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फांसी और 21 साल की कैद के बाद अब नई सजा—शेख हसीना पर कानूनी शिकंजा और कसा

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग प्रमुख शेख हसीना को सोमवार को ढाका की एक विशेष अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने पुरबचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में प्लॉट आवंटन में अनियमितताओं से जुड़े बहुचर्चित जमीन घोटाला मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। इससे पहले इस साल (2025) ही International Crimes Tribunal ने हसीना को “क्राइम्स एगेन्स्ट ह्यूमैनिटी” (2024 छात्र-आन्दोलन खूनखराबे) के लिए फांसी सुनाई थी। और इसके कुछ दिन बाद ही  ढाका कोर्ट  Special Judge Court-5   ने हाल ही में Sheikh Hasina को तीन भ्रष्टाचार-मामलों  में 21 साल की जेल की सजा सुनाई है।जमीन घोटाला मामले में   अदालत ने कुल तीन लोगों को दोषी करार ोदिया है । शेख हसीना (पूर्व प्रधानमंत्री), शेख रेहाना (हसीना की बहन),तुलिप रिजवाना सिद्दीक (शेख रेहाना की बेटी व ब्रिटिश सांसद)। ये तीनों राजुक (RAJUK) द्वारा किए गए प्लॉट आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में दोषी पाए गए।  क्या है पूरा मामला?     यह मामला पुरबचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट से संबंधित है, जो ढाका के पास राजुक द्वारा विकसित एक बड़ा आवासीय प्रोजेक्ट है।     आरोप था कि हसीना और उनके परिवार ने अपने प्रभाव का उपयोग करके इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट में प्लॉट अवैध तरीके से हासिल किए।     मामला कई सालों से जांच में था, और हाल ही में गवाही व दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाया।   अदालत का निर्णय ढाका की विशेष अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया  और तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने कारावास की सजा सुनाई, जिसकी अवधि को लेकर आधिकारिक बयान विस्तृत रूप से सार्वजनिक होना बाकी है । हसीना पहले से ही कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उनके खिलाफ विभिन्न आर्थिक और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले चल रहे हैं। अब एक और मामले में दोषी ठहराया जाना उनकी राजनीतिक और कानूनी स्थिति को कमजोर करता है। तुलिप सिद्दीक जो ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सांसद हैं का नाम इस फैसले में शामिल होने से यह मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। ब्रिटेन की राजनीति और मीडिया में भी इस पर चर्चा शुरू हो चुकी है। अवामी लीग के नेताओं ने इस फैसले को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया है। उनका कहना है कि विपक्षी सरकार हसीना परिवार को “कमजोर करने” की कोशिश कर रही है।मामले के जानकारों के अनुसार  हसीना की कानूनी टीम उच्च अदालत में अपील दाखिल करेगी। अगर सजा बरकरार रहती है तो हसीना और उनका परिवार लंबे समय तक राजनीतिक संकट में रह सकता है।  

एनरॉन घोटाला: छल, साजिश और दिवालिएपन की कहानी जिसने बदला अमेरिकी कारोबार का चेहरा

नई दिल्ली  दिसंबर 2001 की शुरुआत में अमेरिका की आर्थिक व्यवस्था को झटका देने वाली खबर दुनिया के सामने आई—एनरॉन, जिसे कभी “अमेरिका की सबसे इनोवेटिव कंपनी” कहा गया था, महज कुछ ही महीनों में ढह गई। यह पतन सिर्फ एक कंपनी का नहीं था, बल्कि उस कॉरपोरेट संस्कृति का था जो मुनाफे की चमक के पीछे छिपी हेराफेरी को सुनियोजित तरीके से छुपाती रही। ये कुछ-कुछ वैसा ही था जैसे 1990 के दशक का हर्षद मेहता घोटाला, जिसने शेयर बाजार पर भी काफी असर डाला था। एनरॉन का मॉडल ऊर्जा व्यापार के नए दौर का प्रतीक माना गया था, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि कंपनी ने अपने घाटे और बढ़ते कर्ज को छुपाने के लिए जटिल अकाउंटिंग तकनीकों और संदिग्ध पार्टनरशिप कंपनियों का जाल बिछाया था। बैलेंस शीट में काल्पनिक मुनाफा दिखाया गया और निवेशकों को एक ऐसी तस्वीर पेश की गई जो असलियत से बिल्कुल उलट थी। जब व्हिसलब्लोअर्स और मीडिया की रिपोर्टों ने एनरॉन के झूठ का पर्दाफाश किया, तो कंपनी के शेयर कुछ ही हफ्तों में 90 डॉलर से गिरकर एक डॉलर से भी नीचे पहुंच गए। लाखों लोगों की जमा-पूंजी, पेंशन फंड और निवेश जमीन में समा गए। इस घोटाले ने अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित ऑडिट फर्म आर्थर एंडरसन को भी समाप्ति के कगार पर ला दिया, क्योंकि उस पर एनरॉन के अकाउंट्स को गलत तरीके से क्लीन-चिट देने का आरोप लगा। एनरॉन के पतन ने अमेरिकी प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया। सवाल उठने लगे कि क्या ऑडिट और रेगुलेटरी प्रक्रियाएं सिर्फ कागजी हैं? इसी घोटाले की वजह से बाद में अमेरिका में सरबेंस-ऑक्सले एक्ट आया जिसने कॉरपोरेट गवर्नेंस, वित्तीय पारदर्शिता और अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स को नई परिभाषा दी। एनरॉन ने दुनिया को यह सिखाया कि असीमित मुनाफे की लालसा और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाने की प्रवृत्ति किस तरह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है। आज भी एनरॉन स्कैंडल आधुनिक कॉरपोरेट इतिहास का वह काला अध्याय है जिसने सरकारों, निवेशकों और कंपनियों को हमेशा के लिए सतर्क कर दिया। हालांकि कम्पनी 'वी आर बैक' कैम्पेन के जरिए फिर खुद को खड़ा करने में जुटी हुई है।

SC का बड़ा आदेश: डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी पर CBI जांच, बैंकों की संलिप्तता की होगी पड़ताल

नई दिल्ली  देश भर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बहुत सारे फ्रॉड हुए हैं। कभी दारोगा, कभी कमिश्नर तो कभी सीबीआई, ईडी जैसी एजेंसियों के नाम पर डराकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने की धमकियां दी गई हैं और उससे बचाने के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। ऐसे मामलों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ है और उसने सीबीआई से ऐसे सारे मामलों की जांच करने का आदेश दिया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि एजेंसी देश भर में हुए डिजिटल फ्रॉड के केसों की जांच करे। यही नहीं अदालत ने एजेंसी को बैंकों की भूमिका की जांच करनी होगी। इसके लिए एजेंसी को फ्रीहैंड है।

क्या सेना के बराबर मिलेगा वेतन-पेंशन? HC के आदेश से असम राइफल्स के जवानों में उम्मीद

नई दिल्ली  असम राइफल्स में काम कर रहे जवानों के लिए राहत की खबर है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को आदेश देते हुए डेडलाइन थमाई है कि वह असम राइफल्स में काम कर रहे जवानों और भारतीय सेना में काम कर रहे जवानों के वेतन की बराबरी के मुद्दे पर तीन महीने के अंदर फैसला करे। असम राइफल्स एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले की सुनवाई करते हुए सोमवार को जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विमल कुमार यादव की डिवीजन बेंच ने दो टूक कहा कि केंद्र सरकार असम राइफल्स के जवानों के भारतीय सेना और केंद्रीय बलों के वेतन और पेंशन की बराबरी के मुद्दे पर तुरंत फैसला ले। पीठ ने ये भी कहा कि असम राइफल्स एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन (याचिकाकर्ता) केंद्र सरकार के सामने एक रिप्रेजेंटेशन देगी, जिसमें दोनों फोर्स के सैलरी और पेंशन बेनिफिट्स के बीच अंतर को हाईलाइट किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस आवेदन पर तीन महीने के अंदर केंद्र सरकार को फैसला करना होगा। कोर्ट ने कहा कि जब तीसरे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू थीं, तब असम राइफल्स के जवानों को भारतीय सेना के जवानों के बराबर दर्जा दिया गया था। हालांकि, चौथे वेतन आयोग के साथ वेतन और पेंशन में अचानक बदलाव आ गया, जब पैरामिलिट्री फोर्स को इस बराबर दर्जे से बाहर कर दिया गया। सक्षम प्राधिकार के पास दें रिप्रेजेंटेशन बार एंड बेंच के मुताबिक, सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आदेश दिया, "पिटीशनर, तीसरे केंद्रीय वेतन आयोग तक असम राइफल्स और इंडियन आर्मी के बीच सैलरी और दूसरे भत्ते में बराबरी को हाईलाइट करते हुए, सक्षम प्राधिकारी को एक पूरी रिप्रेजेंटेशन देंगे, जो चौथे पे कमीशन के बाद कमज़ोर हो गई लगती है। इसके बाद संबंधित प्राधिकारी उस रिप्रेजेंटेशन के मिलने के तीन महीने के अंदर कानून के हिसाब से उस पर विचार करेंगे।" सबसे पुरानी पैरामिलिट्री फोर्स, 1835 में गठन हाई कोर्ट ने असम राइफल्स एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर यह फैसला सुनाया है। याचिका में सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि सैलरी और पेंशन के मामले में असम राइफल्स के सदस्यों के साथ इंडियन आर्मी जैसा ही बर्ताव किया जाए। बता दें कि असम राइफल्स भारत की सबसे पुरानी पैरामिलिट्री फोर्स है, जिसे असल में 1835 में (कछार लेवी के तौर पर) बनाया गया था। अब इसे बॉर्डर सिक्योरिटी, खासकर इंडिया-म्यांमार बॉर्डर, और नॉर्थईस्ट में इंटरनल सिक्योरिटी और काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। यह गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन आता है, जिसका मतलब है कि भर्ती, सैलरी, पेंशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी “सर्विस कंडीशंस” MHA द्वारा कंट्रोल की जाती हैं। हालांकि, फोर्स का ऑपरेशनल कंट्रोल, जैसे डिप्लॉयमेंट, पोस्टिंग, ट्रांसफर और ऑपरेशन के दौरान कमांड, इंडियन आर्मी या मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेंस (MoD) के पास होता है।  

वक्फ संपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी—‘UMEED’ पर डेटा न अपलोड किया तो भुगतनी पड़ेगी सजा

नई दिल्ली  वक्फ की संपत्तियों की डीटेल 'UMEED' पोर्टल पर अपलोड करने की समय सीमा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे संबंधित ट्राइब्यूनल में जाकर अपनी बात रखें। बता दें कि समय सीमा बढ़ाने वाली याचिकाओं में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोल्ड (AIMPLB) और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल थी। वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने के लिए 5 दिसंबर तक का समय दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था को सजा भी हो सकती है।   इससे पहले 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को पूरी तरह से स्थगित करने से इनकार कर दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई थी। नियमों के मुताबिक वक्फ संपत्ति ना अपलोड करने वालों को छह माह की सजा और 20 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जो लोग संपत्तियों को पोर्टल पर दर्ज नहीं करवाएंगे उनकी संपत्ति का दर्जा खत्म कर दिया जाएगा और बाद में केवल वक्फ ट्राइब्यूनल के आदेश पर ही दोबारा पंजीकरण किया जा सकेगा।  

Maths के सवाल ने फंसा दिया 660 ट्रेनी IAS को, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया चुनौतीपूर्ण सवाल

 मसूरी रक्षामंत्री राजनाथ सिंह उत्तराखंड के मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) पहुंचे. 100वें फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में बोलते हुए उन्होंने वहां ट्रेनी IAS को संबोधित किया और इस दौरान एक गणित का सवाल पूछ लिया. सवाल सुनकर एक बार तो सभागार में मौजूद सभी ट्रेनी आईएएस चकित रह गए. सिविल सर्विसेज के एक दो अफसरों ने गलत जवाब दिया तो रक्षामंत्री ने कहा कि दोबारा कोशिश करने के लिए कहा.  दरअसल, राजनाथ सिंह ने पूछा, ''किसी व्यक्ति के पास इतना पैसा था कि उसने उसका आधा A को दे दिया. वन थर्ड B को दे दिया, जो बाकी अमाउंट 100 पैसा बचा था वो C को दे दिया. बताइए टोटल अमाउंट कितना था? कोई बता सकता है?''  रक्षामंत्री के सवाल पूछते ही सभागार में किसी की आवाज नहीं आई. फिर से उन्होंने एक प्रोफेसर की तरह सवाल को दोहराया. फिर एक ट्रेनी आईएएस ने जवाब दिया- 3000. यह सुनकर रक्षामंत्री ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए सिर हिलाया और कहा कि गलत. फिर से कोशिश करिए.  इसके बाद सभागार में एक और आवाज सुनाई दी. जब एक ट्रेनी अधिकारी ने सही जवाब 'सिक्स हंड्रेड' बताया, तो रक्षा मंत्री ने खुद ही गणितीय तरीके से सवाल का समाधान समझाया.  राजनाथ ने बताया, कुल राशि को A मान लेते हैं.  राम (अ) को दी गई राशि= A/2  श्याम (ब) को दी गई राशि= A/3  दी गई कुल राशि= A/2 + A/3 = 5A/6 शेष बची राशि= A- 5A/6 = 100 इसका हल निकला: A = 600 आस्था और विश्वास का संदेशमैथ्स का समाधान बताने के बाद राजनाथ सिंह ने इस घटना को आस्था और विश्वास से जोड़ा और कहा, "मैथमेटिकल प्रॉब्लम! यानी इस विश्वास के आधार मैंने मान लिया A हो ही नहीं सकता, लेकिन मान लिया कि A है. कभी-कभी आस्था और विश्वास से भी बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो सकता है, होता है, हो नहीं सकता, होता है, होता रहेगा."  बता दें कि 19 सिविल सर्विसेज के 660 ऑफिसर ट्रेनी के साथ 100वां फाउंडेशन कोर्स इसी साल 25 अगस्त को LBSNAA मसूरी में शुरू हुआ था और14 हफ़्ते का यह कोर्स 28 नवंबर को खत्म हो गया.  

रेलवे ने बदली तत्काल टिकट प्रक्रिया: 1 दिसंबर से नया सिस्टम शुरू

नई दिल्ली 1 दिसंबर 2025 से भारतीय रेलवे, बैंकिंग और दूरसंचार सेक्टर में यात्रियों, ग्राहकों और कारोबारियों के लिए कई बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। रेलवे से लेकर बैंक और मोबाइल तक, इन नई नीतियों का मकसद सुरक्षा बढ़ाना, फर्जी गतिविधियों को रोकना और सेवा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है। रेलवे तत्काल टिकट पर OTP अनिवार्य भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब 1 दिसंबर से तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान OTP अनिवार्य होगा। शुरुआत मुंबई सेंट्रल-अहमदाबाद शताब्दी एक्सप्रेस से की जा रही है। टिकट बुक करते समय रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा गया OTP दर्ज किए बिना बुकिंग पूरी नहीं होगी। रेलवे का कहना है कि इससे फर्जी मोबाइल नंबर और अवैध बुकिंग पर रोक लगेगी, और सच में यात्रा करने वाले यात्रियों को लाभ मिलेगा। यह नया नियम IRCTC वेबसाइट, मोबाइल ऐप, कंप्यूटरीकृत रेलवे काउंटर और अधिकृत एजेंटों सभी पर लागू होगा। यात्री ध्यान दें: बुकिंग से पहले अपना मोबाइल नंबर अपडेट करना जरूरी है। OTP उसी नंबर पर आएगा, और बुकिंग के दौरान नंबर बदलना संभव नहीं होगा। SBI ATM और एमकैश में बदलाव 1 दिसंबर से SBI ATM ट्रांजैक्शन शुल्क में बदलाव होगा। वेतन खाताधारकों के लिए 10 मुफ्त ट्रांजैक्शन होंगे, इसके बाद प्रति ट्रांजैक्शन 23 रुपये शुल्क लगेगा। बचत खाताधारकों के लिए 5 मुफ्त लेन-देन की सीमा तय की गई है। साथ ही, SBI ने YONO Lite और Online SBI पर एमकैश सेवा बंद करने का निर्णय लिया है। अब ग्राहक UPI, IMPS, NEFT और RTGS के जरिए ही पैसे ट्रांसफर कर सकेंगे। GST रिटर्न में कड़ी सख्ती GSTN ने घोषणा की है कि जिन व्यापारियों ने पिछले तीन या उससे अधिक वर्षों के रिटर्न नहीं भरे हैं, वे दिसंबर से आगे रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे। पुराने रिटर्न अपडेट करना जरूरी होगा, तभी आगे का टैक्स फाइलिंग संभव होगी। कॉलर का असली नाम अब स्क्रीन पर दूरसंचार विभाग 15 दिसंबर से CNAP लागू करेगा। इसके बाद कॉल आने पर कॉलर का वही नाम स्क्रीन पर दिखाई देगा जो उसने KYC में दर्ज किया है। इस बदलाव से स्पैम और फर्जी कॉल्स पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ेगी।

बैंकिंग काम न करें पेंडिंग: दिसंबर में 18 दिनों की छुट्टियाँ घोषित

नई दिल्ली दिसंबर का महीना शुरू होते ही बैंकों का छुट्टियों का कैलेंडर भी सामने आ गया है. इस बार पूरे देश में अलग-अलग राज्यों को मिलाकर कुल 18 दिन बैंक बंद रहेंगे. हर हफ्ते के 4 रविवार और दूसरे तथा चौथे शनिवार के अलावा कई राज्यों में अपनी-अपनी स्थानीय छुट्टियों की वजह से बैंकिंग कामकाज ठप रहेगा. अगर आप दिसंबर में कोई जरूरी बैंकिंग काम करने की सोच रहे हैं, तो पहले यह लिस्ट देख लेना बेहतर होगा. आरबीआई के कैलेंडर के हिसाब से अलग-अलग तारीखों पर अलग वजहों से बैंक बंद रहेंगे. कही उद्घाटन दिवस तो कही स्थानीय पर्व, कही क्रिसमस से जुडी छुट्टियां तो कही राज्य स्तरीय समारोह, इन सभी की वजह से कई शहरों में ब्रांचें नहीं खुलेंगी. नीचे दी गयी तारीखों की सूची देखकर आप अपने राज्य में किस दिन बैंक बंद मिलेगा, यह आराम से समझ सकते हैं. जानिए दिसंबर में बैंक कब-कब बैंक बंद रहेंगे 1 दिसंबर: अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में उद्घाटन दिवस और स्वदेशी आस्था दिवस पर बैंक बंद रहेंगे. 3 दिसंबर: गोवा में सेंट फ्रांसिस जेवियर पर्व की वजह से सभी बैंक बंद रहेंगे. 7 दिसंबर:रविवार होने के कारण पूरे देश में बैंकिंग कामकाज नहीं होगा. 12 दिसंबर: मेघालय में पा तोगन नेंगमिंजा संगमा पुण्यतिथि पर स्थानीय छुट्टी रहेगी. 13 दिसंबर: दूसरा शनिवार होने से सभी राज्यों में बैंक बंद रहेंगे. 14 दिसंबर: रविवार है, इसलिए सभी जगह बैंक नहीं खुलेंगे. 18 दिसंबर: छत्तीसगढ और मेघालय में सोसो थाम पुण्यतिथि पर छुट्टी रहेगी. 19 दिसंबर: गोवा में गोवा मुक्ति दिवस के मौके पर बैंक बंद रहेंगे. 20 दिसंबर: सिक्किम में लोसूंग–नामसूंग पर्व की वजह से बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी. 21 दिसंबर: रविवार है, इसलिए पूरे देश के बैंक बंद रहेंगे. 22 दिसंबर: सिक्किम में लोसूंग–नामसूंग का दूसरा दिन भी बैंक बंद रहेंगे. 24 दिसंबर: मिजोरम, नागालैंड और मेघालय में क्रिसमस सेलिब्रेशन के कारण छुट्टी होगी. 25 दिसंबर: क्रिसमस पर पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी. 26 दिसंबर: मिजोरम, नागालैंड और मेघालय में क्रिसमस सेलिब्रेशन का दूसरा दिन भी छुट्टी रहेगी. 27 दिसंबर: चौथा शनिवार है, इसलिए सभी राज्यों में बैंक बंद रहेंगे. 28 दिसंबर: रविवार को सभी जगह बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी. 30 दिसंबर: मेघालय में यू कियांग नांगबाह दिवस पर स्थानीय छुट्टी रहेगी. 31 दिसंबर: मिजोरम और मणिपुर में नए साल के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे. बैंक बंद होने के बावजूद ऑनलाइन सेवाएं जैसे UPI, IMPS, NEFT, RTGS बिल्कुल पहले की तरह चलती रहेंगी. यानी पैसों का लेनदेन, बिल पेमेंट और बाकी डिजिटल कामों पर इन छुट्टियों का कोई असर नहीं पडेगा. एटीएम भी पूरे महीने चालू रहेंगे. दिसंबर में शेयर बाजार में भी कुल 9 दिन कामकाज बंद रहेगा. बीएसई के अनुसार हर रविवार और शनिवार के साथ-साथ 25 दिसंबर को क्रिसमस पर भी ट्रेडिंग नहीं होगी.

IMD का बड़ा अपडेट: 1 और 2 दिसंबर को इन राज्यों में होगी भारी बारिश

नई दिल्ली मानसून का सीज़न इस बार बेहद शानदार रहा, जिसने देशभर में न सिर्फ पानी की कमी को दूर किया, बल्कि तापमान को भी ठंडा रखकर लोगों को गर्मी से राहत दी। हालांकि अब मौसम ने करवट बदल ली है। साइक्लोन Ditwah के असर से देश के कई हिस्सों में बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी जारी की गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 और 2 दिसंबर को विभिन्न राज्यों में भारी बारिश और तूफ़ानी हवा का अलर्ट जारी किया है। केरल में मौसम का मिज़ाज मानसून की पहली दस्तक हमेशा की तरह केरल में हुई थी और राज्य में बारिश का सिलसिला अभी भी जारी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 1 और 2 दिसंबर को राज्य के कई जिलों में भारी बारिश होगी। लोगों को जलभराव और तेज़ हवाओं के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है। तमिलनाडु में भी बढ़ी सावधानी तमिलनाडु में मानसून के दौरान हुई अच्छी बारिश का असर अब भी महसूस किया जा रहा है। मौसम विभाग ने 1 और 2 दिसंबर को कई जिलों में जमकर बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान बिजली गिरने और 50-70 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज़ हवा चलने की चेतावनी भी दी गई है। अन्य प्रभावित राज्यों और क्षेत्र तटीय आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार, माहे, पुडुचेरी, यनम और रायलसीमा में भी 1 और 2 दिसंबर को भारी बारिश का अलर्ट है। तेज़ हवाओं और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। राजस्थान और दिल्ली में ठंड बढ़ेगी राजस्थान और दिल्ली में मानसून के बाद कुछ दिनों तक हल्की बारिश रही। अब मौसम विभाग ने इन राज्यों में शीत लहर की संभावना जताई है। खासकर सुबह और रात के समय ठंड बढ़ने की चेतावनी दी गई है।  IMD ने सभी प्रभावित राज्यों में जनता से आग्रह किया है कि वे भारी बारिश, तेज़ हवाओं और बिजली गिरने के संभावित खतरों के प्रति सतर्क रहें। इसके अलावा, ड्राइविंग और बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।  

अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की मुश्किलें बढ़ीं, H-1B वीजा के मामलों में रिकॉर्ड कमी, टाटा की कंपनी टॉप-5 में

नई दिल्ली भारत की टॉप 7 आईटी कंपनियों को इस साल अमेरिका में नए H-1B वीजा सिर्फ 4,573 पेटिशन ही मिले हैं, जो 2015 से 70% कम और पिछले साल से भी 37% कम है. नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की रिपोर्ट के मुताबिक नए कर्मचारियों के लिए टॉप-5 कंपनियों में सिर्फ टीसीएस ही भारतीय कंपनी बची है. पुराने कर्मचारियों का वीजा रिन्यू कराने में भी सिर्फ टीसीएस टॉप-5 में है, लेकिन उसका रिजेक्शन रेट भी बढ़कर 7% हो गया जो पिछले साल 4% था. ये बाकी कंपनियों से काफी ज्यादा है. मतलब अमेरिका में इंडियन आईटी वालों के लिए नया वीजा लेना अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के बाद भारतीयों के H2-1B वीजा में एक साल में ही 40 फीसदी के करीब कमी आ गई है। यूएससीआईएस के आंकड़ों के मुताबिक 2015 से अब तक H-1B वीजा की मंजूरी मिलने में 70 फीसदी की कमी आई है। वहीं एक साल में ही यह 37 फीसदी कम हो गया। भारत की पांच सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में टीसीएस के ही सबसे ज्यादा कर्मचारियों को एच-1बी वीजा मिला है। वहीं भारत की कंपनियों को कुल 4.5 हजार एच-1बी वीजा ही जारी हो सके हैं जो कि इस दशक में सबसे कम हैं। टीसीएस का भी रेजेक्शन रेट 7 फीसदी तक बढ़ गया है। 2024 में टीसीएस के 4 फीसदी ऐप्लिकेशन ही रद्द हुए थे। इस साल टीसीएस के 5293 कर्मचारियों को अमेरिका में अपनी नौकरी जारी रखने की अनुमति मिली है। वहीं भारत से अमेरिका जाने वाले कर्मचारियों की बात करें तो इस साल टीसीएस के केवल 846 लोगों को ही एच-1बी वीजा दिया गया है। 2024 में यह संख्या 1452 थी। अमेरिका में भारत की टॉप आईटी कंपनियों में पहले नंबर पर टीसीएस है जिसका रिजेक्शन रेट 7 फीसदी है। इन्फोसिस का रिजेक्शन रेट 1 पर्सेंट, एचसीएल अमेरिका का 1 फीसदी, एलटीआई माइंडट्री का 1 फीसदी और विप्रो का 2 फीसदी है। अमेरिका में एच-1बी वीजा के मामले में ऐमजॉन, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल सबसे आगे हैं। टॉप एच-1बी वीजा पिटिशन वाली 25 कंपनियों में केवल तीन भारत की कंपनी हैं। टीसीएस के अलावा बाकी कंपनियों का रिजेक्शन रेट कम है। इसकी वजह है कि कंपनियां अब आवेदन ही कम करवा रही हैं। एलन मस्क ने भी ट्रंप को दिखा दिया आईना अमेरिका में एच-1बी वीजा की नीति को लकर एलन मस्क ने बड़ा बयान दिया।उन्होंने कहा कि भारतीयों से अमेरिका ने खूब फायदा कमाया है। मस्क ने कहा कि तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय अप्रवासियों की प्रतिभा ने अमेरिका को बहुत लाभ पहुंचाया।उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक कंपनियों में शीर्ष पदों पर भारतीय मूल के लोग हैं। बता दें कि बीते कुछ समय से ही ट्रंप और मस्क के रिश्तों में दरार पड़ गई है। इस बार चुनाव में मस्क ने ट्रंप का खुलकर साथ दिया था। इसके बाद वह सरकार का हिस्सा भी थे। हालांकि अनबन के अब वे एक दूसरे पर हमलावर नजर आते हैं। इस साल अमेरिका में पुराने कर्मचारियों का H-1B वीजा रिन्यू कराने का रिजेक्शन रेट सिर्फ 1.9% रहा. लेकिन भारतीय कंपनियों में सिर्फ टीसीएस ही मजबूत दिखी, उसने 5,293 पुराने वीजा रिन्यू करवाए. नए कर्मचारियों के लिए टीसीएस को सिर्फ 846 H-1B मिले जो पिछले साल के 1,452 और 2023 के 1,174 से काफी कम हैं, हालांकि उसका रिजेक्शन रेट सिर्फ 2% रहा. कुल मिलाकर भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका में नया स्टाफ भेजना अब पहले से बहुत कठिन हो गया है. TCS का 2% एप्लीकेशन रिजेक्शन अब ज्यादातर H-1B एप्लीकेशन पुराने कर्मचारियों का वीजा बढ़वाने के लिए ही आ रहे हैं और इनमें रिजेक्शन बहुत कम हो रहा है. इंफोसिस, विप्रो और एलटीआईमाइंडट्री जैसी बड़ी कंपनियों का तो सिर्फ 1-2% ही एप्लीकेशन खारिज हुआ है. लेकिन नए लोगों को भेजने वाले आवेदन इस साल जमकर रिजेक्ट हो रहे हैं. बड़ी कंपनियों की बात करें तो टीसीएस का सिर्फ 2% एप्लीकेशन रिजेक्शन हुआ, जबकि एचसीएल अमेरिका का 6%, एलटीआईमाइंडट्री का 5% और कैपजेमिनी का 4% रिजेक्ट हो गया है. इमिग्रेशन प्लेटफॉर्म बियॉन्ड बॉर्डर ने दी ये जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लॉ फर्म बीटीजी अडवाया की पार्टनर मान्सी सिंह कहती हैं कि कंपनियां अब नए लोग लाने की कोशिश कम है और जो पहले से अमेरिका में हैं उन्हें ग्रीन कार्ड की लंबी लाइन में रखने में ज्यादा ध्यान दे रही हैं, यानी H-1B अब नई स्किल लाने का रास्ता कम ले रही है और पुराने कर्मचारियों को रोककर रखने का जरिया ज्यादा बन गया है. बेसिक चेकिंग में एप्लीकेशन फंसे इस रिपोर्ट के अनुसार, इमिग्रेशन प्लेटफॉर्म बियॉन्ड बॉर्डर ने बताया कि पिछले चार साल से लगातार “सॉफ्टवेयर इंजीनियर” कैटेगरी में लेबर सर्टिफिकेशन स्टेज पर ही अप्रूवल कम होते जा रहे हैं, यानी वीजा देने से पहले वाली बेसिक चेकिंग में ही भारतीयों के एप्लीकेशन फंस रहे हैं. कंपनी की हेड ऑफ लीगल कामिला फसान्हा कहती हैं कि इतना ज्यादा रिजेक्शन शायद इसलिए हो रहा क्योंकि अमेरिका अब H-1B प्रोग्राम पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त और लंबा हो गया है, खासकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और टेक जॉब्स के लिए. अभी तो पक्का सबूत नहीं है लेकिन लग रहा है कि पूरा सिस्टम ही भारतीय आईटी वालों के खिलाफ हो गया है. H-1B वीजा भारतीयों के लिए अहम है क्योंकि अमेरिका में रहने वाले सारे भारतीय-अमेरिकी लोगों में से पूरा एक चौथाई हिस्सा इन्हीं H-1B वीजा वालों और उनके परिवारों का है. पहले ये वीजा भारतीय आईटी कंपनियों के लिए बहुत काम का था, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी कंपनियां इससे अपने जूनियर और मिडिल लेवल इंजीनियरों को अमेरिकी क्लाइंट के पास काम करने भेजती थीं. अब भी अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियां ज्यादातर नए भारतीय टैलेंट को अमेरिका बुलाने के लिए इसी H-1B रास्ते का इस्तेमाल करती हैं. ये वीजा भारतीय इंजीनियरों का अमेरिका जाने का सबसे बड़ा दरवाजा है.