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शेयर बाजार में ₹3 लाख करोड़ की गिरावट, अंत तक नहीं संभला, जानिए इसके कारण

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को दिनभर गिरावट जारी रही. खुलने के साथ ही क्रैश हुआ शेयर बाजार (Stock Market Crash), अंत तक संभल नहीं सकता. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 852 अंक फिसलकर बंद हुआ, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने 205 अंक का गोता लगाकर क्लोजिंग की. बाजार के भूचाल में Tata की ट्रेंट लिमिटेड के शेयर समेत Infosys, M&M से लेकर Tech Mahindra, HDFC Bank तक तेज गिरावट लेकर बंद हुए।  शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के बीच मार्केट इन्वेस्टर्स को तगड़ा घाटा हुआ है और उनके करीब 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए. शेयर मार्केट में ये लगातार दूसरा दिन है, जबकि सेंसेक्स-निफ्टी बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।  सेंसेक्स-निफ्टी दिनभर टूटते रहे   BSE Sensex ने गुरुवार को शेयर बाजार में ट्रेडिंग स्टार्ट होने पर अपने पिछले बंद 78,516 की तुलना में फिसलकर 77,983 के लेवल पर शुरुआत की और इसके बाद ये गिरावट लगातार बढ़ती चली गई. बाजार में कारोबार खत्म होने पर 30 शेयरों वाला ये इंडेक्स 852.49 अंक फिसलकर 77,664 के लेवल पर क्लोज हुआ।  सेंसेक्स की तरह ही NSE Nifty भी गिरावट के साथ रेड जोन में ओपन होने के बाद अंत तक लाल निशान पर ही कारोबार करता रहा. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने बुधवार के बंद 24,378 की तुलना में टूटकर 24,202 के स्तर पर खुला था और इसने 205 अंक की गिरावट के साथ 24,173.05 पर क्लोजिंग की।  निवेशकों को हो गया इतना घाटा  सेंसेक्स-निफ्टी के फिसलने के बीच तमाम दिग्गज कंपनियों के शेयर बुरी तरह बिखरे हुए नजर आए. इस गिरावट के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप (BSE Mcap) गिरकर 4,66,35,326 करोड़ रुपये पर आ गया, जो बीते कारोबारी दिन क्लोजिंग के समय 4,69,36,824 दर्ज किया गया था. इस हिसाब से देखें, तो शेयर मार्केट में निवेश करने वालों को एक ही दिन में 3,01,498 करोड़ रुपये का झटका लगा है।  सबसे ज्यादा बिखरे ये 10 शेयर  Share Market में मची भगदड़ के बीच सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों की बात करें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Trent Share (4.21%), M&M Share (3.30%), Bajaj Finserv Share (2.93%), Tech Mahindra Share (2.90%), Infosys Share (2.04%), HDFC Bank Share (1.93%) की गिरावट लेकर बंद हुए. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (4.61%), Dixon Share (3.65%) और MFSL Share (2.35%) फिसलकर बंद हुआ. स्मॉलकैप में सबसे ज्यादा IIFL Share (10.12%) टूटकर बंद हुआ।  शेयर मार्केट में गिरावट के बड़े कारण स्टॉक मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो अमेरिका-ईरान में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी तनातनी के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से उछाल आना शुरू हो गया है, जिससे महंगाई का जोखिम गहरा गया है. गुरुवार को Brent Crude Oil Price 103 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।  इसके अलावा विदेशी बाजारों से मिले निगेटिव सिग्नल ने भी भारतीय शेयर मार्केट के सेंटीमेंट को खराब करने में बड़ी भूमिका निभाई. शुरुआत से ही Japan Nikkei, Honkong HangSeng, South Korea KOSPI इंडेक्स समेत गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) रेड जोन में कारोबार करते दिखे थे। 

मजबूत डॉलर के असर से सोने और चांदी की कीमतों में 1.6 प्रतिशत तक गिरावट

मुंबई सोने और चांदी की कीमतों में मजबूत डॉलर के चलते गुरुवार को दबाव देखा जा रहा है और दोनों कीमती धातुओं में करीब 1.6 प्रतिशत तक की गिरावट है।मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह सोने का 05 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 9:56 पर 0.36 प्रतिशत या 546 रुपए की कमजोरी के साथ 1,52,111 रुपए पर था।अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,719 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,52,200 रुपए उच्चतम स्तर बनाया है। चांदी का 05 मई, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 1.61 प्रतिशत की गिरावट या 3,987 रुपए की कमजोरी के साथ 2,44,377 रुपए पर था।अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,42,220 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,44,730 रुपए का उच्चतम स्तर बनाया है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमत में कमजोरी कमजोरी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर गोल्ड की कीमत 0.68 प्रतिशत कम होकर 4,720 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 2.43 प्रतिशत कम होकर 76 डॉलर प्रति औंस हो गया है। सोने और चांदी में कमजोरी की वजह मजबूत डॉलर इंडेक्स को माना जा रहा है, जो कि 0.11 प्रतिशत बढ़कर 98.50 के ऊपर कारोबार कर रहा था।आमतौर पर जब भी डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखी जाती है तो सोने और चांदी में दबाव देखने को मिलता है।डॉलर इंडेक्स के तेजी का कारण कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी होना है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 103 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.36 प्रतिशत की मजबूती के साथ 94 डॉलर प्रति बैरल पर है। डॉलर इंडेक्स दुनिया की छह बड़ी मुद्रओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की स्थिति को दिखाता है, जिसमें यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग,कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक शामिल हैं।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का कारण: US से जापान तक आर्थिक भूचाल, क्रूड $100 तक पहुंचा

मुंबई  जिसका डर था वही हुआ, भारतीय शेयर बाजार खुलते ही क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले ओपनिंग के साथ ही 800 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स 200 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका-ईरान में टेंशन के साथ ही क्रूड ऑयल की कीमतों में आए उछाल ने एक बार फिर बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है. विदेशों से भी सेंसेक्स-निफ्टी के लिए रेड सिग्नल मिल रहे थे।  सेंसेक्स ने लगाया तगड़ा गोता  BSE Sensex ने गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत होने के साथ अपने पिछले बंद 78,516 की तुलना में फिसलकर 77,983 के लेवल पर शुरुआत की. इसके कुछ ही मिनटों में इंडेक्स की गिरावट तेज होती चली गई और सेंसेक्स 823 अंक फिसलकर 77,693 पर कारोबार करता नजर आया।  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty भी ऐसी ही चाल के साथ आगे बढ़ता दिखा. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 24,378 की तुलना में गिरावट लेकर 24,202 के स्तर पर खुला और फिर फिसलते हुए 24,134 के लेवल पर आ गया।  विदेशों से मिल रहे थे खराब सिग्नल  कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते पहले से ही शेयर बाजार में गिरावट की आशंका जताई जा रही थी. बीते कारोबारी दिन जहां अमेरिका शेयर मार्केट रेड जोन में बंद हुए थे, तो वहीं गुरुवार को खुलने के साथ ही एशियाई बाजार बिखरे हुए नजर आए थे।  जापान का निक्केई इंडेक्स खुलने के साथ ही फिसल गया और खबर लिखे जाने तक 650 अंक की गिरावट लेकर 58,952 पर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 300 अंक की गिरावट लेकर 25,889 पर कारोबार करता नजर आ रहा था. अन्य एशियाई शेयर बाजारों में साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1 फीसदी फिसला था।  Crude Price से सहमा बाजार  शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे का एक बड़ा कारण अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आया बड़ा उछाल भी है, जिसने न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब किया है।  दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार निकल गई है. Brent Crude Price करीब 8 फीसदी उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।  सबसे ज्यादा बिखरे ये शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 1095 शेयरों की शुरुआत गिरावट के साथ रेड जोन में हुई थी और निफ्टी पर इंटरग्लोब एविएशन, SBI लाइफ इंश्योरेंस, एशियन पेंट्स, M&M के शेयर तगड़ी गिरावट में नजर आए थे।  खबर लिखे जाने तक Tech Mahindra Share (2.60%), M&M Share (2.20%), Eternal Share (2.15%) फिसलकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (3.10%), Dixon Tech Share (2%) की गिरावट में नजर आया।  US से जापान तक भूचाल विदेशों से मिल रहे हैं. दरअसल, अमेरिका से लेकर जापान तक दुनियाभर के शेयर बाजारों में भूचाल देखने को मिल रहा है. US Stock Market बुधवार को रेड जोन में बंद हुए, तो एशियाई बाजारों में से अधिकतर में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है।  Japan Nikkei 600 अंक से ज्यादा, जबकि Hongkong HangSeng करीब 300 अंक टूटा दिखाई दे रहा है. इस बीत भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) भी गिरावट में ट्रेड कर रहा है, जो सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का संकेत दे रहा है।  गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन बुधवार को शेयर बाजार में दिनभर गिरावट देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,273 की तुलना में 756 अंकों की गिरावट लेकर 78,516 पर क्लोज हुआ था, तो वहीं एनएसई का निफ्टी भी दिनभर टूटने के बाद अंत में 198 अंक फिसलकर 24,378 पर बंद हुआ था।  Gift Nifty दे रहा ये संकेत  जहां एशियाई शेयर बाजार भारतीय शेयर बाजार में भगदड़ के संकेत दे रहे हैं, तो वहीं गिफ्ट निफ्टी से भी रेड सिग्नल मिल रहे हैं. दरअसल, Gift Nifty ओपनिंग के साथ ही गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. खबर लिखे जाने तक भारतीय शेयर मार्केट के लिए संकेतक माना जाने वाला गिफ्ट निफ्टी 170 अंक की गिरावट में कारोबार कर रहा था।  क्रूड की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन  अमेरिका और ईरान युद्ध में भले ही सीजफायर हो गया हो, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों में अभी भी टेंशन बरकरार है. ईरान होर्मुज खोलने को तैयार नहीं, तो अमेरिका की ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी है. इस टेंशन के चलते कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिला है और Brent Crude Price 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. इससे शेयर बाजारों में दबाव बढ़ा है। 

टेस्ला की भारत में असफलता: 10% टारगेट भी पूरा नहीं हुआ, क्या 6-सीटर से बदल पाएगा हालात?

मुंबई  दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी भारत आई, धमाका करने की कोशिश की, लेकिन हकीकत की जमीन पर उसे तगड़ा झटका लगता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की. आज 22 अप्रैल 2026 को टेस्ला ने अपनी नई Model Y L (6-सीटर, लॉन्ग व्हीलबेस) को भारत के बाजार में उतारा है, जिसकी कीमत 62 लाख रुपये तय की गई है. यह सिर्फ एक नई लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि एक तरह का 'डैमेज कंट्रोल' है, क्योंकि भारत में टेस्ला का अब तक का सफर काफी संघर्ष भरा और उम्मीद से कहीं ज्यादा फीका रहा है।   टेस्ला के भारत में संघर्ष की सबसे बड़ी वजह इसकी आसमान छूती कीमतें रही हैं. भारत में बाहर से आने वाली गाड़ियों पर सरकार 70% से 110% तक का भारी-भरकम इम्पोर्ट टैरिफ लगाती है. इसका नतीजा यह हुआ कि Model Y की कीमत 60 लाख से 68 लाख रुपये के बीच पहुंच गई. इतनी महंगी होने के कारण यह आम आदमी की पहुंच से दूर होकर Mercedes EQB, BMW iX1 और Volvo EC40 जैसी लग्जरी गाड़ियों की कैटेगरी में खड़ी हो गई. भारत जैसे देश में, जहां लोग गाड़ी खरीदने से पहले उसकी कीमत और वैल्यू पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं, टेस्ला कभी भी 'मास मार्केट' को आकर्षित नहीं कर पाई।  आंकड़ों की बात करें तो टेस्ला का प्रदर्शन काफी बुरा रहा है. साल 2025 में कंपनी ने पूरे साल के दौरान सिर्फ 227 गाड़ियां ही बेचीं, जबकि उनका लक्ष्य कम से कम 2,500 यूनिट्स का था. स्थिति इतनी खराब हो गई कि कंपनी को अपने स्टॉक को निकालने के लिए 2 लाख रुपये तक का डिस्काउंट देना पड़ा. यह दिखाता है कि सिर्फ ब्रांड नाम के भरोसे भारतीय बाजार को जीतना इतना आसान नहीं है, खासकर तब जब ग्राहक को हर कदम पर पैसे की कीमत वसूलनी हो।  कीमत के अलावा चार्जिंग की समस्या ने भी टेस्ला की राह मुश्किल की है. भारत में फिलहाल केवल 25,000 चार्जिंग स्टेशन हैं, जो जरूरत के हिसाब से बहुत कम हैं. कई बार तो ऐसा होता है कि जो स्टेशन मैप पर दिखते हैं, वे असल में खराब मिलते हैं. टेस्ला की सबसे बड़ी ताकत उसका 'सुपरचार्जर नेटवर्क' माना जाता है, जिसने अमेरिका और यूरोप में धूम मचा रखी है, लेकिन भारत में यह नेटवर्क अभी नाममात्र का ही है. बिना मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के कोई भी EV यूजर लंबी दूरी के सफर पर निकलने से कतराता है।  भारतीय बाजार में टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों का दबदबा भी टेस्ला के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. टाटा की इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में करीब 60% हिस्सेदारी है, जिसके बाद महिंद्रा और JSW MG मोटर्स का नंबर आता है. ये कंपनियां भारतीय ग्राहकों की नब्ज पहचानती हैं. टाटा नेक्सन EV और महिंद्रा की नई गाड़ियां टेस्ला के मुकाबले बहुत सस्ती हैं और भारतीय परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. ऐसे में टेस्ला के लिए इन दिग्गजों के बीच अपनी जगह बनाना लोहे के चने चबाने जैसा रहा है।  एक और कड़वा सच यह है कि भारत में लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार बहुत ही छोटा है. 16.5 लाख रुपये यानी करीब 20,000 डॉलर से ऊपर की गाड़ियों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी सिर्फ 6.6% है. इस छोटे से हिस्से में भी मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, किआ और ऑडी जैसे पुराने और जमे-जमाए खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं. टेस्ला को न सिर्फ इन ब्रांड्स से लड़ना पड़ रहा है, बल्कि भारतीय सड़कों की चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है. टेस्ला की गाड़ियों का ग्राउंड क्लीयरेंस कम है, जो भारत के बड़े स्पीड ब्रेकर्स और गड्ढों के लिए सही नहीं बैठता. इसे ठीक करने के लिए गाड़ी के डिजाइन में बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें काफी खर्च आता है।  सर्विस नेटवर्क के मामले में भी टेस्ला काफी पीछे छूट गई है. टेस्ला के शोरूम और सर्विस सेंटर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित हैं, जबकि टाटा और महिंद्रा का नेटवर्क गांव-कस्बों तक फैला है. अगर किसी छोटे शहर के ग्राहक को गाड़ी में कोई दिक्कत आए, तो उसके पास कोई आसान रास्ता नहीं होता. इसके अलावा एलन मस्क की अपनी वैश्विक छवि और उनकी राजनीतिक गतिविधियों का असर भी कहीं न कहीं कंपनी की सेल्स पर पड़ा है, जिसे पूरी दुनिया में महसूस किया गया है।  अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा? नई 6-सीटर Model Y L के जरिए टेस्ला भारत के उस प्रीमियम सेगमेंट को लुभाना चाहती है जो बड़ी और आरामदायक SUVs पसंद करता है. यह एक अच्छी कोशिश तो है, लेकिन जानकारों का मानना है कि जब तक टेस्ला भारत में अपनी फैक्ट्री नहीं लगाती और यहीं पर गाड़ियां बनाना शुरू नहीं करती, तब तक ऊंची कीमतों का यह सिलसिला नहीं थमेगा. लोकल मैन्युफैक्चरिंग ही वो एकमात्र रास्ता है जिससे टेस्ला भारतीय बाजार में लंबी रेस का घोड़ा बन सकती है।   

KTM ने लॉन्च किया 390 Duke और 390 Adventure का 350cc वेरिएंट, कीमत जानें

मुंबई   इस महीने की शुरुआत में प्रीमियम मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी Triumph Motorcycle ने कम क्षमता वाली 400 रेंज के लॉन्च के बाद, अब KTM ने अपनी 390 Duke और 390 Adventure लाइन-अप का विस्तार करते हुए नए 350cc वेरिएंट बाजार में उतारे हैं, जिनका मकसद शुरुआती कीमत को कम करना है. हालांकि, Triumph के छोटे मॉडलों के विपरीत KTM के ये नए वेरिएंट मौजूदा 399cc वर्जन के साथ ही बेचे जाएंगे।  नई 390 Duke और 390 Adventure के इंजन इसके इंजन की बात करें तो नया 349.32cc इंजन 8,600rpm पर 41.5hp की पावर और 7,000rpm पर 33.5Nm का टॉर्क जनरेट करता है, यह इंजन 399cc इंजन के मुकाबले 4.5hp का पावर और 5.5Nm कम टॉर्क प्रदान करता है. कंपनी का कहना है कि व्हीलबेस, ग्राउंड क्लीयरेंस, टेक्नोलॉजी (TFT कंसोल सहित) और राइडिंग एर्गोनॉमिक्स जैसे मुख्य पहलू पहले जैसे ही रहेंगे।  खास बात यह है कि मौजूदा सभी 399cc वेरिएंट, नए मॉडल्स के साथ-साथ आने वाले समय तक उपलब्ध रहेंगे. इन्हें अलग दिखाने के लिए इनके नामों में बदलाव किया गया है. ध्यान देने वाली बात यह है कि अब 390 Duke को 390 Duke R के नाम से बेचा जाएगा, जबकि 390 Adventure के नाम के साथ 'S' जोड़ा गया है।  कीमत की बात करें तो नए 350cc KTM 390 Duke की कीमत 2.77 लाख रुपये रखी गई है, जो इसे 390 Duke R से 62,000 रुपये सस्ता बनाती है. वहीं 390 Adventure की कीमत में भी ऐसा ही अंतर देखने को मिलता है।  जहां इसके नए 350cc इंजन वाले वर्जन की कीमत 2.81 लाख रुपये रखी गई है, जोकि 399cc वाले सबसे सस्ते वेरिएंट, 390 Adventure X से लगभग 62,000 रुपये कम है. जब इसकी तुलना ज़्यादा बेहतर स्पेसिफिकेशन वाले 390 Adventure S और R वेरिएंट से की जाती है, तो यह अंतर और भी ज़्यादा नजर आता है। 

चांदी के दाम में 4500 रुपये की बढ़ोतरी, सोने की कीमत भी 2000 रुपये से अधिक बढ़ी

मुंबई  भारतीय बाजार में सोने-चांदी के भाव में जोरदार उछाल आया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के भाव ₹2,000 (1.3%) से अधिक चढ़कर ₹1,53,699 प्रति 10 ग्राम हो गए। वहीं, चांदी के रेट में ₹4,700 (2%) की तेजी आई और यह ₹2,49,423 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। दूसरी ओर इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमतें बढ़ीं। स्पॉट गोल्ड 0.8% चढ़कर 4,755 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गया। इससे पिछले सत्र में इसमें 2% से अधिक की गिरावट आई थी। क्या हैं आज के टिप्स: भारतीय निवेशकों के लिए एमसीएक्स गोल्ड पर ₹1,52,800 – ₹1,51,500 का सपोर्ट और ₹1,54,850 – ₹1,55,500 का रेजिस्टेंस माना जा रहा है। आज क्यों उछले सोने-चांदी के भाव सीजफायर का असर सोने-चांदी के भाव में आज की उछाल के पीछे कई कारण हैं। इनमें से एक कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संघर्ष विराम को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान कोई नया प्रस्ताव नहीं लाता और बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक और हमले नहीं किए जाएंगे। हालांकि, होर्मूज स्ट्रेट अब भी व्यापार के लिए बंद है। ईरान ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका उसके जहाजों पर अपनी नाकाबंदी जारी रखेगा, वह इस जलमार्ग को नहीं खोलेगा। यह जलडमरूमध्य दुनिया के 20% तेल की सप्लाई का रास्ता है। क्रूड ऑयल में तेजी, डॉलर में कमजोरी का असर क्रूड तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बने हुए हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। वहीं, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में 0.1% की गिरावट आई, जिससे सोना दूसरी मुद्राओं वालों के लिए सस्ता हो गया। कमजोर डॉलर से सोने की कीमतों को आमतौर पर सपोर्ट मिलता है। फेड के नए चेयरमैन का बयान: ब्याज दरों पर सख्त रुख अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के लिए नामित केविन वार्श ने सीनेट में कहा कि वह स्वतंत्र रूप से काम करेंगे। उन्होंने ब्याज दरों में जल्दी कटौती करने के बजाय महंगाई पर नियंत्रण के लिए नई रूपरेखा बनाने की बात कही। निवेशकों को उम्मीद है कि वार्श ब्याज दरें धीरे-धीरे कम करेंगे, जिससे सोने पर दबाव बना रह सकता है। ट्रंप के फैसले का असर ग्लोबल मार्केट यानी कॉमैक्स पर आज सुबह सोने की कीमत करीब 1 पर्सेंट बढ़कर 4768 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। इससे पिछले सेशन में सोने की कीमतों में 2 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई थी, जिससे निवेशक थोड़े डरे हुए थे। चांदी की बात करें तो एशियाई ट्रेडिंग घंटों के दौरान चांदी की कीमतों में 1.8 पर्सेंट का सुधार हुआ और यह 77.80 डॉलर प्रति औंस के लेवल पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक सोने की कीमतों में 10 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है, जबकि चांदी इस दौरान करीब 17 पर्सेंट तक टूट चुकी है। आज की बढ़त ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट बाजार में इस बदलाव की एक बड़ी वजह सप्लाई में आ रही रुकावट भी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता अभी भी जहाजों की आवाजाही के लिए बंद है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसके जहाजों पर लगी पाबंदी नहीं हटाता, तब तक वह इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को नहीं खोलेगा। इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में एनर्जी सप्लाई में भारी दिक्कत आ रही है। सप्लाई चेन प्रभावित होने की वजह से महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। यही वजह है कि निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर फिर से सोने की तरफ रुख कर रहे हैं। फेड रिजर्व और डॉलर का दबाव कीमतों में रिकवरी के बावजूद कुछ ऐसे फैक्टर भी हैं जो सोने और चांदी पर लगातार दबाव बना रहे हैं। डॉलर इंडेक्स में पिछले सेशन के दौरान 0.4 पर्सेंट की मजबूती देखी गई है। डॉलर महंगा होने से सोना उन लोगों के लिए महंगा हो जाता है जो दूसरी करेंसी में निवेश करते हैं। इसके अलावा फेडरल रिजर्व के अगले संभावित चेयरमैन केविन वारश के एक बयान ने भी बाजार में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने कहा है कि अगर वे चेयरमैन बनते हैं, तो वे पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करेंगे। इसका मतलब है कि सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को ऊंचे लेवल पर रख सकता है, जो सोने जैसे एसेट के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता। भारतीय बाजार यानी एमसीएक्स पर सोने और चांदी के रेट में आज थोड़ा बदलाव देखा गया है। 21 अप्रैल के डेटा के मुताबिक, एमसीएक्स पर सोने का भाव 1,51,698 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था। वहीं चांदी की बात करें तो यह 2,44,916 रुपये प्रति किलोग्राम के लेवल पर देखी गई। ग्लोबल मार्केट में आई रिकवरी के बाद अब निवेशकों की नजर आने वाले समय में होने वाली शांति वार्ता पर टिकी है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे तब तक कोई नया हमला नहीं करेंगे जब तक ईरान की तरफ से कोई नया और ठोस प्रस्ताव नहीं आ जाता। बड़े बदलाव का इंतजार विश्लेषक अहमद असिरी के अनुसार, बुलियन मार्केट अब जियो-पॉलिटिकल रिस्क को पचा चुका है। पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमतें सीमित दायरे में चल रही हैं। अब बाजार या तो स्थितियों के और बिगड़ने या फिर मैक्रो इकोनॉमी में बड़े बदलाव का इंतजार कर रहा है।

सेंसेक्स में गिरावट: होर्मुज संकट, क्रूड के उछाल और IT शेयरों का संकट, 755 अंक की गिरावट

मुंबई  शेयर मार्केट में जारी तूफानी तेजी पर ब्रेक लग गया है. सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी इंडेक्स तेज गिरावट के साथ ओपन हुआ. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान में मचे घमासान और क्रूड ऑयल की कीमत में अचानक आए उछाल ने दुनियाभर के शेयर बाजारों में फिर हलचल और खौफ बढ़ा दिया है।  भारत की बात करें, तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex 300 अंक की गिरावट के साथ ओपन हुआ और कुछ देर में ये 755 अंक से ज्यादा टूट गया. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty करीब 200 अंक की गिरावट लेकर कारोबार करता दिखा. इस गिरावट के बीच टेक कंपनियों के शेयर क्रैश (IT-Tech Stock Crash) नजर आए. HCT Tech Share तो खुलने के साथ ही करीब 10 फीसदी टूट गया।  खराब शुरुआत, फिर बिखरे इंडेक्स  Share Market में बुधवार को कारोबार की शुरुआत खराब रही और कुछ देर में ही गिरावट तेज हो गई. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,273 की तुलना में 79,019 पर ओपन हुआ और फिर अचानक कुछ मिनटों में ही 755 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर 78,518 के लेवल पर कारोबार करने लगा।   सेंसेक्स की तरह ही एनएसई निफ्टी की भी शुरुआत खराब रही और ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 24,576 की तुलना में गिरावट के साथ 24,470 पर खुला. इसके बाद NSE Nifty भी तेजी से फिसलता चला गया और करीब 200 अंक की गिरावट लेकर 24,352 पर ट्रेड करता दिखा।  Tech Share खुलते ही क्रैश  शेयर बाजार में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के बीच आईटी और टेक कंपनियों के शेयर बुरी तरह क्रैश नजर आए. बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल HCL Tech Share खुलते ही 10 फीसदी के आसपास टूट गया. इसके अलावा Infosys Share (3%), Tech Mahindra Share (2.50%), TCS Share (2.10%) तक गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे।  बाजार क्रैश होने के बड़े कारण बात करें, शेयर बाजार में मची तबाही के पीछे के कारणों के बारे में, तो मिडिल ईस्ट युद्ध की टेंशन फिर हाई पर है, डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज को लेकर अड़े हुए हैं और ईरान दूसरी ओर से लगातार धमकियां दे रहा है. इसके चलते क्रूड की कीमतों में फिर से उबाल आने लगा है. इसका असर एशियाई बाजारों में उथल-पुथल के तौर पर देखने को मिला और विदेशों से मिले निगेटिव सिग्नल के चलते सेंसेक्स-निफ्टी भी बिखर गए।  ये शेयर भी धराशायी आईटी-टेक शेयरों के अलावा अन्य गिरावट वाले स्टॉक्स की बात करें, तो ICICI Bank Share (2%), BEL Share (1.50%) की गिरावट में ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप में शामिल Coforge Share (2.70%), MPhasis Share (1.90%) फिसलकर ट्रेड कर रहा था। 

टेक कंपनियों ने 2026 में 73,000 कर्मचारियों को क्यों निकाला? वजह है चिंता का विषय

   नई दिल्ली दुनिया भर की टेक कंपनियों में इस समय एक बड़ा बदलाव चल रहा है और इसका सबसे बड़ा असर नौकरियों पर दिख रहा है. 2026 की शुरुआत से अब तक 73,000 से ज्यादा लोगों की नौकरी जा चुकी है. यह आंकड़ा सिर्फ एक-दो कंपनियों का नहीं, बल्कि करीब 90 से ज्यादा टेक कंपनियों का है।  सबसे बड़ी बात यह है कि यह सिर्फ एक नॉर्मल फायरिंग नहीं है. इसे टेक इंडस्ट्री का रीसेट कहा जा रहा है. कई कंपनियां सिर्फ AI के नाम पर ही छंटनी कर रही हैं. यानी कंपनियां अपने काम करने का तरीका बदल रही हैं और उसी के हिसाब से कर्मचारियों की जरूरत भी बदल रही है।  इस पूरे बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI. पहले जिन कामों के लिए बड़ी टीम की जरूरत होती थी, अब वही काम AI टूल्स की मदद से कम लोगों में हो रहा है. कंपनियां अब ज्यादा तेज, सस्ती और इफिशिएंट बनने की कोशिश कर रही हैं।  Meta से लेकर Oracle तक.. अगर इस आंकड़े को ध्यान से समझें, तो सबसे पहले नजर जाती है Meta Platforms पर. रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta करीब 8,000 कर्मचारियों को निकालने की तैयारी में है. यह उसकी कुल वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा माना जा रहा है।  यह छंटनी एक ही बार में नहीं, बल्कि अलग-अलग फेज में की जा रही है, जिससे साफ है कि कंपनी लंबे समय के लिए अपने खर्च को कम करना चाहती है।  इसके बाद बात आती है ऐमेजॉन की, जहां पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नौकरियां कम की गई हैं. रिपोर्ट्स में यह संख्या करीब 30,000 तक बताई जा रही है।  ऐमेजॉन का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि यह अकेले इस पूरे 73,000 के आंकड़े का बड़ा हिस्सा कवर करता है. इसी तरह Block Inc. ने भी करीब 4,000 कर्मचारियों को हटाया है. कंपनी ने अपने बिजनेस को लीन बनाने और खर्च कम करने के लिए यह फैसला लिया। सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने भी करीब 1,000 कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया है. Snap ने साफ कहा है कि वह AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा फोकस कर रही है, जिससे कुछ रोल्स की जरूरत कम हो गई है।  Oracle ने हाल ही में की है छंटनी इन बड़ी कंपनियों के अलावा Oracle और दूसरी कई टेक कंपनियों में भी हजारों की संख्या में कटौती की गई है, हालांकि हर कंपनी ने सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं. हाल ही में ओरैकल ने भारत से ही 10 हजार लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया और आगे चल कर 20,000 और जॉब्स जा सकती हैं।  अब अगर इन सभी को एक साथ देखें, तो तस्वीर साफ हो जाती है. Amazon के करीब 30,000, Meta के लगभग 8,000, Block के 4,000 और Snap के 1,000 के साथ बाकी 80-90 कंपनियों में हुई छोटी-बड़ी छंटनी मिलाकर कुल आंकड़ा 73,000 के पार पहुंच जाता है. इसमें ओरैकल द्वाारा फायर किए गए लोग भी हैं।  यह भी समझना जरूरी है कि यह सिर्फ उन नौकरियों का आंकड़ा है जो आधिकारिक तौर पर सामने आए हैं. कई कंपनियां बिना ऐलान के भी टीम कम कर रही हैं, हायरिंग रोक रही हैं या कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर रही हैं. ऐसे मामलों को जोड़ दिया जाए, तो असली संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है।  कोरोना में हुई ज्यादा हायरिंग? इस पूरे ट्रेंड के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. सबसे पहले, कोरोना के समय कंपनियों ने बहुत तेजी से हायरिंग की थी. उस समय डिजिटल सर्विसेज की मांग बढ़ी थी, लेकिन अब ग्रोथ धीमी हो गई है. ऐसे में कंपनियां एक्स्ट्रा स्टाफ को कम कर रही हैं।  दूसरा बड़ी वजह है खर्च कम करना. ग्लोबल इकॉनमी लगातार बदल रही है, महंगाई और निवेश में कमी ने कंपनियों को ज्यादा सतर्क बना दिया है. अब वे हर खर्च को ध्यान से देख रही हैं और जहां जरूरत नहीं है, वहां कटौती कर रही हैं।  तीसरा और सबसे बड़ा कारण है AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल. अब कंपनियां यह समझ चुकी हैं कि कई काम मशीन से कराए जा सकते हैं. इससे उन्हें कम लोगों में ज्यादा काम करने का मौका मिल रहा है। 

Apple में बदलाव: टिम कुक देंगे इस्तीफा, 15 साल बाद नया CEO नियुक्त

वाशिंगटन  टिम कुक ने ऐपल में 15 साल तक CEO पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया है. औपचारिक रूप से कुक के पद छोड़ने के बाद जॉन टर्नस Apple के नए सीईओ होंगे.  कुक कंपनी में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे।  जॉन टर्नस मौजूदा समय में ऐपल में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के चीफ हैं. वे पिछले 25 वर्षों से Apple के साथ जुड़े हुए हैं. वे एक सितंबर से सीईओ की जिम्मेदारी संभालेंगे।  ऐपल में यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है. पिछले कई सालों से ऐसी चर्चा थी कि टिम कुक सीईओ पद छोड़ सकते हैं. आखिरकार इस पर मोहर लग गई. कुक साल 2011 से कंपनी का नेतृत्व कर रहे थे, जब स्टीव जॉब्स ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ दिया था।  65 वर्षीय कुक एक सितंबर को सीईओ की जिम्मेदारी जॉन टर्नस को सौंपेंगे. इसके बाद Apple में बतौर एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में जुड़े रहेंगे।  स्टीव जॉब्स की जगह कुक ने जब कंपनी की जिम्मेदारी संभाली थी, तब उनके सामने कई चुनौतियां थीं. उन्होंने Apple को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और उनकी अगुवाई में कंपनी ने कामयाबी की नई गाथा लिखी।  ऐपल के साथ Tim Cook का सफर टिम कुक ने साल 2011 में स्टीव जॉब्स के पद छोड़ने के बाद ऐपल की कमान संभाली थी. उन्होंने साल 1998 में Apple को जॉइन किया था. उस वक्त कंपनी कई तरह की मुश्किलों से गुजर रही थी. स्टीव जॉब्स ने टिम कुक को ऐपल की ऑपरेशन टीम को नई दिशा में ले जाने के लिए हायर किया था।  साल 2005 से 2011 तक उन्होंने कंपनी चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी निभाई. इस दौरान उन्होंने iPod, MacBook, iPhone और iPad जैसे प्रोडक्ट्स की सप्लाई चेन को ग्लोबल स्टेज पर मजबूत किया. माना जाता है कि टिम कुक की वजह से ही ऐपल बड़े पैमाने पर प्रोडक्ट्स को लॉन्च कर पाया।  2011 में बने थे CEO स्टीव जॉब्स की बीमारी के दौरान टिम कुक ने कंपनी के CEO के रूप में इंटेरिम भूमिका निभाई. 24 अगस्त 2011 को स्टीव जॉब्स ने टिम कुक.को Apple का CEO अपॉइंट किया. टिम कुक की लीडरशिप में ऐपल ने कई बड़े मुकाम हासिल किए।  कुक के CEO रहते हुए कंपनी ने Apple Watch, AirPods, M1, M2, M3 सिलिकॉन चिप्स, Apple Vision Pro जैसे नए प्रोडक्ट्स को लॉन्च किया. इसके साथ ही ऐपल पहली कंपनी बनी जिसकी वैल्यूएशन 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची. टिम की लीडरशिप में iCloud, Apple Music, Apple TV+, App Store जैसे सर्विस बिजनेसेस का विस्तार हुआ। 

MG Windsor EV का नया Commute वेरिएंट लॉन्च, कीमत और फीचर्स पर एक नजर

मुंबई  JSW MG Motor India ने अपनी नई MG Windsor EV रेंज का विस्तार करते हुए, एक नया 'Commute' वेरिएंट जोड़ा है. कंपनी ने इस वेरिएंट की कीमत 13.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी है. इस नए वेरिएंट को मौजूदा Excite ट्रिम से नीचे रखा जाएगा, जिसकी कीमत उससे लगभग 61,000 रुपये कम है. हालांकि यह मुख्य रूप से फ्लीट ऑपरेटरों के लिए है, लेकिन इसे निजी इस्तेमाल के लिए भी रजिस्टर कराया जा सकता है।  MG Windsor EV Commute वेरिएंट का डिजाइन Windsor EV के नए Commute वेरिएंट में LED प्रोजेक्टर हेडलाइट्स, ORVM पर लगे टर्न इंडिकेटर्स और फ्लश डोर हैंडल्स बरकरार रखे गए हैं. हालांकि, इसमें अलॉय व्हील्स की जगह 17-इंच के स्टील व्हील्स का इस्तेमाल किया गया है, जिन पर कोई कवर नहीं मिलता है।  MG Windsor EV Commute वेरिएंट का इंटीरियर इंटीरियर की बात करें तो नए Commute वेरिएंट में एक आसान केबिन लेआउट मिलता है. इस नए वेरिएंट में Excite वेरिएंट में मिलने वाली 10.1-इंच की सेंट्रल टचस्क्रीन नहीं है. इसके बजाय, इसमें 7-इंच का LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है, जो मुख्य डिस्प्ले का काम करता है।  केबिन में मिलने वाली बेसिक फ़ैब्रिक अपहोल्स्ट्री, मैनुअल सीट एडजस्टमेंट और एक मिनिमल डैशबोर्ड लेआउट मिलता है, जबकि गोल्डेन कलर के हाइलाइट्स सिर्फ़ इसके डोर की ट्रिम्स पर ही मिलते हैं. कार में एयर-कंडीशनिंग मैनुअल है, और ORVMs भी मैनुअली एडजस्ट करने वाले हैं।  इसके अलावा, इस वेरिएंट में स्टीयरिंग-माउंटेड गियर सेलेक्टर, क्रूज़ कंट्रोल और डिस्प्ले सेटिंग बटन वाला 2-स्पोक स्टीयरिंग व्हील, और कपहोल्डर व स्टोरेज वाला एक सेंटर कंसोल मिलता रहेगा।  अन्य दिखाई देने वाले एलिमेंट्स में पावर विंडो स्विच, हेडलाइट बीम की हाइट एडजस्ट करने के कंट्रोल, ट्रैक्शन कंट्रोल, आगे की फॉग लाइट्स, ऑटो होल्ड और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक शामिल हैं. इसके अलावा, पीछे की सीटों में भी ऊपर के वेरिएंट्स की तरह ही रिक्लाइनिंग फ़ंक्शन मिलता है।  MG Windsor EV Commute वेरिएंट का बैटरी पैक और रेंज नए Commute वेरिएंट के बैटरी पैक की बात करें तो इसमें वही 38 kWh का बैटरी पैक इस्तेमाल किया गया है, जो इसके निचले ट्रिम्स – Excite, Exclusive और Essence में भी मिलता है. एक बार फुल चार्ज करने पर यह कार 332 km तक की रेंज प्रदान करता है।  इस बैटरी पैक को 7.4 kW AC चार्जर से चार्ज करने पर 10 से 100 प्रतिशत तक चार्ज करने में लगभग 7 घंटे लगते हैं, जबकि 45 kW DC फास्ट चार्जर से यह लगभग 45 मिनट में 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज हो जाता है।