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LG–सांसद बैठक: DDA बनाएगा 3 हजार पार्किंग स्थल, जाम से मिलेगी राहत

नई दिल्ली  राजधानी में पार्किंग और उसकी वजह से लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। LG तरनजीत सिंह संधू ने DDA को दिल्ली में तीन हजार पार्किंग जगहों की पहचान करके काम शुरू करने का निर्देश दिया है। LG ने बुधवार को इसे लेकर सभी सात लोकसभा सांसदों और DDA के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाई लेवल बैठक की है। बैठक में राजधानी के विकास, नागरिक सुविधाओं और जमीनी स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार को लेकर चर्चा हुई।  LG की सांसदों के साथ हुई बैठक में बताया गया कि पार्किंग की समस्या से निजात के लिए DDA अगले एक साल के भीतर दिल्ली भर में 3 हजार से ज्यादा खाली भूखंडों की पहचान करेगा, जिनका इस्तेमाल सरफेस पार्किंग के रूप में किया जाएगा। फिलहाल 232 खाली पड़े DDA के प्लॉट को पार्किंग में बदलने को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि इन भूखंडों की पहचान के बाद करीब एक लाख गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था की जा सकेगी। पार्किंग के लिए जिन 232 जगहें चिह्नित की गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा 98 जगह द्वारका जोन में हैं। इसके अलावा 53 उत्तर जोन, 30 रोहिणी जोन, 28 पूर्वी जोन और 23 दक्षिण जोन में है। LG तरनजीत सिंह संधू ने सातो सांसदों के साथ की बैठक DDA अधिकारियों का कहना है कि इससे पार्किंग संकट कम होने के साथ ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी। बैठक में पार्किंग और ट्रैफिक के अलावा अतिक्रमण, खाली पड़ी DDA जमीनों के इस्तेमाल और DDA पार्कों की देखरेख जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सभी सांसदों ने अवैध कब्जा और अतिक्रमण को बड़ी समस्या बताते हुए कार्रवाई में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। सूत्रों की मानें तो LG और सांसदों के साथ बैठक अब नियमित आयोजित की जाएगी। बैठक में मौजूद साउथ दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि बैठक में हमने DDA की अतिक्रमण वाली जमीनों को खाली करने के साथ-साथ साउथ दिल्ली में 69 एफ्लुएंट कॉलोनियों को नियमित करने, ग्रामसभा की जमीन पर गांव वासियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने और ग्राम सभा की खाली पड़ी जमीन पर पार्कों के विकास का मुद्दा उठाया।  

रेखा गुप्ता कैबिनेट की मंजूरी, दिल्ली में बढ़ी राशन कार्ड की आय सीमा

नई दिल्ली अब ढाई लाख तक सालाना कमाने वाले दिल्ली के लोगों का भी राशन कार्ड बनेगा। आय सीमा में यह बड़ा बदलाव किया गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले से आय सीमा के कारण राशन योजना का लाभ नहीं ले पा रहे लोगों को भी इसका फायदा मिलेगा। बता दें कि इस योजना के तहत पहले आमदनी की सीमा 1 लाख थी, जिसे बढ़ाकर 1.2 लाख किया गया था और अब बीजेपी सरकार ने सीधे डलब से ज्यादा 2.5 लाख कर दिया है, ताकि अधिक से अधिक परिवार को इसका फायदा मिल सके। इस योजना को अब डिजिटल ट्रांजेक्शन से भी जोड़ दिया गया है। CM की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया यह फैसला मंगलवार को कैबिनेट के इस फैसले के बारे में खाद्य और आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार CBDC (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) आधारित राशन वितरण प्रणाली लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके अंतर्गत भविष्य में राशन के लिए वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा की जाएगी, जिससे वे डिजिटल मुद्रा के माध्यम से जरूरत के अनुसार सरकारी राशन की दुकानों से राशन ले सकेंगे। इससे प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितता समाप्त होगा। भविष्य में इस योजना को बैंकिंग प्रणाली से भी जोड़ने का विचार मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित CBDC आधारित मॉडल को फेज वाइज राशन दुकानों पर लागू किया जाएगा और भविष्य में इसे बैंकिंग प्रणाली से भी जोड़ा जाएगा, जिसमें निजी बैंक भी शामिल होंगे। इस योजना का मकसद मिलने वाली सुविधाओं को सुनिश्चित करना, प्रणाली की कमियों को कम करना और लाभार्थियों को खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने कहा कि यह नया मॉडल सामान्य नकद व्यवस्था के स्थान पर डिजिटल मुद्रा आधारित प्रणाली को बढ़ावा देगा।  

वोटर लिस्ट अपडेट के लिए तैयार रहें! 30 जून से दिल्ली में घर-घर पहुंचेंगे BLO, नोट करें तारीखें

नई दिल्ली दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया 30 जून से बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन के साथ पारदर्शी तरीके से शुरू होगी। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने बुधवार को यह जानकारी दी। अशोक कुमार ने कहा कि 20 जून से 29 जून तक बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) का प्रशिक्षण, गणना प्रपत्रों और अन्य दस्तावेजों की छपाई जैसी आंतरिक तैयारियां की जाएंगी। उन्होंने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया के हर चरण में जांच की व्यवस्था रहेगी तथा राजनीतिक दलों को बूथ स्तर के एजेंटों (बीएलए) के माध्यम से इसमें शामिल किया जाएगा। सभी जानकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की वेबसाइट के जरिए साझा की जाएगी। कुमार ने कहा कि जागरूकता गतिविधियां चलाई जाएंगी और मतदाताओं को गणना प्रपत्र जमा करने में सहायता के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। मतदाताओं को गणना प्रपत्र की दो प्रतियां दी जाएंगी, जिनमें से एक भरकर बीएलओ को लौटानी होगी। मतदाताओं को भरे हुए गणना प्रपत्र ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी मिलेगी। इस प्रक्रिया में एक अक्टूबर तक 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी मतदाताओं को शामिल किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने कहा कि एसआईआर के दौरान 13,000 से अधिक बीएलओ घर-घर जाकर गणना कार्य करेंगे। प्रत्येक मौजूदा मतदाता, जिसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, को गणना प्रपत्र (दो प्रतियों में) दिया जाएगा, जिसे भरकर एक प्रति बीएलओ को लौटानी होगी। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई तक चलेगा जिसके बाद पांच अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची सात अक्टूबर को जारी की जाएगी। 13000 से ज्यादा BLO करेंगे गणना मतदाताओं को गणना प्रपत्रों की दो प्रतियां प्रदान की जाएंगी, जिनमें से एक को भरकर बीएलओ को वापस करना होगा। मतदाताओं के पास भरे हुए गणना प्रपत्रों को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी होगी। इस प्रक्रिया में 1 अक्टूबर की पात्रता तिथि तक 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी मतदाता शामिल होंगे। एसआईआर के दौरान, 13,000 से अधिक BLO घर-घर जाकर गणना करेंगे। दिल्ली के मुख्य चुनाव आयोग के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रत्येक मौजूदा मतदाता, जिसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, को एक गणना प्रपत्र (दो प्रतियों में) दिया जाएगा, जिसे उन्हें भरकर एक प्रति BLO को वापस करनी होगी। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर की जाने वाली गणना 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई को समाप्त होगी, जिसके बाद मतदाता सूची का मसौदा 5 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा। एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। SIR पर EC को SC से क्लीन चिट सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। अदालत ने माना है कि यह प्रक्रिया संविधान और कानून के अनुरूप है। आसान शब्दों में समझे तो अदालत का मानना है कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग का अधिकार है और इससे मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाए रखने में मदद मिलती है। यह एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग ने कानून के हिसाब से SIR किया और प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है। EC ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल नहीं किया।

पर्यावरण संरक्षण की बड़ी योजना: DMRC स्टेशनों पर जमा होंगे पुराने कपड़े, होगा रिसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग

नई दिल्ली  घरों में बेकार पड़े पुराने कपड़े अब कचरे में नहीं जाएंगे, बल्कि उनसे नए और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की पहल पर दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और विकास को बढ़ावा देने के लिए नई योजना शुरू की जा रही है। इसके तहत DMRC राजधानी के 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर पुराने कपड़ों के लिए विशेष कलेक्शन बॉक्स लगाएगा, जहां लोग अपने पुराने कपड़े जमा कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ता कपड़ा अपशिष्ट (Waste) पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में इस पहल के जरिए पुराने कपड़ों की वैज्ञानिक तरीके से रिसाइक्लिंग और उनका दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे कचरे में कमी आने के साथ-साथ लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें। इन 10 स्टेशनों पर कलेक्शन बॉक्स जिन स्टेशनों को इस योजना के लिए चुना गया है, उनमें शाहदरा, मोहन एस्टेट, रोहिणी वेस्ट, लाजपत नगर, मालवीय नगर, मयूर विहार फेज-I, हौज खास, पंजाबी बाग वेस्ट, द्वारका और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। मेट्रो स्टेशन पर बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस पहल के तहत जमा किए गए कपड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसके बाद प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इसे दोबारा उपयोग लायक बनाया जाएगा। साथ ही इनकी अपसाइक्लिंग (उपयोगी उत्पादों में बदलना) भी की जाएगी। पुराने कपड़ों से बैग, दरी और अन्य प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे। खास बात यह है कि इन प्रोडक्ट के प्रदर्शन और बिक्री के लिए चयनित मेट्रो स्टेशनों पर विशेष स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा। रिसाइक्लिंग यूनिट में भेजे जाएंगे कपड़े जो कपड़े दोबारा उपयोग के योग्य नहीं होंगे, उन्हें रिसाइक्लिंग यूनिट में भेजा जाएगा, जहां उनसे रिसाइक्ल्ड यार्न, फाइबर और नॉन-वोवन फेल्ट जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे न्यूनतम अपशिष्ट सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस तरह होगी ब्रैंडिंग डीएमआरसी के अनुसार, इस परियोजना की ब्रैंडिंग 'दिल्ली मेट्रो लेडीज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन' के नाम से की जाएगी। फिलहाल कलेक्शन बॉक्स लगाने, ब्रैंडिंग और एमओयू से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस योजना का शुभारंभ किया जाएगा।

ईद-उल-अजहा को लेकर राजधानी दिल्ली में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात, अलर्ट पर पुलिस

नई दिल्ली  बकरीद यानी ईद-उल-अजहा पर राजधानी में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए सभी संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने पैरामिलिट्री फोर्सेस के साथ फ्लैग मार्च शुरू कर दिया है। खुफिया यूनिट स्पेशल ब्रांच एक्टिव हो चुकी है। नाइट पेट्रोलिंग में इजाफा कर दिया गया है। पुलिस अफसरों के मुताबिक, थाने से लेकर जिला लेवल पर सभी समुदायों के मौज़ूज़ शख्सियतों की मौजूदगी में अमन कमिटियों, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशंस (RWA) और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशंस (MWA) की मीटिंग हो चुकी हैं। सांप्रदायिक सद्भावना बनी रहे और त्योहार के दौरान माहौल ना बिगड़े, इसके लिए जरूरी हिदायतें दी गई हैं। संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तुरंत पुलिस को सूचना देने को कहा गया है। अफवाहों से बचने और उन्हें फैलाने वालों से अलर्ट रहने को कहा गया है। जनता से अपील है कि सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखें। संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी है। माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। अफ्रीका समिट रद्द होने के बाद दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा भारत-अफ्रीका फोरम समिट कैंसिल हो चुकी है। इसके लिए राजधानी में पैरामिलिट्री फोर्सेस की 60 कंपनियां बुलाई गई थीं। लिहाजा इन कंपनियों को अब दिल्ली के सभी जिलों में भेज दिया गया है। धार्मिक रूप से संवेदनशील रहे इलाकों में ज्यादा फोर्स दी गई है। इस बीच, धार्मिक स्थलों की भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी के लिए भी स्पेशल टीमें बनाई गई हैं। शांति बनाए रखने की अपील आउटर-नॉर्थ जिले में डीसीपी हरेश्वर स्वामी, नॉर्थ ईस्ट जिले के डीसीपी राहुल अलवर, द्वारका जिले के डीसीपी कुशल पाल सिंह, साउथ वेस्ट जिले के डीसीपी अमित गोयल और नॉर्थ-वेस्ट जिले के एडिशनल डीसीपी सिकंदर सिंह ने अपने-अपने जिलों की अमन कमिटी और धार्मिक प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। जामा मस्जिद एरिया में डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह और रोहिणी जिले के प्रेम नगर में एसएचओ विक्रम सिंह ने पैरामिलिट्री फोर्सेस के साथ मार्च निकाला।

रेखा सरकार का बड़ा फैसला, आय सीमा बढ़ी; डिजिटल पेमेंट वालों को मिलेगा राशन लाभ

नई दिल्ली दिल्‍ली कैबिनेट की बैठक में आज राशन वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा और बेहद अहम फैसला लिया गया है, जिसने राजधानी के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है. सरकार ने राशन कार्ड के लिए जरूरी सालाना आय की सीमा को सीधे 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया है. दिल्‍ली सरकार का मानना है कि पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय की सीमा बहुत कम थी, जिससे कई जरूरतमंद परिवार इस योजना के दायरे से बाहर हो गए थे. मत्रभ्‍ मंजिंदर सिंह सिरसा ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इस फैसले से दिल्‍ली के लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा. इसके साथ ही, राशन वितरण में पारदर्शिता लाने और हर तरह की धांधली को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने अब राशन के लेन-देन में केवल डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है।  रेखा गुप्‍ता कैबिनेट फैसले की 5 मुख्य बातें • आय की सीमा में भारी बढ़ोतरी: राशन कार्ड के लिए एलिजिबिल्‍टी की वार्षिक आय सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है. • लाखों नए परिवारों को लाभ: इस फैसले के बाद मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लाखों नए लाभार्थी इस सरकारी राशन योजना के दायरे में आ जाएंगे. • डिजिटल करेंसी से सीधा भुगतान: राशन योजना में भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए अब केवल डिजिटल करेंसी का ही इस्तेमाल किया जाएगा. • सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर: डिजिटल करेंसी लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी, जिसका इस्तेमाल वे सिर्फ राशन खरीदने के लिए कर सकेंगे. • बिचौलियों और धांधली पर लगाम: इस तकनीक-आधारित व्यवस्था से कोटेदारों की मनमानी, राशन की कालाबाजारी और फर्जी लाभार्थियों की धांधली पूरी तरह बंद हो जाएगी. क्यों खास है यह फैसला और क्या होगा इसका असर? सरकार का यह फैसला दोहरे मोर्चे पर काम करने वाला है—पहला सामाजिक कल्याण का विस्तार और दूसरा तकनीक के जरिए पूरी व्यवस्था का शुद्धीकरण. अब तक 1 लाख रुपये की सालाना आय की सीमा बेहद व्यावहारिक नहीं रह गई थी क्योंकि महंगाई के इस दौर में इतनी आय वाला परिवार भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता है. आय की सीमा को ढाई लाख करने से समाज के एक बहुत बड़े कामकाजी वर्ग (जैसे सुरक्षाकर्मी, ऑटो चालक, छोटे दुकानदार) को मुफ्त या किफायती राशन की सुरक्षा मिल सकेगी।  दूसरा और सबसे क्रांतिकारी कदम है डिजिटल करेंसी (e-RUPI या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी – CBDC) का अनिवार्य इस्तेमाल. अभी तक कई जगहों पर शिकायतें आती थीं कि कोटेदार राशन डकार जाते हैं या लाभार्थियों को बाजार में बेचने पर मजबूर करते हैं. अब जब सरकार सीधे खाते में राशन की डिजिटल करेंसी भेजेगी, तो लाभार्थी उसका इस्तेमाल केवल राशन की दुकान पर ही कर पाएगा. इससे कैश की हेराफेरी खत्म होगी और राशन वितरण प्रणाली 100% पारदर्शी हो जाएगी।  सवाल-जवाब सरकार को राशन के लिए आय की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये क्यों करनी पड़ी? सरकार के अनुसार, पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय सीमा बहुत कम थी. वर्तमान आर्थिक स्थितियों और महंगाई को देखते हुए बुनियादी आय को कम आका गया था, जिससे कई वास्तविक जरूरतमंद राशन के लाभ से वंचित रह जाते थे. अब ढाई लाख की सीमा होने से लाखों छूटे हुए परिवारों को सुरक्षा कवच मिलेगा।  राशन वितरण में डिजिटल करेंसी कैसे काम करेगी और लाभार्थियों को इससे क्या फायदा होगा? सरकार लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे राशन के मूल्य के बराबर डिजिटल करेंसी ट्रांसफर करेगी. यह करेंसी डायरेक्ट अकाउंट में जाएगी, जिससे लाभार्थी राशन की अधिकृत दुकान पर जाकर भुगतान कर सकेंगे. इससे लाभार्थियों को अपनी जेब से नकद खर्च नहीं करना पड़ेगा और वे बिना किसी कटौती के पूरा राशन ले सकेंगे।  इस नई व्यवस्था से राशन वितरण में होने वाली धांधली पर कैसे लगाम लगेगी? डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ‘पर्पज-स्पेसिफिक’ (विशेष उद्देश्य के लिए) होती है. यानी राशन के लिए मिली डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किसी अन्य काम या सामान को खरीदने में नहीं किया जा सकता. इससे राशन की कालाबाजारी, कोटेदारों द्वारा फर्जी अंगूठा लगवाना और बिचौलियों का कमीशन पूरी तरह बंद हो जाएगा। 

दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र का आश्वासन, जिमखाना क्लब को बलपूर्वक खाली नहीं कराया जाएगा

 नई दिल्ली दिल्ली जिमखाना क्लब मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. सरकार ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब की जगह पर जबरदस्ती कब्जा नहीं करेगी. अगर क्लब 5 जून तक जमीन खाली नहीं करता है, तो वह कानून के तहत सही प्रक्रिया का पालन करेगी।  सरकार ने यह बात क्लब की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कही, जिसमें क्लब के सदस्यों की तरफ से सरकार के आदेश को चुनौती दी थी. सरकार ने लुटियंस दिल्ली में 2, सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ की संपत्ति को रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए खाली करने का निर्देश दिया गया था।  केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 5 जून की तारीख क्लब को सिर्फ इसलिए दी गई थी, जिससे वे अपनी मर्जी से जगह खाली कर सकें।  5 जून को जगह नहीं खाली हुई तो…? मेहता ने कहा, "हम कानून के मुताबिक ही कब्जा लेंगे. 5 जून वह तारीख है, जब हमने उन्हें अपनी मर्जी से जगह खाली करने का विकल्प दिया है।  तुषार मेहता ने कहा, "मान लीजिए अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो ऐसा नहीं होगा कि पुलिस तुरंत अंदर घुस जाएगी और जबरदस्ती कब्जा कर लेगी. सार्वजनिक जगहों से बेदखली के संबंध में कानून के तहत जो प्रक्रिया तय है, उसी का पालन किया जाएगा।  इसके बाद कोर्ट ने सवाल किया कि क्या वह केंद्र सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर ले सकती है, जिस पर मेहता ने 'हां' में जवाब दिया।  जमीन छिन जाने के बाद कहां चलेगा क्लब? सुनवाई के दौरान, अदालत ने याचिकाकर्ताओं (क्लब के सदस्य) से यह भी कहा, "भले ही जमीन ले ली जाए, आपकी सदस्यता बनी रहेगी. आप पट्टेदार नहीं हैं।  मेहता ने आगे कहा कि दिल्ली जिमखाना को उसके परिसर के लिए कोई वैकल्पिक जगह दी जाएगी। 

जिमखाना खाली कराना सरकार के लिए चुनौती, अब मैदान में उतरे सिंघवी

नईदिल्ली  दिल्ली के ऐतिहासिक जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) को खाली कराने के केंद्र सरकार के फैसले पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. क्लब के स्थायी सदस्य और कर्मचारी अब इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं. सरकार ने क्लब को 5 जून तक 27.3 एकड़ जमीन और पूरी संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया है।  सरकार का कहना है कि सफदरजंग रोड स्थित यह जमीन ‘अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र’ में आती है और इसका इस्तेमाल रक्षा ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया जाएगा. हालांकि क्लब के कई सदस्यों ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया है।  अभिषेक मनु सिंघवी लड़ेंगे केस जानकारी के मुताबिक क्लब की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को कानूनी लड़ाई के लिए नियुक्त किया गया है. बताया जा रहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की जाएंगी. एक याचिका क्लब के सदस्यों की ओर से और दूसरी करीब 600 कर्मचारियों की ओर से दायर होगी।  113 साल पुराने इस क्लब के स्थायी सदस्यों ने रविवार को लंबी बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की. यह बैठक उस आदेश के एक दिन बाद हुई, जिसमें भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब से उसकी इमारत, लॉन और अन्य सुविधाएं खाली करने को कहा था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि सरकार की तरफ से नियुक्त क्लब की जनरल कमेटी ने L&DO को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट होने तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है।  सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सरकार लीज की शर्तों के तहत ‘सार्वजनिक हित’ में जमीन वापस लेने के लिए पूरी तरह अधिकृत है. दिल्ली जिमखाना क्लब उन दुर्लभ मामलों में शामिल है, जहां सरकार ने स्थायी लीज को समय से पहले खत्म कर ‘री-एंट्री’ की प्रक्रिया शुरू की है।  ‘सैकड़ों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर खतरा’ रिपोर्ट के मुताबिक, क्लब के सदस्य और कर्मचारी इसे अचानक लिया गया फैसला बता रहे हैं. उनका कहना है कि इससे न केवल क्लब की विरासत खतरे में पड़ जाएगी, बल्कि सैकड़ों कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित होगी. क्लब से जुड़े रिटायर्ड जनरल पीके सहगल ने कहा कि सदस्यों ने सर्वसम्मति से सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व चेतावनी के लिया गया यह फैसला 600 कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट खड़ा कर देगा।  कर्मचारियों में भी इस फैसले को लेकर गहरी नाराजगी है. जिमखाना एम्प्लॉयी वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि कई कर्मचारी पिछले 25-26 साल से यहां काम कर रहे हैं और अब उनकी रोजी-रोटी छिनने का खतरा पैदा हो गया है. एसोसिएशन के अध्यक्ष नंदन सिंह नेगी ने कहा कि कर्मचारी और उनके परिवार बेहद परेशान हैं. एक कर्मचारी ने कहा, ‘हमारी झुग्गियां पहले ही टूट रही हैं और अब नौकरी भी चली जाएगी. आखिर हम कहां जाएंगे?’ 1930 से मौद है जिमखाना क्लब कुछ सदस्यों ने सरकार के सुरक्षा संबंधी तर्क पर भी सवाल उठाए हैं. क्लब के एक पूर्व महासचिव ने कहा कि क्लब 1930 के दशक से यहां मौजूद है, जबकि प्रधानमंत्री आवास 1984 में इस इलाके में शिफ्ट हुआ था. अगर सुरक्षा का इतना बड़ा मुद्दा होता तो इतने वर्षों तक कोई समस्या क्यों नहीं हुई? टीओआई के मुताबिक, क्लब के सदस्य नितिन वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ‘काल्पनिक’ आधार पर क्लब को बंद करना चाहती है. उन्होंने कहा कि क्लब में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और हर व्यक्ति की जांच होती है।  इस पूरे विवाद पर देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरन बेदी ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि देश की खेल और संस्थागत विरासत का हिस्सा है. किरण बेदी ने कहा कि यहां देश के बेहतरीन टेनिस मुकाबले हुए हैं और इस जगह से कई पीढ़ियों की यादें जुड़ी हुई हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस फैसले पर दोबारा विचार करेगी।  पूर्व रॉ प्रमुख और क्लब के पूर्व अध्यक्ष एएस दुलत ने कहा कि सदस्य सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के लिए हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं. वहीं इतिहासकार स्वप्ना लिडले ने क्लब के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आजादी से पहले यह ब्रिटिश अधिकारियों का क्लब हुआ करता था, लेकिन 1945 के बाद भारतीयों को भी सदस्यता मिलने लगी. उन्होंने कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तान जा रहे अधिकारियों के लिए यहां कई विदाई समारोह भी आयोजित हुए थे।  अब यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा विवाद बनता जा रहा है. आने वाले दिनों में दिल्ली हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई होने की संभावना है। 

कोर्ट में पूरी हुई मुराद, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने केजरीवाल और सिसोदिया ने कहा ‘हां’

नई दिल्ली  दिल्ली के कथित आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी अपडेट सामने आई है। हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के इस केस से अलग होने के बाद, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आखिरकार कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने के लिए राजी हो गए हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान जस्टिस मनोज जैन के हाथों में आ गई है, जिनकी बेंच के सामने इस केस की नियमित सुनवाई शुरू हो चुकी है। केजरीवाल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक दुर्गेश पाठक ने भी इस नई बेंच के सामने सुनवाई में शामिल होने के लिए अपनी हामी भर दी है। क्या था विवाद और क्यों बदला वकालतनामा? न्यायिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले काफी समय से आम आदमी पार्टी के नेता इस केस की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में होने को लेकर हिचकिचा रहे थे। लेकिन अब जैसे ही यह मामला दूसरी बेंच में ट्रांसफर हुआ, वैसे ही तीनों नेताओं के रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सोमवार को जब सीबीआई (CBI) द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती वाले मामले को जस्टिस मनोज जैन की बेंच के सामने लिस्ट किया गया, तो कोर्ट रूम में एक नई प्रगति देखने को मिली। अदालत का रिकॉर्ड सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज जैन ने आधिकारिक तौर पर नोट किया कि अदालत को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से तीन नए 'वकालतनामा' (सुनवाई में शामिल होने का कानूनी पत्र) प्राप्त हो चुके हैं। यह इस बात का सीधा संकेत है कि आरोपी पक्ष अब इस बेंच के सामने जिरह के लिए पूरी तरह तैयार है। CBI की चुनौती पर अब 16 जुलाई को होगी अगली जंग गौरतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत (Trial Court) के एक फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है। इस मामले की गंभीरता और आरोपियों की ओर से वकालतनामा मिलने के बाद जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें तैयार करने का समय दिया है।

दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन केस में कांग्रेस नेता अलका लांबा पर कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली राऊज एवेन्यू कोर्ट से महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को बड़ा झटका लगा है. जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में कोर्ट ने महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को दोषी ठहराया. 5 जून को अलका लांबा की सजा पर राऊज एवेन्यू कोर्ट में बहस होगी. जुलाई 2024 में अलका लांबा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था।  अलका लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है- कोर्ट पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने कांग्रेस नेता के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किया था. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कहा था कि अलका लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।  कांग्रेस की महिला नेता पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की, काम में बाधा डालने का आरोप , कानूनी आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ता रोकने के आरोप, बीएनएस की धारा 132, 221, 223(a) और 285 के तहत केस चल रहा था. इसमें कोर्ट ने आज (25 मई 2026) दोषी करार दिया।  दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा का आदेश जारी करने के बावजूद अलका लांबा ने 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला कांग्रेस का महिला आरक्षण को लेकर प्रदर्शन किया था। अलका लांबा पर आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ टालस्टाय मार्ग पर लगे बैरिकेड पर पहुंचीं और नारेबाजी की। लांबा संसद का घेराव करने पर आमादा थीं। मौके पर मौजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से निषेधाज्ञा के बारे में प्रदर्शनकारियों को जानकारी दी और प्रदर्शन खत्म करने की चेतावनी दी थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक अलका लांबा और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर बैरिकेड को पार किया और संसद मार्ग जाम कर दिया। पुलिस के काफी समझाने के बाद भी अलका लांबा और दूसरे समर्थक वहां से नहीं हटे, जिसके बाद गिरफ्तार कर लिया था। बाद में सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह के बयान पर अलका लांबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 20 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने संबंधित घटना का वीडियो देखा था, जिसमें पाया गया कि अलका बलपूर्वक लोकसेवक को उसके काम में बाधा पहुंचा रही थीं। बिल्कुल स्वागत है, मैं डरने वाली नहीं हूं- अलका लांबा कोर्ट की तरफ से दोषी करार दिए जाने के बाद अलका लांबा ने कहा, "यही उम्मीद थी, यही होने वाला है. जुलाई 2024 का मामला है. मानसून सत्र चल रहा था. महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर मैं और मेरी सारी बहनें जंतर मंतर पर संवैधानिक अधिकार के तहत महिला आरक्षण लागू करो कि मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे. पुलिस पर दबाव कहूं या अपनी कुर्सी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मुझपर एफआईआर की. 2025 से 2026 इसी कोर्ट में मैं चक्कर काटती रही और आज पता लगता है कि मुझे दोषी पाया गया है. मेरा अपराध था कि मैंने महिला आरक्षण और महिला सुरक्षा के लिए जंतर मंतर पर पहुंचकर आवाज उठाई कैसे? मुझे 5 जून को सजा सुनाई जाएगी. बिल्कुल स्वागत है, डरने वाली नहीं हूं।