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UCC को लेकर अमित शाह का बड़ा दावा, 2029 से पहले 21 राज्यों में होगा लागू

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यूसीसी को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहाकि साल 2029 तक एनडीए के शासन वाले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 30 दिन के सेवा संकल्प अभियान का ऐलान करते हुए अमित शाह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भाजपा और सहयोगी दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाएंगे। मुंबई में सेवा संकल्प अभियान को लेकर मीडिया को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की है। हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि साल 2029 के पहले भाजपा शासित सभी 21 प्रदेशों में समान नागरिक संहिता लागू करने में सफल होंगे। प्रधानमंत्री ने दुनिया में बढ़ाया भारत का मान इस दौरान अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 साल में दुनिया में भारत का कद काफी बढ़ा है। दुनिया का कोई भी मुद्दा हो, आज भारत के प्रधानमंत्री की राय को अहमियत दी जाती है। दुनिया भर में लोग भारतीय पासपोर्ट रखने वाले भारतीय नागरिक को सम्मान की नजर से देखते हैं। नरेंद्र मोदी जी ने भारतीय पासपोर्ट की अहमियत बढ़ाने का काम किया है। इसका नतीजा यह है कि वे दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं, जिन्हें सर्वे में 68 फीसदी अप्रूवल रेटिंग मिली है। उन्होंने आगे कहा कि 36 देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिए हैं, जो भारत के ‘भारत रत्न’ जैसे ही हैं। यह विदेशों में भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों में यह विश्वास पैदा किया है कि 15 अगस्त, 2047 तक भारत सभी क्षेत्रों में सभी देशों से आगे होगा। उन्होंने ने देश में सभी क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि साल 2014 में भारत को ‘फ्रेजाइल फाइव’ में शामिल किया गया था, लेकिन आज यह शीर्ष पांच देशों में शामिल है।

बच्चों की धड़कन से तय होगा पास या फेल, AI स्कूल के इस मॉडल पर उठे सवाल

न्यूयॉर्क अमेरिकी स्कूलों में भविष्य की शिक्षा के नाम पर चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पैरेंट्स की आलोचनात्मक वीडियो दिखाये जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं। सहनशीलता सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है। आइए जानते हैं। सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल, कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनीटर की बीप-बीर सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। कमरे में 14 साल के रेयान कुर्सी पर अकेला बैठा था, उसके सीने पर एक हर्ट मॉनीटर लगा था। उसके दिल की धड़कन पूरी क्लास के सामने बड़े पर्दे पर दिख रही थी। उसकी धड़कन सामान्य थी, नियम था कि धड़कन 10 प्रतिशत से ऊपर नहीं जानी चाहिए। अगर गई तो वह फेल। तभी उसके माता-पिता का वाडियो चलाया गया। उस वीडियो में वे रेयान की कमियों, उसकी गलतियों और उसकी नाकामी की कड़ी आलोचना कर रहे थे। पूरी क्लास यह वीडियो देख रही थी। रेयान के लिए यह बहुत मुश्किल था। उसकी धड़कन बढ़ने लगी, पहले 82, फिर 85 और अंत में 87, उसने अपनी मुठ्ठियां भींच लीं और आंखें बंद कर लीं। वीडियो खत्म होने पर उसकी औसत धड़कन 87 थी, वह एक धड़कन से पास हो गया, लेकिन एक हफ्ते तक उसके हाथ कांपते रहे। यह सिर्फ एक टेस्ट नहीं है। इस स्कूल में बच्चों से बॉट्स की मदद से कुछ ही दिन में पूरा कोर्स खत्म करवाया जाता है। उनसे गंदे टॉयलेट साफ कराए जाते हैं और सोशल मीडिया पर खुद को बेचना सिखाया जाता है। इन तरीकों को सहनशीलता और हिम्मत सिखाना कहा जा रहा है, लेकिन असल में यह बच्चों की भावनाओं के कुचलने जैसा है। मशीन ने दिल की रफ्तार तो नाप ली, पर बच्चे के अंदर का डर और घुटन नहीं नाप सकी।

15 हजार करोड़ की किशाऊ परियोजना को मिलेगी रफ्तार, छह राज्यों के बीच होगा करार

 शिमला  देश के लिए महत्वपूर्ण किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण की दिशा में 15 सितंबर को नई दिल्ली में बड़ा कदम उठाया जाएगा। ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित 660 मेगावाट की इस परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और राजस्थान के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में राज्यों के प्रतिनिधि करार करेंगे। हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं विद्युत, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत और सतर्कता आरडी नजीम बैठक में शामिल होंगे। वह परियोजना में हिमाचल के हितों और राज्य की भूमिका को लेकर पक्ष रखेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समझौता हस्ताक्षर समारोह दोपहर 12 से एक बजे तक कर्तव्य भवन-03, जनपथ, नई दिल्ली में होगा। क्या है किशाऊ परियोजना करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली किशाऊ परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर है। परियोजना में जल भंडारण के साथ बहुउद्देशीय उपयोग का प्रविधान है। राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा हिमाचल के हिस्से का पानी परियोजना के तहत हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इसके बदले दोनों राज्य हिमाचल के बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे। वहीं, हिमाचल और उत्तराखंड को जल घटक की लागत में वित्तीय योगदान नहीं करना होगा। ऐसे में समझौता हिमाचल के लिए जल संसाधन और बिजली से जुड़े हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

पहलगाम पर चीन का भारत के साथ खड़ा होना, क्या पाकिस्तान से दूरी बढ़ा रहा ड्रैगन?

नई दिल्ली चीन और पाकिस्तान हमेशा कहते रहे हैं कि उनकी दोस्ती हर मौसम में चलती है। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा साथी है। पाकिस्तान ने चीन को सीपीईसी जैसी परियोजनाओं से अरब सागर तक रास्ता दिया है। लेकिन नई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक में एक बात खास रही। चीन उस बैठक में था, जिसमें 2025 के पहलगाम हमले की निंदा हुई। बैठक में आतंकवाद पर सख्ती की बात भी कही गई। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 के हमले की निंदा की गई। उस हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसमें सीमा पार आतंकियों, आतंक को पैसे देने और उनके ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया। भारत के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन भी नहीं किया गया। फिर भी चीन का इस दस्तावेज पर दस्तखत करना बड़ी बात है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दोनों देशों के रिश्ते बदल रहे हैं? चीन की मौजूदगी क्यों जरूरी है? दरअसल, पहलगाम का जिक्र नया नहीं था। मई में भी ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने इस हमले की निंदा की थी। दिल्ली के लिए यह इसलिए बड़ा है क्योंकि चीन पाकिस्तान का करीबी दोस्त माना जाता है। यह बात उस समय हुई जब भारत और चीन 2020 के गलवान झगड़े के बाद रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। शी जिनपिंग नई दिल्ली आए। चीन ने ऐसे बयान पर दस्तखत किए जो भारत की बड़ी सुरक्षा चिंता से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं कि चीन ने पाकिस्तान को छोड़ दिया। लेकिन सवाल यह है कि जब चीन के अपने फायदे दांव पर हों, तो वह पाकिस्तान का कितना साथ देगा। चीन की सबसे बड़ी समस्या क्या? बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण भारत नहीं है। कारण है चीनी नागरिकों की सुरक्षा। सीपीईसी पर काम कर रहे चीनी मजदूरों पर, खासकर बलूचिस्तान में, बार-बार हमले हो रहे हैं। इस कारण चीन नाराज है। अब चीन खुलकर पाकिस्तान से सुरक्षा सुधारने को कह रहा है। कुछ परियोजनाएं हमलों के बाद कुछ समय के लिए रुकी भी थीं। 2026 में भी यही समस्या है। चीन सीपीईसी 2.0 आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन सुरक्षा पर जोर दे रहा है। पाकिस्तान ने चीनी लोगों और परियोजनाओं की सुरक्षा सुधारने का वादा किया है। यही कारण है कि रिश्ता टूटा नहीं है। लेकिन सीपीईसी पर सुरक्षा की दिक्कतें बढ़ रही हैं। निवेश को लेकर सवाल खबर है कि दोनों देशों के बीच निवेश को लेकर भी फर्क दिख रहा है। खबर है कि चीन की एक बड़ी कंपनी ने पाकिस्तान की बिजली कंपनी खरीदने का प्लान वापस ले लिया। वजह है पैसे की समस्या और सुरक्षा का खतरा। सीपीईसी बड़े चीनी निवेश पर बना था। अब चीन सिर्फ दोस्ती के लिए पैसा नहीं लगाना चाहता। वह देख रहा है कि पैसा वापस आएगा या नहीं और काम सुरक्षित है या नहीं। पाकिस्तान को चीन के पैसे की जरूरत है, लेकिन वह कर्ज और सुरक्षा की समस्या से जूझ रहा है। बता दें कि मई 2026 में शहबाज शरीफ चीन गए। शी जिनपिंग से मुलाकात हुई। दोनों ने दोस्ती और सीपीईसी को और मजबूत करने की बात कही। चीन ने सीपीईसी 2.0 का साथ दोहराया। पाकिस्तान ने सुरक्षा सुधारने का वादा किया। अगस्त में भी दोनों पक्षों ने सीपीईसी पर बात की। यानी चीन दूर नहीं हो रहा। वह पाकिस्तान से और ज्यादा मांग कर रहा है। शायद यही कारण है कि कुछ मुद्दे पर तनाव दिख रहा है। पाकिस्तान और ब्रिक्स पाकिस्तान 2023 से ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है। उसने चीन और रूस से मदद मांगी। लेकिन सभी देशों की सहमति चाहिए। भारत का विरोध बड़ी रुकावट है। ब्रिक्स में जाने से पाकिस्तान को ज्यादा पहचान और नई ताकतों से बात करने का मौका मिल सकता है। चीन अब तक भारत के विरोध को पार नहीं कर पाया है। लगता है चीन पाकिस्तान के साथ रिश्ता भी रखना चाहता है और भारत के साथ भी बेहतर संबंध रखना चाहता है। पहलगाम वाले बयान के पीछे क्या कारण? चीन के पाकिस्तान में बड़े हित हैं। सीपीईसी कश्मीर के उस हिस्से से जाता है जो पाकिस्तान के पास है। ग्वादर से अरब सागर तक रास्ता मिलता है। पाकिस्तान भारत के सामने संतुलन भी बनाता है। लेकिन चीन का भारत से बड़ा व्यापार भी है। वह सीमा पर शांति और भारत से अच्छे रिश्ते चाहता है। मोदी और शी रिश्ते सुधारने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में चीन नहीं चाहता कि हर मामले में उसे सिर्फ पाकिस्तान का पक्षधर माना जाए। इसलिए ब्रिक्स में पहलगाम की बात इसी दिशा में जाती है। चीन पाकिस्तान का साथी रह सकता है, बिना हर बात पर उसका साथ दिए। क्या रिश्ते खराब हो रहे हैं? पाकिस्तान में लगातार चीनी लोगों पर हमले हो रहे हैं। सीपीईसी की सुरक्षा कमजोर है। निवेश का फायदा साफ नहीं है। परियोजनाओं में देरी है। चीन अब पैसे और सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। साथ ही भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है। लेकिन अभी बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। चीन अब भी पाकिस्तान को जरूरी साथी मानता है। पाकिस्तान अब भी चीन की मदद पर बहुत निर्भर है। चीन सीपीईसी 2.0 का साथ दे रहा है। बता दें कि पहले पाकिस्तान चीन को रास्ता और साथ देता था। चीन पाकिस्तान को पैसा, समर्थन और सुरक्षा देता था। अब चीन बदले में ज्यादा चाहता है- अपने लोगों की सुरक्षा, अपने पैसे की सुरक्षा और काम में साफ तस्वीर। इसलिए ब्रिक्स में पहलगाम का जिक्र अहम है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि चीन ने पाकिस्तान को छोड़ दिया। बात यह है कि पाकिस्तान अब यह नहीं मान सकता कि भारत से टकराव होने पर चीन हर बार अपने आप भारत के खिलाफ खड़ा हो जाएगा। नई दिल्ली के लिए यही बात सबसे बड़ी है।

यूपी-बिहार समेत 23 राज्यों में आज मूसलाधार बारिश का अलर्ट

 नई दिल्ली देश में मानसून की विदाई से पहले मौसम विभाग ने एक बार फिर से टेंशन बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज यानी 14 सितंबर को यूपी, बिहार सहित 23 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। इस दौरान 85 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, इस तेज हवा के झोंके के चलते पूर्वी राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तूफानी हवा लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा पूर्वी भारत में बिजली और वज्रपात का आक्रामक प्रहार देखने को मिल सकता है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में चलने वाली तूफानी हवाओं की वजह से पूर्वी भारत के राज्यों में लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, 4 से अधिक राज्यों में ओले गिरने की भी चेतावनी है। वहीं, मध्य असम और आसपास के इलाकों के ऊपर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। वहीं, कब दबाव का क्षेत्र 24 घंटों के दौरान दक्षिण छत्तीसगढ़ और विदर्भ से होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है। तो चलिए हम आपलोगों को बताते हैं देश के अन्य राज्यों में आज यानी 14 सितंबर को मौसम का हाल कैसा रहेगा। हम जिलावार भी मौसम का हाल बताने जा रहे हैं… देश के 23 राज्यों में बारिश-आंधी की चेतावनी मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज यानी 14 सितंबर को देश के 23 राज्यों यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, त्रिपुरा, असम, मेघालय और नागालैंड में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने का अलर्ट है। दिल्ली में आज मौसम कैसा रहेगा     दिल्ली (14 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): दिल्ली में कल यानी 14 सितंबर को मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, दिल्ली में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहेगा। यूपी में आज मौसम कैसा रहेगा     यूपी (14 सितंबर- बारिश-आंधी की चेतावनी): मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, झांसी, कानपुर, इटावा, सोनभद्र, मिर्जापुर, सीतापुर, उन्नाव, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मानपुरी, गाजीपुर, बलिया, बांदा, प्रयागराज, देवरिया, गोंडा, बलरामपुर और गोरखपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है। वहीं, लखनऊ में आज यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा। बिहार में आज मौसम कैसा रहेगा     बिहार (14 सितंबर-भारी बारिश-तूफान का अलर्ट): गया, पूर्वी चंपारण, रोहतास, गया, नवादा, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, बक्सर, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया किशनगंज, कटिहार, अररिया, बेगूसराय, लखीसराय और खगड़िया में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, पटना में कल यानी 8 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस जाएगा। झारखंड में आज मौसम कैसा रहेगा     झारखंड (14-15 सितंबर- भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): रामगढ़, बोकारो, रांची, हजारीबाग, रामगढ़, जमशेदपुर, पलामू, खूंटी और दुमका में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, इस बारिश के चलते 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रांची में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। उत्तराखंड में आज मौसम कैसा रहेगा     उत्तराखंड (14 सितंबर- बारिश और आंधी की चेतावनी): बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, ऋषिकेश, हरिद्वार, पिथौरागढ़, पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चल सकती है। वहीं, देहरादून में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस जाएगा तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। हिमाचल में आज मौसम कैसा रहेगा     हिमाचल प्रदेश (14 सितंबर- बारिश-आंधी का येलो अलर्ट): कांगड़ा, सिरमौर, शिमला, मंडी, चंबा, कुल्लू और सोलन में मध्यम से तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। वहीं, मनाली में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर में आज मौसम कैसा रहेगा     जम्मू-कश्मीर (14 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): मीरपुर, कुलगाम, कठुआ, जम्मू, शोपियां, डोडा, राजौरी, पुंछ किश्तवाड़ और अनंतनाग में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, श्रीनगर में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा पश्चिम बंगाल में आज मौसम कैसा रहेगा     पश्चिम बंगाल(14-15 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पश्चिमी मेदिनीपुर, पुरबा मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, हावड़ा, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, दक्षिण 24 परगना, कोलकाता, नादिया, अलीपुरद्वार, बीरभूम और कलीम्पोंग में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, इस दौरान 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, कोलकाता में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचेगा। पंजाब में आज मौसम कैसा रहेगा     पंजाब (14 सितंबर-भारी बारिश और आंधी की संभावना): पठानकोट, बरनाला, लुधियाना, चंडीगढ़, जालंधर, गुरदासपुर और पटियाला में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। राजस्थान में आज मौसम कैसा रहेगा     राजस्थान (14 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): अजमेर, भरतपुर, उदयपुर, जयपुर, भिलवाड़ा, सवाई माधोपुर, बारां, कोटा, पाली और बीकानेर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है।। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, जयपुर में कल यानी 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। मध्य प्रदेश में आज मौसम कैसा रहेगा     मध्य प्रदेश (14 सितंबर- बारिश-आंधी का येलो … Read more

UK में बढ़ा बंटवारे का खतरा, तीन राष्ट्रों के नेता आजादी के रोडमैप पर जुटे

लंदन  कार्डिफ में रविवार रात हुए एक सीक्रेट राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरे यूनाइटेड किंगडम के भविष्य पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। 'द टेलीग्राफ' की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक यूके का इतिहास बदलने वाले एक समझौते पर दस्तखत करने के लिए स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेता एक मंच पर जुट रहे हैं। सोमवार को होने वाली इस अभूतपूर्व बैठक में तीनों राष्ट्रों के फर्स्ट मिनिस्टर्स जॉन स्विनी, रून एप आयोवर्थ और मिशेल ओ'नील एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसका सीधा मकसद यूनाइटेड किंगडम को तीन हिस्सों में विभाजित करने और आजादी के लिए नया जनमत संग्रह कराने की राह आसान करना है। 'द टेलीग्राफ' ने बताया है कि स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के नेता सोमवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए इकट्ठा होंगे जिसका मकसद यूनाइटेड किंगडम को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू करना है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ब्रिटेन के इतिहास में यह पहला मौका है जब स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड तीनों ही स्थानों पर एक साथ आजादी का समर्थन करने वाली सरकारें सत्ता में हैं। इस त्रिस्तरीय गठबंधन ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम पर सीधा दबाव बना दिया है। एंडी बर्नहैम कुछ ही दिन पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं और अब वो बड़ी मुसीबत में फंस चुके हैं। UK को 3 हिस्सों में बांटने के लिए ऐतिहासिक समझौता यह बैठक तब हो रही है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सांसदों से कहा कि अगर आजादी के पक्ष में 'स्पष्ट सहमति' बनती है तो वह एक और स्कॉटिश जनमत संग्रह की मंजूरी देंगे। यह शिखर सम्मेलन डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के दो दिन बाद होगा जिसमें उन्होंने कहा था कि वह एक संयुक्त आयरलैंड देखना 'पसंद' करेंगे। शनिवार को डबलिन की यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तरी आयरलैंड का रिपब्लिक (आयरलैंड गणराज्य) में शामिल होना 'बहुत अच्छी बात' होगी और पूछा 'यह बुरा कैसे हो सकता है?' अमेरिकी राष्ट्रपति ने तब हस्तक्षेप किया जब राष्ट्रवादी नेताओं ने प्रधानमंत्री पर दबाव बढ़ा दिया है जिन्होंने इंग्लैंड में सत्ता के विकेंद्रीकरण को अपने एजेंडे के केंद्र में रखा है। SNP नेता और स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने दावा किया कि मिस्टर बर्नहम 'इस विचार का सामना कर रहे हैं कि वह यूनाइटेड किंगडम के आखिरी प्रधानमंत्री के तौर पर इतिहास में दर्ज होंगे।' चार बड़े मुद्दों पर बन रही सहमति कार्डिफ के सेंट डेविड्स होटल में होने जा रही इस बैठक में चारों प्रमुख दलों के नेता 1-अर्थव्यवस्था, 2- ऊर्जा, यूरोपीय संघ (EU) और 3- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ-साथ 4- आत्मनिर्णय के अधिकार पर विस्तृत रोडमैप पेश करेंगे। इसके तहत- स्कॉटलैंड और वेल्स- आजादी के बाद यूरोपीय संघ (EU) के स्वतंत्र सदस्य बनने की योजना पर आगे बढ़ेंगे। उत्तरी आयरलैंड– रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड में विलय के जरिए यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने की राह तलाशेगा। स्कॉटिश फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने कहा 'यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मौजूदा स्थिति अब टिकाऊ नहीं है और वेस्टमिंस्टर को एक 'पोस्ट-यूके फ्यूचर' के लिए तैयार रहना होगा।' इस नए गठबंधन ने वेस्टमिंस्टर की नींद उड़ा दी है और अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री बर्नहैम यूके को बिखरने से बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। टेलीग्राफ ने बताया है कि गुड फ्राइडे एग्रीमेंट की शर्तों के तहत आयरिश पुनर्मिलन के लिए वोटिंग कराने का एक संभावित रास्ता है। इसमें कहा गया है कि अगर ऐसा लगता है कि नॉर्दर्न आयरलैंड के ज्यादातर लोग UK से अलग होने के लिए वोट करेंगे तो जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए।

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने आगे आया भारत-चीन, पुतिन ने किया प्रस्ताव का स्वागत

 नई दिल्ली नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोनों नेताओं के इस प्रस्ताव का स्वागत किया। पेस्कोव ने कहा, "अपनी द्विपक्षीय बैठकों के दौरान, मोदी और शी चिनफिंग ने यूक्रेन के समाधान में गहरी दिलचस्पी दिखाई और समाधान खोजने में मदद करने के लिए सक्रिय रूप से अपने मध्यस्थता के प्रस्ताव दिए।" आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 पर चर्चा इसके अलावा, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के कार्यान्वयन सहित घनिष्ठ व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और संस्कृति में सहयोग पर चर्चा हुई। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार मुलाकात पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "बिश्केक में हुई हमारी मुलाकात के दो सप्ताह से भी कम समय बाद दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर बेहद खुशी हुई। आज की मुलाकात में हमने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के बारे में बात की, जिसमें आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 का कार्यान्वयन भी शामिल है। बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा हुई।" विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों सहित आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिन्होंने समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्रभावित किया है। इस दौरान पीएम मोदी ने दोहराया कि संघर्षों के समाधान में संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है और कहा कि भारत शांति प्रयासों में सहायता करने के लिए तत्पर है।

BRICS समिट के समापन पर PM मोदी का बड़ा संदेश, दुनिया को चाहिए अब ठोस नतीजे

नई दिल्ली नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा क‍ि 'ब्रिक्स' सिर्फ देशों का समूह नहीं बल्कि समाधान का इकोसिस्टम है। उन्‍होंने उम्मीद जताई कि 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' साझा विजन को नई दिशा देगा। पीएम ने आयोजन को सफल बनाने के ल‍िए सभी सदस्य देशों का आभार जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्‍मेलन में शाम‍िल सभी सदस्‍यों का आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा क‍ि आपके महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने हमारे सहयोग को व्यापकता भी दी है और गहराई भी दी है। आप सबकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती उपयुक्तता, उदारता और समावेशिता का प्रमाण है। 'ब्रिक्स समाधान का एक इकोसिस्टम' पीएम मोदी ने कहा, पिछले दो दिनों की हमारी चर्चाओं ने हमारा विश्वास और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, समाधान का एक इकोसिस्टम है। हम आशा करते हैं इस समिट से उसमें जोड़े गए 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' हमारे साझा विजन और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा। हमें सभी परिणाम को समयबद्ध एक्शन और अंतिम पायदान पर प्रभाव से जोड़ना होगा। उन्‍होंने कहा हमारे फ्रेमवर्क फाइल्स से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में प्रभाव पैदा करें, इसके लिए हम सब मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। अब दुनिया हमसे केवल विचार और प्रतिबद्धता नहीं, कंक्रीट पर‍िणाम की अपेक्षा करती है। मुझे विश्वास है कि हम साझा प्रयासों से इन अपेक्षाओं पर जरूर खरे उतरेंगे। पीएम मोदी ने अगले होस्ट के तौर पर चीन को दी बधाई इस मौके पर पीएम मोदी ने ब्रिक्स के अगले होस्ट के तौर पर चीन को एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने कहा, नई दिल्ली समिट को सफल बनाने के लिए मैं आप सभी का और आप सबकी टीम्स का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आप सभी की सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना करता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर घातक हमला, काफिले को बनाया निशाना; 23 जवानों की मौत की आशंका

इस्लामाबाद पाकिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आई है। बलूचिस्तान के लासबेला जिले में सुरक्षा बलों पर बड़ा हमला हुआ है। जानकारी के अनुसार यह हमला एन-25 राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया गया, जहां पाकिस्तानी सेना का काफिला जा रहा था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हमले में 23 से ज्यादा जवानों के मारे जाने की आशंका है। कई अन्य जवान घायल भी बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना लासबेला के कशारी इलाके में हुई। यहां फ्रंटियर फोर्स के करीब 15 वाहनों वाला काफिला चल रहा था। काफिले को निशाना बनाकर विस्फोट किया गया। विस्फोट के बाद एक सुरक्षा वाहन में आग लग गई। घायल जवानों को सबसे पहले बेला शिविर पहुंचाया गया। हमले का आरोप बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए पर लगाया जा रहा है। यह संगठन पिछले कई महीनों से बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों, सरकारी इमारतों और सड़क मार्गों पर हमले बढ़ा रहा है। बीएलए का दावा रहा है कि उसके लड़ाके पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं। खबरों की माने तो लासबेला के कशारी इलाके में फ्रंटियर फोर्स के करीब 15 वाहनों वाले काफिले को निशाना बनाया गया। विस्फोट के बाद 23 से ज्यादा जवानों के मारे जाने की आशंका है। कई अन्य जवान घायल भी बताए जा रहे हैं। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है। घायलों का इलाज बेला शिविर में चल रहा है। राजमार्ग फिलहाल बंद है। हालांकि अभी तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से इस हमले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में मृतकों की संख्या घट-बढ़ भी सकती है। बता दें कि लासबेला एन-25 बलूचिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है। यह राजमार्ग कराची को क्वेटा से जोड़ता है और प्रांत के कई रणनीतिक इलाकों से होकर गुजरता है। इसी रास्ते से सुरक्षा काफिले, आम यात्री और व्यापारिक वाहन भी चलते हैं। लासबेला कराची के काफी करीब माना जाता है। यह इलाका तटीय मार्गों और पश्चिमी बलूचिस्तान को बंदरगाह शहर से जोड़ने वाला अहम इलाका है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब बलूचिस्तान में हिंसा पहले से बढ़ी हुई बताई जा रही है। हाल के महीनों में सुरक्षाकर्मियों, चौकियों, सरकारी सुविधाओं और सड़क मार्गों पर कई हमलों की खबरें आई हैं। बीएलए जैसे संगठन एक से ज्यादा जगहों पर हमला करने और चलते काफिलों को निशाना बनाने का दावा करते रहे हैं। राजमार्गों पर सुरक्षा काफिलों पर हमला बलूचिस्तान में लंबे समय से होता रहा है।

ईरान के हमलों से बढ़ा तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों को अब सिर्फ 2 तय समय पर मिलेगी अमेरिकी सुरक्षा

वाशिंगटन  अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल टौंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा, खासकर हवाई सुरक्षा के समय को सीमित कर दिया है। यह कदम इस अहम समुद्री रास्ते पर चलने वाले जहाजों पर ईरान के हमलों में बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका मई से ही जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में ओमान के तट के पास वाले रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को हवाई सुरक्षा दे रहा था, जिससे ईरानी हमलों के बावजूद तेल की कुछ शिपमेंट आती-जाती रहीं। इस व्यवस्था के तहत, जहाज के मालिक सबसे पहले अमेरिकी नौसेना के कोऑर्डिनेशन सेंटर से मंजूरी लेते थे। यह सेंटर जहाजों को कोऑर्डिनेट्स और गुजरने का समय बताता था, जिसके दौरान अमेरिकी विमान उन्हें सुरक्षा देते थे। होर्मुज में टैंकरों की हवाई सुरक्षा के समय घटाया लेकिन NCAGS द्वारा समुद्री सलाहकारों को भेजे गए ईमेल के हवाले से पता चला है कि सितंबर की शुरुआत में रात भर मिलने वाली सुरक्षा की लंबी अवधि को घटाकर हर दिन दो तय ट्रांजिट स्लॉट कर दिया गया है। जहाजों को सलाह दी गई है कि वे तय समय पर अपनी यात्रा शुरू करें ताकि उन्हें अमेरिकी सेना से सबसे अच्छी सुरक्षा मिल सके। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों की देखरेख करने वाली यूएस सेंट्रल कमांड ने इन संदेशों को बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया और कहा कि NCAGS के संदेश खुद ही सब कुछ स्पष्ट करते हैं। कमर्शियल जहाजों पर बढ़े ईरान के हमले यह बदलाव तब हुआ जब कमर्शियल जहाजों पर हमले बढ़ गए। ईरान ने बुधवार को कहा कि उसने पांच ईरानी टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में दो अमेरिकी जहाजों और आठ तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि ये हमले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों से एक अमेरिकी युद्धपोत पर किए गए हमलों के बाद हुए थे। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने भी दुबई और इराक के पास टैंकरों पर ईरान के और हमलों की जानकारी दी। बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 70 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों पर हमले हो चुके हैं।