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दिल्ली में 17 दिसंबर को भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र पर राष्ट्रीय कार्यशाला

नई दिल्ली नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने काे लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयाेजन 17 दिसंबर को हाेगा। इसका उद्धघाटन केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व मुख्य अतिथि डॉ. जितेंद्र सिंह होंगे। यह आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत भारतीय सर्वेक्षण एजेंसी करेगी, जिसका विषय भू-स्थानिक मिशन: विकसित भारत का एक प्रवर्तक है।  कार्यशाला का उद्देश्य भारत के भू-स्थानिक मिशन को गति देना और विभिन्न क्षेत्रों के नीति निर्माता, प्रौद्योगिकीविद, उद्योग जगत के नेता और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ भारत के भू-स्थानिक भविष्य को आकार देने वाले नवाचारों पर विचार-विमर्श करेंगे। कार्यशाला में कई सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें हितधारकों को उभरते अवसरों पर विचार करने, भू-स्थानिक प्रथाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तेजी लाने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय परिकल्पना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।  

बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती: दिल्ली में बिना वैध PUCC वाहनों को पेट्रोल पर रोक

 नई दिल्ली दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बीजेपी सरकार ने कई सख्त फैसलों का ऐलान किया है, जिनका असर आम लोगों से लेकर वाहन चालकों और निर्माण क्षेत्र तक पड़ेगा. दिल्ली के पर्यावरण संरक्षण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इन कदमों का मकसद राजधानी की हवा को साफ करना और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है. पर्यावरण मंत्री मनजींदर सिंह सिरसा ने घोषणा की है कि 18 दिसंबर से पेट्रोल पंपों पर उन वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा, जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) सर्टिफिकेट नहीं होगा. इस नियम की निगरानी कैमरों के जरिए की जाएगी, ताकि कोई उल्लंघन ना हो सके. नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी. इसके अलावा दिल्ली के बाहर से आने वाले निजी वाहनों को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं. दूसरे राज्यों में रजिस्टर, बीएस-VI उत्सर्जन मानकों से नीचे के निजी वाहनों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह फैसला खासतौर पर उन वाहनों पर लागू होगा, जो अधिक धुआं छोड़कर वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं. दिल्ली की सीमाओं पर तैनात एजेंसियों को इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है. दिल्ली में ईंट, रेत, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्रियों के ​परिवहन पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने दिल्ली वालों से मांगी माफी पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए मंत्री सिरसा ने कहा कि मौजूदा सरकार को 'प्रदूषण की बीमारी विरासत में मिली है'. उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने दिल्ली में प्रदूषण फैलाया, वही आज विरोध कर रहे हैं.' बीजेपी सरकार द्वारा दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि राजधानी के लैंडफिल साइट्स की ऊंचाई में करीब 15 मीटर की कमी आई है और लगभग 8,000 उद्योगों को कड़े प्रदूषण नियंत्रण मानकों के दायरे में लाया गया है. प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर अब तक 9 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है. उन्होंने कहा कि लकड़ी जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने 10,000 हीटर वितरित किए हैं. इसके अलावा, बैंक्वेट हॉल्स में डीजे के उपयोग को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं. मंत्री सिरसा ने स्वीकार किया कि दिल्ली में प्रदूषण पर पूरी तरह काबू पाना इतने कम समय में संभव नहीं है. उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली के लोगों से माफी मांगता हूं, लेकिन सात-आठ महीनों में प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है.' साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी तंज कसते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्ष इसी अवधि में उन्होंने मास्क नहीं पहने थे, लेकिन अब मास्क पहनकर घूम रहे हैं. प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने उठाए कई कदम पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि शहर में 62 पॉल्यूशन हॉटस्पॉट की पहचान की है, जिनमें से 13 क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में प्रदूषण का स्तर कम दर्ज किया गया है. इसके अलावा, 3,427 इलेक्ट्रिक बसों को डीटीसी में शामिल किया गया है ताकि वाहनों से होने वाले ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम किया जा सके. सिरसा ने यह भी बताया कि वैज्ञानिकों की एक समिति गठित की गई है, जो नियमित रूप से बैठक कर प्रदूषण के रुझानों का अध्ययन कर रही है और आगे के उपायों की सिफारिश कर रही है. दिल्ली में इस समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में बना हुआ है. 16 दिसंबर 2025 को सुबह के समय AQI 380 से ऊपर दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है. सर्दियों का मौसम आते ही धुंध और स्मॉग की मोटी चादर छा जाने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों से उड़ती धूल प्रदूषण को बढ़ाने में सहयोग कर रही है. सरकार का मानना है कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा को खराब करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है. इसलिए PUCC चेक को अनिवार्य बनाकर पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाई जा रही है. लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग करने की अपील दिल्ली सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें. दिल्ली सरकार का कहना है कि ये कदम अस्थायी जरूर हैं, लेकिन जनता के स्वास्थ्य को देखते हुए बेहद जरूरी हैं. आने वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा कर आगे और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि ये कदम दिल्ली को स्वच्छ हवा देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि ये उपाय 18 दिसंबर से लागू हो रहे हैं. उन्होंने नगारिकों से नियमों का पालन करने का अनुरोध किया.

दिल्ली विस्फोट मामला: कोर्ट ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी की हिरासत बढ़ाई

नई दिल्ली  दिल्ली ब्लास्ट मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) केस में अल फलाह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत को साकेत कोर्ट ने 20 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। अदालत ने यह आदेश मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए दिया। जावेद अहमद सिद्दीकी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और प्रवर्तन एजेंसियां उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। साकेत कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए न्यायिक हिरासत बढ़ाना जरूरी है। इससे पहले 12 दिसंबर को मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चार आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था। इनमें डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद और आदिल अहमद शामिल थे। इन सभी को उनकी पिछली हिरासत अवधि पूरी होने के बाद अदालत के सामने पेश किया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के बाद चारों आरोपियों को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। एनआईए ने अदालत को बताया था कि आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर नबी, आदिल अहमद, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान और इरफान अहमद मिलकर एक बड़ी साजिश रच रहे थे। एजेंसी के अनुसार, इस मॉड्यूल का उद्देश्य राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाना और संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाना था। जांच में यह भी सामने आया है कि कार में हुए विस्फोट को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी था। चारों मुख्य आरोपियों को एनआईए की हिरासत खत्म होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था। एजेंसी ने उनके खिलाफ जुटाए गए प्रारंभिक सबूतों के आधार पर न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। गौरतलब है कि 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण विस्फोट से पूरे देश में दहशत फैल गई थी। शाम करीब 6:52 बजे एक हाई ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी सफेद हुंडई आई20 कार में जोरदार धमाका हुआ था। इस हमले में कई लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जांच एजेंसियां इस साजिश से जुड़े हर पहलू की गहन जांच में लगी हुई हैं।

दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे बना हादसों का ज़ोन, घने कोहरे में 30+ वाहनों की टक्कर, 4 की जान गई

फरीदाबाद/नूंह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सोमवार को घने कोहरे ने कहर बरपा दिया। फरीदाबाद और नूंह जिलों में अलग-अलग स्थानों पर हुए हादसों में चार लोगों की मौत हो गई। कई वाहन आपस में टकराए और दस से अधिक लोग घायल हो गए। मरने वालों में एक सीआईएसएफ का सब इंस्पेक्टर बताया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। फरीदाबाद में सोमवार सुबह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर घना कोहरा हादसों का कारण बन गया। दृश्यता बेहद कम होने से वाहन चालकों को आगे का रास्ता नहीं दिखा और एक के बाद एक टक्कर होती चली गई। फरीदाबाद के कैल गांव के पास दो अलग-अलग सड़क हादसे हुए। यहां पहली दुर्घटना में एक एंडेवर कार सड़क किनारे खड़े कैंटर से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि एंडेवर में सवार तीन लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई। तीसरा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया। मृतकों में एक की पहचान संदीप कुमार निवासी जयपुर के रूप में हुई है, जबकि दूसरे मृतक की पहचान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। इसी स्थान के पास कुछ ही देर बाद दूसरा हादसा भी हुआ। एक कैंटर में पीछे से क्रेटा गाड़ी जा टकराई। गनीमत रही कि क्रेटा चालक बाल-बाल बच गया, लेकिन उसकी गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात सुचारू कराया। नूंह में भिड़े 30 वाहन, दो की मौत जिला नूंह में भी कोहरे ने बड़ा हादसा करा दिया। सुबह करीब चार बजे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगभग 30 वाहन आपस में भिड़ गए। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दस से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को जिला के राजकीय अस्पताल मांडीखेड़ा में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। हादसा राजस्थान से दिल्ली की तरफ जाते वक्त हुआ। सूत्रों के अनुसार मरने वालों में सीआईएसएफ के सब इंस्पेक्टर हरीश कुमार निवासी अलवर और जयपुर निवासी कारोबारी खलील अहमद शामिल हैं। कुछ स्थानों पर ट्रक पलटने की भी सूचना है, जिससे यातायात काफी देर तक बाधित रहा। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और एम्बुलेंस के देरी से पहुंचने का आरोप लगाया। पुलिस का कहना है कि घना कोहरा हादसों की मुख्य वजह है। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि कोहरे के समय धीमी गति से चलें, फॉग लाइट का प्रयोग करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।  

दिल्ली-NCR की ज़हरीली हवा पर CJI का सवाल— ‘सबसे ज़्यादा मार गरीबों पर ही क्यों?’

नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण चरम पर पहुंच चुका है। जहरीली हवा का मुद्दा सोमवार को सर्वोच्च अदालत में भी उठा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर 17 दिसंबर को सुनवाई होगी। अदालत को बताया गया कि आदेशों के बावजूद स्कूलों पर खेल गतिविधियां हो रही हैं। वहीं, चीफ जस्टिस ने गरीबों पर होने वाले असर पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आदेश वही दिए जा सकते हैं, जिनका पालन संभव हो। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने न्याय मित्र की भूमिका निभा रहीं वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि एहतियाती कदम पहले से मौजूद हैं, लेकिन असली मुद्दा उनका खराब अनुपालन है। सिंह ने कहा कि जब तक यह अदालत आदेश नहीं देती है, अथॉरिटीज की ओर से उन प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जाता है जो पहले मौजूद हैं। चीफ जस्टिस ने कहा, 'यह तीन जजों की बेंच के सामने बुधवार को आएगा। इस पर बात होगी।' एक अन्य वकील ने बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि पुराने आदेश के बावजूद स्कूलों में खेल गतिविधियां चल रही हैं। न्याय मित्र ने कहा, 'इस अदालत के आदेश के बावजूद स्कूलों ने खेल गतिविधियों के लिए तरीके निकाल लिए हैं, इनका आयोजन हो रहा है। CAQM एक बार फिर इस कोर्ट के आदेश का उल्लेख कर रहा है।' इस पर सीजेआई ने कहा, ‘सीजेआई ने कहा, ‘हम समस्या को जानते हैं और हम ऐसे आदेश पारित करेंगे जिनका पालन किया जा सके। कुछ निर्देश ऐसे हैं जिन्हें बलपूर्वक लागू किया जा सकता है। इन शहरी महानगरों में लोगों की अपनी जीवनशैली होती है। लेकिन गरीबों का क्या होगा…।’ न्याय मित्र ने कहा कि गरीब मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इससे पहले पीठ ने कहा था कि वायु प्रदूषण के खिलाफ दायर याचिका को ‘सामान्य’ मामला नहीं माना जा सकता, जिसे केवल सर्दियों के महीनों में ही सूचीबद्ध किया जाए। उसने कहा था कि इस समस्या के अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान खोजने के लिए महीने में दो बार मामले की सुनवाई की जाएगी। सोमवार को दिल्ली घनी धुंध की चादर में लिपटी रही, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 498 पर पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। वायु गुणवत्ता 38 केंद्रों पर ‘गंभीर’ थी, जबकि दो केंद्रों पर यह ‘बेहद खराब’ थी। जहांगीरपुरी में एक्यूआई 498 दर्ज किया गया, जो सभी 40 केंद्रों में सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाला केंद्र रहा।

दिल्ली की राजनीति में बड़ा उलटफेर, फ्री बिजली खर्च में केजरीवाल से आगे रेखा गुप्ता सरकार

नई दिल्ली मुफ्त बिजली योजना पर रेखा गुप्ता सरकार को भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ रही है। बिजली पर दिल्ली सरकार का सब्सिडी बिल पहली बार 4000 करोड़ रुपये से पार जा सकता है। सरकार ने पहले ही इसका बजट बढ़ा दिया था, लेकिन वह भी कम पड़ रहा है। भाजपा सरकार को अनुमान से और अधिक खर्च करने की आवश्यकता होगी।   मीडिया ने सरकार के सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि 2025-26 में बिजली सब्सिडी पर दिल्ली सरकार को 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करनी होगी। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 3,849 करोड़ रुपये का आवंटन बजट में किया था, जोकि 2024-25 के मुकाबले 250 करोड़ रुपये अधिक था। रिपोर्ट के मुताबिक बिजली विभाग ने इस मद में अतिरिक्त 361 करोड़ रुपये की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि अतिरिक्त धनराशि की मांग मुफ्त बिजली योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या में लगातार इजाफे के साथ-साथ बिजली वितरण कंपनियों को देय जमा भुगतानों की वजह से है। इस महीने दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में संशोधित बजट को पेश किया जा सकता है। सरकार आवंटन को बढ़ा सकती है। मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत 2015-16 में आम आदमी पार्टी सरकार ने की थी। तब दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 52.62 लाख थी और सब्सिडी का खर्च 1442 करोड़ था। पिछले एक दशक में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 69 लाख हो गई जबकि सब्सिडी खर्च तीन गुना हो गया। अधिकारियों का अनुमान है कि इस साल यह खर्च 4200 करोड़ तक जा सकता है। दिल्ली के कुल बिजली उपभोक्ताओं में से 83 फीसदी घरेलू हैं। 200 यूनिट प्रति माह खर्च करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली जीरो आता है। 201 से 400 यूनिट तक खर्च करने वालों को 50 फीसदी सब्सिडी मिलती है, जिसकी अधिकतम सीमा 800 रुपये है। 400 से अधिक यूनिट खर्च करने वाले पूरा बिल चुकाते हैं। आधिकारिक डेटा के मुताबिक सर्दियों में जीरो बिल वाले उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। दिसंबर 2022 में 31 लाख कनेक्शन पर जीरो बिल था। जनवरी 2023 में यह संख्या 29 लाख थी। दिसंबर 2023 में यह संख्या बढ़कर 42 लाख हो गई जबकि जनवरी 2024 में 35 लाख हो गई। पिछले साल दिसंबर और इस साल जनवरी में यह संख्या क्रमश: 45 और 40 लाख रही।  

दिल्ली में प्रदूषण चरम पर: AQI 497 के बीच एक्सपर्ट का वार— ग्रैप-4 नाकाफी, नीति पर उठे सवाल

नई दिल्ली दिल्ली में पलूशन लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार सुबह दिल्ली के बवाना में सबसे ज्यादा 497 AQI दर्ज किया गया। दिल्लीवासियों के साथ पर्यावरणप्रेमी भी चिंता में हैं। मशहूर पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने दिल्ली-एनसीआर में लागू किए गए ग्रैप-4 की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे लंबे समाधान के बजाय एक रिएक्टिव कदम बताया। राजधानी में वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने के बाद GRAP के स्टेज-4 को लागू किए जाने के संदर्भ में कंधारी ने कहा कि यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि वर्षों की नीतिगत विफलताओं का नतीजा है।   रविवार को एएनआई से बातचीत में भावरीन कंधारी ने कहा, “GRAP हम जानते हैं, यह एक प्रतिक्रियात्मक उपाय है। जब हालात बहुत खराब हो जाते हैं, तब GRAP-IV लागू किया जाता है। वर्षों से नीति निर्माताओं द्वारा लिए गए फैसलों का नतीजा आज हम देख रहे हैं। यह कोई रातों-रात पैदा हुई स्थिति नहीं है। कुछ दिनों बाद जब AQI के आंकड़े नीचे आएंगे, तो GRAP हटा लिया जाएगा। यह किसी भी तरह से समाधान नहीं है।” बता दें कि शनिवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘सीवियर प्लस’ यानी 450 के करीब पहुंचने के बाद GRAP के स्टेज-4 को लागू करने का फैसला लिया। आयोग के आदेश के मुताबिक, शनिवार शाम 4 बजे AQI 431 दर्ज किया गया था, जो बढ़कर शाम 6 बजे 446 तक पहुंच गया। पलूशन की ताजा वजह क्या बताई गई CAQM ने बताया कि हवा की रफ्तार कम होना, वातावरण का स्थिर रहना, प्रतिकूल मौसम और प्रदूषकों का फैलाव न हो पाना—इन सभी कारणों से वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। इसे देखते हुए आयोग की उप-समिति ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में तत्काल प्रभाव से GRAP स्टेज-4 लागू करने का निर्णय लिया। यह पहले से लागू स्टेज-1, 2 और 3 के अतिरिक्त है। आयोग ने NCR के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और संबंधित एजेंसियों को अतिरिक्त निवारक कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि वायु गुणवत्ता और अधिक खराब न हो। रविवार को भी पलूशन बहुत ज्यादा इस बीच, रविवार सुबह दिल्ली घने स्मॉग की चादर में लिपटी नजर आई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत AQI 461 दर्ज किया गया, जो ‘सीवियर’ श्रेणी में आता है। यह स्थिति तब है, जब GRAP-IV पहले से लागू है। शहर के कई इलाकों गाजीपुर, आईटीओ और आनंद विहार में घना धुंध छाया रहा, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई। CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता अब भी ‘सीवियर’ श्रेणी में बनी हुई है। आज 497 पहुंचा एक्यूआई सुबह 7 बजे बवाना में सबसे खराब AQI 497 दर्ज किया गया। वहीं नरेला में AQI 492 और ओखला फेज-2 में 474 रिकॉर्ड किया गया। इसके मुकाबले एनएसआईटी द्वारका में AQI 411 रहा, जो शहर में सबसे कम दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, राजधानी में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति बनी हुई है और विशेषज्ञ लगातार अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी और ठोस नीतिगत कदमों की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।  

एनसीआर को बड़ी सौगात की तैयारी: 7,000 फ्लैट्स के प्रोजेक्ट का खाका सुप्रीम कोर्ट में रखेगा यीडा

नई दिल्ली  ग्रेटर नोएडा में जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड के अधूरे प्रोजेक्ट में फंसे 7 हजार से ज्यादा घर खरीदारों के लिए एक बार फिर उम्मीद की किरण जागी है। जो लोग लंबे समय से फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यीडा नई योजना लेकर आया है। इसके तहत यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) नई आवासीय स्कीम को सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेगा। उसके बाद इसपर काम शुरू हो जाएगा। यीडा अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में आयोजित एक बैठक में इस प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति, पैसों से जुड़ी दिक्कत और आगे क्या किया जा सकता है जैसी बातों पर चर्चा की गई। यह बैठक लखनऊ में आयोजित की गई थी। लखनऊ में बैठक के दौरान बनाई स्ट्रैटजी जेपी स्पोर्ट्स सिटी मामले को लेकर हाईकोर्ट ने एक कमेटी बनाई थी, जिसकी पहली मीटिंग दो दिन पहले हुई। इस मीटिंग की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने की। मीटिंग में यीडा ने जेपी एसोसिएट्स की रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए की गई स्टडी रिपोर्ट अधिकारियों के सामने रखी। यह रिपोर्ट करी एंड ब्राउन कंपनी ने तैयार की थी। इसी मीटिंग के दौरान प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति, अब तक बिक चुके और खाली पड़े फ्लैट पर विचार किया गया। इसके अलावा विभिन्न बैंकों से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई। साथ ही अधिकारियों ने यह भी देखा कि किन कारणों की वजह से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया है और इसे पूरा करने में क्या क्या चुनौतियां सामने आ रही हैं?   सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को ध्यान में रककर बनेगा प्लान मीटिंग में 19 मई 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी ध्यान में रखा गया। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा था कि प्राधिकरण प्रोजेक्ट रुका हुआ पूरा करने के लिए नया प्लान बना सकता है, लेकिन काम शुरू करने से पहले उसमें कोर्ट की अनुमति लेनी होगी। ताकि लोगों को उनके फ्लैट मिलने में किसी तरह की कोई दिक्कत दोबारा न आए। इसी को ध्यान में रखते हुए यीडा को आवासीय क्षेत्र का विस्तृत प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्लान हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार तैयार किया जाएगा और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा। यीडा के सीईओ आरके सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि जेपी एसोसिएट्स की परियोजना के लिए आवासीय क्षेत्र का प्लान तैयार किया जाएगा और उसे सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद ही किसी भी तरह का निर्माण कार्य या आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। कब शुरू हुआ था यह प्रोजेक्ट? जेपी एसोसिएट्स की सहयोगी कंपनी जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स को साल 2009-10 में स्पोर्ट्स सिटी बनाने के लिए 1000 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। यह जमीन विशेष विकास क्षेत्र (SDZ) योजना के तहत दी गई थी। इसी प्रोजेक्ट में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट भी शामिल था। बाद में यह कंपनी भारी कर्ज में डूब गई, जिसके कारण 2020 में जमीन का आवंटन रद कर दिया गया। आवंटन रद होने के बाद इस फैसले को इलाहबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा लेकिन प्राधिकरण को प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेकर पूरे करने का निर्देश दिए। उसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन वहां भी हाईकोर्ट के फैसले को ही प्रभावी माना गया।  

यादें होंगी ताज़ा, सफर होगा स्मार्ट: 30 साल बाद दिल्ली में फिर दौड़ेगी डबल डेकर बस

नई दिल्ली  दिल्ली में 30 साल बाद डबल डेकर बसों का वापसी का ऐलान किया गया है। अब ये बसें केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि राजधानी का टूरिस्ट आकर्षण बनकर सामने आएंगी। नई डबल डेकर बसें आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और पूरी तरह इलेक्ट्रिक हैं। इन्हें अशोक लेलैंड ने अपनी CSR पहल के तहत बनाया है। बस में 60 से ज्यादा यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है और इसकी ऊंचाई 4.75 मीटर है। बाहरी हिस्से पर दिल्ली के प्रमुख लैंडमार्क की खूबसूरत तस्वीरें बनी हैं। नई बस यात्रियों को दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर करवाएगी। इसका सफर प्रधानमंत्री म्यूजियम से शुरू होगा और भारत मंडपम, नेशनल वॉर मेमोरियल, नया संसद भवन, दिल्ली हाट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों तक जारी रहेगा। बस में एक गाइड भी मौजूद रहेगा जो प्रत्येक इमारत और स्थल से जुड़ी रोचक जानकारियां बताएगा। डबल डेकर बसें कभी 'सुविधा बस' के नाम से दिल्ली की पहचान हुआ करती थीं। 1970 से 1989 तक लाल रंग की ये दो मंजिला बसें बच्चों और बड़ों के लिए रोमांच और यात्रा का अहम हिस्सा थीं। ऊपरी डेक से यात्रा का अनुभव खासतौर पर यादगार माना जाता था। समय के साथ इन बसों का मेंटेनेंस महंगा और मुश्किल हो गया, जिसके कारण ये धीरे-धीरे शहर की सड़कों से गायब हो गईं। अब नई डबल डेकर बसों के आने से राजधानी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोग आधुनिक, सुरक्षित और रोचक अनुभव के साथ दिल्ली दर्शन का आनंद ले सकेंगे। बड़ों के लिए किराया 500 रुपये और 6 से 12 साल के बच्चों के लिए 300 रुपये तय किया गया है।

दिल्लीवालों के लिए खुशखबरी: प्रगति मैदान अंडरपास का अंतिम चरण पूरा होने वाला, ट्रैफिक होगा आसान

नई दिल्ली  दिल्ली के व्यस्त भैरों मार्ग और रिंग रोड पर ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर का आखिरी अंडरपास (अंडरपास-5) जल्द पूरा होने की राह पर है। मुख्य टनल और पांच अंडरपास तो जून 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन कर दिया था, लेकिन ये छठा हिस्सा तकनीकी दिक्कतों और बाढ़ की वजह से रुका हुआ था। अब केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने से काम दोबारा शुरू हो सकता है। 2023 के मॉनसून में भारी बारिश और यमुना के करीब होने से कंक्रीट बॉक्स धंस गए। ऊपर तीन एक्टिव रेलवे ट्रैक होने से निर्माण सिर्फ रात के कुछ घंटों में ही संभव था। काम साल 2023 से ठप पड़ा था। PWD ने IIT दिल्ली और IIT बॉम्बे से सलाह ली। पहले 'कट एंड कवर' तरीका सुझाया गया, जिसमें ट्रैक हटाने पड़ते, लेकिन रेलवे ने लंबे ब्लॉक की इजाजत नहीं दी। नया प्लान क्या है? PWD ने संशोधित डिजाइन बनाया, जिसमें ऊंचाई 5.5 मीटर से घटाकर 3.9 मीटर और चौड़ाई 11.5 मीटर से 6.25 मीटर की गई। तीन लेन की जगह दो लेन, और सिर्फ हल्के वाहनों (कार, बाइक) के लिए। 'कास्ट इन-सिटू' तरीके से काम होगा, बिना धंसे बॉक्स को छेड़े। जून 2025 में MoHUA ने इसे मंजूरी दी। अब रेलवे से अंतिम क्लियरेंस का इंतजार है। ट्रैफिक को कितनी राहत मिलेगी? ये 110 मीटर का अंडरपास पूरा होने पर भैरों मार्ग से रिंग रोड की दिशा में सीधा ट्रैफिक चलेगा। फिलहाल एक तरफ का दो-लेन हिस्सा ही चल रहा है, दूसरी दिशा में वाहनों को यू-टर्न लेना पड़ता है। पूरा होने पर सराय काले खां से कश्मीरी गेट तक सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी। रोजाना लाखों वाहनों को फायदा होगा। बाकी 28 मीटर का काम पूरा करने में करीब 8 महीने लग सकते हैं।