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देश का बजट अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर: वैश्विक निवेशक कर रहे हैं बारीकी से विश्लेषण

नई दिल्ली जब दुनिया युद्ध, महंगाई, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, ऐसे वक्त में भारत का आम बजट सिर्फ घरेलू दस्तावेज नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम संदेश बनकर उभर रहा है जिसका असर अमेरिका से ब्रिटेन तक दिखेगा  । IMF  और World Bank   जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं भारत के बजट को इस सवाल से जोड़कर देख रही हैं  क्या भारत वैश्विक मंदी के बीच स्थिरता का इंजन बन पाएगा? वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरें ऊंची हैं, पश्चिम एशिया और यूक्रेन जैसे क्षेत्रों में युद्ध जारी हैं, जबकि चीन की सुस्ती ने वैश्विक व्यापार को कमजोर किया है। ऐसे माहौल में भारत का बजट 2026 अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष महत्व हासिल कर चुका है।  IMF और World Bank का मानना है कि भारत आने वाले वित्त वर्ष में भी 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रख सकता है। यही वजह है कि वैश्विक एजेंसियां भारत के बजट में राजकोषीय घाटा, पूंजीगत खर्च, रक्षा व्यय और सामाजिक योजनाओं पर खास नजर रखे हुए हैं। Reuters और Bloomberg की रिपोर्टों के अनुसार, विदेशी निवेशक यह देखना चाहते हैं कि भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच कैसे निवेश-अनुकूल माहौल बनाए रखता है। खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और ग्रीन एनर्जी पर बजटीय फोकस को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। World Bank की टिप्पणी World Bank का कहना है कि यदि भारत राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास पर खर्च बढ़ाता है, तो वह न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि वैश्विक विकास को भी सहारा दे सकता है। वहीं IMF ने चेतावनी दी है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए जोखिम बने रहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, अब भारत का बजट सिर्फ देश के लिए नहीं, बल्कि एशिया, अफ्रीका और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। अगर भारत संतुलित बजट पेश करता है, तो यह संदेश जाएगा कि वैश्विक संकट के दौर में भी लोकतांत्रिक और विकासशील अर्थव्यवस्था स्थिर रह सकती है। अमेरिका पर क्या होगा असर? अमेरिका में ब्याज दरें ऊँची होने के कारण निवेशक सुरक्षित और उच्च-ग्रोथ बाजारों की तलाश में हैं। Budget 2026 में अगर भारत  FDI नियमों को और आसान करता है तथा इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर खर्च बढ़ाता है तो तो अमेरिकी पूंजी का बड़ा हिस्सा भारत की ओर शिफ्ट हो सकता है।  Wall Street भारत को अब “Next Growth Engine” के तौर पर देख रहा है। ब्रिटेन (UK) के लिए क्यों अहम भारत का बजट? ब्रेक्ज़िट के बाद ब्रिटेन नए ट्रेड पार्टनर्स की तलाश में है। Budget 2026 में  India-UK FTA के अलावा सर्विस सेक्टर और फाइनेंशियल कोऑपरेशन को गति मिलेगी।  लंदन की कंपनियों को भारत में बड़ा विस्तार मिल सकता है।  ब्रिटिश निवेशक खासकर IT, ग्रीन एनर्जी और स्टार्टअप सेक्टर पर नजर लगाए हुए हैं।  

वैश्विक निवेश की निगाहें भारत पर: बजट 2026 में क्या है निवेशकों की उम्मीदें?

नई दिल्ली यूक्रेन-रूस युद्ध, गाजा संकट, लाल सागर में तनाव, चीन की धीमी अर्थव्यवस्था और अमेरिका-यूरोप में ऊंची ब्याज दरों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब भारत के बजट 2026 पर टिकी हैं, जिसे वैश्विक संस्थाएं आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने वाला मान रही हैं। IMF और World Bank की ताजा रिपोर्टों के अनुसार 2026 में वैश्विक विकास दर 2.7-3% के आसपास रहने की संभावना है।  यूरोप ऊर्जा संकट और युद्ध के असर से जूझ रहा है जबकि  चीन रियल एस्टेट और डिमांड संकट में है। वैश्विक उद्योगों की भारत से उम्मीदें क्यों वैश्विक स्तर पर टैरिफ नीतियाँ और निर्यात मांग में गिरावट जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अमेरिकी टैरिफों और निर्यात बाधाओं से भारतीय निर्यातकों को दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसके समाधान की उम्मीद उद्योगों को बजट से है।पहले  World Bank ने भारत की ग्रोथ अनुमान को थोड़ा कम कर 6.3% कर दिया था, यह वैश्विक आर्थिक दबाव और घरेलू नीतिगत अनिश्चितताओं को ध्यान में रखकर किया गया था। हालांकि  संशोधन में यह स्वीकार किया गया कि भारत दक्षिण एशिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और घरेलू खपत तथा सेवा निर्यात इसे आगे ले जा रहे हैं।     अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और निवेशक भारत के बजट 2026 से उम्मीद कर रहे हैं।     IMF ने भारत के लिए 2025-26 के GDP अनुमान को 6.6% तक अपग्रेड किया है।     यह दिखाता है कि वास्तव में भारत वैश्विक मंदी के बीच भी प्रगति कर रहा है।     मैन्युफैक्चरिंग और Make in India को टैक्स प्रोत्साहन।     सेमीकंडक्टर, EV, ग्रीन एनर्जी में सब्सिडी।     स्टेबल टैक्स पॉलिसी और आसान निवेश नियम।     डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI पर खर्च।     Bloomberg और Reuters के अनुसार, बजट के फैसले तय करेंगे कि ग्लोबल सप्लाई चेन चीन से भारत की ओर कितनी तेजी से शिफ्ट होती है।    रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक असर     NATO और एशिया-पैसिफिक में बढ़ते तनाव के बीच भारत के डिफेंस बजट में बढ़ोतरी पर दुनिया की नजर।     स्वदेशी हथियार और रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा     इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से लॉजिस्टिक्स और व्यापार  मजबूत होगा     विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का बजट इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा।  वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए चुनौती     मुनाफे में फॉरेन इन्वेस्टमेंट फंड (FII) आउटफ्लो और रुपया की कमजोरी ने भी भारत के लिए विनिमय दर संबंधी जोखिम पैदा कर दिए हैं, जिससे बजट में पूंजी आकर्षण और निवेश-सहायक उपायों की मांग बढ़ी है।     चीन सस्ता उत्पादन केंद्र बना हुआ है।     वियतनाम, बांग्लादेश और मैक्सिको प्रतिस्पर्धा में शामिल।     भारत को स्किल, लॉजिस्टिक्स और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर तेज सुधार जरूरी।  

सोना-चांदी के दामों में भारी गिरावट, चांदी 85,000 रुपये सस्ती

 नई दिल्‍ली सोने और चांदी के दाम में शुक्रवार को तगड़ी गिरावट देखने को मिली है. 24 घंटे में चांदी का भाव 85,000 रुपये कम हुआ. वहीं सोने के दाम में भी भारी गिरावट देखने को मिली. इतनी बड़ी गिरावट तब आई है, जब चांदी 4.20 लाख रुपये पर और सोना 2 लाख रुपये के करीब पहुंच गए थे. शुकवार, 3.30 बजे  MCX पर मार्च वायदा के लिए 1 किलो चांदी की कीमत करीब 65000 रुपये गिरकर 3,35,001 रुपये पर पहुंच गई थी, लेकिन गुरुवार की शाम तक सिल्‍वर 4,20,048 रुपये अपने ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुंच गई थी. इस हिसाब से देखें तो 24 घंटे में ही चांदी के भाव (Silver Price) में 85,000 रुपये की गिरावट आई है.  इसी तरह, सोने की कीमत में भी भारी गिरावट आई है. सोना 29  जनवरी, गुरुवार को अपने रिकॉर्ड स्‍तर 1,93,096 रुपये पर था, लेकिन शुक्रवार को यह 16000 रुपये टूटकर 1,67,406 रुपये पर आ गया. यानी कि 24 घंटे के दौरान सोने में 25,500 रुपये की गिरावट आई है.  कल रिकॉर्ड स्‍तर पर पहुंचा था सोना-चांदी वायदा बाजार में गुरुवार को चांदी ने रिकॉर्ड बनाते हुए 4 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा ना सिर्फ पार किया, बल्कि वहां से भी इसमें जबरदस्‍त उछाल आई थी. चांदी का भाव गुरुवार को 34,000 रुपये चढ़कर अपने ऑल टाइम हाई लेवल 4,20,048 रुपये पर पहुंच गई थी. इसी तरह, वायद बाजार 29 जनवरी को सोना 16000 रुपये चढ़कर अपने रिकॉर्ड हाई लेवल 1,93096 रुपये पर पहुंच गया था. हालांकि अब इन दोनों कीमती धातुओं में तगड़ी गिरावट आई है.  अचानक क्‍यों आई ये बड़ी गिरावट?      एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि यह मुनाफावसूली है, क्‍योंकि कई दिनों से सोने और चांदी के भाव तेजी देखी जा रही थी और इनकी कीमतें हर दिन रिकॉर्ड स्‍तर बना रही थीं. चांदी ने तो कुछ ही हफ्ते में 3 लाख रुपये से 4 लाख रुपये का लेवल पार कर लिया था. वहीं सोने ने भी खूब तेजी दिखाई है. ऐसे में अपने प्रॉफिट को बचाने के लिए निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं .      कुछ एक्‍सपर्र्ट्स का तो यह भी कहना है कि सोने और चांदी में जैसे ही बिकवाली हावी हुई वैसे ही शॉर्ट सेलर एंटर हो गए और ट्रेडिंग के दौरान सिल्‍वर को शॉर्ट किया, जिस कारण इसके दाम में भारी गिरावट आई है.      इंटरनेशनल मार्केट में भी चांदी और धातुओं की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, जिससे भारत में भी MCX पर भाव नीचे आ गए.      डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि वह फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की जगह अपने पसंदीदा शख्‍स को रखना चाहते हैं, जिस कारण डॉलर में मजबूती आई और कुछ वैश्विक तनाव भी कम हुए, जिस कारण सोने और चांदी के भाव में गिरावट आई है .  गोल्‍ड -सिल्‍वर ईटीएफ में भी बड़ी गिरावट?  सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट के कारण सिल्‍वर और गोल्‍ड ईटीएफ के दाम बड़ी तेजी से गिरे हैं. शेयर बाजार बंद होने तक सिल्‍वर और गोल्‍ड ETF के दाम 20 फीसदी तक टूट गए. ICICI Silver ETF 20.14 फीसदी गिरा,  निप्‍पॉन इंडिया सिल्‍वर ईटीएफ 18.59 फीसदी टूटा, Tata सिल्‍वर ईटीएफ में 13 फीसदी की गिरावट आई. वहीं गोल्‍ड ईटीएफ की बात करें तो Tata Gold ETF 9.16 फीसदी गिरा, निप्‍पॉन इंडिया गोल्‍ड ईटीएफ 10.50 फीसदी गया.  (नोट- सोना-चांदी या किसी अन्‍य ईटीएफ में निवेश से पहले अपने योग्‍य वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

बाजार में हड़कंप: चांदी अचानक ₹24,000 सस्ती, सोने की कीमतों में भी भारी गिरावट

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट (Gold-Silver Price Crash) आई है और लगातार तूफानी तेजी से भाग रही इन कीमती धातुओं के दाम शुक्रवार को खुलते ही क्रैश हो गए. सबसे बड़ी गिरावट चांदी की कीमत (Silver Price Crash) आई है और MCX पर इसका वायदा भाव करीब 24000 रुपये तक टूट गया है. न सिर्फ चांदी, बल्कि सोने का भाव भी टूटा (Gold Rate Fall) है और ये खुलते ही 8000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है.  Silver Price अचानक क्रैश सबसे पहले बात करते हैं, चांदी की कीमतों में आई गिरावट के बारे में तो बीते कारोबारी दिन गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर Silver Price रॉकेट की रफ्तार से भागा था और इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकल गई थी. हालांकि, कारोबार के अंत में ये 3,99,893 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था और शुक्रवार को जब एमसीएक्स में कारोबार की शुरुआत हुई, तो 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का वायदा भाव 23,993 रुपये टूटकर 3,75,900 रुपये पर आ गया.  वहीं दूसरी ओर गुरुवार को चांदी की कीमत ने जो नया लाइफ टाइम हाई लेवल बनाया था, उसकी तुलना में तो बहुत बड़ी एक दिनी गिरावट देखने को मिली है. जी हां, Silver High 4,20,048 प्रति किलोग्राम था और यहां से एक ही दिन में ये 44,148 रुपये तक सस्ती हो गई है.  सोना भी झटके में हुआ इतना सस्ता  चांदी के बाद बात करें, सोने की कीमतों में आई गिरावट के बारे में, तो ये भी एमसीएक्स पर क्रैश (Gold Rate Crash) नजर आया. बीते कारोबारी दिन गुरुवार को चांदी की तरह से ही ये भी जोरदार तेजी लेते हुए भागा और नया ऑल टाइम हाई लेवल छूने के बाद अंत में 1,83,962 रुपये के लेवल पर क्लोज हुआ था, लेकिन शुक्रवार को जब 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला गोल्ड ओपन हुआ, तो एक झटके में 8,862 रुपये की गिरावट के साथ सस्ता होकर 1,75,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर आ गया.  अगर बात सोने के हाई लेवल की करें, तो गुरुवार को ही Gold Rate तेजी से दौड़ लगाते हुए 1,93,096 के नए Life Time High Lavel पर पहुंचा था और इस स्तर के गिरावट की बात करें, तो शुक्रवार को ये 17,996 सस्ता हो गया है.  सोना-चांदी में गिरावट के पीछे ये वजह अब बात करें, एमसीएक्स से लेकर ग्लोबल बाजारों में सोना-चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में, तो एक्सपर्ट कह रहे हैं, कि कीमती धातुओं के तेजी से नए हाई लेवल पर पहुंचने के बाद बाजार में भारी बिकवाली देखी गई. निवेशकों की इसी मुनाफावसूली से कीमतों में अचानक से तेज गिरावट देखने को मिली है. इसके अलावा ग्लोबल टेंशन का माहौल बरकरार है, लेकिन Tariff Attack के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान (Iran) से परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए कदम आगे बढ़ाया है, जिसका असर भी दिखा है.  

2026 में VW का धमाका: भारतीय बाजार में आएंगी 5 नई कारें, Tayron R-Line की होगी शुरुआत

मुंबई  जर्मन कार निर्माता Volkswagen ने हाल ही में अपनी नई Volkswagen Tayron R-Line का खुलासा किया है. अब Volkswagen India ने 2026 कैलेंडर वर्ष के लिए अपने आने वाले प्रोडक्ट प्लान की घोषणा की है. कंपनी ने जानकारी दी है कि वह भारतीय बाज़ार के लिए 5 नए प्रोडक्ट लॉन्च करने वाली है, जिसमें साल के हर क्वार्टर में एक लॉन्च का प्लान है. कंपनी के आने वाले मॉडल SUV, सेडान और हैचबैक बॉडी स्टाइल में होंगे, जिनका फोकस मार्केट के प्रीमियम सेगमेंट पर होगा. जानकारी के अनुसार, Tayron R-Line आने वाले मॉडल्स में से सबसे पहली होने वाली है, जो भारतीय बाजार में लॉन्च की जाएगी. Volkswagen का प्रोडक्ट इंटरवेंशन रेगुलर लॉन्च के ज़रिए कंपनी की प्रासंगिकता और जुड़ाव बनाए रखने पर केंद्रित है. कंपनी का कहना है कि साल 2026 के लिए उसके बड़े लक्ष्य एस्पिरेशनल प्रीमियम पेशकश, बेहतर कस्टमर इंटरैक्शन और क्यूरेटेड ब्रांड अनुभवों पर केंद्रित हैं. जहां बाकी चार मॉडलों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है, वहीं Volkswagen ने कन्फर्म किया है कि हर नया मॉडल एक अलग प्रीमियम कस्टमर सेगमेंट को टारगेट करेगा. Volkswagen Tayron R-Line इस पहल को लीड करेगी और इसे 2026 की पहली तिमाही में लॉन्च किया जाना है. Volkswagen Tayron R-Line में क्या है खास Volkswagen Tayron R-Line की बात करें तो यह भारत में कंपनी की फ्लैगशिप SUV के तौर पर लॉन्च की जाएगी, और इसे Tiguan R-Line से ऊपर पोजिशन किया जाएगा. यह Volkswagen Tiguan Allspace के भारतीय बाजार में बंद होने के बाद प्रीमियम थ्री-रो SUV सेगमेंट में कंपनी की वापसी है. इस 7-सीटर SUV को MQB EVO प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा, और इसे फाइव-स्टार यूरो NCAP सेफ्टी रेटिंग मिली है. इसमें 2,789 mm का लंबा व्हीलबेस दिया गया है, जो Volkswagen Tiguan से 109 mm ज़्यादा है, ताकि तीसरी रो को जगह मिल सके. Volkswagen Tayron R-Line में स्पोर्टी बंपर, R-Line एक्सटीरियर बैजिंग और 19-इंच के अलॉय व्हील लगाए गए हैं. इसके केबिन में ड्राइवर की तरफ झुकी हुई 15-इंच की टचस्क्रीन और डिजिटल इंस्ट्रूमेंटेशन दिया गया है. इस कार में वेंटिलेटेड और मसाज वाली फ्रंट सीटें, लेदर अपहोल्स्ट्री, पैनोरमिक सनरूफ, मैट्रिक्स LED हेडलैंप, 30-कलर एम्बिएंट लाइटिंग और तीसरी रो को फोल्ड करने पर 850 लीटर तक का बूट स्पेस जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इंजन की बात करें तो संभावना जताई जा रही है कि Volkswagen Tayron R-Line में वही 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन दिया जाएगा, जो Tiguan R-Line में देखने को मिलता है. यह इंजन 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स और ऑल-व्हील-ड्राइव सिस्टम के ज़रिए 204 hp की पावर और 320 Nm का टॉर्क देता है.

कीमती धातुओं की उछाल, जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर की वित्त मंत्री से मांगें क्या हैं

नई दिल्ली भारत का जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग बजट 2026-27 से कुछ ठोस कदमों की उम्मीद कर रहा है ताकि बढ़ती कीमतों, वैश्विक अनिश्चितता और बदलती ग्राहक पसंद के दौर में इस क्षेत्र को मजबूती मिल सके। सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, जिससे गहने आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल इस साल अब तक सोने की कीमतों में लगभग 17% की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले साल 64% के उछाल के बाद आई है। चांदी की कीमतों में पिछले साल 147% का भारी उछाल देखा गया। इसका कारण सुरक्षित निवेश की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, अमेरिकी मौद्रिक नीति में ढील और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में रिकॉर्ड निवेश है। उपभोक्ता मांग स्थिर, लेकिन सतर्क सोने-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद उपभोक्ताओं की मांग बनी हुई है, हालांकि अब वे ज्यादा सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि भारत में गहने सिर्फ एक भावनात्मक खरीद ही नहीं, बल्कि पैसे जमा करने का एक जरिया भी हैं। सेंको गोल्ड के सीईओ की सलाह सेंको गोल्ड के एमडी एवं सीईओ सुवांकर सेन का कहना है कि आने वाले साल में गहनों की किफायती पहुंच अहम होगी। उन्होंने छोटे टिकट वाले ईएमआई विकल्पों को विनियमित करने और ज्वेलरी पर मौजूदा 3% जीएसटी दर की समीक्षा का सुझाव दिया है। साथ ही, 6% सोना आयात शुल्क पर पुनर्विचार, कारीगरों के लिए प्रशिक्षण, तकनीक अपनाने और घरेलू मांग पूरी करने के लिए एसईजी इकाइयों को लचीलेपन की जरूरत बताई है। निर्यातकों की चिंता और मांग स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के एमडी मंगेश चौहान के मुताबिक, उद्योग वैश्विक चुनौतियों के बीच लागत कम करने और व्यवसाय में आसानी के लिए समझदारी भरी सुधारों की मांग कर रहा है। आयात शुल्क में तर्कसंगत कमी, सीमा शुल्क प्रक्रिया को आसान बनाने, जीएसटी को घटाकर 1 से 1.25% करना और टूरिस्ट जीएसटी रिफंड स्कीम को जल्द लागू करना उनकी प्रमुख मांगें हैं। मलाबार ग्रुप के अध्यक्ष का नजरिया मलाबार ग्रुप के चेयरमैन एम.पी. अहमद उम्मीद जताते हैं कि पिछले साल सोने के आयात शुल्क में कटौती के बाद इस बार भी नीतिगत निरंतरता बनी रहेगी। वह सोने के मुद्रीकरण योजना को और आकर्षक बनाने पर जोर देते हैं ताकि घरों में पड़े सोने को अर्थव्यवस्था में लगाया जा सके और आयात निर्भरता घटे। हीरे के कारोबार की अपेक्षाएं डिवाइन सॉलिटेयर्स के एमडी जिग्नेश मेहता कहते हैं कि नेचुरल डायमंड पर 5% आयात शुल्क घटाकर 2.5% किया जाना चाहिए, जिससे निर्यात, रोजगार और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, प्राकृतिक और लैब-ग्रोन डायमंड में अंतर स्पष्ट करने वाली बीआईएस अधिसूचना एक सही कदम थी। लैब-ग्रोन डायमंड को बढ़ावा लुकसन के सीईओ आनंद लुखी मानते हैं कि बजट में लैब-ग्रोन डायमंड को एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। कच्चे माल और मशीनरी पर शुल्क में कमी, अपग्रेडेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोत्साहन और एमएसएमई को आसान कर्ज मुहैया कराना इसके विकास के लिए जरूरी है। भविष्य की राह जेन डायमंड के चेयरमैन नील सोनावाला आशा करते हैं कि बजट में समकालीन और हल्के डिजाइन वाले हीरे के गहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए संगठित खुदरा कारोबार को प्रोत्साहन मिलेगा। एक ऐसा बजट जो डिजिटल समर्थन, मैन्युफैक्चरिंग और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाए, ज्वेरी सेक्टर के अगले चरण के विकास का रास्ता खोलेगा। कुल मिलाकर, उद्योग एक संतुलित बजट की उम्मीद कर रहा है जो गहनों को किफायती बनाए, निर्माण और निर्यात को मजबूत करे और भारत को वैश्विक गहना बाजार में एक ताकत के रूप में स्थापित करने में मदद करे।

FTA डील से बदलेगा ऑटो सेक्टर का गेम, यूरोप-भारत समझौते पर क्या बोले उद्योग के दिग्गज

नईदिल्ली  भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA Deal) ने देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई उम्मीद जगा दी है. यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, रोजगार और तकनीक के नए रास्ते खोलने वाला माना जा रहा है. इस डील से न केवल यूरोप से आने वाली इंपोर्टेड कारें कम कीमत में भारत में उपलब्ध होंगी बल्कि भारत से भी एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा. ऑटो इंडस्ट्री के बड़े दिग्गज इसे इंडस्ट्री के डेवलपमेंट में अहम कदम बता रहे हैं. क्या कहते हैं टाटा के MD SIAM के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी व सीईओ शैलेश चंद्रा का कहना है कि "भारत-ईयू एफटीए ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा. उनका मानना है कि यह समझौता बाजार को खोलने और देश में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के बीच बैलेंस बनाए रखेगा. इससे एक तरफ ग्लोबल ब्रांड्स की भागीदारी बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर घरेलू ऑटो इंडस्ट्री में निवेश और रोजगार के नए अवसर बनेंगे. इसके अलावा ग्राहकों को भी ज्यादा विकल्प मिलने की उम्मीद है." ग्लोबल ब्रांड्स के लिए भरोसेमंद माहौल स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया के एमडी और सीईओ पियूष अरोड़ा ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि, "यह भारत और यूरोप के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा. उनके मुताबिक यूरोपीयन यूनियन भारत के बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक है और यह करार दोनों ओर की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाएगा. उन्होंने कहा कि क्लीन और स्टेबल ट्रेड नियमों से भारतीय ग्राहकों के लिए यूरोपीय कारों के ज्यादा मॉडल लाने की संभावनाएं बनेंगी. लंबे समय में इससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, कैपेसिटी डेवलपमेंट और ऑटो इकोसिस्टम में निवेश को बढ़ावा मिलेगा." कम्पटीशन नहीं… बल्कि फायदे का सौदा महिंद्रा ग्रुप के सीईओ और एमडी डॉ. अनिश शाह ने इसे सिर्फ टैरिफ में कटौती से कहीं ज्यादा बताया है. उनके मुताबिक यह समझौता भारत के लिए इकोनॉमिक ग्रोथ की अगली लहर साबित हो सकता है, जो बीते कई सालों में किए गए नीतिगत सुधारों को और मजबूत करेगा. डॉ. शाह का कहना है कि इस एफटीए की सबसे बड़ी खासियत इसका बैलेंस्ड होना है. एक तरफ यह भारतीय बाजार को यूरोपीय कंपनियों के लिए खोलता है, वहीं दूसरी ओर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के फायदों को भी सुरक्षित रखता है. महिंद्रा ग्रुप इसे कम्पटीशन नहीं, बल्कि देश के ऑटो सेक्टर के लिए फायदे का सौदा मानता है. टू-व्हीलर इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक मौका हीरो मोटोकॉर्प के सीईओ हर्षवर्धन चिताले ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक पल बताया. उनके अनुसार यह सिर्फ व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदारी है जो मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की नींव रखेगी. उन्होंने कहा कि इस करार से भारतीय टू-व्हीलर कंपनियों को यूरोपीय बाजारों में ‘मेक इन इंडिया’ प्रोडक्ट को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा. साथ ही रेगुलेटरी सपोर्ट, रिसर्च, इनोवेशन और ग्लोबल वैल्यू चेन में गहरी भागीदारी को भी बल मिलेगा. इंडियन इंडस्ट्री को ग्लोबल प्लेटफॉर्म टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी इस एफटीए को भारतीय उद्योग के लिए बड़ा मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा कि, "ऐसे समझौते केवल टैरिफ कम नहीं करते, बल्कि पूरे बिजनेस माहौल को बदल देते हैं. इससे सप्लाई चेन मजबूत होती है और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल लेवल पर कम्पटीशन करने का मौका मिलता है. टीवीएस अब नॉर्टन जैसे ब्रांड्स के साथ कंपनी यूरोप और अन्य बाजारों में नए अवसर तलाशने पर फोकस करेगी." क्या हुई है डील भारत सरकार और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई इस डील का एक तगड़ा असर ऑटो इंडस्ट्री पर देखने को मिलेगा. यूरोपीय यूनियन का कहना है कि, यूरोप में बनी गाड़ियों पर भारत में लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. इसके लिए 2.5 लाख यूनिट का कोटा तय किया गया है. यानी फिलहाल ये छूट 2.5 लाख कारों पर ही लागू होगा. यानी आने वाले समय में इंपोर्टेड यूरोपियन कारें काफी कम कीमत में भारत में उपलब्ध होंगी. हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों को इस डील में अगले 5 साल तक के लिए बाहर रखा गया है.  कुल मिलाकर, भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को ऑटो सेक्टर के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में देश की ऑटो इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है. इसके अलावा ग्राहकों को भी कम कीमत में ज्यादा बेहतर ऑप्शन मिलेगा. 

बाजार में जोरदार रैली, सेंसेक्स 950 अंक चढ़ा, HDFC बैंक और ट्रेड डील ने बढ़ाया उत्साह

मुंबई  शेयर बाजार में आज का दिन ‘डर से जीत’ की कहानी जैसा रहा. सुबह के सत्र में भारी बिकवाली के दबाव के बाद दोपहर में बाजार ने जोरदार यू-टर्न लिया. सेंसेक्स जो करीब 81,700 के स्तर तक फिसल गया था, वह तेजी से रिकवर होकर 82,689 के पास पहुंच गया. इसी तरह निफ्टी ने भी 25,159 के अपने निचले स्तर से शानदार बाउंस बैक किया और दिन के कारोबार में 25,458 के हाई तक पहुंचा. बाजार के इस टर्नअराउंड ने ट्रेडर्स के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. इस रिकवरी के पीछे HDFC बैंक की मजबूत खरीदारी और भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुई ट्रेड डील का बड़ा हाथ माना जा रहा है. इसके साथ ही बाजार में तकनीकी स्तर पर आई शॉर्ट कवरिंग ने भी सूचकांकों को ऊपर धकेलने में ईंधन का काम किया, जिससे शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट में बड़ा सुधार आया है. बाजार के इस यू-टर्न के पीछे 3 बड़े और ठोस कारण रहे हैं 1. HDFC बैंक: इंडेक्स का ‘संकटमोचक’ बाजार की इस रिकवरी का सबसे बड़ा क्रेडिट HDFC बैंक को जाता है. इंडेक्स के इस सबसे बड़े दिग्गज शेयर में दूसरे हाफ में जबरदस्त खरीदारी देखी गई. HDFC बैंक अकेले दम पर निफ्टी और सेंसेक्स को ऊपर खींचने वाला सबसे बड़ा योगदानकर्ता (Single Biggest Contributor) बनकर उभरा. जबरदस्त ‘शॉर्ट कवरिंग’ तकनीकी मोर्चे पर देखें तो बाजार में ‘शॉर्ट कवरिंग’ का सहारा मिला. जो ट्रेडर्स सुबह मंदी की पोजीशन बनाकर बैठे थे, वे बाजार की मजबूती देखकर फंस गए और उन्हें अपनी पोजीशन कवर करने के लिए मजबूर होना पड़ा. यह शॉर्ट कवरिंग बैंकिंग सेक्टर और बड़े मार्केट कैप वाले शेयरों में सबसे ज्यादा आक्रामक रही, जिससे इंडेक्स को रफ्तार मिली. भारत-ईयू ट्रेड डील और FIIs की वापसी बाजार के सेंटिमेंट को सबसे ज्यादा मजबूती भारत-ईयू एफटीए (FTA) के बाद मिले विदेशी निवेश से मिली. 28 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने कई हफ्तों की लगातार बिकवाली के बाद ₹480 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की. इस ट्रेड डील को भारत के लिए एक बड़े ‘स्ट्रक्चरल पॉजिटिव’ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे ग्लोबल इन्वेस्टर्स का भरोसा एक बार फिर भारतीय बाजार पर लौटता दिख रहा है.

50,000 कारें बनीं Skoda Kylac की, जानें कब हुई थी इसकी शुरुआत

मुंबई   कार निर्माता कंपनी Skoda Auto India ने दिसंबर 2024 में अपनी कॉम्पैक्ट एसयूवी Skoda Kylaq का प्रोडक्शन शुरू किया था, जिसके एक साल से कुछ ज़्यादा समय बाद कंपनी ने अपने चाकन प्लांट से इस एसयूवी की 50,000वीं यूनिट रोल आउट की है. Skoda Kylaq भारत में चेक कार निर्माता के लिए बिक्री में एक अहम योगदान देने वाली कार रही है, जिसने CY2025 में कंपनी को 72,000 से ज़्यादा यूनिट्स की अब तक की सबसे अच्छी बिक्री हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है. Skoda Auto Volkswagen India के MD और CEO पीयूष अरोड़ा ने कहा कि, "Skoda Kylaq के लिए 50,000 यूनिट का माइलस्टोन हमारे ग्राहकों के इस प्रोडक्ट के प्रति गहरे भरोसे और प्यार को दिखाता है." उन्होंने आगे कहा कि, "हमारे भरोसेमंद MQB-A0-IN प्लेटफॉर्म पर बनी Skoda Kylaq की सफलता इस बात का पक्का सबूत है कि भारत में, भारत और दुनिया दोनों के लिए डिज़ाइन की गई गाड़ियां, देश और दुनिया भर में ग्राहकों से तारीफ और भरोसा हासिल कर रही हैं." Skoda ने दिसंबर 2025 की शुरुआत तक भारत में Skoda Kylaq की 40,000 से ज़्यादा यूनिट्स बेचने की रिपोर्ट दी है. साल 2025 की शुरुआत में भारत में लॉन्च हुई Skoda Kylaq, सबकॉम्पैक्ट SUV मार्केट में स्कोडा की पहली कार है और, एक दशक पहले Skoda Fabia के बंद होने के बाद यह कंपनी का पहला सबकॉम्पैक्ट मॉडल है. इंजन की बात करें तो इस कार में कंपनी का भरोसेमंद 1.0-लीटर, TSI टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया जाता है, जिसके साथ मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प दिया जाता है. अपने इस सेटअप के साथ Skoda Kylaq पहले साल में ही Skoda के लिए एक पॉपुलर मॉडल साबित हुई है. हाल ही में कंपनी ने इस SUV के दो नए वेरिएंट पेश किए हैं और मिड-स्पेक मॉडल के लिए फीचर्स को भी बेहतर बनाते हुए एक बड़ा अपडेट भी दिया है. खास बात यह है कि साल के आखिर में एक तीसरा Sportline वेरिएंट भी आने वाला है.

डिजिटल दुनिया में नया रिकॉर्ड, 900 मिलियन डॉलर की डील के साथ खाबी लैम नंबर-1 क्रिएटर

 नई दिल्ली टिकटॉक पर बिना बोले किए गए अपने मजेदार रिएक्शन वीडियो से मशहूर हुए खाबी लैम अब एक बड़ी वजह से फिर चर्चा में हैं. खाबी ने करीब 900 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 82,800 करोड़ रुपये की एक बड़ी डील साइन की है. यह किसी भी डिजिटल क्रिएटर के लिए दुनिया की सबसे बड़ी डील में से एक मानी जा रही है. साइलेंट वीडियो से दुनिया भर में पहचान खाबी लैम की इस सफलता की शुरुआत उनके साइलेंट वीडियो से हुई थी. वह बिना एक शब्द बोले, सिर्फ चेहरे के हाव-भाव और हाथों के इशारों से ओवर-कॉम्प्लिकेटेड लाइफ हैक्स का मजाक उड़ाते थे.उनकी कहानी दिलचस्प है.कोरोना संकट के दौरान उन्होंने अपनी नौकरी खो दी थी. करने को कुछ नहीं था, तो उन्होंने टिकटॉक पर वीडियो बनाना शुरू किया और धीरे-धीरे दुनिया के सबसे महंगे और सबसे अमीर डिजिटल क्रिएटर बन गए. सोशल मीडिया पर करीब 360 मिलियन फॉलोअर्स हैं. 900 मिलियन डॉलर की डील कैसे बनी? यह बड़ी डील उनकी कंपनी Step Distinctive Limited के आंशिक बिक्री से जुड़ी है, जिसे अमेरिका की Rich Sparkle Holdings ने खरीदा है. यह सिर्फ खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि एक बड़ी पार्टनरशिप का हिस्सा है, जिसका मकसद खाबी के बिजनेस को दुनिया भर में और बड़ा बनाना है.समझौते के मुताबिक, अगले 36 महीनों तक खाबी लैम से जुड़ी सभी कमर्शियल एक्टिविटी जैसे ब्रांड डील, विज्ञापन, लाइसेंसिंग और ई-कॉमर्स का पूरा अधिकार Rich Sparkle के पास रहेगा. यानी तीन साल तक खाबी का पूरा बिजनेस इन्हीं के कंट्रोल में चलेगा.Rich Sparkle का कहना है कि इस मॉडल से भविष्य में 4 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा की सालाना बिक्री हो सकती है. अब क्रिएटर ही नहीं, कंपनी के मालिक भी इस डील का एक बड़ा हिस्सा यह है कि खाबी खुद भी Rich Sparkle Holdings के कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर बन जाएंगे. यानी वह सिर्फ कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर नहीं, बल्कि कंपनी के बड़े मालिकों में से एक हो जाएंगे. AI डिजिटल ट्विन  डील में एक दिलचस्प चीज और शामिल है.खाबी का AI डिजिटल ट्विन. इसमें खाबी के चेहरे, आवाज और हाव-भाव का इस्तेमाल करके एक वर्चुअल खाबी लैम बनाया जाएगा. यह वर्चुअल अवतार विज्ञापनों, लाइव स्ट्रीम और कंटेंट में इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे खाबी का ब्रांड 24 घंटे सक्रिय रह सकता है, भले ही वह खुद मौजूद न हों.नई योजना सबसे पहले अमेरिका, मिडिल ईस्ट और साउथ-ईस्ट एशिया में लागू की जाएगी. इसके लिए कंपनी एक चीन स्थित कंटेंट कॉमर्स कंपनी के साथ काम करेगी.