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अटल पेंशन योजना को बड़ा झटका? RTI रिपोर्ट में सामने आया 1.49 करोड़ एग्जिट का आंकड़ा

नई दिल्ली सरकारी पेंशन स्कीम 'अटल पेंशन योजना' की खूब चर्चा होती है. अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. दरअसल, देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कीम की शुरुआत की गई है. RTI के जरिये APY को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।   सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में पता चला है कि साल 2015 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 1.49 करोड़ लोग इस स्कीम से बाहर हो चुके हैं. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के आंकड़ों के मुताबिक योजना में हर साल रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं. लेकिन साथ ही समय से पहले खाता बंद करने या मृत्यु के कारण स्कीम से बाहर होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।  RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल रजिस्ट्रेशन 8.96 करोड़ तक पहुंच चुका था. लेकिन इनमें से केवल 7.45 करोड़ सब्सक्राइबर ही फिलहाल एक्टिव हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बहुत बड़ा हिस्सा अब इस योजना का सक्रिय रूप से लाभ नहीं उठा रहा है।  साल-दर-साल बढ़ता एग्जिट का ग्राफ योजना के शुरुआती साल 2015-16 के दौरान केवल 2 लोगों ने स्कीम छोड़ी थी. लेकिन हालिया वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा सालाना 30.24 लाख से अधिक को पार कर गया. एक तरफ जहां एग्जिट करने वालों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ नए रजिस्ट्रेशन के मामले में योजना ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ से अधिक नए सब्सक्राइबर्स इस योजना से जुड़े, जो इसके लॉन्च के बाद से किसी भी एक साल में सबसे बड़ी संख्या है।  जब RTI के जरिए यह पूछा गया कि कितने सब्सक्राइबर्स ने रजिस्ट्रेशन के 1 साल, 3 साल या 5 साल के भीतर योगदान देना बंद कर दिया, तो PFRDA ने साफ कर दिया कि अटल पेंशन योजना के तहत 'डिसकंटिन्यूएशन' जैसी कोई अवधारणा नहीं है. इसलिए अगर किसी कारणवश कोई सब्सक्राइबर योगदान देना बंद कर देता है, तो वह बाद में बकाया ब्याज और देरी से किए गए योगदान का भुगतान करके अपने खाते को फिर से चालू कर सकता है।  क्या है अटल पेंशन योजना? अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, मजदूर, कारपेंटर, घरेलू सहायक   के लिए की गई थी. इसके तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं. 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सब्सक्राइबर्स को उनके योगदान के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मिलती है। 

रक्षा सौदे में नया मोड़: भारत के रुख से फ्रांस को लग सकता है झटका, मित्र देश ने दिया नया ऑफर

नई दिल्ली भारत फाइटर जेट स्क्वाड्रन की घटती संख्या को मेंटेन करने के लिए फ्रांस के साथ 114 राफेल जेट की डील पर बातचीत कर रहा है. यह करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील है. इसको लेकर इंडियन एयर फोर्स चीफ एपी सिंह एक दिन पहले तक फ्रांस में थे. लेकिन, अभी तक इस डील का सबसे बड़ा पेच नहीं सुलझा है. भारत चाहता है कि फ्रांस इस जेट का सोर्स कोड नहीं तो कम से कम इंटरफेस डॉक्यूमेंट साझा करे जिससे कि भारत इस जेट में देसी ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलें लगा सके. लेकिन, फ्रांस इंटरफेस डॉक्यूमेंट भी नहीं देना चाहता है. उसकी चिंता है कि अगर वह भारत के साथ यह डॉक्यूमेंट साझा करेगा तो उसकी पूरी गोपनीयता भारत के हाथ लग जाएगी. फिर ये गोपनीय जानकारी भारत के जरिए उसके दुश्मन देश यानी रूस तक पहुंच जाएगी. इसी कारण वह फिलहाल राफेल का इंटरफेस डॉक्यूमेंट नहीं देना चाहता है।  भारत के लिए सुखद ऑफर इस बीच भारत के लिए एक सुखद खबर आई है. राफेल को लेकर बनी भ्रम की स्थिति के बीच पुराने दोस्त रूस ने बड़ा ऑफर दिया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद एक बड़ी पेशकश कर दी है. उन्होंने इंटरनेशनल प्रेस मीट में कहा कि रूस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 से लेकर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम तक हर स्तर पर भारत का सहयोग करने के लिए तैयार है. पुतिन का स्पष्ट रूप से यह कहना दुनिया खासकर फ्रांस के लिए एक बड़ा संदेश है. भारत रूस से एसयू-57 खरीदने की भी योजना पर काम कर रहा है. ऐसे में भारत कितनी संख्या में यह जेट खरीदेगा यह काफी हद तक राफेल डील पर निर्भर करेगा।  दरअसल, एसयू-57 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है. अभी तक दुनिया में केवल तीन देश ही पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें एक अमेरिका, दूसरा चीन और तीसरा देश रूस है. हालांकि रूसी पांचवीं पीढ़ी के जेट एसयू-57 को लेकर एक्सपर्ट कई सवाल भी उठाते रहे हैं लेकिन, रूस की ओर से पूरा सोर्स कोड़ साझा करने, भारत में इस जेट को बनाने और भारत की जरूरत के हिसाब से इस जेट में बदलाव करने जैसे ऑफर को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता है. सामरिक मामलों के एक्सपर्ट यहां तक कह रहे हैं कि भारत की योजना राफेल के साथ-साथ सुखोई-57 के कम से कम तीन स्क्वाड्रन लेने की है. इससे भारत पांचवीं पीढ़ी की अपनी तात्कालिक जरूरत को पूरा कर लेगा. इसके बाद 2035 तक भारत का अपना 5+ पीढ़ी का जेट एम्का तैयार हो जाएगा. भारत एम्का प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है।  फ्रांस को संदेश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ऑफर भारत के नजरिए से काफी अहम है. पुतिन इंटरनेशनल प्रेस के सामने यह बात कही है. ऐसे में पुतिन का यह बयान काफी कुछ कहता है. इसमें यह संदेश छिपा है कि अगर फ्रांस भारत के साथ इंटरफेर डॉक्यूमेंट नहीं साझा करता है तो भारत के विकल्प खुले हैं. भारत पहले ही से रूस का एक बड़ा सैन्य पार्टनर रहा है. इस वक्त भी भारतीय एयरफोर्स की रीढ़ सुखोई-30 एमके जेट हैं. ये चौथी पीढ़ी के जेट हैं और भारत के पास इसके 250 से अधिक यूनिट हैं. इनको भारत में ही असेंबल किया गया है. रूस ने सुखोई-30एमकेई के प्लांट में ही सुखोई-57 को असेंबल करने का ऑफर दिया है. इससे भारत के लिए खर्च में काफी कमी आ जाएगी. इसके साथ ही रूसी विमानों में किसी भी भारतीय मिसाइल को जोड़ना आसान रहेगा. ऐसे में पुतिन का संदेश केवल भारत के लिए नहीं है बल्कि फ्रांस के लिए भी है। 

EPF का ब्याज कब आएगा खाते में? लाखों कर्मचारियों के लिए अहम अपडेट

 नई दिल्‍ली देश के करोड़ों ईपीएफ सदस्‍य इन दिनों अपने अकाउंट में ब्‍याज आने का इंतजार कर रहे हैं. कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) ने मार्च 2026 में फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए 8.25 फीसदी ब्‍याज का ऐलान किया था, लेकिन नया फाइनेंशियल ईयर शुरू होने के 2 महीने से ज्‍यादा समय होने के बाद भी अभी तक सदस्‍यों के अकाउंट में ब्‍याज का पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ है।  ऐसे में पीएफ अकाउंट होल्‍डर्स को इस बात की टेंशन हो रही है कि उनके पीएफ का पैसा कब खाते में भेजा जाएगा? हालांकि, ईपीएफओ ने कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है. जल्‍द ही पीएफ अकाउंट के तहत पैसा सदस्‍यों के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।  EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए मार्च 2026 में EPF पर 8.25% सालाना ब्याज दर की सिफारिश की थी. इसके बाद से सरकार की मंजूरी और नोटिफिकेशन जारी होने का इंतजार किया जा रहा है. यह अपडेट आने के बाद कर्मचारियों के खाते में ब्‍याज का पैसा जमा कर दिया जाएगा. फिलहाल, सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। क्‍यों हो रही है देरी? फाइनेंशियल ईयर खत्म होते ही EPFO ब्याज कर्मचायों के पीएफ अकाउंट में ट्रांसफर नहीं कर देता है, बल्कि इसके पीछे कई प्रॉसेस होते हैं. पहले सरकार की मंजूरी ली जाती है, फिर करोड़ों अकाउंट के आंकड़ों को चेक किया जाता है और रिकॉर्ड अपडेट किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में कुछ महीने लग जाते हैं. पिछले कुछ सालों में भी ब्याज जून और जुलाई के दौरान खातों में जमा किया गया था. इस कारण, इस बार भी ब्‍याज जमा होने में देरी हो रही है।  देरी से क्‍या होगा नुकसान?  ब्‍याज का पैसा लेट से आने का मतलब ये नहीं होता है कि सदस्‍यों को ब्‍याज में नुकसान होगा. EPFO के नियमों के अनुसार, अकाउंट होल्‍डर्स को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. ब्‍याज का कैलकुलेशन अकाउंट में मौजूदा बैलेंस के आधार पर की जाती है, यानी भले ही ब्‍याज की एंट्री बाद में दिखाई दे, लेकिन पूरे साल का ब्‍याज दर से जोड़ा जाएगा. EPFO कई बार यह कह चुका है कि ब्‍याज जमा होने में देरी का अस सदस्‍यों को मिलने वाले अमाउंट पर नहीं पड़ता है. पूरा ब्‍याज उनके अकाउंट में जमा किया जाता है।  कैसे करें चेक अकाउंट में ब्‍याज आया कि नहीं?      EPF मेंबर अपने अकाउंट की जानकारी कई तरह से देख सकते हैं.     UMANG ऐप पर लॉगिन कर View Passbook विकल्प चुन सकते हैं.      इसके साथ ही EPFO की Member Passbook सेवा के जरिए भी बैलेंस और ब्याज की जानकारी देखी जा सकती है.      सदस्य अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल देकर या 7738299899 पर SMS भेजकर भी PF बैलेंस की जानकारी ले सकते हैं.     अगर पासबुक में Int. Updated up to 31/03/2026 लिखा दिखाई देता है, तो समझिए कि ब्याज अपडेट किया जा चुका है.     

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी या इंतजार? 8वें वेतन आयोग को लेकर नई चर्चा

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग एक्शन मोड में आ चुका है। वेतन आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक भी कर रहा है। इस दौरान वेतन आयोग कर्मचारी संगठनों की सुझाव और सिफारिशों पर मंथन भी कर रहा है। वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों को राहत देते हुए सुझाव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि को भी बढ़ा दिया है। आयोग ने अब यह समयसीमा 15 जून 2026 तक कर दी है। यह तीसरी बार है जब मेमोरेंडम जमा करने की तारीख बढ़ाई गई है। इस फैसले के बाद एक बार फिर से ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने में देरी होगी। बता दें कि वेतन आयोग को उसके गठन के बाद सिफारिशों को सौंपने के लिए 18 महीने का समय मिला है। बैकडेट से लागू होने की उम्मीद वेतन आयोग की सिफारिशों में देरी का असर कर्मचारियों और सरकार दोनों पर पड़ सकता है। दरअसल, वेतन आयोग की सिफारिशें बैकडेट यानी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है। अगर सिफारिशों के लागू होने में देरी होती है तो कर्मचारियों का एरियर बढ़ जाएगा। वहीं, नई वेतन संरचना लागू होने पर सरकार को एकमुश्त भुगतान करना होगा। इससे सरकारी खजाने का बोझ बढ़ जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों का बेसिक सैलरी का एरियर मिल सकता है लेकिन हाउस रेंट अलाउंस (HRA) जैसे कुछ भत्तों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। बता दें कि HRA का भुगतान आमतौर पर पूर्व प्रभाव से नहीं किया जाता। ऐसे में वेतन आयोग की रिपोर्ट जितनी देर से आएगी, कर्मचारियों की कुछ संभावित वित्तीय लाभों पर उतना ही असर पड़ सकता है। वेतन आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की प्रक्रिया 5 मार्च 2026 को शुरू हुई थी। शुरुआत में इसकी अंतिम तिथि 30 अप्रैल तय की गई थी, जिसे बाद में 31 मई तक बढ़ाया गया। अब इसे 15 जून तक बढ़ा दिया गया है। मेमोरेंडम केवल वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ईमेल, पीडीएफ या हार्ड कॉपी के रूप में भेजे गए सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा। बता दें कि पिछले साल जनवरी महीने में सरकार ने पहली बार आठवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था। हालांकि, इसकी घोषणा नवंबर महीने में की गई। वेतन आयोग के गठन के बाद फरवरी 2026 में वेबसाइट को लॉन्च किया गया। वेतन आयोग की इस वेबसाइट पर सुझाव दिए जा सकते हैं।

पुतिन का बड़ा दांव! Admiral Nakhimov की वापसी से बदला समुद्री शक्ति संतुलन

मॉस्को  समंदर के रास्ते एक ऐसी खौफनाक खबर आ रही है, जिसने अमेरिकी जैसे सुपरपावर की रातों की नींद उड़ा दी है. रूस ने करीब 30 साल बाद अपने एक ‘दैत्य’ को समंदर में उतार दिया है, जो अकेले ही अमेरिकी नेवी के पूरे बेड़े को पलक झपकते ही तबाह कर सकता है. रूस ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जंगी जहाज ‘एडमिरल नाखिमोव’ को अपने फाइनल सी-ट्रायल के लिए रवाना कर दिया है. समंदर का ये सुल्तान इतना खतरनाक है कि इसके सामने आने के बाद दुश्मन देश के जहाजों को संभलने या भागने के लिए सिर्फ एक सेकेंड का वक्त मिलेगा और फिर सब कुछ खाक हो जाएगा! समंदर में लौटा पुतिन का 28,000 टन का महादानव! रूस का ये कीरोव-क्लास क्रूजर (Kirov-class cruiser) कोई आम जहाज नहीं है. ये दुनिया का इकलौता और सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड कॉम्बैट शिप है. इसका वजन करीब 28,000 टन है. आकार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ये अकेला जहाज अमेरिका के तीन सबसे मॉडर्न ‘अर्ली बर्क क्लास डिस्ट्रॉयर’ (Arleigh Burke-class destroyers) जहाजों से भी बड़ा और भारी है।  सोवियत संघ के जमाने का ये दैत्य पिछले 30 सालों से अपग्रेड होने के लिए रुका हुआ था लेकिन अगस्त 2025 में इसने पहली बार अपनी खुद की ताकत से समंदर की लहरों को चीरना शुरू किया और अब 2026 में ये अपनी अंतिम परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।  रूस की 176 मिसाइलों का जाल, जिरकॉन काल! इस महाविनाशक जहाज के अंदर हथियारों का ऐसा गोदाम है कि कोई दुश्मन इसके करीब आने की सोच भी नहीं सकता. इस जहाज में कुल 176 मिसाइल लॉन्च सेल्स लगाए गए हैं. इनमें से करीब 100 सेल्स में रूस के सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम S-400 का नेवल वर्जन तैनात है, जो जमीन पर मौजूद S-400 की तीन पूरी बटालियन के बराबर आसमान से आने वाली हर आफत को रोक सकता है।  इसके अलावा, बाकी सेल्स में रूस की सबसे घातक ‘जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें’ (Zircon Hypersonic Cruise Missile) भरी गई हैं. ये मिसाइल साउंड की रफ्तार से 9 गुना तेजी (Mach 9) से उड़ती है और 1,000 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को संभलने का एक सेकेंड का मौका भी नहीं देती।  रूस का ‘तख्त’ और बदलती कूटनीति का दांव सेवेर्नोए डिजाइन ब्यूरो के सीईओ आंद्रेई द्याचकोव के मुताबिक, इस जहाज को इस तरह अपग्रेड किया गया है कि ये आज की तारीख में दुनिया का सबसे ताकतवर कॉम्बैट शिप बन चुका है. हालांकि, रूस के लिए इस दैत्य को जिंदा करना आसान नहीं था।  यूक्रेन के साथ जारी भीषण युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों और भारी बजट संकट की वजह से रूस को इसके जुड़वां जहाज ‘प्योत्र वेलिकी’ को समय से पहले ही रिटायर करना पड़ा, क्योंकि दोनों जहाजों को मेंटेन रखना रूस की इकॉनमी पर भारी पड़ रहा था. सोवियत संघ के टूटने के बाद से रूस ने कोई नया बड़ा जहाज नहीं बनाया है, इसलिए अपनी धाक जमाए रखने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत एडमिरल नाखिमोव को चमकाने में झोंक दी।  रूस धोएगा पुराने घाव साल 2022 में यूक्रेन के मामूली मिसाइल हमले में रूस का ‘मोस्कवा’ जहाज डूब गया था, जिससे रूसी नौसेना की साख पर बट्टा लगा था. इसके बाद रूस ने अपना पूरा ध्यान गुपचुप तरीके से हमला करने वाली यासेन-एम क्लास पनडुब्बियों पर लगा दिया था. अब एडमिरल नाखिमोव को सीधे रूस के आर्कटिक बेड़े में शामिल किया जा रहा है।  दरअसल, अमेरिका और नाटो (NATO) देश लगातार आर्कटिक क्षेत्र में रूस के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में रूस का ये न्यूक्लियर पावर्ड दैत्य समंदर के उस बेहद ठंडे रास्ते की पहरेदारी करेगा और अमेरिका को उसकी हद में रहने की सख्त चेतावनी देगा। 

आज का मौसम: मॉनसून की रफ्तार तेज, देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी

तिरुवनन्तपुरम दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल में दस्तक देते ही उत्तर भारत का मौसम भी करवट लेने लगा है। मौसम विभाग ने 5 जून को यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं मॉनसून केरल के बाद अब कर्नाटक, तमिलनाडु के इलाकों की ओर आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून का असर उत्तर और पश्चिमी भारत में दिखाई देगा। अगले 24 घंटे में कम से कम 16 राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। इसकेसाथ ही 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। केरल और कर्नाटक में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह के दौरान केरल और कर्नाटक के बड़े इलाके में मूसलाधार बारिश हो सकती है। वहीं तमिलनाडु के भी बड़े क्षेत्र में बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एक सप्ताह भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मछुआरों को सलाह दी गई है कि कम से कम 9 जून तक वे बंगाल की खाड़ी में ना उतरें। इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट मौम विभाग ने कहा है कि 5 जून को दक्षिण में केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल, मेघालय, नागालैंड, और सिक्किम में बारिश का अनुमान है। उत्तर भारत की बात करें तो पंजाब. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कम से कम 16 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है। दिल्ली का मौसम राजधानी दिल्ली में 4 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 और 6 जून को भी ादल छाए रहेंगे। हवा की गति 40 से 60 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इसके अलावा 5 जून को दोपहर में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश और हवा की वजह से तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की जाएगी। यूपी का मौसम पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 ओर 6 जून को आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी कया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ,वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बलिया, जौनपुर और गाजीपुर में 5 जून को बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, आगरा और मथुरा में भी मध्यम बारिश का अनुमान है। हवाओं की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रह सकती है। पूर्वी यूपी में 7 से 10 जून तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार का मौसम बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में आंधी के साथ बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा राजस्थान के बड़े इलाके में आंधी के साथ बारिश की संभावना है। पहाड़ी इलाकों का मौसम हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, कांगड़ा. चंबा, कुल्लू, सोलन और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ सकती है। इसके अलावा हवाओँ की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटे की रहने की संभावना है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग, चोमील, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, पिथौरागढ़. उत्तर काशी और टिहरी जिलों में मध्यम बारिश की संभावा है। 5 जून को कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

एनएमडीसी ने मनाया पर्यावरण दिवस 2026

हैदराबाद  भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक और एक जिम्मेदार खनन कंपनी एनएमडीसी ने हैदराबाद में अपने मुख्यालय और देश भर में स्थित अपनी परियोजनाओं में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया,  जो सतत खनन और पर्यावरण प्रबंधन के प्रति एनएमडीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है । कंपनी ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जो पर्यावरण सुस्थिरता की दिशा में सामूहिक कार्रवाई के महत्व को उजागर करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस की थीम  “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” पर केंद्रित रहा । समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ जो हरित भविष्य के निर्माण के लिए एक साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है । श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के नेतृत्व में श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन), श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक), श्री अनुराग कपिल, निदेशक (वित्त), और श्री सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी ने पर्यावरण की शपथ दिलवाते हुए कर्मचारियों को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सुस्थिर प्रथाओं को बढ़ावा देने में योगदान करने के लिए प्रेरित किया ।  कार्यक्रम के भाग के रूप में, पर्यावरण के प्रति जागरूकता संबंधी अनेक वीडियो दिखाए गए और एनएमडीसी की पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और सुस्थिर खनन प्रथाओं के लिए चल रही पहलों को प्रदर्शित करने वाला एक वृत्तचित्र दिखाया गया । अपनी सभी परियोजनाओं में, एनएमडीसी ने वृक्षारोपण अभियान चलाए और कर्मचारियों तथा छात्रों के लिए पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने और सुस्थिरता पर अभिनव सोच को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। कंपनी ने सुस्थिर विकल्पों को बढ़ावा देने और रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सुदृढ़ करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का वितरण भी किया । अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “पृथ्वी अपने अस्तित्व के अधिकांश समय तक मनुष्यों के बिना जीवित रही है और अस्तित्व उल्लेखनीय रहा है । मुझे यकीन है कि अगर भविष्य में मनुष्य का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, तो भी पृथ्वी का अस्थित्व आराम से बना रहेगा । इसलिए, यह हमारे ही हित में है कि हम भूमंडल की देखभाल करें और यह सुनिश्चित करें कि यह यह हमारे रहने योग्य बना रहे। यह पृथ्वी के लिए नहीं बल्कि मानवता की उत्तरजीविता की रणनीति है । व्यावसायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार से हम जो भी कदम उठाते हैं, उसे उठाने से पहले हम उनपर जिम्मेवारीपूर्वक विचार अवश्य करें ।“  पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार संगठन के रूप में, एनएमडीसी जिम्मेदार खनन में विश्वास रखता है और उसका पालन करता है । आज हम जो करते हैं वह हमें गर्व महसूस कराता है, न केवल इसलिए कि हम व्यवसाय में निरंतर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि हम पर्यावरण और समुदायों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं ।“  इस अवसर पर वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर एनएमडीसी की आंतरिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने रचनात्मकता और भागीदारी के माध्यम से पर्यावरणीय चेतना को बढावा देने का प्रयास किया ।  आज जब देश एक सुस्थिर भविष्य की ओर बढ़ रहा है, एनएमडीसी यह प्रदर्शित करता है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण प्रबंधन साथ-साथ चल सकते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि पृथ्वी की सतह से नीचे जो पोषित होता है वह उसके ऊपर मौजूद जीवन में भी सार्थक योगदान देता है ।

सीमा पर बढ़ी सख्ती: घुसपैठियों की वापसी को लेकर BSF-BGB के बीच विवाद की स्थिति

कलकत्ता भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्ती के बाद सीमा पर टकराव की नौबत है. बांग्लादेश गार्ड बॉर्डर (BGB) अपने ही नागरिकों को अपने देश में एंट्री नहीं दे रहा है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई दिनों से सैकड़ों बांग्लादेशी घर वापसी के लिए इंतजार कर रहे हैं. लेकिन BGB इन्हें बांग्लादेशी मानती ही नहीं है।  BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स पर अपने 33 लोगों को बांग्लादेश में घुसने नहीं दिया. बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बार्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को अंदर भेजने की बीएसएफ की कोशिश को सफल नहीं होने दिया।  अखबार ने लिखा है, "BGB अधिकारियों के अनुसार आज सुबह-सुबह भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को बांग्लादेश में भेजने की कोशिश की, जिसे बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने रोक दिया. BGB-16 और 61 बटालियन के अधिकारियों ने बताया कि ये घटनाएं सुबह करीब 5:00 बजे बॉर्डर पर अलग-अलग जगहों पर हुईं।  BGB-15 लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मेहदी इमाम ने दावा किया कि सभी लोगों को ज़ीरो लाइन पर रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर कड़ी नज़र रखी जा रही है और BGB हाई अलर्ट पर है; साथ ही इस घटना को लेकर BSF के साथ बातचीत भी चल रही है।  BGB मीडिया सेल ने दावा किया कि सबसे पहले BGB-61 तीस्ता बटालियन के तहत बाराखाटा बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) इलाके से 11 लोगों को बांग्लादेश की तरफ पुश-इन करते हुए देखा गया. आगे BGB ने दावा किया कि फिर उसी समय पैशात्तीबारी BOP इलाके से भी 10 और लोगों को अंदर धकेला जा रहा था।  जानकारी मिलने के बाद BGB की पेट्रोलिंग टीमें तुरंत दोनों जगहों पर पहुंचीं और स्थिति को काबू में किया. BGB ने उन लोगों को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और वे भारतीय सीमा में ही रहे।  पश्चिम बंगाल में अवैध रुप से घुसे बांग्लादेशियों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया जा रहा है. इसके बाद देश में अवैध रूप से घुसे कई बांग्लादेशी स्वेच्छा से वापस बांग्लादेश जाना चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेश सरकार और सेना इन लोगों को अपना नागरिक मानने से ही इनकार कर रही है।  अखबार के अनुसार दुर्गापुर और दिघलतारी BOP की BGB KR पेट्रोलिंग टीमों ने भारतीय सीमा की तरफ से बॉर्डर पिलर 925 और 927 के पास 12 लोगों बांग्लादेश में घुसने से रोक दिया।  बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने बंगाबाडी बॉर्डर इलाके में 28 लोगों बांग्लादेश घुसने रोक दिया।  इस मामले को लेकर गुरुवार दोपहर BGB और BSF के बीच एक फ्लैग मीटिंग हुई. बंगाबाड़ी बॉर्डर पर हुई इस मीटिंग में BSF ने BGB को बताया कि वे इस मुद्दे पर अपने सीनियर अधिकारियों से बात करेंगे और इसका समाधान निकालेंगे।  भारत में इस समय सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि दिल्ली, अहमदाबाद, गुरुग्राम बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस/प्रशासनिक अभियान चलाये जा रहे हैं. ये अभियान अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित हैं। 

GDP में शानदार उछाल: चौथी तिमाही के दम पर FY26 में 7.7% की वृद्धि, FY27 में 6.6% ग्रोथ का अनुमान

नई दिल्‍ली  भारत की वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रोथ बढ़कर 7.7% हुई। मार्च तिमाही के आंकड़े पिछली तिमाही के मुकाबले कम रहे। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की आर्थिक विकास दर 2025-26 में बढ़कर 7.7% हो गई, जो एक साल पहले 7.1% थी। हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते वैश्विक और घरेलू जोखिमों के कारण इस रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी, जबकि पिछली तिमाही में यह 8% थी। भारत अब नई जीडीपी (GDP) सीरीज के तहत आंकड़े जारी कर रहा है। इसमें महंगाई मापने वाले बास्केट में हालिया बदलाव, 2022-23 को नया आधार वर्ष (बेस ईयर) बनाना और अपडेटेड बैक-सीरीज डेटा शामिल है। यह सब महामारी के बाद खपत के बदलते पैटर्न और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेज़ी से विस्तार को बेहतर ढंग से समझने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही. हालांकि, यह इससे पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के 8% के मुकाबले थोड़ी कम है. इसका मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार में आई कमी रही. मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ जो तीसरी तिमाही में 12.8% पर थी, वह आखिरी तिमाही में गिरकर 7.3% पर आ गई।  फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.9% रही GVA ग्रोथ ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) की बात करें तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसकी ग्रोथ रेट 7.9% दर्ज की गई. चौथी तिमाही में भी जीवीए ग्रोथ 7.9% रही, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देती है. बता दें कि जीवीए से पता चलता है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे खेती, उद्योग) में कुल कितनी असली कमाई या वैल्यू जुड़ी।  पूरे साल की यह ग्रोथ सरकार के फरवरी के दूसरे अनुमान 7.6% से भी ज्यादा है। वहीं पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2024-25 में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.1% रही थी। नॉमिनल जीडीपी में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी (वर्तमान कीमतों पर) के मोर्चे पर भी अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार कायम रखी है। वित्त वर्ष 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी के 346.36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 318.07 लाख करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया था। यह स्पष्ट रूप से 8.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर को रेखांकित करता है। जीडीपी के ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। 7.8 प्रतिशत की मजबूत तिमाही वृद्धि और 7.7 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर न सिर्फ भारतीय बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह देश के लगातार बढ़ते आर्थिक परिदृश्य को भी मजबूती प्रदान करता है।  मैन्युफैक्चरिंग में दिखी सुस्ती     वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही। यह तीसरी तिमाही की 8% की ग्रोथ के मुकाबले थोड़ी कम है।     तिमाही-दर-तिमाही आधार पर विकास दर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दर्ज की गई सुस्ती है।     मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ जहां तीसरी तिमाही में 12.8% के उच्च स्तर पर थी, वह चौथी तिमाही में घटकर 7.3% पर आ गई है। GVA ग्रोथ 7.9% रही, नॉमिनल जीडीपी की रफ्तार भी धीमी     आर्थिक विकास को करीब से दर्शाने वाली ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) ग्रोथ पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.9% दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में भी GVA की विकास दर ठीक इतनी ही यानी 7.9% रही।     दूसरी ओर, अगर मौजूदा बाजार भाव पर आधारित नॉमिनल जीडीपी की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें 8.9% की बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले वित्त वर्ष-25 के 9.7% की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से कम है। भविष्य का अनुमान: वित्त वर्ष-27 में 6.6% रह सकती है ग्रोथ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जारी अनुमानों के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 में आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले साल देश की ग्रोथ रेट 110 बेसिस पॉइंट्स यानी 1.10% घटकर 6.6% पर आ सकती है। RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की जीडीपी दर में कमी का अनुमान जताया है. आरबीआई के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है. पहले आरबीआई ने रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी का अनुमान जारी किया था।  नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी हुआ डेटा सांख्यिकी मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे साल के जीडीपी आंकड़ों को एक नए बदलाव के साथ पेश किया है। इस बार पूरे साल के डेटा को नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर कैलकुलेट करके जारी किया गया है। नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है। आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई। 1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत 'बैक-सीरीज' डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग … Read more

लोनधारकों को राहत या इंतजार? RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर

नई दिल्ली केंद्रीय बैंक RBI ने 3 से 5 जून तक चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद रेपो रेट 5.25 पर बरकरार रखने का फैसला लिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने शुक्रवार सुबह 10 बजे MPC मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी दी. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रेपो रेट नहीं बढ़ाने के फैसले को जानकार, एक राहत की तरह मान रहे हैं. इस फैसले से स्‍पष्‍ट है कि अगर आपने रेपो रेट से लिंक्‍ड होम लोन, कार लोन या अन्‍य तरह का बैंक लोन लिया है, तो आपके लोन की EMI नहीं बढ़ेगी।  कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ?  केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान मामूली रूप से कम कर दिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए रियल GDP ग्रोथ अनुमान  6.9 से कम कर 6.6 फीसदी कर दिया है।      जून 2026 तिमाही: 6.6%     सितंबर 2026 तिमाही: 6.3%     दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%     मार्च 2027 तिमाही: 6.8%   इस साल अनुमान से ज्‍यादा रह सकती है महंगाई महंगाई दर पर RBI का अनुमान है कि इस साल देश में महंगाई थोड़ी ज्‍यादा रह सकती है. इसमें तेल और गैस की बढ़ी कीमतों का बड़ा रोल रहेगा. मार्च में महंगाई दर 3.4 फीसदी और अप्रैल में 3.5 फीसदी रही थी, जबकि इससे पहले फरवरी 2026 में महंगाई दर 3.2 रही थी.  ये आंकड़े केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्‍य से कम थे. हालांकि आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है. RBI के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 5.1 फीसदी रह सकती है।      जून 2026 तिमाही: 4.2%     सितंबर 2026 तिमाही: 5.1%     दिसंबर 2026 तिमाही: 5.9%     मार्च 2027 तिमाही: 5.4% हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी। RBI MPC मीटिंग के अन्य बड़े फैसले     ग्रोथ का अनुमान घटाया: वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते RBI ने आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। अब चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ आउटलुक को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।     स्टांस 'न्यूट्रल' रखा: महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बावजूद मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपनी नीति का रुख 'न्यूट्रल' (तटस्थ) बनाए रखने का फैसला किया है। कमेटी स्थिति पर नजर रखते हुए डेटा के आधार पर आगे कदम उठाएगी।     महंगाई को लेकर चिंता: गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि हालांकि रिटेल महंगाई अभी टारगेट के दायरे में है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण फ्यूल (ईंधन) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव डाल सकती हैं।     कमजोर मानसून का डर: पश्चिम-दक्षिण मानसून में कमी (कम बारिश) के अनुमान को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी की पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की फसल विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन जैसी योजनाएं इसके असर को कम करने में मदद करेंगी।     सर्विस सेक्टर मजबूत: अच्छी बात यह है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर है और GST रेशनलाइजेशन व स्थिर रोजगार के चलते शहरी क्षेत्रों में कंजम्पशन (खपत) को सहारा मिल रहा है। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।