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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे अस्पताल में भर्ती, तबीयत बिगड़ने के बाद रद्द हुए सभी सार्वजनिक कार्यक्रम

ठाणे अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को इलाज के लिए ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि उनकी हालत पूरी तरह से स्थिर है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। पिछले कुछ दिनों से काम के भारी दबाव और लगातार भागदौड़ का सीधा असर एकनाथ शिंदे की सेहत पर पड़ा है। उन्हें कमजोरी महसूस हो रही थी। विधानमंडल की कार्यवाही के दौरान ही उन्हें बुखार की शिकायत हुई थी। इसके बावजूद वह कुछ तय कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए ठाणे पहुंचे, लेकिन तबीयत ज्यादा नासाज होने के चलते उन्हें अपने सभी कार्यक्रम रद्द करने पड़े। डॉक्टरों ने दी अस्पताल में भर्ती होने की सलाह रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के राजनीतिक घटनाक्रमों और फिर विधानमंडल का अधिवेशन शुरू होने के कारण एकनाथ शिंदे लगातार व्यस्त चल रहे थे। माना जा रहा है कि थकान, वायरल बुखार और कमजोरी की वजह से ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ा। डॉक्टरों ने उन्हें घर पर रहकर आराम करने के बजाय अस्पताल में भर्ती होकर समुचित इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद शुक्रवार रात उन्हें फौरन ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, चिंता की कोई बात नहीं है और उनकी स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। रात 2 बजे हुआ शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश डिप्टी सीएम के अस्पताल में भर्ती होने की वजह से ठाणे में होने वाले एक अहम सियासी कार्यक्रम में भी बदलाव करना पड़ा। दरअसल, ठाणे के गंगूबाई शिंदे हॉल में शुक्रवार दोपहर धुले से ठाकरे गुट की शिवसेना उपनेत्री शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश समारोह आयोजित होने वाला था। लेकिन एकनाथ शिंदे के अचानक बीमार पड़ने के कारण इसे टालना पड़ा। आखिरकार देर रात 2 बजे कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में शुभांगी पाटिल ने ठाणे में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वायरल बुखार और लगातार व्यस्तता के बीच अस्पताल पहुंचे शिंदे     प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर विधानसभा सत्र के दौरान ही एकनाथ शिंदे को तेज बुखार और कमजोरी महसूस होने लगी थी. शुरुआत में इसे सामान्य थकान माना गया, लेकिन शाम तक तबीयत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने जांच की सलाह दी. देर रात उन्हें ठाणे के जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।      लगातार राजनीतिक बैठकों, विधानसभा सत्र और प्रशासनिक गतिविधियों के कारण पिछले कुछ दिनों से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा था. डॉक्टरों का मानना है कि वायरल संक्रमण के साथ लगातार काम का दबाव भी उनकी तबीयत बिगड़ने की एक वजह हो सकता है. फिलहाल उनकी मेडिकल जांच जारी है और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।      शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने बताया कि उपमुख्यमंत्री की स्थिति स्थिर है और उन्हें केवल निगरानी तथा आराम के लिए अस्पताल में रखा गया है. पार्टी की ओर से समर्थकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील भी की गई है।  महत्वपूर्ण कार्यक्रम फिलहाल स्थगित स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते एकनाथ शिंदे के कई राजनीतिक कार्यक्रम फिलहाल रद्द या स्थगित कर दिए गए हैं. शनिवार को प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण पार्टी दीक्षांत समारोह में भी अब वह शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा आगामी राजनीतिक दौरों की नई तारीख बाद में तय की जाएगी।  डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज अस्पताल सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. वायरल बुखार और कमजोरी को देखते हुए उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है. शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और फिलहाल किसी गंभीर जटिलता की जानकारी सामने नहीं आई है।  राजनीतिक हलकों में बढ़ी चिंता महाराष्ट्र की राजनीति में एकनाथ शिंदे की अहम भूमिका को देखते हुए उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर तेजी से फैल गई. सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. फिलहाल पार्टी का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह के बाद ही उनकी सार्वजनिक गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी।  एकनाथ संभाजी शिंदे महाराष्ट्र के एक प्रमुख राजनेता हैं, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। शिंदे इससे पहले 30 जून 2022 से 5 दिसंबर 2024 तक महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। राजनीति में उनकी शुरुआत 1980 के दशक में शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दीघे के मार्गदर्शन में हुई, जिसके बाद वे 1997 में ठाणे नगर निगम में पहली बार पार्षद चुने गए। ठाणे के कोपरी-पांचपाखाड़ी विधानसभा क्षेत्र से 2004 से लगातार विधायक रहे शिंदे ने 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के दौरान शिवसेना में बगावत का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी और उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। फरवरी 2023 से वे शिवसेना के अध्यक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं, जब चुनाव आयोग ने उनके गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी। 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद हुए नेतृत्व परिवर्तन में, उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।

भारत का बड़ा फैसला: पाकिस्तान में छिपे 23 आतंकियों को आतंकी घोषित, आतंक के खिलाफ सख्त संदेश

  नई दिल्ली केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है. गृह मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी करके 23 आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी UAPA के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया है. इन सभी 23 नामों को UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है. इनमें से ज्यादातर आतंकी जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं और पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रह रहे हैं।   इस लिस्ट में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम शामिल हैं, जो 2016 में नगरोटा स्थित भारतीय सेना शिविर पर हुए हमले और 2022 में जम्मू के सुंजवां में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े बताए गए हैं।  लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को हाफिज मोहम्मद सईद के करीबी सहयोगी के रूप में बताया गया है. सबसे चौंकाने वाला नाम मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का है. गजट के मुताबिक उसका स्थायी पता बेंगलुरु, कर्नाटक का है, जबकि वह अभी पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है।  सरकार का कहना है कि वह लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और ISIS से जुड़े मॉड्यूल से संबंध रखता है. उस पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भर्ती करने, हथियारों की ट्रेनिंग दिलवाने और आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा जुटाने का आरोप है।  गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि संबंधित व्यक्ति आतंकवाद में शामिल है. इसी आधार पर UAPA की धारा 35 के तहत उसका नाम कानून की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है।  इस सूची में शामिल होने के बाद इन आतंकियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता आसान हो जाता है. यह अधिसूचना गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव राकेश राठी ने जारी की है।  पाकिस्तान के इन खूंखार आतंकियों का नाम साल 2016 में नगरोटा में आर्मी कैंप पर हुए हमले का मास्टरमाइंड हाफिज मोहम्मद सईद ही था। इसके अलावा सुजवान मिलिटरी स्टेशन पर हमले में भी उसका नाम आया था। गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन में इनका नाम अब्दुर रऊफ, हाफिज खालिद वलीद उर्फ और राणा इफ्तिकार बताया गया है। राणा इफ्तिकार जिहादी संगठनों की बागडोर संभालता है। इसके अलावा युवाओं को भटकाकर आतंक के रास्ते पर लाता था। इसके अलावा अब्दुल रऊफ लश्कर और जमात-उद-दवा का सदस्य है। वह आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने, फंड इकट्ठा करने का काम करता है। 51 साल का हाफिज खालिद वलीद हाफिज सईद के अंडर में ही काम करता है और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है। इसके अलावा इस लिस्ट में मसूद इलियास कश्मीरी का नाम है जिसे मुफ्ती मसूद इलियास के नाम से भी जानते हैं। वह पीओके के रावलकोट में रहता है और जैश-ए-मोहम्मद में नियुक्तियां करता है। इसके अलावा भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराता है। भारत में हुए आतंकी हमले में भी उसका नाम शामिल है। नोटिफिकेशन के मुताबिक मोहम्मद मुसादिक उर्फ हमजा पाकिस्तान के नारोवाल जिले के शकारगढ़ में रहता है और कश्मीर में घुसपैठ खरने वाले जैश-ए-मोहम्मद के गुट की मदद करता है। वह सीमा पार ड्रोन के जरिए हथियार भी भेजता है और जैश के लिए साइबर हेड का भी काम करता है। वह ऑनलाइन माध्मय से भी युवाओं को आतंकी गतिविधियों की ओर आकर्षित करता है। अबू साद के नाम से जाना जाने वाला मुफ्ती मोहम्मद असगरर खान अब्बासपुर में रहता है और नगरोटा में सेना के कैंप पर हुए हमले में शामिल था। इसके अलावा 56 साल के हाफिज अब्दुल शकूर का भी इस लिस्ट में नाम है। नोटिफिकेशन में क्या कहा गया? गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में सईद के करीबी साथियों के तौर पर अब्दुल रऊफ, हाफिज खालिद वलीद और राणा इफ्तिखार की पहचान की है। दस्तावेज में कहा गया है, "54 साल के राणा इफ्तिखार जिहाद-विरोधी संगठनों के बीच तालमेल बिठाता है, युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उकसाता है और हाफिज सईद का करीबी साथी है।" इसमें आगे बताया गया, "52 साल का अब्दुल रऊफ लश्कर और जमात-उद-दावा से जुड़ा है। वह आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने और उनमें तालमेल बिठाने तथा फंड इकट्ठा करने के काम में शामिल है। वह हाफिज सईद की सीधी कमान में लश्कर के मुख्य आतंकवादियों में से एक है।" इसमें आगे कहा गया है, "51 साल का हाफिज खालिद वलीद, हाफिज सईद की सुरक्षा में रहकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से काम करता है और कई आतंकवादी घटनाओं का मास्टरमाइंड है।" एनआईए को मिलेगी ताकत सूची में आतंकवादियों के नाम शामिल होने से नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को उनके फंड को रोकने, हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने और उनकी संपत्ति जब्त करने की शक्ति मिलेगी। 2019 में आतंकवाद-रोधी कानून में संशोधन करके व्यक्तिगत आतंकवादियों को भी सूची में शामिल करने का प्रावधान किया गया था। संशोधन से पहले केवल समूहों को ही आतंकवादी संगठनों के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता था। 80 आतंकवादियों की लिस्ट शनिवार को पाकिस्तान में रहने वाले 23 आतंकवादियों को सूची में जोड़ा गया, जिनमें जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हुए हमलों में शामिल लोग भी शामिल हैं। इसके साथ ही सूची में शामिल आतंकवादियों की कुल संख्या 80 हो गई है। केंद्र सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर, मुफ्ती मुहम्मद असगर खान उर्फ अबू साद, हाफिज अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार, अब्दुल्ला जिहादी, गुलाम फरीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की और वसीम नूर जट को सूची में शामिल किया है। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों फिरदौस अहमद भट, हारून रशीद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कय्यूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद वलीद, मौलाना सैफुल्ला खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ तैबी, ओवैस फारूक, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार, मोहम्मद शाहिद फैसल (जो अल-कायदा और ISIS से भी जुड़ा है) को भी सूची में शामिल किया गया है।

Forex Reserves Down: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, गोल्ड रिजर्व भी घटा

 नई दिल्‍ली भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और गोल्‍ड रिजर्व में भारी कटौती हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए आंकडों के अनुसार, 26 जून 2026 को समाप्‍त सप्‍ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.654 अरब डॉलर घटकर 666.933 अरब डॉलर रह गया, जबकि इससे पहले के सप्‍ताह के फॉरेन एक्‍सचेंज 963 मिलियन डॉलर बढ़कर 672.587 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।  आरबीआई ने बताया कि विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े हिस्‍से फॉरेन करेंसी असेट्स में 150 मिलियन डॉलर की गिरावट आई है और यह 541.067 अरब डॉलर पर आ चुका है. विदेशी मुद्रा असेट में यूरो, पाउंड और येन जैसी नॉन अमेरिकी करेंसी की वैल्‍यू में उतार-चढ़ाव का भी असर विदेशी मुद्रा भंडार में हुआ है।  गोल्‍ड रिजर्व में भारी गिरावट इसके अलावा, एक सप्‍ताह में गोल्‍ड रिजर्व में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सोने के भंडार 5.394 अरब डॉलर घटकर 102.536 अरब डॉलर पर आ गया. वहीं स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) की वैल्‍यू 89 मिलियन डॉलर घट गई और 18.558 अरब डॉलर रह गई. इतना ही नहीं IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी 21 मिलियन डॉलर घटकर 4.7772 अरब डॉलर रह गई है।  फरवरी में रिकॉर्ड हाई पर था विदेशी रिजर्व  गौर करने वाली बात है कि 27 फरवरी 2026 की सप्‍ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हाई पर था. हालांकि, इसके बाद वेस्‍ट एशिया में बढ़े तनाव और संघर्ष के कारण रुपये में लगाता दबाव बना रहा है, जिसके बाद रुपये की गिरावट को कंट्रोल करने के लिए आरबीआई ने कई उपाय किए, उसमें डॉलर की बिक्री भी शामिल थी. जिस कारण विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखने को मिली है।   क्‍यों आई गोल्‍ड रिजर्व में कटौती?  इसके अलावा, पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में संकट को कम करने के लिए 11 मई को लोगों से अपील की कि वे विदेशी यात्राएं कम करें. पेट्रोल और डीजल वाहनों का उपयोग कम करें और सोने की खरीद भी बंद करें, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा विदेशी खर्च को कम किया जा सके और आयात लागत को घटाया जा सके. इसके बाद सोने के आयात शुल्‍क में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई, जिस कारण सोने का आयात घट गया और गोल्‍ड के रिजर्व में कटौती देखी गई है। 

Heatwave in America: रिकॉर्ड गर्मी ने बिगाड़ा Independence Day Celebration, वॉशिंगटन DC में कई कार्यक्रम प्रभावित

 वॉशिंगटन  अमेरिका के पूर्वी तट पर भीषण गर्मी की वजह से कई राज्यों में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं. वॉशिंगटन डीसी में नेशनल मॉल पर लगा ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर शुक्रवार को कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया गया. गर्मी और नमी के कारण वहां तापमान 113 डिग्री फारेनहाइट (करीब 45 डिग्री सेल्सियस) तक महसूस हो रहा था. वर्जीनिया और मैरीलैंड के कई शहरों में परेड कैंसिल कर दी गई हैं. हालांकि कैपिटल फोर्थ कॉन्सर्ट को तय समय पर ही रखा गया है, बस सुरक्षा के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं।  फेयर आयोजित करने वाली संस्था फ्रीडम 250 ने एक्स पर बयान जारी कर कहा कि उनके लिए मेहमानों, कर्मचारियों और कलाकारों की सुरक्षा सबसे जरूरी है, इसलिए फेयर को शाम पांच बजे तक बंद रखा गया. इसी गर्मी के चलते वर्जीनिया के लीसबर्ग और मैरीलैंड के लॉरेल तथा टकोमा पार्क में स्वतंत्रता दिवस की परेड रद्द कर दी गई हैं।  दूसरी तरफ, अमेरिकी कैपिटल पुलिस ने बताया कि शाम को होने वाला वार्षिक कैपिटल फोर्थ कॉन्सर्ट तय समय रात आठ बजे ही शुरू होगा, लेकिन गर्मी को देखते हुए दर्शकों के लिए गेट शाम सात बजे  खोले जाएंगे।  पुलिस ने लोगों से पानी की बोतलें साथ लाने की अपील की है. इस कॉन्सर्ट में पैटी लाबेल, एलन जैक्सन, शिकागो और कूल एंड द गैंग जैसे कलाकार परफॉर्म करेंगे. गुरुवार शाम हुई रिहर्सल में गर्मी की वजह से आम लोगों को जाने की इजाजत नहीं दी गई थी।  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शाम को साउथ डकोटा जाकर माउंट रशमोर पर भाषण देंगे और आतिशबाजी देखेंगे. वे कल शाम वॉशिंगटन में भी भाषण देंगे, जिसके बाद बड़ा आतिशबाजी शो होगा।  भीषण गर्मी के कारण एमट्रेक ने भी उत्तर पूर्वी इलाके में कुछ ट्रेनें रद्द कर दी हैं, क्योंकि गर्मी से पटरियां प्रभावित हो सकती हैं. न्यूयॉर्क में मेयर जोहरान मामदानी ने बिजली बचाने की अपील की, जिस पर रिपब्लिकन नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 

सिंधु जल विवाद में चीन की एंट्री क्यों? भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने ड्रैगन का क्यों लिया सहारा

नई दिल्ली  पाकिस्तान दशकों से सिंधु से अपनी प्यास बुझा रहा था. सिंधु जल समझौते से फायदा उठा रहा था. मगर वह अपनी औकात भूल गया. उसे यह याद नहीं रहा कि सिंधु जल समझौते की चाबी भारत के पास है. पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक करवाकर बहुत बड़ी गलती कर दी. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को दोतरफा मार मारी. पहले तो ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को गहरे जख्म दिए. उसके बाद सिंधु जल समझौते को तोड़कर पाकिस्तान के होश ठिकाने लगा दिए. भारत ने जब से सिंधु का पानी रोका है, तब से पाकिस्तान की हालत खराब है. वह पानी के लिए तड़प रहा है. पाकिस्तानी नेताओं के बयान में बार-बार सिंदु का दर्द झलक रहा है. अलग-अलग मंचों पर सिंधु का राग अलाप रहा है. जब इन सबसे भारत पर कोई असर नहीं पड़ा तो पाकिस्तान अब चीन के पल्लू में जा छिपा है. पाकिस्तान ने अबकी बार सिंधु जल विवाद पर सीधे चीन को घसीट लिया है।  दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर विवाद पुराना है. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने साफ कर दिया है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल सकती. इसके बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. अब पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद में चीन का नाम भी जोड़ दिया है. पाकिस्तान का कहना है कि हिमालय से निकलने वाली नदियां सिर्फ भारत और पाकिस्तान की नहीं हैं, बल्कि चीन भी इनका बड़ा हितधारक है. सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान ने अचानक चीन को इस विवाद में क्यों घसीटा? पाकिस्तान की नई रणनीति क्या है? सबसे पहले जानते हैं कि पाकिस्तान ने अब चीन का नाम कैसे और क्यों लिया है. दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि हिमालय से निकलने वाली नदियां कुदरत की देन हैं. ये नदियां सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती हैं. उनका कहना है कि चीन से भी कई बड़ी नदियां निकलती हैं, इसलिए पानी का मुद्दा पूरी मानवता से जुड़ा है और चीन की भूमिका भी अहम है. यानी पाकिस्तान यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का मुद्दा है।  पाकिस्तान का पूरा बयान क्या है? पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘चीन के बारे में दो सवाल थे. सबसे पहले हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियों का पानी कुदरत की एक बड़ी देन है. हिमालयी नदी प्रणाली अल्लाह की एक नेमत है, जो सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती है. चीन की नदियां भी वहीं से निकलती हैं. इसलिए, यह पूरी इंसानियत की साझा विरासत है. पानी से जुड़े बड़े मुद्दों पर चीन का रवैया हमेशा सकारात्मक रहेगा, क्योंकि वह सिर्फ़ दक्षिण एशिया (भारत और पाकिस्तान) में बहने वाली नदियों के मामले में ही नहीं, बल्कि हिमालय से चीन और सुदूर पूर्व (हमारे पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) की ओर बहने वाली विशाल नदी प्रणालियों के मामले में भी एक अहम पक्षकार है।  चीन का नाम क्यों लिया? अब सवाल है कि आखिर पाकिस्तान ने चीन का नाम क्यों लिया. तो इसका जवाब सिंपल है- प्रेशर यानी दबाव. जी हां, सिंधु जल पर पाकिस्तान छटपटा रहा है. भारत ने जब से पानी रोका है, तब से वह बिलबिला रहा है. वह हर कोशिश कर रहा है मगर सिंधु का एक कतरा तक नहीं मिल पा रहा है. भारत साफ कर चुका है, पहले आतंकाद रोको, तभी पानी मिलेगा. इसलिए पाकिस्तान इस समय कूटनीतिक दबाव में है. भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कई मंचों पर घेरा है. ऐसे में पाकिस्तान चाहता है कि चीन खुलकर उसके पक्ष में बोले और भारत पर दबाव बने।  पाकिस्तान को चीन से क्या उम्मीद यह हकीकत है कि चीन बहुत समय से पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है. यूं कहिए कि वह पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. इसलिए पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन उसके समर्थन में आवाज उठा सकता है. मगर बीते कुछ समय से भारत-चीन के रिश्ते भी बेहतर हुए हैं. अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते भारत और चीन में नजदीकियां बढ़ी हैं. ऐसे में पाकिस्तान का चीन खुलकर साथ दे और भारत का विरोध करे, इसकी संभावना बहुत कम है. इसलिए यहां पाकिस्तान की दाल गलती नहीं दिख रही है।  चीन क्यों नहीं देगा दखल भारत-पाकिस्तान के इस सिंधु जल मसले पर चीन के न बोलने की एक और वजह है. भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल विवाद का आधार सिंधु जल संधि है. यह समझौता सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इसमें चीन किसी भी रूप में पक्षकार नहीं है. इसलिए चीन चाहकर भी दो देशों के मसले में मौजूदा हालात में न बोलेगा और न दखल देगा. वैसे भी लीगली भी देखें तो सिंधु जल संधि में चीन की कोई भूमिका नहीं है।  पाकिस्तान को किस बात का डर? पाकिस्तान के लिए सिंधु का पानी संजीवनी से कम नहीं है. पाकिस्तान बहुत हद तक सिंधु के पानी पर जिंदा है. पाकिस्तान की खेती और पीने के पानी का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. अगर भारत संधि के तहत मिले अपने अधिकारों का अधिकतम इस्तेमाल करता है या परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाता है, तो पाकिस्तान को भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता हो सकती है. इस बार तो वैसे भी बाढ़ ने पाकिस्तान को बचा लिया. मगर बाढ़ नहीं आती तो पाकिस्तान में अभी त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहा होता।  सिंधु जल पर भारत का रुख क्या है? सिंधु जल समझौते पर भारत का रुश साफ है. भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. पाकिस्तान जब तक आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तब तक उसे एक बूंद भी सिंधु का पानी नहीं मिलेगा. भारत का तर्क है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते. भारत यह भी कह … Read more

Oil Import पर घटेगी निर्भरता? SBI रिपोर्ट में 2030 तक भारत की बड़ी तैयारी का खुलासा

नई दिल्‍ली ईरान-अमेरिका जंग के दौरान भारत को कच्‍चे तेल के आयात में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कई देश से ज्‍यादा कीमत पर कच्‍चे तेल का आयात करना पड़ा, जिस कारण देश का आयात बिल काफी बढ़ गया।  अब देश अपने आयात बिल को कम करने पर फोकस कर रहा है. साथ ही एनर्जी को लेकर दूसरे देशों से निर्भरता को कम कर रहा है. जिसे लेकर सरकार ने इलेक्‍ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ा दी है और इसे प्रमोट भी कर रही है. नियामकी चीजों में ढील भी दी गई है. हर तरफ से सरकार का फोकस कच्‍चे तेल को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है. इस बीच, SBI की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया गया है।  SBI की रिपोर्ट कहती है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2030 तक भारत एक बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा, जिससे उसका आयात बिल 1 लाख करोड़ रुपये कम हो सकता है, जिससे भारत को एक बड़ी मदद मिलेगी. हालांकि, इसके लिए भारत को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं… 2030 तक हो सकता है ये बड़ा बदलाव दरअसल, रिपोर्ट का कहना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए ऐसा लगता है कि 2027 से 2030 के बीच 35 लाख इलेक्ट्रिक वाहन, पेट्रोल वाहनों की जगह ले सकते हैं. अगर 2030 तक घरेलू ऑटो मार्केट में 20 फीसदी ईवी का हिस्‍सा होता है तो भारत का इम्‍पोर्ट बिल 1 लाख करोड़ रुपये तक कम हो जाएगा।  रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल मार्च से जून महीने के दौरान, हर महीने एवरेज 2.30 लाख ईवी वाहनों का रजिस्‍ट्रेशन हुआ है. यह 2025 तक हर महीने 1.3 लाख था. इसका मतलब है कि हर महीने ईवी रजिस्‍ट्रेशन की संख्‍या में करीब 1 लाख की बढ़ोतरी हुई है।  चार्जिंग इंफ्रा बढ़ाने पर जोर  SBI की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अलग-अलग राज्‍यों में चार्जिंग स्‍टेशनों को लेकर लोड अलग-अलग है. कुछ राज्‍यों में हर चार्जिंग स्‍टेशन 200 से ज्‍यादा ईवी की सेवा देते हैं और दूसरे राज्‍यों में यह संख्‍या 50 वाहनों तक ही सीमित है. भारत में ईवी चार्जिंग की सफलता, चार्जिंग स्‍टेशनों और ईवी इंफ्रा पर निर्भर करेगी. भारत में कुल 29,151 चार्जिंग स्‍टेशन हैं. इसमें भी कर्नाटक और महाराष्‍ट्र में कुल देश का 35 फीसदी ईवी इंफ्रा डेवलप है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सबसे पहले हर राज्‍यों में चार्जिंग इंफ्रा को बढ़ाने पर जोर देना होगा।  दूसरे देशों पर निर्भरता होगी कम  अगर सरकार और राज्‍य पूरी क्षमता के साथ ईवी को प्रमोट करते हैं और उसके सफलता के लिए सही प्रयास किए जाते हैं तो यह कच्‍चे तेल के आयात में बड़ी कटौती कर सकती है. देश में पेट्रोल-डीजल पंपो की संख्‍या कम हो सकती है, क्‍योंकि ईवी के आने से ईंधन भरवाने की समस्‍या कम हो जाएगी. इस वजह से दूसरे देशों-खासकर मिडिल ईस्‍ट और अमेरिका जैसे दशों से कच्‍चे तेल की निर्भरता कम हो जाएगी। 

Monsoon Session 2026: 20 जुलाई से संसद सत्र की संभावना, PM-CM पद से जुड़े अहम विधेयक पर हो सकती है चर्चा

नई दिल्ली संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस बार मॉनसून सत्र तीन सप्ताह तक चल सकता है। हालांकि संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति में इसपर कोई फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर चार सप्ताह तक मॉनसून सत्र चलता है और इसमें 20 बैठकें होती हैं। हालांकि इस बार बैठकों की संख्या कम भी हो सकती है। बता दें कि पश्चिम बगाल, असम और पुदुच्चेरी में बीजेपी की जीत और कई पार्टियों में चल रही अंदरूनी कलह के बीच यह सत्र हो रहा है। ऐसे में सदन में कई मामलों को लेकर हंगमा होने के भी आसार हैं। टीएमसी के 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन करने का ऐलन कर दिया है। इसके अलावा शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा के साथ सात सांसद पहले ही बीजेपी के साथ आ गए हैं। अब एनसीपी (SP) में भी टूट के कयास लगाए जा रहे हैं। टीएमसी और शिवसेना सांसदों पर भी होगा फैसला लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को टीएमसी के 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को लेकर भी फैसला करना है। इन सांसदों ने उन्हें अलग गुट की मान्यता देने का प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर को दिया है। जानकारों का कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले भी इसपर फैसला हो सकता है। राज्यसभा में सत्तापक्ष के समीकरण काफी मजबूत हो गए हैं। महिला आरक्षण विधेयक फिर पेश कर सकती है सरकार पिछले सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिर गया था। लोकसभा में संख्या कम होने की वजह से निचले सदन में ही विधेयक पारित नहीं हो पाए थे। हालांकि अगर इस बार मॉनसून सत्र से पहले ही स्पीकर फैसला करते हैं तो सत्तापक्ष दोनों सदनों में मजबूत हो सकता है। ऐसे में सरकार महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक 2029 को लोकसभा में पेश कर सकती है। जानकारी के मुताबिक सरकार इन विधेयकों का मसौदा फिर से तैयार कर रही है। इसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया जा सकता है। दक्षिण के राज्यों का कहना था कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के निर्धारण से उनका प्रतिनिधित्व संसद में कमजोर हो जाएगा। इसी समस्या को टालने के लिए सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का विधेयक लाया जा सकता है। पीएम-सीएम जेल वाला बिल सरकार इस सत्र में पीएम और सीएम की कुर्सी छीनने वाला बिल भी ला सकती है। बताया जा रहा है कि संशोधन विधेयक के लिए ऐसे प्रावधान किए जा सकते हैं कि सजा होने पर सीएम और पीएम की कुर्सी छीन ली जाए। इसके अलावा कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए अन्य सिफारिशें भी की जा सकती है। एक देश एक चुनाव बिल को पारित कराने के लिए भी सरकार जोर लगा सकती है। इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, एफसीआरए बिल, एंटी डोपिंग बिल भी पेश किया जा सकता है।

Jaish-e-Mohammed पर ATS की बड़ी कार्रवाई, दो राज्यों से 8 संदिग्धों को दबोचा

 गांधीनगर गुजरात ATS (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने आतंक के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े 8 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी गुजरात में आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय नेटवर्क बनाने के लिए काम कर रहे थे। इस बारे में जानकारी देते हुए गुजरात एटीएस ने बताया कि इन सभी 8 आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 13, 17, 18, 38, 39 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 148 और 61 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ATS ने इन आठ संदिग्धों को दबोचा ATS ने बताया कि आरोपियों की पहचान अहमद, पिता अब्दुल्ला गाज़ीवाला, इब्राहिम घाघा, पिता मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर, पिता अब्दुल्ला गाजीवाला, जकारिया दुर्रानी, ​​पिता मोहम्मद अम्मार घाघा, मुफ्ती फौज़ान, पिता इस्माइल दौवा, मोहम्मद अमीन शेरा, मोहम्मद अब्दुल, पिता रहमान सावदी और बिलाल मोहम्मद, पिता अम्मार घाघा के रूप में हुई है। इससे एक दिन पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए गुरुवार को पुलिस अधिकारी ने बताया कि, इस बाबत तीन आरोपियों को पंजाब से और एक को दिल्ली से पकड़ा गया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को उनके आकाओं ने दिल्ली में धार्मिक स्थलों और पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी करने का काम सौंपा था। दिल्ली में आतंकी गतिविधि को देना चाहते थे अंजाम अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभदीप सिंह उर्फ विशाल (23), गुरजंत सिंह उर्फ ऋषि (22), साजन सिंह उर्फ हनी (28) और गगनप्रीत (24) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि ये आरोपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट शहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों के इशारे पर दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। बचने के लिए विदेशी नंबरों का कर रहे थे इस्तेमाल एक अधिकारी ने बताया कि पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी अपने पाकिस्तानी आकाओं द्वारा मुहैया कराए गए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सशस्त्र कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों से इतने हथियार बरामद पुलिस ने आरोपियों के पास से एक जिगाना पिस्तौल, एक .30 बोर पिस्तौल, नौ कारतूस और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विशेष प्रकोष्ठ को खुफिया जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान स्थित आईएसआई एजेंट शहजाद भट्टी अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली-एनसीआर में आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहा है और इसके लिए उसने पंजाब के युवाओं को भर्ती किया है।

EPFO Portal Update: अब वेबसाइट से नहीं होगा UAN एक्टिवेशन, एक हफ्ते बाद पोर्टल खुला; जानें क्या बदला

 नई दिल्‍ली कई बार डेडलाइन बढ़ाने और 8 दिनों तक लगातार बंद रखने के बाद फाइनली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) की वेबसाइट को फिर से बहाल कर दिया गया है, लेकिन अब भी कई सर्विसेज को यूज करने में थोड़ी दिक्‍कत आ सकती है।  EPFO ने अपने पोर्टल पर जानकारी शेयर करते हुए कहा है कि सर्विस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन और मेंबर एक्‍सप्रीएंस को बेहतर बनाने के लिए महत्‍वपूर्ण डेटाबेस और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. सदस्‍य और नियोक्‍ता सर्विस सही तरीके से शुरू कर दी गई हैं और उपयोग के लिए उपलब्‍ध हैं।  EPFO ने आगे कहा कि क्‍लेम और सर्विस रिक्वेस्‍ट को चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से प्रॉसेस किया जाएगा. साथ ही शुरुआती 2 सप्ताह की अवधि के दौरान सटीकता तय करने के लिए अतिरिक्त वेरिफिकेशन और अथेंटिफिकेशन जांच भी की जाएगी।  EPFO ने स्पष्ट किया है कि अब UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा पूरी तरह UMANG App पर शिफ्ट कर दी गई है, यानी अगर किसी कर्मचारी को अपना UAN एक्टिवेट करना है या पहली बार UAN बनवाना है, तो उसे अब EPFO पोर्टल की बजाय UMANG ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इस प्रक्रिया में आधार आधारित Face Authentication (FAT) का उपयोग किया जाएगा, जिससे पहचान की पुष्टि अधिक सुरक्षित और आसान होगी। अगर आपका UAN अभी तक एक्टिव नहीं है, तो सबसे पहले अपने मोबाइल में UMANG App डाउनलोड करें। इसके बाद ऐप खोलकर EPFO Services में जाएं। यहां “UAN Services Through Face Auth” के अंदर “UAN Activation” विकल्प चुनें। फिर स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें। इसके बाद आपका UAN सफलतापूर्वक एक्टिवेट हो जाएगा। पहले EPFO पोर्टल के जरिए सीधे नया UAN बनाया जा सकता था, लेकिन अब यह सुविधा भी वेबसाइट से हटा दी गई है। अगर किसी कर्मचारी का PF अकाउंट है लेकिन अभी तक UAN नहीं बना है, तो वह UMANG App में “UAN Allotment and Activation” विकल्प चुनकर अपना नया UAN प्राप्त कर सकता है। इसके लिए मोबाइल नंबर सत्यापित करना होगा, आवश्यक सदस्य विवरण भरना होगा और आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करना होगा। नए EPFO पोर्टल पर UAN Retrieval की प्रक्रिया पहले से कहीं आसान कर दी गई है। अगर आपको अपना UAN याद नहीं है, तो पोर्टल पर अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और मांगे गए पहचान या पते से जुड़े दस्तावेज अपलोड करें। इसके बाद मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करके आप आसानी से अपना UAN दोबारा प्राप्त कर सकते हैं। EPFO ने यह भी स्पष्ट किया है किडेथ क्लेम यानी सदस्य की मृत्यु के बाद क्लेम करने की सुविधा अभी भी यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर उपलब्ध रहेगी। नामांकित व्यक्ति (Nominee) या लाभार्थी पेंशन और अन्य दावों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी का आधार से लिंक मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए और बैंक खाते की जानकारी तैयार रखनी होगी। आवेदन के दौरान मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक या कैंसिल चेक और जन्म तिथि का प्रमाण जैसे दस्तावेज PDF फॉर्मेट में अपलोड करने होंगे। हर फाइल का साइज 2 MB से कम होना चाहिए और फाइल के नाम में स्पेस नहीं होना चाहिए। UMANG (Unified Mobile Application for New-age Governance) भारत सरकार का आधिकारिक मोबाइल ऐप है, जिसके जरिए नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। EPFO की अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं भी अब इसी ऐप के माध्यम से उपलब्ध हैं। इससे कर्मचारियों को EPFO कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी और अधिकांश काम घर बैठे मोबाइल से ही पूरे किए जा सकेंगे। EPFO के नए पोर्टल और UMANG ऐप के जरिए सेवाओं को अधिक डिजिटल, सुरक्षित और आसान बनाने की कोशिश की गई है। अगर आप EPF सदस्य हैं, तो अब UAN से जुड़ी सेवाओं के लिए UMANG ऐप का इस्तेमाल करना ही सबसे आसान और आधिकारिक तरीका होगा। ईपीएफओ ने दी ये सलाह सदस्यों और नियोक्ताओं से अनुरोध है कि वे धैर्य रखें, क्योंकि इस अवधि के दौरान क्‍लेम्‍स और कुछ सेवाओं के प्रॉसेस में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है. सदस्यों से यह भी अनुरोध है कि वे व्यस्त समय के दौरान ऑनलाइन सेवाओं का बार-बार उपयोग करने या बार-बार अनुरोध करने से बचें. EPFO अपने सभी सदस्‍यों के धैर्य और सहयोग की सराहना करता है और अपने सभी सदस्‍यों के लिए सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।  क्‍या-क्‍या चीजें हुईं अपडेट?  ईपीएफओ ने सिर्फ इतनी जानकारी दी है कि सभी सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर दिया गया है. हालांकि, उसने इस चीज की जानकारी नहीं दी कि क्‍या-क्‍या नई चीजें शुरू हुई हैं या क्‍लेम या अन्‍य प्रॉसेस अब कितना आसान हो जाएगा? सिर्फ इतना बताया गया है कि मेंटेनेस काम और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया गया है।  एक हफ्ते तक बंद थी साइट  ईपीएफओ की वेबसाइट पिछले 7 दिनों से बंद की गई थी. ईपीएफओ का कहना है कि यह सर्विस इसलिए बंद थी, क्‍योंकि वह जरूरी डेटा और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रहा था, ताकि सदस्‍यों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।   गौरतलब है कि शुरुआत में, ईपीएफओ ने कहा था कि मेंटेनेस के लिए 28 जून को समाप्त हो जाएगा और सेवाएं 29 जून को फिर से शुरू हो जाएंगी. बाद में उसने समयसीमा में संशोधन किया और डेडलाइन को 1 जुलाई की रात 11:59 बजे तक बढ़ा दिया, और अंत में घोषणा की कि सेवाएं 3 जुलाई, 2026 को फिर से शुरू हो जाएंगी, लेकिन आज दोपहर बाद ये सेवाएं बहाल की गई हैं। 

PM मोदी के बाद कौन संभाल सकता है कमान? अमित शाह, योगी समेत कई नामों पर सर्वे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2014 से प्रधानमंत्री के तौर पर देश की कमान संभाल रहे हैं। हाल ही में वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह हमेशा चर्चा का मुद्दा रहता है कि भारतीय जनता पार्टी में उनके बाद इस पद को कौन संभाल सकता है। हालांकि, भाजपा नेता पीएम मोदी के ही लगातार नेतृत्व की बात करते रहे हैं। हाल ही में उनके उत्तराधिकारी को लेकर एक पोल किया गया था। लाइव हिन्दुस्तान की तरफ से जून में पोल किया गया था, जिसमें पीएम मोदी के संभावित उम्मीदवार को लेकर जनता की राय पूछी गई थी। आंकड़े बताते हैं कि इस रेस में सबसे आगे उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चल रहे हैं। पोल में शामिल आधे से ज्यादा प्रतिभागियों ने उनके नाम का चुनाव किया है। क्या रहे नतीजे पोल के मुताबिक, 58 फीसदी लोगों ने योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लगाई। जबकि, 22 प्रतिशत लोग केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समर्थन में थे। 5 प्रतिशत लोगों ने नितिन गडकरी और 3 फीसदी लोगों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नाम का विकल्प चुना। जबकि, 9 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्होंने किसी और नेता के विकल्प का चुनाव किया। PM मोदी के नाम रिकॉर्ड मोदी 10 जून को भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले व्यक्ति बन चुके हैं। वह लगातार 4,399 दिन से इस पद पर हैं और उन्होंने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नेहरू 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे थे। मोदी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में भी 9000 से भी अधिक दिन तक कार्य कर चुके हैं। उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में नौ जून 2024 को शपथ ली थी। बने रहेंगे पीएम बीते साल अप्रैल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट की अटकलों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद भी मोदी ही देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा था, 'यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के बारे में सोचने का सही समय नहीं है, क्योंकि 2029 में मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे।' योगी आदित्यनाथ का क्या था जवाब बीते साल पीटीआई से बातचीत में भावी पीएम उम्मीदवार को लेकर आदित्यनाथ से सवाल किया गया था। तब उन्होंने कहा था, 'देखिए, मैं एक राज्य का मुख्यमंत्री हूं। पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश की जनता के लिए यहां लगाया है और राजनीति मेरा फुल टाइम जॉब नहीं है। फिलहाल, हम यहां काम कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मैं योगी हूं।'