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यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प

योगी सरकार 142 बीपीएचयू के जरिए उपलब्ध कराएगी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी  इंचार्ज, रजिस्ट्रेशन रूम से लेकर वेटिंग रूम और सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब बनाई जाएंगी पीएचसी और सीएचसी के अंदर कराया जाएगा निर्माण लखनऊ  प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ब्लॉक स्तर तक मजबूत और आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार राज्य के विभिन्न ब्लॉकों में 142 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) स्थापित करने जा रही है। इन यूनिटों के जरिये ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जांच, पंजीकरण और प्राथमिक उपचार की बेहतर सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपये की लागत से हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें इंचार्ज कक्ष, रजिस्ट्रेशन रूम, वेटिंग रूम, सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब समेत कई आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इनका निर्माण मौजूदा पीएचसी और सीएचसी के भीतर ही कराया जाएगा, ताकि पहले से उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सक्षम बनाया जा सके। ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि योगी सरकार की योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन इकाइयों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी और मरीजों को जिला अस्पतालों पर निर्भरता कम रहेगी। सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को अब छोटी-बड़ी जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। ब्लॉक स्तर पर सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में भी सुधार आएगा। गांव के करीब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि बीपीएचयू मॉडल के लागू होने के बाद ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा। इससे मरीजों को पंजीकरण से जांच तक की कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगी। जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में होगा काम जनपद स्तर पर जिला पंचायतों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर निर्माण के लिए समस्त कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में किए जाएंगे। ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की इन घटकों की योजना बनाने एवं निगरानी में शामिल किया जाएगा।

महिला आरक्षण लागू होने पर यूपी में सीटों का विस्तार, 120 सांसद और 603 विधायक चुनने की तैयारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में 2029 के आम चुनाव से मतदाता 80 के बदले 120 लोकसभा सीटों और 2032 के विधानसभा चुनाव से 403 की जगह पर 603 असेंबली सीटों के लिए सांसद और विधायक चुनते नजर आ सकते हैं, जिनमें 40 लोकसभा और 200 विधानसभा सीट पर हर एक कैंडिडेट महिला हो सकती है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन कानून में जरूरी बदलाव करके 2029 के चुनाव से विधायिका में महिला आरक्षण को लागू करने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कई राजनीतिक दलों के नेताओं से इसको लेकर चर्चा की और आगे सर्वदलीय बैठक बुलाकर सरकार के प्रस्ताव पर पक्ष-विपक्ष के दलों के सुझाव के साथ इस पर काम आगे बढ़ सकता है। सरकार मौजूदा सीटों को 50 फीसदी बढ़ाकर बढ़ी सीटों पर 33 फीसदी कोटा महिला का तय करने की योजना बना रही है। संविधान में 106वें संशोधन के जरिए महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) बनाया गया था। अमित शाह की बैठक में शामिल रहे नेताओं के हवाले से यह बात बाहर आई है कि केंद्र सरकार का प्रस्ताव है कि इस साल शुरू हुई जनगणना के नतीजों और उसके आधार पर परिसीमन का इंतजार किए बगैर महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर काम कर लिया जाए। इससे उन राज्यों की तकलीफ भी कम होगी, जिन्हें प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण करने के बाद सीटों के नए बंटवारे में नुकसान का डर था। सरकार की तरफ से यह भी प्रस्ताव है कि राय बने तो अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सीटों को उसी अनुपात में महिला आरक्षण के दायरे में लाया जा सकता है। योजना है कि लोकसभा की 543 सीटों को 816 कर दिया जाए और उसमें 273 महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाए। उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण के लिए 120 लोकसभा और 603 विधानसभा सीट! केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर आम सहमति बनी तो 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले सभी संसदीय और विधानसभा चुनावों की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। यूपी में लोकसभा की 80 सीटों को बढ़ाकर 120 किया जा सकता है और उसमें 40 सीट महिलाओं के लिए रिजर्व किया जा सकता है। इसी तरह विधानसभा की सीट संख्या 403 को बढ़ाकर 603 किया जा सकता है और उसमें 200 से 201 असेंबली सीटों को महिला आरक्षित किया जा सकता है। सरकार अभी सहयोगी और विपक्षी दलों से रायशुमारी के चरण में है। सरकार की योजना यह है कि अगर सब राजी हो जाएं तो बजट सत्र में ही या कुछ समय बाद विशेष सत्र बुलाकर कानून में जरूरी संशोधन करके महिला आरक्षण को लागू करने की तरफ कदम बढ़ाया जाए।  

यूपी सरकार का बड़ा फैसला: क्रिकेटर रिंकू सिंह को मिली RSO की जिम्मेदारी

लखनऊ भारत को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा सम्मान दिया है। उनकी शानदार उपलब्धि को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का  किया है। टी20 वर्ल्ड कप जीत में निभाई अहम भूमिका सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर इतिहास रच दिया। भारत टी20 वर्ल्ड कप का सफलतापूर्वक बचाव करने वाली पहली टीम बनी और तीसरी बार यह खिताब अपने नाम किया। यह टूर्नामेंट रिंकू सिंह के लिए भावनात्मक रूप से काफी कठिन रहा, क्योंकि टूर्नामेंट के दौरान ही उनके पिता का कैंसर से निधन हो गया था। इसके बावजूद रिंकू टीम से दोबारा जुड़े और बाकी मैच खेले। रिंकू सिंह को मिलेगा सरकारी पद रिंकू सिंह के योगदान को सम्मान देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें रीजनल स्पोर्ट्स ऑफिसर (RSO) नियुक्त करने का फैसला किया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने एक योजना शुरू की है, जिसके तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी और नकद पुरस्कार दिया जाएगा। अन्य खिलाड़ियों को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी भारतीय पुरुष हॉकी टीम के खिलाड़ी राजकुमार पाल को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) बनाया जाएगा। वह पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। पैरालंपिक हाई जंप गोल्ड मेडलिस्ट प्रवीण कुमार को भी DSP बनाया जाएगा। पैरालंपिक जेवलिन थ्रो सिल्वर मेडलिस्ट अजीत सिंह को जिला पंचायत राज अधिकारी बनाया जाएगा। पैरालंपिक 200 मीटर ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सिमरन को भी इसी पद पर नियुक्ति मिलेगी। इन सभी खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोक भवन में आयोजित सम्मान समारोह में नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। लक्ष्मण अवॉर्ड और रानी लक्ष्मीबाई अवॉर्ड भी दिए जाएंगे सरकार ने 2024-25 के लिए 9 खिलाड़ियों को लक्ष्मण अवॉर्ड और रानी लक्ष्मीबाई अवॉर्ड देने का भी फैसला किया है। हर विजेता को 3.11 लाख रुपये नकद और कांस्य प्रतिमा दी जाएगी। लक्ष्मण अवॉर्ड विजेता (जनरल कैटेगरी): उत्तम सिंह, विनय, अभिजीत कुमार, विक्रांत बालियान, सागर दांगी रानी लक्ष्मीबाई अवॉर्ड विजेता (जनरल कैटेगरी): भानु पाठक, दीपक कुमार, तान्या चौधरी, तनुश्री पांडे, ओम यादव, राजकुमार पाल, यश कुमार, मुस्कान यादव, अभय सिंह; रानी लक्ष्मीबाई अवॉर्ड विजेता (पैरा कैटेगरी): श्रवण कुमार, यश तोमर, ईशान खान, प्रगति केसरीवानी, वंतिका अग्रवाल; उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।  

कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी आमलोगों की समस्याएं, अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही के दिए निर्देश

  बिलासपुर जिला कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में आज कलेक्टर संजय अग्रवाल ने भी लोगों की समस्याएं सुनी। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोगों ने कलेक्टर से मिलकर निजी एवं सामुदायिक शिकायत संबंधी आवेदन दिया। कलेक्टर ने अधिकांश मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे एवं जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने भी लोगों की समस्याएं सुनी।         जनदर्शन में ग्राम कछार के सुरेश कुमार बंजारे ने आवेदन देकर बताया कि गांव के ही राधेश्याम द्वारा घर के सामने गली में दीवार खड़ी कर रास्ता संकीर्ण कर दिया गया है, जिससे आवागमन के लिए काफी परेशानी हो रही है। कलेक्टर ने एसडीओ को प्रकरण भेजते हुए परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बिलासपुर की उत्तरा यादव के द्वारा विधवा पेंशन का लाभ दिलाने की मांग कलेक्टर के समक्ष रखी गई। इस संबंध में संयुक्त संचालक समाज कल्याण विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। ग्राम जरोंधा निवासी परमानंद कौशिक ने कलेक्टर से मुलाकात कर आवेदन दिया कि उनकी निजी भूमि पर गांव के ही गोपाल मेहर द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर दीवार खड़ी कर दी गई है और रास्ते में कीचड़युक्त पानी बहाकर आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहा है। इससे खेती-किसानी के कार्यों में भारी परेशानी हो रही है।  उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी शिकायत की जा चुकी है और न्यायालय से कब्जा हटाने का आदेश भी मिला था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से पुनः हस्तक्षेप कर अवैध कब्जा हटाने की मांग की है। देवरीखुर्द निवासी पुरुषोत्तम दास ने प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत स्वामित्व कार्ड जारी करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 50 वर्षों से निवास कर रहे हैं और उनकी पत्नी के नाम पर पट्टा भी है, लेकिन अब तक उन्हें स्वामित्व कार्ड नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र कार्ड जारी करने की अपील की है ताकि उन्हें अपने अधिकारों का लाभ मिल सके। कलेक्टर ने एसडीओ मस्तुरी को मामले पर उचित कार्यवाही के निर्देश दिए।           सकरी तहसील अंतर्गत ग्राम चिचिरदा निवासी धनीराम कौशि ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उन्होंने अपनी भूमि के सीमांकन के लिए आवेदन किया था। तहसीलदार द्वारा राजस्व निरीक्षक को सीमांकन करने का आदेश भी जारी किया गया, लेकिन आज तक सीमांकन नहीं किया गया है। इससे उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने एसडीओ तखतपुर को प्रकरण की जांच कर निराकरण करने के निर्देश दिए है। बिल्हा ब्लॉक के ग्राम नगपुरा निवासी रूचि नेताम ने बताया कि उन्होंने जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वर्ष 2024-25 में आवेदन किया था। काफी समय बीत जाने के बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ। दस्तावेज की कमी के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को मामले को सौंपा।   

मजदूरी से उठकर अनीता ने बदली अपनी कहानी, मेहनत से बनाई पहचान

स्वयं सहायता समूह से बदली तकदीर: अनीता संग 4400 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर मजदूरी से उठकर अनीता ने बदली अपनी कहानी, मेहनत से बनाई पहचान सरकारी सहयोग से सिलाई और किराने की दुकान से अनीता ने बनाया आर्थिक आधार लखनऊ अमरोहा जिले के विकास खंड गजरौला के ग्राम पंचायत सलेमपुर गोसाईं की रहने वाली अनीता देवी आज उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकीं हैं, जो कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के कारण अपनी जरूरतों को भी ठीक से पूरा नहीं कर पातीं थीं। वे अपने पति के साथ मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करती थीं। जीवन में स्थिर आय का कोई साधन नहीं था और हर दिन संघर्ष से भरा होता था। लेकिन आज वही अनीता “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं, जो अपने दम पर सालाना लाखों की आय अर्जित कर रहीं हैं। उनके समूह से जुड़ी 4400 महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन गई हैं। योगी सरकार की मदद से अनीता ने लिखी अपनी कहानी सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने अनीता देवी के जीवन में जो बदलाव किया, जिसने पूरी दिशा ही बदल दी। आज वह अपने समूह की अध्यक्ष हैं। उनके समूह से 4400 महिलाएं जुड़ी हुई हैं जो कि आत्मनिर्भर बन चुकीं हैं। शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अनीता को न केवल आर्थिक सहायता मिली, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का अवसर भी मिला। योगी सरकार के सहयोग से वर्ष 2021 में सामुदायिक निवेश निधि से उन्हें 1,10,000 रुपये मिले जिससे उनके व्यवसाय को मजबूत आधार दिया। इसके बाद उन्हें वर्ष 2023 में समूह के माध्यम से 15 हजार रिवॉल्विंग फंड के रूप में प्राप्त हुए। जबकि वर्ष 2024 में 3,00,000 सीसीएल और 2025 में 4,00,000 सीसीएल प्राप्त हुआ। आज समूह के सहयोग से अनीता देवी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है।  कोरोना काल में किया खूब काम, उसी से मिली सफलता  आज सलेमपुर में अनीता ने 27 समूह बनाए हैं। उन्होंने अपने घर से सिलाई के कार्य की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने इसे एक व्यवसाय का रूप दिया और कपड़े तैयार कर बेचने लगीं। कोरोना काल में उनके समूह ने मिलकर मास्क और उससे जुड़े बहुत से उत्पाद बनाए थे। उनकी यही मेहनत रंग लाई और आज उनकी आमदनी में काफी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। 2023 दिसंबर में उन्होंने 'शक्ति ट्रेडर्स' के नाम से किराना की दुकान खोली जिसे उनके पति और बेटा मिलकर चलाते हैं। इससे उनकी आय के स्रोत बढ़ते गए। वर्तमान में उनकी मासिक आय 40,000 से 45000 रुपये तक हो जाती है। यह सफलता केवल उनके परिश्रम का परिणाम नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि योगी सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर कैसे महिलाओं को सशक्त बना रही हैं।  आत्मनिर्भरता से सम्मान तक: अनीता बनीं समूह और गांव के लिए प्रेरणा आज अनीता न केवल अपने परिवार का सहारा बनीं हैं, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं। इसके अलावा समय मिलने पर वह अपने घर से कॉस्मेटिक से जुड़े उत्पाद भी बेचने का काम करतीं हैं। उन्होंने मेहनत से यह दिखाया है कि आत्मनिर्भरता से ही सच्चा सम्मान मिलता है। अब वह अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती रहती हैं, ताकि वे भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। अनीता इसके लिए योगी सरकार का धन्यवाद देती हैं। वे कहती हैं कि “समूह से जुड़ने के बाद हमारे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है। अब हमारे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से बहुत बेहतर हुई है। अनीता की यह कहानी केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जो सरकारी योजनाओं, सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति से संभव हुई है।

यूपी में 125 ग्रामीण स्टेडियमों का निर्माण कराया जा चुका है, 39 स्टेडियम निर्माणाधीन – गिरीश चंद्र यादव

युवा कल्याण एवं खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव की प्रेसवार्ता ग्रामीण स्टेडियम, युवा सहभागिता और खेल प्रोत्साहन से संवर रहा युवाओं का भविष्य – गिरीश चंद्र यादव यूपी में 125 ग्रामीण स्टेडियमों का निर्माण कराया जा चुका है, 39 स्टेडियम निर्माणाधीन – गिरीश चंद्र यादव युवक और महिला मंगल दलों का गठन कर प्रदेश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ा जा रहा – गिरीश चंद्र यादव  “माय भारत” पोर्टल पर 19 लाख युवा पंजीकृत, “युवा साथी” पोर्टल पर 12 लाख युवाओं को मिली सरकारी योजनाओं की जानकारी – गिरीश चंद्र यादव लखनऊ  प्रदेश सरकार में युवा कल्याण एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), गिरीश चंद्र यादव ने  प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश में युवाओं के शारीरिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक प्रदेश सरकार खेल अवसंरचना के विस्तार, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इससे प्रदेश के युवाओं के विकास के साथ-साथ खेल जगत में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों को बढ़ाना सुनिश्चित होगा।   खेल मंत्री ने योगी सरकार की प्रत्येक विकास खंड में मिनी स्टेडियम/ग्रामीण स्टेडियम के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इसके तहत प्रदेश में अब तक 125 ग्रामीण स्टेडियमों का निर्माण कराया जा चुका है, साथ ही 8 विकास खंडों में दो-दो स्टेडियम भी बनाए गए हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें। वर्तमान में ग्रामीण स्टेडियम निर्माण की 39 परियोजनाओं में कार्य प्रगति पर है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से इन स्टेडियमों के सुचारु संचालन के लिए खेल उपकरणों की खरीद हेतु हर वर्ष स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से खेल प्रशिक्षकों की तैनाती भी की जा रही है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश के युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय गतिविधियों से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर युवक एवं महिला मंगल दलों का गठन किया गया है। प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में अब तक 53,760 युवक मंगल दल और 52,354 महिला मंगल दल गठित किए जा चुके हैं। इन दलों को खेल गतिविधियों से जोड़कर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया जा रहा है। अब तक 96,000 मंगल दलों को खेल प्रोत्साहन सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है और शेष को भी जल्द सामग्री प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है। युवा कल्याण एवं खेल मंत्री ने बताया कि खेलों में युवाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में विधायक खेल स्पर्धा और संसदीय क्षेत्रों में सांसद खेल स्पर्धा आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के 3 लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। साथ ही दिल्ली में आयोजित 29वें राष्ट्रीय युवा उत्सव में उत्तर प्रदेश के 79 युवाओं के दल ने भाग लिया, जबकि 28वें राष्ट्रीय युवा उत्सव में राज्य को कहानी लेखन, कविता लेखन और पेंटिंग में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। युवा उत्सव के 29वें आयोजन में लोकनृत्य टीम ने तृतीय स्थान हासिल किया। मंत्री ने बताया कि “माय भारत” पोर्टल पर अब तक 19 लाख से अधिक युवाओं का पंजीकरण कराया जा चुका है, जिसके माध्यम से प्रदेश के युवा स्वच्छता, पौधरोपण, नशामुक्ति और रक्तदान जैसी रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा “युवा साथी” पोर्टल पर 12 लाख से अधिक युवाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करायी जा चुकी है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं और मंगल दलों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष ‘राज्य स्तरीय विवेकानन्द यूथ अवार्ड’ प्रदान किया जाता है। प्रेस कॉफ्रेंस के समापन में मंत्री ने दोहराया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी तरह के संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

नवनिर्माण के नौ वर्ष: स्वस्थ और समर्थ युवा होंगे उत्तर प्रदेश के विकास की मजबूत आधारशिला

नवनिर्माण के नौ वर्ष: स्वस्थ-समर्थ युवा बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला  योगी सरकार ने यूपी में किया खेल सुविधाओं का अभूतपूर्व विकास, महानगरों से लेकर ग्रामीण स्तर तक सरकार ने खड़ा किया स्पोर्ट्स का बुनियादी ढांचा मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय में तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन व विशेषज्ञ लखनऊ   पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खेलों के क्षेत्र में एक नई पहचान गढ़ी है। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में खेल सुविधाओं का ऐसा अभूतपूर्व विकास हुआ है, जिसने महानगरों से लेकर गांवों तक खेलों की मजबूत बुनियाद खड़ी कर दी है। यह परिवर्तन केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुका है। सरकार की "एक मंडल-एक स्पोर्ट्स कॉलेज" की परिकल्पना ने हर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर दिया है। मेरठ में स्थापित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय भविष्य के चैंपियनों और खेल विशेषज्ञों को तैयार करने का केंद्र बन रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य खेल नीति-2023 ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और सुरक्षा प्रदान करते हुए खेलों को करियर के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके साथ ही प्रदेश में एकलव्य क्रीड़ा कोष की स्थापना भी की गई है।  योगी सरकार में खेल क्रांति का उदय: गांव से ग्लोबल मंच तक यूपी का दबदबा खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने पुरस्कार राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है। ओलंपिक में एकल वर्ग के खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक पर ₹06 करोड़,  रजत पदक पर 04 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹02 करोड़ का पुरस्कार और टीम गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹02 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹01 करोड़ का पुरस्कार है। जबकि एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹डेढ़ करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹75 लाख का प्रोत्साहन निर्धारित है। इसके अलावा कॉमनवेल्थ अथवा विश्वकप से जुड़ी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक पर ₹1.5 करोड़, रजत पदक पर ₹75 लाख तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹50 लाख का पुरस्कार निर्धारित है। वहीं ओलंपिक गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों के प्रतिभाग किये जाने पर प्रोत्साहन स्वरूप ₹10-10 लाख और कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियन गेम्स में प्रतिभाग करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों को ₹05-05 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पहल युवाओं के मन में खेलों के प्रति लगाव और समर्पण को और मजबूत करेगी। मजबूत बुनियाद, सुनहरा भविष्य: खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश ग्रामीण स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए "एक जनपद एक खेल" योजना से 75 जनपदों में ₹25,000/- प्रतिमाह की दर से प्रशिक्षकों को मानदेय का भुगतान एवं 30 खिलाड़ियों को किट एवं खेल सामग्री की व्यवस्था की गई।  वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 खेलों की टीमों में 434 बालक एवं 355 बालिका समेत कुल 789 खिलाड़ियों को किट वितरित करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। गोरखपुर और वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है जबकि प्रदेशभर में स्टेडियम, क्रीड़ा हॉल, स्वीमिंग पूल और जिम जैसी सुविधाओं का विस्तार, इस बात का प्रमाण है कि खेल अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा। मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय से सशक्त होता उत्तर प्रदेश इसके साथ ही, मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय और एकलव्य क्रीड़ा कोष जैसी पहलें खेल संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। दरअसल कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत प्रदेश में रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ी न केवल मैदान में बल्कि जीवन में भी सफल बन सकें। आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल खेलों में भाग लेने वाला नहीं, बल्कि जीतने और देश का नाम रोशन करने वाला बन रहा है। यह मजबूत, स्वस्थ और समर्थ युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की सच्ची आधारशिला है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज हादसे पर लिया संज्ञान, कार्रवाई के आदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया प्रयागराज हादसे का संज्ञान  मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख व घायलों को 50-50 हजार रुपये आर्थिक मदद की घोषणा हादसे में घायल लोगों का समुचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया सीएम ने लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  प्रयागराज के फाफामऊ में हुए कोल्ड स्टोरेज हादसे का संज्ञान लिया। उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन को तत्काल राहत उपलब्ध कराने और घायलों के समुचित उपचार का निर्देश दिया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में मरने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की। सीएम ने कहा कि स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों को तेजी से पूरा करे, घायलों के इलाज में किसी प्रकार को कोताही न हो और सभी घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित कराया जाए। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दु:ख की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह उनके साथ खड़ी है।

योगी सरकार में ग्रामीण महिलाओं ने बनाया रिकॉर्ड, 10 लाख लीटर रोज कर रहीं दूध का संग्रहण

31 जिलों की महिलाओं ने किया पांच हजार करोड़ का दूध का कारोबार योगी सरकार में ग्रामीण महिलाओं ने बनाया रिकॉर्ड, 10 लाख लीटर रोज कर रहीं दूध का संग्रहण उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन बन रहा तरक्की का आधार स्तंभ प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने की अभूतपूर्व तरक्की लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए दुग्ध उत्पादन और संग्रहण के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। योगी सरकार की योजनाओं और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश की लाखों महिलाएं आज आर्थिक सशक्तीकरण की मजबूत आधारशिला बन चुकीं हैं। प्रदेश के 31 जिलों में सक्रिय महिला समूहों ने प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि करीब 5000 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार भी किया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। छह हजार से अधिक गांवों की महिलाएं इस अभियान से जुड़कर अभूतपूर्व प्रगति कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर ये महिलाएं दुग्ध संग्रहण, प्रोसेसिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं यह मॉडल न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि उन्हें उद्यमी के रूप में स्थापित कर रहा है। इससे गांवों में पलायन कम होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। योगी सरकार की योजनाओं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के सहारे ग्रामीण महिलाओं का यह नेटवर्क आने वाले समय में प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। उत्तर प्रदेश में राज्य आजीविका मिशन तरक्की का आधार स्तंभ बन रहा है। प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने दुग्ध संग्रहण के जरिए अभूतपूर्व तरक्की की है। विभिन्न जिलों में संभाली कमान प्रदेश में विभिन्न महिला संचालित मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां (एमपीसीएल) इस बदलाव की धुरी बनी हुई हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’ बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा जिलों में कार्यरत है। पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’ बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र और वाराणसी में सक्रिय है। सामर्थ्य एमपीसीएल प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी और कानपुर नगर में महिलाओं को सशक्त बना रही है। गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल’ देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में काम कर रही है। तराई क्षेत्र में ‘सृजन एमपीसीएल’ बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर में नई संभावनाएं गढ़ रही है।

नवनिर्माण के नौ वर्ष: स्वस्थ-समर्थ युवा बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला

योगी सरकार ने यूपी में किया खेल सुविधाओं का अभूतपूर्व विकास, महानगरों से लेकर ग्रामीण स्तर तक सरकार ने खड़ा किया स्पोर्ट्स का बुनियादी ढांचा मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय में तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन व विशेषज्ञ लखनऊ पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खेलों के क्षेत्र में एक नई पहचान गढ़ी है। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में खेल सुविधाओं का ऐसा अभूतपूर्व विकास हुआ है, जिसने महानगरों से लेकर गांवों तक खेलों की मजबूत बुनियाद खड़ी कर दी है। यह परिवर्तन केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुका है। सरकार की "एक मंडल-एक स्पोर्ट्स कॉलेज" की परिकल्पना ने हर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर दिया है। मेरठ में स्थापित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय भविष्य के चैंपियनों और खेल विशेषज्ञों को तैयार करने का केंद्र बन रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य खेल नीति-2023 ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और सुरक्षा प्रदान करते हुए खेलों को करियर के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके साथ ही प्रदेश में एकलव्य क्रीड़ा कोष की स्थापना भी की गई है। योगी सरकार में खेल क्रांति का उदय: गांव से ग्लोबल मंच तक यूपी का दबदबा खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने पुरस्कार राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है। ओलंपिक में एकल वर्ग के खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक पर ₹06 करोड़,  रजत पदक पर 04 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹02 करोड़ का पुरस्कार और टीम गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹02 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹01 करोड़ का पुरस्कार है। जबकि एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹डेढ़ करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹75 लाख का प्रोत्साहन निर्धारित है। इसके अलावा कॉमनवेल्थ अथवा विश्वकप से जुड़ी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक पर ₹1.5 करोड़, रजत पदक पर ₹75 लाख तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹50 लाख का पुरस्कार निर्धारित है। वहीं ओलंपिक गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों के प्रतिभाग किये जाने पर प्रोत्साहन स्वरूप ₹10-10 लाख और कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियन गेम्स में प्रतिभाग करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों को ₹05-05 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पहल युवाओं के मन में खेलों के प्रति लगाव और समर्पण को और मजबूत करेगी। मजबूत बुनियाद, सुनहरा भविष्य: खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश ग्रामीण स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए "एक जनपद एक खेल" योजना से 75 जनपदों में ₹25,000/- प्रतिमाह की दर से प्रशिक्षकों को मानदेय का भुगतान एवं 30 खिलाड़ियों को किट एवं खेल सामग्री की व्यवस्था की गई।  वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 खेलों की टीमों में 434 बालक एवं 355 बालिका समेत कुल 789 खिलाड़ियों को किट वितरित करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। गोरखपुर और वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है जबकि प्रदेशभर में स्टेडियम, क्रीड़ा हॉल, स्वीमिंग पूल और जिम जैसी सुविधाओं का विस्तार, इस बात का प्रमाण है कि खेल अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा। मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय से सशक्त होता उत्तर प्रदेश इसके साथ ही, मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय और एकलव्य क्रीड़ा कोष जैसी पहलें खेल संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। दरअसल कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत प्रदेश में रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ी न केवल मैदान में बल्कि जीवन में भी सफल बन सकें। आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल खेलों में भाग लेने वाला नहीं, बल्कि जीतने और देश का नाम रोशन करने वाला बन रहा है। यह मजबूत, स्वस्थ और समर्थ युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की सच्ची आधारशिला है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।