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छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने के लिए मलेशिया ने शुरू की नई योजना

क्वालालंपुर ऑस्ट्रेलिया के बाद मलेशिया भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी कर रहा है। मलेशिया अगले साल से 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा सकता है। मलेशिया के अलावा और भी कई देश ऐसे हैं, जहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन लगा रखा है। इन देशों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच को सीमित करने का फैसला लिया है। मलेशिया के संचार मंत्री फहमी फदजिल ने रविवार को कहा कि सरकार ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर उम्र की पाबंदी लगाने के तरीकों पर विचार कर रही है। उन्होंने युवाओं को साइबरबुलिंग, फाइनेंशियल स्कैम और बच्चों के यौन शोषण जैसे ऑनलाइन अपराधों से बचाने के लिए इस फैसले की जरूरत बताई। मलेशिया की लोकल मीडिया द स्टार की रिपोर्ट में कहा गया, “हमें उम्मीद है कि अगले साल तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सरकार के उस फैसले को मान लेंगे, जिसमें 16 साल से कम उम्र के लोगों के यूजर अकाउंट खोलने पर रोक लगाई गई है।” बच्चों के मेंटल हेल्थ और सुरक्षा पर सोशल मीडिया का असर दुनिया भर में एक बढ़ती हुई चिंता बन गया है। चाहे टिकटॉक हो या स्नैपचैट, गूगल या फिर मेटा के सभी प्लेटफॉर्म (फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम), यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संकट का कारण बनता जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के मेंटल हेल्थ संकट को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका के लिए अमेरिका में केस भी चल रहे हैं। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया में, अगले महीने से 16 साल से कम उम्र के सभी सोशल मीडिया यूजर्स के रजिस्टर्ड अकाउंट को डीएक्टिवेट किया जाएगा। इसपर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। मलेशिया हाल ही में सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़ी नजर रख रहा है। उनका कहना है कि ऑनलाइन जुए और नस्ल, धर्म और हानिकारक पोस्ट जैसे कंटेंट तेजी से बढ़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मलेशिया में 8 मिलियन से अधिक यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स को जनवरी में लागू हुए नए नियम के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य है।

तीन तूफान एक साथ, 4 राज्यों में भारी आफत का अलर्ट

नई दिल्ली भारतीय मौसम विभाग जिस बात का डर जता रहा था, वह अब सच होता दिख रहा है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया मौसम तंत्र तेजी से सक्रिय हो रहा है और आने वाले दिनों में यह बड़े चक्रवाती खतरे का रूप ले सकता है. आईएमडी की तरफ से जारी ताजा मौसम अपडेट में बताया गया है कि मलेशिया और स्ट्रेट ऑफ मलक्का के पास मौजूद निम्न दबाव का क्षेत्र फिलहाल वहीं पर बना हुआ है और इसके साथ जुड़ा साइक्लोनिक सर्कुलेशन 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक सक्रिय है. अनुमान है कि यह सिस्टम पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए अगले 24 घंटे में दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर डिप्रेशन में बदल जाएगा और इसके बाद अगले 48 घंटों में चक्रवाती तूफान के रूप में दक्षिण बंगाल की खाड़ी में तीव्र हो सकता है. इस बीच कोमोरिन क्षेत्र और उसके आसपास भी ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिसकी वजह से 25 नवंबर के आसपास कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के पास एक और लो प्रेशर एरिया बनने की पूरी संभावना है. यह सिस्टम बाद में और अधिक सक्रिय हो सकता है. वहीं दक्षिण-पूर्व अरब सागर में बना चक्रवाती परिसंचरण भी फिलहाल बरकरार है. इन तीन अलग-अलग मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय रहने के कारण दक्षिण भारत और आसपास के समुद्री इलाकों में मौसम तेजी से बिगड़ रहा है. चार राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट इन साइक्लोनिक सिस्टम के प्रभाव से तमिलनाडु, केरल, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और तटीय आंध्र प्रदेश में अगले पांच दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है. तमिलनाडु में 25 से 27 नवंबर तक भारी बारिश के साथ 28, 29 और 30 नवंबर को बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है. वहीं केरल और माहे में 26 नवंबर तक भारी वर्षा की संभावना है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 25 से 29 नवंबर के बीच लगातार तेज बारिश होने की चेतावनी है, जबकि 26 से 28 नवंबर के दौरान यहां बहुत भारी वर्षा की आशंका है. तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 29 और 30 नवंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग की तरफ से जारी अपडेट के मुताबिक, तमिलनाडु में 24 से 28 नवंबर तक, केरल और माहे में 24 से 26 नवंबर तक और तटीय आंध्र प्रदेश में 27 और 28 नवंबर को आकाशीय बिजली गिरने के साथ गरज-चमक की संभावना है. अंडमान और निकोबार द्वीपों में छह दिनों तक गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. कुछ इलाकों में हवा की गति और बढ़कर 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है. मछुआरों के लिए अलर्ट समुद्र में मौसम अत्यंत खराब रहने वाला है, इसलिए मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की गई है. उन्हें 27 नवंबर तक दक्षिण अंडमान सागर में, 25 से 28 नवंबर तक दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में, 29 नवंबर तक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, कोमोरिन और तमिलनाडु-पुदुचेरी-श्रीलंका तटों पर और 27 से 30 नवंबर तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तथा आंध्र प्रदेश तट के पास समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है. केरल तट, लक्षद्वीप और मालदीव के आसपास भी 27 नवंबर तक समुद्र में जाने पर रोक है. पहले से समुद्र में मौजूद नावों और नौकाओं को जल्द से जल्द सुरक्षित तटों पर लौटने की सलाह दी गई है, जबकि आंध्र प्रदेश तट के मछुआरों को 28 नवंबर से पहले वापसी अनिवार्य कर दी गई है. उत्तर भारत में बढ़ रही ठंड, यूपी में घने कोहरे का अलर्ट दूसरी तरफ देश के उत्तर-पश्चिमी राज्यों में सर्दी धीरे-धीरे दस्तक दे रही है और अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है. मध्य भारत में भी अगले कुछ दिनों में ठंड बढ़ सकती है. वहीं उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में 25 नवंबर की रात और सुबह के समय घना कोहरा छाने की चेतावनी जारी की गई है. कुल मिलाकर बंगाल की खाड़ी में बन रहा निम्न दाब क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है और यह सिस्टम आने वाले दिनों में बड़े चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है. दक्षिण भारत, अंडमान-निकोबार और तटीय आंध्र प्रदेश में इस सिस्टम का असर सबसे ज्यादा दिखाई देगा, इसलिए प्रशासन और जनता दोनों के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. मौसम विभाग ने अगले दिनों में नियमित अपडेट का पालन करने की सलाह दी है.

INS माहे भारतीय नौसेना में शामिल, जनरल उपेंद्र द्विवेदी बने ऐतिहासिक समारोह के साक्षी

मुंबई मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में माहे-श्रेणी का पहला स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत आज नौसेना में शामिल हो गया। कोचीन शिपयार्ड में निर्मित इस श्रेणी के आठ पनडुब्बी रोधी पोत नौसेना के बेड़े में शामिल होने हैं, जिनमें से यह पहला पोत है। यह माहे-क्लास का पहला पनडुब्बी रोधी (एंटी सबमरीन) और उथले पानी (जहां पानी की गहराई कम हो) में चलने वाला युद्धपोत है, जो तटीय इलाकों के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। मुंबई में हुए समारोह में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे। द्विवेदी ने तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा- सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति सिनर्जी है। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह जहाज उथले पानी में ऑपरेशन, तटीय इलाकों में गश्त, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश जैसे कामों में बड़ी भूमिका निभाएगा। ये काम बिना शोर के करने की काबिलियत के चलते इसे ‘साइलेंट हंटर’ नाम दिया गया है। INS माहे को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने तैयार किया है, जो नौसेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक मजबूत कदम माना जा रहा है। नौसेना ने इसे “नए दौर का तेज, फुर्तीला और आधुनिक भारतीय युद्धपोत” कहा है। INS माहे भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी का युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। यह शैलो वॉटर यानी कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में भी उच्च सटीकता (हाई-प्रिसिजन) के साथ ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसका 80 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बना है। यह एक मल्टी-रोल वॉरशिप है, जो कोस्टल डिफेंस, अंडरवॉटर सर्विलांस और सर्च-एंड-रेस्क्यू जैसे कई महत्वपूर्ण मिशन में तैनात किया जा सकता है। इसमें माइन ले-ड्रॉपिंग की क्षमता भी है, जिससे यह समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने और दुश्मन की गतिविधियों को रोकने में सक्षम है। युद्धपोत निर्माण में भारती की बढ़ती महारत माहे का जलावतरण स्वदेशी उथले पानी के लड़ाकू विमानों की एक नई पीढ़ी के आगमन का प्रतीक है- आकर्षक, तेज और पूरी तरह से भारतीय। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, माहे-श्रेणी युद्धपोत डिजाइन, निर्माण और एकीकरण में भारत की बढ़ती महारत को दर्शाता है। क्या है एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट? एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ऐसे युद्धपोत हैं जिन्हें तटीय क्षेत्रों के उथले पानी में पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये जहाज नौसेना की तटीय सुरक्षा क्षमता को बढ़ाते हैं और उन्नत सोनार, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर जैसी प्रणालियों से लैस होते हैं। ये जहाज दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, खोज और बचाव कार्यों को करने और माइन बिछाने जैसे काम भी कर सकते हैं। देश चैन से सोएगा क्योंकि आप जागते रहेंगे- थलसेनाध्यक्ष मुंबई में भारतीय नौसेना के नए युद्धपोत INS माहे के भव्य कमीशनिंग समारोह में थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह अवसर न सिर्फ गर्व का है, बल्कि देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता और समुद्री शक्ति का सशक्त प्रतीक भी है। उन्होंने सबसे पहले जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और पूरी टीम को ‘ब्रावो जूलू’ कहते हुए शानदार आयोजन के लिए बधाई दी।

NCW का बड़ा फैसला: अब शॉर्ट-कोड 14490 पर मिलेगी तुरंत मदद

नई दिल्ली राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं के हक में एक बड़ा कदम उठाया है। कमीश्न ने महिलाओं के लिए 24×7 शॉर्ट-कोड हेल्पलाइन 14490 जारी किया है। यह हेल्पलाइन चौबीसों घंटे काम करेगी। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि यह हेल्पलाइन कॉल करने वालों को प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में मार्गदर्शन प्रदान करेगी, प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेगी तथा आपात स्थितियों में समय पर हस्तक्षेप की सुविधा प्रदान करेगी। बयान में बताया गया है कि यह टोल-फ्री नंबर याद रखने में आसान है और आयोग की मौजूदा हेल्पलाइन ‘7827170170' से जुड़ा हुआ है, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या शुल्क के बिना मदद सुनिश्चित की जा सके। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि नया ‘शॉर्ट-कोड' आयोग की पहुंच को सुदृढ़ करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जरूरतमंद महिलाओं को तत्काल सहायता प्राप्त हो।

देश ने कहा NO टू इच्छामृत्यु: जनमत संग्रह में 53% मतदाताओं ने किया विरोध

स्लोवेनिया स्लोवेनिया के नागरिकों ने रविवार को एक जनमत संग्रह में उस कानून को खारिज कर दिया, जो लाइलाज बीमारी से पीड़ित लोगों को अपना जीवन समाप्त करने की अनुमति देता था। चुनाव प्राधिकारियों द्वारा जारी प्रारंभिक परिणामों में यह जानकारी सामने आई। लगभग पूरी हो चुकी मतगणना के अनुसार, करीब 53 प्रतिशत मतदाताओं ने इस कानून के खिलाफ मतदान किया जबकि लगभग 46 प्रतिशत ने इसके पक्ष में वोट दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान लगभग 50 प्रतिशत रहा। इच्छामृत्यु के खिलाफ अभियान का नेतृत्व करने वाले रूढ़िवादी कार्यकर्ता एलेस प्रिम्क ने कहा, ‘‘करुणा की जीत हुई है। स्लोवेनिया ने जहर देकर मौत की नीति पर आधारित सरकार के स्वास्थ्य, पेंशन और सामाजिक सुधारों को अस्वीकार कर दिया है।'' यूरोपीय संघ के इस छोटे से देश की संसद ने यह कानून जुलाई में पारित किया था। पिछले वर्ष हुए एक गैर-बाध्यकारी जनमत संग्रह में लोगों ने इसका समर्थन किया था। हालांकि, प्रिम्क और अन्य विरोधियों ने 40,000 से अधिक हस्ताक्षर जमा कर फिर से मतदान कराने के लिए दबाव डाला। कानून के अनुसार, मानसिक रूप से सक्षम ऐसे लोग जिनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है या असहनीय दर्द झेल रहे हैं, उन्हें इच्छामृत्यु का अधिकार दिया जाना था। इसका मतलब था कि मरीज दो चिकित्सकों की मंजूरी के बाद स्वयं घातक दवा लेते। यह कानून मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों पर लागू नहीं होता। इस कानून का समर्थन प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब की उदारवादी सरकार समेत कई पक्षों ने किया। समर्थकों ने तर्क दिया कि यह कानून लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन और अपनी पीड़ा समाप्त करने का समय और तरीका स्वयं तय करने का अधिकार देता है। विरोध करने वालों में रूढ़िवादी समूह, कुछ चिकित्सक संघ और कैथोलिक चर्च शामिल थे। उनका कहना था कि यह कानून स्लोवेनिया के संविधान के खिलाफ है और सरकार को इसके बजाय बेहतर दर्दनाशक चिकित्सा सुविधाओं पर काम करना चाहिए। यूरोपीय संघ के कई अन्य देशों में ऐसे कानून पहले से लागू हैं, जिनमें स्लोवेनिया का पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया भी शामिल है।  

भारतीयों को राहत: कनाडा की नागरिकता नीति में ऐतिहासिक सुधार, C-3 बिल को हरी झंडी

कनाडा कनाडा ने वंश-आधारित नागरिकता कानून को आधुनिक बनाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है। इस अधिनियम में संशोधन करने वाले विधेयक को शाही मंजूरी मिल गई है। इस कदम से का असर भारतीय मूल के हजारों परिवारों पर पड़ने की संभावना है। कनाडा सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नागरिकता अधिनियम (2025) में संशोधन करने वाले विधेयक सी-3 को शाही स्वीकृति मिल गई है। इसमें कहा गया कि यह नागरिकता अधिनियम को और अधिक समावेशी बनाने और कनाडाई नागरिकता के मूल्य को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।  समाचार विज्ञप्ति में कहा गया है, "नए कानून के लागू होते ही, उन सभी लोगों को कनाडाई नागरिकता प्रदान की जाएगी, जो विधेयक के प्रभाव में आने से पहले पैदा हुए हैं और जो प्रथम-पीढ़ी की सीमा या पिछले कानूनों के पुराने प्रावधानों के कारण नागरिक नहीं बन पाए थे।" कनाडाई वंशानुक्रम से नागरिकता पर पहली-पीढ़ी की सीमा वर्ष 2009 में लागू की गई थी। इसका अर्थ है कि यदि कोई बच्चा कनाडा के बाहर पैदा हुआ या गोद लिया गया है, तो वह वंशानुक्रम से कनाडाई नागरिक नहीं माना जाएगा, यदि उसके कनाडाई माता-पिता भी कनाडा के बाहर ही पैदा हुए हों या गोद लिए गए हों। मामले से परिचित लोगों का कहना है कि इस सीमा के कारण अनेक भारतीय मूल के कनाडाई लोगों के लिए समस्या उत्पन्न हो गई, जिनके बच्चे देश से बाहर पैदा हुए थे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नया कानून विदेश में जन्मे या गोद लिए गए कनाडाई माता-पिता को इस विधेयक के लागू होने की तिथि या उसके बाद कनाडा के बाहर जन्मे या गोद लिए गए अपने बच्चे को नागरिकता देने की अनुमति देगा, बशर्ते कि उनका कनाडा से पर्याप्त संबंध हो।    

गाजा में हिंसा जारी, इजराइल ने युद्धविराम का उल्लंघन किया 500 बार, भारी हताहत

तेल अवीव: अल जजीरा ने गाजा सरकार के मीडिया ऑफिस के बयान का हवाला देते हुए बताया कि 10 अक्टूबर को युद्धविराम लागू होने के बाद से इजराइल ने सिर्फ 44 दिनों में लगभग 500 बार गाजा सीजफायर तोड़ा है. इसके कारण सैकड़ों फिलिस्तीनियों की मौत हो गई. ऑफिस के अनुसार इन उल्लंघनों के दौरान 342 आम लोग मारे गए हैं. इनमें ज्यादातर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं. ऑफिस ने कहा, 'हम इजराइली कब्जा करने वाले अधिकारियों द्वारा सीजफायर समझौते के लगातार गंभीर और व्यवस्थित रूप से उल्लंघन की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'ये उल्लंघन अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और समझौते से जुड़े मानवीय प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है. इन उल्लंघनों में से 27 आज, शनिवार को हुए जिनमें 24 लोग मारे गए और 87 घायल हुए.' अल जजीरा के अनुसार ऑफिस ने यह भी कहा कि इजराइल अपने उल्लंघन से होने वाले मानवीय और सुरक्षा नतीजों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है. जैसा कि संघर्ष विराम समझौते में जरूरी था, इजराइल तबाह हुए इलाके में बहुत जरूरी मदद और मेडिकल सप्लाई के पूरे और निर्बाध आवाजाही पर भारी रोक लगा रहा है. शनिवार (लोकल टाइम) को इजराइली सेना ने गाजा में ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए. इसमें बच्चों समेत कम से कम 24 फिलिस्तीनी मारे गए. यह युद्ध से जूझ रहे इलाके में छह हफ़्ते पुराने संघर्ष विराम का नया उल्लंघन था. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि ये हमले तब किए गए जब हमास के एक लड़ाके ने गाजा की तथाकथित येलो लाइन के अंदर इजराइली सैनिकों को निशाना बनाया. ये इजराइली नियंत्रण वाला क्षेत्र है. इजराइली बयान में कहा गया, 'जवाब में इजरायल ने हमास के पांच सीनियर लड़ाकों को मार गिराया.' हालांकि, हमास ने इजरायल के बयान को चुनौती दी और दावे का सबूत मांगा. अल जजीरा के मुताबिक हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो के एक सीनियर अधिकारी इज्जत अल-रिशेक ने गाजा डील के मीडिएटर्स और अमेरिका से अपील की कि वे इजराइल पर अपने दावे का समर्थन करने और गाजा समझौते को लागू करने के लिए दबाव डालें. स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि उत्तरी गाजा में दर्जनों फिलिस्तीनी परिवारों को घेर लिया गया है, क्योंकि इजराइली सेना ने सीजफायर समझौते का उल्लंघन करते हुए अपनी सेना को इलाके में और अंदर भेज दिया है.

दिल्ली ब्लास्ट पर ओवैसी का हमला तेज, बोली– जालिमों को नहीं छोड़ा जाएगा

हैदराबाद दिल्ली में लाल किले के पास हुई आतंकी घटना पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी का एक और बयान सामने आया है। उन्होंने हैदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश के दुश्मन हमारे दुश्मन हैं। एक इदारा (संस्थान) बनाना कितना मुश्किल है। मुसलमानों ने जो इदारे कायम किए यदि कोई उस तालीम इदारे (शैक्षणिक संस्थान) में बैठक कर बन बनाने की साजिश करता है तो हम उसकी निंदा करते हैं। जो एक मदरसे और स्कूल का कमरा नहीं बना सकते वे जालिम अमोनियम नाइट्रेट लेकर बैठते हैं। दिल्ली ब्लास्ट का जिक्र करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि 14 लोग मारे गए। हिन्दू भी मारे गए और मुस्लिम भी मारे गए। हमको इस तरह की जहनियत (मानसिकता या सोच) रखने वाले लोगों की मजम्मत (निंदा) करनी चाहिए। जो मुल्क का दुश्मन है वो हमारा दुश्मन है। अगर इस तरह की हरकतें होंगी तो फिर हम खुली छूट देते हैं कि जो चाहे करना चाहो करो… असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि जो लोग समझते हैं कि मुसलमानों को सेकेंड क्लास सिटिजन बनाया जाएगा तुम भूल जाओ तुम्हारी नस्लें खत्म हो जाएंगी… हम खत्म हो जाएंगे लेकिन जब तक दुनिया बाकी रहेगी हिन्दुस्तान में मुसलमान एक बाइज्जत हिन्दुस्तानी बन कर रहेगा। हम अपने हक के लिए जम्हूरियत (लोकतंत्र) के दायरे में लड़ते रहेंगे। हम अपनी मस्जिदों को बचाएंगे। तुम एक मस्जिद शहीद करोगे हम लाखों मस्जिदें बनाएंगे। असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि जो लोग मुसलमानों को गाली देते हैं, जो लोग हमसे वफदारी का सर्टिफिकेट मांगते हैं, हमने बहुत कुछ सहा है, और कल भी सहेंगे, लेकिन हमने कभी अपने देश से नफरत नहीं की। हमने जुल्म करने वालों से कहा कि तुम जालिम हो हम तुमसे नफरत करते हैं। यदि तुम मुसलमानों को दबा रहे हैं तो भारत को कमजोर कर रहे हो। यदि आप मुसलमानों को नफरत से देखेंगे और उनके साथ नाइंसाफ़ी करेंगे तो भारत एक विकसित देश कैसे बनेगा? असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यदि भारत दुनिया का शांतिप्रिय देश बनना चाहता है तो यह कैसे होगा जब आप 19 करोड़ मुस्लिमों को हिकारत की नजर से देखेंगे। संविधान में समानता का मूल अधिकार है। आप इसे भूल जाते हैं। मस्जिद के खिलाफ फैसला आया तो क्या किसी मुसलमान ने कोर्ट में जाकर किसी जज पर जूता फेंका? जूता फेंकने वाले के बारे में एक लफ्ज भी नहीं बोला जाता है क्योंकि उसका बहुसंख्य वर्ग से ताल्लुक था। हमारी वतन से मोहब्बत रहेगी इसलिए नहीं कि तुम हुक्मरान हो।  

IMD की चेतावनी: तूफान सेन्यार से अगले दो दिन मूसलाधार बारिश की संभावना

 नई दिल्ली मानसून के शानदार सीज़न के बाद अब मौसम ने फिर करवट ले ली है। बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण बनने वाले चक्रवाती तूफान सेन्यार की सक्रियता से देश के कई हिस्सों में अगले दो दिनों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसके मद्देनजर अगले 48 घंटे के लिए कई राज्यों में चेतावनी जारी की है। मूसलाधार बारिश के लिए अलर्ट IMD ने बताया कि तूफान सेन्यार के प्रभाव से केरल, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, गरजने और 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ धूल भरी आंधी का भी खतरा है। साइक्लोनिक गतिविधियों का असर अंडमान-निकोबार, यनम, रायलसीमा, लक्षद्वीप और माहे पर भी देखने को मिलेगा। इन इलाकों में अगले 48 घंटों में बादलों की झमाझम बरसात होने के साथ तेज हवाओं और बिजली गिरने की संभावना है। राजस्थान और दिल्ली में ठंड का असर मानसून के जाने के बाद राजस्थान और दिल्ली में मौसम ठंडा हो गया है। हालांकि, दिन के समय धूप के बीच तापमान में गिरावट का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे में राजस्थान और दिल्ली के कई हिस्सों में तापमान 2-3 डिग्री तक नीचे गिर सकता है, जिससे ठंड का अहसास बढ़ेगा। सावधानियों की जरूरत IMD ने जनता से आग्रह किया है कि मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के दौरान सतर्क रहें। सड़क पर यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें और नदी-नाले या तटीय इलाकों में अनावश्यक प्रवेश न करें। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय तूफान सेन्यार मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर रहा है, और इसके असर से देश के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं और ठंड का असर देखने को मिलेगा।  

INS Mahe वॉरशिप ने नेवी में बनाई एंट्री, समंदर में दुश्मनों के लिए होगा खतरा

मुंबई   इंडियन नेवी ने सोमवार को अपने पहले माहे-क्लास एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) जहाज INS Mahe को आधिकारिक तौर पर बेड़े में शामिल कर लिया गया है. यह कार्यक्रम मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित हुआ, जहां इसकी कमीशनिंग ने भारत की समुद्र तट की सुरक्षा में एक नया अध्याय जोड़ने का काम किया है. मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में हुए समारोह में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इसे नेवी को समर्पित करने का काम किया है.    INS Mahe की खासियत    80% से अधिक स्वदेशी निर्माण जनरल द्विवेदी ने कहा, "INS Mahe के अधिकारियों और जवानों को ब्रावो सलाम. देश में बनी इस युद्धपोत की कमीशनिंग हम सबके लिए गर्व का क्षण है." INS Mahe की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका 80% से अधिक स्वदेशी निर्माण है. साथ ही इसमें नौसेना के डिजाइनरों, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और देश की कई रक्षा कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान है. जिन्होंने साथ मिलकर इस जहाज में लगे कई अहम सिस्टम भारत में ही बनाए गए हैं, जिनमें पावर मैनेजमेंट और प्रोपल्शन सिस्टम, एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, मिडियम रेंज वाला हल-माउंटेड सोनार, मल्टी-फंक्शन सर्विलांस रडार, टॉरपीडो और ASW रॉकेट सिस्टम आते हैं.  खतरनाक समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों का बड़ा दुश्मन INS Mahe को ऐसे इलाकों के लिए बनाया गया है जहां बड़े युद्धपोत आसानी से संचालन नहीं कर सकते हैं.  इस जहाज की खासियत की बात करें तो इससे तटीय सुरक्षा, तेज लहर वाले पानी में पनडुब्बी की खोज, समुद्री निगरानी, माइन्स बिछाने और लो इंटेंसिटी समुद्री ऑपरेशनों जैसे मिशनों को आसानी से अंजाम देने का काम कर सकता है.  INS Mahe की खासियत INS Mahe 78 मीटर लंबा और लगभग 1,100 टन वजनी है साथ ही यह जहाज बेहद फुर्तीला माना जाता है. इसकी टॉप स्पीड 25 नॉट्स है, रेंज 1,800 नौटिकल माइल और यह 14 दिन तक लगातार मिशन पर रह सकता है. इसका ड्राफ्ट सिर्फ 3 मीटर से भी कम है, जिससे यह तट के बिलकुल पास जाकर भी ऑपरेशन कर सकता है.  INS Mahe का नाम मालाबार तट के प्राचीन शहर 'माहे' पर रखा गया है. इसके चिन्ह में कलारीपयट्टु की प्रसिद्ध तलवार उरुमी दिखाई देती है, जो फुर्ती और सटीकता का प्रतीक है. माही-क्लास के कुल 8 जहाज बनाए जा रहे हैं. बाकी सात 2027 तक नौसेना को सौंप दिए जाएंगे. इनके आने से पुरानी अभय-क्लास की जगह नई और एडवांस तटीय सुरक्षा क्षमता तैयार हो जाएगी, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बियों की निगरानी और भी मजबूत होगी.