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अनोखी घटना : ट्रेन का टॉयलेट बना शख्स का कमरा, वीडियो सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप

नई दिल्ली भारत में त्योहारों का सीजन शुरू होते ही सोशल मीडिया पर ट्रेनों की भीड़ के वीडियो छा जाते हैं. लेकिन इस बार जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसने सभी को हैरान कर दिया है. इस वीडियो में एक शख्स ट्रेन के वॉशरूम को ही अपना ‘मेकशिफ्ट बेडरूम’ बना लेता है. वह वॉशरूम के अंदर बिछावन लगाकर आराम से लेटा नजर आता है. यह नज़ारा इतना अजीब और चौंकाने वाला है कि देखने वाले यकीन नहीं कर पा रहे कि कोई ट्रेन के वॉशरूम में ऐसे भी सफर कर सकता है. ट्रेन के वॉशरूम में बिछाया बिस्तर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति ट्रेन के वॉशरूम के अंदर अपने ट्रैवल एसेंशियल्स के साथ लेटा हुआ है. उसके पास एक बिछावन है, जो उसने बड़ी सावधानी से फोल्ड करके खिड़की से टिकाई हुई है. बाहर से वीडियो रिकॉर्ड करने वाले शख्स को देखकर वह आराम से मुस्कुराता है, मानो यह उसका रोज का ठिकाना हो. कंटेंट क्रिएटर ने ऐसे किया रिएक्ट यह वीडियो कंटेंट क्रिएटर विशाल ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. वीडियो में विशाल प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर इस नज़ारे को रिकॉर्ड करते हैं और कहते हैं, भाई ने तो वॉशरूम को बेडरूम बना दिया!इसके बाद वे मजाकिया लहजे में पूछते हैं कि ये पूरा घर का सामान है? जिस पर अंदर बैठा व्यक्ति बेफिक्र होकर जवाब देता है-हां. हालांकि ये वीडियो कब का है , ये साफ नहीं है.  'ट्रेन वॉशरूम बना दिया बेडरूम' यह वीडियो अब तक 6 लाख से ज्यादा व्यूज पा चुका है और सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं. कुछ यूजर्स इसे मजेदार मान रहे हैं, जबकि कई ने सफाई और पब्लिक प्रॉपर्टी के दुरुपयोग पर चिंता जताई है. दूसरे ने कहा कि वाकई इसने तो वॉशरूम को बेडरूम बना दिया, यकीन नहीं होता.तीसरे ने लिखा कि इंडियन रेलवेज को वाकई देखना चाहिए कि यात्री ट्रेन में क्या कर रहे हैं.वहीं  कुछ लोगों ने जताई हमदर्दी हालांकि कई यूजर्स ने उस व्यक्ति के प्रति सहानुभूति भी जताई. उनका कहना था कि लंबी यात्रा में सीट न मिलने पर उसने बस किसी तरह गुजारा किया होगा.एक यूजर ने लिखा कि शायद उसके पास सीट नहीं थी, इसलिए उसने यही तरीका अपनाया.

पाकिस्तान के लिए FATF का कड़ा संदेश, ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने का मतलब नहीं मिलेगा टेरर फंडिंग की छूट

इस्लामाबाद  ग्लोबल टेरर फंडिंग वॉचडॉग संस्था FATF ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि भले अक्टूबर 2022 में उसे 'ग्रे लिस्ट' से बाहर कर दिया गया था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को लेकर पूरी तरह सुरक्षित हो गया है. FATF की अध्यक्ष एलिसा डे एंडा मद्राजो ने कहा कि सभी देशों को, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, अपराधों को रोकने और उन्हें टालने के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए. 'टेरर फंडिंग रोकने के लिए काम करते रहें' FATF अध्यक्ष ने फ्रांस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'कोई भी देश जो ग्रे लिस्ट में है या पहले ग्रे लिस्ट में था, वह अपराधियों- चाहे मनी लॉन्ड्रर हों या आतंकवादी- की गतिविधियों को लेकर पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. इसलिए हम सभी देशों से, जिनमें डिलीस्टेड देश भी शामिल हैं, आग्रह करते हैं कि वे अपराधों को रोकने के अपने अच्छे प्रयास जारी रखें.' पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में FATF की 'ग्रे लिस्ट' से हटा दिया गया था और अब यह सुनिश्चित करने के लिए फॉलो-अप किया जा रहा है कि वह टेरर फंडिंग विरोधी उपाय लागू कर रहा है. हालांकि, पाकिस्तान FATF का सदस्य नहीं है, इसलिए एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) इस फॉलो-अप का संचालन कर रहा है. डिजिटल वॉलेट से आतंकी कैंपों को फंड कर रहा पाकिस्तान FATF अध्यक्ष ने कहा कि ग्रे लिस्ट में शामिल देशों और क्षेत्रों की निगरानी इसलिए की जाती है क्योंकि वहां टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में गंभीर कमियां पाई गई हैं. इन टिप्पणियों के बीच ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर आतंकवादी कैंपों को फंड कर रहा है, जिससे वित्तीय लेन-देन को छुपाया जा रहा है.  भारत की नेशनल रिस्क असेसमेंट 2022 ने पाकिस्तान को टेरर फंडिंग के 'उच्च जोखिम वाले' स्रोत के रूप में चिन्हित किया था. भारत के योगदान वाली एक अध्ययन रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स से पैदा होने वाले जोखिमों पर चिंता जताई. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान क्षेत्र में प्रोलिफरेशन फाइनेंसिंग के लिए उच्च जोखिम वाला देश बना हुआ है.  

खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान जल्द लौटेंगे बांग्लादेश, आम चुनाव की सुगबुगाहट बढ़ी

ढाका  बांग्लादेश में आगामी चुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. बांग्लादेश की नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. खांडेकर मोशर्रफ हुसैन ने बताया कि देश में आगामी आम चुनाव का कार्यक्रम नवंबर या दिसंबर में घोषित किया जाएगा. उन्होंने भरोसा जताया कि चुनाव फरवरी 2026 तक जरूर संपन्न हो जाएगा और ये स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होगा, ताकि जनता अपने सांसद चुन सके और सरकार बना सके. साथ ही उन्होंने बताया कि आगामी आम चुनाव में बीएनपी से निर्वासित नेता तारिक रहमान 17 साल बाद जल्द ही लंदन से बांग्लादेश लौटेंगे. मौजूदा चुनाव प्रणाली पर जोर डॉ. हुसैन ने बांग्लादेश की पारंपरिक चुनाव प्रणाली पर उठा रहे सवालों बोलते हुए कहा, 'देश में प्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से ही सांसद चुने जाते हैं, जहां मतदाता किसी व्यक्ति को वोट देते हैं, न कि किसी दल को.' उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के जनसंपर्क द्वारा उठाई जा रही (PR) प्रणाली की मांग को अप्रासंगिक बताया और कहा कि जनसंपर्क प्रणाली में मतदाता किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि किसी पार्टी को वोट देंगे… सांसद पार्टी के सदस्य होंगे. वे जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे. बांग्लादेश में इसकी उम्मीद नहीं है. इसलिए, हमारा दृढ़ विश्वास है कि बांग्लादेश में चुनाव वर्तमान प्रणाली के अनुसार ही होंगे. और कई लोकतांत्रिक देशों में यही व्यवस्था है. उन्होंने ब्रिटेन और भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोकतंत्रों में भी सांसदों का सीधा चुनाव जनता करती है और फिर वे संसद में जाकर सरकार बनाते हैं. अंतरिम सरकार पर भरोसा BNP नेता ने वर्तमान अंतरिम सरकार की तारीफ की और कहा कि सत्ता संभालते वक्त उसने जनता से मताधिकार जल्द लौटाने का वादा किया था. उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि अंतरिम सरकार जनता से किया अपना वादा निभाएगी और हमें उम्मीद है कि चुनाव फरवरी 2026 में होंगे. तारिक रहमान की वापसी तारिक रहमान के बांग्लादेश लौटने के सवाल में उन्होंने कहा, 'हां हमने सुना है कि उन्होंने खुद घोषणा की है कि वह जल्द ही आएंगे और इसी तैयार भी चल रही है. हम सभी चुनाव आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वह आकर चुनाव में भाग ले सकें. हमें उम्मीद है कि तारिक रहमान जल्द ही बांग्लादेश आएंगे.' कौन हैं तारिक रहमान तारिक रहमान दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर्रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के पुत्र हैं, जिन्हें देश में अनुपस्थिति में कई मामलों में सजा सुनाई गई थी. शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है. दरअसल, जुलाई-अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना को पीएम पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी. इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ. यूनुस ने लंदन जाकर तारिक रहमान से मुलाकात की और फरवरी 2026 में चुनाव की घोषणा की. उधर, अंतरिम सरकार ने हसीना की आवामी लीग पार्टी की गतिविधियां निलंबित कर दीं और चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण भी रद्द कर दिया. इससे लगता है कि आवामी लीग को आगामी आम चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं मिलेगी.

ट्रम्प का बड़ा बयान और प्रतिबंध, राष्ट्रपति पेट्रो पर कार्रवाई से लैटिन अमेरिका में अमेरिकी नीति पर असर

वाशिंगटन अमेरिका ने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो (Gustavo Petro) पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है. यह कदम ट्रंप प्रशासन और अमेरिका के पुराने सहयोगी इस लैटिन अमेरिकी देश के बीच बढ़ते तनाव को और गहरा कर सकता है. अमेरिका ने ये प्रतिबंध उस समय लगाए, जब ट्रंप ने पेट्रो पर आरोप लगाया कि उन्होंने कोलंबिया से अमेरिका में कोकीन की तस्करी रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. पिछले कुछ हफ्तों से वॉशिंगटन और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी सेना ने दक्षिण कैरेबियन क्षेत्र में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संदिग्ध जहाजों पर हमले किए हैं, जिन पर अमेरिका का दावा है कि वे ड्रग्स लेकर जा रहे थे. हालांकि, उसकी ओर से अब तक इसका कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया है. डोनाल्ड ट्रंप ने पेट्रो को बताया 'ड्रग लीडर' गुस्तावो पेट्रो ने अमेरिका पर कै​रेबियन सागर में एयरस्ट्राइक करके निर्दोष लोगों की 'हत्या' करने का आरोप लगाया था. जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने कोलंबियाई राष्ट्रपति को 'अवैध ड्रग लीडर' और 'बुरा आदमी' कहकर संबोधित किया था. पेट्रो, जिनका अब सिर्फ 10 महीने का कार्यकाल बाकी है, लंबे समय से इन अमेरिकी सैन्य हमलों के विरोधी रहे हैं. वह कोलंबिया में छह दशकों से चल रहे संघर्ष को शांति वार्ताओं और आत्मसमर्पण समझौतों के जरिए खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है. अमेरिका ड्रग तस्करी बर्दाश्त नहीं करेगा अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बयान जारी करते हुए कहा, 'जब से राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो सत्ता में आए हैं, कोलंबिया में कोकीन का उत्पादन दशकों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. इससे अमेरिका में ड्रग्स की बाढ़ आ गई है और हमारे नागरिक इस जहर के शिकार हो रहे हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'राष्ट्रपति पेट्रो ने कोलंबिया में ड्रग कार्टेल्स को फलने-फूलने का भरपूर मौका दिया है और इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका की सुरक्षा के लिए कड़ा कदम उठाया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि हम ड्रग तस्करी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे.' कोलंबिया किसी के दबाव में नहीं झुकेगा ट्रंप ने 23 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में मीडिया से कहा था कि 'पेट्रो न सिर्फ असफल नेता हैं बल्कि एक अवैध ड्रग डीलर हैं, जिन्होंने अपने देश को अपराधियों के हवाले कर दिया है.' कोलंबिया सरकार ने एक बयान जारी करके अमेरिका के इस कदम को 'गंभीर कूटनीतिक आक्रमण' बताया है. राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने कहा,'अमेरिका की कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है. कोलंबिया कभी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा. हमने अपने देश में शांति और न्याय के लिए संघर्ष किया है.' कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी राजदूत को तलब कर राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है और कहा है इस तरह की बयानबाजी से दोनों देशों के बीच सहयोग पर गंभीर असर पड़ेगा. कैरेबियन सागर में अमेरिका की लगातार बढ़ती सैन्य तैनाती पर लैटिन अमेरिका के देशों ने चिंता जताई है. ब्राजील और चिली ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि 'कूटनीतिक समाधान' ही किसी भी समस्या को हल करने का सबसे उपयुक्त रास्ता है, जबकि मेक्सिको ने ट्रंप प्रशासन के क्षेत्र में एयरक्राफ्ट कैरियर 'यूएसएस जेराल्ड फोर्ड' तैनात करने के फैसले को 'एकतरफा और असंतुलित' कदम बताया. 

पेंशनधारकों को भी मिलेगा फायदा? 8वें वेतन आयोग पर सरकार नवंबर में उठा सकती अहम कदम

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। सरकार की ओर से लंबे इंतज़ार के बाद आठवें वेतन आयोग  को लेकर तैयारियां तेज़ कर दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार नवंबर 2025 तक इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है।यह अपडेट ऐसे समय पर आया है जब देशभर के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। सातवें वेतन आयोग की अवधि इस साल दिसंबर में समाप्त हो रही है, ऐसे में केंद्र को जल्द ही नए आयोग की रूपरेखा तैयार करनी होगी। सरकार की अंदरूनी तैयारियां वित्त मंत्रालय इस समय विभिन्न विभागों और राज्य सरकारों से मिले सुझावों की समीक्षा कर रहा है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल में संकेत दिया कि केंद्र इस विषय पर “सक्रिय रूप से काम कर रहा है” और अधिसूचना “सही समय पर” जारी की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के साथ ही उनके कार्यक्षेत्र और नियम तय करने की प्रक्रिया में है। पिछले अनुभवों को देखते हुए यह प्रयास किया जा रहा है कि देरी ना हो और कर्मचारियों की वेतन-संरचना में जल्द सुधार लागू किया जा सके। कब लागू हो सकता है नया वेतन आयोग? यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार चलता है तो 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 2026 के मध्य तक तैयार हो सकती है, जबकि इसे 2028 तक लागू करने की संभावना जताई जा रही है। यह वही पैटर्न है जो 7वें वेतन आयोग के दौरान देखने को मिला था। हालांकि, सरकार का इरादा है कि कर्मचारियों को बीच के वर्षों में हुई संभावित वृद्धि का लाभ एरियर या बोनस के रूप में मिले, ताकि किसी का आर्थिक नुकसान न हो। कौन होंगे लाभार्थी? नया आयोग लागू होने पर केंद्रीय मंत्रालयों, रक्षा बलों, रेलवे, डाक विभाग और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। वहीं पेंशनधारकों की पेंशन में भी आनुपातिक वृद्धि की उम्मीद है।

स्टारलिंक का विस्तार: 9 शहरों में आ रहे अर्थ स्टेशन, इंटरनेट कनेक्टिविटी में बड़ी अपडेट

नई दिल्ली एलन मस्‍क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्‍टारलिंक (Starlink) की सेवाएं जल्‍द भारत में शुरू हो सकती हैं। भारत सरकार की ओर से स्‍टारलिंक को जरूरी अनुमत‍ि दी जा चुकी है। नई जानकारी यह है कि स्‍टारलिंक भारत के 9 शहरों में अर्थ स्‍टेशन यानी जमीन पर लगे स्‍टेशन बनाएगी। इन 9 शहरों में मुंबई, नोएडा, लखनऊ, चंडीगढ़ और कोलकाता जैसे शहर शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने Gen 1 सैटेलाइट के लिए 600 जीबीपीएस कैपिसिटी की डिमांड की है। स्‍टारलिंक के पास अलग-अलग जेनरेशन के सैटेलाइट हैं, जिनमें जेन 1 सबसे पुराना बैच है। इस इस पूरे मामले की बारीकियां समझते हैं। क्‍या होते हैं अर्थ स्‍टेशन रिपोर्टों के अनुसार, अर्थ स्‍टेशन जमीन पर बनाए गए ऐसे स्‍टेशन होते हैं, जो अंतरिक्ष से सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा को एकत्र करते हैं। वैसे तो स्‍टारलिंक का इंटरनेट सीधे यूजर के घर या ऑफ‍िस पर आता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अर्थ स्‍टेशनों से भी इंटरनेट को एक जगह से दूसरे जगह पर पहुंचाया जा सकता है। कहा जाता है कि पहले स्‍टारलिंक भारत में अपने अर्थ स्‍टेशन नहीं बनाने वाली थी। सरकार के हस्‍तक्षेप के बाद अर्थ स्‍टेशन भारत में बनाने पर फैसला हुआ। जेनरेशन 1 सैटेलाइट क्‍या हैं जेनरेशन 1 उन सैटेलाइट को कहा जाता है, जिन्‍हें स्‍टारलिंक ने अपने शुरुआती समय में लॉन्‍च किया था। ये भी बाकी सैटेलाइट्स की तरह पृथ्‍वी की निचली कक्षा में चक्‍कर लगाते हैं। यह स्‍टारलिंक के सैटेलाइटों का सबसे पुराना बैच जरूर है, लेकिन सैटेलाइट इंटरनेट देने के लिए पर्याप्‍त है। 100 से ज्‍यादा टर्मिनल को मंजूरी ईटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने स्‍टारलिंक को 100 से ज्‍यादा टर्मिनल आयात करने की अनुमति दे दी है। स्‍टारलिंक की सर्विस शुरू होने से पहले सरकार उसे हर कसौटी पर परख लेना चाहती है। गौरतलब है कि स्‍टारलिंक इस बात पर राजी हो चुकी है कि वह देश के डेटा को देश के बाहर स्‍टोर नहीं करेगी। स्‍टारलिंक से जुड़ी चिंताओं की वजह से ही कंपनी को लाइसेंस मिलने में 5 साल से ज्‍यादा समय लगा है। स्‍टारलिंक के साथ ही एयरटेल के समर्थन वाली वनवेब और जियो एसईएस जैसी कंपनियों को भी देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की मंजूरी दी गई है। कहा जाता है कि अगले साल की शुरुआत में स्‍टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट भारत में शुरू हो सकता है, जिसके बाद लोगों को इंटरनेट का एक नया विकल्‍प मिल जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गाजियाबाद पहुंचेंगी, जानें कौन-कौन से रास्ते रहेंगे बंद

साहिबाबाद रविवार को इंदिरापुरम स्थित यशोदा मेडिसिटी का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी। इस दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य वीवीआइपी शामिल रहेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर रविवार को ट्रांस हिंडन क्षेत्र में विभिन्न मार्गाें पर रूट डायवर्जन रहेगा। यातायात पुलिस ने रूट डायवर्जन का प्लान जारी कर दिया है। डीसीपी यातायात त्रिगुण बिसेन ने बताया कि रूट डायवर्जन सुबह सात बजे से लेकर कार्यक्रम समाप्ति तक रहेगा। इन मार्गाें पर रहेगा रूट डायवर्जन – भोपुरा, तुलसी निकेतन से हिंडन एयरफोर्स गोलचक्कर की तरफ सभी प्रकार के भारी वाणिज्यिक वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद रहेगा। यह वाहन करनगेट गोल चक्कर से बीकानेर गोल चक्कर का प्रयोग कर मोहननगर होते हुए अपने गंतव्य को जायेंगे। – सीआइएसएफ टी-प्वाइंट से वसुंधरा की ओर सभी प्रकार के भारी वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद रहेगा। यह वाहन सीआइएसएफ टी-प्वाइंट से एनएच-9 होते हुए आगे जाएंगे। – वसुंधरा से सीआइएसएफ टी-प्वाइंट की तरफ भी भारी वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। यह सभी वाहन वसुंधरा से डाबर होते हुए यूपी गेट व एनएच-9 की तरफ जाएंगे। – वीवीआइपी कार्यक्रम के चलते वसुंधरा से सीआइएसएफ टी-प्वाइंट तक हल्के व मध्यम वाहनों को आवश्यकता अनुसार रोका जाएगा और संचालन किया जाएगा।  

वैज्ञानिक अध्ययन में आश्चर्यजनक नतीजा, भारतीय पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी बनी स्थिर

मणिपाल पिछले कई सालों से वैश्विक स्तर पर बहुत से लोगों को माता-पिता बनने के लिए परेशान होते देखा गया है. इसकी एक बड़ी वजह पुरुषों में गिरती सीमन क्वालिटी को माना जाता है. वैश्विक स्तर पर कई देशों में सीमन क्वालिटी घट रही है, जिससे फर्टिलिटी यानी बच्चे होने की क्षमता पर असर पड़ रहा है. कमजोर या कम संख्या में स्पर्म होने से महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में परेशानी, आईवीएफ में असफलता और इन्फर्टिलिटी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि सीमन की गिरती क्वालिटी वैश्विक स्तर पर पुरुषों को परेशान कर रही है. हालांकि, दक्षिण भारतीय पुरुषों पर हुई नई स्टडी में बिल्कुल उल्टे नतीजे देखने को मिले हैं.  मणिपाल स्थित कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज द्वारा की गई नई स्टडी में पता चला है कि पिछले 17 सालों में दक्षिण भारतीय पुरुषों में सीमन की क्वालिटी में कोई गिरावट नहीं हुई है. ये दुनिया भर में घटते स्पर्म काउंट की चिंताओं के बीच राहत देने वाली खबर है. इस स्टडी में लगभग 12,000 पुरुषों का डेटा देखा गया. इससे पता चलता है कि भारत में, खासकर दक्षिण में, पुरुषों की फर्टिलिटी अब तक स्टेबल बनी हुई है.   स्टडी में क्या पाया गया? अमेरिकन जर्नल ऑफ मेंस हेल्थ में छपी इस स्टडी में 2006 से 2022 तक के दक्षिण भारतीय पुरुषों के स्पर्म के सैंपल्स टेस्ट किए गए. ये पुरुष कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज की एंड्रोलॉजी लैब में फर्टिलिटी की टेस्टिंग के लिए आए थे. स्टडी में स्पर्म की संख्या, उनकी स्पीड, सर्वाइवल रेट और स्ट्रक्चर जैसे गुणों को देखा गया. इन आंकड़ों पर स्टडी करने के बाद पाया गया कि 17 सालों में स्पर्म क्वालिटी में कोई खास बदलाव नहीं हुआ. इसका मतलब है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में जहां स्पर्म्स की क्वालिटी घटने की चिंता है, उस डर के दायरे से दक्षिण भारतीय पुरुष बाहर हैं. रिसर्च में क्या पाया गया? स्टडी करने वाले सतीश अडिगा ने कहा कि ये दिखाता है कि दक्षिण भारतीय पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी स्टेबल है. उन्होंने ये भी बताया कि पुरुषों में बांझपन बढ़ रहा है, लेकिन इसका कारण स्पर्म क्वालिटी में कमी नहीं, बल्कि अन्य कारण हो सकते हैं. जर्मनी के लेखक स्टीफन श्लाट ने कहा कि ये स्टडी ग्लोबल स्पर्म क्राइसिस के आइडिया को चुनौती देता है. साथ ही, उन्होंने बताया कि पुरुषों की फर्टिलिटी को समझने के लिए क्षेत्रीय आंकड़े बहुत जरूरी हैं.

त्रिनिदाद में राम मंदिर निर्माण की तैयारी, सरकार का भरोसा- पूरा साथ देंगे

त्रिनिदाद  कैरेबियन का एक छोटा-सा देश, समुद्र के बीच बसा हुआ. लेकिन वहां गूंजती है “सिय राममय सब जग जानी…”. बात हो रही है त्रिनिदाद और टोबैगो की. यहां हिंदू आबादी अच्छी-खासी है और भगवान राम के प्रति आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है. इसी आस्था को और मजबूत करने के लिए देश की राजधानी में राम मंदिर बनाने की तैयारी हो रही है. त्रिनिदाद के जन सुविधा मंत्री बैरी पदारथ ने धार्मिक नेताओं के साथ बैठक में यह घोषणा की है कि सरकार इस मंदिर की योजना को पूरा समर्थन देगी. उन्होंने कहा कि  राम लला की पहल का हम स्वागत करते हैं और हम इसका समर्थन करते हैं. उन्होंने ये भी बताया कि दुनिया में जहां-जहां हिंदू संस्कृति बची है, उनमें त्रिनिदाद और टोबैगो की पहचान एक ‘रामायण देश’ के रूप में होती है. पर्यटन और संस्कृति- दोनों को मिलेगा फायदा सरकार इस राम मंदिर को सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि एक पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी देख रही है. यहां होगा पूजा-पाठ, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रम, हिंदू परंपराओं का संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना. सरकार का मानना है कि इससे देश की पहचान और मजबूत होगी और दुनिया भर के श्रद्धालु यहां आएंगे. ‘अयोध्या नगरी’ का भी खास प्रस्ताव न्यूयॉर्क की संस्था ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ राम मंदिर के संस्थापक प्रेम भंडारी ने एक और दिलचस्प प्रस्ताव दिया है कि यहां एक छोटी ‘अयोध्या नगरी’ बनाई जाए. खास तौर पर उन लोगों के लिए जो भारत की अयोध्या नहीं जा पाते. यह प्रस्ताव उन्होंने त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर के सामने रखा है.अभी हाल के महीनें मई 2025 में  त्रिनिदाद-टोबैगो में अयोध्या के राम मंदिर की रामलला प्रतिमा की प्रतिकृति का अनावरण हुआ था. जब वह प्रतिमा पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंची तो 10,000 से ज्यादा भक्तों ने उसका स्वागत किया था. यह बताता है कि यहां भगवान राम लोगों के दिलों में कितने गहरे बसे हुए हैं. भारत से रिश्ते और मोदी का सम्मान इसी साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिनिदाद-टोबैगो की यात्रा पर गए थे. यह उनकी इस देश की पहली आधिकारिक यात्रा थी और 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की वहां पहली द्विपक्षीय यात्रा भी. इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भी मिला था, ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो. प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने यह सम्मान देते हुए मोदी को वैश्विक नेतृत्व, भारतीय प्रवासियों से जुड़े रिश्ते और कोविड-19 के समय मदद के लिए धन्यवाद दिया. सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं इसे 140 करोड़ भारतीयों की ओर से स्वीकार करता हूं. मंत्री बैरी पदारथ ने कहा कि अगले कुछ महीनों में राम मंदिर और हिंदू धार्मिक जीवन से जुड़े और बड़े ऐलान होंगे. सरकार का लक्ष्य साफ है कि त्रिनिदाद-टोबैगो को हिंदू धर्म का मजबूत केंद्र बनाना, धार्मिक पर्यटन बढ़ाना  और भगवान राम की शिक्षा को दुनिया तक फैलाना.

नाबालिग की संपत्ति के सौदे अब व्यस्क होने पर खुद कैंसिल कर सकेंगे, बिना केस दर्ज कराए

नई दिल्ली  देश की सर्वोच्च अदालत ने नाबालिगों से संबंधित संपत्ति के लेन-देन पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है. कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अगर माता-पिता या अभिभावक कोर्ट की परमीशन के बिना किसी नाबालिग की संपत्ति बेच देते हैं तो बालिग होने के बाद वह उस सौदे को कैंसिल कर सकता है. वहीं, कोर्ट ने आगे कहा कि इसके लिए किसी भी तरह का मुकदमा दर्ज करने की जरुरत नहीं होगी. अदालत ने कहा कि व्यवहार से अस्वीकृति भी कानूनी रूप से वैध मानी जाएगी. बता दें, कोर्ट ने 7 अक्टूबर को एक केस का फैसला देते हुए यह कहा कि कोई नाबालिग व्यस्क हो जाता है, तो वह अपने माता-पिता या अभिभावक के संपत्ति के स्वयं बेचना या किसी अन्य को देने वाले फैसले को अस्वीकार कर सकता है. यह फैसला जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने केएस शिवप्पा बनाम श्रीमती के नीलाम्मा मामले में सुनाया. न्यायमूर्ति मिथल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह सुरक्षित रूप से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि नाबालिग के अभिभावक द्वारा निष्पादित शून्यकरणीय लेनदेन को नाबालिग द्वारा वयस्क होने पर समय के भीतर अस्वीकार और नजरअंदाज किया जा सकता है, या तो शून्यकरणीय लेनदेन को रद्द करने के लिए मुकदमा दायर करके या अपने स्पष्ट आचरण से उसे अस्वीकार करके. फैसले में कहा गया कि विवादास्पद प्रश्न यह है कि क्या नाबालिगों के लिए यह आवश्यक है कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर वयस्क होने पर अपने प्राकृतिक अभिभावक द्वारा निष्पादित पूर्व विक्रय विलेख को रद्द करने के लिए वाद दायर करें. इसमें कहा गया कि प्रश्न यह है कि क्या वयस्क होने के तीन वर्ष के भीतर उनके आचरण के माध्यम से इस तरह के विक्रय विलेख को अस्वीकृत किया जा सकता है. प्रश्नों का उत्तर देने के लिए, पीठ ने हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 7 और 8 का हवाला दिया और कहा कि प्रावधानों को सरलता से पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि नाबालिग के प्राकृतिक अभिभावक को बिना अदालत की पूर्व अनुमति के नाबालिग की अचल संपत्ति के किसी भी हिस्से को बंधक रखने, बेचने, उपहार देने या अन्यथा हस्तांतरित करने या यहां तक ​​कि ऐसी संपत्ति के किसी भी हिस्से को पांच साल से अधिक अवधि के लिए या नाबालिग के वयस्क होने की तारीख से एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पट्टे पर देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. इसलिए, अधिनियम की धारा 8 की उपधारा (2) के तहत दिए गए किसी भी तरीके से नाबालिग की संपत्ति हस्तांतरित करने के लिए नाबालिग के अभिभावक के लिए अदालत की पूर्व अनुमति अनिवार्य है. यह विवाद कर्नाटक के दावणगेरे के शामनूर गांव में दो समीपवर्ती भूखंडों – संख्या 56 और 57 – से संबंधित था, जिसे मूल रूप से 1971 में रुद्रप्पा नामक व्यक्ति ने अपने तीन नाबालिग बेटों – महारुद्रप्पा, बसवराज और मुंगेशप्पा के नाम पर खरीदा था. जिला न्यायालय से पूर्व अनुमति लिए बिना, रुद्रप्पा ने ये प्लॉट किसी तीसरे पक्ष को बेच दिए. प्लॉट संख्या 56 एस आई बिदारी को बेचा गया और बाद में 1983 में बी टी जयदेवम्मा ने इसे खरीद लिया. नाबालिगों के वयस्क होने के बाद, उन्होंने और उनकी मां ने 1989 में वही प्लॉट के.एस. शिवप्पा को बेच दिया. जयदेवम्मा की ओर से स्वामित्व का दावा करते हुए केस किया गया सिविल मुकदमा अंततः कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया, जिसने नाबालिगों को अपने स्वयं के बिक्री विलेख के माध्यम से अपने पिता की बिक्री को अस्वीकार करने के अधिकार को बरकरार रखा. ठीक इसी तरह का लेनदेन प्लॉट संख्या 57 के साथ भी हुआ, जिसे रुद्रप्पा ने अदालत की अनुमति के बिना कृष्णोजी राव को बेच दिया, जिन्होंने इसे 1993 में के. नीलाम्मा को बेच दिया. जीवित बचे नाबालिगों ने वयस्क होने पर उसी प्लॉट को केएस शिवप्पा को बेच दिया, जिन्होंने बाद में दोनों प्लॉटों को मिलाकर एक घर बना लिया. इसके बाद नीलाम्मा ने दावणगेरे में अतिरिक्त सिविल जज के समक्ष मामला दायर किया और स्वामित्व का दावा किया. ट्रायल कोर्ट ने उसके मुकदमे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रुद्रप्पा द्वारा की गई बिक्री अमान्य थी और नाबालिगों द्वारा बाद में की गई बिक्री से वैध रूप से अस्वीकृत हो गई. हालांकि, 2005 में प्रथम अपीलीय न्यायालय और 2013 में उच्च न्यायालय ने इस निष्कर्ष को पलट दिया, और कहा कि चूंकि नाबालिगों ने अपने पिता के विक्रय विलेख को रद्द करने के लिए कोई औपचारिक मुकदमा दायर नहीं किया था, इसलिए लेनदेन की पुष्टि हो गई. इसके बाद शिवप्पा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. प्रावधानों का उल्लेख करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि कोई भी प्राकृतिक अभिभावक न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना नाबालिग की अचल संपत्ति को हस्तांतरित नहीं कर सकता है और ऐसा कोई भी लेनदेन नाबालिग के कहने पर शून्यकरणीय है. हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून में यह निर्दिष्ट नहीं किया गया है कि ऐसे शून्यकरणीय लेनदेन को किस प्रकार अस्वीकृत किया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति मिथल ने कहा कि एक नाबालिग, वयस्क होने पर, इस तरह के लेन-देन से बच सकता है या उसे अस्वीकार कर सकता है, या तो बिक्री विलेख को रद्द करने के लिए मुकदमा दायर करके या फिर स्पष्ट और असंदिग्ध आचरण द्वारा, जैसे कि उसी संपत्ति की नई बिक्री को अंजाम देना.