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मुख्यमंत्री ने लोक भवन में 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से प्रदान किए प्रमाणपत्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4.60 लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई को दिया ₹148 करोड़ का संबल   एक क्लिक पर छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में पहुंची छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि   मुख्यमंत्री ने लोक भवन में 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से प्रदान किए प्रमाणपत्र   अन्य पिछड़ा वर्ग के 2.23 लाख और अनुसूचित जाति के 1.59 लाख विद्यार्थियों को मिला लाभ   लखनऊ उत्तर प्रदेश के 4,60,559 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई को शनिवार को आर्थिक संबल मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में एक क्लिक कर डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में ₹148.04 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि भेजी। उन्होंने मंच पर 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रमाणपत्र पाने वालों में रणबीर वर्मा, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अलकैफ, अनन्या अवस्थी, मिली, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, बुशरा, अभिषेक यादव और साइमा शामिल रहे। मुख्यमंत्री के हाथों प्रमाणपत्र पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।   सरकार की इस पहल का सबसे अधिक लाभ अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिला है। अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों के खातों में ₹60.01 करोड़ भेजे गए। अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों को ₹64.54 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिली। इसी तरह सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों के खातों में ₹11.43 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों के खातों में ₹12.06 करोड़ पहुंचाए गए।   आर्थिक अभाव के कारण नहीं छूटेगी पढ़ाई योजना में अल्प आय वर्ग के पूर्वदशम यानी कक्षा नौ और दस के साथ दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य आर्थिक अभाव को किसी विद्यार्थी की शिक्षा की राह में बाधा नहीं बनने देना है।   आधार आधारित भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता छात्रवृत्ति आवेदन से लेकर भुगतान तक की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली से धनराशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित पैकेट सिस्टम भी लागू किया गया है। इससे छात्रवृत्ति वितरण में बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और विद्यार्थियों को बिना किसी दौड़भाग के योजना का लाभ मिल रहा है।   प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को ₹4,793 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दी है। सरकार की कोशिश प्रक्रिया को और सरल बनाकर प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक योजना का लाभ पहुंचाने की है।

योगी सरकार का बड़ा तोहफा, 4.60 लाख छात्र-छात्राओं के खातों में पहुंची स्कॉलरशिप; जानें किसे कितना मिला

लखनऊ सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार की सुबह उत्तर प्रदेश के 4.60 लाख छात्र-छात्राओं के बैंक खाते में एक क्लिक से स्कॉलरशिप भेज दी। लखनऊ के लोक भवन सभागार में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले स्कॉलरशिप न तो समय पर मिलती थी और न ही पूरी। भ्रष्टाचारी लोग छात्रों की स्कॉलरशिप डकार जाते थे। बाबू जब स्कॉलरशिप छात्र को देता था तो उसमें से अपना कमीशन काट लेता था। उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में सिर्फ 2900 करोड़ रुपए की धनराशि स्कॉलरशिप में जाती थी। आज हम लोग 6200 रुपए स्कॉलरशिप में मुहैया करा रहे हैं। यानी दोगुने से भी ज्यादा। सीएम योगी ने कहा कि आज एडमिशन लेने के बाद ही स्कॉलरशिप छात्रों को भेज दी जाती है। 2 अक्टूबर को बैंक बंद होने के नाते आज 3 अक्टूबर को स्कॉलरशिप ट्रांसफर की गई है। सीएम योगी ने संबंधित विभागों से कहा कि कोई भी बच्चा स्कॉलरशिप से वंचित न रहने पाए। सीएम योगी ने कहा कि पिछले साल संस्था की गलती, छात्र द्वारा देरी से आवेदन या किसी अन्य त्रुटि की वजह से यदि स्कॉलरशिप नहीं मिल पाई तो हम उसे भी स्कॉलरशिप मुहैया करा रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई पैसे के अभाव में बाधित नहीं हो। स्कॉलरशिप हर छात्र का संबंल बनेगी। उन्होंने बताया कि सरकार सभी वर्गों के छात्रों को स्कॉलरशिप मुहैया करा रही है। यह केवल स्कॉलरशिप तक सीमित नहीं है। आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि आप यूपी के अंदर ऐसे समय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जब आपके सामने पहचान का संकट नहीं है। 2017 के पहले यूपी के युवाओं को यूपी के बाहर जाने पर लोग यूपी वाला कहकर किनारे कर देते थे। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी में अक्सर दंगे-कर्फ्यू लगते थे। बच्चे पढ़ाई छोड़ देते थे। सरकार कहती थी की उनकी रुचि ही नहीं। हमने अध्ययन कराया तो पता चला कि ज्यादातर बच्चियां स्कूल छोड़ती हैं क्योंकि स्कूल में पीने का पानी और टायलेट भी नहीं है। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग टायलेट की व्यवस्था कराई। पीने के पानी और अन्य सुविधाओं का इंतजाम किया। आज के दिन में बेसिक शिक्षा के 1.60 करोड़ बच्चों को हम कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे आदि का भी इंतजाम कर हैं। अटल विद्यालयों में अनाथ बच्चों का पालन पोषण करने के साथ ही सरकार उनकी अच्छी पढ़ाई-लिखाई भी करा रही है। कस्तूरबा विद्यालयों में इंटर तक की पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख+ छात्र-छात्राओं को 4793 करोड़+ की छात्रवृति/ शुल्क प्रतिपूर्ति डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए से ट्रांसफर की गई है। किस वर्ग के कितने बच्चों को मिली स्कॉलरशिप अन्य पिछड़ा वर्ग 2,23,615 60.01 करोड़ रुपए अनूसूचित वर्ग 1,59,959 64.54 करोड़ रुपए सामान्य वर्ग 38, 084 11.43 करोड़ रुपए

भारतीय साइक्लिंग को बड़ी उपलब्धि, पुणे में 2032 UCI Road World Championships का होगा आयोजन

नोएडा नोएडा क्षेत्र के विधायक पंकज सिंह (Pankaj Singh) का परिचय केवल नोएडा की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। बहुत कम लोग जानते हैं कि नोएडा के विधायक पंकज सिंह भारत की एक बहुत बड़ी संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। भारत की बड़ी राष्ट्रीय संस्था के अध्यक्ष के तौर पर नोएडा क्षेत्र के विधायक पंकज सिंह ने कमाल की उपलब्धि हासिल की है। पंकज सिंह की मेहनत के कारण भारत को दुनिया के बड़े इंवेट का आयोजक बनने का अवसर मिला है। नोएडा के विधायक पंकज सिंह की इस उपलब्धि को जानिए यह बात तो सबको पता है कि नोएडा क्षेत्र के विधायक पंकज सिंह (Pankaj Singh) उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता हैं किन्तु उनके विषय में ऐसी ढेर सारी जानकारियां हैं जिसे नोएडा तथा उत्तर प्रदेश के लोग नहीं जानते हैं। आपको बता दें कि नोएडा क्षेत्र के विधायक पंकज सिंह भारत की प्रसिद्ध संस्था भारतीय साइक्लिंग महासंघ Cycling Federation of India (CFI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। नोएडा के विधायक पंकज सिंह अप्रैल 2023 में भारतीय साइक्लिंग महासंघ CFI के अध्यक्ष चुने गए थे। इससे पहले नोएडा के विधायक पंकज सिंह भारतीय तलवारबाजी संघ (fencing association of india) के अध्यक्ष थे।  इतना ही नहीं नोएडा के विधायक पंकज सिंह की बदौलत हाल ही में भारत के हिस्से में एक बड़ी उपलब्धि आई है। पंकज सिंह की मेहनत से यह संभव हो पाया है कि भारत के इतिहास में पहली बार भारत के पुणे शहर में रोड वर्ल्ड चैंपियनशिप (UCI) का आयोजन होगा। यह आयोजन वर्ष-2032 में होना है। इस आयोजन के लिए CFI की पूरी टीम लगी हुई है। शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को CFI की टीम ने नोएडा के विधायक पंकज सिंह को यूसीआई रोड वर्ल्ड चैंपियनशिप का पत्र विधिवत प्रदान किया।  पंकज सिंह को मेजबानी का स्मृति चिन्ह भेंट किया   इस अवसर पर CFI के अधिकारियों मनिंदर पाल सिंह एवं ओंकार सिंह ने 2032 UCI Road World Championships की मेजबानी से संबंधित स्मृति चिह्न/अलॉटमेंट सॉवेनियर पंकज सिंह को भेंट किया। पंकज सिंह ने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित साइक्लिंग प्रतियोगिताओं में से एक की मेजबानी मिलना देश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग जगत में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और भारतीय साइक्लिंग की निरंतर प्रगति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि 100 वर्षों से अधिक के इतिहास में यह पहली बार होगा जब UCI Road World Championships का आयोजन भारत में किया जाएगा। इसके साथ ही भारत इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप की मेजबानी करने वाला एशिया का चौथा देश बनेगा। उन्होंने कहा कि इस विश्वस्तरीय आयोजन से भारत में साइक्लिंग के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धात्मक अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही देश के युवाओं को साइक्लिंग को एक गंभीर खेल करियर के रूप में अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। पंकज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर रहा है।  2032 UCI Road World Championships की मेजबानी इसी बदलते भारत और वैश्विक खेल मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का प्रमाण है। उन्होंने Cycling Federation of India के सभी पदाधिकारियों, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं इस उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि भारत इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। 

मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम, दानिश आजाद अंसारी ने कही बड़ी बात

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री  दानिश आजाद अंसारी जी ने आज लखनऊ में मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम को प्रदेश के युवाओं एवं छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर अल्प-आय वर्ग के पूर्वदशम एवं दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में ₹148 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। श्री दानिश आजाद अंसारी जी ने कहा कि आज का दिन उत्तर प्रदेश के युवाओं, नौजवानों और विशेष रूप से जेन-जी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने हमेशा युवाओं के सपनों को उड़ान देने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक कारणों से किसी भी छात्र की शिक्षा प्रभावित न हो। कार्यक्रम में मा. कैबिनेट मंत्री श्री ओमप्रकाश राजभर जी, मा. पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र कश्यप जी, मा. समाज कल्याण मंत्री श्री असीम अरुण जी, मा. मंत्री श्री संजीव कुमार गोंड जी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री बैजनाथ रावत जी, मा. विधायक श्रीमती जय देवी जी, मा. श्री अमरेश कुमार जी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

‘सपा ने यूपी को तमाशे के अलावा कुछ नहीं दिया’, मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने अखिलेश यादव को घेरा

‘एआई और टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग देखना है तो सपा कार्यालय चले जाइए’, दानिश आजाद का अखिलेश पर तीखा हमला ‘सपा ने यूपी को तमाशे के अलावा कुछ नहीं दिया’, मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने अखिलेश यादव को घेरा ‘सपा सरकार में नौकरियों की नीलामी होती थी, रेट तय होते थे’, अखिलेश के आरोपों पर बीजेपी ने किया तीखा पलटवार 'अपने शासन में यूपी को बीमारू राज्य बनाने वाले आज निवेश पर ज्ञान दे रहे हैं', दिनेश प्रताप सिंह का अखिलेश पर तीखा हमला अखिलेश जब नकल की बात आप करते हैं तो यूपी की जनता को हंसी आती है : दिनेश प्रताप सिंह ‘बिना खर्ची-पर्ची के योगी सरकार ने साढ़े नौ लाख सरकारी नौकरियां दी’, दिनेश प्रताप सिंह ने सपा पर साधा निशाना लखनऊ  सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयानों पर यूपी सरकार के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी और बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने तीखा पलटवार किया है। दानिश आजाद ने एआई और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से लेकर सपा के 2012-17 के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों तक पर सवाल खड़े किए और कहा कि सपा के दौर में सरकारी भर्तियों में नौकरी की नीलामी होती थी। वहीं, बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने निवेश और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर अखिलेश को घेरते हुए कहा कि जिस यूपी में पहले निवेशक आने से डरते थे, आज वही प्रदेश बेहतर कनेक्टिविटी और कानून के राज के कारण निवेश का केंद्र बन रहा है। ‘एआई का दुरुपयोग देखना है तो सपा कार्यालय चले जाइए’ दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा समाज को भ्रमित करने की नीयत से काम करती है। उन्होंने कहा कि आज यूपी और देश डिजिटल मजबूती की ओर बढ़ रहे हैं। एआई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल विद्यार्थियों और युवाओं के करियर ग्रोथ के लिए होना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर रील देखकर टाइम पास करने के लिए। मंत्री ने आरोप लगाया कि सपा कार्यालय में तकनीक का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “एआई का दुरुपयोग अगर देखना है, टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग अगर देखना है, तो आप समाजवादी पार्टी के कार्यालय चले जाओ।” उन्होंने कहा कि तमाशा बनाने के अलावा सपा ने यूपी को कुछ नहीं दिया। ‘सपा शासनकाल में नौकरियों की नीलामी होती थी’ दानिश आजाद ने आरोप लगाया कि 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार में सरकारी भर्तियों के दौरान अलग-अलग नौकरियों के रेट तय होते थे और एजेंट लगाए जाते थे। उन्होंने कहा कि किसी नौकरी के लिए 10 लाख, किसी के लिए 20 लाख और किसी के लिए 30 लाख रुपये तक की बोलियां लगती थी। उन्होंने सपा सरकार में छात्रवृत्ति, शिक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए और कहा कि सपा को पहले अपने कार्यकाल का इतिहास देखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि जनता ने उसे सत्ता से बाहर क्यों किया। ‘वसूली के डर से निवेशक यूपी नहीं आते थे’ दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि अपने शासनकाल में जिन्होंने यूपी को बीमारु राज्य बना दिया आज वो प्रदेश में निवेश पर ज्ञान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले निवेशक यहां निवेश करने से डरते थे, क्योंकि निवेश का पता चलते ही सपा नेता वसूली अभियान शुरू कर देते थे। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में निवेशकों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया जा रहा है और अब यूपी में खर्ची-पर्ची की बात कोई सोच भी नहीं सकता। दिनेश ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज है और बेहतर रोड, एयर व वॉटरवेज कनेक्टिविटी के कारण निवेशक यूपी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ‘सपा सरकार में नौकरियों का हाल खराब था’ दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश के नकल और रोजगार के मुद्दे उठाने पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता नहीं थी और जाति के आधार पर नियुक्तियां होती थी। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में करीब साढ़े नौ लाख सरकारी नौकरियां पारदर्शी तरीके से दी गई हैं। उन्होंने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर युवाओं को नौकरी मिल रही है, इसलिए उन्हें दिक्कत हो रही है। सिंह ने कहा कि सपा की दुकान 2017 में ही बंद नहीं हुई, बल्कि 2047 तक बंद रहने वाली है।

18 साल की उम्र पूरी कर चुके युवाओं के लिए मौका, फार्म-6 से मतदाता सूची में ऐसे जुड़वाएं नाम

 गोरखपुर  मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से वंचित रह गए लोगों के लिए राहत की खबर है। अब अर्ह युवा, पहली बार मतदाता बनने वाले, छूटे हुए, बेघर, दिव्यांग और महिला मतदाता आसानी से सिर्फ फार्म-6 के माध्यम से अपना नाम सूची में शामिल करा सकेंगे। इसके लिए आनलाइन या आफलाइन दोनों ही माध्यमों से आवेदन किया जा सकता है। भारत निर्वाचन आयोग 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र नागरिकों के लिए फार्म-6 के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा देता है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी जय प्रकाश ने बताया कि जिन पात्र लोगों का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर के संबंध में 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका है, वे भी फार्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र देना जरूरी नहीं उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र लगाने की अनिवार्यता निर्वाचन आयोग ने समाप्त कर दी है। मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र भरकर लगाना अनिवार्य नहीं है। पात्र व्यक्ति संबंधित बीएलओ के माध्यम से आफलाइन आवेदन कर सकते हैं अथवा निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल से आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आयोग के अनुसार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए पात्र नागरिक भारतीय नागरिक होना, संबंधित क्षेत्र का सामान्य निवासी होना और अयोग्य न होना जरूरी है। एसआइआर में कटे थे 6.45 लाख नाम गोरखपुर में एसआइआर से पहले 36.66 लाख से अधिक मतदाता थे। अभियान में 6.45 लाख से अधिक नाम हटे। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो मतदाता तो थे, लेकिन 2003 की मतदाता सूची में अपने, माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से संबंधित जरूरी जानकारी या अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके। जिला स्तर पर एसआइआर के बाद जारी आंकड़ों में 6,45,634 नाम हटने और मतदाताओं की संख्या घटकर 30,20,908 होने की जानकारी दी गई थी। एसआइआर के दौरान फार्म छह के साथ घोषणा पत्र के जरिए 2003 के रिकार्ड की जानकारी देना महत्वपूर्ण हो गया था। अब इस अतिरिक्त बाध्यता के हटने से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी , जो पुराने पारिवारिक रिकार्ड की जानकारी न होने के कारण आवेदन की प्रक्रिया में अटक रहे थे।

योगी सरकार ने 15 IAS समेत 38 अफसरों का किया ट्रांसफर, खनन और चिकित्सा शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव

लखनऊ योगी आदित्यनाथ सरकार ने शनिवार तीन अक्टूबर को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने 15 आईएएस और 23 पीसीएस अफसरों का ट्रांसफर किया है। इन तबादलों को चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बीती 20 सितंबर को सरकार ने दस आईएस अधिकारियों का तबादला कर दिया था। IAS अमित कुमार घोष और अमृत अभिजात समेत दस अधिकारियों को नई तैनाती दी गई थी। आईएएस अफसरों के ट्रांसफर में खनन सचिव माला श्रीवास्तव से सचिव खनन का प्रभार ले लिया गया है। उन्हें अब निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म की जिम्मेदारी दी गई है। पंचायती राज के निदेशक आईएएस अधिकारी अमित सिंह को हटाकर हरिप्रताप शाही को निदेशक पंचायती राज बनाया गया है। अमित सिंह को प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ पद का कार्यभार दिया गया है। आईएएस अधिकारी राकेश कुमार सिंह को अपर आयुक्त आवास विकास परिषद भेजा गया है। खनन और चिकित्सा शिक्षा विभाग में बदलाव खनन और चिकित्सा शिक्षा विभाग में भी बदलाव किया गया है।माला श्रीवास्तव को सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म तथा निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म के पद पर तैनात किया गया है। डॉ. उज्जवल कुमार को विशेष सचिव एवं निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म की जिम्मेदारी दी गई है। वह इससे पहले प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के पद पर थे। जेरीभा को प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन बनाया गया है। वह इससे पहले विशेष सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म तथा अपर निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म के पद पर थीं। आईएएस अफसर ध्रुव खाडिया को जौनपुर से मुख्य विकास अधिकारी मऊ के पद पर भेजा गया है। विवेक कुमार श्रीवास्तव को सदस्य राजस्व परिषद प्रयागराज और नरेंद्र बहादुर सिंह को मुख्य विकास अधिकारी जौनपुर के पद पर तैनाती मिली है। उज्जवल कुमार विशेष सचिव खनन बनाए हैं। आईएएस अफसर जे रीभा एमडी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन में भेजी गई हैं तो सचिन कुमार सिंह विशेष सचिव, चिकित्सा शिक्षा और प्रकाश बिंदु सचिव चिकित्सा शिक्षा के साथ अर्चना गहरवार को कुलसचिव AKTU लखनऊ और रीना सिंह कुलसचिव KGMU के पद पर तैनाती मिली है। डॉ. चन्द्र भूषण, सचिन कुमार सिंह को मिली नई जिम्मेदारी डॉ. चन्द्र भूषण को अपर निदेशक, डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के पद पर भेजा गया है। उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद में अपर निदेशक के पद पर तैनात रहे सचिन कुमार सिंह को विशेष सचिव, चिकित्सा शिक्षा नियुक्त किया गया है। ध्रुव खाड़िया मुख्य विकास अधिकारी, जौनपुर थे। मुख्य विकास अधिकारी, मथुरा के पद पर रहे विवेक कुमार श्रीवास्तव को प्रयागराज स्थित राजस्व परिषद में सदस्य (न्यायिक) बनाया गया है। लखीमपुर खीरी में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के पद पर तैनात नरेंद्र बहादुर सिंह को मुख्य विकास अधिकारी, जौनपुर की जिम्मेदारी दी गई है। श्रीहरि प्रताप शाही को निदेशक, पंचायती राज की जिम्मेदारी श्रीहरि प्रताप शाही को निदेशक, पंचायती राज बनाया गया है। वह अब तक अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपीईडा के पद पर थे। निदेशक, पंचायती राज के पद पर तैनात अमित कुमार सिंह को प्रबंध निदेशक, पीसीडीएफ नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले थे। प्रकाश बिन्दु को सचिव, चिकित्सा शिक्षा बनाया गया है। इससे पहले वह प्रबंध निदेशक, पीसीडीएफ के पद पर थे। नीरज शुक्ला प्रबंध निदेशक पीसीएफ बनाए गए है। नीरज शुक्ला अपर आयुक्त आवास विकास परिषद के पद पर थे। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा से जुड़े दो प्रमुख पदों पर भी बदलाव किया गया है। अर्चना गहरवार को कुलसचिव, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय नियुक्त किया गया है। वहीं रीना सिंह को कुलसचिव, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय बनाया गया है। इस फेरबदल के बाद प्रशासनिक, पंचायती राज, चिकित्सा शिक्षा, खनन और विकास प्राधिकरण से जुड़े कई विभागों में अधिकारियों की नई तैनाती हुई है। 23 पीसीएस अधिकारियों का तबादला यूपी सरकार ने PCS कैडर के 23 अधिकारियों का भी तबादला कर दिया है। शासन की जारी लिस्ट में कई जिलों के अपर जिलाधिकारी (ADM), उपजिलाधिकारी (SDM) और नगर निगमों के अपर नगर आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत चंद्रेश कुमार को मुख्य राजस्व अधिकारी देवरिया, ज्ञानेन्द्र विक्रम को एडीएम (न्यायिक) संतकबीरनगर, लवी त्रिपाठी को एडीएम (प्रशासन) सहारनपुर और राजेश कुमार को अपर नगर आयुक्त मेरठ बनाया गया है। वहीं पुष्पेंद्र पटेल को एडीएम (प्रशासन) रामपुर, अर्पित गुप्ता को कुलसचिव बांदा कृषि विश्वविद्यालय, विजय शंकर को कुलसचिव महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय कुशीनगर, अभिनव कन्नौजिया को संयुक्त दुग्ध आयुक्त और बृजेश कुमार सिंह को सचिव मेरठ विकास प्राधिकरण के पद पर तैनात किया गया है। शिवानी सिंह को एडीएम (नमामि गंगे) जालौन, प्रेम चन्द्र मौर्य को एडीएम (वि/रा) प्रतापगढ़, रामजी मिश्रा को एडीएम (वि/रा) लखनऊ, राजेंद्र कुमार को एडीएम (न्यायिक) हरदोई और प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी को एडीएम (प्रशासन) मुरादाबाद की जिम्मेदारी दी गई है।

सीएम योगी ने 4.60 लाख से अधिक छात्राओं के खातों में भेजे 148 करोड़ रुपये से अधिक

छात्रवृत्ति से खिले सपनों के पंख, योगी सरकार ने आसान की पढ़ाई की राह सीएम योगी ने 4.60 लाख से अधिक छात्राओं के खातों में भेजे 148 करोड़ रुपये से अधिक छात्रों ने कहा- आर्थिक मदद से पढ़ाई का बोझ हुआ कम, किताबों और फीस में मिलेगी राहत डॉक्टर बनने से पुलिस सेवा तक के सपनों को छात्रवृत्ति से मिला संबल छात्रों ने कहा- सीएम योगी के हाथों स्वीकृति पत्र मिलना गौरव का पल लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लोकभवन में पूर्वदशम (कक्षा 9-10) और दशमोत्तर कक्षाओं की 4.60 लाख से अधिक छात्राओं के खातों में 148 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि हस्तांतरित की। छात्रवृत्ति पाने वाले छात्र-छात्राओं ने सीएम की सराहना करते हुए कहा कि आर्थिक सहायता से पढ़ाई जारी रखने में परिवार को बड़ी राहत मिलेगी। छात्रवृत्ति केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उनके भविष्य के सपनों को आगे बढ़ाने का सहारा है। पढ़ाई के खर्च में मिलेगी राहत, किताबें खरीदेंगे छात्र गोसाईंगंज के सत्यम ने कहा कि छात्रवृत्ति मिलने से पढ़ाई के खर्च में परिवार को राहत मिलेगी। वह राशि का इस्तेमाल किताबों और जरूरी शैक्षणिक सामग्री खरीदने में करेंगे। सुरियामऊ के विवेक कनौजिया ने कहा कि छात्रवृत्ति से फीस और किताबों का खर्च पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे आगे की पढ़ाई के लिए उनका उत्साह बढ़ा है। रकीबखेड़ा के अमन कुमार ने कहा कि वह नई किताबें खरीदकर अपनी पढ़ाई को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाएंगे। गोसाईंगंज के मयंक रावत ने भी कहा कि छात्रवृत्ति से शिक्षा से जुड़ी जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। सीएम योगी के हाथों स्वीकृति पत्र मिलना गौरव की बात है। डॉक्टर और पुलिस अधिकारी बनने का सपना इटौंजा की साक्षी ने कहा कि छात्रवृत्ति मिलने से आगे पढ़ाई करने का हौसला बढ़ा है। इससे पढ़ाई से जुड़ी जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। डॉक्टर बनने का सपना संजोए सत्येंद्र रावत ने कहा कि आर्थिक सहायता मिलने से परिवार को पढ़ाई का खर्च संभालने में सहूलियत होगी। इससे वह डॉक्टर बनने के लक्ष्य की तैयारी पर बेहतर तरीके से ध्यान दे सकेंगे। पुलिस विभाग में सेवा देने का लक्ष्य रखने वाले छात्र ने कहा कि छात्रवृत्ति से परिवार पर आर्थिक बोझ कम होगा और उन्हें अपने भविष्य की तैयारी के लिए प्रोत्साहन मिला है। आर्थिक दबाव कम होने से पढ़ाई पर रहेगा ध्यान  इटौंजा की आकांक्षा गौतम ने कहा कि छात्रवृत्ति से किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने में मदद मिलेगी। इससे परिवार पर पढ़ाई का आर्थिक दबाव कम होगा। अर्चना ने कहा कि आर्थिक सहयोग उनके लिए पढ़ाई आगे बढ़ाने में बड़ी मदद है। छात्र-छात्राओं ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से दी जा रही छात्रवृत्ति जैसी सहायता से आर्थिक परिस्थितियां उनकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनेंगी। मजदूर के बेटे रणवीर के लिए यादगार रहा पल   कक्षा 12 के छात्र रणवीर वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों छात्रवृत्ति का स्वीकृति पत्र मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि उनके पिता मजदूरी करते हैं। ऐसे में छात्रवृत्ति मिलने से उनके परिवार पर आर्थिक बोझ कम होगा और पढ़ाई आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। रणवीर ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों स्वीकृति पत्र मिलने का यह पल वह कभी नहीं भूलेंगे। हिमांशु वर्मा ने भी छात्रवृत्ति मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि सरकार की यह सहायता उन्हें पढ़ाई जारी रखने और भविष्य के लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी। ओबीसी के 2.23 लाख विद्यार्थियों को 60.01 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों के खाते में 60.01 करोड़ रुपये भेजे गए। जबकि अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों के खाते में 64.54 करोड़ रुपये और सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों के खाते में 11.43 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। इसी तरह अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों के खाते मे 12.06 करोड़ रुपये भेजे गए हैं।

नोएडा-गाजियाबाद के डूब क्षेत्र में बदलेगा नियम, हजारों घरों को वैध बिजली कनेक्शन देने की तैयारी

लखनऊ  यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में रहने वालों को अब मजबूरी में अवैध बिजली कनेक्शन के भरोसे नहीं रहना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (राज्य परिवर्तन आयोग) ने डूब क्षेत्र के हजारों निवासियों को अस्थायी नियमित बिजली कनेक्शन देने का रास्ता निकाला है। इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी करने की तैयारी है। दरअसल, 16 वर्ष पुराने तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता के एक शासनादेश के कारण पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने गौतमबुद्धनगर के नोएडा और गाजियाबाद के छिजारसी, चोटपुर, शिव विहार, कनावटी आदि यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में वर्ष 2010 से बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगा रखी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने वैध कनेक्शन देने का निकाला रास्ता वैसे तो इस क्षेत्र में निर्माण ही नहीं हो सकता है लेकिन हजारों घर अवैध तरीके से बन चुके हैं। जांच में डूब क्षेत्र के 13 हजार से अधिक घरों (संपत्तियों) में अवैध कनेक्शन के जरिए बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी हो रही है। प्रति वर्ष 16 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली चोरी का मामला हाल ही में मुख्यमंत्री के समक्ष आयोग के सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारी) मनोज कुमार सिंह ने उठाते हुए कहा था कि निजी व्यक्तियों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में अवैध तरीके से बिजली आपूर्ति कर 11 रुपये यूनिट तक की वसूली की जा रही है। विद्युत वितरण निगम के कार्मिकों की मिलीभगत से हो रही वसूली का एक भी पैसा कॉरपोरेशन को नहीं मिल रहा है। योगी ने इस पर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए डूब क्षेत्र के निवासियों को वैध कनेक्शन देने का रास्ता निकालने के निर्देश दिए थे। सिंह ने बताया चूंकि बिजली मूलभूत आवश्यकता है इसलिए न्यायालय व प्रशासनिक आदेश के साथ ही ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट आदि पर सभी पहलुओं से विचार-विमर्श करते हुए सशर्त कनेक्शन देने का रास्ता निकाला गया है। इस पर मुख्यमंत्री की सहमति मिलते ही आदेश जारी कर दिया जाएगा। सिंह ने बताया कि जब तक डूब क्षेत्र के अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जाती है तब तक वहां के निवासियों को अंतरिम रूप से अस्थाई नियमित बिजली कनेक्शन बाकायदा कैंप लगाकर दिए जाएंगे। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम व नोएडा पावर कंपनी अपने-अपने डूब क्षेत्र में कनेक्शन देने का पूरा डाटा अलग रखेगा। संपत्ति के निवासियों/कब्जाधारियों द्वारा बिजली के नेटवर्क के विकास और कनेक्शन लागत का खर्च उठाने पर कनेक्शन इस शर्त के साथ दिया जाएगा कि कनेक्शन को कभी निवास का कोई वैधानिक अधिकार/स्वामित्व का प्रमाण पत्र नहीं माना जाएगा। कोर्ट आदि के आदेश पर परिसर/संपत्तियों को खाली करना होगा। प्रशासन द्वारा निर्माण हटाए जाने की स्थिति में कनेक्शन काटने के लिए उपभोक्ता से पूछने की आवश्यकता नहीं होगी। बाढ़ आने पर मुआवजा नहीं मांगा जा सकेगा। पर्यावरणीय क्षति मुआवजे आदि का भुगतान उपभोक्ता को ही करना होगा। सिंह का मानना है कि नेटवर्क विकसित कर कनेक्शन देने से विद्युत दुर्घटनाएं रुकने के साथ ही बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा। उपभोक्ताओं को भी बिजली के लिए ज्यादा बिल नहीं देना पड़ेगा।

योगी सरकार में पुलिस का एक्शन मोड, इनामी अपराधियों पर शिकंजा; 15,233 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त

योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा, 23 हजार से अधिक इनामी गिरफ्तार, 15,233 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त साइबर अपराध पर कार्रवाई से लेकर माफिया की संपत्ति जब्ती तक, यूपी पुलिस का दिखा एक्शन मोड साइबर अपराध की रोकथाम में यूपी सबसे आगे निकला, 874.58 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कराई इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी और माफिया नेटवर्क पर प्रहार, बीमारू से सुरक्षित प्रदेश बना यूपी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार में पुलिस और प्रशासन ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। साइबर अपराध के मामलों में 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। वहीं 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं। साइबर अपराध पर कार्रवाई में देश में पहला स्थान यूपी पुलिस साइबर अपराध की रोकथाम के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित कर रही है। इसके साथ ही सभी जनपदों के पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से अगस्त 2019 से जून 2026 तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। इन उपलब्धियों के आधार पर मार्च 2026 में साइबर अपराध संबंधी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश, देश में पहले स्थान पर रहा। अपराधियों पर कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर भी शिकंजा 20 मार्च 2017 से अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए, जबकि 12,202 घायल हुए। इसी अवधि में 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। गैंगस्टर एक्ट के तहत 87,835 अपराधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत 995 अपराधियों पर कार्रवाई की गई। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 152 अरब 33 करोड़ रुपये से अधिक (यानी करीब 15,233 करोड़ रुपये) मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गईं। चिह्नित माफिया और गिरोहों के खिलाफ भी कार्रवाई प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इनके विरुद्ध कुल 909 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया।