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चंडीगढ़ में बम की धमकी से हड़कंप, 7 स्कूलों में चला सर्च ऑपरेशन, मौके पर पहुंची डॉग स्क्वायड

चंडीगढ़. चंडीगढ़ में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब शहर के सात प्रमुख स्कूलों को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। धमकी मिलने के बाद चंडीगढ़ पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने सभी स्कूलों में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया। एहतियात के तौर पर स्कूल परिसरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस कंट्रोल रूम के अनुसार सबसे पहले सेक्टर-31 स्थित एयर फोर्स स्कूल को धमकी भरा ई-मेल मिला। इसके बाद कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-37बी, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-37डी, विवेक हाई स्कूल सेक्टर-38, सेक्रेड हार्ट स्कूल सेक्टर-26, स्ट्रॉबेरी फील्ड्स हाई स्कूल सेक्टर-26, डीपीएस सेक्टर-40 और कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल सेक्टर-9 को भी इसी तरह की धमकी मिली है। धमकी मिलते ही सभी स्कूलों में पुलिस टीमें पहुंच गईं और पूरे परिसर की गहन जांच शुरू कर दी गई। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड प्रत्येक स्कूल के भवन, कक्षाओं, पार्किंग और अन्य संवेदनशील स्थानों की तलाशी ले रहे हैं। प्रारंभिक जांच में मामला ई-मेल के जरिए भेजी गई धमकी का प्रतीत हो रहा है। साइबर सेल ई-मेल के स्रोत, आईपी एड्रेस और भेजने वाले की पहचान करने में जुट गई है। फिलहाल किसी भी स्कूल से कोई संदिग्ध वस्तु मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चंडीगढ़ पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

रिश्वत मामले में सुंदर शाम अरोड़ा को राहत नहीं, हाई कोर्ट ने ट्रायल रोकने से किया इनकार

चंडीगढ़  पंजाब की पूर्व कांग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री रहे सुंदर शाम अरोड़ा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने रिश्वत मामले में दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली उनकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका आधारहीन है और इसमें कोई मेरिट नहीं है। गौरतलब है कि सुंदर शाम अरोड़ा को वर्ष 2022 में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने अपने सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) को 50 लाख रुपये की रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि आय से अधिक संपत्ति के मामले से अपना नाम निकलवाने के लिए उन्होंने एआईजी को एक करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी। विजिलेंस के अनुसार, अरोड़ा पहली किस्त के तौर पर 50 लाख रुपये लेकर पहुंचे थे, तभी उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी मामले में दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर चल रही ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रद्द करने के लिए उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, इस मामले में सुंदर शाम अरोड़ा को पहले ही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है।

CM मान आज महिलाओं के खातों में भेजेंगे सहायता राशि, ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ का होगा शुभारंभ

बरनाला. पंजाब विधानसभा चुनाव 2019 के समय आम आदमी पार्टी ने पांच गारंटियों को एलान किया था। इसी क्रम मे आज मुख्यमंत्री भगवंत मान सिंह मान धुरी में 'मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना' की शुरुआत करेंगे। इसके तहत आज से पंजाब की महिलाओं के खातों में एक हजार से 1500 रुपये ट्रांसफर होंगे।  मुख्यमंत्री वेब लिंक लॉन्च कर योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। अब तक योजना के तहत करीब 50 लाख महिलाओं का पंजीकरण हो चुका है। जनरल वर्ग की महिलाओं को एक हजार रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। बाद में रजिस्ट्रेशन कराने वाली महिलाओं को भी इस स्कीम का पूरा लाभ मिलेगा। सीएम मान आज तीन महीने की सम्मान राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर करेंगे। यह राशि 3500 से लेकर 4000 रुपये के बीच होगी। क्या है मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना? मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण महिला कल्याण स्कीम है। सीएम मान ने इस योजना का एलान पंजाब बजट 2026–27 के दौरान किया था। योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के अंतर्गत पंजाब की सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये सम्मान राशि दी जाएगी। योजना की शुरुआत आज से होगी। कैसे मिलेंगे रुपये? योजना के अंतर्गत राशि महिलाओं के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी। पंजाब राज्य की 18 वर्ष या अधिक आयु की महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकती हैं। क्या है पात्रता? योजना का लाभ लेने के लिए महिला का पंजाब का निवासी होना आवश्यक है। महिला की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए। महिला का आधार कार्ड बैंक अकाउंट से लिंक होना चाहिए। जरूरी दस्तावेज महिला का आधार कार्ड। महिला की बैंक पासबुक की फोटोकॉपी। पंजाब का राशन कार्ड या वोटर आईडी कार्ड। मोबाइल नंबर- आधार कार्ड और बैंक पासबुक से लिंक होना चाहिए। आज 97 फीसदी महिलाओं को मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को घोषणा की बुधवार को दोपहर 12 बजे के बाद राज्य की महिलाओं के मोबाइल फोन पर खास संदेश आएगा। संदेश में लिखा होगा कि आपके खाते में 4,500 या 3,000 रुपये जमा हो गए हैं। यह राशि पंजाब सरकार की ओर से राज्य की महिलाओं के लिए शुरू की जा रही मांवां धीयां सत्कार योजना के तहत डाली जाएगी।

पंजाब में महिलाओं को बड़ी सौगात! ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ लॉन्च, 40 लाख महिलाओं को एक साथ 3 महीने की राशि

 बरनाला  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महलकलां में कहा कि राज्य महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक दिन लिखने को तैयार है, क्योंकि आम आदमी पार्टी सरकार ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ शुरू करके एक और बड़ी गारंटी पूरी कर रही है। उन्होंने कहा कि दोपहर 12 बजे के बाद पूरे पंजाब में मोबाइल फोन बजने लगेंगे, क्योंकि हर महिला के बैंक खाते में तीन हजार और अनुसूचित जाति (एससी) की महिलाओं के खाते में चार हजार रुपये की तीन महीने की ‘सत्कार राशि’ एक ही किश्त में जमा की जाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब के तेज़ी से हो रहे विकास से घबराए विरोधी राज्य की प्रगति में बाधा डालने की साजिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "एक जुलाई से महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में पैसे मिलने लगेंगे। 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के तहत, हर महिला को हर महीने एक हजार मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे। यह रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी और जो महिलाएं पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन पा रही हैं, वे भी इसके लिए पात्र होंगी। उम्मीद है कि पंजाब की लगभग 97% महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिसके लिए राज्य सरकार ने बजट में कुल 9,300 करोड़ का प्रावधान किया है।" मान ने कहा, "हमारी सरकार लोगों की भलाई के लिए लगातार काम कर रही है। हमने घरों को मुफ़्त बिजली दी है, बिना किसी भ्रष्टाचार के 68,000 से ज़्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं, सड़कों को बेहतर बनाया है, टोल प्लाज़ा बंद करके रोज़ाना लगभग 70 लाख की बचत की है, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत किया है, बुनियादी ढांचा तैयार किया है और कई अन्य अहम पहल की हैं। जब हमारी सरकार सत्ता में आई थी, तब सिंचाई के लिए नहर के पानी का सिर्फ़ 22% ही इस्तेमाल हो रहा था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 80% से ज़्यादा हो गया है। हम राज्य भर में गांवों के विकास के लिए अनुदान भी दे रहे हैं।" राज्य में हेल्थकेयर में किए गए सुधारों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मुख्यमंत्री सेहत योजना देश की अपनी तरह की पहली योजना है जो पंजाब के हर परिवार को 10 लाख तक का कैशलेस इलाज देती है। इसका मकसद राज्य के हर परिवार को यूनिवर्सल हेल्थकेयर देना है, और लोग इस योजना के तहत 650 करोड़ से ज़्यादा का मुफ़्त इलाज करवा चुके हैं।" AAP ने पूरी की आखिरी गारंटी  मुख्यमंत्री वेब लिंक लॉन्च कर योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। अब तक योजना के तहत करीब 50 लाख महिलाओं का पंजीकरण हो चुका है। जनरल वर्ग की महिलाओं को एक हजार रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। बाद में रजिस्ट्रेशन कराने वाली महिलाओं को भी इस स्कीम का पूरा लाभ मिलेगा। सीएम मान आज तीन महीने की सम्मान राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर करेंगे। यह राशि 3500 रुपये से लेकर 4000 रुपये के बीच होगी। क्या है मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना? मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण महिला कल्याण स्कीम है। सीएम मान ने इस योजना का एलान पंजाब बजट 2026–27 के दौरान किया था। योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के अंतर्गत पंजाब की सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये सम्मान राशि दी जाएगी। योजना की शुरुआत आज से होगी। कैसे मिलेंगे रुपये? योजना के अंतर्गत राशि महिलाओं के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी। पंजाब राज्य की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकती हैं। क्या है पात्रता?     योजना का लाभ लेने के लिए महिला का पंजाब का निवासी होना आवश्यक है।     महिला की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए।     महिला का आधार कार्ड बैंक अकाउंट से लिंक होना चाहिए। जरूरी दस्तावेज     महिला का आधार कार्ड।     महिला की बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।     पंजाब का राशन कार्ड या वोटर आईडी कार्ड।     मोबाइल नंबर- आधार कार्ड और बैंक पासबुक से लिंक होना चाहिए। आज 97 फीसदी महिलाओं को मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को घोषणा की बुधवार को दोपहर 12 बजे के बाद राज्य की महिलाओं के मोबाइल फोन पर खास संदेश आएगा। संदेश में लिखा होगा कि आपके खाते में 4,500 या 3,000 रुपये जमा हो गए हैं। यह राशि पंजाब सरकार की ओर से राज्य की महिलाओं के लिए शुरू की जा रही मांवां धीयां सत्कार योजना के तहत डाली जाएगी।  

169 करोड़ के घपले में CBI की बड़ी कार्रवाई, रिटायरमेंट के दिन ही गिरफ्तार हुए IAS प्रदीप कुमार

चंडीगढ़ सरकारी नौकरी में रिटायरमेंट का दिन आमतौर पर विदाई, सम्मान और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. लेकिन हरियाणा के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के लिए यही दिन कानूनी कार्रवाई का दिन बन गया. हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के तत्कालीन सदस्य सचिव और आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उनके अंतिम कार्य दिवस पर गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान सरकारी धन के 169 करोड़ रुपये के कथित गबन और फर्जी निवेश से जुड़े मामले में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  यह गिरफ्तारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह उस बहुचर्चित बैंकिंग घोटाले की कड़ी है, जिसमें हरियाणा सरकार के कई विभागों के करोड़ों रुपये कथित तौर पर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और संदिग्ध बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किए गए. सीबीआई का दावा है कि अकेले HSPCB को 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसे एजेंसी हरियाणा सरकार के किसी विभाग को हुआ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान बता रही है।  जानिए, क्या है पूरा मामला सीबीआई के अनुसार, प्रदीप कुमार मूल रूप से 2011 बैच के हरियाणा सिविल सेवा (HCS) अधिकारी थे, जिन्हें बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत किया गया. सदस्य सचिव के तौर पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने बोर्ड की निवेश संबंधी प्रक्रिया में सीधे तौर पर भूमिका निभाई. जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने निर्धारित वित्तीय सीमा से कहीं अधिक राशि को चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC First Bank शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) बनाने के नाम पर ट्रांसफर करने की मंजूरी दी. यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ लिया।  फिक्स्ड डिपॉजिट कभी बना ही नहीं सीबीआई की जांच में सामने आया कि जिस रकम को एफडी के लिए भेजा गया था, वह पहले HSPCB के नाम से कथित तौर पर खोले गए एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई. जांच एजेंसी का कहना है कि इस खाते को खोलने के लिए न तो विभागीय स्वीकृति ली गई थी और न ही इसका कोई अधिकृत रिकॉर्ड मौजूद था. सबसे गंभीर आरोप यह है कि उस खाते में कभी कोई फिक्स्ड डिपॉजिट बनाया ही नहीं गया. इसके बजाय खाते से कथित तौर पर फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन किए गए और 169 करोड़ रुपये की रकम निकाल ली गई. सीबीआई का कहना है कि यह पूरा लेनदेन सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसकी जांच अभी जारी है।  नोटिस के बाद भी नहीं हुए पेश जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रदीप कुमार को कई बार जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वह पूछताछ से बचते रहे. इसी बीच उन्होंने पंचकूला की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर कर दी थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित थी. सीबीआई ने बताया कि उनकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. संयोग यह रहा कि उसी दिन उनका सरकारी सेवा का अंतिम कार्य दिवस भी था।  504 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा है मामला HSPCB का यह मामला अकेला नहीं है. जांच एजेंसी के अनुसार, यह 504 करोड़ रुपये के उस बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों के सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग की जांच चल रही है. सीबीआई का आरोप है कि सरकारी रकम को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर बैंक खातों में भेजा गया. बाद में कथित तौर पर फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए रकम निकालकर विभिन्न शेल कंपनियों तक पहुंचाई गई. इसी नेटवर्क की पूरी वित्तीय श्रृंखला की जांच अब सीबीआई कर रही है।  राज्य सरकार के अनुरोध पर CBI ने संभाली जांच शुरुआत में इस पूरे मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर रहा था. बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की. सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, विभागीय फाइलों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू की. बताया जा रहा  है कि सीबीआई के अनुसार, अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है. इनमें IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के छह अधिकारी,  हरियाणा सरकार के तीन अधिकारी, दो प्राइवेट कंपनियां और उसमें काम करने वाल छह कर्मचारी शामिल हैं.  प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी से पहले भी दो सीनियर सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

पंजाब में बढ़ा बिजली बिल? विभाग ने जारी की अहम जानकारी, जानें क्या करें

चंडीगढ़. पंजाब में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अहम खबर सामने आई है। मीटर रीडरों की हड़ताल के चलते पी.एस.पी.सी.एल. ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य भर में बिजली के बिल स्पीड पोस्ट के जरिए भेजे जाएंगे। इस फैसले से 10.5 लाख से अधिक खपतकार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। बिजली विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल सामान्य से ज्यादा आया है, बिल पर ‘एन कोड’ लिखा हुआ है या कई महीनों का इकट्ठा बिल मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। एन कोड का मतलब है कि मीटर की वास्तविक रीडिंग नहीं ली जा सकी और पिछली खपत के आधार पर अंदाजन (अनुमानित) बिल जारी किया गया है। यह फाइनल बिल नहीं माना जाएगा। पी.एस.पी.सी.एल. के अनुसार, जैसे ही मीटर की असली रीडिंग ली जाएगी, उसी के अनुसार पूरा हिसाब किया जाएगा। अगर किसी उपभोक्ता ने अधिक राशि जमा करवा दी है तो वह रकम अगले बिल में एडजस्ट कर दी जाएगी, वहीं कम भुगतान की स्थिति में बाकी राशि बाद में जोड़ी जाएगी। दरअसल, पंजाब में आउटसोर्स मीटर रीडर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिस कारण कई इलाकों में मीटर रीडिंग नहीं हो सकी। इसी वजह से विभाग को मजबूरी में अनुमानित बिल जारी करने पड़े। फिलहाल मीटर रीडरों की हड़ताल खत्म होने को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है और बातचीत जारी है।

जिला परिषद चुनाव परिणामों पर विवाद, मुक्तसर में धांधली के आरोप; हाईकोर्ट जाने की तैयारी

श्री मुक्तसर साहिब. मुक्तसर में मंगलवार को जिला परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरपर्सन का चुनाव कर लिया है। वोटिंग के बाद आम आदमी पार्टी की गुरविंदर कौर मलोट को चेयरपर्सन चुना गया। वहीं वाइस चेयरपर्सन शिरोमणि अकाली दल की कुलविंदर कौर जस्सिआना सर्वसम्मति से चुन ली गईं, क्योंकि आप के पास वाइस चेयरमैन का कोई उम्मीदवार नहीं था। यह प्रक्रिया रेड क्रास भवन में की गई। शिअद ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व विधायक और जिला प्रधान कंवरजीत सिंह रोजी बरकंदी ने कहा कि प्रशासन ने सत्ता पक्ष के इशारे पर धक्केशाही की। उनका आरोप है कि जिले की 13 सीटों में से सात शिअद के पास थीं, जबकि आप के पास सिर्फ पांच और कांग्रेस के पास एक सदस्य था। शिअद नेता ने क्या दावा किया? ऐसे में चेयरमैन शिअद का बनना चाहिए था। शिअद नेता मनजिंदर सिंह बिट्टू ने दावा किया कि ब्लाक समिति के दो चेयरमैनों सहित उनके पास नौ वोटें थीं। उन्होंने कहा कि एक वोट रद कर दी गई और एक सदस्य की वोट को धक्के से आप में शामिल करके हमें 8-7 के फर्क से हराया गया। एसडीएम ने मंत्री और विधायक के दबाव में आकर मनमानी की। शिअद ने साफ कर दिया है कि वह इस पूरे मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। प्रशासन के अनुसार 17 सदस्यों का कोरम था। इसमें चेयरमैन चुनाव के लिए आप को आठ वोट मिले, शिअद को सात वोट मिले और एक वोट रद हो गया। कांग्रेस से संबंधित एक जिला परिषद सदस्य गैरहाजिर रहा। आप ने मनाया जश्न आप ने चेयरपर्सन बनने पर जश्न मनाया। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री डा. बलजीत कौर, विधायक जगदीप सिंह काका बराड़ और गिद्दड़बाहा से विधायक हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों के भाई सनी ढिल्लों मौजूद रहे। नवनियुक्त चेयरपर्सन गुरविंदर कौर मलोट ने कहा कि वह विकास कार्यों को प्राथमिकता देंगी और लोगों की समस्याएं हल करने के लिए तत्पर रहेंगी। वाइस चेयरपर्सन कुलविंदर कौर जस्सिआना ने कहा कि वह चेयरमैन के बराबर कुर्सी पर बैठकर लोगों का काम करेंगी। धक्केशाही करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा शिअद के पूर्व विधायक कंवरजीत सिंह रोजी बरकंदी ने कहा कि इससे हफ्ता पहले भी जब चेयरमैन का चुनाव होना था तो सत्ता पक्ष ने बायकाट कर दिया था। अब मंगलवार को दूसरी बार चुनाव हुआ था अधिकारियों ने सरेआम सत्ता पक्ष के कहने पर धक्केशाही की है।‌ऐसा करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। आप के पास चार महीने चेयरमैनशिप रहेगी और उसके बाद विधानसभा चुनाव में लोग इनको धक्केशाही का जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि सोमवार को चुनाव से एक दिन पहले उनका ब्लाक समिति का चेयरमैन पुलिस ने बिना वजह उठा लिया था। जिसे हमने देर शाम को रिहा करवाया। यह सरकार की बौखलाहट है।

पंजाब के नए DGP पर जल्द फैसला! UPSC की अहम बैठक से साफ होगी तस्वीर

चंडीगढ़. पंजाब में आज परमानेंट डीजीपी नियुक्त होने का रास्ता साफ हो जाएगा। UPSC ने डीजीपी का पैनल शॉर्टलिस्ट करने के लिए आज बैठक बुलाई है। इस बैठक में तीन अधिकारियों का पैनल तैयार कर पंजाब सरकार को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर सरकार एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करेगी। जुलाई 2022 में पंजाब सरकार ने गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया था। इसके बाद से ही उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद पंजाब में स्थायी डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगी इसी साल फरवरी में यूपीएससी ने पंजाब सरकार से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम मांगे थे। इसके बाद पंजाब सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजी थी। इनमें से यूपीएससी आज तीन अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगी। अब पढ़ें 14 अफसरों की लिस्ट में किन-किन का नाम:- वर्तमान डीजीपी गौरव यादव समेत 14 अफसरों के नाम भेजे: पंजाब सरकार ने 6 अप्रैल को यूपीएससी को 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची भेजी थी, जिसमें वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव (1992 बैच) का नाम भी शामिल है। सरकार द्वारा भेजी गई इस सूची में वरिष्ठता के आधार पर गौरव यादव का नाम तीसरे स्थान पर है। इस बैच के सबसे वरिष्ठ अधिकारी शरद सत्य चौहान हैं, जिनके बाद क्रमशः हरप्रीत सिंह सिद्धू, गौरव यादव और कुलदीप सिंह का स्थान आता है। इस प्रस्ताव में 1993 बैच के तीन और 1994 बैच के सात अधिकारी भी शामिल हैं। तीन अफसरों का पैनल तय करेगा यूपीएससी: यूपीएससी, पंजाब सरकार की ओर से भेजी गई 14 आईपीएस अधिकारियों की सूची में से तीन अधिकारियों का पैनल शॉर्टलिस्ट कर सरकार को भेजेगा। इस पैनल में शामिल किसी भी एक अधिकारी को पंजाब सरकार स्थायी डीजीपी नियुक्त कर सकती है। सूची में सबसे ऊपर डॉ. शरद सत्य चौहान का नाम है, जबकि दूसरे स्थान पर हरप्रीत सिंह सिद्धू का नाम है, जो 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं व वरिष्ठता सूची में दूसरे स्थान पर आते हैं। वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव का नाम तीसरे स्थान पर है। यदि यूपीएससी ने वरिष्ठता के आधार पर पैनल तैयार किया, तो यही तीन नाम इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके बाद पंजाब सरकार एक बार फिर गौरव यादव को डीजीपी नियुक्त करने का निर्णय ले सकती है। इन अधिकारियों के सूची में नाम भेजे: सरकार की ओर से स्थायी डीजीपी के लिए भेजे गए अधिकारियों के पैनल को तीन बैचों में बांटा गया है। 1992 बैच में गौरव यादव (वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी), शरद सत्य चौहान, कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू के नाम शामिल हैं। 1993 बैच में गुरप्रीत कौर देव, जितेंद्र कुमार जैन और शशि प्रभा द्विवेदी का नाम है। वहीं 1994 बैच में सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार सिन्हा, अमरदीप सिंह राय, वी. नीरजा, अनिता पुंज, नरेश कुमार और राम सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा 1989 बैच के सामंत गोयल ने इस पद के लिए अनिच्छा जताई है, जबकि अर्पित शुक्ला और ईश्वर सिंह अपनी सेवानिवृत्ति के करीब होने के कारण इस दौड़ से बाहर हैं। ऐसे होती है सिलेक्शन प्रक्रिया सरकार की ओर से पैनल भेजे जाने के बाद उस पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की जाती है। इसमें UPSC के अध्यक्ष (अध्यक्ष के रूप में), केंद्रीय गृह सचिव या उनके प्रतिनिधि, राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के वर्तमान डीजीपी तथा किसी केंद्रीय पुलिस संगठन के प्रमुख (जो संबंधित राज्य कैडर से न हों) शामिल होते हैं। यह कमेटी तीन नामों को अंतिम रूप देती है और उन्हें राज्य सरकार को भेजती है, जिसके बाद सरकार अंतिम नियुक्ति पर निर्णय लेती है।

School Reopen Update: 1 जुलाई से स्कूल खुलेंगे या बढ़ेगा अवकाश? गर्मी-बिजली संकट पर फैसला बाकी

बुढलाडा  पंजाब में पड़ रही भीषण गर्मी, लगातार बढ़ते तापमान और बार-बार लग रहे बिजली कटों के बीच 1 जुलाई से पूरे राज्य में स्कूल खुलने जा रहे हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाने का ऐलान करेगी। दूसरी ओर, सरकार और शिक्षा विभाग से गर्मियों की छुट्टियों में 10 दिन और बढ़ोतरी करने की मांग उठने लगी है, ताकि बच्चों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आने वाले दिनों में बढ़ेगा और तापमान उक्त मांग समाजसेवी गुरलाभ सिंह माहल, भाजपा नेता काका अमरिंदर सिंह दातेवास समेत बड़ी संख्या में लोगों ने उठाई है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले ही 1 जून से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियों की घोषणा की थी, लेकिन मौजूदा समय में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना जताई है। ऐसे हालात में स्कूल खोलना बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। स्कूलों में छुट्टियां और बढ़ाने की मांग  उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के कारण लू लगने, दस्त, उल्टी, पेट संबंधी बीमारियों और अन्य मौसमी रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। छोटे बच्चे इन बीमारियों की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं, इसलिए सरकार को विद्यार्थियों की सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना है कि हर साल मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ोतरी की जाती रही है। इस वर्ष भीषण गर्मी के साथ-साथ बिजली संकट ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को गंभीरता से देखते हुए स्कूलों की गर्मियों की छुट्टियों में कम से कम 10 दिन का और विस्तार किया जाए। उनका कहना है कि यह फैसला विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के हित में होगा। इस मौके पर अभिभावकों और समाजसेवियों ने भी सरकार से इस मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। 

NIHEA की 7 करोड़ रुपये सालाना की परियोजना फाइलों में कैद, चंडीगढ़ में काम लटका

चंडीगढ़. देश में आधुनिक अस्पतालों की बढ़ती जरूरत के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ इंजीनियर और आर्किटेक्ट तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना दो दशक बाद भी शुरू नहीं हो सकी। वर्ष 2006 में पीजीआइ में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थकेयर इंजीनियरिंग एंड आर्किटेक्चर (एनआइएचईए) स्थापित करने की घोषणा हुई थी। उम्मीद थी कि यहां ऐसे विशेषज्ञ तैयार होंगे, जो भविष्य के अस्पतालों की बेहतर डिजाइन, सुरक्षित निर्माण और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की योजना बना सकेंगे। लेकिन 20 साल बाद भी यह परियोजना केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2007 में पीजीआइ को संस्थान स्थापित करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ हर वर्ष सात करोड़ रुपये तक का बजट उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया था। योजना के तहत हेल्थ फैसिलिटी प्लानिंग एंड डिजाइनिंग तथा हेल्थकेयर इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट जैसे विशेष मास्टर डिग्री कोर्स शुरू किए जाने थे। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ तैयार करना था, जो अस्पतालों की योजना, निर्माण, तकनीकी प्रबंधन और स्वास्थ्य अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित कर सकें। हालांकि, परियोजना शुरुआत से ही असमंजस में रही। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने यह कहते हुए प्रस्ताव रोक दिया कि इसमें पीजीआइ की भूमिका स्पष्ट नहीं है। बाद में गवर्निंग बाडी ने भी माना कि इस तरह का संस्थान स्थापित करना पीजीआइ के मूल दायित्व यानी कोर मैंडेट का हिस्सा नहीं है। समितियों ने शुरू की मास्टर डिग्री इसके बाद भी योजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए। वर्ष 2016 से 2021 के बीच गठित विभिन्न समितियों ने एमबीए की जगह मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक), चंडीगढ़ कालेज आफ आर्किटेक्चर और यूआइईटी के सहयोग से पाठ्यक्रम तैयार करने तथा एम्स-जोधपुर और आइआइटी-जोधपुर के संयुक्त माडल को अपनाने जैसी सिफारिशें कीं। लेकिन इन सुझावों के बावजूद परियोजना मंजूरी की दहलीज पार नहीं कर सकी।मार्च 2024 में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि एनआइएचईए की स्थापना पीजीआइ के कोर मैंडेट में नहीं आती। समिति ने सुझाव दिया कि इस तरह का संस्थान आइआइटी रोपड़ या चंडीगढ़ कालेज आफ आर्किटेक्चर जैसे संस्थानों में स्थापित किया जाना अधिक उपयुक्त होगा। प्रस्तावों और समितियों के बावजूद परियोजना के बाद भी नहीं निकला हल ऑडिट रिपोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। दो दशक तक बैठकों, प्रस्तावों और समितियों के बावजूद परियोजना का धरातल पर नहीं उतरना यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की महत्वपूर्ण योजनाएं कई बार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाती हैं। यदि यह संस्थान समय पर स्थापित हो जाता, तो देश को अस्पतालों के निर्माण और स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए विशेष प्रशिक्षित विशेषज्ञों की एक नई पीढ़ी मिल सकती थी। आज भी महत्वाकांक्षी योजना फाइलों से बाहर आने का इंतजार कर रही है।