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WhatsApp 1 मार्च से भारत में करोड़ों यूजर्स के लिए बंद, चेक करें अपने अकाउंट की स्थिति

नई दिल्ली, SIM-Binding नियम को लेकर अब तस्वीर और साफ होती दिख रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि मैसेजिंग ऐप्स के लिए SIM से अकाउंट जोड़ना अनिवार्य रहेगा और इसमें किसी तरह की ढील देने का फिलहाल इरादा नहीं है. 1 मार्च की तय समय सीमा को लेकर भी सरकार सख्त रुख में दिखाई दे रही है.  दूरसंचार विभाग यानी DoT ने OTT मैसेजिंग ऐप्स को साफ निर्देश दिए हैं कि यूजर का अकाउंट एक्टिव SIM से जुड़ा होना चाहिए. WhatsApp पर क्या पड़ेगा असर? इसका मतलब यह है कि अगर फोन में वह SIM मौजूद नहीं है, जिससे WhatsApp या Telegram रजिस्टर है, तो ऐप का इस्तेमाल सीमित हो सकता है या बंद भी हो सकता है. भारत में WhatsApp के सबसे ज्यादा यूजर्स हैं जो अलग अलग डिवाइस पर एक ही नंबर का WhatsApp यूज करते हैं. ऐसे में करोड़ों यूजर्स के लिए WhatsApp काम नहीं करेगा जिन्होंने एक अकाउंट को अलग अलग डिवाइसेज पर ऐक्टिव कर रखा है.  रिपोर्ट्स में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान का जिक्र किया जा रहा है, जिसमें कहा गया कि सुरक्षा पहले है और SIM-Binding नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. सरकार का मानना है कि डिजिटल फ्रॉड और फर्जी नंबर के जरिए हो रहे अपराधों को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है. Sim Binding से प्रभावित कौन होगा?     जो यूजर एक सिम से अलग अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप चलाते हैं. साथ ही जो बार बार सिम कार्ड बदलते रहते हैं.      WhatsApp Web खुद से हर छह घंटे में लॉगआउट हो जाएगा. जारी रखने के लिए QR कोड स्कैन करना होगा.      60-80% तक छोटे बिजनेस ऑपरेशनल डिसरप्शन का शिकार हो सकते हैं. SIM Binding के बाद WhatsApp का Linked Device काम करेगा? WhatsApp का एक बड़ा फीचर इसका लिंक्ड डिवाइस है. इसके तहत ही एक नंबर से अलग अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप काम करता है. लेकिन इस नियम के बाद इसमें बड़ी रेस्ट्रिक्शन लगेगी.  गौरतलब है कि Sim Binding Rule के बाद Linked Device पूरी तरह से काम करना बंद नहीं करेगा, लेकिन लिमिटेशन आएंगी. WhatsApp सिर्फ उसी फोन में चलेगा जिसमें वो सिम होगा जिससे WhatsApp अकाउंट बनाया है. अगर डिवाइस से सिम निकलेगा तो वॉट्सऐप बंद हो सकता है.  मौजूदा समय में 14 दिन तक वॉट्सऐप लिंक्ड रहता है. लेकिन नियम आ जाने के बाद ये ऐसा नहीं हो पाएगा. बार बार वेरिफिकेशन होगा जिससे वॉट्सऐप  काम करना बंद हो सकता है. सिम बाइंडिंग से डिजिटल फ्रॉड कम होंगे? पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल सेंटर, और नकली प्रोफाइल के जरिए बड़े स्तर पर धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. सरकार का तर्क है कि अगर हर मैसेजिंग अकाउंट एक्टिव और असली SIM से जुड़ा रहेगा, तो जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा. यही वजह है कि इस नियम को साइबर सुरक्षा के नजरिए से अहम बताया जा रहा है. SIM Binding पर टेक कंपनियों का विरोध हालांकि दूसरी तरफ कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और इंडस्ट्री ग्रुप्स ने चिंता भी जताई है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ग्लोबल मैसेजिंग कंपनियों ने DoT के नियमों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह नियम कानूनी दायरे से बाहर हो सकता है. कुछ कंपनियों ने इसे प्राइवेसी से भी जोड़ा है. लेकिन सरकार का रुख फिलहाल साफ दिख रहा है कि नियम वापस लेने या टालने का कोई संकेत नहीं है. WhatsApp यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? खबरों के मुताबिक 1 मार्च की डेडलाइन इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसके बाद नियम पूरी तरह लागू माने जाएंगे. पहले कहा जा रहा था कि कंपनियों को समय दिया गया है ताकि वे अपने सिस्टम में जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें. अब माना जा रहा है कि यह समय सीमा खत्म होने के करीब है. अगर ये नियम 1 मार्च से लागू हो गया तो WhatsApp Web या दूसरे डिवाइस पर लॉगिन के नियम सख्त हो सकते हैं. एक्टिव SIM के बिना ऐप चलाना मुश्किल हो सकता है. हालांकि अभी तक आम यूजर के लिए कोई अलग से आधिकारिक पब्लिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए कई लोग इंतजार कर रहे हैं कि अंतिम रूप से क्या व्यवस्था लागू होगी.   WhatsApp ही नहीं, दूसरे ऐप्स पर भी असर यह पूरा मामला सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं है. Telegram, Signal और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं. यानी यह एक व्यापक नीति बदलाव हो सकता है, जो पूरे डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम को प्रभावित करेगा. फिलहाल साफ संकेत यही है कि SIM-Binding नियम पर सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है. 1 मार्च को लेकर काउंटडाउन जारी है और टेक कंपनियों के साथ-साथ करोड़ों यूजर्स की नजर भी इसी पर टिकी है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि नियम किस रूप में लागू होता है और आम यूजर के अनुभव में कितना बदलाव आता है.

वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ीं: कॉर्डेलिया क्रूज केस में हाई कोर्ट से कार्रवाई को मंजूरी

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में तत्कालीन आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की मंजूरी दे दी है। अदालत ने केंद्र सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लियाए जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के पुराने फैसले को चुनौती दी गई थी। वानखेड़े पर आरोप है कि उन्होंने एनसीबी में रहते हुए अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को फंसाने की धमकी दी और उनके परिवार से रुपये की मांग की। उन पर जांच को गलत दिशा में मोड़ने का भी आरोप है। अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल एवं जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने साल 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले के संबंध में आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ शुक्रवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की अनुमति प्रदान कर दी। केंद्र सरकार ने कैट के आदेश को दी थी चुनौती जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल एवं जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस आदेश के खिलाफ केन्द्र की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया गया था। केन्द्र सरकार ने कैट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा 18 अगस्त, 2025 को वानखेड़े को जारी किए गए आरोपपत्र को रद्द कर दिया गया था। क्या हैं समीर वानखेड़े पर आरोप? साल 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी समीर वानखेड़े उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने 2021 में मुंबई के नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) में अपने कार्यकाल के दौरान अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ कांड में फंसाने की धमकी देकर उनके परिवार से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। शुरू की गई थी अनुशासनात्मक जांच कैट के समक्ष वानखेड़े ने केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक जांच को चुनौती देते हुए एक मूल आवेदन दायर किया। एनसीबी से कार्यमुक्त होने के बाद भी कथित रूप से उसके कानूनी विभाग से गोपनीय जानकारी मांगने के लिए अनुशासनात्मक जांच शुरू की गई थी। सिंगल बेंच ने दखल से किया था इनकार यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने एनसीबी के विधिक अधिकारी से जांच की दिशा मोड़ने का आश्वासन भी मांगा था। उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 12 जनवरी को वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने वाले कैट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष पहुंचा। खंडपीठ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी दे दी है।

अफगान हमले से दहला पाकिस्तान, PMO के नजदीक एयरस्ट्राइक की खबर से सुरक्षा अलर्ट

इस्लामाबाद भारत के दो पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शुरु हुई जंग विध्वसंक रूप लेते जी रही है। ताजा हमले में अफगानिस्तान की तालिबान सेना ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री दफ्तर के करीब ड्रोन से एयरस्ट्राइक की है। ये हमला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर किया गया। इस हमले के जरिए एक तरफ अफगानिस्तान ने अपनी ताकत का इजहार किया है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के सत्ता गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान ने कंधार में पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक का बदला इस्लामाबाद में ड्रोन अटैक से लिया है। अफगानिस्तान गृह मंत्रालय की बॉर्डर पुलिस के प्रवक्ता के हवाले से आज तक की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पीएम ऑफिस से 5 किलोमीटर दूर तक हमला करने में कामयाबी हासिल की है। अफगानिस्तान बॉर्डर पुलिस के प्रवक्ता अब्दुल्ला फारूकी ने दावा किया है कि काबुल ने इस्लामाबाद में एयर स्ट्राइक की है। इसके अलावा नौशेरा, एबटाबाद, जमरूद में भी अटैक किए गए हैं। फारूकी कहा, "इस्लामाबाद के पीएम ऑफिस से 5 किलोमीटर दूर उनकी आर्मी का कैंप है, वहां हमने हमला किया है।" कई अहम सैन्य ठिकानों पर भी हमले का दावा अफगान सुरक्षा बलों ने यह दावा भी किया है कि उसके हमले में पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों और सुविधा केंद्रों को निशाना बनाया गया है। सुरक्षा बलों ने यह दावा भी किया कि ये हमले पाकिस्तान की तरफ से कंधार, काबुल और पक्तिका में किए गए एयरस्ट्राइक का जवाब है। हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। चीन ने की दोनों पक्षों से युद्धविराम की अपील इस बीच, चीन ने दोनों पक्षों से युद्धविराम की अपील की है। चीन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंसक झड़पों को लेकर बहुत चिंतित है और उसने दोनों पक्षों से युद्धविराम के लिए बातचीत की है। गौरतलब है कि इन झड़पों में 133 अफगान तालिबान लड़ाके और पाकिस्तान के दो जवान मारे गये हैं। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा राजधानी काबुल सहित अफगानिस्तान के बड़े शहरों पर बमबारी के बाद चीन संघर्ष के बढ़ने पर बहुत चिंतित है। चीन ने दोनों पक्षों से शांत रहने और संयम बरतने की अपील करते हुए कहा है कि जितनी जल्दी हो सके युद्धविराम और खून-खराबा से बचा जाना चाहिए। 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारने का पाक का दावा उन्होंने कहा, "चीन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष में लगातार मध्यस्थता की है और आगे भी तनाव कम करने में एक रचनात्मक भूमिका निभाना जारी रखने को वह तैयार है।" उन्होंने कहा कि मंत्रालय और पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान में चीन के दूतावास इस मामले पर दोनों देशों में संबंधित पार्टियों के साथ काम कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार का कहना है कि 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए। जबकि पाकिस्तान का कहना है कि चल रही झड़पों में उसके दो जवान मारे गए हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि हालिया हमलों के बाद अब अफगानिस्तान के साथ 'खुली जंग शुरु हो गई है।  

इजरायल के साथ भारत की बड़ी डील पर पाकिस्तान परेशान, सऊदी अरब कनेक्शन से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे पर दुनिया भर में सुर्खियां बनी हैं। वह भारत के ऐसे पहले पीएम थे, जो 2017 में इजरायल की धरती पर पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने एक और रिकॉर्ड बनाया और दूसरी बार इजरायल पहुंचे। यही नहीं इस दौरान उन्होंने इजरायल की संसद को भी संबोधित किया। इजरायल के नेता बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनकी गर्मजोशी वाली मुलाकात की तस्वीरें खूब वायरल हुई हैं। इस बीच पाकिस्तान को लेकर भी कयास लगने लगे हैं और कतर के मीडिया संस्थान अलजजीरा ने इसे उसकी सुरक्षा से जोड़ा है। अलजजीरा लिखता है कि पीएम मोदी का यह इजरायल दौरा ऐसा था, जिसमें उन्होंने खूब दिखाने की कोशिश की कि इजरायल के भारत कितना करीब है। बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी के दौरे से पहले ही कैबिनेट मीटिंग की थी और उसमें बताया था कि उसके 'हेक्सागन ऑफ अलायंस' में भारत सबसे अहम कड़ी है। इस फ्रेमवर्क में इजरायल की ओर से भारत के अलावा अफ्रीकी देशों, साइप्रस, ग्रीस और कुछ अन्य अरब मुल्कों को रखा गया है। पीएम मोदी का यह इजरायल दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब तुर्की के पीएम रेचेप तैयप अर्दोआग इजरायल के सबसे बड़े आलोचक बने हुए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान और सऊदी अरब ने डिफेंस पैक्ट किया है। इसके तहत दोनों ने तय किया है किसी एक मुल्क पर भी हमला हुआ तो वह दोनों का माना जाएगा। ऐसी स्थिति में भारत और इजरायल दोनों के लिए यह जरूरी था कि वे एक गठबंधन का हिस्सा बनें। इजरायल और भारत के संबंधों में मोदी के सत्ता में आने के बाद से ही तेजी आई है। 2017 में पीएम मोदी पहली बार इजरायल गए थे। इसके बाद अब इजरायल तो भारत का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है। इसके अलावा अब डिफेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी के मामले में भी दोनों का सहयोग बढ़ सकता है। भारत की ओर से इजरायल के आयरन बीम के लिए भी डील करने की कोशिश है। इसे इजरायली सेना ने 2025 के दिसंबर में ही शामिल किया है। इसके अलावा आयरन डोम मिसाइल की तकनीक ट्रांसफर किए जाने को लेकर भी बातचीत चल रही है। इजरायल और भारत की डील में सऊदी अरब का क्यों आ रहा नाम अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत मसूद खान का कहना है कि पीएम मोदी और नेतन्याहू की यह मीटिंग अहम है। उन्होंने कहा कि इजरायल और भारत ने यह समझौता पाकिस्तान और सऊदी अरब के अग्रीमेंट की तर्ज पर किया है। इजरायल के ऐसे ही समझौते पहले ही अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों के साथ हो चुके हैं। चीन में पाक के राजदूत रहे मसूद खालिद का कहना है कि हमने देखा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पिछले साल इजरायली ड्रोन्स का भारत ने इस्तेमाल किया था। नेतन्याहू का हेक्सागन प्रस्ताव स्पष्ट नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि वह जल्दी ही प्रजेंटेशन देंगे। अब पाकिस्तान की बात करें तो वह बीते कुछ सालों में सुन्नी मुस्लिम देशों के गुट का नेतृत्व करने की कोशिश में रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान इकलौता ऐसा मुस्लिम देश है, जो परमाणु हथियारों से लैस है। इसी का वह फायदा उठाता रहा है। यही कारण था कि एक तरफ सऊदी अरब ने उसके तरफ रक्षा सौदा किया है तो वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर कर्ज भी दिया है।  

इलाहाबाद है भाई… बयान से छाए CJI सूर्यकांत, जानें किस संदर्भ में कही यह बात

नई दिल्ली CJI सूर्यकांत ने कहा कि इसे होली ब्रेक के बाद लिस्ट करो। नहीं नहीं, इसे उसके भी एक हफ्ते बाद करो। इलाहाबाद है भाई, एक हफ्ता तो लग जाएगा भांग का नशा उतरने में। सीजेआई की यह हल्के-फुल्के अंदाज में की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में रोजाना कई मामलों की सुनवाई होती है। इसमें कुछ चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कोर्ट में होती है। शुक्रवार को हुई एक सुनवाई चर्चा का विषय बन गई। इसमें सीजेआई सूर्यकांत ने हल्के-फुल्के अंदाज में एक केस को लिस्ट करने के मामले में कहा कि इसे होली के हफ्तेभर बाद लिस्ट करो, क्योंकि इलाहाबाद है भाई, भांग का नशा उतरने में हफ्ताभर तो लग जाएगा। बार एंड बेंच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सुरेश देवी वर्सेज हाई कोर्ट ऑफ इलाहाबाद से जुड़ी एक सुनवाई को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ''इसे होली ब्रेक के बाद लिस्ट करो। नहीं नहीं, इसे उसके भी एक हफ्ते बाद करो। इलाहाबाद है भाई, एक हफ्ता तो लग जाएगा भांग का नशा उतरने में।'' सीजेआई की यह हल्के-फुल्के अंदाज में की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। बता दें पूरे देशभर में होली धूमधाम से मनाई जाती है। प्रयागराज में भी होली के त्योहार को लेकर काफी उत्सुकता है। इस बार चार मार्च को रंग खेलने वाली होली पड़ रही है। कई जगह होली के दिन भांग का भी सेवन किया जाता है। माना जा रहा है कि इसी संदर्भ में सीजेआई सूर्यकांत ने यह मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की और मामले को सुनवाई के लिए होली के थोड़े और दिन बाद रखा। वहीं, एक अन्य मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने एक वकील को जमकर फटकार लगाई। पूरन चंद्र सेन बनाम राजस्थान राज्य के मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने वकील से कहा कि इन पर जुर्माना नहीं लगाया हाईकोर्ट ने? बंद वंद पहने नहीं हैं, लग रहा कोई दंगल में उतरने आया है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि हाई कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। फिर सीजेआई ने पूछा कि आपको वकालत करते हुए कितने साल हो गए है, जिसपर वकील ने कहा कि 1995 से कर रहा हूं। सीजेआई सूर्यकांत इतना सुनते ही भड़क गए और पूछा कि आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की। प्लीज ऐसी पिटीशन फाइल न करें। लोग आप पर विश्वास करते हैं। अगर आप यह सब फाइल करेंगे तो लोग आप पर विश्वास कैसे करेंगे। इस पर वकील ने कहा कि आरएसएस के आदर्श संविधान के खिलाफ है, जिस पर जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि अगर आप और दबाव डालेंगे तो हमें कॉस्ट बढ़ानी पड़ेगी। आपकी आइडियोलॉजी या पॉलिटिक्स वगैरह से राय अलग हो सकती है, लेकिन इससे कोई ऑफेंस नहीं होता या आप किसी अथॉरिटी के खिलाफ एफआईआर करने को नहीं कहते। कृपया पीछे हटें, खुद को शर्मिंदा न करें।

हाई कोर्ट से राहत के बाद बंगाल में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, अमित शाह दिखाएंगे परिवर्तन यात्रा को हरी झंडी

कोलकाता बंगाल में भाजपा की प्रस्तावित ‘परिवर्तन यात्रा’ को लेकर चल रही कानूनी रस्साकशी के बीच कोलकाता हाई कोर्ट ने सशर्त अनुमति दे दी है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष की पीठ में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि एक और दो मार्च को दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक यात्रा निकाली जा सकेगी, लेकिन किसी भी स्थान पर एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ नहीं होनी चाहिए। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सुनिश्चित करनी होगी।   हाई कोर्ट 'परिवर्तन यात्रा' को दी सशर्त अनुमति अदालत ने यात्रा के समय को भी सीमित कर दिया है, जिसके तहत दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक ही जुलूस निकालने की इजाजत होगी। भाजपा सूत्रों के अनुसार, होली के त्योहार के मद्देनजर तीन और चार मार्च को यात्रा स्थगित रहेगी। ऐसे में पार्टी ने रणनीति बनाई है कि एक और दो मार्च को ही यात्रा का भव्य उद्घाटन कर दिया जाए, जबकि पांच मार्च से इसे पुनः सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा। इस दौरान कूचबिहार, कृष्णनगर, कुल्टी, इस्लामपुर और संदेशखाली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से यात्रा गुजरेगी।   अब दो मार्च को शाह आएंगे कोलकाता इस राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में केंद्रीय मंत्रियों और दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगने वाला है। विशेष रूप से, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में मामूली बदलाव हुआ है; अब वे एक मार्च की बजाय दो मार्च को दक्षिण 24 परगना जिले के रायदिघी से इस यात्रा का शुभारंभ कर सकते हैं। भाजपा ने पूरे राज्य को 10 संगठनात्मक संभागों में बांटा है, जिनमें से नौ संभागों में यह यात्रा निकलेगी। कोलकाता संभाग को इस यात्रा से मुक्त रखा गया है क्योंकि वहां 14 मार्च को होने वाली ब्रिगेड रैली की तैयारियां चल रही हैं, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संबोधित करेंगे।  

इस्लामिक देशों पर रमजान में कार्रवाई पर घिरी अमेरिका सरकार, सांसद ने उठाए गंभीर सवाल

ईरान ईरान पर अमेरिकी हमलों की आशंका बढ़ने के बीच अमेरिकी सांसद ने ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंसूबों पर सवाल उठाए हैं। सोमालियाई मूल की अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने शुक्रवार को अमेरिकी सरकार पर तीखे सवाल उठाए कि अमेरिका रमजान के महीने में ही मुस्लिम देशों को निशाना क्यों बनाता है। उन्होंने इस दौरान पूर्व में इराक पर अमेरिका के हमलों का भी जिक्र किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इल्हान उमर ने लिखा, “अमेरिका ने रमजान के दौरान इराक पर हमला किया था और यह जानकर दुख हो रहा है कि अमेरिका एक बार फिर रमजान में ही ईरान पर हमला करने जा रहा है। संभवतः अमेरिका को रमजान के दौरान ही मुस्लिम देशों पर हमला करना पसंद है।” अमेरिकी सांसद ने आगे कहा, “और मुझे यकीन है कि इन देशों पर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन ना करने की वजह से ये हमले नहीं किए जा रहे बल्कि इसीलिए कि वे किसकी पूजा करते हैं।” मंडरा रहा हमले का खतरा इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकला तो वे हमला करने से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन कोई सहमति बनती नहीं दिख रही है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन जारी रखेगा और यही अमेरिका के लिए लाल रेखा है। अमेरिका ने क्षेत्र में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। तीसरे दौर की वार्ता का क्या निकला नतीजा? इस बीच ईरान और अमेरिका ने गुरुवार को तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई घंटे तक अप्रत्यक्ष वार्ता की, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। जिनेवा में हुई वार्ता में मध्यस्थता करने वाले ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने कहा कि बातचीत में 'महत्वपूर्ण प्रगति' हुई है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता देश की 'सबसे गहन और लंबी वार्ताओं' में से एक रही। अराघची ने गुरुवार को ईरान के सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही। वहीं अमेरिका ने अभी तक वार्ता को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने दिया निर्णय स्थगित, फैसला सुरक्षित

इलाहाबाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न का मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. साथ ही कहा है कि फैसला आने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी. इस तरह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को फौरी राहत मिल गई है. कोर्ट के फैसले के बाद अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. इससे पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में उनकी अग्रिम जमानत अर्जी की पोषणीयता पर बहस हुई है, जिसमें राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के अधिवक्ताओं ने अग्रिम जमानत का विरोध किया. कुंभ और माघ मेले में यौन शोषण का आरोप लगाया गया. अदालत में एफआईआर पढ़ी गई. राज्य सरकार के वकीलों ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया. कोर्ट में दोनों पक्षों की दलील इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते। उन्होने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। शंकराचार्य के वकील ने कहा पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता और अभिभावकों का कोई पता नहीं है। सरकार ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है। शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ हत्या, दुष्कर्म, हत्या का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां-बाप कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकारी की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ दर्ज है पॉक्सो का केस ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा 2-3 अज्ञात लोगों पर बाल यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इलाहाबाद जिला न्यायालय की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में केस दर्ज किया गया। यह आदेश पॉक्सो कोर्ट के पॉक्सो कोर्ट के अपर जिला जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर दर्ज किया गया है। उन्होंने अपने आदेश में पुलिस से कहा था कि वो पॉक्सो एक्ट के तहत निष्पक्ष रूप से इस मामले की जांच करें। साथ ही कोर्ट ने पीड़ितों की पहचान और सम्मान की सुरक्षा करने का भी आदेश दिया है। माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शुरू हुआ था विवाद इसी साल माघ मेले में ज्योतिर्मठ उत्तराखंड के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ मौनी अमावस्या के दिन मेला प्रशासन के साथ विवाद हो गया था। पालकी पर स्नान करने के लिए  जाते समय शंकराचार्य और उनके शिष्यों को प्रशासन ने भीड़ अधिक होने और भगदड़ की आशंका पर घाट से पहले ही रोक दिया। शंकाराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बटुकों को चोटी पकड़कर घसीटा और उनकी पिटाई की। साथ ही साथ शंकराचार्य और उनके शिष्यों का भी अपमान किया। इसके विरोध में शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने धरने पर बैठ गए जहां पर उन्हें पुलिस वाले छोड़कर गए थे। 11 दिन तक धरना चला। शंकराचार्य की मांग थी कि अधिकारी आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग लें तो वह अपने टेक समाप्त कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 11 दिनों  तक धरने पर बैठे रहने पर भी जब को हल नहीं निकला तब शंकराचार्य ने 28 जनवरी को माघ मेला छोड़ दिया और काशी के लिए रवाना हो गए।   

बंगाल SIR पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट सख्त: आदेश उल्लंघन बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार हमारे आदेशों का उल्लंघन करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हमने स्पष्ट कर दिया है कि किन दस्तावेजों की जांच की जानी है। हमारे आदेश बिलकुल स्पष्ट हैं। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से बताया गया कि चुनाव आयोग ने राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर में तैनात न्यायिक अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि वह अपने न्यायिक अधिकारियों को जानता है और वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होंगे। न्यायिक अधिकारियों के लिए जारी किया प्रशिक्षण मॉड्यूल : बंगाल सरकार पश्चिम बंगाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने पीठ से कहा, 'चुनाव आयोग ने पीठ पीछे न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। एक प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया है जिसमें कहा गया है कि उन्हें क्या स्वीकार करना चाहिए और क्या नहीं।' इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राज्य में इस प्रक्रिया के लिए तैनात न्यायिक अधिकारी इस संबंध में फैसले लेंगे। सीजेआई ने कहा, 'हम इस तरह की बातें बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसका अंत होना चाहिए। हम अपने न्यायिक अधिकारियों को जानते हैं और वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं हो सकते।' इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किन दस्तावेजों की जांच की जानी है। हमारे आदेशों से आगे कोई नहीं जाएगा :सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि हमारे आदेश बिलकुल स्पष्ट हैं। पीठ ने कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेशों से आगे जाएगी। पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे गतिरोध से निराश होकर शीर्ष अदालत ने 20 फरवरी को एक 'असाधारण' निर्देश जारी किया। इसमें राज्य में विवादित मतदाता सूचियों की एसआईआर में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात करने का निर्देश दिया गया।  

विजय और रश्मिका ने अपने रिसेप्शन में पीएम मोदी को किया आमंत्रित, वायरल हुई तस्वीर

नई दिल्ली  विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) और रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) ने 26 फरवरी, 2026 को शादी कर ली। कपल ने उदयपुर में अपने करीबी दोस्तों और परिवार की मौजूदगी में शादी की और अब 4 मार्च, 2026 को हैदराबाद में रिसेप्शन दिया जाएगा। आज सुबह रश्मिका और विजय की गृह मंत्री अमित शाह के साथ तस्वीरें वायरल हो गईं। दोनों ने अमित शाह को भी अपने रिसेप्शन में आमंत्रित किया था। अब, VIROSH की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इस जोड़े ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर उन्हें भी रिसेप्शन में आमंत्रित किया था। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि विजय और रश्मिका प्रधानमंत्री से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें शॉल भेंट कर रहे हैं। पीएम मोदी ने दी बधाई     विजय और रश्मिका की शादी से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने दंपति को बधाई पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा, "माधवी और गोवर्धन राव देवरकोंडा जी, 26 फरवरी 2026 को होने वाले विजय और रश्मिका के विवाह समारोह में आपका निमंत्रण पाकर हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। देवरकोंडा और मंदन्ना परिवारों को इस हार्दिक और शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई। यह विजय और रश्मिका के जीवन में एक नए, खूबसूरत अध्याय की शुरुआत है।" पत्र में आगे लिखा था, “विजय और रश्मिका दोनों ही फिल्मों में स्क्रिप्ट के लिए नए नहीं हैं। लेकिन उनके वास्तविक जीवन का यह दिव्य रूप से रचा गया अध्याय, जो प्रेम और स्नेह से भरा है, निश्चित रूप से उनके द्वारा सिल्वर स्क्रीन पर रचे गए जादू को भी मात देगा। प्रेम और समझदारी के साथ, वे जिम्मेदारियों को साझा करें, एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करें, एक-दूसरे की खूबियों से सीखें और सच्चे साथी बनकर जीवन की यात्रा करें। इस शुभ अवसर पर कपल और उनके परिवारों को मेरी शुभकामनाएं। सादर कब होगा रिसेप्शन? रश्मिका और विजय का वेडिंग रिसेप्शन, 4 मार्च, 2026 को हैदराबाद में होगा। ऐसी उम्मीद है कि इस मौके पर साउथ और बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स इसका हिस्सा बनेंगे।