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वैभव ने मचाया कोहराम, जोफ्रा ने बरपाया कहर… SRH IPL से बाहर

 मुल्लांपुर मुल्लांपुर में बुधवार रात IPL 2026 के एल‍िम‍िनेटर (Eliminator) मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने सनराइजर्स हैदराबाद को 47 रन से हराकर क्वाल‍िफायर-2 (Qualifier-2) में जगह बना ली. इस जीत के सबसे बड़े हीरो रहे 15 साल के वैभव सूर्यवंशी और तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर. एक ने बल्ले से तूफान मचाया, तो दूसरे ने गेंद से SRH की कमर तोड़ दी। राजस्थान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 243 रन बनाए. जवाब में हैदराबाद की पूरी टीम 19.2 ओवर में 196 रन पर ऑलआउट हो गई. अब राजस्थान का सामना शुक्रवार को गुजरात टाइटन्स से होगा. इस मैच का विजेता फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से भिड़ेगा। पूरे मुकाबले में सबसे ज्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी की रही. 15 साल के इस बल्लेबाज ने सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन ठोक दिए. उनकी पारी में 12 छक्के और 5 चौके शामिल रहे. वह IPL इतिहास का सबसे तेज शतक लगाने से सिर्फ 3 रन दूर रह गए. क्रिस गेल का 30 गेंदों में शतक का रिकॉर्ड टूटते-टूटते बचा। वैभव ने शुरुआत से ही पैट कमिंस और SRH के गेंदबाजों पर हमला बोल दिया. फुल लेंथ गेंदों को सीधे साइट स्क्रीन के पार पहुंचाया, जबकि शॉर्ट गेंदों पर भी जमकर रन बटोरे. उनकी बल्लेबाजी इतनी आक्रामक थी कि SRH कप्तान कमिंस लगातार फील्ड बदलते और रणनीति बनाते नजर आए, लेकिन कोई तरीका काम नहीं आया। इस सीजन में वैभव सूर्यवंशी ने छक्कों का नया रिकॉर्ड भी बना दिया. उन्होंने IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा 65 छक्के लगाने का कारनामा किया. इससे पहले यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम था, जिन्होंने 2012 में 59 छक्के लगाए थे। वैभव ने सिर्फ 16 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया. उनकी बल्लेबाजी देखकर ऐसा लग रहा था कि वह T20 क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने के अपने सपने को भी सच कर सकते हैं. हालांकि आठवें ओवर में प्रफुल हिंगे की गेंद पर थर्ड मैन पर कैच आउट होकर वह इतिहास रचने से चूक गए. आउट होने के बाद उनका धीमे कदमों से पवेलियन लौटना उनकी निराशा साफ दिखा रहा था। दूसरे छोर पर यशस्वी जायसवाल 29 रन बनाकर संघर्ष करते दिखे. वहीं ध्रुव जुरेल ने सिर्फ 21 गेंदों में 50 रन की शानदार पारी खेली. राजस्थान एक समय 13 ओवर में 2 विकेट पर 180 रन बनाकर 260 के पार जाता दिख रहा था, लेकिन आखिरी 5 ओवर में SRH ने वापसी की. उस दौरान राजस्थान ने 36 रन के भीतर 5 विकेट गंवा दिए। हैदराबाद की ओर से प्रफुल हिंगे ने 3 विकेट लिए, हालांकि उन्होंने 4 ओवर में 54 रन भी दिए. शिवांग कुमार ने यशस्वी जायसवाल का विकेट लेकर प्रभावित किया. दूसरी तरफ कमिंस का दिन बेहद खराब रहा. उन्होंने 4 ओवर में बिना विकेट लिए 64 रन लुटा दिए. साकिब हुसैन ने 3 ओवर में 49 रन दिए, जबकि ईशान मलिंगा भी महंगे साबित हुए। 244 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत बेहद खराब रही. जोफ्रा आर्चर ने पावरप्ले में ही मैच राजस्थान की तरफ मोड़ दिया. उन्होंने पहले अभिषेक शर्मा को बाउंसर पर फंसाया, फिर ईशान किशन को कवर पर कैच कराया. ट्रैविस हेड ने उनकी रफ्तार के खिलाफ जगह बनाकर खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद सीधे स्टंप्स में जा लगी। आर्चर की तेज रफ्तार गेंदबाजी के सामने SRH का विस्फोटक टॉप ऑर्डर टिक नहीं पाया. पांचवें ओवर तक टीम 57 रन पर 4 विकेट गंवा चुकी थी. इसके बाद हैदराबाद कभी मुकाबले में वापसी नहीं कर सका और आखिरकार 196 रन पर ढेर हो गया। राजस्थान के लिए यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि पूरे सीजन में टीम की लड़ाई और वापसी की कहानी भी बन गई. अब टीम की नजर Qualifier-2 जीतकर फाइनल में पहुंचने पर होगी. क्वाल‍िफायर 2 मुकाबला 29 मई को गुजरात के ख‍िलाफ होना है।  

क्रिकेट इतिहास में नया तूफान! वैभव सूर्यवंशी का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर से भी तेज

मुंबई   भारतीय क्रिकेट में जब भी कोई नया युवा बल्लेबाज कमाल करता है, तो उसकी तुलना तुरंत भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर से होने लगती है। लेकिन आज कहानी कुछ और है। सवाल यह नहीं है कि क्या 15 साल के वैभव सूर्यवंशी अगले सचिन हैं, बल्कि सस्पेंस इस बात का है कि क्रिकेट के मायने अब कितने बदल चुके हैं। जहां सचिन के दौर में क्रीज पर टिकना महानता थी, वहीं वैभव के दौर में पहली ही गेंद से तबाही मचाना पहचान बन चुका है। सचिन की परीक्षा थी 'टिकना' 15 नवंबर 1989 को जब 16 साल के सचिन तेंदुलकर पाकिस्तान के खतरनाक गेंदबाजों के सामने उतरे, तो उनका मकसद सिर्फ जिंदा रहना और क्रीज पर टिकना था। उन्होंने साल 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ 119 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलने के लिए 189 गेंदें ली थीं। उस दौर में टेस्ट क्रिकेट और धैर्य ही असली पैमाना हुआ करते थे, जहां स्कूल की किताबें साथ लेकर चलने वाले सचिन ने धीरे-धीरे अपनी बादशाहत बनाई। पहली गेंद से धमाका करते वैभव इसके ठीक उलट, राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 14 साल की उम्र में आईपीएल डेब्यू करते ही शार्दुल ठाकुर की पहली गेंद पर छक्का जड़ दिया था। उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ महज 35 गेंदों में शतक ठोक दिया, जो किसी भी भारतीय द्वारा आईपीएल इतिहास का सबसे तेज शतक है। अपनी 101 रनों की पारी में 94 रन तो उन्होंने सिर्फ चौके-छक्कों से बनाए थे। IPL 2026 के सीजन में वैभव का बल्ला आग उगल रहा है। उन्होंने 14 मैचों में 232 के हैरान करने वाले स्ट्राइक रेट से 583 रन कूट दिए हैं, जिसमें सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 37 गेंदों में लगाया गया एक और खूंखार शतक शामिल है। 53 में से 42 छक्कों की कहानी काफी कुछ कहती है! इस सीजन में वैभव सूर्यवंशी ने कुल 53 छक्के लगाए हैं, जिनमें से 42 सिर्फ तेज गेंदबाजों के खिलाफ आए हैं. यानी लगभग हर चार में से तीन छक्के उन्होंने पेस अटैक के खिलाफ लगाए हैं।  यह सिर्फ आंकड़ा नहीं है, यह एक पैटर्न है और वह पैटर्न बताता है कि वैभव के सामने सबसे बड़ा खतरा नहीं, बल्कि सबसे बड़ा अवसर खुद तेज़ गेंदबाज़ बन रहे हैं।  पेस अटैक पर सीधा हमला तेज गेंदबाजों के खिलाफ वैभव का प्रदर्शन IPL 2026 में असाधारण रहा है. उन्होंने इस विभाग के खिलाफ 478 रन बनाए हैं, औसत 43.45 और स्ट्राइक रेट 235.46 के साथ. इस दौरान 44 चौके और 42 छक्के उनके नाम दर्ज हैं।  सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने हर 4.83 गेंद पर एक छक्का जड़ा है- जो किसी भी पेस अटैक के लिए एक लगातार दबाव का संकेत है। स्पिन के खिलाफ भी उनका प्रदर्शन मजबूत है, लेकिन तुलना खुद फर्क बता देती है. स्पिन के खिलाफ उन्होंने 105 रन बनाए हैं, औसत 35.00 और स्ट्राइक रेट 218.75 के साथ. यहां भी 11 छक्के दर्ज हैं, लेकिन असली तबाही तेज गेंदबाजों के खिलाफ ही दिखी है।  शुरुआत ही सबसे बड़ा हथियार वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी का सबसे खतरनाक पहलू उनका शुरुआती आक्रमण है. वह क्रीज़ पर 'सेट होने' का इंतजार नहीं करते- बल्कि पहली गेंद से ही मैच का स्वरूप बदल देते हैं. इस सीजन में-  – पहली गेंद पर 3 छक्के – पहले 5 गेंदों में 11 छक्के – पहले 10 गेंदों में 20 छक्के – पहले 15 गेंदों में 36 छक्के ये आंकड़े बताते हैं कि उनका इरादा साफ है या तो शुरुआत में ही मैच पर कब्जा, या फिर विपक्ष को बचने का मौका ही नहीं देना।  पावरप्ले में सबसे बड़ा धमाका पावरप्ले यानी पहले छह ओवर- जहां मैच की दिशा तय होती है और यहीं वैभव सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुए हैं।  पहले 6 ओवरों में उन्होंने-  – 430 रन बनाए – औसत 61.42 – स्ट्राइक रेट 231.18 – 37 छक्के यानी हर ओवर में सिर्फ रन नहीं, बल्कि दबाव भी बढ़ता गया. दिलचस्प बात यह है कि यही वह चरण है जहां सबसे ज्यादा तेज गेंदबाज गेंदबाजी करते हैं और यहीं वे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।  मिडिल ओवर्स में भी नहीं रुकता तूफान पावरप्ले के बाद अक्सर बल्लेबाजों की रफ्तार कम होती है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी इस परिभाषा को भी चुनौती दे रहे हैं।  सातवें ओवर के बाद भी उनका स्ट्राइक रेट 235.38 बना हुआ है. इस चरण में उन्होंने 16 छक्के लगाए हैं और हर 4.06 गेंद पर एक छक्का निकाला है।  यानी उनका खेल किसी एक फेज पर निर्भर नहीं है- वह पूरे 20 ओवर का खतरा हैं. 44 गेंदबाज, 31 शिकार इस सीजन में वैभव ने अब तक 44 अलग-अलग गेंदबाजों का सामना किया है, और उनमें से 31 को छक्का जड़ चुके हैं।  यह आंकड़ा बताता है कि वह किसी एक टीम या किसी एक गेंदबाज पर निर्भर नहीं हैं. उनका आक्रमण सिस्टम के खिलाफ नहीं, बल्कि हर व्यक्तिगत गेंदबाज के खिलाफ चलता है।  कहानी सिर्फ छक्कों की नहीं 53 छक्कों में से 42 सिर्फ तेज गेंदबाजों के खिलाफ होना एक बड़ी कहानी कहता है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में अब 'सबसे मजबूत विभाग' भी सबसे बड़ा निशाना बन सकता है।  वैभव सूर्यवंशी ने साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ पासपोर्ट में लिखी होती है, मैदान पर नहीं. अब टी20 क्रिकेट का सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या कोई गेंदबाज उन्हें रोक पाएगा, या हर तेज गेंद सिर्फ उनके लिए एक और मौका बन चुकी है? बदल गया क्रिकेट का मिजाज सचिन का काम टीम को संभालना था, लेकिन वैभव का काम विरोधी टीम की गेंदबाजी को तहस-नहस करना है। सचिन को खुद को साबित करने के लिए सालों मिले, लेकिन आज के इम्पैक्ट प्लेयर वाले टी20 दौर में वैभव के पास सिर्फ 20 गेंदें होती हैं मैच का पासा पलटने के लिए।   

वैभव सूर्यवंशी ने खेली विस्फोटक पारी, लेकिन मामूली लक्ष्य तक ही सीमित रही Rajasthan Royals

नई चंडीगढ़  दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला करो या मरो का है। जो भी टीम आज का मैच जीतेगी वह 29 मई को गुजरात टाइटंस के साथ क्वालीफायर 2 खेलेगी जिसमें से दूसरा फाइनलिस्ट निकलेगा। आरसीबी पहले ही गुजरात टाइटंस को हराकर फाइनल में पहुंच चुकी है। RR VS GT Eliminator Pich Report: मुल्लनपुर में पहला पारी का औसतन स्कोर 214 रन है। पिच नंबर चार का प्रयोग किया जाएगा खेलने के लिए जोकि बैटिंग के अनुकूल है। ऐसे में आज भी हाईस्कोरिंग मुकाबला देखने को मिल सकता है। खासकर तब जब वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा जैसे धुरंधर बल्लेबाजों का आमना सामना हो रहा हो।

भारत का भविष्य है वैभव’, लेकिन टेस्ट से पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट जरूरी: गांगुली

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस युवा खिलाड़ी की हो रही है, वह हैं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी. अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को हैरान करने वाले इस युवा बल्लेबाज को लेकर अब पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने बड़ा बयान दिया है.  मीडिया से  इंटरव्यू में गांगुली ने साफ कहा कि वैभव अभी टेस्ट क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. उन्होंने BCCI और चयनकर्ताओं को संकेत देते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में प्रतिभा जरूर दिख रही है, लेकिन लाल गेंद के क्रिकेट में जगह बनाने के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन जरूरी है. गांगुली ने कहा- T20 क्रिकेट में उसे तुरंत शामिल किया जा सकता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में नहीं. उसे पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ज्यादा रन बनाने होंगे. हालांकि इस समय वह बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी है. 15 साल का लड़का जिस तरह दुनिया के गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी कर रहा है, वह अविश्वसनीय है. वह भारत का भविष्य है. दादा ने वैभव की बल्लेबाजी की जमकर तारीफ भी की. उनका मानना है कि इतनी कम उम्र में जिस आत्मविश्वास और निडर अंदाज के साथ वह खेल रहे हैं, वह भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है. क्या आक‍िब को मिलनी चाहिए जगह, गांगुली की दो टूक इंटरव्यू में गांगुली ने घरेलू क्रिकेट और चयन प्रक्रिया पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करने वाले आकिब नबी को अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय टीम में जगह मिलनी चाहिए थी. गांगुली ने कहा कि नबी ने रणजी सीजन में बेहतरीन गेंदबाजी की थी. हालांकि उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव के चयन का भी समर्थन किया. गांगुली के मुताबिक- प्रिंस यादव बेहद तेज गेंदबाज हैं और जब आपके पास रफ्तार होती है तो आपको ज्यादा समय तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इंतजार नहीं करवाना चाहिए. मुझे लगता है कि दोनों खिलाड़ियों को मौका मिलना चाहिए था.” गांगुली ने आधुनिक क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी ने क्रिकेट को अलग तरीके से सीखा था और उस दौर में किसी ने नहीं सोचा था कि T20 क्रिकेट इतना बड़ा फॉर्मेट बन जाएगा. उन्होंने र‍िकी पोंट‍िंग, कुमार संगकारा,  जो रूट, एल‍िस्टेयर कुक  जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि समय के साथ क्रिकेट और खिलाड़ियों की सोच दोनों बदलती रहती है. पूर्व कप्तान ने कहा कि T20 क्रिकेट अब हमेशा रहने वाला है और यह लगातार ऐसे खिलाड़ियों को पैदा करेगा जो आक्रामक क्रिकेट खेलेंगे और गेंद को सीधे स्टैंड्स में पहुंचाएंगे.

मेदवेदेव का क्ले पर संघर्ष जारी, फ्रेंच ओपन के पहले राउंड में फिर बाहर हुए रूसी स्टार

 पेरिस  रूस के स्टार टेनिस खिलाड़ी और पूर्व विश्व नंबर एक दानिल मेदवेदेव का फ्रेंच ओपन में निराशाजनक प्रदर्शन एक बार फिर जारी रहा। मंगलवार को छठी वरीयता प्राप्त मेदवेदेव को ऑस्ट्रेलिया के वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी एडम वाल्टन ने पांच सेटों तक चले रोमांचक मुकाबले में 6-2, 1-6, 6-1, 1-6, 6-4 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। रोलां गैरों की धीमी क्ले कोर्ट सतह पर मेदवेदेव का संघर्ष एक बार फिर साफ दिखाई दिया। यह नौ में से छठी बार है जब वह फ्रेंच ओपन के पहले दौर में ही हारकर बाहर हुए हैं। मुकाबले में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिले और दोनों खिलाड़ियों ने बारी-बारी से दबदबा बनाया। वॉल्टन ने की शानदार शुरुआत ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी वॉल्टन ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट आसानी से अपने नाम किया, लेकिन मेदवेदेव ने दूसरे सेट में जोरदार वापसी करते हुए केवल एक गेम गंवाया। हालांकि वह लय बरकरार नहीं रख सके और तीसरा सेट गंवा बैठे। चौथे सेट में फिर वापसी करने वाले मेडवेडेव निर्णायक सेट में दबाव नहीं झेल सके। विश्व रैंकिंग में 97वें स्थान पर मौजूद वॉल्टन ने पांचवें सेट में 4-4 की बराबरी पर मेदवेदेव की सर्विस तोड़ी और फिर शानदार होल्ड के साथ करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। यह किसी शीर्ष-10 में शामिल खिलाड़ी के विरुद्ध उनकी पहली जीत भी है। जीत के बाद वॉल्टन ने कहा कि पिछले साल सिनसिनाटी में मेदवेदेव के खिलाफ मिली जीत ने उन्हें आत्मविश्वास दिया था। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास था कि मैं यह कर सकता हूं। मैच में काफी उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन निर्णायक सेट में जिस तरह वापसी की, उस पर मुझे गर्व है। मोनफिल्स की भावुक विदाई वहीं स्थानीय खिलाड़ी गेल मोनफिल्स को भी पहले दौर में हमवतन खिलाड़ी ह्यूगो गैस्टन के विरुद्ध हार का सामना करना पड़ा। 2008 में सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाले मोनफिल्स का यह फ्रेंच ओपन में आखिरी मुकाबला रहा। 39 साल के मोनफिल्स अपने पसंदीदा कोर्ट फिलिप-चैटियर पर गैस्टन के विरुद्ध मैच जीतने के बहुत करीब थे। उन्होंने पहला और दूसरा सेट आसानी से 6-2, 6-3 से जीत लिया था। हालांकि, इसके बाद गैस्टन ने शानदार वापसी की और अगले दो सेट 3-6, 2-6 से अपने नाम कर लिए। आखिरी सेट में गैस्टन पूरी तरह हावी रहे और 6-0 से जीत हासिल कर ली। मैच के बाद एक खास ट्रिब्यूट वीडियो दिखाया गया, जिसमें राफेल नडाल, रोजर फेडरर, नोवाक जोकोविक, यानिक सिनर, कार्लोस अलकराज और स्टानिस्लास वावरिंका जैसे बड़े खिलाड़ियों के संदेश शामिल थे। इसके अलावा उनके फ्रेंच साथी गैस्केट, नोआ, गाइल्स साइमन, जो-विल्फ्रेड सोंगा और आर्थर फिल्स ने भी उन्हें सम्मान दिया। शीर्ष वरीय सबालेंका की शानदार शुरुआत महिला सिंगल्स में विश्व की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका ने स्पेन की जेसिका बूजास मानेरो को 6-4, 6-2 से शिकस्त देकर अपने अभियान की शुरुआत जोरदार तरीके से की। यह मुकाबला एक घंटे 15 मिनट तक चला। शीर्ष वरीयता प्राप्त सबालेंका ने कोर्ट फिलिप-चैट्रियर पर अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए ग्रैंड स्लैम में पहले दौर में लगातार 22वीं जीत दर्ज की। सबालेंका क्ले-कोर्ट सीजन में कुछ उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन के बाद पेरिस पहुंची थीं। सबालेंका ने ओपन एरा में 'सनशाइन डबल' हासिल करने वाली सिर्फ पांचवीं महिला बनकर इतिहास रचा था। सबालेंका ने पूरे मैच में दबदबा बनाए रखा। पहले सेट में 4-0 की बढ़त बनाने के बाद सबालेंका ने दूसरे सेट में भी तेजी से आगे बढ़ते हुए 5-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। उनका बैकहैंड कोर्ट पर बार-बार जोरदार तरीके से चला, और नेट पर बढ़ते आत्मविश्वास ने उनके खेल में एक नया आयाम जोड़ दिया। दूसरे सेट में भी इस स्पेनिश खिलाड़ी ने कुछ शानदार पल दिखाए, जिसमें एक बेहतरीन एंगल्ड बैकहैंड वाली और एक साहसी 'बैकहैंड डाउन द लाइन' शाट शामिल था, जिसने कुछ देर के लिए मैच के नतीजे को टाल दिया।

रोलां गैरो डेब्यू में इतिहास: भारतीय मूल के निशेश ने फ्रिट्ज को दी करारी शिकस्त

नई दिल्ली फ्रेंच ओपन 2026 में रविवार को 21 साल के भारतीय मूल के अमेरिकी टेनिस खिलाड़ी निशेश बसावरेड्डी ने बड़ा उलटफेर किया, जिसने टेनिस जगत को हैरान कर दिया। विश्व नंबर 9 और 7वीं वरीयता प्राप्त टेलर फ्रिट्ज को विश्व नंबर 148 निशेश ने हराकर अपने रोलां गैरो डेब्यू मैच में इतिहास रच दिया। उन्होंने कोर्ट सुजैन लेंगलेन पर 7-5, 7-6, 6-5, 6-1 से 4 सेट के मुकाबले में अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। साल 2000 में जैन-माइकल गैम्बिल के बाद इस क्ले-कोर्ट ग्रैंड स्लैम में किसी टॉप-10 खिलाड़ी को हराने वाले वो पहले अमेरिकी बन गए हैं। घुटने की चोट से वापसी कर रहे थे फ्रिट्ज दरअसल, विश्व नंबर- 9 के खिलाड़ी टेलर फ्रिट्ज घुटने की चोट के कारण दो महीने तक कोर्ट से बाहर रहने के बाद बहुत कम अभ्यास मैचों के साथ पेरिस पहुंचे थे, जहां उन्हें मैच पर अपनी पकड़ बनाने में संघर्ष करते हुए देखा गया और लगभग तीन घंटे की कड़ी टक्कर के बाद वह अपने हमवतन युवा खिलाड़ी से हार गए। वहीं, निशेश ने शुरुआत से ही अपना आत्मविश्वास दिखाया और प्रेशर वाले इस खेल में जीत हासिल कर इतिहास रचा। भारतीय मूल के इस युवा प्रतिभा के लिए ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि रही, जिन्होंने USTA की रोलां गैरो वाइल्ड कार्ड चैलेंज जीतकर पेरिस में अपना वाइल्डकार्ड स्थान पक्का किया था। बता दें कि बसावरेड्डी पेरिस में अपना सफर जारी रखेंगे, जहां अगले दौर में उनका मुकाबला एक और युवा अमेरिकी खिलाड़ी एलेक्स मिशेलसन से हो सकता है, जो पहले दौर में अलेक्सांद्र शेवचेंको का सामना कर रहे हैं। कौन हैं निसेश बसावरेड्डी? निशेश बसावरेड्डी, भारतीय मूल के अमेरिकी खिलाड़ी हैं, जिनका जन्म 2 मई 2005 को हुआ था। उनके माता-पिता 1999 में आंध्र प्रदेश से अमेरिका शिफ्ट हो गए थे। कैलिफोर्निया में जन्मे निशेश का जूनियर करियर शानदार रहा, जहां वह  ITF जूनियर रैंकिंग में विश्व नंबर 3 पर पहुंचे और उन्होंने 2022 जूनियर यूएस ओपन का बॉयज डबल्स खिताब जीता। पूर्व डबल्स वर्ल्ड नंबर 1 राजीव राम के मार्गदर्शन में, बसावरेड्डी ने साल 2024 में प्यूर्टो वालार्टा और टिब्यूरॉन में दो एटीपी चैलेंजर खिताब जीते। इसी साल उन्होंने सऊदी अरब में 'एटीपी नेक्स्टजेन फाइनल्स' में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने 2025 में ऑस्ट्रेलियन ओपन से अपने ग्रैंड स्लैम करियर की शुरुआत की थी। पहले दौर में उनका सामना दिग्गज नोवाक जोकोविच से हुआ, जहां पहले सेट में शानदार शुरुआत करने के बाद वह 6-4, 3-6, 4-6, 2-6 से मैच हार गए थे। जून 2025 में, वह एटीपी (ATP) रैंकिंग में शीर्ष 100 में शामिल हो गए और विंबलडन तथा यूएस ओपन के मुख्य ड्रॉ में खेले, लेकिन दोनों ग्रैंड स्लैम के पहले दौर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

सात्विक-चिराग की जोड़ी ने रोमांचक मुकाबले में दर्ज की जीत, अगले दौर में एंट्री

 सिंगापुर  स्टार भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू मंगलवार को पांचवीं वरीयता प्राप्त पुत्री कुसुमा वरदानी को सीधे गेम में हराकर सिंगापुर ओपन के दूसरे दौर में पहुंच गईं। महिला सिंगल्स में 30 वर्षीय सिंधू ने दुनिया की छठे नंबर की इंडोनेशियाई खिलाड़ी को 21-17, 21-18 से हराया। पूर्व विश्व चैंपियन सिंधू का अगला मुकाबला जापान की रिको गुंजी से होगा। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता पुरुष डबल्स जोड़ी भी शुरुआती दौर में चेन झी यी और प्रेस्ली स्मिथ की मलेशिया की दुनिया की 25वें नंबर की जोड़ी को 26-28, 21-15, 21-13 से हराकर अगले दौर में पहुंच गई। पुरुष सिंगल्स में आयुष शेट्टी हालांकि 65 मिनट तक चले मुकाबले में विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता विक्टर एक्सेलसन के विरुद्ध 21-11, 14-21, 12-21 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए। वहीं महिला सिंगल्स में युवा उन्नति हुड्डा भी पूर्व विश्व जूनियर चैंपियन और आठवीं वरीयता प्राप्त टोमोका मियाजाकी के हाथों 14-21, 10-21 से हारकर टूर्नामेंट से जल्दी बाहर हो गईं महिला डबल्स में भारत की कविप्रिया सेल्वम और सिमरन सिंघी भी 48 मिनट में पाउला लोपेज और लूसिया रोड्रिग्ज की स्पेन की जोड़ी से 21-18, 13-21, 5-21 से हारकर बाहर हो गईं। अश्विनी भट के और शिखा गौतम भी चांग चिंग हुई और यांग चिंग टुन की चीनी ताइपे की जोड़ी से 16-21, 11-21 से हार गईं।  

फुटबॉल का युग बदलने की तैयारी: 2026 विश्व कप में दिग्गजों की विदाई की चर्चा तेज

 नई दिल्ली  फुटबॉल के महाकुंभ फीफा विश्व कप 2026 में अब कुछ ही दिन शेष हैं और ओलिंपिक के बाद खेलों की दुनिया का यह सबसे बड़ा उत्सव इसके कुछ दिग्गज सितारों के लिए आखिरी हो सकता है। पांच-पांच विश्व कप खेल चुके गत चैंपियन अर्जेंटीना के स्टार लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो को हम इस टूर्नामेंट में उन्हें आखिरी बार अपने देश के लिए खेलते हुए देखेंगे। वहीं छोटे से देश क्रोएशिया को 2018 के विश्व कप में फाइनल तक पहुंचाकर सबको चौंकाने वाले लुका मोड्रिक भी उम्र और करियर के उस पड़ाव पर हैं कि शायद उनके लिए भी यह आखिरी विश्व कप होगा। 41 वर्षीय रोनाल्डो 23 साल से पुर्तगाल टीम में 41 वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने दो दशक से अधिक समय पहले 2003 में राष्ट्रीय टीम में पदार्पण किया था। वह राष्ट्रीय टीम के लिए सबसे अधिक गोल (143) के साथ दुनिया में सबसे ऊपर हैं। 2006 फीफा विश्व से अब तब वह व्यक्तिगत तौर पर अपनी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करते आए हैं, लेकिन अपनी टीम को यही एकमात्र बड़ा खिताब न दिला पाने की कसक हमेशा उनके मन में रही है। अब इसे इसे पूरा करना चाहेंगे। मेसी का सपना खिताब की रक्षा करना 2022 विश्व कप में अर्जेंटीना को खिताब दिलाने वाले लियोनेल मेसी इस बार 38 वर्ष की आयु में अर्जेंटीना के इस खिताब के बचाव के लिए मैदान पर उतरेंगे। मेसी फिलहाल अमेरिका में एमएलएस में इंटर मियामी टीम के लिए खेलते हैं, पर विश्व कप से ठीक पहले वर्कलोड के चलते और एमआरआई में उनके बाएं हेमस्ट्रिंग मांसपेशियों में अधिक दबाव की पुष्टि हुई है। यह चिंता की बात तो है पर वह अब आराम करेंगे और इस विश्व में तरोताजा होकर राष्ट्रीय टीम के लिए अपना शत प्रतिशत देंगे। क्रोएशिया का फिर लोहा मनवाएंगे लुका मिडफील्ड के दिग्गज और बैलन डी ओर विजेता मोड्रिक भी इस विश्व तक 40 साल की उम्र के करीब पहुंच चुके हैं। उनकी कप्तानी में क्रोएशिया 2018 के विश्व कप में फाइनल तक पहुंची थी। इस बार वह क्रोएशिया का संभवत: आखिरी बार नेतृत्व कर इस देश का फुटबॉल की दुनिया में एक बार फिर लोहा मनवाने का प्रयास करेंगे। कोच के भरोसे पर संन्यास से लौटे मैनुअल 2024 में ही जर्मन टीम से संन्यास ले चुके गोलकीपर मैनुअल नेयर पर कोच जुलियन नागेल्समैन ने भरोसा जताया तो उन्होंने संन्यास से वापसी की और कोच ने उन्हें टीम में शामिल किया। मैनुअल 2014 की विश्व विजेता टीम का भी हिस्सा थे। वहीं दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े स्टार टोटेनहम क्लब के पूर्व खिलाड़ी सोन ह्युंग-मिन का भी यह आखिरी विश्व कप हो सकता है। उन्होंने 2014 में पहला विश्व कप खेला था। पांच विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ी खिलाड़ी                          देश          कब से कब तक एंटोनियो कार्बाजल           मेक्सिको     1950 से 1966 लोथर मथाउस                जर्मनी        1982 से 1998 राफेल मार्केज                 मेक्सिको      2002 से 2018 लियोनेल मेसी                अर्जेंटीना      2006 से 2022 क्रिस्टियानो रोनाल्डो          पुर्तगाल      2006 से 2022 आंद्रेज गार्डैडो                  मेक्सिको     2006 से 2022

IPL 2026 एलिमिनेटर से पहले वैभव सूर्यवंशी बने ग्लोबल सेंसेशन, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

15 साल के वैभव सूर्यवंशी का क्रेज अब क्रिकेट की सीमाएं पार कर WWE तक पहुंच गया है. WWE सुपरस्टार ड्रू मैकइंटायर जिम में राजस्थान रॉयल्स (RR) की जर्सी पहनकर वर्कआउट करते नजर आए, जिसकी पीठ पर वैभव सूर्यवंशी का नाम लिखा था. ड्रू के 'Chosen One' कैप्शन ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी, जबकि राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग भी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने 'OMG!' लिखकर प्रतिक्रिया दी. इसके साथ ही अब वैभव के सामने IPL 2026 एलिमिनेटर की सबसे बड़ी परीक्षा है. बुधवार को न्यू चंडीगढ़ में राजस्थान रॉयल्स का मुकाबला सनराइजर्स हैदराबाद से होगा, जहां एक बार फिर सभी निगाहें इस किशोर बल्लेबाज पर टिकी रहेंगी. सबसे बड़ा खतरा वैभव! बेखौफ अंदाज में बल्लेबाजी करने वाले वैभव सूर्यवंशी इस सीजन गेंदबाजों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे हैं. पैट कमिंस, ईशान मलिंगा और साकिब हुसैन जैसे गेंदबाजों के खिलाफ भी वह आक्रामक रवैया अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे. अगर वैभव पावरप्ले में टिक गए तो कुछ ही ओवरों में मैच का रुख बदल सकते हैं. बल्लेबाजों का स्वर्ग है न्यू चंडीगढ़ एलिमिनेटर जिस मैदान पर खेला जाना है, वहां इस सीजन बल्लेबाजों का दबदबा रहा है। खेले गए चार मुकाबलों में से तीन में 220 से ज्यादा रन बने. इसी मैदान पर पंजाब किंग्स ने 254 रन का विशाल स्कोर भी खड़ा किया था. ऐसे में वैभव जैसे विस्फोटक बल्लेबाज के लिए यह मंच बिल्कुल मुफीद माना जा रहा है. अब प्लेऑफ में अग्निपरीक्षा ड्रू मैकइंटायर का वैभव की जर्सी पहनना इस बात का संकेत है कि 15 साल के बल्लेबाज का नाम अब वैश्विक खेल जगत में भी चर्चा का विषय बन चुका है. लेकिन असली चुनौती अब एलिमिनेटर में है, जहां राजस्थान रॉयल्स को जीत दिलाने की जिम्मेदारी काफी हद तक वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर के कंधों पर होगी. अगर वैभव का बल्ला चला, तो WWE स्टार का यह 'Chosen One' कैप्शन और भी ज्यादा चर्चा में आ सकता है. ड्रू मैकइंटायर कौन हैं? 40 साल के Drew McIntyre दुनिया के सबसे बड़े प्रोफेशनल रेसलिंग संगठन WWE के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं. उनका असली नाम एंड्रयू मैकलीन गैलोवे IV (Andrew McLean Galloway IV) है और वे स्कॉटलैंड के रहने वाले हैं.

पैट कमिंस की हैदराबाद के सामने रियान पराग की राजस्थान, किसकी होगी जीत?

नई दिल्ली  आईपीएल 2026 में आज एलिमिनेटर मुकाबला खेला जाएगा। इसमें पैट कमिंस की कप्तानी वाली सनराइजर्स हैदराबाद का सामना रियान पराग की राजस्थान रॉयल्सस से है। दोनों टीमों की टक्कर मुल्लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। हैदराबाद की टीम पॉइंट्स टेबल में तीसरे और राजस्थान की टीम चौथे नंबर पर थी। हैदराबाद बनाम राजस्थान हेड टू हेड आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स की अब तक 23 मुकाबले खेले गए हैं। इसमें सनराइजर्स को 14 जीत मिली है जबकि राजस्थान ने 9 मैचों को अपने नाम किया है। इस सीजन हुए दोनों मुकाबले में हैदराबाद ने राजस्थान को हराया है। आखिरी 5 मैचों में हैदराबाद का पलड़ा 5-0 से भारी है। इसी वजह से राजस्थान रॉयल्स के लिए मैच आसान नहीं होगा। आखिरी बार राजस्थान ने 2023 सीजन में हैदराबाद को हराया था। प्लेऑफ में दो बार भिड़ंत हो चुकी राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच आईपीएल के प्लेऑफ में भी टक्कर हो चुकी है। 2024 सीजन का दूसरा क्वालीफायर इन्हीं दोनों टीमों के बीच खेला गया था। उसमें सनराइजर्स हैदराबाद को जीत मिली थी। उससे पहले 2013 में भी दोनों टीमों के बीच एलिमिनेटर मुकाबला हुआ था। उस मैच में राजस्थान ने हैदराबाद को 4 विकेट के अंतर से हराया था। इस सीजन राजस्थान और हैदराबाद का रिकॉर्ड राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल 2026 की दमदार शुरुआत की थी। उसने अपने पहले चारों मैच जीते थे। फिर सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उसे हार मिली। 5वें से 12वें मैच के बीच टीम सिर्फ दो जीत हासिल कर पाई। हालांकि आखिरी दो मैच जीतकर उसने प्लेऑफ में जगह बना लिया। वहीं दूसरी तरफ सनराजर्स हैदराबाद को पहले चार मैचों में तीन हार मिली थी। फिर राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ ही लगातार 5 जीत का सिलसिला शुरू हुआ। तब से टीम ने 10 मैचों में 8 जीत हासिल की है।