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LPG बाजार में बड़ा बदलाव, अमेरिका बना भारत का बड़ा सप्लायर; खाड़ी देशों की बढ़ी टेंशन

  नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत की ऊर्जा खरीद व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है. इसी बदलाव का असर है कि मध्य-पूर्वी देशों से भारी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आयात करने वाला भारत अमेरिका से यह पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहा है. अब अमेरिका पारंपरिक खाड़ी देशों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है. वहीं, रूस भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के बावजूद, भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है।  डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 55% रही, जबकि फरवरी में यह केवल 14% थी. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करना है।  28 फरवरी को दोनों देशों ने ईरान पर हमला कर दिया था जिसके बाद शुरू हुए युद्ध ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई. इस युद्ध ने एनर्जी सप्लाई चेन पर बहुत बुरा असर डाला क्योंकि ईरान ने तेल-गैस की सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बेहद नाजुक युद्धविराम कायम है और युद्ध खत्म करने के लिए कोई भी बातचीत अपने आखिरी मुकाम तक नहीं पहुंच पा रही है।  LPG के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर भारत अब अमेरिका की तरफ मुड़ा  भारत पारंपरिक रूप से अपनी अधिकांश LPG जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहा है. लेकिन युद्ध के कारण संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे देशों से आयात बहुत कम हुआ है. भारत के LPG आयात में इन देशों की संयुक्त हिस्सेदारी फरवरी में 81% से घटकर मई में केवल 16% रह गई।  मई में अमेरिका से भारत को LPG निर्यात 73% बढ़कर लगभग 6.66 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया. इससे खाड़ी क्षेत्र से आने वाले कार्गो में आई भारी गिरावट की भरपाई करने में मदद मिली।    सप्लाई में आई रुकावट के चलते भारत को घरेलू स्तर पर भी सख्त कदम उठाने पड़े. सरकार ने हाल ही में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए LPG सिलेंडर खरीदने पर रोक लगा दी और कुछ उद्योगों को LPG की सप्लाई कम कर दी ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।  घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी ने भी स्थिति को कुछ हद तक संभालने में मदद की है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का LPG उत्पादन संघर्ष से पहले लगभग 35,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन था जो बढ़कर 50,000-52,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है. इससे आयात पर निर्भरता कुछ कम हुई है लेकिन देश की कुल मांग का लगभग 60% हिस्सा अब भी आयात से पूरा होता है।  तेल आयात पर भी ईरान संघर्ष का असर भारत के तेल आयात में भी संघर्ष का असर देखने को मिला है. मई में रूस से कच्चे तेल का आयात 24% बढ़कर 19.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो भारत के कुल लगभग 49 लाख बैरल प्रतिदिन के कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा है।  केप्लर के विश्लेषकों का कहना है कि रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों को सही कीमत पर मिल रहा है. भारत को यह तेल ऐसे वक्त में मिल रहा है जब खाड़ी देशों से सप्लाई लगभग रुकी हुई है।  इसके साथ ही भारत ने वेनेजुएला और ओमान से भी खरीद बढ़ाई है. मई में ओमान से कच्चे तेल का आयात 179% बढ़ा, जो यह दिखाता है कि भारतीय रिफाइनरियां ऐसे सप्लायरों की ओर रुख कर रही हैं जिन्हें समंदर के जरिए देश में लाना आसान हो। 

‘2-3 हफ्तों में तेल की कीमतों में बड़ा उछाल’, Hormuz संकट पर ग्लोबल ऑयल कंपनियों की वॉर्निंग

 नई दिल्ली करीब दो महीने पहले अमेरिका के इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन ने एक विश्लेषण जारी किया था, जिसमें सवाल पूछा गया था कि 'दुनिया के पास काम चलाने लायक कच्चे तेल का न्यूनतम स्टॉक खत्म होने में कितना वक्त लगेगा?.' इसका सार ये था कि भले ही बाजार में करोड़ों बैरल तेल मौजूद हो, लेकिन अगर इस्तेमाल के लिए उपलब्ध भंडार बहुत कम हो जाए तो पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है. इंसानी शरीर में ब्लड प्रेशर की तरह असली मुद्दा तेल की मात्रा नहीं, बल्कि उसके लगातार प्रवाह का है।  करीब चार हफ्ते बाद बैंक ने एक और विश्लेषण जारी किया, जिसमें बताया गया कि .होर्मुज स्ट्रेट सितंबर तक क्यों खुल जाएगा… किसी न किसी तरह. बैंक के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में वैश्विक तेल भंडार 8.4 अरब बैरल था, लेकिन उसमें से केवल 0.8 अरब बैरल ही ऐसा था जिसे इस्तेमाल किया जा सकता था।  संक्षेप में कहें तो, अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है और तेल की महंगाई के कारण मांग में कमी 55 लाख बैरल प्रतिदिन पर स्थिर रहती है, तो OECD देशों (Organisation For Economic Co-operation and Development) के कमर्शियल तेल भंडार जून तक भारी दबाव में आ सकते हैं।  इसके बाद सितंबर तक दुनिया के तेल भंडार उस न्यूनतम स्तर पर पहुंच सकते हैं, जहां से सामान्य संचालन करना मुश्किल हो जाएगा. दिलचस्प बात यह है कि जेपीमॉर्गन की पिछली रिपोर्ट के बाद तेल की कीमतें बढ़ने के बजाय घटी हैं, इसलिए मांग में गिरावट की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है।  सप्लाई कम फिर भी गिर रही तेल की कीमतें… बड़ा तूफान आने वाला है इस दौरान सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल तेल जरूरतमंद देशों तक नहीं पहुंच पा रहा था. सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में कीमतें तेजी से बढ़नी चाहिए थीं ताकि मांग कम हो जाए. लेकिन इसके उलट मार्च के आखिर में बहुत अधिक बढ़ने और फिर एक महीने बाद दोबारा बढ़ने के बाद तेल की कीमतें गिरने लगीं. इससे मांग कम होने के बजाय और बढ़ी है. इसी वजह से जेपीमॉर्गन ने रिपोर्ट जारी कर कहा था कि वैश्विक तेल बाजार के गणित में कुछ गड़बड़ है।  इसके कुछ हफ्ते बाद गोल्डमैन सैक्स ने भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद, मई में वैश्विक तेल भंडार रिकॉर्ड 87 लाख बैरल प्रतिदिन की दर से घटे।  फिर भी मई में तेल की कीमतें काफी नीचे रहीं. इसकी एक बड़ी वजह बाजार को रोजाना दिए जाने वाले वो संकेत थे जिनमें सरकारी और गैर-सरकारी सूत्र लगातार यह कह रहे थे कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता बस होने ही वाला है।  लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तेल बाजार भले ही इस खतरे को नजरअंदाज करना चाहे, लेकिन अब तेल उद्योग की बड़ी कंपनियां खुलकर चेतावनी देने लगी हैं।  तेल स्टोरेज खत्म होने का झटका बाजार सह नहीं पाएगा हाल ही में शेवरॉन के CEO माइक वर्थ ने कहा कि अगले दो महीनों में तेल की कीमतें बढ़ने की संभावना है क्योंकि पहले से ही बेहद कम स्तर पर मौजूद कच्चे तेल के भंडार ईरान युद्ध की वजह से लगातार घट रहे हैं।  उन्होंने गुरुवार को एक कॉन्फ्रेंस में कहा, 'सुरक्षा के लिए मौजूद अतिरिक्त भंडार खत्म हो रहा है और ऐसा झटका सहने की क्षमता भी खत्म होती जा रही है. बाजार के पास इस असंतुलन को संभालने की क्षमता अब पहले की तुलना में काफी कम रह गई है।  उन्होंने आगे कहा, 'अगले कुछ हफ्तों में यह दबाव सीधे तेल की कीमतों में दिखने लगेगा. जून और खासकर जुलाई में कीमतें ऊपर जाएंगी।  वर्थ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पिछले एक हफ्ते में तेल की कीमतों में करीब 10% की गिरावट आई है. इसकी वजह यह उम्मीद रही कि अमेरिका और ईरान तीन महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए कोई समझौता कर सकते हैं. इसी संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है, जो दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल की आवाजाही का रास्ता है।  उनकी चेतावनी से यह चिंता भी बढ़ गई है कि अगर युद्ध खत्म करने के लिए कोई समझौता हो भी जाता है तब भी तेल की कीमतें महीनों तक ऊपर बनी रह सकती हैं. वैसे भी फिलहाल ऐसा कोई समझौता होता हुआ नजर नहीं आ रहा. इस संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार से रोजाना 1.2 से 1.3 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति गायब हो चुकी है।  युद्ध खत्म हो भी जाए तब भी अगले साल तक नहीं सुधरेंगे तेल बाजार के हालात वर्थ की बात अन्य तेल अधिकारियों की चेतावनियों से भी मेल खाती है. इनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकारी तेल कंपनी Adnoc के प्रमुख भी शामिल हैं. उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि अगर संघर्ष खत्म भी हो जाए, तब भी होर्मुज स्ट्रेट में तेल की सामान्य आवाजाही अगले साल से पहले बहाल होने की संभावना नहीं है।  ADNOC के सीईओ सुल्तान अल-जाबेर ने 21 मई को एक प्रोग्राम में कहा, 'संघर्ष से पहले के स्तर की 80% तेल आपूर्ति बहाल होने में कम से कम चार महीने लगेंगे और पूरी क्षमता से तेल प्रवाह 2027 की पहली या शायद दूसरी तिमाही से पहले शुरू नहीं होगा।  जेपीमॉर्गन की तरह वर्थ ने भी कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतें उतनी नहीं बढ़ीं जितनी उम्मीद थी. इसकी वजह यह रही कि देशों ने इमर्जेंसी के लिए अच्छी मात्रा में तेल जमा कर रखा था, अमेरिका ने बाजार को तेल दिया और ईरान, रूस, वेनेजुएला के प्रतिबंधित तेल भी बाजार में पहुंचे. लेकिन अब ये भंडार तेजी से घट रहे हैं।  ऑयल प्राइस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें एक बड़ा फैक्टर चीन के तेल भंडार हैं जो चुपचाप तेजी से कम हो रहे हैं. इसमें कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक दोनों तरह के भंडार शामिल हैं. चीन के रणनीतिक भंडार में करीब 1.4 अरब बैरल तेल होने का अनुमान है. अगर चीन इन्हें बड़े पैमाने पर बाजार में उतारता है, तो संकट कुछ समय के लिए टल सकता है।  वर्थ ने यह भी कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट सरकारों को सीख देगा कि वो भविष्य के लिए … Read more

ईरान के हमले से कुवैत में तबाही, हवाई अड्डा बना निशाना

कुवैत  कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। कुवैत स्थित भारत के दूतावास ने इसकी पुष्टि कर दी है। कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि हमले में 63 लोग घायल हुए हैं, जिनमें हवाई अड्डे के कर्मचारी और यात्री शामिल हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमले में हवाई अड्डे की सुविधाओं और राजनयिक मिशनों को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। इंडियन एंबेसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'कुवैत स्थित भारतीय दूतावास आज कुवैत के हवाई अड्डे पर हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त करता है। दूतावास मृतक के परिवार के संपर्क में है और कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर मृतक के परिवार और घटना में घायल हुए लोगों को हर संभव सहायता देने के लिए समन्वय स्थापित किए हुए है।' कुवैत ने जताई कड़ी नाराजगी कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से उनकी जमीन पर क्रूर हमले किए हैं। ईरान के इस तरह के हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। बयान के अनुसार, इन हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई नागरिक और महत्वपूर्ण ढांचागत सुविधाओं को निशाना बनाया गया। कुवैती विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह ईरान के इन हमलों को पूरी तरह खारिज करता है। इस तरह की घटनाएं ना केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और 2026 के सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 का भी उल्लंघन हैं। कुवैत की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके नागरिकों की रक्षा रेड लाइन है, जिसे किसी भी हालत में पार नहीं किया जा सकता। कुवैत देगा ईरान को जवाब! कुवैत सरकार ने इन हमलों का जवाब देने के लिए संभावित उपायों पर विचार करने की बात कही है। कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस स्थिति पर ध्यान देने और तनाव कम करने के लिए तत्काल कूटनीतिक प्रयास तेज करने की अपील की है। कुवैती रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल-1 (टी1) को कई ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। कुवैत पर हमलों के समय ही बुधवार सुबह को बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी चेतावनी सायरन बजाए जाने की जानकारी दी है। गृह मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को एक चेतावनी सायरन बजाया गया जिसमें नागरिकों और निवासियों से शांत रहने और सुरक्षा संबंधी आधिकारिक निर्देशों को पालन करते हुए करीब सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई।

कर्नाटक की सियासत में नया अध्याय: डीके शिवकुमार ने संभाली कमान, 13 मंत्रियों का शपथ ग्रहण

कर्नाटक कर्नाटक में पिछले तीन साल से चल रहा मुख्यमंत्री पद का विवाद आखिरकार थम गया है। कांग्रेस के अहम रणनीति कार माने जाने वाले डीके शिवकुमार राज्य की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। बुधवार को कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में डीके शिवकुमार ने पद और गरिमा की शपथ ली। उनके साथ कर्नाटक कांग्रेस के बड़े दलित नेता जी परमेश्वर ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही डीके के 13 और मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र का नाम भी शामिल है राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए निकले डीके शिवकुमार सबसे पहले अपनी मां के आवास पर पहुंचे। यहां पर उन्होंने उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह सीधे लोकभवन पहुंचे, जहां पर कांग्रेस के तमाम बड़े नेता समेत संत समाज उनकी प्रतीक्षा में था। शिवकुमार ने सबसे पहले वहां मौजूद संतों का अभिवादन किया। संतों ने मिलकर ‘होने वाले मुख्यमंत्री’ को पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद शिवकुमार मंच पर पहुंचे, जहां सबसे पहले उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का गले लगकर अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का स्वागत किया। संविधान की प्रति लेकर ली शपथ राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शिवकुमार को बुलाया, तो डीके के हाथ में लाल रंग की संविधान की प्रति भी थी। इसी प्रति को हाथ में लेकर उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली, जिस वक्त डीके शपथ ले रहे थे उनके कार्यकर्ताओं के बीच में जबरदस्त जोश देखने को मिला। शपथ लेने के बाद डीके ने मंच पर जनता के सामने झुककर उनका अभिवादन किया। डीके के शपथ लेने के बाद जी परमेश्वरा ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद एक-एक करके बाकी मंत्रियों ने भी अपने पद की शपथ ली। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बेटे यतींद्र भी शामिल थे। नए मंत्रियों में कौन-कौन शामिल? कर्नाटक में तीन साल के उठा पटक के बाद सत्ता संभालने वाले डीके शिवकुमार की टीम में नए नाम भी शामिल हुए हैं। उप मुख्यमंत्री के रूप में जी. परमेश्वर ने शपथ ली है। इसके अलावा के.एच. मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायर गौड़ा, प्रियांक खरगे, यू.टी. खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्दारमैया, बैरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल ने भी मंत्री के रूप में पद और गरिमा की शपथ ली। वीआईपी रहा सीएम शिवकुमार का शपथ ग्रहण कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह भव्य रहा है। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य में मौजूद रहे। उनकी मां गौरम्मा, पत्नी उषा और उनके बच्चे शामिल थे। समारोह में धार्मिक गुरु, फिल्म जगत की हस्तियां, खिलाड़ी और उद्योगपति भी मौजूद थे। चालीस से अधिक धर्मगुरु समारोह में उपस्थित थे। इसके अलावा अभिनेता रविचंद्रन, अभिनेत्री जयमाला, किच्चा सुदीप, रम्या, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद और उद्योगपति अनिल कुंबले जैसी जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद थीं। परंपरा से हटकर शपथ ग्रहण समारोह पश्चिम दिशा के बजाय पूर्व दिशा की ओर मुख करके आयोजित किया गया। यह निर्णय आध्यात्मिक और ज्योतिषीय सलाहकारों की सलाह पर लिया गया था। लोक भवन परिसर में स्थित 'ग्लास हाउस' में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जहां निर्धारित स्थानों पर लगभग 3,500 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। धर्मगुरुओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी, जबकि समारोह की कार्रवाई को सभी तक पहुंचाने के लिए छह एलईडी स्क्रीन लगाई गई थीं। इस कार्यक्रम के लिए 2,000 से अधिक वीआईपी पास जारी किए गए थे। बता दें, तीन साल तक चली खींचतान के बाद सिद्दारमैया ने आखिर कार अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद शिवकुमार का राजतिलक तय माना जा रहा था। हालांकि, दिल्ली में पार्टी नेताओं ने इस पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन बाद में पूरा मामला खुल गया। दिल्ली से लौटकर आए सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दिया और इसके साथ ही पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया गया। शिवकुमार ने विधायकों के साथ अपना समर्थन दिखाते हुए राज्यपाल से शपथ के लिए समय मांगा। इसके बाद तीन जून की तारीख तय हुई। बुधवार तीन जून को पद और गरिमा की शपथ लेने के साथ ही कर्नाटक में कांग्रेस का किंगमेकर आखिरकार किंग बन ही गया।  

Mumbai Weather Alert: तेज आंधी और भारी बारिश की चेतावनी, मॉनसून को लेकर आई बड़ी खबर

मुंबई  महाराष्ट्र में झमाझम बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में आंधी और तूफान की संभावनाएं जताई हैं। खास बात है कि मॉनसून की एंट्री का तारीख नजदीक आने के साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम बदलने लगा है। कहा जा रहा है कि पुणे में पूरे सप्ताह बारिश की संभावनाएं जताई जा रही हैं। मौसम विभाग का कहना है कि 4 जून को मॉनसून केरल में दस्तक दे सकता है। खबर है कि मुंबई और पुणे के साथ ठाणे और पालघर जिले में येलो अलर्ट जारी कर दिया गया है। यहां बारीश और तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा कोंकण और पश्चिम महाराष्ट्र बेल्ट में प्री मॉनसून गतिविधियां और मजबूत हो सकती हैं। ऐसे में क्षेत्र में झमाझम बारिश होने के आसार हैं। खास बात है कि महाराष्ट्र के कई जिले लंबे समय से उमस और गर्मी का सामना कर रहे थे। ऐसे में बारिश तापमान राहत दे सकती है। 4 जून तक मुंबई में बारिश खास बात है कि इस सप्ताह की शुरुआत से ही मुंबई में बारिश दर्ज की जा रही थी। अब संभावनाएं हैं कि 4 जून तक शहर में बारिश हो सकती है। वहीं, पुणे में कम से कम 6 जून तक हल्की बारिश हो सकती है। फिलहाल, शहर में 3 और 5 जून को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 4 जून को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। इस दौरान बारिश जारी रहने की संभावनाएं हैं। मौसम के जानकारों का कहना है कि अगले 5 दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं। इस दौरान इनकी रफ्तार 40 से 50 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि इस दौरान आंधी-तूफान के साथ कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है। खास बात है कि एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि बारिश के मौजूदा दौर का मॉनसून के आगमन से लेना देना नहीं है। महाराष्ट्र में मॉनसून क्षेत्रीय मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून गतिविधियों के लिए पूरे महाराष्ट्र में स्थिति अनुकूल हैं। दोपहर और शाम के समय में बारिश की ज्यादा संभावनाएं हैं। 4 जून को आएगा मॉनसून मंगलवार को IMD ने बताया कि मॉनसून 4 जून के आसपास केरल पहुंच सकता है। आईएमडी ने अपने दैनिक पूर्वानुमान में कहा, 'दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप तथा केरल और तमिलनाडु के कुछ भागों में चार जून के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून के और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।' आईएमडी ने पहले अनुमान जताया था कि केरल में मानसून की दस्तक 26 मई के आसपास होगी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। बाद में विभाग ने 29 मई को कहा कि मानसून अगले हफ्ते पहुंच सकता है।

इंडसइंड बैंक की मुश्किलें गहराईं! 2000 करोड़ की गड़बड़ी के बाद अब PMO-RBI में शिकायत

मुंबई  प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख बैंक इंडसइंड बैंक की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। बैंक में करीब ₹2,000 करोड़ की डेरिवेटिव्स अकाउंटिंग गड़बड़ी सामने आने के बाद अब एक व्हिसलब्लोअर ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और कई अन्य नियामक एजेंसियों से मामले की जांच की मांग की है। मामले से जुड़े डॉक्यूमेंट्स के अनुसार शिकायत की प्रतियां गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO), राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) और अन्य एजेंसियों को भी भेजी गई हैं। इस खबर के बाद शुरुआती कारोबार में ही इंडसइंड बैंक के शेयर आज करीब 2.50 प्रतिशत से अधिक नीचे 888.80 रुपये पर आ गए। अंदरूनी कारोबार और गवर्नेंस में खामियों के आरोप इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक शिकायत में बैंक के पूर्व पूर्वी भारत जोनल हेड समीर अग्रवाल पर इनसाइडर ट्रेडिंग यानी गोपनीय जानकारी के आधार पर शेयर ट्रेडिंग का आरोप लगाया गया है। व्हिसलब्लोअर का दावा है कि समीर अग्रवाल ने बैंक की गोपनीय जानकारियों का इस्तेमाल करते हुए अपने परिवार और संबंधित संस्थाओं के जरिए शेयरों में कारोबार कराया। आरोप है कि सार्वजनिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने से पहले करीब ₹815 करोड़ के शेयर डील के जरिए लगभग ₹46 करोड़ का लाभ कमाया गया। माइक्रोफाइनेंस लोन और ऑडिट रिपोर्ट को लेकर भी सवाल शिकायत में केवल इनसाइडर ट्रेडिंग ही नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इनमें वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर, माइक्रोफाइनेंस लोन की एवरग्रीनिंग, ऑडिट निष्कर्षों को दबाने और कथित अनियमितताओं को छिपाने के प्रयास शामिल हैं। व्हिसलब्लोअर का आरोप है कि बैंक के कुछ सीनियर अफसरों और बोर्ड के सदस्यों ने इन मुद्दों को दबाने की कोशिश की। इंडसइंड बैंक ने आरोपों को किया खारिज बता दें इकनॉमिक टाइम्स द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में इंडसइंड बैंक ने इन आरोपों को खारिज किया है। बैंक ने कहा कि वह व्हिसलब्लोअर द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं करता। बैंक के अनुसार सभी शिकायतों की आंतरिक रूप से जांच की गई है और आवश्यक कार्रवाई नियामकीय नियमों तथा बैंक की नीतियों के अनुसार की गई है। बैंक ने यह भी कहा कि कुछ मामलों की जानकारी उसने स्वयं संबंधित अधिकारियों को दी थी। चूंकि मामला अभी समीक्षा के दायरे में है, इसलिए बैंक इस पर और टिप्पणी नहीं करेगा। बढ़ सकती है नियामकों की निगरानी विशेषज्ञों का मानना है कि ₹2,000 करोड़ की अकाउंटिंग गड़बड़ी के बाद सामने आई इस नई शिकायत से इंडसइंड बैंक पर नियामकीय निगरानी और बढ़ सकती है। अगर जांच एजेंसियां आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई पाती हैं, तो बैंक और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू हो सकती है।

संपत्ति के बाद नौकरी में भी बेटियों के अधिकार मजबूत, जानिए Supreme Court का अहम फैसला

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के बाद बेटियों के अधिकार को लेकर बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विवाह के बाद भी बेटी परिवार का ही अंग है. किसी बेटी को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए सिर्फ इसलिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि वह विवाहित है. सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले ने विवाहित बेटियों के अधिकार को लेकर छाई भ्रम की धुंध हटा दी है।  सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया कि निवास एक अलग पात्रता शर्त है, जिसका मूल्यांकन प्रत्येक मामले के तथ्यों पर किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी विवाहित बेटियों के अधिकार खारिज किए जाने को इस धारणा के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता कि हर विवाहित बेटी जरूरी रूप से कहीं और रहती है।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक निर्णय उन अनुमानों पर आधारित नहीं किया जा सकता, जो व्यापक हैं और जीवंत वास्तविकताओं से कटे हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता निशा ने तर्क दिया कि विवाहित बेटियों को एक लाभकारी योजना से बाहर करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है और यह समानता की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करता है. सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि विवाहित बेटियाँ आम तौर पर अपने वैवाहिक घरों में चली जाती हैं।  सरकार की ओर से दलील यह भी दी गई कि विवाह के बाद बेटियां स्थानीय निवास की आवश्यकता को पूरा नहीं कर सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा का उद्देश्य उत्तराधिकार का अधिकार बनाना नहीं, एक मृतक के परिवार को तत्काल वित्तीय राहत देना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में निरंतरता सुनिश्चित करना है. एक बार जब निर्भरता को मानक रूप में स्वीकार कर लिया जाता है, तो एक विवाहित बेटी को केवल इसलिए बहिष्कृत करना तर्कहीन हो जाता है।  सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर फैसला सुनाया कि क्या विवाहित बेटियों को संवैधानिक रूप से 'परिवार' की परिभाषा से बाहर रखा गया है? क्या अनुकंपा के आधार पर उन्हें उचित मूल्य की दुकान का लाइसेंस दिया जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2025 में दिए अपने निर्णय में कहा था कि केवल अविवाहित बेटी को ही अनुकंपा के आधार पर माता या पिता के नाम से लाइसेंस वाली उचित मूल्य की राशन दुकान का आवंटन अनुकंपा के आधार पर ट्रांसफर हो सकता है।  याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. अपनी याचिका में विवाहित बेटी ने यह तर्क दिया था कि वह अपने पिता की मृत्यु के बाद मां और एक विकलांग बहन की देखभाल कर रही है। 

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में भक्तों की आस्था का अनोखा रिकॉर्ड, 12.4 लाख लोगों ने करवाया मुंडन

तिरुपति  आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर को बाल चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।मंदिर प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अनुसार, 1 से 27 मई तक कुल 12,43,063 श्रद्धालुओं ने अपने बाल अर्पित किए। यह आंकड़ा पिछले वर्षों को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना है। पिछले सालों से तुलना मई 2024 में यह संख्या लगभग 10.65 लाख थी, जबकि इससे पहले की अवधि में 10.18 लाख भक्तों ने बाल चढ़ाए थे। मंदिर अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों, हफ्ते के आखिरी मे भीड़ और देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों के आने से इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक दिन का रिकॉर्ड 18 से 23 मई के बीच रोजाना 50,000 से अधिक भक्तों ने मुंडन करवाया। खासतौर पर 23 मई को 57,580 बाल चढ़ावे दर्ज किए गए, जो हाल के वर्षों में एक दिन का सबसे अधिक आंकड़ा है। 24 घंटे मुंडन सेवाएं भीड़ को ठीक तरीके से संभालने के लिए TTD ने मुख्य कल्याणकट्टा सहित 11 मिनी मुंडन केंद्रों पर सेवाएं 24 घंटे चालू रहती हैं। 1,150 से अधिक नाई (जिनमें 269 महिला नाई शामिल हैं) शिफ्ट में काम कर रहे हैं ताकि भक्तों को बिना इंतजार के समय में सेवा मिल सके। 167 करोड़ के बाल धार्मिक आस्था के साथ-साथ ये बाल TTD के लिए बड़े राजस्व का स्रोत भी बन गए हैं। इन्हें 'काला सोना' कहा जाता है। इकट्ठा किए गए बालों को सॉर्टिंग और ग्रेडिंग के बाद चीन, इटली, अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में नीलाम किया जाता है, जहां इनका उपयोग विग, हेयर एक्सटेंशन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में होता है। आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में बाल नीलामी से 67 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी, जो 2023-24 में बढ़कर 167 करोड़ रुपये हो गई। 2024-25 में यह 190 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है और अगले वित्तीय वर्ष में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। भक्तों की सुविधा पर जोर TTD ने मुंडन केंद्रों पर स्वच्छता, स्टरलाइज्ड ब्लेड, गर्म पानी, पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था और टोकन सिस्टम जैसी सुविधाएं बढ़ा दी हैं ताकि भक्तों को सुरक्षित और आरामदायक अनुभव मिले।

नई राफेल डील में ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर, 50% स्वदेशी पुर्जों के साथ भारत में तैयार होंगे 90 विमान

 नई दिल्ली भारतीय रक्षा क्षेत्र और वायु सेना (IAF) के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. भारत सरकार ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स (Rafale Fighter Jets) खरीदने की मेगा डील की दिशा में सबसे बड़ा और औपचारिक कदम उठा लिया है।  रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस सरकार को लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR – Letter of Request) जारी कर दिया है, जो सरकारी स्तर (G-to-G) पर होने वाले रक्षा समझौतों की आधिकारिक शुरुआत है. लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली यह मेगा डील भारत का अब तक का सबसे बड़ा फाइटर जेट खरीद कार्यक्रम है।  यह सौदा न केवल भारतीय वायु सेना की घटती 'स्कवाड्रन क्षमता' को मजबूत करेगा, बल्कि देश को एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के मामले में एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित करेगा. इस सौदे की सबसे खास बात यह है कि यह 'बाय ग्लोबल, मेक इन इंडिया' नीति के तहत आ रहा है, जिसका सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था, रक्षा उत्पादन और रोजगार के अवसरों पर पड़ेगा।  क्यों खास है 114 राफेल की नई डील? यह नई राफेल डील साल 2016 में हुई 36 राफेल विमानों की खरीद से बिल्कुल अलग और कई गुना बड़ी है. पिछली बार भारत ने सभी 36 विमान फ्रांस से तैयार स्थिति (Fly-away condition) में खरीदे थे. लेकिन इस बार भारत सरकार की प्राथमिकता देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है. इस नई मेगा डील की सबसे मुख्य विशेषताएं हैं… 22 से 24 जेट्स फ्रांस से तैयार होकर आएंगे: वायुसेना की आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए लगभग 22 से 24 राफेल लड़ाकू विमान सीधे फ्रांस में डसॉल्ट एविएशन की मैरिनेक फैक्ट्री से पूरी तरह तैयार स्थिति में उड़कर भारत आएंगे. इससे वायुसेना को तुरंत आधुनिक कॉम्बैट क्षमता मिलेगी।  90 से 94 जेट्स का निर्माण भारत में होगा: इस डील की असली ताकत यह है कि कुल 114 विमानों में से करीब 90 से 94 फाइटर जेट्स का उत्पादन भारत में किया जाएगा. यह इतिहास में पहली बार होगा जब राफेल जैसे विश्वस्तरीय 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू विमान का निर्माण फ्रांस की धरती से बाहर किसी अन्य देश में किया जाएगा।  50% स्वदेशी पुर्जों का होगा इस्तेमाल: भारत में बनने वाले इन राफेल विमानों में कम से कम 50 प्रतिशत सामग्री, तकनीक और पुर्जे पूरी तरह से भारतीय यानी 'स्वदेशी' होंगे. इसके साथ ही, इस समझौते के तहत भारत को यह अधिकार और तकनीकी पहुंच मिलेगी कि वह अपनी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों (जैसे अस्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल को राफेल जेट में सीधे इंटीग्रेट कर सके) . कौन सी भारतीय कंपनियां बनेंगी डसॉल्ट एविएशन की पार्टनर? फ्रांस की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन अकेले भारत में इतने बड़े पैमाने पर विमानों का निर्माण नहीं कर सकती. इसके लिए उसे भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के साथ हाथ मिलाना होगा।  साझेदारी की रेस में सबसे आगे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (Tata Advanced Systems Limited – TASL) का नाम है. जून 2025 में ही डसॉल्ट एविएशन और टाटा (TASL) ने राफेल के फ्यूजलेज (विमान का मुख्य धड़ या बॉडी) को भारत में बनाने के लिए एक बड़े रणनीतिक समझौते की घोषणा की थी।  इसके अलावा, भारत की सरकारी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिसके पास लड़ाकू विमान बनाने का दशकों पुराना अनुभव है।  निजी क्षेत्र की अन्य बड़ी कंपनियां जैसे लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा डिफेंस और भारत फोर्ज भी इस विशाल सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकती हैं. ये भारतीय कंपनियां राफेल के विंग्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार कंपोनेंट्स, केबिन और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों के निर्माण में डसॉल्ट के साथ मिलकर काम करेंगी।  कहां होगा इन फाइटर जेट्स का प्रोडक्शन और मेंटेनेंस? 90 से अधिक राफेल विमानों का उत्पादन भारत के किन शहरों में होगा, इसे लेकर औद्योगिक गलियारों में भारी उत्साह है. सबसे बड़ा हब हैदराबाद बनने जा रहा है, जहां टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और डसॉल्ट एविएशन मिलकर राफेल के फ्यूजलेज और मुख्य बॉडी पार्ट्स के निर्माण के लिए एडवांस्ड फैसिलिटी स्थापित कर रहे हैं।  इसके अलावा, विमानों की अंतिम असेंबली लाइन (Final Assembly Line) को लेकर भी कयास जारी हैं, जिसके लिए महाराष्ट्र या कर्नाटक के रक्षा औद्योगिक पार्कों पर विचार किया जा सकता है।  उत्पादन के साथ-साथ, विमानों के रख-रखाव को लेकर भी भारत ने बाजी मार ली है. डसॉल्ट एविएशन ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के पास एक अत्याधुनिक 'मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल' (MRO) फैसिलिटी स्थापित की है, जिसका नाम DAMROI (Dassault Aviation Maintenance, Repair and Overhaul India) है।  यह सेंटर पहले से ही चालू हो चुका है. वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास मौजूद मिराज-2000 और 36 राफेल विमानों की सर्विसिंग का काम संभाल रहा है. भविष्य में भारत में बनने वाले 94 राफेल विमानों की सर्विसिंग और अपग्रेडेशन भी इसी एमआरओ हब के जरिए देश के भीतर ही संभव होगी।  रक्षा क्षेत्र में लगेंगी कितनी नौकरियां? यह निवेश भारतीय रोजगार बाजार के लिए एक गेम चेंजर साबित होने वाला है. रक्षा विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक इस मेगा प्रोजेक्ट से भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरियां पैदा होंगी।      हाई-टेक इंजीनियरिंग नौकरियां: विमान के डिजाइन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और असेंबली के लिए हजारों एयरोस्पेस इंजीनियरों, डेटा साइंटिस्ट्स और तकनीशियनों की सीधी भर्ती होगी।      एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बढ़ावा: 50% स्वदेशी पुर्जों की शर्त के कारण भारत की सैकड़ों छोटी और मध्यम (MSME) कंपनियों को कलपुर्जे बनाने के ऑर्डर मिलेंगे. इससे स्थानीय स्तर पर वेल्डिंग, मशीनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में काम करने वाले कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार की बाढ़ आ जाएगी।      कौशल विकास (Skill Development): फ्रांस की तकनीक भारत में ट्रांसफर (Transfer of Technology) होने से भारतीय कार्यबल को वैश्विक स्तर की हाई-टेक ट्रेनिंग मिलेगी, जो भविष्य में भारत के अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) के विकास में काम आएगी।  भारतीय वायु सेना के लिए क्यों जीवनदान है यह सौदा? वर्तमान में भारतीय वायु सेना (IAF) लड़ाकू विमानों की भारी किल्लत से जूझ रही है. दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर एक साथ सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना के पास 42 लड़ाकू विमान स्क्वॉड्रन होने चाहिए. लेकिन पुराने मिग-21 जैसे … Read more

योजना में गड़बड़ी का खुलासा, पुरुषों और लखपति महिलाओं को भी मिल रही थी राशि

मुंबई  महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहन योजना’ की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं. दस्तावेजों की जांच और ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद सरकार ने करीब 80 लाख लाभार्थियों को योजना से बाहर कर दिया है. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि हजारों पुरुष महिलाओं के नाम पर इस योजना का लाभ उठा रहे थे।  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि योजना शुरू करते समय पात्रता के लिए कुछ शर्तें तय की गई थीं, लेकिन शुरुआती चरण में स्व-प्रमाणन (Self Certification) के आधार पर आवेदन स्वीकार किए गए थे. बाद में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर सवाल उठाए, जिसके बाद राज्य सरकार ने व्यापक जांच और केवाईसी अभियान शुरू किया।  जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े सरकार की तरफ से कराए गए विभिन्न सरकारी डेटाबेस के मिलान के बाद कई तरह की गड़बड़ियां सामने आईं. जांच में पता चला कि करीब 16 हजार पुरुषों ने खुद को महिला बताकर योजना का लाभ लिया. इसके अलावा लगभग 5 लाख सरकारी कर्मचारी, 10 लाख आयकरदाता और 4 से 5 लाख ऐसे लाभार्थी पाए गए जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन मौजूद है, जबकि योजना के नियमों के तहत वे पात्र नहीं थे।  सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 74 हजार ऐसी महिलाएं भी पाई गईं, जिनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी, जबकि करीब 2 लाख महिलाओं की उम्र 65 वर्ष से अधिक निकली. दोनों ही श्रेणियां योजना की पात्रता शर्तों से बाहर हैं।  ई-केवाईसी नहीं कराने वालों पर भी कार्रवाई जांच में यह भी सामने आया कि करीब 62 लाख लाभार्थियों ने बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद ई-केवाईसी नहीं कराया. सरकार ने ई-केवाईसी की समय-सीमा तीन बार बढ़ाई थी और करीब पांच महीने तक लोगों को दस्तावेज सत्यापन का अवसर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की।  सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी पहचान सत्यापन की एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य फर्जी खातों, पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी को रोकना है।  अब भी 1.60 करोड़ महिलाओं को मिल रहा लाभ उधर मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अपात्र लाभार्थियों को हटाने के बावजूद योजना का लाभ अभी भी करीब 1.60 करोड़ पात्र महिलाओं को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजना को पारदर्शी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं तक ही पहुंचे।  राज्य सरकार का दावा है कि इस कार्रवाई से योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सकेगा. वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है कि शुरुआती चरण में इतनी बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के आवेदन कैसे स्वीकृत हो गए।