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भारी बारिश के बाद घेपन झील का दायरा 173% बढ़ा, हिमाचल और पड़ोसी क्षेत्रों में खतरा बढ़ा

केलांग  हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में घेपन झील का दायरा बेहद अधिक बढ़ गया है. जलवायु परिवर्तन की वजह से लगातार घाटी के ग्लेशियर पिघल रहे हैं और ऐसे में झील का दायरा बढ़ रहा है. घाटी में मौसम में काफी बदलाव आया और पूरा पैटर्न बदला है. जानकारी के अनुसार, लाहौल घाटी के सिस्सू के ऊपर घेपल झील है. यह झील 13583  फीट की ऊंचाई पर स्थित है और बीते 33 साल में  झील का दायरा 173 फीसदी बढ़ गया है.  फिलहाल, करीब 101.30 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली ढाई किलोमीटर लंबी यह झील लाहौल घाटी के लिए गंभीर खतरा बन गई है. नेशनल रिमोट सेंसिग सेंटर ने चेताया है कि यदि यह झील टूटी हिमाचल प्रदेश से लेकर जम्मू और पकिस्तान तक तबाही मचा सकती है. सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय  का केंद्रीय जल आयोग और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्पयुटिंग भी कई दशकों से लाहौल की झील पर अध्ययन कर रहे है. अध्ययन में पता चला है कि झील की लम्बाई 2,464 मीटर और चौड़ाई 625 मीटर है. झील लाहौल घाटी के लिए गंभीर खतरा बन गई है. ग्लेशियर पिघलने से बनी हिमाचल की सबसे बडी इस झील में 35.08 मिलियन क्यूबिक मीटर तक पानी है. झील के बढ़ते आकार और ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के कारण अगर पानी का स्तर ऐेसे ही बढ़ता रहा तो इसके टूटने की आशंका बढ जाएगी. ऐसे में झील को संवेदनशील सूची में रखा गया है. क्या कहती हैं डीसी लाहौल स्पीति लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण बडाना ने बताया कि विशेषज्ञों और तकनीकी टीम ने झील का निरीक्षण किया है. झील में हिमाचल का पहला अर्ली वार्निग सिस्टम स्थापित किया जाएगा. यह सिस्टम सैटेलाइट से काम करेगा और मौसम विभाग और प्रशासन सूचना देगा. गौरतलब है कि अटल टनल से आगे सिस्सू गांव है और इसके ऊपर छह सात घंटे की पैदल यात्रा के बाद घेपन झील आती है. यहां पर ट्रैकर्स भी जाते हैं.

US नंबर वन’ की हुंकार: ट्रंप ने दिखाई परमाणु शक्ति, दी फिर कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दुनिया को तबाह करने के दावे को दोहराते हुए कहा कि अमेरिका के पास पहले से ही इतने परमाणु हथियार हैं कि दुनिया को 150 बार तबाह किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यही भी कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया में नंबर वन है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ मुलाकात को शानदार बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका आखिरी लक्ष्य परमाणु निरस्त्रीकरण है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "मुझे लगता है कि परमाणु निरस्त्रीकरण एक बड़ी बात होगी। हम दुनिया को 150 बार तबाह कर सकते हैं।" 'रूस और चीन अमेरिका से काफी पीछे' ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "परमाणु क्षमताओं के मामले में अमेरिका पहले, रूस दूसरे और चीन तीसरे नंबर है। ये काफी पीछे हैं लेकिन अगले पांच सालों में ये लोग बराबरी पर आ जाएंगे। इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैंने व्लादिमीर पुतिन और शी चिनफिंग से बात की है और हर कोई उस पैसे को अब दूसरी चीजों पर खर्च करना चाहेगा।" 'दुनिया में शांति चाहता हूं' ट्रंप ने यह भी कहा, "मैं पूरी दुनिया में शांति चाहता हूं।" ट्रंप की यह टिप्पणी पिछले हफ़्ते उनके उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करेगा और उन्होंने पेंटागन को हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। उस समय ट्रंप ने कहा था, "आपको बहुत जल्द पता चल जाएगा। लेकिन हम कुछ परीक्षण करने जा रहे हैं, हां। दूसरे देश ऐसा करते हैं। अगर वे ऐसा करने जा रहे हैं, तो हम भी करेंगे। मैं यहां कुछ नहीं कहूंगा।"  

अवैध परमाणु गतिविधियों पर भारत का बड़ा बयान: ट्रंप के कमेंट को भी लिया गंभीरता से

नई दिल्ली  ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण के दावों पर भारत ने तगड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि यही तो पाकिस्तान का इतिहास है। उन्होंने कहा कि हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह से सतर्क हैं। वह गलत और अवैध तरीके से ही तो सबकुछ करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दशकों से इसी तरह से तस्करी कर रहा है। निर्यात नियंत्रण का उल्लंघन कर रहा है। गुप-चुप ढंग से साझेदारियां बना रहा है। जायसवाल ने आगे कहा कि हमने हमेशा ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस तरफ खींचा है। डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा था गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन दशक के अंतराल के बाद परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करने की अपनी योजना को सही ठहराया। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान और चीन उन देशों में शामिल हैं जो परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ट्रंप के इसी बयान का जिक्र कर रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि निश्चित रूप से उत्तर कोरिया परीक्षण कर रहा है। पाकिस्तान भी परीक्षण कर रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले सप्ताह कहा था कि रूस ने पोसाइडन परमाणु-सक्षम ‘सुपर टॉरपीडो’ का परीक्षण किया है। ट्रंप ने अपने वक्तव्य में परमाणु हथियारों के परीक्षण की प्रक्रिया पुनः शुरू करने के अपने निर्णय को दृढ़तापूर्वक उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि हथियारों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण आवश्यक है।   अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दूसरे देश परीक्षण करते हैं, और हम परीक्षण नहीं करते। हमें परीक्षण करना ही होगा। रूस ने भी कुछ दिन पहले थोड़ी धमकी दी थी जब उसने कहा था कि वे कुछ अलग स्तर के परीक्षण करने वाले हैं। लेकिन रूस परीक्षण करता है, चीन परीक्षण करता है, और हम भी परीक्षण करने वाले हैं। इस दौरान रणधीर जायसवाल ने कई अन्य बातों का भी जिक्र किया। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के भारत आने के दावे की भी बात की। प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि ट्रंप कब भारत आएंगे। उन्होंने कहा कि इस बारे में जानकारी मिलते ही वह बताएंगे।  

वंदे मातरम को बाँटना ही विभाजन की शुरुआत थी: पीएम मोदी

नई दिल्ली वंदे मातरम को भारत की शाश्वत संकल्पना बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष भर चलने वाले स्मरणोत्सव का शुभारंभ विशेष डाक टिकट और सिक्के के विमोचन के साथ किया। वंदे मातरम की गौरव गाथा को विभिन्न उपमाओं-अलंकरणों से स्पंदन देते हुए पीएम मोदी ने इससे जुड़े इतिहास के एक काले पन्ने को पलटने के साथ ही बिना किसी का नाम लिए वर्तमान चुनौतियों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा- 'आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम की भावना ने पूरे राष्ट्र को प्रकाशित किया था, लेकिन दुर्भाग्य से 1937 में वंदे मातरम के महत्वपूर्ण पदों को, उसकी आत्मा के एक हिस्से को अलग कर दिया गया था। वंदे मातरम के टुकड़े किए गए थे। इस विभाजन ने देश के विभाजन के बीज भी बो दिए थे।'   'विभाजनकारी सोच देश के लिए आज भी चुनौती' पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र निर्माण का इस महामंत्र के साथ ये अन्याय क्यों हुआ? ये आज की पीढ़ी को भी जानना जरूरी है, क्योंकि वही विभाजनकारी सोच देश के लिए आज भी चुनौती बनी हुई है। नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित वंदे मातरम स्मरणोत्सव के शुभारंभ समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें इस सदी को भारत की सदी बनाना है। ये साम‌र्थ्य भारत के 140 करोड़ लोगों में है। हमें इसके लिए खुद पर विश्वास करना होगा। उन्होंने चेताया कि इस संकल्प यात्रा में हमें पथभ्रमित करने वाले भी मिलेंगे। नकारात्मक सोच वाले लोग हमारे मन में शंका-संदेह पैदा करने का प्रयास भी करेंगे। तब हमें आनंद मठ का वो प्रसंग याद करना है, जिसमें जब संतान भवानंद वंदे मातरम गाता है तो एक दूसरा पात्र तर्क-वितर्क करता है। वह पूछता है कि तुम अकेले क्या कर पाओगे? तब वंदे मातरम से प्रेरणा मिलती है, जिस माता के इतने करोड़ पुत्र-पुत्री हों, उसके करोड़ों हाथ हों, वो माता अबला कैसे हो सकती है? 'वंदे मातरम एक ऊर्जा है' इस प्रसंग के साथ ही भारत के जन-बल का महत्व रेखांकित करते हुए पीएम ने कहा कि आज तो भारत माता की 140 करोड़ संतान हैं। उसके 280 करोड़ भुजाएं हैं। इनमें से 60 प्रतिशत से भी ज्यादा नौजवान हैं। दुनिया का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय लाभ हमारे पास है। ये साम‌र्थ्य इस देश का है, ये साम‌र्थ्य मां भारती का है। ऐसा क्या है, जो आज हमारे लिए असंभव है? ऐसा क्या है, जो हमें वंदे मातरम के मूल सपने को पूरा करने से रोक सकता है? प्रधानमंत्री ने राष्ट्र गीत को मंत्र बताते हुए देशवासियों को ऊजीकृत करने का प्रयास किया। कहा कि वंदे मातरम एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, एक संकल्प है। ये एक शब्द मां भारती की साधना है। ये आत्मविश्वास से भर देता है और हमारे भविष्य को नया हौसला देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं, जिसकी सिद्धि न हो सके। ऐसा कोई लक्ष्य नहीं, जो हम भारतवासी पा ना सकें। देश बांटने का अंग्रेजों का खतरनाक प्रयोग था बंगाल विभाजन प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम के सहारे इतिहास के कुछ पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई का शायद ही ऐसा कोई अध्याय होगा, जिससे वंदे मातरम किसी न किसी रूप से जुड़ा नहीं था। 1896 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता अधिवेशन में वंदे मातरम गाया। 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ। ये देश को बांटने का अंग्रेजों का एक खतरनाक प्रयोग था, लेकिन वंदे मातरम उन मंसूबों के आगे चट्टान बनकर खड़ा हो गया। बंगाल के विभाजन के विरोध में सड़कों पर एक ही आवाज थी- वंदे मातरम। उन्होंने कहा कि बरिसाल अधिवेशन में जब आंदोलनकारियों पर गोलियां चलीं, तब भी उनके होंठों पर वही मंत्र था। भारत के बाहर रहकर आजादी के लिए काम कर रहे वीर सावरकर जैसे स्वतंत्र सेनानी जब आपस में मिलते थे तो उनका अभिवादन वंदे मातरम से ही होता था। पीएम ने महात्मा गांधी, श्री अरबिंदो और भीकाजी कामा का भी उल्लेख किया।  

सुप्रीम कोर्ट की चिंता: आवारा कुत्तों के बढ़ते हमले से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि दांव पर

 नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के अस्पतालों, शैक्षणिक केंद्रों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन जैसे क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन समेत विभिन्न परिसरों में कुत्तों के हमले का जिक्र किया है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि ये आवारा कुत्ते विदेशी नागरिक पर भी हमला कर रहे हैं, जिससे देश की छवि पर असर पड़ रहा है।  कोर्ट ने अपने आदेश में एनडीटीवी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि अदालत के संज्ञान में यह भी लाया गया है कि भारत आने वाले विदेशी नागरिक भी अकारण आवारा कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। बेंगलुरु में हुई ऐसी ही एक घटना में, सुबह की दौड़ के दौरान एक वेल्श उद्यमी को आवारा कुत्ते ने काट लिया। यह घटना इस बात पर जोर देती है कि यह समस्या न तो ग्रामीण या घनी आबादी वाले इलाकों तक सीमित है और न ही केवल असुरक्षित नागरिकों तक सीमित है, बल्कि इसने ऐसे रूप धारण कर लिए हैं जो जन सुरक्षा, पर्यटन और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देश की छवि पर भी असर डाल रहे हैं। आदेश में कोर्ट ने कहा, 'इस न्यायालय को विभिन्न समाचार रिपोर्टों और मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंड/डिपो (अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों सहित) और रेलवे स्टेशनों, यानी संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि के बारे में अवगत कराया गया है। स्कूल परिसरों में बच्चों पर हमले, अस्पताल परिसरों में मरीजों और तीमारदारों को काटने, खेल स्टेडियमों में आवारा कुत्तों द्वारा एथलीटों और अधिकारियों पर हमला करने और बस स्टैंड/डिपो और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों/यात्रियों पर आवारा कुत्तों द्वारा हमला करने की घटनाएं इस न्यायालय के संज्ञान में आई हैं।' अदालत ने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति, विशेष रूप से शिक्षण, उपचार और मनोरंजन के लिए बने संस्थागत स्थानों में, न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि इन परिसरों को रोके जा सकने वाले खतरों से सुरक्षित रखने में प्रणालीगत विफलता को भी दिखाती है। यह स्थिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों, विशेषकर बच्चों, मरीजों और खिलाड़ियों के जीवन और सुरक्षा के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करती है। सर्वोच्च न्यायालय ने कुत्तों के काटने की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को आदेश दिया कि वे सभी शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, सार्वजनिक खेल परिसरों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों आदि से सभी आवारा कुत्तों को हटाना सुनिश्चित करें। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए इन सभी संस्थानों और स्थानों की उचित बाड़ लगाई जानी चाहिए।  

SC का बड़ा आदेश: ED, CBI और पुलिस को गिरफ्तारी से पहले बताना होगा कारण

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए कहा कि अब किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी से पहले पुलिस, ED, CBI या कोई भी जांच एजेंसी आरोपी को लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी मनमाने ढंग से नहीं हो सकती, बल्कि उसके पीछे ठोस, स्पष्ट और कानूनी आधार होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि उसे किस मामले में और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही एजेंसी को गिरफ्तारी के समय लिखित नोटिस/गिरफ्तारी मेमो देना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पुलिस, ईडी, सीबीआई सहित सभी जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले या गिरफ्तार करने के तुरंत बाद, उसे उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य होगा। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि यदि गिरफ्तारी की वजह आरोपी को उसकी भाषा में लिखित रूप से नहीं बताई गई, तो ऐसी गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा। बता दें कि यह फैसला जुलाई 2024 में मुंबई में हुए बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू हिट-एंड-रन केस से जुड़े ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना आवश्यक है। इस फैसले में न्यायमूर्ति मसीह ने 52 पन्नों का विस्तृत निर्णय लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मौलिक सुरक्षा है।अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को कारणों की जानकारी ‘यथाशीघ्र’ दी जानी चाहिए, ताकि आरोपी को अपने अधिकारों और कानूनी स्थिति का स्पष्ट ज्ञान हो सके। अदालत ने अपने फैसले में निम्न प्रमुख बिंदु निर्धारित किए हैं गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताना संविधान का आदेश है, और यह किसी भी परिस्थिति में टाला नहीं जा सकता। गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप में दिया जाना अनिवार्य होगा, और वह भाषा वही होनी चाहिए जिसे आरोपी समझ सके। यदि गिरफ्तारी के समय अधिकारी तत्काल लिखित कारण देने में असमर्थ हो, तो पहले मौखिक रूप से कारण बताए जाएं, और बाद में लिखित नोटिस, रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले, आरोपी को सौंपा जाना चाहिए। यदि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए गए, तो गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा, और आरोपी को रिहा होने का अधिकार होगा। देशभर में लागू होगा आदेश सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि यह फैसला पूरे भारत में तुरंत प्रभाव से लागू हो।

PM किसान सम्मान निधि: खाते में जल्द आएंगे पैसे, सरकार ने जारी की नई तारीख

नई दिल्ली  केंद्र सरकार की तरफ से किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली 21वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार हर साल किसानों को तीन बार 2-2 हजार रुपये की आर्थिक मदद देती है — यानी कुल ₹6,000 सालाना। अब किसानों को इंतजार है कि 21वीं किस्त उनके खाते में कब आएगी?   अब तक किन किसानों को मिली 21वीं किस्त केंद्र सरकार ने 26 सितंबर 2025 को उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के करीब 27 लाख किसानों के बैंक खातों में 21वीं किस्त भेज दी थी। ये भुगतान इसलिए किया गया क्योंकि इन राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से किसानों को भारी नुकसान हुआ था। पिछली यानी 20वीं किस्त 2 अगस्त 2025 को जारी हुई थी, जब करीब 9 करोड़ किसानों को इसका लाभ मिला। आमतौर पर हर चार महीने के अंतराल पर किस्त जारी होती है, इसलिए अब 21वीं किस्त नवंबर 2025 के मध्य या आखिर तक आने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बाद (14 नवंबर 2025) केंद्र सरकार अगली किस्त जारी कर सकती है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक घोषणा (Official Notification) नहीं आई है। अब सबसे आसान काम, लिस्ट में नाम चेक करना. इसके लिए सबसे पहले https://pmkisan.gov.in/homenew.aspx वेबसाइट पर जाएं. वहां फार्मर्स कॉर्नर सेक्शन में बेनिफिशियरी लिस्ट का ऑप्शन मिलेगा. क्लिक करें और अपना राज्य चुनें. फिर जिला, ब्लॉक और गांव सिलेक्ट करें. इसके बाद गेट रिपोर्ट पर क्लिक कर दें. स्क्रीन पर पूरी लिस्ट आ जाएगी. अपना नाम ढूंढें। अगर दिख रहा है तो बधाई हो, पैसे जल्द आ जाएंगे. पीएम किसान योजना का हेल्पलाइन नंबर पीएम किसान योजना ने लाखों किसानों का जीवन आसान बनाया है. खेती-बाड़ी के खर्चे निकालने में ये मदद बड़ा सहारा है. पीएम किसान योजना से जुड़ी अगर कोई दिक्कत हो तो हेल्पलाइन नंबर 155261 या 011-23381092 पर कॉल कर सकते हैं या फिर लोकल कृषि अधिकारी से बात करें।  

ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन: हर रॉकेट में 80% योगदान भारतीय उद्योग का

बेंगलुरु: ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के विकास का 50 प्रतिशत हिस्सा उद्योग संघ को सौंपना चाहती है. घरेलू एयरोस्पेस, रक्षा और इंजीनियरिंग क्षेत्र की क्षमता की सराहना करते हुए, नारायणन ने कहा कि वे पहले से ही इसरो के मिशनों के लिए लगभग 80 से 85 प्रतिशत प्रणालियों का योगदान दे रहे हैं. ISRO प्रमुख ने इंडिया मैन्युफैक्चरिंग शो के दौरान कहा कि, "आज, जब आप भारत के सबसे शक्तिशाली रॉकेट PSLV को देखते हैं, तो उन्होंने (HAL और L&T के नेतृत्व वाले भारतीय संघ ने) पहला रॉकेट तैयार कर लिया है. हम इसे इस वित्तीय वर्ष के अंत से पहले, संभवतः फरवरी तक, लॉन्च करने जा रहे हैं." भारत के एयरोस्पेस, रक्षा और सामान्य इंजीनियरिंग क्षेत्रों के प्रमुख व्यापार मेले, इंडिया मैन्युफैक्चरिंग शो (IMS 2025) का सातवां संस्करण बैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र (BIEC) में आयोजित किया गया है. नारायणन ने बताया कि, "एक बार जब हम (भारतीय संघ द्वारा) दो प्रक्षेपणों में सफल हो जाते हैं, तो हमारी योजना PSLV विकास का कम से कम 50 प्रतिशत सीधे भारतीय उद्योग संघ को देने की है." उन्होंने बताया कि भारतीय उद्योग ने "बाहुबली रॉकेट LMV3-M5 का उपयोग करके" सबसे भारी संचार उपग्रह, CMS-03 मिशन में 80 प्रतिशत योगदान दिया. ISRO अध्यक्ष ने कहा कि, "यह मिशन ISRO द्वारा प्रक्षेपित किया गया है. इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन अगर आप योगदान पर गौर करें, तो लगभग 80 से 85 प्रतिशत प्रणालियां पूरे उद्योग द्वारा प्रदान की गईं. भारतीय उद्योगों द्वारा किया गया योगदान इतना ही है." ISRO की यात्रा पर विचार करते हुए, उन्होंने कहा कि "अंतरिक्ष एजेंसी ने 21 नवंबर, 1963 को भारतीय धरती से एक अमेरिकी निर्मित छोटे रॉकेट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया था. पूरा निसार उपग्रह भारत में भारतीय उद्योगों द्वारा निर्मित, भारत में ही असेंबल और एक भारतीय रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया था." उन्होंने आगे कहा कि, "उस साधारण शुरुआत के बाद से, इस साल जुलाई ISRO के लिए एक और महत्वपूर्ण अवसर और मील का पत्थर साबित हुआ. हमने NASA और ISRO के सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) (जिसे NAISER भी कहते हैं) उपग्रह का प्रक्षेपण किया. यह JPL-NASA द्वारा एक पेलोड और एक एंटीना बनाने के लिए 10,300 करोड़ रुपये का निवेश था और भारत द्वारा भी इसी तरह का एक पेलोड बनाया गया." नारायणन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ISRO द्वारा प्रक्षेपित प्रत्येक रॉकेट में 80 प्रतिशत योगदान भारतीय उद्योग का होता है. उनके अनुसार, लगभग 450 उद्योग ISRO के मिशनों में योगदान दे रहे हैं. केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की घोषणा के बाद इन उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिला. उन्होंने कहा कि, "उस समय, देश में अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए मुश्किल से तीन-चार स्टार्टअप ही काम कर रहे थे. आज, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि देश में 330 से ज़्यादा स्टार्टअप इकोसिस्टम काम कर रहा है." इसके अलावा, ISRO ने 511 करोड़ रुपये के समझौते के ज़रिए लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) की तकनीक HAL को हस्तांतरित कर दी है, और 16 SSLV का उत्पादन निजी उद्योगों को सौंपने की योजना है. प्रमुख उपलब्धियों को याद करते हुए, नारायणन ने कहा कि 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास भारत की सॉफ्ट लैंडिंग वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक निर्णायक क्षण था. उन्होंने कहा कि, "भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग करने वाला पहला देश बना." उन्होंने मंगल ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) को भी 'सटीकता का चमत्कार' बताते हुए कहा कि, "अंतरिक्ष यान ने 60 करोड़ किलोमीटर की यात्रा की और इसका इंजन 295 दिनों के बाद बिना किसी त्रुटि के पुनः चालू हो गया, एक ऐसी उपलब्धि जो किसी अन्य देश ने अपने पहले प्रयास में हासिल नहीं की." नारायणन ने क्रायोजेनिक इंजन तकनीक में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी ज़ोर दिया, जो 1990 के दशक की शुरुआत में भारत को नहीं दी गई थी. उन्होंने आगे कहा कि, "आज, हमने तीन स्वदेशी क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणालियां विकसित की हैं. एक ऐसा देश जो कभी साइकिलों पर रॉकेट के पुर्जे ढोता था, अब विश्वस्तरीय इंजन बना रहा है." एक और उपलब्धि हासिल करते हुए, नारायणन ने कहा कि ISRO 29 जनवरी, 2024 को अपना 100वां रॉकेट प्रक्षेपण पूरा करेगा और इसे 'भारत के अंतरिक्ष इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय' बताया. उन्होंने HCL और ISRO द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित 32-बिट स्वदेशी कंप्यूटर प्रोसेसर के हालिया विकास का भी उल्लेख किया, जो इलेक्ट्रॉनिक्स स्वतंत्रता प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. ISRO प्रमुख ने कहा कि भारत मौजूदा समय में संचार, नौवहन और पृथ्वी अवलोकन आवश्यकताओं के लिए 56 उपग्रहों का संचालन कर रहा है, जिनकी संख्या तीन से चार गुना तक बढ़ाई जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच सालों के भीतर वार्षिक प्रक्षेपणों की संख्या को मौजूदा 10-12 से बढ़ाकर लगभग 50 करने का लक्ष्य भी रखा है.

आवारा पशुओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों व एजेंसियों को कार्रवाई के आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अहम निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि सभी आवारा पशुओं को सड़कों, राज्य के हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों से हटाया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे लेकर राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नगरपालिकाओं को भी निर्देश जारी किया है। इतना ही नहीं कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आवारा पशुओं को हटाने के लिए हाईवे निगरानी टीमें बनाई जाएं जो उन्हें पकड़ कर सड़कों से हटाएगी और शेल्टर होम्स में रखेगी। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में आगे आवारा कुत्तों के मुद्दे पर भी आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और उन्हें शेल्टर होम में जगह दी जाए। साथ ही उन्हें टीकाकरण के बाद भी उसी इलाके में न छोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं।   सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों- जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कुत्तों के काटने के मामलों में चौंकाने वाली बढ़ोतरी की बात कही और आदेश दिया कि अधिकारी आवारा कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें शेल्टर में टीके दिए जाएं। इसके बाद उन्हें पुरानी जगहों पर न छोड़ा जाए। इसके अलावा सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के दोबारा न घुसने देने के इंतजाम भी तय हों। कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को करेगी।  

अहमदाबाद विमान हादसा: SC ने पायलट को दोषी ठहराने से किया इंकार, पिता को दिया सांत्वना संदेश

 नई दिल्ली/ अहमदाबाद     सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहमदाबाद प्लेन क्रैश जुड़े मामले पर सुनवाई की. इस अदालत ने एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के पायलट-इन-कमांड, दिवंगत कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता से कहा, "देश में कोई भी यह नहीं मानता कि यह पायलट की गलती थी." जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह टिप्पणी 91 साल के पुष्कर सभरवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. पुष्कर सभरवाल ने इस क्रैश की एक स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सही जांच की मांग की है, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें. हमदर्दी जताते हुए, बेंच ने याचिकाकर्ता पुष्कर सभरवाल को भरोसा दिलाया कि इस हादसे के लिए उनके बेटे को दोषी नहीं ठहराया जा रहा है. इस साल जून में अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के लंदन जाने वाले विमान के पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने कहा, "इस त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है." बता दें कि इस विमान हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ उस दुर्भाग्यपूर्ण उड़ान के पायलटों में से एक, कमांडर सुमित सभरवाल के पिता पुष्कर राज सभरवाल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी वाली समिति से दुर्घटना की जांच कराने का अनुरोध किया गया था. याचिका में तर्क दिया गया है कि दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में भारी खामियां हैं. सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि जांच दल ने व्यापक तकनीकी जांच करने के बजाय, मुख्य रूप से मृत पायलटों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब अपना बचाव करने में असमर्थ हैं. याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों द्वारा की गई जांच में तथ्यों का चयनात्मक और अपूर्ण खुलासा, महत्वपूर्ण विसंगतियों की उपेक्षा, तथा उन प्रणालीगत कारणों को दबाना शामिल है जो डिजाइन या इलेक्ट्रॉनिक खराबी की ओर इशारा करते हैं. रिपोर्ट में बिना किसी पुष्टिकारक साक्ष्य या व्यापक तकनीकी विश्लेषण के जल्दबाजी में यह अनुमान लगाया गया है कि यह घटना पायलट की गलती से हुई है. याचिका में भारत संघ, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और महानिदेशक, विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर तकनीकी खामियां और चूक हैं, जिससे इसके निष्कर्ष अविश्वसनीय हैं. आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने दलील दी कि उनके मुवक्किल निष्पक्ष जांच चाहते हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एएआईबी द्वारा की जा रही वर्तमान जांच स्वतंत्र नहीं है. उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि वह विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम के नियम 12 के तहत न्यायिक निगरानी में जांच का निर्देश दे. न्यायमूर्ति ने कहा- "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह दुर्घटना घटी और उन्होंने अपने बेटे को खो दिया. लेकिन उन्हें यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि उनके बेटे पर आरोप लगाया जा रहा है या उसे दोषी ठहराया जा रहा है. हम स्पष्ट कर देंगे, कोई भी उसे किसी भी चीज के लिए दोषी नहीं ठहरा सकता." न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि पायलट के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और रिपोर्ट में दोष बांटने का कोई सवाल ही नहीं है और वास्तव में, जांच का उद्देश्य दोष बांटना नहीं है और इसका उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करना और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचना नहीं है. शंकरनारायण ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक लेख का उल्लेख किया, जो इस जांच से प्राप्त जानकारी पर आधारित है और जिसमें कहा गया है कि उनके मुवक्किल के बेटे पर हमला किया जा रहा है. न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "हमें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि एक विदेशी प्रेस, आपके मुकदमे को अमेरिकी अदालत में डब्ल्यूएसजे के खिलाफ क्या कहना चाहिए था." वरिष्ठ वकील ने कहा कि डब्ल्यूएसजे एक भारतीय सरकारी सूत्र का हवाला दे रहा है. पीठ ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और आरोप एक विदेशी प्रेस द्वारा लगाया गया है, जिसका आक्षेप तथ्यात्मक रूप से गलत है. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि इस तरह की घटिया रिपोर्टिंग इसलिए की जा रही है क्योंकि वे केवल भारत को दोष देना चाहते हैं. शंकरनारायणन ने कहा कि हमें इस घटिया रिपोर्टिंग को नज़रअंदाज करना चाहिए. पीठ ने जवाब दिया कि उनके समक्ष प्रस्तुत याचिका में ऐसा कुछ भी नहीं है. वरिष्ठ वकील ने बताया कि 3 अगस्त को, प्रतिवादी संख्या 3, जो प्रारंभिक जांच कर रहे हैं ने अपने मुवक्किल, जो अब 91 वर्ष के हैं, के घर दो अधिकारियों को भेजा. उन्होंने सवाल किया कि आपके बेटे का तलाक कब हुआ. उसे बताया गया कि करीब 15 साल पहले. इस पर यह थ्योरी बनायी जाने लगी कि वह अवसाद से ग्रस्त था इसीलिए आत्महत्या करने की कोशिश की. उनके मुवक्किल से भी उनकी पत्नी का निधन के बारे में पूछा गया. वरिष्ठ वकील ने कहा कि अधिकारियों ने उनके मुवक्किल से कहा कि इसलिए उनके बेटे को अवसाद है, जबकि उन्होंने जांचकर्ताओं के आचरण की आलोचना की. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि भारत कोई छोटा देश नहीं है, बल्कि 142 करोड़ लोगों वाला देश है. उन्होंने आगे कहा, "किसी को भी यह विश्वास नहीं है कि पायलट की कोई गलती थी. त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है." वरिष्ठ वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का बेटा पायलट था और उनका पोता भी पायलट है और वे राष्ट्र को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लोगों द्वारा इस तरह के आरोप लगाना गलत है. प्रतिवेदन सुनने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से जवाब मांगा और 10 नवंबर को एक अन्य संबंधित मामले के साथ इस मामले पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई.