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BCCI का बड़ा ऐलान: IPL 2026 फेज-2 में 12 शहरों में खेले जाएंगे 50 मैच

नई  दिल्ली  भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के फुल शेड्यूल का ऐलान कर दिया है। बीसीसीआई ने इस महीने की शुरुआत में पहले चरण का कार्यक्रम घोषित किया था लेकिन गुरुवार को बोर्ड ने लीग स्टेज के बचे हुए मैचों के शेड्यूल का ऐलान कर दिया है। दूसरा चरण 13 अप्रैल से शुरू होगा और 24 मई तक खेला जाएगा। ये मैच 12 वेन्यू पर खेले जाएंगे। आईपीएल 2026 का 19वां सीजन शनिवार से शुरू होगा, जिसमें पहला मैच बेंगलुरु में मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच होगा। बीसीसीआई ने 11 मार्च को शुरुआती 20 मैचों का कार्यक्रम जारी किया था। पांच बार की दो चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस आईपीएल 2026 के दूसरे चरण में दो बार आमने-सामने होंगी, जो 13 अप्रैल से शुरू होगा। एसआरएच और आरआर इस फेज़ की शुरुआत हैदराबाद में करेंगे, जबकि आईपीएल की दो बड़ी टीमें सीएसके और एमआई 23 अप्रैल को मुंबई में और 2 मई को चेन्नई में भिड़ेंगी। टूर्नामेंट के इस फेज में आठ डबल-हेडर होंगे। आईपीएल के दूसरे चरण के दौरान मैच 13 अप्रैल से 24 मई तक भारत में 12 जगहों पर होंगे। इस दौरान 50 मैच खेले जाएंगे। दूसरे फेज के मैच बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, जयपुर, धर्मशाला, रायपुर और न्यू चंडीगढ़ में होंगे। जैसे ही टूर्नामेंट एक अहम फेज में आ रहा है, टीमें प्लेऑफ़ में जगह बनाने के लिए अलग-अलग जगहों पर मुकाबला करेंगी, और लीग स्टेज के दूसरे हिस्से में यह रेस और तेज होने की उम्मीद है। 13 अप्रैल, 2026 को एक्शन फिर से शुरू होगा, जिसमें हैदराबाद में सनराइजर्स हैदराबाद का मुकाबला राजस्थान रॉयल्स से होगा, जिससे रोमांचक मैचों का माहौल बनेगा। फैंस टूर्नामेंट के एक रोमांचक फेज़ की उम्मीद कर सकते हैं क्योंकि लीग स्टेज के आखिरी हफ़्तों से पहले टीमें जगह बनाने के लिए मुकाबला करेंगी। दूसरे फेज़ में आठ डबल-हेडर होंगे, जिसमें दोपहर के मैच 03:30 बजे से और शाम के मैच 07:30 बजे से शुरू होंगे। पंजाब किंग्स अपने होम मैच न्यू चंडीगढ़ और धर्मशाला में खेलेगी, जिसमें इस फेज के दौरान धर्मशाला में तीन मैच शामिल हैं। राजस्थान रॉयल्स जयपुर में चार होम गेम होस्ट करेगी, जबकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बेंगलुरु में तीन और रायपुर में दो होम मैच खेलेगी। प्लेऑफ़ के वेन्यू की घोषणा बाद में की जाएगी।

बीच उड़ान में तकनीकी गड़बड़ी, एयर इंडिया की लंदन फ्लाइट 7 घंटे बाद वापस

नई दिल्ली दिल्ली से लंदन के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की फ्लाइट AI 111 को गुरुवार दोपहर अचानक वापस दिल्ली लौटना पड़ा। यह विमान करीब 7 घंटे तक हवा में रहा और 3,300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुका था, जब तकनीकी खराबी के कारण इसे बीच रास्ते से मोड़ने का फैसला लिया गया। सऊदी अरब के ऊपर से मुड़ा विमान फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, एयरबस A350 विमान उस समय सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र के ऊपर था, जब पायलट को तकनीकी समस्या का पता चला। गौरतलब है कि ईरान युद्ध के कारण इस क्षेत्र का हवाई मार्ग पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। हजारों किलोमीटर का सफर हुआ बेकार विमान ने गुरुवार सुबह 6:13 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। लगभग 7 घंटे की लंबी उड़ान के बाद, दोपहर करीब 1:20 बजे यह वापस दिल्ली में लैंड हुआ। आमतौर पर सऊदी अरब से लंदन पहुँचने में भी 6-7 घंटे का समय लगता है, लेकिन सुरक्षा कारणों से एयरलाइन ने इसे आगे ले जाने के बजाय वापस बुलाना बेहतर समझा। एयर इंडिया का रुख एयर इंडिया ने अब तक इस 'यू-टर्न' के पीछे के सटीक तकनीकी कारण का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, माना जा रहा है कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह कदम उठाया गया। प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों और ठहरने की व्यवस्था की जा रही है।

बस हादसे पर सरकार सख्त, मृतकों के परिवारों को 5 लाख की आर्थिक सहायता घोषित

अमरावती आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम जिले में हुए भीषण बस हादसे के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों को 2-2 लाख रुपये देने का भी फैसला किया गया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। कैबिनेट ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। गौरतलब है कि गुरुवार सुबह मार्कापुरम जिले में एक निजी ट्रैवल्स की बस और टिपर ट्रक की टक्कर के बाद भीषण आग लग गई, जिसमें 14 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 28 लोग घायल हो गए। यह हादसा सुबह करीब 6 से 6:30 बजे के बीच रायवरम के पास एक स्टोन क्वारी के नजदीक हुआ। बताया जा रहा है कि बस तेलंगाना के जगतियाल से नेल्लोर जिले के कनीगिरी जा रही थी और इसमें 40 से ज्यादा यात्री सवार थे। हादसे के बाद बस और ट्रक दोनों पूरी तरह जलकर खाक हो गए। घायलों को ओंगोल और मार्कापुरम के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतकों और घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस और टिपर दोनों गलत दिशा में चल रहे थे। टक्कर के दौरान बस टिपर के डीजल टैंक से टकरा गई, जिससे आग लग गई। वहीं, बस चालक का कहना है कि स्टेयरिंग फंस जाने के कारण वह वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। आग बुझाने के लिए तीन दमकल गाड़ियों को लगाया गया। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए अधिकारियों से बातचीत की और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए। उन्होंने मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने के भी आदेश दिए। वहीं, राज्य के परिवहन मंत्री मणिपल्ली रामप्रसाद रेड्डी ने भी हादसे पर शोक जताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और घायलों को सर्वोत्तम उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का बड़ा बयान: देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की कोई कमी नहीं

नई दिल्ली ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच कुछ शहरों के पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ उमड़ती दिख रही है। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडरों में भी कथित संकट का दावा किया जा रहा है। इस बीच, इन दावों को सरकार ने गलत बताया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में है। सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स पर पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय ने जनता से अपील की है कि वे जान-बूझकर चलाए जा रहे एक शरारतपूर्ण और सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान से गुमराह न हों, जिसका उद्देश्य बेवजह घबराहट फैलाना है। 'पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं' भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से ज्यादा देशों को रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति करता है। क्योंकि भारत दुनिया के लिए एक शुद्ध निर्यातक है, इसलिए घरेलू पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित है। पूरे देश में एक लाख से ज्यादा खुदरा ईंधन आउटलेट खुले हैं और बिना किसी रुकावट के ईंधन दे रहे हैं। किसी भी आउटलेट से आपूर्ति की राशनिंग करने के लिए नहीं कहा गया है। पूरी दुनिया में, देश कीमतों में बढ़ोतरी, राशनिंग, ऑड-ईवन वाहन प्रतिबंधों और स्टेशनों को जबरन बंद करने जैसी स्थितियों का सामना कर रहे हैं। मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा, ''कुछ देशों ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। भारत को ऐसे किसी भी उपाय की जरूरत महसूस नहीं होती। जहां दूसरे देश राशनिंग कर रहे हैं, वहीं भारत में आपूर्ति की कोई कमी नहीं है। जहां कुछ चुनिंदा पंपों पर घबराहट में खरीदारी के इक्का-दुक्का मामले सामने आए, वे सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो के जरिए जान-बूझकर फैलाई गई गलत जानकारी के कारण हुए थे। ऐसे पंपों पर मांग में अचानक बढ़ोतरी के बावजूद, सभी उपभोक्ताओं को ईंधन दिया गया और तेल कंपनियों के डिपो आपूर्ति बढ़ाने के लिए पूरी रात काम करते रहे। तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को दिए जाने वाले क्रेडिट को पहले के एक दिन से बढ़ाकर 3 दिन से ज्यादा करने के कदम भी उठाए हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पंप मालिकों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) से जुड़ी समस्याओं के कारण किसी भी पंप पर पेट्रोल और डीजल की कोई कमी न हो।'' कच्चे तेल की आपूर्ति: कमी की पूरी भरपाई हो गई है मंत्रालय ने आगे कहा, ''होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति के बावजूद, भारत को आज दुनिया भर में अपने 41 से ज्यादा आपूर्तिकर्ताओं से पहले की तुलना में ज़्यादा कच्चा तेल मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उपलब्ध बड़ी मात्रा ने किसी भी रुकावट की पूरी भरपाई कर दी है। भारत की हर रिफाइनरी 100 फीसदी से ज्यादा क्षमता पर चल रही है। अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय तेल कंपनियों द्वारा पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।''

मिसाइल अटैक से दहला अबू धाबी, सड़क पर गिरे मलबे ने ली दो लोगों की जान

विदेश  अबू धाबी मीडिया ऑफिस के अनुसार गुरुवार को मिसाइल के मलबे से हुई घटना में मारे गए दो लोगों में एक भारतीय नागरिक शामिल है। इस घटना में तीन लोगों के घायल होने की जानकारी है। UAE में मरने वाले लोगों की संख्या अब 11 तक पहुंच गई है। मिसाइल के मलबे से एक भारतीय की मौत अबू धाबी मीडिया ऑफिस के X पर एक पोस्ट में, अधिकारियों ने बताया कि घायल हुए तीन लोग अमीराती, जॉर्डन और भारतीय नागरिक थे। बता दें कि युद्ध के मौजूदा दौर में खाड़ी क्षेत्र में नागरिकों पर हुए सबसे गंभीर हमलों में से एक इसे माना जा रहा है। जानकरी के अनुसार, यह घटना स्वेहान स्ट्रीट पर हुई। जब ईरानी हमले को UAE की हवाई सुरक्षा प्रणाली ने नाकाम कर दिया। इस दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोक लिया गया। रोकी गई मिसाइलों का मलबा जब सड़क पर गिरा तो उसकी चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और तीन घायल हो गए। UAE आने वाले खतरों के लिए पूरी तरह तैयार : रक्षा मंत्रालय UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बुधवार तक 166 लोग घायल हुए थे। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि हवाई सुरक्षा प्रणाली ने अब तक कुल 357 बैलिस्टिक मिसाइलों, 15 क्रूज़ मिसाइलों और 1,815 ड्रोन को रोका है। वहीं आगे आने वाले खतरों का मुकाबला करने के लिए वे लोग पूरी तरह से तैयार है। IRGC ने बड़े पैमाने पर की थी हमले की तैयारी युद्ध के 27वें दिन ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल से इजरायल पर हमला किया। जिसका निशाना इजरायल का मिलिट्री कमांड कंट्रोल सेंटर और साथ ही डेड सी के दक्षिण में उसके परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी इंडस्ट्रीज थी। यह हमला शुक्रवार की सुबह किया गया। इससे पहले मारे गए नौ लोगों में सशस्त्र बलों के तीन सदस्य शामिल हैं। UAE के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अब तक पाकिस्तानी, नेपाली, बांग्लादेशी और फिलिस्तीनी नागरिकता वाले छह लोग भी मारे गए हैं। इसके अलावा UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार बुधवार को हवाई सुरक्षा तंत्र ने 357 बैलिस्टिक मिसाइलों, 15 क्रूज मिसाइलों और 1,815 UAVs को निशाना बनाया था। बुधवार तक कुल 166 लोग घायल हुए थे। इसमें लोगों को मामूली से लेकर गंभीर चोटें लगी थी। घायलों में UAE, मिस्र, सूडान, इथियोपिया, फिलीपींस, पाकिस्तान, ईरान, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, अज़रबैजान, यमन, युगांडा, इरिट्रिया, लेबनान, अफगानिस्तान, बहरीन, कोमोरोस, तुर्की, इराक, नेपाल, नाइजीरिया, ओमान, जॉर्डन, फिलिस्तीन, घाना, इंडोनेशिया, स्वीडन और ट्यूनीशिया के नागरिक शामिल थे।  

इजरायल ने होर्मुज ब्लॉकेड के इंचार्ज ईरानी कमांडर तंगसीरी को किया मार, बंदर अब्बास पर हुई भीषण हवाई स्ट्राइक

तेहरान  मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक इजरायल ने एक बड़ा दावा किया है. एक इजरायली अधिकारी के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर अलीरेजा तंगसीरी की इजरायली हमले में मौत हो गई है. दावा किया जा रहा है कि यह हमला ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में हुआ।  तंगसीरी ईरान के ताकतवर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना शाखा का नेतृत्व कर रहे थे. एक अधिकारी ने यह भी दावा किया कि कमोडोर तंगसीरी होर्मुज को बंद कराने की निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।  तंगसीरी को होर्मुज में ईरान की आक्रामक समुद्री रणनीति का मुख्य सूत्रधार माना जाता था. वे अक्सर अमेरिका और इजरायल को समुद्र में कड़ी चुनौती देने वाले बयानों के लिए चर्चा में रहते थे. यदि उनके मारे जाने की पुष्टि होती है, तो यह ईरान के सैन्य ढांचे और विशेषकर उसकी नौसैनिक शक्ति के लिए बड़ा झटका होगा।  ट्रम्प ने फिर से अमेरिका की जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे ईरान से बातचीत चल रही है और ईरानी सरकार युद्धविराम चाहती है, लेकिन घरेलू दबाव के डर से खुलकर ऐसा नहीं कह पा रही। उन्होंने कहा, “हम इतनी बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं कि दुनिया ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। वे बातचीत कर रहे हैं और बहुत ज्यादा समझौता करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें डर है कि अगर उन्होंने यह बात कही तो उनके अपने लोग ही उन्हें मार सकते हैं। उन्हें हमसे भी डर है। इस बड़े दावे के बावजूद, तेहरान की ओर से अभी तक अपने शीर्ष कमांडर की स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. बंदर अब्बास ईरान का सबसे महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डा है, जहां से पूरे फारस की खाड़ी की निगरानी की जाती है।    आपको बता दें कि अभी तक इस जंग में अमेरिका और इजरायल ईरान के तीन दर्जन से अधिक प्रमुख सैन्य कमांडरों को निशाना बना चुके हैं।  इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुंच सकता है. ईरान द्वारा अपने शीर्ष सैन्य अधिकारी की मौत का बदला लेने के लिए जवाबी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है, जिससे खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षा संकट और गहरा सकता है।  कच्चे तेल की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल पहुंची ईरान जंग थमने की उम्मीद कम होती दिख रही है और इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 2% बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह बढ़त ऐसे समय आई है जब ईरान ने ट्रम्प के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। दरअसल, बुधवार को खबर आई थी कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर बातचीत चल रही है, जिससे कीमतों में थोड़ी गिरावट आई थी। लेकिन ईरान के इनकार के बाद फिर से बाजार में चिंता बढ़ गई है। ईरान जंग शुरू होने के बाद से अब तक तेल की कीमतें 40% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इसकी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में भारी कमी है, जिससे सप्लाई प्रभावित हो रही है। ईरान के विदेश मंत्री की खुली धमकी इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री ने खुली धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि जहां भी अमेरिकी हित दिखेंगे, वहां हमला किया जाएगा, और जो देश अमेरिका का साथ देगा, वो भी निशाने पर होगा. इस बयान ने पूरे इलाके में डर और तनाव और बढ़ा दिया है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अमेरिका को अपने तेल भंडार से तेल निकालना पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें झटके खा रही हैं।  बहरीन में ड्रोन हमला उधर बहरीन में ईरान के हमले से आग लगने की खबर आई, जबकि UAE ने भी पुष्टि की है कि वो ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को इंटरसेप्ट कर रहा है. वहीं लेबनान में हिजबुल्लाह ने इजरायली सैनिकों पर कई हमले करने का दावा किया है. इस बीच खबर आई थी कि अमेरिका का F-18 फाइटर जेट ईरान ने मार गिराया. हालांकि अमेरिका के सेंटकॉम ने इस दावे का फैक्ट चेक किया है और कहा कि ईरान ने किसी भी US फाइटर जेट को नहीं गिराया है, जो पहले दावा किया जा रहा था।   ट्रंप कर सकते हैं बड़ा ऐलान, इजराइल चिंतित ईरान युद्ध लाइव अपडेट्स: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शनिवार तक ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान कर सकते हैं. इजराइली मीडिया के अनुसार तेल अवीव को चिंता है कि अमेरिका अचानक एकतरफा तरीके से लड़ाई रोक सकता है ताकि बातचीत का रास्ता खुल सके. सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान कोई ‘बड़ी रियायत’ देता है तो ट्रंप अस्थायी रूप से युद्ध रोक सकते हैं. इसी बीच इजराइल ने संभावित सीजफायर से पहले सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है ताकि ज्यादा से ज्यादा बढ़त हासिल की जा सके. हालांकि अमेरिका-ईरान के बीच विस्तृत समझौते की संभावना अभी कम बताई जा रही है।  'इजराइल के साथ खड़े हैं', युगांडा का बड़ा बयान ईरान युद्ध लाइव अपडेट्स: मिडिल ईस्ट में जारी जंग पर अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं. युगांडा के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज जनरल मुहूजी काइनरुगाबा ने इजराइल का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि ‘इजराइल का अस्तित्व का अधिकार है और उस पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए.’ उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया इस जंग से थक चुकी है और अब इसे खत्म होना चाहिए. साथ ही चेतावनी दी कि अगर इजराइल को खत्म करने की बात की गई तो युगांडा इस युद्ध में शामिल हो सकता है। 

मणिपुर: उखरूल में सुरक्षाबलों ने ध्वस्त किए 6 अवैध बंकर, हिंसा रोकने के लिए की बड़ी तैनाती

 इंफाल मणिपुर के उखरूल जिले में बढ़ती हिंसा के बीच सुरक्षाबलों ने बड़ा अभियान चलाया है. पुलिस के मुताबिक, लितान इलाके में सक्रिय सशस्त्र समूहों द्वारा बनाए गए 6 अवैध बंकरों को ध्वस्त कर दिया गया है. ये बंकर हाल ही में हुई गोलीबारी में इस्तेमाल हो रहे थे, जिसमें कई लोग घायल हुए थे. इस कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव तो बना हुआ है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है।  गुरुवार को पुलिस ने जानकारी दी कि उखरूल जिले के लितान और मोंगकट चेपू अपर गांवों में सुरक्षाबलों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन के दौरान कुल छह अवैध बंकरों को ढहा दिया गया. ये बंकर सशस्त्र समूहों द्वारा बनाए गए थे और इन्हें रणनीतिक रूप से ऐसे स्थानों पर बनाया गया था जहां से हमले करना आसान हो. सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को इलाके में शांति बहाल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।  पुलिस के बयान के मुताबिक, यह ऑपरेशन  चलाया गया और यह कार्रवाई पिछले दिन शुरू हुए अभियान का ही हिस्सा थी. सुरक्षाबलों ने व्यवस्थित तरीके से बंकरों को चिन्हित किया और फिर उन्हें ध्वस्त किया. इन बंकरों का इस्तेमाल हाल ही में हुई गोलीबारी के दौरान किया गया था, जिससे इलाके में भय का माहौल बना हुआ था. इस कार्रवाई के बाद कई बंकर अब पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं।  लितान इलाके में हाल ही में सशस्त्र समूहों के बीच हुई गोलीबारी में कम से कम तीन लोग घायल हो गए थे. यह घटना स्थानीय लोगों के लिए काफी डरावनी रही, क्योंकि गोलीबारी रिहायशी इलाकों के आसपास हो रही थी. सुरक्षाबलों ने इस घटना के बाद तुरंत इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी थी और लगातार निगरानी रखी जा रही थी।  यह पूरा घटनाक्रम लितान सारेइखोंग इलाके में कुकी और तंगखुल नागा समुदायों के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है. फरवरी में दोनों समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 30 से ज्यादा घरों को आग के हवाले कर दिया गया था. इस घटना के बाद से ही इलाके में तनाव बना हुआ है और छोटी-छोटी घटनाएं भी बड़े संघर्ष का रूप ले रही हैं।  फरवरी की घटना के बाद आसपास के गांवों जैसे मोंगकोट चेपू और शार्काफुंग में भी कई बार गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं. इन घटनाओं ने पूरे इलाके को संवेदनशील बना दिया है. लोग डर के साये में जी रहे हैं और रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है. सुरक्षाबलों की लगातार तैनाती के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।  हाल ही में हुई घटनाओं में मंगलवार को कामजोंग जिले के शार्काफुंग इलाके में फायरिंग के दौरान तंगखुल नागा समुदाय के दो लोग घायल हो गए. वहीं सोमवार को मोंगकोट चेपू में एक कुकी महिला भी गोलीबारी में घायल हुई थी. ये घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि इलाके में तनाव अभी भी चरम पर है और किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं।  पुलिस ने बताया कि सुरक्षाबल अब भी इलाके में सर्च ऑपरेशन और एरिया डोमिनेशन अभियान चला रहे हैं. संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके. अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर और कड़े कदम उठाए जाएंगे। 

वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए सरकार का तोहफा, ट्रेन के AC कोच में मुफ्त सफर की सुविधा

नई दिल्ली देश के वीर सैनिकों और वीरता पुरस्कार विजेताओं के सम्मान में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने घोषणा की है कि अब सेना के वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले जवानों और उनके परिवारों को भारतीय रेलवे की ट्रेनों में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी. रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह रियायत थल सेना, नौसेना और वायु सेना के उन बहादुर जवानों को दी जाएगी, जिन्हें सेना मेडल, नौसेना मेडल और वायु सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया है।  किन सुविधाओं का मिलेगा लाभ? सरकार के इस आदेश के तहत पात्र लाभार्थियों को फर्स्ट क्लास, 2AC और AC चेयर कार में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी. खास बात यह है कि इस सुविधा के साथ एक साथी को भी मुफ्त यात्रा की अनुमति होगी।  परिवार को भी मिलेगा लाभ यह सुविधा सिर्फ पुरस्कार विजेताओं तक सीमित नहीं है. आदेश के मुताबिक यदि पुरस्कार विजेता का निधन हो चुका है, तो उनके जीवनसाथी (पति/पत्नी) को पुनर्विवाह तक यह सुविधा मिलती रहेगी. अविवाहित मरणोपरांत पुरस्कार विजेताओं के माता-पिता भी इस सुविधा के पात्र होंगे. इस फैसले को सैनिकों के प्रति सरकार के सम्मान और आभार के रूप में देखा जा रहा है।  सरकार का मानना है कि देश की रक्षा में असाधारण साहस दिखाने वाले जवानों को विशेष सम्मान मिलना चाहिए. रेलवे यात्रा में यह छूट न केवल उन्हें सुविधा देगी, बल्कि उनके योगदान के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता भी दर्शाएगी. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की योजनाएं सेना के मनोबल को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इससे जवानों और उनके परिवारों को यह संदेश जाता है कि देश उनके बलिदान और सेवा को हमेशा याद रखता है।  केंद्र सरकार का यह निर्णय उन वीरों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाई. अब वे और उनके परिवार इंडियन रेलवे की ट्रेनों में आरामदायक AC कोच में बिना किसी शुल्क के यात्रा कर सकेंगे। 

पीएम मोदी बने दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता, ट्रंप का रैंक रहा काफी नीचे; अमेरिकी सर्वे में सफलता

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क  अमेरिका की डेटा एनालिटिक्स फर्म 'मॉर्निंग कंसल्ट' से पीएम मोदी के खुशखबरी सामने आई है। हालिया वैश्विक सर्वे के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता बनकर उभरे हैं। उन्हें 68 प्रतिशत की जबरदस्त अप्रूवल रेटिंग के साथ पहला स्थान मिला है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महज 39 फीसदी वोट के साथ काफी पीछे हैं। 'ग्लोबल लीडर अप्रूवल रेटिंग ट्रैकर' का हिस्सा यह डेटा, पीएम मोदी की लगातार बनी हुई घरेलू लोकप्रियता और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को दिखाता है। इस डेटा के आधार पर पीएम मोदी दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के अपने समकक्षों से काफी आगे हैं। इस सर्वे में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, दोनों को 62 प्रतिशत की अप्रूवल रेटिंग के साथ दूसरे स्थान पर रखा गया है। यह ताजा अप्रूवल रेटिंग 2 से 8 मार्च, 2026 के बीच जमा किए गए डेटा पर आधारित हैं। ये रेटिंग सर्वे में शामिल हर देश के वयस्कों के विचारों के पिछले सात दिनों के साधारण मूविंग एवरेज को दर्शाती हैं। इस ट्रैकर से पीएम मोदी की स्थिति और अन्य प्रमुख पश्चिमी नेताओं की स्थिति के बीच एक बड़ा अंतर सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 39 प्रतिशत है, जबकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की अप्रूवल रेटिंग 24 प्रतिशत रही। इस सूची में और नीचे देखें तो, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस सर्वे में सबसे कम रेटिंग वाले नेताओं में से एक बने हुए हैं। उनकी अप्रूवल रेटिंग 17 प्रतिशत और डिसअप्रूवल रेटिंग 75 प्रतिशत है। मॉर्निंग कंसल्ट ने बताया कि ये ताजा रेटिंग्स सर्वे किए गए हर देश के वयस्कों के विचारों के पिछले सात दिनों के सिंपल मूविंग एवरेज को दिखाती हैं। पीएम मोदी की नेट अप्रूवल रेटिंग काफी ज्यादा बनी हुई है। सिर्फ 26 प्रतिशत लोगों ने ही असहमति जताई है, जो कि इस ट्रैकर में शामिल ज्यादातर दूसरे नेताओं के मुकाबले काफी कम है। यह लगातार बढ़त जुलाई 2025 की पिछली रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें भी प्रधानमंत्री को दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता के तौर पर 75 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग के साथ मजबूत स्थिति में दिखाया गया था। उस पिछली रिपोर्ट में, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग 59 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग के साथ दूसरे नंबर पर थे, जबकि अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली 57 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर थे।  

ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप का कड़ा आदेश: ‘जल्द निपटाओ, और भी काम हैं

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के साथ जारी युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहते और आने वाले कुछ हफ्तों में इसे खत्म करने की कोशिश में हैं. ट्रंप आने वाले कुछ हफ्तों में इस संघर्ष पर पूर्णविराम लगाना चाहते हैं ताकि वे अपने अन्य घरेलू और राजनीतिक एजेंडों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।  Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का मानना है कि युद्ध अपने अंतिम चरण में है और उन्होंने अपने सहयोगियों को सार्वजनिक रूप से बताए गए 4-6 हफ्तों के टाइमलाइन पर टिके रहने के निर्देश दिए हैं. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने मई के मध्य में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में एक शिखर सम्मेलन की योजना बनाई है. उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक के शुरू होने से पहले ईरान युद्ध समाप्त हो जाएगा।  समस्या यह है कि ट्रंप के पास युद्ध समाप्त करने के आसान विकल्प नहीं हैं और शांति वार्ता अभी शुरुआती चरण में है. बाहरी राजनीतिक सहयोगियों के साथ बातचीत के दौरान उनका ध्यान कई बार अन्य मुद्दों पर भी गया, जिनमें आने वाले मध्यावधि चुनाव, हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन एजेंट भेजने का उनका फैसला और मतदाता पात्रता नियमों को कड़ा करने वाले कानून को कांग्रेस से पारित कराने की रणनीतियां शामिल हैं।  एक ओर तो ट्रंप युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने मध्यपूर्व में अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दबाव भी बढ़ाया है. मध्यस्थ देशों के जरिए शुरुआती बातचीत शुरू हुई है, लेकिन अभी शांति वार्ता शुरुआती दौर में ही है और कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।   तेल और रणनीति रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सलाहकारों के सामने ये बात रखी कि युद्ध खत्म करने के किसी समझौते के तहत अमेरिका को ईरान के तेल तक पहुंच मिल सकती है. हालांकि, इस पर अभी कोई ठोस योजना नहीं बनी है।  ट्रंप जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिक भेजने के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं, लेकिन इससे युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिसे वह टालना चाहते हैं. अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल और 13 की मौत हो चुकी है, जो उनकी चिंता का एक बड़ा कारण है.ट्रंप के करीबी सहयोगियों में इस बात को लेकर मतभेद है कि आगे क्या रणनीति होनी चाहिए. कुछ लोग कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, जबकि कुछ सख्त सैन्य कार्रवाई और यहां तक कि ईरान में शासन परिवर्तन की बात कर रहे हैं।  अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने का आदेश देने को तैयार हैं, लेकिन ऐसा करने से हिचक रहे हैं क्योंकि इससे युद्ध जल्दी खत्म करने का उनका लक्ष्य प्रभावित हो सकता है. उन्हें चिंता है कि यदि युद्ध जारी रहा तो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने या घायल होने की संख्या बढ़ सकती है. अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और 13 की मौत हो चुकी है।  वैश्विक असर और जोखिम यदि जल्द समझौता नहीं होता, तो होर्मुज में रुकावट जारी रह सकती है, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित होगा. वहीं इजरायल और खाड़ी देशों की भूमिका भी इस संघर्ष को और जटिल बना सकती है।  इस युद्ध का असर अमेरिकी राजनीति पर भी दिख रहा है. आगामी चुनावों और बढ़ती महंगाई के बीच ट्रंप पर दबाव है. अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है. हाल ही में फ्लोरिडा की एक महत्वपूर्ण सीट डेमोक्रेट्स के खाते में जाने से हड़कंप मचा है. विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई और जीवनयापन की लागत आगामी चुनावों में ट्रंप की पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।  रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप खुद भी मानते हैं कि युद्ध उनके अन्य एजेंडे से ध्यान भटका रहा है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ता, तो अमेरिका पहले से भी ज्यादा कड़ा हमला कर सकता है।