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राष्ट्रपति का सम्मान: छत्तीसगढ़ को आदि कर्मयोगी अभियान और पीएम जनमन योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए किया गया सम्मानित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मंत्री नेताम ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं राष्ट्रपति के हाथों राज्य सरकार की ओर से प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने किया सम्मान ग्रहण रायपुर, छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी सशक्त पहचान दर्ज कराई है। आदि कर्मयोगी अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए राज्य को आज भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य’ के रूप में सम्मानित किया गया। यह सम्मान राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया। राज्य सरकार और जनजातीय विकास विभाग की ओर से यह सम्मान प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने राष्ट्रपति के करकमलों से प्राप्त किया। प्रमुख सचिव  बोरा ने इस मौके पर पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में जनजातियों और विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए किए जा रहे कार्यो के संबंध में विस्तार से प्रस्तुती दी। वहीं मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने जिलों में जनजातियों के विकास में किए जा रहे कार्यो की जानकारी दी। कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुआल ओराम तथा राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके, जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव विभु नायर भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर समस्त विभागीय अधिकारियों और फील्ड टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान राज्य के उन कर्मयोगियों के परिश्रम और समर्पण की पहचान है, जिन्होंने जनजातीय सशक्तिकरण को धरातल पर साकार किया है। कार्यक्रम में धमतरी और कोरिया जिलों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही जनजाति विभाग के स्टेट ट्रेनर ललित शुक्ला को भी व्यक्तिगत श्रेणी में पुरस्कार प्राप्त हुआ। आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत मोहला-मानपुर, बालोद, दंतेवाड़ा और धमतरी जिलों को ‘स्क्रीन फेलिसिटेशन अवार्ड’ मिला, जो इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय सेवा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को राज्य के प्रत्येक जिले में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस मौके धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा, कोरिया कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, बालोद कलेक्टर दिव्या मिश्रा एवं दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत उपस्थित थे। आदिम जाति विकास मंत्री राम विचार नेताम ने इस उपलब्धि पर पूरे विभाग को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जनजातीय विकास विभाग ने जन-कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने कहा कि “यह पुरस्कार हमारे अधिकारियों, फील्ड कर्मचारियों और उन जनप्रतिनिधियों की मेहनत का परिणाम है, जो राज्य के दूरस्थ अंचलों तक योजनाओं की रोशनी पहुँचाने में दिन-रात जुटे हैं।” गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ ने हाल के वर्षों में जनजातीय शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण के क्षेत्र में कई अभिनव कदम उठाए हैं। आदि कर्मयोगी अभियान ने प्रशासनिक दक्षता को नई दिशा दी है, वहीं पीएम जनमन योजना ने आदिवासी समाज के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाया है। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के जनजातीय कल्याण विभागों के अधिकारी, परियोजना निदेशक, विकास सहयोगी संस्थाएँ और जनजातीय प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री साय ने 90 करोड़ रुपये के 26 निर्माण कार्यों का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में आयोजित सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के 13वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने 90 करोड़ रुपये की लागत से 26 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री साय ने जिले के प्रत्येक विकासखंड में 50-50 लाख रुपये की लागत से एक-एक सामुदायिक भवन के निर्माण तथा पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में ओबीसी विद्यार्थियों की सीटों में वृद्धि करने की घोषणा की। कार्यक्रम में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव तथा वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के विकास और हितों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग को संवैधानिक अधिकार प्रदान किए गए हैं, जिसके लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन केवल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि शासन की नीतियों और रीति-नीति से प्रभावित होकर जगदलपुर में आज 210 भटके हुए लोग मुख्यधारा में लौटे हैं तथा उन्होंने 153 हथियार भी जमा किए हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मोदी की गारंटी को पूर्ण करने के लिए प्रदेश सरकार पिछले 22 महीनों से  समर्पण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वायदे के अनुरूप तेंदूपत्ता खरीदी की कीमत में वृद्धि की, 3100 रुपये प्रति क्विंटल के मान से धान खरीदा, रामलला दर्शन योजना लागू की तथा मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना को पुनः प्रारंभ किया। इसके अतिरिक्त भी अनेक जनहितकारी और महत्वाकांक्षी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के स्थापना दिवस की बधाई देते हुए समाजजनों से शासन की योजनाओं से जुड़कर विकास में सहभागी बनने की अपील की। इससे पूर्व उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने समाजजनों को बधाई देते हुए समाज में अपनी भूमिका को और सशक्त करने का आह्वान किया। वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि पिछड़ा वर्ग समाज मेहनतकश और कर्मठ है। उन्होंने आने वाली पीढ़ी को बेहतर ढंग से शिक्षित करने और अपने अधिकारों के प्रति सजग एवं जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने जिले में संचालित ‘मावा मोदोल कोचिंग संस्थान’ की सराहना करते हुए अधिक से अधिक युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही। मुख्यमंत्री साय ने सर्व पिछड़ा वर्ग सम्मेलन के दौरान कुल 90 करोड़ 06 लाख 88 हजार रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें 56 करोड़ 51 लाख 40 हजार रुपये की लागत से 14 विकास कार्यों का शिलान्यास तथा 33 करोड़ 55 लाख 48 हजार रुपये की लागत से 12 निर्माण कार्यों का लोकार्पण सम्मिलित है।कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने ओबीसी वर्ग के तीन मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सांसद भोजराज नाग, अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी, भानुप्रतापपुर विधायक  सावित्री मंडावी, कांकेर विधायक आशाराम नेताम, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद, प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

सुरक्षा के साथ सौगात: दंतेवाड़ा पुलिस ने धनतेरस पर नागरिकों को लौटाए 107 मोबाइल

जगदलपुर धनतेरस के अवसर पर दंतेवाड़ा पुलिस ने लोगों को सौगात देते हुए उनके गुम मोबाइल लौटाए. लगभग 22,00,000 रुपए मूल्य के 107 मोबाइल को पड़ोसी राज्य ओडिशा के अलावा पड़ोसी जिले जगदलपुर, सुकमा, बीजापुर और कोंडागांव से बरामद किया गया था. पुलिस अधीक्षक आईपीएस गौरव राय, एएसपी आईपीएस राम कुमार वर्मन, एएसपी आईपीएस उदित पुष्कर एवं सायबर सेल नोडल अधिकारी डीएसपी ठाकुर गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिले में गुम मोबाइल तलाश अभियान चलाया गया था. गुम मोबाइल को CEIR पोर्टल के माध्यम से तलाश कर ‘‘इया आपलो सामान निया’’ कार्यक्रम के माध्यम से उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा गया. दन्तेवाड़ा पुलिस ने आम नागरिकों की सुगमता के लिए सायबर हेल्पलाइन नम्बर 9479151665 जारी किया है. इसके साथ भारत सरकार द्वारा जारी 1930 हेल्पलाइन नम्बर और cybercrime@gov.in में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. सायबर हेल्पलाइन दन्तेवाड़ा के नाम से व्हाटसप अकाउंट भी बनाया गया है, जिसमें आम नागरिक अपने शिकायत व्हाटसप के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं. सायबर अपराध होने की स्थिति में 24X7 सायबर हेल्पलाइन दन्तेवाड़ा 9479151665 एवं क्यूआर कोड को स्केन कर घर बैठे सम्पर्क कर अपने साथ हुए किसी भी तरह के सायबर अपराध की शिकायत दर्ज करने हेतु सम्पर्क कर सकते हैं, ताकि उनकी शिकायत सीधे सायबर पोर्टल में दर्ज कर दी जाए. प्रार्थी को व्हाटसप के माध्यम से ही एकनालेजमेंट नम्बर प्रदाय कर दिया जाएगा. इसके साथ दन्तेवाड़ा जिले के आमजन को सायबर अपराध व इसके रोकथाम के लिए जागरूक करने ‘‘सायबर संगवारी दन्तेवाड़ा’’ नामक व्हाटस्अप चैनल बनाया गया है, जिसमें प्रत्येक दिन सायबर अपराध एवं उसके रोकथाम संबंधी जानकारी प्रेषित की जाएगी, यही नहीं अननोन काल, संदिग्ध व्हाटसप काल, मेसेज, लिंक या आपके बैंक अकाउंट या सोशल मीडिया अकाउंट पर किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि होने पर साइबर हेल्पलाईन दन्तेवाड़ा 9479151665 से सम्पर्क कर शिकायत कर सकते हैं.

भूमि खरीद-फरोख्त में बड़ी राहत: साय सरकार ने ऋण पुस्तिका अनिवार्यता खत्म की

रायपुर जमीन से जुड़ी अगर रत्ती भर की भी कभी आपने कोई कार्रवाई की होगी, या कभी किसी किसान या जमीन के कारोबारी से पाला पड़ा हो तो आपको ऋण पुस्तिका की अहमियत अच्छे से पता है. इसको लेकर अच्छी यादें कम, बुरी यादें ज्यादा होंगी. अब साय सरकार ने ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लेते हुए जमीन की खरीदी-बिक्री में ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त कर दी है. पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा प्रदेश के तमाम जिला पंजीयकों को ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त करने के संबंध में पत्र जारी किया है. इसमें पंजीयकों से अधीनस्थों को जमीन की खरीदी-बिक्री में ऋण पुस्तिका की अनिवार्यकता समाप्त किए जाने के संबंध में निर्देशित करते हुए इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा गया है. किसानों-जमीन मालिकों की समस्या को इंगित करते हुए पत्र में लिखा गया है कि कृषि भूमि के राजस्व अभिलेख की प्रविष्टियों का इंद्राज कर किसानों को ऋण पुस्तिका जारी की जाती है. इसके अलावा किसानों को समय समय पर दिए जाने वाले ऋण, बंधक आदि का रिकार्ड भी ऋण पुस्तिका में दर्ज किया जाता है. वर्तमान में छत्तीसगढ़ में राजस्व अभिलेख ऑनलाइन कर दिए गए हैं, तथा भूमि पर भारित ऋण की प्रविष्टि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाती है. राजस्व अभिलेखों के गिरदावरी संबंधी रिकार्ड ऑनलाईन अद्यतन होते हैं जो ऋण पुस्तिका में अद्यतन नहीं हो पाते हैं. पंजीयन अधिकारियों के द्वारा रजिस्ट्री के समय ऑनलाइन प्रविष्टियों से डाटा मिलान किया जाता है, दस्तावेज में शुल्क अवधारण के या पंजीयन के उद्देश्य से ऋण पुस्तिका की कोई विशेष प्रासंगिता नहीं होती हैं. पंजीयन अधिकारियों के लिए ऋण पुस्तिका के तथ्यों की सत्यता जांचने का कोई प्रावधान नहीं है. प्रायः यह देखने में आया है कि भौतिक ऋण पुस्तिका की कमी अथवा अन्य कारणों से क्रेता किसानों को जमीन खरीदी-बिक्री के बाद नई ऋण पुस्तिकाएं समय पर नहीं मिल पाती हैं. इससे पक्षकारों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है तथा शासन की छवि भी खराब होती हैं. प्रदेश में दस्तावेजों का ऑनलाईन पंजीयन वर्ष 2017 से किया जा रहा है, तथा भुईयां से किसानों को नक्शा खसरा व बी-1 की प्रति भी ऑनलाइन प्राप्त हो रही है. विक्रेता के स्वामित्व के वेरिफिकेशन हेतु पंजीयन साफ्टवेयर का भुईया के साथ इंटीग्रेशन किया गया है, जिससे पंजीयन के समय दस्तावेज में वर्णित तथ्यों का राजस्व विभाग के डाटा से ऑनलाइन मिलान होने पर पंजीयन की कार्रवाई की जाती है. शासन द्वारा राजस्व विभाग के साफ्टवेयर में ऑटो म्यूटेशन का प्रावधान किया गया है. जिसके तहत् भूमि के पंजीयन के साथ ही स्वतः खसरे का बटांकन होकर नवीन बी-1 जनरेट हो जाता है, जिसमें क्रेता एवं विक्रेता के पास धारित भूमि की जानकारी स्वतः अद्यतन हो जाती है. प्रदेश में भूमि के पंजीयन से लेकर अन्य कार्य ऑनलाईन हो रहे हैं, जिसके तहत् पंजीयन प्रणाली को पेपरलेस भी किया गया है। भुईयां पोर्टल पर भूमि का बी-1, खसरा एवं नक्शा आदि ऑनलाइन उपलब्ध है, और मान्य भी है. अतः अब भौतिक रूप से प्रदाय की जा रही ऋण पुस्तिका या किसान किताब की पंजीयन हेतु आवश्यकता नहीं है. अतः दस्तावेजों के पंजीयन के लिए किसानों / पक्षकारों से ऋण पुस्तिका की मांग न की जाए. भूमि के स्वामित्व फसल विवरण एवं पंजीयन हेतु प्रासंगिक अन्य तथ्यों की पुष्टि ऑनलाइन डाटा से अनिवार्य रूप से किया जाए.

खुशखबरी: गन्ना किसानों को मिला 5.98 करोड़, दीपावली की खुशियाँ दोगुनी

कवर्धा/पंडरिया  दीपावली पर्व से पहले कबीरधाम जिले के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. राज्य शासन ने वर्ष 2024-25 के पेराई सत्र के लिए गन्ना विक्रेता किसानों को प्रति क्विंटल 39.90 रुपए की दर से 5 करोड़ 98 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है. यह राशि लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना मर्या. पंडरिया को प्राप्त हुई है. शासन से राशि मिलने के बाद कारखाना प्रबंधन द्वारा कुल 7,658 गन्ना उत्पादक किसानों के खातों में यह धनराशि सीधे बैंक के माध्यम से भेजने की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है. यह निर्णय दीपावली से ठीक पहले आने के कारण किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है. किसान अब त्योहार को और अधिक हर्षोल्लास से मना सकेंगे. किसानों ने इस निर्णय के लिए प्रदेश सरकार और विधायक भावना बोहरा के प्रति आभार व्यक्त किया है. कारखाना प्रबंधन ने बताया कि गन्ना किसानों को प्रोत्साहन राशि देने का उद्देश्य उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है. पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि किसानों के हित और खुशहाली ही उनकी प्राथमिकता है, और यह प्रयास उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है. त्योहार के इस मौसम में राज्य शासन की यह पहल निश्चित रूप से किसानों के लिए “दीपावली का बोनस तोहफा” साबित हो रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई रौनक देखने को मिलेगी.

ललमोतिया की दिवाली: मिट्टी के दीयों से रोशन होंगे घर-आंगन, इस बार होगा खास उत्सव

मिट्टी के दीयों से घर-आंगन जगमगाने वाली ललमोतिया की दिवाली इस बार होगी खास महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक मदद से बढ़ाया उत्पादन, दोगुनी हुई कमाई रायपुर अम्बिकापुर जिले के ग्राम कुमरता की कुम्हार महिला ललमोतिया की इस बार की दिवाली पहले से कहीं ज्यादा खास रहने वाली है। मिट्टी के दीये बनाकर लोगों के घरों को रोशन करने वाली ललमोतिया की मेहनत को अब शासन की महतारी वंदन योजना से नया सहारा मिला है। योजना से मिली आर्थिक सहायता के चलते उन्होंने इस वर्ष दीयों और कलशों की मात्रा बढ़ाई, जिससे उनकी कमाई दोगुनी हो गई है। ललमोतिया बताती हैं कि यह उनका पारंपरिक व्यवसाय है वे मिट्टी से दीये, कलश और अन्य सामग्री बनाकर जीवन-यापन करती हैं। पहले सीमित आमदनी के कारण उत्पादन बढ़ाना मुश्किल था, क्योंकि मिट्टी की व्यवस्था से लेकर भट्टी में पकाने तक हर चरण में मेहनत और खर्च दोनों अधिक लगते थे। लकड़ी, कोयला और अन्य सामग्रियों की व्यवस्था करने में भी कठिनाई होती थी।     उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाले एक हजार रुपये को उन्होंने बचाकर दिवाली के लिए उपयोग किया। इस राशि से आवश्यक सामग्री खरीदी और उत्पादन की मात्रा बढ़ा दिया। अब वे पहले की तुलना में अधिक दीये बना रही हैं, जिससे बिक्री और आय दोनों में वृद्धि हुई है। पहले वे केवल अपने गांव के बाजार में सामग्री बेचती थीं, पर अब नवानगर, दरिमा, कर्रा और टपरकेला जैसे आसपास के बाजारों में भी अपने उत्पाद बेचने जाती हैं। ललमोतिया कहती है कि पहले लगा था कि पारंपरिक काम छोड़कर मजदूरी करनी पड़ेगी, लेकिन महतारी वंदन योजना ने हमारी उम्मीदों को फिर से जगाया। इस योजना ने न केवल हमारी आर्थिक स्थिति सुधारी है बल्कि हमारी कला और परंपरा को भी संजोने का अवसर दिया है।     मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना उनके परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस बार उनकी भी दिवाली खुशियों और रोशनी से भरपूर होगी।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता बनवारी लाल अग्रवाल का निधन

कोरबा,  छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता बनवारी लाल अग्रवाल का 78 वर्ष की आयु शुक्रवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। कोरबा के मोतीसागर पारा के मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा नेता बनवारी लाल अग्रवाल छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। उन्होंने अपना जीवन संगठन, समाज और शिक्षा के प्रति समर्पित किया। उन्होंने शिक्षक के रूप में छत्तीसगढ़ उच्चतर माध्यमिक शाला बिलासपुर और सावन पब्लिक स्कूल, नई दिल्ली में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनसंघ के समय में की थी। 1990 के दशक में वे बिलासपुर भाजपा कमेटी के संगठन महामंत्री बने। इसके बाद उन्होंने कोरबा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। वे 1993 में पहली बार कटघोरा विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए और 1998 में भी पुनः चुने गए। विधानसभा में अपने कार्यकाल के दौरान वे लोकलेखा समिति, प्रश्न एवं संदर्भ समिति, आवास समिति और कार्य मंत्रणा समिति सहित कई महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य रहे। उन्हें छत्तीसगढ़ विधानसभा का उपाध्यक्ष बनने का अवसर भी मिला।  

छत्तीसगढ़: BMO रिश्वत लेते गिरफ्तार, एसीबी की बड़ी कार्रवाई

रायपुर एसीबी की टीम ने आज सक्ती जिले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) राजेंद्र कुमार पटेल को अपने ही कार्यालय के बाबू से 15000 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा. यह कार्रवाई बीएमओ कार्यालय डभरा के बाबू की शिकायत पर की गई. एसीबी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. एसीबी इकाई बिलासपुर की टीम ने पिछले डेढ़ साल में 35 ट्रैप की कार्रवाई है। 6 अक्टूबर 2025 को वार्ड नंबर 12 डभरा, जिला सक्ती निवासी उमेश कुमार चंद्रा बीएमओ कार्यालय डभरा में बाबू के पद पर पदस्थ है. उन्होंने एसीबी इकाई बिलासपुर में शिकायत की थी कि उसकी यात्रा भत्ता बिल की राशि 81000 रुपए का भुगतान पूर्व में हो चुका है. राशि भुगतान होने के एवज में डभरा के बीएमओ राजेंद्र कुमार पटेल ने उससे 32500 रुपए रिश्वत की मांग की. बीएमओ 16500 रुपए ले लिए हैं. 16000 रुपए की और मांग की जा रही है, जिसे वह बीएमओ को नहीं देना चाहता बल्कि उसे रंगे हाथ पकड़वाना चाहता है. जांच में शिकायत सही पाई गई. इसके बाद एसीबी ने बीएमओ को रिश्वत लेते पकड़ने का जाल बिछाया. मोलभाव पर आरोपी ने 15000 रुपए लेने सहमति दी, जिस पर ट्रैप की योजना तैयार की गई. आज प्रार्थी को रिश्वती रकम 15000 रुपए आरोपी को देने के लिए भेजा गया. बीएमओ राजेंद्र कुमार पटेल डभरा स्थित अपने कार्यालय में प्रार्थी से 15000 रुपए रिश्वत ले रहा था, इस दौरान एसीबी की टीम ने बीएमओ को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा और रिश्वत रकम को आरोपी से बरामद किया. अचानक हुई कार्रवाई से आसपास हड़कंप मच गया. पकड़े गए आरोपी से रिश्वत की रकम 15 हजार रुपए जब्त कर एसीबी की टीम रिश्वतखोर बीएमओ के विरुद्ध धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई कर रही है. एसीबी ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.

मुख्यमंत्री साय बोले – बस्तर में नए विश्वास और विकास की सुबह — माओवादी कैडर की मुख्यधारा में वापसी

रायपुर आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। वर्षों तक हिंसा और भय की छाया में जी रहे 210 माओवादी कैडरों ने आज “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत बंदूक छोड़कर संविधान को अपनाने का निर्णय लिया है। यह छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास के नए युग का शुभारंभ है। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने आज जगदलपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो युवा कभी माओवाद की झूठी विचारधारा के जाल में उलझे हुए थे, वे आज लोकतंत्र की शक्ति, संविधान के आदर्शों और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों पर विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कुल 210 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन पर कुल 9 करोड़ 18 लाख रुपये का इनाम घोषित था। समारोह में 210 माओवादी कैडरों ने कुल 153 हथियार समर्पित किए, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS राइफलें, एक INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 शॉटगन और एक पिस्तौल शामिल हैं। मुख्यमंत्रीसाय ने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोषजनक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने बंदूकें नीचे रखकर संविधान को थामा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के भविष्य में शांति और एकता के बीज बोए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, भय और हिंसा से नहीं। राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी पहल आज न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में बदलाव की ठोस आधारशिला सिद्ध हो रही हैं। इन योजनाओं ने बंदूक और बारूद की जगह संवाद, संवेदना और विकास को स्थापित किया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभूतपूर्व आत्मसमर्पण केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज — सभी ने मिलकर जिस समन्वित और निरंतर प्रयास से यह परिवर्तन संभव किया, वह बस्तर के इतिहास में मील का पत्थर है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह दृश्य न केवल बस्तर बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा है — कि यदि नीयत साफ हो और नीतियाँ जनसंबंधी हों, तो हिंसा का अंत और शांति की शुरुआत संभव है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण हिंसा की जड़ को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है। “अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर, जहाँ कभी भय का शासन था, वहाँ आज विश्वास का शासन है। जो कल जंगलों में छिपे थे, आज वे समाज के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं,”।  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की यह दृढ़ प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा — “प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह जी के नेतृत्व में हम इस लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। बस्तर का यह परिवर्तन उसी संकल्प का प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वरोजगार, प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” के उस मूल भाव का विस्तार है, जो यह संदेश देता है कि परिवर्तन का मार्ग हिंसा नहीं, बल्कि विश्वास है। यह कार्यक्रम अब पूरे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुधार की दिशा में नई ऊर्जा लेकर आएगा। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना यह सिद्ध करती है कि जब सरकार की नीतियाँ संवेदनशील और जनकेंद्रित होती हैं, तब सबसे कठिन समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा — “हमारा लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं, बल्कि एक नए बस्तर का निर्माण है — जहाँ हर घर में विश्वास और हर मन में विकास का उजाला हो।” मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, सुरक्षा बलों और नागरिक समाज को इस परिवर्तन के सहयोगी बनने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि शांति, विकास और समृद्धि की यह यात्रा तभी स्थायी होगी जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस परिवर्तन की भावना को आत्मसात करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर को नए उद्योग, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के माध्यम से आत्मनिर्भर क्षेत्र में परिवर्तित करेगी। जंगलों की हरियाली के साथ यहाँ के युवाओं के जीवन में भी उजाला फैलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के इतिहास में यह वह क्षण है, जब “बंदूक की गूंज” की जगह “विकास की गूंज” सुनाई दे रही है। यह उस बस्तर का पुनर्जन्म है, जहाँ अब भय नहीं, विश्वास और बंधुत्व का शासन होगा। अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा — “यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है। यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान है — शांति, विश्वास और विकास की। आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के लिए शांति और परिवर्तन का मॉडल बनेगा।   इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वयअरुण साव औरविजय शर्मा, सांसदमहेश कश्यप, जगदलपुर विधायककिरण सिंह देव, पुलिस महानिदेशकअरुणदेव गौतम, एडीजी सीआरपीएफअमित कुमार, एडीजी बीएसएफनामग्याल, एडीजी (एएनओ)विवेकानंद झा, बस्तर रेंज के आईजीसुंदरराज पी, बस्तर के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

बिहान की दीदियों ने तैयार किए संगिनी ब्रांड के आकर्षक गिफ्ट हैम्पर

 ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय कदम, सक्ती प्रशासन का सतत सहयोग रायपुर, दीपावली जैसे प्रमुख त्यौहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत कार्यरत जिला सक्ती की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। ग्राम पलाड़ीखुर्द की राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह की सदस्याएं अपने “संगिनी” ब्रांड के अंतर्गत आकर्षक गिफ्ट हैम्पर तैयार कर रही हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के सुगंधित एवं डिज़ाइनर मोम उत्पाद शामिल हैं। महिलाओं की सशक्तिकरण और रोज़गार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल यह अभिनव पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और रोज़गार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। जिला प्रशासन सक्ती द्वारा दीदियों को उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन के लिए निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।  समूह की सदस्य श्रीमती पुष्पा दीदी ने बताया कि समूह द्वारा त्यौहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए राखी, रंगोली, आचार, गुलाल, तथा मोम उत्पाद जैसे विविध वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से हमें न केवल आर्थिक लाभ मिला है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। समूह को 2 लाख रुपये तक की आय पुष्पा दीदी ने आगे बताया कि समूह की दीदियों ने पूर्व में आर-सेटी (त्ैम्ज्प्) से डिज़ाइनर कैंडल बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसके बाद यूट्यूब वीडियो के माध्यम से गिफ्ट हैम्पर तैयार करने का विचार आया। इस समय जिले की विभिन्न इंडस्ट्रीज और संस्थानों से गिफ्ट हैम्पर के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जिनकी आपूर्ति दीदियों द्वारा समय पर और आकर्षक पैकेजिंग में की जा रही है।  इस पहल से समूह को लगभग 1 लाख 50 हजार  से 2 लाख रुपये तक का व्यवसाय प्राप्त होने की संभावना है। इन्हें अभी तक लगभग 60 हज़ार रुपए के गिफ्ट हैंपर के ऑर्डर मिल चुके हैं । यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें स्थायी आजीविका और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रहा है। बिहान मिशन के तहत संचालित यह पहल महिलाओं की सृजनशीलता, परिश्रम और नवाचार की उत्कृष्ट मिसाल है, जो अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।