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विवादित चैप्टर पर मचा बवाल, सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार—NCERT के पूरे सिलेबस की होगी समीक्षा

नई दिल्ली एनसीईआरटी की कक्षा 8वीं की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों को लेकर एक अध्याय दिया गया था। यह अध्याय नए तैयार हुए सिलेबस का हिस्सा था, जिस पर खूब विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने ऐतराज जताया था। इस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सरकार ने कहा कि हम NCERT के पूरे सिलेबस की ही समीक्षा कराएंगे। इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं बेंच ने केंद्र, राज्यों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पुस्तक में विवादास्पद अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले तीन विशेषज्ञों से दूरी बनाएं। अदालत ने कहा कि उसके आदेशों का उद्देश्य न्यायपालिका के संस्थागत कार्यों की किसी भी स्वस्थ एवं वस्तुनिष्ठ आलोचना को रोकना नहीं है। इसके साथ ही बेंच ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह विधि अध्ययन पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों का पैनल एक सप्ताह के भीतर गठित करे। इस पर सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हमने एनसीईआरटी में व्यवस्थागत बदलाव शुरू किए हैं। विषय विशेषज्ञों द्वारा जांच-पड़ताल किए बिना कुछ भी प्रकाशित नहीं किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर केंद्र एनसीईआरटी को पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के लिए कहने के बजाय इसके लिए विशेषज्ञ समिति का गठन करे तो यह बेहतर होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि केंद्र ने एनसीईआरटी को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। बता दें कि मंगलवार को ही NCERT ने विवादित चैप्टर को लेकर माफी मांगी थी। संस्था के निदेशक और सदस्यों ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक 'समाज की खोज: भारत और उससे आगे' के एक विवादित अध्याय को लेकर मंगलवार को बिना शर्त और बिना किसी योग्यता के सार्वजनिक माफी मांगी है। विवाद पुस्तक के अध्याय-4 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' को लेकर हुआ था। इसमें न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भों का उल्लेख किया गया था। एनसीईआरटी ने कहा है कि यह पूरी पुस्तक अब वापस ले ली गई है और फिलहाल उपलब्ध नहीं है। एनसीईआरटी की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘असुविधा के लिए हमें गहरा खेद है और हम सभी हितधारकों की समझदारी की सराहना करते हैं। एनसीईआरटी शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।’ सुप्रीम कोर्ट ने लगा दिया था पुस्तक पर बैन इस मामले में पहले ही उच्चतम न्यायालय ने इस पाठ्यपुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत , न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पुस्तक की सभी भौतिक तथा डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया था। साथ ही अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह भी पूछा था कि विवादित अध्याय के साथ पुस्तक प्रकाशित करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।  

यू-टर्न की खबर: अमेरिका पीछे हटा, ईरान की चेतावनी के बीच होर्मुज में टैंकरों की गति पर असर

वाशिंगटन मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने वैश्विक तेल बाजार में अचानक हलचल मचा दी. अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर को सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट किया है, ताकि दुनिया तक तेल की आपूर्ति जारी रह सके. लेकिन यह दावा ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. कुछ ही मिनटों बाद यह पोस्ट हटा दी गई और व्हाइट हाउस को आगे आकर सफाई देनी पड़ी। क्रिस राइट ने अपने पोस्ट में लिखा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान भी वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की, ताकि वैश्विक बाजारों तक तेल की आपूर्ति बनी रहे। हालांकि, यह जानकारी सामने आते ही तेल बाजार में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ ही देर में कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया. इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल किसी भी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन अभी ऐसा कोई मिशन नहीं चल रहा है। अमेरिकी मंत्री के दावे को IRGC ने नकारा इस मामले पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी प्रतिक्रिया दी थी. ईरान के अधिकारियों ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री के दावे को पूरी तरह गलत बताया. उनका कहना था कि कोई भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास आने की हिम्मत तक नहीं कर पाया. बाद में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के एक प्रवक्ता ने भी कहा कि ऊर्जा मंत्री के एक्स अकाउंट से जो वीडियो पोस्ट किया गया था, उसे विभाग के कर्मचारियों ने गलत कैप्शन के साथ साझा कर दिया था, इसलिए उसे हटा दिया गया। यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक बाजार पहले से ही बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई गुजरती है। ऑयल टैंकर पर हमले, शिपिंग कंपनियों ने बंद की सर्विस हाल ही में यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑर्गनाइजेशन और अन्य एजेंसियों के आंकड़ों में भी चिंता जताई गई है. 1 से 10 मार्च के बीच कम से कम 10 तेल टैंकरों पर हमले या हमले की कोशिशें दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इसके कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल का भंडार बढ़ने लगा है. कई तेल उत्पादक देशों को मजबूर होकर उत्पादन कम करना पड़ा है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश रोजाना लाखों बैरल कम तेल निकाल रहे हैं। अगर बंद रहा होर्मुज स्ट्रेट तो वैश्विक बाजार पर पड़ेगा असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्दी बहाल नहीं हुई, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और ज्यादा पड़ सकता है. हालांकि, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक फारस की खाड़ी से तेल निर्यात सामान्य नहीं होने दिया जाएगा। युद्ध से पहले हर दिन औसतन करीब 138 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. इसी बीच ट्रंप प्रशासन वैश्विक बाजार को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को बीमा सुरक्षा देने और जरूरत पड़ने पर नौसेना से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने का प्रस्ताव दिया है. इसके बावजूद तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। JPMorgan Chase के कमोडिटी विश्लेषकों ने मंगलवार को कहा, जब तक Strait of Hormuz से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ऐसे नीतिगत फैसलों का तेल की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं होगा। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया. सोमवार को कीमतें करीब 30 फीसदी बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. लेकिन इसके अगले ही दिन अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान के अंदर अब तक के सबसे आक्रामक हमले किए जाएंगे, जिससे बाजार में फिर अनिश्चितता बढ़ गई।

भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने की कोशिश, इंटेलिजेंस चीफ का दिल्ली दौरा

नई दिल्ली बांग्लादेश में बीएनपी (BNP) की जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हो गई हैं। देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मार्च की शुरुआत में बांग्लादेश की शीर्ष रक्षा खुफिया एजेंसी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (DGFI) के प्रमुख ने भारत का एक उच्च-स्तरीय दौरा किया। तारिक रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद से किसी शीर्ष अधिकारी की यह पहली भारत यात्रा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के नवनियुक्त DGFI महानिदेशक मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने 1 से 3 मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। 2 मार्च को एक निजी रात्रिभोज के दौरान दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों ने खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा की। आपको बता दें कि भारत लंबे समय से बांग्लादेश की धरती पर होने वाली भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है। भारत की प्राथमिकता नई सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था में जो गिरावट आई थी, उसे सुधारने के लिए तारिक रहमान सरकार अब भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है। इस सुरक्षा सहयोग का पहला बड़ा परिणाम पश्चिम बंगाल में देखने को मिला। राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने रविवार को घोषणा की कि बांग्लादेश के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के दो मुख्य आरोपियों को उत्तर 24 परगना के बनगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है। आपको बता दें कि 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख युवा नेता और 'इंकलाब मंच' के प्रवक्ता हादी को दिसंबर 2025 में ढाका में सिर में गोली मारी गई थी, जिसके बाद सिंगापुर में उनकी मौत हो गई थी। आरोपियों की पहचान फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। इन्हें शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात बनगांव से पकड़ा गया। बांग्लादेश सरकार ने गिरफ्तार व्यक्तियों तक 'काउंसुलर एक्सेस' मांगी है ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबैद इस्लाम ने सोमवार को ढाका में पत्रकारों से कहा कि सरकार हादी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी स्थापित नियमों का पालन करेगी। उन्होंने कहा, "हमने कोलकाता स्थित अपने मिशन के माध्यम से आरोपियों तक पहुंच मांगी है। चूंकि भारत और बांग्लादेश के बीच बंदियों के हस्तांतरण की संधि मौजूद है, इसलिए हम आरोपियों को वापस लाने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयास करेंगे। हमें इस मामले में भारत से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है।" सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर-जनरल कैसर राशिद का दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद हादी के हत्यारों की भारत में गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि तारिक रहमान सरकार भारत के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर यह सहयोग कितना प्रभावी साबित होता है।

12 दिन में संघर्ष तेज, ईरान ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला कर दिखाया कॉन्फिडेंस, हॉर्मुज पर कब्ज़ा

तेहरान ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया. रात भर पूरे पश्चिम एशिया में हवाई हमले के सायरन, मिसाइल लॉन्च और नए हमलों की खबरें सामने आईं. इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले जारी रखे, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया. हालांकि अब इन हमलों से ज्यादा बड़ा मुद्दा स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जिसने बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है।  ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है. इसमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के मध्य हिस्सों को निशाना बनाया गया. वहीं इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई ठिकानों पर एक और बड़ा हमला किया है. उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ईरान के लोगों को सीधा संदेश यह आपके लिए जीवन में एक बार मिलने वाला ऐसा अवसर है जिससे आप अयातुल्लाहशासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं. अयातुल्ला अब इस दुनिया में नहीं हैं और मैं जानता हूं कि आप नहीं चाहते कि उनकी जगह कोई दूसरा तानाशाह आ जाए।  स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज पर बढ़ा तनाव, बड़ी मुसीबत अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया, जिनमें बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाज भी शामिल थे. हॉर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसके बलों ने इस अहम तेल मार्ग के पास इन जहाजों को निशाना बनाया।  1300 से ज्यादा की हो चुकी है मौत संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका और इजराइल के हमलों में 1300 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है. रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के हो सकते हैं. वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बताया कि ईरान के हमलों में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है।  बढ़ रहा है संघर्ष का दायरा     इस युद्ध का असर पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई दे रहा है. लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए, जो ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को हुए हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई. वहीं हिज्बुल्लाह ने उसी दिन इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया।      खाड़ी देशों में भी हवाई सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए. बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं. कतर ने सात मिसाइल हमलों की पुष्टि की जबकि कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में पांच ड्रोन घुसने की जानकारी दी।      सऊदी अरब ने चार ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया. वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1,475 ड्रोन और 260 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. इससे साफ है कि यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।  इजरायल ने रात में किया हमला, ईरान ने सुबह-सुबह दिया धुआंधार जवाब मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच इजरायल ने तेहरान में हमलों की दूसरी लहर शुरू की. इजरायली सेना ने बताया कि उसने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हवाई हमले किए. बुधवार सुबह ईरान की ओर से ने कहा कि तेहरान के एक रिहायशी इलाके को निशाना बनाया गया. वहीं लेबनान में इजरायली हमले के दौरान रेड क्रॉस की एक एम्बुलेंस पर हमला हुआ, जिसमें एक पैरामेडिक की मौत हो गई. दूसरी ओर ईरान की सेना ने दावा किया कि उसने युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे तेज और भारी ऑपरेशन शुरू किया है. सरकारी मीडिया के अनुसार इस हमले में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरान की 175 बच्चियों का हत्यारा कौन? ट्रंप की सेक्रेटरी ने क्या कहा व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एक स्कूल पर हमले के मामले में क्यों कहा कि ईरान के पास टॉमहॉक मिसाइल हो सकती है, जबकि ये मिसाइलें केवल अमेरिका और उसके तीन सहयोगी देशों के पास हैं. इस पर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जवाब दिया कि राष्ट्रपति को अमेरिकी जनता के सामने अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है और इस पर जांच चल रही है. ईरान ने दागीं सऊदी अरब पर बैलिस्टिक मिसाइलें, 7 को मार गिराया गया ईरान के साथ चल रहे युद्ध के 12वें दिन सऊदी अरब ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश की ओर दागी गई सात बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये मिसाइलें देश के विभिन्न इलाकों की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया. मंत्रालय ने बताया कि सऊदी सेना लगातार हाई अलर्ट पर है और किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार है. हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं.  ईरान ने इजरायल में मचाई है भारी तबाही, दिखा नहीं रहे नेतन्याहू: अरागची ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे दुनिया से सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. अरागची ने दावा किया कि ईरान की शक्तिशाली सेना इजरायल के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, जिसे नेतन्याहू नहीं चाहते कि लोग देखें. उन्होंने दावा किया कि जमीन पर … Read more

जबरन कब्जे पर क्या कहते हैं संयुक्त राष्ट्र के कानून?

संयुक्त राष्ट्र दुनियाभर में अभी दो जंगे चल रही हैं, जिनकी चर्चा हर जगह हो रही है। इसमें पहला युद्ध तो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हो रहा है, जबकि दूसरा रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा है। रूस-यूक्रेन जंग फरवरी 2022 से ही जारी है। इस युद्ध में रूस ने यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जाया है, जिसमें डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसी जगहें शामिल हैं। इसके अलावा वह 2014 से ही क्रीमिया पर कब्जा करके बैठा है, जो कभी यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था। ये तो बस एक ताजा उदाहरण है, जिसमें किसी देश ने दूसरे देश के हिस्सों को कब्जाया है। अगर इतिहास उठाकर देखें तो ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे, जहां किसी देश ने पहले दूसरे मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ दी। फिर उस मुल्क के किसी हिस्से को कब्जा लिया। ईरान के साथ चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग में भी ऐसा होने की संभावना जताई जा रही है। अब यहां सवाल उठता है कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है? क्या किसी देश को दूसरे मुल्क की जमीन पर जबरन कब्जा करने का अधिकार है? संयुक्त राष्ट्र के नियम इस संबंध में क्या कहते हैं? अगर आप इंटरनेशनल रिलेशन के स्टूडेंट हैं या फिर सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो फिर आपको इसका जवाब भी मालूम होना चाहिए। देश कब्जाने को लेकर UN के नियम क्या हैं? संयुक्त राष्ट्र (UN) एक ऐसी संस्था है, जिसका प्रमुख काम दुनिया में शांति बनाए रखना है, ताकि युद्ध की संभावना पैदा ना हो। मगर फिर भी कई देशों के बीच युद्ध होते रहते हैं। UN के 193 सदस्य देश हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करना होता है। इस चार्टर को आप UN का संविधान मान सकते हैं, जिसमें बताया गया है कि किसी देश को क्या करना है और क्या नहीं करना है। इसी चार्टर में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि क्या कोई देश दूसरे देश के किसी हिस्से पर कब्जा कर सकता है या नहीं। UN चार्टर के आर्टिकल 2 में इस बारे में विस्तार से बात की गई है। इस आर्टिकल में 7 प्वाइंट्स हैं, जिसमें आर्टिकल 2(4) में कब्जे से संबंधित बातें हैं। आर्टिकल 2(4) में कहा गया है, 'सभी सदस्य देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी मुल्क की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी से परहेज करेंगे, या किसी भी अन्य ऐसे तरीके से परहेज करेंगे जो संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाता हो।' आसान भाषा में कहें तो इस आर्टिकल में कहा गया है कि दूसरे देशों पर ना तो हमला करें और ना ही उन्हें धमकी दें। यहां जिस क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की बात हुई है, उसका मतलब है कि किसी देश की ना तो जमीन कब्जाई जाए और ना ही उसके बॉर्डर चेंज किए जाएं। कुल मिलाकर शांति से रहें और युद्ध ना करें। जमीन कब्जाने के बाद क्या नियम लागू होते हैं? हालांकि, ऐसा देखने को मिलता है कि भले ही हर देश UN चार्टर पर साइन कर दे, लेकिन वह इसके नियमों का पालन नहीं करता है। जैसे रूस का ही उदाहरण लेते हैं, उसने UN के नियमों का पालन नहीं किया और यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जा लिया। अब यहां सवाल उठता है कि अगर कोई देश ऐसा कर देता है, तो फिर उसे कब्जे वाली जगह पर किन नियमों का पालन करना चाहिए। 12 अगस्त, 1949 को अपनाई गई चौथी जिनेवा संधि में इस बारे में विस्तार से बात हुई है। ये संधि युद्ध के समय और कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए समर्पित है। इसमें कहा गया है कि कब्जे वाले इलाके में उन सभी लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए, जो सेना के सदस्य नहीं हैं। कब्जे वाले इलाके में रहने वाले सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उनके साथ मारपीट या उन्हें टॉर्चर नहीं किया जा सकता है। कब्जाने वाले देश को इस बात की इजाजत नहीं है कि वह लोगों को भगाए या उन्हें डिपोर्ट करे। उसे इस बात की भी इजाजत नहीं है कि वह कब्जे वाले इलाके में अपने देश के नागरिकों को बसा सके। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कब्जा वाले इलाके में खाना और दवाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

क्या 2026 में बदल गए किरायेदारी कानून? मकान खाली कराने के दावों का फैक्ट चेक

नई दिल्ली 'नए रेंट नियम 2026' वाला एक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 'भारत का नया किराया कानून 2026' के दावे के साथ शेयर किए गए ऐसे पोस्ट में किराएदारों और मकान मालिकों से संबंधित नियमों को लेकर कई बड़े सनसनीखेज बदलाव के दावे किए गए हैं। वायरल पोस्ट के अनुसार किराया कानूनों में सरकार ने बहुत ज्यादा परिवर्तन कर दिया है। इसमें किराया, एडवांस और मकान खाली कराने के लिए नई वैद्यानिक प्रक्रिया में संशोधन की बात कही गई है। नए रेंट नियम 2026 के दावे से कंफ्यूजन ऑनलाइन तेजी से फैलने की वजह से ऐसे पोस्ट ने किराएदारों और मकान मालिकों में बहुत ही ज्यादा कंफ्यूजन पैदा कर दिया है। अलबत्ता,शेयर किए जा रहे तथ्यों में तकनीकी तौर पर कुछ सही हैं, लेकिन उनके पीछे की सच्चाई पूरी तरह से अलग है। 'नए रेंट नियम 2026' वाले पोस्ट में दावा     पहला तो वायरल पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि नया किराया नियम इसी साल लागू हुआ है।     इसे इस तरह से बताने की कोशिश की गई है कि ये नियम एकसाथ पूरे देश में लागू हैं।     डिपॉजिट के तौर पर मकान मालिक दो महीने से ज्यादा का किराया नहीं ले सकता।     बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए किराएदारों को नहीं निकाला जा सकता।     रेंट एग्रीमेंट डिजिटली स्टैंप्ड होना जरूरी है और 60 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन आवश्यक है।     12 महीने में सिर्फ एक बार किराया बढ़ सकता है, इसके लिए 90 दिनों की पूर्व सूचना जरूरी है।     मकान मालिक को प्रॉपर्टी में दाखिल होने से 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा।     अगर 30 दिनों के भीतर जरूरी मरम्मत नहीं करवाए जाते हैं तो किराएदार उसे खुद ही करवा सकता है और किराए से उसमें लगा खर्च काट सकता है।     ताला बदलना, पानी/बिजली काटना या किराएदारों को धमकाना दंडनीय है।     कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगर किराया, संपत्ति को नुकसान या एग्रीमेंट को लेकर कोई विवाद होता है, तो इसका निपटारा किराया अदालत या ट्रिब्यूनल के द्वारा 60 दिन के अंदर किया जाएगा।   'रेंट नियम 2026' जैसा कोई नियम नहीं बनाया गया है। अलबत्ता इनके कुछ प्रावधान मॉडल टेनेंसी एक्ट(MTA) 2021 में शामिल हैं।     केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद सरकार ने इसे एक गाइडलाइन नियमावली की तरह जारी किया था।     राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसके आधार पर अपने किराया नियम तैयार करने थे।     भारत में आवासीय और किराया संबंधी कानून राज्य सरकारों के अधीन आते हैं।     यानी किराया से संबंधित नियावली तैयार करने या उसमें संशोधन का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। मॉडल टेनेंसी एक्ट पर केंद्र सरकार का स्टैंड     दिसंबर, 2021 में तत्कालीन आवास और शहरी मामलों के राज्यमंत्री कौशल किशोर ने एक सवाल के जवाब में लोकसभा में कहा था कि लैंड और कोलोनाइजेशन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।     उन्होंने केंद्र शासित प्रदेशों को लेकर भी ये बताया था कि उन्हें सलाह दी गई है कि वह या तो मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नया कानून लागू करें या फिर अपने मौजूदा किराया नियावली में संशोधन करें। मॉडल टेनेंसी एक्ट को किन राज्यों ने अपनाया     राज्यसभा में पिछले साल अगस्त तक की दी गई जानकारी के अनुसार कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नियम तैयार किए हैं।     असम, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेश इनमें शामिल हैं।     केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों से कहा गया है कि वह मॉडल टेनेंसी एक्ट के ताजा स्वरूप के अनुरूप अपने किराया कानूनों में बदलाव करें। इन राज्यों ने इसके पुराने ड्राफ्ट के आधार पर इसे नोटिफाई कर लिया था। मॉडल टेनेंसी एक्ट को लेकर विवाद     रेंटल एग्रीमेंट के दौरान 'आधार' डिटेल उपलब्ध करवाने के प्रावधान पर सवाल उठाए गए हैं और इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत बताया जाता है।     इस कानून के तहत रेंट एग्रीमेंट के डिजिटल रजिस्ट्रेशन का यह कहकर विरोध होता है कि इससे किराएदार और मकान मालिक दोनों के निजी डेटा एक्सपोज होने का खतरा है।

समुद्र किनारे दिखीं रहस्यमयी ‘डूम्सडे फिश’, मैक्सिको में महिला ने रिकॉर्ड किया अनोखा नजारा

मैक्सिको बीच पर टहलना ही अपने आप में अनोखा अनुभव होता है। यहीं पर अगर कोइ दुर्लभ मछली दिख जाए तो दिन यादगार होना तय है। मैक्सिको के काबो सैन लुकास में बीच पर मोनिका पिटेंगर के साथ ऐसा ही हुआ है। उन्हें वो मछली दिखी है जो कई सालों में एक झलक दिखाती है। इस फिश को डूम्स डे फिश कहते हैं। डूम्स डे का मतलब 'प्रलय का दिन' होता है। मोनिका ने इसका वीडियो बनाकर अपना अनुभव साझा किया है। मोनिका वीडियो में बोलती दिख रही हैं कि मुझे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। फिक्शन मूवी वाला सीन था बिल्कुल। कुछ सेकंड बाद ही उन्हें दूसरी मछली भी दिखी तो वो नर्वस हो गईं। वो अजीब सी चमकती हुई आकृति थी इसलिए सभी परेशान हो रहे थे। पानी में वापस भेजा उनकी बहन को लगा कि ये मछली किसी दिक्कत में हैं। फिर उन्होंने मछली को धक्का देकर पानी में वापस भेजने की कोशिश शुरू की। तब कई और लोग भी आए और धक्का देने लगे। कितना अद्भुत मौका था जब मछलियां काफी देर बाद भी वापस नहीं आईं तो मोनिका और उनके परिवार ने इन फिश के बारे में पढ़ा और समझ आया ये तो अद्भुत मौका था। ये हर कोई नहीं अनुभव कर पाता है। 3000 फीट नीचे ये मछली 30 फीट तक लंबी होती है। ये पानी में 3000 फीट नीचे रहती हैं। इसलिए इन्हें अद्भुत माना जाता है। इनका असली नाम ओर फिश है। जापानी मान्यता इन्हें डूम्स डे फिश नाम जापान से मिला है। वहां माना जाता है कि ये समुद्र के देवता Ryūjin का संदेश देती हैं। ये बताती हैं कि सुनामी या भूकंप आने वाला है।

उत्तर भारत में गर्मी का कहर शुरू: राजस्थान से चली गर्म हवाओं ने MP, दिल्ली-UP को तपाया

नई दिल्ली राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं का असर अब पूरे मध्य भारत में दिखने लगा है। मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान तेजी से बढ़ा है और कई जगहों पर यह सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं और अगले एक सप्ताह तक तेज धूप और गर्म हवाओं का असर बना रह सकता है। दिल्ली में भी तापमान बढ़ने लगा है। मंगलवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के करीब रहेगा। हालांकि शहर की हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 326 दर्ज किया गया, जो Severe श्रेणी में आता है।   UP में मौसम का बदला मिजाज उत्तर प्रदेश में भी मौसम तेजी से करवट ले रहा है। आगरा, झांसी और बांदा जैसे जिलों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। वहीं मेरठ, हापुड़ और कासगंज में सुबह हल्की धुंध और कोहरा भी देखने को मिला। मध्यप्रदेश में बढ़ी गर्मी प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 6.4 डिग्री अधिक है। पचमढ़ी को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश संभागों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को गर्मी का तीखा असर महसूस होने लगा है। ट्रफ सिस्टम का असर, कहीं हल्की बारिश संभव मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय बिहार से मराठवाड़ा तक एक ट्रफ लाइन झारखंड, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के ऊपर से गुजर रही है। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बादल छाने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी हवाओं के साथ एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है और जम्मू-कश्मीर के ऊपर उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम भी बह रही है। प्रमुख शहरों का तापमान भोपाल – अधिकतम 36.8°C, न्यूनतम 15°C इंदौर – अधिकतम 36.4°C, न्यूनतम 15.5°C ग्वालियर – अधिकतम 37.2°C, न्यूनतम 18.2°C जबलपुर – अधिकतम 36°C, न्यूनतम 17°C राजस्थान में मार्च में ही हीटवेव राजस्थान में गर्मी ने मार्च की शुरुआत में ही अपने तेवर दिखा दिए हैं। बाड़मेर में तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश का सबसे अधिक रहा। वहीं जयपुर में पारा 37.8 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने जैसलमेर और बाड़मेर सहित चार जिलों में 10-11 मार्च के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है। जल्दी क्यों बढ़ रही गर्मी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी में उत्तर और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हुई। इसके कारण आसमान साफ रहा और सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक पहुंचने लगीं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले तीन-चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। 15 मार्च के बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना भी है।

राहत की खबर: बढ़ी LPG की सप्लाई, रिफाइनरियों ने उत्पादन में किया 10% इजाफा

ईरान ईरान युद्ध और मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच तेल और गैस सप्लाई में आई बाधा के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी (रसोई गैस) की कोई कमी नहीं है और हाल के दिनों में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की संभावित कमी को लेकर जो चिंताएं सामने आई थीं, अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिए जाने के बाद एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। साथ ही जमाखोरी और अनियमितताओं को रोकने के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक कदम भी उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि देश की सभी तेल रिफाइनरियां फिलहाल 100 प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रही हैं ताकि एलपीजी की आपूर्ति लगातार बनी रहे। इसके अलावा वितरण व्यवस्था पर निगरानी को और सख्त करने के लिए मॉनिटरिंग अवधि को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। सरकार ने जमाखोरी और काला बाजारी पर रोक लगाने के लिए Essential Commodities Act के प्रावधान लागू किए हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि Essential Services Maintenance Act (ESMA) लागू नहीं किया गया है। अफवाहों से बचने की अपील सरकार ने कहा कि कुछ समय के लिए बाजार में चिंता की स्थिति बनी थी, लेकिन अब आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। लोगों से सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करने की अपील की गई है, क्योंकि ऐसी अफवाहें अनावश्यक घबराहट पैदा कर सकती हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता अधिकारियों ने बताया कि घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कुछ उद्योग संगठनों द्वारा व्यावसायिक एलपीजी की संभावित कमी को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन सरकार ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वैश्विक संकट के बीच भारत की तैयारी सरकारी सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव के बावजूद India ऊर्जा आपूर्ति के मामले में कई देशों से बेहतर स्थिति में है। ऊर्जा मंत्रालय और तेल कंपनियां लगातार अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए। सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और मांग को संभालने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद हैं। किसी प्रकार का संकट नहीं है।  

विरासत अधिकार और शरीयत कानून पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, UCC पर संसद को दी सलाह

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। शरीयत कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संसद को विचार करना चाहिए। कानूनी शून्य (Legal Vacuum) पैदा होने का खतरा चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि यदि अदालत सीधे शरीयत कानून को खत्म कर देती है, तो इससे एक 'कानूनी शून्य' पैदा हो जाएगा। पीठ के अनुसार, ऐसी स्थिति में मुस्लिम विरासत (Inheritance) को नियंत्रित करने के लिए कोई वैकल्पिक कानून मौजूद नहीं रहेगा। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग को सकारात्मक बताते हुए इसे विधायिका (Legislature) के पाले में डाल दिया। हक और सुधारों के बीच संतुलन सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि सुधारों की प्रक्रिया में हमें यह ध्यान रखना होगा कि किसी समुदाय को उन अधिकारों से वंचित न कर दिया जाए जो उन्हें वर्तमान में मिल रहे हैं। वहीं, जस्तटिस बागची ने रेखांकित किया कि UCC लागू करने का अधिकार संसद के विवेक पर निर्भर है। उन्होंने कहा… "एक पुरुष के लिए एक पत्नी का नियम फिलहाल सभी समुदायों पर समान रूप से लागू नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं कि कोर्ट सभी दूसरी शादियों को असंवैधानिक घोषित कर दे। हमें नीति निदेशक सिद्धांतों (Directive प्रिंसिपल्स) को प्रभावी बनाने के लिए विधायी शक्ति पर निर्भर रहना होगा।"