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जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा, सीएम मोहन यादव ने प्रदेश में हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में जल जीवन मिशन की बुधवार को समीक्षा बैठक में कहा कि प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जल स्रोतों में किसी भी स्थिति में सीवरेज का दूषित जल न मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन मध्यप्रदेश इस मिशन को मार्च 2027 तक पूरा कर देश में मिसाल पेश करेगा। मिशन के संचालन और संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जल आपूर्ति कभी प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंच और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। पिछले दस वर्षों में जल संकट का सामना करने वाले गांवों की रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जल वितरण का समय पानी की उपलब्धता के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराया जाएगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन मिल चुके हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत है। वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य पूरा किया गया और 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। प्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने वाला पहला राज्य बन गया है और “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला है। एकल नल जल योजनाओं में 93 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है। डिजिटल मॉनिटरिंग, NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं और सौर-ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से जल जीवन मिशन को तकनीकी और ऊर्जा सुरक्षा के साथ संचालित किया जा रहा है। बैठक में बताया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। नए ग्राम, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों में जल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इस योजना के पूरा होने से मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश में अग्रणी राज्य बन सकेगा।  

मतदाता सूची में बड़ा बदलाव: SIR प्रक्रिया अंतिम चरण में, लाखों नाम हो सकते हैं डिलीट

भोपाल प्रदेश में मतदाताओं के गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन शत-प्रतिशत हो गया है। गुरुवार रात 12 बजे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो जाएगी। 16 दिसंबर को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा। इसमें प्रदेश भर के 30 से 35 लाख मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। इनमें मृत, स्थानांतरित, दो स्थान पर नाम वाले मतदाता शामिल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जिले के विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची से नाम अधिक कटने की संभावना है।   वहीं, जिनके गणना पत्रक तो जमा हो गए लेकिन आवश्यक जानकारी नहीं दी गई है, उन्हें रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस देकर दस्तावेज मांगे जाएंगे। एसआईआर में जो गणना पत्रक दिए गए, वे मतदाताओं को भरकर देने थे। इसमें वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका या उनके माता-पिता, दादा-दादी में से किसी एक के नाम की जानकारी भी देनी थी। जिन मतदाताओं ने वर्ष 2003 के एसआईआर के आधार पर जानकारी न देकर केवल हस्ताक्षर करके गणना पत्रक दिए हैं, उनके नाम तो प्रारूप सूची में आएंगे लेकिन उन्हें नोटिस जारी होंगे। ऐसे मतदाताओं की संख्या करीब 12 लाख है। चूंकि, गणना पत्रक सभी मतदाताओं को जारी किए गए हैं इसलिए जिन मतदाताओं ने एक से अधिक स्थान पर गणना पत्रक जमा किए हैं, उनके नाम केवल एक स्थान पर रहेंगे।   इंदौर में 1.94 लाख मतदाताओं का नहीं मिला 2003 का रिकॉर्ड, अब देने होंगे दस्तावेज भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य शहरी क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं के नाम अधिक कटेंगे क्योंकि यहां अपेक्षाकृत अधिक मतदाता रोजगार, पढ़ाई आदि कारणों से स्थानांतरित होते रहते हैं। मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की अलग से सूची बनेगी। यह संख्या 18 से 23 लाख हो सकती है। इनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं आएंगे। प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि बूथ लेवल एजेंटों से जो जानकारी प्राप्त हो रही है, उसके अनुसार सूची में ऐसे मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में दर्ज हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर दर्शाए पते पर रहते ही नहीं हैं। ऐसे सभी मतदाताओं के नाम सूची से हटेंगे। प्रारूप प्रकाशन के बाद बूथवार मतदाताओं का सत्यापन कराया जाएगा। इसके आधार पर दावा-आपत्ति होंगे। 16 दिसंबर को होगा प्रारंभिक प्रकाशन मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 16 दिसंबर को होगा। इसमें जो नाम शामिल नहीं होंगे, उन्हें विलोपित माना जाएगा। सूची के आधार पर 15 जनवरी, 2026 तक दावा-आपत्ति होंगे। सात फरवरी तक इनका निराकरण रजिस्ट्रीकरण अधिकारी करेंगे। प्रारूप सूची में नाम नहीं आया तो भी अवसर यदि किसी भी कारण से प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं आता है तो भी नाम जुड़वाने का अवसर रहेगा। इसके लिए दावा या आपत्ति की प्रक्रिया में भाग लेना होगा। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को निर्धारित पहचान पत्र बताने होंगे। इस आधार पर निर्णय होगा। एक नजर में 27 अक्टूबर, 2025 की स्थिति में मतदाता- 5,74,06,143 मतदान केंद्र- 65,014 गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन हुआ- 5,74,06,098

भोपाल मेट्रो सीमित सुविधाओं के साथ होगी लॉन्च, कई स्टेशन पर निर्माण जारी रहेगा

भोपाल लंबे इंतजार के बाद भोपाल मेट्रो का 21 दिसंबर को लोकार्पण किया जाएगा, लेकिन मेट्रो यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाएं आज भी नदादर है। जबकि मेट्रो प्रोजेक्ट की डीपीआर में यात्री सुविधाओं को शामिल किया गया। इनमें सबसे खास मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी और नेशनल कामन मोबिलिटी कार्ड जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं आज भी कागजों में कैद है। चौकाने वाली बात यह है कि जमीनी स्तर पर इन सुविधाओं को शुरू करने के लिए अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। मेट्रो स्टेशन के नीचे एंट्री-एग्जिट स्टेशन पर सिर्फ साइकिल डेक, ड्रॉप ऑफ, पिक पाइंट जैसी बेसिक सुविधाओं के साथ भोपाल मेट्रो को पटरियों पर दौड़ाया जाएगा। यह देखकर कहना गलत नहीं होगा कि एमपी मेट्रो प्रबंधन ने लोकार्पण को मजाक बना दिया है। जबकि यात्रियों सुविधाओं को इसलिए ध्यान दिया जाता है, ताकि शहर के नागरिक अधिक से अधिक मेट्रो का उपयोग कर सकें, लेकिन जब मेट्रो तक पहुंचने के लिए कनेक्टिविटी ही नहीं होगी तो यात्री मेट्रो स्टेशन तक पहुंचेंगे कैसे। इसका खामियाजा आने वाले दिनों में मेट्रो प्रबंधन को भुगतना पड़ेगा। मेट्रो चलेगी, लेकिन यात्रियों को नहीं मिलेंगी ये सुविधाएं लोकार्पण के साथ मेट्रो तो चलेगी, लेकिन मेट्रो यात्रियों को यह सुविधाएं पहले दिन से नहीं मिलेंगी। इनमें सबसे खास स्टेशन पर मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी के तहत आने वाली सुविधाएं हैं। जिनमें एलिवेटेड मेट्रो, आईटीपी, फीडर-बे, पार्किंग, बस-बे शामिल हैं। इन सुविधाओं के लिए मेट्रो यात्रियों को कम से कम दो से तीन महीने का इंतजार करना पड़ेगा। यह वह सुविधाएं हैं, मेट्रो स्टेशन से यात्रियों की कनेक्टिविटी को जोड़ती हैं । मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि एम्स मेट्रो स्टेशन पर पार्किंग के लिए जगह मिल गई है। जबकि आरकेएमपी मेट्रो स्टेशन पर रेलवे स्टेशन की पार्किंग का उपयोग करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। इसी तरह एमपी नगर में भी विकल्प देखे जा रहे हैं। बस इन्हीं सुविधाओं के साथ शुरू होगी मेट्रो लोकार्पण के बाद भोपाल मेट्रो बस इन्हीं सुविधाओं के साथ शुरू होगी। इनमें लिफ्ट, एस्केलेटर, सीढ़ी, एआइ सीसीटीवी, अत्याधुनिक प्रणाली, कोच में स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम, मैनुअल टिकट, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित स्थान पर स्वचालित दरवाजे, कोच में आपातकालीन संपर्क और आपातकालीन द्वार, पुरुष, महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडरों के लिए शौचालय, यात्री सूचना प्रदर्शन प्रणाली, साइनेज, आडियो अनाउंसमेंट, कस्टममेर केयर सेंटर, साइकिल डेक, ड्राप आफ और पिक पाइंट की सुविधाओं के साथ मेट्रो शुरू होगी। बाहरी निर्माण कार्य दो माह तक चलते रहेंगे मेट्रो स्टेशनों के नीचे व आसपास चल रहे काम आगामी दो माह तक चलते रहेंगे। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इन कामों के चलते मेट्रो के परिचालन में कोई दिक्कत नहीं आएगी। सभी स्टेशनों की गत दिवस धुलाई और सफाई का काम करवाया गया है।   एक बार में 750 यात्री कर सकेंगे यात्रा एम्स से सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक एक बार में 750 यात्री मेट्रो में यात्रा कर सकेंगे। तीन कोच की इस ट्रेन के प्रत्येक कोच की क्षमता 250 यात्रियों की है। फिलहाल तीन कोच की एक मेट्रो ही अप-डाउन करेगी। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर दो से तीन मेट्रो चलाई जा सकती हैं। इसके लिए मेट्रो प्रशासन तैयार है।

धरती ने बदली तकदीर: पन्ना के किसान को मिला 3.39 कैरेट का हीरा, कीमत करोड़ों में पहुंच सकती है

पन्ना किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है जो सब्र और लगन से काम करते हैं। लकवाग्रस्त किसान राजेन्द्र सिंह बुंदेला के साथ कुछ आज ऐसा ही हुआ है। वर्षों की मेहनत और आस्था का फल उन्हें कृष्णा कल्याणपुर पटी की उथली खदान में चमचमाते हुए 3.39 कैरेट के जैम्स क्वालिटी हीरे के रूप में मिला है। हीरे की क्या है कीमत? खजुराहो निवासी बुंदेला करीब डेढ़ साल पहले लकवे से पीड़ित हुए थे। ठीक होने के बाद, उन्होंने मेहनत न कर पाने के कारण हीरा कार्यालय से पट्टा बनवाकर खदान लगाई। ​इस हीरे की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी जा रही है।    पूरी राशि को हीरे की खोज में लगाएंगे राजेंद्र सिंह किसान बुंदेला इसे अपने ईष्ट भगवान जुगल किशोर जु की कृपा मानते हैं। उनका सपना है कि नीलामी से मिलने वाली पूरी राशि को वह फिर से हीरे की खोज में लगाएंगे ताकि हीरा कार्यालय में लगी बड़े हीरों की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर दर्ज हो सके। यह उनके लिए महज शुरुआत है। बुंदेला का यह विश्वास और जिद्द उन्हें सफलता की नई राह पर ले जा रहा है। उन्होंने दोपहर करीब ढाई बजे इस हीरे को हीरा कार्यालय में जमा किया।

भोपाल मेट्रो बस से सस्ती पड़ेगी! फ्री ट्रायल के बाद कम किराया, जानें कैसे बनेगा यह सबसे किफायती विकल्प

भोपाल  भोपाल में बनने जा रही मेट्रो सिर्फ शहर की रफ्तार ही नहीं बढ़ाने वाली, बल्कि जेब पर भी हल्की पड़ने वाली है. ऐसा पहली बार हो सकता है कि एयर-कंडीशन्ड मेट्रो, शहर की बसों से भी सस्ती साबित हो जाए वो भी सिर्फ शुरुआती ऑफर में नहीं, बल्कि आने वाले महीनों तक. 21 दिसंबर से मेट्रो की यात्री सेवा शुरू होने जा रही है, और शुरुआत होगी एक हफ्ते के फ्री ट्रायल राइड्स के साथ. उसके बाद किराया धीरे-धीरे तीन हफ्तों में 25%, 50% और 75% तक बढ़ेगा. यानी शुरुआत में बेहद कम दाम और आगे भी जेब पर ज्यादा दबाव नहीं. अब बात बसों की BCLL का बस नेटवर्क पिछले दो साल से लगभग आधा ही चल रहा है. 220 बसें स्वीकृत हैं, लेकिन सड़क पर सिर्फ 50 से 90 के बीच ही दौड़ पा रही हैं. नतीजा ये है कि पूरे शहर का फीडर नेटवर्क कमजोर पड़ गया है और कई रूट सीधे-सीधे मेट्रो को सपोर्ट भी नहीं कर पा रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई रूट पर डायरेक्ट बस ही नहीं मिलती जैसे सुभाष नगर से AIIMS भोपाल तक. TR-4B रूट तो सुभाष नगर डिपो से होकर जाता था, लेकिन करोंड रूट पर मेट्रो निर्माण की वजह से अब उसे डायवर्ट कर दिया गया है. बसें अब डिपो से गुजरती ही नहीं, बल्कि सीधे RoB पार करके बोर्ड ऑफिस/ISBT की तरफ चली जाती हैं. ऐसे में यात्रियों को बीच रास्ते में बस बदलनी पड़ती है, जिसका मतलब है दूसरा टिकट. अगर कोई यात्री AIIMS तक बस से जाना चाहे, तो लगभग 9 किमी की यात्रा में पहले 12 रुपये और फिर 9 रुपये देने पड़ते हैं यानी कुल 21 रुपये. इतना देकर भी पूरा सफर धीमा, भीड़भाड़ वाला और मौसम की मार झेलने वाला होगा. वहीं मेट्रो वही दूरी तेज़, स्मूथ और AC आराम में लगभग इतने ही या इससे कम किराये में तय करवा सकती है. यही वजह है कि मेट्रो लांच होते ही बस की तुलना में ज्यादा किफायती और प्रैक्टिकल विकल्प बनकर सामने आएगी. मेट्रो में अभी टोकन, बाद में कॉमन मोबिलिटी कार्ड शुरुआत में यात्रियों को फिजिकल टोकन लेने होंगे. स्टेशन में प्रवेश, कंकर्स पर टोकन लेना, सिक्योरिटी, रेल लेवल पर चढ़ना ये बेसिक प्रोसेस रहेगा. अभी स्मार्ट कार्ड या पास सिस्टम शुरू नहीं होगा. लेकिन जैसे ही मेट्रो का पूरा 16 किमी का करोंड AIIMS कॉरिडोर चालू होगा, कॉमन मोबिलिटी कार्ड लाया जाएगा. इससे मेट्रो और शहर की बस दोनों का किराया एक ही कार्ड से, कैशलेस तरीके से UPI से भी दे सकेंगे. MPMRCL जल्द ही किराया संरचना की आधिकारिक घोषणा करेगा, लेकिन फिलहाल संकेत हैं कि इंदौर मेट्रो की तरह 10 से 20 रुपये तक का किराया रखा जा सकता है. यात्रियों के लिए खास इंतज़ाम हर कोच में 4 सीटें महिलाओं के लिए और 2 सीटें दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित होंगी. यानी शुरुआत भले ही साधारण टोकन सिस्टम से हो, लेकिन आने वाले महीनों में भोपाल की मेट्रो यात्रा और भी स्मार्ट, तेज़ और सस्ती होने वाली है.

महाकालेश्वर मंदिर में ड्रेस कोड लागू, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए नया नियम प्रभावी

उज्जैन  उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में नए साल 2026 से एक बड़ा और व्यवस्था बदलने वाला नियम लागू हो गया है। मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि सभी पुजारी, पुरोहित और उनके प्रतिनिधियों को ड्रेस कोड का पालन करना होगा। उन्हें अपना आईडी प्रदर्शित करना होगा। यह नियम सुरक्षा, अनुशासन और उनकी स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने के लिए लागू किया जा रहा है। जानें क्यों उठाया ये कदम? बता दें कि पिछले कुछ समय से महाकाल मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। खासतौर पर त्यौहारों, विशेष अवसरों और सामान्य दिनों में भी उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ की वजह से कई बार सुरक्षा एजेंसी कर्मचारियों को पहचानना मुश्किल हो जाता था। कई बार गैर रजिस्टर्ड लोग भी खुद को मंदिर का सेवक या प्रतिनिधि बताकर मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर चुके हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए मंदिर समिति अब सख्त व्यवस्था लागू कर रही है। किस पर लागू होगा ये नया नियम ड्रेस कोड का ये नया नियम केवल मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों समेत उनके प्रतिनिधियों और मंदिर सेवकों के लिए ही लागू किया जा रहा है। -16 रजिस्टर्ड पुजारी – 22 पुरोहित – 45 प्रतिनिधि (इनमें एजेंट/सहयोगी भी शामिल) कैसी होगी ड्रेस मंदिर प्रशासन एक मानक पोशाक तय कर रहा है। जिसमें रंग, डिजाइन और पहनने का तरीका एकदम समान होगा। ताकि भीड़ में भी इन्हें तुरंत पहचाना जा सके। ये ड्रेस इनकी परम्परा से मेल खाती हो, इसका विशेष ध्यान रखते हुए ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। ID कार्ड भी अनिवार्य -आईडी कार्ड मंदिर प्रशासन की ओर से जारी किए जाएंगे -ताकि अधिकृत व्यक्तियों की पहचान आसान हो सके -फर्जी प्रतिनिधियों पर लगेगी रोक – सुरक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी कदम यहां करें महाकाल भस्म आरती के दर्शन जानें क्या कहती है मंदिर समिति? मामले में महाकालेश्वर उज्जैन मंदिर समिति सदस्यों का कहना है कि महाकाल मंदिर की गरिमा, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाने की तैयारी की है। नए साल में हर पुजारी, पुरोहित तय नियम में ही सेवा दे पाएगा। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बुंदेलखंड की तस्वीर बदलेगी, 76 किमी लंबा फोरलेन और 42 जंक्शन से होगा विकास का नया युग

 खजुराहो बुंदेलखंड विश्व प्रसिद्ध खजुराहो की वास्तुकला, मंदिरों और मूर्तियों की नक्काशी के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। दूसरी ओर सिंचाई सुविधाओं, उद्योगों की कमी से रोजगार के अवसरों का भी अभाव है। अब बुंदेलखंड का वैभव और बढ़ेगा। युवाओं को रोजगार देने वाला बनेगा। बुंदेलखंड के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई। सागर के मसवासी ग्रंट में औद्योगिक क्षेत्र को विशेष औद्योगिक पैकेज के तहत विकसित किया जाएगा। 24,240 करोड़ का संभावित निवेश आएगा। नौरादेही टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाया जाएगा। बुंदेलखंड वीरों-हीरों की धरती: सीएम छतरपुर. सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों को 1857 करोड़ की 31वीं किस्त जारी की। योजना के तहत अब तक 46500 करोड़ रुपए बहनों के खातों में भेजे जा चुके हैं। लाड़ली बहना सम्मेलन राजनगर में हुआ। संबोधन में सीएम ने कहा, बुंदेलखंड हीरों और महावीरों की पवित्र धरती है। क्षेत्र की गरिमा और गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर – मसवासी ग्रंट में उद्योगों की स्थापना से 29 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। एक रुपए प्रति वर्गमीटर की दर पर निवेशकों को जमीन दी जाएगी। विकास शुल्क चुकाने के लिए 20 समान वार्षिक किस्तों की सुविधा मिलेगी। – सागर से दमोह के बीच फोरलेन पर 13 अंडरपास, तीन बड़े पुल, 9 मध्यम पुल, एक आरओबी, 13 बड़े जंक्शन और 42 मध्यम जंक्शन बनाए जाएंगे। -भू-अर्जन एवं अन्य कार्यों के लिए 323.41 करोड़ का भुगतान राज्य बजट से होगा। – एमपी के दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेज के लिए 990 नियमित और 615 आउटसोर्स कर्मी मिलेंगे। प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में 330 नियमित और 205 व्यक्तियों को आउटसोर्स पर रखा जाएगा। – दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना 165 करोड़ 6 लाख की होगी। 17 गांवों का 3600 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।

इंदौर में रियल एस्टेट में आया बड़ा उछाल, नवंबर में 43% अधिक रजिस्ट्री, पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन

इंदौर  मध्य प्रदेश का आर्थिक शहर इंदौर अब रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर जिले में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पिछले साल की तुलना में 43 प्रतिशत तक बढ़ गया। शहर के चारों उप पंजीयन कार्यालयों में यह तेजी साफ नजर आई, जिनमें सबसे ज्यादा उछाल इंदौर-4 में दर्ज किया गया। कुल मिलाकर अप्रेल से नवंबर 2025 तक जिले में पिछले साल की तुलना में 1091 रजिस्ट्रियां ज्यादा हुई हैं। नवंबर महीने में जिले में कुल 14,140 संपत्तियों का पंजीयन हुआ, जबकि नवंबर 2024 में यह संख्या 9905 थीं। इसमें इंदौर-1 में पिछले साल की तुलना में 1262 अधिक रजिस्ट्रियां हुईं। इंदौर-2 में 822, इंदौर-3 में 934 और इंदौर-4 में रिकॉर्ड 1225 रजिस्ट्रियों का उछाल देखने को मिला। यह रुझान बताता है कि खरीदारों का भरोसा अब भी मजबूत है और बाजार की गति तेज होती जा रही है। इंदौर 2, 3 और 4 में खरीद-बिक्री बढ़ी अप्रेल से नवंबर की अवधि में जिले में कुल 1,12,588 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 1,11,497 थी। इंदौर-2, इंदौर-3 और इंदौर-4 क्षेत्रों में खरीद-बिक्री बढ़ी है, वहीं इंदौर-1 में कुछ गिरावट दर्ज की गई। बावजूद पूरे जिले में प्रॉपर्टी बाजार ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेषज्ञों ने बताई प्रॉपर्टी खरीद में तेजी की वजह इंदौर में प्रॉपर्टी खरीद में आई इस तेजी के कई कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में लगातार होती इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, नए मार्गों और रिंग रोड के विस्तार, मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति और सुदृढ़ होती कनेक्टिविटी ने रियल एस्टेट को मजबूती दी है। प्रॉपर्टी बाजार बढ़ने के कई और भी कारण 1- रोजगार, स्टार्टअप और आइटी कंपनियों में तेजी शहर में आइटी पार्क, स्टार्टअप इकॉनमी और मल्टीनेशनल कंपनियों की मौजूदगी ने युवाओं और प्रोफेशनल्स का आवागमन बढ़ाया है। इससे मकान, फ्लैट और कमर्शियल स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है। 2- लगातार विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर सुपर कॉरिडोर, रिंग रोड, बीआरटीएस, मेट्रो प्रोजेक्ट, नए फ्लाइओवर और कनेक्टिविटी में सुधार ने शहर को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। 3- सेफ और ग्रोथ-ओरिएंटेड सिटी की छवि स्वच्छता में लगातार देश का नंबर-1 शहर रहने से लोगों का विश्वास बढ़ा है। बाहर से आने वाले परिवार इंदौर में बसना पसंद कर रहे हैं, जिससे मकान और प्लॉट की खरीद बढ़ी है। 4- निवेशकों का भरोसा, रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ज्यादा शहर में प्रॉपर्टी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फिर भी मेट्रो शहरों की तुलना में सस्ती दरें मिलती हैं। यही कारण है कि लोग इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। 5- नई टाउनशिप, हाई-राइज और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की भरमार सुपर कॉरिडोर, पीथमपुर रोड, स्कीम नंबर 94, 114 और बायपास क्षेत्रों में बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट तेजी से विकसित हो रहे हैं। नई टाउनशिप्स की बढ़ती संख्या से लोगों को सुविधाजनक और प्रीमियम आवास विकल्प मिल रहे हैं।

मध्यप्रदेश में नए साल में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं, पावर जनरेशन कंपनी ने प्रस्तावित की 10% वृद्धि

भोपाल  मध्यप्रदेश में नए साल की शुरुआत बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का करंट लग सकता है। राज्य की पावर जनरेशन कंपनी ने मप्र विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक इजाफे का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। आयोग इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए जन सुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। नियामक आयोग जन सुनवाई के दौरान आम जनता और हितधारकों की आपत्तियाँ सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय देगा। फिलहाल प्रस्ताव ने उपभोक्ताओं में नए साल के बिलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कंपनी ने बढ़ोतरी को बताया अनिवार्य नियामक आयोग मुख्यालय में दायर याचिका में कंपनी ने दावा किया कि लगातार बढ़ रहे लाइन लॉस और वित्तीय दबाव के कारण दरों में संशोधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित बढ़ोतरी की सीमा 10% तक हो सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय जन सुनवाई के बाद ही होगा। 15 दिसंबर से हो सकती है सुनवाई  आयोग के सूत्रों का कहना है कि कंपनी के प्रस्ताव पर प्रारंभिक अध्ययन के बाद आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। पहली सुनवाई 15 दिसंबर को होने की संभावना है, हालांकि आयोग की ओर से इसका औपचारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। आठ महीने पहले ही बढ़े थे बिजली के दाम इस साल अप्रैल से ही उपभोक्ता पहले से बढ़े हुए टैरिफ का भुगतान कर रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष में कंपनियों ने 7.52% बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन आयोग ने केवल 3.46% वृद्धि की मंजूरी दी थी। यही कारण है कि घरेलू, गैर-घरेलू और कृषि श्रेणियों में प्रति यूनिट दरें कुछ पैसों की वृद्धि के साथ लागू हुईं और फिक्स चार्ज भी बढ़ाए गए। चुनावी वर्षों में मिली थी राहत पिछले दो वर्ष 2024 में लोकसभा और 2023 में विधानसभा चुनाव हुए, जिसके चलते आयोग ने दर बढ़ोतरी पर सख्ती दिखाई थी। 2024 में 3.86% बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले मात्र 0.7% और 2023 में 3.20% की तुलना में केवल 1.65% बढ़ोतरी को मंजूरी मिली थी।  प्रदेश में सहकारिता चुनाव भी प्रस्तावित हैं, ऐसे में राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आयोग बड़ी राहत देने की संभावना कम लग रही है। सूत्रों का अनुमान है कि नई दरें 4 से 6% की सीमा में तय की जा सकती हैं। इसके बाद भी उपभोक्ताओं के लिए नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। 

रणजीत लोक का निर्माण इंदौर में, महाकाल लोक जैसी भव्यता, 6 करोड़ से ज्यादा खर्च, सिंहस्थ से पहले होगा पूरा

इंदौर इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर का कायापलट होने जा रहा है। यहां रणजीत लोक बनाकर मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस पर कुल 6  करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्लान तैयार हो चुका है, टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने कहा- रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया कि रणजीत लोक तैयार होने के बाद श्रद्धालु मंदिर के पास बने बड़े मैदान से प्रवेश करेंगे। वहां से एक पाथ-वे के माध्यम से छोटी पार्किंग तक पहुंचेंगे। पाथ-वे में जिग-जैग पैटर्न पर रेलिंग लगाई जाएंगी। इनकी संख्या भीड़ के अनुसार घटाई या बढ़ाई जा सकेगी।इसके बाद श्रद्धालु दत्त मंदिर से होते हुए दर्शन की मुख्य लाइन में पहुंचेंगे। भगवान के दर्शन कर वहीं से वापस बाहर निकलेंगे। पाथ-वे की दीवारों पर रामायण और सुंदरकांड की झलक मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- यहां सभी तरह के मौसम के मुताबिक व्यवस्थाएं जुटाई जाएंगी ताकि सर्दी, गर्मी और बारिश में भक्तों को परेशानी न हो। बैठने के लिए नई बेंच लगेंगी। बाउंड्रीवाल भी बनाई जाएगी।25 फीट का पाथ-वे बनेगा, इसकी दीवारों पर पत्थरों से भगवान हनुमान से जुड़े दृश्य उकेरे जाएंगे। रामायण और सुंदरकांड को तस्वीरों में दर्शाया जाएगा। छत पर कशीदाकारी, बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी रोशनी रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। भक्त पाथ-वे के जरिए दर्शन करने जाएंगे। यहां एलईडी पर भगवान के लाइव दर्शन होंगे।स्मार्ट सिटी संभाल रहा निर्माण की जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते इसका काम शुरू किया जा चुका है। पांचवीं पीढ़ी संभाल रही पूजा-अर्चना का काम वर्तमान पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा स्व. पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई। इंदौर स्मार्ट सिटी के पास जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। परिसर में पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम बनेगा रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। 1960 में गर्डर-फर्शी से पक्का बनाया, 1992 में छत डाली मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। पं. व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई। व्यास के अनुसार, होलकर राजा जब भी युद्ध के लिए जाते थे तो यहां पूजा-हवन करते थे। विजय की कामना के साथ यहां आते और फिर युद्ध के लिए जाते थे इसलिए मंदिर का नाम रणजीत हनुमान पड़ा। उन्होंने कहा- पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर यहां रणजीत अष्टमी मनाई जाती है। सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकाली जाती है। दिनभर पूजा-अर्चना और विशेष आरती की जाती है। 21 लाख रुपए के रथ पर सवार होकर रणजीत हनुमान नगर भ्रमण करते हैं। महाकाल लोक के बाद अब मध्यप्रदेश में हनुमान लोक नजर आएगा। इसका निर्माण सौंसर के जाम सांवली में होगा। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड 314 करोड़ की लागत से करीब 30 एकड़ में इसका निर्माण करवा रहा है। उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर 6 फेज में हनुमान लोक कॉरिडोर का काम होगा। फर्स्ट फेज में 35 करोड़ की लागत से एंट्रेंस प्लाजा से हनुमान लोक तक का काम किया जाएगा। हर साल इसलिए निकलती है प्रभात फेरी पुजारी पं. दीपेश व्यास का कहना है कि सीताजी के हरण के बाद वानर राज सुग्रीव के आदेश पर वानर सेना उनका पता लगाने गई थी। हनुमान जी उनका पता लगाकर लौटे थे। यह खबर जब भगवान राम ने सुनी तो उन्होंने कहा कि हनुमान तुम रण को जीतकर आए हो। लंका को जलाकर आए हो इसलिए आज से मैं तुम्हें रणजीत नाम प्रदान करता हूं। इसके बाद वहां लाखों वानरों ने हनुमान जी को कंधे पर बैठाकर पूरे जंगल में परिभ्रमण कराया था। इसी के प्रतीकात्मक स्वरूप पौष अष्टमी पर यह यात्रा निकलती है।