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उप मुख्यमंत्री देवड़ा लखेरापुरा में व्यवसायियों के बीच पहुंचे

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि स्वदेशी अपनाओ अभियान विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम है। इस समय नवरात्रि चल रही है, दशहरा और दीपावली आने वाली है, हम सब का दायित्व है कि स्वदेशी अपनाएं  और भारत को समृद्ध बनाएं। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने यह बात रविवार को भोपाल के लखेरापुरा मार्केट के दुकानदारों के बीच जाकर कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का संलल्प है कि 2047 में हमारा देश विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आए और हमारा भारत देश विश्व गुरू के रूप में स्थापित हो। दुकानदारों को दिलाया स्वदेशी का संकल्प उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी संकल्प पत्र स्वयं भरा और दुकानदारों एवं ग्राहकों से भी अपील की कि वे भी स्वदेशी सामग्री क्रय-विक्रय का संकल्प लें। श्री देवड़ा ने उपस्थित दुकानदारों एवं उपभोक्ताओं को सामूहिक रूप से स्वदेशी अपनाने की शपथ भी दिलाई। घटी जीएसटी मिला उपहार, धन्यवाद मोदी सरकार उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने लखेरापुरा मार्केट में स्वदेशी अपनाओ अभियान के तहत स्थानीय व्यापारी बंधुओ से भेंट कर उन्हें अभियान के संबंध में जानकारी दी और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने ग्राहकों को भी जागरूक कर स्वदेशी वस्तुएं खरीदने वालों को प्रोत्साहित किया। स्वदेशी अपनाओ अभियान के तहत श्री देवड़ा ने कहा कि  "घटी जीएसटी मिला उपहार धन्यवाद मोदी सरकार" हम सभी स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों पर गर्व करें। श्री देवड़ा ने लखेरापुरा मार्केट में दौरा कर दुकानों में स्वदेशी अपनाओं के स्लोगन लिखे पोस्टर चिपकाए और अपने विचार साझा किए। 

राज्य निर्वाचन आयोग के कर्मचारियों का हुआ नेत्र परीक्षण

भोपाल राज्य निर्वाचन आयोग में गत दिनों नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में नेत्र चिकित्सक डॉ. गजेन्द्र चावला की टीम ने राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी-कर्मचारियों का नेत्र परीक्षण कर उन्हें उचित सलाह एवं मार्गदर्शन दिया। शिविर में आयोग के लगभग 80 कर्मचारियों का नेत्र परीक्षण किया गया।  

1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के लिए खुशखबरी, दिवाली बाद 1250 की जगह मिलेंगे 1500 रूपए हर माह

भोपाल   1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के लिए खुशखबरी है। अक्टूबर में योजना की 29वीं किस्त जारी की जाएगी । इसके तहत प्रत्येक लाड़ली बहन के खाते में 1250 रूपए पहुंचेंगे। इसी के साथ राशि में भी 250 रुपए की वृद्धि की जाएगी और भाईदूज से बहनों को 1500 रुपए प्रतिमाह मिलना शुरू हो जाएंगे।इसकी घोषणा खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की है।बता दे कि मोहन सरकार ने 12 सितंबर को 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 28वीं किश्त के लिए 1541 करोड़ और 31 लाख से अधिक बहनों को एलपीजी सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 48 करोड़ जारी कर किए गए थे ।योजना की शुरुआत के बाद से अब तक 41 हजार करोड़ की राशि लाड़ली बहनों को दी जा चुकी है। भाई दूज से लाड़ली बहनों को मिलेंगे 1500 हर माह शनिवार को एक कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए हमारे खजाने में धन की कोई कमी नहीं है। दीपावली की भाईदूज से लाड़ली बहनों को 1500 रुपए प्रतिमाह देंगे और हमारा संकल्प है कि धीरे-धीरे यह राशि बढ़ाकर 3 हजार रुपए प्रतिमाह कर देंगे। अगले तीन साल में 2028 तक 3000 रुपए बहनों के खाते में भेजने का लक्ष्य है। उम्मीद है कि नवंबर में मिलने वाली किस्त में 250 रुपए इजाफा कर 1500 रूपए दिए जा सकते है, क्योंकि 20-21 अक्टूबर को दिवाली है और 23 अक्टूबर को भाईदूज है, ऐसे में नंवबर की किस्त में बढ़ी हुई राशि का लाभ मिल सकता है। वर्तमान में लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250 रू     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से अगस्त 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 27 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 41 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

आमजनों से अभद्रता अस्वीकार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री के निर्देश पर मऊगंज के प्रभारी तहसीलदार निलंबित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनता के साथ संवेदना, सहानुभूति और मददगार के रूप में व्यवहार करना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है। लोक सेवकों द्वारा आमजनों से अभद्रता किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आमजन से अभद्र व्यवहार और बेहद अशिष्ट शब्दावली का प्रयोग करने पर मऊगंज जिले के प्रभारी तहसीलदार श्री वीरेन्द्र कुमार पटेल को निलंबित किया गया है।  उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में प्रभारी तहसीलदार श्री पटेल द्वारा एक व्यक्ति से किए गए अशोभनीय कृत्य के संदर्भ में यह कार्यवाही की गई है। मऊगंज जिले के कलेक्टर द्वारा प्रभारी तहसीलदार पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा के प्रतिवेदन पर कमिश्नर रीवा श्री बी.एस. जामोद द्वारा प्रभारी तहसीलदार, तहसील मऊगंज श्री पटेल को कदाचरण के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। 

सतत न्याय की पहल: इस शनिवार भी एमपी हाई कोर्ट में ताबड़तोड़ सुनवाई

जबलपुर हाई कोर्ट को चार लाख 82 हजार 627 कुल लंबित मुकदमों के बोझ से निजात दिलाने युद्ध स्तर पर प्रयास जारी है। इस अभियान के अंतर्गत निरंतर दूसरे शनिवार को 8 विशेष पीठों ने 296 प्रकरणों का निराकरण करने का आदर्श प्रस्तुत किया। 8 विशेष पीठों ने जमानत अर्जियों को सुना। शेष दो नियमित पीठों के समक्ष सर्विस व अवमानना के प्रकरण सुने गए। दरअसल, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के निर्देश पर इन विशेष पीठों का गठन किया गया है। शनिवार को आठ विशेष पीठों ने 866 जमानत के मामलों पर सुनवाई की। इनमें से से 296 मामले निराकृत कर दिए गए। वहीं, सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई कर रही दोनों बेंचों ने 41 मामलों का निराकरण किया। इस तरह एक दिन में ही 337 लंबित मामलों का पटाक्षेप कर दिया गया। जबकि पहले शनिवार को आठ विशेष बेंच में 864 मामले सुनवाई के लिए रखे गए थे, जिनमें से 350 प्रकरणों का निराकरण किया गया था। इन जजों ने सुनी जमानत अर्जियां जज – कुल आवेदन सुने – निराकृत न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा – 115 – 55 न्यायमूर्ति एमएस भट्टी – 149- 51 न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल- 138 – 33 न्यायमूर्ति दीपक खोत – 126 – 33 न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी – 103 – 33 न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे – 84- 32 न्यायमूर्ति रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन- 48- 14 न्यायमूर्ति बीपी शर्मा – 102 – 45 सर्विस मैटर्स के लिए बैठी ये बेंच जस्टिस डीडी बंसल- 92 – 04 जस्टिस विवेक जैन- 109- 37 कुल मामलों पर सुनवाई – 866 निराकृत मामले – 337 द्रुतगति से बढ़ रहे लंबित मामलों को गंभीरता से लिया गया हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन व सचिव परितोष त्रिवेदी के अनुसार उन्होंने मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा को बताया था कि मुख्यपीठ में इस वर्ष दायर की गई व लंबित जमानत अर्जियों का आंकड़ा तीन हजार के पास पहुंच गया है। सर्विस मैटर्स का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। इसको लेकर वकीलों में पिछले कुछ समय से असंतोष व्याप्त है। इस संबंध में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया था। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सचदेवा ने द्रुतगति से बढ़ रहे लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए नवीन व्यवस्था दे दी। विगत 20 सितंबर को जमानत के मामलों के लिए आठ विशेष बेंच गठित की थीं। इस बार दो बेंच सर्विस मैटर्स के लिए भी बैठीं। जैन ने कहा कि हाई कोर्ट की यह पहल सराहनीय है। इससे बड़ी संख्या में पक्षकारों को राहत मिली। सामान्य कार्य दिवसों की तरह इनमें पक्षकार, वकील, कर्मचारी व अधिकारी शामिल रहे। एक वर्ष में 50 हजार केस निपटाने का लक्ष्य उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चार लाख 82 हजार 627 केस लंबित हैं। इसमें 2,86,172 मामले सिविल और 1,96,455 क्रिमिनल के हैं। कुल क्रिमिनल मामलों में शून्य से 10 साल पुराने 1,34,524 केस, 11 से 25 साल पुराने 59,424 केस और 25 साल से भी ज्यादा पुराने केसों की संख्या 2,507 है। हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में तीन हजार मामले अकेले जमानत अर्जियों से जुड़े हैं, जो महीनों से लंबित हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर की तीनों पीठों में कुल 53 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या है, कार्यरत 43 हैं। अनुमान है कि 10 जजों की स्पेशल बेंच एक साल में 30 से 50 हजार से अधिक मामलों का निपटारा कर सकती है। सभी बेंचें एमसीआरसी यानी क्रिमिनल मामलों, आदेश, एडमिशन और अंतिम सुनवाई पर विचारण करेंगी।

सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत या नई चुनौती? अवकाश नियमों पर समीक्षा के लिए MP में कमेटी का गठन

भोपाल  मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को मिलने वाले अवकाश की व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव होने वाला है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह समिति सरकारी विभागों, निगम-मंडलों और अन्य संस्थाओं में वर्तमान में लागू सार्वजनिक, सामान्य और ऐच्छिक अवकाशों का विस्तार से अध्ययन करेगी। अध्ययन के बाद समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी और उसी के आधार पर भविष्य में अवकाश की नई सूची तय की जाएगी। सरकार का मानना है कि समय के साथ कर्मचारियों को मिलने वाली छुट्टियों की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो गई है ताकि इसे व्यावहारिक और संतुलित बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने दिए थे संकेत करीब एक माह पहले गणेश चतुर्थी से पहले आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि प्रदेश में कर्मचारियों को दिए जाने वाले सभी प्रकार के अवकाशों की नई समीक्षा की जाएं।   तीनों कैटेगरी का फिर से निर्धारण इसमें सामान्य अवकाश, अर्जित अवकाश और ऐच्छिक अवकाश तीनों कैटेगरी को शामिल किया जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से त्यौहारों के दिनों की छुट्टियों पर भी विचार किया जाए। उसी बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि गणेश चतुर्थी को प्रदेश में सामान्य अवकाश घोषित किया जाए। समिति का किया गया गठन मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने चार सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति का काम है कि वह प्रदेश में छुट्टियों की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करें और अपनी सिफारिशें सरकार को दें। इस बार अन्य विभाग भी शामिल पहले यह जिम्मेदारी केवल सामान्य प्रशासन विभाग पर ही होती थी, लेकिन इस बार सरकार ने फैसला किया है कि अन्य अहम विभागों को भी इसमें शामिल किया जाए ताकि अवकाश की सूची पर एक संतुलित और सर्वसम्मत राय सामने आ सके। धार्मिक आधार पर भी होगी समीक्षा नई समिति यह भी देखेगी कि अलग-अलग वर्गों और धर्मों से जुड़े त्योहारों को ध्यान में रखकर अवकाश किस प्रकार तय किए जाएं। माना जा रहा है कि दीपावली, नवरात्र, ईद और क्रिसमस जैसे बड़े त्यौहारों पर सामान्य अवकाश बनाए रखने के साथ-साथ अन्य त्यौहारों की भी समीक्षा की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी समुदाय या वर्ग के साथ पक्षपात न हो और सभी को बराबरी से अवसर मिले। कौन हैं समिति में शामिल अधिकारी गठित समिति में चार विभागों के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसमें समिति के समन्वयक की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को दी गई है। यह जिम्मेदारी इस समय संजय कुमार शुक्ल निभा रहे हैं। इसके अलावा गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी और राजस्व विभाग से प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल को समिति का सदस्य बनाया गया है। पहले सामान्य प्रशासन विभाग की थी जिम्मेदारी अब तक अवकाशों की घोषणा और समीक्षा का काम केवल सामान्य प्रशासन विभाग तक सीमित रहता था। वहीं इस बार सरकार ने निर्णय लिया है कि इस प्रक्रिया में अन्य महत्वपूर्ण विभागों की भागीदारी भी होगी। इससे निर्णय अधिक व्यापक और पारदर्शी हो सकेगा। साथ ही अवकाशों की सूची तय करने में सभी पहलुओं पर संतुलित विचार किया जा सकेगा। नहीं रहेगी जरुरत से ज्यादा छुट्टियां राज्य सरकार चाहती है कि कर्मचारियों को मिलने वाली छुट्टियां न तो जरूरत से ज्यादा हों और न ही इतनी कम कि त्यौहारों और व्यक्तिगत अवसरों पर उन्हें परेशानी हो। संतुलित व्यवस्था से न केवल कर्मचारी संतुष्ट होंगे बल्कि विभागों की कार्यक्षमता भी प्रभावित नहीं होगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस पर अंतिम निर्णय लेगी और संभावना है कि आने वाले समय में प्रदेश के कर्मचारियों को एक नई अवकाश नीति देखने को मिलेगी।

IAS ट्रांसफर अपडेट: मध्य प्रदेश में बड़े फेरबदल, निधि सिंह को नई जिम्मेदारी

भोपाल प्रदेश सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के आठ अधिकारियों के बाद 18 आइएएस अधिकारियों के तबादले शनिवार देर रात कर दिए। इसमें अधिकतर अधिकारियों को जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी पदस्थ किया गया है। संयुक्त आयुक्त भू अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर निधि सिंह अब अपर श्रम आयुक्त इंदौर होंगी। वहीं, सृष्टि देशमुख गौड़ा को अपर कलेक्टर खंडवा और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सतना संजना जैन को अपर कलेक्टर मैहर बनाया है। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के उपसचिव जगदीश कुमार गोमे को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सिंगरौली, अपर मिशन संचालक राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल हरसिमरनप्रीत कौर को कटनी, अंजली जोसेफ जोनाथन उप सचिव तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार को हरदा, सोजान सिंह रावत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नर्मदापुरम को ग्वालियर, हिमांशु जैन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शिवपुरी को नर्मदापुरम, अपर कलेक्टर जबलपुर सर्जना यादव को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीहोर, वैशाली जैन अनुविभागीय अधिकारी हुजूर को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा अपर कलेक्टर रतलाम, दिव्यांशु चौधरी अनुविभागीय अधिकारी डबरा को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा अपर कलेक्टर डिंडौरी। सृजन वर्मा अनुविभागीय अधिकारी सिंगरौली को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा अपर कलेक्टर बुरहानपुर, अर्चना कुमारी अनुविभागीय अधिकारी शुजालपुर को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा अपर कलेक्टर अनूपपुर, शिवम प्रजापति अनुविभागीय अधिकारी पुनासा खंडवा को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत। अपर कलेक्टर शहडोल सौम्या आनंद सहायक कलेक्टर शहडोल को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा अपर कलेक्टर श्योपुर, आकिप खान सहायक कलेक्टर मंडला को अनुविभागीय अधिकारी पिपरिया नर्मदापुरम, पंकज वर्मा सहायक कलेक्टर जिला सिवनी को अनुविभागीय अधिकारी पुनासा खंडवा और सपना अनुराग जैन अपर कलेक्टर बुरहानपुर को अपर संचालक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण इंदौर प्रदेश किया गया है।

विद्यार्थियों के लिए जरूरी अपडेट: आधार अभियान का दूसरा चरण अब अक्टूबर से

दूसरे चरण में 26 लाख विद्यार्थियों के किये जायेंगे आधार अपडेट भोपाल  प्रदेश में 26 लाख विद्यार्थी अब तक अपने आधार में आवश्यक बायोमेट्रिक अपडेट नहीं करा पाए हैं। अपडेट विद्यार्थियों के 5 वर्ष और 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर अनिवार्य होता है। आधार में नवीनतम बायोमेट्रिक दर्ज होने के बाद ही विद्यालय प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों को सहज रूप से मिल सकेगा। विद्यार्थियों को शासकीय योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईएडीएआई) और स्कूल शिक्षा विभाग ने 18 अगस्त 2025 को ‘विद्यार्थी के लिए "आधार, अब विद्यालय के द्वार" अभियान प्रारंभ किया था। अभियान के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में आधार नामांकन एवं अपडेट शिविर लगाए गए थे। अब प्रदेश के सभी जिलों में एक अक्टूबर से इस अभियान का दूसरा चरण प्रारंभ किया जा रहा है। दूसरे चरण में उन विद्यालयों को प्राथमिकता दी गई है, जहाँ सबसे अधिक विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक अपडेट लंबित हैं। साथ ही, ऐसे बड़े विद्यालयों का भी चयन किया गया है, जिनके आसपास अन्य विद्यालय भी संचालित होते हैं, जिससे अधिकाधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल सके। यूआईएडीएआई और शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के आधार का बायोमेट्रिक स्टेटस देखने के लिये यू-डाइस+ पोर्टल पर विशेष सुविधा विकसित की है। इसके माध्यम से विद्यालय आसानी से उन विद्यार्थियों की पहचान कर सकेंगे जिनका अपडेट लंबित है। अभियान के सफल संचालन के लिए 26 सितम्बर को जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रोग्रामर, ब्लॉक रिसोर्स सेंटर, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और शासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रशिक्षित किया गया। इससे पूर्व यूआईएडीएआई आधार ऑपरेटरों को भी प्रशिक्षित कर चुका है। विद्यालय प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यू-डाइस+ पोर्टल से लंबित विद्यार्थियों की सूची प्राप्त करें। सूची में शामिल विद्यार्थियों को पूर्व सूचना दें और शिविर के लिए रोस्टर तैयार करें। साथ ही, विद्यार्थियों को नजदीकी आधार सेवा केंद्रों में भी बायोमेट्रिक अपडेट कराने के लिए प्रेरित करें।  

बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापकों की पदोन्नति पर शिक्षा विभाग को दी समय सीमा

ग्वालियर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सहायक अध्यापकों को बड़ी राहत देते हुए शिक्षा विभाग को उनकी पदोन्नति पर तीन माह में विचार करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता उनकी वास्तविक नियुक्ति तिथि (पांच और सात सितंबर 1998) से मानी जाएगी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विभाग को 18 रिक्त अध्यापक पदों पर तीन माह के भीतर उनके प्रमोशन पर निर्णय लेना होगा। साथ ही सभी लक्षित लाभ दिए जाएंगे, हालांकि बकाया वेतन नहीं मिलेगा।   यह था पूरा मामला     याचिकाकर्ताओं ने 25 अगस्त 2014 में जारी विभागीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी पदोन्नति की मांग खारिज कर दी गई थी।     उनका कहना था कि वे 1998 में शिक्षा कर्मी ग्रेड-3 के रूप में नियुक्त हुए और 2007 से सहायक अध्यापक कैडर में शामिल हुए, लेकिन विभाग ने उनकी वरिष्ठता 2001 से गिनकर पदोन्नति से वंचित कर दिया।     विभाग ने तर्क दिया था कि वरिष्ठता 2001 से मानी जाएगी, जब उनका समायोजन हुआ था, लेकिन हाई कोर्ट ने साफ किया कि 2008 के नियमों के लागू होने के बाद शिक्षा कर्मियों की सेवाओं को ही वरिष्ठता का आधार माना जाएगा।   इसके साथ ही, कोर्ट ने 25 अगस्त 2014 का विभागीय आदेश रद कर दिया। इस फैसले से सहायक अध्यापकों को न केवल वरिष्ठता का लाभ मिलेगा, बल्कि पदोन्नति की राह भी खुल गई है।

मोबाइल से करें महाकाल के दर्शन, भक्तों के लिए लॉन्च हुई सुविधा

उज्जैन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महादेव के भक्तों के लिए अब नई प्रोटोकॉल दर्शन की प्रक्रिया बदली जा रही है। पहले यहां प्रवेश के लिए टोकन जारी किए जाते थे, लेकिन अब नई व्यवस्था के अनुसार भक्तों को मोबाइल लिंक के जरिए बुकिंग करनी होगी। इस बदलाव के तहत अब कोई भी व्यक्ति या अधिकारी सीधे टोकन लेकर दर्शन नहीं कर पाएंगे। मंदिर समिति की ओर से मोबाइल पर लिंक भेजा जाएगा, जिसके माध्यम से बुकिंग पूरी होगी और तभी प्रोटोकॉल दर्शन का अवसर मिलेगा। यह व्यवस्था इसलिए लागू की जा रही है ताकि महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की भीड़ नियंत्रण रही और वह दर्शन का पूरा लाभ उठा सके। इस कदम से न केवल प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी, बल्कि इससे अनियमितताओं पर रोक लगेगी और भक्तों का समय बचेगी।