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EPFO Alert: 31 लाख निष्क्रिय PF खातों में ₹9,000 करोड़ जमा, ऐसे करें अपना क्लेम

 नई दिल्ली केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 (EPF Scheme 2026) की अधिसूचना जारी कर दी है और इसके साथ ही ईपीएफओ सदस्यों (EOFO Menbers) के लिए एक नए युग की शुरुआत की है. इस बीच इंडिया टुडे को मिली एक सूचना के अधिकार (RTI) से बपड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल, इससे पता चला है कि देश में ईपीएफओ के तहत 30.91 लाख निष्क्रिय खाते हैं और इनमें 9,330 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लावारिस पड़ी है. ये इतनी बड़ी रकम है कि इससे तीन IIT बन जाएंगे।  इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईपीएफ के निष्क्रिय खातों में जमा बिना दावे वाली जमा रकम को लेकर यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब नई ईपीएफ योजना, 2026 लागू हो रही है, जबकि आधार से जुड़े और हाई वैल्यू वाले अकाउंट्स के बारे में अभी तक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।  29 जून से प्रभावी नई EPF स्कीम गौरतलब है कि नोटिफाई किए जाने के बाद नई EPF Scheme 2026 बीते 29 जून से प्रभावी है, जिसने ईपीएफ योजना, 1952 का स्थान लिया है. नई योजना का उद्देश्य भविष्य निधि नियमों (EPF Rules) को सरल बनाना और संगठन से जड़ी करीब 8 करोड़ सक्रिय ईपीएफओ सदस्यों के लिए सिस्टम को अधिक डिजिटल बनाना है।  RTI में क्या खुलासा हुआ?  आरटीआई में बताए गए आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसमें ईपीएफओ ने बताया है कि बीते 31 मार्च 2026 तक 30,91,862 निष्क्रिय ईपीएफ खाते थे, जिनमें लगभग 9,330 करोड़ रुपये की लावारिस राशि जमा थी. बीते फाइनेंशियल ईयर की तुलना में इस आंकड़े में मामूली सुधार ही देखने को मिला है।  इससे पहले 31 मार्च 2025 को निष्क्रिय पीएफ खातों की संख्या 31.83 लाख थी और ये संख्या 31 मार्च 2026 तक लगभग 92,000 की कमी के साथ घटकर एक साल में 30.91 लाख हो गई है. इसके अलावा इन खातों में जमा बिना दावे वाली लावारिस रकम में 851 करोड़ रुपये की कमी आई है, जो 10,181 करोड़ रुपये से कम होकर 9,330 करोड़ रुपये रह गई।  EPF निष्क्रिय खातों में पड़े 9,330 करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा 2016 में शुरू की गई उड़ान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना पर हुए खर्च करीब 10,169 करोड़ रुपये के बराबर हैं. इसके अलावा बिना दावे वाला ये पैसा केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के लिए 2026-27 में आवंटित राशि के भी लगभग बराबर है।  तीन IIT खड़े हो जाएंगे इतनी रकम में  रिपोर्ट में साल 2014 के सरकारी अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि उस समय देश में एक आईआईटी की स्थापना की लागत करीब 1,750 करोड़ रुपये थी. वहीं महंगाई को ध्यान में रखकर देखें, तो साल 2026 में ये लागत करीब 2,934 करोड़ रुपये हो जाती है. इस हिसाब से देखें, तो निष्क्रिय पीएफ खातों में जमा बिना दावे वाली रकम में भारत में 3 आईआईटी खड़े हो सकते हैं. इसके बाद भी करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा बच जाएंगे।  RTI में मांगी गई थी ये डिटेल  EPFO के तहत निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या को लेकर इंडिया टुडे ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों के लिए ऐसे खातों और इनमें जमा रकम की सालाना डिटेल मांगी थी. ईपीएफओ की ओर से कहा गया कि वह सिर्फ 2025-2026 की जानकारी ही शेयर कर सकता है. इसके पीछे का कारण बताते हुए संगठन ने कहा कि निष्क्रिय लेखा प्रकोष्ठ (IAC) की स्थापना 2025-26 के दौरान की गई थी और इसके द्वारा पिछले वर्षों की जानकारी नहीं रखी जाती है।  RTI आवेदन में आधार से जुड़े निष्क्रिय खातों का विवरण और इनमें जमा राशि के अलावा ऑटो-सेटलमेंट की जानकारी भी मांगी गई थी. लेकिन ईपीएफओ ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ई) का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया है. वहीं हाई वैल्यू (5 लाख रुपये से अधिक राशि) वाले निष्क्रिय खातों का भी कोई डेटा मुहैया नहीं कराया गया है। 

समुद्री कटाव से दहला ओडिशा: गंजाम के 17 गांवों का अस्तित्व खतरे में, हजारों परिवार दहशत में

भुवनेश्वर ओडिशा के गंजाम जिले में समुद्री कटाव ने विकराल रूप धारण कर लिया है। समुद्र के लगातार आगे बढ़ने से गंजाम ब्लॉक के पोड़मपेटा गांव समेत दो ग्राम पंचायतों के 17 गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। शुक्रवार को एक पक्का मकान समुद्र में समा जाने की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक समुद्र गांव से करीब एक किलोमीटर दूर था, लेकिन लगातार कटाव के कारण अब वह गांव की सीमा तक पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि पोड़मपेटा का बड़ा हिस्सा समुद्र में विलीन हो चुका है। कभी करीब 500 घरों वाला यह गांव अब कुछ गिने-चुने मकानों तक सिमट गया है। रोज निगल रहा जमीन स्थानीय लोगों का कहना है कि समुद्र प्रतिदिन कुछ न कुछ जमीन अपने आगोश में ले रहा है। कटाव वाले क्षेत्र से अधिकांश परिवार पलायन कर चुके हैं, लेकिन शेष भूमि भी तेजी से खत्म होती जा रही है। इससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। 17 गांवों पर संकट स्थानीय सर्वेक्षण के मुताबिक पालिबंधा ग्राम पंचायत के नौ और रामगड़ा ग्राम पंचायत के आठ गांव समुद्री कटाव की जद में हैं। इन गांवों के हजारों लोगों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार से तट सुरक्षा दीवार, बोल्डर पैकिंग और अन्य स्थायी उपाय करने की मांग की है। आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की चेतावनी प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। प्रभावित गांवों के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन शुरू करेंगे और आगामी चुनावों का बहिष्कार भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री को लिखा पत्र छत्रपुर विधायक कृष्ण चंद्र नायक ने मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रभावित गांवों को बचाने के लिए तत्काल विशेष पैकेज, तकनीकी सहायता और स्थायी तटीय सुरक्षा परियोजनाएं शुरू करने का आग्रह किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में कई गांवों का नामोनिशान मिट सकता है। समुद्र का बढ़ता कहर अब गंजाम तट के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

क्या अमेरिकी सेना बन रही है पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा? डॉक्युमेंट्री में पेंटागन को लेकर बड़ा दावा

वाशिंगटन  वैश्विक पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर अक्सर बड़े-बड़े देशों और औद्योगिक घरानों को कटघरे में खड़ा किया जाता है. लेकिन दुनिया में एक ऐसा महा-प्रदूषक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधियों में ‘फ्री पास’ यानी पूरी छूट मिली हुई है. प्रसिद्ध खोजी पत्रकार एबी मार्टिन (Abby Martin) की नयी खोजी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘अर्थ्स ग्रेटेस्ट एनिमी’ (Earth’s Greatest Enemy) ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. 120 मिनट की फिल्म ने पुख्ता सबूतों और अविश्वसनीय आंकड़ों के साथ साबित किया है कि अमेरिकी सेना (US Military) और उसका रक्षा मुख्यालय पेंटागन वैश्विक जलवायु संकट को बढ़ाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा संस्थागत प्रदूषक है।  140 देशों के कुल उत्सर्जन से भी अधिक कार्बन फैलाता है पेंटागन लॉरा पोलक (Laura Pollock) की ओर से की गयी फिल्म की समीक्षा के अनुसार, इस डॉक्युमेंट्री में अमेरिकी रक्षा विभाग और उसकी नौसेना एवं वायुसेना के प्रदूषण फैलाने संबंधी जो आंकड़े पेश किये गये हैं, वे चौंकाने वाले हैं।      विमानों का ईंधन ईकोसाइड : फिल्म में पत्रकार एबी मार्टिन बताती हैं कि औसत अमेरिकी नागरिक अपने पूरे जीवनकाल में (लगभग 40 वर्ष) जितना ईंधन का इस्तेमाल करता है, बोइंग पेगासस (Boeing Pegasus) जैसे अमेरिकी सैन्य टैंकर की सिर्फ एक उड़ान में उतना ईंधन खत्म हो जाता है. अमेरिका ऐसे 600 से अधिक उड़ान टैंकर हवा में उड़ाता है।      140 देशों से भी बड़ा प्रदूषक पेंटागन : अमेरिकी सेना का कुल कार्बन उत्सर्जन दुनिया के 140 देशों के संयुक्त उत्सर्जन से भी कहीं अधिक है. इसके बावजूद वैश्विक जलवायु सम्मेलनों (जैसे COP26) में सैन्य उत्सर्जन के इन आंकड़ों को छिपा लिया जाता है।      लाखों समुद्री जीवों का कत्लेआम : एक डरावना आंकड़ा यह भी है कि अमेरिकी नौसेना (US Navy) को अपने 5 साल के युद्धाभ्यास और परीक्षणों के दौरान 2.6 मिलियन (26 लाख) से अधिक समुद्री स्तनधारी जीवों (Marine Mammals) को नुकसान पहुंचाने या उन्हें मार डालने की कानूनी छूट मिली हुई है. इतना ही नहीं, इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान छोड़े गये 2.5 लाख से अधिक गोले और प्रदूषण ने वहां की भूमि को स्थायी रूप से बंजर बना दिया है।  जहां-जहां अमेरिकी बेस, वहां-वहां ‘जहरीली मौत’ खोजी पत्रकार एबी मार्टिन और उनके पति माइक प्रिसनर ने इस सच्चाई को उजागर करने के लिए पूरी दुनिया का दौरा किया. वे ग्लासगो (स्कॉटलैंड) से लेकर अलास्का, हवाई और जापान के ओकिनावा द्वीप तक गये. कैंप लेज्यून और कोरल रीफ को कैसे नुकसान पहुंचा है, यहां जानें।  डॉक्युमेंट्री का संदेश : एक साथ कई मोर्चे पर संघर्ष कर रही है हमारी प्रकृति।  Earths Greatest Enemy: उत्तरी कैरोलिना के कैंप लेज्यून का सच उत्तरी कैरोलिना के ‘कैंप लेज्यून’ में अमेरिकी सेना के ही घरेलू बेस से हुए ईंधन रिसाव, जहरीले कचरे और औद्योगिक अपशिष्टों के कारण स्थानीय अमेरिकी बस्तियों के पानी में जहर घुल गया. फिल्म में उन माताओं का रुदन दिखाया गया है, जिन्होंने इस दूषित पानी के कारण अपने बच्चों को खो दिया।  हवाई और ओकिनावा में कोरल रीफ का विनाश हवाई और ओकिनावा (जापान) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के निर्माण के लिए पहाड़ों को डायनामाइट से उड़ाया जा रहा है. उसके मलबे को समुद्र में फेंककर दुर्लभ कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) को हमेशा के लिए दफन किया जा रहा है. जब पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कायक (नावों) के जरिये समुद्र में इसका विरोध किया, तो अमेरिकी स्पीडबोट्स ने उनकी नावें पलट दीं और उन्हें हिरासत में ले लिया।  अमेरिकी नेताओं का पाखंड डॉक्युमेंट्री में अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के पाखंड पर भी तीखा प्रहार किया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि एक तरफ तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी और प्रगतिशील प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसी नेता लाइव स्ट्रीम पर कॉप-26 (COP26) के लक्ष्यों को ‘ऐतिहासिक’ बताती हैं, लेकिन जब उनसे सवाल पूछा जाता है कि नेट-जीरो (Net-Zero) के दावों के बीच पेंटागन का बजट और सैन्य खर्च लगातार क्यों बढ़ाया जा रहा है, तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता।  अमेरिकी पाखंड का सबसे अचूक और प्रामाणिक दस्तावेज यह फिल्म सीधे तौर पर व्हाइट हाउस और पेंटागन को कटघरे में खड़ा करती है, जो आम जनता को पर्यावरण बचाने के लिए ‘प्लास्टिक स्ट्रॉ’ छोड़ने और ‘इलेक्ट्रिक कारें’ खरीदने का उपदेश देते हैं, लेकिन खुद खरबों गैलन कच्चा तेल फूंकने वाली अपनी युद्ध मशीनरी के प्रदूषण को आधिकारिक रिकॉर्ड की किताबों से ही गायब रखते हैं. यह डॉक्युमेंट्री पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पूंजीवादी ताकतों द्वारा चलाये जा रहे इस सबसे बड़े पाखंड का एक अचूक और प्रामाणिक दस्तावेज है। 

केतन मर्डर केस के बीच पुरुष आयोग की मांग फिर गरमाई, BJP सांसद बोले- पुरुषों के अधिकारों पर भी हो ध्यान

नई दिल्ली पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने समाज में एक नई बहस छेड़ दी है। मंगेतर सिया गोयल की बेवफाई और हत्या की खौफनाक साजिश सामने आने के बाद अब पुरुषों के अधिकारों और उनकी कानूनी सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। इसी कड़ी में भाजपा राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल ने इस घटना को बेहद विचलित करने वाला बताते हुए देश में 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' बनाने की पुरजोर मांग उठाई है। इस मामले में 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन को गिरफ्तार किया गया है। सांसद ने शेयर किया अपना पुराना प्राइवेट बिल सांसद मित्तल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया। यह वीडियो दिसंबर 2025 की राज्यसभा कार्यवाही का है, जब उन्होंने पुरुष आयोग बनाने के लिए संसद में एक 'प्राइवेट मेंबर बिल' पेश किया था। मित्तल ने एक्स पर लिखा, "पुणे का केतन अग्रवाल मामला बहुत परेशान करने वाला है। केतन और उनके परिवार को निष्पक्ष, पूरी और बिना किसी भेदभाव के जांच मिलनी चाहिए, और सबसे बढ़कर, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। मैंने संसद में 'नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल' पेश किया था। हर पीड़ित को न्याय, मदद और कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। केतन का मामला यह याद दिलाता है कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं। उन्हें संस्थागत मदद, कानूनी सुरक्षा और एक ऐसा मंच मिलना चाहिए जहां उनकी बात सुनी जा सके। लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना, न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए।" बता दें कि अशोक कुमार मित्तल पंजाब से सांसद चुने गए थे। जब उन्होंने यह बिल पेश किया था, तब वे आम आदमी पार्टी (AAP) का हिस्सा थे। हालांकि, इसी साल अप्रैल में राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले 7 AAP सांसदों के गुट के हिस्से के रूप में उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का दावा किया था। क्या है प्राइवेट मेंबर बिल का इतिहास? संसद में किसी भी प्राइवेट मेंबर बिल के पास होने की संभावना बहुत कम होती है और यह मुश्किल से ही कभी वोटिंग के चरण तक पहुंच पाता है। इतिहास पर नजर डालें तो आजादी के बाद से अब तक सिर्फ 14 प्राइवेट बिल ही कानून का रूप ले पाए हैं। वहीं, साल 1970 के बाद से कोई भी ऐसा बिल संसद के दोनों सदनों से पास नहीं हो सका है। केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब तक क्या-क्या हुआ? पुणे के इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी अहम बातें इस प्रकार हैं। 26 वर्षीय पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी 20 वर्षीय मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी (22) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। 3 जुलाई को पुणे की एक अदालत ने दोनों मुख्य आरोपियों को 16 जुलाई तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है। लोनावला ग्रामीण पुलिस ने आरोपियों की पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। पुलिस दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ (लाई-डिटेक्टर) टेस्ट कराना चाहती थी, लेकिन दोनों आरोपियों के आधिकारिक रूप से इनकार करने के बाद कोर्ट ने इस अर्जी को भी नामंजूर कर दिया है।

Parliament Monsoon Session 2026: 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र, सरकार ने किया ऐलान

नई दिल्ली  संसद का आगामी मानसून सत्र 2026 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। भारत सरकार की सिफारिश पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने दोनों सदनों की बैठक बुलाने की अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात की पुष्टि की है कि सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति जी ने मानसून सत्र के आयोजन को मंजूरी दी है। संसद का यह आगामी सत्र 20 जुलाई 2026 को शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस अवधि के दौरान दोनों सदनों में राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न अहम मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा की जाएगी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। इस मानसून सत्र की शुरुआत बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत के बाद हो रही है। इस सत्र में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई बगावत का असर भी देखने को मिलेगा। तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की अलग समूह के तौर पर मान्यता की मांग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले का इंतजार है। राज्यसभा में नए चुने गए और दोबारा चुने गए सदस्यों के शपथ लेने के बाद संख्या बल सत्ताधारी गठबंधन राजग के पक्ष में और मजबूत हो गया।पिछला सत्र सरकार के लिए निराशाजनक रहा था क्योंकि लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिर गया था, जिसका मकसद 2029 में विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना था। सरकार अब विधेयक का नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसके तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों को एकसमान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। दरअसल, आबादी के आधार पर सीटों में बढ़ोतरी दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक दलों के लिए चिंता का बड़ा विषय रहा है।

केतन मर्डर केस में बड़ा खुलासा! सिया गोयल के Snapchat चैट ने बदली जांच की दिशा

 पुणे केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस के हाथ एक बेहद चौंकाने वाला सुराग लगा है, जिसने इस पूरी मर्डर मिस्ट्री में एक नया ट्विस्ट ला दिया है. पुलिस की जांच टीम अब आरोपी सिया गोयल के एक कथित स्नैपचैट चैट को खंगाल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि हत्या की इस पूरी वारदात को एक गहरी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था।  ताजा जानकारी के मुताबिक, यह कथित बातचीत 25 मई की है. इस चैट में आरोपी सिया गोयल कथित तौर पर अपनी दोस्त से फ्लाइट टिकट बुक करने के बहाने उसका आधार कार्ड मांगती है। सिया ने हिंदी में लिखा, "आधार कार्ड फ्रंट और बैक भेज दे फॉर वेडिंग टिकिट्स, जो होने नहीं वाली पर फिर भी भेज दे।  जांच अधिकारी अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या यह पूरी बातचीत और हवाई टिकटों की बुकिंग केवल एक दिखावा थी। ऐसा संदेह है कि इस कथित चैट और टिकट अरेंजमेंट्स के जरिए सिया यह दिखाना चाहती थी कि केतन अग्रवाल के साथ उसकी शादी की तैयारियां बिल्कुल सामान्य रूप से चल रही हैं, ताकि केतन की हत्या के बाद किसी को उस पर शक न हो. यह पूरी कवायद मर्डर प्लॉट को छिपाने और जांच भटकाने की एक बड़ी कोशिश हो सकती है।  जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसी भी डिजिटल चैट की कानूनी वैधता उसकी तकनीकी और फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी. इसलिए फिलहाल इस चैट को अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता।  केतन के परिवार का आरोप केतन के पिता, विशाल देवीचंद अग्रवाल की तरफ़ से दर्ज FIR में आरोप लगाया गया है कि चेतन और सिया, दोनों ने मिलकर उनके बेटे को एक चट्टान से नीचे धकेल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. केतन 18 जून की सुबह घर से निकला, पुणे-मुंबई हाईवे पर किवाले ब्रिज से सिया को साथ लिया और फिर लोहागढ़ फोर्ट की ओर गया।  उसी दिन दोपहर से पहले सिया गोयल ने अपने चेतन की मां को फ़ोन करके बताया कि वह गलती से लोहागढ़ किले की एक खाई में गिर गया है. स्थानीय लोगों और पुलिस ने उसे खाई में पाया और अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. FIR के अनुसार, 21 जून को केतन अग्रवाल के पिता और रिश्तेदार उस जगह पर गए जहां वह गिरा था और उन्हें लगा कि उस जगह पर गलती से फिसलने की संभावना बहुत कम थी. परिवार ने आरोप लगाया कि सिया गोयल का फ़ोन लगातार व्यस्त रहता था और वह अक्सर अपने प्रेमी चेतन का ज़िक्र करती थी, जिससे उन्हें शक हुआ कि दोनों के बीच रोमांटिक रिश्ता था। 

कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा जारी, 4,812 तीर्थयात्रियों का तीसरा जत्था जम्मू से हुआ रवाना

जम्मू जम्मू-कश्मीर में जम्मू यात्री निवास आधार शिविर से श्री अमरनाथ यात्रा के लिए 4812 तीर्थयात्रियों का तीसरा जत्था शनिवार को 'बम बम भोले' के जयकारों के बीच पवित्र गुफा मंदिर के लिए रवाना हुआ।अधिकारियों के अनुसार, 2041 तीर्थयात्री बालटाल के लिए रवाना हुए, जबकि2771 तीर्थयात्री बसों और निजी वाहनों के काफिले में पहलगाम मार्ग से यात्रा करने के लिए निकले। यात्रा का काफिला कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुआ। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को आधार शिविर से तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को श्री अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया। इसमें कहा गया है कि वार्षिक यात्रा के लिए पहले से पंजीकरण कराना अनिवार्य है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इस रास्ते पर प्रतिदिन जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित कर दी गयी है। बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन कर लौटे श्रद्धालु उधर, वार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा 2026 शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बालटाल और पहलगाम, दोनों मुख्य मार्गों से हर्षोल्लास के साथ शुरू हुई। बालटाल मार्ग से सुबह रवाना हुए पहले जत्थे के कई श्रद्धालु बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन कर बेहद खुशी-खुशी लौट आए। पवित्र गुफा के दर्शन कर लौटे श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और आस्था की अलग ही झलक दिखाई दी। उन्होंने कहा कि दिव्य दर्शनों से अद्भुत आनंद मिला है। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस वर्ष पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी अपने पूर्ण आकार में विराजमान हैं। पहले दिन दर्शन करने वाले यात्रियों ने खुद को बहुत ही सौभाग्यशाली बताया। उनका कहना है कि उन्हें पहली आरती और प्रथम पूजा के दौरान बाबा बर्फानी के दिव्य स्वरूप के दर्शन का अवसर मिला। उनका कहना है कि यात्रा मार्ग पर मौसम ने थोड़ी परीक्षा जरूर ली लेकिन भोलेनाथ की भक्ति के आगे सारी मुश्किलें आसान हो गईं। उन्होंने कहा कि दर्शन कर जत्थे का हर सदस्य भगवान शिव के रंग में रंग गया। पवित्र शिवलिंग के दर्शन कर अद्भुत आनंद मिला : पंकज पहले जत्थे में शामिल श्रद्धालु पंकज सावंत ने बताया कि वे सुबह करीब पांच बजे दर्शन के लिए निकले। यात्रा के दौरान तेज बारिश और घने कोहरे के कारण चढ़ाई कठिन रही लेकिन बाबा भोलेनाथ की कृपा से सभी बाधाएं आसान लगने लगीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब नौ बजे जब वे पवित्र गुफा पहुंचे, तब वहां केवल सात-आठ श्रद्धालु ही मौजूद थे। भीड़ कम होने के कारण उन्हें पांच से दस मिनट तक शांतिपूर्वक पवित्र शिवलिंग के दर्शन और ध्यान का अवसर मिला। वहां का नजारा अद्भुत था, जिससे आत्मिक आनंद मिला।  

पाकिस्तान में विदेशी महिलाओं से गैंगरेप से मचा बवाल, इशाक डार के करीबी पर गंभीर आरोप

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के लाहौर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दो विदेशी महिलाओं के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण के मामले में पुलिस ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) का एक बेहद करीबी रिश्तेदार भी शामिल है। इसे मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। लाहौर की एक अदालत ने शुक्रवार को चारों आरोपियों मोहम्मद रजा डार, हसन रजा, सिकंदर खान और साजिद अली को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इनमें से मुख्य आरोपी मोहम्मद रजा डार डिप्टी पीएम इशाक डार का करीबी रिश्तेदार है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया, "चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें देश के उप-प्रधानमंत्री इसहाक डार का करीबी रिश्तेदार शामिल है, इसलिए पुलिस इस हाई-प्रोफाइल केस की हर पहलू से बेहद बारीकी और गंभीरता से जांच कर रही है।" पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महिलाएं नीदरलैंड और वेनेजुएला की नागरिक हैं। 29 जून को लाहौर पहुंचने पर पांच लोगों ने कथित तौर पर उनका अपहरण कर लिया था और फिर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। स्पेन से आए एक फोन कॉल के बाद बची जान इस खौफनाक वारदात का शिकार हुईं महिलाओं की जान तब बची जब पुलिस को स्पेन से एक आपातकालीन फोन कॉल आया। दरअसल, पीड़ितों में से एक महिला के पिता ने स्पेन से पाकिस्तानी अधिकारियों को संपर्क कर अपनी बेटी की जान खतरे में होने की जानकारी दी। इस अंतरराष्ट्रीय इनपुट के तुरंत बाद हरकत में आई लाहौर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस ठिकाने पर छापेमारी की और दोनों विदेशी महिलाओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया। लाहौर पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में पांच संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 365A (अपहरण) और 375A (सामूहिक दुष्कर्म) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को दबोच लिया है, जबकि पांचवां आरोपी अभी भी फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। बिजनेस पार्टनर हैं आरोपी और पीड़ित महिलाएं एक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महिलाओं और मुख्य आरोपी मोहम्मद रजा डार के बीच पहले से ही व्यावसायिक संबंध थे। महिलाओं ने पुलिस को बताया कि वे अक्टूबर 2025 में सिंगापुर में रजा डार से मिली थीं। दोनों महिलाएं और रजा डार एक क्रिप्टोकरेंसी वेंचर में बिजनेस पार्टनर थे। इसी व्यापारिक सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए रजा डार ने महिलाओं को पाकिस्तान आने का न्योता दिया और उनके लिए बिजनेस वीजा का प्रबंध भी किया। आमंत्रण पर दोनों महिलाएं 29 जून को लाहौर पहुंची थीं। एक पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि लाहौर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद रजा डार और उसके साथी उन्हें रिसीव करने आए। लेकिन वे उन्हें होटल ले जाने के बजाय जबरन एक अज्ञात घर में ले गए। वहां आरोपियों ने बंधक बनाकर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उनकी रिहाई के बदले मोटी फिरौती की मांग की। अदालत के एक अधिकारी के मुताबिक, जब शुक्रवार को चारों आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो पीड़ितों ने रजा डार की पहचान मुख्य साजिशकर्ता के रूप में की है।  

बलूचिस्तान फिर दहला! ग्वादर में BLA के फिदायीन हमले से 30+ पाक सैनिकों की मौत का दावा

बलूचिस्तान पाकिस्तान में बीएलए यानी बलूच लिबरेशन आर्मी ने कोहराम मचा दिया है. बलूचिस्तान के ग्वादर में बीएलए ने पाकिस्तानी सैनिकों की लाशें बिछाकर गदर काट दी है. जी हां, बलूचिस्तान के ग्वादर में फिदायीन हमला कर बीएलए ने पाकिस्तान के 30 से अधिक सैनिकों को मार डाला. ग्वादर के जिवानी इलाके के पनवान में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप पर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है. गौरतलब है कि बलूच लिबरेशन आर्मी को पाकिस्तान ने बैन कर रखा है. समय-समय पर बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान को घाव देता रहता है. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है।  बीएलए ने अटैक कर पाकिस्तान को दिया गहरा जख्म ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि इस हमले में 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान का अलगाववादी समूह है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार इसे एक आतंकी संगठन मानती है. इसे बैन कर रखा है. जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी का दावा है कि वह बलूचिस्तान को आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहा है. उसका कहना है कि बलूचिस्तान का हक मारा जा रहा है. पाकिस्तानी हुकूमत बलूचिस्तान के साथ सौतेला व्यवहार करती है. पाकिस्तानी सरकार यहां के खजाने को लूटती है, मगर उस लिहाज से इस इलाके का विकास नहीं करती।  ग्वादर में कब और कैसे हुआ अटैक बहरहाल, ग्वादर में यह हमला शुक्रवार शाम को हुआ. इस अटैक को बलूच लिबरेशन आर्मी की खास ‘मजीद ब्रिगेड’ ने अंजाम दिया.  बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि अताउल्लाह बलूच उर्फ अजमल नाम के एक आत्मघाती हमलावर ने शाम करीब 6:32 बजे (स्थानीय समय) विस्फोटकों से लदे ट्रक को कोस्ट गार्ड के कड़ी सुरक्षा वाले कैंप में घुसा दिया, जिससे जबरदस्त धमाका हुआ. इस अटैक में कैंप पूरी तरह मलबे के ढेर में बदल गया।  बीएलए ने वीडियो में दिखाया सबूत बलूच लिबरेशन आर्मी के मीडिया विंग ‘हक्कल’ ने 43 सेकंड का एक वीडियो भी जारी किया. इस वीडियो में साफ दिख रहा था कि धमाके से ठीक पहले विस्फोटकों से भरा ट्रक कैंप में घुस रहा था. बलूच लिबरेशन आर्मीने कहा कि बाद के फुटेज में मिलिट्री कैंप का एक बड़ा हिस्सा तबाह हुआ दिखाई दिया. इतना ही नहीं, ट्रक बम धमाके के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी के ‘फतेह स्क्वाड’ ने ज़मीन से एक साथ हमला किया. बलूच लिबरेशन आर्मी के मुताबिक, इसके बाद उसके लड़ाकों ने बचे हुए कोस्ट गार्ड कर्मियों से आमने-सामने की लड़ाई लड़ी और ऑपरेशन के दौरान 30 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया। 

कश्मीर की पाठ्यसामग्री पर बवाल: बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा? मकबूल भट्ट और अलगाववादियों के महिमामंडन का दावा

जम्मू  आतंकवाद और अलगाववाद के अंधकार से दूर हो रहे जम्मू-कश्मीर की नई पीढ़ी को फिर से आतंक का पाठ पढ़ाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर समग्र शिक्षा नीति के तहत स्कूलों को ऐसी किताबें भेजी गई है कि जिसमें आतंकी मकबूल बट को शहीद और अलगाववादियों को स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए महिमामंडन किया गया है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने इस किताब को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और पुस्तक खरीद में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजी गई "जम्मू-कश्मीर की महान व दिग्गज हस्तियां" नामक इस पुस्तक को एक निजी प्रकाशक ओबराय बुकस सर्विस की ओर से प्रकाशित किया गया है और इसे हिलाल अहमद व संतोष मीणा द्वारा लिखा गया है। सैयद अलगी, शब्बीद सहित कई अलगाववादियों का जिक्र शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर पुस्तक को सार्वजनिक करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और इस पुस्तक की खरीद करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। फोरम के उप-प्रधान रघु मेहता व ट्रस्टी दीपक कपूर ने बताया कि पुस्तक में आतंकी मकबूल भट्ट को शहीद-ए-आजम बताया है और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम व मौलवी फारूक को कश्मीर का स्वतंत्रता सेनानी। प्रदेश सरकार ने समग्र शिक्षा योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए इस पुस्तक की खरीद की और प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पुस्तक उपलब्ध कराई गई। कपूर ने बताया कि पुस्तक में मकबूल बट पर अध्याय है। इसमें भारत को आक्रांता दिखाया है और बताया है मकबूल ने कश्मीर की आजादी के लिए बलिदान दे दिया। 1984 में दी गई थी फांसी मकबूल को सीआइडी इंस्पेक्टर अमर चंद व भारतीय राजदूत की हत्या के आरोप में 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी। पुस्तक में कुछ अन्य अध्यायों में सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह, मसरत आलम, मीरवाइज उमर फारूक व मौलवी फारूक को कश्मीर का स्वतंत्रता सेनानी करार दिया गया है।