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अटलजी का जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन और लोकहित के प्रति समर्पण का अद्वितीय उदाहरण : मुख्यमंत्री

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी जयंती के अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटलजी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहा। लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, सुशासन की स्थापना और जनकल्याण के व्यापक दृष्टिकोण के कारण वे देशवासियों के हृदय में सदैव अमर रहेंगे। वे केवल महान राजनेता ही नहीं, बल्कि संवेदनशील कवि, दूरदर्शी राजनेता और करुणा से भरे जननायक थे, जिन्होंने राजनीति को जनसेवा का सशक्त माध्यम बनाया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटलजी के नेतृत्व में देश ने विकास, पारदर्शिता और सुशासन की नई दिशा प्राप्त की।  उनका समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने का संकल्प आज भी हमारी शासन-नीति का केंद्रीय आधार है। यही भावना छत्तीसगढ़ सरकार के प्रत्येक कार्यक्रम, योजना और निर्णय का मार्गदर्शन करती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन को सशक्त बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार, पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध सेवाओं की आपूर्ति और जनविश्वास की पुनर्स्थापना के प्रयास लगातार जारी हैं। यह यात्रा अटलजी के विचारों, आदर्शों और प्रेरणा से ऊर्जा प्राप्त करती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अटल बिहारी वाजपेयी के आदर्शों—ईमानदारी, संवेदनशीलता, संवाद और समावेशी विकास—को अपने जीवन और कार्य में अपनाएँ तथा विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। इस अवसर पर विधायक श्री किरण सिंह देव उपस्थित थे।

कांकेर घटना पर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान: धर्मांतरण बड़ा खतरा, कैंसर भी पीछे

रायपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज भिलाई में पंच दिवसीय हनुमंत कथा करने छत्तीसगढ़ पहुंचे. रायपुर एयर पोर्ट पर उतरते ही उन्होंने पत्रकारों से चर्चा के दौरान धर्मांतरण को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत में कैंस से बड़ा खतरा धर्मांतरण है. बता दें, भिलाई में आज से पंच दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान एक दिवसीय दिव्य दरबार भी लगाया जाएगा. इस दौरान उन्होंने कहा कि हम भारत में एक संदेश देना चाहते हैं कि यदि भारत में बांगलादेश जैसी स्थिति नहीं चाहते, तो यही समया है, सही समय है. अगर हिन्दू एकजुट नहीं हुआ, तो वह दिन दूर नहीं… जो बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हुआ, वह भारत देश और छत्तीसगढ़ के चौक-चौराहों में देखा न जाए. पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कांकेर में धर्मांतरण पर मचे बवाल को लेकर भी बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कांकेर में जो हुआ, वह अच्छा नहीं हुआ. लेकिन हिंदुओं ने एकता दिखाई उसके लिए धन्यवाद !  उन्होंने आगे कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में शांति और उन्नति हो… भारत विश्व गुरु बने. अंत में उन्होंने कहा कि जबतक भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं बन जाएगा, तब तक हम यात्रा करते रहेंगे.

क्रिसमस से पहले मैग्नेटो मॉल में हंगामा, भीड़ ने सजावट को पहुंचाया नुकसान

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मैग्नेटो मॉल में बुधवार को एक चौंकाने वाली घटना हुई। लाठी-डंडों से लैस करीब 80-90 लोगों की भीड़ मॉल में घुस आई और क्रिसमस की सजावट को तहस-नहस कर दिया। यह घटना उस दिन हुई जब राज्य में धार्मिक रूपांतरण के आरोपों के खिलाफ बंद का आह्वान किया गया था। भीड़ ने नहीं मानी सुरक्षा गार्ड्स की रोक खबर के मुताबिक, भीड़ ने क्रिसमस ट्री, लाइट्स और अन्य सजावट को तोड़ दिया। सुरक्षा गार्ड्स ने रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। मॉल के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'हम पिछले 16 साल से हर बंद का समर्थन करते आए हैं, लेकिन ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा। भीड़ ने हमें धमकाया और हिंसा की।' एक अन्य कर्मचारी ने बताया, 'कई महिलाएं रोने लगीं। जो भी रोकने की कोशिश करता, भीड़ उस पर टूट पड़ती। लोग बार-बार चिल्ला रहे थे कि वे सांता नहीं देखना चाहते। फिल्म देखने आए दर्शक डरकर भागने लगे।' बंद की वजह सरवा हिंदू समाज ने कथित धार्मिक रूपांतरण के खिलाफ राज्यव्यापी बंद बुलाया था। इसका मुख्य कारण कांकेर जिले के बड़ेतेवड़ा गांव में हुआ विवाद था। 16 दिसंबर को गांव के सरपंच राजमन सलाम ने अपने पिता का शव ईसाई रीति से अपनी निजी जमीन पर दफनाया। इससे नाराज भीड़ ने प्रेयर हॉल में तोड़फोड़ की और सामान जला दिया। 18 दिसंबर को दो समुदायों में झड़प हुई। पत्थरबाजी में 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी सहित कई लोग घायल हो गए। बाद में कानूनी प्रक्रिया से शव निकालकर कब्रिस्तान में दफनाया गया। इस घटना ने पूरे राज्य में तनाव बढ़ा दिया। राज्य में बंद का मिला-जुला असर बंद को शहरों में अच्छा समर्थन मिला। रायपुर सहित कई शहरी इलाकों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर कम रहा। कुछ जगहों पर तोड़फोड़ की छिटपुट घटनाएं हुईं, लेकिन ज्यादातर इलाकों में शांति बनी रही।  

ठिठुरन बढ़ेगी! छत्तीसगढ़ में 3 दिन में लुढ़केगा पारा, उत्तर-मध्य हिस्सों में शीतलहर का असर

रायपुर छत्तीसगढ़ में ठंड का असर लगातार बना हुआ है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार प्रदेश के कुछ हिस्सों में शीतलहर चली. अगले 3 दिनों में प्रदेश के न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक हल्की गिरावट होने और उत्तर-मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में शीतलहर चलने की संभावना जताई है. बीते दिन ऐसा रहा प्रदेश का मौसम मौसम विभाग के अनुसार दुर्ग जिले के एक–दो स्थानों पर शीतलहर चली है. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ. रायपुर का तापमान सामान्य के आसपास राजधानी रायपुर में बुधवार को अधिकतम तापमान 28.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक है. वहीं न्यूनतम तापमान 12.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.7 डिग्री कम है. शहर में दिन के समय हल्के बादल और शाम के समय ठंडक महसूस की गई. हवा की औसत गति 2 किमी प्रति घंटा रही. रायपुर में ऐसा रहेगा मौसम मौसम विभाग ने बताया कि 25 दिसंबर को रायपुर शहर में कुहासा छाए रहने की संभावना है. इस दिन अधिकतम तापमान लगभग 28 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. मौसम विभाग ने लोगों को ठंड को देखते हुए सावधानी बरतने और आवश्यक एहतियात अपनाने की सलाह दी है. प्रदेश में मौसम शुष्क, बारिश के आसार नहीं मौसम विभाग ने बताया कि पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई. अगले एक से दो दिनों तक भी प्रदेश में सूखा मौसम बने रहने की संभावना है.

कोरबा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने पहुंचे डीआरएम, धीमे कामकाज पर अधिकारियों को लगाई फटकार

कोरबा रेलवे स्टेशन कोरबा में यार्ड री-मॉडलिंग का काम शुरू करने की प्रक्रिया एक साल से जारी है। मानिकपुर कोल साइडिंग व इमलीड्रङ्ग्गू रेलवे फाटक पर बनने वाला ओवरब्रिज यार्ड विस्तार में बड़ा बाधक है। यह काम तीन माह चलेगा। विसंगतियों से हम कैसे निपटेंगे, ताकि उसका कोई नुकसान रेलवे और यात्रियों को न हो, इसको ध्यान में रखना होगा। ऐसी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हुए हम यार्ड री-मॉडलिंग के काम में तेजी कैसे ला सकते हैं, यह देखना होगा। यह बातें बुधवार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) राकेश रंजन ने कहीं। वे पदभार संभालने के दूसरे ही दिन कोरबा प्रवास पर पहुंचे थे। उन्होंने इमलीडुग्गू रेलवे फाटक के समीप यार्ड री-मॉडलिंग के लिए बनाए गए मैप प्लान को देखने के बाद इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते कोल डिस्पैच के दबाव से राहत पाने क्या प्रयास किए जा सकते हैं, यह सोचना सभी की जिम्मेदारी है। स्टेशन में क्रू लॉबी का निरीक्षण करने के दौरान रनिंग स्टाफ क्रू लॉबी में स्टाफ से चर्चा किया चर्चा कर परेशानियों को जाना।  उन्हें ड्यूटी इमानदारी का सजगता के साथ निभाने को कहा। डीआरएम रंजन ने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशन पर चल रहे कामों की धीमी गति पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने प्लेटफार्म पर चल रहे काम का जायजा लिया। अधूरे एफओबी, पुराने एआरएम रूम के पास सेफ्टीवॉल की कमी, प्लेटफार्म पर बिखरी निर्माण सामग्री को व्यवस्थित करने और अधूरे कामों को जल्द पूरा करने कहा। डीआरएम रंजन गेवरारोड स्टेशन भी गए। यहां स्टेशन परिसर के साथ कोल साइडिंग को देखा। गेवरारोड स्टेशन के संभावित विस्तार कार्यों की जानकारी ली। पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर की लाइन से जुड़ने की योजना के तहत लाइन विस्तार और यार्ड को नए सिरे से विकसित करने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा की। निरीक्षण कर शाम 4 बजे बिलासपुर लौट गए। डीआरएम के प्रवास पर रेल संघर्ष समिति कोरबा के संयोजक रामकिशन अग्रवाल ने कहा कि नए डीआरएम रंजन पहली बार कोरबा आए। उनके प्रवास की योजना अधिकारियों ने पहले से ही बना रखी थी, जिसे गोपनीय रखकर यात्रियों के हितों को दरकिनार किया गया। समिति का प्रतिनिधि मंडल उनसे मिलकर यात्री समस्याओं पर चर्चा कर सुझाव देना चाहता था।

पदभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षक रडार पर, युक्तियुक्तकरण के बाद गिरेगी गाज

रायपुर शिक्षक युक्तियुक्तकरण को करीब छह माह हो गए है. इसके बाद भी जिले के 11 शिक्षकों ने नए स्कूलों में अभी तक ज्वाइनिंग नहीं दी है. जबकि उनका अभ्यावेदन अमान्य घोषित हो चुका है. ऐसे शिक्षकों के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है. इसलिए जेडी ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए जांच दल का गठन किया है. जिसका जिम्मा डीईओ और बीईओ को सौंपा गया है. इससे पदभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों में हड़कम्प मच गया है. शासन के आदेश पर जिले में जून माह में शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया. इसमें शहर और आसपास के स्कूलों में आवश्यकता से अधिक पदस्थ शिक्षकों को शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय स्कूल में भेजा गया. जिले में करीब साढ़े सात सौ शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया. इसके खिलाफ कई शिक्षक हाईकोर्ट गए. वहां से कई को राहत मिली. वहीं जिला और संभाग स्तरीय कमेटी के समक्ष भी उन्होंने हाईकोर्ट के निर्देश पर अभ्यावेदन प्रस्तुत किया. इसमें जिले के मिडिल स्कूल के 11 शिक्षकों को राहत नहीं मिली. उनका आवेदन अमान्य कर दिया गया. इसके बाद भी उन्होंने युक्तियक्तकरण के छह माह बाद भी नए स्कूलों में ज्वाइनिंग नहीं दी है. शासन के आदेश पर उनका वेतन पहले से रोका जा चुका है. इसके बाद भी शिक्षक नए स्कूल में उपस्थित दर्ज नहीं करा रहे है. ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है. इसके लिए जेडी आरपी आदित्य ने संभाग के पदभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश डीईओ और बीईओ को सौपा है. उसके खिलाफ ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कहीं जा रही है. जिसमें उनकी नौकरी भी जा सकती है. निलंबित नहीं होंगे शिक्षक सीधे किए जाएंगे बर्खास्त युक्तियुक्तकरण करने के बाद दूर-दराज के स्कूल में शिक्षक जाना नहीं चाह रहे है. उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश जारी किया गया है. इसके बाद भी जिले से कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी. शिक्षकों को निलंबित करने से उनको फायदा है. इसलिए जेडी ने उनके खिलाफ जांच दल बनाकर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. जिसमें शासन को बर्खास्ती की अनुशंसा भी की जा सकती है. नहीं तो क्रेक सर्विस भी करने की बात कहीं जा रही है. प्राइमरी स्कूल के 9 शिक्षकों पर भी होगी कार्रवाई वहीं जिले के प्राइमरी स्कूल के 9 शिक्षकों ने युक्तियुक्तकरण में नई पोस्टिंग मिलने के बाद भी पदभार ग्रहण नहीं किया गया है. उनके खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी को दल बनाकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी है. लेकिन डीईओ उस ओर ध्यान नहीं दे रहे है. संयुक्त संचालक ने डीईओ को पदभार ग्रहण नहीं करने वाले सहायक शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए है. इसलिए अब उनके खिलाफ भी जल्द जांच दल बनेगा.

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता: कंधमाल में सीसी मेंबर गणेश मारा गया

जगदलपुर ओड़िसा के कंधमाल जिले में नक्सलियों के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन में जवानों ने 2 महिला और 4 पुरुष सहित 6 नक्सलियों को मार गिराया है. मारे गए नक्सलियों में सेंट्रल कमेटी (CC) मेंबर गणेश उईके के अलावा एरिया कमेटी मेंबर (ACM) बारी उर्फ राकेश शामिल है. कंधमाल जिले के चाकापाड़ इलाके में जवानों की नक्सलियों से जबरदस्त मुठभेड़ बीती रात से जारी है. बीती रात जहां सुरक्षा बल के जवानों ने दो नक्सलियों को मार गिराया था, जिनमें सुकमा का रहने वाला एरिया कमेटी मेंबर (ACM) और बीजापुर का अमृत दलगम सदस्य बारी उर्फ राकेश शामिल था. दोनों पर नक्सलियों पर कुल 23 लाख 65 हजार रुपए का इनाम घोषित था. मौके से दो हथियार बरामद किए गए. वहीं आज सुबह मुठभेड़ में दो महिला और दो पुरुष नक्सलियों को मार गिराने में कामयाबी हासिल की. इनमें से एक सीसी मेंबर गणेश उईके भी शामिल है. गणेश उईके की 7 राज्यों में तलाश थी. तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला गणेश उईके साउथ सब जोनल का इंचार्ज था. ऑपरेशन में ओडिशा की स्पेशल फ़ोर्स SOG की 20 टीमें व सीआरपीएफ की 3 टीमें मौजूद उड़ीसा पुलिस के DIG ऑपरेशन IPS अखिलेश्वर सिंह व कंधमाल एसपी पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. मौक़े से दो नग INSAS राइफल व एक नग 303 रायफल बरामद किया है. DIG कर रहे मॉनिटरिंग ओडिशा पुलिस के DIG ऑप्श अखिलेश्वर सिंह ने मुठभेड़ को लेकर लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बताया कि स्पेशल इंटेलिजेंस विंग से मिली जानकारी के आधार पर, कंधमाल जिले के चाकपाड पुलिस स्टेशन इलाके और गंजाम जिले के सीमावर्ती इलाकों में रामभा जंगल रेंज में 23 टीमों (20 SOG, 2 CRPF, 1 BSF) का एक जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया गया। तीन नक्सलियों का पहचान होना बाकी इस दौरान कई बार गोलीबारी हुई। इलाके की तलाशी के बाद, वर्दी पहने चार माओवादियों (दो पुरुष और दो महिलाएं) के शव बरामद किए गए, साथ ही दो INSAS राइफल और एक .303 राइफल भी मिली। मारे गए माओवादियों में से एक की पहचान गणेश उइके के रूप में हुई है, जो सेंट्रल कमेटी का सदस्य और ओडिशा में नक्सली संगठन का प्रमुख था। बाकी तीन की पहचान अभी होनी बाकी है। गणेश पर 1.1 करोड़ रुपये का इनाम था। तीन माओवादी में दो महिलाएं भी शामिल इस ऑपरेशन में मारे गए तीन माओवादी में दो महिलाएं भी शामिल थीं, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस का कहना है कि इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पेशल इंटेलिजेंस विंग से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया था। जब सुरक्षा बलों ने जंगल में प्रवेश किया, तो नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में चारों नक्सलियों को मार गिराया गया। कौन था गणेश उइके? बता दें कि गणेश उइके सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था और ओडिशा में प्रतिबंधित संगठन का मुखिया माना जाता था। उसके सिर पर 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था। गणेश उइके की उम्र 69 साल थी और वो तेलंगाना के नालगोंडा जिले के चेंदूर मंडल के पुललेमाला गांव का रहने वाला था। गणेश उइके को पक्का हनुमंतु, राजेश तिवारी, चमरू और रूपा जैसे कई नामों से जाना जाता था। बाकी तीन माओवादी, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। जिनकी पहचान अब तक नहीं हो पाई है। पुलिस का कहना है कि इलाके में और भी खोजबीन की जा रही है।

धान खरीदी घोटाले पर कार्रवाई, लापरवाह पाए गए 2 पटवारी सस्पेंड

बलरामपुर धान खरीदी कार्य में लापरवाही करने वाले 2 पटवारियों के खिलाफ बलरामपुर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया है. कलेक्टर ने तहसील रामचंद्रपुर में पदस्थ पटवारी बंधन राम और तहसील रामानुजगंज में पदस्थ पटवारी विजय यादव को निलंबित कर दिया है. जारी आदेश में बताया गया है कि धान खरीदी वर्ष 2025–26 के दौरान संबंधित पटवारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गई, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियमों के विपरीत है. इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों पटवारियों को निलंबित किया है. निलंबन अवधि में पटवारी बंधन राम का मुख्यालय तहसील कार्यालय कुसमी तथा पटवारी विजय यादव का मुख्यालय तहसील कार्यालय शंकरगढ़ निर्धारित किया गया है. आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान दोनों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा.

डिप्टी सीएम विजय का बड़ा फैसला: मंत्रियों व पुलिस अधिकारियों को गॉर्ड ऑफ ऑनर देने की परंपरा समाप्त

रायपुर/कबीरधाम छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा की पहल पर एक एतिहासिक बदलाव हुआ है। राज्य मत्रियों और पुलिस ऑफिसर्स को गार्ड ऑफ ऑनर देने की परंपरा खत्म कर दी गई है। गृह विभाग ने गार्ड ऑफ ऑनर के नियमों में संशोधन किए जाने का आदेश जारी कर दिया गया है। यह तत्काल प्रभाव से लागू  हो गया है। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने अपने निवास में प्रेस ब्रीफिंग ली। उन्होंने कहा कि गार्ड ऑफ ऑनर की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर इसमें वर्तमान स्थिति में आवश्यकतानुसार बदलाव किया गया है। पुलिस बल को अनावश्यक औपचारिकताओं से मुक्त कर उनकी कार्यक्षमता का उपयोग उनके मूल दायित्वों के पालन के लिए यह संशोधन किया है। इसका उद्देश्य पुलिस बल की कार्यक्षमता का उपयोग कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने और औपनिवेशिक सोच से जुड़ी परंपराओं को खत्म करना है।  शर्मा ने स्वयं विभाग के अधिकारियों को गार्ड ऑफ ऑनर की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर इसमें वर्तमान स्थिति में आवश्यकतानुसार बदलाव करने के निर्देश दिए थे। जिसके परिपालन में गृह विभाग ने पुलिस बल को अनावश्यक औपचारिकताओं से मुक्त कर उनकी कार्यक्षमता का उपयोग उनके मूल दायित्वों के पालन के लिए यह संशोधन किया है। सामान्य दौरों में सलामी गारद समाप्त जारी आदेश के तहत राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन-प्रस्थान एवं निरीक्षण के दौरान अब गृहमंत्री, समस्त मंत्रीगण, पुलिस महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) नहीं दिया जाएगा। जिला भ्रमण, दौरे या निरीक्षण के समय पूर्व में प्रचलित सलामी व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। इससे पुलिस बल का समय और ऊर्जा का प्रभावी उपयोग सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा जनसेवा के कार्यों में हो सकेगा। राष्ट्रीय एवं राजकीय आयोजनों में यथावत व्यवस्था यह प्रतिबंध राष्ट्रीय और राजकीय समारोहों पर लागू नहीं होगा। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), शहीद पुलिस स्मृति दिवस (21 अक्टूबर), राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर), राजकीय समारोहों तथा पुलिस दीक्षांत परेड जैसे अवसरों पर औपचारिक सलामी गारद की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी। संवैधानिक पदों के लिए प्रोटोकॉल जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रोटोकॉल के अनुसार संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों एवं विशिष्ट अतिथियों के लिए सलामी गारद की व्यवस्था पहले की तरह यथावत रहेगी। यह निर्णय शासन की प्रशासनिक सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता और आधुनिक, जनोन्मुखी व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पुलिस बल की कार्यक्षमता में सकारात्मक सुधार होगा।

जशपुर को बड़ी सौगात: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 11 सिंचाई परियोजनाओं को दी मंजूरी, ₹199.50 करोड़ स्वीकृत

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर को दी ऐतिहासिक सिंचाई सौगात किसानों के हित में 11 परियोजनाओं के लिए लगभग 199 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन के दो वर्षों के दौरान जशपुर जिले के कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। जिले में किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 199 करोड़ 49 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय को स्थायी मजबूती मिलेगी। प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप जशपुर जिले में बैराज, एनीकट, तालाब एवं व्यपवर्तन योजनाओं के निर्माण, मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से जिले के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और वर्षा पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। जशपुर जिले को स्वीकृत प्रमुख सिंचाई योजनाओं में मैनी नदी, बगिया स्थित बैराज उद्वहन सिंचाई योजना के लिए 79 करोड़ 37 लाख रुपये, कुनकुरी ईब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य हेतु 37 करोड़ 9 लाख रुपये, सहसपुर तालाब योजना के लिए 4 करोड़ 27 लाख रुपये तथा डुमरजोर (डुमरिया) व्यपवर्तन योजना हेतु 10 करोड़ 36 लाख रुपये की स्वीकृति शामिल है। इसी क्रम में तुबा एनीकट योजना के लिए 2 करोड़ 67 लाख रुपये, बारो एनीकट योजना हेतु 7 करोड़ 6 लाख रुपये, मेडरबहार तालाब योजना के लिए 5 करोड़ रुपये, पमशाला एनीकट योजना हेतु 28 करोड़ 2 लाख रुपये, कोनपारा तालाब (दलटोली डेम) के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के लिए 3 करोड़ 47 लाख रुपये, अंकिरा तालाब योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार हेतु 3 करोड़ 47 लाख रुपये तथा कोकिया व्यपवर्तन योजना के लिए 16 करोड़ 17 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन सिंचाई परियोजनाओं के पूर्ण होने से जिले के अनेक ग्रामों में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को खेती के लिए नियमित पानी मिलेगा, फसल उत्पादन बढ़ेगा और कृषि को स्थायी आजीविका का मजबूत आधार प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सिंचाई, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। जशपुर जिले को मिली ये सिंचाई सौगातें सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनकल्याणकारी नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इन योजनाओं से जिले के किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।