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रांची में धुंध और हल्की बारिश, कई जिलों में वज्रपात की चेतावनी

रांची  झारखंड में मौसम ने फिर से करवट ली है. राजधानी रांची समेत झारखंड के कई जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है. एक ओर तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान किया, वहीं दूसरी ओर दोपहर बाद हो रही हल्की बारिश कुछ राहत भी दे रही है. दोपहर बाद बारिश से मिली राहत गुरुवार को रांची के अलग-अलग हिस्सों में दोपहर बाद बारिश हुई. इससे सुबह से बढ़ा तापमान कुछ थम गया. रांची में 0.5 मिमी बारिश दर्ज की गई. जबकि सरायकेला में 4 मिमी बारिश हुई. मौसम में बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत मिली. रांची में आज सुबह धूंध राजधानी रांची में आज सुबह धुंध की चादर में लिपटी रही. सुबह 7 बजे तक भी सूरज के दर्शन नहीं हो सके. एक दिन पहले तक इसी समय तेज धूप और गर्मी से लोग परेशान थे. तेज हवा और वज्रपात की संभावना मौसम विभाग के अनुसार 17 अप्रैल को राज्य के उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व हिस्सों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात के साथ हल्की बारिश की संभावना है. आने वाले दिनों में लू चलने के आसार 18 अप्रैल को मौसम शुष्क रहने का अनुमान है. इधर, 19 और 20 अप्रैल को राज्य के कई जिलों में लू चलने की चेतावनी दी गई है. 19 अप्रैल को पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार में लू की स्थिति रहेगी, जबकि 20 अप्रैल को इन जिलों के साथ सरायकेला-खरसांवा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिम सिंहभूम भी इसकी चपेट में रहेंगे. राज्य में सबसे अधिक तापमान मेदिनीनगर का रहा राज्य में सबसे अधिक तापमान मेदिनीनगर में 41.8 डिग्री सेल्सियस रहा. वहीं, रांची का अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसमें मामूली गिरावट देखी गई.

चुटिया इलाके में प्रशासन की कार्रवाई से हड़कंप, गैस स्टॉक का भंडाफोड़

 रांची झारखंड के रांची के चुटिया इलाके में गुरुवार रात जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रखे गए गैस सिलेंडरों को जब्त किया. यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें साईं कॉलोनी और पावर हाउस सारा कॉलोनी सहित कई जगहों पर छापेमारी की गई. प्रशासन की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया और अवैध गैस कारोबार पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है. जिला प्रशासन और पुलिस का संयुक्त अभियान जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन की टीम ने चुटिया पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया. इस दौरान कुल 200 से अधिक सिलेंडर बरामद किए गए. जब्त सिलेंडरों में कॉमर्शियल सिलेंडर के अलावा उज्ज्वला योजना, इंडेन और भारत गैस कंपनी के घरेलू सिलेंडर भी शामिल हैं. अधिकारियों के अनुसार, इन सिलेंडरों का उपयोग नियमों के खिलाफ किया जा रहा था. मौके पर मौजूद एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट मो जफर हसनात ने बताया कि प्रशासन को अवैध भंडारण और गैस के काले कारोबार की गुप्त सूचना मिली थी. इसी सूचना के आधार पर पूरी योजना बनाकर छापेमारी की गई. उन्होंने बताया कि कार्रवाई देर रात तक जारी रही और हर संदिग्ध जगह की बारीकी से जांच की गई. 200 से अधिक सिलेंडर जब्त छापेमारी के दौरान पावर हाउस सारा कॉलोनी स्थित एक परिसर से करीब 125 सिलेंडर बरामद किये गए. वहीं साईं कॉलोनी स्थित आवसीय परिसर से 75 से 80 सिलेंडर मिले. इसके अलावा साईं कॉलोनी स्थित आवसीय परिसर में खड़े एक छोटे हाथी वाहन से भी 20 से 22 सिलेंडर जब्त किए गए. इतना ही नहीं, एक आवासीय परिसर में छापेमारी के दौरान 50 से 60 कॉमर्शियल सिलेंडर भी पाए गए, जिन्हें नियमों के खिलाफ रखा गया था. एसडीओ के नेतृत्व में चला अभियान इस पूरे अभियान का नेतृत्व एसडीओ के निर्देशन में किया गया. सिटी डीएसपी रमन के अलावा चुटिया थाना प्रभारी पूनम कुजूर भी अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहीं और कार्रवाई को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने हर स्थान पर जांच कर अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए. आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई प्रशासन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और अवैध गैस कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले में संबंधित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी.

सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई,15 लाख का इनामी शाहदेव मारा गया, जंगल में सर्च ऑपरेशन जारी

 हजारीबाग हजारीबाग जिले के पिपरवार-केरेडारी सीमावर्ती क्षेत्र स्थित खपिया जंगल में शुक्रवार को सुरक्षा बलों और टीएसपीसी (TSPC) उग्रवादियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई. इस कार्रवाई में पुलिस और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने संगठन के चार उग्रवादियों को मार गिराया है. मारे गए उग्रवादियों में संगठन का जोनल कमांडर और 15 लाख का इनामी उग्रवादी शाहदेव भी शामिल है, जिसकी लंबे समय से तलाश की जा रही थी. गुप्त सूचना पर कोबरा टीम का प्रहार दरअसल पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि टीएसपीसी के उग्रवादी किसी बड़ी साजिश के तहत खपिया कोटी झरना इलाके में जमा हुए हैं. इसके बाद कोबरा बटालियन और चतरा जिला पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला. जैसे ही सुरक्षा बल जंगल के करीब पहुंचे, उग्रवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने मोर्चा लेते हुए चार उग्रवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया. खबर लिखे जाने तक पुलिस और नक्सलियों के बीच लगातार गोलीबारी जारी है. बताया जा रहा है कि मारे गए उग्रवादियों में शाहदेव की पत्नी नताशा भी शामिल है. टीएसपीसी संगठन की टूटी कमर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन से टीएसपीसी को तगड़ा झटका लगा है. सुरक्षा बलों के द्वारा चलाए जा रहे अभियानों से चाईबासा और चतरा के इलाकों में सक्रिय टीएसपीसी उग्रवादी संगठनों की कमर टूट गई है. कार्रवाई के दौरान उग्रवादियों द्वारा प्रयुक्त किये जाने वाले हथियार और गोला-बारूद भी भारी मात्रा में बरामद हुए हैं. जंगलों में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन मुठभेड़ के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है. कयास लगाए जा रहे हैं कि कुछ उग्रवादी जंगल और पहाड़ियों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे हैं, जिनकी तलाश में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. पुलिस मुख्यालय स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों का कहना है कि जब तक क्षेत्र उग्रवाद से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा.

सियासी समीकरणों में बदलाव, बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक में असंतोष

पटना  कहते हैं कि राजनीति में नेता भले ही अपने वोट बैंक के भरोसे रहें, लेकिन उनकी एक गलती बना-बनाया वोट बैंक न सिर्फ बिगाड़ सकती है बल्कि भड़का भी सकती है। सोशल मीडिया पर इन दिनों जिस तरह की चर्चा चल रही है, उसको देख कर बीजेपी के मामले में भी ऐसा ही लग रहा है। एक तरफ विजय कुमार सिन्हा का त्याग-तपस्या-बलिदान वाला बयान और दूसरी तरफ श्रेयसी सिंह की चुप्पी। उधर नीतीश ने इसी बहाने अपनी तरफ से मरहम लगा दिया। समझिए कैसे। बिहार में बीजेपी से कोर वोटर हुए नाराज बिहार में बीजेपी को सत्ता में लाने में भूमिहार ब्राह्मणों का बड़ा हाथ माना जाता रहा है। 2005 में जब ये वोटर लालू प्रसाद यादव के चलते कांग्रेस से बिदके थे, तो उन्होंने अपना सारा समर्थन बीजेपी की झोली में डाल दिया। पटना का बिक्रम विधानसभा क्षेत्र हो या फिर बेगूसराय में 2015 को छोड़ बाकी विधानसभा चुनाव। भूमिहार ब्राह्मण और ब्राह्मण बिरादरी बहुल क्षेत्रों में लोगों ने बीजेपी को हाथों-हाथ लिया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस को फिर से इसी समाज का समर्थन मिला और उसने वापसी भी की। लेकिन अब यही समाज बीजेपी से फिर से नाराज है। और तो और बीजेपी के कुछ चुनिंदा 'राय' यानी यादव वोटर भी नाराज दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिख रही नाराजगी सोशल मीडिया साइट्स पर आप जाएंगे तो आपको कई ऐसे पोस्ट मिलेंगे, जिसमें खुल कर बिहार बीजेपी को कोसा जा रहा है। यहां तक कहा जा रहा है कि बीजेपी को जब सरकार बनाने का मौका मिला तो अपने उन कोर वोटरों को ही भूल गई, जिसने उन्हें सत्ता के इस मुकाम तक पहुंचाया। अपनी पार्टी के किसी नेता को छोड़ बाहर से आए चेहरे पर भरोसा किया गया। ऐसे में कोर वोटरों को सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनाए जाने से ज्यादा ऐतराज अपनी अनदेखी का है। वहीं जिस तरह से सियासी हवा में श्रेयसी सिंह का नाम तैरा, उसके बाद राजपूत वोटरों के एक तबके में भी नाराजगी दिख रही है। इन सबका असर भी देखने को मिला। बिहार में पहली बार बीजेपी सत्ता की ड्राइविंग सीट पर है, लेकिन इसकी खुशी बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ताओं में ही नहीं दिख रही है। कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि एक बार पटना बीजेपी ऑफिस घूम आइए, आपको सहज अंदाजा मिल जाएगा।     2005 में बीजेपी को नीतीश के जरिए सत्ता में लाने में सवर्ण वोटरों की बड़ी भूमिका     सवर्ण वोटरों ने बीजेपी को एकजुट होकर एकमुश्त वोट दिया था और देते रहे     लेकिन अब नए समीकरण गढ़ने पर बीजेपी को यही वोटर सुना रहे     नाराजगी सम्राट चौधरी को सीएम बनाने से नहीं बल्कि अपनी अनदेखी होने से नीतीश ने इसी मौके का उठाया फायदा पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की गद्दी तो छोड़ दी लेकिन जाते-जाते उन्होंने जातीय समीकरणों की ऐसी गोटी फिट की, जो भले ही सरकार को बनाए रखने में नींव का काम करे। लेकिन बीजेपी के लिए मुसीबत ही बनेगी। नीतीश कुमार ने अपने भरोसेमंद मंत्री विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र प्रसाद यादव (यादव) को उपमुख्यमंत्री बनवाकर बीजेपी के कोर वोटरों के दिल पर मरहम लगा दिया। बात ये रही कि कुर्मी जाति से किसी को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली, तो जदयू में निशांत के नाम और राजनीति में आने के बाद संतुष्टि है, नाराजगी नहीं। अब क्या करेगी बीजेपी? ये फैसला कोई नहीं कर सकता कि बीजेपी क्या करेगी? ये पूरी तरह से उसका अंदरुनी मसला है, लेकिन विधायक दल की बैठक के बाद जिस तरह से विजय कुमार सिन्हा ने त्याग-तपस्या-बलिदान और कमांडर वाली बात की, उससे उन्होंने काफी हद तक बीजेपी में भूमिहार वोटरों की सहानुभूति अपनी ओर खींच ली। ऐसे में अब बिहार बीजेपी के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि वो अपने कोर वोटरों को मनाए कैसे, क्योंकि ये वोटर ऐसी जमात है जो नाराज होने पर शिफ्ट होने में देर नहीं करते। अब बीजेपी इन्हें फिर से कैसे पाले में लाती है, जाहिर है इसके लिए उसके थिंक टैंक में मंथन जरूर हो रहा होगा।

गन्ना खेती होगी आधुनिक, किसानों को मशीनें किराये पर मिलेंगी

पटना  बिहार सरकार ने राज्य में गन्ना की खेती को आधुनिक बनाने के साथ ही छोटे और सीमांत किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से गन्ना उत्पादक वाले जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (गन्ना सेवा केंद्र) स्थापित करने का निर्णय है लिया है । इसका मुख्य उद्देश्य मशीनीकरण को बढ़ावा देना, गन्ने की खेती में लागत को कम करना और उत्पादन को बढ़ाना है। विदित हो कि राज्य में गन्ना की खेती विस्तार करने के उद्देश्य से गन्ना उद्योग विभाग द्वारा कई योजनाएं शुरू की गई है, ताकि किसान गन्ना की खेती की तरफ आकर्षित हो सकें। किसानों को फायदा गन्ना की खेती को बढ़ावा देने के लिए गन्ना उद्योग विभाग द्वारा राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में गन्ना सेवा केंद्र की स्थापना करने का निर्णय लिया है, ताकि गन्ना की खेती करने के लिए किसान इस सेंटर से आधुनिक मशीनों को किराये पर ले सकेंगे। लघु एवं सीमांत किसानों को महंगी मशीन खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनके जरूरत के समय इस सेंटर पर मशीनें उपलब्ध रहेंगी। बताया जाता है कि राज्य में ज्यादातर छोटे और सीमांत गन्ना किसान हैं, जिन्हें खेती के दौरान लंबे समय से विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ता है। गन्ना किसानों की समस्या जिसमें खेती की लागत बहुत अधिक होना और उत्पादन कम होना, अत्याधुनिक मशीनों का आभाव एवं मजदूरों के भरोसे ज्यादातर काम कराना शामिल है। गन्ना की खेती करने में भूमि की तैयारी से लेकर उसके बुवाई और कटाई जैसे काम हाथ से होने के कारण प्रति एकड़ लागत बहुत बढ़ जाती है। इसको देखते हुए गन्ना उद्योग विभाग ने जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यहां उपलब्ध मशीनें गन्ना खेती के पूरे चक्र के लिए रहेंगी, जिससे की किसानों को मिट्टी की तैयारी करने से लेकर बीज उपचार, बुवाई, सिंचाई सहायता और कटाई में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही किसानों को प्रति एकड़ लागत कम होगी, समय पर खेती के काम होंगे और गन्ना का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ेंगे। गन्ना सेवा केंद्र ये सीएचसी आगे चलकर 'गन्ना सेवा केंद्र' के रूप में भी काम करेंगे। यह किसानों के लिए एक वन-स्टॉप समाधान होगा। यहां किसानों को खेती से जुड़ी सलाह, नई किस्मों की जानकारी, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी, मिल और बाजार से जुड़ाव के बारे में भी जानकारी मिलेगी। इससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।  

पटना का कुख्यात गैंगस्टर भोला सिंह गिरफ्तार, फर्जी पहचान से रह रहा था गुजरात में

पटना  बिहार के मोस्ट वांटेड क्रिमिनल भोला सिंह को CBI की टीम ने गुजरात से दबोच लिया है। सूरत से गिरफ्तार भोला सिंह पटना जिले के पंडारक का रहने वाला है। वो अपना नाम बदल कर सूरत में रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी अपहरण के 12 साल पुराने मामले में हुई है। बिहार का वांटेड भोला सिंह गिरफ्तार भोला सिंह को बिहार अलग-अलग थानों की पुलिस भी ढूंढ रही थी। उस पर इन थानों में 11 केस दर्ज हैं। भोला सिंह किडनैपिंग, मर्डर समेत कई बडे़ अपराधों का आरोपी है। बिहार पुलिस अब भोला सिंह को रिमांड पर लेने की तैयारी में है। उधर सीबीआई के अनुसार कोलकाता के दो लोग 14 जुलाई 2014 को ही गायब हुए थे। पुलिस जांच के बाद कोलकाता हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद CBI ने इस केस में भोला सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी। 11 साल से फरार भोला को CBI ने दबोचा भोला सिंह इस केस में 11 साल से फरार था। 2015 में सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की थी और तभी से भोला सिंह अंडरग्राउंड हो गया था। भोला सिंह ने सूरत में अमित शर्मा के नाम से फर्जी आईडी बनवा ली थी और सूरत जाकर भूमिगत हो गया था। सीबीआई ने इसी बीच टेक्निकल सर्विलांस के साथ मुखबिरों का जाल बिछाया तो उसके ठिकाने का पता चल गया। इसके बाद ट्रैप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई के गिरफ्तार किए जाने के बाद भोला सिंह को कोलकाता पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है।     कभी मोकामा विधायक अनंत सिंह के लिए काम करता था भोला सिंह     अनंत सिंह के साथ NTPC में भोला सिंह करता था ठेकेदारी     15 साल पहले अनंत सिंह से हुआ विवाद तो हो गया अलग     बाद में भोला के भाई मुकेश ने अनंत सिंह के साथ कर ली थी सुलह CRPF कमांडो की ट्रेनिंग ले रखी है भोला ने पटना जिले से सटे पंडारक का रहने वाला भोला सिंह CRPF में भी भर्ती हुआ था और कमांडो की ट्रेनिंग भी ली थी। इसके बाद एक बाहुबली के साथ भोला सिंह ने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने के बाद भोला सिंह फरार हो गया था। उस वक्त पुलिस ने भोला और उसके भाई मुकेश पर 3 लाख रुपयों का इनाम भी रखा था। बाद में मुकेश सिंह ने आत्मसमर्पण कर बेल ले ली थी। 3 लेयर सिक्योरिटी में रहता था गैंगस्टर भोला सिंह गैंगस्टर भोला सिंह अपनी सुरक्षा को लेकर भी हद से ज्यादा सतर्क रहता था। उसने अपने लिए 3 लेयर सिक्योरिटी बनाई थी, जिसमें कुख्यात शूटर उसकी सुरक्षा करते थे। भोला सिंह ने साल 2008 में अनंत सिंह के रिश्तेदार विवेका पहलवान के भाई कॉन्ट्रैक्टर संजय सिंह की हत्या की थी। 2010 में उसकी दुश्मनी उसी बाहुबली के साथ हो गई, जिसके साथ उसने काम शुरू किया था। तब 2 करोड़ रुपयों के विवाद में भोला बाहुबली के खिलाफ हो गया था। पटना में ही 2013 में उसने खुलेआम कुख्यात राजीव सिंह को गोलियों से भून मौत के घाट उतार दिया था

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार मई के पहले सप्ताह में, 70% पुराने चेहरे रहेंगे

पटना  बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले सप्ताह में होगा। यह विस्तार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद होगा। चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे। हालांकि संभावना यही है कि बिहार का नया मंत्रिमंडल कोई खास सरप्राइज देने वाला नहीं होगा। कैबिनेट में करीब 70 प्रतिशत वही चेहरे होंगे जो नीतीश कुमार की पिछली सरकार के मंत्रिमंडल में थे। बीजेपी क्यों कर रही 5 विधानसभा चुनावों के नतीजों का इंतजार? बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सबसे खास है। इस चुनाव में दो चरणों में 23 और 29 मई को मतदान होना है। इससे पहले बीजेपी के तमाम बड़े नेता बंगाल में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। यानी इस महीने बीजेपी के नेता फुरसत में नहीं हैं। दूसरी तरफ बिहार में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनी है। वह सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद होने वाले शपथ समारोह को भव्य बनाना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि शपथ समारोह में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहें। यही कारण है कि वह पश्चिम बंगाल सहित असम, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने का इंतजार कर रही है। उसे इस चुनाव में असम के साथ बंगाल में भी बीजेपी का परचम लहराने की उम्मीद है। इसी आशा में वह बिहार के शपथ समारोह में दोहरा जश्न मनाना चाहती है। नई कैबिनेट में 70 प्रतिशत पुराने चेहरे दिखने के आसार बिहार में सम्राट चौधरी की नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार 4 मई के बाद होने के आसार हैं। संभावना यही है कि बिहार सरकार के इस नए मंत्रिमंडल में 70 प्रतिशत मंत्री वही होंगे, जो इससे पहले नीतीश कुमार सरकार की कैबिनेट में थे। बताया जाता है कि शेष करीब 30 फीसदी मंत्री जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए बनाए जा सकते हैं। पिछली सरकार के कई मंत्रियों के बदल सकते हैं विभाग बिहार सरकार में पिछली सरकार के मंत्रियों में से कई के विभाग बदले जा सकते हैं। उनमें से कई को अधिक महत्वपूर्ण विभाग दिए जा सकते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जल संसाधन और वित्त जैसे विभाग पुराने मंत्रियों को ही दिए जा सकते हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के मुताबिक कैबिनेट में विस्तार पर अंतिम निर्णय बैठक में होगा। सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार में अब मोदी और नीतीश मॉडल चलेगा। उन्होंने अब नीतीश मॉडल के साथ पीएम मोदी का भी नाम जोड़ दिया है। पूर्व में सिर्फ नीतीश मॉडल की बात कही जाती रही थी। सत्ता के बंटवारे का समीकरण बताया जाता है कि नए मंत्रिमंडल में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाईटेड ( जेडीयू ) से ज्यादातर मंत्री पुराने ही होंगे। बीजेपी के कोटे से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम), चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। एलजेपी-आर को दो, आरएलएम को एक और ‘हम’ को एक मंत्री पद मिल सकता है। बताया जाता है कि सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों में से किसी को भी दो से अधिक विभाग नहीं दिए जाएंगे।  

पटना में जदयू की अचानक बैठक, मंत्रिमंडल विस्तार पर कयास

पटना  बिहार में एक बार फिर से सियासी हलचल तेज होती हुई दिख रही है।  15 अप्रैल को सम्राट सरकार के गठन के दिन जदयू ने अपने विधायक दल की बैठक टाल दी थी। लेकिन अब अचानक से नीतीश कुमार के आवास 7 सर्कुलर रोड पर फिर से जदयू की बैठक बुला ली गई है। जदयू के विधायकों को 20 अप्रैल को पटना में हाजिर रहने को कहा गया है। जदयू विधायक दल की अचानक बुलाई गई बैठक बिहार में नीतीश कुमार के सीएम पद छोड़ने के बाद इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है। हालांकि ये बताया जा रहा है कि 15 अप्रैल को जदयू विधायक दल की बैठक टाल कर उसे NDA विधायक दल की बैठक बनाया गया था। अब नई सरकार के मद्देनजर 20 अप्रैल को जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। हालांकि इसको लेकर कई तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं। पहला कयास- मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायक दल की मीटिंग पहला कयास ये लगाया जा रहा है कि बिहार में अभी सिर्फ सम्राट चौधरी (सीएम), विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव (डिप्टी सीएम) ही मंत्रिमंडल में हैं। ऐसे में विभागों के बंटवारे के लिए कैबिनेट विस्तार होना तय है। कहा जा रहा है कि जदयू ने मंत्रिमंडल विस्तार में अपने कोटे के मंत्रियों की लिस्ट फाइनल करने के लिए ये बैठक बुलाई है। हालांकि पुष्ट रूप से कुछ भी नहीं बताया गया है। दूसरा कयास- क्या निशांत को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी जदयू विधायक दल की बैठक को लेकर ये कयास भी लगाए जा रहे हैं कि बिहार में निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी है। लिहाजा जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में निशांत कुमार को जदयू में बड़ी जिम्मेदारी देने को लेकर भी संभावना जताई जा रही है। या बैठक का कोई और ही मकसद NDA के एक सूत्र ने हमें बताया कि 'बैठक का मकसद अभी तक साफ नहीं है।' एक तरह से देखा जाए तो ये बैठक 15 नवंबर को भी हो सकती थी, उस दिन जदयू विधायक दल की मीटिंग होनी जरूरी भी थी, क्योंकि बिहार में नई सरकार आकार लेने वाली थी। लेकिन नीतीश कुमार ने इसे टाल दिया। क्यों टाला गया, अब तक इसकी ठोस वजह नहीं बताई गई है। वहीं दूसरी तरफ ये भी चर्चा है कि नीतीश कुमार कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर अभी कोई भी पुष्टि नहीं है।  

जनगणना 2027: अब ऑनलाइन स्व-गणना, 33 सवालों का देना होगा जवाब

पटना  बिहार में आज 17 अप्रैल से जनगणना 2027 का पहला चरण (मकान सूचिकरण) शुरू होने जा रहा है। इसमें लोग घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन कर सकेंगे। पहले चरण में स्व-गणना का काम 1 मई तक चलेगा। बिहार में जनगणना 2027 में पहले 15 दिनों तक लोग ऑनलाइन पोर्टल पर खुद अपने परिवार और घर की जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद गणनाकर्मी घर पहुंचकर दर्ज जानकारी की जांच करेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। बिहार में जीविका दीदियों की ली जाएगी मदद इस पोर्टल पर परिवार के मुखिया के नाम और परिवार के किसी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद नागरिकों को 33 सवालों के जवाब भरने होंगे। स्व-गणना के लिए प्रभावी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान से सभी को जोड़ने के लिए 'जीविका दीदियों' की मदद ली जाएगी।इन सवालों में मकान की स्थिति, फर्श, दीवार और छत किससे बनी है, कितने लोग रहते हैं, परिवार के सदस्यों की संख्या, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई, गैस कनेक्शन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जानकारी मांगी जाएगी। आइए आपको बताते हैं कैसे आप स्पेट-बाय स्टेप जनगणना के लिए अपनी जानकारी भर सकते हैं… पहला चरण: जनगणना के लिए जानकारी भरने के लिए रजिस्ट्रेशन – जनगणना के लिए अपनी जानकारी भरने के लिए सबसे पहले आपको सरकारी पोर्टल में लॉगिन करके एंट्री करनी होगी। – सरकारी पोर्टल पर जाएं। फिर अपने राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का चयन करें। कैशे कोड दर्ज करें। परिवार के पंजीकरण के लिए परिवार के मुखिया का नाम, 10 अंकों का मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी (वैकल्पिक) दर्ज करें। परिवार के मुखिया का नाम बाद में बदला नहीं जा सकेगा। ऐसे में जो मुखिया है, उसी का नाम डालें। – प्रत्येक परिवार के लिए केवल एक मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा सकता है। एक बार पंजीकृत होने के बाद वही मोबाइल नंबर किसी अन्य परिवार के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। दूसरा चरण– सत्यापन और जगह की पहचान जनगणना के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद दूसरा चरण शुरू होगा। इसमें आपने जो जगह भरी है, उसका सत्यापन किया जाएगा। फिर जगह की पहचान की जाएगी। बताते हैं इसके लिए आपको क्या करना होगा.. – पोर्टल पर आपको अपनी भाषा का चयन करना होगा। पोर्टल पर पसंदीदा भाषा वाले बॉक्स में जाकर अपनी भाषा का सिलेक्शन करें। यहां भाषा चयन के बाद रजिस्ट्रेशन के लिए डाले गए मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। इस ओटीपी को साइट पर दर्ज करें। बता दें, चयनित भाषा को बाद में बदला नहीं जा सकता है। – साइट पर आगे बढ़ें और अपने जिले का चयन करें। यहां पिन कोड दर्ज करें। फिर अपने गांव, नगर या स्थानीय क्षेत्र की जानकारी भरें। – आगे बढ़ने पर आपको आपके क्षेत्र का नक्शा दिखाई देगा। इस पर अपने निवास स्थान को चिन्हित करें। इसके लिए आपको नक्शे पर दिख रहे लाल रंग के मार्क को आगे-पीछे खिसकाकर अपने मकान के सटीक जगह पर रखें और स्थान की पुष्टि करें। तीसरा चरण: डेटा दर्ज करें और पूछी गई डिटेल भरें – पूछे गए सवालों को पूरा भरें: मकानसूचीकरण और मकानों की गणना वाली प्रश्नावली भरें। प्रश्नों को समझने में आपकी सहायता के लिए टूलटिप्स, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) और 'महत्वपूर्ण जानकारी' उपलब्ध हैं। – पूर्वालोकन एवं समीक्षा: अभी तक आपने जो जानकारी भरी है, वो यहां आपको देखने को मिलेगी। आप दर्ज की गई सभी जानकारी को अच्छे से जांच लें। – अगर दर्ज किए गए डेटा में कोई संशोधन करना है तो आपको वापस उसी सेक्शन में जाना होगा। ऐसे में अभी तक भरी जानकारी को ड्राफ्ट के रूप में सेव करें। अगर सभी जानकारी भर चुकी है और कोई संसोधन नहीं करना है तो पुष्टि करें और सबमिट करें। – पुष्टि करें और सबमिट करें पर क्लिक करके अपने डेटा का फाइनल सबमिशन करें। फाइनल सबमिशन के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा। – स्व-गणना पहचान संख्या (SEID) का सृजन: पूरी डिटेल भरने के बाद जब आप फाइनल सबमिट करेंगे तो 11 अंकों की एक खास स्व-गणना पहचान संख्या (SE ID) जनरेट होगी, जो 'H' अक्षर से शुरू होती है। यह आईडी SMS और अगर आपने ईमेल आईडी दी है तो उसके जरिए आपको मिलेगी। चौथा चरण: क्षेत्रीय सत्यापन चौथे चरण में आपके मकान का क्षेत्रीय सत्पापन जनगणना कर्मी करेंगे। – जब जनगणना करने वाले कर्मी आपके घर आएं, तो उन्हें अपनी SE ID दें, जो आपको ऑनलाइन मकान की गणना करने पर मिलेगी। – SE ID मिलान का परिणाम: अगर SE ID मौजूदा रिकॉर्ड से मेल खाती है, तो आपकी जानकारी की पुष्टि कर उसे मंजूर कर लिया जाएगा। अगर SE ID का मिलान नहीं होता है तो गणनाकर्मी आपकी नई जानकारी लेकर दर्ज करेगा।  

बोकारो में कंकाल मामले पर HC का बड़ा सवाल, पुलिस की लापरवाही पर जताई नाराजगी

 बोकारो झारखंड के बोकारो में एक युवती के लापता होने और उसके बाद जंगल से एक महिला का कंकाल मिलने के मामले में पुलिस की लापरवाही को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), बोकारो SP, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के निदेशक और विशेष जांच टीम (SIT) को समन जारी करते हुए 16 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह समन जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने लापता लड़की की मां रेखा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। उनकी 18 वर्षीय बेटी 31 जुलाई 2025 से लापता है। इस संबंध में बोकारो के पिंड्राजोरा थाने में FIR दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर लापता लड़की की मां ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बिना जांच के पुलिस ने किया बड़ा दावा इसी बीच हाल ही में बोकारो पुलिस ने जंगल से एक स्त्री का कंकाल बरामद किया और दावा किया कि यह लापता लड़की का हो सकता है। हालांकि याचिकाकर्ता रेखा देवी के वकील ने अदालत को बताया कि बोकारो पुलिस द्वारा बरामद किया गया महिला का कंकाल लापता पीड़िता का नहीं है। 'कंकाल मिलने के बाद भी DNA मिलान नहीं कराया' इसके बाद न्यायाधीशों ने सरकार से पूछा कि क्या उस कंकाल का रेखा देवी और उनके पति के साथ DNA के साथ मिलान किया गया है। तब ना में जवाब मिलने पर अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कंकाल के कई दिन पहले ही बरामद हो जाने के बावजूद, कोई DNA टेस्ट नहीं किया गया और न ही कोई सैंपल लिया गया। HC ने कहा- पूरी प्रक्रिया में की जा रही देरी अदालत को बताया गया कि इस मामले में दिनेश महतो नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बोकारो के एक जंगल से एक महिला का कंकाल बरामद किया गया है। तो जजों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सैंपल पहले ही ले लिया गया होता, तो नतीजा कुछ ही घंटों में पता चल जाता, लेकिन बिना किसी वजह के पूरी प्रक्रिया में देरी की जा रही है। 18 पुलिस कांस्टेबलों को किया गया निलंबित इसी बीच, बोकारो SP ने इस केस में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में पिंडराजोड़ा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सहित 18 पुलिस कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया है। रेखा देवी की 18 साल की बेटी 31 जुलाई, 2025 को लापता हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने पिंडराजोड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी। लेकिन बेटी का खोजने के लिए पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर, रेखा देवी ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।