samacharsecretary.com

राजनाथ सिंह ने स्वागत में मिला चांदी का मुकुट लौटाया, बोले- इसे गरीब बेटी की पायल के लिए इस्तेमाल करें

 आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने प्रवास के दौरान 'खटीक गर्जना सम्मेलन' में हुए स्वागत के दौरान उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया. दरअसल, समाज की ओर से राजनाथ सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया. सम्मान स्वीकार करने के बाद रक्षा मंत्री ने मुकुट अपने पास रखने के बजाय उसे समाज को वापस लौटा दिया. चांदी का मुकुट वापस लौटाते समय उन्होंने कहा कि मैं सब कुछ स्वीकार कर लेता हूं, लेकिन चांदी का यह मुकुट आपके हवाले करता हूं. किसी गरीब मां-बाप की बेटी शादी के बाद विदा हो रही हो और उसके पैरों में चांदी की पायल न हो, तो इस मुकुट को तुड़वाकर उसके लिए पायल बनवाकर दे देना. राजनाथ सिंह की इस बात ने पूरे कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।  'समाज को बांटने की कोशिश में नहीं आएंगे' सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए समाज को भड़काने की कोशिश करते हैं. कभी जाति के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर समाज में दरार पैदा करने का प्रयास किया जाता है।  उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना होगा कि हम किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और समाज को बंटने नहीं देंगे. समाज में प्रेम हो, सहयोग हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना हो, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा. राजनाथ सिंह ने कहा- 'याद रखिए, टूटने से बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे।  'सनातन और हिंदू धर्म को जाति के चश्मे से देखने वाले मूल भाव नहीं समझते' रक्षा मंत्री ने कहा कि सनातन और हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को समझ नहीं पाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी व्यवस्था कर्म आधारित है. इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य हो सकता है. उन्होंने कहा कि वह साझा कर्तव्य धर्म की रक्षा करना और राष्ट्र की रक्षा करना है।  'खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया' राजनाथ सिंह ने खटीक समाज के इतिहास और योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय तक अत्याचार सहे, लेकिन अपने धर्म और आस्था को नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि खटीक समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं किया. यह उसके धैर्य, संघर्ष और अपनी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  रक्षा मंत्री ने समाज से एकजुट रहने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समाज की ताकत उसके एकजुट रहने में है और किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने की कोशिशों से बचना होगा।  सबका लक्ष्य एक—धर्म और राष्ट्र की रक्षा हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को नहीं समझ पाते हैं। हमारी व्यवस्था कर्म-आधारित है। इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य भी हो सकता है। लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है—धर्म और राष्ट्र की रक्षा करना। खटीक समाज की तारीफ 1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की गई और बंगाल में हिंदुओं को निशाना बनाया जाने लगा, तब गोपाल पाठा के नेतृत्व में खटीक समाज के कई लोगों ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने हिंदुओं की रक्षा करने का काम किया था। खटीक वो, जो खौफ को भी डरा दे समय चाहे कोई भी रहा हो, चुनौती कैसी भी रही हो और शत्रु कितना भी शक्तिशाली रहा हो, खटीक समाज ने धर्म और देश के स्वाभिमान की रक्षा से कभी पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। ऐसा भी कहा जा सकता है कि खटीक वो है, जो खौफ को भी डरा दे। खटीक वो है, जो खतरे में सबसे आगे खड़ा रहे। खटीक वो है, जो खुद कठिनाई सहकर भी दूसरों की रक्षा करे। यूपी तेजी से विकास कर रहा आज उत्तर प्रदेश भी डबल इंजन की सरकार के साथ तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। आप याद कीजिए, एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलता था। ऊबड़-खाबड़ सड़कें होती थीं। असुरक्षा का माहौल था। लोग भय में जी रहे थे और आए दिन दंगे होते थे। अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था यूपी उत्तर प्रदेश आज विकास के लिए जाना जा रहा है। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जा रहा है। जो प्रदेश कभी अपराधियों के लिए सुर्खियों में रहता था, आज औद्योगिक कॉरिडोर बना रहा है। मेट्रो रेल का नेटवर्क फैला रहा है। अब तो आगरा मेट्रो के विस्तार का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ढाई साल बाद बदले काशी विश्वनाथ मंदिर के CEO विश्वभूषण मिश्र

वनारस  श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्र का तबादला कर दिया गया। उन्हें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में उप सचिव बनाया गया है। उन्होंने फरवरी 2024 में पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल में वायु प्रदूषण से बचाव के लिए धाम परिसर में एयर फिल्टर लगाने की पहल हुई। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र का रविवार देर रात तबादला कर दिया गया है। उन्हें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में उप सचिव की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वभूषण मिश्र ने 2 फरवरी 2024 को मंदिर के सीईओ का पदभार संभाला था। उन्होंने ढाई साल से अधिक समय तक इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाली। अपने कार्यकाल के दौरान, विश्वभूषण मिश्र ने काशी विश्वनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में वायु प्रदूषण से बचाव के लिए धाम परिसर में एयर फिल्टर लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। वर्तमान में धाम परिसर में ये एयर फिल्टर सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कई अन्य कार्यों को लेकर भी उनके कार्यकाल में महत्वपूर्ण पहल की गई थी। इसी तबादला सूची में एक और महत्वपूर्ण नियुक्ति हुई है। पीसीएस अधिकारी वरखा सिंह को वाराणसी का अपर नगर आयुक्त बनाया गया है। इससे पहले, वरखा सिंह उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ में प्रधान प्रबंधक के पद पर तैनात थीं। उनके स्थानांतरण के बाद, वह अब वाराणसी नगर निगम में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगी। विश्वभूषण मिश्र का कार्यकाल और उपलब्धियां विश्वभूषण मिश्र ने 2 फरवरी 2024 को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का पदभार ग्रहण किया था। उन्होंने ढाई साल से अधिक समय तक मंदिर प्रशासन की बागडोर संभाली। उनके कार्यकाल में काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया। वायु प्रदूषण से बचाव के लिए धाम परिसर में एयर फिल्टर स्थापित करने का निर्णय भी उनके कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इन एयर फिल्टरों के लगने से धाम परिसर में वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रखने के लिए कई पहल कीं। बरखा सिंह की नई जिम्मेदारी तबादला सूची में पीसीएस अधिकारी बरखा सिंह को वाराणसी में एक अहम पद दिया गया है। उन्हें वाराणसी का अपर नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस नई जिम्मेदारी से पहले, वरखा सिंह उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ में प्रधान प्रबंधक के पद पर कार्यरत थीं। अब वह वाराणसी नगर निगम में अपनी नई भूमिका निभाएंगी। यह स्थानांतरण वाराणसी के स्थानीय प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। विश्वभूषण मिश्र के तबादले के बाद, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंदिर प्रशासन में सीईओ का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। नए अधिकारी के सामने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और बेहतर बनाने की चुनौती होगी। उन्हें मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और धाम में चल रहे विकास कार्यों को आगे बढ़ाना होगा।

दिवाली-छठ पर ट्रेनों में बढ़ेगी सीटों की संख्या, कई रूटों पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

लखनऊ दिवाली पर अभी से ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट से परेशान यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर रेलवे प्रशासन ने त्यौहार में तत्काल कोटे की सीटें बढ़ाने का फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजकर अनुमति मांगी गई है। मंजूरी मिलते ही लखनऊ से दिल्ली, मुंबई और हावड़ा रूट की ट्रेनों में तत्काल कोटे की सीटें 6,500 से बढ़ाकर 12,000 से अधिक कर दी जाएंगी। यह बढ़ोतरी पूरी तरह अस्थायी होगी। फिलहाल लखनऊ से दिल्ली जाने वाली लखनऊ मेल, एसी एक्सप्रेस, गोमती और वैशाली एक्सप्रेस, तथा मुंबई जाने वाली पुष्पक, अवध व कुशीनगर एक्सप्रेस में भारी वेटिंग चल रही है। हावड़ा रूट की ट्रेनों का भी यही हाल है। दशहरा, दिवाली और छठ पर स्पेशल ट्रेन दशहरा, दीपावली और छठ पर्वों पर यात्रियों की भीड़ के मद्देनजर दरभंगा से अहमदाबाद तक पूजा विशेष गाड़ी चलेगी। यह गाड़ी वाराणसी जंक्शन (कैंट) होकर गुजरेगी। पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ सुमित कुमार ने बताया कि गाड़ी संख्या- 09465 स्पेशल 18, 25 सितम्बर, 2, 9, 16, 23, 30 अक्तूबर, 6, 13, 20 और 27 नवम्बर को हर शुक्रवार अहमदाबाद से रात 8.25 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन रात 11.20 बजे कैंट आएगी। यहां से तीसरे दिन सुबह 10.30 बजे दरभंगा पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या-09466 विशेष गाड़ी 21, 28 सितम्बर, 5, 12, 19, 26 अक्तूबर, 2, 9, 16, 23, 30 नवम्बर तथा 2 दिसम्बर को हर सोमवार दरभंगा से भोर में 3 बजे प्रस्थान कर दिन में 1.35 बजे कैंट आएगी। यहां से अहमदाबाद प्रस्थान करेगी। त्योहारों पर इन स्पेशल ट्रेनों का भी होगा संचालन वहीं, उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज से भी दुर्गापूजा, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा पर ट्रेनों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए स्पेशल ट्रेनों का संचालन होगा। प्रयागराज जंक्शन से उधना के लिए ट्रेन नंबर 04105/04106 विशेष ट्रेन को एक अक्तूबर से 30 नवंबर चलेगी।गुरुवार और रविवार को प्रयागराज से रवाना होगी। प्रयागराज से साबरमती के लिए गाड़ी संख्या 04179/04180 (गाड़ी संख्या 04111/04112 के स्थान पर) तीन अक्तूबर से 29 नवंबर तक प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को संचालित होगी।प्रयागराज से दादर के लिए गाड़ी संख्या 04139/04140 साप्ताहिक विशेष गाड़ी दो अक्तूबर से 29 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी। प्रयागराज से वेरावल के लिए गाड़ी संख्या 04173/04174 एक अक्तूबर से 27 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार को संचालित होगी।सूबेदारगंज से वलसाड के लिए गाड़ी संख्या 04119/04120 साप्ताहिक विशेष ट्रेन तीन अक्तूबर से 29 नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को चलाई जाएगी।इसी रूट की एक अन्य गाड़ी संख्या 04177/04178 का संचालन छह अक्तूबर से 25 नवंबर के बीच प्रत्येक मंगलवार को होगा। सूबेदारगंज से उधना के बीच द्वि-साप्ताहिक विशेष गाड़ी संख्या 04155/04156 आगामी 19 अक्तूबर से 27 नवंबर तक प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को उपलब्ध रहेगी।इसके अलावा सूबेदारगंज से दादर के लिए गाड़ी संख्या 04175/04176 साप्ताहिक विशेष गाड़ी चार अक्तूबर से 24 नवंबर के बीच प्रत्येक रविवार को तथा सूबेदारगंज से इंदौर के लिए गाड़ी संख्या 04169/04170 – साप्ताहिक विशेष गाड़ी दो अक्तूबर से 28 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को यात्रियों की सेवा के लिए पटरी पर उतरेगी। यह जानकारी उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी अमित मालवीय ने दी। हरिहर, केवी-जनता एक्स.बदले रास्ते से जाएगी वहीं, उत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन (चारबाग) स्टेशन पर कॉनकोर्स निर्माण के लिए लिये गए ब्लॉक की अवधि 15 सितम्बर तक बढ़ा दी गई है। इससे आधा दर्जन से ज्यादा ट्रेनें बदले मार्गों से चलेंगी, जबकि एक गाड़ी को शॉर्ट टर्मिनेट और शॉर्ट ओरिजिनेट किया जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (सीपीआरओ) सुमित कुमार ने बताया कि 14 और 15 सितम्बर को बनारस-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस उतरेटिया में यात्रा समाप्त करेगी और यहीं से चलाई जाएगी। वहीं, 14 सितम्बर को अप और डाउन साइड की बरौनी-अम्बाला हरिहर एक्सप्रेस, 14 और 15 सितम्बर को बनारस-नई दिल्ली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस (केवी) और इन्हीं तिथियों में बनारस-देहरादून जनता एक्सप्रेस बदले मार्ग उतरेटिया-ट्रांसपोर्ट नगर-आलमनगर के रास्ते चलाई जाएंगी। 14 सितम्बर को गुवाहाटी-ओखा एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग बाराबंकी-मल्हौर-ऐशबाग-कानपुर सेंट्रल के रास्ते चलाई जायेगी।

अब ट्रांसपोर्ट नगर में नहीं होगा परमानेंट DL का टेस्ट, मौंदा सेंटर में लगेगा ऑटोमेटेड ट्रैक

 लखनऊ  परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने वालों का सोमवार से वाहन चलाने का टेस्ट ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर मौंदा में होगा। अब टेस्ट की व्यवस्था बदल जाएगी। आवेदकों का ट्रांसपोर्ट नगर व देवा रोड एआरटीओ कार्यालय में ट्रैक पर टेस्ट नहीं होगा। ज्ञात हो कि ट्रांसपोर्ट नगर कार्यालय में 2014 में 20 लाख रुपये की लागत से तैयार कराए गए टेस्ट ट्रैक पर अब रिनीवल यानि नवीनीकरण के लिए आने वाले आवेदकों का टेस्ट होगा। परिवहन विभाग ने राजधानी में ड्राइविंग टेस्ट की मैनुअल व्यवस्था खत्म कर दिया है। अब कंप्यूटराइज्ड और सेंसर आधारित सिस्टम से नए केंद्र में आटोमेटेड टेस्टिंग होगी। मौंदा केंद्र के ट्रैक पर लगे सेंसर वाहन की गतिविधि और चालक की गलतियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। साथ ही टेस्ट के परिणाम में मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश कम होगी। आज से ड्राइविंग टेस्ट शुरू राजधानी के पहले ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर का उद्घाटन 30 जून को परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह ने किया था। अब 14 सितंबर से वहां स्थायी डीएल के लिए ड्राइविंग टेस्ट शुरू किया जा रहा है। शुरुआती योजना में प्रतिदिन 150 आवेदकों के टेस्ट की क्षमता थी, इसे बढ़ाकर 300 टेस्ट प्रतिदिन किया गया था। एआरटीओ प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया, पहले आवेदक एआरटीओ कार्यालय पहुंचकर दस्तावेज और बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद ट्रैक पर वाहन चलाकर टेस्ट देते थे। अब उन्हें नए आटोमेटेड ट्रैक पर टेस्ट देना होगा। बायोमीट्रिक व अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया एआरटीओ कार्यालय में ही पूरी होगी। उल्लेखनीय है कि मौंदा स्थित नया केंद्र ट्रांसपोर्ट नगर से नादरगंज इंडस्ट्रियल एरिया होकर सेंटर 12 व कानपुर रोड किसान पथ से 20 किलोमीटर की दूरी पर है।  

मछुआरा समाज के वोटों पर सियासत तेज, संजय निषाद ने किया आगाह- दलाली करने वालों से बचें

मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करने वालों से रहें सावधान: संजय निषाद   बोले, यूपी में पहली बार राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ मछुआरा समाज, मौसमी नेताओं से सतर्क रहने की जरूरत   लखनऊ कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मी के बीच मछुआरा समाज को मौसमी नेताओं से सावधान रहने की नसीहत दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ है। ऐसे समय में समाज के वोटों की दलाली करने वालों को पहचानने की जरूरत है।   डॉ. संजय निषाद ने बिना किसी का नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मौसमी नेता अब तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है, यहां-वहां घूमकर दूसरों की दरी बिछानी है या मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम और वहां समाज के राजनीतिक उभार को नुकसान पहुंचाने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को गुमराह करने निकले हैं।   उन्होंने कहा कि जो खुद एक विधानसभा चुनाव जीतने की हैसियत नहीं रखता, वह जेब में नोटों की गड्डी लेकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर यूपी के निषाद समाज को राजनीति सिखाने चला है। मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। उत्तर प्रदेश के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह समझ लेना चाहिए कि राजनीति और संघर्ष उनके खून में है।   डॉ. निषाद ने कहा कि मछुआरा समाज ने मुगलों और अंग्रेजों से संघर्ष किया और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संविधान में समाज को अधिकार और आरक्षण मिला, लेकिन आपसी बिखराव के कारण उसका हक लुटता रहा। आज भी केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप के नाम पर भेद पैदा कर समाज को एकजुट होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।   उन्होंने कहा कि दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज के बीच बांटने और उसके वोटों का सौदा करने वालों को समाज पहचान ले। मछुआरा गरीब जरूर है, लेकिन अपने स्वाभिमान और अधिकारों का सौदा करने वाला नहीं है। उन्होंने पोस्ट के अंत में ‘जय निषादराज’ लिखा।

योगी सरकार के ₹9.99 लाख करोड़ बजट में सितंबर तक खर्च हुए सिर्फ ₹2.27 लाख करोड़

लखनऊ  बजट पास हुए पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन विभागों के रकम खर्च करने की रफ्तार बेहद सुस्त है। यह हाल तब है जब अगले साल की शुरुआत में यूपी विधान सभा चुनाव प्रस्तावित है। सरकार अधिसूचना लगने के पहले ही बजट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करके परियोजनाओं को जमीन पर उतारना चाहती है। अगले साल जनवरी में अधिसूचना संभावित है। योगी सरकार ने इस साल फरवरी में 9.12 लाख करोड़ रुपये का मूल बजट पास किया था। इसके बाद अनुपूरक बजट लाई थी। कोषवाणी के आंकड़ों के मुताबिक सरकार के प्रस्तावित बजट 9.99 लाख करोड़ रुपये से सापेक्ष अगस्त तक 2.08 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक खर्च किया गया। सितंबर तक के आंकड़े देखें तो यह खर्च 2.27 लाख करोड़ रुपये है। इस लिहाज से सितंबर तक खर्च की गई रकम बजट के सापेक्ष 22.78% है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट और अनुपूरक बजट पास होने के बाद मंत्रियों को नवंबर तक ज्यादा से ज्यादा वित्तीय स्वीकृतियां जारी करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा था कि इसी वित्तीय वर्ष चुनाव होने की वजह से रकम का इस्तेमाल करने के लिए कम वक्त मिलेगा, लिहाजा इसमें तेजी रखी जाए। शुरुआती दिनों में विभागों ने तेजी दिखाई, लेकिन बाद में सुस्त हो गई। कोषवाणी के आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल बजट के सापेक्ष विभागों को 4.46 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं। बजट के सापेक्ष वित्तीय स्वीकृति का आंकड़ा 44.64% है। वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष विभागों को 3.40 लाख करोड़ रुपये की रकम आवंटित की गई है। यहां के आंकड़े राहत भरे बजट के सापेक्ष रकम खर्च करने के आंकड़ों में भले ही सुस्ती दिखाई दे रही है, लेकिन आवंटित रकम की सापेक्ष खर्च के आंकड़े फिर भी राहत भरे हैं। मसलन आवास विभाग ने आवंटित बजट का 95% खर्च किया है। लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन ने आवंटित बजट का 65.40% खर्च किया है। हथकरघा उद्योग ने आवंटित बजट का 99.25% बजट इस्तेमाल किया है। कई विभागों का वास्तविक खर्च 10% से भी कम तमाम विभाग ऐसे हैं, जिनका वास्तविक बजट खर्च 10% से भी कम है। स्टांप एवं पंजीकरण 7.61%, समाज कल्याण के अधीन आने वाला जनजाति कल्याण विभाग 4.48%, विकलांग एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण 9.38%, वित्त विभाग के अधीन सामूहिक बीमा 6.59%, लोक निर्माण के अधीन भवन निर्माण मद में 9.18%, राष्ट्रीय एकीकरण विभाग 5.62%, आपदा राहत में 3.03%, पर्यटन में 2.82%, नियोजन में 5.34% है। नागरिक उड्डयन 2.14%, मत्स्य 5.62%, पंचायतीराज 9.76% और लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन में 8.54% है। विभागों के अब तक बजट खर्च की स्थिति (प्रतिशत में) विभाग    खर्च आबकारी    27.73 आवास    27.86 खनन    28.27 ऊर्जा    32.74 कृषि    24.87 ग्राम्य विकास    13.99 सहकारिता    36.60 खाद्य तथा रसद    18.07 खेल    17.67 गृह (पुलिस)    33.12 चिकित्सा (सार्वजनिक स्वास्थ्य)    16.98 नगर विकास    11.94 परिवहन    20.40 महिला एवं बाल कल्याण    16.24 लोक निर्माण (सड़कें)    15.97 बेसिक शिक्षा     38.78 माध्यमिक शिक्षा    32.14

‘गरीब राजभर समाज में पैदा हुआ, इसलिए निशाना बनाते हैं’, ओम प्रकाश राजभर ने साधा विपक्ष पर निशाना

गरीब राजभर समाज में पैदा हुआ, इसलिए मेरी पैदाइश पर टिप्पणी: ओम प्रकाश राजभर   ओम प्रकाश सिंह पर पलटवार, बोले, मैं भी अनर्गल टिप्पणी कर सकता हूं लेकिन माता-पिता का अपमान करना हमारे संस्कार नहीं   सपा पर भी साधा निशाना, कहा, विधानसभा टिकट के लिए अपमान का घूंट पीकर पड़े हैं   लखनऊ  कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पैदाइश को लेकर की गई टिप्पणी पर सपा नेता ओम प्रकाश सिंह पर तीखा पलटवार किया है। सोशल मीडिया पर उन्हें ‘मित्र ओम प्रकाश सिंह जी’ संबोधित करते हुए राजभर ने कहा कि पिछले दो दिनों से उनका बयान सामने आ रहा है। बयान सुनकर उन्हें हैरानी नहीं हुई, बल्कि ओम प्रकाश सिंह पर तरस आया। उन्होंने कहा कि उनकी पैदाइश पर टिप्पणी इसलिए की गई, क्योंकि वह किसी जमींदार या ऊंची जाति में नहीं, बल्कि बेहद गरीब और असहाय राजभर समाज में पैदा हुए हैं।   राजभर ने कहा कि उन्हें राजभर होने का कभी दुख नहीं रहा। बल्कि इस बात की खुशी है कि जिस समाज में पैदा हुए, उसके लिए कुछ करने की नीयत और हौसला उनके अंदर है। उन्होंने कहा कि चाहें तो वह भी ओम प्रकाश सिंह पर अनर्गल टिप्पणी कर सकते हैं, लेकिन छोटी जाति में पैदा होने के बावजूद राजभर समाज ने किसी व्यक्ति के माता-पिता पर गलत बयानबाजी करना नहीं सिखाया। उन्होंने ओम प्रकाश सिंह के माता-पिता को प्रणाम करते हुए कहा कि कौन कब, कहां, किस कुल और किस जाति में पैदा होगा, यह कोई व्यक्ति तय नहीं करता। इसे परमात्मा तय करते हैं।   इसके बाद राजभर ने सपा और ओम प्रकाश सिंह पर सियासी हमला तेज करते हुए कहा कि शायद वे लोग ईश्वर को नहीं मानते। अगर मानते होते तो भगवान राम, रघुकुल, सूर्यवंश और सनातन का अपमान करने वाली समाजवादी पार्टी में एक विधानसभा टिकट के लिए अपमान का घूंट पीकर नहीं पड़े रहते।   राजभर ने कहा कि वह कर्म करने में विश्वास रखते हैं और कर्म के फल की चिंता नहीं करते। उन्होंने राजभर समाज के साथ पिछड़ों, दलितों और शोषितों की आवाज बुलंद करने का प्रण लिया है और उसी को पूरा करने में लगे हैं। उन्होंने ओम प्रकाश सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें सपा का टिकट चाहिए तो बेशक लें। जनता सब देख रही है। वह उन्हें भी देख रही है और उनकी पार्टी को भी। समय आने पर नतीजा भी जनता ही देगी।   कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि ओम प्रकाश सिंह अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगेंगे और वह उनसे माफी की अपेक्षा भी नहीं रखते। लेकिन एक बार अपने माता-पिता को याद करके जरूर सोचें कि उनके जैसे छोटी जाति में पैदा हुए व्यक्ति की पैदाइश को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित है या नहीं।   राजभर ने आखिर में लिखा कि बाकी ईश्वर उनका भला करे। इसके साथ उन्होंने ‘जय श्रीराम’ लिखकर अपनी पोस्ट समाप्त की।

सहारनपुर, लखीमपुर और अंबेडकर नगर के CDO बदले, 48 अफसरों को नई तैनाती

लखनऊ उत्तर प्रदेश शासन ने रविवार को देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 14 आईएएस और 34 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। इसमें तीन जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) समेत कई मंडलों के अपर आयुक्तों को नई तैनाती दी गई है। सहारनपुर के मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन को मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उत्तर प्रदेश स्टार्ट-अप मिशन बनाया गया है। उनकी जगह राज्य कर विभाग में तैनात अपर आयुक्त डॉ. सुनील कुमार वर्मा को सीडीओ सहारनपुर की जिम्मेदारी दी गई है। लखीमपुर खीरी के सीडीओ अभिषेक कुमार को विशेष सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग बनाया गया है, जबकि अयोध्या में अपर जिलाधिकारी (नगर) के पद पर तैनात योगानन्द पाण्डेय को लखीमपुर खीरी का नया सीडीओ बनाया गया है। इसी तरह अम्बेडकर नगर के सीडीओ आनन्द कुमार शुक्ला को विशेष सचिव रेशम विभाग एवं निदेशक रेशम बनाया गया है और कुशीनगर के अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) वैभव मिश्रा को अम्बेडकर नगर का सीडीओ बनाया गया है। राजस्व परिषद प्रयागराज में बड़ा फेरबदल राजस्व परिषद प्रयागराज में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। सदस्य (न्यायिक) साहब सिंह को सचिवालय प्रशासन विभाग में सचिव बनाया गया है। उनकी जगह पर डॉ. विश्राम, अपर आयुक्त विन्ध्याचल मंडल और देवेन्द्र कुमार सिंह कुशवाहा, विशेष सचिव रेशम विभाग को सदस्य (न्यायिक), राजस्व परिषद प्रयागराज बनाया गया है। आईटी विभाग के विशेष सचिव राहुल सिंह को विशेष सचिव, लोक निर्माण विभाग, संयुक्त निदेशक युवा कल्याण अशोक कुमार कनौजिया को विशेष सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग और अपर आयुक्त अलीगढ़ मंडल अरुण कुमार को विशेष सचिव, ग्राम्य विकास विभाग बनाया गया है। अपर नगर आयुक्त सहारनपुर प्रदीप कुमार यादव को अपर आयुक्त अलीगढ़ मंडल की जिम्मेदारी दी गई है। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं सचिव चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा* को सचिव चिकित्सा शिक्षा के पद से अवमुक्त किया गया है। दूसरी ओर यूपी में 34 पीसीएस अफसरों के तबादले, कई एसडीएम, नगर आयुक्त और एसडीएम बदल दिए गए हैं। अपर नगर आयुक्त गाजियाबाद जंग बहादुर यादव को संयुक्त आयुक्त (प्रशासन), आयुक्त ग्राम्य विकास के कार्यालय में भेजा गया है। वहीं प्रधान प्रबंधक, सहकारी चीनी मिल संघ सुश्री बरखा सिंह को अपर नगर आयुक्त, वाराणसी नगर निगम बनाया गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ हटे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा को उपसचिव, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग बनाया गया है। गौतमबुद्धनगर और प्रयागराज की अदला-बदली अपर जिलाधिकारी (नजूल) प्रयागराज और उपसंचालक चकबंदी प्रयागराज संजय कुमार पाण्डेय को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), गौतमबुद्धनगर और वहां तैनात एडीएम (प्रशासन) मंगलेश दुबे को उपसंचालक चकबंदी, प्रयागराज भेजा गया है। इसके अलावा एडीएम (वि/रा) बहराइच अमित कुमार-2 और एडीएम (वि/रा) बागपत विनीत उपाध्याय को प्रधान प्रबंधक, उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ। एडीएम वि/रा) देवरिया राम शंकर को उपायुक्त (प्रशासन), आयुक्त खाद्य एवं रसद। एडीएम वि/रा) कासगंज दिग्विजय प्रताप सिंह को उपनिदेशक, राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद। एडीएम (प्रशासन) एटा संगम लाल को एडीएम (नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति), मिर्जापुर के पद पर भेजा गया है। एडीएम न्यायिक) जालौन योगेंद्र सिंह को उपनिदेशक (प्रशासन), रेशम निदेशालय। नगर मजिस्ट्रेट मुजफ्फरनगर पंकज प्रकाश राठौड़ को (एडीएम वि/रा), देवरिया और उपजिलाधिकारी बुलंदशहर दीपक कुमार पाल को नगर मजिस्ट्रेट, मुजफ्फरनगर।उपजिलाधिकारी हापुड़ श्रीमती रेणु को अपर नगर आयुक्त, गाजियाबाद। उपजिलाधिकारी औरैया अजय आनंद वर्मा को उपजिलाधिकारी, आजमगढ़ और आजमगढ़ की एसडीएम श्रीमती दिव्या सिकरवार को एसडीएम औरैया भेजा गया है। एसडीएम सिद्धार्थनगर श्रीमती रेणु मिश्रा को एसडीएम फर्रुखाबाद, एसडीएम गोंडा प्रदीप कुमार सिंह को एसडीएम गौतमबुद्धनगर, एसडीएम कानपुर देहात प्रद्युम्न कुमार को एसडीएम बस्ती। उपसचिव अधीनस्थ सेवा चयन आयोग श्रीमती वंदना त्रिवेदी को उपनिदेशक, डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासन अकादमी में तैनाती दी गई है। एडीएम (प्रशासन) बदायूं अरुण कुमार को एडीएम (वि/रा) बहराइच और एसडीएम सहारनपुर मानवेंद्र सिंह (2019) को एडीएम (प्रशासन) बदायूं। उपनिदेशक मंडी परिषद राजीव कुमार राय को एडीएम (वि/रा) बागपत, एडीएम (नागरिक आपूर्ति) आगरा अजय नारायण सिंह को एडीएम (प्रशासन) एटा, एसडीएम आजमगढ़ प्रशांत कुमार को एडीएम (नागरिक आपूर्ति) आगरा और एसडीएम आजमगढ़ श्रीमती प्रियंका सिंह को अपर नगर आयुक्त, मथुरा भेजा गया है। सचिव कानपुर विकास प्राधिकरण अभय कुमार पाण्डेय को एडीएम (वि/रा) कासगंज, एसडीएम कौशांबी सुखलाल प्रसाद वर्मा कोएडीएम (नजूल) प्रयागराज, एसडीएम बस्ती शत्रुहन पाठक को एडीएम (न्यायिक) जालौन। मुख्य राजस्व अधिकारी मिर्जापुर देवेंद्र प्रताप सिंह-2 को सचिव, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण और एडीएम (नमामि गंगे) मिर्जापुर श्रीमती विजेता को मुख्य राजस्व अधिकारी, मिर्जापुर में तैनात किया गया है। एसडीएम संभल सुश्री शुभी गुप्ता को सहायक निदेशक, लोहिया अकादमी, एसडीएम मैनपुरी अशोक कुमार को एसडीएम हापुड़ और एसडीएम झांसी शुभेन्दु शेखर सिंह को विशेष कार्याधिकारी, यूपीडा बनाया गया है।

बिजली आपूर्ति में यूपी का शानदार प्रदर्शन, 135 में 74 दिन देश में रहा नंबर-1

बिजली आपूर्ति में यूपी का दमदार प्रदर्शन, 135 में 74 दिन देश में रहा अव्वल कोयला संकट के बावजूद योगी सरकार ने संभाले रखी बिजली व्यवस्था, जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे आपूर्ति 24 मई से 22 दिनों तक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त बिजली आपूर्ति भारी बारिश से कोयला आपूर्ति प्रभावित, फिर भी प्रदेश में बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार सक्रिय सीआईएल समेत संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने में जुटी योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किए जाने का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। एक मई से अब तक 135 दिनों में प्रदेश ने 74 दिन देश में सर्वाधिक विद्युत मांग की आपूर्ति की, जबकि 37 दिन दूसरे स्थान पर रहा। यानी 135 दिनों में 111 दिन उत्तर प्रदेश ने देश के शीर्ष दो राज्यों में रहते हुए बिजली की मांग पूरी की। प्रदेश में 24 मई से अब तक 22 दिनों में सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। हालांकि देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और जलभराव के चलते कोयला खदानों में उत्पादन एवं आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों के तापीय विद्युत संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। यूपीपीसीएल के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भी कोयले की कमी और गीले कोयले के कारण तापीय उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। विभिन्न विद्युत इकाइयों में तकनीकी एवं अन्य कारणों से ट्रिपिंग के चलते उपलब्धता में कमी आई है। इसके बावजूद योगी सरकार ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखे हैं। दिन के समय सामान्य आपूर्ति दिन के समय प्रदेश में विद्युत आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। हालांकि पीक समय में विद्युत उपलब्धता कम होने और पावर एक्सचेंज में महज 2-3 प्रतिशत तक सीमित क्लीयरेंस के कारण ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में रात्रिकालीन सीमित रोस्टरिंग की जा रही है। वहीं जिला मुख्यालयों में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड समेत संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार का फोकस उपभोक्ताओं को अधिकतम राहत देने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल कर आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने पर है।

लोकायुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे CM योगी

लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में  शामिल होंगे मुख्यमंत्री योगी सोमवार को गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में होगा आयोजन सीएम योगी करेंगे स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर लगेगी प्रदर्शनी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार (14 सितंबर) को उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन करेंगे। समारोह में लोक आयुक्त संगठन की 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी के माध्यम से संगठन की स्थापना से अब तक की कार्यप्रणाली, प्रमुख उपलब्धियों और पांच दशक की यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा।