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एमपी ट्रांसको में रात्रिकालीन यार्ड निरीक्षण संस्कृति ने बचाया पॉवर ट्रांसफार्मर, टला बड़ा नुकसान

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में सब स्टेशनों एवं यार्डों के नियमित रात्रिकालीन निरीक्षण की व्यवस्था अब एक कार्यसंस्कृति का रूप ले चुकी है। इसी कार्यसंस्कृति के तहत नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा स्थित 132 केवी सबस्टेशन में रात्रि कालीन निरीक्षण के दौरान 40 एमवीए क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर में उत्पन्न हुई असामान्यता का समय रहते पता चल गया। इससे संभावित बुशिंग फेल्योर, उपकरण क्षति, दुर्घटना तथा विद्युत आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को टालते हुए एक बड़े आर्थिक नुकसान से बचाव किया जा सका। रात्रिकालीन निरीक्षण में मिली असामान्यता पिछले दिनों रात्रिकालीन निरीक्षण के दौरान आउटसोर्स सुरक्षा कर्मी आदर्श लावंशी ने 132 केवी सिवनी मालवा सब स्टेशन के 40 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर से असामान्य आवाज आते हुए सुनी। उन्होंने तत्काल ड्यूटी पर तैनात आउटसोर्स ऑपरेटर श्यामसुंदर गौर एवं नितिन कुमार गौर को इसकी जानकारी दी। तीनों कर्मियों ने स्थिति का सूक्ष्म निरीक्षण किया तथा मामले की गंभीरता को समझते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना दी। त्वरित कार्रवाई से टली बड़ी समस्या सूचना मिलते ही सहायक अभियंता बी.पी. द्विवेदी तथा कार्यपालन अभियंता (परीक्षण) लक्ष्मण आर्य ने अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश शांडिल्य के मार्गदर्शन में लोड डिस्पैच सेंटर से समन्वय स्थापित कर संबंधित पावर ट्रांसफार्मर का आपातकालीन शटडाउन कराया। इसके बाद परीक्षण एवं तकनीकी जांच की गई, जिसमें संबंधित बुशिंग के पैरामीटर असामान्य पाए गए। जांच के आधार पर बुशिंग को बदलने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। समय रहते टाला गया संभावित फेल्योर अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश शांडिल्य ने बताया कि यदि बुशिंग की इस असामान्यता का समय रहते पता नहीं चलता तो बुशिंग फेल्योर की स्थिति निर्मित हो सकती थी। ऐसी स्थिति में पावर ट्रांसफार्मर को गंभीर क्षति पहुंचने के साथ दुर्घटना, लंबे समय तक आउटेज तथा आर्थिक नुकसान की संभावना भी थी। उन्होंने कहा कि समय पर की गई रिपोर्टिंग और त्वरित तकनीकी कार्रवाई से संभावित फेल्योर, उपकरण क्षति, दुर्घटना एवं आर्थिक हानि को टाला जा सका। प्रबंध संचालक ने की सराहना मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि सबस्टेशनों में की जाने वाली नियमित रात्रिकालीन निगरानी एवं निरीक्षण व्यवस्था विद्युत प्रणाली की विश्वसनीयता तथा उपकरणों की सुरक्षा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने आउटसोर्स ऑपरेटर श्यामसुंदर गौर, नितिन कुमार गौर तथा सुरक्षा कर्मी आदर्श लावंशी की विवेक शीलता,सतर्कता एवं सजगता की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किए जाने के निर्देश दिए।  

वन विहार में जुड़े आवास, वन्य जीवन का विकास थीम के अनुरूप संरक्षण, जागरूकता जनभागीदारी पर हो रहे विविध कार्यक्रम

भोपाल राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 के अंतर्गत वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में वन्यजीव संरक्षण, जैव-विविधता, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह की थीम "जुड़े आवास, वन्यजीवन का विकास" निर्धारित की गई है। थीम के अनुरूप आयोजित गतिविधियों में वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवास के बीच संबंध, जैव-विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया जा रहा है। कार्यक्रमों में वनकर्मियों एवं उनके परिवारों के साथ विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। 4 अक्टूबर को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये। कार्यक्रम में वनकर्मियों एवं उनके परिवारों के लिए फैमिली वाइल्डलाइफ डे-वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत वनकर्मियों एवं उनके परिवारों को वन्यजीव सप्ताह की गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से फैमिली वाइल्डलाइफ डे का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य वनकर्मियों एवं उनके परिवारों के बीच वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता एवं सहभागिता को बढ़ावा देना तथा परिवार के सदस्यों को वन्यजीव एवं प्रकृत्ति संरक्षण से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस आयोजन में 15 परिवारों लगभग 60 प्रकृति प्रेमियों द्वारा सहभागिता की गई। कार्यक्रम में सम्मिलित सभी को एनीमल रेस्, गेम्स्, हेबीटेट एवं फूड चैन के माध्यम से रोचक जानकारी प्रदान की गई। विद्यालीयन एवं महाविद्यालीयन विद्यार्थियों हेतु 'मध्यप्रदेश के वन्यजीव विषय पर मेहंदी प्रतियोगिता-विद्यार्थियों में मध्यप्रदेश की वन्यजीव संपदा एवं जैव-विविधता के प्रति रुचि एवं जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से 'मध्यप्रदेश के वन्यजीव विषय पर मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों ने भाग लेकर वन्यजीवों, पक्षियों, वनस्पतियों एवं प्रकृति से संबंधित विषयों को अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया। मेहंदी प्रतियोगिता में कुल 55 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। विद्यालीयन एवं महाविद्यालीयन विद्यार्थियों हेतु मध्यप्रदेश के वन्यजीव' विषय पर पाम पेंटिंग प्रतियोगिता वन्यजीव संरक्षण के प्रति युवाओं एवं विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए 'मध्यप्रदेश के वन्यजीव विषय पर पाम पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने पेंटिंग के माध्यम से मध्यप्रदेश के वन्यजीवों, उनके आवास एवं प्रकृति संरक्षण से जुड़े संदेशों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। इस प्रतियोगिता में कुल 82 प्रतिभागियों ने भाग लिया। वन्यजीव पासपोर्ट' गतिविधि राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 के चौथे दिवत्त 'वन्यजीव पासपोर्ट' गतिविधि को आगंतुकों से उत्साहजनक प्रतिसाद प्राप्त हुआ। इस गतिविधि का प्रमुख उद्देश्य वन विहार आने वाले आगंतुकों को वन्यजीव संरक्षण की विभिन्न अवधारणाओं से परिचित कराना और उन्हें संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय सहभागी बनाना रहा। कुल 303 आगंतुकों ने वन्यजीव पासपोर्ट गतिविधि के लिए पंजीयन कराया। गतिविधि में निर्धारित सहभागिता पूरी करने वाले प्रतिभागियों में से 45 को 'वन्यजीव संरक्षण राजदूत' तथा 51 को 'वन्यजीव चैंपियन के रूप में मान्यता प्रदान की गई। आयोजन में संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान विजय कुमार सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक एवं वन विहार के अन्य अधिकारी / कर्मचारी उपस्थित रहे। 5 अक्टूबर की गतिविधियां राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न जागरूकता एवं सहभागिता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रकृति एवं वन्यजीवों के ऐसे पहलुओं से आमजन को परिचित कराने के उद्देश्य से अदृश्यों से मिलिए, प्रकृति पक्ष पर (खुला बर्ग) कार्यक्रम प्रातः 7:00 बजे से 9:00 बजे तक वन विहार स्थित विहार वीथिका में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के माध्यम से प्रकृति के सूक्ष्म एवं कम दिखाई देने वाले पक्षों के प्रति लोगों में जिज्ञासा एवं संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। विद्यालयीन विद्यार्थियों में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरणीय मुद्दों एवं मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व से जुड़े विषयों की समझ विकसित करने के उद्देश्य से "जुड़े आवास, वन्यजीवन का विकास' विषय पर 'वाईल्ड लाईफ मूट कोर्ट प्रातः 10.00 बजे से अपरान्ह 4.00 बजे तक विहार वीथिका में आयोजित किया जावेगा। मूट कोर्ट के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों पर तार्किक चिंतन अभिव्यक्ति एवं संवाद का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरणीय कानून एवं संरक्षण विषयों के प्रति रुचि उत्पन्न करना, वन्यजीव संरक्षण के प्रति तार्किक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना एवं सार्वजनिक अभिव्यक्ति एवं संवाद कौशल को बढ़ावा देना। साथ ही राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत मध्यप्रदेश के वन्यजीव विषय पर विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए 'रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन प्रातः 10:00 बजे से 11:30 बजे तक वन विहार स्थित विहार वीथिका में किया जाएगा। प्रतियोगिता में प्रतिभागी रंगों एवं पारंपरिक कला के माध्यम से मध्यप्रदेश के वन्यजीवों एवं जैव-विविधता को प्रस्तुत करेंगे। प्रतियोगिता का उद्देश्य रचनात्मक कला के माध्यम से विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा से परिचित कराना तथा वन्यजीव संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।

मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर संकोच दूर करना और व्यापक जागरूकता लाना बेहद आवश्यक: राज्यमंत्री गौर

भोपाल। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्ण गौर ने कहा कि मासिक धर्म महिलाओं एवं बेटियों के जीवन की एक अत्यंत स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, किंतु लंबे समय तक सामाजिक झिझक के कारण इस विषय पर खुलकर चर्चा न होने से अनेक किशोरियों और महिलाओं को सही समय पर स्वच्छता संबंधी आवश्यक जानकारी नहीं मिल पाती थी। स्वस्थ बेटी, जागरूक महिला और आत्मविश्वासी नारी ही समाज की वास्तविक प्रगति का आधार हैं।  स्वच्छता से स्वास्थ्य, स्वास्थ्य से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से महिला सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त होता है। इस संदेश को प्रत्येक जरूरतमंद बहन-बेटी तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। एक सक्षम बेटी, आत्मनिर्भर नारी और सशक्त मातृत्व ही हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं।" पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर भोपाल स्थित गोविंदपुरा क्षेत्र के रत्नागिरी चौराहा, आनंद नगर दशहरा मैदान में आयोजित विशाल सैनिटरी पैड वितरण समारोह को संबोधित कर रही थीं। कृष्णा सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में आयोजित जनहितकारी कार्यक्रम में राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने लगभग 2,000 महिलाओं को 3 महीने की अवधि के लिए उपयोगी नि:शुल्क सेनेटरी पैड का वितरण किया। उन्होंने कहा कि केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके सुरक्षित उपयोग, उचित निस्तारण तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने के संबंध में व्यापक जनजागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से बेटियों के साथ स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर सहज और खुलकर संवाद स्थापित करने का आह्वान किया। राज्यमंत्री गौर ने रेखांकित किया कि मध्यप्रदेश सरकार महिलाओं और बेटियों के सम्मान, उन्नति के अवसरों एवं मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। समाज सेवा की वास्तविक परिभाषा को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद तक स्वच्छता सामग्री पहुँचाना, बेटी के मन से झिझक दूर करना और उसे स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाना ही सच्ची जनसेवा है। उन्होंने संस्था के सदस्यों एवं सहयोगियों की इस अनुकरणीय पहल की प्रशंसा करते हुए प्रदेश की बेटियों के स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।  

Ayushman Scheme पर MP में बढ़ा विवाद, 8 अक्टूबर से इलाज बंद करने की चेतावनी; दिल्ली जाएंगे निजी डॉक्टर

भोपाल. मध्य प्रदेश के निजी अस्पतालों में आगामी 8 अक्टूबर से आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज पूरी तरह ठप हो जाएगा। योजना की भारी-भरकम बकाया राशि का भुगतान न होने और एनबीएचएस (एनबीएचएस) सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता के विरोध में प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन बहिष्कार का ऐलान किया है। इसके साथ ही मांगों की अनदेखी किए जाने पर 1000 एंबुलेंस के साथ दिल्ली कूच करने की चेतावनी भी दी गई है। डेढ़ से दो करोड़ रुपये प्रति अस्पताल बकाया इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( आईएमए) मध्य प्रदेश और यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन ( यूपीएचडीए) सहित विभिन्न अस्पताल संगठनों ने संयुक्त रूप से इस आंदोलन का शंखनाद किया है। राजधानी भोपाल के अधिकांश प्रमुख निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना के तहत औसतन 1.5 से 2 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से बकाया राशि न मिलने के कारण अस्पतालों का संचालन करना और कर्मचारियों का वेतन देना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – नागरिकों की सुविधा और द्रुत गति से नवीन जिलों का विकास शासन की प्राथमिकता

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पांढुर्णा सहित प्रदेश के नवीन जिलों के विकास, नागरिक सुविधाओं और जिलों का द्रुत गति से विकास शासन की प्राथमिकता है। यहां के युवाओं को उद्योगों और रोजगार से जोड़ने के लिए उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम बनाये जायेंगे। यहां पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की संभावनाओं को और बढ़ाएंगे। पांढुर्णा जिले के विकास में कोई भी बाधा नहीं आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को पांढुर्णा जिले में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में अध्यक्षता करते हुए समिति के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि पांढुर्णा जिले के नवीन निर्माण कार्यों की स्वीकृतियां लगातार जारी की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने हनुमान लोक के अगले चरण के निर्माण कार्यों में प्रगति की जानकारी प्राप्त की और तीव्र गति से कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बैठक में पांढुर्णा जिले के विकास और उपलब्धियों के बारे में बताया गया कि जिले में अभी तक 112 करोड़ रूपये के विकास कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं, जिनमें मुख्य रूप से सांदीपनि विद्यालय पांढुर्णा, सांदीपनि विद्यालय सौंसर, पुलिस कंट्रोल रूम पांढुर्णा और चमत्कारिक हनुमान मंदिर जामसांवली हनुमान लोक के प्रथम चरण का निर्माण कार्य शामिल है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा सांदीपनी प्राथमिक शाला पांढुर्णा को स्कूल सर्टिफिकेशन योजना के अंतर्गत गोल्ड अवॉर्ड प्रदान किया गया है। सांदीपनि विद्यालय सौंसर में 1654 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जिले में कुल 248 करोड़ रूपये की लागत के विकास कार्य निर्माणाधीन हैं, जिनमें विभिन्न शासकीय कार्यालयों, सड़क, पुल, नलजल योजनाओं के कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने लोकहित परिसर नवीन कलेक्टर कार्यालय भवन पांढुर्णा के प्रस्तावित योजना का अवलोकन किया। हनुमान लोक के लोकार्पण के बाद मासिक आय हुई दोगुनी बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री डॉ.यादव द्वारा हनुमान लोक के लोकार्पण के बाद से यहां की औसत मासिक आय 25 लाख रूपये से बढ़कर 60 लाख रूपये हो गई है। प्रथम चरण में हनुमान लोक की 57 दुकानों की नीलामी से लगभग 11 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है, प्राप्त आय का उपयोग मंदिर और श्रद्धालु सुविधाओं के विकास एवं रख – रखाव में किया जा रहा है। बैठक की शुरुआत में जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्य छिंदवाड़ा – पांढुर्णा सांसद विवेक बंटी साहू, पूर्व मंत्री नाना भाऊ मोहोड़, पांढुर्णा विधायक निलेश ऊईके और सौंसर विधायक विजय रेवनाथ चौरे ने मुख्यमंत्री डॉ.यादव का पौधा भेंट कर स्वागत किया। जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में अशासकीय सदस्यों के साथ ही जबलपुर संभाग के आयुक्त धनंजय सिंह, आईजी जबलपुर प्रमोद वर्मा, कलेक्टर नीरज वशिष्ठ, डीआईजी राकेश सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद्र परिहार, सीईओ जिला पंचायत अग्रिम कुमार सहित सभी विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे। विभागीय प्रदर्शनियों का किया अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांदीपनी स्कूल पांढुर्णा में आयोजित सेवा सेतु अभियान सरकार आपके द्वार शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल एवं प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। उन्होंने स्वरोजगार मूलक योजनाओं के हितग्राहियों द्वारा किए जा रहे कार्यों तथा स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे उत्पादों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने हितग्राहियों को हितलाभ वितरण के साथ मुख्यमंत्री स्कूटी योजना अंतर्गत कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्कूटी वितरित की। मुख्यमंत्री ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोरडोंगरी की छात्रा श्वेता साबले, विद्यार्थी दीपांशु पराड़कर तथा सांदीपनी स्कूल की छात्रा दिव्या करबे को स्कूटी प्रदान की और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन मंडल सामान्य के स्टॉल का अवलोकन करते हुए वहां प्रदर्शित आयुर्वेदिक एवं औषधीय उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वन एवं औषधीय संसाधनों से तैयार किए जा रहे उत्पादों को उपयोगी बताते हुए इनके बेहतर प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने ऊर्जा विभाग, ऊर्जा विकास निगम के स्टॉल अवलोकन के दौरान प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के स्टॉल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय उद्यमियों द्वारा तैयार किए जा रहे अचार, टोमेटो सॉस एवं विभिन्न प्रकार के मसालों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्टॉल पर महिला स्व-सहायता समूह की दीदियों द्वारा तैयार किए गए लिप्पन आर्ट, मोजेक आर्ट एवं टी-लाइट क्राफ्ट सहित अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का अवलोकन कर महिलाओं के हुनर की सराहना की। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जियों, अनाज तथा हल्दी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को वितरित किए हितलाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए गए। खेड़ीकला निवासी तुषार सुभाष काकड़े को ड्रिप इरिगेशन हेतु अनुदान राशि 1 लाख रुपए, भंदारगोंदी निवासी मोहन हिवसे को औजार अनुदान योजना तथा पुनम दुधकवरे, अश्विनी राजू सावकर, वैशाली हेमंत सौदागर, हर्षला वानखेड़े एवं किशोर दुधकवरे निवासी पांढुर्णा को प्रधानमंत्री श्रम योगी पेंशन योजना का लाभ प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रमेश कोहले एवं सुरेश वघाले निवासी पांढुर्णा को वृद्धा पेंशन स्वीकृति, पांढुर्णा निवासी मनिषा बारंगे को दिव्यांग पेंशन योजना, कुरेशा बी को श्रवण यंत्र प्रदान किया गया। पांढुर्णा निवासी योगिता तायवाडे को व्हीलचेयर एवं ब्रेलीकेट, पांढुर्णा निवासी ओम प्रकाश मानकर एवं अशोक शहगल को प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 का लाभ मिला। पांढुर्णा निवासी मंदा वानखड़े, पूजा योगेश, अपूर्वा ठोमेरे एवं तरुण ठोमेरे को खाद्यान्न पात्रता पर्ची प्रदान की गई। पिपलपानी निवासी विजेश साहेबराव भादे को बीआरसी योजना के तहत बायो रिसोर्स सेंटर का लाभ मिला, पार्वती तिवारी एवं मनोहर धारपुरे निवासी पांढुर्णा को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने वृद्धजनों का किया सम्मान, बच्चों को दुलारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पांढुर्णा जिले में सेवा मेरा योगदान एवं सेवा सेतु अभियान में सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सांदीपनि स्कूल, पांढुर्णा में “हमारे वृद्ध, हमारा स्वाभिमान” एवं “हमारे बच्चे, हमारा स्वाभिमान” थीम पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित वृद्धजनों का शॉल, श्रीफल से सम्मान करते हुए उन्हें फलों की टोकरी भेंट की। उन्होंने वृद्धजनों से आत्मीय संवाद कर उनका कुशलक्षेम जाना। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के बच्चों से भी आत्मीय भेंट की। उन्होंने बच्चों को ड्रॉइंग किट, मिठाइयां एवं चॉकलेट वितरित कीं। उन्होंने बच्चों से … Read 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सीएम यूथ कॉन्क्लेव–2026: मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे 20 हजार युवाओं से सीधा संवाद

भोपाल। प्रदेश की युवा शक्ति की प्रतिभा, आकांक्षाओं और नवाचार को नई संभावनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में सीएम यूथ कॉन्क्लेव–2026 का आयोजन 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जाएगा। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने लाल परेड मैदान में कार्यक्रम स्थल, प्रदर्शनी कक्षों सहित आयोजन से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने तैयारियों की प्रगति की जानकारी लेते हुए आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने तथा युवाओं की सुविधा और कार्यक्रम की सुव्यवस्थित संचालन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन एवं आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे। कॉन्क्लेव में रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान तथा उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष फोकस रहेगा। विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और नवोदित उद्यमों की सहभागिता से युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार की बदलती आवश्यकताओं और उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी मिलेगी। 17 विभागों और विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता आयोजन में 17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विभाग अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं और गतिविधियों से युवाओं को परिचित कराएंगे। मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर एवं सेडमैप द्वारा स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से संबंधित गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी। 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्षों में दिखेगी संभावनाओं की तस्वीर कॉन्क्लेव में विभागों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और नवोदित उद्यमों के 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। इनमें रोजगार, प्रशिक्षण, कॅरियर, उद्यमिता, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और शासकीय योजनाओं से संबंधित गतिविधियां प्रदर्शित की जाएंगी। विश्वविद्यालयों द्वारा शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, कॅरियर मार्गदर्शन और ड्रोन प्रौद्योगिकी सहित भविष्य की आवश्यकताओं से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी। विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता तक मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से विभिन्न नवोदित उद्यम अपने उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे। युवा इन नवाचारों के माध्यम से नए विचारों को उत्पाद एवं उद्यम में बदलने की प्रक्रिया को समझ सकेंगे। इससे उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित करने और नए विचारों पर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। उभरती प्रौद्योगिकियों पर रहेगा विशेष जोर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी, अर्धचालक प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत वाहन (EV) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां कॉन्क्लेव के प्रमुख विषयों में शामिल होंगी। इन क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा। कॅरियर से साइबर सुरक्षा तक विविध विषयों पर मार्गदर्शन आयोजन में कॅरियर मार्गदर्शन, कौशल विकास, मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेषज्ञों एवं संबंधित विभागों द्वारा जानकारी दी जाएगी। पुलिस विभाग के माध्यम से महिला सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग, जन-सुरक्षा एवं युवा संवाद से जुड़े विषयों पर जागरूकता गतिविधियां भी होंगी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बढ़ाएंगी उत्साह युवा शक्ति के इस महोत्सव में संवाद और मार्गदर्शन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल और मुंबई के कबीर कैफे की सुरमयी प्रस्तुतियां कार्यक्रम में जोश, उमंग और उत्साह का संचार करेंगी। समर्थ युवा, सशक्त भारत सीएम यूथ कॉन्क्लेव–2026 युवाओं को संवाद, मार्गदर्शन और संभावनाओं से जोड़ने की व्यापक पहल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ 20 हजार युवाओं का संवाद और 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्षों में प्रदर्शित गतिविधियां उन्हें बदलते समय की आवश्यकताओं, कौशल और कॅरियर की नई दिशाओं से परिचित कराएंगी। युवा शक्ति की प्रतिभा, विचार और ऊर्जा को सही दिशा और अवसर प्रदान कर विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण को गति देना ही इस आयोजन का मूल उद्देश्य है।  

त्योहारी सीजन में बढ़ी ट्रेन सेवाएं, 3 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़े; यात्रियों को मिलेगी राहत

भोपाल. त्योहारों के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए रेलवे ने भोपाल मंडल होकर संचालित तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के फेरों का विस्तार किया है। इससे गुना, शिवपुरी, रुठियाई, चाचौड़ा-बीनागंज और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को अतिरिक्त ट्रेन विकल्प मिलेंगे। खासतौर पर दीपावली और छठ पूजा के दौरान लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। इंदौर-सूबेदारगंज स्पेशल (04170) अब 3 अक्टूबर से 28 नवंबर तक प्रत्येक शनिवार और मंगलवार चलेगी। वापसी में 04169 सूबेदारगंज-इंदौर स्पेशल 2 अक्टूबर से 27 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को संचालित होगी। ट्रेन रुठियाई, गुना और शिवपुरी होकर चलेगी।

प्रसूता की मौत से राजगढ़ में मचा बवाल, पूर्व विधायक-परिजनों ने जताया आक्रोश; जांच के आदेश

राजगढ़. प्रसव के बाद जिला अस्पताल में एक प्रसूता की मौत हो गई, जिसके बाद परिजन ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाए कि प्रसूता को न डॉक्टर ने देखा, न नर्स ने। जानकारी लगने के बाद एसडीएम, तहसीलदार व टीआई मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाया। उधर पूर्व विधायक बापूसिंह भी पहुंचे व काफी देर तक परिसर में धरने पर बैठे रहे। जानकारी के मुताबिक प्रसूता अमेरपुरा निवासी अमरीबाई पति दिनेश तंवर (19) को शनिवार रात को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद वह ठीक थी, लेकिन बाद में ब्लीडिंग होने लगी। स्टाफ ने परिजनों को बताया तो उन्होंने कहा की कपड़े बदल दो, लेकिन ब्लीडिंग नहीं रुकी। जब दोबारा स्टाफ से कहा तो उन्होंने सुनने से इंकार कर दिया। डॉक्टर व नर्स ने देखा तक नहीं। सास सहित परिजन रातभर स्टाफ से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिला। रविवार अलसुबह करीब 3 बजे प्रसूता ने दम तोड़ दिया। बच्चे को जन्म देने के बाद बिगड़ी तबीयत जानकारी के मुताबिक अमरीबाई को शनिवार रात को प्रसव लिए जिला अस्पताल लाया गया था। यह उसका पहला प्रसव था। आधी रात के बाद उसका सामान्य प्रसव हुआ और स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसे सामान्य वार्ड में भर्ती कर दिया गया। परिजन के मुताबिक कुछ देर बाद अमरीबाई को तेज रक्तस्राव शुरू हो गया। सास धापूबाई का आरोप है कि उन्होंने नर्सिंग स्टाफ को कई बार इसकी जानकारी दी, लेकिन उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया गया। हालत बिगड़ने के बाद स्टाफ सक्रिय हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सास धापूबाई ने ड्यूटी नर्स पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि रक्तस्राव के कारण बहू के कपड़े भीग रहे थे। नर्सिंग स्टाफ को स्थिति बताई, लेकिन उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। उल्टा मुझे डांटकर भगा दिया। कहा की 'खून ही तो बह रहा है। ' इस बात को लेकर महिला काफी आहत हुई लेकिन रिश्वत ले चुके नर्सिंग स्टाफ ने जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई। परिजन का आरोप है कि लगातार रक्तस्राव के बावजूद प्रसूता को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। नर्स बोली – 'बार-बार मत आना, मुझे सोने दो' प्रसूता की सास धापूबाई ने बताया की वह दो-तीन बार नर्सिंग स्टाफ को बता चुकी थीं कि बहू का रक्तस्राव बंद नहीं हो रहा है। लेकिन स्टॉफ सुबह देखने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। सास का आरोप है कि नर्स ने उन्हें बार-बार परेशान नहीं करने और वापस नहीं आने की बात कही। कहा की यहां बार बार मत आना, मुझे सोने दो। रुपए लेकर की सामान्य डिलिवरी हंगामे के दौरान परिजनो ने रुपए लेने के भी आरोप लगाए । उनका कहना है कि नर्स ने 1500 रुपए और सफाईकर्मी ने 500 रुपए मांगे। रुपए देने के बाद ही प्रसव कराया गया। परिजन ने बच्चे की स्थिति को लेकर भी प्रसव से पहले अलग-अलग बातें बताए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बच्चा टेढ़ा है, उल्टा है, गले में नाल निपटी हुई है, लेकिन जैसे ही रुपए दिए तो सब बहाने खत्म हो गए और सामान्य प्रसव करा दिया अस्पताल में हंगामा, पति रास्ते से लौटा घटना की जानकारी लगते ही पूर्व विधायक बापूसिंह तंवर व हेमराज कल्पोनी भी जिला अस्पताल जा पहुंचे थे। वह परिजनों के साथ अस्पताल में धरने पर बैठ गए। काफी देर तक परिजनों नाराज लोग हंगामा करते रहे। अस्पताल प्रबंधन पर भी लापरवाही के आरोप लगाते रहे। वह पीएम करने को तैयार नहीं थे, बाद में बमुश्किल प्रशासन की समझाइश के बाद मामला शांत हो सका। उधर अमरीबाई का पति दिनेश तंवर (21) मजदूरी के लिए जोधपुर जा रहा था। सामान्य प्रसव की जानकारी मिलने के बाद वह रात की बस से रवाना हो गया था। बाद में पत्नी की हालत बिगड़ने की सूचना मिली तो परिजन ने उसे रास्ते से वापस बुलाया। एसडीएम ने दिया जांच के निर्देश हंगामे की सूचना पर तहसीलदार विनीत गोयल और कोतवाली टीआई मंजू मखेनिया मौके पर पहुंचीं। परिजन एसडीएम को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद एसडीएम निधि भारद्वाज अस्पताल पहुंचीं व परिजन से चर्चा की। एसडीएम ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रेडक्रॉस से सहायता राशि देने की बात कही गई। आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। इसके बाद प्रसूता का पोस्टमॉर्टम कराया गया और शव परिजन को सौंप दिया गया।

ग्वालियर जिला अस्पताल में बिजली संकट से हड़कंप, 6 घंटे बंद रही बिजली; 7 ऑपरेशन टले

ग्वालियर. जिला अस्पताल मुरार में शनिवार को करीब छह घंटे बिजली गुल रहने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे ज्यादा असर ऑपरेशन, जांच और ब्लड बैंक पर पड़ा। नेत्र और सर्जरी विभाग में ऑपरेशन के लिए चिन्हित सात मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़े। इनमें नेत्र विभाग में चार और सर्जरी विभाग के तीन मरीज शामिल हैं। वहीं एक्स-रे और सीटी जांच भी घंटों बंद रही। जांच के लिए इंतजार कर रहे कई मरीज बिजली नहीं आने पर बिना जांच कराए ही वापस लौट गए। बिना बिजली मरीज रहे परेशान जनरेटर से सीटी जांच के लिए बिजली सप्लाई शुरू की गई, इसके बाद जांच हो सकीं। बिजली गुल होने के दौरान अस्पताल के ओपीडी हिस्से में जनरेटर से आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन अस्पताल के अन्य हिस्सों में बिजली नहीं होने से मरीज और उनके स्वजन परेशान होते रहे। आर्थोपेडिक विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल नजर आए। पंखे और कूलर बंद होने के कारण स्वजन हाथ के पंखे से मरीजों को हवा करते दिखाई दिए। ऑपरेशन के बाद मरीजों को इस वार्ड में शिफ्ट किया जाता है ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहा। ब्लड बैंक में तापमान नियंत्रण बिगड़ा बिजली गुल होने से ब्लड बैंक में भी तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था प्रभावित हुई। ब्लड खराब होने की आशंका को देखते हुए ब्लड बैंक प्रभारी ने अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद ब्लड बैंक के लिए आरएमओ डॉक्टर जेपीएन शर्मा, सहायक प्रबंधक डॉक्टर राजेश बिरथरिया ने जनरेटर से अस्थायी बिजली व्यवस्था कराई। हालांकि, इस दौरान रक्त लेने पहुंचे मरीजों के स्वजन को भी इंतजार करना पड़ा। रोजाना 150 एक्स-रे, छह घंटे बाद शुरू हुई जांच अस्पताल में ओपीडी के दौरान रोजाना करीब 150 एक्स-रे किए जाते हैं। शनिवार को बिजली गुल रहने के कारण एक्स-रे जांच करीब छह घंटे प्रभावित रही। बिजली बहाल होने के बाद ही एक्स-रे सहित अन्य जांच दोबारा शुरू हो सकीं।

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: जांच रिपोर्ट पर कांग्रेस भड़की, आंदोलन की दी चेतावनी

इंदौर. इंदौर के भागीरथपुरा में हुए दूषित पानी कांड को लेकर सियासत और संवेदनाओं का दौर तेज हो गया है। प्रशासन की बहुचर्चित जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद रविवार को कांग्रेस पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आई। सुबह 10 बजे से ही शहर कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता पीड़ित परिवारों का दर्द बांटने उनके बीच पहुंच गए। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह प्रभावितों की राय और उनके दर्द के आधार पर ही सरकार के खिलाफ एक बड़े और चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी। मृतक जीवनलाल के परिवार से मिले कांग्रेसी शुक्रवार रात को शहर कांग्रेस की अहम बैठक में यह तय हुआ था कि पार्टी का हर नेता सीधे पीड़ितों से जाकर मिलेगा। इसी कड़ी में रविवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में टीम ने घर-घर जाकर दस्तक दी। जनसंपर्क की शुरुआत सबसे पहले इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले जीवनलाल के घर से की गई। इसके बाद नेताओं ने भागीरथपुरा के अन्य प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात कर उनकी वर्तमान स्थिति, शिकायतें और प्रशासन की जांच रिपोर्ट को लेकर उनके मन की बात जानी। 30 साल की लापरवाही की जांच रिपोर्ट में खुली परतें भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से बीमारी और मौतों के मामले में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने व्यवस्था की लंबी चूक को उजागर किया है। बुधवार को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुई रिपोर्ट के मुताबिक, यह संकट किसी एक अधिकारी की गलती से पैदा नहीं हुआ, बल्कि करीब तीन दशक में सीवर और जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी कई खामियां, निगरानी की कमी, शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई न होना और पाइपलाइन बदलने में हुई लंबी देरी धीरे-धीरे जमा होती गईं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सीवर और पेयजल लाइनों की तकनीकी स्थिति से लेकर नगर निगम की निगरानी व्यवस्था और पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया तक कई स्तरों पर कमियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथपुरा में दूषित पानी का खतरा दिसंबर 2025 में अचानक पैदा नहीं हुआ था, बल्कि पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था में मौजूद तकनीकी जोखिम लंबे समय से बने हुए थे। कई जगह सीवर लाइन पानी की पाइपलाइन के ऊपर जांच में सामने आया कि भागीरथपुरा में सीवर नेटवर्क 1990 से 1995 के बीच और जलापूर्ति पाइपलाइन 1999 से 2004 के बीच बिछाई गई थी। कई स्थानों पर दोनों नेटवर्क समानांतर, जबकि कुछ जगह एक-दूसरे को क्रॉस कर रहे थे। आयोग ने पाया कि दोनों लाइनों के बीच निर्धारित दूरी भी कई स्थानों पर नहीं थी। कुछ जगह सीवर लाइन पेयजल पाइपलाइन के ऊपर तक थी। आयोग ने इस स्थिति को दूषित पानी के पेयजल नेटवर्क में प्रवेश के लिए गंभीर तकनीकी जोखिम माना है। यानी जिस नेटवर्क से लोगों के घरों तक पानी पहुंच रहा था, उसमें संक्रमण का खतरा पाइपलाइन बिछाए जाने के समय से ही मौजूद था। शिकायतें आती रहीं, व्यवस्था कमजोर रही आयोग के समक्ष अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बयानों में पाइपलाइन लीकेज, खराबी और पानी की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतों का उल्लेख हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, जलापूर्ति नेटवर्क की पर्याप्त मैपिंग, संवेदनशील स्थानों की पहचान, लीकेज की निगरानी और समय पर मरम्मत की व्यवस्था प्रभावी नहीं थी। आयोग ने इसे महज तकनीकी समस्या न मानते हुए संस्थागत स्तर की विफलता भी माना है। चार साल में पूरा हुआ पाइप बदलने का काम  पुरानी पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई, लेकिन टेंडर और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लगातार देरी होती रही। आयोग ने अलग-अलग चरणों में हुई देरी का ब्योरा भी रिपोर्ट में दर्ज किया है। पहले टेंडर में— टेंडर जारी करने में – 39 दिन की देरी एमआइसी स्तर पर निर्णय में – 63 दिन अनुबंध प्रक्रिया में करीब – 94 दिन काम पूरा करने की निर्धारित समयसीमा – मई 2024 वास्तविक पूर्णता – जनवरी 2026 आयोग के आकलन के मुताबिक, विभिन्न चरणों की देरी को मिलाकर असामान्य विलंब 859 दिन से अधिक रहा। रिपोर्ट में टेंडर शाखा, इंजीनियरिंग अधिकारियों, प्रशासनिक स्तर, पर्यवेक्षण व्यवस्था और ठेकेदार की भूमिका की अलग-अलग समीक्षा की गई है। 126 दिन बाद तय हुआ कि टेंडर फिर से होगा दूसरे टेंडर की वित्तीय बोली 22 अगस्त 2024 को खोली गई थी। इसके बाद दोबारा टेंडर कराने की सिफारिश 26 दिसंबर 2024 को की गई। यानी इस निर्णय तक पहुंचने में करीब 126 दिन लग गए। इसके बाद तीसरे टेंडर में भी प्रक्रिया तेज नहीं हुई। तकनीकी और वित्तीय बोली की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामला टेंडर समिति के समक्ष रखने में करीब 94 दिन लगे। इस तरह तीन टेंडर और सैकड़ों दिनों की प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद पाइपलाइन जनवरी 2026 में बदली जा सकी, जबकि मूल रूप से काम मई 2024 तक पूरा होना था। पुराने रिकॉर्ड नहीं मिले, जांच में आई मुश्किल जांच आयोग को पुराने सीवर और जलापूर्ति नेटवर्क से संबंधित मूल नक्शे, वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका, निरीक्षण रिकॉर्ड और पूर्णता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए जा सके। आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण यह तय करना मुश्किल रहा कि मूल निर्माण के दौरान किस स्तर पर और किस प्रकार की चूक हुई थी। कई अधिकारियों और महापौर परिषद को क्लीनचीट रिपोर्ट में तत्कालीन निगमायुक्त और वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा, तत्कालीन निगमायुक्त एवं वर्तमान पर्यटन विभाग के एमडी दिलीप यादव तथा तत्कालीन निगमायुक्त और वर्तमान सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल को क्लीनचीट दी गई है। इसके अलावा तत्कालीन अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा, अपर आयुक्त सिद्धार्थ जैन और अभिषेक गेहलोत को भी जांच में क्लीनचीट मिली है। आयोग के अनुसार, इन अधिकारियों के कार्यकाल में पानी की पाइपलाइन बिछाने के काम में कोई देरी सामने नहीं आई। महापौर और महापौर परिषद को भी आयोग ने क्लीनचीट दी है। दो अपर आयुक्त और इंजीनियर पर लापरवाही की टिप्पणी आयोग ने तत्कालीन अपर आयुक्त भव्या मित्तल और रोहित सिसोनिया को लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना है। वहीं, तत्कालीन नर्मदा प्रोजेक्ट प्रभारी कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर 2025 को रोहित सिसोनिया ने भागीरथपुरा के टेंडर के संबंध में संजीव श्रीवास्तव को चर्चा करने के लिए लिखा था, लेकिन इस पर 26 दिसंबर को चर्चा हुई। आयोग ने इसे करीब 72 दिन … Read more