्ट किया है कि मास्टर प्लान या लैंड यूज परिवर्तन संबंधी प्रावधानों के बावजूद टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड नियम ही मान्य होंगे। इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्लान में ये संशोधन     अब इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के नियम प्रभावी होंगे     5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 10 हेक्टेयर तो इससे अधिक आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 20 हेक्टेयर जमीन अनिवार्य।     नगरीय सीमा या प्लानिंग एरिया के बाहर कम से कम 40 हेक्टेयर में ही टाउनशिप विकसित होगी।     24 से 30 मीटर चौड़ी सड़क से कनेक्टिविटी जरूरी     सड़क, पेयजल, सीवेज, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था डेवलपर को स्वयं ही करनी होगी।     डेवलपर के लिए 5 करोड़ नेटवर्थ और 6 करोड़ टर्नओवर अनिवार्य।     लैंड यूज परिवर्तन के लिए अब 10 फीसदी राशि जमा करनी होगी।     प्रस्तावों पर सचिव नगरीय विकास या कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निर्णय लेगी। ये होंगे फायदे     बड़े और नियोजित टाउनशिप विकास को बढ़ावा मिलेगा।     अव्यवस्थित कॉलोनियों पर नियंत्रण लगेगा।     सड़क, पानी, बिजली और सीवेज जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी।     पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा और शहरी विकास अधिक व्यवस्थित और दीर्घकालिक होगा। ये नुकसान भी     छोटे और मझोले डेवलपर्स बाजार से बाहर हो सकते हैं     एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स कम होने की आशंका     मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सस्ते घरों की उपलब्धता घट सकती है     बड़े भूखंड जुटाना कठिन होने से प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ सकती है     भोपाल-इंदौर में आवासीय प्रोजेक्ट्स की रगतार कम होगी एफॉर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है असर नए नियमों से छोटे और मझोले डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में होगा। यहां 10 हेक्टेयर क्षेत्र जुटाना छोटे डेवलपर्स के लिए आसान नहीं होगा। वहीं पॉलिसी के तहत डेवलपर के लिए न्यूनतम 5 करोड़ की नेटवर्थ और 6 करोड़ रुपए का औसत वार्षिक टर्नओवर भी प्रभाव डालेगा। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे, वहीं पांच साल बाद नवीनीकरण के लिए भी 25 हजार देना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करते हैं। ऐसे डेवलपर्स बाजार से बाहर होंगे तो एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या घटने की आशंका है। साधिकार समितियां करेंगी अनुमोदन अब टाउनशिप संबंधी प्रस्तावों पर संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अध्यक्षता वाली समिति विचार नहीं करेगी। इसके स्थान पर नई साधिकार समितियां गठित की गई हैं। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण-अनुमोदन करेगी। वहीं जिलों में अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को है।

Bhopal City Bus Service में बड़ा बदलाव, स्मार्ट सिटी CEO को मिला संचालन का जिम्मा

भोपाल भोपाल सिटी बसों से अब राजनीतिक दखल खत्म होने वाला है। यह सेवा अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन हो गई है। इसका प्रभार अब महापौर या एमआईसी की जगह स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड‎(बीसीएलएल) ‎राज्य सरकार की नई 'मुख्यमंत्री सुगम‎परिवहन सेवा' का हिस्सा बन गई है। ‎इसका आधिकारिक पत्र भोपाल नगर निगम ‎को सौंप दिया गया है। अब तक बीसीएलएल में महापौर‎और एमआईसी (मेयर इन काउंसिल)‎ सदस्यों (पार्षदों) का सीधा दखल होता ‎था, लेकिन अब कमान पूरी तरह ‎प्रशासनिक अफसरों के हाथ में होगी। जब तक नया कार्यकारी बोर्ड पूरी ‎तरह आकार नहीं ले लेता, तब तक वर्तमान ‎व्यवस्था के तहत सीईओ के पद पर अंजू‎ अरुण ही प्रभारी बनी रहेंगी।‎ नई नीति में प्रदेश को सात जोन में बांटा नई नीति के तहत पूरे प्रदेश को 7 जोन ‎में बांटा गया है। इसमें भोपाल क्षेत्र के साथ ‎नर्मदापुरम संभाग को भी जोड़ा गया है।‎दोनों संभागों के कलेक्टर इसके बोर्ड में‎ होंगे, जो बस सेवा को नियंत्रित करेंगे।‎ सिफारिशें नहीं चलेंगी जानकारी के अनुसार, रूट्स तय करने, बसों के स्टॉपेज या‎नई बसें चलाने में अब पार्षदों या ‎एमआईसी की सिफारिशें नहीं चलेंगी। पूरा‎ नियंत्रण क्षेत्रीय कंपनी के पास होगा। इससे ‎सेवा के संबंध में फैसले तेजी से और‎ व्यावहारिक आधार पर लिए जाएंगे।‎ भोपाल क्षेत्रीय कंपनी ही अब तय करेगी ‎कि शहर और उप नगरीय इलाकों में कौन‎ से रूट पर कितनी बसें चलेंगी। किराया‎ निर्धारण और परमिट की पूरी व्यवस्था भी ‎यही कंपनी संभालेगी। जिससे नगर निगम‎पर निर्भरता खत्म होगी।‎ बीसीएलएल की बसों में अक्सर आने‎ वाली शिकायतों (जैसे चालकों की‎मनमानी, समय पर बस न मिलना) को‎दूर करने के लिए इसे टेलिजेंट ट्रांसपोर्ट‎ मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया जाएगा। ‎इससे बसों की लाइव ट्रैकिंग और सुचारू‎ मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय से होगी।‎ कार्रवाई भी समय पर हो सकेगी।‎ भोपाल क्लस्टर में चलेंगी 398 बसें‎ योजना के पहले चरण में भोपाल क्षेत्र के 104 ‎मार्गों पर कुल 398 बसें चलाने का खाका तैयार ‎किया गया है। ये बसें भोपाल शहर के मुख्य‎ मार्गों से लेकर उपनगरीय क्षेत्रों और नर्मदापुरम ‎संभाग के प्रमुख रूट्स को आपस में जोड़ेंगी।‎ सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय निजी‎ ऑपरेटरों के जरिए इन 398 बसों का संचालन‎ पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल‎पर कराएगी। जिससे बीसीएलएल की तरह नगर‎ निगम पर वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।‎ बता दें कि पहले साढ़े तीन सौ से ज्यादा सिटी बसें भोपाल शहर में दौड़ती थी, लेकिन इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान में करीब 70 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही है। इस वजह से टैक्सी, ऑटो पर यात्रियों की निर्भरता बढ़ गई है।  

Crude Oil सस्ता होने से खुशखबरी, पेट्रोल-डीजल और LPG को लेकर बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्‍ली  कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लुढ़ककर दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 4.55% की गिरावट के साथ 98.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.73% टूटकर 92.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. दोनों ही अनुबंधों के लिए 7 मई के बाद का यह सबसे निचला स्तर है. क्रूड की कीमतों में आई यह गिरावट भारत के लिए बड़ी राहत है।  भारत के लिहाज से सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस संभावित समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का संकट टल सकता है. तनाव से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और एलएनजी का परिवहन इसी मार्ग से होता था. इस रूट के सुचारू होने से भारत में गैस और तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहेगी, जिससे देश में एलपीजी की किल्लत का खतरा पूरी तरह टल जाएगा और आपूर्ति चेन मजबूत होगी।  अमेरिका-ईरान में शांति की उम्मीद से टूटे दाम तेल की कीमतों में यह बड़ी गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बना है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर “काफी हद तक बातचीत पूरी” कर चुके हैं. इस समझौते के तहत मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है।  भले ही ते बाजार इस खबर से झूम उठा हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अभी पूरी तरह जश्न मनाना जल्दबाजी होगी. राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों से ईरान के साथ किसी भी समझौते में जल्दबाजी न करने को कहा है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रुकावटों समेत कई जटिल मुद्दों पर दोनों पक्षों में मतभेद अभी भी बरकरार हैं।   

2027 मिशन के लिए BJP-RSS की सियासी कवायद तेज, भागवत का दौरा क्यों अहम?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत रविवार की शाम तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे. संघ प्रमुख आरएसएस भले ही पूर्वी क्षेत्र के प्रशिक्षण वर्ग में शामिल होने के लिए आए हों, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस दौरे के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।  मोहन भागवत के तीन के लखनऊ प्रवास को विशुद्ध रूप से आरएसएस के कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है. प्रशिक्षण वर्ग में बौद्धिक निर्देशन के साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष और विभिन्न अभियानों की समीक्षा करेंगे, लेकिन संघ प्रमुख की इस यात्रा ने प्रदेश की सियासी सरगर्मी को बढ़ा दी है।  उत्तर प्रदेश को देश की 'सत्ता का प्रवेश द्वार' कहा जाता है. यूपी की सियासत में आरएसएस की भूमिका हमेशा से एक 'साइलेंट किंगमेकर' और 'ग्राउंड इंजीनियर' की रही है. भले ही संघ खुद को एक सांस्कृतिक संगठन कहता है, लेकिन बीजेपी के लिए जनसंघ के दौर से ही सियासी रण में वो मददगार बनता रहा है. 2017 और 2022 में बीजेपी को मिली जीत में संघ का रोल काफी अहम रहा है. ऐसे में 2027 से पहले मोहन भागवत एक बार फिर से यूपी पहुंचे हैं।  लखनऊ के दौरे पर मोहन भागवत संघ प्रमुख मोहन भागवत तीन दिन के लखनऊ दौरे पर हैं और निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में ठहरे हैं. वो मंगलवार तक लखनऊ में रहेंगे. लखनऊ में संघ का अवध, गोरक्ष, काशी और कानपुर प्रांत के स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण वर्ग चल रहा है. इस दौरान मोहन भागवत  प्रशिक्षण वर्ग में बौद्धिक निर्देशन के साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष और विभिन्न अभियानों की समीक्षा करेंगे।  मोहन भागवत पूर्वी क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ बैठकों में वह शताब्दी वर्ष के तहत चल रहे गृह संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलनों सहित विभिन्न अभियानों के अलावा शाखा विस्तार पर चर्चा करेंगे और आगे के अभियानों और कार्यक्रमों को लेकर निर्देश देंगे. हालांकि संघ प्रमुख अपने प्रवास के दौरान किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, लेकिन आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बीजेपी के प्रमुख पदाधिकारियों, सरकार के प्रतिनिधियों और संघ के प्रशिक्षण वर्ग में शामिल हो सकते हैं।  सीएम से डिप्टीसीएम से होगी मुलाकात? संघ प्रमुख मोहन भागवत से  लखनऊ प्रवास के दौरान सरकार और बीजेपी नेता मुलाकात करने से भी पहुंच सकते हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक सहित यूपी सरकार के कई बड़े मंत्री मुलाकात कर सकते हैं. इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पकंज चौधरी भी दिल्ली से लखनऊ पहुंच गए हैं. सरकार और बीजेपी संगठन के तमाम अहम लोग  संघ प्रमुख से मिलने के लिए निराला नगर जा सकते हैं।  उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है. ऐसे में सरकार के कामकाज और 2027 विधानसभा चुनाव तैयारियों को लेकर भी चर्चा हो सकती है. ऐसे में वह प्रदेश के राजनीतिक हालात की भी जानकारी ले सकते हैं और जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश करेंगे. इससे पहले भी देखा गया है कि संघ प्रमुख लखनऊ पहुंचे हैं तो सरकार से लेकर संगठन तक के लोग उनसे मिलने पहुंचते रहे हैं।  ट्रिपल एस मॉडल' से सत्ता की हैट्रिक यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से संघ प्रमुख मोहन भागवत प्रचारकों और प्रमुख पदाधिकारियों से प्रदेश की समाजिक और राजनीतिक स्थितियों के संबंध में भी फीडबैक लेंगे. बीजेपी संगठन और सरकार के प्रमुख पदाधिकारियों से मुलाकात में संगठन और सरकार के बीच समन्वय के मुद्दों पर भी बात हो सकती है. इसे ट्रिपल एस मॉडल के रूप में देखा जाता है. यह मॉडल पूरी तरह सरकार, संगठन और संघ के तीन स्तंभों पर आधारित माना जाता है।  संघ विचारधारा और अनुशासित कैडर नेटवर्क देता है. बीजेपी का संगठन चुनावी लामबंदी और राजनीतिक रणनीति संभालता है. जबकि सरकार अपने कामकाज और योजनाओं के आधार पर जनता के बीच संदेश पहुंचाती है. ये तीनों जब एक ही दिशा में काम करते हैं तो बीजेपी की चुनावी मशीनरी काफी प्रभावी मानी जाती है.  2014 के बाद बीजेपी की चुनावी जीत में इस मॉडल की भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है।  2027 की चुनावी जंग जीतने का प्लान 2027 चुनाव से पहले फिर के एक बार ट्रिपल एस के बीच तालमेल बैठकर सत्ता की हैट्रिक लगाने का प्लान है. इसीलिए होली के बाद से यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों में संघ और बीजेपी के बीच समन्वय बैठकों की एक पूरी श्रृंखला चली. इन बैठकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह हिस्सा लिए थे, जबकि संघ के क्षेत्रीय और प्रांत स्तर के प्रचारक भी बैठक में शिरकत करते थे।  राजनीतिक विश्लेषक इन बैठकों को सिर्फ नियमित संगठनात्मक संवाद नहीं मानते, बल्कि 2027 के चुनावों से पहले बीजेपी की चुनावी रणनीति का शुरुआती खाका खींचने की कवायद बताते हैं. हालांकि, यह है कि बीजेपी और संघ के बीच इस तरह की समन्वय बैठकें नई नहीं हैं.  2019 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले भी इसी तरह का संवाद अभियान चलाया गया था. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जमीन पर सियासी माहौल बनाने के लिए यह रणनीति अपनाई गई थी. संघ और बीजेपी के सियासी तालेमल से ही चुनावी जंग जीतने में सफल रही है।  यूपी संघ-BJP की सियासी प्रयोगशाला उत्तर प्रदेश संघ की सियासी प्रयोगशाला रही है. 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पूरे देश में महज 2 सीटों पर सिमट गई थी. इसके बाद संघ के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहब देवरस की रणनीति के तहत संघ परिवार (विशेषकर विश्व हिंदू परिषद) ने राम मंदिर आंदोलन की कमान संभाली. संघ ने इस आंदोलन के जरिए उत्तर प्रदेश के बिखरे हुए हिंदू समाज को एक वैचारिक सूत्र में पिरोया।  संघ के कार्यकर्ता 'शिला पूजन' और गांवों में 'राम ज्योति' यात्राओं के जरिए घर-घर दस्तक दी. इस वैचारिक जमीन का राजनीतिक फायदा बीजेपी को मिला, लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा और कल्याण सिंह के उभार के साथ 1991 में पहली बार हबयूपी में सरकार बनी. 2002 से 2012 के बीच यूपी में भाजपा लगातार कमजोर हो रही थी और तीसरे-चौथे नंबर की पार्टी बन चुकी थी। इसके बाद 2014 के … Read more

फलता ने बढ़ाई ममता की टेंशन! TMC के लिए भवानीपुर से ज्यादा बड़ा झटका क्यों माना जा रहा नतीजा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान के नतीजों ने पूरे राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार देबांशू पांडा ने इस सीट पर 1.09 लाख से भी ज्यादा वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की है. यह जीत सिर्फ भाजपा की मजबूती को नहीं दिखाती, बल्कि 15 साल सत्ता में बैठी रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए एक ऐसा बड़ा झटका है जिसने पार्टी के भीतर एक गंभीर संकट का इशारा कर दिया है. जहां टीएमसी प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई. ये प्रत्याशी कोई और नहीं, टीएमसी संगठन में सबसे पावरफुल अभिषेक बनर्जी के राइट हैंड मैन कहे जाने वाले जहांगीर खान थे. जिन्होंने आखिरी वक्त मुकाबले से खुद को अलग कर लिया, और अपना वोट भी नहीं डाला।  ऐसे में यह सवाल तो बनता है कि टीएमसी के लिए ममता बनर्जी की सीट भवानीपुर की हार ज्यादा गंभीर थी, या फलता का नतीजा? भवानीपुर में होने वाले किसी भी राजनैतिक उतार-चढ़ाव को लोग अक्सर ममता बनर्जी के पर्सनल जादू और शहर के वोटर्स के मिजाज से जोड़कर देखते हैं, जहां हार-जीत का अंतर कभी-कभी पार्टी की ढिलाई की वजह से बदल सकता है. लेकिन फलता की हार तृणमूल कांग्रेस की उस 'ग्रासरूट मशीनरी' यानी जमीनी संगठन की नाकामी को सामने लाती है, जिसके दम पर पार्टी पिछले कई सालों से बंगाल पर राज कर रही है. यह हार इसलिए भी ज्यादा चुभने वाली है क्योंकि फलता सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस के 'नंबर दो' और ममता के उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी के लोकसभा क्षेत्र 'डायमंड हार्बर' का एक मुख्य हिस्सा है।  इस क्षेत्र के पुराने इतिहास को देखें तो दक्षिण 24 परगना जिला हमेशा से टीएमसी का सबसे मजबूत और अभेद्य गढ़ रहा है. इस जिले ने हमेशा तृणमूल कांग्रेस का बढ़-चढ़कर साथ दिया है. साल 2024 के लोकसभा चुनावों में, जब अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर सीट से रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी, तब इसी फलता विधानसभा क्षेत्र ने उन्हें अकेले 1.68 लाख वोटों की बड़ी लीड दी थी. उस चुनाव में अभिषेक बनर्जी का वोट शेयर फलता में लगभग 89% था, यानी  एकतरफा मुकाबला. लेकिन, सिर्फ दो साल के भीतर तृणमूल कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर सिर्फ 3.7% पर आ जाना और पार्टी उम्मीदवार का चौथे नंबर पर खिसककर अपनी जमानत तक गंवा देना, किसी भी राजनैतिक पार्टी के लिए बहुत बड़ी नाकामी है. फलता सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं है, बल्कि यह वह इंडस्ट्रियल और ग्रामीण इलाका है जहां टीएमसी का बूथ मैनेजमेंट सबसे अचूक माना जाता था. इस सीट पर मिली करारी हार यह साफ करती है कि पार्टी का वह जमीनी ढांचा, जो कभी हर वोटर के घर तक पकड़ रखता था, अब पूरी तरह से बिखर चुका है।  अभिषेक का 'डायमंड हार्बर मॉडल' ध्वस्त यह हार सीधे तौर पर टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की राजनैतिक साख और उनकी लीडरशिप पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है. अभिषेक बनर्जी लगातार खुद को पार्टी के मॉडर्नाइजेशन और पार्टी ऑर्गेनाइजेशन में खुद को नए के लीडर के रूप में पेश करते रहे हैं. उन्होंने बार-बार 'डायमंड हार्बर मॉडल' की तारीफ की है. एक ऐसा मॉडल जिसे वे अच्छे गवर्नेंस, तुरंत एक्शन और अचूक चुनावी रणनीति का प्रतीक बताते थे. चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में, 2 मई को अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय नेतृत्व और भाजपा को खुली चुनौती देते हुए कहा था कि भाजपा को उनके डायमंड हार्बर मॉडल में एक मामूली खरोंच लगाने के लिए भी 10 जन्म लेने होंगे, और अगर हिम्मत है तो दिल्ली से अपने नेताओं को बुलाकर फलता में मुकाबला करके दिखाएं. इस तरह की आक्रामक चुनौती के बाद जब नतीजे पूरी तरह उल्टे आते हैं, तो राजनैतिक नुकसान सिर्फ एक सीट का नहीं होता, बल्कि नेता की साख पूरी तरह प्रभावित हो जाती है।  शुभेंदु अधिकारी ने इस नतीजे के तुरंत बाद तंज कसते हुए कहा कि कुख्यात 'डायमंड हार्बर' मॉडल अब तृणमूल के 'हार-बार' मॉडल में बदल चुका है. फलता की हार ने यह साबित कर दिया है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों की 35 कंपनियों की तैनाती और कड़े इलेक्शन मैनेजमेंट के बीच, जब सरकारी मशीनरी का अनुकूल सहयोग मुमकिन नहीं हो पाता, तब संगठन की असली परीक्षा होती है. यह नतीजा अभिषेक बनर्जी के उस दावे को कमजोर करता है कि उनका संगठन बिना किसी अतिरिक्त मदद के भी अजेय है।  अंतर्कलह का अंत नहीं इसके साथ ही, फलता के नतीजे टीएमसी के भीतर पिछले काफी समय से चल रहे 'पुराने वफादार बनाम नए कॉर्पोरेट-शैली के रणनीतिकार' के अंदरूनी संघर्ष को और ज्यादा तेज करेंगे. ममता बनर्जी की राजनीति हमेशा से संघर्ष करने, सड़क पर उतरकर आंदोलन करने और जमीनी स्तर के पुराने नेताओं को साथ लेकर चलने पर टिकी रही है. इसके उलट, अभिषेक बनर्जी पर उन्हीं की पार्टी के लोग आरोप लगा रहे हैं कि उनका मॉडल कॉर्पोरेट इलेक्शन मैनेजमेंट, डेटा एनालिटिक्स और पारंपरिक नेताओं को दरकिनार कर नए चेहरों को आगे बढ़ाने की वकालत करता है. फलता की इस ऐतिहासिक पराजय से पार्टी के भीतर ममता बनर्जी के पुराने खेमे को अभिषेक के खिलाफ मुंह खोलने का एक और मौका मिल गया है. पार्टी के भीतर यह आवाजें उठने लगी हैं कि संगठन के फैसलों से पुराने और जमीनी नेताओं को साइडलाइन करने का नतीजा ही फलता में देखने को मिला है।  ममता की चुनौती अभिषेक को बचाना चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में टीएमसी उम्मीदवार का अचानक पीछे हटने की घोषणा करना यह इशारा करता है कि लोकल लीडरशिप और शीर्ष नेतृत्व के रणनीतिकारों के बीच गहरा अविश्वास था. ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति बेहद पेचीदा है. एक तरफ उन्हें अपने घोषित उत्तराधिकारी की साख को बचाना है, तो दूसरी तरफ पार्टी के बिखरते जा रहे कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं की नाराजगी को दूर करना है. भवानीपुर की जीत या हार ममता के अपने कंट्रोल में होती है, लेकिन फलता का बिखरना यह दिखाता है कि पार्टी पर उनकी पकड़ के बावजूद ऑर्गेनाइजेशन पर कंट्रोल कमजोर हो रहा है।  इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू मतगणना के दिन तृणमूल की गैरमौजूदगी रही. टीएमसी जैसी मजबूत पार्टी का मतगणना केंद्रों पर अपने काउंटिंग एजेंट तक तैनात न … Read more

पंजाब में वोटिंग का दिन! निकाय चुनाव के लिए सुरक्षा कड़ी, बूथों पर CCTV से निगरानी

चंडीगढ़  पंजाब में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के लिए आज  यानि मंगलवार को मतदान हो रहा । राज्य की 8 नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों के लिए आज  वोट डाले जा रहे , जबकि चुनावी नतीजों की घोषणा 29 मई को होगी।  वहीं, इस बार बैलेट पेपर के माध्यम से वोटिंग होगी। 3977 बूथ हैं। 36 हजार मुलाजिम चुनावी प्रक्रिया में शामिल हैं। 35500 पुलिस मुलाजिम व होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं। जबकि, हर बूथ पर 5 मुलाजिम तैनात रहेंगे। आईएएस व पीसीएस अफसर जिलों में तैनात किए गए हैं। 36.72 लाख मतदाता डालेंगे वोट इस बार बठिंडा, अबोहर, बटाला, बरनाला, कपूरथला, मोगा, पठानकोट और मोहाली नगर निगम के चुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने हुए हैं। विशेष बात यह है कि बरनाला नगर निगम के लिए पहली बार चुनाव करवाए जा रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक इस चुनाव में कुल 36,72,932 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इसमें 18 लाख 990 पुरुष, 7,73,716 महिलाएं और 226 अन्य हैं। आप से सबसे अधिक उम्मीदवार मैदान में बता दें, पंजाब भर के निकाय चुनावों की घोषणा के बाद 10,809 उम्मीदवारों ने शुरुआती नामांकन भरा था। जिसमें से 2393 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया था। 79 उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है। अब चुनाव के लिए 7555 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें सबसे अधिक उम्मीदवार सत्तापक्ष आम आदमी पार्टी (आप) के चुनाव लड़ रहे हैं जिनकी संख्या 1801 हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के 1550, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 1316, शिरोमणि अकाली दल के 1251, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 96, 1528 निर्दलीय और 13 अन्य उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। निकाय चुनाव सभी दलों के लिए अहम हैं, क्योंकि इसे 2027 में विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। सभी पोलिंग बूथों के अंदर और बाहर सीसीटीवी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए राज्य के सभी पोलिंग बूथों के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी रिकॉर्डिंग कम से कम एक वर्ष तक सुरक्षित रखी जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में संबंधित फुटेज को बिना अनुमति नष्ट नहीं किया जाएगा। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मंचंदा की खंडपीठ ने नगर निकाय चुनावों से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश जारी किए। 26 मई को पंजाब में सरकारी छुट्टी का एलान पंजाब सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए 26 मई को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इस दौरान चंडीगढ़ सहित पंजाब सरकार के सभी सरकारी दफ्तर, बोर्ड, कॉर्पोरेशन, शैक्षणिक संस्थान और अन्य सरकारी प्रतिष्ठान इस दिन बंद रहेंगे। इसके अलावा, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अपने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए 26 मई को विशेष आकस्मिक अवकाश की घोषणा की है। 5-6 दिन में ही निपटा प्रचार आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इन स्थानीय निकाय चुनावों को शहरी मतदाताओं के राजनीतिक मिजाज का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। बता दें, पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने 11 मई को इन चुनावों का एलान किया था। 19 मई को नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों को प्रचार के लिए केवल 5-6 दिनों का ही समय मिल सका। जिसमें उम्मीदवारों ही नहीं, राजनीतिक पार्टियों के धुरंधरों नें इसमें पूरी ताकत झोंक दी। विधायकों मंत्रियों की परफॉर्मेंस का रिपोर्ट कार्ड होंगे नतीजे बता दें, सत्तारूढ़ 'आप' के विधायकों और मंत्रियों ने आज प्रचार में अपनी पूरी ताकत लगा दी, क्योंकि इन चुनावों के नतीजे उनकी परफॉर्मेंस का रिपोर्ट कार्ड तय करेंगे। इसके साथ ही, इन चुनावों से भाजपा का ग्राफ भी साफ हो जाएगा, जो इस बार काफी आक्रामक तरीके से चुनावी मैदान में उतरी है। राज्य चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पोलिंग स्टेशनों के आसपास किसी भी तरह की प्रचार सामग्री प्रदर्शित करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। अकाली दल ने की मतदान का समय बढ़ाने की मांग शिरोमणि अकाली दल ने राज्य चुनाव आयोग से मतदान का समय बढ़ाने की मांग की है। अकाली नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि मतदान का समय सुबह 8 से 5 बजे की जगह सुबह 7 से शाम 6 बजे तक बढ़ाया जाना चाहिए। चीमा ने कहा कि प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप है जिसका असर मतदान प्रतिशत पर पड़ सकता है। अगर सुबह और शाम के चलते मतदान का समय दो घंटे बढ़ा दिया जाए तो उससे मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी। मौजूदा समय मजदूरों के लिए भी उपयुक्त नहीं है क्योंकि वो काम के कारण अपने मताधिकार का उपयोग नहीं कर पाएंगे।  

Horoscope Today 26 May: मेष से मीन तक पढ़ें आज का राशिफल और शुभ संकेत

मेष पिछले कुछ समय से आप जिस प्रोजेक्ट के लिए दिन-रात एक कर रहे थे, उसका क्रेडिट आखिरकार आपको मिलने वाला है। कानूनी या जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का फैसला आपके पक्ष में आ सकता है। कंस्ट्रक्शन के काम से जुड़े लोगों को अच्छा मुनाफा होगा। धन की बचत करने में आप सफल रहेंगे। सभी सदस्यों के बीच तालमेल बेहतर रहेगा। वृषभ वृषभ राशि वालों के जीवन में आज के दिन बड़े और पॉजिटिव बदलाव देखने को मिलेंगे। आलस्य छोड़कर एक्शन मोड में आने का समय है। टीम वर्क से किए गए कामों में आपको बड़ी सफलता मिलेगी। अगर आप अपनी नौकरी बदलना चाहते हैं, तो इंटरव्यू कॉल्स आने की पूरी संभावना है। मिथुन लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए योजना बनाने का यह सही समय है। घर के माहौल में सुधार होगा। पीठ या जोड़ों के दर्द से थोड़ी परेशानी हो सकती है। शेयर मार्केट में बड़ा रिस्क लेने से पूरी तरह बचें। पैसों का लेनदेन करते समय लिखा-पढ़ी जरूर करें, नहीं तो धोखा हो सकता है। कर्क कर्क राशि वालों के लिए समय थोड़ा संभलकर चलने का है। ग्रहों का इशारा है कि इस समय आपको अपनी योजनाओं को पूरी तरह गुप्त रखना चाहिए, जब तक कि वे पूरी न हो जाएं। ऑफिस में कुछ लोग आपकी पीठ पीछे आपकी इमेज खराब करने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए अपने काम से काम रखें। सिंह फिजूलखर्ची पर अगर काबू नहीं रखा, तो बजट पूरी तरह गड़बड़ा सकता है। दोस्तों के साथ अच्छा समय बीतेगा, जिससे मानसिक रूप से हल्कापन महसूस होगा। योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। वाहन चलाते समय स्पीड पर कंट्रोल रखें। कन्या एक से अधिक माध्यम से धन का आगमन होगा, जिससे बैंक बैलेंस में सुधार देखने को मिलेगा। पार्टनर के साथ किसी लॉन्ग ड्राइव या डिनर डेट पर जाने का प्लान बन सकता है। सेहत बिल्कुल दुरुस्त रहेगी। करियर रोमांचक मोड़ ले सकता है। तुला तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन थोड़ा मिलाजुला रहेगा। इमोशन में बहकर कोई भी बड़ा फैसला न लें, खासकर जब बात आपके करियर या पैसों से जुड़ी हो। व्यापारियों को थोड़ा संभलकर कदम बढ़ाना होगा। नौकरी में काम की धीमी रफ्तार के कारण बॉस की डांट सुननी पड़ सकती है। वृश्चिक इंकम सामान्य रहेगी। सुख-सुविधाओं की चीजों पर अचानक बड़ा खर्च हो सकता है। लव लाइफ में किसी पुरानी बात को लेकर अनबन हो सकती है। खान-पान की लापरवाही से पेट की समस्या परेशान कर सकती है। धनु इंकम के रास्ते खुलेंगे, लेकिन घरेलू जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई पर अचानक बड़ा खर्च सामने आ सकता है। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी। माइग्रेन या सिर के भारीपन को नजरअंदाज न करें, भरपूर नींद लें। धनु राशि वालों के लिए दिन मेहनत का मीठा फल चखने का है। मकर तुला राशि वालों के लिए ये दिन बेहद संतुलित और खुशनुमा रहने वाला है। कला, संगीत, लेखन या किसी भी क्रिएटिव फील्ड से जुड़े लोगों को कोई बड़ा प्लेटफॉर्म या पहचान मिल सकती है। बिजनेस करने वाले जातकों की बिक्री में उछाल आ सकता है। नौकरी में मनचाहा ट्रांसफर मिलने के योग हैं। कुंभ कुंभ राशि के जातकों के लिए दिन की शुरुआत थोड़ी भागदौड़ और मानसिक दबाव के साथ हो सकती है। ऑफिस में पेंडिंग काम का बोझ बढ़ेगा, लेकिन स्थिति अचानक आपके पक्ष में मुड़ जाएगी। सरकारी क्षेत्र या बड़े टेंडर्स से जुड़े व्यापारियों को कोई बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता है। नौकरीपेशा लोग सहकर्मियों की पॉलिटिक्स से दूर रहें। मीन आज के दिन सरप्राइज की बात हो सकती है, चाहे वह ट्रैवल हो या कोई इंटरेस्ट हो, यह आपके बॉन्ड को मजबूत करेगा। आपकी फाइनेंशियल सिचुएशन विकास के अवसरों से भरी रहेगी। हाथ आए मौकों को अपनाने की आपकी क्षमता न केवल आपकी सिचुएशन को सुरक्षित करेगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री प्रदेश में शीघ्र लागू होगी आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति, मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं: मुख्यमंत्री आयुष संस्थानों को समग्र वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता: मुख्यमंत्री पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा एवं बस्ती मंडलों में होगी एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश में ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति-2026’ को लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को केवल उपचार आधारित व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए आयुष, योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं के समन्वय से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को आधुनिक प्रबंधन, गुणवत्ता मानकों और पर्यटन से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया जाना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार और निवेश को भी नई गति मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत, आयुर्वेद एवं योग की परंपरा तथा धार्मिक पर्यटन सर्किट को आयुष वेलनेस सेक्टर से जोड़ा जाए। वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकसित किए जाने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि आयुष संस्थानों को उपचार केंद्रों के साथ-साथ वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 3,953 आयुष स्वास्थ्य इकाइयां, 1,034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 225 योग वेलनेस सेंटर और 19 आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आयुष सेवाओं का विस्तार गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत स्वरूप में किया जाए। इसके लिए पीपीपी मॉडल के माध्यम से आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र तथा आयुष कॉलेजों के उन्नयन की दिशा में चरणबद्ध कार्रवाई की जाए। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। नीति के अंतर्गत एकीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आयुष वेलनेस एवं चिकित्सा केंद्र, प्रशिक्षण युक्त एकीकृत संस्थान तथा आयुष कॉलेज आधारित मॉडल विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों में पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, डिजिटल हेल्थ सेवाएं तथा अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष आधारित वेलनेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने निवेशकों को एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से त्वरित स्वीकृतियां उपलब्ध कराने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित नीति में निवेश आधारित सब्सिडी, संचालन संबंधी प्रोत्साहन, ब्याज सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट तथा रोजगार सृजन आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। आयुष शोध, नवाचार तथा पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए भी विशेष प्रोत्साहन प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री ने मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा एवं बस्ती मंडलों में एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को आधुनिक आयुष चिकित्सा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने आयुष चिकित्सा संस्थानों में ओपीडी सेवाओं को बेहतर बनाने, दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा पंचकर्म जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को जनविश्वास और गुणवत्ता से जोड़ते हुए मरीजों को बेहतर उपचार एवं वेलनेस सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।  मुख्यमंत्री ने महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर में शोध एवं नवाचार गतिविधियों को गति देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थायी फैकल्टी की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने तथा आयुष की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

समय से पहले आएगा मानसून? 26 मई को केरल पहुंचने के आसार, 10 दिन में बस्तर में एंट्री संभव

रायपुर  रायपुर मौसम केंद्र के मौसम वैज्ञानिक बीके चिंधालोरे ने बताया कि केरल में हर साल 1 या 2 जून को मानसून पहुंचता है लेकिन इस बार दक्षिण पश्चिम मानसून 26 मई को ही केरल पहुंच जाएगा. केरल में मानसून के पहुंचते ही नमीयुक्त हवाएं भी आएंगी, जिससे नौतपा में भी लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।  छत्तीसगढ़ में कब पहुंचेगा मानसून केरल में मानसून पहुंचने के बाद लगभग 10 से 12 दिनों में मानसून छत्तीसगढ़ में पहुंचता है. यानी प्रदेश में मानसून पहुंचने की संभावित तिथि 5 मई से 7 मई के आसपास है।  छत्तीसगढ़ में 25 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. छत्तीसगढ़ में 26 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. कुछ इलाकों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा) चलने की संभावना है।  छत्तीसगढ़ में 27 मई से 29 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. कुछ स्थानों पर बिजली कड़कने और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा) के साथ आंधी आने की संभावना है।  छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों के लिए तापमान का पूर्वानुमान छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिनों में अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है. इसके बाद इसमें 1-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है. साउथ वेस्ट मानसून का अग्रिम आगमन 2026 राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र भारत मौसम विज्ञान विभाग के सुबह 8 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार इस बार मानसून का अग्रिम आगमन हो रहा है. मानसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E, 7°N/70°E, 7°N/75°E, 8°N/80°E, 10°N/85°E, 13.5°N/90°E और 17°N/95°E से होकर गुजर रही है. अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण पश्चिम, दक्षिण पूर्व और पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मानसून आगे बढ़ने के लिए परिस्थतियां अनुकूल है।  पूर्वोत्तर भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 मई को असम और मेघालय में गरज, बिजली और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 25 और 26 मई को अरुणाचल प्रदेश में, 25 से 29 मई के दौरान असम और मेघालय में, और 25, 29 और 30 मई को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है. 25 से 27 मई के दौरान अरुणाचल प्रदेश में, असम और मेघालय में अलग अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।  दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत 25 से 28 मई के दौरान केरल, माहे और लक्षद्वीप में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ व्यापक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है. 25 से 28 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और आंतरिक कर्नाटक में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ छिटपुट से लेकर मध्यम वर्षा की संभावना है. तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा में 25 से 27 मई के दौरान और तेलंगाना में 25 से 30 मई के दौरान भी 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।  25 और 26 मई को उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक के झोंके) की संभावना है. 25 और 26 मई को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में छिटपुट भारी वर्षा की भी संभावना है. केरल और माहे में 25 से 28 मई के दौरान भी यही संभावना है।  पूर्वी भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 और 26 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 25 से 30 मई के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में और 25 से 28 मई के दौरान बिहार में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश होने की संभावना है. 27 से 29 मई के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में, 26 से 28 मई के दौरान बिहार में और 25 मई को झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक हवाएं) आने की संभावना है. 25 से 27 मई के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में छिटपुट भारी बारिश होने की संभावना है।  उत्तरपश्चिम भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 मई और 28-30 मई के दौरान जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है. उत्तराखंड में 25, 29 और 30 मई को भी यही स्थिति रहेगी. 28-30 मई के दौरान पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है. 25-29 मई के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में और 30 मई को राजस्थान में भी यही स्थिति रहेगी. 28 और 29 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में और 29 और 30 मई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है।