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पुणे हत्या मामला: कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या में ‘प्लान A, B और C’ की साजिश सामने आई

मुंबई महाराष्ट्र के मशहूर लोहगढ़ किले में कारोबारी केतन अग्रवाल की पहाड़ी से धकेलकर हत्या करने के मामले में हर दिन रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले बाकायदा गूगल पर हत्या करने के तरीके सर्च किए थे। इतना ही नहीं दोनों ने हत्या की जगह का चुनाव करने और पकड़े जाने पर पुलिस को क्या जवाब देना है, इसकी बाकायदा रिहर्सल भी की थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को जोड़ने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस रविवार को दोनों आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच लोहगढ़ किले लेकर पहुंची, जहां पूरे क्राइम सीन को री-क्रिएट किया गया। पुलिस को गुमराह करने के लिए बनाया था प्लान B जांच अधिकारियों के मुताबिक, सिया और चेतन ने इस खौफनाक हत्याकांड को किसी मंझे हुए अपराधियों की तरह अंजाम दिया था। वारदात से पहले दोनों अकेले लोहगढ़ किले गए थे ताकि उस सटीक जगह की पहचान कर सकें जहां से केतन को नीचे धकेला जा सके। पकड़े जाने के डर से बचने के लिए उन्होंने भेष बदलने की भी योजना बनाई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने सिर्फ एक ही योजना नहीं बनाई थी, बल्कि अगर मुख्य प्लान फेल हो जाता तो उनके पास 'प्लान सी' भी तैयार था। पकड़े जाने की सूरत में पुलिस के सामने क्या कहानी सुनानी है इसकी स्क्रिप्ट उन्होंने पहले ही रट ली थी। सबूत मिटाने के लिए दोनों ने मोबाइल की पूरी चैट हिस्ट्री और रीसायकल बिन को भी साफ कर दिया था, जिसे रिकवर करने के लिए फोन फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। पहली बार झाड़ियों ने बचाई जान, सांप का बहाना बनाया पुलिस फाइलों से पता चला है कि 18 जून को केतन की हत्या करने से पहले भी सिया ने उसे मारने की कोशिश की थी। बीती 14 जून को सिया केतन को लेकर इसी किले पर आई थी और उसने केतन को धक्का दे दिया था। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि केतन ने पहाड़ी के किनारे उगी एक झाड़ी को पकड़ लिया और उसकी जान बच गई। उस समय अपनी साजिश पर पर्दा डालने के लिए सिया ने तुरंत नाटक रचा। वह 'सांप-सांप' चिल्लाने लगी और केतन को गले लगा लिया, जिससे केतन को लगा कि सिया सचमुच डर गई थी और सांप से बचाने के चक्कर में उसका संतुलन बिगड़ा था। जन्मदिन के बहाने दोबारा बुलाया 14 जून को नाकाम होने के बाद सिया ने हार नहीं मानी। 18 जून को अपने जन्मदिन का बहाना बनाकर वह केतन को दोबारा ट्रेकिंग के लिए लोहगढ़ किला ले आई। इस बार उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी को भी वहां बुला लिया था। पुलिस के मुताबिक, योजना के तहत जैसे ही सिया पहाड़ी के किनारे एक तय जगह पर बैठी वैसे ही पीछे से छिपकर आ रहे चेतन चौधरी ने केतन को जोरदार धक्का दे दिया। केतन संभल पाता उससे पहले ही वह 300 फीट गहरी खाई में जा गिरा और उसकी मौत हो गई। 17 करोड़ का महल, 2 प्राइवेट प्लेन केतन और सिया की सगाई इसी साल फरवरी में हुई थी और आगामी नवंबर में दोनों की बेहद भव्य शादी होने वाली थी। केतन के परिवार ने राजस्थान के जयपुर में एक आलीशान महल को 17 करोड़ रुपये में बुक किया था। यही नहीं बारात और मेहमानों को ले जाने के लिए दो प्राइवेट विमानों की व्यवस्था भी की जा चुकी थी। लेकिन सिया अपने परिवार के सामने चेतन से प्यार की बात स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। पुलिस हिरासत में उसने बेहद चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि परिवार से बगावत करने और सगाई तोड़ने से ज्यादा आसान केतन को रास्ते से हटाना था। बिलखते पिता की भावुक अपील इस बीच शनिवार रात केतन अग्रवाल के गहुंजे स्थित निवास की हाउसिंग सोसाइटी में समाज के लोगों ने एक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल बेहद भावुक हो गए। उन्होंने 18 जून को लोहगढ़ किले में मौजूद रहे पर्यटकों से सामने आने की अपील की। विशाल अग्रवाल ने कहा, "कुछ लोग हमें सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर कह रहे हैं कि वे उस दिन किले पर मौजूद थे और उन्होंने कुछ संदिग्ध देखा था, लेकिन वे पुलिस के पास जाने से कतरा रहे हैं। मैं उन सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि कृपया आगे आएं और मेरे बेटे को न्याय दिलाने में पुलिस की मदद करें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपको किसी कानूनी पचड़े या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।" फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने से पहले हर उस रास्ते और लोकेशन की वीडियोग्राफी कर रही है, जिसका इस्तेमाल इस वीभत्स हत्याकांड में किया गया था।

तिरुपति बालाजी दर्शन: अनंत अंबानी ने मुंडन कर भगवान के चरणों में अर्पित किए बाल

तिरुमाला दुनिया के सबसे अमीर और प्रतिष्ठित परिवारों में से एक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के उत्तराधिकारी अनंत अंबानी ने आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी) में दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा का परिचय देते हुए भगवान के चरणों में अपने बाल समर्पित किए (मुंडन संस्कार करवाया)। सोशल मीडिया पर अनंत अंबानी की इस सादगी और धार्मिक निष्ठा की जमकर सराहना हो रही है। लोग इसे अध्यात्म की पराकाष्ठा मान रहे हैं, जहाँ दुनिया की तमाम दौलत, शोहरत और नाम पीछे छूट जाते हैं और केवल ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही मायने रखता है। आस्था से बड़ा कोई आभूषण नही अक्सर कहा जाता है कि भगवान के दरबार में अमीर हो या गरीब, हर कोई एक समान है। अनंत अंबानी के इस कदम ने इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया है। भौतिक सुख-सुविधाओं और वैश्विक स्तर पर पहचान होने के बावजूद, उन्होंने सनातन परंपराओं का पालन करते हुए तिरुपति बालाजी के चरणों में अपना शीश नवाया। एक संदेश जो दिल को छू गया: "सब कुछ पाकर भी जो भगवान को चुनता है, वही सबसे धनवान है। जहाँ नाम, दौलत और शोहरत पीछे रह जाते हैं… वहाँ सिर्फ़ आस्था साथ चलती है। दुनिया की सबसे बड़ी दौलत भी, भगवान के दरबार में सिर्फ़ श्रद्धा बन जाती है।" तिरुपति में मुंडन परंपरा का महत्व सनातन धर्म में तिरुपति बालाजी मंदिर में मुंडन कराने (बालों का दान करने) की सदियों पुरानी परंपरा है। इसे अहंकार के त्याग और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। अनंत अंबानी का यह रूप दिखाता है कि अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत है। सादगी की मिसाल: अनंत अंबानी ने तिरुपति देवस्थानम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दर्शन किए। परंपरा का सम्मान: आधुनिक जीवनशैली के बीच सनातन संस्कृति और मुंडन की परंपरा का निर्वहन किया। सोशल मीडिया पर चर्चा: नेटिजन्स अनंत अंबानी के इस धार्मिक झुकाव और अहंकार-रहित व्यक्तित्व की सराहना कर रहे हैं।

वेनेजुएला भूकंप: 1000 से अधिक इमारतें ढहीं, राहत-बचाव कार्य जारी

नई दिल्ली दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में 25 जून को भूकंप के दो झटके हजारों लोगों की जिंदगियां निगल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस भूकंप में 1430 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने आज सुबह कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब भी मलबे से लाशों पर लाशें निकल रही हैं। वहीं देश के उत्तरी तट के बाद अब भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी कराकास और माराके में भी 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे। भूकंप में 3360 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 250 के करीब लोगों को जिंदा निकाला गया है। खुद ही परिजनों को तलाश रहे लोग वेनेजुएला में राहत टीमों की कमी की वजह से लोगों को खुद ही मलबा हटाकर परिजनों की तलाश करनी पड़ रही है। वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि लोग ला गुआइरा राज्य की यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से पुलिस, सिविल प्रोटेक्शन, दमकल की टीमें भेजने के लिए रास्ते खाली रखना जरूरी है। जमींदोज हो गईं 1000 इमारतें बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र और राजधानी काराकास में भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतें, कई अस्पताल और शॉपिंग सेंटर पूरी तरह जमींदोज हो गये हैं। इसके अलावा करीब 1,000 अन्य बुनियादी ढांचागत स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा तबाही काराकास के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र में हुई है, जहां देश का मुख्य बंदरगाह और सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। ला गुएरा में अब तक मलबे से 243 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस आपदा के बाद वेनेजुएला में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव दल पहुंचना शुरू हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक सहायता अभियान चलाने की घोषणा की है। ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड ने अपनी खोजी और बचाव टीमें, प्रशिक्षित श्वान दल और ड्रोन भेजे हैं। अमेरिका ने इसके साथ ही युद्धपोत, परिवहन विमान और 15 करोड़ डॉलर (लगभग 1,415 करोड़ 40 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है। आंतरिक मामलों के मंत्री डियोसडाडो काबेलो के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर काराकास के लॉस पालोस ग्रांडेस और अल्तामिरा इलाकों के अलावा ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कन जैसे उत्तरी तटीय राज्यों पर पड़ा है।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर रुबियो का बड़ा बयान, व्यापार समझौता अंतिम चरण में

नई दिल्ली अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर सराहना की है। साथ ही, उन्होंने भारत को तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति बताया है। व्हाइट हाउस में समाचार एजेंसी IANS को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को अपना करीबी साझेदार और सहयोगी मानता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है और अब वैश्विक स्तर पर लिए जाने वाले अहम फैसलों में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। रुबियो ने कहा, "हम प्रधानमंत्री मोदी और उनके काम के बड़े प्रशंसक हैं।" मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को पहले से कहीं अधिक मजबूत बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहद घनिष्ठ संबंध हैं, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। उनके अनुसार, यह समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इसकी घोषणा हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप कब करेंगे भारत की यात्रा अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले वर्ष की शुरुआत में भारत की यात्रा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा की तैयारियां जारी हैं और इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका रक्षा, ऊर्जा, खनिज, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री सुरक्षा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी बड़ी भूमिका निभाना चाहता है और दोनों देशों के बीच क्वाड सहयोग भी आगे बढ़ेगा। मार्को रुबियो ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भी सराहना करते हुए कहा कि इस समुदाय ने अमेरिका के विकास में अहम योगदान दिया है और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में सेतु का काम किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका के बीच कई साझा मूल्य और हित हैं, जिनके आधार पर भविष्य में और व्यापक सहयोग संभव है। रुबियो के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब भारत-अमेरिका व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं।

पीएम मोदी बोले- सोना न खरीदने और कार पूलिंग अपनाने की अपील का देशभर में दिखा असर

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम के 135वें एपिसोड के जरिए देश की जनता को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देश के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते आत्मनिर्भरता के कदमों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारा देश अब समुद्र से लेकर आकाश तक सुरक्षित और आत्म निर्भर है। पीएम मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर देश-विदेश में हुए कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा प्रस्तावित योग दिवस के मौके पर दुनिया भर के करोड़ों लोगों ने योग किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देशवासियों की दी गई सलाहों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने न सिर्फ इन सलाहों को माना, बल्कि उस पर अमल भी किया। पीएम मोदी ने कहा कि देश के कई परिवारों ने फैसला किया है कि वह शादी विवाह में सोना नहीं खरीदेंगे। अगर जरूरत पड़ी भी तो वह पुराने सोने को गलाकर नए जेवर बना लेंगे। इसके अलावा पीएम ने बताया कि कई लोगों ने अपनी विदेश यात्राएं रद्द कर दी, तो कई लोगों ने साथ मिलकर कार पूलिंग को भी अपनाने का काम किया है। इसके अलावा लोगों ने पेट्रोल और डीजल के उपयोग को भी कम करने का जबरदस्त प्रयास किया है। बता दें, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट से निपटने के लिए लोगों को सोने को न खरीदकर विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। इसके अलावा उन्होंने लोगों से सोना न खरीदने और कार पुलिंग करने की सलाह दी थी। हरगिला की यात्रा, अविश्वास से विश्वास तक की यात्रा पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में असम के हरगिला पक्षी के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कैसे असम में विलुप्ती की कगार पर आए हरगीला पक्षी को लोग अंधविश्वास की वजह से मार रहे थे। पीएम ने बताया कि हरगिला पक्षी हमारे पर्यावरण को साफ करने में मदद करता है। लेकिन असम में लोग अंधविश्वास की वजह से इसे मिटाने पर तुले हुए थे। आलम यह था कि जिस पेड़ पर हरगिला के घोंसले होते थे, वह उस पेड़ को ही काट देते थे। इसके बाद एक जीव विज्ञानी ने इस पर ध्यान दिया और लोगों को इससे जोड़ा। इसके बाद आज लोग हरगिला को लेकर अपने विचार बदल रहे हैं। हरगिला को बचाने वाली इस टीम को हरगीला आर्मी कहते हैं।

India-US Trade Deal पर बड़ी अपडेट, सर्जियो गोर ने कहा- जल्द हो सकता है समझौता

वाशिंगटन   भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के करीब पहुंच गए हैं। इसमें बस कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं और पक्षों इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर ध्यान दे रहे हैं। व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में, अमेरिकी राजदूत गोर ने भरोसा जताया कि यह एग्रीमेंट आने वाले हफ्तों या महीनों में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कई दूसरे बड़े व्यापार समझौतों के मुकाबले बातचीत पहले ही बहुत तेजी से आगे बढ़ चुकी है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते की शेष कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा, "समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) की भाषाई रूपरेखा पर अभी काम होना बाकी है। करीब 48 घंटे पहले दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ मैं उन बैठकों में शामिल था, जहां हमने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। वे मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। यह वार्ता बेहद सार्थक रही। हालांकि, कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। अब बहुत कुछ उस अंतिम मसौदे की भाषा पर निर्भर करेगा, जिस पर दोनों पक्ष हस्ताक्षर करेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।" गोर ने कहा कि बातचीत को सही नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका समझौते पर सिर्फ लगभग 18 महीने से चर्चा चल रही थी। उन्होंने कहा, "देखिए, इसे सही नजरिए से देखें तो, हम इस समझौते पर डेढ़ साल से काम कर रहे हैं।  यूरोपीय संघ समझौता, जो अभी भी पूरी नहीं हुई है, उसे 20 साल हो गए हैं। हर कोई कहता है, 'इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?' हम इसे पूरा करने की दिशा में एक शानदार रास्ते पर हैं।"प्रस्तावित समझौते के कंटेंट को लेकर बात करने से इनकार करते हुए, अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि दोनों सरकारें ऐसे नतीजे की ओर काम कर रही हैं जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो। उन्होंने कहा, "मैं ज्यादा कुछ नहीं बताना चाहता। आपको इंतजार करना होगा और देखना होगा। यह उन चीजों में से एक है जब आपको कॉमन ग्राउंड मिलता है और हम उन चीजों की पहचान कर पाते हैं जो दोनों पक्षों के लिए अच्छी हैं, तभी डील होती है।" अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया मीटिंग के बाद भी भारत आने के लिए उत्सुक हैं। गोर ने कहा, "मेरे पास अभी पक्की तारीखें नहीं हैं। मैं अभी राष्ट्रपति से मिला हूं। मैं उनके साथ ओवल ऑफिस में कई घंटे रहा। राष्ट्रपति ने जो बातें पूछी, उनमें से एक यह थी, 'तो मैं कब आ रहा हूं?' वह आने के लिए बहुत उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें बुलाया है। मुझे लगता है कि यह किसी समय होगा।"हालांकि, उन्होंने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव शेड्यूल के कारण टाइमलाइन बताने से मना कर दिया, लेकिन गोर ने कहा कि भारत अभी भी उनकी प्राथमिकता वाली जगह बना हुआ है। अमेरिकी राजदूत ने कहा, "अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, इसलिए राष्ट्रपति का शेड्यूल बहुत व्यस्त है, जिसमें वे अन्य देश में घूमने पर फोकस करेंगे। लेकिन इसके बावजूद, भारत उन जगहों की लिस्ट में सबसे ऊपर है जहां वे जल्द ही जाएंगे।" गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की अटकलों के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूत आधारशिला बने हुए हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छी जगह पर हैं। उस संबंधों की एक बड़ी वजह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच का रिश्ता है जो हमेशा मजबूत रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे दोस्त हैं और यह बात सालों पुरानी है और यह बात आगे भी जारी रहेगी।" भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद मार्केट एक्सेस बढ़ाना, टैरिफ की रुकावटें कम करना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। दोनों सरकारों ने बार-बार इस समझौते को अपनी प्राथमिकता बताया है और एक बड़े ट्रेड फ्रेमवर्क पर जाने से पहले एक शुरुआती समझौते को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। व्यापार, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सबसे तेजी से बढ़ते स्तंभ में से एक बनकर उभरा है, जिसमें रक्षा, तकनीक, जरूरी और नई तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध भी शामिल हैं। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में अपने बढ़ते सहयोग के साथ-साथ आर्थिक इंटीग्रेशन को भी गहरा करने की कोशिश की है।

गोवा में कमीशन हुआ स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS अक्षय

नई दिल्ली  भारतीय तटरक्षक बल ने अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए नई पीढ़ी के फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ICGS अक्षय (यार्ड 1273) को आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल कर लिया। वास्को (गोवा) में आयोजित समारोह के दौरान इस स्वदेशी पोत को कमीशन किया गया। यह जहाज समुद्री सीमाओं की निगरानी, त्वरित कार्रवाई और तटीय सुरक्षा को नई मजबूती देगा। ICGS अक्षय का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके भारतीय तटरक्षक बेड़े में शामिल होने से देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। 'समुद्र सिर्फ व्यापार नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का भी आधार' पश्चिमी क्षेत्र के तटरक्षक कमांडर इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा (PTM, TM) ने कहा कि समुद्र केवल आवागमन और व्यापार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा भारत के राष्ट्रीय उद्देश्यों का अहम हिस्सा है और इसे हर हाल में मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की तैयारी केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह तैयारी प्लेटफॉर्म, वर्दीधारी जवानों के प्रशिक्षण, मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) और सबसे बढ़कर उनकी सोच और क्षमता में दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि हर नया प्लेटफॉर्म तटरक्षक बल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि ICGS अक्षय भारतीय तटरक्षक बल की समुद्र में मौजूदगी को और मजबूत करेगा। इसके जरिए आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया की गति बेहतर होगी और तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी। यह पोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।

भायखला में सनसनी: जिंक फॉस्फाइड वाले कैप्सूल बांटने के आरोप में फैयाज प्रेमजी पकड़ा गया

मुंबई मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस के दौरान जहरीले कैप्सूल बांटने की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया. पुलिस ने इस मामले में फैयाज प्रेमजी नाम के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी बिना अनुमति के 'दर्द से राहत' के नाम पर लोगों को कैप्सूल बांट और बेच रहा था. मुंबई पुलिस के मुताबिक जेजे और भायखला इलाके से मोहर्रम का जुलूस गुजर रहा था, जहां आरोपी कथित तौर पर लोगों को कैप्सूल बांट रहा था. पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने फैयाज को कैप्सूल वितरित करते हुए देखा. शक होने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की और उसके पास मौजूद कैप्सूल जब्त कर लिए. डीसीपी सेंट्रल रीजन जोन-1 जयंत मीणा ने बताया, 'बीती रात भायखला पुलिस स्टेशन की सीमा में मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था. जुलूस के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति लोगों को कैप्सूल बांटता और बेचता हुआ दिखाई दिया. संदेह होने पर मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने उससे पूछताछ की और उसके पास से कैप्सूल का स्टॉक बरामद किया.' पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने खासतौर पर मुहर्रम जुलूस को निशाना बनाया और इसमें शामिल होने वाले लोगों को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखता था. फैयाज ने 50 KG जिंक फॉस्फाइड मंगाया था डीसीपी जयंत मीणा ने कहा, 'पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने कुल 30 हजार खाली कैप्सूल और 50 किलो जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने वाला जहरीला केमिकल) मंगवाया था, जो बेहद जहरीला पदार्थ है.' पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान पुणे निवासी फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जो पेंट का कारोबार करता है और बीबीए ग्रेजुएट है. पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने कई दिनों तक अपने ठिकाने पर कैप्सूलों में जहर भरने का काम किया. पुलिस का कहना है कि कैप्सूल का सेवन करने वाले सलमान सैयद नाम के व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई थी. उसे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज भायखला पुलिस ने आरोपी के पास से 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद किए हैं. प्रत्येक कैप्सूल में करीब एक ग्राम जिंक फॉस्फाइड मिलाया गया था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी साल 2025 में ईरान और इराक गया था. पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है. इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 110 और 123 के तहत जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि फैयाज प्रेमजी शिया खोजा मुस्लिम समुदाय से संबंध रखता है. आरोपी एक साल में 19 बार ईरान-इराक गया फैयाज की बहन ईरान में फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम करती है, जबकि उसकी मां भी ईरान में रहती हैं. उसकी पत्नी से उसका तलाक हो चुका है. जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच फैयाज कई बार ईरान और इराक की यात्रा कर चुका है. पुलिस के मुताबिक पिछले एक साल में ही वह 19 बार ईरान और इराक गया था. फैयाज प्रेमजी पुणे के विमान नगर इलाके में रहता है, जहां उसका पेंट का कारोबार है. मुंबई आने के दौरान वह डोंगरी इलाके के एक गेस्ट हाउस और डॉरमेट्री में ठहरा था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी उन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और क्या आरोपी किसी के प्रभाव में था या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था. हालांकि, फिलहाल किसी आतंकी संगठन से उसके संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है. फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की गहन जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति या संगठन शामिल था या नहीं.

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से पहले बड़ा फैसला संभव, जानें ताजा अपडेट

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है।  जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।  क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद?  दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है।  अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा।  नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है?  आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है।  फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई।  कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है।  अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है?  केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।   अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा?  जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

केरल में मानसून की रफ्तार धीमी, अल-नीनो के असर से 33 फीसदी कम बारिश; खेती पर संकट के आसार

नई दिल्ली केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में अब तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है।  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की डायरेक्टर वीके. मिनी ने जानकारी दी कि राज्य के सिर्फ चार जिले तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते हैं।  IMD के मानकों के अनुसार, जब किसी जिले में बारिश की कमी 19 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उसे 'बारिश की कमी' (Rainfall Deficient) की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है।  खेती पर कम बारिश का असर बारिश की इस कमी ने कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आईएमडी की सामान्य से कम (Below Normal) बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए खास उपाय अपनाएं. अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश होने की आशंका है. वीके. मिनी ने बताया कि बारिश पर आधारित कृषि क्षेत्रों (Rain-fed Areas) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश से मिट्टी की नमी घट रही है और खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है।  मौसम पर अल-नीनो का कैसा असर? सामान्य रूप से जून के महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर दो डिप्रेशन और पांच तक निम्न दबाव प्रणालियां बनती हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करती हैं. इसी के साथ देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश होती है लेकिन इस साल जून में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक भी डिप्रेशन नहीं बना. केरल में सामान्यतः जून और जुलाई-अगस्त में दो-दो तथा सितंबर में एक डिप्रेशन बनता है, लेकिन अल नीनो की स्थिति के कारण इन प्रणालियों के बनने में कमी आ सकती है।  पारंपरिक कृषि कैलेंडर प्रभावित केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप 'तिरुवाथिरा नजट्टुवेला' कहा जाता है. यह धान की रोपाई और बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने चरम पर होता है. लेकिन इस साल अल नीनो के असर से  कृषि कैलेंडर प्रभावित हुआ है।  IMD ने चेतावनी दी कि अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो भूजल स्तर घट सकता है. पेयजल संकट पैदा हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान बल्कि अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।