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बांगलादेश बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी, अब भारत में घुसने की कोशिश करने वाले घुसपैठिये डरेंगे

कलकत्ता भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर घुसपैठ और तस्करी पर लगाम कसने के लिए अब एक अनोखी और चौंकाने वाली रणनीति पर विचार किया जा रहा है. अब यहां सीमावर्ती इलाकों पर पारंपरिक बाड़ और टेक्नोलॉजी के अलावा प्रकृति का खतरनाक हथियार इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है. खबर है कि सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ ने अपने फील्ड यूनिट्स को निर्देश दिया है कि वे नदी और दलदली इलाकों में सांप और मगरमच्छ जैसे सरीसृपों के इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन करें।  भारत-बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा में करीब 175 किलोमीटर नदी और दलदली इलाका है, जहां बाढ़ और भौगोलिक स्थिति के कारण सामान्य बाड़ लगाना संभव नहीं होता. ऐसे में BSF अब प्रकृति को ही सुरक्षा का हथियार बनाने की सोच रही है. माना जा रहा है कि अगर यह योजना लागू होती है, तो घुसपैठियों के लिए सीमा पार करना पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है।  खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के बाद यह विचार सामने आया है. 26 मार्च को BSF मुख्यालय से भेजे गए एक आंतरिक संदेश में कहा गया है कि जिन नदी वाले इलाकों में बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां ‘प्राकृतिक अवरोध’ के तौर पर सांप और मगरमच्छ जैसे जीवों का उपयोग किया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल यह योजना केवल चर्चा और व्यवहार्यता जांच के स्तर पर है, इसे लागू करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।  बीएसएफ के प्लान में कहां रुकावट? इसी साल फरवरी में दिल्ली स्थित बीएसएफ मुख्यालय में हुई एक बैठक के बाद यह कम्युनिकेशन जारी किया गया. संदेश में सीमा चौकियों (BOPs) को ‘डार्क जोन’ (जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है) के रूप में चिन्हित करने और वहां रहने वाले गांववालों के खिलाफ दर्ज मामलों की रिपोर्ट मांगी गई है।  हालांकि द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, BSF के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अभी यह सिर्फ चर्चा का विषय है. ‘अभी तक सांप-मगरमच्छ तैनात करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है. सिर्फ संभावना तलाशने को कहा गया है. इसमें कई चुनौतियां हैं… सरीसृपों को कहां से लाया जाए, उनका रखरखाव कैसे हो और नदी किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा।  घुसपैठियों के लिए डर का माहौल अगर यह योजना लागू हुई तो घुसपैठिए और तस्करों के लिए भारत में घुसने का ख्याल आते ही कांप उठना तय है. नदी के पानी में मगरमच्छ और घने जंगलों में जहरीले सांप है… यह सोचकर ही कोई भी गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करने से पहले सौ बार सोचेगा।  विशेषज्ञों का मानना है कि नदी वाले इलाकों में जहां फेंसिंग नहीं लग पाती, वहां प्राकृतिक बाधाएं काफी प्रभावी साबित हो सकती हैं. लेकिन साथ ही यह भी चिंता जताई जा रही है कि बाढ़ के समय ये सरीसृप दोनों तरफ के गांवों के लिए खतरा बन सकते हैं।  बॉर्डर पर फेंसिंग अभी भी अधूरी संसदीय स्थायी समिति की 17 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश सीमा की कुल 4,096.7 किमी में से सिर्फ 2,954.56 किमी ही फेंसिंग हो पाई है. अभी भी 371 किमी फेंसिंग बाकी है. कठिन भौगोलिक स्थिति, नदियां, पहाड़ियां और स्थानीय विरोध के कारण फेंसिंग कार्य धीमा चल रहा है।  गृह मंत्रालय की 2024-25 वार्षिक रिपोर्ट भी मानती है कि नदी और निचले इलाकों में फेंसिंग लगाना चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में BSF अब टेक्नोलॉजी (ड्रोन, सेंसर, कैमरा) के साथ-साथ प्राकृतिक तरीकों पर भी विचार कर रही है।  BSF अधिकारी मानते हैं कि सांप और मगरमच्छ तैनात करना आसान नहीं होगा. इनकी खरीद, रखरखाव, प्रजनन और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना होगा. साथ ही बाढ़ के मौसम में इनके गांवों में घुस आने का खतरा भी बना रहेगा. फिलहाल यह प्रस्ताव चर्चा के चरण में है. BSF पूर्वी कमांड को डार्क जोन की मैपिंग करने और रिपोर्ट देने को कहा गया है।   

₹2.80 करोड़ पर टैक्स ‘0’: क्या आप भी इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं? जानें धारा 54F के बारे में

हैदराबाद  हैदराबाद के आयकर अपीलीय न्‍यायाधिकरण (ITAT) ने एक खास फैसले में आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत एक टैक्‍सपेयर को बड़ी राहत दी है. अब उसे 2.80 करोड़ रुपये की टैक्‍सेबल इनकम नहीं देनी पड़ेगी।    ब्रिटेन में रह रहे व्‍यक्ति से जुड़ा मामला आइए जानते क्‍या आप ले सकते हैं ये लाभ और आयकर अधिनियम की धारा 54F क्‍या है, जिसके तहत इतनी बड़ी टैक्‍स छूट मिल सकती है? हालांकि, पहले इससे जुड़ा मामला समझ लेते हैं कि आखिर किस मामले के तहत इतनी बड़ी टैक्‍स छूट दी गई है. दरअसल, ये मामला एक NRI से जुड़ा हुआ है, जो ब्रिटेन में रहता है।  2.80 करोड़ पर 0 टैक्‍स 2.80 करोड़ पर 0 टैक्‍स: टैक्स सलाहकार प्लेटफॉर्म टैक्स बडी के अनुसार, ब्रिटेन में रहने वाले टैक्‍सपेयर रेवंत ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान पांच विला 5.26 करोड़ रुपये में बेचे. अधिग्रहण की लागत को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने 3.41 करोड़ रुपये का लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) दिखाया. इसके मुकाबले, उन्होंने धारा 54F के तहत 2.80 करोड़ रुपये की टैक्‍स छूट का दावा किया, जिसमें उन्होंने एक नई आवासीय संपत्ति में निवेश का दिखाया था।  क्‍या था पूरा विवाद?              क्‍या था पूरा विवाद: हालांकि, विवाद इसलिए पैदा हुआ, क्योंकि एक्वा स्पेस डेवलपर्स से खरीदी गई नई प्रॉपर्टी 10 अप्रैल, 2023 को उनकी बहन श्रेया के नाम पर रजिस्‍ट्रर्ड की गई थी.अधिकारी ने धारा 54F के तहत किए गए पूरे दावे को सख्त कानून के आधार पर खारिज कर दिया. जिसका तर्क था कि मकान रेवंत के नाम पर रजिस्‍टर्ड नहीं था. इसलिए, उन्हें कानूनी मालिक नहीं माना जा सकता था. धारा 54F के तहत दी गई छूट पूरी तरह से अस्वीकार कर दी गई।  रेवंत ने क्‍या दिया तर्क? रेवंत ने क्‍या दिया तर्क? : टैक्‍सपेयर के 3.41 करोड़ रुपये के पूरे LTCG को टैक्‍स के लायक समझा गया. रेवंत ने तर्क दिया कि प्रॉपर्टी का रजिस्‍ट्रेशन उनकी बहन के नाम पर केवल लॉजिस्टिकल संबधी समस्‍याओं के कारण किया गया था, क्योंकि वह विदेश में रह रहे थे और रजिस्‍ट्रेशन के समय भारत आने में असमर्थ थे।  सभी दस्‍तावेज सब्मिट किए         इसके बाद उन्‍होंने यह साबित करने के लिए कई दस्‍तावेज दिए. इसमें बिल्डर द्वारा जारी आवंटन पत्र उनके नाम पर था. 65 लाख रुपये की बुकिंग एडवांस अमाउंट सीधे उनके बैंक खाते से जमा की गई थी. 4.31 करोड़ रुपये की कुल खरीद अमाउंट उनके पिता के साथ संयुक्त बैंक खाते के माध्यम से भुगतान की गई थी. उनकी बहन ने लिखित पुष्टि दी कि वह संपत्ति की वास्तविक मालिक नहीं हैं।  कोर्ट ने सुनाया खास फैसला कोर्ट ने सुनाया खास फैसला: इन सभी दस्‍तावेजों के पेश करने के बाद हैदराबाद के आयकर अपीलीय न्‍यायाधिकरण (ITAT) ने माना कि न्यायिक मिसालें आम तौर पर धारा 54एफ के तहत आती हैं, जब संपत्तियां पति या पत्नी या अविवाहित बच्चों के नाम पर खरीदी जाती हैं. इसके बाद रेवंत के हक में फैसला आया है और उनका 2.80 करोड़ टैक्‍सेबल इनकम शून्‍य हो गया।  धारा 54एफ क्या है? आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत व्यक्ति और अविभाजित परिवार (HUF) गैर-आवासीय संपत्तियों जैसे शेयर या सोना की बिक्री से मिले लॉन्‍गटर्म कैपिटल गेन पर छूट का दावा कर सकते हैं, बशर्ते बिक्री से मिला नेट अमाउंट को भारत में किसी एक आवासीय संपत्ति में फिर से निवेश किया जाए. निवेश तय समय सीमा के भीतर किया जाना चाहिए. खरीद बिक्री से एक साल पहले या दो वर्ष बाद, या निर्माण तीन वर्ष के भीतर होना चाहिए. छूट की अधिकतम सीमा ₹10 करोड़ है। 

केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग 10-12 अप्रैल से शुरू, IRCTC के जरिए होगी पूरी प्रक्रिया

देहरादून  उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने घोषणा की है कि केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा की बुकिंग 10 से 12 अप्रैल के बीच शुरू कर दी जाएगी। यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि इस बार यात्रा को सुरक्षित, पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं। टिकटों की कालाबाजारी और धोखाधड़ी को रोकने के लिए यूकाडा ने इस बार 100% ऑनलाइन टिकटिंग का निर्णय लिया है।शुरुआत में 20-20 दिनों के स्लॉट के लिए टिकट खोले जाएंगे। मौसम और यात्रियों के दबाव का आकलन करने के बाद ही अगले चरणों की बुकिंग शुरू की जाएगी। इस बार कुल आठ रूटों पर हेली सेवाओं का संचालन होगा, जिसके लिए अलग-अलग ऑपरेटरों का चयन किया जा चुका है। इनमें चिप्सन एविएशन, राजस एयरो स्पोर्ट्स, थम्बी एविएशन, पिलग्रिमेज एविएशन, यूनाइटेड हेली चार्टर्स, हिमालयन हेली सर्विसेज, ट्रांसभारत एविएशन और एरो एयरक्राफ्ट शामिल है। चरणबद्ध तरीके से होगी बुकिंग यात्रियों की भारी भीड़ और हिमालयी क्षेत्र के अनिश्चित मौसम को देखते हुए बुकिंग को स्लॉट में बांटा गया है। शुरूआत में 20-20 दिनों के स्लॉट के लिए टिकट खोले जाएंगे। मौसम और यात्रियों के दबाव का आकलन करने के बाद ही अगले चरणों की बुकिंग शुरू की जाएगी। 8 रूट और 8 ऑपरेटर, 3 कंपनियां पहली बार देंगी सेवा इस बार कुल आठ रूटों पर हेली सेवाओं का संचालन होगा, जिसके लिए अलग-अलग ऑपरेटरों का चयन किया जा चुका है। इनमें चिप्सन एविएशन, राजस एयरो स्पोर्ट्स, थम्बी एविएशन, पिलग्रिमेज एविएशन, यूनाइटेड हेली चार्टर्स, हिमालयन हेली सर्विसेज, ट्रांसभारत एविएशन और एरो एयरक्राफ्ट शामिल है। खास बात यह है कि इनमें से तीन कंपनियां पहली बार चारधाम रूट पर अपनी सेवाएं देने जा रही हैं। पिछली यात्राओं में यात्रियों को रिफंड मिलने में हुई देरी पर यूकाडा ने सख्त रुख अपनाया है।  डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट किया कि क्लेम व्यवस्था में रिफंड की प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान और तेज बनाया गया है। साथ ही जिन ऑपरेटरों के खिलाफ रिफंड या सेवा में लापरवाही की शिकायत मिलेगी, उन्हें तुरंत नोटिस जारी कर दंडित किया जाएगा।     क्लेम व्यवस्था: रिफंड की प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान और तेज बनाया गया है।     कार्रवाई: जिन ऑपरेटरों के खिलाफ रिफंड या सेवा में लापरवाही की शिकायत मिलेगी, उन्हें तुरंत नोटिस जारी कर दंडित किया जाएगा।     एडवाइजरी: यात्रियों के अधिकारों और नियमों की जानकारी के लिए जल्द ही एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की जाएगी।

ईरान ने सीजफायर की शर्तों को किया खारिज, होर्मुज को बंद करने और 45 दिन के युद्धविराम पर नहीं हुआ सहमति

तेहरान   ईरान और अमेरिका को एक मसौदा प्रस्ताव मिला है, जिसमें 45 दिन के युद्धविराम और होर्मुज को फिर से खोलने की बात कही गई है ताकि युद्ध समाप्त करने का रास्ता निकाला जा सके. पश्चिम एशिया के दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये के मध्यस्थों की ओर से तैयार किया गया है, जो संघर्ष को रोकने के प्रयास में जुटे हैं. उनका मानना है कि 45 दिन की यह अवधि दोनों देशों के बीच व्यापक वार्ता के लिए पर्याप्त समय देगी, जिससे स्थायी युद्धविराम पर सहमति बन सके।  अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव देर रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पश्चिम एशिया में अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा गया, लेकिन अमेरिका की इस पर प्रतिक्रिया नहीं आई है. वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने होर्मुज को खोलने से लेकर 45 दिन के अस्थायी सीजफायर के लिए भी इनकार कर दिया है. ईरान के वरिष्ठ अधिकारी ने न्यू एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ईरान को लगता है कि अमेरिका परमानेंट सीजफायर नहीं करना चाहता।  क्या है युद्धविराम की शर्तें?     पहले चरण में करीब 45 दिन का युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव है, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी. अगर बातचीत के लिए और समय चाहिए हुआ, तो इस सीजफायर को बढ़ाया भी जा सकता है।      दूसरे चरण में युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का अंतिम समझौता किया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना और ईरान के उच्च स्तर के समृद्ध यूरेनियम का समाधान -जैसे उसे देश से बाहर भेजना या उसकी मात्रा कम करना, सिर्फ अंतिम समझौते के बाद ही संभव होगा।  इस प्रस्ताव की शर्तों की जानकारी सबसे पहले समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने दी. ईरान का कहना है कि वह तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक उसे वित्तीय क्षतिपूर्ति और भविष्य में फिर से हमले न होने का आश्वासन नहीं मिल जाता।  समझौता इतना भी आसान नहीं ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध में अब तक किसी तरह के समझौते की सूरत नहीं बन पाई. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि कोई भी पक्ष अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. युद्ध के 24वें दिन तक ट्रंप समझौते के मूड में थे, लेकिन एक बार फिर से वे काफी एग्रेसिव हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर बमबारी की धमकी दी है. ईरान भी लगातार कह रहा है कि वो अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन का इंतजार कर रहा है।  ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध में अब तक किसी तरह के समझौते की सूरत नहीं बन पाई. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि कोई भी पक्ष अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. युद्ध के 24वें दिन तक ट्रंप समझौते के मूड में थे, लेकिन एक बार फिर से वे काफी एग्रेसिव हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर बमबारी की धमकी दी है. ईरान भी लगातार कह रहा है कि वो अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन का इंतजार कर रहा है। 

US-ईरान के बीच सीजफायर की उम्मीद, ईरान ने भेजा मध्यस्थों को शांति प्रस्ताव

तेहरान  मिडिल-ईस्ट में तनाव में भारी बढ़ोतरी के साथ जंग अपने 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी धमकियां तेज़ कर दी हैं, जबकि तेहरान ने इस पर तीखा जवाब दिया है. ऐसे में जंग खतरनाक रूप लेती जा रही है।  Axios ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक ग्रुप 45 दिनों के संभावित संघर्ष-विराम की शर्तों पर चर्चा कर रहा है, जिससे जंग स्थायी रूप से रुक सकती है।  एक्सियोस ने बातचीत की जानकारी रखने वाले चार अमेरिकी, इज़रायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से यह बात कही है।  सीजफायर पर क्या बात हुई? एक्सियोस में संवाददाता बाराक रविद की रिपोर्ट में कहा गया है कि दो फेज़ वाली डील की शर्तों पर बातचीत जारी है. पहले फेज़ में 45 दिन का संभावित सीज़फ़ायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे फेज़ में युद्ध खत्म करने पर एक समझौता होगा. अगर बातचीत के लिए और वक्त की ज़रूरत हुई, तो सीज़फ़ायर बढ़ाया जा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोलने या ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का सामना करने की उनकी डेडलाइन मंगलवार शाम है।  पर्दे के पीछे क्या चल रहा? रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी, मिस्र और तुर्की के मीडिएटर के ज़रिए बातचीत हो रही है और ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भेजे गए टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए भी हो रही है. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने हाल के दिनों में ईरान को कई प्रपोज़ल दिए, लेकिन अभी तक ईरानी अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया है।  सूत्रों ने कहा कि मीडिएटर पार्टियों के साथ दो-फ़ेज़ वाली डील की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं. पहला फ़ेज़ संभावित 45-दिन का सीज़फ़ायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी. एक सूत्र ने कहा कि अगर बातचीत के लिए और समय की ज़रूरत हुई तो सीज़फ़ायर बढ़ाया जा सकता है।  दूसरे फ़ेज़ में युद्ध खत्म करने पर एक एग्रीमेंट होगा. सूत्रों ने कहा कि मीडिएटर सोचते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलना और ईरान के बहुत ज़्यादा एनरिच्ड यूरेनियम का समाधान या तो इसे देश से हटाकर या डाइल्यूशन करके सिर्फ़ एक फ़ाइनल डील का नतीजा हो सकता है।  होर्मुज़ को लेकर ईरान का सख्त रुख! ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने 5 अप्रैल, रविवार को होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और इज़रायल को कड़ी चेतावनी जारी की है. आईआरजीसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि फारस की खाड़ी में नई सुरक्षा व्यवस्था बन रही है और यह अहम समुद्री रास्ता अब पहले जैसा नहीं रहेगा।  वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर रविवार के दिन पलटवार की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर यह रास्ता नहीं खोला गया, तो मंगलवार को ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा. होर्मुज़ पर ईरान के नियंत्रण के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। 

रुपया हुआ मजबूती से ऊंचा, डॉलर के मुकाबले 12 साल की सबसे बड़ी वृद्धि, RBI के कदमों का असर

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सख्त कदमों के बाद रुपये ने 12 साल की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की है, जिससे बाजार में नई हलचल पैदा हो गई है। आज 6 अप्रैल को रुपया 0.3% मजबूत होकर 92.83 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को इसमें 1.8% की तेज छलांग दर्ज की गई थी, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की बढ़त है। ब्लूमबर्ग ने सीआर फॉरेक्स के प्रबंध निदेशक अमित पबारी के हवाले से बताया है कि 10 अप्रैल की समयसीमा से पहले बैंक अपनी डॉलर की स्थिति समाप्त करेंगे, जिससे रुपया और मजबूत होकर 91.50 से 92 के दायरे में पहुंच सकता है। शुक्रवार को गुड फ्राइडे के कारण स्थानीय बाजार बंद थे। RBI के सख्त फैसलों से बदला खेल रुपये की मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण RBI के हालिया कड़े कदम हैं। केंद्रीय रिजर्व बैंक ने बैंकों की डॉलर पोजीशन $100 मिलियन तक सीमित की और ऑफशोर ट्रेडिंग के बड़े माध्यम NDF पर रोक लगाई साथ ही सट्टेबाजी वाले सौदों पर भी सख्ती बढ़ाई। आरबीआई के इन कदमों से बाजार में डॉलर की मांग घटी और रुपया मजबूत हुआ। ईरान युद्ध का असर अब भी बना खतरा हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव अभी भी रुपये के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। तेल की कीमतों में तेजी, भारत का बढ़ता आयात बिल और देशी निवेशकों की बिकवाली, जैसे ये सभी फैक्टर रुपये पर दबाव बना सकते हैं। पिछले एक साल में कितना कमजोर हुआ रुपया तेजी के बावजूद, रुपया पिछले एक साल में करीब 8.2% गिर चुका है और एशिया की कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा है। रुपये को सपोर्ट देने के लिए RBI को भारी हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट आई है। RBI की बैठक पर टिकी बाजार की नजर अब निवेशकों की नजर RBI की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर है। खास तौर पर गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान महत्वपूर्ण होंगे। यह तय करेगा कि रुपया आगे और मजबूत होगा या दबाव में आएगा। समिति की बैठक सोमवार से शुरू होगी और बुधवार को इसके नतीजे की घोषणा की जाएगी। क्या फिर कमजोर होगा रुपया? विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ईरान युद्ध लंबा चलता है तो रुपया फिर दबाव में आ सकता है। मुथूट फिनकॉर्प लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री अपूर्व जावडेकर का कहना है, "मुझे उम्मीद है कि अगर ईरान युद्ध लंबा चलता है, जिससे कम से कम एक तिमाही तक तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, तो रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो जाएगा, जब तक कि आरबीआई और हस्तक्षेप न करे।" एशियाई देशों की करेंसी पर दबाव भारत अकेला नहीं है। थाईलैंड, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देश भी ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, जिससे उनकी मुद्राएं भी दबाव में हैं। RBI के सख्त कदमों से रुपये को मजबूती जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक हालात, खासकर तेल और युद्ध आगे की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है।

मणिपुर में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, भारत-म्यांमार बॉर्डर के पास 4 उग्रवादी पकड़े गए

 इंफाल मणिपुर में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है, जहां अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े चार उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, ये कार्रवाई दो अलग-अलग जिलों में की गई. इस ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस की भी अहम भूमिका रही. खास बात यह है कि इनमें से कुछ गिरफ्तारियां भारत-म्यांमार सीमा के पास हुई हैं, जो लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों का संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. इस कार्रवाई से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश गया है।  पुलिस के बयान के अनुसार, शनिवार को सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने तेंगनौपाल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित यांगौबुंग गांव के आसपास से दो उग्रवादियों को गिरफ्तार किया. इनकी पहचान थोखचोम इंगोचा सिंह (31) और थोखचोम रघुनाथ मेइती (48) के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि ये दोनों अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हुए थे और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में थे. इस इलाके में अक्सर उग्रवादी गतिविधियों की खबरें सामने आती रही हैं।  इसी दिन एक अन्य कार्रवाई में इम्फाल ईस्ट जिले के पैलेस कंपाउंड इलाके से एक और उग्रवादी को गिरफ्तार किया गया. इस आरोपी की पहचान लैशराम इनाओटोम्बा सिंह (19) के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, यह युवक भी एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा हुआ था और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था. सुरक्षा एजेंसियों को उसके बारे में पहले से इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर उसे पकड़ने की योजना बनाई गई थी।  इसके बाद रविवार को भी सुरक्षा बलों ने अभियान जारी रखा और इम्फाल ईस्ट जिले के संजेनबाम खुनौ इलाके में एक और उग्रवादी को उसके घर से गिरफ्तार किया गया. हालांकि पुलिस ने इस आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन शुरुआती जांच में उसके भी एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़े होने की बात सामने आई है. इस तरह दो दिनों में चार अलग-अलग उग्रवादियों की गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।  पीटीआई के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से राज्य में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. सुरक्षा एजेंसियां अब इन आरोपियों से पूछताछ कर उनके नेटवर्क, फंडिंग और अन्य साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं. मणिपुर में लंबे समय से उग्रवाद एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि आम लोगों में भी भरोसा बढ़ता है।   

क्या ईरान में 45 दिन का युद्ध विराम होगा? पाकिस्तान समेत कई देशों की पेशकश पर निर्भर स्थिति

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध से मची वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तान सहित अन्य मध्यस्थों ने पूरा जोर लगाया है और 45 दिनों के सीजफायर प्लान पर बातचीत शुरू हो गई है। बता दें कि बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से यह जंग जारी है। ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं इस युद्ध की वजह से ईंधन आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इस बीच एक्सियोस ने रविवार को चार अमेरिकी, इजरायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह 45 दिन के संभावित सीजफायर की शर्तों पर चर्चा कर रहा है। इस सीजफायर प्लान से युद्ध का हमेशा के लिए अंत भी हो सकता है। क्या है सीजफायर प्लान? रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थ दो चरणों वाले एक समझौते की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें बताया गया है कि पहला चरण 45 दिन का संभावित सीजफायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी। वहीं दूसरा चरण युद्ध को समाप्त करने के समझौते पर आधारित होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बातचीत के लिए और समय की जरूरत पड़ी, तो सीजफायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है। एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे मध्यस्थ युद्धविराम के लिए जुटे सभी मध्यस्थ एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एपी को बताया है कि संघर्षविराम कराने की उनकी सरकार की कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे सीजफायर को लेकर उम्मीदें एक बार फिर लौटी हैं। वही क्षेत्र के दो अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के अलावा तुर्किये और मिस्र के मध्यस्थ भी अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। ईरान ने रखी हैं शर्तें एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। वही ईरान ने युद्ध खत्म करने के शर्त के रूप में युद्ध का हर्जाना और सुरक्षा की गारंटी समेत कई मांगें रखी हैं। ट्रंप ने दी है डेडलाइन इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को एक बार फिर धमकी देते हुए कहा कि ईरान के साथ सोमवार तक समझौता होने की प्रबल संभावना है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो अमेरिका और तेजी से हमले करेगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अगर ईरान समझौते की दिशा में तेजी नहीं दिखाता है तो वह सब कुछ उड़ा देने और तेल पर नियंत्रण करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वार्ता जारी रखने के लिए ईरानी वार्ताकारों को राहत दी है। इससे पहले ट्रंप ने रविवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों पर हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को चेतावनी दी कि अगर जलमार्ग को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान को 'नरक बना दिया जाएगा। ईरान ने दिया दो टूक जवाब वहीं ईरान ने ट्रंप को दो टूक जवाब दे दिया है। ईरान के संस्कृति मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों को खारिज करते हुए उन्हें 'अस्थिर और भ्रम में रहने वाला व्यक्ति' करार दिया। सैयद रजा सालिही-अमीरी ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा, ''ईरानी समाज उनके बयानों पर आम तौर पर ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका मानना है कि उनमें व्यक्तिगत, व्यवहारिक एवं भाषाई संतुलन का अभाव है और वह लगातार परस्पर विरोधी रुख अपनाते रहते हैं।'' सालिही-अमीरी ने कहा, ''ऐसा लगता है कि ट्रंप एक ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिसका पूरा विश्लेषण न तो ईरानी कर पा रहे हैं और न ही अमेरिकी।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज ‘दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए बंद है।’

ईरान ने युद्ध के बीच भारत की कूटनीति की सराहना, विदेश नीति पर गर्व महसूस किया

नई दिल्ली ईरान ने भारत की कूटनीति की तारीफ की है। सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही का कहना है कि भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है। खास बात है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को अल्टीमेटम दे दिया है। वहीं, इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध और तेज होने के आसार हैं। हालांकि, ट्रंप का दावा है कि सोमवार को डील हो सकती है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इलाही ने कहा है, 'भारतीय कूटनीति बहुत अच्छी है और वे इस मुद्दे में अधिक बड़ी भूमिका भी निभा सकते हैं।' उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका और ईरान को युद्ध के बीच 1 महीने से ज्यादा समय हो गया है। विदेश नीति की भी हुई थी तारीफ कुछ दिनों पहले ही भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने कहा, 'भारत निश्चित रूप से तनाव कम करने में एक प्रभावी और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख देश के रूप में और अपनी संतुलित विदेश नीति के कारण, भारत तनाव कम करने और बातचीत को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए एक विशेष स्थान रखता है।' उन्होंने कहा, 'भारत के सभी पक्षों के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं, जो इसे गलतफहमियों को कम करने और राजनयिक रास्तों को मजबूत करने में एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाते हैं।' जयशंकर को मिलाया ईरानी विदेश मंत्री ने फोन भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बात की थी। उन्होंने जानकारी दी, 'ईरान के विदेश मंत्री अराघची का फोन आया। मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई।' जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से भी रविवार को बात की थी। खबर है कि दोनों के बीच बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति और एनर्जी सप्लाई का मुद्द उठा था। विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की। ट्रंप की धमकी ट्रंप ने रविवार को ईरान को सात अप्रैल तक का समय देकर कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला तो वह अब ईरान के बिजली घरों और पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा। उन्होंने सात अप्रैल 'मंगलवार' को 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' घोषित कर दिया है। उन्होंने पोस्ट किया है, ईरान में मंगलवार 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' होगा, सब कुछ एक साथ। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा। समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से गुजरता है। फरवरी 2026 में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस रास्ते पर कड़ा नियंत्रण कर लिया है। इससे दुनिया भर में तेल की आपूर्ति बाधित हुई है और कीमतें काफी ज्यादा बढ़ गयी हैं। ट्रंप का 'इसे खोल दो' कहना इसी वैश्विक संकट को खत्म करने की अंतिम चेतावनी है।

487 किलोमीटर रूट पर कवच परीक्षण पूरा, दक्षिण मध्य रेलवे ने बड़ी सफलता हासिल की

हैदराबाद  दक्षिण मध्य रेलवे ने 2025-26 के दौरान 487 किलोमीटर रूट के लिए कवच क्षेत्र परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक है।  कवच स्वदेशी रूप से विकसित एक सुरक्षा प्रणाली है, जिसे मानवीय त्रुटि के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। यह किसी खतरे के सिग्नल को पार करने वाली ट्रेन के लिए स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकता है और स्पीड एवं सिग्नल की लगातार निगरानी करके सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने में मदद करता है। दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने रविवार को कहा कि उसने सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर दिया है और इस दिशा में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर नेटवर्क में कवच 4.0 की स्थापना के लिए कदम उठाए गए। जोन ने रेलवे बोर्ड के 402 रूट किलोमीटर के लक्ष्य को पार करते हुए 487 रूट किलोमीटर की दूरी के लिए फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। एससीआर ने एक बयान में कहा कि सावधानीपूर्वक योजना और प्रभावी कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप यह शानदार उपलब्धि हासिल हुई है। जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम भी शुरू कर दिया है, जिससे पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 357 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 479 रूट किलोमीटर (आरकेएम) की दूरी के लिए सेक्शन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। कवच 4.0 इंस्टॉलेशन का फील्ड परीक्षण काजीपेट पेद्दामपेट (101 मार्ग किमी), मल्काजगिरि कामारेड्डी (106 मार्ग किमी), चारलापल्ली रघुनाथपल्ली (79 मार्ग किमी), गुंतकल रायचूर (120 मार्ग किमी), और मुदखेड परभणी (81) के बीच खंडों में आयोजित किया गया था। इन खंडों में लोको कवच का परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर ने काजीपेट बलहरशाह, विजयवाड़ा दुव्वाडा और वाडी रेनिगुंटा के बीच 479 रकमाल की दूरी के विभिन्न खंडों में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम को चालू किया है। ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग एक ऐसी रेल संचालन प्रणाली है, जिसमें ट्रेनों की आवाजाही स्वचालित स्टॉप सिग्नलों द्वारा नियंत्रित होती है। ये सिग्नल ट्रेनों के गुजरने पर स्वचालित रूप से संचालित होते हैं। एबीएस प्रणाली का उद्देश्य एक ही दिशा में चलने वाली ट्रेनों को पीछे से टक्कर के जोखिम के बिना सुरक्षित रूप से एक-दूसरे का अनुसरण करने में सक्षम बनाना है। इससे रेलवे लागत कम होती है, खंड की क्षमता में सुधार होता है और ट्रेनों की औसत गति भी बढ़ती है। इस प्रणाली को शुरू में एससीआर नेटवर्क के उच्च घनत्व वाले और प्रमुख मुख्य मार्गों पर चालू किया जा रहा है। एससीआर के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने क्षेत्रीय और मंडल स्तर पर सिग्नल और दूरसंचार विंग के अधिकारियों के असाधारण योगदान की सराहना की है, जिसकी बदौलत जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और कवच फील्ड परीक्षणों को रिकॉर्ड स्तर पर सफलतापूर्वक पूरा किया है। महाप्रबंधक ने यह भी कहा कि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कवच और एबीएस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।