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निवेश प्रवाह बढ़ने के संकेत, SBI-कोटक रिपोर्ट में बड़े पूंजी इनफ्लो का अनुमान

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया नीतिगत घोषणाओं और निवेश संबंधी सुधारों से भारत में 75 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आ सकती है। एसबीआई रिसर्च और कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्टों में कहा गया है कि इन सुधारों से विदेशी निवेश बढ़ेगा, रुपये को मजबूती मिलेगी और सरकारी उधारी की लागत कम हो सकती है। एसबीआई का अनुमान है कि आरबीआई के उपायों से कम से कम 40 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है, जबकि कोटक सिक्योरिटीज ने 50 से 75 अरब डॉलर तक पूंजी प्रवाह की संभावना जताई है। दोनों संस्थानों का मानना है कि अगस्त में मौद्रिक नीति समिति रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रख सकती है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.9 प्रतिशत था। केंद्रीय बैंक ने इसके लिए कमजोर वैश्विक मांग, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को जिम्मेदार बताया है। वहीं खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। पीएम ने आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ किया विमर्श प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक उथल पुथल के बीच आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्यों के साथ भारत की आर्थिक वृद्धि को और गति देने के उपायों पर विचार विमर्श किया और सुझाव लिए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए विभिन्न सुझावों और नीतिगत कदमों पर विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही जीवन की सुगमता और कारोबार की सुगमता को बेहतर बनाने से जुड़े सुधारों पर भी मंथन हुआ। इस समय वैश्विक पटल पर पश्चिम एशिया का संघर्ष एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। बैठक के दौरान इस भू-राजनीतिक संकट को लेकर भी गंभीरता से चर्चा हुई। पीएम-ईएसी के सदस्यों ने पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अपना आकलन प्रधानमंत्री के सामने पेश किया। यह आकलन सरकार को भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नीतियां तैयार करने में मदद करेगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं और असमान विकास दर जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। बैठक में पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास भी मौजूद रहे। वर्तमान में ईएसी-पीएम के अध्यक्ष एस महेंद्र देव हैं। परिषद में तीन पूर्णकालिक सदस्य और 11 अंशकालिक सदस्य शामिल हैं। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए यह 7.7% रह सकती है। आंकड़ों के मुताबिक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था की वृद्धि के प्रमुख चालक बने हुए हैं। वैश्विक संकट में विकास की रणनीति पीएम व आर्थिक सलाहकार परिषद के बीच हुई इस बैठक में मुख्य रूप से उन रणनीतियों पर मंथन किया गया, जो भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी तेजी से आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल नीतियां बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार करना भी जरूरी है।  

टाटा स्टील, वोल्टास समेत कई कंपनियां देंगी डिविडेंड, जानें रिकॉर्ड डेट और रकम

 नई दिल्ली इस हफ्ते टाटा ग्रुप की कई कंपनियां एक्स-डिविडेंड स्टॉक के तौर पर ट्रेड करने जा रही हैं। इन कंपनियों की लिस्ट में टाटा मोटर्स, वोल्टास भी शामिल हैं। कुल 6 कंपनियां एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगी। आइए डीटेल्स में जानते हैं। 1- टाटा स्टील लिमिटेड (Tata Steel Ltd) कंपनी ने निवेशकों को एक शेयर पर 4 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। इस डिविडेंड के लिए टाटा स्टील ने 12 जून 2026 की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। शुक्रवार को टाटा स्टील लिमिटेड के शेयर बीएसई में 1.78 प्रतिशत की गिरावट के बाद 206.80 रुपये के स्तर पर बंद हुए थे। बता दें, बीते एक साल में कंपनी के शेयरों की कीमतों 30 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने क मिली है। 2- वोल्टास लिमिटेड (Voltas Ltd) शुक्रवार को कंपनी के शेयर करीब 1 प्रतिशत की तेजी के साथ 1297.40 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। टाटा ग्रुप की यह कंपनी भी एक शेयर पर 4 रुपये का डिविडेंड देने जा रही है। वोल्टास ने भी 12 जून की तारीख को ही रिकॉर्ड डेट तय किया है। 3- टाटा केमिकल्स लिमिटेड (Tata Chemicals Ltd) इस कंपनी ने एक शेयर पर 11 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनी ने 10 जून 2026 की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। बीते एक साल में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है। 4- टाटा इनवेस्टमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (Tata Investment Corporation Ltd) टाटा ग्रुप की यह कंपनी भी अपने निवेशकों को डिविडेंड दे रही है। इस कंपनी ने एक शेयर पर 3.40 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। टाटा इनवेस्टमेंट कारपोरेशन लिमिटेड ने 10 जून की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। बता दें, शुक्रवार को 669.60 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। 5- Tata Elxsi Ltd टाटा ग्रुप की कंपनी ने एक शेयर पर 75 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। Tata Elxsi Ltd ने डिविडेंड के लिए 10 जून 2026 की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। शुक्रवार को कंपनी के शेयर 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 4299.90 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। पिछले एक साल टाटा ग्रुप की इस कंपनी के शेयरों की कीमतों में 33 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली है। 6- Trent Ltd ट्रेंट लिमिटेड के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने जा रहे हैं। कंपनी ने एक शेयर पर 6 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। पिछले एक साल में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 26 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली है। 7- टाटा मोटर्स लिमिटेड (Tata Motors Ltd) इस कंपनी ने एक शेयर पर 4 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनी इस डिविडेंड के लिए 12 जून 2026 की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है।

भारत में बढ़ा इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज, Tata Motors की रिकॉर्ड बिक्री ने सबको चौंकाया

 नई दिल्ली भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार बढ़ रहा है. साल-दर-साल… महीने-दर-महीने कंपनियों की सेल पहले से बेहतर हो रही हैं. ये सिलसिला दिखा रहा है कि लोग अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों को स्वीकार कर रहे हैं. मई 2026 में सभी कंपनियों की मिलाकर 25,880 इलेक्ट्रिक कारें रजिस्टर हुई हैं।   यानी इतने लोगों ने इलेक्ट्रिक कारों को खरीदा है. पिछले साल मई के मुकाबले ग्रोथ 80.7 फीसदी की है. मई 2025 में सभी कंपनियों की कुल सेल 14,323 यूनिट्स तक ही पहुंच पाई थी. इलेक्ट्रिक कारों की सेल में ये ग्रोथ सिर्फ ईयर-ऑन-ईयर ही नहीं बल्कि मंथ-ऑन-मंथ भी है।  पिछले महीने यानी अप्रैल 2026 में भारतीय बाजार में कुल 24,753 इलेक्ट्रिक कारें बिकी थीं. मंथ-ऑन-मंथ इस सेगमेंट में 4.6 फीसदी की ग्रोथ है. आइए जानते हैं भारती बाजार में किस कंपनी ने कितनी इलेक्ट्रिक कारों को बेचा है।  टॉप पर टाटा मोटर्स सबसे पहले बात करते हैं, टाटा मोटर्स की जिसने मई 2026 में रिकॉर्ड बिक्री की है. टाटा मोटर्स के लिए मई का महीना शानदार रहा है. कंपनी ने पहली बार 10 हजार यूनिट्स की सेल का आंकड़ा पार किया है. मई महीने में टाटा मोटर्स ने सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों को बेचा है. कंपनी ने कुल 10,339 यूनिट्स बेची है, जो पिछले साल मई में सिर्फ 5,083 यूनिट्स थी. कंपनी की ग्रोथ 103.4 फीसदी है।  वहीं महिंद्रा की बात करें, तो कंपनी इलेक्ट्रिक कारों के बाजार में दूसरा सबसे बड़ा ब्रांड है. कंपनी ने मई 2026 में 6,210 कारों को बेचा है. वहीं मई 2025 में कंपनी की इलेक्ट्रिक व्हीकल सेल 3,131 यूनिट्स थी. अप्रैल 2026 की बात करें, तो कंपनी ने 5,864 कारें बेची थीं।  रफ्तार भरती मारुति सुजुकी  एमजी मार्केट का तीसरा बड़ा प्लेयर है, जिसने मई 2026 में 4,985 कारों को बेचा है. पिछले साल कंपनी ने 4,599 यूनिट्स बेची थी, जबकि अप्रैल 2026 में कंपनी ने 5,420 यूनिट्स को बेचा था. मारुति सुजुकी तेजी से इस लिस्ट में ऊपर आया है. कंपनी के पास सिर्फ एक इलेक्ट्रिक कार है, जिसकी मई में 1,591 यूनिट्स बिकी हैं।  भारत में नई कंपनी होने के बाद भी विनफास्ट बेहतर परफॉर्म कर रही है. कंपनी ने मई 2026 में 1,238 कारों को बेचा है. अप्रैल 2026 में कंपनी ने 1,290 कारें बेची थीं. चीनी ब्रांड बीवाईडी की सेल अभी भी एक हजार यूनिट्स से कम है. कंपनी ने मई में 686 यूनिट्स को बेचा है।  इनके अलावा हुंडई ने 460 इलेक्ट्रिक कारों को मई 2026 में बेचा है. पिछले साल मई में कंपनी ने 719 कारें बेची थीं, जबकि अप्रैल 2026 में कंपनी ने 559 कारें बेची थीं. वहीं किआ मोटर्स ने 349 इलेक्ट्रिक कारों को बेचा है. वहीं सिट्रोएन की इलेक्ट्रिक कारों का आंकड़ा 22 पर ही सिमट गया है. पिछले साल कंपनी ने 129 कारों को बेचा था। 

गोल्ड वैल्यू में बड़ी गिरावट से बढ़ी चर्चा, RBI ने साफ किया- रिजर्व का सोना सुरक्षित है

नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक के गोल्‍ड रिजर्व वैल्‍यू में गिरावट आई है. यह वैल्‍यू 2 अरब डॉलर से ज्‍यादा कम हो चुका है. RBI के नए वीकली रिपोर्ट में 29 मई, 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान उसके सोने के भंडार की वैल्‍यू में 2.19 अरब डॉलर की गिरावट आई है।  इस गिरावट से बाजार में यह अटकलें लगने लगीं कि RBI ने अपने सोने के भंडार का कुछ हिस्‍सा बेच दिया होगा, लेकिन गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक का गोल्‍ड रिजर्व बरकरार है, बल्कि इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई है।  RBI के आंकड़ों के अनुसार, 29 मई तक गोल्‍ड रिजर्व की वैल्‍यू 112.60 अरब डॉलर थी. इसी सप्ताह के दौरान, फॉरेन करेंसी असेट (भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक) में 3.12 अरब डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई और यह बढ़कर 546.15 अरब डॉलर हो गया. गोल्‍ड रिजर्व की रिपोर्ट किए गए वैल्‍यू में गिरावट के बावजूद, विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में बढ़ोतरी ने देश की पूरी रिजर्व स्थिति को मजबूत करने में मदद की।  सोने के भंडार में गिरावट?  RBI ने स्पष्ट किया कि सोने के भंडार में गिरावट खासतौर पर वैल्‍यू में बदलाव के कारण हुई है, न कि कीमती धातु की बिक्री के कारण. सोने के भंडार अमेरिकी डॉलर में दर्ज किए जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार प्राइस के आधार पर हर सप्ताह इनका वैल्‍यूवेशन किया जाता है. इसी कारण, वैश्विक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा के परिवर्तन भंडार के रिपोर्ट किए गए प्राइस को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं, चाहे केंद्रीय बैंक के पास मौजूद सोने की मात्रा अनचेंज रहे।  शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मल्होत्रा ​​ने कहा कि ऐसी खबरों का कोई आधार नहीं है जिनमें यह सुझाव दिया गया है कि आरबीआई ने सोना बेचा है. उन्‍होंने  कहा कि नहीं, RBI ने सोना नहीं बेचा है. हमारे सोने के भंडार में मामूली बढ़ोतरी हुई है।  RBI ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्टों का खंडन किया यह स्पष्टीकरण ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के एक विश्लेषण के बाद आया है जिसमें सुझाव दिया गया था कि भंडार के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि 22 मई को समाप्त होने वाले दो सप्ताह की अवधि के दौरान लगभग 12 अरब डॉलर वैल्‍यू के सोने की बिक्री हुई, जबकि इसी अवधि में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में वृद्धि हुई. इस विश्लेषण के कारण यह अटकलें लगाई गईं कि वैश्विक बाजार की अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक ने रुपये को सहारा देने या अपनी विदेशी मुद्रा स्थिति को मजबूत करने के लिए सोने के भंडार का उपयोग किया होगा।  हालांकि, आरबीआई ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसके पास मौजूद सोने का फिजिकल रिजर्व 880.52 टन पर अनचेंज है. केंद्रीय बैंक ने इस बात पर जोर दिया कि सोने के भंडार के प्राइस में होने वाले उतार-चढ़ाव को वास्तविक भंडार में होने वाले बदलाव से भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें लाभ और नुकसान भंडार प्रबंधन की एक नियमित प्रक्रिया है।  पीआईबी ने भी खबरों का किया खंडन  सरकार की सूचना जांच एजेंसी, प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने भी सोने की बिक्री से जुड़ी खबरों को 'फर्जी' बताया. आरबीआई के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए, पीआईबी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है. सितंबर 2025 के अंत में कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.92% थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70% हो गई और 22 मई 2026 तक और बढ़कर 16.85% हो गई। 

सोना-चांदी बाजार में बड़ी गिरावट, चांदी में ₹16 हजार से ज्यादा की टूट; अमेरिका बना वजह

नई दिल्‍ली सोना और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान भारी गिरावट आई है. चांदी एक ही झटके में 16,600 रुपये तक टूट चुकी है, जबकि सोने की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है. शु्क्रवार को रात 11.30 बजे कमोडिटी मार्केट के बंद होने तक चांदी के भाव 16,000 से ज्‍यादा टूट चुके थे, जबकि सोने के दाम में भी करीब 4000 रुपये तक की गिरावट आई थी।   सोने और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान इतनी भारी गिरावट सिर्फ अमेरिका की वजह से आई है. MCX पर दाम तेजी से गिरने के बाद सर्राफा बाजार में भी सोने-चांदी के भाव में गिरावट आई है. दिल्‍ली से लेकर मुंबई तक सोने-चांदी सस्‍ते हो चुके हैं।  MCX पर सोने-चांदी की कीमत  मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने के भाव में 3947 रुपये गिरकर 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी की कीमत 16,595 रुपये गिरकर 2,48,201 रुपये प्रति किलो पर आ गया है. सोने-चांदी के भाव में ये गिरावट अमेरकी-ईरान तनाव और फेड रेट बढ़ोतरी की आशंका के बीच आया है।  क्‍यों आई सोने-चांदी के भाव में आई ये गिरावट?  इंटरनेशलन मार्केट में सोना 3.4 फीसदी तक गिर गया है. अमेरिका में जॉब डाटा अनुमान से बेहतर डेटा आया है. इसका असर बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर पड़ा है. दोनों में तेजी देखी जा रही है, जिससे सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट रही है.  वहीं अमेरिका फेडरल बैंक इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है. इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका-ईरान में लड़ाई से कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं. इससे मंहगाई बढ़ने का खतरा बन गया है. यह भी सोने-चांदी में गिरावट की बड़ी वज है।  इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी के भाव  अमेरिका में 5 जून को स्पॉट गोल्ड 3.2 फीसदी गिरकर 4,330.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं सिल्वर 7.1 फीसदी गिरकर 68.63 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. भारत में सोना 2 फीसदी और चांदी करीब 7 फीसदी टूटी है।   आपके शहर में सोने की कीमत      दिल्‍ली में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,43,860 रुपये है.      चेन्‍नई में 22 कैरेट गोल्‍ड प्राइस 1,45,525 रुपये है.      मुंबई में 22 कैरेट सोने के दाम  ₹1,42,752 है.      बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,43,22 रुपये है.  17 जून को होगी फेड की बैठक  जानकारों का कहना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिंसंबर ट्रेडर्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है.अक्‍टूबर में यह बढ़ोतरी 60 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद दिख रही है. हालांकि, जॉबा डेटा आने से पहले उम्‍मीद थी कि कम से कम इस साल तो इंटरेस्‍ट नहीं बढ़ सकता है. फेड के अधिकारियों की बैठक 16-17 जून को होने वाली है. इस बैठक की अध्यक्षता नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श करेंगे. इस बैठक के बाद फैसले का ऐलान किया जाएगा।  (नोट- सोने-चांदी में किसी भी तरह की खरीदारी से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

विदेशी निवेश नियमों में ढील का असर: डॉलर के मुकाबले रुपया उछला, बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाने के बाद आज भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली. शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 के स्तर पर बंद हुआ था।  निवेश नियमों में ढील से बढ़ा भरोसा रिजर्व बैंक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश करने के नियमों को काफी सरल कर दिया है. इसके साथ ही, अनिवासी भारतीयों (NRIs) और विदेशी भारतीय नागरिकों (OCIs) के लिए भी भारतीय शेयर बाजार (इक्विटी) में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है।  बाजार के जानकारों का मानना है कि आरबीआई के इन कदमों से देश में विदेशी डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा. 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का दायरा बढ़ने और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसी खास सुविधाओं से रुपये को बड़ी ताकत मिली है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा जताया कि भारत का 682 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है।  ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है. केंद्रीय बैंक ने बाजार को लेकर अपना रुख 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ रखा है, जिससे जरूरत पड़ने पर आगे कदम उठाए जा सकें।  महंगाई और विकास दर के नए अनुमान कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अपने आर्थिक अनुमानों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं:     विकास दर (GDP): चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।      महंगाई (CPI): खुदरा महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% किया गया है।  वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) आज करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की यह बढ़ती कीमत भारत के आयात बिल के लिए एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन आरबीआई के नए सुधारों ने फिलहाल बाजार के डर को दूर कर रुपये को बूम दे दिया है। 

एक तरफ Layoffs, दूसरी तरफ AI पर भारी खर्च! Amazon की रणनीति पर उठे सवाल

 नई दिल्ली दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक ऐमेजॉन इस समय एक अजीब दोराहे पर खड़ी नजर आ रही है. एक तरफ कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों की नौकरी जा रही है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐमेजॉन ने करीब 30,000 नौकरियां खत्म कर दी हैं. लेकिन इसी दौरान कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश जारी रखा है. यही वजह है कि अब कंपनी के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है।  अमेरिका के सिएटल शहर में हुई एक सिटी काउंसिल हियरिंग में ऐमेजॉन के कुछ इंजीनियर्स ने खुलकर अपनी ही कंपनी के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि जिस समय कंपनी बड़े-बड़े AI डेटा सेंटर बना रही है, उसी समय कर्मचारियों की छंटनी करना गलत है।  रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर्स निवेश कर रहा है. ऐसे में 30 हजार लोगों की छंटनी पर कई सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि ये पूरे वर्कगफोर्स का 8.6% है जो काफी ज्यादा है।  इन इंजीनियर्स ने सिर्फ नौकरी कटौती पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि  डेटा सेंटर को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि ये डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और संसाधन खपत करते हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर पड़ता है।  दरअसल, Amazon ही नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री इस समय AI रेस में लगी हुई है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एनवीडिया जैसी कंपनियां भी इसी दौड़ में हैं. हर कंपनी चाहती है कि वह AI में आगे निकले, और इसके लिए अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं।  लेकिन इस दौड़ की कीमत कौन चुका रहा है? यही सवाल अब कर्मचारियों और आम लोगों के बीच उठने लगा है. Amazon के अंदर जो विरोध दिख रहा है, वह एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है।  हाल के दिनों में अमेरिका और यूरोप में एआई और डेटा सेंटर के खिलाफ कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं. लोगों को डर है कि AI नौकरियां खत्म करेगा और साथ ही पर्यावरण पर भी भारी दबाव डालेगा।  Amazon के मामले में यह विरोध इसलिए और खास है क्योंकि यह कंपनी के अंदर से ही उठ रहा है. आम तौर पर कर्मचारी अपनी कंपनी के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल नहीं उठाते, लेकिन यहां मामला अलग है।  विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई पर हो रहा भारी खर्च अभी कंपनियों के लिए कमाई में नहीं बदल पा रहा है. यानी कंपनियां पहले पैसा लगा रही हैं, लेकिन उसका फायदा तुरंत नहीं मिल रहा. ऐसे में लागत कम करने के लिए नौकरी कटौती का रास्ता अपनाया जा रहा है।  यही वजह है कि अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या AI का यह मॉडल टिकाऊ है या नहीं. Amazon की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है. यह उस पूरी टेक दुनिया की तस्वीर दिखाती है, जहां भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए आज के कर्मचारियों की कीमत चुकाई जा रही है।  आने वाले समय में यह साफ होगा कि AI वाकई उतना बड़ा बदलाव लाता है जितना दावा किया जा रहा है, या फिर यह भी एक महंगा प्रयोग साबित होता है. लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि Amazon के अंदर उठी यह आवाज अब पूरी दुनिया में गूंज रही है।   

‘IPL खत्म, अब भविष्य देखो’— Googleई की उड़ान और उदय कोटक के बयान ने खींचा ध्यान

मुंबई  दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां भविष्य की दिशा आज लिए जा रहे फैसलों से तय हो रही है. टेक्नोलॉजी,पूंजी और निवेश का खेल अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक हो गया है. इसी संदर्भ में गूगल का हालिया कदम बेहद महत्वपूर्ण है. जिस कंपनी के पास पहले से ही भारी नकद भंडार है. जिसने लगातार मुनाफे के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. वही कंपनी बाजार से अतिरिक्त 80 अरब डॉलर जुटाने जा रही है. उदय कोटक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस तरफ ध्यान दिलाया है और देसी कंपनियों को चेताया है. आईपीएल का मजा खत्म हुआ, अब भविष्य की तरफ देख लो. गूगल के आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं. सालाना मुनाफा लगभग 160 अरब डॉलर, एक तिमाही का मुनाफा 62 अरब डॉलर और कुल मार्केट वैल्यू 4.5 खरब डॉलर. इतना मार्केट कैप तो निफ्टी 50 और सेंसेक्स की कंपनियों को मिलाकर भी नहीं है।  यहां सबसे अहम सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी और मजबूत कंपनी भी भविष्य को लेकर इतनी आक्रामक तैयारी कर रही है तो हम क्या कर रहे हैं. क्या हम भी उसी स्तर की तत्परता और दूरदृष्टि दिखा रहे हैं? हम अपनी स्थिति को देखें तो एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आता है. एक तरफ राजनीतिक स्थिरता और ताकत अपने चरम पर है. मजबूत नेतृत्व,लगातार चुनावी जीत और लगभग एकदलीय प्रभुत्व जैसी स्थिति है. कुल मिलाकर मोदी सरकार बेहद स्थिर है. दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ईरान वॉर ने चुनौतियां और बढ़ा दी है. विकास दर भले ही स्थिर दिखती हो लेकिन तीन चीजें चिंता पैदा कर रही है।  कुछ लोगों को आर्थिक स्थिति गिरने की बात पचती नहीं है. वे तुरंत बताने लगते हैं कि भारत बड़ी इकॉनमी में सबसे तेज बढ़ने वाला देश है. हमारी जीडीपी 6 परसेंट के ऊपर है. लेकिन सच्चाई इतनी चमकीली नहीं है. अगर दुनिया के सभी देशों के देखें तो भारत से ज्यादा जीडीपी वृद्धि दर नाइजर और इथियोपिया की है. प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के मामले में भी हम आठवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश हमसे आगे है. हाल ही में पश्चिम एशिया जंग के कारण रुपया पिछले एक साल में लगभग 12% गिरा है और यह लगातार सातवां साल है जब इसमें गिरावट आई है. यह एक अजीब स्थिति है. महंगाई काबू में है. चालू खाता घाटा संतुलित है. विकास की गति भी ठीक है फिर भी मुद्रा कमजोर बनी हुई है।  आर्थिक विकास का असली इंजन निवेश होता है. खासतौर पर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और विदेशी निवेश (FDI). यही निवेश नई टेक्नोलॉजी लाता है,रोजगार पैदा करता है और देश को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ता है. लेकिन अपने देश में प्राइवेट सेक्टर का निवेश उतनी तेजी से बढ़ नहीं रहा है. सरकार ने बजट में विकास के काम के लिए 11 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है लेकिन सिर्फ सरकारी निवेश से काम नहीं चलेगा. इस पूरी तस्वीर को अगर गूगल के उदाहरण के साथ जोड़कर देखें तो फर्क साफ दिखाई देता है. वहां कंपनियां यह मानकर चल रही हैं कि भविष्य अनिश्चित है, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और टेक्नोलॉजी तेजी से बदलेगी. इसलिए अभी से निवेश बढ़ाना जरूरी है. वहीं भारत में कई बार यह धारणा दिखती है कि हमारा बाजार इतना बड़ा है कि निवेशक खुद ही आएंगे. लेकिन वास्तविकता यह है कि निवेशक भरोसे और रिटर्न की गारंटी मिलने पर ही आते हैं।  सीआईआई रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर ने सितंबर में 7.7 लाख करोड़ निवेश किया है. ये अच्छा संकेत है. लेकिन पिछले एक दशक के आंकड़े को देखें तो कॉरपोरेट निवेश जीडीपी के 12 प्रतिशत पर स्थिर है. इसे हर हाल में बढ़ाना होगा. हमारे पास एक विशाल बाजार, युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और वैश्विक स्तर पर बढ़ती रणनीतिक अहमियत है. लेकिन इन फायदों को वास्तविक आर्थिक ताकत में बदलने की जरूरत है। 

सेंसेक्स-निफ्टी पर बिकवाली का दबाव जारी, गिरावट के बीच बाजार ने दिखाई वापसी

मुंबई  शेयर मार्केट में गुरुवार को एक बार गिरावट आई और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स रेड जोन में खुले. लेकिन खास बात ये रही है कि तेज गिरावट लेकर खुलने के कुछ ही मिनटों में रिकवरी भी जोरदार देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ करीब 500 अंक फिसल गया, लेकिन कुछ देर में ही गिरावट की रफ्तार धीमी पड़ गई. कुछ ऐसा ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स के साथ ही देखने को मिला है।  सेंसेक्स-निफ्टी की बदली-बदली चाल  गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,346 की तुलना में गिरकर 73,935 पर खुला और फिर अचानक फिसलकर 73,807 के लेवल पर आ गया. हालांकि गिरावट की तेज रफ्तार कुछ ही देर बाद धीमी पड़ गई और ये 30 शेयरों वाला इंडेस्क 200 अंक के आसपास फिसलकर कारोबार करता हुआ नजर आया।  NSE Nifty की बात करें, तो ये पिछले बंद 23,405 के मुकाबले गिरावट लेकर 23,282 पर ओपन हुआ और फिसलते हुए कुछ ही मिनटों में 23,247 तक चला गया. इसके बाद इसमें भी सुधार आया और खबर लिखे जाने तक 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स सिर्फ 80 अंक फिसलकर 23,322 पर ट्रेड कर रहा था।  शुरुआती कारोबार में निफ्टी पर Coal India, Adani Enterprises, Grasim, ONGC, Adani Ports तेज बढ़त के साथ ओपन हुए, तो वहीं Infosys, HCL Tech, Cipla, Eicher Motors और M&M के शेयरों ने रेड जोन में कारोबार की शुरुआत की।  बुधवार को ऐसा था बाजार का हाल  बीते कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 74,649 की तुलना में गिरकर 74,507 पर खुला था और फिर देखते ही देखते क्रैश (Sensex Crash) होकर 73,492 के लेवल पर आ गया था. हालांकि, अंत में ये तेज रिकवरी के साथ 303 अंक फिसलकर 74,346 पर क्लोज हुआ था।  पहले ही मिले थे गिरावट के संकेत  भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के संकेत पहले से ही मिल रहे थे. जहां Gift Nifty 200 अंक फिसलकर कारोबार कर रहा था, तो वहीं तमाम एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा हुआ नजर आया था. जापान का निक्केई इंडेक्स (Japan Nikkei) करीब 1500 अंक, हांगकांग का हैंगसेंग (HangSeng) करीब 400 अंक और साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स (KOSPI) 170 अंक टूटकर कारोबार कर रहा था।  इन शेयरों से बाजार को सपोर्ट  शुरुआती तेज गिरावट से उबारने में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों का रोल रहा, जिन्होंने मार्केट को सपोर्ट दिया. इनमें बीएसई लार्जकैप में शामिल Eternal Share (2%), Titan Share (1.50%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप में Voltas Share (5%), Dixon Share (2%), Suzlon Share (1.90%) की तेजी में नजर आए। 

Trump Tariff Plan से बढ़ सकती है ट्रेड टेंशन, भारत-चीन पर नया टैरिफ प्रस्ताव

 नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नया टैरिफ प्लान (Donald Trump Tariff Plan) तैयार कर लिया है और नए अमेरिकी टैरिफ रेट प्रस्तावित किए गए हैं. अमेरिका अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों से किए जाने वाले आयात पर कम से कम 10 फीसदी का टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं और उनका ये प्रपोजल जबरन श्रम प्रथाओं की जांच के बाद आया है.  रिपोर्ट्स की मानें, भारत और चीन को लेकर भी नया टैरिफ तय कर लिया गया है, जो 12 फीसदी से ज्यादा हो सकता है।  India-China समेत किन देशों पर कितना टैरिफ?  ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित नए टैरिफ रेट्स को देखें, तो भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से आने वाले सामानों पर ट्रंप 12.5 फीसदी का टैरिफ लगा सकते हैं. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने साफ किया है कि कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय यूनियन, ताइवान और ब्रिटेन समेत अन्य देशों से आयात पर 10 फीसदी की टैरिफ दर लागू होगी।  इधर डील पर बात, उधर टैरिफ प्लान गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था. अब ट्रंप उन टैरिफ को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत को लेकर ये खास इसलिए भी है, क्योंकि Donald Trump Tariff Plan ऐसे समय में सामने आया है, जबकि US के मुख्य वार्ताकार द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US BTA) को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिनों की बातचीत कर रहे हैं।  धारा 301, 60 जांचें, टैरिफ तैयारी रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि ने धारा 301 के तहत की गई 60 जांचों के निष्कर्ष जारी किए हैं, जिनमें भारत को उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है, जिन्होंने जबरन लेबर बेस्ड सामानों के आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया है या प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है।  अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (USTR) के एक नोटिस में कहा गया है कि जिन अर्थव्यवस्थाओं में जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध है, या जिन्होंने पारस्परिक व्यापार समझौते के माध्यम से प्रतिबद्धता जताई है, या जिनके पास कुछ जबरन श्रम से बने उत्पादों को प्रतिबंधित करने वाली सीमित व्यवस्थाएं हैं, उन्हें अतिरिक्त 10% शुल्क का सामना करना पड़ेगा।  भारत सहित अन्य अर्थव्यवस्थाओं के लिए, अमेरिकी व्यापार मंत्रालय ने 12.5% ​​की हाई एक्स्ट्रा टैरिफ रेट प्रस्तावित किए हैं. ट्रंप प्रशासन के इस ने टैरिफ प्रपोजल में कपड़ों पर आयात का जिक्र भी किया गया है. जो कुछ अर्थव्यवस्थाओं से अमेरिका में एक निश्चित मात्रा में कपड़ा आयात को धारा 301 के तहत कम टैरिफ रेट पर करने की अनुमति देता है।