samacharsecretary.com

BRICS समिट के समापन पर PM मोदी का बड़ा संदेश, दुनिया को चाहिए अब ठोस नतीजे

नई दिल्ली नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा क‍ि 'ब्रिक्स' सिर्फ देशों का समूह नहीं बल्कि समाधान का इकोसिस्टम है। उन्‍होंने उम्मीद जताई कि 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' साझा विजन को नई दिशा देगा। पीएम ने आयोजन को सफल बनाने के ल‍िए सभी सदस्य देशों का आभार जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्‍मेलन में शाम‍िल सभी सदस्‍यों का आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा क‍ि आपके महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने हमारे सहयोग को व्यापकता भी दी है और गहराई भी दी है। आप सबकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती उपयुक्तता, उदारता और समावेशिता का प्रमाण है। 'ब्रिक्स समाधान का एक इकोसिस्टम' पीएम मोदी ने कहा, पिछले दो दिनों की हमारी चर्चाओं ने हमारा विश्वास और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, समाधान का एक इकोसिस्टम है। हम आशा करते हैं इस समिट से उसमें जोड़े गए 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' हमारे साझा विजन और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा। हमें सभी परिणाम को समयबद्ध एक्शन और अंतिम पायदान पर प्रभाव से जोड़ना होगा। उन्‍होंने कहा हमारे फ्रेमवर्क फाइल्स से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में प्रभाव पैदा करें, इसके लिए हम सब मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। अब दुनिया हमसे केवल विचार और प्रतिबद्धता नहीं, कंक्रीट पर‍िणाम की अपेक्षा करती है। मुझे विश्वास है कि हम साझा प्रयासों से इन अपेक्षाओं पर जरूर खरे उतरेंगे। पीएम मोदी ने अगले होस्ट के तौर पर चीन को दी बधाई इस मौके पर पीएम मोदी ने ब्रिक्स के अगले होस्ट के तौर पर चीन को एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने कहा, नई दिल्ली समिट को सफल बनाने के लिए मैं आप सभी का और आप सबकी टीम्स का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आप सभी की सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना करता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर घातक हमला, काफिले को बनाया निशाना; 23 जवानों की मौत की आशंका

इस्लामाबाद पाकिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आई है। बलूचिस्तान के लासबेला जिले में सुरक्षा बलों पर बड़ा हमला हुआ है। जानकारी के अनुसार यह हमला एन-25 राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया गया, जहां पाकिस्तानी सेना का काफिला जा रहा था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हमले में 23 से ज्यादा जवानों के मारे जाने की आशंका है। कई अन्य जवान घायल भी बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना लासबेला के कशारी इलाके में हुई। यहां फ्रंटियर फोर्स के करीब 15 वाहनों वाला काफिला चल रहा था। काफिले को निशाना बनाकर विस्फोट किया गया। विस्फोट के बाद एक सुरक्षा वाहन में आग लग गई। घायल जवानों को सबसे पहले बेला शिविर पहुंचाया गया। हमले का आरोप बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए पर लगाया जा रहा है। यह संगठन पिछले कई महीनों से बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों, सरकारी इमारतों और सड़क मार्गों पर हमले बढ़ा रहा है। बीएलए का दावा रहा है कि उसके लड़ाके पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं। खबरों की माने तो लासबेला के कशारी इलाके में फ्रंटियर फोर्स के करीब 15 वाहनों वाले काफिले को निशाना बनाया गया। विस्फोट के बाद 23 से ज्यादा जवानों के मारे जाने की आशंका है। कई अन्य जवान घायल भी बताए जा रहे हैं। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है। घायलों का इलाज बेला शिविर में चल रहा है। राजमार्ग फिलहाल बंद है। हालांकि अभी तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से इस हमले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में मृतकों की संख्या घट-बढ़ भी सकती है। बता दें कि लासबेला एन-25 बलूचिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है। यह राजमार्ग कराची को क्वेटा से जोड़ता है और प्रांत के कई रणनीतिक इलाकों से होकर गुजरता है। इसी रास्ते से सुरक्षा काफिले, आम यात्री और व्यापारिक वाहन भी चलते हैं। लासबेला कराची के काफी करीब माना जाता है। यह इलाका तटीय मार्गों और पश्चिमी बलूचिस्तान को बंदरगाह शहर से जोड़ने वाला अहम इलाका है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब बलूचिस्तान में हिंसा पहले से बढ़ी हुई बताई जा रही है। हाल के महीनों में सुरक्षाकर्मियों, चौकियों, सरकारी सुविधाओं और सड़क मार्गों पर कई हमलों की खबरें आई हैं। बीएलए जैसे संगठन एक से ज्यादा जगहों पर हमला करने और चलते काफिलों को निशाना बनाने का दावा करते रहे हैं। राजमार्गों पर सुरक्षा काफिलों पर हमला बलूचिस्तान में लंबे समय से होता रहा है।

ईरान के हमलों से बढ़ा तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों को अब सिर्फ 2 तय समय पर मिलेगी अमेरिकी सुरक्षा

वाशिंगटन  अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल टौंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा, खासकर हवाई सुरक्षा के समय को सीमित कर दिया है। यह कदम इस अहम समुद्री रास्ते पर चलने वाले जहाजों पर ईरान के हमलों में बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका मई से ही जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में ओमान के तट के पास वाले रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को हवाई सुरक्षा दे रहा था, जिससे ईरानी हमलों के बावजूद तेल की कुछ शिपमेंट आती-जाती रहीं। इस व्यवस्था के तहत, जहाज के मालिक सबसे पहले अमेरिकी नौसेना के कोऑर्डिनेशन सेंटर से मंजूरी लेते थे। यह सेंटर जहाजों को कोऑर्डिनेट्स और गुजरने का समय बताता था, जिसके दौरान अमेरिकी विमान उन्हें सुरक्षा देते थे। होर्मुज में टैंकरों की हवाई सुरक्षा के समय घटाया लेकिन NCAGS द्वारा समुद्री सलाहकारों को भेजे गए ईमेल के हवाले से पता चला है कि सितंबर की शुरुआत में रात भर मिलने वाली सुरक्षा की लंबी अवधि को घटाकर हर दिन दो तय ट्रांजिट स्लॉट कर दिया गया है। जहाजों को सलाह दी गई है कि वे तय समय पर अपनी यात्रा शुरू करें ताकि उन्हें अमेरिकी सेना से सबसे अच्छी सुरक्षा मिल सके। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों की देखरेख करने वाली यूएस सेंट्रल कमांड ने इन संदेशों को बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया और कहा कि NCAGS के संदेश खुद ही सब कुछ स्पष्ट करते हैं। कमर्शियल जहाजों पर बढ़े ईरान के हमले यह बदलाव तब हुआ जब कमर्शियल जहाजों पर हमले बढ़ गए। ईरान ने बुधवार को कहा कि उसने पांच ईरानी टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में दो अमेरिकी जहाजों और आठ तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि ये हमले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों से एक अमेरिकी युद्धपोत पर किए गए हमलों के बाद हुए थे। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने भी दुबई और इराक के पास टैंकरों पर ईरान के और हमलों की जानकारी दी। बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 70 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों पर हमले हो चुके हैं।

BRICS में ग्लोबल साउथ की बढ़ी आवाज, PM मोदी बोले- समाधान उनके लिए नहीं, उनके साथ मिलकर बनाएं

नई दिल्ली विविधता और सहयोग को सेलिब्रेट करते हुए ब्रिक्स समिट पूरी हुई। इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत ने की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि BRICS में उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभव का सम्मान होता है और समाधान उनके लिए नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं। टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर ये बोले पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि BRICS की शक्ति हमारी विविधता और सहयोग में है। ब्रिक्स के पार्टनर देश और आउटरीच के लिए आमंत्रित विशेष प्रतिनिधियों के साथ एक सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेशन हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। 'कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लोगों के जीवन पर इसका बहुत नकारात्मक असर प्रभाव भी हो रहा है और व्यापक प्रभाव भी हो रहा है। पीएम मोदी का सबको साथ लेकर चलने पर जोर पीएम ने कहा कि महामारियों, क्लाइमेट डिजास्टर और सप्लाई चेन में गतिरोध ने दिखाया है कि आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समूह में कई कदम उठाए हैं। मोदी ने कहा कि टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेशन हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए हमने टेक्नॉलजी को अपनाने में सबको साथ लेकर चलने पर जोर दिया है। मित्रता, सहभागिता और सहयोग… ब्रिक्स समिट का ऐसे हुआ समापन उन्होंने कहा कि भारत ने ब्रिक्स के मंच से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है। हमारी कोशिश है कि ब्रिक्स सहयोग सिर्फ सरकारों तक सीमित ना रहे। हमारे उद्यमी, किसान, रिसर्चर, महिलाएं, युवा इसके सक्रिय भागीदार बनें। पीएम मोदी ने कहा कि हमारा मानना है कि BRICS में विकसित सल्यूशन का लाभ सिर्फ ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप अपनाने की जरूरत है।

शी जिनपिंग ने BRICS में रखा चीन का 5 सूत्रीय एजेंडा, AI से लेकर व्यापार और आधुनिक कारखानों पर जोर

नई दिल्ली चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दुनिया में बराबरी की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि बिना नियमों वाली दुनिया उस चौराहे जैसी है, जहां यातायात संकेत नहीं हों। ऐसी जगह अराजकता होना तय है। जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम सभी देशों को मिलकर बनाने चाहिए। ताकतवर देश जो चाहे, वही सही है, यह सोच अब नहीं चल सकती। ग्लोबल साउथ के देशों को मिलकर अंतरराष्ट्रीय कानून का बचाव करना चाहिए। सभी देशों की बराबरी, दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल न देना और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने जैसे नियमों का पालन जरूरी है। साथ ही कानून और अंतरराष्ट्रीय नियम सभी पर एक जैसे लागू होने चाहिए। इसमें दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। शी जिनपिंग ने कहा कि बड़े काम करने के लिए लोगों को सबसे पहले रखना जरूरी है। ग्लोबल साउथ के देशों को आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास करना चाहिए और साल 2030 तक तय विकास लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि चीन ने 5 साल पहले ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव शुरू किया था। इसके तहत दूसरे देशों के साथ मिलकर 2 हजार से ज्यादा परियोजनाएं पूरी की गई हैं। 2 लाख से अधिक लोगों को ट्रेनिंग भी दी गई है। इसका फायदा 120 से ज्यादा देशों के लोगों को मिला है। चीन दुनिया के लिए अपने दरवाजे और ज्यादा खोल रहा है। राजनयिक संबंध रखने वाले अफ्रीका के सभी 53 देशों को चीन ने बिना टैरिफ वाली सुविधा दी है। ब्रिक्स के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने होंगे। उन्होंने उद्योग और सामान पहुंचाने की चेन को मजबूत रखने और आपसी फायदे वाले खुले सहयोग की बात कही। शी जिनपिंग ने कहा कि नई तकनीक, पारंपरिक उद्योगों के सुधार और नए क्षेत्रों में मिलकर काम करने की जरूरत है। चीन ने 5 नई पहल का रखा प्रस्ताव चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 5 नई पहल का प्रस्ताव रखा। पहली पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खुले और सभी के लिए उपलब्ध ढांचे की है। चीन ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा समूह बनाने, बड़े भाषा मॉडल पर सहयोग बढ़ाने, ट्रेनिंग और एक्सपर्ट बैठकों का आयोजन करने को तैयार है। व्यापार को आसान बनाना दूसरी पहल व्यापार और निवेश को आसान बनाने की है। चीन ने ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत देश आपस में नीतियों का तालमेल बढ़ा सकेंगे। चीन अगले साल सेवाओं के व्यापार पर ब्रिक्स मंच भी आयोजित करेगा। तीसरी पहल डिजिटल उद्योगों में सहयोग की है, जिसके लिए एक साझा क्लाउड मंच बनाने का प्रस्ताव है। आधुनिक कारखाने बनाना चौथी पहल समझदार मशीनों और कारखानों से जुड़ी है। चीन ब्रिक्स देशों को आधुनिक कारखाने बनाने और साझा मानक तैयार करने में मदद देगा। पांचवीं पहल विज्ञान और तकनीक से जुड़े हुनरमंद लोगों को तैयार करने की है। इसके लिए ब्रिक्स इंजीनियरों का साझा समूह बनाने और युवाओं के लिए विज्ञान-तकनीक नवाचार कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

BRICS में अमेरिका की नीतियों पर निशाना, फिर भी भारत का रुख संतुलित; क्या बदली विदेश नीति?

नई दिल्ली 8वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में 11 सदस्य देशों की सर्वसम्मति से जारी "नई दिल्ली घोषणापत्र" के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। अमेरिका की तरफ से लगाए जा रहे प्रतिबंधों, टैरिफ युद्ध और मध्य-पूर्व संकट पर जिस कड़े लहजे में घोषणापत्र तैयार किया गया है, उससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्ष और संतुलित विदेश नीति से हटकर पश्चिमी विरोधी खेमे की ओर झुक रहा है? विदेश मामलों के विशेषज्ञों और रिपोर्टों का विश्लेषण यह साफ करता है कि यह भारत का कोई "नीतिगत बदलाव" नहीं, बल्कि ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत की जटिल 'बैलेंसिंग एक्ट' (संतुलन बनाने की कला) की एक बड़ी सफलता है। अमेरिका और ईरान का नाम नहीं, लेकिन इजरायल पर सीधा निशाना घोषणापत्र में भाषा के इस्तेमाल और कूटनीतिक शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। एकतरफा प्रतिबंध: घोषणापत्र में लिखा, "हम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंधों और सेकेंडरी सैंक्शंस की निंदा करते हैं, जो गरीबों को प्रभावित करते हैं।" इसमें अमेरिका का नाम नहीं लिया गया, लेकिन रूस और ईरान को सीधा कूटनीतिक राहत और समर्थन मिला। परमाणु ठिकानों पर हमले: घोषणापत्र में लिखा, "IAEA की देखरेख वाले शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों और असैन्य बुनियादी ढांचों पर हमलों पर गंभीर चिंता।" यहां भी अमेरिका, इजरायल या ईरान किसी का नाम नहीं, लेकिन तेहरान (ईरान) के उस तर्क को समर्थन मिला कि उनके परमाणु केंद्रों पर हमले अवैध हैं। लेबनान और इजराइल: घोषणापत्र में लिखा, "हम इजरायल से अपील करते हैं कि वह लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करे और अपनी कब्जाधारी सेना को लेबनानी क्षेत्र से पूरी तरह हटाए।" इसमें इजरायल का स्पष्ट रूप से नाम लिया गया और UN प्रस्ताव 1701 का पालन करने को कहा गया। ट्रंप 2.0 का दबाव और भारत का अपना रुख यह घोषणापत्र ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में टैरिफ और रूसी तेल खरीद को लेकर पहले से ही खिंचाव देखा जा रहा है। ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को "अमेरिका विरोधी" करार देते हुए डॉलर को कमजोर करने या इस गुट से जुड़ने वाले देशों पर 10% से लेकर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है। भारत ने रूसी तेल पर अमेरिका की आपत्तियों और अतिरिक्त टैरिफ को "अनुचित और तर्कहीन" करार दिया है। हालांकि, ब्रिक्स घोषणापत्र में अमेरिकी नीतियों की आलोचना के बावजूद, भारत ने संवाद और कूटनीति का रास्ता खुला रखा है। क्या भारत चीन-रूस के करीब जा रहा है? नई दिल्ली घोषणापत्र के बाद भारत के कूटनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों में दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। विशेषज्ञ कहते हैं, "भारत का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स को ऐसा मंच बनने से रोकना होना चाहिए जिसका इस्तेमाल चीन अपनी महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षाओं के लिए करे।" अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला का कहना है, "भारत का भविष्य पश्चिम (अमेरिका और यूरोप) का वैश्विक साझेदार बनने में है। अगर भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते नहीं करता है, तो इससे किसे फायदा होगा, यह सोचने की जरूरत है।" यह 'शिफ्ट' नहीं, भारत की कूटनीतिक महारत है 11 ऐसे देशों, जिनमें ईरान-UAE या चीन-भारत जैसे विरोधी हित वाले देश शामिल हैं, को एक साझा बयान पर दस्तखत कराना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के इतर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात में स्पष्ट किया कि भारत मध्य-पूर्व में संवाद, कूटनीति और जहाजों की सुरक्षा चाहता है। भारत आज भी रूस, यूक्रेन, अमेरिका, इजराइल और ईरान- सभी विरोधी खेमों से एक साथ संवाद बनाए रखने की अपनी अद्वितीय क्षमता को साबित कर रहा है।

हूती का लाल सागर में कब्जा बढ़ा, होर्मुज में कमर्शियल जहाज पर हमला; BRICS की अपील बेअसर?

नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भारत, सऊदी अरब, ईरान और यूएई सहित सदस्य देशों की ओर से पश्चिम एशिया (West Asia) में 'अधिकतम संयम' बरतने की अपील और "नई दिल्ली घोषणापत्र" जारी करने के महज 24 घंटे के भीतर क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है। रणनीतिक रूप से अति-संवेदनशील स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक कमर्शियल जहाज पर एक अज्ञात मिसाइल से हमला किया गया है। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, जहाज को पहुंचे नुकसान और चालक दल के सदस्यों की स्थिति की जांच की जा रही है, जबकि इलाके में बाकी जहाजों को काफी ज्यादा सतर्कता बरतने की चेतावनी जारी की गई है। मोखा पोर्ट और बाब अल-मंडेब पर हूतियों का कब्जा ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक समुद्री मार्ग बाब अल-मंडेब स्ट्रेट पर स्थित आखिरी दो प्रमुख द्वीपों और महत्वपूर्ण मोखा बंदरगाह पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया है। मोखा पोर्ट पर कब्जे के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के शरूराह सैन्य अड्डे पर हथियार डिपो और कमांड सेंटर को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। अल जजीरा के मुताबिक, सऊदी सीमा पर हुए इस हमले में दो लोग घायल हुए हैं। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाले लाल सागर के इस व्यापारिक मार्ग पर हूतियों के बढ़ते नियंत्रण से सऊदी अरब के कच्चे तेल के वैश्विक निर्यात पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता हुसैन मोहब्बी ने यमन के 'अंसार अल्लाह' (हूती) की इन सैन्य सफलताओं का खुले तौर पर स्वागत किया है। प्रेसिडेंट ट्रंप ने ठुकराई सऊदी की सैन्य कार्रवाई की मांग सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हूतियों के खिलाफ सीधी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया था। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने इस चरण में हूतियों के खिलाफ प्रत्यक्ष अमेरिकी सैन्य अभियानों में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरान और ओमान तय करेंगे होर्मुज के नए समुद्री रूट इस बीच, चीन की सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान और ओमान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के लिए नए एंट्री और एग्जिट रूट के ब्योरे पर सहमति व्यक्त की है। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि दोनों देश सोमवार को मस्कट में होने वाली एक क्षेत्रीय बैठक के दौरान खाड़ी देशों के प्रतिनिधियों को इन नए नेविगेशन मार्गों की विस्तृत जानकारी देंगे, ताकि तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो। BRICS की अपील के बेअसर होने की आशंका यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब शनिवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पश्चिम एशिया में नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और एनर्जी सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने के लिए तत्काल शांति व कूटनीतिक वार्ता का आह्वान किया था। लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि लाल सागर और फारस की खाड़ी में युद्ध का दायरा लगातार चौड़ा होता जा रहा है।

हूतियों की बड़ी बढ़त से मचा हड़कंप! सऊदी ने ड्रोन हमले के बाद बंद की अहम तेल पाइपलाइन

 रियाद सऊदी अरब ने शुक्रवार को ड्रोन हमले के बाद अपनी महत्वपूर्ण पूर्वी-पश्चिमी तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इस दौरान, ईरान समर्थित यमन के हूती लड़ाकों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित एक रणनीतिक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इससे पहले से ही चल रहे क्षेत्रीय युद्ध में एक और मोर्चा खुल गया है। इस्लामी मिलिशिया ने बाब अल-मंदेब के नौवहन मार्ग के आसपास वर्षों में अपनी सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त हासिल कर ली है। हूतियों की यह बढ़त वैश्विक तेल और गैस की कीमतों को और बढ़ाने के ईरान के प्रयासों को मजबूत कर सकती है। इससे अमेरिका पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाने की उसकी कोशिशों को बल मिल सकता है। 1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन सऊदी अरब ने कहा कि उसने पिछले दिन हुए ड्रोन हमले के बाद अरब प्रायद्वीप के आर-पार फैली 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्वी-पश्चिमी पाइपलाइन को बंद कर दिया है। सऊदी अरब ने इस फैसले को एहतियाती कदम बताया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए इराक से उड़ाए गए कई ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हमले में लोग घायल हुए हैं। सरकारी सऊदी प्रेस एजेंसी में जारी बयान में सऊदी अरब ने कहा कि वह तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, ताकि इराकी सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अवसर दिया जा सके। सऊदी अरब ने हालांकि कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, प्रतिष्ठानों और नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। इराक सरकार ने की निंदा इराक सरकार ने हूतियों के हमले की निंदा की है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि जांच में यह पुष्टि होने के बाद कि हमले में इस्तेमाल किये गये ड्रोन वास्तव में इराक के थे, एक सैन्य कमांडर को औपचारिक रूप से पद से हटा दिया गया है। बाद में इराक के सूत्रों ने बताया कि ईराक ने एहतियाती कदम के तौर पर ईरान के साथ शलमचेह सीमा चौकी को बंद करने का आदेश दिया है और हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तलाश के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। सऊदी अरब और अमेरिका ने जुलाई में इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त रूप से बमबारी की थी। दोनों देशों ने इन मिलिशिया पर सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया था, जिनकी जिम्मेदारी हूतियों ने ली थी। बेहद महत्वपूर्ण है यह पाइपलाइन गौरतलब है कि 1980 के दशक में निर्मित पूर्वी-पश्चिमी पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। यह पाइपलाइन उस समय से सऊदी तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है, जब युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज के रास्ते होने वाले तेल परिवहन को बाधित कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, जून की शुरुआत तक सऊदी अरब ने कथित तौर पर पाइपलाइन के पश्चिमी छोर पर स्थित लाल सागर के बंदरगाह के जरिए कच्चे तेल का निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ाकर प्रतिदिन 50 लाख बैरल से अधिक कर दिया था। बाब अल-मंदेब में स्थित छोटे और बंजर ज्वालामुखीय द्वीप मायून, जिसे पेरिम के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन हूतियों के कब्जे की पुष्टि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एक हूती अधिकारी ने की है। लाल सागर पर निर्भर है सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब, ईरान द्वारा होर्मुज में जहाजों को निशाना बनाये जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए लाल सागर पर अधिक निर्भर हो गया है। करीब 28 किलोमीटर चौड़े बाब अल-मंदेब को बंद करने के हूतियों के प्रयासों ने इस वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना भी लगातार मुश्किल बना दिया है। हूती सशस्त्र बलों ने शुक्रवार को जारी एक बयान में तटीय क्षेत्र में अपनी और बढ़त का दावा किया, हालांकि इसमें मायून, बंदरगाह शहर मोखा या बाब अल-मंदेब का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया। समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ जैसी बढ़ोतरी, वैसी बढ़ोतरी की नीति अपनाने का संकल्प जताया और कहा कि सऊदी जहाजों को छोड़कर सभी कंपनियों के लिए समुद्री नौवहन सुरक्षित है। तेल बाजार में चिंता इन घटनाक्रमों से तेल बाजारों में चिंता बढ़ गई है। इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमत फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गयी, जिससे भविष्य में वाशिंगटन के साथ किसी भी बातचीत में तेहरान को अधिक दबाव बनाने का मौका मिल सकता है। जुलाई में नाकाबंदी की घोषणा करने के बाद से हूती लाल सागर में सऊदी जहाजों पर हमले कर रहे हैं और सऊदी अरब के भीतर तेल प्रतिष्ठानों को भी निशाना बना रहे हैं। समूह का कहना है कि उसके हमले यमन में हूतियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों की सऊदी अरब की लंबे समय से जारी नाकाबंदी के जवाब में हैं। एक हूती प्रसारक के अनुसार, गुरुवार को हूतियों द्वारा बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किये जाने के बाद सऊदी अरब ने मोखा हवाई अड्डे पर हवाई हमला किया। तत्काल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की रिपोर्टें नहीं है।

14 सितंबर को बैंक रहेंगे बंद! गणेश चतुर्थी पर इन शहरों में नहीं खुलेगी SBI-PNB समेत बैंकों की शाखा

नई दिल्ली कल सोमवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। अगर आप कल 14 सितंबर को बैंक ब्रांच जाकरअपना काम निपटाने का प्लान कर रहे हैं तो पहले जान लीजिए कि आपके राज्य में बैंक खुले हैं या नहीं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कैलेंडर के मुताबिक कल सोमवार को बैंक कई राज्यों में बंद रहने वाले हैं। यहां जानिये कल किन राज्यों में और क्यों बैंक बंद रहने वाले हैं। कल सोमवार 14 सितंबर को क्यों बंद रहेंगे बैंक? कल सोमवार 14 सितंबर को बैंक गणेश चतुर्थी के कारण बंद रहेंगे। बैंक बेलापुर, महाराष्ट्र, कर्नाटक,ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गोवा, तेलांगना जैसे राज्यों में बंद रहने वाले हैं। यहां सभी सरकारी और प्राइवेट सेक्टर बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा, एक्सिस, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई जैसे तमाम बैंकों की ब्रांच नहीं खुलेंगी। बैंक गणेश चतुर्थी, गणेश पूजा, वरसिद्धि विनायक व्रत, विनायकर चतुर्थी और हरतालिका तीज के कारण बंद होंगे। इनके अलावा देश के बाकि सभी राज्यों में बैंक खुले रहेंगे। गणेश चतुर्थी, गणेश पूजा, वरसिद्धि विनायक व्रत और विनायकर चतुर्थी क्यों मनाते हैं? गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू त्योहार है। इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उन्हें मोदक, दूर्वा और फूल अर्पित करते हैं और सुख-समृद्धि, बुद्धि तथा विघ्नों से मुक्ति की कामना करते हैं। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में यह त्योहार उत्साह से मनाया जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता और शुभता का देवता माना जाता है। वरसिद्धि विनायक व्रत भी भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस व्रत को रखा जात है। विनायकर चतुर्थी तमिलनाडु में भगवान गणेश की आराधना को कहा जाता है। हरतालिका तीज क्यों मनाते हैं? हरतालिका तीज महिलाओं का प्रमुख व्रत और त्योहार है, जो भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित महिलाएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना करती हैं। माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह की कथा इस व्रत से जुड़ी है। देश के बाकी राज्यों में खुली रहेंगी बैंक ब्रांच? महाराष्ट्र, कर्नाटक,ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गोवा, तेलांगना को छोड़कर बैंक देश के बाकी सभी राज्यों मे खुले रहेंगे। वहां, बैंकों में सामान्य तरीके से काम होगा। सितंबर में कब-कब बंद रहेंगे बैंक? 13 सितंबर – रविवार 14 सितंबर – गणेश चतुर्थी यानी गणेश पूजा के कारण बेलापुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, नागपुर, पणजी और विजयवाड़ा समेत कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे। 15 सितंबर – संवत्सरी, नुआखाई, गणेश चतुर्थी का दूसरा दिन रहेगा जिसके कारण अहमदाबाद, भुवनेश्वर और गोवा में बैंक बंद रहेंगे। 20 सितंबर – रविवार 21 सितंबर – श्रीमंत शंकरदेव जन्मोत्सव और श्री नारायण गुरु समाधि के कारण भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे। 22 सितंबर – करमा पूजा के कारण रांची में बैंक बंद रहने वाले हैं। 23 सितंबर – महाराजा हरि सिंह जी के जन्मदिन के कारण जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 25 सितंबर – इंद्रजात्रा के कारण गंगटोक में बैंक बंद रहने वाले हैं। 26 सितंबर – चौथे शनिवार के कारण बैंक बंद रहेंगे। 27 सितंबर – रविवार

NIA का हाफिज सईद पर शिकंजा, आतंकी गतिविधियों में भूमिका सामने आने के बाद फिर जारी हुआ वारंट

नईदिल्ली  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (ANI) ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हाफिज सईद के खिलाफ एक और कामयाबी मिली है। स्पेशल कोर्ट ने हाफिज के खिलाफ एक गैर जमानती वारंट जारी किया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि भारत का सबसे वॉन्टेड आतंकी और लश्कर का संस्थापक पाकिस्तान में है। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी समूहों को हथियार, फंडिंग और निर्देश देने से जुड़े एक मामले में लश्कर चीफ के खिलाफ दो महीने में दूसरा गैर जमानती वारंट हासिल किया गया है। स्पेशल कोर्ट एनआईए की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 75 के तहत लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और घोषित आतंकवादी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी। याचिका में पाकिस्तान के पंजाब के सरगोधा के रहने वाले हाफिज सईद को फरार आरोपी बताया गया। नकीब भट की गिरफ्तारी से हुआ था खुलासा आपको बता दें कि श्रीनगर में चेकिंग के दौरान मोहम्मद नकीब भट की गिरफ्तारी हुई थी। उसके पास से चीन में बना ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। जकूरा पुलिस स्टेशन में UAPA, आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद हुई जांच में एक आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की छापेमारी में लश्कर और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े कई और आतंकवादियों और दो पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई। NIA ने कहा कि जांच के दौरान हाफिज सईद की भूमिका सामने आई। गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी आतंकवादी उससे जुड़े पाए गए। NIA ने कोर्ट को बताया, "सईद पाकिस्तान से काम कर रहा है और कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवादियों को हथियार, पैसे और निर्देश दे रहा है। जानकारी मिली है कि आतंकवादी अभी पाकिस्तान में है और कानून की पकड़ से बचने के लिए जान-बूझकर अपनी गिरफ्तारी से बच रहा है।" जज ने सुनाया फैसला एनआईए की दलील सुनने के बाद NIA एक्ट के तहत स्पेशल जज प्रेम सागर ने 8 सितंबर को कहा कि जांच के दौरान हाफिज सईद की भूमिका सामने आई है और वह आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है। वह फरार है और जांच एजेंसी उसे सामान्य तरीके से पेश करने में कामयाब नहीं हो पाई है, इसलिए हाफिज सईद के खिलाफ एक सामान्य गैर जमानती वारंट जारी किया गया।