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कमला हैरिस का आरोप, नेटन्याहू ने ट्रंप को ईरान युद्ध में घसीटा, ‘एपस्टीन फाइल्स’ से ध्यान भटकाने की कोशिश

वॉशिंगटन  अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ सैन्य संघर्ष में 'खींच लिया' और इसे 'एपस्टीन फाइल्स' से ध्यान भटकाने की एक 'कमजोर कोशिश' बताया।  मिशिगन डेमोक्रेटिक वीमेन कॉकस द्वारा शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कमला हैरिस ने इन शत्रुताओं को एक ऐसे युद्ध के रूप में बताया जिसे 'अमेरिकी लोग नहीं चाहते.' डेट्रॉइट में अपने संबोधन के दौरान, हैरिस ने प्रशासन के इरादों की और भी कड़ी आलोचना की और ट्रंप पर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का इस्तेमाल घरेलू विवादों से ध्यान भटकाने के लिए करने का आरोप लगाया. उन्होंने मौजूदा नेतृत्व को अमेरिका के इतिहास का 'सबसे भ्रष्ट, संवेदनहीन और अक्षम' प्रशासन करार दिया।  प्रेसिडेंट के लीडरशिप स्टाइल के बारे में बताते हुए हैरिस ने कहा कि ट्रंप 'ऐसे घूमना चाहते हैं जैसे वह मजबूत हों और जिसे चाहें उसके खिलाफ अमेरिका की मिलिट्री की ताकत का इस्तेमाल करेंगे.' उन्होंने कहा कि यह तरीका विदेश नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव दिखाता है और दावा किया कि वह 'दूसरे विश्व युद्ध के बाद से किसी भी पार्टी के अमेरिका के पहले प्रेसिडेंट हैं जिन्होंने अमेरिका की जिम्मेदारी छोड़ दी है. हमारे गठबंधनों, हमारी दोस्ती को बढ़ावा देने और बचाने की।  पूर्व उप-राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक मानकों की अनदेखी करने वाले प्रशासन ने देश की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने 'अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों, जैसे कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के महत्व का दिखावा भी नहीं किया और असल में उसे नजरअंदाज कर दिया।  हैरिस के अनुसार इन कदमों ने अमेरिका को उसके सहयोगियों की नजर में 'अविश्वसनीय' बना दिया है और कुछ खास मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए हमारे पास जो भी प्रभाव था, उसे छीन लिया है.' विदेश नीति और सैन्य भागीदारी से हटकर उन्होंने अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और प्रजनन अधिकारों जैसे घरेलू मुद्दों पर भी बात की।  चुनावी राजनीति की ओर बढ़ते हुए हैरिस ने डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावनाओं पर भरोसा जताया और कहा कि उन्हें विश्वास है कि पार्टी नवंबर में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनावों में जीत हासिल करेगी। 

तमिलनाडु हादसा: विरुधुनगर की पटाखा फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट, 18 जिंदगियां बुझीं

नई दिल्ली. तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 1 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। कैसे हुआ हादसा? एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विस्फोट फैक्ट्री के अंदर अचानक हुआ, जिसके बाद तेज धमाकों की आवाज दूर-दूर तक सुनी गई। विस्फोट इतना जोरदार था कि फैक्ट्री का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया और आग तेजी से फैल गई। राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम जारी है। कैसे हुआ हादसा? शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि पटाखा बनाने के दौरान सुरक्षा मानकों में लापरवाही या केमिकल के गलत हैंडलिंग के कारण यह विस्फोट हो सकता है। हालांकि, घटना के असल कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने घटना पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच की जा रही है। तमिलनाडु में विरुधुनगर और शिवकाशी क्षेत्र पटाखा उद्योग के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां पहले भी कई बार इस तरह के हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है।

BJP का बड़ा कदम, दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया

नई दिल्ली  भारत सरकार बांग्लादेश में अपने नए उच्चायुक्त के तौर पर वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को नियुक्त कर सकती है. सूत्रों के अनुसार मौजूदा उच्चायुक्त प्रणय वर्मा का तबादला ब्रसेल्स किया जा सकता है और उनकी जगह त्रिवेदी को ढाका भेजने की तैयारी है. यह नियुक्ति ऐसे समय में सामने आई है जब भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को लेकर कई अहम मुद्दों पर बातचीत जारी है और दोनों देश रिश्तों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।  द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है कि इस नियुक्ति की घोषणा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हो सकती है. दिनेश त्रिवेदी का पश्चिम बंगाल से गहरा राजनीतिक जुड़ाव रहा है, ऐसे में इस फैसले को कूटनीतिक के साथ-साथ राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।  क्यों अहम है यह नियुक्ति?     दिनेश त्रिवेदी लंबे समय तक पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने लोकसभा व राज्यसभा दोनों में प्रतिनिधित्व किया है. वे पूर्व में रेल मंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री भी रह चुके हैं. तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी भूमिका और भी अहम मानी जाती है।      भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले कुछ समय में कई घटनाओं के कारण चर्चा में रहे हैं. शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद बदले राजनीतिक हालात और नई सरकार के आने से दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है. हालांकि हाल के दौर में दोनों पक्ष संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।  क्या संदेश देना चाहती है सरकार? सरकार का यह कदम दो स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक तरफ यह बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में पहल है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी समझी जा रही है।  दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति कब तक हो सकती है? सूत्रों के अनुसार, इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है, और संभावना है कि यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हो. हालांकि सरकार की ओर से अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।  क्या यह एक सामान्य कूटनीतिक नियुक्ति है? आमतौर पर ऐसे पदों पर करियर राजनयिकों की नियुक्ति होती है, लेकिन कभी-कभी सरकार राजनीतिक नेताओं को भी यह जिम्मेदारी देती है. इस कारण यह नियुक्ति विशेष मानी जा रही है।  भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसका क्या असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि एक अनुभवी राजनीतिक नेता की नियुक्ति संवाद को नया आयाम दे सकती है. इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद मिल सकती है।  क्या इसका असर पश्चिम बंगाल चुनाव पर पड़ेगा? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह फैसला चुनावी माहौल में भाजपा के लिए सकारात्मक संदेश दे सकता है. इससे यह दिखाने की कोशिश होगी कि पार्टी बंगाल के नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दे रही है। 

भारतीय जहाजों पर हमले के बाद ईरान को नई दिल्ली का चेतावनी भरा संदेश, नतीजे भुगतने होंगे

नई दिल्ली दो भारतीय क्रूड ऑयल जहाजों पर ईरानी नौसेना की गोलीबारी में कोई हताहत नहीं हुआ है। भारतीय अधिकारियों ने रविवार को इसकी पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने बताया कि जहाजों के एक केबिन की खिड़की का शीशा टूट गया। भारतीय अधिकारियों ने तेहरान को साफ संदेश दिया कि ऐसी किसी भी हरकत के नतीजे भुगतने पड़ेंगे। समझा जाता है कि भारत में ईरानी दूतावास और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच इस घटना को लेकर मतभेद है। सूत्रों ने बताया कि IRGC अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों पर टोल वसूलना चाहता है, जबकि भारतीय अधिकारी ऐसी मांग मानने को तैयार नहीं हैं। 2 भारतीय जहाजों (जग अर्णव और सन्मार हेराल्ड) पर ईरानी नौसेना की ओर से गोलीबारी की यह घटना तब हुई है, जब ईरानी युद्धपोत IRIS लवान अभी भी कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा है। यह भारत से शरण मांगकर आया था। इस युद्धपोत के 183 चालक दल सदस्यों में से लगभग 120 को पहले ही स्वदेश भेज दिया गया है, जबकि कुछ जरूरी कर्मी जहाज की देखभाल के लिए केरल के बंदरगाह पर रुके हुए हैं। इस ईरानी जहाज की ओर से भारत से शरण इसलिए मांगी गई क्योंकि उसका दूसरा युद्धपोत IRIS डेना 4 मार्च को श्रीलंका के पास अमेरिकी पनडुब्बी से हमला कर डुबो दिया गया था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि IRGC स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल रहा है, लेकिन एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि भारत किसी भी तरह का टोल देने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि ईरानी गोलीबारी की इस घटना के नतीजे सामने होंगे। दोनों भारतीय जहाज बड़े क्रूड ऑयल टैंकर हैं और लाखों बैरल तेल ले जा रहे थे, जो शनिवार को ओमान के उत्तर में ईरानी नौसेना की गोलीबारी का शिकार हुए और उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वापस मुड़ना पड़ा। नई दिल्ली ने ईरानी राजदूत को किया तलब ईरान ने पहले कहा था कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष में शामिल न होने वाले देशों के जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। ताजा घटनाक्रम के बाद भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई है। नई दिल्ली ने ईरानी राजदूत को तलब किया और घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। मरीन ट्रैफिक के अनुसार, भारतीय झंडे वाला बल्क कैरियर जग अर्णव सऊदी अरब के अल जुबैल से भारत की ओर आ रहा था। वहीं, दूसरा जहाज सन्मार हेराल्ड इराक से क्रूड ऑयल लेकर भारत जा रहा था। अधिकारियों ने कहा कि भारत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गोलीबारी को बहुत गंभीरता से ले रहा है और देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खुली और स्वतंत्र नौवहन का समर्थन करता है। ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल पारगमन गलियारों में से एक है, जिसमें वैश्विक क्रूड शिपमेंट का 20% हिस्सा गुजरता है। भारत उन देशों में शामिल है जिनके सबसे अधिक जहाज इस स्ट्रेट से गुजरते हैं, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर उसकी निर्भरता को दर्शाता है। ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध के बीच भारत को मित्र राष्ट्रों की सूची में रखा है, जिनके जहाजों को इस स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दी जा रही है, जबकि अन्य देशों के जहाजों को ड्रोन-मिसाइल हमलों की धमकी देकर रोका जा रहा है। “होर्मुज़ फिर से बंद”-VHF प्रसारण ने बढ़ाई दहशत घटना के दौरान कई जहाजों ने एक रेडियो प्रसारण सुना, जिसमें दावा किया गया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को “पूरी तरह बंद” कर दिया गया है। प्रसारण में कहा गया कि अमेरिका के साथ वार्ता विफल होने के बाद यह कदम उठाया गया है और किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं होगी। इस संदेश ने पूरे समुद्री क्षेत्र में दहशत फैला दी, जिसके बाद कई जहाजों ने तुरंत अपनी दिशा बदल ली। भारत की कड़ी प्रतिक्रिया: ईरानी राजदूत तलब घटना के बाद भारत सरकार ने ईरानी राजदूत को तलब किया और इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने इस घटना को गंभीर चिंता का विषय बताया और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने की मांग की। सरकारी सूत्रों के अनुसार, शिपिंग महानिदेशालय (DG Shipping) स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।   ईरान की सफाई और कूटनीतिक संतुलन की कोशिश इस बीच, ईरान की ओर से स्थिति को शांत करने की कोशिश भी दिखाई दी। भारत में ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि उन्हें घटना के विस्तृत विवरण की जानकारी नहीं है और दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामला जल्द सुलझ जाएगा। समुद्री गलियारों में बढ़ता अनिश्चितता का साया होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय निगरानी तेज कर दी गई है। क्या कहा भारत ने ईरान से? भारत ने ईरान से साफ कहा कि वह इस घटना को गंभीरता से लेता है और ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। विदेश सचिव ने ईरानी राजदूत से आग्रह किया कि वे भारत की चिंता अपने देश के अधिकारियों तक पहुंचाएं और भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग को जल्द बहाल करें। क्या ईरान ने कोई जवाब दिया? बैठक में ईरान के राजदूत ने भारत की चिंताओं को सुना और भरोसा दिया कि वे इस संदेश को तेहरान तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत की बात को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों तक तुरंत जानकारी दी जाएगी। होर्मुज का महत्व क्यों? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है। भारत जैसे देश, जो खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात करते हैं, इस मार्ग पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर डाल सकता है। क्या आगे हालात सुधरेंगे? भारत ने साफ किया है कि वह इस मार्ग … Read more

अमरावती सेक्स स्कैंडल: नागपुर की नाबालिग पीड़िता ने दिए बयान, हो सकते हैं बड़े खुलासे

 अमरावती महाराष्ट्र में अमरावती के परतवाड़ा सेक्स स्कैंडल को लेकर नया मोड़ सामने आया है. इस केस में पहली नाबालिग पीड़िता सामने आई है. उसने पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराया है. अब पूरे मामले की जांच और तेज कर दी गई है. स्पेशल जांच टीम (SIT) लगातार नए सुराग खंगाल रही है. इस मामले को लेकर अन्य पीड़ितों से भी अपने बयान दर्ज कराने की अपील की जा रही है. शनिवार को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले अमरावती पहुंचे, उन्होंने अफसरों के साथ इस पूरे मामले को लेकर मीटिंग भी की।  नाबालिग पीड़िता नागपुर की रहने वाली है. उसने पुलिस से संपर्क कर आपबीती साझा की है. पुलिस के मुताबिक, पीड़िता का बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, इससे मामले की कई अनसुलझी कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल सकती है।  इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई, जब 11 अप्रैल को सोशल मीडिया पर कुछ आपत्तिजनक वीडियो क्लिप्स और तस्वीरें सामने आईं, जिनमें नाबालिग लड़कियों के साथ शोषण की बातें सामने आईं. इसके बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया और पुलिस ने संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की।  जांच आगे बढ़ी तो अमरावती के परतवाड़ा क्षेत्र से जुड़े एक नेटवर्क का खुलासा हुआ. पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी भी शामिल है. इस मामले में पुलिस ने कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए हैं, जिनमें 7 मोबाइल, एक लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और एक टैबलेट शामिल हैं. इन सभी उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।  राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय निगरानी शुरू कर दी है. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पुलिस अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल बैठक की, इस बैठक में सीनियर पुलिस अधिकारी, SIT प्रमुख और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।  मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और सभी संभावित पीड़ितों को सामने लाने के प्रयास किए जाएं. उन्होंने कहा कि पीड़ितों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें हर संभव सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।  फ्लैट, कैफे में लड़कियों को बुलाते थे आरोपी पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर नाबालिग लड़कियों को अलग-अलग जगहों पर बुलाकर उनका शोषण किया. इनमें किराए के फ्लैट, कुछ कैफे और एक गार्डन शामिल है. पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जो कई जगहों पर सक्रिय था।  इस बीच, जांच टीम ने सोशल मीडिया पर फैलाए गए आपत्तिजनक कंटेंट को भी हटाने की कार्रवाई शुरू की है. अब तक करीब 41 सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिलीट किया जा चुका है, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से वीडियो और फोटो फैलाने के लिए किया जा रहा था।  SIT अब इस पूरे नेटवर्क की डिजिटल और फिजिकल ट्रेल की जांच कर रही है. फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक या दो आरोपियों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।  इस मामले में पीड़िता का सामने आना एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि अब जांच एजेंसियों के पास प्रत्यक्ष बयान और ठोस आधार मौजूद हैं. फिलहाल पूरा ध्यान SIT की जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिका है, जिससे यह तय होगा कि इस पूरे नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है। 

महिला आरक्षण बिल पर TMC और कांग्रेस का गठजोड़, पीएम मोदी ने उठाए सवाल

बिष्णुपुर  पश्चिम बंगाल के बिष्णुपुर में विजय संकल्प सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि संसद में महिला आरक्षण बिल पास कराने के समय टीएमसी ने कांग्रेस के साथ मिलकर इसका विरोध किया, जिससे बंगाल की बहनों और बेटियों की उम्मीदों को झटका लगा. अपने संबोधन में उन्होंने महिला सशक्तिकरण और महिला सुरक्षा को भाजपा की पहचान बताया और कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है।  उन्होंने आगे कहा कि विकसित भारत के निर्माण में बेटियों की भूमिका बढ़ाना जरूरी है और राजनीति में उनकी भागीदारी भी मजबूत होनी चाहिए. इसी के साथ पीएम मोदी ने टीएमसी के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के अनुकूल नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ भाजपा महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी ने इस दिशा में सहयोग नहीं किया।  रैली के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश और दुनिया में उनका सम्मान होता है, लेकिन टीएमसी पर उनके सम्मान को लेकर सवाल उठते हैं. उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति बंगाल आई थीं, तब जो घटनाक्रम हुआ, उसे पूरे देश ने देखा. इसके साथ ही पीएम ने टीएमसी पर घुसपैठियों को लाभ पहुंचाने और कानून-नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया, साथ ही धर्म के आधार पर आरक्षण देने की कोशिश को संविधान की भावना के खिलाफ बताया।  सभा में कई जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा दिलाया कि 'मातृ शक्ति भरोसा कार्ड' के जरिए बंगाल की हर बहन को साल में 36,000 रुपये दिए जाएंगे. महिला सशक्तिकरण के रोडमैप को सामने रखते हुए बताया गया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने पर गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये की सीधी आर्थिक मदद मिलेगी, वहीं संतान होने पर केंद्र सरकार की ओर से भी 5,000 रुपये की सहायता दी जाएगी।  बेटियों के भविष्य और उनकी शिक्षा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50,000 रुपये की मदद देने का बड़ा वादा किया. गरीबों के हक की बात करते हुए मंच से साफ किया गया कि बंगाल की जनता को अब अपने राशन की चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बीजेपी की सरकार आते ही सबको मुफ्त राशन मिलेगा और कोई उसे छीन नहीं पाएगा. इसके साथ ही, सिर पर पक्की छत का सपना पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं को 1.5 लाख रुपये तक की सहायता देने की बात कही गई. स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया गया कि आयुष्मान भारत योजना लागू होते ही हर महिला को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलना शुरू हो जाएगा, जिसे वर्तमान सरकार ने रोक रखा है।  अपने संबोधन के अंत में उन्होंने स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने आयुष्मान योजना को रोका हुआ है, लेकिन भाजपा सरकार बनने पर 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही उन्होंने कानून व्यवस्था पर सख्ती की बात कही और लोगों से अपील की कि वे सही और गलत के बीच फर्क समझकर निर्णय लें. उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।             

बंगाल में चुनाव से पहले ED का बड़ा ऐक्शन, कोलकाता DCP के ठिकानों पर मारे गए छापे

कलकत्ता बंगाल में चुनाव से पहले ईडी का ताबड़तोड़ ऐक्शन जारी है। कोयला घोटाला मामले में ईडी की टीम कोलकाता डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वा के ठिकानों पर छापा मारने पहुंची है। जानकारी के मुताबिक ईडी की टीम शांतनु विश्वास के अलावा बलयुगुंगे ऐंड सन एटरप्राइजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर जय कामदार के घर पर भी छापेमारी कर रही है। जानकारी के मुताबिक शांतनु विश्वास के दो ठिकानों और जय कामदार के एक ठिकाने पर छापेमारी जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक शांतनु विश्वास के बेहाला स्थित आवास पर ताला लगा हुआ है और गेट के अंदर के कुत्ता मौजूद है। ऐसे में ईडी की टीम बाहर ही खड़ी है। कोयला तस्करी की जांच में शांतनु सिन्हा विश्वास का भी नाम आया था। इसके बाद ईडी ने उन्हें तलब भी किया था। ईडी कोयला तस्करी मामले में कम से कम 8 आईपीएस अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। बीते दिनों ईडी की टीम इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमेटी (IPAC) के ठिकानों पर छापपेमारी की थी। आईपैक के को फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद दिल्ली की अदालत ने विनेश चंदेल को 20 दिनों की ईडी की हिरासत में भेजा था। ईडी दिल्ली पुलिसद्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है। ईडी ने इस मामले में पुलकित जैन और प्रतीक जैन की पत्नी बार्बी जैन को भी दिल्ली स्थित मुख्यालय में तलब किया था। टीएमसी नेताओं के घर पर भी छापेमारी दो दिन पहले आयकर विभाग ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक देबाशीष कुमार के आवास के साथ-साथ पार्टी के दो अन्य नेताओं के घरों और कार्यालयों सहित कई परिसरों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई से विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र में राजनीतिक तनाव पैदा हो गया है। कुमार रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने दक्षिण कोलकाता के मनोहरपुकुर रोड स्थित कुमार के आवास पर सुबह-सवेरे तलाशी शुरू की। छापेमारी शुरू होने के समय तृणमूल उम्मीदवार वहीं मौजूद थे। इसके साथ ही पास में स्थित उनके चुनावी कार्यालय और मोतीलाल नेहरू रोड स्थित एक पार्टी कार्यालय में भी तलाशी ली जा रही है। इसी बीच आयकर विभाग के अधिकारियों की एक अन्य टीम ने कालीघाट में तृणमूल कांग्रेस नेता कुमार साहा के आवास की तलाशी ली। आयकर अधिकारी स्थानीय तृणमूल नेता मिराज शाह के एल्गिन रोड स्थित आवास पर भी पहुंचे। मिराज शाह भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी की उम्मीदवारी के चार प्रस्तावकों में से एक हैं।इस बीच, दिन के दौरान साल्ट लेक और मिडलटन स्ट्रीट सहित शहर के कई अन्य स्थानों पर भी आयकर विभाग की छापेमारी देखी गयी।

यूपी से लेकर पंजाब तक लू का प्रकोप, तापमान 45 डिग्री तक जा सकता है; बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली अप्रैल महीने की शुरुआत जहां देश के बड़े हिस्से में बारिश के साथ हुई तो वहीं अब मौसम दोहरा रंग दिखा रहा है। पहाड़ी इलाकों में मौसम विभाग ने बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है तो वहीं कम से कम 6 राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि दोपहर के समय लोगों को बेवजह बाहर निकलने से बचना चाहिए। वहीं जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम समेत 12 राज्यों में आंधी चलने और बारिश का अनुमान है। वहीं यूपी, पंजाब,हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में लू चलने की प्रबल संभावना है। यूपी का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक भी जा सकता है। दिल्ली-एनसीआर का मौसम मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार को दिल्ली और आसपास के इलाकों में धूप रहेगी। हालांकि शाम तक मौसम करवट ले सकता है और तेज हवाएं चल सकती हैं। रविवार को भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। अधिकतम तापमान 40 डिग्री तक जा सकता है। उत्तर प्रदेश में लू का अलर्ट मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में लू का अलर्ट जारी किया है। बुंदेलखंड में तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, विशेषकर दक्षिणी क्षेत्रों में अगले दो से तीन दिन के दौरान लू चलने का पूर्वानुमान है और अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब या उससे ऊपर जा सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। आईएमडी ने बताया कि पूरे राज्य में शुष्क मौसम बना हुआ है और लगातार पछुआ हवाएं चल रही हैं। बुलेटिन में कहा गया, ''दिन के समय पूर्वी उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर लू चलने की संभावना है।' शनिवार को राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। प्रयागराज में तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से लगभग 3.2 डिग्री अधिक है, जबकि राज्य का सर्वाधिक 44.6 डिग्री सेल्सियस तापमान बांदा में दर्ज किया गया। ओडिशा में भीषण गर्मी का प्रकोप ओडिशा में शनिवार को भीषण गर्मी का प्रकोप रहा और करीब 15 स्थानों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। मौसम विभाग के मुताबिक बोलांगीर जिले का टिटलागढ़ 42.7 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म स्थान रहा, इसके बाद झारसुगुड़ा में 42.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। विभाग के अनुसार भवानीपटना में 42 डिग्री सेल्सियस, जबकि संबलपुर और नुआपड़ा में 41.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। विभाग के अनुसार इसी प्रकार हीराकुड में 41.4 डिग्री सेल्सियस, बोलांगीर और तालचर में 41 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने बिहार के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। इसमें सुपौल, अरररिया, किशनगंज और सिवान जिले शामिल हैं।

ईरान की धमकी: ‘गलती की तो पूरी ताकत से देंगे जवाब’, ट्रंप को किया चेतावन

तेहरान  ईरान और अमेरिका में जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बार फिर सख्त लहजे में चेतावनी दी है. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मह बाकर ग़ालिबाफ ने साफ कहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार जरूर है, लेकिन अगर जरा सी भी गलती हुई तो जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा।  टीवी पर रविवार को दिए गए संबोधन में गालिबाफ ने दो टूक कहा कि ईरान इस समय हाई अलर्ट पर है. उन्होंने कहा, "हम पूरी तरह तैयार हैं. अगर उन्होंने जरा सी भी गलती की, तो हम पूरी ताकत से जवाब देंगे." उनके इस बयान से साफ है कि एक तरफ वार्ता की बात हो रही है, लेकिन दूसरी तरफ सख्ती भी बरकरार है।  गालिबाफ ने यह भी दावा किया कि ईरान ने मैदान में अपनी ताकत दिखाई है और अब वह मजबूत स्थिति से बातचीत करना चाहता है. उन्होंने कहा कि इस बार ईरान की सैन्य क्षमता पहले के मुकाबले काफी बेहतर है और यह बात जंग के दौरान साफ नजर आई है।  हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका के पास संसाधन और ताकत ज्यादा है. गालिबाफ ने कहा, "हम सैन्य तौर पर अमेरिका से मजबूत नहीं हैं. उनके पास ज्यादा पैसा, ज्यादा हथियार और ज्यादा अनुभव है." लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अपनी रणनीति और तैयारी के दम पर हालात को अपने पक्ष में मोड़ा है।  गालिबाफ के मुताबिक, यह सीधी लड़ाई नहीं बल्कि अलग तरह की जंग है, जिसमें ईरान ने अपनी योजना के जरिए मजबूत देशों का मुकाबला किया. उन्होंने कहा कि विरोधी देशों के पास संसाधन तो थे, लेकिन उनकी रणनीति सही नहीं रही, जबकि ईरान ने बेहतर तरीके से काम किया।  गालिबाफ ने अमेरिका के फैसलों पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनके विरोधी ईरान को सही तरीके से समझ नहीं पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि "वे हमारे लोगों को लेकर भी गलत सोच रखते हैं और सैन्य फैसलों में भी गलती करते हैं।  इस दौरान उन्होंने इजरायल पर भी निशाना साधा. गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका भले ही "अमेरिका फर्स्ट" की बात करता हो, लेकिन असल में उसके फैसलों में इजरायल की भूमिका ज्यादा नजर आती है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका कई बार इजरायल से मिली जानकारी के आधार पर फैसले लेता है, जो सही नहीं होती।  इसके अलावा, गालिबाफ ने यह भी कहा कि विरोधी देशों ने ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली. उनके मुताबिक, ईरान को अस्थिर करने और उसकी तेल संपत्ति पर कब्जा करने की योजना भी नाकाम रही।  इस बीच, अमेरिका की तरफ से भी रुख सख्त बना हुआ है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि ईरान पर दबाव बनाकर रखा जाएगा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ब्लॉकेड जारी रहेगी और ईरानी जहाजों को उसके पोर्ट से निकलने नहीं दिया जाएगा. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश बातचीत की राह चुनते हैं या फिर टकराव और बढ़ता है। 

होर्मुज में भारतीय जहाज पर हमले के बीच भारत भेज रहा है 3000 जवान, 10 जेट और 5 वॉरशिप, अमेरिका-चीन की चिंता बढ़ी

नई दिल्ली भारत और रूस की दोस्‍ती दशकों पुरानी है. न जाने कितने झंझावात आए और गए, पर दोनों देशों की दोस्‍ती मजबूत पिलर की तरह अडिग रही. ईरान जंग और होर्मुज जंग के बीच अब दोनों परंपरागत मित्र देश ने एक ऐसा फैसला किया है, जिससे अमेरिका और चीन जैसे देशों के माथे पर पसीना आना तय है. भारत और रूस एक-दूसरे की जमीन पर सेना के जवानों की तैनाती करने पर सहमत हो गए हैं. तीन हजार जवानों के अलावा 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट और 5 युद्धपोत भी दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में तैनात कर सकेंगे. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, पूरी दुनिया सुरक्षा चिंता के अभूतपूर्व दौर से गुजर रही है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने इस चिंता को और भी बढ़ा दिया है, ऐसे में भारत और रूस की ओर से उठाया गया यह कदम अपने आप में ऐतिहासिक है. ऐसे वक्‍त में जब दुनियाभर में दशकों से चली आ रही सहयोग की भावना दरक रही है, दो मित्र देशों के बीच इस तरह की रक्षा साझेदारी परस्‍पर विश्‍वास का बेहतरीन उदाहरण है।  भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने वाले एक अहम समझौते के तहत अब दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर 3000 तक सैनिक, सीमित संख्या में नौसैनिक जहाज और सैन्य विमान तैनात कर सकेंगे. यह व्यवस्था ‘इंडो-रशियन रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट’ (RELOS) के तहत लागू हुई है, जिस पर फरवरी 2025 में भारत और रूस के बीच हस्ताक्षर हुए थे और यह इस साल 12 जनवरी से प्रभावी है. रूस ने इस समझौते को दिसंबर 2025 में औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी. रूस की आधिकारिक कानूनी इंफॉर्मेशन पर प्रकाशित जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में एक समय में अधिकतम पांच युद्धपोत, दस सैन्य विमान और 3,000 सैनिकों की तैनाती कर सकते हैं. यह तैनाती पांच वर्षों की अवधि के लिए होगी, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है. रूसी संसद की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के प्रथम उपाध्यक्ष व्याचेस्लाव निकोनोव (First Deputy Chairman of International Affairs Committee Vyacheslav Nikonov) ने इस प्रावधान की पुष्टि की है।  दोनों देशों को मिलेंगी कई सुविधाएं इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सैन्य सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. खासतौर पर भारत के पास मौजूद रूसी मूल के सैन्य उपकरणों की सर्विसिंग और लंबी अवधि की तैनाती में यह समझौता बेहद उपयोगी साबित होगा. इसके अलावा यह समझौता संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और मानवीय सहायता अभियानों को भी कवर करता है. RELOS समझौता केवल सैन्य तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लॉजिस्टिक सहयोग का भी विस्तृत प्रावधान है. इसके तहत मेजबान देश युद्धपोतों को बंदरगाह सेवाएं (Port Services), मरम्मत सुविधा, पानी, भोजन और अन्य तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराएगा. वहीं, सैन्य विमानों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल, उड़ान से जुड़ी सूचनाएं, नेविगेशन सिस्टम का उपयोग, पार्किंग और सुरक्षा जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. ईंधन, लुब्रिकेंट्स और तकनीकी मरम्मत जैसी सेवाएं भुगतान के आधार पर प्रदान की जाएंगी।  सामरिक साझेदारी को मजबूती समझौते के तहत दोनों देशों को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, जैसे एयरबेस और बंदरगाहों, तक पारस्परिक पहुंच भी मिलेगी. इससे भारत को रूस के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक क्षेत्र के ठिकानों तक पहुंच मिलेगी, जबकि रूस को भारत के सैन्य ढांचे का व्यापक उपयोग करने का अवसर मिलेगा. यह समझौता संयुक्त प्रशिक्षण, आपदा राहत और संभावित संयुक्त अभियानों के लिए भी मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे दोनों देशों की सामरिक साझेदारी और मजबूत होगी।