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नागपुर में RSS मुख्यालय और स्मृति मंदिर को ‘रेडिएशन’ अटैक की धमकी, सुरक्षा बढ़ाई गई

नागपुर   महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय और डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर में 'रेडिएशन' की धमकी से हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर को भेजी गई एक गुमनाम चिट्ठी में दावा था कि आरएसएस मुख्यालय और स्मृति मंदिर में रेडियोएक्टिव पदार्थ फैला दिया गया है। यह चिट्ठी कथित तौर पर 'डीएसएस' नाम के एक संगठन ने भेजी है। इस चिट्ठी के मिलने के बाद एक बड़े पैमाने पर जांच शुरू हो गई है, जिसमें एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) और एनडीआरएफ भी शामिल हैं। अंग्रेजी में लिखी यह गुमनाम चिट्ठी 27 अप्रैल को डाक के जरिए पुलिस कमिश्नर रविंद्रकुमार सिंघल के दफ्तर पहुंची। इसमें आरएसएस के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था और एक चेतावनी दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में कहा गया था कि सीजियम-137 नाम का एक बेहद खतरनाक रेडियोएक्टिव पाउडर कई अहम जगहों पर कथित तौर पर रख दिया गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीजियम-137 (137सीएस) धातु सीजियम का एक रेडियोएक्टिव आइसोटोप है। यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता। यह न्यूक्लियर रिएक्टरों और हथियारों में यूरेनियम के न्यूक्लियर विखंडन से बनने वाला एक उप-उत्पाद है। इसकी हाफ-लाइफ (अर्ध-आयु) 30.05 साल होती है, जिसका मतलब है कि इसकी रेडियोएक्टिविटी को आधा होने में तीन दशक लग जाते हैं। इससे बीटा कण और शक्तिशाली गामा किरणें निकलती हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में दावा किया गया है कि यह रेडियोएक्टिव पदार्थ आरएसएस मुख्यालय, रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर, गणेशपेठ स्थित भाजपा दफ्तर, ऑरेंज और एक्वा दोनों लाइनों की मेट्रो ट्रेनों की सीटों पर, और बसों में रखा गया है। दावा किया गया कि उन्हें यह रेडियोएक्टिव पदार्थ एक कैंसर अस्पताल से मिला था। चिट्ठी में आगे अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा गया है, "नागपुर शहर अब पूरी तरह से रेडिएशन के खतरे में है। जब तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन के विशेषज्ञ यहां आकर जांच करेंगे, तब आपको इस बात की सच्चाई का पता चलेगा।" चिट्ठी में हाल ही में हुई एक घटना का भी जिक्र किया गया, जिसमें दोसर भवन मेट्रो स्टेशन के पीछे एक खाली प्लॉट में डेटोनेटर और जिलेटिन की छड़ें मिली थीं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 'डीएसएस' ने उन विस्फोटकों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था, "वह तो बस एक चेतावनी थी। असली खेल तो अब शुरू हुआ है।" पत्र मिलने के बाद, एटीएस ने एनडीआरएफ और परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञों के साथ मिलकर आरएसएस मुख्यालय, मेट्रो स्टेशनों और बताई गई दूसरी जगहों की पूरी तरह से तलाशी ली। विशेषज्ञों की शुरुआती तलाशी में अभी तक कोई भी रेडियोएक्टिव पदार्थ नहीं मिला है। हालांकि, एटीएस की शिकायत के आधार पर सदर पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस मुख्यालय 150 सीआईएसएफ जवानों और नागपुर पुलिस की 24 घंटे की कई-स्तरीय सुरक्षा घेरे में है।

गर्मी पर राहत का संकेत: अगले 48 घंटों में पारा गिरेगा, दिल्ली-यूपी समेत 18 राज्यों में आंधी-बारिश

नई दिल्ली  अगले 48 घंटे में उत्तर भारत में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि लू और भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग ने गुरुवार को लखनऊ समेत प्रदेश के 45 जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात और तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है। इन राज्यों में होगी बारिश आईएमडी के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और बिहार समेत कई राज्यों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने के साथ हल्की बारिश, आकाशीय बिजली गिरने और ओलावृष्टि का खतरा है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मेघ गर्जन, बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। बंगाल-झारखंड में तूफानी हवाएं और बारिश का दौर रहेगा आईएमडी के मुताबिक 30 अप्रैल तक दक्षिण भारत में कमजोर चक्रवाती परिसंचरण के असर से पांच राज्यों में आंधी-तूफान के साथ तेज बारिश हो सकती है। रायलसीमा, महाराष्ट्र के कई हिस्सों और पश्चिमी घाट क्षेत्र में भारी बादल बरस सकते हैं। वहीं पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और झारखंड में गरज-चमक के साथ तूफानी हवाएं और बारिश का दौर रहेगा। हालांकि कुछ इलाकों में हीटवेव अभी भी जारी रह सकती है। उत्तर प्रदेश में आज यानी 30 अप्रैल को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर सहति पंजाब और हरियाणा में आज और फिर 2 से 5 मई के दौरान धूल भरी आंधी और बिजली गिरने के साथ बारिश के आसार हैं। राजस्थान में मौसम के दो रंग दिखेंगे। पूर्वी राजस्थान में 5 मई तक लगातार बारिश और आंधी की स्थिति बनी रहेगी, जबकि पश्चिमी राजस्थान में 2 से 4 मई के बीच तीव्र धूल भरी आंधी चलने का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और भारी बारिश हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तराखंड में आज से 5 मई तक व्यापक स्तर पर बारिश और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में 3 से 5 मई के बीच 50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ मौसम बिगड़ने का अनुमान है। पर्यटकों को पहाड़ों पर यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बिहार और झारखंड का कैसा रहेगा मौसम? बिहार में कल की तरह आज भी (30 अप्रैल) भीषण आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हवा की गति 70 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश भी हो सकती है। वहीं, झारखंड के कुछ हिस्सों में आज ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना है। 3 मई तक यहां रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहेगा। रेड अलर्ट जैसी स्थिति अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले 5 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। विशेष रूप से आज नागालैंड और मणिपुर में 70 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाएं तबाही मचा सकती हैं। असम और मेघालय में 3 मई तक अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। कर्नाटक में आज ओलावृष्टि होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने इस दौरान लोगों को कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। आंधी के समय बिजली के उपकरणों का प्रयोग कम करें और किसानों को कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने का निर्देश दिया गया है। उत्तर प्रदेश में बुधवार को भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ली और कई जिलों में आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई, जिससे लोगों को काफी राहत मिली। यूपी के 50 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया मौसम विभाग ने करीब 50 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर, कौशांबी, प्रयागराज, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, गोरखपुर, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, बुलंदशहर, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं समेत कई जिलों में तेज धूल भरी आंधी, बारिश, वज्रपात और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। बिहार के इन जिलों में गरज-चमक के साथ होगी बारिश उत्तर प्रदेश और बिहार में बुधवार को बदले मौसम ने कहर बरपाया। धूलभरी आंधी, बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाओं में यूपी में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 घायल हो गए। बिहार में भी तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो गई। यूपी में सबसे अधिक असर अवध क्षेत्र में देखने को मिला। मौसम विभाग ने गुरुवार को लखनऊ समेत प्रदेश के 45 जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात और तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है। बिहार में आंधी, वर्षा व ओलावृष्टि से हुआ नुकसान बिहार के विभिन्न हिस्सों में बुधवार की शाम आई आंधी, वर्षा व ओलावृष्टि से मक्का, आम व लीची के साथ सब्जी की फसल को काफी क्षति पहुंची। मधुबनी में लगभग सात हजार हेक्टेयर में आम की फसल प्रभावित हो गई। इस दौरान विभिन्न घटनाओं में पटना, मधुबनी व सारण जिले में तीन महिलाओं समेत चार लोगों की जान चली गई।  

‘भारत ने शुरू किया था लंबा ऑपरेशन…’, राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को इस नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. यह ऑपरेशन लगभग एक साल पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था. 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी।  इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया. रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीति साफ है – किसी भी हालत में आतंकवादी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  भारत ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और अब ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के खिलाफ अपना रुख साबित किया है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिर्फ 72 घंटे में पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके पीछे लंबी तैयारी थी. अगर जरूरत पड़ती तो भारत लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार था।  आज की दुनिया तेजी से बदल रही है. कई बड़े देश अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. राष्ट्रीय हितों को पहले से ज्यादा जोर-शोर से सामने रख रहे हैं. पुराना नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय सिस्टम अब सवालों के घेरे में है. संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं।   प्रौद्योगिकी, सप्लाई चेन और डिजिटल टूल्स को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में भारत को इस नई दुनिया में और ज्यादा सतर्कता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और विकास की रणनीति को नई परिस्थितियों के अनुसार ढालना होगा।  आतंकवाद के तीन आयाम और उसकी जड़ें राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को मानवता पर एक काला धब्बा बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद सिर्फ एक विकृत मानसिकता है. यह सुरक्षा का मुद्दा ही नहीं, बल्कि मानव मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है. आतंकवाद को अक्सर धर्म या किसी हिंसक विचारधारा के नाम पर जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, जो दरअसल आतंकियों को कवर फायर देना है।  रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि आतंकवाद सिर्फ राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, बल्कि इसके तीन आयाम हैं – ऑपरेशनल (संचालन संबंधी), आइडियोलॉजिकल (वैचारिक) और पॉलिटिकल (राजनीतिक). आतंकवाद की असली ताकत उसकी वैचारिक और राजनीतिक जड़ों में है. उन्होंने इसे रावण की नाभि से जोड़कर समझाया कि जब तक इस नाभि यानी वैचारिक और राजनीतिक संरक्षण को नहीं सुखाया जाएगा, आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होगा. इसलिए आतंकवाद को सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि सभी तीन आयामों में लड़ना जरूरी है।  पाकिस्तान पर सीधा हमला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि वह लगातार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान आजादी के समय एक साथ स्वतंत्र हुए, लेकिन आज भारत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान इंटरनेशनल टेररिज्म (International Terrorism) का केंद्र बन गया है।  उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसके प्रायोजकों (स्पॉन्सर्स) में कोई फर्क नहीं करता. पीएम मोदी की नीति के तहत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का रवैया अपनाया गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को परमाणु हमले की धमकियां भी मिलीं, लेकिन भारत उनमें नहीं फंसा और राष्ट्रहित में जो जरूरी था, वह किया।  तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत का प्रदर्शन ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य शक्ति के नए रूप का उदाहरण बना. इसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने एक साथ, एक योजना के तहत काम किया. रक्षा मंत्री ने कहा कि अब भारत की सैन्य शक्ति साइलो में नहीं चलती, बल्कि संयुक्त और एकीकृत रूप में उभरी है. यह एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की छवि को मजबूत करता है।  भारत ने ऑपरेशन अपनी शर्तों और अपने समय पर शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही समाप्त किया. सिर्फ उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया गया जो हमले के जिम्मेदार थे. ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका गया क्योंकि क्षमता कम थी, बल्कि भारत ने अपनी मर्जी से रोका. जरूरत पड़ने पर ज्यादा कुछ भी किया जा सकता था।  स्वदेशी हथियारों की बढ़ती विश्वसनीयता ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम से लेकर निगरानी प्लेटफॉर्म तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खूब इस्तेमाल हुआ. इससे भारत की सटीकता और घातक क्षमता काफी बढ़ गई. रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन के बाद स्वदेशी हथियारों और रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता दुनिया भर में बढ़ी है।  अब कई देश भारत से हथियार और रक्षा सामग्री खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत का मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स अब शांति काल के साथ युद्ध के समय में भी तेज सप्लाई देने के लिए तैयार है. सर्ज कैपेसिटी और स्टोरेज कैपेसिटी मजबूत हुई है. इससे भारत की डिटरेंस बढ़ी है।  भविष्य की तैयारी: AI और टेक्नोलॉजी रक्षा मंत्री ने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है. GPU क्षमता बना रहा है. फ्यूचर स्किल्स प्रोग्राम चला रहा है. AI को 'Augmented Infantry' यानी बढ़ी हुई पैदल सेना के रूप में देखा जा रहा है. सेना ने AI, मशीन लर्निंग और बिग डेटा का इस्तेमाल करके अपनी क्षमताएं मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है. इससे देश न सिर्फ ज्यादा सुरक्षित बनेगा, बल्कि शक्तिशाली और समृद्ध भी होगा।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इन बयानों से साफ है कि नया भारत आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ बिना किसी समझौते के खड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ आतंकियों को सबक सिखाया, बल्कि दुनिया को भारत की सैन्य तैयारी, संयुक्त ताकत और स्वदेशी क्षमता का संदेश भी दिया. बदलते विश्व में भारत अपनी सुरक्षा और मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह सजग और तैयार है।   

बिरयानी कांड के बाद मुंबई में तरबूज की बिक्री पर रोक, दुकानदारों में खौफ

मुंबई  दक्षिण मुंबई के पाइधोनी इलाके से दिलचस्प खबर सामने आ रही है. यहां बाजार से तरबूज एकदम गायब हो गया है. इसी इलाके में हाल ही में बिरयानी के साथ तरबूज खाने से एक परिवार के चार लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद जांच के लिए पाइधोनी इलाके में पहुंची खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) टीम पहुंची।  हालांकि इस मामले में चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब एफडीए की टीम बाजार में जांच के ल‍िए पहुंची लेक‍िन उसे इलाके में एक भी तरबूज बेचने वाला नहीं मिला और न ही क‍िसी फल की दुकान पर तरबूज म‍िला।  बता दें कि 27 अप्रैल को अब्दुल्लाह डोकड़िया (40), उनकी पत्नी नसीम (35) और बेटियां आयशा (16) व जैनब (13) ने तरबूज और बिरयानी खाने के बाद उल्टी और बेहोशी के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए थे. चारों की कुछ ही घंटों के अंतराल में मौत हो गई थी।  एफडीए अब लैब रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, लेकिन शायद यही डर है कि बाजार में तरबूज बेचने वाले सभी विक्रेता अचानक गायब हो गए हैं. इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है।  इस घटना के बाद तरबूज को लेकर डर का आलम ऐसा था कि जब रविवार शाम 7 बजे एफडीए की टीम पहली बार पाइधोनी बाजार पहुंची, तब तक इलाके से तरबूज पूरी तरह गायब हो चुका था. बाजार में एक भी फल विक्रेता के पास तरबूज नहीं मिला. उसके बाद सोमवार, मंगलवार और बुधवार को भी FDA की टीमें लगातार बाजार में छापेमारी करती रहीं कि किसी के पास तरबूज मिले लेकिन वहां एक भी विक्रेता या तरबूज नहीं मिला।  एक FDA अधिकारी ने कहा, “यह बहुत अजीब मामला है. हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा. हमने पिछले रिकॉर्ड्स भी चेक किए, लेकिन तरबूज या तरबूज-बिरयानी से जुड़ा कोई फूड पॉइजनिंग का केस पहले नहीं मिला।  तरबूज बेचने वाले के गायब होने से रुकी जांच अधिकारियों ने कहा कि इलाके में तरबूज विक्रेता का पता न चल पाने से जांच की एक महत्वपूर्ण दिशा रुक गई है.अगर तरबूज स्थानीय बाजार से खरीदा गया था, तो हो सकता है कि इसे अन्य लोगों ने भी खाया हो लेकिन अब तक ऐसा कोई और केस रिपोर्ट नहीं हुआ है. परिवार के रिश्तेदारों से पूछताछ भी की गई लेकिन यह पता नहीं चल सका कि तरबूज आखिर कहां से खरीदा या लाया गया था।  एफडीए ने लिए 11 सैंपल जांच के बीच एफडीए ने मृतक परिवार के घर से 11 सैंपल इकठ्ठा किए हैं, जिनमें फ्रिज से बचा हुआ तरबूज और बिरयानी, बर्तनों से निकाला गया पुलाव, फ्रीजर से कच्चा चिकन, मसाले, चावल, आधा खाया हुआ खजूर, गिलासों में रखा पानी और मिट्टी का घड़ा शामिल है। फिलहाल लैब रिपोर्ट आने में देरी के चलते जांच आगे बढ़ने में दिक्कत आ रही है. हालांकि एफडीए अब लैब रिजल्ट का इंतजार कर रही है, ताकि मौत की असली वजह का पता  लगाया जा सके। 

अंबानी के घर के करीब आलीशान फ्लैट किराए पर मिल रहा, जीवनस्तर को दें नई ऊंचाई

मुंबई  मुंबई के पेडर रोड पर स्थित ऐतिहासिक मार्लबोरो हाउस (Marlboro House) इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. मुकेश अंबानी के आवास 'एंटीलिया' के बेहद करीब स्थित इस बिल्डिंग का एक शानदार 4BHK फ्लैट किराए के लिए उपलब्ध है, जिसका वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।  लग्जरी रियल एस्टेट कंटेंट क्रिएटर गौरव बोधिजा द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में घर के मॉडर्न इंटीरियर और आलीशान डेक की झलक दिखाई गई है. हाल ही में रेनोवेट किए गए इस 4BHK अपार्टमेंट की सबसे बड़ी खूबी इसका गार्डन और डेक है।  यह घर आधुनिक लग्जरी और पुराने दौर की भव्यता का एक अनोखा मिश्रण है. आर्ट डेको (Art Deco) शैली में बनी इस ऐतिहासिक इमारत के वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. 1938 में बनी यह इमारत दक्षिण मुंबई का एक प्रमुख लैंडमार्क है. इसे मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट क्लॉड बैटली ने डिजाइन किया था, जिनका बॉम्बे की आधुनिक वास्तुकला में बहुत बड़ा योगदान माना जाता है।  इस घर का इतिहास काफी रोचक है. इसे मूल रूप से एक जर्मन महिला के लिए बनाया गया था, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के कारण उन्हें भारत छोड़कर जाना पड़ा और वे कभी इस घर में रह नहीं सकीं. बाद में साल 1945 में रामजी हंसराज कमानी ने इस इमारत को खरीद लिया था. फिलहाल इस बिल्डिंग में कुल छह फ्लैट हैं. दक्षिण मुंबई के पेडर रोड जैसी वीआईपी लोकेशन और ऐतिहासिक वास्तुकला की वजह से इस फ्लैट का वीडियो न केवल रियल एस्टेट के शौकीनों के बीच, बल्कि इतिहास प्रेमियों के बीच भी सुर्खियां बटोर रहा है।  कितना है किराया? मार्लबोरो हाउस की पहली मंजिल पर एक आलीशान 4BHK अपार्टमेंट का मासिक किराया 12 लाख रुपये तय किया गया है. करीब 3,000 स्क्वायर फीट में फैले इस घर की सबसे बड़ी खूबी इसका 750 स्क्वायर फीट का निजी गार्डन है, जो मुंबई जैसे घने शहर में एक दुर्लभ विलासिता है. इस अपार्टमेंट में तीन मुख्य बेडरूम, चार बाथरूम और एक पाउडर रूम के साथ-साथ दो कारों की पार्किंग और सर्वेंट क्वार्टर की सुविधा भी दी गई है।  यहां रहने वाले किरायेदारों को पिकल-बॉल कोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी. हालांकि, इस प्राइम लोकेशन पर रहने के लिए जेब अच्छी-खासी ढीली करनी होगी, क्योंकि किराए के साथ ही किरायेदारों को 6 महीने का किराया (करीब 72 लाख रुपये) सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर जमा करना होगा। 

यूरिया खाद पर किचकिच खत्म, 100 लाख टन के गैप को भरने के लिए नई पॉलिसी लांच

नई दिल्ली  भारत सरकार देश में खेती के लिए सबसे जरूरी यूरिया (Urea) खाद की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. सरकार ने एक नई निवेश नीति तैयार की है, जिसके लिए एक कैबिनेट नोट भी बना लिया गया है. इस नई नीति का मुख्य मकसद देश में यूरिया के नए कारखाने लगाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, ताकि विदेशों से खाद न मंगानी पड़े. फिलहाल भारत में यूरिया की जितनी जरूरत है और जितनी पैदावार हो रही है, उसके बीच करीब 100 लाख मीट्रिक टन का बड़ा अंतर है. इसी अंतर को भरने के लिए सरकार अब नई सुविधाओं और नियमों का ऐलान करने वाली है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।  भारत में हर साल लगभग 380 से 400 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है, लेकिन देश में मौजूद कारखाने केवल 300 लाख मीट्रिक टन ही बना पाते हैं. इसका मतलब है कि हमें अपनी कुल जरूरत का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों से खरीदना पड़ता है. रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि यूरिया की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण होता है, इसलिए नई कंपनियां तब तक पैसा लगाने से डरती हैं जब तक उन्हें यह पता न हो कि उन्हें सरकार से कितनी सब्सिडी (Subsidy) मिलेगी. नई नीति में अगले 8 सालों के लिए सब्सिडी की न्यूनतम और अधिकतम सीमा तय की जाएगी, जिससे निवेशकों को भविष्य का अंदाजा मिल सके और वे बेझिझक नए प्लांट लगा सकें।  पुरानी नीति का असर इससे पहले साल 2012 में नई निवेश नीति (New Investment Policy – 2012) आई थी. उस नीति की वजह से देश में छह नए यूरिया कारखाने लगे थे, जिनमें गोरखपुर (Gorakhpur), सिंदरी (Sindri), बरौनी (Barauni), रामागुंडम (Ramagundam), पानागढ़ (Panagarh) और गड़ेपान (Gadepan) शामिल हैं. इन कारखानों से यूरिया की पैदावार काफी बढ़ी थी, लेकिन अब उस पुरानी नीति का समय खत्म हो गया है और मांग लगातार बढ़ती जा रही है।  नई नीति के तहत सरकार कंपनियों को कारखाना लगाने के लिए सीधे पैसे नहीं देगी, बल्कि एक ऐसा ढांचा तैयार करेगी जिससे कंपनियों को मुनाफा मिल सके. कंपनियों को आमतौर पर नीति लागू होने के चार साल के भीतर कारखाना चालू करना होगा. वर्तमान में किसानों को यूरिया का एक बैग (45 किलो) लगभग 266 रुपये में मिलता है, जबकि इसे बनाने का खर्च 1,200 से 1,700 रुपये तक आता है. इस बीच का जो भी बड़ा अंतर है, वह सरकार सब्सिडी के तौर पर चुकाती है।  गैस की उपलब्धता जरूरी यूरिया बनाने के लिए गैस की जरूरत होती है, जो काफी महंगी और सीमित है. अधिकारियों का कहना है कि भले ही हम देश में बहुत सारे कारखाने लगा लें, लेकिन अगर उनके पास पर्याप्त गैस नहीं होगी, तो फिर से दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ेगा. इसके अलावा, वैश्विक बाजार में खाद की कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।  बजट में सब्सिडी के लिए करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये रखे गए थे, लेकिन अनुमान है कि यह खर्च बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है. यूरिया के अलावा अन्य खादों जैसे एनपीके (NPK – Nitrogen, Phosphorus, Potassium) के नियम थोड़े अलग हैं, वहां सरकार एक तय मदद देती है और कंपनियां बाजार के हिसाब से दाम तय करती हैं, लेकिन यूरिया में पूरी जिम्मेदारी सरकार की होती है. नई नीति आने से उम्मीद है कि आने वाले सालों में भारत यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर बन पाएगा। 

भारत की आर्थिक ताकत में तेजी, वैश्विक शांति में अहम भूमिका निभा सकता है: वैश्विक विशेषज्ञ

नई दिल्ली   भारत तेजी से एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है और वैश्विक स्तर पर छवि विश्व शांति व्यवस्था को आकार देने वाले, आर्थिक स्थिरता और टेक्नोलॉजी को बढ़ाने वाले देश की बन रही है। यह बयान बुधवार को ग्लोबल एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी में इकोनॉमिस्ट एंटरप्राइज के 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026' के साइडलाइन के दौरान आईएएनएस से ​​बातचीत में उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निपटने, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और एआई और उभरती टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को बढ़ावा देने में भारत के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में अर्थशास्त्र के ली का शिंग प्रोफेसर डैनी क्वाह ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद की बदलती प्रकृति और व्यापारिक गतिशीलता में आए बदलावों ने विश्व अर्थव्यवस्था में काफी अनिश्चितता पैदा कर दी है। क्वाह ने कहा कि व्यापारिक व्यवधानों से परे, एक गहरी चिंता वैश्विक विश्वास में कमी और बहुपक्षीय प्रणालियों का कमजोर होना है, जो पारंपरिक रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आधार रही हैं। उन्होंने आईएएनएस को बताया,“भारत इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है और अगर भारत कोशिश करे तो शांति कायम होगी। लोग शांति लाने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। मुझे लगता है कि लोग उचित नेतृत्व के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। उचित नेतृत्व क्या होगा, यह तय करना अभी भारत पर निर्भर है।” वहीं, लंदन के विज्ञान संग्रहालय के निदेशक इयान ब्लैचफोर्ड ने एआई के प्रति भारत के विशिष्ट और आशावादी दृष्टिकोण का जिक्र किया। ब्लैचफोर्ड ने कहा, “अगर आप अमेरिका और यूरोप के सार्वजनिक सर्वेक्षणों को देखें, तो अधिकांश आबादी एआई को लेकर चिंतित है। भारत में स्थिति इसके विपरीत है। भारत एआई केंद्रों के लिए क्षमता निर्माण कर रहा है और साथ ही इसके प्रभावों पर गहराई से विचार भी कर रहा है।” ब्लैचफोर्ड ने वैश्विक दक्षिण की व्यापक उपलब्धियों, विशेष रूप से भारत की विकास यात्रा की सराहना की। ब्लैचफोर्ड ने आईएएनएस को बताया, “देश आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है, जबकि वह ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों से भी जूझ रहा है।”उन्होंने आगे कहा, “यह पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत है, जिन्हें दशकों से समृद्धि का लाभ मिल रहा है।”

गलवान के बाद पहली बार भारत दौरे पर आएंगे जिनपिंग, ब्रिक्स मंच पर बढ़ रही भारत-चीन की निकटता

नई दिल्ली साल 2020 की हिंसक गलवान झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में जो बर्फ जमी थी, वह अब धीरे-धीरे पिघलती हुई नजर आ रही है। हालिया घटनाक्रमों और कूटनीतिक वार्ताओं से यह लगभग साफ हो गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस साल भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत का दौरा करेंगे। 2020 के गलवान विवाद के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी, जो कूटनीतिक लिहाज से एक बहुत बड़ा कदम है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। हाल ही में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में चीन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को अपना पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई है। भारत और चीन ब्रिक्स (BRICS) तंत्र के तहत अपने आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। एक तरफ जहां चीन ने ब्रिक्स समूह की वर्तमान अध्यक्षता के लिए भारत का पूरा समर्थन किया है, वहीं भारत सरकार ने भी इस तंत्र के तहत आयोजित विभिन्न गतिविधियों में चीन द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की है। चीनी विशेष दूत झाई जुन का भारत दौरा पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर आयोजित बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के विशेष दूत झाई जुन पिछले सप्ताह नई दिल्ली में थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव नीना मल्होत्रा से मुलाकात की। झाई ने स्पष्ट किया कि दुनिया के दो प्रमुख विकासशील देशों के रूप में, चीन और भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत और संवाद बनाए रखा है। चीन ने की भारत की भूमिका की तारीफ चीनी दूत झाई जुन ने भारत की अध्यक्षता को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा- चीन ब्रिक्स की रोटेटिंग (वर्तमान) अध्यक्षता के रूप में भारत द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करता है। हमें उम्मीद है कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर होने वाला यह ब्रिक्स परामर्श क्षेत्रीय स्थिति पर एक मजबूत संदेश देगा और इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा। भारत का रुख और नीना मल्होत्रा का बयान चीन द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव नीना मल्होत्रा ने भी ब्रिक्स तंत्र के भीतर चीन की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्रीय तनावों को जल्द से जल्द कम करने और शांति को बढ़ावा देने के लिए चीन सहित सभी ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी और राष्ट्रपति का संभावित दौरा ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक के लिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी के जल्द ही भारत आने की उम्मीद है। यह दौरा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को और आगे बढ़ाएगा। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा है। पिछले साल तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई एक बैठक में शी जिनपिंग ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन का भरोसा दिया था। इस साल के अंत में होने वाले मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग के भारत आने की उम्मीद है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक सैन्य झड़प के बाद, यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए इस दौरे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह खबर इस बात का संकेत देती है कि सीमा पर तनाव के बावजूद, भारत और चीन ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और संवाद का रास्ता खुला रखना चाहते हैं। कैसे तैयार हुई इस दौरे की जमीन? भारत और चीन के बीच यह कूटनीतिक नरमी अचानक नहीं आई है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में सिलसिलेवार तरीके से इसके लिए पृष्ठभूमि तैयार की गई है। LAC पर गश्त समझौता (अक्टूबर 2024): दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त की बहाली को लेकर एक अहम समझौता हुआ, जिसने तनाव कम करने की दिशा में पहली बड़ी भूमिका निभाई। रूस में मोदी-शी की मुलाकात (अक्टूबर 2024): इस समझौते के तुरंत बाद, रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच गलवान के बाद पहली औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हुई। SCO सम्मेलन में न्योता (अगस्त 2025): प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के लिए चीन के तियानजिन गए थे। वहीं पर उन्होंने शी जिनपिंग को 2026 के ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया था, जिसे चीनी राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया था। 'ब्रिक्स की आड़ में' रिश्ते सुधारने के क्या मायने हैं? सीधे द्विपक्षीय स्तर पर संबंध सुधारना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। ब्रिक्स जैसा मंच दोनों देशों को एक 'ग्लोबल साउथ' के एजेंडे के तहत बातचीत करने का बहाना देता है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर अमेरिका की सख्त व्यापारिक नीतियों और टैरिफ आदि के कारण भारत और चीन दोनों ही अपने क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। अपनी धीमी होती अर्थव्यवस्था के बीच चीन भारत जैसे विशाल बाजार से तनाव कम करना चाहता है। वहीं, भारत भी चाहता है कि सीमा पर शांति बनी रहे ताकि वह अपने आंतरिक विकास और वैश्विक कूटनीति पर ध्यान केंद्रित कर सके।

सऊदी और यूएई ने होर्मुज को बायपास किया, भारत तक तेल सप्लाई का नया मार्ग तय

  नई दिल्ली ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद जब होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो भारत के लिए तेल और गैस की किल्लत हो गई. तेल और गैस के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों पर निर्भर भारत के लिए होर्मुज का बंद होना बड़ा झटका साबित हुआ. इस बीच रूसी तेल पर लगे बैन के हटने से भारत को राहत मिली लेकिन सऊदी, यूएई से भारत को तेल सप्लाई कुछ समय के लिए लगभग बंद हो गई. लेकिन दोनों खाड़ी देशों ने इसका तोड़ भी निकाल लिया और होर्मुज को बायपास कर कच्चा तेल अब भारत तक पहुंचाने लगे हैं।  सऊदी अरब से भारत को कच्चे तेल की सप्लाई अब सामान्य हो गई है और यूएई से आने वाली खेप पिछले साल के औसत से काफी ज्यादा चल रही है. ऐसा इसलिए संभव हो सका है क्योंकि दोनों देशों ने होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के बीच वैकल्पिक बंदरगाहों से लोडिंग बढ़ा दी है।    शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर के वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि सऊदी अरब और यूएई से बढ़ी सप्लाई, ईरान और वेनेजुएला से दोबारा शुरू हुए आयात, और रूस से अधिक खरीद ने खाड़ी क्षेत्र से आई कमी की आंशिक भरपाई की है. इससे अप्रैल में भारत को कच्चे तेल की उपलब्धता बनी रही।  केप्लर के मुताबिक, 1 से 26 अप्रैल के बीच भारत का औसत कच्चा तेल आयात 44 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो फरवरी के 52 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले करीब 15% कम है. इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत के दूसरे सबसे बड़े स्रोत इराक से सप्लाई अभी भी बंद है, साथ ही कुवैत और कतर से भी आपूर्ति रुकी हुई है।  अप्रैल में सऊदी अरब ने भारत को 6.97 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 का औसत 6.68 लाख बैरल प्रतिदिन था. वहीं, यूएई से सप्लाई 6.19 लाख बैरल प्रतिदिन रही, जो पिछले वित्त वर्ष के 4.33 लाख बैरल प्रतिदिन औसत से काफी ज्यादा है।  सऊदी अरब और यूएई होर्मुज के बंद होने के बीच भारत कैसे पहुंचा रहे अपना तेल? सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए भारत तक तेल भेज रहा है. फारस की खाड़ी स्थित रास तनुरा बंदरगाह से भेजी जाने वाली तेल की खेप 70 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली पाइपलाइन के जरिए लाल सागर के यनबू टर्मिनल तक आ रही है।  दूसरी ओर यूएई 17 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली ADCOP पाइपलाइन के जरिए तेल को फुजैरा बंदरगाह तक भेज रहा है, जो ओमान की खाड़ी पर स्थित है. इन दोनों देशों के अलावा खाड़ी के अन्य उत्पादक देश अब भी निर्यात के लिए बड़े पैमाने पर होर्मुज पर निर्भर हैं।  भारत ने ओमान से भी तेल खरीद बढ़ा दी है क्योंकि उसका तेल होर्मुज के जरिए नहीं आता. अप्रैल में भारत को ओमान से 1.01 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जबकि 2025-26 का औसत केवल 18 हजार बैरल प्रतिदिन था।  युद्ध के बाद रूस और ईरान के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील से भारतीय रिफाइनरों को राहत मिली है, जो होर्मुज संकट के बाद विकल्प तलाश रहे थे। अप्रैल में सात साल बाद ईरान से 1.51 लाख बैरल प्रतिदिन और नौ महीने बाद वेनेजुएला से 2.58 लाख बैरल प्रतिदिन सप्लाई फिर शुरू हुई। हालांकि अमेरिका से भारत को तेल सप्लाई कम रही. अप्रैल में यह घटकर 1.15 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि 2025-26 का औसत 3.14 लाख बैरल प्रतिदिन था।  रूस से सप्लाई, जो जनवरी-फरवरी में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण घटी थी, मार्च में दोगुनी होकर 20 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई थी. लेकिन अप्रैल में रूसी तेल की उपलब्धता कम रही जिस कारण यह घटकर 16 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। 

EPFO में बदलाव: ATM से पेंशन विड्रॉल होगा संभव, पेंशन 7.5 गुना तक बढ़ सकती है

 नई दिल्‍ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ रहा है. सरकार पीएफ रजिर्स्‍टड कर्मचारियों को लाभ देने के लिए कई चीजों पर विचार कर रही है. खासकर पेंशन में योगदान देने वाले कर्मचारियों को बड़ा लाभ देने पर विचार कर रही है. EPS-95 पेंशन को बढ़ाने पर चर्चा कर रही है।  श्रमिक संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार ईपीएस के तहत पेंशन को 1 हजार रुपये से बढ़ाकर ₹7500 करे. अगर सरकार पेंशन को लेकर इस प्रस्‍ताव को मान लेती है तो पेंशन में 7.5 गुना इजाफा होगा. संसदीय समिति ने भी पेंशन बढ़ाने की सिफारिश की. इसके अलावा, सरकार पीएफ कर्मचारियों के ब्याज को जल्द अकाउंट में डिपॉजिट करने की बात कही है।  पीएम अकाउंट होल्‍डर्स के खाते में 8.25% ब्याज जल्‍द डिपॉजिट हो सकता है, जिसका कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं. वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार मंजूरी मिलते ही खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा. ऐसा माना जा रहा है कि मई में पीएफ का ब्‍यजा अकाउंट में आ सकता है।  ATM से PF निकालने की सुविधा  ईपीएफओ पोर्टल के तहत कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं, जिसे जल्‍द लागू किया जा सकता है. खासकर एटीएम से PF की निकासी को लेकर सबसे बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है. जल्‍द इसके लागू होने की उम्‍मीद है. एटीएम से पीएफ की निकासी लागू होने के बाद पीएफ के पैसे तक सदस्‍यों की पहुंच आसान हो जाएगी. फिर सेविंग अकाउंट की तरह, पीएफ अकाउंट से भी ATM कार्ड के जरिए पैसा निकाल सकते हैं।  EPFO ने बना दिया नया रिकॉर्ड ईपीएफओ के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 8.31 करोड़ क्लेम सेटलमेंट किया गया. पिछले साल 6.01 करोड़ क्लेम से तुलना में यह एक बड़ा उछाल है. इसमें से 5.51 करोड़ क्लेम एडवांस या आंशिक विड्रॉल से जुड़े रहे. जानकारी के अनुसार, ईपीएफओ ने 71.11% एडवांस क्लेम 3 दिन में निपटाए, जो पिछले साल यह आंकड़ा 59.19% था।  डिजिटल सुविधा से प्रॉसेस आसान  6.68 करोड़ क्लेम बिना चेक इमेज अपलोड, 1.59 करोड़ खातों में बिना employer मंजूरी बैंक लिंक, 70.55 लाख ट्रांसफर क्लेम ऑटो-प्रोसेस और 29.34 लाख सदस्यों ने खुद प्रोफाइल अपडेट किया. अप्रैल 2026 के दौरान 61.03 लाख क्लेम सेटलमेंट किया गया. वहीं 98.70% क्लेम 20 दिन से कम में निपटाए गए।  नई पहल: E-PRAAPTI पोर्टल  ईपीएफओ की ओर से एक नई पहल की भी शुरुआत की है, जिसके तहत निष्क्रिय PF खातों को सक्रिय करने के लिए नया प्लेटफॉर्म आधार आधारित एक्सेस से पुराने खाते जोड़ना आसान हो जाएगा. इसका फायदा UAN से लिंक न होने वाले खातों को मिलेगा और भविष्‍य में बिना मेंबर ID वाले यूजर्स को भी सुविधा मिलेगी।