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लॉकडाउन पर अफवाहों का सरकार ने किया खंडन, हरदीप पुरी ने कहा- कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

नई दिल्ली देश में एक बार फिर लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में लॉकडाउन लगाने की सारे बातें सिर्फ अफवाहें हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिति जरूर अनिश्चित बनी हुई है, लेकिन सरकार हर परिस्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरी कदम उठा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे समय में ज़रूरी है कि हम सभी शांत, ज़िम्मेदार और एकजुट रहें। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति में अफवाह फैलाना और बेवजह डर का माहौल बनाना गैर-जिम्मेदाराना और हानिकारक है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। लॉकडाउन को लेकर अफवाहों का दौर देश में एक बार फिर लॉकडाउन को लेकर अफवाहों का दौर शुरू हो गया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, सप्लाई चेन को लेकर चिंताओं और कुछ देशों में उभरते संकट के कारण लोगों में आशंका का माहौल बन रहा है, जिसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। इस कारण सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर लगातार ऐसे संदेश वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार जल्द ही लॉकडाउन लगा सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सरकार ने जारी किया स्पष्टीकरण केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने स्पष्ट किया है कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और ऐसी सारी बातें निराधार व भ्रामक हैं । उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिति जरूर अनिश्चित बनी हुई है लेकिन सरकार हर परिस्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, सप्लाई चेन और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश में ईंधन, ऊर्जा और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। उन्होंने कहा कि इस तरह की भ्रामक खबरें फैलाना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे बाजार और समाज दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने अपील की है कि ऐसे समय में ज़रूरी है कि हम सभी शांत, ज़िम्मेदार और एकजुट रहें।

नेपाल में बालेन युग की शुरुआत, बालेंद्र शाह ने ’12:34′ बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ ली

काठमांडू  आज, 27 मार्च 2026 से नेपाल में 'बालेन' युग की शुरुआत हो गई है। काठमांडू के पूर्व मेयर और 'रैपर' से राजनेता बने बालेन शाह (बालेंद्र शाह) ने नेपाल के 40वें और देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। 35 वर्षीय बालेन ने अपनी पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाकर नेपाल के पुराने राजनीतिक घरानों और पारंपरिक दलों के वर्चस्व को खत्म कर दिया था। शपथ ग्रहण समारोह और '12:34' का शुभ मुहूर्त राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल द्वारा काठमांडू स्थित राष्ट्रपति भवन 'शीतल निवास' में बालेन शाह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण के लिए आज दोपहर 12:34 बजे का समय चुना गया था। हिंदू ज्योतिष और पंडितों के अनुसार यह समय बेहद शुभ माना गया और साथ ही यह '1-2-3-4' का एक अनूठा अंकगणितीय पैटर्न भी बनाता है। इसके बाद वह दोपहर 14:15 बजे (14-15 पैटर्न) अपना कार्यभार संभालेंगे। बालेन शाह नेपाल के शीर्ष कार्यकारी पद पर पहुंचने वाले मधेश मूल के पहले व्यक्ति भी बन गए हैं। इस समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ-साथ बौद्ध लामाओं की प्रार्थनाएं भी शामिल की गई हैं। प्रचंड बहुमत और दिग्गज नेताओं की हार बालेन की 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' (RSP) ने हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 182 सीटों पर क्लीन स्वीप करते हुए दो-तिहाई के करीब बहुमत हासिल किया है। सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब बालेन शाह ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से नेपाल के चार बार के प्रधानमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी (UML) के दिग्गज नेता के.पी. शर्मा ओली को भारी अंतर से हरा दिया। 'Gen Z' का आंदोलन और बदलाव की लहर नेपाल में सितंबर 2025 में आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर युवाओं (Gen Z) ने एक बड़ा और हिंसक आंदोलन किया था। इसके बाद हुए इस पहले आम चुनाव में युवाओं ने पुरानी राजनीतिक पार्टियों को पूरी तरह से नकार दिया। अपनी शपथ से ठीक पहले बालेन ने देश में एकता का संदेश देने के लिए 'जय महाकाली' नामक एक रैप सॉन्ग का नया वीडियो जारी किया। सोशल मीडिया पर आते ही इसे कुछ ही घंटों में लाखों व्यूज मिल गए। बालेन शाह का सफर: इंजीनियरिंग से सत्ता के शीर्ष तक 27 अप्रैल 1990 को जन्मे बालेन पेशे से एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं। राजनीति में आने से पहले वे युवाओं के बीच एक लोकप्रिय रैपर के रूप में मशहूर थे, जो अपने गानों के जरिए सिस्टम की कमियों पर निशाना साधते थे। मई 2022 में उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता था। अपने कार्यकाल के दौरान कड़े फैसलों और अतिक्रमण हटाने की मुहिम से उन्होंने 'सुधारक' की छवि बनाई। जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री पद की रेस में उतरने के लिए उन्होंने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया था।

JKविधानसभा में हिंसा, ‘इजरायल मुर्दाबाद’ के नारे, BJP और कांग्रेस के विधायकों के बीच झड़प

श्रीनगर  जम्मू कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार, 27 मार्च को बजट सत्र की शुरुआत में ही बड़ा हंगामा शुरू हो गया. उमर अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस (NC) और महबूबा मुफ्ती की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के विधायकों ने सदन में 'इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगाए. इसी के साथ, ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई के बैनर भी लहराए गए. वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायकों ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के बैनर लहराए।  विधानसभा के वेल में विधायकों ने खामेनेई की तस्वीर लेकर प्रदर्शन किया. दूसरी ओर बीजेपी ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाए. हंगामे के बीच में 'अमेरिका हाय-हाय' का शोर भी सुनाई दिया।  काले कपड़े पहनकर आए विधायक नेशनल कांफ्रेंस विधायक तनवीर सादिक ने काले कपड़े पहने हैं और माथे पर कुछ लिखा हुआ है. विधायक ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के खिलाफ हैं. इसके अलावा, बीजेपी विधायक ने 'जम्मू को इंसाफ दो' के नारे लगाए और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर मांग रखी।  आधे घंटे के लिए सदन स्थगित, बुलाने पड़े मार्शल सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक हाथ में पोस्टर लिए नारेबाजी करते नजर आए. स्थिति इतनी बेकाबू हो गई थी कि मजबूरन 20-25 मिनट की कार्यवाही के बाद ही आधे घंटे के लिए सदन स्थगित करना पड़ा. सदन दोबारा से 11.00 बजे शुरू होगा।  हंगामे की शुरुआत इजरायल के खिलाफ नारेबाजी के साथ हुई. सत्ता पक्ष (एनसी, कांग्रेस) के विधायक, पीडीपी और कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की. हंगामा इतना बढ़ गया मार्शल तैनात करने पड़े।  नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी के लगे नारे सदन में हंगामे के दौरान बीजेपी और कांग्रेस विधायक आमने सामने आ गए. दोनों दलों के विधायकों की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नारे लगाए जाने लगे. मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया. अगर मार्शल न आते और बीच-बचाव न कराते तो बात हाथापाई तक पहुंच सकती थी। 

चंडीगढ़ एयर शो में तिरंगा आसमान में, लोगों में जोश; सुखना लेक पर एंट्री केवल प्री-बुकिंग वालों के लिए

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में सुखना लेक पर 27 मार्च से दो दिवसीय एयर शो की शुरुआत हो गई है, जिसमें भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने आसमान में शानदार करतब दिखाए। कार्यक्रम के दौरान फाइटर जेट्स ने आकाश में तिरंगा, डायमंड और अंग्रेजी अक्षर ‘A’ की आकृतियां बनाकर दर्शकों को रोमांचित किया। शो देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर बिना प्री-बुकिंग एंट्री पर रोक लगाई है। इस दौरान सुखना लेक को आम लोगों के लिए बंद रखा गया है और मुख्य अतिथि के रूप में चीफ सेक्रेटरी राजेश प्रसाद भी कार्यक्रम में शामिल हुए। आसमान में दिखा वायुसेना का दम एयर शो के दौरान सूर्यकिरण टीम ने समन्वय और सटीकता के साथ कई हवाई करतब पेश किए। फाइटर जेट्स ने एक साथ उड़ान भरते हुए आकाश में अलग-अलग आकृतियां बनाई, जिसमें डायमंड फॉर्मेशन और अंग्रेजी अक्षर ‘A’ प्रमुख रहे। सबसे खास पल तब रहा जब जेट्स ने तिरंगा बनाकर देशभक्ति का संदेश दिया, जिसे देखकर दर्शकों ने उत्साह के साथ तालियां बजाईं। भारी भीड़ और सख्त सुरक्षा सुखना लेक पर आयोजित इस शो को देखने के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया था कि केवल प्री-बुकिंग वाले लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए NDRF की टीम को भी तैनात किया गया है, जो आसमान में उड़ने वाले पक्षियों पर नजर बनाए हुए है, ताकि शो के दौरान किसी तरह की बाधा न आए। शो देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे। मुख्य अतिथि के तौर पर चीफ सेक्रेटरी राजेश प्रसाद शामिल हुए। एयर शो में बिना प्री-बुकिंग के एंट्री नहीं दी गई। इस दौरान लेक आम लोगों के लिए बंद कर दी गई है। NDRF की टीम आसमान में उडने वाले पक्षियों पर नजर रखी। इस शो में दो पायलट चंडीगढ़ के विंग कमांडर तेजेश्वर सिंह और दिवाकर शर्मा भी शामिल हैं। इसके साथ ही आर्मी पब्लिक स्कूल चंडी मंदिर के 2005 बैच के छात्र रहे विंग कमांडर तेजेश्वर सिंह भी सूर्य किरण की एरोबैटिक टीम का हिस्सा रहे और इस टीम को लीड किया। इनके साथ ही फ्लाइट लेफ्टिनेंट कमल संधू भी टीम का हिस्सा रहे। वहीं इससे पहले सुबह से ही बूंदाबांदी हुई। हालांकि इससे शो पर कोई असर नहीं पड़ा। प्रशासन की तरफ से शो में आने वाले लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था सुखना लेक पर खुले में की गई है। स्थानीय पायलटों की खास भागीदारी इस एयर शो में चंडीगढ़ के दो पायलटों की भागीदारी खास आकर्षण का केंद्र रही। विंग कमांडर तेजेश्वर सिंह और दिवाकर शर्मा इस टीम का हिस्सा हैं। तेजेश्वर सिंह, जो आर्मी पब्लिक स्कूल चंडी मंदिर के 2005 बैच के छात्र रह चुके हैं, इस एरोबैटिक टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ फ्लाइट लेफ्टिनेंट कमल संधू भी टीम में शामिल हैं, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से दर्शकों को प्रभावित किया। मौसम का हल्का असर, शो जारी कार्यक्रम शुरू होने से पहले सुबह हल्की बूंदाबांदी हुई थी, जिससे कुछ समय के लिए मौसम को लेकर आशंका बनी रही। हालांकि इसका एयर शो पर कोई खास असर नहीं पड़ा और सभी निर्धारित कार्यक्रम समय पर पूरे किए गए। दर्शकों के लिए बैठने की व्यवस्था खुले में की गई थी, जहां से उन्होंने पूरे शो का आनंद लिया। दो दिन तक बंद रहेगा सुखना लेक एयर शो के चलते सुखना लेक को दो दिनों के लिए आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील की है और आयोजन के सफल संचालन के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। शो के दौरान सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पेट्रोल 13 रुपये सस्ता, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म: सरकार ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके कारण उपजे ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दरअसल वित्त मंत्रालय द्वारा 26 मार्च को जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला किया है। सरकार के इस कदम के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी, जो पहले 13 रुपये थी, वो अब घटकर 3 रुपये रह गई है और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी, जो पहले 10 रुपये थी, वो अब शून्य हो गई है। तेल कंपनियों को सरकार ने दी बड़ी राहत यह कदम पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों से जूझ रही तेल विपणन कंपनियों, एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी, को राहत देने के लिए उठाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू होगी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सरकार ने इस संकट के बावजूद अभी तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हैं, जिससे देश में ईंधन विपणन कंपनियां दबाव में थीं। तेल विपणन कंपनियों का घाटा कम होगा रेटिंग एजेंसी ICRA ने गुरुवार को जारी नोट में कहा कि यदि कच्चे तेल का औसत मूल्य 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक रहता है, तो ईंधन कंपनियों को पेट्रोल पर 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 14 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो सकता है।नइस महीने की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो बाद में घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल रह गईं। दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का करीब आधा आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। संघर्ष बढ़ने के साथ ईरान ने इस जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया, जिससे टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। नायरा एनर्जी ने कीमतें बढ़ाईं नायरा एनर्जी, जो देश के 1,02,075 पेट्रोल पंपों में से 6,967 का संचालन करती है, ने बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने का फैसला किया है। उसके पंपों पर पेट्रोल 100.71 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.31 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी की संयुक्त ईंधन रिटेल कंपनी जियो-बीपी, जिसके 2,185 आउटलेट हैं, ने भारी नुकसान के बावजूद अभी तक कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है। सरकारी तेल कंपनियां, जो बाजार के करीब 90 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखती हैं, फिलहाल कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं। क्या होता है उत्पाद शुल्क पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक टैक्स है। इसे लगाने के पीछे मुख्य उद्देश्य राजस्व इकट्ठा करना है, जिसका उपयोग देश के विकास, बुनियादी ढांचे , रक्षा और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है। क्या सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल?     जहां एक तरफ अब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी को कम कर दिया है, तो ऐसे में ये सवाल चर्चा में आना लाजमी है कि क्या पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे?     जिस तरह से पेट्रोल में 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम की गई है और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को जीरो कर दिया है, तो इससे गुंजाइश बनती है कि पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो     माना तो जा रहा है कि एक्साइज ड्यूटी कम होने से इसका सीधा फायदा आम आदमी को मिल सकता है। पर इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि जिस तरह से देश में मौजूदा हालात चल रहे हैं उससे तेल कंपनियां इस एक्साइज ड्यूटी के कम होने का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की महंगाई को संतुलित करने में भी कर सकती है।     हालांकि, ये जरूर माना जा रहा है कि जो लोगों को लग रहा था कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, उसके लिए जरूर माना जा रहा है कि फिलहाल ऐसा होना मुश्किल नजर आ रहा है। वहीं, पेट्रोल-डीजल के दाम कम प्रति लीटर कम होंगे या ऐसे ही बने रहेंगे? इसके लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।

जग वसंत वेसल ने 42 हजार टन LPG के साथ होर्मुज से गुजरात की ओर किया रवाना

 अहमदाबाद एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. 'जग वसंत' नाम का वेसल (टैंकर) कांडला पोर्ट पहुंच चुका है. यह होर्मुज के रास्ते गुजरात पहुंचा है. इस जहाज में 42 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा LPG गैस लाई गई है।  यह खेप ठीक उसी समय आई है जब दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई को लेकर काफी अनिश्चितता चल रही है. कांडला पोर्ट अथॉरिटी ने बताया कि आज ही इस गैस को मिड-सी ट्रांसफर के जरिए उतारा जाएगा।  मिड-सी ट्रांसफर का मतलब है कि समुद्र में ही जहाज से गैस को दूसरे सिस्टम या पोर्ट की सुविधाओं तक पहुंचा दिया जाता है. इससे गैस तेजी से उतर जाती है, समय बचता है और सप्लाई भी जल्दी शुरू हो जाती है।  इस बड़ी खेप से देश में LPG गैस की उपलब्धता और मजबूत होने की उम्मीद है. खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा सप्लाई को लेकर थोड़ी अस्थिरता बनी हुई है। कांडला पोर्ट भारत के सबसे बड़े ऊर्जा आयात बंदरगाहों में से एक है. यहां से LPG गैस देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जाती है. इस खेप के आने से आने वाले दिनों में घरेलू LPG सप्लाई को स्थिर और सुचारू रखने में मदद मिलेगी।  बता दें कि ईरान की ओर से कुछ ही मुल्कों को होर्मुज के रास्ते से जहाज लेकर जाने की अनुमति मिली है. भारत उन देशों में शामिल है जिसे ईरान ने रास्ते का इस्तेमाल करने की इजाजत दी है।  अब तक कितने टैंकर भारत पहुंचे? ईरान-अमेरिका तनाव से होर्मुज रास्ता बाधित होने के बावजूद भारत के चार महत्वपूर्ण तेल टैंकर सुरक्षित पहुंच चुके हैं. ईरान द्वारा विशेष अनुमति मिलने से ये जहाज पार हो सके।  MT शिवालिक (LPG) 16 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा, जबकि MT नंदा देवी (LPG) 17 मार्च को कांडला में उतरा. जग लाडकी (81,000 टन कच्चा तेल) 18 मार्च मुंद्रा आया. लाइबेरिया फ्लैग Shenlong सऊदी क्रूड लेकर 11 मार्च के आसपास मुंबई पहुंचा। युद्ध में क्या हैं ताजा अपडेट? युद्ध का 28 दिन बीत चुका है. शुक्रवार को अमेरिका-इजरायल का ईरान के साथ युद्ध का 29वां दिन है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह फिलहाल अगले दस दिनों तक ईरान के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला नहीं करेंगे। 

होर्मुज स्ट्रेट का संकट समाप्त, तेल-गैस वाले देशों का गठबंधन, अब बिना दिक्कत जलेंगे चूल्हे

 मुंबई  ईरान जंग ने एक बार फिर से फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल, डीजल आदि) बेस्‍ड डेवलपमेंट मॉडल की खामियों को उजागर कर दिया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का तीन तिहाई आयात करता है. अरब देश एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत हैं. तेल के साथ ही गैस का भी आयात किया जाता है. इनसे ही भारत में गाड़ियां सड़कों पर सरपट भागती हैं और घरों में चूल्‍हे जलते हैं. ऐसे में खाड़ी देश में किसी भी तरह का संकट आने पर उसका सीधा असर भारत भी पड़ता है. अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान अटैक करने के बाद ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है. एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले होर्मुज स्‍ट्रेट पर भी इसका व्‍यापक असर पड़ा है. इससे तेल और गैस से लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्‍य काफी अहम है, क्‍योंकि इसी रूट से तेल और गैस के अधिकांश शिपमेंट आते हैं ।  अब इस निर्भरता को कम करने की दिशा में अहम और निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया गया है. भारत अगले 9 से 10 साल में नॉन-फॉसिल फ्यूल बेस्‍ड पावर कैपेसिटी को कुल उत्‍पादन का 60 फीसद करने का लक्ष्‍य रखा है. इस तरह फॉसिल फ्यूल यानी तेल आधारित ऊर्जा जरूरतों को तकरीबन एक तिहाई तक सीमित कर दिया जाएगा. ऐसे में यदि होर्मुज जैसे संकट की स्थिति में भी देश की ऊर्जा जरूरतों पर ज्‍यादा असर नहीं पड़ेगा।  अब समझ‍िए कि होर्मुज स्‍ट्रेट पर निर्भरता आने वाले कुछ सालों में कैसे खत्‍म होगी. दरअसल, वैश्विक जलवायु संकट के बीच भारत ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को और मजबूत करते हुए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC) के तहत 2031-2035 अवधि के लिए देश के अपडेटेड राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी. इस नए लक्ष्य के तहत भारत ने 2005 के स्तर के मुकाबले अपनी अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी लाने और 2035 तक कुल बिजली क्षमता में 60% हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधनों से हासिल करने का लक्ष्य रखा है. यह कदम पेरिस एग्रीमेंट (Paris Agreement) के तहत भारत की जिम्मेदारियों का हिस्सा है और इसे देश की तीसरी NDC प्रस्तुति माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि यह लक्ष्य केवल महत्वाकांक्षी नहीं, बल्कि पहले से हासिल प्रगति पर आधारित है।  संकट से सीख, टार्गेट से आगे की बात सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत ने साल 2015 में तय किए गए अपने पूर्व NDC लक्ष्यों (33-35% उत्सर्जन तीव्रता में कमी और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता) को समय से काफी पहले ही हासिल कर लिया था. इसी आधार पर अब नए और अधिक कड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. अपडेटेड NDC समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों (CBDR-RC) के सिद्धांतों के अनुरूप है और ‘विकसित भारत 2047’ की व्यापक परिकल्पना को भी मजबूती देता है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता के बीच कई देश अपने जलवायु लक्ष्यों से पीछे हटते दिख रहे हैं. ऐसे समय में भारत का यह कदम वैश्विक मंच पर एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. ऊर्जा और जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने इस बार जलवायु महत्वाकांक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है. दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आकलनों के अनुसार 2035-36 तक भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता लगभग 70% तक पहुंच सकती है, लेकिन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तौर पर 60% का ही लक्ष्य रखा है, जिससे यह लक्ष्य यथार्थवादी और विश्वसनीय बना रहे।  ऐसे बनेगी बात सरकार ने स्पष्ट किया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई मौजूदा और नई नीतियों का सहारा लिया जाएगा. इनमें ग्रीन एनर्जी का विस्तार (ग्रीन हाइड्रोजन मिशन) बैटरी स्टोरेज, स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाएं और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसके अलावा International Solar Alliance जैसे वैश्विक सहयोग मंच और राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजना (NAPCC) के तहत चल रहे कार्यक्रम भी इन लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे. सरकार कार्बन कैप्चर तकनीकों और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. नई NDC केवल उत्सर्जन में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अनुकूलन उपायों पर भी खास ध्यान दिया गया है. इसमें तटीय सुरक्षा, ग्लेशियर निगरानी, हीट एक्शन प्लान और आपदा लचीलापन शामिल हैं. सरकार ने Lifestyle for Environment (LiFE) पहल के जरिए आम नागरिकों को भी जलवायु कार्रवाई में शामिल करने का लक्ष्य रखा है, ताकि रोजमर्रा की जीवनशैली में पर्यावरण अनुकूल बदलाव लाए जा सकें। 

सरकार का नया नियम: CCTV कैमरे से हो रही थी जासूसी, डेटा पाकिस्तान तक पहुंच रहा था

नई दिल्ली भारत सरकार CCTV कैमरों को लेकर सख्त हो गई है.  देश में सीसीटीवी कैमरों को लेकर बड़ा खतरा सामने आया है. अब यह सिर्फ निगरानी का मामला नहीं रहा, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा बन गया है।  हाल ही में जांच एजेंसियों ने एक नेटवर्क पकड़ा है, जिसमें सीसीटीवी कैमरों से रिकॉर्ड डेटा पाकिस्तान भेजा जा रहा था. कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है. सरकार ने एक गाइडलाइन जारी की है।  CCTV की सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं. कंपनियों को अगाह कर दिया गया है कि जो मार्केट में सीसीटीव कैमरे बेचे जा रहे हैं उसमे स्टैंडर्ड फॉलो किए जाएं. सरकार ने ये भी कहा है कि सराकरी डिपार्टमेंट क्राटेरिया मैच ना करने वाली कंपनियों से सीसीटीवी नहीं खरीदें।  भारत में कमजोर है सीसीटीवी की सिक्योरिटी! यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पहले से ही विदेशी सीसीटीवी और सर्विलांस सिस्टम पर सवाल उठते रहे हैं. खासकर चीनी डिवाइस को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि इंटरनेट से जुड़े कैमरों को दूर बैठकर कंट्रोल किया जा सकता है और डेटा बाहर भेजा जा सकता है।  अब सवाल ये है कि क्या भारत में लगे सीसीटीवी कैमरे सुरक्षित हैं. जवाब थोड़ा चिंता बढ़ाने वाला है. साइबर रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में हजारों सीसीटीवी कैमरे खुले इंटरनेट पर एक्सपोज्ड हैं और उनमें बेसिक सिक्योरिटी की कमी है. ऐसे कैमरे हैकिंग और डेटा लीक के लिए आसान टारगेट बन जाते हैं।  CERT-In और दूसरी साइबर एजेंसियों ने भी कई बार चेतावनी दी है कि IP कैमरों में सिक्योरिटी खामियां पाई जाती हैं. डिफॉल्ट पासवर्ड, कमजोर सॉफ्टवेयर और अपडेट की कमी सबसे बड़ी वजह है. ऐसे डिवाइस को इंटरनेट पर स्कैन करके हैक किया जा सकता है।  दूर से हैक हो सकते हैं कैमरे एजेंसियों का कहना है कि हैकर्स इन कैमरों को बॉटनेट में बदल सकते हैं. यानी हजारों कैमरे एक साथ कंट्रोल किए जा सकते हैं. Cyber Swachhta Kendra के तहत भी ऐसे खतरों को लेकर अलर्ट जारी किया जाता है।  इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. PIB की प्रेस रिलीज में सीसीटीवी को लेकर बड़े फैसले बताए गए हैं. सरकार ने कहा है कि अब सीसीटीवी के लिए सख्त सिक्योरिटी नियम लागू होंगे. हर डिवाइस के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी देनी होगी।  इसमें चिप, फर्मवेयर और सोर्स तक की डिटेल शामिल होगी. ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई संदिग्ध सोर्स तो नहीं है. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी कैमरे में बैकडोर नहीं होना चाहिए. यानी ऐसा कोई रास्ता नहीं होना चाहिए जिससे डेटा बाहर भेजा जा सके।  सीसीटीवी खरीदने से पहले जरूर देखें सर्टिफिकेशन हर सीसीटीवी कैमरे को सर्टिफिकेशन से गुजरना होगा. यह टेस्टिंग सिर्फ सरकारी मान्यता प्राप्त लैब में होगी. बिना टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के कोई भी कैमरा भारत में नहीं बिक सकेगा।  सरकारी विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं. वे सिर्फ उन्हीं कैमरों को खरीदेंगे जो इन नियमों को फॉलो करते हैं. साथ ही सभी मंत्रालयों को अपने CCTV सिस्टम की सिक्योरिटी जांचने के निर्देश दिए गए हैं।  चीनी सीसीटीवी कैमरों पर अपना स्टिकर लगा कर बेचती हैं कई भारतीय कंपनियां चिंता वाली बात ये है कि देश में करोड़ों सीसीटीवी कैमरे पब्लिक प्लेस पर लगे हैं. सीसीटीवी की सिक्योरिटी पर काफी समय से उतना ध्यान नहीं दिया गया. हैकर्स या क्रिमिनल्स समय समय पर सीसीटीवी हैक करके सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं. भले ही सरकार ने नए खरीद पर सख्ती लगाई है, लेकिन उन पुराने कैमरों का क्या?  दरअसल सीसीटीवी की सिक्योरिटी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनें पर टिकी होती है. कंपनियां आम तौर पर चीन से कैमरा इंपोर्ट करके अपनी ब्रांडिंग करके भारत में बेचती हैं. उनके पास अपना सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन तक नहीं होता है. इसके लिए भी वो चीनी सॉफ्टवेयर पर भरोसा करती हैं. ऐसे में बैकडोर एंट्री यानी हैकिंग के चासेस बढ़ जाते हैं।  भारत में सीसीटीवी कैमरे बेचने वाली कंपनियों पर सरकार को शिकंजा कसना होगा. खास तौर पर ऐसी कंपनियां जो चीन से कैमरा इंपोर्ट करके अपनी ब्रांडिंग के साथ बेचते हैं और सॉफ्टवेयर तक अपना नहीं बनाते हैं. इस तरह के चीनी कैमरे सस्ते मिलते हैं और सर्विस कॉस्ट भी कम होती है. इसलिए ये बाजार में सबसे सस्ते और ज्यादा एवेलेबल होते हैं।  दिलचस्प ये है कि कई भारतीय ब्रांड चीनी कैमरों पर अपना स्टिकर लगा कर, सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर में थोडे़ बदलाव करके ऑनलाइन-ऑफलान धड़ल्ले से बेच रही हैं. सोचिए आप घर के अंदर इन कैमरों को लगाते हैं और वो फुटेज चीनी हैकर्स को मिल रहा हो? CP Plus ने क्या कहा? इस बीच इंडस्ट्री ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है. CP PLUS के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य खेमका ने कहा, 'भारत ने सीसीटीवी सिक्योरिटी के लिए सख्त नियम लागू करके बड़ा कदम उठाया है. जब कई देश अभी भी कमजोरियों से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने लीडरशिप दिखाई है' हमारे हिसाब से यह बहुत अहम कदम है. हार्डवेयर की पूरी जानकारी, सिक्योरिटी टेस्टिंग और सरकारी जांच जैसे नियम CCTV सिस्टम को डिजाइन से ही सुरक्षित बनाएंगे. इससे आम लोगों और संस्थानों का भरोसा भी बढ़ेगा।  एक जैसी राष्ट्रीय पॉलिसी से पूरा सिस्टम स्टैंडर्ड बनेगा. हर कैमरा एक ही नियम पर चलेगा. इससे कमजोर कड़ी खत्म होगी और साइबर खतरे कम होंगे. इंडस्ट्री भी इसके लिए तैयार है. सैकड़ों सर्टिफाइड मॉडल पहले ही बाजार में आ चुके हैं।  अब जब AI, IoT और क्लाउड के साथ सर्विलांस आगे बढ़ रहा है, तो सिक्योरिटी सबसे जरूरी है. यह कदम भारत को ग्लोबल लेवल पर मजबूत बनाएगा और सुरक्षित सर्विलांस का भविष्य तय करेगा। 

गॉडमैन अशोक खरात केस में 100 अश्लील वीडियो और 1500 करोड़ की संपत्ति का खुलासा

 नासिक महाराष्ट्र के नासिक जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां गिरफ्तार स्वयंभू गॉडमैन अशोक खारत से जुड़े एक मंदिर को साल 2018 में राज्य सरकार से एक करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड मिला था. यह जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर सामने आई है. बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार ने 31 मार्च 2018 को क्षेत्रीय पर्यटन विकास योजना के तहत इस मंदिर के विकास के लिए 1.05 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी थी. उस समय पर्यटन और सांस्कृतिक कार्य विभाग की जिम्मेदारी बीजेपी नेता जयकुमार रावल के पास थी।  यह मंदिर नासिक जिले के सिन्नर इलाके में स्थित श्री इशान्येश्वर देवस्थान ट्रस्ट से जुड़ा है, जिसकी जिम्मेदारी अशोक खरात संभालते थे. इस मंदिर परिसर के विकास के लिए सरकार ने कई कामों को मंजूरी दी थी, जिनमें हॉल का निर्माण, परिसर में पेविंग ब्लॉक लगाना, पुरुष और महिलाओं के लिए अलग शौचालय, चेंजिंग रूम, पार्किंग सुविधा, श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था, गार्डन और बिजली व्यवस्था शामिल थे।  अशोक खरात से जुड़े मंदिर को 1.05 करोड़ की मंजूरी सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, कुल स्वीकृत राशि में से 2017-18 वित्तीय वर्ष में 25 लाख रुपये जारी भी किए गए थे. यह फंड सार्वजनिक निर्माण विभाग यानी PWD के जरिए खर्च किया गया. सूत्रों के अनुसार, नासिक जिले में इस योजना के तहत शामिल चार प्रोजेक्ट्स में से इस मंदिर को सबसे ज्यादा फंड मिला था. यह भी बताया गया कि उस समय अशोक खरात के खिलाफ कोई आरोप सामने नहीं आए थे, इसलिए यह फंड सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूर किया गया था।  दरअसल, यह मंजूरी एक बड़े फैसले का हिस्सा थी, जिसमें राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में धार्मिक स्थलों और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए करीब 112 करोड़ रुपये के कामों को मंजूरी दी थी. इनमें से करीब 17 करोड़ रुपये विभिन्न एजेंसियों जैसे PWD, नगर निगम और जिला परिषदों को जारी करने के लिए तय किए गए थे।  2018 में पर्यटन योजना के तहत मिला सरकारी फंड इस पूरे मामले ने तब नया मोड़ लिया जब 18 मार्च को अशोक खरात को एक 35 साल की महिला द्वारा लगाए गए रेप के आरोपों के बाद गिरफ्तार किया गया. महिला ने आरोप लगाया कि खरात ने तीन साल तक उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया. फिलहाल वह पुलिस हिरासत में है और मामले की जांच जारी है।  जांच के दौरान सामने आया कि अशोक खरात के पास कई बड़े राजनीतिक नेताओं का आना-जाना था. इससे उनके प्रभाव और पहुंच को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया है, जिसकी अगुवाई आईपीएस अधिकारी तेजस्वी सतपुते कर रही हैं. SIT ने अब तक खरात के खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज किए हैं. इनमें एक पीड़िता गर्भवती महिला भी शामिल बताई जा रही है।  रेप आरोप में गिरफ्तारी के बाद मामले ने लिया नया मोड़ जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. SIT को अशोक खरात से जुड़े करीब 100 आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं. इसके अलावा उनके पास करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की बात भी सामने आई है. अब इस मामले में आयकर विभाग भी सक्रिय हो गया है और खरात तथा उनसे जुड़े लोगों की संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है. वहीं साइबर पुलिस इन आपत्तिजनक वीडियो की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।  महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते और राज्य सरकार इस पूरे मामले की जांच पर नजर बनाए हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए फंड जारी करना एक नियमित प्रक्रिया होती है और उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही फैसले लिए जाते हैं. हालांकि अब जब अशोक खरात के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो इस पूरे मामले को नए नजरिए से देखा जा रहा है।  जांच में 100 वीडियो और 1500 करोड़ की संपत्ति का खुलासा यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सरकारी फंडिंग, राजनीतिक संपर्क और बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियों की भी जांच हो रही है. आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

1 अप्रैल से देश में होंगे 5 बड़े बदलाव: LPG, ATM, PAN और अन्य, हर नागरिक पर होगा प्रभाव

नई दिल्ली नया वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों और टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे। PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा अब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी। HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है। क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा। अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्स सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा। कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्ट अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा। नया आयकर अधिनियम 2025 लागू 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगी अब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी। क्या है इसका सीधा असर? इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।