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पांढुर्णा में हनुमान लोक का निर्माण, मोहन यादव करेंगे लोकार्पण, अनोखी प्रतिमा का होगा उद्घाटन

पांढुर्णा  आस्था के बड़े केंद्र जामसांवली हनुमानजी लोक के लोकार्पण की बारी आ गई है. मध्य प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव 26 मार्च को हनुमान लोक का लोकार्पण करेंगे. उज्जैन में महाकाल लोक की तर्ज पर हनुमान लोक का भी विस्तार किया जा रहा है. जिसके चलते अलग-अलग फेज में काम होने हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हनुमान लोक बनाने की घोषणा की थी. 314 करोड़ की लागत से 30 एकड़ में बन रहा है हनुमान लोक मंदिर समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि "करीब 30 एकड़ में बन रहे हनुमान लोक के पहले फेज का काम पूरा हो गया है. पहले फेज में करीब 35 करोड़ की लागत से यहां चिरंजीवी पथ, श्रद्धालुओं व पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था, फूड कोर्ट, हनुमानजी की बाल लीलाओं को प्रदर्शित करती प्रतिमाएं, महाराष्ट्रीयन संस्कृति को दर्शाता स्वागत द्वार और परिसर में लाइटिंग की व्यवस्था की गई है. दूसरे फेज में होगा गर्भ गृह का निर्माण  हनुमान लोक के सेकंड फेज का काम अभी बाकी है. बताया जा रहा है कि हनुमान लोक प्रोजेक्ट का निर्माण 10 साल में पूरा होना है. जिसके तहत अभी पहले फेज का काम पूरा हुआ है. सेकंड फेज का निर्माण अभी बाकी है. सेकंड फेज के लिए भी शासन द्वारा दो भागों में फंड दिया जाना है. सेकंड फेज में मंदिर से लगे नाले का संरक्षण व सौंदर्यीकरण, चिरंजीवी पथ का निर्माण होना है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और आस्था को देखते हुए एमपी शासन द्वारा मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार करते हुए 'हनुमान लोक' का निर्माण किया जा रहा है. जिसे उज्जैन के 'महाकाल लोक' की तर्ज पर भव्य रूप दिया जा रहा है. मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में बनाए जा रहे इस भव्य 'हनुमान लोक' परियोजना पर 314 करोड़ रुपए की लागत आएगी." दूसरे फेज में होगा गर्भ गृह का निर्माण हनुमान लोक के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. जिसमें भक्ति सागर एवं प्रवचन हॉल का निर्माण, यज्ञशाला का निर्माण, दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग का निर्माण, संस्कृत महाविद्यालय का निर्माण, भोजशाला का निर्माण, धर्मशाला का निर्माण, चिकित्सा केंद्र की स्थापना, अष्ट सिद्धि केंद्र का निर्माण, ओपन एयर थिएटर का निर्माण, वाटर फ्रंट पाथवे का निर्माण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना, शेष बचे पाथ वे का निर्माण एवं परिसर का सौंदर्यीकरण का कार्य शामिल है. श्री हनुमान लोक परियोजना के दूसरे चरण में श्री मूर्ति गर्भगृह का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो मंदिर की पारंपरिक आस्था और आधुनिक सुविधा दोनों का समन्वय होगा. मंदिर न्यास द्वारा इस गर्भगृह की डिजाइनिंग और योजना तैयार की जा रही है. यह निर्माण कार्य श्रद्धालुओं को करीब से दिव्य दर्शन की अनुभूति देगा. ऐतिहासिक मान्यताएं और रहस्य मंदिर के पुजारी कमलेश तिवारी ने बताया कि "इस स्थान पर हनुमानजी की श्रीमूर्ति स्वयंभू प्रकट हुई थी. इस तरह की लेटी हुई और ऊर्ध्वमुखी प्रतिमा पूरे भारतवर्ष में कहीं और देखने को नहीं मिलती है, जो इसे अत्यंत विशिष्ट बनाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्रारंभ में हनुमानजी की प्रतिमा खड़ी अवस्था में थी. वर्षों पूर्व कुछ चोरों ने प्रतिमा के नीचे खजाना छिपे होने की अफवाह के कारण इसे हटाने का प्रयास किया. इस दौरान मूर्ति अपने स्थान से हिली नहीं, बल्कि अपने-आप विश्राम अवस्था में लेट गई. कई प्रयासों के बावजूद मूर्ति को हिलाया नहीं जा सका, यहां तक कि 20 बैलों की सहायता से भी मूर्ति को टस से मस नहीं किया जा सका. मंदिर के इतिहास के बारे में कोई प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, लेकिन लगभग 100 वर्ष पहले के राजस्व अभिलेखों में यहां हनुमान जी की उपस्थिति का उल्लेख मिलता है. कुछ लोगों का मानना है कि भगवान श्रीराम इस स्थान पर पीपल के पेड़ के रूप में विराजमान हैं, जबकि हनुमान जी उनके चरणों में लेटे हुए हैं."

एमपी के 61 युवाओं ने सरकारी स्कूलों से यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाई, इतिहास रचा

भोपाल  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) UPSC परीक्षा में इस बार मध्यप्रदेश ने इतिहास रच दिया। इसमें प्रदेश के 61 प्रतिभाशाली युवा चयनित हुए। खास बात यह है कि इनमें से अनेक युवाओं ने सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में पढ़ाई की है। भारत की सबसे कठिन परीक्षा क्रेक कर इन युवाओं ने न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश में अपना नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 मार्च को इन सभी सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित करेंगे। सीएम सभी युवाओं से चर्चा भी करेंगे। यूपीएससी परीक्षा में प्रदेश के हर वर्ग के युवाओं का चयन हुआ। इनमें कई छोटे गांवों के हैं ​जहां 24 घंटे बिजली भी उपलब्ध नहीं रहती। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट का भी अभाव बना रहता है। इसके बावजूद युवाओं ने अपना हौसला नहीं खोया और जज्बा, जुनून के बल पर कामयाबी हासिल की। चयनित 15 युवाओं ने सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई की एमपी में शिक्षा के स्तर में लगातार इजाफा हो रहा है। चयनित युवाओं में अनेक सरकारी स्कूल, कॉलेजों में पढ़े हैं। यूपीएससी में चुने गए कुल 61 विद्यार्थियों में से 15 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त कर सफलता अर्जित की है। यह आंकड़ा प्रदेश के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों की प्रतिभा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यूपीएससी में चयनित आशीष शर्मा, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के स्नातक हैं। पुलकित जैन, बीएससी उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल, प्राची चौहान, बीएससी, सुभद्रा शर्मा, शासकीय कन्या महाविद्यालय गंजबासौदा, सौम्या जैन बीए गांधी पीआर कॉलेज, भोपाल, आयुष स्वामी, बीए जेएलएन कॉलेज सोहागपुर नर्मदापुरम, निकित सिंह बीए अर्थशास्त्र अटल बिहारी बाजपेयी महाविद्यालय इंदौर, दीपक बघेल बीए जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, राजवर्धन सिंह सिसोदिया बीए गुजराती समाज कॉलेज, इंदौर, प्राची जैन बीकॉम सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल, रूपल बान बीएससी, एम उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल, रोहन जैन बीएससी मैथ्स शासकीय होल्कर साइंस कॉलेज इंदौर, अंकुश पाटीदार बीएससी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, गौरव जाट बैचलर ऑफ आर्ट्स देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, पवित्र मिश्रा बीएससी प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रीवा, उज्ज्वल जैन बीए श्रीमंत माधवराव सिंधिया शासकीय महाविद्यालय कोलारस में पढ़े हैं। युवाओं ने अपना जज्बा, जुनून के बल पर कामयाबी हासिल की। 

मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी बच्चों के लिए पहली बार विद्यारंभ समारोह का आयोजन

मध्यप्रदेश में पहली बार आंगनवाड़ी बच्चों का विद्यारंभ समारोह मिलेगा ‘विद्यारंभ प्रमाण-पत्र’ 24 मार्च को पूरे प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों में होगा समारोह राज्य स्तरीय ‘ग्रेजुएशन सेरेमनी’ में मंत्री सुभूरिया करेंगी बच्चों को सम्मानित भोपाल मध्यप्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को नई पहचान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। राज्य में पहली बार आंगनवाड़ी केंद्रों में शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे 5 से 6 आयु वर्ष के बच्चों को “विद्यारंभ प्रमाण-पत्र” प्रदान कर उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर अग्रसर किया जाएगा। प्रदेश में 24 मार्च को आयोजित होने वाले बाल चौपाल (ECCE Day)के अवसर पर प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ समारोहपूर्वक प्रमाण-पत्र वितरण किया जाएगा, जिससे शाला पूर्व शिक्षा को सामाजिक और संस्थागत मान्यता मिल सके। इस पहल को राज्य स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए भोपाल में विशेष राज्य स्तरीय ‘ ग्रेजुएशन सेरेमनी ’ का आयोजन किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया बच्चों को प्रमाण-पत्र वितरित कर उनके उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य की शुभकामनाएँ देंगी। यह कार्यक्रम भोपाल जिले की बाणगंगा परियोजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 1061 और 859 में आयोजित होगा, जहां 35 बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। यह पहल केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 5-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र देकर उनके शैक्षणिक जीवन की औपचारिक शुरुआत को मान्यता दी जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के अनौपचारिक शिक्षा से औपचारिक विद्यालयी प्रणाली में सुगम संक्रमण को सुनिश्चित करना, परिवार और समुदाय को शाला पूर्व शिक्षा के प्रति जागरूक करना तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा के सशक्त केन्द्र के रूप में स्थापित करना है। कार्यक्रम के आयोजन में प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था रॉकेट लर्निंग का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है। संस्था के साथ केंद्र और राज्य स्तर पर हुए समझौते के तहत वर्तमान में मध्यप्रदेश के 39 जिलों में गुणवत्तापूर्ण शाला पूर्व शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। विद्यारंभ प्रमाण-पत्र पहल से न केवल बच्चों की शैक्षणिक यात्रा में निरंतरता सुनिश्चित होगी बल्कि समुदाय में आंगनवाड़ी केंद्रों के प्रति विश्वास और सहभागिता भी बढ़ेगी। इससे बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत होगा और भविष्य में ड्रॉपआउट दर कम करने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का परचम पुस्तिका का किया लोकार्पण

वर्ष 2025 की यूपीएससी में चयनित अभ्यर्थी वर्ष 2047 के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के हैं शिल्पकार इन युवाओं के कंधों पर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के कल्याण और विकास का है दायित्व अभ्यर्थियों को ट्राफी भेंट कर किया गया सम्मानित   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा की सफलता में मध्यप्रदेश की बढ़ती उपस्थिति हम सबके लिए गौरव का विषय है। प्रदेश की माटी से 61 सिलेक्शन बदलते मध्यप्रदेश की तस्वीर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूपीएससी-2025 की परीक्षा में चयनित सभी अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह आपके संकल्प और सामर्थय का सम्मान है। चयनित अभ्‍यर्थी वर्ष-2047 के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के शिल्पकार हैं। जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष मना रहा होगा, तब आप प्रशासन के शिखर पर होंगे। आपका एक-एक निर्णय, एक-एक नवाचार, विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की नीव रखेगा। नियति ने आप सबको महत्वपूर्ण दायित्व के लिए चुना है। सफलता अपने साथ दायित्व लेकर आती है। आपके कंधों पर मध्यप्रदेश के करोड़ों नागरिकों के कल्याण और विकास का दायित्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संघ लोक सेवा आयोग 2025 में चयनित अभ्यर्थियों से संवाद और उनके सम्मान के लिए कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। चयनित अभ्यर्थियों पर केंद्रित लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चयनित अभ्यर्थियों पर केंद्रित "मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का परचम" पुस्तिका के डिजिटल वर्जन का रिमोट के माध्यम से लोकार्पण किया। चयनित अभ्यर्थियों पर केंद्रित लघु फिल्म का इस अवसर पर प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चयनित अभ्यर्थियों को ट्रॉफी भेंट कर उनका सम्मान किया। अभ्यर्थियों का चिंतनशील, संवेदनशील और परिश्रमी होना उन्हें सफल बनाने के साथ-साथ प्रदेश की प्रगति का स्तंभ बनेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चयनित युवाओं के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में प्रशासनिक सेवा में आना सौभाग्यशाली अवसर है। लोकतंत्र की खूबसूरती है कि राजनीतिक क्षेत्र में चुनाव के आधार पर हर 5 वर्ष में जनप्रतिनिधियों की परीक्षा होती है। यह लोकतंत्र की ही विशेषता है कि इसमें देश की जनता के विश्वास के आधार पर व्यक्ति सर्वोच्च पद पर पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज 23 मार्च को वीर सपूत भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू का शहीद दिवस है। उन शहीदों ने हमें स्वराज्य दिया था। इस धरती को विकसित और आत्मनिर्भर बनाते हुए सुराज की स्थापना अब हमारी जिम्मेदारी है। सिविल सेवा में चयन परिवार के साथ समाज की बेहतरी और सेवा के लिए संकल्प की पूर्ति का अवसर देता है। हमारा प्रयास हो कि हम दूसरों के सुख – दुख में सहभागी बन सकें। कई ऐसे भी उदाहरण रहे हैं, जिन्होंने अच्छे रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन फील्ड पर वह व्यवस्थाओं को सही तरीके से लागू नहीं करा पाए। आपका चिंतनशील, संवेदनशील और परिश्रमी होना आपको सफल बनाने के साथ-साथ प्रदेश की प्रगति का स्तंभ बनेगा। अंत्योदय, नवाचार, ईमानदारी और सत्य निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को आगे बढ़ाने का समय है। मानवीय कार्यों के आधार पर देश की दुनिया में विशिष्ट पहचान है। चयनित अभ्यर्थी अपने सेवाकाल में अंत्योदय, नवाचार, ईमानदारी और सत्य निष्ठा से कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए आत्मनिर्भर भारत के शिल्पकार बनें। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों से जीवन पर्यंत पढ़ने और सीखने की ललक बनाए रखने का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 173वीं रैंक प्राप्त पूर्णत: दृष्टिहीनता की चुनौतियों से घिरे श्री अक्षत बल्दवा की सराहना करते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो कोई भी शारीरिक अक्षमता सपनों के आड़े नहीं आ सकती। सोहागपुर और सिरोंज जैसे छोटे शहरों के अभ्यर्थियों का भी हुआ चयन अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा में इस वर्ष देशभर से कुल 958 अभ्यर्थी चयनित हुए। इनमें मध्यप्रदेश के 61 प्रतियोगी शामिल हैं। देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता अर्जित करने वाले हमारे 22 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने शासकीय स्कूल – कॉलेज से पढ़ाई की है। प्रदेश के सोहागपुर और सिरोंज जैसे छोटे शहरों से आने वाले अभ्यर्थियों का भी चयन हुआ है। यह सिविल सेवा के प्रति राज्य के युवाओं में बढ़ते रुझान को दर्शाता है। अब यह धारणा धीरे-धीरे समाप्त हो रही है कि सिविल सेवा में चयन के लिए राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों अथवा दिल्ली या इंदौर जैसे शहरों में जाकर ही तैयारी करनी होगी। इस अवसर पर अखिल भारतीय स्तर पर 5वीं रैंक प्राप्त श्री ईशान भटनागर और 260वीं रैंक प्राप्त सुश्री प्राची चौहान ने अपने अनुभव साझा किए। श्री भटनागर ने बताया कि गवर्नेंस संवैधानिक मूल्यों को धरातल पर लाने का सही तरीका होता है, यही मेरी प्रेरणा रही। उन्होंने कहा कि प्रशासन के माध्यम से जमीनी स्तर पर काम करते हुए संविधान की मूल भावना के अनुरूप लोगों को न्याय दिलाया जा सकता है। ये सेवा आम आदमी के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम हो सकती है। सुश्री प्राची चौहान ने कहा कि धैर्य और ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व ने प्रदेश की बेटियों को संबल प्रदान किया है।

प्रदेश में हवाई पट्टियों के विकास से सुदृढ़ हो रही क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी

भोपाल मध्यप्रदेश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने और दूरस्थ जिलों को हवाई सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा हवाई पट्टियों के विकास एवं विस्तार के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। इससे प्रदेश में पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों को हवाई मार्ग से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए मध्यप्रदेश सिविल एविएशन पॉलिसी-2025 लागू की गई है, जिसका उद्देश्य विमानन अधोसंरचना का विकास कर हवाई सेवाओं का विस्तार करना है। प्रदेश की 11 हवाई पट्टियों – सिवनी, सागर, गुना, रतलाम, उज्जैन, बिरवा (बालाघाट), उमरिया, छिंदवाड़ा, मंदसौर, नीमच और शिवपुरी को उड़ान प्रशिक्षण और अन्य विमानन गतिविधियों के संचालन के लिए निजी संस्थाओं को उपयोग के लिए दिए जाने की पहल की गई है। इस पहल से विमानन क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही हवाई पट्टियों का बेहतर संधारण एवं अनुरक्षण भी सुनिश्चित होगा। प्रदेश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश वायु संपर्कता नीति-2018 भी लागू की गई है। इस नीति में चयनित एयरलाइंस को प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच उड़ान सेवाएँ प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। केंद्र सरकार की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) में भी प्रदेश में हवाई अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में दतिया हवाई पट्टी के विकास एवं विस्तार के लिए इसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपा गया। दतिया एयरपोर्ट प्रदेश का 8वाँ हवाई अड्डा है, जहाँ से छोटे यात्री विमानों का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 में शिवपुरी एवं उज्जैन की हवाई पट्टियों के विकास और विस्तार के लिए भी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन हवाई पट्टियों को उन्नत कर क्षेत्रीय हवाई अड्डों के रूप में विकसित करने और नियमित विमान सेवाओं के संचालन योग्य बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही वर्तमान में प्रगति पर है। प्रदेश में हवाई अधोसंरचना के इस विस्तार से न केवल हवाई संपर्क सुदृढ़ होगा, बल्कि पर्यटन, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल से थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने की सौजन्य भेंट

भोपाल में प्रस्तावित सेना दिवस आयोजन प्रदेशवासियों को भारतीय सेना की समृद्ध परंपरा, शौर्य और बलिदान से जोड़ने का होगा महत्वपूर्ण अवसर : उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से निवास कार्यालय, भोपाल में थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने सौजन्य भेंट की। जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने आगामी वर्ष में भोपाल में आयोजित होने वाली सेना दिवस परेड के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बैठक में सेना एवं राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सहभागिता की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ देशभक्ति, सैन्य सम्मान और जन-भागीदारी की भावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि भोपाल में प्रस्तावित सेना दिवस आयोजन प्रदेशवासियों को भारतीय सेना की समृद्ध परंपरा, शौर्य और बलिदान से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। इससे प्रदेश के युवाओं में सेना में शामिल होकर राष्ट्र सेवा करने की प्रेरणा भी मिलेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन सेना और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना को भी सुदृढ़ करेंगे। थल सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने बताया कि 15 जनवरी 2027 को भोपाल में भव्य सेना दिवस परेड आयोजित की जाएगी, जिसकी भव्यता और स्वरूप नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड के समान होगा। इस आयोजन के अंतर्गत परेड के साथ सैन्य प्रदर्शनी, सैन्य अभ्यास, शौर्य संध्या और विभिन्न आकर्षक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही सेवानिवृत्त सैनिकों का सम्मान भी किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि कार्यक्रमों की शुरुआत 1 नवंबर 2026 को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस से ‘मेरी माटी अभियान’ के अंतर्गत की जाएगी। जनवरी 2027 में 7 से 12 जनवरी तक सैन्य प्रदर्शनी, 9, 11 एवं 13 जनवरी को परेड अभ्यास, 11 एवं 13 जनवरी को शौर्य संध्या अभ्यास तथा 11-12 जनवरी को बड़े तालाब में सैन्य गतिविधियां आयोजित होंगी। मुख्य परेड 15 जनवरी को प्रस्तावित मार्गों पर आयोजित की जाएगी, जबकि शौर्य संध्या और अन्य कार्यक्रम शहर के विभिन्न स्थलों पर संपन्न होंगे। बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान, लेफ्टिनेंट जनरल रंजीत सिंह, मेजर जनरल विकास लाल, बिग्रेडियर नितिन भाटिया, कर्नल सौरभ कुमार, सन्नी जुनेजा, राजेश बंडले तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश में गौवंश संरक्षण के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव : मंत्री पटेल

मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज भोपाल में "गौ सेवा से राष्ट्र निर्माण" विषय पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन भोपाल भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान केवल एक पशु का नहीं, बल्कि माता का रहा है। प्रदेश में गोवंश के संरक्षण के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव किए गए हैं। जिसके अंतर्गत अब सरकार गोशालाओं के लिए प्रति गाय प्रतिदिन 40 रुपये की राशि प्रदान कर रही है। स्वावलंबी मॉडल गौशालाओं के अंतर्गत सरकार 130 एकड़ जमीन और 5000 गायों के पालन के साथ सीएनजी और जैविक खाद उत्पादन मॉडल पर काम कर रही है। पशुपालन एवं डेयरी राज्‍यमंत्री स्‍वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने यह बात संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। भोपाल स्‍थ‍ित मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के तीनों आयुर्वेदिक महाविद्यालय और विश्व आयुर्वेद परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को 'गौ-सेवा से राष्ट्र निर्माण' संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश में गौ-संवर्धन एवं संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों और जन प्रतिनिधियों ने युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान गौ-संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने पर चर्चा की गई। राज्‍यमंत्री पटेल ने कहा मध्यप्रदेश सरकार ने अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग का नाम बदलकर गौपालन पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग कर दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश के संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक अभिनव योजना तैयार की गई है। इसके तहत लगभग 130 एकड़ भूमि निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएगी, जहां न्यूनतम 5 हजार गौमाताओं के साथ बड़े स्तर पर आधुनिक गौशालाएं विकसित की जाएंगी। इस योजना का उद्देश्य गौशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से स्वावलंबी इकाइयों के रूप में विकसित करना है। इसके लिए गौशालाओं में सीएनजी उत्पादन, जैविक खाद निर्माण, दुग्ध उत्पादन, ब्रीडिंग और सोलर ऊर्जा जैसे बहुआयामी कार्य किए जाएंगे। विशेष रूप से गोबर से सीएनजी बनाने और जैविक खाद तैयार करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे आय के स्थायी स्रोत विकसित होंगे। राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि 5 हजार गौमाताओं की क्षमता वाली इन गौशालाओं में भविष्य में 15 से 20 हजार तक गौवंश रखने की व्यवस्था की जाएगी। इससे उत्पादन और आय में वृद्धि होगी और गौशालाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेंगी। प्रदेश के 32 जिलों में इस योजना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि 7 जिलों में टेंडर जारी किए जा चुके हैं। दमोह जिले में इस मॉडल की पहली गौशाला स्थापित की जा रही है। यह मॉडल पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और प्रदेश में आवारा गौवंश की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में परम गौसेवक गुरुदेव अच्युतानंद, सारस्वत वक्ता वैद्य प्रदीप त्रिपाठी, विश्व आयुर्वेद परिषद् के संरक्षक राम प्रताप सिंह राजपूत, डॉ. संध्या चौकसे, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय, मानसरोवर समूह के आयुर्वेद संचालक डॉ. बाबुल ताम्रकार, मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग सिंह राजपूत, साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्या डॉ. मनीषा राठी उपस्‍थ‍ित रहीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- किसान समृद्ध होंगे, तभी समृद्ध होगा हमारा प्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का किसानों ने किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारी धरोहर हैं। ये अन्नदाता ही देश के भाग्य विधाता हैं। सरकार प्रदेश के किसानों की समृद्धि के लिए कृत संकल्पित है। अन्नदाताओं को मजबूत करने के लिए ही हम 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। इसमें सरकार का पूरा फोकस खेती को आधुनिक तकनीक, नवाचार और मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन के साथ गौपालन, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी एवं कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चा वादा और पक्का काम, यही सरकार का संकल्प है। हमने किसानों से जो वादा किया था, वह पूरा करके भी दिखाया है। उन्होंने कहा कि जब हमारे खेतों से लेकर कारखाने तक समृद्धि आएगी, तभी तो हमारे किसान भी समृद्ध और खुशहाल होंगे। मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही विकसित भारत@2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में किसानों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिले, इसके लिए प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान एवं नयी सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में आगर-मालवा जिले के लिए 167.21 करोड़ रुपए लागत की आहू मध्यम सिंचाई परियोजना और 24.88 करोड़ रुपए की लागत से हड़ाई तालाब निर्माण को मंजूरी दी गई। करीब 200 करोड़ रुपए की इन दोनों योजनाओं से आगर-मालवा जिले के खेतों तक पानी पहुंचेगा और 4800 हैक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी। आगर-मालवा जिले को यह दो सौगातें मिलने पर किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत कर आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर आगर-मालवा जिले के बड़ोद क्षेत्र के कुछ गांवों के अटपटे से नाम बदलने का आश्वासन किया। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द वे स्वयं आगर-मालवा आएंगे और किसानों के बीच जाकर उनसे संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिल्ली-मुंबई सुपर एक्सप्रेस-वे से जुड़ने के बाद आगर-मालवा को विकास को नए पंख लगे हैं। अब राजस्थान के झालावाड़ से नया हाई-वे भी सीधे उज्जैन के बाबा महाकाल और नलखेड़ा की मां बगुलामुखी धाम को जोड़ेगा। इससे धार्मिक पर्यटन के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और माल परिवहन में लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने उद्यानिकी फलदार पौधों के मूल्यांकन एवं मुआवजा राशि में वृद्धि कर दी है। इसके तहत हमने आगर-मालवा जिले के मशहूर ओडीओपी उत्पाद संतरे की फसल के लिए पूर्व निर्धारित दर 4500 प्रति वृक्ष को बढ़ाकर 17,500 प्रति वृक्ष कर दिया गया है। यह जिले के संतरा उत्पादक किसानों के लिए बड़ी सौगात है। राज्य सरकार ने भावांतर भुगतान योजना का लाभ सोयाबीन किसानों को दिया है। अब इस योजना में सरसो की फसल को भी शामिल कर किसानों को नई सौगात दी गई है। गेहूं उत्पादक किसानों को 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस देकर सरकार 2625 रुपए मूल्य पर खरीदी कर रही है। तुअर की शत-प्रतिशत खरीदी के लिए भी हम प्रतिबद्ध हैं। आगर-मालवा विधायक श्री मधु गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का कोना-कोना सिंचाई सुविधाओं से लैस हो रहा है और आगर मालवा जिला भी इससे अछूता नहीं है। कृषि कल्याण वर्ष में जिले के किसानों की समृद्धि के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 200 करोड़ लागत की सिंचाई परियोजना और तालाब विकास कार्यों को मंजूर किया है। उन्होंने औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए निवेशकों को आगर मालवा से ईकाई प्रारंभ करने के लिए आकर्षित किया है। अब जिले में फूड चेन मकेन कंपनी की स्थापना से यहां के हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि आगर मालवा में 18 हजार करोड़ रुपए की लागत से भगवान श्री बैजनाथ धाम का निर्माण किया जा रहा है। आगर मालवा को गोकुल ग्राम, 2 नवीन महाविद्यालय और अनेकों गौशालाओं की सौगात मिली है। अभिनंदन समारोह में जिलाध्यक्ष श्री ओम मालवीय, श्री मेहरबान सिंह सहित आगर-मालवा जिले से बड़ी संख्या में आए किसान बंधु एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।  

पूर्व मंत्री पवैया ने संभाला राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष का पदभार

उप मुख्यमंत्री देवड़ा एवं शुक्ल ने दी शुभकामनाएं भोपाल पूर्व मंत्री जय भान सिंह पवैया ने सोमवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा और शुक्ल ने पवैया को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में राज्य वित्त आयोग पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने भी पवैया को शुभकामनाएं दीं। संविधान के 73वें एवं 74वें संशोधनों के तहत पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 243 (आई) एवं 243 (वाई) के अनुसार प्रत्येक राज्य में हर पांच वर्ष में राज्य वित्त आयोग का गठन किया जाता है। यह राज्य का 6वाँ वित्त आयोग है। राज्य वित्त आयोग का मुख्य उद्देश्य पंचायतों एवं नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन करना, उनके आय के स्रोतों को मजबूत करने के उपाय सुझाना तथा राज्य के करों, शुल्कों एवं अनुदानों के उचित वितरण के संबंध में अनुशंसाएं देना है।  

श्रीरामनवमी के पावन अवसर पर 7 स्थलों पर होगा प्राकट्य पर्व का आयोजन

लोक एवं भक्ति गायन के साथ नृत्य में दिखेगी श्रीराम की महिमा भोपाल श्रीरामनवमी के पावन अवसर पर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराने के उद्देश्य से प्राकट्य पर्व का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार 27 मार्च, 2026 को सात स्थलों पर श्रीराम केन्द्रित नृत्य नाटिका, गायन सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया जाएगा। इनमें श्रीराम राम राजा मंदिर प्रांगण ओरछा धाम (निवाड़ी), भरत घाट – चित्रकूट (सतना), श्रीराम जानकी (पंचायती) मंदिर – शहडोल, मंगल भवन परिसर – उमरिया, जुगल किशोर मंदिर प्रांगण – पन्ना, सीतामढ़ी – कोतमा (अनूपपुर) और अहमदपुर – बरेली (रायसेन) पर कार्यक्रम सायं 7 बजे से प्रारंभ होगा और कार्यक्रम में सभी का प्रवेश नि:शुल्क रहेगा। श्रीराम के सम्बन्ध में पौराणिक मान्यताओं के साथ स्थानीय स्तर पर भी अनेक आख्यान, जनश्रुतियां प्रचलित हैं, जो आम जनमानस में विश्वास के रूप में मान्य है। संस्कृति विभाग द्वारा श्रीराम जन्मोत्सव की गरिमा के अनुरूप, धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताओं को दृष्टिगत रखते हुए ‘प्राकट्य पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। ओरछा धाम में होने वाले कार्यक्रम में सर्वप्रथम बुन्देली लोक गायन की प्रस्तुति सुमुस्कान प्रजापति, छतरपुर द्वारा दी जाएगी। इसके बाद श्रीराम केन्द्रित नृत्य नाटिका सुमाण्डवी अजय आरोणकर, भोपाल के निर्देशन में होगी। वहीं, सुविख्यात गायिका सुसौम्या शर्मा, विदिशा द्वारा भक्ति गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। चित्रकूट में होने वाले कार्यक्रम में सर्वप्रथम बघेली लोक गायन की प्रस्तुति सुस्नेहा मिश्रा, मऊगंज द्वारा दी जाएगी। इसके बाद श्रीराम केन्द्रित नृत्य नाटिका सुतरुणा सिंह, ग्वालियर के निर्देशन में होगी। सुविख्यात भजन गायक शर्मा बंधु, उज्जैन द्वारा भक्ति गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। शहडोल में होने वाले कार्यक्रम में सर्वप्रथम बघेली लोक गायन की प्रस्तुति सुरीता तिवारी, रीवा द्वारा दी जाएगी। इसके बाद हनुमान लीला का मंचन अखण्ड सुदर्पण जन कल्याण समिति, खण्डवा के कलाकारों द्वारा होगा। सुविख्यात गायिका सुभारती विश्वनाथन, भोपाल द्वारा भक्ति गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। उमरिया में होने वाले कार्यक्रम में सर्वप्रथम बघेली लोक गायन की प्रस्तुति मुनीन्द्र मिश्रा, शहडोल द्वारा दी जाएगी। इसके बाद श्रीराम केन्द्रित नृत्य नाटिका की प्रस्तुति डॉ. नेहा विश्वकर्मा, जबलपुर के निर्देशन में होगी। गायिका सुपल्लवी तिवारी, सिवनी द्वारा भक्ति गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। पन्ना में होने वाले कार्यक्रम में सर्वप्रथम बुन्देली लोक गायन की प्रस्तुति सुखुशी तिवारी, छतरपुर द्वारा दी जाएगी। इसके बाद श्रीराम केन्द्रित नृत्य नाटिका की प्रस्तुति सुमनस्वी भोजने, भोपाल के निर्देशन में होगी। गायक यश गोपाल श्रीवास्तव, सागर द्वारा भक्ति गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। कोतमा, अनूपपुर में होने वाले कार्यक्रम में सर्वप्रथम बघेली लोक गायन की प्रस्तुति अजय कुमार, सीधी द्वारा दी जाएगी। इसके बाद रामलीला की प्रस्तुति अरविंद कुमार पटेल, सीधी के निर्देशन में होगी। वहीं, गायक सुजीत तिवारी, वाराणसी द्वारा भक्ति गायन की प्रस्तुति दी जाएगी।