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संगठन में शक्ति है, कलेक्टर का संदेश: पंचायतों की प्रगति के लिए समग्र प्रयास जरूरी

संगठन में शक्ति है, पंचायतों को आगे बढ़ने के लिए समग्र प्रयास करने होंगे: कलेक्टर   बड़वानी -पाटी विकासखंड के ग्राम डोंगरगाँव के बालिका आश्रम में 'रात्रि चौपाल' आयोजित  –  छात्राओं के साथ बैठकर किया भोजन, संवाद कर बेहतर भविष्य के लिए किया प्रेरित   बड़वानी "संगठन में शक्ति है, पंचायतों को आगे बढ़ने के लिए समग्र प्रयास करने होंगे।" उक्त विचार कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने पाटी विकासखण्ड के ग्राम डोंगरगाँव में आयोजित 'रात्रि चौपाल' के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि विकास का केंद्र है। ग्राम विकास के लिए सभी ग्रामीणजन एकजुट होकर कार्य करे।  ग्रामीणों से सीधा संवाद और फीडबैक  रात्रि चौपाल के माध्यम से कलेक्टर ने ग्रामीणों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं पर सीधा संवाद किया। उन्होंने कृषि,स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा संबंधी कार्यो एवं योजनाओं ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन संबंधी फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन जनता के द्वार पर इसीलिए है ताकि संवाद और समाधान के बीच की दूरी कम हो सके।  रात्रि चौपाल में ग्राम के प्रगतिशील कृषकों ने जैविक खेती और मुर्गीपालन से प्राप्त सकारात्मक परिणामों को साझा किया।इस दौरान कलेक्टर ने बच्चों से सीधे संवाद कर  परीक्षा परिणाम, स्कूल उपस्थिति, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और छात्रवृत्ति की स्थिति संबंधी जानकारी प्राप्त की। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जननी सुरक्षा योजना, प्रसव पूर्व एएनसी पंजीयन, संस्थागत प्रसव और सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूक किया गया।कौशल विकास एवं रोजगार के अवसर और सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।  छात्राओं से भेंट कर वितरित की पुस्तकें  चौपाल के उपरांत कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने ग्राम की नन्ही छात्राओं से भेंट कर उन्हें पुस्तकें वितरित की और पूरी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जिला प्रशासन की इस पहल एवं सहजता की न केवल आश्रम की छात्राओं बल्कि ग्रामीणों में भी सराहना की।  कलेक्टर ने छात्राओं के साथ बैठकर किया भोजन, डोंगरगाँव आश्रम में किया रात्रि विश्राम  कलेक्टर श्रीमती सिंह ने पाटी विकासखण्ड के ग्राम डोंगरगाँव स्थित जनजातीय बालिका आश्रम में रात्रि विश्राम के दौरान आश्रम का निरीक्षण कर छात्राओं के साथ आत्मीय चर्चा की। इस दौरान उन्होंने छात्राओं से पढ़ाई,आश्रम में दी जा रही सुविधाओ एवं भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जाना।इस दौरान उन्होंने छात्राओं के बैठकर भोजन किया।

अहमदाबाद जा रहे बच्चों की तस्करी का मामला, उज्जैन-नागदा में 26 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया

उज्जैन उज्जैन रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात बच्चों की तस्करी की सूचना पर बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन को उज्जैन और फिर नागदा स्टेशन पर रोककर पुलिस, बाल कल्याण समिति (CWC) और अन्य विभागों की टीम ने 26 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जानकारी के मुताबिक, बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि करीब 100 बच्चों को मजदूरी के लिए मुजफ्फरनगर से अहमदाबाद ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही उज्जैन में चार थानों का बल, आरपीएफ, जीआरपी, श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को अलर्ट किया गया। गुरुवार रात करीब 11 बजे जैसे ही अंत्योदय एक्सप्रेस उज्जैन स्टेशन पहुंची, टीम ने ट्रेन में सर्चिंग शुरू की। करीब आधे घंटे तक 50 से अधिक बच्चों और उनके साथ मौजूद लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें शुरुआती तौर पर 4 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इसी दौरान ट्रेन आगे बढ़ गई। रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहीं सीएसपी दीपिका शिंदे ने तत्काल नागदा स्टेशन को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई। वहां एक घंटे तक चली सर्चिंग के बाद 22 और नाबालिग बच्चों को ट्रेन से उतारा गया। इस तरह कुल 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। नागदा से उतारे गए सभी बच्चे नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिनमें से दो की उम्र 14 साल से भी कम है। सभी बच्चों को फिलहाल उज्जैन जीआरपी को सौंप दिया गया है। परिजनों से संपर्क कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, वहीं बच्चों को फिलहाल CWC उज्जैन में रखा जाएगा। पुलिस को आशंका है कि बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात ले जाया जा रहा था, हालांकि कुछ बच्चे सोमनाथ और अन्य स्थानों पर घूमने जाने की बात भी कह रहे हैं। मामले की जांच जारी है। श्रम विभाग की सहायक आयुक्त राखी जोशी के अनुसार, सूचना थी कि चार लोग 100 से अधिक नाबालिगों को गुजरात ले जा रहे हैं। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों को किस उद्देश्य से और किन लोगों द्वारा ले जाया जा रहा था।

विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को रोल मॉडल बनाने की अपील, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को बनाएं रोल मॉडल : मुख्यमंत्री डॉ.यादव प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में जोड़ें नए आयाम रीवा से सर्वाधिक 24 हजार यात्रियों ने लिया हवाई सेवाओं का लाभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का रोल मॉडल बनाने के प्रयास किए जाएं। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के साथ ही पड़ौसी राज्यों के यात्रियों को भी विमानन सेवाएं लाभान्वित करती हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र का महत्व बढ़ाने की दृष्टि से भी ये सेवाएं महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई बैठक में विमानन विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विकसित होने वाले मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के परिसर में हैलीपेड निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। हैली सेवाओं के विस्तार के लिए हैलीपेड निर्माण में निजी क्षेत्र का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने उज्जैन एयरपोर्ट के विकास के लिए संचालित कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उज्जैन एयरपोर्ट में एयरफील्ड का कुल क्षेत्रफल 95 एकड़ है। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार उज्जैन एयरपोर्ट 2700 मीटर लंबाई के रनवे के साथ कुल 4 हजार 100 मीटर लंबाई में विकसित होगा। इसके लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए 590 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत की जा चुकी है। सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए एयरपोर्ट उपयोगी होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि एयरपोर्ट के विकास के सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। बैठक में पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा के संचालन के संबंध में भी चर्चा हुई। रोजगारपरक एविएशन पाठ्यक्रम का लाभ युवाओं को दिलवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार के साथ दक्ष पायलट और अन्य प्रशिक्षित अमले की आवश्यकता होगी। नई शिक्षा नीति में एविएशन पाठ्यक्रम को रोजगारपरक शिक्षा की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा एविएशन कोर्स का लाभ युवाओं को दिलवाने के लिये प्रयास करने के ‍निर्देश दिये। सफल है प्रदेश की विमानन नीति, रीवा से 24 हजार यात्रियों ने उठाया हवाई सेवा का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 गत फरवरी 2025 में जारी की गई थी। नीति में विमानन क्षेत्र की समग्र वैल्यू चैन के लिए कई तरह के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश से बनारस और पटना जैसे बड़े नगरों के लिए विमान सेवा प्रारंभ करने का प्रयास किया जाए ताकि धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले। प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में नए आयाम जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन नीति की सफलता के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के एयरपोर्ट से नए गंतव्यों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता भी शिड्यूल्ड ऑपरेटर्स को दी जा रही है। मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 की सफलता का ही यह प्रमाण है कि गत छह माह में रीवा से 24 हजार यात्रियों ने हवाई सेवा का लाभ उठाया है। रीवा से दिल्ली, रीवा से रायपुर सप्ताह में तीन दिन और रीवा से इंदौर प्रतिदिन फ्लाइट उपलब्ध है। गत चार माह में रीवा से इंदौर की ऑक्यूपेंसी 85 प्रतिशत और गत डेढ़ माह में रीवा से रायपुर की ऑक्यूपेंसी 80 प्रतिशत से अधिक है। रीवा- नई दिल्ली फ्लाइट की ऑक्यूपेंसी भी 70 प्रतिशत से अधिक है। बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन विभाग श्री संजय कुमार शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, सचिव वित्त श्री लोकेश जाटव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

नर्मदा में क्रूज डूबने से 9 की मौत, 9 लापता; पर्यटन मंत्री ने पेट्रोल-डीजल बोट पर रोक की जानकारी न होने की बात कही

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक आई तेज आंधी के चलते डूब गया। अब तक 9 शव मिल चुके हैं। 24 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रशासन के मुताबिक 9 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। हादसा किनारे से करीब 300 मीटर दूर हुआ। बरगी सिटी सीएसपी अंजुल मिश्रा ने बताया कि शुरुआती रेस्क्यू में SDRF ने कई लोगों को बचाया, लेकिन अंधेरा और खराब मौसम से राहत कार्य प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह फिर से रेस्क्यू जारी है। वहीं प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी जबलपुर पहुंचे हैं, लेकिन उनका हैरान करने वाला बयान सामने आया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- नर्मदा में पेट्रोल-डीजल बोट पर रोक है। उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।चना मिलते ही SDRF और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और युद्ध स्तर पर राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।   मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव मदद दी जाएगी। यह हादसा एक बार फिर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों और मौसम की सतर्क निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और लापता लोगों की तलाश तेज कर दी गई है। सेना और स्पेशल टीमों ने संभाला मोर्चा हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ अब राष्ट्रीय स्तर की टीमें भी तैनात की गई हैं। आर्मी भी मौके पर मौजूद है। हैदराबाद से एक स्पेशल टीम और हेलिकॉप्टर रवाना किया गया है। कोलकाता से पैरामिलिट्री की एक विशेष टीम जबलपुर पहुंच चुकी है। हाइड्रॉलिक मशीनों और पोकलेन की मदद से 20 फीट गहरे पानी में फंसे क्रूज को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। क्रूज पायलट बोले- संभलने का मौका ही नहीं मिला क्रूज के पायलट महेश ने बताया, 'सुरक्षा के इंतजाम तो थे, लेकिन अचानक आए तेज तूफान के चलते क्रूज अनियंत्रित हो गया। किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।' महेश को 10 साल का अनुभव है। खमरिया के एक परिवार के 15 लोग सवार थे ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया के A3 सेक्शन में कार्यरत कर्मचारी कामराज आर्य परिवार के 15 लोगों के साथ घूमने गए थे। कामराज के माता-पिता भी साथ में थे, लेकिन वे किनारे बैठे हुए थे। कामराज के साथ उनकी पत्नी, भाभी और बच्चे क्रूज में घूमने गए हुए थे। कामराज मूलत: कर्नाटक के रहने वाले हैं। उनके एक बेटे को बचा लिया गया। वहीं कामराज, उनकी पत्नी और एक बेटा अब भी लापता है। पर्यटन विभाग बोला- क्रूज 20 साल पुराना पर्यटन विभाग के एक अधिकारी योगेंद्र रिछारिया ने बताया, ‘बरगी डैम में फिलहाल एक क्रूज ऑपरेट किया जा रहा है। इसे 2006 में बनाया गया था। इसकी कैपेसिटी 60 यात्रियों की है। एक अन्य क्रूज खराब है।’ अब तक इन मृतकों की पहचान हुई     श्रीमती नीतू सोनी (43), निवासी कोतवाली, जबलपुर     श्रीमती सौभाग्यम अलागन (42), निवासी अन्नानगर, वेस्ट तारापुरम, तमिलनाडु     श्रीमती मधुर मैसी (62), निवासी खाजन बस्ती, नई दिल्ली     श्रीमती काकुलाझी (38), निवासी वेस्ट लैंड खमरिया, जबलपुर     श्रीमती रेशमा सैयद (66)     शमीम नकवी (66)     मरिना मैसी पति प्रदीप मैसी (39)     त्रिशान पिता प्रदीप मैसी (4) एक डेडबॉडी की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

एमपी में इस तारीख को ‘प्री-मानसून’ की एंट्री, अगले 72 घंटे आंधी और बारिश का अलर्ट

ग्वालियर बीते एक सप्ताह से झुलसा रही गर्मी के बीच मौसम ने राहत की ठंडी सांस दी। हल्के बादलों और धूल भरी हवा के असर से सूरज की तपिश फीकी पड़ गई और अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो सामान्य से 1.9 डिग्री कम रहा। लंबे समय बाद पारा 40 डिग्री से नीचे आने से दिन में गर्मी का असर कमजोर पड़ा और लोगों ने राहत महसूस की। सुबह से आसमान में बादलों की आवाजाही और बदली हवा ने मौसम का मिजाज बदल दिया। राजस्थान से आने वाली गर्म हवाओं पर ब्रेक लगने से लू जैसे हालात नहीं बने। भीषण गर्मी से मिलेगी राहत पश्चिमी हवा का रुख उत्तर की ओर मुडऩे और अरब सागर से नमी आने से शहर के मौसम में नरमी घुल गई। न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर भारत में बने चक्रवातीय घेरे के असर से अगले तीन दिन आंधी और तेज बारिश की संभावना बनी हुई है।  यदि यह सिस्टम सक्रिय रहा तो मई की शुरुआत राहतभरी हो सकती है। दोपहर में तापमान 38.4 डिग्री तक पहुंचा, लेकिन तपिश चुभन नहीं बन सकी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि नमी और बादलों की मौजूदगी से फिलहाल भीषण गर्मी से कुछ राहत बनी रह सकती है। रीवा में हुई तेज बारिश प्रदेश में रीवा शहर के मौसम में बड़ा बदलाव आया है। सुबह से ठंड हवाओं के साथ हल्की बारिश शुरू हो गई। भीषण गर्मी के बीच ठंडक ने दी बड़ी राहत। इसी सप्ताह रीवा में तापमान 44.5 डिग्री तक पहुंच गया था लेकिन बारिश और ठंड हवाओं के कारण इसमें तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। आगे भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। सीधी में भी हुई बारिश सीधी में भी भीषण गर्मी के बीच अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। कुछ ही मिनटों में आए अंधड़ ने मौसम बदल दिया। जिसके बाद साथ झमाझम बारिश शुरु हो गई। लगातार चल रही रिमझिम बारिश होने के कारण लोगों को ठंड से राहत मिल गई। कब आएगा प्री मानसून जानकारी के लिए बता दें कि मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 16 जून के आसपास प्रदेश में प्री-मानसून सक्रिय हो जाएगा, जिसके बाद कई जिलों में झमाझम बारिश की संभावना है। पिछले कुछ हफ्तों से गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, लेकिन अब एमपी के कई जिलों में मौसम में बड़ा बदलाव आने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और सागर संभाग में प्री-मानसून की बौछारें सबसे पहले पहुंचेंगी। इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश के आसार हैं। धीरे-धीरे यह असर पूरे प्रदेश में दिखाई देगा।  

गुजारा-भत्ता पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ‘पुरुष पल्ला नहीं झाड़ सकता’

ग्वालियर  शादी के बाद पत्नी का भरण-पोषण करना पति का न केवल नैतिक, बल्कि अनिवार्य कानूनी दायित्व है। हाईकोर्ट ने एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पति स्वस्थ और काम करने में सक्षम है, तो वह यह कहकर गुजारा भत्ता देने से नहीं बच सकता कि उसकी आय कम है या वह बेरोजगार है। जस्टिस अमित सेठ की एकल पीठ ने पति और पत्नी दोनों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को यथावत रखा है। मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर दरअसल शबीना व शाहिद (दोनों के परिवर्तित नाम) का निकाह नवंबर 2019 में मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुआ था। पत्नी का आरोप था कि निकाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसे मायके में शरण लेनी पड़ी। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि उसका पति मैकेनिक है और 30 हजार रुपए महीना कमाता है, इसलिए उसे भरण पोषण दिलाया जाए।  दूसरी ओर पति ने कोर्ट में दलील दी कि वह मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर है और उसकी मासिक आय केवल 5,000 रुपए है। उसने दलील दी कि इतनी कम आय में वह 4,000 रुपए गुजारा भत्ता नहीं दे सकता। वहीं पत्नी ने गुजारा भत्ता की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिक्कतें अपनी जगह, हक अपनी जगह     कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 125 सीआरपीसी का उद्देश्य महिला को दर-दर भटकने से बचाना और उसे गरिमापूर्ण जीवन देना है। यदि पति शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो उसे एक 'अकुशल श्रमिक' के बराबर कमाकर पत्नी को पैसा देना ही होगा।     पति ने अपनी सही आय के पुख्ता सबूत नहीं दिए, इसलिए फैमिली कोर्ट द्वारा कलेक्टर रेट (न्यूनतम मजदूरी) के आधार पर 4,000 रुपए का अंतरिम गुजारा भत्ता तय करना पूरी तरह उचित है। क्या होता है गुजारा भत्ता जानकारी के लिए बता दें कि गुजारा भत्ता (Alimony/Maintenance) तलाक या अलग होने के बाद एक पति/पत्नी द्वारा दूसरे को दी जाने वाली कानूनी और वित्तीय सहायता है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर साथी को विवाह के दौरान की जीवनशैली बनाए रखने में मदद करना है। यह राशि अदालत द्वारा या आपसी सहमति से तय की जा सकती है। ये भी जानें -मुख्य उद्देश्य तलाक के बाद आर्थिक असमानता को दूर करना।-यह स्थायी (जीवनभर) या अस्थायी (पुनर्वास के लिए) हो सकता है। -यह आमतौर पर पति की आय का 25-33% हो सकता है, जो पति-पत्नी की संपत्ति, उम्र और वैवाहिक अवधि पर निर्भर करता है। -यह आमतौर पर प्राप्तकर्ता के पुनर्विवाह करने या मौत होने तक जारी रहता है।

सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली पुलिस की गलती, कोर्ट में सवाल उठे

इंदौर   राजा रघुवंशी हत्याकांड (Raja Raghuvanshi Murder Case) को एक साल पूरे होने वाले है लेकिन इस हाईप्रोफाइल केस में अभी भी कई ट्विस्ट सामने आ रहे है। इस हत्याकांड की मुख्य आरोपी और मृतक राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी को कोर्ट ने शर्तों के आधार और 50 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी है। सोनम रघुवंशी के पिता देवी सिंह ने उसकी जमानत कराई। सोनम की जमानत की खबर सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर लोग एक ही सवाल गूंज रहा है- 'आखिर सोनम को जमानत कैसे मिली? बताया जा रहा है कि सोनम रघुवंशी को जमानत शिलॉन्ग पुलिस की एक गलती के कारण मिली है। बता दें कि, इससे पहले सोनम की 3 बार जमानत रद्द हो चुकी है। पुलिस की एक गलती और सोनम को मिली जमानत मिली जानकारी के अनुसार, राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम शिलॉन्ग पुलिस की कमजोर विवेचना के चलते इतने कम समय में जेल से बाहर आने में सफल हुई है। पूर्वी खासी हिल्स जिला न्यायालय ने शिलॉन्ग पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाए हैं। पुलिस ने चालान में धाराएं अलग-अलग लिखी थीं। बताया जा रहा कि यह पुलिस की टाइपिंग मिस्टेक थी। इसके अलावा गिरफ्तारी की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और ट्रायल में भी देरी की गई। शिलांग के सत्र न्यायालय ने जमानत देते हुए अपनी टिप्पणी में कहा- पुलिस ने गिरफ्तारी का कारण बताने वाला फार्म सही तरीके से नहीं भरा था। कई जगह अलग-अलग धाराएं लिखी गई थीं। ट्रायल में भी पुलिस ने देरी की है। पुलिस ने और कहा कि गलती? जिला कोर्ट ने ये भी पाया कि ,गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट नहीं बताए गए हैं। कोर्ट ने पाया कि, आरोपी को गिरफ्तारी के समय जिन धाराओं और तथ्यों के आधार पर पकड़ा गया, उनकी सही और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। दस्तावेज़ों में भी ये साफ नहीं था कि, किन धाराओं के तहत गिरफ्तारी की गई है, जिससे आरोपी को अपने बचाव का पूरा मौका नहीं मिल गया। बता दें कि, गिरफ्तारी के कारण न बताना संविधान के अनुच्छेद 22 (1) का उल्लंघन माना गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, ये आरोपी का मौलिक अधिकार है कि उसे तुरंत गिरफ्तारी का कारण बताया जाए। कोर्ट ने पकड़ी एक और बड़ी गलती इसके अलावा जिला कोर्ट ने एक और बड़ी गलती पकड़ी। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी मौजूद नहीं है जिससे ये पता चल सके की जिस समय सोनम को गाजीपुर कोर्ट ने पेश किया गया तब उसकी तरफ से कोई वकील मौजूद था। कोर्ट ने कहा कि उस समय अगर वकील मौजूद होता तो ये आपत्ति पहले ही उठाई जा सकती थी। इन शर्तों के आधार पर मिली जमानत     सोनम किसी सबूत के साथ छेडख़ानी नहीं करेगी।     हर तारीख पर कोर्ट में उपलब्ध होगी।     कोर्ट के क्षेत्राधिकार (शिलांग से बाहर) से बिना कोर्ट की इजाजत नहीं जा सकेगी।     50 हजार रुपए के बांड कोर्ट में जमा करेगी। क्या है मामला इंदौर के सहकार नगर, कैट रोड निवासी राजा रघुवंशी की 23 मई 2025 को शिलांग के टूरिस्ट प्लेस में हत्या हुई थी। ऑपरेशन हनीमून के तहत स्थानीय पुलिस ने आरोपी सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह, उसके साथी विशाल चौहान, आकाश राजपूत, आनंद कुर्मी सभी निवासी नंदबाग को गिरफ्तार किया था। केस में कई माह से आरोपी जेल में हैं। 

जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से गोचा नदी के स्टॉप डैम की तस्वीर हुई बदल

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से बदली गोचा नदी स्टॉप डैम की तस्वीर भोपाल मध्यप्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी जनआंदोलन के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चल रहे इस अभियान ने प्रदेशभर में जल संरचनाओं के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन को नई गति दी है। इसी अभियान के अंतर्गत गुना जिले के जनपद पंचायत राघौगढ़ की ग्राम पंचायत मोररवास में जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से जल संकट जैसी चुनौती का समाधान संभव है। सूखे स्टॉप डैम में लौटी जीवन की धारा गोचा नदी पर स्थित स्टॉप डैम में पूर्व में पानी का ठहराव नहीं हो पाता था और वर्षा जल बहकर अन्य स्थानों पर चला जाता था। परिणामस्वरूप ग्रामीणों एवं पशुधन को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से 50 हजार रुपये की जनसहयोग राशि से बोरी बंधान का कार्य 6 से 11 अप्रैल के बीच पूर्ण किया गया। इस छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास से अब स्टॉप डैम में जल ठहराव बढ़ा है और जल संग्रहण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। श्रमदान से बना जनआंदोलन इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया और जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में यह कार्य सामूहिक रूप से पूर्ण किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश प्रसारित हुआ। मवेशियों एवं वन्य जीवों को मिला सहारा बोरी बंधान से जल उपलब्धता में वृद्धि हुई है, जिससे अब मवेशियों एवं वन्य जीवों के लिए भी पानी की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी है। जो स्थान पहले सूखा रहता था, वह अब जीवनदायी जल स्रोत के रूप में विकसित हो रहा है। प्रेरणादायक मॉडल गोचा नदी स्टॉप डैम का यह परिवर्तन ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत जनसहभागिता आधारित कार्यों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। यह पहल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरी है और यह संदेश देती है कि सामूहिक प्रयास, जनसहयोग एवं सकारात्मक सोच से जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।  

मोहन सरकार में मंत्रिमंडल में बदलाव, इन नामों को मिल सकता है मौका!

इंदौर   मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर दो दिन पहले हुई एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर कवायद शुरू हो गई है जिसे मंत्रिमंडल के विस्तार से भी जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार में मंत्रियों का कोरम पूरा हो जाएगा। इसमें बड़ा फेरबदल होने की भी संभावनाएं जताई जा रही है जिसमें नई मंत्री बनाए जाने के साथ कुछ की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार को ढाई साल होने जा रहे हैं। इस बीच मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है। वर्तमान में 31 मंत्री हैं, जबकि 35 बनाए जा सकते हैं। चार पदों को भरा जाएगा जिसके साथ कुछ मंत्रियो को मुक्त करके नए बनाए जाने की भी बात सामने आ रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी इस बात को मजबूत यूं भी माना जा रहा है कि दो दिन पहले डॉ. मोहन यादव के निवास पर एक समन्वय समिति की बैठक हुई थी जिसमें संघ के कई बड़े दिग्गज नेता मौजूद थे और माना जाता है कि कोई भी बड़े फैसले से पहले समिति में बात रखी जाती है। इस बात से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिछले दिनों दिल्ली के लगातार दौरे को भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी मानी जा रही है।  रिपोर्ट के मुताबिक ये भी कहानी सामने आ रही है कि मंत्रिमंडल विस्तार में इंदौर का नाम भी है जिसमें मालिनी गौड़ प्रमुखता से है तो दूसरे पायदान पर मनोज पटेल है। हालांकि विधायक उषा ठाकुर भी खासा प्रयास कर रही हैं जिसके लिए उन्होंने भोपाल-दिल्ली एक कर रखा है। उनके अलावा संभाग से अर्चना चिटनीस का नाम भी है। वहीं भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, बृजेंद्र सिंह यादव और रीति पाठक के नाम भी मंत्री बनने वाले विधायकों की फेहरिस्त में हैं। ये नाम तो मंत्री बनने के दावेदारों के है, लेकिन कुछ नाम ऐसे दिग्गजों के भी हैं जिनके इस्तीफे भी हो सकते हैं। संतुलन बनाने का होगा प्रयास मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाने का भी प्रयास किया जाएगा। हालांकि निगम मंडल और प्राधिकरणों में जो नियुक्ति हो रही है जिसमें मोहन सरकार व भाजपा का संगठन इस बात का बारीकी से ध्यान रख रहा है। भविष्य में होने वाले चुनाव को लेकर भी अभी से बिसात जमाई जा रही है ताकि सभी वर्गों की नाराजगी को दूर किया जा सके।

2 मई से MP में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू, पुराने आवेदकों के लिए प्रोफाइल अपडेट जरूरी, चयन मेरिट के आधार पर

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MP अतिथि शिक्षक भर्ती (Guest Teacher Recruitment) की प्रक्रिया का बिगुल फूंक दिया है। इस बार विभाग ने पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए अतिथि शिक्षक पोर्टल 3.0 शुरू किया गया है। 2 मई 2026 से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश भर के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में विषयवार पद करीब 10 हजार पदों को भरने की तैयारी है। हाल ही में अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए यह बड़ी खबर है, क्योंकि अब चयन का आधार पूरी तरह से डिजिटल स्कोर कार्ड और मेरिट होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना सत्यापन के किसी भी आवेदक का स्कोर कार्ड जनरेट नहीं होगा, जिससे वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगा। इसलिए सभी इच्छुक कैंडिडेट्स को तय समयसीमा में जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विभाग ने पदों की कुल संख्या स्पष्ट नहीं की है, लेकिन यह प्रक्रिया प्रदेश के स्कूलों में विषयवार रिक्त करीब 10 हजार पदों को भरने के लिए संचालित की जा रही है। इसमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की आवश्यकता के अनुसार चयन किया जाएगा। एमपी अतिथि शिक्षक भर्ती 2026 आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी करें, क्योंकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। पोर्टल 3.0 पंजीकरण और प्रोफाइल अपडेट की प्रक्रिया इस वर्ष भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।  1. नए आवेदकों के लिए (For New Applicants) जो अभ्यर्थी पहली बार अतिथि शिक्षक के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें पोर्टल 3.0 पर फ्रेश रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसमें उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के माध्यम से अपनी आईडी जनरेट करनी होगी। 2. पूर्व रजिस्टर्ड उम्मीदवारों के लिए (For Old Applicants) पहले से पंजीकृत उम्मीदवारों को अपनी पुरानी आईडी से लॉगिन कर प्रोफाइल अपडेट (Profile Update) करना अनिवार्य है। इसमें उन्हें अपनी नवीनतम शैक्षणिक योग्यता, व्यावसायिक डिग्री (B.Ed/D.El.Ed) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के अंक अपडेट करने होंगे। डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन और स्कोर कार्ड अतिथि शिक्षक भर्ती में सबसे जरूरी डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन है। बिना वेरिफिकेशन के आवेदक का स्कोर कार्ड (Score Card) जनरेट नहीं होगा, और बिना स्कोर कार्ड के भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना असंभव है। पुराने कैंडिडेट्स को करनी होगी प्रोफाइल अपडेट भर्ती पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से “अतिथि शिक्षक पोर्टल 3.0” पर की जाएगी। नए आवेदकों को पहले पंजीयन करना होगा, जबकि पुराने उम्मीदवारों को अपनी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी। इसके बाद सभी आवेदकों को अपने शैक्षणिक, व्यावसायिक योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे। प्रोफाइल लॉक करने के बाद आवेदकों को संकुल प्राचार्य के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। सत्यापन के बाद ही स्कोर कार्ड तैयार किया जाएगा, जो मेरिट तय करने का आधार बनेगा। साथ ही, इस बार पहले ही विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया     आवेदकों को पोर्टल पर अपने डाक्यूमेंट्स अपलोड करने के बाद संकुल प्राचार्य (Cluster Principal) के पास मूल डाक्यूमेंट्स के साथ जाना होगा।     प्राचार्य ओटीपी के माध्यम से पोर्टल पर जानकारी को एक्सेप्ट या रिजेक्ट करेंगे।     यदि आवेदन रिजेक्ट होता है, तो आवेदक उसे सुधार कर दोबारा जमा कर सकता है। चयन का आधार: मेरिट और स्कोर कार्ड  अतिथि शिक्षकों का चयन मेरिट के आधार पर होगा।      शैक्षणिक योग्यता (Academic Record): 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएट/पोस्टग्रेजुएट के अंक।     व्यावसायिक योग्यता: बी.एड (B.Ed) या डी.एल.एड के अंक।     पात्रता परीक्षा (TET): शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्राप्त अंकों को विशेष वेटेज दिया जाएगा।     अनुभव: पूर्व में अतिथि शिक्षक के रूप में किए गए कार्य का अनुभव अंक। सावधानियां और निर्देश      अधूरी योग्यता: यदि बी.एड या अन्य कोर्स का रिजल्ट वेटिंग है, तो वेरिफिकेशन नहीं होगा।     मल्टीपल आईडी: यदि किसी आवेदक के पास एक से अधिक आईडी है, तो अनुभव प्रमाण पत्र मर्ज कराना अनिवार्य है।     डाक्यूमेंट्स: बिना ओरिजिनल डॉक्यूमेंट के संकुल प्राचार्य (Cluster Principal) वेरिफिकेशन नहीं करेंगे। अधिकारियों की जवाबदेही और निगरानी   लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर कार्रवाई की जाएगी। नाराजगी देख बदली व्यवस्था अतिथि शिक्षकों ने 29 अप्रैल को भोपाल के अंबेडकर पार्क में बड़ा आंदोलन किया था। अतिथि शिक्षक सरकार द्वारा वार्षिक अनुबंध का वादा तोड़ने और डीपीआई द्वारा 30 अप्रैल से कार्यमुक्त करने से नाराज हैं। उनके आंदोलन से प्रदेश में सरकार की छवि पर खराब असर पड़ने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग हरकत में आया है। उनकी नाराजगी को संभालने के लिए डीपीआई द्वारा नए शैक्षणिक सत्र के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया के संबंध में नया आदेश जारी किया है।