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लश्कर आतंकियों की तलाश में सेना का मेगा सर्च ऑपरेशन, राजौरी के जंगलों पर आसमान से नजर

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों का आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन पिछले छह दिनों से जारी है. सूत्रों के अनुसार, 2 से 3 शीर्ष लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी जंगल के इलाके में छिपे हुए हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षाबलों ने गुरुवार सुबह पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि राजौरी के गंभीर मुगलान इलाके में कुछ आतंकियों को छिपे होने का इनपुट मिला था. इसके आधार पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा संयुक्त रूस आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है जो छठे दिन भी जारी है. सूत्रों का कहना है कि इस इलाके में 2 से 3 लश्कर के आतंकी छिपे हुए हैं। लेफ्टिनेंट जनरल ने किया सैन्य क्षेत्र का दौरा आतंकवाद विरोधी इस बड़े ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने बुधवार को खुद इस सैन्य क्षेत्र का दौरा किया था. उन्होंने अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों से मुलाकात की और कमान संभाल रहे अधिकारियों के साथ जारी काउंटर टेरर ऑपरेशन की रणनीतिक समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि शनिवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच सुबह करीब साढ़े 11 बजे भीषण मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घने जंगल वाले इलाके से खदेड़ दिया। इस बेहद घने जंगल क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए सेना द्वारा आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है. अत्याधुनिक ड्रोन और सैन्य हेलिकॉप्टरों के जरिए पूरे जंगल के कोने-कोने पर पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि छिपे हुए आतंकियों को भागने का कोई मौका न मिले।

EPFO का बड़ा बदलाव! अब ATM से निकाल पाएंगे PF का पैसा, जानिए कब और कैसे मिलेगा फायदा

 नई दिल्ली PF अमाउंट अब ATM से निकलेगा, पिछले काफी समय से इसकी चर्चा हो रही है. अगर ATM से पीएफ के पैसे निकलेंगे लगेंगे, तो एक नौकरीपेशा लोगों की इससे जुड़ी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। दरअसल, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान बड़ा ऐलान कर दिया है, उन्होंने कहा कि अगले महीने यानी जून से आप अपना PF अमाउंट UPI का इस्तेमाल कर ATM से निकाल पाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को पूरी तरह से डिजिटाइज किया जा रहा है, जिससे PF निकालना और भी आसान हो जाएगा, सरकार का लक्ष्य है कि पीएफ खाताधारकों को अपना ही पैसा निकालने के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और न ही लंबे-चौड़े फॉर्म भरने पड़ें। ATM और UPI से निकाल सकेंगे पैसे मनसुख मांडविया ने बताया कि एक नया सिस्टम सुनिश्चित किया गया है, जिसके तहत खाताधारक अपने कुल पीएफ फंड का 25% हिस्सा जमा रखकर बाकी 75% पैसा एटीएम (ATM) या यूपीआई (UPI) के जरिए जब चाहें तब निकाल सकेंगे. यह सुविधा अगले महीने से लागू करने की तैयारी है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि EPFO 2.0 और ऑटोमैटिक क्लेम प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है, जिससे क्लेम सेटलमेंट पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगा, पहले जो 10-12 कॉलम के फॉर्म भरने पड़ते थे, उस पेचीदा सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। WhatsApp चैटबॉट की सुविधा उन्होंने कहा कि पीएफ से जुड़ी जानकारियों को और आसान बनाने के लिए इसे WhatsApp चैटबॉट से जोड़ा जा रहा है. खाताधारक सिर्फ व्हाट्सऐप पर मैसेज करके अपने अकाउंट बैलेंस, ब्याज अमाउंट और बीमारी या शादी के लिए फंड विड्रॉल की पात्रता जैसी सारी जानकारियां तुरंत हासिल कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि मैसेज से लोग ये भी जान पाएंगे कि वो अभी कितना अमाउंट निकाल सकते हैं, पहले कब-कब निकाले थे, ये सारा व्हाट्सऐप पर मैसेज से कर्मचारियों को मिल जाएगा. पूरा सिस्टम डिजिटल में तब्दील हो जाएगा। कैसे निकलेगा ATM से पैसा? एटीएम और यूपीआई से पैसे निकालने की इस सुविधा को आधार से लिंक किया जाएगा, आपकी पहचान पूरी तरह डिजिटल तरीके से (आधार वेरिफिकेशन के जरिए) प्रमाणित होगी, जिससे बिना किसी कागजी कार्रवाई के तुरंत पैसा ट्रांसफर हो सकेगा। हालांकि अगर फटाफट यानी ATM से तुरंत पैसे निकलने लगेंगे तो फिर अधिकतर लोगों के PF अकाउंट खाली हो जाएंगे, क्योंकि उन्हें जब जरूरत होगी, तब पीएफ के पैसे निकाल लेंगे. इसपर एक्सपर्ट्स भी चिंता जता रहे हैं. जब पैसा निकालना इतना आसान हो जाएगा तो स्वाभाविक रूप से लोगों में इसे खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जिससे रिटायरमेंट फंड समय से पहले खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खुली छूट नहीं बनाया है. केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि आप चाहकर भी अपना पूरा PF अकाउंट खाली नहीं कर सकते हैं, कुल जमा राशि का 25% हिस्सा हमेशा पीएफ अकाउंट में लॉक रहेगा. आप केवल ऊपरी 75% हिस्से का ही इस्तेमाल कर पाएंगे। बता दें, पीएफ पर मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज तब सबसे ज्यादा फायदा देता है जब पैसे को लंबे समय तक छुआ न जाए, बार-बार पैसा निकालने से रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाला अंतिम फंड बहुत छोटा हो जाएगा।

हिमाचल में बड़ा अलर्ट! झील फटी तो 57 पुल समेत कई इलाके हो सकते हैं तबाह

 नई दिल्ली लाहौल-स्पीति के सिस्सू गांव में रहने वाले लोग अब शांतिपूर्ण पहाड़ी जीवन नहीं जी पा रहे हैं. अटल टनल खुलने के बाद यहां पर्यटकों की भारी भीड़ आ गई है, लेकिन गांव के ठीक ऊपर एक बड़ी समस्या पैदा हो रही है. 4,068 मीटर की ऊंचाई पर बनी घेपन झील हर साल बड़ा होती जा रही है. वैज्ञानिकों को डर है कि अगर यह झील फट गई तो सिस्सू गांव पर बहुत बड़ा खतरा आ सकता है. एकदम 2013 में केदारनाथ में आई आपदा की तरह।  सिस्सू गांव चंद्रा नदी के किनारे बसा है. अटल टनल से निकलते ही यह पहला बड़ा गांव है. कुछ साल पहले तक यहां शांति थी. लोग खेती और पशुपालन करते थे. लेकिन अक्टूबर 2020 में अटल टनल खुलने के बाद रोजाना हजारों गाड़ियां यहां से गुजरती हैं. पीक सीजन में 5000 गाड़ियां तक आती हैं।  DTE की रिपोर्ट के मुताबिक नदी किनारे अब बोटिंग, जिपलाइन, ऑफ-रोड वाहन और पर्यटक गतिविधियां चल रही हैं. गांव में होमस्टे और कैफे खुल गए हैं. लेकिन इस खूबसूरती के पीछे एक बड़ा खतरा छिपा है. गांव से करीब 11 किलोमीटर ऊपर हिमालय की घेपन झील (घेपांग घट) लगातार बढ़ रही है।  झील का आकार तेजी से बढ़ रहा है घेपन ग्लेशियर झील है. 1989 में इसका क्षेत्रफल सिर्फ 36.49 हेक्टेयर था. 2022 तक यह बढ़कर 101.30 हेक्टेयर हो गया है – यानी लगभग तीन गुना. वैज्ञानिकों के अनुसार, घेपन ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है. 1962 से अब तक ग्लेशियर 2.76 किलोमीटर पीछे हट चुका है. राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि यह झील अतिसंवेदनशील है. अगर झील फटी तो सबसे पहले सिस्सू गांव पर असर पड़ेगा।  वैज्ञानिकों ने 8 अलग-अलग स्थितियों का अध्ययन किया है. सभी में सिस्सू गांव रेड जोन में आता है. सबसे खतरनाक स्थिति में झील फटने के सिर्फ 21 मिनट में बाढ़ का पानी सिस्सू पहुंच सकता है. पानी की रफ्तार 43 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है. इस बाढ़ में सिर्फ पानी नहीं आएगा।  भारी मलबा, चट्टानें, पत्थर और ग्लेशियर के टुकड़े भी साथ आएंगे. इसकी चपेट में 34 बस्तियां, 204 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन, 57 पुल और 106 किलोमीटर सड़कें आ सकती हैं. मनाली-लेह हाईवे, अटल टनल और पूरा पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो सकता है. बाढ़ का असर चिनाब नदी के रास्ते जम्मू-कश्मीर तक पहुंच सकता है।  ग्लेशियर पिघलने के कारण वैज्ञानिक भानु प्रताप और अनिल कुलकर्णी जैसे विशेषज्ञ बताते हैं कि हिमालय का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. पहले ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरती थी, अब बारिश हो रही है. बारिश बर्फ को बहुत तेजी से पिघलाती है.  1962 के बाद से घेपन ग्लेशियर हर साल औसतन 53 मीटर सिकुड़ रहा है. झील का बढ़ता पानी ग्लेशियर को और तेजी से पिघला रहा है. यह एक साइकिल बन गया है जो लगातार तेज होता जा रहा है।  राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने झील को अतिसंवेदनशील घोषित किया है. NRSC, केंद्रीय जल आयोग, NCPOR और CDAC जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं. सिस्सू की कृत्रिम झील पर एक पायलट अलर्ट सिस्टम लगाया गया है, जिसमें सेंसर, कैमरा और सैटेलाइट आधारित चेतावनी व्यवस्था है. लेकिन यह टेस्टिंग फेज में है।  समस्या यह है कि गांव में अभी कोई पूरा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, सायरन, चेतावनी बोर्ड या स्पष्ट निकासी रास्ते नहीं हैं. जमीनी स्तर पर तैयारी काफी कमजोर दिख रही है. घेपन झील अकेली नहीं है. हिमाचल प्रदेश में 2016 में 805 ग्लेशियर झीलें थीं, जो 2022 तक बढ़कर 1,619 हो गईं।  पूरे हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर क्षेत्रफल तेजी से घट रहा है. जलवायु परिवर्तन के कारण नई-नई झीलें बन रही हैं, जो भविष्य में बड़े खतरे बन सकती हैं. घेपन झील सिस्सू गांव के लिए एक टाइम बम की तरह है. एक तरफ पर्यटन से हो रही कमाई, दूसरी तरफ बढ़ता पर्यावरणीय खतरा।  वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं और झीलें बढ़ रही है. स्थानीय लोगों को डर के साथ जीना पड़ रहा है. सरकार और वैज्ञानिकों को अब जल्दी से जल्दी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, निकासी योजनाएं और जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।  सिस्सू की कहानी पूरे हिमालय के लिए चेतावनी है. जलवायु परिवर्तन अब दूर की समस्या नहीं रहा- यह हमारे पहाड़ों, गांवों और जिंदगियों को सीधे प्रभावित कर रहा है. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो एक दिन यह खतरा हकीकत बन सकता है। 

सब्जियों की कीमतों में बड़ा खेल! तोरई कहीं ₹6 तो कहीं ₹60, हरी सब्जियों के रेट ने चौंकाया

नईदिल्ली हरी सब्जियों के रेट कहीं आसमान पर हैं तो कहीं जमीन पर। शहर वाले जहां हैरान हैं तो वहीं गांव और छोट कस्बे के लोग मौज काट रहे हैं। छोटी मंडियों में भिंडी 3 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा जबकि, तोरई 6 रुपये किलो बिक रही। हालांकि, यही सब्जियां छोटे कस्बों और गांव की फुटकर मंडियों में 10 रुपये किलो हैं तो दिल्ली और मुंबई में 40 से 80 रुपये किलो। सबसे पहले बात करते हैं कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की कप्तानगंज थोक मंडी की। यहां मंगलवार को तोरई 6 रुपये किलो बिकी, भिंडी सुबह 3 रुपये बिक रही थी, लेकिन दो घंटे बाद ही इसे 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा था। परवल इस मंडी में 100 रुपये में 5 किलो मिल रहा था। कुशीनगर के मथौली नगर पंचायत की फुटकर मंडी में हरी सब्जियों रेट जमीन पर आ गए हैं। मुंबई में हरी सब्जियों के दाम सुनकर रह जाएंगे दंग अब मुंबई का रेट भी सुन लीजिए। कुशीनगर जिले के दीनानाथ रस्तोगी एक सब्जी की दुकान मुंबई में है। उन्होंने हिन्दुस्तान को जो फुटकर रेट बताया, उन्हें सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। जिस भिंडी को कुशीनगर में 2 रुपये किलो पर भी कोई नहीं पूछ रहा, वही मुंबई में 60 से 80 रुपये किलो बिक रही है। 15 रुपये किलो वाला करेला मुंबई में 80 रुपये फुटकर में और थोक में 60 रुपये किलो है। यहां 10 रुपये वाला बैगन भी वहां 60 रुपये किलो है। ग्वारफली 60, नेनुआ यानी तोरई 60 रुपये बिक रहा है। जो परवल कुशीनगर में 20 रुपये किलो था, वह मुंबई में 60 रुपये किलो है। दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट शिवसागर दिल्ली में सब्जी की दुकान लगाते हैं। उनके मुताबिक दिल्ली की आजादपुर मंडी में मंगलवार को भिंडी 16 रुपये, करेला 4 रुपये, गोभी 20 रुपये, तोरई 40 रुपये किलो बिकी। दूसरे नंबर की तोरई 6 रुपये और एक नंबर तोरई 13 -18 रुपये किलो थी। दूसरी ओर लौकी 5 रुपये, टिंडा 13 से 15 रुपये, मटर 40 से 55 रुपये, खीरा 24 रुपये, ग्वार फली 20 रुपये, ककोड़ा 45 रुपये और मूली 10 रुपये प्रति किलो के रेट से बिकी। दिल्ली में हरी सब्जियों के थोक और फुटकर रेट दिल्ली में फुटकर में खीरा 50 रुपये किलो और गोभी 80 रुपये किलो बिक रही हैं। तोरई भी 60 रुपये और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रही है। करेला 40 रुपये किलो और मटर 30 रुपये में 250 ग्राम यानी 120 रुपये किलो बिक रही है। टिंडा भी 100 से 120 रुपये किलो है। थोक और फुटकर रेट में क्यों है इतना अंतर सब्जी बिक्रेता शिवसागर बताते हैं कि मंडी से रेहड़ी तक सब्जियों को लाने में ढुलाई पहले की तुलना में अब अधिक लग रही है। कच्चा सौदा होने के कारण 10 प्रतिशत सब्जियां शाम तक खराब हो जाती हैं। ग्राहक को एक नंबर का माल चाहिए ऐसे में सब्जियों की छंटाई होती है। उन्होंनें बताया कि अगर 10 किलो तोरई मंडी से 13 रुपये के हिसाब से लाते हैं तो 130 रुपये पड़ती है। माल भाड़ा, दुकान का किराया और अपनी मेहनत जोड़ लें तो यह कुल 180 रुपये ही हो जाएगी। धनिया-मिर्चा जिसे मुफ्त समझते हैं, वह भी फ्री नहीं मिलते अब इसकी छंटाई करें तो मुश्किल से 6 किलो की तोरई एक नंबर की निकलेगी। यानी अब इसी खरीद रेट करीब 30 रुपये हो जाएगी। इसी तरह का नियम सभी हरी सब्जियों पर लागू होता है। वहीं, दीनानाथ रस्तोगी बताते हैं कि मुंबई में कीमतें थोक में भी बहुत अधिक हैं और मार्जिन कम है, ऊपर से मुफ्त धनिया-मिर्चा देना पड़ता है। इनका भी रेट इन्हीं सब्जियों पर रखने की मजबूरी है।

गर्मी से फिलहाल राहत नहीं, 29 मई के बाद बदलेगा मौसम; आंधी-तूफान की चेतावनी

नईदिल्ली  दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार 28 मई तक उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान में कोई बड़ी कमी आने की संभावना नहीं है। इसके बाद 29 से 31 मई के बीच तापमान में छह से आठ डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि यह राहत पूरी तरह से नहीं होगी, क्योंकि ‘नौतपा’ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। नौतपा अर्थात साल के वे नौ सबसे गर्म दिन होते हैं। यह अवधि मई के अंत में शुरू होकर जून के पहले सप्ताह तक की होती है। इस समय सूर्य भूमध्य रेखा के काफी करीब होता है और कर्क रेखा की ओर बढ़ता है, जिसके कारण मैदानी इलाकों का तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। दूसरी ओर एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ जारी है, साथ ही 28 मई, 2026 से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से उत्तर-पश्चिमी भारत के कई राज्यों में धूल भरी आंधी, हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। फिलहाल 28 मई तक देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी से राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आज, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में लू या हीटवेव चलने की आशंका जताई गई है। इन राज्यों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, विदर्भ और पश्चिम राजस्थान में भीषण लू चलने का अंदेशा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रह सकता है। दोपहर के समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं पश्चिम बंगाल में गंगा के तटीय इलाकों, कोंकण-गोवा, सौराष्ट्र-कच्छ और तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा कराईकल के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम के बने रहने की आशंका है। उमस के कारण लोगों को अधिक पसीना और बेचैनी महसूस हो सकती है। समुद्री क्षेत्रों में नमी बढ़ने से गर्मी और ज्यादा परेशान करेगी। जबकि, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में रात के समय भी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में ‘वार्म नाइट’ की स्थिति रहने की आशंका जताई है। इसका मतलब है कि रात का तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, जिससे लोगों को नींद और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। क्या दिल्ली-एनसीआर में भीषण लू से मिलेगी राहत? दिल्ली-एनसीआर में 26 और 27 मई को भी गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। मौसम विभाग ने भीषण लू के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अधिकतम तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 29 से 32 डिग्री के बीच रहने का पूर्वानुमान है। दिनभर आसमान साफ रहेगा, जिससे धूप और ज्यादा तेज महसूस होगी। गर्म हवाओं के कारण लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है। विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते 28 और 29 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में; 28, 30 और 31 मई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में; और 28 तथा 31 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ बारिश व 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं के 70 किमी प्रति घंटे में तब्दील होने के आसार हैं। इन राज्यों में तापमान में गिरावट आएगी और तपिश से राहत मिलने की संभावना है। कई राज्यों में आंधी और बारिश के आसार वर्तमान में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम तेजी से बदल रहा है। बिहार, झारखंड, कर्नाटक और कई दक्षिणी राज्यों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरल और पश्चिम बंगाल में भी गरज के साथ बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े न होने की अपील की है। पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश का सिलसिला जारी है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। चेरापूंजी में सात सेमी और अगरतला में आठ सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं आज, 26 मई, 2026 को भी असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। यहां बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी इन राज्यों में भारी बारिश की आशंका जताई है। लोगों को नदी और पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की गई है। दक्षिण भारत में भी बदलेगा मौसम केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बरस सकते हैं बादल। विभाग ने यहां बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम भी बना रहेगा। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाएं चलने के आसार हैं। समुद्र में हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। मानसून की आगे बढ़ने की स्थिति दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। … Read more

24 परगना से मालदा तक कार्रवाई, बकरीद से पहले घुसपैठियों पर शिकंजा

कलकत्ता एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं तो दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में हलचल मची हुई है. कई स्टेट बॉर्डर के पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े ग्रुप इकट्ठा होने लगे हैं जो अपने वतन वापस जा रहे हैं।  अपने वतन लौट रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासी            एक बांग्लादेशी प्रवासी महिला रोजीना बीबी ने बताया कि वो डरी हुई हैं. उन्हें कहा, 'हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे, क्योंकि इलाज की प्रक्रिया लंबी चली, इसलिए परिवार गैर-कानूनी तौर पर यहीं रह गया. लेकिन नए कानूनी आदेश ने पूरी स्थिति ही बदल दी है. नए निर्देशों के तहत सरकारी कार्रवाई के डर से उनके मकान मालिक ने हाल ही में उनसे घर खाली करने को कहा जिससे उनके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।    बंगाल सरकार का सख्त एक्शन पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. वो गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से फायदा उठा रहे हैं. उन्हें नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके और मतदाता के रूप में पंजीकृत करके, यहां उनके वोट मांगे जा रहे थे… ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा. गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं… अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।  हकीमपुर चेक पॉइंट पर प्रवासियों की भीड़                     उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते है।  दलाल की मदद से आए भारत              हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो बच्चों के साथ बैठीं 36 वर्षीय सबीना खातून ने बताया कि सालों पहले वह दलालों के जरिए गैर-कानूनी तौर पर भारत में दाखिल हुई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली. और उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके RG कर अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया था. अब नए कानून ने उन्हें एक दिल तोड़ने वाले मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. क्योंकि उसका पति एक भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकता. सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं. "सतखिरा में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे," सबीना अपने बच्चों की ओर देखते हुए आंखों में आंसू भरकर कहती है. उसका सवाल है, 'क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?' बॉर्डर चेकपॉइंट के पास जमा हुई भारी भीड़ बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है. इसके साथ ही होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचती नजर आ रही है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।  1. अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़े निर्देश दिए हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में 'होल्डिंग सेंटर' बनाए गए हैं. पकड़े गए संदिग्ध घुसपैठियों को जेल भेजने के बजाय 30 दिनों तक इन सेंटर्स में रखकर उनकी पहचान और बायोमेट्रिक जांच की जाएगी. इसके बाद उन्हें बीएसएफ (BSF) को सौंपकर उनके देश वापस भेजा जाएगा. डर के कारण कई घुसपैठिए वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे हैं।  2. सीएए (CAA) के तहत नागरिकता: बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए सीएए (CAA) सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं. इन सेंटर्स के माध्यम से उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।  3. 5 रुपये में 'माछ-भात' योजना और नई पाबंदियां: चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करते हुए, नई सरकार ने पूरे राज्य में 400 कैंटीन खोलने का फैसला किया है, जहाँ 5 रुपये में मछली-चावल (माछ-भात) मिलेगा. इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के 1 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।  4. टीएमसी (TMC) नेताओं पर जनता का आक्रोश: वसूली, भ्रष्टाचार और बाहुबल के आरोपों के चलते टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम लोगों में भारी गुस्सा है. कुछ नेताओं के घरों से भारी मात्रा में कैश मिला है, तो कई नेताओं को जनता द्वारा पीटे जाने और कोर्ट में 'चोर-चोर' के नारे लगने की खबरें हैं।  5. टीएमसी में भारी टूट और बगावत की अटकलें: टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के दो विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए, जिससे टीएमसी में बड़ी बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि 60 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं और टीएमसी के 12 से 20 सांसद एक साथ बीजेपी में जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचा जा सके।  जो CAA के दायरे से बाहर हैं, उन्हें माना जाएगा घुसपैठिया     बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी.  इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं। 

CM बनने के बाद पहली बार PM मोदी से मिले विजय, सियासी गलियारों में बढ़ी चर्चा

 नई दिल्ली तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री, जोसेफ विजय अपनी कुर्सी संभालने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं. इस मुलाकात में उन्होंने प्रधानमंत्री से तमिलनाडु की उन मांगों को लेकर बात की जो केंद्र सरकार के सामने काफी लंबे समय से पेंडिंग हैं. विजय, तमिलनाडु के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं. उनकी मुलाकात का पूरा एजेंडा तो सामने नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री के अलावा और भी कई राजनीतिक हस्तियों से मिल सकते हैं। तमिलनाडु हाउस पहुंचे विजय दिल्ली पहुंचने के बाद विजय सबसे पहले, सेंट्रल दिल्ली में तमिलनाडु हाउस पहुंचे. प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात शाम 4 बजकर 30 मिनट के लिए शिड्यूल थी. शाम को प्रधानमंत्री से मिलने विजय सेवा तीर्थ पहुंचे. वहां करीब 25 मिनट तक दोनों की मीटिंग चली. इस मीटिंग में विजय और पीएम मोदी की बातचीत के बारे में डिटेल्स सामने आने का अभी इंतजार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर दी थी बधाई विजय का सिनेमा सुपरस्टार से, पॉलिटिक्स का हीरो बनना बड़ी खबर थी. जब उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बधाई दी थी. पीएम के एक्स हैन्डल से शेयर हुए पोस्ट में लिखा था, 'थिरु सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बधाई. उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं. केंद्र सरकार लोगों का जीवन बेहतर करने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी। दो साल पहले ही अपनी पार्टी TVK के साथ विजय ने राजनीति में एंट्री ली थी. तमिलनाडु चुनावों में शानदार जीत के बावजूद उनके पास बहुमत की कमी थी जिसके चलते उनका मुख्यमंत्री बन पाना लगातार खबरों में था. लेकिन की दशकों के बाद राज्य में तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन की सरकार चला रहे विजय, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही लगातार एक्शन में नजर आ रहे हैं।

समान नागरिक संहिता पर असम ने उठाया बड़ा कदम, विधानसभा में बिल पास

गुवाहाटी असम विधानसभा चुनाव ने यूनिफॉर्म सिविल कोड ( समान नागरिक संहिता ) बिल को पास कर दिया है। इसी के साथ देश में उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम तीसरा राज्य बन गया है। जहां की विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल काेड बिल को पास किया है। बीजेपी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में यूनिफॉर्म सिविल काेड लागू करने का वादा किया था। बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद सीएम बने हिमंत बिस्वा सरमा ने पहली कैबिनेट में यूसीसी बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी। असम में बहुविवाह के साथ लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का प्रवाधान किया गया है। UCC संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है : सीएम हिमंता ‘समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- प्रस्तावित कानून विपक्ष के बीजेपी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 44 की नींव पर आधारित है. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, समान नागरिक संहिता का लंबा इतिहास है. इसकी मांग सबसे पहले कांग्रेस ने 1925 में की थी. 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका सुझाव दिया था. वही कांग्रेस आज इसका विरोध कुरान और शरीयत के नजरिए से कर रही है, न कि हिंदू, ईसाई या आदिवासी दृष्टिकोण से। कांग्रेस केवल एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है : सीएम हिमंता हिमंता ने कहा- कांग्रेस समान नागरिक संहिता का विरोध कर रही है. वह सभी जातियों, पंथों और धर्मों का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि केवल एक विशेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है. कांग्रेस असम की भौगोलिक विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करती. मुख्यमंत्री ने कहा, आज की कांग्रेस को देखकर बहुत दुख और पीड़ा होती है. हमारे वक्तव्यों में सभी धर्मों और सभी लोगों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए. मुझे लगता है कि कांग्रेस को सांप्रदायिक पार्टी में बदलने के बजाय भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा का पालन करना चाहिए। असम यूसीसी बिल की बड़ी बातें:     शादी-तलाक का अनिवार्य पंजीकरण: सभी शादियों और तलाक का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा न करने पर जुर्माने का प्रावधान है     विवाह की न्यूनतम आयु: आदिवासियों को छोड़कर सभी धर्मों के लिए लड़के की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल तय की गई है।     धोखे से शादी पर सजा: पहचान छिपाकर, धोखे या जबरदस्ती से शादी करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है।     बहुविवाह पर प्रतिबंध: सभी धर्मों में एक से अधिक शादियां करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है। विवाहित रहते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।     लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, संबंध टूटने पर भी सरकार को जानकारी देनी होगी। लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को संपत्ति का कानूनी अधिकार मिलेगा।     महिलाओं को समान अधिकार: सभी महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा और माता-पिता की संपत्ति में बेटी का भी पूरा हक होगा। इसके अलावा, छोटे बच्चों (5 वर्ष से कम) की कस्टडी का अधिकार आमतौर पर मां को दिया गया है।     आदिवासी समुदायों (ST) को छूट: राज्य की अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को इन नए यूसीसी नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है। वे अपनी पारंपरिक रूढ़ियों और सामुदायिक कानूनों का पालन करना जारी रख सकते हैं। (नोट: उत्तराखंड और गुजरात ने भी इसी तरह के नियम बनाए हैं। असम तीसरा राज्य है जिसकी विधानसभा में यूसीसी पास हुआ है।) यूसीसी विधेयक की मूल बातें 154 पन्नों के इस बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य विवाह और तलाक़, उत्तराधिकार, लिव-इन रिश्तों से संबंधित क़ानूनों को नियंत्रित और विनियमित करना है और इससे जुड़े मामलों का संचालन करना है। असम सरकार ने इस बिल के संदर्भ में एक बयान जारी कर कहा, "अगर यह बिल पास हो जाता है, तो धोखाधड़ी को रोकने के लिए सभी शादियों और तलाक़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हो जाएगा. जोड़ों को समारोह के 60 दिनों के भीतर उप-रजिस्ट्रार के समक्ष विवाह ज्ञापन प्रस्तुत करना होगा। विवाह संबंधी प्रावधानों के तहत, यह विधेयक एक विवाह को अनिवार्य बनाता है और दूल्हों के लिए 21 वर्ष और दुल्हनों के लिए 18 वर्ष की एक समान क़ानूनी आयु निर्धारित करता है। विधेयक में कहा गया है, "यह प्रस्तावित क़ानून रीति-रिवाजों की पूरी आज़ादी देकर सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करता है. इसके तहत शादियाँ किसी भी मौजूदा धार्मिक समारोह या रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न की जा सकती हैं. इनमें वैदिक विवाह, अहोम चकलोंग, सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह, पवित्र मिलन और आनंद कारज शामिल हैं। अतुल बोरा ने पेश किया था बिल असम की विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने पेश किया था। यूसीसी में अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। वे 'पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों' को करती रहेंगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड चार विषयों को कवर करेगा। इसमें शादी की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार, और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामले शामिल हैं। यह सभी धर्मों पर लागू होगा। जब हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली सरकार ने इस बिल को पेश किया था तो विपक्ष ने विरोध किया था। यूसीसी बीजेपी का बड़ा वादा था, जिस सीएम सरमा ने पूरा कर दिया है।  

राशन कार्ड धारकों को बड़ा फायदा: सरकार ने स्कीम में किए अहम सुधार, करोड़ों परिवारों को राहत

 नई दिल्‍ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अहम फैसला हुआ है. कैबिनेट के इस फैसले से राशन लेने वाले 80 करोड़ लोगों पर सीधा असर पड़ेगा.  सरकार ने राशन व्यवस्था (PDS- पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला किया.  इसके लिए 'सार्थक-पीडीएस' (SARTHAK-PDS) योजना शुरू की गई है.  इस पूरी योजना पर करीब 25,530 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजना के तहत सरकार हर महीने 80 करोड़ लोगों को राशन दे रही है. अब इस स्‍कीम को सही से चलाने के लिए कैबिनेट ने SARTHAK PDS योजना जारी रखने की मंजूरी दी है और इसके तहत कुछ बड़े सुधार किए हैं, जिसका लाभ गरीब परिवारों को मिलेगा. इन सुधारों से राज्‍यों को सपोर्ट देने से लेकर राशन की चोरी रोकने जैसी चीजें शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि इस योजना का मकसद देश की पब्लिक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सिस्‍टम (PDS) यानी राशन व्यवस्था को ज्यादा मजबूत, आधुनिक और पारदर्शी बनाना है. इसके लिए केंद्र सरकार ने ₹25,530 करोड़ का केंद्रीय आवंटन मंजूर किया है. इस स्‍कीम के तहत तीन खास बदलाव करने की बात कही गई है। योजना के तहत तीन खास बदलाव राज्‍यों की राशन ढुलाई में मदद करना: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कैबिनेट में बड़ा फैसला लेते हुए कहा गया है कि राज्‍यों की आर्थिक मदद की जाएगी. सरकार राज्‍यों की एजेंसियों को खाद्यान को एक राज्‍य के भीतर गोदामों से दुकानों तक पहुंचाने के लिए आर्थिक सहायता देगी. इससे ट्रांसपोर्ट कॉस्‍ट कम होगी और गरीबों तक राश समय पर पहुंच सकेगा. दूरदराज के इलाकों में इसका सबसे ज्‍यादा लाभ होगा। फेयर प्राइस शॉप: इसका मतलब है कि सरकार राशन की दुकानों को भी सपोर्ट देगी. अश्विनी वैष्‍णव ने कहा कि लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी, जो काफी कम थी और अब राशन डीलरों को डिजिटल उपकरण, बेहतर स्‍टोरेज और संचालन के लिए सहायता मिलेगी. इससे दुकानों की वर्क सिस्‍टम मजबूत होगा और राशन डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में गड़बड़ी कम होगी. राशन दुकानदारों को आर्थिक राहत भी मिल सकती है। तीसरा बड़ा बदलाव: कैबिनेट में तीसरा सुधार पब्लिक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सिस्‍टम (PDS) का मॉर्डनाइजेशन है. सरकार राशन की व्‍यवस्‍था को मॉर्डनाइज करने जा रही है और इसे टेक्‍नोलॉजी बेस्‍ड बनाने जा रही है. इसमें ऑटोमेशन, डिजिटल ट्रैकिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, स्‍मार्ट डिवाइस और ट्रांसपैरेंसी टूल शामिल है. इससे चोरी, ब्‍लैकमार्केटिंग कम होगी और जरूरतमंदों तक इसका सीधा लाभ मिलेगा। बता दें सरकार का उद्देश्य वन नेशन-वन राशन कार्ड जैसी व्यवस्थाओं को भी ज्यादा प्रभावी बनाना है, ताकि देशभर में राशन वितरण अधिक सीमलेस और ट्रांसपैरेंसी हो सके. इसका करोड़ों लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। 

Middle East में नया तनाव, ट्रंप की मांग पर अमेरिका और सऊदी आमने-सामने

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब एक नई जंग पर्दे के पीछे शुरू होती दिख रही है. इस बार मामला सीधे वॉशिंगटन और उसके सबसे पुराने अरब सहयोगी सऊदी अरब के बीच का है. वजह बनी है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह नई रणनीति, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ दिया। 25 मई को ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए एक बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी भी शांति समझौते का हिस्सा बनने के लिए मुस्लिम देशों को एक साथ अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने होंगे. ट्रंप ने खास तौर पर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान का नाम लेते हुए इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही। लेकिन ट्रंप की यह अपील खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब को बिल्कुल पसंद नहीं आई. कुछ ही घंटों बाद रियाद की तरफ से संकेत दिया गया कि सऊदी का पुराना रुख नहीं बदला है. सऊदी अधिकारियों ने साफ कहा कि जब तक फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन के लिए "स्पष्ट रास्ता" तय नहीं होता, तब तक इजरायल के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं। कई अरब देशों ने इजरायल संग स्थापित किए रिश्ते इस प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि गाजा युद्ध के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति पहले जैसी नहीं रही. 2020 में जब अब्राहम अकॉर्ड्स हुए थे, तब कई अरब देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे. बाद के दौर में सऊदी अरब ने भी इजरायल के साथ संबंध स्थापित करने की कोशिश की। हालांकि, इस बीच गाजा से हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया और फिर एक बड़ी जंग शुरू हो गई. यही वजह रही कि सऊदी-इजरायल के बीच रिश्ते स्थापित नहीं हो पाए, लेकिन मौजूदा हालात में सऊदी अरब किसी जल्दबाजी में कदम उठाने के मूड में नहीं दिख रहा। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सऊदी की नाराजगी यह विवाद सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है. इसके पीछे होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता तनाव भी बड़ा कारण है. मई की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने "प्रोजेक्ट फ्रीडम" नाम से एक सैन्य मिशन शुरू करने की कोशिश की थी. इसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि ईरान वहां अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने इस ऑपरेशन की घोषणा खाड़ी सहयोगियों से पूरी सहमति लिए बिना कर दी. इससे सऊदी नेतृत्व नाराज हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी सेना को अपने एयरस्पेस और सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया. प्रिंस सुल्तान एयरबेस से अमेरिकी उड़ानों पर रोक लगा दी गई. इसके बाद अमेरिकी ऑपरेशन को भारी झटका लगा और "प्रोजेक्ट फ्रीडम" सिर्फ 36 घंटे के भीतर ठप पड़ गया। अब सोच-समझकर फैसला लेगा सऊदी अरब! सऊदी अरब अब अमेरिका की हर रणनीति का आंख बंद करके समर्थन नहीं करना चाहता. इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान का सीधा खतरा है. तेहरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर किसी खाड़ी देश ने अमेरिकी या इजरायली सैन्य कार्रवाई के लिए अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने दिया, तो उसे भी जवाबी हमले का सामना करना पड़ेगा। 2019 में सऊदी अरब के अबकैक और खुरैस तेल प्लांट्स पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले अब भी रियाद के लिए बड़ी चेतावनी बने हुए हैं. यही कारण है कि सऊदी नेतृत्व किसी सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहता है. इसके अलावा सऊदी अरब खुद को इस्लाम की सबसे पवित्र जगहों मक्का और मदीना का संरक्षक मानता है. ऐसे में फिलिस्तीन मुद्दे को नजरअंदाज करके इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करना उसके लिए आसान नहीं है. गाजा युद्ध के बाद अरब देशों की जनता में इजरायल के खिलाफ गुस्सा भी काफी बढ़ा है। उधर ईरान इस पूरी घटना को अपने लिए रणनीतिक मौके की तरह देख रहा है. अमेरिका जहां एक बड़ा एंटी-ईरान गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान खाड़ी देशों और वॉशिंगटन के बीच बढ़ती दूरी का फायदा उठाने में लगा है. विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की "अब्राहम अकॉर्ड्स फर्स्ट" वाली रणनीति ने उल्टा असर किया है. इससे अमेरिका के सहयोगी देश ही असहज हो गए हैं और वे अब अपने सुरक्षा हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।