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ममता बनर्जी का केंद्र और भाजपा पर हमला, चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। 5 मई 2026 को कार्यवाहक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee Press Conference) ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए स्पष्ट कर दिया कि वे इस्तीफा नहीं देंगी। ममता ने कड़े शब्दों में कहा, "मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। हम चुनाव हारे नहीं हैं, हमें साजिश के तहत हराया गया है। मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी, क्योंकि नैतिक तौर पर जीत हमारी हुई है।" '100 सीटें लूटी गईं और 90 लाख नाम काटे गए' ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने चुनाव आयोग का औजार के रूप में इस्तेमाल किया है। सीएम ममता के अनुसार, "हमारी 100 सीटें लूट ली गईं और 90 लाख मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची (SIR) से हटा दिए गए। भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर एक गंदा और घटिया खेल खेला है, जिसे मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी नहीं देखा।" EVM और चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को 'खलनायक' करार दिया। उन्होंने EVM की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए कहा, "वोटिंग के बाद EVM मशीन 80-90% चार्ज कैसे रह सकती है? आमतौर पर यह 40% से नीचे होती है। चुनाव से दो दिन पहले हमारे लोगों को गिरफ्तार किया गया, IPS और IAS अधिकारियों को बदल दिया गया और भाजपा की पसंद के अधिकारियों को तैनात किया गया।" उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना केंद्रों पर उन्हें धक्का देकर बाहर निकाला गया और उनके एजेंटों के साथ मारपीट की गई। 'इंडी' गठबंधन के साथ की मजबूती और भविष्य की रणनीति हार के बावजूद ममता बनर्जी ने विपक्षी एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव समेत 'इंडी' गठबंधन के तमाम नेताओं ने उन्हें फोन कर अपना समर्थन दिया है। ममता ने कहा, "अखिलेश यादव कल कोलकाता आ रहे हैं। आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मजबूत होगी। मेरा लक्ष्य साफ है – मैं अब एक 'आजाद पंछी' की तरह पूरे देश में इंडी गठबंधन को मजबूत करने का काम करूँगी।" 'कुर्सी की मोहताज नहीं, मैं एक आजाद पंछी हूं' ममता ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 15 वर्षों में न तो पेंशन ली और न ही तनख्वाह का एक पैसा निकाला। उन्होंने कहा, "अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, इसलिए मैं एक आम आदमी हूं। अब कोई यह नहीं कह सकता कि मैं सत्ता का इस्तेमाल कर रही हूँ। मैंने अपनी पूरी जिंदगी लोगों की सेवा में लगा दी है और अब मैं जनता के बीच जाकर इस अन्याय के खिलाफ लड़ूंगी।"

सत्ता की जंग तेज: बंगाल में मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं, अमित शाह को जिम्मेदारी

नई दिल्ली बंगाल और असम में भाजपा को प्रचंड जीत मिली है। इसके बाद अब सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। भाजप ने गृहमंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल के लिए और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को असम के लिए विधायक दल के नेता के चयन के लिए केंद्रीय प्रर्यवेक्षक नियुक्त किया है। भाजपा आलाकमान ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल का 'पर्यवेक्षक' और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा को असम के पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सह पर्यवेक्षक बनाया गया है। बंगाल में 9 मई को होगा नए सीएम का शपथग्रहण बंगाल बीजेपी अध्यक्ष ने घोषणा की है कि 9 मई को होगा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि ममता बनर्जी को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी बंगाल के अगले सीएम हो सकते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री फेस को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। जिसका फैसला गृहमंत्री अमित शाह कर सकते हैं.  

सरकारी अस्पताल में छापा, ऑपरेशन थिएटर से मिला सोना और नकदी

 साउथ 24 परगना पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में एक सरकारी अस्पताल से भारी मात्रा में कैश और सोना मिलने के बाद हड़कंप मच गया है. इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है, जहां बीजेपी ने टीएमसी नेताओं पर अवैध संपत्ति छिपाने का आरोप लगाया है. घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और पुलिस जांच में जुट गई है।  मामला साउथ 24 परगना के जिबंतला थाना क्षेत्र के माथेरदिघी ग्रामीण अस्पताल का है, जहां ऑपरेशन थिएटर से भारी मात्रा में कैश और सोने के गहने बरामद किए गए. मंगलवार सुबह इस घटना का खुलासा हुआ, जब अस्पताल के अंदर एक संदिग्ध बैग देखा गया. इस बैग को देखकर स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ को शक हुआ. जब बैग को खोला गया, तो उसके अंदर बड़ी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण और जमीन से जुड़े दस्तावेज मिले. इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।  बताया जा रहा है कि अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील स्थान पर इतनी बड़ी मात्रा में अवैध संपत्ति का मिलना बेहद चौंकाने वाला है. आमतौर पर इस जगह पर मरीजों का इलाज होता है, लेकिन वहां इस तरह का बैग मिलने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई साधारण मामला नहीं है और इसमें बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है. घटना के बाद अस्पताल प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है।  इस पूरे मामले में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बड़ा आरोप लगाया है. उनका दावा है कि यह अवैध संपत्ति टीएमसी के एक नेता के करीबी व्यक्ति की है. बीजेपी का कहना है कि साउकत मोल्ला के करीबी माने जाने वाले हुसैन गाजी ने इस संपत्ति को अस्पताल में छिपाकर रखा था. जैसे ही यह मामला सामने आया, बीजेपी कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर को भी घेर लिया।  बीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के कारण अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया. सूचना मिलने के बाद जिबंतला थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की. पुलिस ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह कैश और सोना आखिर किसका है।  दूसरी तरफ, अस्पताल के डॉक्टर शाहरुख खान ने बीजेपी के आरोपों को लेकर अलग ही दावा किया है. उन्होंने बताया कि यह बैग समसेर मीर नाम के युवक का है, जो स्थानीय टीएमसी बूथ अध्यक्ष का बेटा है. डॉक्टर के मुताबिक, समसेर मीर अस्पताल में अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम करता है. उनका कहना है कि बैग अस्पताल में उसी ने छोड़ा था, हालांकि इसके पीछे की असली वजह क्या है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है।  इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. बीजेपी लगातार टीएमसी पर हमला बोल रही है और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है. पार्टी का कहना है कि यह भ्रष्टाचार का बड़ा मामला है और इसमें कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं. वहीं, टीएमसी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे सियासी विवाद और बढ़ गया है।  फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अस्पताल में इतनी बड़ी मात्रा में कैश और सोना कैसे पहुंचा. साथ ही, जमीन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है. इस घटना ने न सिर्फ अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है. आने वाले दिनों में जांच के बाद इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। 

आंधी-बारिश का असर, दिल्ली-NCR में सुधरी हवा

नई  दिल्ली राजधानी में इस साल की सबसे साफ हवा सोमवार को दर्ज की गई। करीब 25 दिनों बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 100 से नीचे पहुंच गया, जिससे लोगों को प्रदूषण से आंशिक राहत मिली। CPCB)के एयर बुलेटिन के अनुसार, सोमवार को दिल्ली का AQI 88 रिकॉर्ड किया गया, जो “संतोषजनक” श्रेणी में आता है। इस दौरान मुख्य प्रदूषकों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), ओजोन (O₃) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) शामिल रहे। हालांकि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं रहने वाली है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, आज से प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ सकता है और AQI सामान्य श्रेणी में पहुंच सकता है। इससे पहले 8 अप्रैल को AQI 93 रिकॉर्ड किया गया था। इस साल अब तक यह तीसरा मौका है जब AQI 100 से नीचे रहा—20 मार्च और 8 अप्रैल को भी AQI 93 दर्ज हुआ था। दिल्ली में सबसे साफ हवा शादीपुर इलाके में रही, जहां AQI महज 46 दर्ज किया गया। वहीं एनसीआर के अन्य शहरों में अलग-अलग स्तर की वायु गुणवत्ता देखी गई फरीदाबाद (73), गाजियाबाद का 114, ग्रेटर नोएडा का S9, गुरुग्राम का 104 और नोएडा (s6)। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 5 से 7 मई तक प्रदूषण का स्तर सामान्य बना रहेगा, लेकिन इसके बाद यह “सामान्य से खराब” श्रेणी में जा सकता है। हवाओं की गति सोमवार को 20 से 70 किमी/घंटा के बीच रही, जिससे प्रदूषक कणों का फैलाव हुआ और हवा साफ बनी रही। मंगलवार को हवा की रफ्तार 12 से 40 किमी/घंटा और बुधवार को 12 से 20 किमी/घंटा रहने की संभावना है, जिससे प्रदूषण स्तर में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। दिल्ली-NCR से हटा GRAP-1 CAQM) की सब-कमिटी ने सोमवार को हालात की समीक्षा कर GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के पहले चरण (GRAP-1) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। गौरतलब है कि 16 अप्रैल को प्रदूषण के स्तर के “खराब” श्रेणी में पहुंचने के बाद GRAP-1 लागू किया गया था। लेकिन हाल के दिनों में बारिश और अनुकूल मौसम की वजह से वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया। CAQM की बैठक में दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा हालात का आकलन किया गया और पाया गया कि मौसम फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण के लिए अनुकूल है। इसी आधार पर GRAP-1 को हटाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, कमिटी ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रदूषण को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी कदम लगातार जारी रखें। साथ ही, वायु गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी बनाए रखने की बात भी कही गई है। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को भी शहर के अलग-अलग इलाकों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम माना जा रहा है। पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले तीन से चार दिनों तक दिल्ली में हल्के बादलों की मौजूदगी बनी रहेगी। इसके चलते फिलहाल तेज गर्मी के लौटने के आसार कम हैं और लोगों को राहत मिलती रहेगी। पश्चिमी विक्षोभों का असर राजधानी में थो इस बार गर्मी से राहत का बड़ा कारण बार-बार सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ रहे हैं।  मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च और अप्रैल के दौरान 12 से अधिक पश्चिमी विक्षोभों ने दिल्ली के मौसम को प्रभावित किया। इन विक्षोभों के कारण समय-समय पर बारिश, धूल भरी आंधी और ओलावृष्टि हुई, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर इस समय तक तेज गर्मी पड़ने लगती है, लेकिन इस बार मौसम अपेक्षाकृत सुहाना बना रहा। अप्रैल में 84% अधिक वर्षा मौसम विभाग के मुताबिक, मार्च में सामान्य से 15 प्रतिशत और अप्रैल में 84 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभों के चलते दिल्ली में बारिश, आंधी और बादल छाए रहने का सिलसिला बना हुआ है, जिससे तापमान नियंत्रित रहा और लोगों को गर्मी से राहत मिली। मई के पहले सप्ताह में भी यही पैटर्न जारी है। विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे फिलहाल भीषण गर्मी के लौटने के आसार कम हैं। राजधानी में घटी बिजली की खपत मौसम में आए बदलाव का असर अब बिजली की मांग पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले दो दिनों में पावर डिमांड में करीब 200-300 मेगावॉट की कमी दर्ज की गई है। बिजली कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली में अधिकतम बिजली मांग 5159 मेगावॉट रही, जो हाल के दिनों के मुकाबले काफी कम है। वहीं रविवार को यह आंकड़ा 5836 मेगावॉट दर्ज किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि बिजली की मांग पूरी तरह से मौसम के मिजाज पर निर्भर करती है। अप्रैल के आखिरी दिनों में तेज धूप और उमस के चलते बिजली की खपत तेजी से बढ़ गई थी और एक दिन मांग 7000 मेगावॉट तक पहुंच गई थी।

भाजपा की बड़ी रणनीति: बंगाल में अमित शाह, असम में जेपी नड्डा बने पर्यवेक्षक

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल में अमित शाह को पर्यवेक्षक बनाया गया है। इसके अलावा मोहन चरण माझी को शह पर्यवेक्षक की भूमिका सौंपी गई है। यह दोनों बंगाल में विधायक दल के नेता का चयन करेंगे। वहीं, असम  जेपी नड्डा को नियुक्त किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में अपने विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पार्टी का केंद्रीय पर्यवेक्षक नामित किया। पार्टी ने असम में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा को भी केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया। पार्टी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को असम में भाजपा के विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है। वहीं, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पश्चिम बंगाल में भाजपा के विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। बंगाल में भाजपा की बंपर जीत गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सोमवार को 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है। हालांकि, फालता में मतदान रद्द होने के कारण 293 निर्वाचन क्षेत्रों के मतों की गिनती हुई और इस वजह से फिलहाल बहुमत का आंकड़ा 147 है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगाई और शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाया। इस जीत के साथ, भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाएगी। निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने 206 सीटें जीत लीं हैं। असम में हैट्रिक बात असम की करें तो यहां पर एनडीए लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रहा है। उसने 126 सदस्यीय विधानसभा में रिकॉर्ड 102 सीट जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने हाल के समय का अपना सबसे खराब प्रदर्शन किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जिन 90 सीट पर चुनाव लड़ा उनमें से 82 पर जीत हासिल की। जबकि उसके सहयोगी दलों – बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 11 सीट पर चुनाव लड़ा और 10 सीट पर जीत हासिल की। असम गण परिषद (अगप) ने 26 सीट पर चुनाव लड़ा जबकि 10 सीट पर जीत दर्ज की। भाजपा ने राज्य में पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया। इससे पहले उसने 2021 और 2016 में 60 सीट जीती थीं।  

सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा: मुजफ्फराबाद और बहावलपुर में आतंकी ठिकानों पर तेजी से चल रहा निर्माण कार्य

इस्लामाबाद  भारत ने बीते साल मई में ऑरपरेशन सिंदूर लॉन्च करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं। इस दौरान पंजाब में जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर को एक सटीक हमले में तबाह कर दिया गया था। आतंकी मसूद अजहर का गुट जैश अब इस नुकसान से उबरते हुए फिर से सक्रिय हो रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बहावलपुर में जैश के हेडक्वार्टर में बड़े पैमाने पर निर्माण का काम चल रहा है। इसकी कई इमारतों को बना लिया गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि जैश-ए-मोहम्मद बहावलपुर में अपने मुख्यालय का फिर से निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान के पंजाब में N-5 नेशनल हाईवे के पास स्थित 'जामिया सुभान अल्लाह' नाम के इस परिसर की बीते महीने की सैटेलाइट तस्वीरों में यहां भारी मशीनरी और निर्माण वाहन दिखाई दिए हैं। परिसर की मस्जिद को बनाया जा रहा अमेरिका स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी वैंटोर और इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस टीम ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बताया है कि परिसर स्थित मस्जिद के क्षतिग्रस्त गुंबदों की मरम्मत कर दी गई है। इन पर हाल ही में काम किया गया है। आसपास की कई इमारतों को हाल-फिलहाल में ठीक किया गया है। बहावलपुर जैश का अकेला ठिकाना नहीं है, जहां मरम्मत का काम चल रहा है। 22 अप्रैल की तारीख वाली सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर के मुजफ्फराबाद में भी जैश के ठिकानों पर निर्माण दिखा है। जैश से जुड़े ठिकाने सैयदना बिलाल मस्जिद को बनाया जा रहा है। इस मस्जिद पर भी हमला किया गया था। हालिया तस्वीरें संकेत देती हैं कि बहावलपुर में जैश हेडक्वार्टर का पुनर्निर्माण चल रहा है। परिसर में बने गुंबद अब ठीक दिखाई दे रहे हैं। परिसर में अन्य गतिविधियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। इन ठिकाने पर भारी मशीनरी देखी गई है। कई जगहों का निर्माण पूरा हुआ इंटेल लैब के भू-खुफिया शोधकर्ता डेमियन साइमन ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि बहावलपुर स्थित उस ठिकाने पर पुनर्निर्माण का काम चल रहा है, जिसे पहले भारत ने निशाना बनाया था। मरकज सुभान अल्लाह के ऊपर बने गुंबद अब ठीक किए हुए दिखाई दे रहे हैं। यह इसे पूरी तरह से चालू करने की कोशिश है। साइमन का कहना है कि हमलों से क्षतिग्रस्त हुई इमारतों का मलबा हटाया जा रहा है। वहीं मुजफ्फराबाद में सैयदना बिलाल मस्जिद को पूरी तरह से फिर बनाया जा रहा है। भारत के हमलों में मस्जिद की इमारत को जो नुकसान पहुंचा था। उसके बाद मरम्मत करना मुमकिन नहीं था। ऐसे में इसे दोबारा बनवाने का फैसला लिया गया है। FATF की निगरानी पर सवाल पाकिस्तान में आतंकी गुटों की गतिविधियों पर FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की निगरानी है। इसका काम टेरर फाइनेंसिंग को रोकना है। जैश खुलेआम 'सुभान अल्लाह कंपाउंड' को फिर से बनाने के लिए पैसे जुटाने का अभियान चला रहा है। FATF इस मामले में पूरी तरह बेखबर दिख रहा है। ये तस्वीरें दिखाती हैं कि पाकिस्तान में आतंकी गुटों को पनाह मिलना और उनका फलना-फूलना जारी है। जैश सरगना अजहर मसूद अपनी गतिविधियां लगातार कर रहा है।  

इतिहास रचा सुनेत्रा पवार ने, भारी मतों से जीत; उपचुनाव में BJP और कांग्रेस का हाल

मुंबई  देश के 5 राज्यों की 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। महाराष्ट्र के बारामती सीट से NCP उम्मीदवार सुनेत्रा पवार ने 2 लाख 18 हजार वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। जीत का यह अंतर भारत में किसी विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा है। सुनेत्रा पूर्व डिप्टी CM अजित पवार की पत्नी हैं, जिनका 28 जनवरी 2026 को विमान हादसे में निधन हो गया था। बारामती अजित पवार की पारंपरिक सीट रही है। यहां से सुनेत्रा की जीत पहले से लगभग तय थी। उनके खिलाफ 22 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। महाराष्ट्र की राहुरी सीट से भाजपा के अक्षय कार्डिले जीत गए हैं। भाजपा ने गुजरात, नगालैंड और त्रिपुरा की 1-1 सीट भी जीत ली है। कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे साउथ सीट पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। उपचुनाव वालीं सभी 7 सीटें पूर्व विधायकों की मौत के कारण खाली हुई थीं। कर्नाटक, नगालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। गुजरात की लिमखेड़ा और महाराष्ट्र के बारामती और राहुरी सीट पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। बारामती में मिली जीत के बाद सुनेत्रा पवार ने जनता का दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह जीत लोगों के भरोसे, प्यार और समर्थन का नतीजा है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने अजित पवार को याद करते हुए कहा कि यह जीत उनके काम और यादों को समर्पित है। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों का आभार जताया और भरोसा दिलाया कि वे सभी वर्गों के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे और जनता के विश्वास पर खरा उतरेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों और भाजपा नेताओं के दौरों से उत्तर प्रदेश में चुनावी रणनीति हुई सक्रिय

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे भी नहीं आए थे और भारतीय जनता पार्टी ने साल 2027 में होने वाले चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसके संकेत भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई पार्टी दिग्गजों के दौरों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से मिल रहे हैं। बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। वहीं, अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। भाजपा को यूपी में भी असम की तरह हैट्रिक की उम्मीद है। UP में जुटे भाजपा के टॉप नेता 29 अप्रैल को बंगाल में दूसरे चरण का मतदान हुआ है। इससे एक दिन पहले ही भाजपा चीफ और पीएम मोदी 28 अप्रैल को उत्तर प्रदेश पहुंच गए थे। वहीं, जब पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने दल बदल किया, तो बंगाल में चुनावी ड्यूटी निभा रहे कई भाजपा नेता दिल्ली पहुंच गए थे। बंगाल के नतीजों के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक का विरोध की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों को कड़ी सजा मिली है। उन्होंने दावा किया कि सपा को भी जल्द ही महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उनका इशारा उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर था क्यों अहम है उत्तर प्रदेश साल 2014 में जब भाजपा ने कुल 282 लोकसभा सीटें जीती थीं, तो इसमें यूपी की 71 सीटें भी शामिल थीं। खास बात है कि 80 सीटों वाला यूपी लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य है। वहीं, 2024 के चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा था और पार्टी घटकर महज 33 सीटों पर आ गई थी। इससे पहले 2019 में भाजपा को यूपी में 62 लोकसभा सीटें मिली थीं। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। वहीं, भाजपा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्गों को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है जो लोकसभा चुनाव में उनसे छिटक गए थे। अब बीजेपी अपने पुराने वोट बैंक को फिर से हासिल करने के लिए कई बड़े कदम उठा सकती है ताकि यादव और जाटव वोटों के अलावा अन्य जातियों में अपनी पकड़ फिर से बनाई जा सके। बंगाल का जीत बनेगी भाजपा का इंश्योरेंस बंगाल में जीत के साथ ही भाजपा ने उत्तर और पश्चिम की तरह पूर्व में भी मजबूती हासिल कर ली है। हालांकि, दक्षिण में कर्नाटक को छोड़ दिया जाए, तो भाजपा को लोकसभा में खास समर्थन नहीं मिलता है। साथ ही बंगाल की जीत को भाजपा इंश्योरेंस की तरह भी देख सकती है, जहां अगर उसे किसी मजबूत राज्य में लोकसभा चुनाव में झटका लगता है, तो बंगाल से भरपाई की जा सके। यहां कुल 42 लोकसभा सीटें हैं। पंजाब पर भी नजरें कहा जा रहा है कि पंजाब को हमेशा से प्रधानमंत्री मोदी सरकार चुनावी रूप से अहम मानती रही है। सिख बहुल राज्य में भाजपा लगातार समुदाय को अपनी ओर लाने के प्रयास करती रही है। वही, दल सत्तारूढ़ आप को भी कुर्सी से बेदखल करने की कोशिश में है। 7 राज्यसभा सांसदों का आना भाजपा को कुछ हद तक चुनावी रूप से मददगार साबित हो सकता है। चुनाव के नतीजे बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक 206 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, असम में शतक लगाकर चुनावी जीत की हैट्रिक पूरी की। इधर, केरल में भी भाजपा की सीटों का ग्राफ बढ़ा है। जबकि, तमिलनाडु में एक्टर विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी। पुडुचेरी में एनडीए ने जीत हासिल की।

डोनाल्ड ट्रंप के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के बीच अमेरिका-ईरान टकराव तेज, होर्मुज में फंसे जहाज

नई दिल्ली होर्मुज में जारी तनाव की वजह से पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच ईरान ने एक बार फिर यूएई पर अटैक किया है। ईरान ने यूएई पर करीब 15 मिसाइलें और ड्रोन दागे। इसके बाद आपातकालीन सायरन बजाकर लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने का आग्रह किया गया। इससे पहले अमेरिकी सेना ने दो व्यापारिक जहाजों के होर्मुज से होकर गुजरने का दावा किया था। इसके बाद अमेरिका और ईरान में एक बार फिर युद्ध की स्थित बनती दिखाई दे रही है। इसकी शुरुआत ईरान ने यूएई पर हमले करके कर दी है। यह चेतावनी उस समय जारी की गयी, जब कुछ समय पहले हालांकि, तत्काल किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है और बाद में स्थिति को सामान्य घोषित कर दिया गया। युद्धविराम पर ट्रंप ने साधी चुप्पी होर्मजु में ईरान ने अमेरिकी नौसेना के पोत पर हमला करने का दावा किया जिसे अमेरिका ने खारिज कर दिया है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम का आगे बढ़ाने को लेकर भी चुप्पी साधे हुए हैं। उधार ईरान और यूएई में तनाव बढ़ने के बाद खाड़ी देश सुरक्षा को लेकर फिर तनाव में आ गए हैं। ईरान और अमेरिका में बातचीत के तमाम प्रयास विफल हो गए। ईरान जितनी बार भी अमेरिका को अपने प्रस्ताव भेजता है उन्हें सिरे से खारिज कर दिया जाता है। ऐसे में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। होर्मुज में फंसे सैकड़ों जहाज इस बीच, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को मार्गदर्शन देने की पेशकश की है। ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज में सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं। अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान ने बताया कि अमेरिकी ध्वज वाले दो व्यापारिक जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और फारस की खाड़ी में तैनात नौसेना के गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाज व्यापारिक यातायात बहाल करने में मदद कर रहे हैं। कमान ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये जहाज 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत जलडमरूमध्य से गुजरे और व्यापारिक जहाज सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नौसैनिक जहाज कब पहुंचे या व्यापारिक जहाज कब रवाना हुए।वइसी घोषणा के तुरंत बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में संभावित मिसाइल हमले का आपातकालीन सायरन जारी किया गया, जिसमें लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया। अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम लागू होने के बाद यह पहली ऐसी चेतावनी थी। फिलहाल किसी के हताहत होने या नुकसान की खबर नहीं है। इससे पहले, ईरान की समाचार एजेंसियों ने दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण-पूर्व में एक बंदरगाह के पास ईरान ने एक अमेरिकी पोत को निशाना बनाया, जिस पर समुद्री सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। खबरों में कहा गया कि पोत को वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया। हालांकि, अमेरिकी कमान ने स्पष्ट किया कि "अमेरिकी नौसेना के किसी भी जहाज को निशाना नहीं बनाया गया है।" क्या है ट्रंप का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की थी। इस पहल में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक, 100 से अधिक विमान और करीब 15,000 सैनिक शामिल हो सकते हैं, हालांकि सहायता के स्वरूप को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। अमेरिका के नेतृत्व वाले संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र ने जहाजों को ओमान के जलक्षेत्र से गुजरने की सलाह दी है और वहां 'उन्नत सुरक्षा क्षेत्र' बनाया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां इस जोखिम को उठाने के लिए तैयार होंगी या नहीं, क्योंकि ईरान पहले भी जहाजों पर हमले कर चुका है और आगे भी ऐसा करने की चेतावनी दे चुका है। ईरान ने अमेरिकी पहल को तीन सप्ताह से अधिक समय से लागू नाजुक युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। ईरान के सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कोई भी विदेशी सैन्य बल, विशेषकर अमेरिकी सेना, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करती है तो उसे निशाना बनाया जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस पर ईरान का नियंत्रण उसे अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे युद्ध में रणनीतिक बढ़त देता है, जिससे वह वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान जहाजों के आवागमन में बाधा डालता है तो अमेरिका "कड़ा जवाब" देगा। उन्होंने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को मानवीय पहल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उन नाविकों की मदद करना है, जो युद्ध के कारण फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने इस पहल को ट्रंप की "भ्रमपूर्ण सोच" करार दिया है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी मांगों में लगातार बदलाव के कारण कूटनीतिक समाधान मुश्किल हो रहा है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात ने आरोप लगाया है कि ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे उसके एक तेल टैंकर पर ड्रोन से हमला किया, हालांकि इसमें किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। उधर, पाकिस्तान ने सोमवार को बताया कि उसने अमेरिकी कब्जे में लिए गए एक ईरानी जहाज के 22 चालक दल के सदस्यों को अपने यहां स्थानांतरित करने में मदद की है। यह कदम वार्ता बहाल करने के प्रयासों के तहत विश्वास बहाली के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तान में महिला आत्मघाती दस्ते तैयार, जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाने की साजिश में जैश-ए-मोहम्मद

श्रीनगर  पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा महिला आत्मघाती दस्ते के लिए बड़े स्तर पर भर्तियां करने में लगा है। इस आत्मघाती दस्ते को तैयार करने की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात को दी गई है।    इस संगठन की ओर से आयोजित महिला आत्मघाती दस्ते की बड़ी बैठक की खुफिया जानकारी और तस्वीरें मिली है। 18 अप्रैल को सुबह 9 बजे मुजफ्फराबाद के गोजर स्थित ओएसए (वन स्टेप अहेड कॉलेज) कॉलेज में 10 घंटे का विशेष सत्र आयोजित किया गया और भर्तियां की गयीं।  इस सत्र में आतंकवादी मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर समेत पीओके के चार कमांडर भी मौजूद थे। करीब 150 से ज्यादा महिलाओं को इस विशेष सत्र के लिए बुलाया गया था। खुफिया एजेंसी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक 18 अप्रैल को हुई आत्मघाती दस्तों की भर्ती और ट्रेनिंग कैंप पूरी जानकारी केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपी जा चुकी है। पाकिस्तानी सेना कर रही मदद पाकिस्तानी मामलों के जानकार और लंबे समय तक खुफिया एजेंसियों को सेवा देने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर हरदीप सिंह विरदी कहते हैं कि पाकिस्तान की सेना का पूरा फोकस महिलाओं के आत्मघाती दस्ते को तैयार करने पर लगा हुआ है। यही वजह है कि जैश ए मोहम्मद की महिला विंग जमात उल मोमिनात को आगे किया जा रहा है।      रिटायर्ड ब्रिगेडियर विरदी कहते हैं कि इसके साथ-साथ पाकिस्तान में ही हरकत-उल-मुजाहिदीन से जुड़ी महिलाएं भी आतंक को आगे बढ़ाने में शरीक होती हैं। उनको भी जम्मू कश्मीर से लेकर भारत के अलग अलग हिस्सों में आतंक को फैलाने का टास्क दिया जा रहा है। निशाने पर जम्मू-कश्मीर केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक इस कोर्स के बाद दो चरण के बड़े कोर्स जमात-उल-मोमिनात की ओर से कराए जाने हैं। सूत्रों के मुताबिक आखिरी सेशन में पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर के खुद शामिल होने का बयान भी जारी किया गया।        जानकारी के मुताबिक इस बैठक में महिलाओं को जम्मू कश्मीर के नक्शे के साथ यहां के एक-एक जिले और उसकी डेमोग्राफी के बारे में बताया गया। इस बैठक में जिक्र इस बात का भी किया गया कि मई के तीसरे हफ्ते में इन महिलाओं को इस सत्र के बाद लाहौर में एक विशेष ट्रेनिंग दी जानी है।      इससे पहले भी 17 जनवरी को लाहौर के वीमेन लॉ कॉलेज और बहावलपुर के मरकज उस्मान-ओ-अली में भी कैंप लगाए जा चुके हैं। जिसमें 90 से ज्यादा महिलाओं ने शिरकत की थी।