samacharsecretary.com

किलर रोबोट नहीं, AI का खुद से सीखना चिंता की वजह; ओबामा ने चेताया

वाशिंगटन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनियाभर में बहस चल रही है. कोई इसे फ्यूचर की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी बता रहा है, तो कोई इससे जॉब्स और इंसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama ने AI को लेकर अपनी चिंता बताई है. ओबामा का कहना है कि एआई कंपनियों के मार्केट वैल्यूएशन में हाइप हो सकता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि एआई की टेक्नोलॉजी भी ओवरहाइप्ड है. आइए जानते हैं इसके बारे में. उन्होंने AI से ह्यूमैनिटी खत्म होने की बात से भी इनकार नहीं किया है और ये बेहद डरावना है।  Obama के समय में ही बनी थी AI पर रिपोर्ट ओबामा ने बताया कि उनके राष्ट्रपति रहते 2015-16 के आसपास उनकी एडमिनिस्ट्रेशन ने एआई के सोशल, इकोनॉमिक और एथिकल इम्पैक्ट को समझने के लिए एक कमीशन बनाया था. इस कमीशन ने AI को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट भी तैयार की थी।  ओबामा के मुताबिक इसके बाद आई एडमिनिस्ट्रेशन ने इस रिपोर्ट को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया. यानी AI को लेकर जिन सवालों पर उस समय चर्चा शुरू हुई थी, वो अब और ज्यादा बड़े हो चुके हैं।  अब AI खुद सीख रहा है एआई के तेजी से आगे बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में से एक रिसर्सिव लर्निंग है. आसान भाषा में समझें तो AI अब सिर्फ इंसानों से ट्रेनिंग लेकर आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि खुद भी सीखने लगा है।  ओबामा के मुताबिक कुछ समय पहले तक एआई मॉडल्स की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा इंसानों के इनपुट का था. लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीर बदल गई और यह बैलेंस करीब 50-50 तक पहुंच गया. यानी अब AI को आगे बढ़ाने में ह्यूमन ट्रेनिंग के साथ उसका खुद से सीखना भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।  आने वाले समय में 90% खुद सीखेगा AI? ओबामा का अनुमान है कि आने वाले समय में एआई की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा सेल्फ-लर्निंग का हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो AI डेवलपमेंट की स्पीड आज के मुकाबले काफी ज्यादा तेज हो सकती है।  उन्होंने एआई की इस ग्रोथ को हॉकी स्टिक जैसी ग्रोथ बताया. इसका मतलब है कि शुरुआत में ग्रोथ धीरे होती है, लेकिन एक पॉइंट के बाद इसकी स्पीड अचानक बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है।  किलर रोबोट नहीं, ये है असली डर एआई के खतरे की बात होते ही किलर रोबोट्स और इंसानों को खत्म करने वाली मशीनों की चर्चा शुरू हो जाती है. ओबामा के मुताबिक ऐसा खतरा पूरी तरह जीरो नहीं है, लेकिन इसकी संभावना कम है.उनकी असली चिंता AI मिसअलाइनमेंट को लेकर है. यानी एआई सिस्टम ऐसा गोल तय कर ले जो इंसानों के इरादों से अलग हो।  इसके लिए AI का कॉन्शियस होना या इंसानों से नफरत करना जरूरी नहीं है. अगर एआई खुद से फैसले लेने लगे और उसके गोल्स इंसानों के गोल्स से अलग हो जाएं, तो बड़ी समस्या पैदा हो सकती है. यही वजह है कि एआई के तेज विकास के साथ यह सवाल भी जरूरी होता जा रहा है कि आखिर इसे इंसानों के कंट्रोल और गोल्स के साथ कैसे जोड़ा जाए। 

ट्रंप-शी जिनपिंग की मुलाकात तय, अमेरिका दौरे में इन मुद्दों पर होगी चर्चा

बीजिंग  चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की सरकारी यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर हो रही है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि शी 23 सितंबर को वाशिंगटन पहुंचेंगे। वहां उनकी ट्रंप से बड़ी बैठक होगी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, शी ज्वाइंट बेस एंड्रयूज के हवाई अड्डे पर उतरेंगे। ट्रंप खुद वहां जाकर उनका स्वागत करेंगे। यह बहुत कम होता है। आमतौर पर ट्रंप विदेशी मेहमानों से वाइट हाउस में ही मिलते हैं। बता दें कि दोनों नेता इससे पहले मई में मिले थे। तब ट्रंप बीजिंग गए थे। दोनों देशों ने अपने रिश्ते सुधारने की बात की थी। ये दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। इस बड़ी बैठक से पहले दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी अंतिम तैयारी को लेकर बातचीत कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसमें टैरिफ का मुद्दा भी शामिल है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बात करेंगे। दोनों नेताओं की मुलाकात बहुत ही अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि यह बातचीत इसलिए भी जरूरी हो गई है क्योंकि ट्रंप ने शुक्रवार को एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए। इस कानून से रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है। इसमें चीन और भारत भी शामिल हैं। कानून का नाम लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 है। दूसरी ओर चीन ने कहा है कि वह रूसी तेल-गैस खरीद पर अमेरिकी टैरिफ का विरोध करता है। चीन का कहना है कि दो देशों के सामान्य व्यापार में तीसरे देश को दखल नहीं देना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा है कि चीन बराबरी और आपसी फायदे के आधार पर दूसरे देशों के साथ सामान्य व्यापार करता है। यह व्यापार किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है। इसमें बाहरी दबाव नहीं होना चाहिए। चीन एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है। इनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी भी नहीं है।

PF की बेस लिमिट बढ़ी तो घटेगी इन-हैंड सैलरी? जानें EPFO का नया नियम

 नई दिल्‍ली सरकार ने अनिवार्य कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कवरेज के लिए सैलरी लिमिट को 17 सितंबर से 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है. सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे।  इस नियम के बदलने का क्या मतलब है?  यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जो पहली बार EPFO में शामिल हो रहे हैं. सितंबर 2014 से कर्मचारी भविष्‍य निधि (EPFO) के अंतर्गत आने वाले किसी कंपनी में 15,000 रुपये तक कमाने वाले कर्मचारियों को पेंशन में योगदान देना जरूरी था. अब ये लिमिट बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है. ऐसे में अब 15 से 25 हजार रुपये के बीच कमाने वाले कर्मचारियों की खुद से पीएफ पेंशन के दायरे में रख दिया जाएगा और उन्‍हें पेंशन का लाभ दिया जाएगा।  अगर 20,000 रुपये है सैलरी तो क्‍या होगा असर?  पुरानी सीमा के तहत ₹20,000 प्रति माह की बेसिक सैलरी पर किसी कंपनी में शामिल होने वाला कर्मचारी वैधानिक सीमा से ऊपर था और खुद ही इसके दायरे में नहीं आता था, लेकिन अब लिमिट बढ़ने के बाद ₹20,000 नई सीमा से कम है, इसलिए अब वह कर्मचारी लागू नियमों के अधीन अनिवार्य कवरेज के अंतर्गत आता है यानी उसका पीएफ पेंशन में योगदान शुरू हो जाएगा।  इसका मतलब है कि कर्मचारी को रिटायरमेंट के लिए जमा किए गए PF का लाभ मिलेगा, ईपीएस के तहत पेंशन की पात्रता होगी और कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा कवर मिलेगा।  10 हजार महीना कमाने वालों पर क्‍या होगा असर?  अगर आपकी 10 हजार रुपये सैलरी है तो आपके लिए कुछ भी नहीं बदलने वाला है. आपका जितना पहले पेंशन में योगदान जा रहा था, उसी हिसाब से आज भी जा रहा होगा. क्‍योंकि आप पहले भी सैलरी लिमिट के दायरे में थे और अब भी सैलरी लिमिट के दायरे में हैं।  अगर आपकी 25,000 रुपये से ज्‍यादा सैलरी तो क्‍या होगा?  अगर आपकी सैलरी 25 हजार रुपये से ज्‍यादा है तो मंथली कटौती में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. जहां कटौती वैधानिक सीमा पर लिमिटेड है, वहां कर्मचारियों का अधिकतम कंट्रीब्‍यूशन 15,000 रुपये का 12 फीसदी यानी 1800 रुपये प्रति माह था. नई लिमिट के अनुसार यह ₹25,000 का 12%, यानी ₹ 3,000 प्रति माह हो जाएगा. जिससे कर्मचारी की कटौती ₹1,200 तक बढ़ सकती है. इन कर्मचारियों के लिए इसका मतलब होगा कि उन्हें हर महीने कम वेतन मिलेगा और उनके पीएफ बचत खाते में अधिक राशि जमा होगी। 

Indian Army Cyber Labs: सैन्य सिस्टम में विदेशी बग्स का होगा पता, दिल्ली के बाद 5 और जगह खुलेंगी साइबर लैब

 नई दिल्ली भारतीय सेना विदेशी मूल के साइबर अटैक से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंतित है. इसलिए वह 6 आश्वस्त (AASHVAST) प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना बना रही है. इन लैब्स का मकसद ड्रोन और अन्य सैन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में छिपी कमजोरियों का पता लगाना है. इनमें खराब कोड, छिपे हुए एक्सेस मैकेनिज्म और फर्मवेयर स्तर की खामियों की जांच की जाएगी, जो सैन्य अभियानों को बाधित कर सकती हैं।  दिल्ली में लैब पहले ही शुरू हो चुकी है. देशभर में कम से कम पांच और लैब्स लगाने की योजना है. शुरुआत में इनका फोकस ड्रोन पर रहेगा. बाद में सेना द्वारा खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जाएगी. यह पहल ऐसे समय में आई है जब सैन्य उपकरणों में चीनी मूल के पुर्जों को लेकर चिंता बढ़ रही है. खासकर पूर्वी सीमाओं पर तैनात ड्रोनों में चीनी साइबर अटैक की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।   भारत ने पहले भी घरेलू सैन्य ड्रोन निर्माताओं को चीनी मूल के पुर्जों का इस्तेमाल सीमित करने के निर्देश दिए थे. 2025 में आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने रक्षा मंत्रालय को एक फ्रेमवर्क सौंपा था, जिसका उद्देश्य यूएवी से चीनी मूल के साइबर अटैक को पूरी तरह हटाना था. आश्वस्त लैब्स इस प्रक्रिया में एक और परत जोड़ेंगी. वे सिर्फ यह नहीं देखेंगी कि कोई हिस्सा कहां से खरीदा गया, बल्कि उसकी असली उत्पत्ति और उसमें क्या छिपा हो सकता है, इसकी भी जांच करेंगी।  फर्मवेयर स्तर की छिपी खतरों की जांच आश्वस्त सिस्टम को क्विकपे प्राइवेट लिमिटेड ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स महानिदेशालय के लिए विकसित किया है. यह सिर्फ फिजिकल जांच पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम का एनालिसिस करेगा. यह सिस्टम करीब 14 तरह की कमजोरियों का पता लगा सकता है. इनमें छिपे हुए कोड और कमांड शामिल हैं, जो ड्रोन के कामकाज में बाधा डाल सकते हैं।  लोकेशन या समय आधारित खराबी भी पता चलेगी, जो किसी खास इलाके या समय पर मिशन को खराब कर सकती है. एम्बेडेड पासवर्ड, एन्क्रिप्शन कुंजी और रिमोट एक्सेस टूल भी स्कैन किए जाएंगे. कुछ खराबियां ऐसी हो सकती हैं जो यूएवी को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने या मिशन पूरा करने से रोक दें।  अप्रैल 2026 में सेना ने फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम वैलिडेशन के लिए कस्टमाइज्ड लाइसेंस्ड सॉफ्टवेयर खरीदने का आरएफपी जारी किया था. इससे साफ है कि सेना इस दिशा में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की भूमिका बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो गई है. अगर किसी सिस्टम में छिपा बैकडोर या दुर्भावनापूर्ण कोड हो, तो दुश्मन उसे दूर से नियंत्रित या बाधित कर सकता है. इसलिए ऐसी जांच जरूरी है।  सीसीटीवी कैमरे भी जांच के दायरे में स्क्रीनिंग कार्यक्रम आगे चलकर भविष्य में खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों तक भी फैलेगा. इन जांचों में संभावित रूप से कमजोर प्रॉप्राइटरी प्रोटोकॉल और एम्बेडेड तकनीकों को देखा जाएगा, खासकर विदेशी मूल की प्रणालियों से जुड़ी तकनीकों को. व्यापक उद्देश्य साइबर लचीलापन बढ़ाना, बाहरी हस्तक्षेप का खतरा कम करना।  सैन्य प्लेटफॉर्म को विवादित परिचालन वातावरण में भरोसेमंद बनाए रखना है. यह पहल आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत रक्षा तकनीक में अधिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी योगदान देगी. सेना की यह कोशिश दिखाती है कि वह सिर्फ हार्डवेयर खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहती. वह सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर स्तर पर भी पूरी तरह सुरक्षित सिस्टम चाहती है।  ड्रोन और सीसीटीवी जैसे उपकरणों में छिपी कमजोरियां युद्ध के मैदान में गंभीर परिणाम ला सकती हैं. आश्वस्त लैब्स इन जोखिमों को कम करने में मदद करेंगी. इससे भारतीय सेना की तकनीकी सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य के संघर्षों में बाहरी हस्तक्षेप का खतरा घटेगा. कुल मिलाकर यह कदम आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप है, जहां साइबर सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी पारंपरिक सैन्य क्षमता। 

PTI के ‘सोमनाथ’ बयान से मचा हड़कंप, इस्लामाबाद-रावलपिंडी में कड़ी सुरक्षा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में इस वक्त हालात कुछ ठीक नहीं हैं. एक तरफ तो मक्का पैक्ट को लेकर वो इंटरनेशनल मोर्चे पर फंसा हुआ है, दूसरी ओर अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक करके तालिबान को बदले के लिए उकसा चुका है. इन सबके बीच आंतरिक मोर्चे पर भी हुकूमत का वक्त कुछ अच्छा नहीं चल रहा है. पाकिस्तान में 27 सितंबर को होने वाले PTI के इस्लामाबाद मार्च से पहले सियासी तनाव बढ़ा हुआ है. खबरें हैं कि PTI के खैबर पख्तूनख्वा अध्यक्ष जुनेद अकबर ने सरकार को चेतावनी देते हुए ये तक कह दिया कि हम इस्लामाबाद को सोमनाथ बना देंगे।  जुनेद अकबर ने ये भी कहा कि पार्टी को पता है कि सरकार प्रदर्शन के दौरान गोली चला सकती है, लेकिन इस बार PTI कार्यकर्ता सिर्फ शव लेकर वापस नहीं लौटेंगे. ये बात उन्होंने पेशावर में एक सभा को संबोधित करने के दौरान कहा. यहीं पर उन्होंने ये भी कहा कि – ‘हम इस्लामाबाद को सोमनाथ बना देंगे’. उन्होंने दावा किया कि PTI कार्यकर्ता कई रास्तों से इस्लामाबाद पहुंचेंगे और जरूरत पड़ी तो पैदल भी मार्च करेंगे।  सरकार ने सोमनाथ पर दिया कड़ा रिएक्शन  उनके इस बयान पर पाकिस्तान सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने इसे हिंसा की धमकी बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत है, लेकिन हिंसा या लोगों की जान को खतरा पैदा करने वाली किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद की ओर मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों पर कड़ी पाबंदियां लगा दी हैं.  सरकार ने चेतावनी दी है कि कोई भी समूह राजधानी में किसी भी तरह की बाधा नहीं डाल सकेगा. सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार कहा कि प्रशासन, पुलिस और गृह मंत्रालय स्पष्ट हैं कि अशांति फैलाने वाले समूहों को इस्लामाबाद पहुंचने नहीं दिया जाएगा.  उन्होंने इस्लामाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें राजनीतिक दलों को सार्वजनिक सड़कों और नागरिकों की आवाजाही बाधित करने से मना किया गया है।  27 सितंबर को PTI करने वाली है मार्च     आपको बता दें कि इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने 27 सितंबर को एक लॉन्ग मार्च का ऐलान कर रखा है. वो देशव्यापी प्रदर्शन से     पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और पड़ोसी शहर रावलपिंडी में बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है.     अधिकारियों ने शहर की ओर आने वाले प्रदर्शनों और मार्च की तैयारी में लगभग एक हजार कार्गो कंटेनर लगा दिए हैं. लाल जोन, फैजाबाद और जीरो पॉइंट जैसे महत्वपूर्ण रास्तों तथा संवेदनशील इलाकों को मजबूत किया जा रहा है।      सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं. कंटेनर प्रमुख चौराहों और संवेदनशील क्षेत्रों के रास्तों पर रखे गए हैं. फैजाबाद से मुर्री रोड की ओर जाने वाले मार्गों पर भी बैरिकेडिंग दिख रही है।      कुछ जगहों पर बैरिकेड को मजबूत करने के लिए मिट्टी की बोरियां और ढेर लगाए गए हैं. ये तैयारियां जमात-ए-इस्लामी के लंबे मार्च के इस्लामाबाद पहुंचने के बीच हो रही हैं. साथ ही पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, किसान इत्तेहाद और कश्मीरी समूहों के अलग-अलग प्रदर्शनों के कारण भी प्रशासन सतर्क है।   

पीआईबी भोपाल के नेतृत्व में जम्मू पहुंचे पत्रकारों के अध्ययन दल ने जम्मू की पीआईबी निदेशक सुनेहा जलाली से की भेंट

जम्मू। पीआईबी भोपाल के नेतृत्व में जम्मू की छह दिवसीय यात्रा पर पहुंचे पत्रकारों के अध्ययन दल ने आज जम्मू की पीआईबी निदेशक सुनेहा जलाली से भेंट की। मध्य प्रदेश के पत्रकारों का स्वागत करते हुए सु नेहा जलाली ने बताया कि वर्तमान में जम्मू क्षेत्र में कई विकास परीयोजनाएं चल रही हैं। धारा 370 के रद्द होने के बाद से यहां की विकास योजनाओं में गुणात्मक बदलाव और तेजी आई है। जम्मू एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है, वहीं कई राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और  चौडीकरण हो रहा है। उन्होंने अध्ययन दल को बताया कि वह आने वाले दिनों में जम्मू क्षेत्र की कई विकास योजनाओं और सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रूबरू होंगे। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश शर्मा भी उपस्थित थे, जिनका स्वागत पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल द्वारा किया गया। पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के उपनिदेशक शारिक नूर ने सुनेहा जलाली, मीडिया एवं संचार अधिकारी जाकिर मलिक और मुशर्रफ वाणी को स्मृति चिन्ह भेंट किए।

आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम: उत्तर भारत का गौरव है जम्मू का ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर

जम्मू। उत्तर भारत के सबसे भव्य और विशाल धार्मिक स्थलों में शुमार जम्मू का प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। भगवान विष्णु (रघुनाथ जी) को समर्पित यह ऐतिहासिक मंदिर अपनी समृद्ध डोगरा विरासत, बेजोड़ वास्तुकला और दुर्लभ आध्यात्मिक धरोहरों के लिए दुनिया भर में विशिष्ट पहचान रखता है। डोगरा शासकों की ऐतिहासिक देन मंदिर की नींव डोगरा राजवंश के संस्थापक महाराजा गुलाब सिंह ने वर्ष 1835 में रखी थी। उनके विज़न को साकार करते हुए उनके सुपुत्र महाराजा रणबीर सिंह ने वर्ष 1860 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण कराया। लगभग 25 वर्षों के अथक प्रयासों के बाद यह भव्य परिसर अपने वर्तमान स्वरूप में सामने आया। वास्तुकला और दुर्लभ आध्यात्मिक वैभव रघुनाथ मंदिर परिसर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता बल्कि स्थापत्य कला के लिए भी जाना जाता है: सात भव्य शिखर: पूरे परिसर में सात अलग-अलग मंदिर स्थापित हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना ऊंचा और नक्काशीदार शिखर है। स्वर्ण जड़ित गर्भगृह: मुख्य मंदिर के गर्भगृह की तीन तरफ की दीवारें सोने की चमकदार चादरों से सुसज्जित हैं, जो इसकी भव्यता में चार चांद लगाती हैं। समस्त देव स्वरूपों का वास: भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ-साथ यहाँ सनातन धर्म के लगभग सभी प्रमुख देवी-देवताओं व रामायण कालीन पात्रों की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं। अद्वितीय शिवलिंग व प्रतिमाएं: पंडित राकेश शास्त्री के अनुसार, मंदिर में सवा बारह लाख शालिग्राम शिलाओं की परिक्रमा मौजूद है। इसके अलावा, यहाँ जर्मनी से लाया गया विश्व का पहला दुर्लभ स्फटिक शिवलिंग और भारत की सबसे बड़ी भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित है। ज्ञान का खजाना: परिसर में स्थित ऐतिहासिक पुस्तकालय में शारदा लिपि, संस्कृत और विभिन्न भारतीय भाषाओं की हज़ारों दुर्लभ पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं। सुरक्षा का कड़ा पहरा अतीत में आतंकी हमलों का निशाना बनने के बाद भी इस पावन धाम की महिमा और भक्तों के विश्वास में कोई कमी नहीं आई। वर्तमान में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत चाक-चौबंद रखी गई है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु कड़े सुरक्षा घेरे के बीच निर्भय होकर प्रभु श्रीराम के दर्शन करते हैं।

साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे का एक्शन, प्रोफेसर डूल्ला पर कार्रवाई और माफी

मुंबई  आईआईटी बॉम्‍बे में छात्र की आत्‍महत्‍या के कुछ द‍िनों बाद बड़ी खबर सामने आ रही है. पि‍छले 3 द‍िनों से लगातार धरने पर बैठे छात्रों की मांगों को मानते हुए संस्‍थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्‍ला को न‍िलंब‍ित कर द‍िया है. डूल्‍ला पर छात्र को प्रताड‍़‍ित करने के आरोप लगाए गए हैं. पुल‍िस ने छात्र के माता-प‍िता की श‍िकायत पर प्रोफेसर डूल्‍ला के ख‍िलाफ मामला भी दर्ज क‍र लि‍या है।  मुंबई पुल‍िस की ओर से दी गई जानकारी के मुताब‍िक आईआईटी बॉम्‍बे में छात्र की आत्‍महत्‍या के मामले को अब मुंबई क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर द‍िया गया है. अब इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच ही करेगी।  बता दें क‍ि हाल ही में आईआईटी बॉम्बे में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी, जिस पर परीक्षा में नकल करने का आरोप था. इस घटना के विरोध में छात्र सड़क पर उतर आए थे और तीन दिनों से कैंपस के मुख्य गेट पर धरना दे रहे थे. छात्रों की मांग थी कि छात्र की सुसाइड के लिए जिम्मेदार प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्‍ला पर कार्रवाई की जाए और उन्‍हें तत्‍काल सस्‍पेंड क‍िया जाए. इसके साथ ही प्रदर्शनकार‍ियों की मांग थी क‍ि उनकी 18 सूत्रीय मांगों को माना जाए. करीब 3 दिन तक चले लंबे तनाव के बाद आखिरकार छात्रों की मांगें मान ली गई हैं।  आखिर क्या था पूरा मामला? IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के दूसरे साल के BTech स्टूडेंट साहिल रवींद्र वाकोडे (22) शुक्रवार शाम अपने हॉस्टल के कमरे में छत के पंखे से लटके हुए पाए गए थे. यह घटना मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और ChatGPT का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई।  उनके परिवार का आरोप है कि महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले वाकोडे को यह कदम उठाने से पहले संस्थागत उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वाकोडे पर भारी दबाव था और उन्हें एकेडमिक सस्पेंशन की धमकियां दी जा रही थीं।  छात्र के माता-पिता की शिकायत पर, पुलिस ने शनिवार को भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में FIR दर्ज की।  घटना के तुरंत बाद, जब पुलिस मामले की शुरुआती तहकीकत ही कर रही थी, तब आईआईटी प्रशासन ने एक बयान जारी कर दिया था. उस बयान में घटना से जुड़ी कुछ ऐसी परिस्थितियों का जिक्र कर दिया गया था, जो आधिकारिक तौर पर साबित नहीं हुई थीं।  जांच जारी रहने के बीच ही संस्थान के इस रवैये और जल्दबाजी में दिए गए बयान पर सवाल उठने लगे, जिसके बाद बैकफुट पर आए प्रशासन को 'X' (ट्विटर) पर आकर आधिकारिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी।  IIT बॉम्बे ने माफीनामे में क्या लिखा? संस्थान ने अपने आधिकारिक 'X' हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा: 'हम साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में अपने पिछले संचार (Communication) में दिए गए कथनों के लिए माफी मांगते हैं।  प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकारते हुए आगे कहा, 'इस घटना तक ले जाने वाले विवरण और परिस्थितियां फिलहाल संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच का विषय हैं. जारी जांच को ध्यान में रखते हुए, उचित जांच प्रक्रिया के जरिए तथ्य स्थापित होने से पहले घटनाओं का विवरण देना या उन्हें परिभाषित करना अनुचित था।  क्यों बड़ा है यह यू-टर्न? किसी भी कैंपस में ऐसी अप्रिय घटना होने के बाद पुलिस फॉरेंसिक और आधिकारिक जांच के जरिए ही सच तक पहुंचती है. ऐसे में बिना रिपोर्ट आए संस्थान का कोई भी बयान जांच की दिशा को प्रभावित कर सकता है।  प्रोफेसर पर भी एक्शन छात्र साहिल की मौत के मामले में जहां एक तरफ आईआईटी बॉम्बे को अपने शुरुआती बयान पर बैकफुट पर आते हुए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी है, वहीं दूसरी तरफ कैंपस में बढ़ते जनाक्रोश और विरोध के बीच प्रशासन ने सख्त कदम भी उठाए हैं.  मामले से जुड़े विवाद और सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बाद संबंधित विभाग के प्रोफेसर के खिलाफ भी प्रशासनिक स्तर पर एक्शन लिया गया है. छात्रों का आरोप था कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीन रवैये के कारण स्थिति बिगड़ी, जिसके बाद संस्थान ने निष्पक्ष जांच का भरोसा देते हुए यह कदम उठाया है।  डायरेक्टर के इस्तीफे की खबर झूठी: IIT बॉम्बे कैंपस में मचे बवाल और विरोध प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर के इस्तीफे को लेकर तमाम तरह की अफवाहें चल रही थीं. इन अटकलों पर विराम लगाते हुए संस्थान ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि डायरेक्टर आईआईटी बॉम्बे ने इस्तीफा नहीं दिया है. संस्थान ने बयान जारी कर कहा कि आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है. हम स्पष्ट रूप से यह कहते हैं कि इससे जुड़ी खबरें पूरी तरह से गलत हैं।  बता दें कि साह‍िल की सुसाइड से मौत के बाद कैंपस में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र अपने 18 पॉइंट चार्टर के साथ डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग भी कर रहे थे. फिलहाल स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही हैं. साहिल की मौत की असली वजह क्या थी, यह आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।  अब मुंबई क्राइम ब्रांच ने 22 वर्षीय आईआईटी बॉम्बे छात्र की कथित आत्महत्या की जांच अपने हाथ में ले ली है और प्रोफेसर डूल्ला व अन्य को पूछताछ के लिए बुलाने की संभावना है. डूल्‍ला पर छात्र को प्रताड़ि‍त करने का आरोप है. हालांक‍ि आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूल्ला के साथ एकजुटता जताई है. फोरम ने कहा कि उन्होंने संस्थागत प्रोटोकॉल का पालन करते हुए परीक्षा के दौरान स्मार्टफोन के अनधिकृत इस्तेमाल की रिपोर्ट की थी। फोरम ने कहा कि डूल्ला मिड-सेमेस्टर परीक्षा की निगरानी कर रहे थे और उन्होंने कथित अकादमिक कदाचार की रिपोर्ट संस्थान अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए दी। 

ममता बनर्जी को बड़ी राहत, TMC के बैंक अकाउंट का मिला एक्सेस

कलकत्ता चुनाव आयोग की तरफ से 'जोड़ाफूल' सिंबल फ्रीज किए जाने के झटके के बीच 'कालीघाट तृणमूल' (ममता बनर्जी गुट) को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने साफ किया है कि चुनाव चिन्ह में बदलाव का बैंक खातों के इस्तेमाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पार्टी अपने तीनों बैंक खातों का संचालन पूर्व आदेश के तहत ही करती रहेगी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिह्न में किया गया बदलाव केवल आगामी उपचुनावों तक ही सीमित है। इसलिए फिलहाल यह बैंक खातों के वित्तीय प्रबंधन पर लागू नहीं होगा। कैसे निकाल सकेंगे बैंक अकाउंट से पैसा? हाईकोर्ट के नए आदेश के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक अकाउंट के संचालन के लिए तय की गई अंतरिम व्यवस्था को अब 29 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। पैसा निकालने की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी: दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता: ममता तृणमूल गूट के कोई भी दो अधिकृत व्यक्ति चेक पर हस्ताक्षर कर सकेंगे। स्पेशल ऑफिसर की स्क्रूटनी: अदालत की तरफ से नियुक्त विशेष अधिकारी पूर्व जज सुब्रत तालुकदार इन चेकों की जांच करेंगे। स्पेशल ऑफिसर की मंजूरी के बाद ही बैंक संबंधित राशि का भुगतान करेगा। जुलाई के अंतरिम आदेश को कोर्ट ने फिर बढ़ाया यह मामला सबसे पहले जुलाई में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के सामने आया था, जब पार्टी के तीन खातों को फ्रीज किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उस समय हाईकोर्ट ने रिटायर जज सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 सितंबर तक खातों के अस्थायी प्रबंधन का आदेश दिया था। अब बेंच ने 9 जुलाई के उसी आदेश की अवधि को 29 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया है, जिससे पार्टी को अपने दैनिक और कानूनी खर्चों को पूरा करने में सहूलियत मिलेगी। 28 साल पुरानी पार्टी दो धड़ों में बंटी, हाथ से छूटा 'जोड़ाफूल' ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर 'तृणमूल कांग्रेस' (TMC) की नींव रखी थी। पिछले 28 वर्षों से 'जोड़ाफूल' (घास पर दो फूल) और 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का नाम ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान का आधार रहा है। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनावों के महज चार महीने के भीतर ममता बनर्जी की बनाई यह पार्टी अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है और व्यावहारिक रूप से दो धड़ों में टूट चुकी है। ममता बनर्जी गुट (कालीघाट कैंप): चुनाव आयोग के फैसले के बाद यह धड़ा आगामी उपचुनावों में 'ममता सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस' के नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' सिंबल के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा। बागी गुट (ऋतब्रत बनर्जी कैंप): इस धड़े को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित हुआ है। पार्टी के नाम और 28 साल पुराने ऐतिहासिक चुनाव चिन्ह के छिन जाने के बाद ममता बनर्जी ने आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर इसी हफ्ते सुनवाई होने की उम्मीद है।

हनुमान जी को लेकर बयान पर विवाद, शशि थरूर के बेटे ने अमेरिकी को लताड़ा

नई दिल्ली केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे ईशान ने हिंदू धर्म के खिलाफ टिप्पणी को लेकर अमेरिकी की जमकर क्लास लगा दी। उन्होंने इतिहास से आंकड़े पेश कर बताया है कि अमेरिका में ईसाई धर्म आने से सैकड़ों साल पहले इसकी एंट्री भारत में हो चुकी थी। दरअसल, सोशल मीडिया पर हनुमान जी की प्रतिमा साझा कर यूजर उसे गिराने की बात क रहा था। जैसी ह्यू नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने हनुमान जी की प्रतिमा की तस्वीर साझा की थी। सात ही लिखा, 'जब हम जीतेंगे, तो इसे गिराने वाले हैं।' इसपर ईशान थरूर ने जवाब दिया, 'पता नहीं इस बेवकूफ को यह पता है या नहीं कि भारत में ईसाई धर्म, अमेरिका में ईसाई धर्म के आने से 1500 साल से भी ज्यादा पहले आ गया था। भारत में हजारों चर्च हैं। फिर भी अमेरिका हनुमान जी की एक मूर्ति बर्दाश्त नहीं कर पा रहा? हर जगह धार्मिक राष्ट्रवादी ही दुनिया के सबसे कमजोर और कम आत्मसम्मान वाले लोग होते हैं।' कौन हैं ईशान थरूर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1984 में जन्मे ईशान अमेरिका में पत्रकार हैं। उनका नाम सिंगापुर में हुआ था। उनके जुड़वा भाई का नाम कनिष्क है। वह केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं। वह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मामलों और वैश्विक राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते रहे हैं। हाल ही में वॉशिंगटन पोस्ट में छंटनी के बाद वह चर्चा में आ गए थे। न्यूयॉर्कर के अनुसार, साल 2026 में संस्था के साथ शुरुआत करने वाले ईशान ग्लोबल नोट्स नाम से एक इंटरनेशनल पॉलिटिक्स कॉलम लिखते हैं। इससे पहले वह करीब 1 दशक तक वॉशिंगटन पोस्ट में रहे और वर्ल्ड व्यू कॉलम लिखते रहे। साल 2021 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ डिल्पोमैसी ने उन्हें आर्थर रॉस मीडिया अवॉर्ड फॉर कॉमेंट्री से नवाजा था। 2024 में उन्हें टेड सोरेन्सन अवॉर्ड मिला। इसके साथ ही वह काउंसिल ऑन फॉरिन रिलेशन्स में 2026-27 एड्वर्ड आर मरो प्रेस फैलो हैं। इससे पहले वह 8 सालों तक टाइम में सीनियर एडिटर और संवाददाता रहे थे। उन्होंने सिंगापुर और न्यूयॉर्क में संस्था के लिए काम किया है। उन्होंने साल 2006 में येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। खास बात है कि येल में पढ़ाई के दौरान उन्हें सड्लर फैलोशिप मिली थी। उन्होंने अपनी पत्रकारिता की पारी की शुरुआत साल 2006 से टाइम मैगजीन से की थी। साल 2014 में उन्होंने संस्थान को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में द वॉशिंगटन पोस्ट पहुंचे थे।