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सेवा की कहानी: महतारी वंदन की राशि से यशोदा ने संवारा सिलाई का कारोबार

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उनके हुनर और स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में सहायक बन रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सकालो की मती यशोदा प्रजापति की कहानी इसका उदाहरण है। सिलाई के हुनर को अपनी आजीविका का आधार बनाने वाली यशोदा ने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता का उपयोग घरेलू जरूरतों के साथ बचत के लिए किया। छोटी-छोटी बचत से उन्होंने अपनी सिलाई की दुकान को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में अपनी भागीदारी मजबूत की। महतारी वंदन की राशि से मिली बचत और कारोबार को संबल यशोदा लंबे समय से सिलाई का काम कर रही हैं। सिलाई से होने वाली आय से वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में पति का सहयोग करती हैं। महतारी वंदन योजना से नियमित आर्थिक सहायता मिलने के बाद उनके लिए अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ कुछ राशि बचा पाना भी आसान हुआ। इसी बचत का उपयोग उन्होंने अपनी सिलाई की दुकान को आगे बढ़ाने में किया। यशोदा बताती हैं, “महतारी वंदन का पैसा मिलता है तो उससे मुझे बहुत मदद हो जाती है। पैसे इकट्ठा करके धीरे-धीरे अपनी दुकान को आगे बढ़ाया है।” सिलाई से आय, बच्चों की पढ़ाई में भी सहयोग यशोदा के पति वैन चलाते हैं और उनके दो बच्चे हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच यशोदा सिलाई का काम संभाल रही हैं। उनकी सिलाई से होने वाली आमदनी घर के खर्च में सहयोग देती है। वहीं महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में भी सहायक बन रही है। यशोदा का कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक संबल मिलता है। इससे वे अपनी जरूरत के अनुसार राशि का उपयोग करने के साथ भविष्य के लिए बचत भी कर सकती हैं। हुनर और आर्थिक संबल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम यशोदा के लिए महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता केवल मासिक सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके हुनर को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनी। सिलाई के काम से होने वाली आय और योजना से मिली आर्थिक सहायता का समझदारी से उपयोग कर वे परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं। यशोदा ने महतारी वंदन योजना से मिल रहे आर्थिक संबल के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता जब महिलाओं की मेहनत, हुनर और बचत से जुड़ती है, तो यह परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा दे सकती है।

बैटरी चलित ट्रायसायकल से बदला 75% अस्थिबाधित सोमारू का जीवन, मिली आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

सरकार की संवेदनशील पहल  बैटरी चलित ट्रायसायकल से बदला 75% अस्थिबाधित सोमारू का जीवन, मिली आत्मनिर्भरता की नई उड़ान ​रायपुर         समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांगजन हितैषी योजनाएं प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद का नया उजाला भर रही हैं। नारायणपुर जिले के नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गुडरीपारा निवासी 47 वर्षीय सोमारू नेताम की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे एक शासकीय योजना ने न सिर्फ एक व्यक्ति की शारीरिक बाधाओं को दूर किया, बल्कि उन्हें समाज में स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के साथ जीने का संबल भी दिया।       ​ग्राम गुडरीपारा निवासी सोमारू नेताम, पिता श्री चैतराम, 75 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांगता से ग्रस्त हैं। इस गंभीर दिव्यांगता के कारण उनका जीवन लंबे समय तक काफी कठिनाइयों से भरा रहा। चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ होने की वजह से उनकी दिनचर्या बेहद सीमित होकर रह गई थी। घर से बाहर निकलने से लेकर दैनिक आवश्यकताओं के सामान के लिए बाजार जाने या स्वास्थ्य जांच हेतु अस्पताल पहुंचने तक, हर छोटे-बड़े काम के लिए उन्हें अपने परिवार के सदस्यों या ग्रामीणों की मदद पर निर्भर रहना पड़ता था। दूसरों पर इस लगातार निर्भरता ने न केवल उनके आवागमन को बाधित किया था, बल्कि उनके भीतर के आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर रखा था।        ​सोमारू के इस कठिन जीवन संघर्ष को आसान बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग की 'बैटरी चलित (मोटराइज्ड) ट्रायसायकल प्रदाय योजना' एक वरदान बनकर सामने आई। विभाग द्वारा संवेदनशीलता से पहल करते हुए सोमारू नेताम को एक आधुनिक बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। यह ट्रायसायकल मिलते ही सोमारू के दैनिक जीवन की तस्वीर रातों-रात बदल गई।         ​अब सोमारू को अपनी छोटी से छोटी जरूरतों के लिए किसी दूसरे का इंतजार नहीं करना पड़ता। वे बिना किसी सहायता के अपने घर से खुद ट्रायसायकल चलाकर बाजार, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों तक बेहद आसानी से आवागमन कर रहे हैं। इस सुविधा ने उनकी गतिशीलता को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे न केवल उनके समय और श्रम की बचत हो रही है, बल्कि परिवार के सदस्यों पर से भी उनकी निर्भरता काफी कम हो गई है। ​स्वतंत्र रूप से आवागमन करने की इस आजादी ने सोमारू के आत्मबल को एक नई ऊंचाई दी है। वे अब न केवल अपने व्यक्तिगत कार्य स्वयं निपटा रहे हैं, बल्कि सामाजिक गतिविधियों में भी अधिक सहजता और उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए सोमारू बताते हैं कि बैटरी चालित ट्रायसायकल उनके लिए महज एक वाहन नहीं, बल्कि स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जीने का सबसे बड़ा सहारा है। इसने उनकी जिंदगी को सुगम बनाकर भविष्य के प्रति उनका नजरिया पूरी तरह बदल दिया है।       ​दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  सरकार की यह योजनाएं असल मायने में जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। सोमारू नेताम की यह प्रेरणादायक कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब शासकीय योजनाएं सही समय पर सही हितग्राही तक पहुंचती हैं, तो वे जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक सहभागिता के नए दरवाजे खोल देती हैं।

0.40 हेक्टेयर में गुलाब पटेल ने लिखा मछली पालन से समृद्धि का नया अध्याय

सेवा संकल्प से संवरी उम्मीद  0.40 हेक्टेयर में गुलाब पटेल ने लिखा मछली पालन से समृद्धि का नया अध्याय ​रायपुर,       ​एक किसान के लिए उसकी ज़मीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीदों का आधार होती है। सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम नवरंगपुर निवासी गुलाब पटेल पिता: स्व. श्री प्रेमलाल पटेल ने अपनी इसी ज़मीन में छिपी संभावनाओं को पहचाना और एक ऐसी मिसाल कायम की, जो आज प्रदेश के हज़ारों किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।      ​पारंपरिक खेती से इतर कुछ नया करने की सोच के साथ गुलाब पटेल ने जल संरक्षण और मत्स्य पालन को आजीविका का जरिया बनाने का फैसला किया। उनकी इस सोच को साकार करने में केंद्र व राज्य सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और सेवा संकल्प अभियान संबल बने। ​शासकीय योजना से मिली राह और संबल      गुलाब पटेल के पास 0.40 हेक्टेयर भूमि थी, जिसे उन्होंने तालाब निर्माण के लिए चुना। योजना के तहत उन्हें विभाग से 1.20 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। विभागीय मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता से तालाब का निर्माण पूरा हुआ और इसी के साथ शुरू हुआ मछली पालन का एक नया सफर। ​250 क्विंटल उत्पादन और 10 से 15 लाख का शुद्ध लाभ       तालाब बनने के बाद गुलाब पटेल ने मत्स्य पालन को वैज्ञानिक तकनीक और पूरे समर्पण के साथ अपनाया। नियमित देखरेख, उत्तम आहार और सही प्रबंधन का नतीजा यह रहा कि आज उनके 0.40 हेक्टेयर के जलक्षेत्र से प्रतिवर्ष लगभग 250 क्विंटल मछली का उत्पादन हो रहा है। तमाम लागत निकालने के बाद उन्हें हर साल 10 से 15 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ मिल रहा है। ​सेवा संकल्प अभियान: कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतरती योजनाएं        गुलाब पटेल की यह सफलता 'सेवा संकल्प अभियान' की उस मूल भावना को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य शासकीय योजनाओं को केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रखकर आम जन के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाना है। शासन के सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन और किसान की अनथक मेहनत के इस संगम ने एक छोटे से भू-खंड को आर्थिक आत्मनिर्भरता के मजबूत मॉडल में बदल दिया है।       ​आज गुलाब पटेल न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर दूसरों के लिए भी एक मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि यदि सही योजना और दृढ़ संकल्प का साथ मिले, तो ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी समृद्धि का द्वार खोल सकता है।

सेवा संकल्प अभियान: धमतरी में दिव्यांग बालिकाओं को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक

सेवा संकल्प अभियान: धमतरी में दिव्यांग बालिकाओं को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक नुक्कड़ नाटक से दिया नशामुक्ति का संदेश ​रायपुर,       राज्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत धमतरी स्थित शासकीय श्रवण बाधितार्थ बालिका विद्यालय में समाज कल्याण विभाग द्वारा एक दिवसीय विभागीय प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बालिकाओं को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में नशामुक्त वातावरण का निर्माण करना था। ​योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी        शिविर में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित विभिन्न हितग्राहीमूलक एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया तथा मिलने वाले लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शासन की मंशा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है। बालिकाओं को उपलब्ध अवसरों और अधिकारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सही जानकारी ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। ​नुक्कड़ नाटक बना आकर्षण का केंद्र       कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नशामुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति रही। कलाकारों ने अपने संवादों और जीवंत अभिनय के माध्यम से नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक तथा सामाजिक दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। नाटक के जरिए संदेश दिया गया कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सामूहिक दायित्व है।        उपस्थित ​प्रमुख जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने अंत में  लोगों को नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने और दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प दिलाया।

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। पारंपरिक उल्लास और आत्मीय वातावरण में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों से भेंट कर उन्हें तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है। माताओं-बहनों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि तीज का पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना का अवसर है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी माताओं-बहनों और उनके परिवारों के सुखी, समृद्ध और स्वस्थ जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज का पर्व भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन आज इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों के बीच तीज मिलन का अवसर अत्यंत सुखद और आत्मीय है। मुख्यमंत्री निवास में भी तीज के अवसर पर प्रदेशभर से आई बहनों के साथ पर्व का उल्लास साझा करने का अवसर मिला था। हमारी परंपराओं की यही खूबसूरती है कि वे हमें परिवार और समाज से जोड़ती हैं तथा आपसी प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करती हैं।  सनातन संस्कृति में मातृशक्ति को मिला है सर्वोच्च सम्मान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। हमारे वेदों, पुराणों और सामाजिक परंपराओं में नारी के सम्मान और उसकी गरिमा का संदेश निहित है। हमारी संस्कृति कहती है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”, अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां परिवार की पहली शिक्षक और संस्कारों की आधारशिला होती है। माताओं-बहनों के परिश्रम, त्याग और आशीर्वाद से ही परिवार मजबूत होता है और मजबूत परिवार से सशक्त समाज तथा समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है। इसलिए राज्य सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का हितग्राही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बराबर का सहभागी मानकर कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस योजना से माताओं-बहनों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव उन्हें विशेष संतोष देता है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के साथ बच्चों की पढ़ाई, बचत और छोटे-छोटे स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं। कोई बहन सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर बेटी का भविष्य संवार रही है तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर अपने हुनर को आजीविका में बदल रही है। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला को आगे बढ़ने के लिए अवसर, संसाधन और आवश्यक सहयोग मिले। जब हमारी माताएं-बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो परिवार मजबूत होगा और पूरे प्रदेश की प्रगति को नई गति मिलेगी। 13.85 लाख लखपति दीदियां बनीं महिला सशक्तिकरण की नई पहचान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि माताओं-बहनों को स्थायी आजीविका, कौशल और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुखद तस्वीर है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं। अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से मिले आर्थिक संबल और बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी न केवल परिवारों को समृद्ध बना रही है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को देश-दुनिया में मिलेगी नई पहचान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट लोककला, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यहां की सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी ताकत है। इसे सहेजने के साथ नई पीढ़ी और देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 650 करोड़ रुपए की लागत से फिल्म सिटी तैयार की जा रही है। इससे छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण और शूटिंग की संभावनाओं का विस्तार होगा। स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार तथा प्रतिभा प्रदर्शन के नए अवसर तैयार होंगे और प्रदेश के पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में कलाकारों का अमूल्य योगदान है। हमारे कलाकार अपनी प्रतिभा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सुगंध और यहां की परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहेगी। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर मुख्यमंत्री  साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके 15 वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण और विकास … Read more

SIM किसी और को देना पड़ सकता है भारी, जेल के साथ 50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान

रायपुर. अगर अपने पहचान दस्तावेज से सिम लेकर दूसरे व्यक्ति को बेचना या किराये पर दिया है, तो सावधान हो जाएं. दूरसंचार विभाग की ओर से सख्त एडवाइजरी जारी कर मोबाइल यूजर्स को सतर्क किया है. टेलिकॉम पहचान और सिम कार्ड से जुड़ी जानकारी के गलत इस्तेमाल को गंभीर अपराध बताया है. फर्जी आईडी से सिम खरीदने-बेचने या मोबाइल के आईएमईआई (आईएमईआई) नंबर से छेड़छाड़ करने पर 3 साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. दूरसंचार विभाग के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों के जरिए SIM कार्ड लेना, किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर मोबाइल कनेक्शन हासिल करना या अपने नाम पर जारी SIM को धोखाधड़ी के लिए किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध कराना कानूनी अपराध है. ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. यह सख्त एडवाइजरी छत्तीसगढ़ में सामने आए बड़े साइबर फ्रॉड के बाद जारी किया गया है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों में 410 से ज्यादा लोगों के दस्तावेज का इस्तेमाल कर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम निकाला जाना सामने आया है. इन सिम का इस्तेमाल बाद में साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा. एमपी के मैहर निवासी रामकृष्ण कुशवाहा को पुलिस ने दबोचा था. वह 4 साल पहले रायपुर आकर गुढ़ियारी में रह रहा था. उसने एक युवती से शादी की और उसके नाम से 3 कंपनियों की सिम बेचने लगे. वह सिम लेने के लिए आने वाले ग्राहकों का बायोमैट्रिक मशीन पर दो बार अंगूठा लगावाकर दो सिम जारी करता था. इसमें से एक ग्राहक और दूसरा अपने पास रखता था. आरोप है कि ऐसे 410 से अधिक सिम को  गोवा में साइबर ठगों को बेच दिया गया. एक व्यक्ति के नाम पर सिर्फ 9 सिम भारत में आमतौर पर किसी एक व्यक्ति अपने नाम पर सिर्फ 9 मोबाइल कनेक्शन रह सकता है. कुछ राज्यों में नियम अलग हैं, जैसे जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सीमा 6 है. सरकार ने 23 अगस्त से डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म में एक नया फीचर भी जोड़ा है, जिसके जरिए तय सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन वाले मामलों की पहचान के लिए फोटो समेत अन्य विवरणों का मिलान किया जा सकेगा. इस व्यवस्था को लागू करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को अपने सिस्टम को सरकारी प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है.

चंपारण्य बनेगा राष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र, ₹73.42 करोड़ से होगा विकास

चंपारण्य में ₹73.42 करोड़ के महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को केंद्र की मंजूरी राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम – राजेश अग्रवाल रायपुर  छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित “वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स” परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति  CSMC ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं  संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु वल्लभाचार्य जी से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा। परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

केंद्रीय टास्क फोर्स व प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की समीक्षा : कैबिनेट सचिव ने राज्यों के साथ की वीडियो कॉन्फ्रेंस

रायपुर केन्द्रीय कैबिनेट सचिव  टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और केंद्रीय टास्क फोर्स से जुड़े प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील ने नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से इस समीक्षा बैठक में भाग लिया और राज्य में प्रमुख केन्द्रीय परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स राजमार्ग, रेलवे लाइन्स, पावर ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी प्रमुख ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की गई।   बैठक में राज्यों के मुख्य सचिवों को केंद्रीय योजनाओं के तहत प्राप्त फंड्स का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित कर उपयोगिता प्रमाण-पत्र केंद्र सरकार को त्वरित भेजने और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की प्रगति की नियमित समीक्षा विभागीय स्तर पर करने के संबंध में चर्चा हुई। टास्क फोर्स की बैठक में केन्द्र सरकार के विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी विभागीय योजनाओं की राज्यों में हो रही प्रगति के बारे में मुख्य सचिवों से विस्तार से चर्चा की।

किरण सिंह देव की होगी वापसी, इलाज के बाद कल लौटकर संभालेंगे BJP की कमान

रायपुर. सड़क हादसे में घायल छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव दिल्ली में उपचार के बाद कल छत्तीसगढ़ लौटेंगे। वे दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ निवास से रवाना होकर शाम तक रायपुर पहुंचेंगे। इसके साथ ही BJP प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की अटकलों पर विराम लग गया है। किरण सिंह देव लौटते ही प्रदेश में भाजपा की कमान फिर से संभालेंगे। सड़क हादसे में घायल हुए थे किरण सिंह देव बता दें कि किरण सिंह देव 29 जुलाई को परिवार के साथ बागेश्वर धाम से लौट रहे थे। इस दौरान उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के तालबेहट क्षेत्र में झांसी-ललितपुर नेशनल हाईवे-44 पर उनकी इनोवा आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई थी। हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए दिल्ली ले जाया गया, जहां मेदांता अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया। हादसे के बाद से उनका उपचार दिल्ली में ही चल रहा था। अब उपचार पूरा होने के बाद वे वापस छत्तीसगढ़ लौट रहे हैं। दिल्ली में नेताओं ने की मुलाकात इलाज के दौरान दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ निवास में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने किरण सिंह देव से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना था।

नवा रायपुर में मंत्री राजेश अग्रवाल का जनदर्शन, दूर-दराज से पहुंचे नागरिकों से किया संवाद

जनसेवा ही सुशासन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता : पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में जनदर्शन, दूर-दराज से पहुंचे नागरिकों से आत्मीय संवाद कर सुनीं समस्याएं और मांगें अधिकारियों को प्रकरणों के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने दिए निर्देश रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में जनदर्शन के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों एवं आगंतुकों से भेंट की। इस दौरान उन्होंने आमजन से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी मांगों, समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित विषयों पर आवश्यक जानकारी ली। जनदर्शन में दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी विभिन्न समस्याओं एवं आवश्यकताओं से मंत्री अग्रवाल को अवगत कराया। मंत्री अग्रवाल ने प्रत्येक व्यक्ति की बात को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित अधिकारियों को प्रकरणों का निराकरण करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को आमजन की शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के साथ ही प्रकरणों पर समय-सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए तथा पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ समय पर मिलना सुनिश्चित करें। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि जनसेवा ही सुशासन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रदेश की जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। आमजन से निरंतर संवाद के माध्यम से उनकी आवश्यकताओं को समझते हुए प्रभावी निराकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जनदर्शन के माध्यम से नागरिकों को अपनी बात सीधे रखने का अवसर मिल रहा है और प्राप्त प्रकरणों पर संबंधित विभागों के अधिकारियों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। जनदर्शन के दौरान नागरिकों ने अपनी समस्याओं के साथ विभिन्न सुझाव भी साझा किए। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि आमजन के सुझाव शासन की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य कर रही है।