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दिल्ली-NCR में बारिश का कहर, गरज के साथ तेज बौछारें; IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

नई दिल्ली दिल्ली-NCR में मौसम ने शुक्रवार को अचानक करवट ली है. कई इलाकों में तेज गरज के साथ झमाझम बारिश से लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट को बढ़ाकर रेड अलर्ट कर दिया है. मौसम विभाग के इस अलर्ट के बाद दिल्ली और एनसीआर के लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है।  जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों के साथ-साथ नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश हुई है. मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. लगातार बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है. हालांकि राहत की बात यह है कि जन्माष्टमी के चलते स्कूल-कॉलेज और तमाम दफ्तरों में छुट्टी होने के चलते सड़कों पर ट्रैफिक का कम दबाव रहेगा।  मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, राजधानी के ज्यादातर हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश (50 से 100 मिमी) होने की आशंका है. बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है।  राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक भी मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. वहीं मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय है और यह श्रीगंगानगर से होकर निम्न दबाव वाले क्षेत्र तक गुजर रही है. इसका असर उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है।  राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. पिछले 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई. सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे ज्यादा 130 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. राजस्थान के अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ में भी हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।   

गाजियाबाद में स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी और टीकाकरण पर सवाल, सूचना आयुक्त ने निगम से मांगे दस्तावेज

गाजियाबाद राज्य सूचना आयोग ने गाजियाबाद नगर निगम को आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) के नसबंदी और टीकाकरण अभियान को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने निगम के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें एनजीओ को किए गए भुगतान की जानकारी को 'थर्ड पार्टी की आर्थिक हित से जुड़ी सूचना' बताकर देने से इनकार किया गया था। सूचना आयोग ने नगर निगम से स्पष्ट कहा, 'अगर स्ट्रीट डॉग्स को वैक्सीन दी जा रही है तो वे कहीं से खरीदी भी जा रही होंगी, दिखाइए उसके कागज।' क्या है पूरा मामला? एक आरटीआई आवेदन के जवाब में गाजियाबाद नगर निगम ने बताया था कि नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का काम एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के माध्यम से कराया जा रहा है। इसमें निगम ने दावा किया था कि 1 अक्टूबर 2023 से 15 अप्रैल 2026 के बीच गाजियाबाद नगर निगम सीमा क्षेत्र में 22,494 स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी व टीकाकरण किया गया है। GDA के दावों पर क्यों खड़े हुए सवाल? हालांकि, इस दावे के बाद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे क्योंकि 2020 में हुए पशु सर्वे में शहर में करीब 48 हजार कुत्ते होने का अनुमान लगाया गया था। इसके मुकाबले नगर निगम अब तक 53,447 से अधिक कुत्तों का स्टरलाइजेशन कराने का दावा सवाल खड़े कर रहा था। इसके बाद ही आरटीआई के जरिये मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। भुगतान की जानकारी छिपाने का आरोप आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से जब इस कार्य के बदले एनजीओ को दिए गए भुगतान का ब्योरा मांगा गया, तो नगर निगम ने यह कहते हुए जानकारी देने से मना कर दिया कि यह तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के वित्तीय हितों से जुड़ी निजी जानकारी है। सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम के मुख्य आदेश निगम के इसी जवाब से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने नगर निगम के रवैये पर सवाल खड़े किए और निम्नलिखित निर्देश दिए…     सरकारी कोष के इस्तेमाल का हिसाब दें: यह थर्ड पार्टी का मामला नहीं है, क्योंकि आवेदक ने एनजीओ की बैलेंस शीट या बैंक स्टेटमेंट नहीं मांगा है। सरकारी खजाने से जो पैसा एनजीओ को दिया गया है, उसका ब्योरा जनता के सामने आना चाहिए।     सत्यापन की प्रणाली की जानकारी दें: एनजीओ ने 22,494 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का दावा किया है, लेकिन इस दावे को सत्यापित (Verify) करने के लिए नगर निगम के पास क्या सिस्टम है, इसका ब्योरा उपलब्ध कराना होगा।     वैक्सीन खरीद का हिसाब दें: एनजीओ ने इतनी बड़ी संख्या में टीके (वैक्सीन) कहां से खरीदे, इसके बिल और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।  

पानी की सप्लाई बंद होने से पहले मिलेगा SMS अलर्ट, दिल्ली जल बोर्ड शुरू करेगा नई सर्विस

नई दिल्ली  जिस तरह बिजली वितरण कंपनियां पावर कट या विलिंग संबंधित तमाम अपडेट्स उपभोक्ताओं को देती रहती है, उसी तरह जल बोर्ड ने भी उपभोक्ताओं को SMS के जरिए पानी संबंधित तमाम जानकारियां उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। पहले फेज में 20 लाख उपभोक्ताओं से बोर्ड SMS ब्रॉडकास्ट सर्विस शुरू करेगा। इस योजना के लिए जल्द ही एक प्राइवेट एजेंसी भी नियुक्त की जाएगी। SMS ब्रॉडकास्ट सर्विस नहीं होने के चलते शिकायतों की संख्या अधिक है। इससे जल बोर्ड के हेल्पलाइन नंबर पर भी बोझ अधिक बढ़ता जा रहा है। बिजली कंपनी की तरह पानी का एसएमएस आएगा जल बोर्ड अफसरों के अनुसार दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली वितरण कंपनियां अपने उपभोक्ताओं को बिजली संबंधित हर तरह की जानकारी SMS और वट्सऐप पर जारी करती है। बिजली बिल घर पर डिलीवर करने से कुछ दिन पहले बिजली कंपनियां सभी उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के बारे में जानकारी भी देती है। इसी तरह जल बोर्ड भी अब अपने उपभोक्ताओं को SMS सर्विसेज उपलब्ध कराएगा। इसमें पानी व सीवर संबंधित नियोजित या अनियोजित मेटिनेस वर्क, पानी सप्लाई ठप होने, लाइनों में किसी तरह की खराबी आने और मेंटेनेंस के बाद पानी सप्लाई शुरू करने संबंधित तमाम जानकारियां उपभोक्ताओं के मोबाइल पर SMS के जरिए दी जाएगी। जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि दिल्ली के नागरिकों के साथ तुरंत और बड़े पैमाने पर संवाद करने की नियमित आवश्यकता होती है। ऐसी सूचनाओं के प्रसार में देरी से नागरिकों को असुविधा होती है, जिससे हेल्पलाइन नंबर 1916 पर शिकायतों का बोझ बढ़ता है। अफसरों का कहना है कि ब्रॉडकास्ट SMS सर्विसेज के लिए किसी प्राइवेट कंपनी को हायर किया जाएगा। शुरुआत में 20 लाख उपभोक्ताओं से सर्विसेज की शुरुआत की जाएगी। ई-केवाईसी होने के बाद उपभोक्ताओं की संख्या करीब 60-62 लाख होने की उम्मीद है। इसके बाद SMS सर्विसेज का दायरा बाकी उपभोक्ताओं तक बढ़ाया जाएगा। सर्विस की शुरुआत अगले एक या डेढ़ महीने में किया जाएगा। 123 होटलों के बोरवेल होंगे सील नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त रुख के बाद दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने पहाड़गंज और आसपास के इलाको में भूजल के अवैध दोहन पर कार्रवाई तेज कर दी है। डीजेबी ने रिपोर्ट जमा करके बताया है कि इलाके में चिह्नित 555 होटल और गेस्ट हाउस में से 432 ने अपने बोरवेल पर डिजिटल वॉटर मीटर/पीजोमीटर लगा लिए है। वही, नियमों का पालन नहीं करने वाले 123 होटलों के बोरवेल सील करने की तैयारी है। DJB की रिपोर्ट के अनुसार, पिछली सुनवाई तक सिर्फ 162 होटल और गेस्ट हाउस मे मीटर लगाए गए थे। एनजीटी के सख्त रुख के बाद डीजेबी ने होटल असोसिएशनों के साथ बैठके की और लगातार फॉलो-अप किया। डीजेबी ने एनजीटी को बताया है कि भूजल निकासी की निगरानी आगे भी जारी रहेगी।  

अभिजीत दीपके से क्यों भिड़े मनीष ब्रह्मभट्ट? जानें कौन हैं CJP-D बनाने वाले नेता

नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी बनी और टूटकर दो हिस्से होने की कगार पर भी है। खबर है कि सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी D का ऐलान कर दिया है। इसका मतलब 'डेमोक्रेटिक' या 'लोकतांत्रिक' से है। उन्होंने सीजेपी पर राजनीति करने के आरोप लगाए हैं। कौन हैं ब्रह्मभट्ट जो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद अब अलग सीजेपी की शुरुआत कर रहे हैं। ब्रह्मभट्ट के आरोप हैं कि संगठन अब AAP यानी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की 'मनमाने ढंग से चुनी गई टीम' बन गया है। साथ ही कहा कि इसमें आंदोलन में शामिल रहे लोगों को प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिल रहा है। ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।' कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के माय नेता पर दर्ज जानकारी के अनुसार, ब्रह्मभट्ट गुजरात के पालनपुर के हैं। उन्होंने हेमचंद्राचार्य यूनिवर्सिटी से साल 2006 में एलएलबी की है। इससे पहले इसी विश्वविद्यालय से 2005 में बीकॉम की थी। खास बात है कि वह चुनावी राजनीत में भी किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन कुछ खास सफलता नहीं मिली। उन्होंने साल 2022 में पालनपुर सीट से ही गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ा था। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे ब्रह्मभट्ट को हार का सामना करना पड़ा था और महज 964 वोट ही हासिल किए थे। इस सीट पर तब भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार अनिकेत ठक्कर ने 95 हजार से ज्यादा वोट लेकर जीत हासिल की थी। अलग होकर क्या बोले मनीष ब्रह्मभट्ट CJP-डेमोक्रेटिक के फाउंडर ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'आज हम 'कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक' लॉन्च कर रहे हैं… हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? यह आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना बहाया था, लेकिन आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया और इसका राजनीतिकरण कर दिया गया। अब यह 'टीम केजरीवाल' बन गई है क्योंकि अभिजीत दीपके और अन्य लोगों ने अपने घरों में आराम से बैठकर 12 सदस्यों की टीम बना ली।' उन्होंने कहा, 'आंदोलन की सफलता के बाद किसी भी वॉलंटियर या प्रदर्शनकारी को न तो बुलाया गया और न ही उनसे राय ली गई। सोशल मीडिया या इंस्टाग्राम से जुड़े लोगों से भी जरूरी शर्तों के बारे में नहीं पूछा गया। इसके बजाय उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों, एक महिला मित्र और कॉलेज के दोस्तों को शामिल करके टीम बना ली।' उन्होंने कहा, 'हम चाहते थे कि यह एक राष्ट्रीय टीम हो, जिसमें हर राज्य से पांच लोग हों और उन क्षेत्रों से प्रदर्शनकारियों और वॉलंटियर्स को चुना जाए। हमने इच्छा जताई थी कि चयन प्रक्रिया 'हाई कमांड' या किसी मनमाने अधिकारी के इशारे पर न हो, लेकिन उन्होंने इस इच्छा को ठुकरा दिया और मनमाने ढंग से टीम बना ली। इस टीम को बनाने का विचार भी अरविंद केजरीवाल का ही था क्योंकि वे शुरू से ही धोखेबाज रहे हैं। जब अन्ना आंदोलन शुरू हुआ, तो उन्होंने अन्ना का फायदा उठाया…।'

Delhi Holiday: BRICS समिट के कारण 11 सितंबर को सरकारी कार्यालयों में अवकाश, जानें क्या-क्या रहेगा बंद

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में होने जा रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने 11 सितंबर 2026, शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. इस फैसले से दिल्ली के लोगों को लगातार तीन दिनों का लंबा वीकेंड मिलने की संभावना है. सरकार का कहना है कि सम्मेलन के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।  सभी सरकारी कार्यालयों में रहेगा अवकाश दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (को-ऑर्डिनेशन ब्रांच) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सभी सरकारी कार्यालयों, स्वायत्त निकायों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 11 सितंबर को अवकाश घोषित किया है. इस दिन इन संस्थानों में नियमित कामकाज नहीं होगा।  BRICS सम्मेलन के कारण लिया गया निर्णय सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि BRICS शिखर सम्मेलन के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए यह अवकाश घोषित किया गया है. सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।  ऐसे में राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक तैयारियों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सम्मेलन के दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. सुरक्षा एजेंसियां बड़े स्तर पर तैनात रहेंगी और कुछ मार्गों पर विशेष प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं. इस वजह से आम लोगों को यात्रा की योजना पहले से बनाकर चलने की सलाह दी जा रही है। 

बिल्डरों को सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, ब्रोशर में जो वादा किया उसे पूरा करना होगा; DLF मामले में सख्ती

नई दिल्ली अक्सर ऐसा देखा जाता है कि बिल्डर कोई भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू करते वक्त ब्रोशर, पंपलेट या वेबसाइट में बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बाद में इसे मार्केटिंग बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं. ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर के एक नामी बिल्डर को कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ब्रोशर में किए वादे सिर्फ मार्केटिंग नहीं हैं, उसी के मुताबिक प्रोजेक्ट देना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रोजेक्ट के ब्रोशर में संभावित होमबायर्स से किए गए वादों को महज मार्केटिंग मैटेरियल बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।  रियल एस्टेट डेवलपर की जिम्मेदारी है कि वह आवासीय परियोजना का निर्माण और डिलीवरी वैसे ही करे, जिनका वादा खरीदारों से किया गया था. गुरुग्राम के DLF होम डेवलपर्स ‘द प्राइमस' के प्रोजेक्ट पर सुनवाई के दौरान अदालत ने ये टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने मूल योजना में प्रस्तावित 24 मीटर चौड़ी रोड में लगातार बदलावों पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने दो टूक कहा कि किसी आवासीय परियोजना के ब्रोशर में सुविधा, लेआउट या अन्य वादे केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नहीं माने जा सकते. डेवलपर को परियोजना को उसी तौर पर विकसित करना होगा जैसा खरीदारों के सामने पेश किया गया था।  सड़क में बदलाव को मामूली नहीं माना जा सकता जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि सड़क से संबंधित बदलाव मामूली नहीं कहे जा सकते. ये काफी मायने रखता है. सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट को ब्रोशर के वादे तहत कदम नहीं उठाता तो वह उचित आदेश पारित करेगा. दस्तावेजों के मुताबिक, प्रोजेक्ट में 24 मीटर चौड़ी रोड के लिए 147 मीटर लंबे हिस्से में से करीब 52 मीटर को ग्रीन एरिया बना दिया गया है. वहीं सड़क का एक बड़ा हिस्सा सोसायटी के लोगों और मेहमानों की पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है.अदालत ने कहा कि लगभग 100 मीटर की सड़क के करीब 66 फीसदी हिस्से का इस्तेमाल तो ग्रीन एरिया या पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था।  24 मीटर चौड़ी सड़क का अधूरा वादा पीठ ने नाराजगी जताई कि कई मौके दिए जाने के बाद भी बिल्डर ने खामी को सुधारा. जजों ने कहा कि ये समझ से परे है कि प्रोजेक्ट को ब्रोशर में किए वादों के तहत पूरा करने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन अभी तक हालात नहीं बदले. सुप्रीम कोर्ट का ये ऑर्डर सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट के बाद आया. कोर्ट ने 24 मीटर चौड़ी सड़क और प्रोजेक्ट का अन्य मामलों में अनुपालन न होने कथित अनियमितताओं से जुड़ी अन्य शिकायतों पर प्रारंभिक तथ्य-जांच करने का निर्देश CBI को दिया था।  सीबीआई ने दाखिल की थी स्टेटस रिपोर्ट CBI ने स्टेटस रिपोर्ट के पहले प्रोजेक्ट के नक्शों, तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निस्संदेह मूल परियोजना और ब्रोशर में जैसी सड़क दिखाई गई थी, वैसी रोड प्रोजेक्ट में मौजूद नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने रोड के लिए जरूरी जमीन न देने और लापरवाही को लेकर हरियाणा सरकार और उसके अफसरों पर भी नाराजगी जताई. कोर्ट ने सोसायटी के निवासियों की RWA वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव की दिक्कतों पर एक्शन न लेने पर भी सरकारी अफसरों के प्रति असंतोष दिखाया। 

दिल्लीवासियों को राहत, सरकारी दुकानों और वैन से 35 रुपये किलो मिलेगा प्याज

नई दिल्ली दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से प्याज की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हैं। इसे देखते हुए दिल्ली सरकार ने उचित दर की दुकानों (सरकारी राशन दुकानों) और वैन के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार राजधानी में प्याज का संकट पैदा नहीं होने देगी। सरकार का उद्देश्य दिल्लीवासियों को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें उचित और सस्ती दरों पर प्याज उपलब्ध कराना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्याज आम लोगों की पहुँच से बाहर न हो। दिल्ली के लिए 1000 टन प्याज आवंटित उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के लिए 1000 टन प्याज आवंटित करने का निर्णय लिया है। इसे उचित दर की दुकानों के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली के सभी 13 जिलों में एक-एक वैन के माध्यम से भी प्याज की बिक्री की जाएगी। प्रत्येक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में वैन पहुँचने से लोगों को प्याज खरीदने में आसानी होगी। इससे राजधानी के विभिन्न इलाकों में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकेंगे।

6 फ्लैग स्टाफ रोड बनेगा दिल्ली का पहला स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर

नई दिल्ली दिल्ली में 'शीशमहल' के नाम से चर्चित पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले को अब रेखा गुप्ता सरकार ने नया रूप में देने का फैसला लिया है। अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास 6, फ्लैग स्टाफ रोड सिविल लाइंस स्थित सरकारी बंगले को दिल्ली गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर बनाने का फैसला लिया गया है। विवादों में रहे इस बंगले में राज्य के CIP गेस्ट के ठहरने की व्यवस्था होने के साथ-साथ सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी जगह उपलब्ध कराएगी। 2023 में भाजपा ने बंगले के कथित 45 करोड़ रुपये के सौंदर्यीकरण और लग्जरी सुविधाओं को लेकर इसे 'शीशमहल' करार किया था। सरकार जल्द ही इसे लेकर औपचारिक घोषणा कर सकती है।     केजरीवाल के इस्तीफे और बंगले के निर्माण को लेकर शुरू हुई जांच के बाद से ही यह बंगला खाली पड़ा है।     खाली पड़े इस बंगले का इस्तेमाल कैसे हो, इसे लेकर सरकार में लंबे समय से चर्चा चल रही थी।     पहले चर्चा थी कि इसे आधिकारिक तौर पर सीएम आवास घोषित किया जाएगा, लेकिन सीएम रेखा गुप्ता ने इसमें रहने से इनकार कर दिया।     उसके बाद इसे म्यूजियम बनाने को लेकर भी योजना बनाई गई, लेकिन अब उस योजना को भी खारिज कर करके दिल्ली सरकार ने गेस्ट हाउस बनाने का फैसला किया है दिल्ली को मिलेगा पहला स्टेट गेस्ट हाउस     दिल्ली में सरकार का अभी तक अपना कोई स्टेट गेस्ट हाउस नहीं है।     द्वारका में एक स्टेट गेस्ट हाउस बनाने की योजना है, लेकिन अभी तक उस पर काम शुरू नहीं हो पाया है।     इसलिए सरकार ने फैसला किया है कि राज्य के जो भी VVIP गेस्ट होंगे वह इस बंगले में रुकेंगे।     देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधिमंडल, विशिष्ट अतिथियों और उच्चस्तरीय अधिकारियों की मेजबानी इस बंगले में की जाएगी।     सरकारी बंगले को VIP मेहमानों के लिए गेस्ट हाउस के साथ-साथ कला और संस्कृति केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा।     यहां एक सभागार और आधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम भी विकसित किया जाएगा।     परिसर में प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन और सरकारी समारोह का भी आयोजन किया जाएगा। क्योंकि इसके अंदर एक बड़ा परिसर भी है जहां इस तरह के आयोजन किए जा सकते हैं।

दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाए जाएंगे, रिज क्षेत्र में लगेंगे पीपल, नीम और बरगद

नई दिल्ली  तीन-चार वर्षों में दिल्ली के रिज क्षेत्र की सूरत बदलने वाली है। यहां से विलायती कीकर और बबूल जैसे पेड़ों को हटाकर उनकी जगह पर्यावरण के अनुकूल और ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन, जामुन जैसे देसी प्रजाति के पेड़ लगाए जाएंगे। इस तरह पूरे रिज क्षेत्र को 'दिल्ली का लंग्स' यानी फेफड़ा बनाया जाएगा, जो शहर को स्वच्छ हवा मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाएगा। आम लोगों को प्रकृति से जोड़ने के लिए रिज एरिया में खास तरह के 8 वन भी बनाए जाएंगे और उनमें अलग-अलग तरह के देसी प्रजाति के पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही रिज एरिया में मौजूद वॉटर बॉडीज और पुरातात्विक संरचनाओं का संरक्षण भी किया जाएगा। यहां 70 से अधिक छोटे तालाब और कुछ छोटे रेस्तरां भी बनाए जाएंगे। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को दिल्ली में पौधरोपण महाअभियान की शुरुआत करते हुए ये जानकारियां साझा कीं। इस अभियान के तहत दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाए जाएंगे। प्रदूषण कम करने पर जोर अभियान के तहत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में सरकारी विभागों, स्कूलों, स्थानीय निकायों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा। इसका उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करना भी है। सरकार का कहना है कि इससे राजधानी का हरित क्षेत्र बढ़ेगा, वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और आने वाले वर्षों में दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलाने में मदद मिलेगी।

PM उदय योजना को नहीं मिल रहा रिस्पॉन्स, प्रॉपर्टी नियमितीकरण शुल्क कम करने की तैयारी

नई दिल्ली  1511 अनाधिकृत कॉलोनियों में जैसा है वैसे ही के आधार पर लोगों को उनकी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक देने के लिए नए सिरे से पीएम उदय योजना की शुरुआत की गई थी। नियमों को आसान बनाते हुए यह प्रक्रिया DDA की बजाय MCD को दी गई थी। इसके बावजूद इसे रिस्पांस नहीं मिल रहा है। अब MCD की मांग पर DDA इस योजना के तहत रेगुलराइजेशन शुल्क कम करने पर विचार कर रही है। अधिकारी के अनुसार MCD की तरफ से यह मांग मिली है जिस पर अधिकारी विचार कर रहे हैं। अभी तक पीएम उदय योजना को कोई खास रिस्पांस नहीं मिला है। पोर्टल पर दी जा रही जानकारी के अनुसार अभी तक 50 से भी कम आवेदन मिले हैं। हालांकि प्रक्रिया को सरल करने के बाद इसमें बड़ी संख्या में आवेदन आने की उम्मीद थी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि इसके नियमतीकरण का शुल्क अधिक है। आवेदन न मिलने और इस शुल्क में कमी के लिए अप्रैल में MCD ने DDA को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि इस शुल्क को कम किया जाए। MCD को उम्मीद है कि DDA इस शुल्क को कम करे तो बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर सकते हैं। 2019 में शुरु हुई पीएम उदय योजना दिल्ली में पीएम उदय योजना 2019 में लाई गई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य 1731 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 45 लाख प्रॉपर्टी मालिकों को उनके घर का स्वामित्व का अधिकार देना था। हालांकि तय मानकों से अतिरिक्त निर्माण करने के व दूसरी प्रक्रियाएं जटिल होने की वजह से छह साल में मात्र 40 हजार लोग ही इसका लाभ ले सके थे। DDA से मिले कम रिस्पांस के बाद केंद्र सरकार ने नए बदलावों व आसान प्रक्रिया के साथ अप्रैल 2026 में इन कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा कर मालिकाना हक देने की बात कही थी। इस बार प्रक्रिया को आसान किया गया और MCD को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि कोर्ट में चल रहे मामलों की वजह से करीब 200 कॉलोनियों को इसमें से हटा लिया गया। फिलहाल 350 AFR की ही अनुमति फिलहाल यहां पर संपत्तियों की खरीद फरोख्त जनरल पावर अटॉर्नी के आधार पर होती है। इसलिए MCD ने DDA से अपील की है कि इसके रेगुलराइजेशन का शुल्क एक तिहाई कम करे। अभी तक 350 फ्लोर एरिया रेशियो (AFR) की ही अनुमति है। अभी तक रेगुलराइजेशन के लिए यदि किसी 100 गज की जमीन पर बनी चार मंजिला इमारत के ऊपर किसी ने दो मंजिल और बना रखी है तो उसे करीब सात से 10 लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बाकी खर्चे अलग हैं। ऐसे में निगम ने मांग की है कि इस शुल्क को भी घटाया जाए। क्योंकि अतिरिक्त FAR लेने पर 11 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क है, वह तीन गुणा अधिक देना पड़ता है। यही वजह है कि लोग अप्लाई नहीं कर रहे हैं। अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकांश निर्माण नियमों के तहत नहीं है। इसलिए तीन गुणा अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।