samacharsecretary.com

औचक निरीक्षण से हड़कंप: मंत्री परमार पहुंचे सिवनी, आयुष कार्यालय से लेकर पॉलीटेक्निक कॉलेज तक जांच

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने, बुधवार को सिवनी जिले के प्रवास के दौरान, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय (अग्रणी) स्नातकोत्तर महाविद्यालय का औचक निरीक्षण कर, महाविद्यालयीन गतिविधियों एवं विद्यार्थियों को दी जा रही समस्त सुविधाओं का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने सर्वप्रथम महाविद्यालय परिसर में स्थित मां भारती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया एवं महात्मा गांधी जी की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय में संचालित कक्षाओं का अवलोकन करते हुए, विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों से उनके ग्राम, कॉलेज तक आने-जाने के साधनों की जानकारी लेते हुए, महाविद्यालय के प्राचार्य को 15 किलोमीटर की परिधि तक विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय में विद्यार्थियों की अधिकतम एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। साथ ही परिसर में पूर्णरूपेण स्वच्छता बनाए रखने को भी कहा। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं का अवलोकन किया तथा उपलब्ध पुस्तकों के समुचित वितरण सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन में सुलभ एवं सुगम सुविधा मिल सके। इस दौरान सिवनी के विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन, प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल राठौर, एसडीएम श्रीमती पूर्वी तिवारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री श्री परमार ने आयुष कार्यालय का औचक निरीक्षण कर दिए आवश्यक निर्देश मंत्री श्री परमार ने आयुष विभाग कार्यालय सिवनी का निरीक्षण कर, कार्यालय के विभिन्न कक्षों, अभिलेखों एवं कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने कार्यालय परिसर में साफ-सफाई, साज-सज्जा, सुव्यवस्थित संधारण व्यवस्था तथा विकसित हर्बल गार्डन का भी अवलोकन किया। मंत्री श्री परमार ने निरीक्षण के दौरान, आयुष विधाओं को आमजन तक अधिक लोकप्रिय, लाभकारी एवं स्वास्थ्यवर्धक बनाने, औषधियों के समुचित संधारण तथा मांग के अनुरूप सेवाओं के विस्तार के लिये आवश्यक मार्गदर्शन एवं निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने निरीक्षण के पूर्व, सिवनी विधानसभा के विधायक श्री दिनेश राय मुनमुन, प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल कुमार राठौर एवं जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशवंत माथुर के साथ संयुक्त चर्चा कर, जिले में 50 बिस्तरीय आयुर्वेदिक अस्पताल एवं हर्बल गार्डन की स्थापना के लिये प्रस्ताव तैयार कर विभाग को प्रेषित करने के निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने पॉलीटेक्निक कॉलेज में शैक्षणिक एवं भौतिक व्यवस्थाओं का किया अवलोकन मंत्री श्री परमार ने शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय का भी औचक निरीक्षण कर, महाविद्यालयीन गतिविधियों एवं विद्यार्थियों को दी जा रही समस्त सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर, आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की विभिन्न कक्षाओं एवं ट्रेडवार प्रयोगशालाओं का अवलोकन कर, शैक्षणिक एवं भौतिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने और समय-समय पर महाविद्यालय में आने वाले पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही पानी की टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये। मंत्री श्री परमार ने महाविद्यालय की लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब, उपकरणों एवं अन्य सुविधाओं का अवलोकन करते हुए, इन व्यवस्थाओं के उन्नयन के लिये प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिये, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।  

डीजीपी-11 बना चैलेंजर ट्रॉफी विजेता: 18 वींचैलेंजर ट्रॉफी क्रिकेट प्रतियोगिता का खिताब डीजीपी-11 के नाम

भोपाल  महेश्वर खेल-कूद शिक्षण एवं सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित 18वींचैलेंजर ट्रॉफी क्रिकेट प्रतियोगिता का विभागीय फाइनल मुकाबला 23दिसंबर को नेहरू नगर पुलिस लाईन भोपाल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। फाइनल मैच डीजीपी-11 एवं जिला पुलिस बल भोपाल के मध्य खेला गया, जिसमें डीजीपी-11ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 121 रनों से शानदार विजय प्राप्त कर प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में डीजीपी-11ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 218 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से दिशांत खरे ने 89 रनों की प्रभावशाली पारी खेली। उनके साथ गौरव सिंह भदौरिया ने 58 रन तथा प्रज्ञा बालरे ने 39 रनों का उपयोगी योगदान देकर टीम को बड़े लक्ष्य तक पहुँचाया। जिला पुलिस बल भोपाल की ओर से गेंदबाजी में विशाल कहर ने 3 विकेट तथा सुशील ने 2 विकेट प्राप्त किए। 218 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिला पुलिस बल भोपाल की टीम डीजीपी-11की सटीक गेंदबाजी के सामने अधिक देर तक टिक नहीं सकी और पूरी टीम 97 रनों पर सिमट गई। टीम की ओर से ए. पठान ने 42 रनों का संघर्षपूर्ण योगदान दिया। डीजीपी-11की ओर से गेंदबाजी में राहुल रावत ने 4 विकेट, नरेंद्र रैकवार ने 3 विकेट तथा अरुण ने 1 विकेट प्राप्त कर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फाइनल मुकाबले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दिशांत खरे को प्रदान किया गया। प्रतियोगिता के दौरान बेस्ट बॉलर का पुरस्कार डीजीपी-11 के विशाल सिंह भदौरिया, बेस्ट बैटर का पुरस्कार डीजीपी-11 के गौरव सिंह भदौरिया, बेस्ट फील्डर/विकेटकीपर का पुरस्कार डीजीपी-11 के संदीप सूर्यवंशी तथा प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जिला पुलिस बल भोपाल के विशाल कहर को प्रदान किया गया। प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण 25वीं वाहिनी सेनानी श्री नागेंद्र सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीजीपी-11 के मैनेजर एवं बैटिंग कोच श्री श्याम मूर्ति, बॉलिंग कोच श्री मंजीत सिंह, फिटनेस कोच श्री मनोज बड़ोला सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी, खिलाड़ी एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे। यह जीत केवल पदक नहीं, बल्कि पुलिस के अनुशासन, प्रशिक्षण, समर्पण और साहस का प्रतीक है। इनकी मेहनत और कौशल यह दर्शाता है कि पुलिस कर्मी सिर्फ कानून और व्यवस्था के संरक्षक नहीं, बल्कि खेल और फिटनेस के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट हैं।  

प्रदेश के विकास की समग्र तस्वीर पेश करेगा ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’

उद्योग के साथ पर्यटन, नगरीय विकास और एमएसएमई के क्षेत्र में विकास सशक्त तस्वीर होगी प्रदर्शित भोपाल  ग्वालियर में आज आयोजित होने जा रहा ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ मध्यप्रदेश के विकास मॉडल को एक नए और व्यापक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने जा रहा है। यह आयोजन केवल निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस समग्र सोच को सामने लाता है, जिसमें उद्योग, नगरीय विकास, पर्यटन, एमएसएमई, स्टार्ट-अप और रोजगार एक साथ आगे बढ़ते हुए दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यह समिट राज्य की विकास यात्रा में एक साधारण कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक समन्वित विकास मंच के रूप में उभर रहा है। समिट के दौरान एमपीआईडीसी द्वारा आयोजित प्रदर्शनी और प्रस्तुतियों में नगरीय विकास विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों को विशेष स्थान दिया गया है। प्रदर्शनी में लगाए गए सूचना पैनलों और ऑडियो-विजुअल फिल्म के माध्यम से यह बताया गया कि किस तरह शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। इन योजनाओं का सीधा प्रभाव आम नागरिक के जीवन पर पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी पहलों के जरिए बेहतर सड़कों, सार्वजनिक सेवाओं, डिजिटल सुविधाओं और शहरी प्रबंधन को मजबूती मिल रही है, जिससे शहरी जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। नगरीय क्षेत्रों में जलप्रदाय, सीवरेज और हरित क्षेत्र विकास से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं की जानकारी भी इस मंच पर प्रस्तुत की जा रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचा विकसित करना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए शहरी विस्तार को सुव्यवस्थित करना है। स्वच्छ जल आपूर्ति, बेहतर सीवरेज व्यवस्था और हरित क्षेत्रों का विकास शहरों को निवेश और रोजगार के लिए अधिक अनुकूल बना रहा है। शहरी आजीविका और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाली योजनाओं को भी समिट में प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को दिए गए ब्याजमुक्त ऋण, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से परिवारों को आजीविका से जोड़ने और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की पहल यह दर्शाती है कि शहरी विकास केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं, बल्कि मानव संसाधन के सशक्तिकरण पर भी समान रूप से केंद्रित है। भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल परियोजनाओं की प्रगति आधुनिक शहरी परिवहन की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। इसी व्यापक दृष्टिकोण का विस्तार मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के ‘अभ्युदय 2025’ पवेलियन में भी दिखाई देता है। यह पवेलियन आधुनिक तकनीक और सुसंगठित कंटेंट के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक स्थलों, वन्यजीव पर्यटन और अनुभवात्मक पर्यटन को प्रस्तुत करता है। एलईडी वॉल पर चलने वाली फिल्मों, वर्चुअल रियलिटी अनुभव, महाकाल दर्शन के लिए होलोग्राम तकनीक और डिजिटल स्टैंडीज़ के जरिए यह बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में किस तरह नए अनुभव और अवसर विकसित कर रहा है। सेल्फी और फोटो बूथ जैसे इंटरएक्टिव एलिमेंट्स के जरिए दर्शकों की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है, जिससे राज्य की पर्यटन पहचान और मजबूत हो रही है। समिट में MSME, स्टार्ट-अप और निर्यात को लेकर आयोजित समानांतर सत्र इस आयोजन को और व्यावहारिक बनाते हैं। इन सत्रों में नीति समर्थन, पूंजी बाजार से जुड़ाव, नवाचार संरक्षण, निर्यात संवर्धन और वैश्विक बाजारों में अवसरों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। राष्ट्रीय संस्थानों, निर्यात संगठनों और वित्तीय संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी यह स्पष्ट करती है कि मध्यप्रदेश उद्यमियों को केवल निवेश आमंत्रण तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और मंच भी उपलब्ध करा रहा है। इस समिट की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है देश के शीर्ष उद्योगपतियों और कॉरपोरेट लीडर्स की व्यापक उपस्थिति। ऊर्जा, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, सीमेंट, एफएमसीजी और लॉजिस्टिक्स जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख उद्योगपति और निर्णय-कर्ता एक ही मंच पर उपस्थित रहेंगे। उनकी भागीदारी यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश को आज उद्योग जगत एक भरोसेमंद और भविष्य-उन्मुख राज्य के रूप में देख रहा है। समिट के दौरान बड़े निवेश प्रस्तावों से जुड़ी परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण, भूमि आवंटन और आशय पत्रों का वितरण तथा उच्च रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों का सम्मान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ केवल विचार और संवाद का मंच नहीं, बल्कि निवेश, रोजगार और क्रियान्वयन को एक साथ जोड़ने वाला ठोस प्रयास है। यह आयोजन यह संदेश देता है कि मध्यप्रदेश में विकास एकांगी नहीं है। यहाँ उद्योग के साथ-साथ नगरीय जीवन की गुणवत्ता, पर्यटन की संभावनाएँ और एमएसएमई की मजबूती भी समान रूप से प्राथमिकता में हैं। ग्वालियर में होने जा रहा यह समिट राज्य की उसी संतुलित और यथार्थवादी विकास सोच का सजीव उदाहरण बनकर सामने आएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- हम सुशासन और संवेदनशीलता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं

प्रधानमंत्री श्री मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह के सहयोग से प्रदेश में नक्सलवाद समाप्त करना राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि वर्ष 2026 कृषि और कृषक कल्याण को और वर्ष 2027 युवाओं को होगा समर्पित अब प्रदेश में 30 प्रतिशत से अधिक निवेश प्रस्ताव उतर रहे धरातल पर विजन 2047 में मध्यप्रदेश को 225 लाख करोड़ रूपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डी.डी. कॉन्क्लेव 2025 में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास और जनकल्याण के लिए निरंतर नवाचार कर रही है। जनसेवा के कार्यों और प्रदेश के अभ्युदय के लिए कई कार्यों को आरंभ किया गया है। हम सुशासन और संवेदनशीलता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं। शासन के धन का सदुपयोग करते हुए अधिक से अधिक लोगों का कल्याण हो यह हमारा लक्ष्य है। वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया। वर्ष 2026 में कृषि और कृषक कल्याण को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी और वर्ष 2027 युवाओं को समर्पित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाल सलाम को आखिरी सलाम कहते हुए नक्सलवाद को प्रदेश से समाप्त करना हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। प्रधानमंत्री श्री मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के सक्रिय सहयोग से राज्य सरकार निर्धारित समय-सीमा से पहले नक्सलवाद को समाप्त करने में सफल रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दूरदर्शन के 'डी.डी. कॉन्क्लेव भोपाल-2025' में मध्यप्रदेश सरकार के 2 वर्ष के कार्यों पर आधारित विशेष सत्र में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार की दो वर्ष की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में केन्द्रीय सूचना प्रसारण राज्य मंत्री श्री एल. मुरूगन, केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री संजय जाजू, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एंकर श्री सुधीर चौधरी ने साक्षात्कार लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से राज्य सरकार की दो साल की उपलब्धियों, सरकार की प्राथमिकताओं, चुनौतियों, भविष्य की कार्ययोजना तथा व्यक्तिगत जीवन से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'दमदार दो साल-मोहन सरकार' लघु फिल्म का रिमोट कंट्रोल से विमोचन भी किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बजट को डबल करना हमारा लक्ष्य है। इसके साथ ही मितव्ययिता से बचत करना भी हमारी प्राथमिकता है। सौर ऊर्जा को प्राथमिकता देकर हम सरकार के खर्च में कमी के साथ-साथ किसानों को भी बचत के लिए प्रेरित कर रहे हैं। नवकरणीय ऊर्जा के प्रोत्साहन से देश में सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश उपलब्ध करा रहा है। दिल्ली की मेट्रो की बिजली से संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब नीति और नीयत साफ हो तो ईश्वर भी मदद करते हैं। हमने सभी व्यवस्थाओं को प्रदेश में सुसंगत बनाने का प्रयास किया है। जन कल्याण की योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश हमारे लिए केवल एमओयू की संख्या नहीं बल्कि धरातल पर दिखने वाला रोजगार और उत्पादन है। इसी सोच के साथ प्रदेश में निवेश नीति और प्रशासनिक कार्यशैली दोनों में मूलभूत बदलाव किए गए। पहले इन्वेस्टर्स समिट केवल इंदौर में होती थी, हमने इन गतिविधियों का विस्तार प्रदेश के सभी संभागों में किया। परिणाम यह रहा कि जहां सामान्यत: 5-7 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव ही जमीन पर उतरते थे, वहीं मध्यप्रदेश में यह अनुपात 30 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भावांतर योजना की शुरुआत वर्ष 2017 में की। थी भावांतर योजना में किसानों को उपज का उचित मूल्य मिले और बाजार की स्थिरता से सुरक्षा का कार्य हो रहा है। राज्य सरकार आगामी वर्ष को कृषि कल्याण के रूप में मनाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहना योजना हमारे लिए सामाजिक न्याय और नारी सम्मान की स्थायी प्रतिबद्धता है। बहनों की जरूरत और आत्म सम्मान को समझते हुए राशि में डेढ़ गुना की वृद्धि की गई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और एयर एम्बुलेंस चलाने जैसे नवाचार किए गए हैं। स्वस्थ मध्यप्रदेश बनाना हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रदेश में धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश पर्यटन की दृष्टि से असीम संभावनाओं का प्रदेश है। सिंहस्थ : 2028 को हम एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रहे हैं। सरकार की तैयारियां अभी से समग्र और चरणबद्ध रूप से आरंभ हो चुकी है। हमारा प्रयास यह है कि प्रदेश में पर्यटन की व्यवस्थाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही टाइगर स्टेट के रूप में पहचाना जाता था और अब चीता स्टेट के रूप में भी प्रदेश ने देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। हम मध्यप्रदेश को वन्य जीव संरक्षण का राष्ट्रीय और वैश्विक मॉडल बनाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विजन 2047 में मध्यप्रदेश को 225 लाख करोड़ रूपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही प्रति व्यक्ति आय को 22 लाख रूपए बनाने का लक्ष्य है। यह लक्ष्य कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण, उद्योग, निवेश और निर्यात को नई ऊंचाई देने, ग्रीन एनर्जी और समावेशी विकास के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। 

टक्कर के बाद तांडव: वसीम खान का बवाल, हिंदू युवती को खुलेआम हत्या की धमकी

इंदौर गाड़ी टकराने के बाद एक मुस्लिम युवक ने हिंदू युवती को जान से मारने की धमकी दी। उसको कॉल लगाया और कहा कि मेरे पास तुम्हारी तस्वीर है। मैंने तुम्हारा इंतजाम करवा दिया है। पुलिस ने देर रात आरोपित वसीम खान के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। लसूड़िया पुलिस के अनुसार 7 दिसंबर को फरियादी कसक का स्कूटर बाइक से टकरा गया था। उस वक्त उसका भाई स्कूटर चला रहा था। गाड़ी में नुकसान होने पर बाइक (एमपी 09एडब्ल्यू 9207) के चालक ने 10 हजार रुपये दिए और गाड़ी ठीक करवा दी। कसक का आरोप है इसके बाद अनजान नंबर से कॉल आया और उसने वसीम खान नाम बताया। उसने पहले युवती से जानकारी ली। बाद में कहा मेरे पास तुम्हारी तस्वीर आ गई है। मैं तुम्हारा इंतजाम करवा दूंगा। उसने कहा कि तुम्हें 15 दिन के अंदर घायल करूंगा। मैं तांत्रिक हूं। घटना की हिंदू संगठन को जानकारी लगी तो थाने पहुंचे और वसीम निवासी श्रीनगर कांकड़ के खिलाफ केस दर्ज करवाया।   हिंदू संगठन ने लगाया लव जिहाद का आरोप मुस्लिम युवक को पकड़ा, मंगलवार रात आजाद नगर थाना क्षेत्र में भी हंगामा हो गया। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम युवक पर लव जिहाद का आरोप लगाया। हालांकि पुलिस ने बगैर कार्रवाई के दोनों को छोड़ दिया। टीआइ लोकेशसिंह भदौरिया ने कहा युवती मर्जी से आई थी। घटना तीन ईमली बस अड्डे की है। हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने बाराबंकी उप्र के सहीम पुत्रल मोहम्मद सलीम को हिंदू युवती के साथ पकड़ा। आरोप लगाया कि वह हिंदू युवती को बहसा फुसला कर ले जा रहा है। हालांकि बाद में युवती ने कहा मैं सहीम के साथ दो साल से रह रही हूं। दोनों काम के सिलसिले में मुंबई जा रहे थे।

खिलाड़ियों का सम्मान, युवा सशक्तिकरण और किसान-ग्रामीणों के लिए सहकारी क्रांति: मंत्री सारंग

खेल और सहकारिता में हुई अभूतपूर्व प्रगति : मंत्री सारंग खिलाड़ियों का सम्मान, युवा सशक्तिकरण और किसान-ग्रामीणों के लिए सहकारी क्रांति भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार की परिकल्पना जहाँ केंद्र और राज्य एक साझा लक्ष्य, साझा गति और साझा परिणाम के साथ काम करते हैं, आज मध्यप्रदेश में ज़मीन पर साकार रूप ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह बात सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को अपेक्स बैंक समन्वय भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में कही। खेल एवं युवा कल्याण विभाग: प्रदेश का गौरव, देश में नई पहचान मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक अर्जित कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ओलम्पिक व पैरा ओलम्पिक 2024 में प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता कर पदक अर्जित किये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश ने खेलों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, तमिलनाडु में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी प्रकार 38वें नेशनल गेम्स, उत्तराखण्ड में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 67 पदक अर्जित कर राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया। अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदक तालिका में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 57 पदक तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 391 पदक अर्जित किए। हॉकी एशिया कप 2025, 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कजाकिस्तान, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर एवं एशियन केनो स्लालम चैंपियनशिप चीन में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को शीर्ष राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने बनाएं नये राष्ट्रीय रिकॉर्ड प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर न केवल निरंतर पदक अर्जित कर रहे हैं, बल्कि नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभा को नई पहचान दिला रहे हैं। पोल वॉल्ट में देव मीणा ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक हासिल किया है। शूटिंग में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने 50 मीटर राइफल स्पर्धा में रिकॉर्ड स्कोर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धि दर्ज की है। वहीं शॉट पुट में समरदीप सिंह ने अपने दमदार प्रदर्शन से राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप कांस्य विजेता टीम में प्रदेश के 3 खिलाड़ी मंत्री सारंग ने बताया कि तमिलनाडु में आयोजित एफआईएच जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप–2025 में भारतीय टीम ने अर्जेंटीना को 4–2 से पराजित कर पहली बार कांस्य पदक जीतकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि इस गौरवपूर्ण सफलता में मध्यप्रदेश पुरुष हॉकी अकादमी, भोपाल के प्रतिभाशाली खिलाड़ी अंकित पाल, तलैम प्रियोबर्ता एवं थोनाओजाम इंगालेंबा लुवांग के उत्कृष्ट प्रदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ओलम्पिक और एशियन गेम्स पदक विजेताओं को बनाएंगे राजपत्रित अधिकारी खिलाड़ियों के सम्मान और भविष्य सुरक्षा पर सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए मंत्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार, एकलव्य, विक्रम, विश्वामित्र और लाइफटाइम अचीवमेंट जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। विक्रम पुरस्कार प्राप्त 28 खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में नियुक्ति दी गई है, वहीं ओलम्पिक और एशियन गेम्स पदक विजेताओं को राजपत्रित अधिकारी बनाए जाने का प्रावधान किया जा रहा है।  खिलाड़ियों को दी गई सम्मान राशि मंत्री सारंग ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को व्यापक प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक अर्जित करने वाले 1375 खिलाड़ियों को 116 लाख रुपये, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के 228 पदक विजेताओं को 153 लाख रुपये तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के 51 खिलाड़ियों को 37.83 लाख रुपये दिए गए। पेरिस ओलम्पिक 2024 में 3 कांस्य पदक विजेता खिलाड़ियों को 300 लाख रुपये एवं 3 प्रतिभागी खिलाड़ियों को 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन हेतु 19 खेल संघ संस्थाओं को 50.80 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई। क्रांति गौड़ को 1 करोड़ की सम्मान राशि मंत्री सारंग ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 की विजेता भारतीय महिला टीम की सदस्य प्रदेश की सुक्रांति गौड़ को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई है। वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को स्पोर्ट्स हब बनाने का लक्ष्य मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश में 18 खेलों की 11 खेल अकादमियां संचालित हैं, जहाँ 1300 से अधिक खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खेल अधोसंरचना के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होने बताया कि भोपाल के नाथू बरखेड़ा में लगभग 985 करोड़ रुपये की लागत से अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माणाधीन है। प्रदेश में 20 अंतर्राष्ट्रीय हॉकी सिंथेटिक टर्फ, 10 सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक तथा 120 से अधिक स्टेडियम एवं खेल परिसर विकसित किए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को भारत का प्रमुख स्पोर्ट्स हब बनाना है। खेल विभाग के नवाचार मंत्री सारंग ने बताया कि युवाओं को शासन की योजनाओं से जोड़ने हेतु ‘मेरा युवा मध्यप्रदेश’ पोर्टल को सशक्त किया जा रहा है, जिस पर विभिन्न विभागों की युवा केंद्रित योजनाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि ‘खेलो बढ़ो अभियान’ के माध्यम से विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं तथा युवाओं में खेलों के प्रति रुचि एवं सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान (MPYP) के अंतर्गत प्रदेश के सफल, सक्षम एवं प्रेरणादायी युवाओं को समाज के लिए मार्गदर्शक (मेंटोर) के रूप में विकसित किया जा रहा है। खेल विभाग की आगामी कार्ययोजना मंत्री सारंग ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस में स्पोर्ट्स कोटा लागू कर प्रतिवर्ष 10 सब-इंस्पेक्टर एवं 50 कांस्टेबल की नियुक्ति का प्रावधान किया जायेगा। मुख्यमंत्री खेल अधोसंरचना विकास योजना के अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चरणबद्ध रूप से इंडोर हॉल एवं आधुनिक खेल परिसरों का … Read more

दो वर्षों में सुदृढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पारदर्शिता और तकनीक पर फोकस, योजनाओं का किया विस्तार : खाद्य मंत्री राजपूत

योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी : खाद्य मंत्री राजपूत दो वर्षों में सुदृढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पारदर्शिता और तकनीक पर फोकस, योजनाओं का किया विस्तार भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण, किसान हित तथा गैस आपूर्ति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की गई हैं। विभाग द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। खाद्य मंत्री राजपूत राजधानी में विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियों को लेकर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 करोड़ 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। राशन वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम लागू किया गया, जिसके तहत हितग्राहियों को एसएमएस के माध्यम से राशन आगमन एवं वितरण की जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त 26 जनवरी एवं 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में पात्र हितग्राहियों की सूची का वाचन किया जा रहा है। ई-केवाईसी प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति की गई खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि विभाग द्वारा ई-केवाईसी प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति की गई है। प्रदेश में दो वर्ष में लगभग 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है। अब तक 4 करोड़ 97 लाख हितग्राहियों के ई-केवाईसी कराये जा चुके हैं। इस तरह से अब तक लगभग 93 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण हो चुके हैं। बायोमेट्रिक के साथ-साथ फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों एवं दिव्यांगजनों सहित लगभग 15 लाख हितग्राहियों को ई-केवाईसी से छूट प्रदान की गई है। साथ ही 14 लाख नए पात्र हितग्राहियों को जोड़कर पात्रता पर्ची जारी की गई है। वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना में नि:शुल्क राशन खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 39 हजार परिवार अन्य राज्यों में तथा लगभग 6 हजार परिवार अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 16 लाख परिवार प्रतिमाह अंतर-जिला पोर्टेबिलिटी का लाभ ले रहे हैं। वहीं जनजाति एवं पहुंचविहीन 89 गांवों में “आपका राशन आपके द्वार” योजना के माध्यम से घर-घर राशन पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री अन्नदूत योजना के अंतर्गत वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित कर राज्य स्तरीय कंट्रोल कमांड सेंटर से निगरानी की जा रही है। एलपीजी आपूर्ति के क्षेत्र में उज्ज्वला एवं गैर-उज्ज्वला योजनाओं के अंतर्गत प्रदेश की बहनों की 6 करोड़ 17 लाख गैस रिफिल कराई गईं, जिसमें 911 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइप के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। वेयरहाउसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने तीन मोबाइल ऐप विकसित खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि वेयरहाउसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा नमी मापक, फ्यूमिगेशन एवं निरीक्षण से संबंधित तीन मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जिससे अनाज भंडारण की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। किसान हित में विभाग द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान की खरीदी की गई। लगभग 28 लाख किसानों से फसल खरीदी कर 51 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गेहूं की खरीदी में 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया। सत्यापन एवं निरीक्षण से 49 करोड़ से अधिक का राजस्व अर्जित खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि नाप-तौल विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में सत्यापन एवं निरीक्षण के माध्यम से 49 करोड़ 14 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 11 हजार 700 प्रकरण पंजीबद्ध कर लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपये की दंड राशि वसूल की गई। उपभोक्ता विवादों के त्वरित निराकरण के लिए उपभोक्ता आयोगों का कंप्यूटरीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दो वर्षों में 3 लाख 7 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभाग द्वारा आगामी अवधि में राशन दुकानों को मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित करने, सॉफ्टवेयर सिस्टम के एकीकरण, उन्नत तकनीक से राशन वितरण तथा सिंहस्थ 2028 के लिए मेला क्षेत्र में राशन एवं गैस आपूर्ति की विस्तृत व्यवस्था किए जाने की कार्य योजना भी तैयार की गई है।  

NGT ने लगाया ब्रेक: भोपाल अयोध्या बायपास पर अब नहीं कटेंगे पेड़

भोपाल राजधानी भोपाल के अयोध्या बायपास चौड़ीकरण के लिए हरे पेड़ों की कटाई के खिलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल( NGT) ने बुधवार को पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है.   बायपास चौड़ीकरण के लिए कुल 8 हजार पेड़ों को काटा जाना था. रोक के बाद प्रोजेक्ट में खटाई खटाई में पड़ सकता है..  मंगलवार 23 दिसम्बर से इन पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई थी, लेकिन इसके अगले ही दिन यानी आज 24 दिसम्बर बुधवार को एनजीटी ने पेड़ों की कटाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है. हालांकि एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि सिर्फ पेड़ कटाई पर रोक लगाई गई है, लेकिन संबंधित एजेंसी सड़क निर्माण का कार्य जारी रख सकता है. इसके लिए पेड़ों के साथ छेड़छाड़ न की जाए. इसलिए लगाई कटाई में रोक भोपाल में 10 लेन सड़क के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए एनजीटी में याचिका लगाने वाले नितिन सक्सेना ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण  (एनएचएआई) द्वारा सड़क निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई तो शुरू कर दी गई, लेकिन इसके लिए तय मानकों का पालन नहीं किया गया. शहर में इसके पहले भी बीआरटीएस, स्मार्ट सिटी, कोलार सिक्सलेन और मेट्रो समेत अन्य प्रोजेक्ट के लिए लाखों पेड़ों की बलि चढ़ चुकी है. संबंधित निर्माण एजेंसियों ने भी पेड़ कटने के बाद उसकी भरपाई के लिए पौधारोपण का दावा किया था, लेकिन हकीकत सबके सामने है. 8 जनवरी तक रोक याचिकाकर्ता के वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि पूर्व में दिए गए एनजीटी के आदेश के अनुसार वृक्षों की कटाई की वैकल्पिक योजना पर विचार करने के लिए कोई केंद्रीय रूप से सशक्त समिति गठित नहीं की गई है, जिससे कम संख्या में वृक्षों की कटाई आवश्यक हो सके. न ही काटे गए वृक्षों की क्षतिपूर्ति और रोपित वृक्षों के 5 वर्ष तक जीवित रहने के लिए इस न्यायाधिकरण द्वारा निर्देशित विधि के अनुसार क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के संबंध में कोई निर्णय लिया गया है. अयोध्या बायपास क्षेत्र में बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को सॉ कटर से काटा गया था. स्थानीय लोगों ने कहा कि यह क्षेत्र शहर के लिए ग्रीन लंग की तरह काम करता था. अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट से जुड़ा मामला पहले से ही एनजीटी में विचाराधीन था. इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई को मंजूरी देना कई सवाल खड़े करता है. नियमों के मुताबिक, एनजीटी में मामला लंबित होने की स्थिति में किसी भी तरह की बड़ी पर्यावरणीय गतिविधि पर रोक लगनी चाहिए. इतनी जल्दी कैसे मिली अनुमति? सूत्रों के अनुसार, 12 दिसंबर को स्टेट इम्पावरमेंट कमेटी की बैठक हुई और उसी दिन या बेहद कम समय में एनएचएआई को 7,881 पेड़ काटने की हरी झंडी दे दी गई. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अनुमति देने से पहले विस्तृत पर्यावरणीय आकलन और जनसुनवाई जरूरी होती है. खटाई में पड़ सकता है 16 किलोमीटर लंबा 10 लेन वाला प्रोजेक्ट  गौरतलब है एनजीटी द्वारा हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से करीब 16 किलोमीटर लंबे 10 लेन वाला अयोध्या बायपास चौड़ीकरण प्रोजेक्ट खटाई में पड़ सकता है. हालांकि बिना हरे पेड़ों के काटे सड़क चौड़ीकरण का काम बदस्तूर जारी रहेगा. हालांकि एनजीटी ने सुनवाई के दौरान बड़े ही सख्त अंदाज में कहा है कि, नियम पहले, प्रोजेक्ट बाद में होता रहेगा.  हरे पेड़ों की कटाई ने वृक्ष संरक्षण कानून पर उठा दिए सवाल रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या बाइपास चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित 8000 हरे पेड़ों की कटाई के फैसले ने वृक्ष संरक्षण कानून पर भी सवाल उठा दिए हैं. बायपास चौड़ीकरण के लिए 8000 हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए एनजीटी में अपनी टिप्पणी में प्रतिपूरक वनीकरण पर भी सरकार से जवाब मांगा और कहा है कि विकल्पों पर भी विचार जरूरी है.  रोक के बावजूद बिना पेड़ काटे चलता रहेगा सड़क का काम NGT ने बायपास चौड़ीकरण के लिए हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक एक भी पेड़ नहीं कटेगा. इससे 16 किमी लंबे 10 लेन वाला बड़ा प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में आ गया है. एनजीटी के आदेश को मोहन सरकार के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है.  प्रतिपूरक वृक्षारोपण पर सवाल एनएचएआई की ओर से दावा किया गया है कि पेड़ों की कटाई के बदले प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया जाएगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या नए लगाए जाने वाले पौधे उसी क्षेत्र में, उसी संख्या और उसी जैव विविधता के होंगे? अनुभव बताता है कि कागजों में दिखाया गया वृक्षारोपण ज़मीनी हकीकत में अक्सर नजर नहीं आता. हाईकोर्ट और नियमों का हवाला पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे पहले भी हाईकोर्ट और एनजीटी कई मामलों में साफ कर चुके हैं कि विकास कार्यों के नाम पर अंधाधुंध पेड़ काटना स्वीकार्य नहीं है. सड़क चौड़ीकरण के विकल्प तलाशे जाने चाहिए थे, लेकिन सबसे आसान रास्ता हरियाली खत्म करना चुना गया.

भोपाल प्रशासन का कड़ा कदम: चाइनीज मांझा पर पूर्ण प्रतिबंध, कानून तोड़ने वालों के लिए सजा

भोपाल पतंगबाजी के नाम पर हो रही मौतों और गंभीर हादसों को देखते हुए भोपाल पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत सख्त आदेश जारी करते हुए भोपाल नगर सीमा में चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। मांझा पक्षियों के लिए जानलेवा पुलिस के अनुसार, चाइनीज मांझा पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। कई बार पतंग उड़ाने के दौरान पक्षी इसमें उलझकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और कई मामलों में उनकी मौके पर ही मौत हो जाती है। इतना ही नहीं, सड़क पर चलने वाले राहगीर और दोपहिया वाहन चालक भी चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। मांझे की अत्यधिक मजबूती और उस पर चिपका कांच इन हादसों की बड़ी वजह है। तुरंत प्रभाव से लागू हुआ चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर बैन  रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को भोपालपुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और खरीद के खिलाफ एक आदेश किया है और यह आदेश तुरंत प्रभाव से राजधानी में लागू हो गया है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 (2) के तहत jकार्रवाई होगी. राजधानी भोपाल में पूरी तरह से बैन हो गया चाइनीज मांझा गौरतलब है चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और खरीद पर लागू हुआ प्रतिबंध राजधानी भोपाल की सीमा में लागू है. पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किए गए आदेश में राजधानी भोपाल में पतंगबाजी में चाइनीज मांझे के उपयोग, बिक्री और भण्डारण को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है और इस्तेमाल करते पाए गए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई होगी. इसलिए लगाई गई रोक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले त्योहारों के दौरान पतंगबाजी की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आमजन की सुरक्षा, पशु-पक्षियों के जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कठोर कदम उठाया गया है। प्रतिबंध के तहत अब भोपाल में न तो चाइनीज मांझे का उपयोग किया जा सकेगा, न उसकी बिक्री होगी और न ही किसी तरह का भंडारण किया जा सकेगा। आदेश दो माह तक प्रभावी यह आदेश दो माह तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सजा और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे परंपरागत और सुरक्षित सूती मांझे का ही उपयोग करें। चाइनीज मांझे से दूरी बनाकर न सिर्फ कानून का पालन करें, बल्कि इंसान, पशु-पक्षियों और खुद की जान की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें।  आम नागरिकों से सुरक्षित मांझा उपयोग करने की गई अपील उल्लेखनीय है हर साल चाइनीज़ मांझे के इस्तेमाल से लोग गंभीर हादसे के शिकार होते हैं. चाइनीज मांझे से कई लोगों को जानलेवा चोटें भी आ चुकी हैं. प्रशासन ने दुकानदारों और आम नागरिकों से अपील की है कि वो सुरक्षित मांझे का ही उपयोग करें, और चाइनीज़ मांझे की बिक्री, इस्तेमाल और भंडारण करने वालों की सूचना तुरंत पुलिस को दें. पतंगबाजी में चाइनीज मांझा इस्तेमाल करना अपराध अब भोपाल में पतंग उड़ाने के लिए चाइनीज मांझे का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। जो भी व्यक्ति चाइनीज मांझे के साथ पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चाइनीज मांझे का बेचना, खरीदना, भंडारण करना तीनों ही कानूनन अपराध होंगे। दुकानदारों को भी सख्त चेतावनी दी गई है। सुरक्षा के लिए लिया गया फैसला भोपाल पुलिस ने यह फैसला पक्षियों, राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। हर साल चाइनीज मांझे से कई गंभीर हादसे होते हैं। पहले भी हो चुके हैं गंभीर हादसे चाइनीज मांझे से पहले कई लोगों को जानलेवा चोटें लग चुकी हैं। कुछ मामलों में लोगों की जान भी जा चुकी है, वहीं कई पक्षी भी घायल या मृत पाए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की अपील प्रशासन ने दुकानदारों, आम नागरिकों से अपील की है कि सिर्फ सुरक्षित मांझे का ही इस्तेमाल करें। अगर कहीं चाइनीज मांझा बिकता या इस्तेमाल होता दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।

विकसित भारत का कृषि मॉडल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से स्वस्थ जीवन की ओर

विशेष लेख विकसित भारत का कृषि मॉडल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और स्वस्थ जीवन राजेन्द्र शुक्ल भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विकास के उस मार्ग पर अग्रसर है, जहाँ आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक मूल्यों को समान महत्व दिया जा रहा है। इसी समग्र दृष्टि के अंतर्गत भारतीय कृषि को भी एक नए युग की ओर ले जाया जा रहा है। कृषि सदियों से हमारी सभ्यता की रीढ़ रही है। आधुनिक युग में रासायनिक उर्वरकों और सिंथेटिक कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता ने खेती की लागत बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, उसकी जलधारण क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप, हमारे भोजन की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत की समस्याओं का समाधान हमारी अपनी परंपराओं और ज्ञान प्रणाली में निहित है। इसी विचार से प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है, जो भारतीय कृषि की मूल आत्मा से जुड़ी हुई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कृषि को केवल उत्पादन के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्थिरता और आत्मनिर्भरता के व्यापक संदर्भ में देखा जाए। भारत की पारंपरिक कृषि व्यवस्था सह-अस्तित्व और संतुलन पर आधारित रही है, जिसमें गौमाता की भूमिका केंद्रीय रही है। गौ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता और पोषण सुरक्षा का आधार रही हैं। हमारे पूर्वज जानते थे कि गौवंश का संरक्षण सीधे मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ा है। गोबर और गोमूत्र से भूमि को पोषण मिलता है, सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और मिट्टी पुनः जीवंत होती है। स्वस्थ मिट्टी से प्राप्त अन्न अधिक पौष्टिक, सुरक्षित और मानव शरीर के अनुकूल होता है। प्राकृतिक खेती कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि में प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की भारतीय पद्धति है। वे इसे किसानों की लागत घटाने, आय बढ़ाने और उन्हें बाहरी निर्भरता से मुक्त करने का सशक्त माध्यम मानते हैं। साथ ही, यह देशवासियों को रसायन-मुक्त, विषरहित भोजन उपलब्ध कराने का मार्ग है। यही कारण है कि प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया है। प्राकृतिक खेती की कार्यप्रणाली सरल, स्वदेशी और प्रभावशाली है। इसमें गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि कृषि आदानों के उत्पादन के आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक इनपुट मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करते हैं और भूमि की उर्वरता को दीर्घकालिक रूप से बढ़ाते हैं। पलवार (मल्चिंग) जैसी तकनीकें मिट्टी की नमी बनाए रखती हैं, जल संरक्षण में सहायक होती हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से फसलों की रक्षा करती हैं। इन उपायों से खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे शून्य बजट प्राकृतिक खेती का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से संभव होता है। सहकारिता से समृद्धि और संस्थागत शक्ति प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके विजन 'सहकारिता से समृद्धि' के तहत, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को संगठित किया जा रहा है एवं किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाया जा रहा है ताकि छोटे किसानों को न केवल सस्ती दरों पर प्राकृतिक खाद-बीज मिल सकें, बल्कि उनके विषमुक्त उत्पादों को उचित बाजार और लाभकारी मूल्य भी प्राप्त हो सके। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और सहकारिता का मेल ही ग्रामीण समृद्धि का नया मार्ग है। प्राकृतिक खेती का महत्व केवल खेत तक सीमित नहीं है; इसका सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य और जीवनशैली से है। आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनका एक बड़ा कारण रासायनिक अवशेषों से युक्त भोजन है। प्राकृतिक खेती से प्राप्त शुद्ध और विषमुक्त अन्न पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा योग और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाना इसी समग्र स्वास्थ्य दृष्टि का हिस्सा है। योग, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या तभी पूर्ण लाभ देती है जब भोजन भी शुद्ध और प्राकृतिक हो। प्राकृतिक खेती, स्वस्थ भोजन और योग—तीनों मिलकर स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार करते हैं। प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का व्यावहारिक मंत्र—‘एक एकड़, एक मौसम’—किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। छोटे स्तर पर प्रयोग कर किसान बिना जोखिम उठाए परिणाम देख सकता है और फिर धीरे-धीरे विस्तार कर सकता है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, आदानों की उपलब्धता और बाजार से जोड़ने के लिए मजबूत संस्थागत समर्थन दिया जा रहा है। किसान उत्पादक संगठन (FPOs) इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक शक्ति प्राप्त हो रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि महिला किसान इस परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। इस संपूर्ण प्रयास में गौ-सेवा का स्थान केंद्रीय है। गौवंश का संरक्षण और संवर्धन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और सतत विकास सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम है। मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी की इस दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में प्राकृतिक खेती, गौ-संवर्धन और किसान कल्याण को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मिट्टी, किसान और उपभोक्ता—तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, भारतीय जीवनदृष्टि का पुनर्जागरण गौ-आधारित प्राकृतिक खेती केवल कृषि सुधार की पहल नहीं, बल्कि भारतीय जीवनदृष्टि का पुनर्जागरण है। गौमाता और मिट्टी की रक्षा के अपने सांस्कृतिक दायित्व को निभाते हुए, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भोजन, संतुलित जीवनशैली और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। यही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित, आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत के स्वप्न को साकार करने का सशक्त मार्ग है।