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दुनिया के पहले खरबपति बनने की राह पर एलन मस्क, कई देशों की अर्थव्यवस्था से ज्यादा हुई संपत्ति

वाशिंगटन एलन मस्क खरबपति बनने से केवल 29 अरब डॉलर दूर हैं। उनकी संपत्ति में गुरुवार को आया 274 अरब डॉलर का उछाल उनके SpaceX के आईपीओ से आया है।एलन मस्क अब ताईवान (976.72 अरब डॉलर) आयरलैंड (779.38 अरब डॉलर), बेल्जियम (776.73 अरब डॉलर), स्वीडन (760.48 अरब डॉलर), इजरायल (719.85 अरब डॉलर), अर्जेंटीना (688.38 अरब डॉलर) जैसे देशों से भी अमीर हो गए हैं। उनका कुल नेटवर्थ इन देशों की जीडीपी से भी अधिक है। कैसे बनेंगे दुनिया के पहले खरबपति ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक एलन मस्क की कुल दौलत 971 अरब डॉलर हो गई है। जबकि, फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक अब वह 982 अरब डॉलर के मालिक हैं। रॉयटर्स के अनुमान के अनुसार शेयर मार्केट में स्पेसएक्स की लिस्टिंग के बाद मस्क की दौलत एक ट्रिलियन डॉलर के पार चली जाएगी और वह दुनिया के पहले खरबपति बन जाएंगे। SpaceX का सबसे बड़ा IPO SpaceX ने अपने IPO में 75 अरब डॉलर जुटाए हैं। कंपनी के शेयर 135 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर जारी किए गए हैं, जिससे कंपनी का बाजार मूल्य करीब 1.77 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 152 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया है। इसे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा IPO माना जा रहा है। SpaceX क्यों है इतना खास? 2002 में शुरू हुई SpaceX आज रॉकेट लॉन्च, स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है। निवेशक इसे भविष्य की सबसे बड़ी टेक और स्पेस कंपनियों में गिन रहे हैं। IPO को संस्थागत और रिटेल निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। भारत के सबसे अमीर लोगों से कितने आगे? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार गौतम अडानी की संपत्ति लगभग 115 अरब डॉलर और मुकेश अंबानी की संपत्ति उससे भी कम है। ऐसे में मस्क की संभावित 1 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ भारत के शीर्ष अरबपतियों की संपत्ति से कई गुना अधिक होगी। निवेशकों की नजर लिस्टिंग पर अब पूरी दुनिया की नजर SpaceX की लिस्टिंग पर है। अगर शेयर में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी आती है तो एलन मस्क आधिकारिक तौर पर दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन सकते हैं। इस साल 2026 में मस्क की संपत्ति में 351 अरब डॉलर का इजाफा हो चुका है यानी कुल 56.7% की बढ़ोतरी। इसमें गुरुवार को 274 अरब डॉलर की उछाल शामिल है, जो भारत के कई राज्यों के वार्षिक बजट से कई गुना अधिक है। यह राशि भारत की कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त मार्केट कैप के बराबर है।

Stock Market Rally: जंग खत्म होने की उम्मीद से बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स ने लगाई 1700 अंकों की छलांग

मुंबई  सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली. यह तेजी तब आई, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने की खबर आई है. इस खबर के आने के बाद सेंसेक्‍स 1695 अंक या 2.30% चढ़कर 75,527.95 पर पहुंच गया. इसी तरह, निफ्टी 461.30 अंक या 1.99% चढ़कर 23,622.90 पर बंद हुआ।  बैंक निफ्टी में और भी बड़ी रैली देखने को मिली, जो 1638 अंक या 2.97 फीसदी चढ़कर 56,800 के ऊपर बंद हुआ. पूरे मार्केट में तेजी के कारण सभी इंडेक्‍स ग्रीन जोन में रहे और निवेशकों ने मोटी रकम बना ली. बीएसई के टॉप 30 शेयरों की बात करें तो पावरग्रिड और टेक महिंद्रा को छोड़कर सभी शेयर शानदार तेजी पर बंद हुए. सबसे ज्‍यादा तेजी बजाज फाइनेंस में 5.62 फीसदी की रही. इसके बाद L&T, Indigo, Titan और एटर्नल जैसे शेयरों में 5 फीसदी तक की उछाल रही।  आज 10 लाख करोड़ की कमाई  मिड और स्‍मॉल कैप इंडेक्‍स में भी धुंआधार तेजी देखने को मिली, जिस कारण रिटेल से लेकर बड़े निवेशकों तक ने मोटी कमाई की. इस तेजी के कारण बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन 452.66 लाख करोड़ रुपये से करीब 10 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 462 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच गया।  शेयर बाजार में क्यों आई इतनी तेजी?  ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने बताया है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में प्रतिबंधों को हटाना, होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त करना और ईरान के चारों ओर तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी शामिल है. वहीं अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ जंग समाप्‍त करने का समझौता करीब पूरा हो चुका है और इस सप्‍ताह भर में साइन किए जाएंगे. यह ऐलान ईरान के तेल इंडस्‍ट्री पर कंट्रोल करने की धमकी देने के कुछ ही घंटों के बाद आई।  इस खबर के आने के बाद अमेरिकी बाजारों में जबरदस्‍त तेजी देखने को मिली. अमेरिकी बाजार शानदार तेजी पर बंद हुए और आज इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दे रहा है, जो शानदार तेजी के साथ कारोबार कर रहा है. इसके अलावा, कुछ और वजहों से भी मार्केट में तेजी रही।  कच्‍चे तेल के दाम में गिरावट  ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 5 फीसदी गिरकर  86.4 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो दो महीने के निचले स्‍तर के करीब है. इस तेज गिरावट के कारण क्रूड ऑयल पर निर्भर शेयरों में तेजी देखने को मिली. वहीं एशियाई बाजारों में भी रैली रही. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्‍स 8 प्रतिशत से अधिक और जापान का निक्केई 225 इडेक्‍स 3 प्रतिशत से अधिक बढ़ा. चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्‍स भी पॉजिटिव रहा।  रुपये में मजबूती अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 65 पैसे की मजबूती आई और यह 95.20 पर पहुंच गया. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के संकेतों के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, डॉलर के कमजोर होने और घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुझान ने भी रुपये को मजबूती दी। 

शेयर बाजार में शानदार रैली, ट्रंप के यू-टर्न का असर; शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी उछले

मुंबई  भारतीय शेयर मार्केट हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को गजब की तेजी के साथ खुले हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान मसले पर यू-टर्न के बीच निवेशकों ने खरीदारी का माहौल पहले ही मिनट से बना दिया. नतीजन सेंसेक्स 950 अंकों की बंपर तेजी के साथ 74,788 लेवल पर और निफ्टी 260 अंक की उछाल के साथ 23,428 पर खुला।  आईटी के साथ बैंकिंग सेक्टर ने दिखाया दम निफ्टी आईटी के साथ निफ्टी फार्मा में भी कमाल की तेजी देखी गई. मजबूत शेयरों की बात करें तो इसमें एलएंडटी, ट्रेंट, इटरनल, इंडिगो और बजाज फाइनेंस शामिल रहे. इनके शेयरों में 2 से 3 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई. उम्मीद के अनुसार बैंकिंग शेयर भी इस पॉजिटिव खबर के चलते कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं. एचडीएफसी बैंक हो या आईसीआईसीआई बैंक या फिर देश का सबसे बडा पब्लिक सेक्टर बैंक एसबीआई ने मार्केट को तेजी दी. मार्केट की इस धमाकेदार शुरुआत से एक बात साफ दिखाई दे रही है कि ज्यादातर सेक्टर्स हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।  मिडिल ईस्ट में अमेरिका के यू-टर्न का असर आज अगर भारतीय शेयर मार्केट में आई तेजी की वजह देखें तो वो सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति का वो बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ जंग खत्म होने की बात कही थी. इसके बाद ही निवेशकों का भरोसा बाजार पर लौटा. दूसरी तरफ अमेरिकी मार्केट की भी गुरुवार को हालत सुधरी, जिसका सीधा असर देश के शेयर मार्केट पर आज दिखाई दे रहा है।  अमेरिकी बाजार में भी रही तेजी गुरुवार को अमेरिकी बाजार की बात करें तो डाउ जोन्स 1.86% चढ़ा, वहीं, एसएंडपी 500 में 1.75% की तेजी देखी गई. इसके अलावा नैस्डैक 2.5% उछलकर बंद हुआ. इसके ठीक एक दिन पहले बुधवार को अमेरिकी मार्केट में उठा-पटक का दौर था।  एशियाई मार्केट में दिखा जोर मिडिल ईस्ट में दिख रही शांति का असर एशियाई मार्केट पर भी दिखाई दिया. निक्केई 225 में 3% से ज्यादा तेजी आई. इसके साथ ही हैंग सेंग 1.5% ऊपर बंद हुआ. वहीं, शंघाई कंपोजिट में 1% की बढ़त रही. देश के शेयर मार्केट के साथ ग्लोबल मार्केट पिछले कारोबारी दिन (बुधवार) के मुकाबले गुरुवार को ज्यादा स्टेबल नजर आए।  कच्चा तेल एक बार फिर 90 डॉलर के नीचे शांति वार्ता की उम्मीदों के बीच एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे जा चुकी हैं. खबर लिखे जाने तक ब्रेट क्रूड ऑयल 88.59 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. वहीं WTI क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल पर है. कच्चा तेल सस्ता होना भारत के लिए गुड न्यूज है, इससे देश की महंगाई और इंपोर्ट बिल में कमी आती है।  विदेशी निवेशकों को लेकर चिंता अभी भी भारतीय बाजार में घरेलू निवेशक जमकर खरीदारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ विदेशी निवेशक की लागातर निकासी देश की के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. बीते दिन यानी 11 जून को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बाजार से करीब 1,987 करोड़ रुपये के शेयर निकाले. वहीं दूसरी तरफ घरेलू निवेशकों ने 4,224 करोड़ रुपये की खरीदारी की. एनएसडीएएल के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशक इस महीने जून में अभी तक 45,512 करोड़ रुपये भारतीय शेयर मार्केट से निकाल चुके हैं। 

भारत में ऑपरेशन बंद कर अमेरिकी कंपनी ने निकाले सभी 250 कर्मचारी, कर्मचारियों में मची चिंता

नई दिल्‍ली AI अब कंपनियों के बीच तेजी से अप्‍लाई हो रहा है, जिसका नतीजा ये है कि कंपनियां एआई का यूज बढ़ाते ही कर्मचारियों की संख्‍या में कटौती कर रही हैं. इसी के मद्देनजर, एक  अमेरिकी कंपनी ने भारत से अपना कारोबार बंद करने का फैसला किया है. इससे भारत में काम कर रहे सभी 250 कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित हुई है।   यह अमेरिकी रियल एस्टेट टेक कंपनी OpenDoor है, जिसने भारत स्थित अपने परिचालन को बंद करने का निर्णय लिया है, क्योंकि कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका में छोटी एआई बेस टीमों की ओर रुख कर रही है।  कर्मचारियों के साथ शेयर किए गए एक नोट में OpenDoor के सीईओ काज नेजातियान ने कहा कि कुछ महीने पहले जब कंपनी ने ओपनडोर 2.0 लॉन्च किया था, तब भारत में उसके लगभग 250 कर्मचारी थे. इसमें से पिछले कुछ महीनों में कुछ नौकरियों को वापस संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थानांतरित कर दिया गया है।  उन्‍होंने आगे कहा कि आज हम अमेरिका में अपने कस्‍टमर्स के लिए इन पदों को और भी सुलभ बनाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रहे हैं और भारत स्थित अपने परिचालन को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे है. इससे भारत में हमारे उन सभी सहकर्मियों पर असर पड़ेगा, जिन्होंने ओपनडोर के लिए काम किया है।  भारत में बहुत अच्‍छे सहयोगी मिले उन्होंने कहा कि भारत में हमारे सहयोगी बहुत अच्छे लोग हैं. वे लोग शानदार काम करते हैं. अगर कोई इन्‍हें हायर करना चाहता है, तो उनके लिए ये बेहतरीन काम करके देंगे. हालांकि हम अब भारत से अपना कारोबार समेटकर निकल रहे हैं।  ओपनडोर यह बदलाव क्यों कर रहा है? इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए नेजातियान ने कहा कि ओपनडोर ने सालों से भारत में एक बड़ी टीम बनाई है ताकि अलग-अलग सिस्‍टम में मैन्युअल वर्कफ़्लो को संभाला जा सके. हालांकि, कंपनी ने कहा कि इन सिस्‍टम को यून‍िफाइड करने और पूरे अमेरिका में छोटी AI बेस्‍ड कस्‍टमर्स फोकस टीमें बनाने के बाद उसके ऑपरेशन में बदलाव आया है।  नेजातियन ने कहा कि हमारे ग्राहक अमेरिका में हैं, और उनके लिए हम जो परिचालन कार्य करते हैं, उसे उनके करीब रहकर करना सबसे अच्छा है. उन्होंने आगे कहा कि ओपनडोर 2.0 कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से एक बहुत छोटी कंपनी होगी, लेकिन प्रभाव के हिसाब से एक बहुत बड़ी कंपनी होगी. उन्होंने लिखा कि हमारे लोग पहले से कहीं अधिक चीजों के मालिक होंगे, अधिक निर्माण करेंगे और उनका दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा।  कंपनी ने कहा कि रिस्‍टैब्लिसमेंट से कम चीजों, कम प्रॉसेस और कम ऑप्‍शन के साथ संचालन सरल हो जाएगा. कंपनी एक ऐसा सिंगल प्लेटफॉर्म बनाने की योजना बना रही है जहां कर्मचारी घर की खरीद, रिन्‍यूवेबल और बिक्री की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक कर सकें. साथ ही अलग-अलग सॉल्‍यूशन पर काम कर सकें। 

अनिल अंबानी पर संकट के बादल! NCLT के फैसले ने बढ़ाई चिंता, आगे क्या होगा?

मुंबई  उद्योगपति अनिल अंबानी को एक बड़ा झटका लगा है। दरअसल, मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी। इस फैसले के साथ ही अंबानी के खिलाफ दिवालियापन प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, NCLT के फैसले के बाद अनिल अंबानी ने स्पष्ट किया है कि वे इस आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में चुनौती देंगे। अगर अनिल अंबानी का दिवालियापन प्रक्रिया मामला आगे बढ़ता है तो एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) नियुक्त किया जा सकता है, जो कानून के तहत उनकी व्यक्तिगत संपत्तियों का आकलन और नियंत्रण संभालने की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह मामला करीब 1,200 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़ा है। SBI का दावा है कि अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और रिलायंस इंफ्राटेल को दिए गए कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। कंपनियों के कर्ज नहीं चुकाने के बाद बैंक ने गारंटी के आधार पर वसूली की कार्रवाई शुरू की थी। इस पूरे प्रकरण पर अनिल अंबानी की ओर से बयान आया है। यह मामला साल 2016 का है, जो कथित रूप से दी गई एक विवादित व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है। अंबानी पक्ष का दावा है कि उन्हें इस फंड से कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं मिला था। मामला उस समय का है, जब भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन संबंधी प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं हुए थे। अंबानी के प्रवक्ता के मुताबिक NCLT का विस्तृत आदेश मिलने के बाद उनकी कानूनी टीम उसका अध्ययन करेगी और उपलब्ध कानूनी विकल्पों के तहत उचित मंच पर चुनौती देगी। उन्होंने भरोसा जताया कि अंबानी अपनी स्थिति को न्यायिक मंचों पर सफलतापूर्वक साबित करेंगे। अमिताभ झुनझुनवाला पर सीबीआई का एक्शन इस बीच, मुंबई की एक विशेष अदालत ने रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े एक कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के पूर्व प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला को सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है। झुनझुनवाला इससे पहले अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज एक मामले में न्यायिक हिरासत में थे। इस मामले में कंपनी पर कथित तौर पर 2,929.05 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। सीबीआई के अनुसार, रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, उसके निदेशकों और अज्ञात सरकारी अधिकारियों ने मिलकर 31 बैंकों और वित्तीय संस्थानों के एक समूह (कंसोर्टियम) के साथ धोखाधड़ी की साजिश रची। इस समूह से कंपनी ने कुल मिलाकर लगभग 9,280 करोड़ रुपये का लोन लिया था।

Tata Sierra CNG का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए खबर, कंपनी ने लॉन्च को लेकर खोले पत्ते

  नई दिल्ली टाटा ने सीएनजी कारों के साथ वो प्रयोग किए हैं, जो इंडस्ट्री में दूसरे प्लेयर्स नहीं कर रहे हैं. चाहें सीएनजी के साथ ऑटोमेटिक (AMT) गियरबॉक्स देना हो या फिर कार का पेट्रोल पर नहीं बल्कि सीधे सीएनजी पर स्टार्ट होना हो. लेकिन टाटा की सारी सीएनजी कारें सब-फोर मीटर सेगमेंट की हैं।  यानी टाटा सीएनजी वाली सभी कारें चार मीटर से छोटी हैं. चाहें बता टियागो की हो या फिर नेक्सन की. ऐसे में एक सवाल उठता है कि क्या टाटा मोटर्स एक बड़ी सीएनजी कारों को मार्केट में उतारेगी. मसलन टाटा सिएरा सीएनजी या कर्व सीएनजी हमें देखने को मिलेगी. वैसे इंटरनेट पर टाटा सिएरा सीएनजी को लेकर कई तरह की बातचीत चल रही है।  कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी इसे जल्द ही लॉन्च कर सकती हैं, लेकिन इन कयासों को हकीकत क्या है. ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ वक्त में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है. वैसे इजाफा सीएनजी की कीमतों में भी हुआ है. तो क्या टाटा बड़ी सीएनजी कारों को लॉन्च करेगी।  क्या CNG में आएगी टाटा सिएरा और कर्व SUV?  ऑटो से बातचीत में टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के चीफ कमर्शियल ऑफिसर विवेक श्रीवत्स ने सीएनजी और टाटा की प्लानिंग पर कई बाते बताई हैं. टाटा की बड़ी कारों में सीएनजी देने के सवालों पर उन्होंने बताया, 'सीएनजी कारों के ज्यादातर खरीदार 15 लाख से कम के सेगमेंट में हैं. बड़ी गाड़ियों में कंज्यूमर्स के अपेक्षाएं अलग हैं।  'बड़ी कारों के खरीदारों को परफॉर्मेंस, ड्राइवेबिलिटी और ओवरऑल कैपेबिलिटी चाहिए होती है. प्रोडक्ट के नजरिये से भी देखें तो, बड़ी गाड़ियों में CNG पावरट्रेन हमेशा वैसी परफॉर्मेंस नहीं देते जैसी उस सेगमेंट के ग्राहक चाहते हैं. फिलहाल हमें बड़ी कारों में सीएनजी की कोई मांग नहीं दिख रही है।  इसका ये मतलब है कि अगर आप सिएरा सीएनजी का इंतजार कर रहे हैं, तो कंपनी इसे अभी लॉन्च नहीं करने वाली है. हालांकि, विवेक ने ये नहीं कहा कि सिएरा सीएनजी या टाटा की बड़ी कारों में सीएनजी कभी नहीं मिलेगा. उन्होंने बताया कि हम लगातार मार्केट ट्रेंड्स और कस्टमर्स की जरूरत का आकलन करते रहते हैं. अगर भविष्य में बड़ी कारों में सीएनजी की मांग बढ़ेगी, तो हम सही प्रोडक्ट के साथ बाजार में उतरने पर विचार करेंगे।  बढ़ रहा सीएनजी का मार्केट सीएनजी कारों को पहले सिर्फ फ्लीट ओनर्स की पसंद के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब ये नजरिया बदल रहा है. इसकी वजह सेफ, कम्फर्टेबल और प्रैक्टिकल विकल्प का मिलना है. सीएनजी देश का तेजी से बढ़ने वाला फ्यूल टाइप है।  वित्तवर्ष 2025 में इसका मार्केट शेयर 19 परसेंट था, जो वित्तवर्ष 2026 में बढ़कर 22 फीसदी पहुंच गया है. हालांकि, इसके बाद भी लोगों के मन में सीएनजी कारों की रिसेल वैल्यू और अपफ्रंट कॉस्ट को लेकर कई सवाल होते हैं।  विवेक श्रीवत्स ने बताया कि सीएनजी कारों की नेट कॉस्ट पेट्रोल कारों के मुकाबले 16 से 20 फीसदी ज्यादा होती हैं. हालांकि, अगर कोई रोजाना 40 किलोमीटर का औसत सफर करता है, तो 16 से 20 परसेंट का ये एक्स्ट्रा खर्च शुरुआती एक साल में ही निकल जाता है।  उन्होंने बताया कि चार साल की ओनरशिप में पेट्रोल कार का कुल खर्च सीएनजी के मुकाबले 10 से 12 परसेंट बढ़ जाता है. वहीं फैक्टरी फिटेड सीएनजी कारों की रिसेल वैल्यू भी ज्यादा होती है। 

सोना हुआ 6 महीने में सबसे सस्ता! कीमतों में बड़ी गिरावट के पीछे क्या है कारण, जानिए Buy or Wait

 नई दिल्ली सोने का भाव टूट (Gold Rate Fall) रहा है. न सिर्फ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज और घरेलू मार्केट में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ये लगातार सस्ता हो रहा है. गुरुवार को सोने का भाव छह महीने के निचले स्तर पर आ गया है. स्पॉट गोल्ड की कीमत 21 नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर 4,022.09 डॉलर पर पहुंच गई. इसके अलावा डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर 4,116.20 डॉलर पर आ गए।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट को लेकर स्टोनएक्स के सीनियर एनालिस्ट मैट सिम्पसन ने कहा, 'Gold Rate 4,000 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) की ओर तेजी से बढ़ रहा है. बुधवार को जारी सीपीआई रिपोर्ट के बाद अमेरिकी डॉलर सूचकांक में कोई खास तेजी नहीं आई।  MCX पर भी टूटे सोना-चांदी  न सिर्फ स्पॉट मार्केट में सोने की कीमत बिखरी है, बल्कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी गोल्ड-सिल्वर प्राइस में गिरावट आई है. 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate  गुरुवार को मार्केट ओपन होने के साथ ही गिरकर 1.46 लाख रुपये पर आ गया. तो वहीं 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली 1 किलो चांदी की कीमत गिरकर 2.30 लाख रुपये के करीब आ गई. इसमें ओपनिंग के साथ ही लगभग 5000 रुपये की गिरावट आई. इसके बाद अब चांदी अपने हाई से 2.26 लाख रुपये सस्ती मिल रही है।  Gold में गिरावट की वजह क्या?  अगर सोने में गिरावट के कारणों की बात करें, तो सबसे बड़ा एक कारण नजर आता है और वो है महंगाई का जोखिम. अमेरिका में मई महीने की रिटेल महंगाई दर तीन साल के हाई 4.2% पर पहुंच गई है. दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति कहते नजर आ रहे हैं कि, 'I Love Inflation'. मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते एनर्जी प्रोडक्ट की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकियों पर महंगाई का बम फोड़ने का काम किया है।  CME फेडवॉच टूल के मुताबिक, व्यापारी दिसंबर तक अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 70% से ज्यादा संभावना जता रहे हैं. उधर ईरान के होर्मुज बंद के ऐलान के बाद अचानक तेल की कीमतों में उछाल आया है. महंगाई बढ़ने के जोखिम के चलते सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. बता दें कि गोल्ड को हमेशा महंगाई के खिलाफ बचाव के रूप में देखा जाता है, लेकिन हाई पॉलिसी रेट्स कीमती धातुओं पर दबाव डालते हैं।  Gold में खरीदारी का मौका  तमाम रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका में महंगाई और मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते के कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आई है. यह गिरावट निवेशकों के लिए एक खरीदारी का मौका (Gold Buying Opportunity) बन सकती है। 

SUV सेगमेंट में फिर धमाका करेगी Hyundai, CRETA के बाद CNG मॉडल लाने की तैयारी तेज

 नई दिल्ली हुंडई भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी पुरानी पोजिशन को दोबारा हासिल करने की कोशिश में लगी हुई है. कभी ये भारतीय बाजार की दूसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी थी, जो अब चौथे नंबर पर पहुंच गई है. कंपनी मिडसाइज एसयूवी सेगमेंट में एक नया मॉडल लॉन्च करने वाली है, जो क्रेटा से अलग होगा।  हम बात कर रहे हैं हुंडई बेयॉन (Hyundai Bayon) बेस्ड एसयूवी की, जिसे भारत में टेस्टिंग के वक्त स्पॉट किया गया है. इस एसयूवी का कोडनेम Bc4i है, जिसे हाल में भारत में टेस्टिंग के वक्त स्पॉट किया गया है. स्पाई फोटोज से इस एसयूवी के डिजाइन का अंदाजा लगाया जा सकता है।  कब लॉन्च होगी SUV? कंपनी इस कार को जुलाई से सितंबर 2026 के बीच में कभी लॉन्च कर सकती है. पहले माना जा रहा था कि बेयॉन पर बेस्ड ये एसयूवी फ्रॉन्क्स के सेगमेंट में आएगी, लेकिन अब ये साफ है कि कार मिडसाइज एसयूवी होगी. ये ठीक मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा और विक्टोरिस की तरह हुंडई के पोर्टफोलियो में क्रेटा के साथ मिलेगी।  कार के फ्रंट में मौजूदा वेन्यू की स्प्लिट स्टाइल हेडलाइट डिजाइन मिलेगा. कार में स्लिम एलईडी डेटाइम रनिंग लैम्प्स टॉप पर मिलेंगे. बंपर के निचले हिस्से में एयर वेंट्स मिलेंगे. इसके अलावा कार के फ्रंट में पार्किंग सेंसर और ADAS के रडार सेंसर को भी देखा गया है. पहले आए कुछ शॉट्स में ब्लैक क्लैडिंग भी देखी गई थी।  टेस्टिंग कार का कुछ हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट में आने वाली बेयॉन से हू-ब-हू मिलता है. कार के रियर पोर्शन में भी स्प्लिट स्टाइलिंग वाली लाइट्स देखने को मिल सकती हैं. रियर बंपर के निचले हिस्से में ब्रेक लाइट्स और अपर पोर्शन में एलईडी टर्न इंडिकेटर दिए जा सकते हैं। CNG अवतार में भी आएगी हुंडई इस एसयूवी में 360 डिग्री कैमरा देगी या नहीं ये अभी कन्फर्म नहीं है. क्योंकि कार में कोई भी कैमरा पॉड दिखा नहीं है. ध्यान रखें कि क्रेटा को इस फीचर के साथ स्पॉट किया गया था. रिपोर्ट्स की मानें, तो ये कार पेट्रोल इंजन के साथ सीएनजी में भी मिलेगी।  इसमें डुअल सिलेंडर सीएनजी विकल्प दिया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो ये कंपनी की पहली 4 मीटर से बड़ी कार होगी, जो सीएनजी के साथ आएगी. इसकी कीमत वेन्यू से ज्यादा और क्रेटा के कम होगी. इस कार का सीधा मुकाबला हुंडई क्रेटा, मारुति ग्रैंड विटारा, मारुति विक्टोरिस, टाटा सिएरा, रेनो डस्टर, स्कोडा कुशाक और फॉक्सवैगन ताइगुन से होगा। 

Meta-Reliance की बड़ी डील! भारत में खुलेगा पहला AI डेटा सेंटर, टेक सेक्टर में हलचल तेज

 नई दिल्ली  फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा अब भारत में अपना पहला आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) डेटा सेंटर ओपन करने जा रही है. मेटा ने इसके लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ पार्टनरशिप की है और ये डेटा सेंटर गुजरात राज्य के जामनगर में शुरू होगा।  रिलायंस इंडस्ट्रीज जामनगर में सेंटर तैयार करेगी, जिसके बाद मेटा इसमें अपना ऑपरेशन शुरू करेगा. मेटा का यह AI डेटा सेंटर भारत के AI मिशन को पावर देने का काम करेगा।  मेटा और रिलायंस पार्टनरशिप के तहत तैयार होने वाले AI डेटा सेंटर 168 मेगावॉट कैपिसिटी के साथ शुरू होगा. बाद में इसका एक्सपेंशन किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, यह सेंटर आने वाले 2 साल में शुरू होने जा रहा है। . रिलायंस तैयार कर रही है Meta AI डेटा सेंटर  रिलायंस इस फैक्टरी को तैयार करेगी, जबकि मेटा अपने AI सिस्टम को सपोर्ट देने के लिए इसका इस्तेमाल करेगी. यह सपोर्ट फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे प्रोडक्ट में काम करता है. साथ ही यह प्रोजेक्ट मार्क जकरबर्ग की उस बड़ी प्लानिंग को आगे बढ़ाएगा, जिसको वह पर्सनल सुपर इंटेलीजेंस भी कहते हैं।  मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि यह AI विस्तार में मदद करेगा मार्क जुकरबर्ग ने जारी एक बयान में कहा है कि उनको गर्व है कि हम रिलायंस के साथ मिलकर भारत में अपना पहला AI डेटा सेंटर बना रहे हैं. जामनगर में तैयार होने वाला यह डेटा सेंटर ग्लोबल AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने में मदद करेगा. साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में हमारे निवेश को और मजबूत करने में मदद करेगा।  रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर को सर्विस देगी  पार्टनरशिप के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर के पूरे लाइफसाइकल के दौरान एंड-टू-एंड सर्विस देगी. इसमें डेटा सेंटर का डिजाइन, डेवलपमेंट, यूटिलिटी मैनेजमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी और पूरी तरह से फुली मैनेज्ड ऑपरेशनल सर्विसेज को शामिल किया गया है।  रिलायंस अपनी स्थिति को और जमबूत करेगी  पार्टनरशिप के तहत रिलायंस भारत में हाइपरस्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सिंगल-विंडो सॉल्यूशंस प्रोवाइडर के रूप में अपनी स्थिति को मजूबत करेगी. ग्राहकों को एक ही कंपनी के जरिए डेटा सेंटर से जुड़ी सभी प्रमुख सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 

जंग के माहौल का बाजार पर नहीं पड़ा असर, हरे निशान में खुला सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों की हुई बल्ले-बल्ले

मुंबई  अमेरिका-ईरान के बीच हुए ताजा हमलों के बीच जहां दुनियाभर के अन्‍य प्रमुख बाजारों में बड़ी गिरावट देखी गई, वहीं भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में  खुले. मार्केट खुलते ही BSE सेंसेक्‍स में 416 अंक से ज्‍यादा का उछाल दिखा, जबकि निफ्टी 50 में भी करीब 100 अंकों का उछाल देखने को मिला. सेंसेक्‍स 74,300 के पार ट्रेड करता दिखा, जबकि निफ्टी 23,300 के पार कारोबोर करता दिखा।  करेंसी मार्केट में उथल-पुथल के बीच भारतीय रुपये में आज गिरावट देखी जा रही है. बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे की गिरावट के साथ 95.56 के लेवल पर कारोबार करता दिखा।  घरेलू शेयर बाजार की अच्‍छी शुरुआत भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख देखा गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 303.73 अंक चढ़कर 74,222.49 के स्तर पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 85.40 अंक की बढ़त के साथ 23,327.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार से पैसा निकालना बदस्तूर जारी है. एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्र यानी मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 4,566.03 करोड़ रुपये के शेयर बेचे (ऑफलोड किए) थे।  रुपये में क्‍यों दिखी गिरावट?  मिडिल ईस्ट में युद्ध के ताजा घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे टूटकर 95.56 के स्तर पर आ गया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में रुपये में शुरुआती गिरावट के बाद और कमजोरी आई. इससे पहले मंगलवार को रुपये में थोड़ी मजबूती देखी गई थी, जब यह 20 पैसे की बढ़त के साथ 95.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।  विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, इस भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय मुद्रा पर चौतरफा दबाव बना दिया है. फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि बुधवार को बाजार खुलते ही 'डॉलर-रुपया' (USD/INR) की जोड़ी में भारी कमजोरी देखी गई. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराने के लिए ईरान जिम्मेदार है और अमेरिका इस हमले का 'करारा जवाब' देगा।  कच्चे तेल में उबाल से रुपये पर बढ़ा दबाव वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' (Brent Crude) वायदा बाजार में 0.73 प्रतिशत की तेजी के साथ 92.12 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था. बाजार विश्लेषकों और ट्रेडर्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट में नए सिरे से शुरू हुए तनाव की वजह से भारतीय रुपया गंभीर दबाव में है. चूंकि भारत अपनी ऊर्जा (कच्चा तेल और गैस) जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली कोई भी बढ़ोतरी सीधे तौर पर देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बढ़ा देती है. इसी वजह से घरेलू मुद्रा लगातार कमजोर हो रही है।  अमेरिका और ईरान के बीच हिंसक जवाबी कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर आत्मघाती ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं. इस सैन्य टकराव के चलते वैश्विक बाजार सहमे हुए हैं।