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अब ये करना होगा अनिवार्य! आज से लागू होंगे नए टिकट बुकिंग नियम

भोपाल आम रेल यात्रियों को आरक्षित टिकट आसानी से उपलब्ध कराने और दलालों द्वारा हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। अब 1 अक्टूबर से सामान्य आरक्षण खुलने के पहले 15 मिनट के दौरान केवल आधार-प्रमाणित उपयोगकर्ता ही IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से आरक्षित टिकट बुक कर पाएंगे। इस व्यवस्था से आम जनता को शुरुआती समय में कन्फर्म टिकट मिलने की सुविधा सुनिश्चित होगी। एजेंटों पर रोक बरकरार रेलवे ने स्पष्ट किया है कि कम्प्यूटरीकृत पीआरएस काउंटरों पर टिकट बुकिंग की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही सामान्य आरक्षण खुलने के पहले 10 मिनट तक अधिकृत एजेंटों पर पहले से लागू रोक भी जारी रहेगी। यानी एजेंट पहले दिन टिकट बुकिंग की प्रक्रिया में शुरुआती समय में शामिल नहीं हो पाएंगे।   आम उपयोगकर्ताओं के हित में यह पहल भोपाल मंडल के पीआरओ नवल अग्रवाल ने बताया कि रेलवे की यह पहल आम उपयोगकर्ताओं के हित में है। इससे टिकट खरीदने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और बिचौलियों या बेईमान पर रोक लगेगी। यात्रियों भी IRCTC आईडी को आधार से प्रमाणित कर लें, ताकि उन्हें इस सुविधा का लाभ आसानी से मिल सके।

मुख्यमंत्री 7-8 अक्टूबर को करेंगे कॉन्फ्रेंस, कलेक्टर-कमिश्नर सहित सभी विभागों के अफसर होंगे शामिल

भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 7 और 8 अक्टबूर को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी, आईजी-डीआईजी के साथ पहली कॉन्फ्रेंस करेंगे। इस कांफ्रेंस के आठ मुख्य बिंदु तय किए गए हैं। जिसके बार में मंत्रालय के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी जानकारी देंगे। दो दिन की बैठक में तैयार होगा रोडमैप जानकारी के मुताबिक, सीएम डॉ मोहन यादव इस कांफ्रेंस में अपनी प्राथमिकताएं देंगे। जिसमें साल भर का रोडमैप तैयार किया जाएगा और पैमाने पर परफॉर्मेंस मॉनिटर की जाएगी। इस कॉफ्रेंस में नगरीय निकायों के कमिश्नर और जिला पंचायत सीईओ को बुलाया जाएगा। बैठक में सभी के साथ ग्रुप डिस्कशन होगा। वहीं, आईएएस अफसरा और पुलिस विभाग के आला-अफसरों का भी एक सत्र होगा। किस मुद्दे पर कौन से विभाग का अफसर बोलेगा नगरीय प्रशासन विभाग की पीएम आवास योजना, अमृत योजना और स्वच्छ भारत मिशन पर संजय दुबे जानकारी देंगे। गुड गवर्नेंस के राजस्व मामलों का निपटारा और डिजिटलाइजेशन, भूमि अधिग्रहण समेत कई अन्य मुद्दों पर संजय कुमार शुक्ला जानकारी देंगे। क्राउड मैनेजमेंट, रोड सेफ्टी, क्रिमिनल लॉ और एयर एंबुलेंस के मुद्दे पर शिवशेखर शुक्ला जानकारी देंगे। सिकल सेल, पोषण, अस्पताल के जुड़े मुद्दों पर संदीप यादव जानकारी देंगे। वहीं, स्किल डेवलपमेंट, एमएसएमई लोन स्कीम, उद्योगों को जमीन का आवंटन, पीएम गतिशक्ति, स्टार्टअप सहित दूसरे मामलों की जानकारी राघवेंद्र कुमार सिंह देंगे। खाद-बीज, नरवाई प्रबंध, प्राकृतिक खेती, सिंचाई की प्लानिंग, दूध उत्पादन सहित दूसरे मामलों की जानकारी अशोक वर्णवाल देंगे। एडमिशन और ड्रॉप आउट रेट, शिक्षा की गुणवत्ता समेत दूसरे मामलों की जानकारी देने का जिम्मा संजय गोयल पर है। पीएम जनमन, दजगुआ, पीएम आवास व स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), मनरेगा, आजीविका मिशन, पंचायती राज, ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, इको सेंसेटिव जोन समेत कई दूसरे मामलों की जानकारी दीपाली रस्तोगी देंगी। 

हाथियों से होने वाले नुकसान पर लगेगा ब्रेक, गज रक्षक ऐप से होगा रियल टाइम ट्रैकिंग

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ तो है ही, लेकिन पिछले कुछ सालों से ये हाथियों का भी गढ़ बन चुका है. हाथियों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. हाथियों ने बांधवगढ़ को अपना स्थाई अड्डा बना लिया है. लगभग पूरे शहडोल संभाग में हाथियों की मूवमेंट देखने को मिलती है. साल भर वे धमाचौकड़ी मचाते नजर आते हैं. शहडोल, अनूपपुर, उमरिया सभी जिले हाथियों से प्रभावित हैं. हाथियों के मूवमेंट के दौरान अक्सर ही हाथी-मानव द्वंद की स्थिति बनती है. ऐसे में हाथियों के हर एक मूवमेंट के बारे में जानकारी के लिए अब इनकी निगरानी भी हाईटेक होने जा रही है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इसकी तैयारी भी शुरू हो चुकी है, गज रक्षक अब हाथियों से करेगा रक्षा. इस पहल से हाथी-मानव संघर्ष को रोकने में मदद मिलेगी. क्या है गज रक्षक ऐप? गज रक्षक ऐप, जैसा नाम वैसा काम. हाथियों से रक्षा के लिए ये ऐप तैयार किया गया है. वैसे तो इस ऐप की लॉन्चिंग विश्व बाघ दिवस 29 अगस्त को भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा की गई थी. इस मोबाइल एप्लिकेशन को वन विभाग मध्य प्रदेश, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट और कल्पवैग कंपनी के सहयोग से तैयार किया गया है. बांधवगढ़ में 26 से 29 सितंबर तक इस ऐप की ट्रेनिंग वनकर्मियों को दी जा चुकी है. गज रक्षक ऐप के फायदे गज रक्षक ऐप के फायदों के बारे में बताते हुए बांधवगढ़ के डायरेक्टर अनुपम सहाय ने कहा, "इस ऐप के माध्यम से हाथियों की रियल टाइम लोकेशन की जानकारी लगेगी. उनके मूवमेंट और व्यवहार की जानकारी भी ये ऐप उपलब्ध कराएगा. गांव के नजदीक हाथियों के आते ही इसके माध्यम से समय रहते अलर्ट मिल जाएगा, जिससे हाथी मानव द्वंद को रोकने में सहायता मिलेगी. इससे हाथियों की मॉनिटरिंग आसान होगी." मूवमेंट ट्रैक किया जा सकेगा खेतों में लगी फसल की जानकारी से लेकर हाथी जिन जगहों पर लगातार मूवमेंट करते हैं. उनके रोजमर्रा के स्थलों और विद्युत लाइन की जानकारी इकट्ठा करके रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी. जिससे हाथी-मानव द्वंद को कम किया जा सकेगा. इसके अलावा हाथियों की करेंट लोकेशन मिलते ही स्थानीय जनसमुदाय को व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना देकर उन्हें सतर्क किया जा सकेगा. हाथियों के लिए हाईटेक ऐप गज रक्षक एक हाईटेक ऐप है, जिससे हाथियों की निगरानी डिजिटल तरीके से की जा सकेगी. इसमें एसएमएस अलर्ट, वॉइस कॉल, पुश नोटिफिकेशन, सायरन, और ऑफलाइन मोड जैसी सुविधाएं भी दी गई है, जो हाथियों की निगरानी में बहुत कारगर साबित हो सकती हैं. ऐप से हाथियों पर निगरानी रखने वाला व्यक्ति उनकी यथास्थिति के बारे में जानकारी साझा करेगा. साथ ही हाथियों की फोटो खींचकर और करंट लोकेशन ऐप पर अपलोड करेगा. साथ ही बताएगा कि हाथी अकेला विचरण कर रहा है या फिर झुंड में है. यह जानकारी हाथियों की करंट लोकेशन से 10 किलोमीटर के दायरे में ऐप यूजर्स को मिल जाएगी. इससे हाथी-मानव द्वंद को कम करने और हाथियों के संरक्षण में सहयोग मिलेगा. बांधवगढ़ सहित अन्य जिलों के वन स्टाफ को ट्रेनिंग गज रक्षक ऐप को लेकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ट्रेनिंग जारी है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के कई जिलों के कर्मियों को ट्रेंड किया जा रहा है. खासकर उन इलाके के वनकर्मियों को जहां हाथियों का मूवमेंट अधिक रहता है. जैसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, संजय दुबरी टाइगर रिजर्व, नॉर्थ शहडोल, साउथ शहडोल, अनुपपुर, सीधी, सिंगरौली, सतना, उमरिया, डिंडोरी के वन कर्मचारियों को इस ऐप की ट्रेनिंग दी जाएगी. बांधवगढ़ में कितने हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वर्तमान में काफी संख्या में हाथी है. वैसे तो यहां पहले भी हाथी आते थे, लेकिन अब हाथियों ने इसे अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है. साल 2018 में 40 हाथियों का एक झुंड आया था फिर वो वापस नहीं गया. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में स्थायी रूप से रहने लगा है. इन हाथियों की संख्या अब लगभग 60 से 65 तक पहुंच गई है, जो लगातार बढ़ती ही जा रही है. फसलों के समय में ये हाथी ग्रामीण इलाकों में भी कभी-कभी मूव करते हैं. हाथियों को बांधवगढ़ क्यों पसंद आया एक्सपर्ट बताते हैं "हाथी या फिर कोई भी वन्य प्राणी हो, वह वहीं रुकेगा जहां उसे पीने के लिए पर्याप्त पानी, खाने को भोजन मिले और रहने को सुरक्षित आवास मिले. जहां ये सुविधाएं मौजूद होती है, जंगली जानवर अपना बसेरा बना लेते हैं. हाथियों के लिए ये तीनों ही चीजें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आसानी से मिल रही है. इसलिए हाथियों के लिए यह जगह फेवरेट हो गई है. इसके अलावा वे वहां सुरक्षित भी महसूस करते हैं. " हाथियों का गढ़ बना शहडोल शहडोल संभाग जो आदिवासी बाहुल्य है. इसमें शहडोल, अनूपपुर, उमरिया सहित तीन जिले आते हैं. यहां जंगल बहुत घना है और प्राकृतिक संपदा से भरपूर है. यही वजह है कि इस इलाके में तरह-तरह के वन्य प्राणी और दुर्लभ पक्षी रहते हैं. फिलहाल ये तीनों जिले हाथियों के गढ़ बन चुके हैं. यहां साल भर हाथियों का मूवमेंट रहता है. ये जिले छत्तीसगढ़ राज्य से सटे हुए हैं. इस कारण वहां से भी हाथियों की मूवमेंट होती रहती है. 

इंदौर मेट्रो की बड़ी अपडेट: दिवाली बाद 17 KM ट्रायल रन, पब्लिक राइड में अभी देर

इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन अब तक 13 किलोमीटर का हो चुका है। कुल 17 किलोमीटर तक इसका ट्रायल रन रेडिसन चौराहे तक होगा। दीपावली के बाद यह ट्रायल किया जाएगा, लेकिन इसके संचालन में अभी समय लगेगा, क्योंकि मेट्रो के स्टेशन अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं। अफसरों की प्राथमिकता चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा स्टेशन, सुखलिया ग्राम स्टेशन, विजय नगर और रेडिसन चौराहा स्टेशन बनाने की है। फरवरी तक इन स्टेशनों का काम समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अगले साल तक मेट्रो का संचालन 17 किलोमीटर हिस्से में किया जा सके। यहां तक मेट्रो के चलने के बाद यात्रियों के लिए भी सुविधा होगी। सुपर काॅरिडोर की आईटी कंपनी व काॅलेजों में पढ़ने वाले विजय नगर व आसपास के हिस्सो में रहते हैं। घट गई यात्री, एक फेरे में दस-पंद्रह यात्री फिलहाल मेट्रो का संचालन छह किलोमीटर हिस्से में हो रह है, लेकिन मेट्रो कार्पोरेशन को इससे आय नहीं हो रही है, क्योंकि एक बार के फेरे में दस से पंद्रह यात्री ही सफर कर रहे हैं। इस कारण अब मेट्रो ट्रेन के संचालन में फेरबदल भी किया गया है। चार माह पहले जब इंदौर में मेट्रो का संचालन शुरू हुआ था तो अधिकतम 25 हजार तक एक दिन में यात्रियों ने सफर किया था, लेकिन अब यात्रियों की संख्या 50 से 100 तक सिमट गई है। इस कारण मेट्रो के संचालन की लागत भी नहीं निकल पा रही है, जबकि मेट्रो के संचालन और स्टेशन पर 300 से ज्यादा कर्मचारियों का स्टाॅफ रखा गया है। दरअसल शहरवासी मेट्रो को देखने के लिए उसमे सफर कर रहे थे। अभी जिस हिस्से में मेट्रो का संचालन हो रहा है वहां न तो बसाहट है और न ही कोई औद्योगिक क्षेत्र। इस कारण वहां मेट्रो को वास्तविक यात्री नहीं मिल रहे है। अभी भी लोग जरुरत के बजाए शौकिया तौर पर मेट्रो के सफर का आनंद लेने जा रहे हैं। मेट्रो ट्रेन-फैक्ट फाइल इंदौर मेट्रो एयरपोर्ट, दो बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन को कवर करेगी। शहर के मध्य हिस्से के ट्रैफिक को कम करने में मददगार साबित होगी। हर 30 मिनट के अंतर से मेट्रो ट्रेन चलेगी।शहर में कुल 28 स्टेशनों से ट्रेन गुजरेगी। फिलहाल दस जगह स्टेशनों का काम चल रहा है। मेट्रो ट्रेन का संचालन  फिलहाल छह किलोमीटर हिस्से में हो रहा है। यहां मेट्रो का किराया अधिकतम 30 रुपये है। 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेन का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री संवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई है। जिसे यात्री पकड़ कर सफर कर सकते है। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आतंरिक रुप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी।     

18 सितंबर से कृषि विश्वविद्यालयों में यूजी प्रवेश, कम छात्रों के रजिस्ट्रेशन से सीटें खाली

जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर और ग्वालियर में यूजी की सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया 18 सितंबर से चल रही है, जो आठ अक्टूबर तक चलेगी।प्री एग्रीकल्चर टेस्ट (पीएटी) का रिजल्ट आने के बाद दोनों विवि के 17 सरकारी कालेजों की करीब 1472 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा, लेकिन इस बार एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की घटती संख्या ने दोनों विवि की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, पहली आनलाइन काउंसलिंग में 1472 सीटों के लिए सिर्फ 2715 विद्यार्थियों ने ही पंजीयन कराया है, जबकि 12 हजार 563 विद्यार्थी पीएटी परीक्षा में सफल रहे। इनमें नौ हजार 848 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने पीएटी उत्तीर्ण करने के बाद भी काउंसलिंग में भाग नहीं लिया। जबलपुर विवि के जानकार बताते हैं कि प्रदेश के अन्य निजी और आटोनामस कालेजों में बिना पीएटी के प्रवेश दिया जा रहा है। पीएटी उत्तीर्ण करने वाले अधिकांश विद्यार्थियों ने इन कालेजों में प्रवेश ले लिया है। 20 और कॉलेजों में बिना पीएटी के प्रवेश जबलपुर के 12 और ग्वालियर के पांच कृषि कॉलेज हैं, जिनमें प्रवेश के लिए पीएटी परीक्षा अनिवार्य है। यह परीक्षा बीते कुछ वर्षों से लगातार विलंब से हो रही है। इस बार भी जुलाई में यह परीक्षा हुई, जबकि अन्य निजी और ऑटोनॉमस कॉलेजों में समय पर प्रवेश दे दिया गया। अब जल्द ही 20 पारंपरिक शासकीय कॉलेजों में एग्रीकल्चर सिलेबस शुरू करने की तैयारी हो रही है। ऐसे में 2026 में पीएटी में बैठने वालों की संख्या और कम हो जाएगी। पीएटी में शामिल होने वाली विद्यार्थियों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2024 में 17304 विद्यार्थियों ने प्री एग्रीकल्चर टेस्ट दिया था, जबकि 2025 में यह संख्या 12563 रही। सरकारी कॉलेज में इसलिए कम प्रवेश प्रदेश के कई निजी और पारंपरिक शिक्षा प्रदान करने वाले शासकीय कॉलेजों में अब कृषि में यूजी कराया जा रहा है। इन कॉलेजों में प्रवेश के लिए पीएटी परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं। बिना पीएटी के सीधे प्रवेश दिया जा रहा है। जबलपुर और ग्वालियर कृषि विवि से संबद्ध सरकारी कॉलेजों में पीएटी परीक्षा में पास होने पर ही प्रवेश दिया जाता है। जबलपुर कृषि विवि में लगातार प्रोफेसरों की कमी हो रही है, लेकिन भर्ती नहीं हो रही। कृषि विवि का बजट न मिलने से भवन और अन्य शिक्षा संबंधित कार्यों में बाधा आ रही है। कृषि विवि की सीटों पर एक नजर जबलपुर कृषि विवि- जबलपुर- 77 रीवा- 77 टीकमगढ़- 77 गंजबसौदा- 77 वारासिवनी- 77 पवारखेड़ा- 77 खुरई सागर- 66 पन्ना- 66 पेमेंट सीट- 201 हार्टिकल्चर- 132 फारेस्ट्री- 28 एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग- 77 ग्वालियर कृषि विवि से संबद्ध- ग्वालियर, इंदौर, सीहोर, खंडवा और मंदसौर की कुल 494 सीटें

157 साल पुरानी परंपरा का भव्य नजारा: जबलपुर के नुनहाई में करोड़ों के गहनों और 350 किलो चांदी के रथ से मां दुर्गा का सम्मान

जबलपुर नुनहाई की दुर्गा प्रतिमा का 10 करोड़ के जेवर से श्रृंगार किया गया है. जिस रथ में माता की विदाई होती है, वह 350 किलो चांदी का बना है, जिसकी बाजार में कीमत 5 करोड़ रुपए से ज्यादा है. जबलपुर के इस क्षेत्र में 157 सालों से दुर्गा उत्सव मनाया जा रहा है. नवरात्रि के दौरान सराफा का यह कारोबारी क्षेत्र 9 दिनों तक माता की भक्ति में डूब जाता है. 157 सालों से बैठा रहे दुर्गा प्रतिमा जबलपुर में दुर्गा उत्सव का इतिहास 150 साल से अधिक पुराना है. सराफा इलाके में रहने वाले विनीत सोनी नुनहाई दुर्गा उत्सव समिति के अध्यक्ष हैं. विनीत बताते हैं कि उनकी दुर्गा उत्सव समिति ने पहली बार मां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना 1867 में की थी. तब से यह सिलसिला रुका नहीं है, बीते 157 साल से इसी स्थान पर दुर्गा प्रतिमा की स्थापना की जा रही है. देवरानी-जेठानी माता की प्रतिमा जबलपुर के सराफा इलाके में 2 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होती हैं. एक सर्राफ की और दूसरी नुनहाई की. यह लगभग एक ही समय शुरू हुई थी. इन दोनों को ही नगर सेठानी कहा जाता है और दोनों में देवरानी-जेठानी का संबंध माना जाता है. इसकी वजह यह है कि सड़क के दोनों तरफ ये प्रतिमाएं बैठाई जा रही हैं. इन दोनों दुर्गा उत्सव की स्थापना लगभग 150 साल पहले ही हुई थी. बुंदेली शैली की प्रतिमा विनीत सोनी ने बताया "दुर्गा उत्सव में अलग-अलग किस्म की प्रतिमाएं रखी जाती हैं, लेकिन उनके नुनहाई वाली माता की प्रतिमा का स्वरूप कभी नहीं बदला. वे हमेशा ही बुंदेली शैली में ही बनाई गई. इस मूर्ति को भी पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार बनता चला आ रहा है." 10 करोड़ के गहनों से श्रृंगार विनीत सोनी का कहना है कि माता के श्रृंगार में 1 किलो से ज्यादा सोने के गहने चढ़ाए जाते हैं. इसमें बुंदेली शैली के कई ऐसे आभूषण हैं जिनका चलन सालों पहले था. अब इन्हें कोई नहीं पहनता है, लेकिन हम आज भी उन्हीं आभूषणों से माता का श्रृंगार करते हैं. आज सोने के दाम 1 लाख रुपए तोला से ज्यादा है. ऐसी स्थिति में केवल माता का श्रृंगार ही 10 करोड़ रुपए से ज्यादा के जेवर से होता है. 5 करोड़ के रथ से मां की विदाई बात केवल श्रृंगार पर ही खत्म नहीं हो जाती. नुनहाई की माता की विदाई जिस रथ से होती है. उस रथ की कीमत 5 करोड़ रुपये है. इसे 350 किलो चांदी से बनाया गया है. आज चांदी 1 लाख 35 हजार रुपए किलो है, ऐसी स्थिति में इस रथ की कीमत 5 करोड़ रुपए हो जाती है. साल भर यह रथ सुरक्षा में रखा रहता है और अब इसे माता की विदाई के लिए तैयार किया जा रहा है. सुरक्षा में लगे 4 गनमैन यूं तो जिस स्थान पर इस पंडाल की स्थापना की जाती है. वह क्षेत्र सराफा में है. यहां सड़क छोटी है और आसानी से यहां से कोई भाग नहीं सकता, इसके बावजूद माता के पंडाल में सरकार की ओर से पूरे 9 दिन तक चार गनमैन तैनात रहते हैं. आस्था का केंद्र सराफा बाजार 9 दिनों तक लगभग बंद रहता है. दुकानदार दुकान खोलते जरूर हैं, लेकिन ज्यादातर समय वे दुर्गा उत्सव की व्यवस्थाओं में ही लगे रहते हैं. इस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों की बेटियां दुर्गा उत्सव में अपने ससुराल से मायके आती हैं. जबलपुर शहर का आम आदमी भी भारी भीड़ के बावजूद यहां दर्शन करने जरूर आता है. रजनी राजपूत ने बताया "यह प्रतिमा बेहद सुंदर है और जिस भावना से इस क्षेत्र के लोग देवी प्रतिमा की स्थापना करते हैं. वह भावना सभी को प्रभावित करती है." बड़ी कृपा है माता की इस क्षेत्र के लोग माता को अपनी बेटी मानते हैं, और इन्हें कंधे पर उठाकर लाते हैं और विदाई भी ऐसी होती है कि देखने वालों की आंखों में आंसू आ जाते हैं. पूरी सड़क पर फूल बिछा दिए जाते हैं और आसपास के हर घर में ऊपर से फूलों की बरसात होती है. 9 दिनों का यह त्यौहार इस कारोबारी इलाके को भक्ति से भर देता है. विनीत सोनी कहते हैं "माता की ही कृपा है कि इस क्षेत्र में लोग खुशी-खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं."  

चीता सफारी का आनंद लें कूनो नेशनल पार्क में, ऑनलाइन बुकिंग के लिए जानें तरीका

श्योपुर  श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में आज एक अक्टूबर पर्यटक चीतों का रोमांच देख सकेंगे। इसी दिन से नेशनल पार्क में चीता सफारी की शुरुआत हो जाएगी। कूनो पार्क में बाड़ों के अतिरिक्त खुले जंगल में 16 चीते विचरण कर रहे हैं। कूनो और मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य में कुल 27 चीते हैं। जिनमें भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं। बता दें कि चीता पुनर्वास परियोजना के तहत 17 सितंबर 2022 को अपने जन्म दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इसके बाद फरवरी 2023 में 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से लाकर यहां छोड़े गए थे। वर्तमान में कूनो पार्क में 24 चीते हैं, जिसमें से आठ चीते और शावक बाड़े में हैं। शेष खुले जंगल में हैं जिनका दीदार पर्यटक कर सकेंगे। प्रदेश में चीतों के दूसरे रहवास मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य यहां से भेजे गए तीन चीते बाड़ों में हैं। पर्यटन विभाग पार्क खुलने के बाद यहां कूनो रिट्रीट के आयोजन की भी तैयारी कर रहा है, जिसमें पर्यटकों के लिए रहने व खान-पान सहित कई अतिरिक्त सुविधाएं होंगी। एक अक्टूबर से पर्यटक यहां पहुंचेंगे, इसलिए वन विभाग की ओर से कूनो नेशनल पार्क की वेबसाइट पर भी कूनो सफारी को हाइलाइट किया गया है। हेल्पडेस्क भी बनाई गई है, जिस पर चीतों को लेकर पर्यटकों की जिज्ञासा आ रही है। ऐसे कर सकते हैं बुकिंग कूनो नेशनल पार्क में चीतों समेत अन्य वन्य जीव भी देखने को मिलेंगे। इसके लिए कूनो नेशनल पार्क की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। छह लोगों के लिए कूनो में सफारी का शुल्क जिप्सी सहित 4,500 रुपये हैं, वहीं अगर आप अपने वाहन से जा रहे हैं तो 1,200 रुपये ही लगेंगे। पार्क के अहेरा गेट और पीपलवाड़ी गेट से कूनो सफारी के लिए जा सकते हैं। इसी क्षेत्र में चीतों को छोड़ा गया है। उत्तम कुमार शर्मा (सीसीएफ व फील्ड डायरेक्टर कूनो पार्क) के अनुसार, वर्जन कूनो में चीतों को देखने के लिए पर्यटक एक अक्टूबर से आ सकते हैं। प्रबंधन की ओर से तैयारियां की गई हैं। शुल्क कितना होगा? पर्यटन विभाग सफारी के शुभारंभ के साथ ही पर्यटकों के लिए कुनो रिट्रीट का भी आयोजन कर रहा है, जहां आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी. सफारी का एक निश्चित शुल्क भी है छह लोगों के लिए जिप्सी की सवारी का शुल्क ₹4,500 है, जबकि निजी वाहन से सफारी का शुल्क केवल ₹1,200 होगा. ऐसे करें ऑनलाइन बुकिंग पर्यटक वेबसाइट पर बुकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इसके लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान की वेबसाइट पर जाना होगा. वन विभाग ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की वेबसाइट पर कूनो सफारी को भी प्रदर्शित किया है. एक हेल्पडेस्क भी बनाया गया है. आप वहां से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.  सतपुड़ा के लिए इंतजार कोर जोन 10 अक्र्टूबर तक बंद रहेगा। तेज बारिश से मढ़ई, चूरना की सड़कें खराब हो गई हैं। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया। ऐसे पहुंचें टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क (Tiger reserve in MP) पहुंचने नजदीकी एयरपोर्ट भोपाल, जबलपुर, बनारस, प्रयागराज, नागपुर हैं। रेलवे स्टेशन नर्मदापुरम, शहडोल, सिवनी, दमोह, मंडला फोर्ट, त्यौहारी, मड़वास, नागपुर हैं। ये जानवर देख सकते हैं बाघ, चीते (कूनो में), तेंदुआ, हाथी, बायसन, चीतल, हिरण, बारहसिंघा, गौर, भालू, सांभर, चौसिंगा, चिंकारा के साथ ही विलुप्त प्रजाति के पक्षी भी। 10 टाइगर रिजर्व – संजय दुबरी, सीधी – पन्ना, पन्ना, छतरपुर – सतपुड़ा, नर्मदापुरम – कान्हा, मंडला-बालाघाट – बांधवगढ़, शहडोल – पेंच, सिवनी-छिंदवाड़ा – वीरांगना दुर्गावती, दमोह – डॉ. विष्णु वाकणकर (रातापानी), भोपाल सीहोर, रायसेन – माधव- शिवपुरी – नौरादेही- सागर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया जिले के लगभग 1536 वर्ग किमी में फैला है। पार्क प्रबंधन ने सफारी टिकट दर में 10% और गाइड चार्ज में 65% की बढ़ोत्तरी की है। नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर है। निजी वाहन से पहुंच सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन उमरिया है। कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला-बालाघाट जिले में लगभग 2,051.74 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर और निकटतम रेलवे स्टेशन चिरईडोंगरी है। पेंच टाइगर रिजर्व कुछ हिस्सा महाराष्ट्र और कुछ मध्यप्रदेश के सिवनी, छिंदवाड़ा जिले से लगा है। यहां ब्लैक पैंथर आकर्षण का केंद्र होता है। हालांकि ये कभी-कभार ही दिखते हैं। प्रदेश के नेशनल पार्क -1- वन विहार, भोपाल -2- कूनो पालपुर, श्योपुर -3- माधव- शिवपुरी -4- कान्हा- मंडला से बालाघाट -5- बांधवगढ़ – उमरिया -6- सतपुड़ा – भोपाल -7- पेंच – सिवनी-छिंदवाड़ा -8- पन्ना – पन्ना -9- डायनासोर जीवाश्म पार्क – धार -10- रानी दुर्गावती- दमोह -11- संजय दुबरी- सीधी-सिंगरौली जंगल या टाइगर सफारी के लिए कैसे करें एडवांस बुकिंग इसके लिए आपको मध्य प्रदेश के वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://forest.mponline.gov.in/ पर जाना होगा या फिर आप अपने पसंदीदा टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क को चुनकर उसकी वेबसाइट पर एडवांस बुकिंग के लिए एप्लाई कर सकते हैं। 

परिवहन विभाग डिजिटल प्लेटफार्म से नागरिकों को दे बेहतर सेवाएँ : परिवहन मंत्री श्री सिंह

फेसलेस सेवाओं के विस्तारीकरण का हुआ लोकार्पण भोपाल परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार नागरिकों को गुड गवर्नेंस में बगैर तकलीफ के सेवाएँ देना चाहती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग में ऑनलाइन एवं फेसलेस सेवाओं का विस्तार किया गया है। अब नागरिकों को कार्यालय आए बिना 51 प्रकार की सेवाएँ दी जायेंगी। इस व्यवस्था से विभाग की कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिक दक्षता बढ़ेगी। परिवहन मंत्री श्री सिंह मंगलवार को भोपाल के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय कोकता में फेसलेस सेवाओं के विस्तारीकरण के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राहवीर योजना में बालाघाट के श्री अंकित असाटी को पुरस्कृत किया। श्री असाटी ने बालाघाट में हुई सड़क दुर्घटना में तत्परता दिखाते हुए घायल राहगीर को समय पर अस्पताल पहुँचाने का श्रेष्ठ कार्य किया था। पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रुपये की राशि उनके खाते में अंतरित की गयी। परिवहन मंत्री ने सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दो पहिया चालकों को हेलमेट भी प्रदान किये। पासपोर्ट कार्यालय के समान परिवहन कार्यालय की होगी कार्य-प्रणाली श्री सिंह ने कहा कि परिवहन विभाग की कार्य-प्रणाली को पासपोर्ट कार्यालय के समान बनाया जा रहा है। नागरिकों के ड्रायविंग लायसेंस एवं अन्य सुविधाएँ घर पहुँचाए जाने की सुविधा सुनिश्चित की जायेगी। परिवहन कार्यालयों में कम्प्यूटर ऑपरेटरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। नागरिकों को अब कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि उन्हें आवश्यक दस्तावेजों की कमी की जानकारी भी ऑनलाइन दिये जाने की व्यवस्था होगी। किसी वजह से नागरिक को कार्यालय आना पड़ता हैं, तो इसकी नियमित समीक्षा डेशबोर्ड पर संबंधित परिवहन अधिकारी करेंगे। सचिव परिवहन श्री मनीष सिंह ने बताया कि सेवाओं के विस्तारीकरण से विभाग की छवि में और सुधार आयेगा। परिवहन आयुक्त श्री विवेक शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन सेवाओं के सुधार के लिये एआई तकनीक (ऑर्टीफिशियल एन्टेलीजेंस) का भी उपयोग किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नागरिक सेवाओं में और सुधार के लिये पब्लिक फोरम पर आए सुझावों पर अमल किया जाएगा। । विभाग में सारथी एवं वाहन पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। कार्यक्रम को एनआईसी के श्री कमलेश्वर जोशी ने भी संबोधित किया कार्यक्रम में परिवहन कार्यालयों में नागरिक सेवाओं के सुधार पर केन्द्रित फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।  

स्वर्ण पदक जीतकर अवंतिका नामदेव ने किया शहडोल का नाम रोशन, अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दिखाएंगी दम

भोपाल  शहडोल की होनहार बेटी अवंतिका नामदेव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लगन, मेहनत और जुनून के सामने कोई भी मंज़िल दूर नहीं। ग्वालियर में आयोजित 69वीं शालेय राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में अवंतिका ने स्वर्ण पदक जीतकर न केवल शहडोल संभाग को गौरवान्वित किया, बल्कि अब उनका चयन राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के लिए भी हो गया है, जो आगामी अक्टूबर में अरुणाचल प्रदेश के इटानगर में आयोजित होगी। अवंतिका, ब्राइटन इंटरनेशनल स्कूल शहडोल की कक्षा 10वीं की छात्रा हैं। पहली बार शहडोल संभाग की शिक्षा विभाग की टीम ने इस राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में भाग लिया। अवंतिका ने अपने दमदार प्रदर्शन से प्रतियोगिता में अलग ही छाप छोड़ी। अपने आत्मविश्वास, फुर्ती और ताक़त के बल पर उन्होंने फाइनल बाउट में प्रतिद्वंदी को पछाड़ते हुए गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा जमाया। राष्ट्रीय स्तर पर अब अवंतिका न सिर्फ शहडोल, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी। 

आरडीएसएस अंतर्गत इंदौर संभाग का 43वां सब स्टेशन मठमठ में ऊर्जीकृत

भोपाल शासन की महत्वपूर्ण रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत इंदौर संभाग का 43वां 33/11 केवी बिजली सब स्टेशन झाबुआ की पेटलावद तहसील के मठमठ में मंगलवार की शाम पूर्ण प्रोटोकाल के साथ ऊर्जीकृत किया गया। करीब 2.85 करोड़ की लागत एक इस सब स्टेशन से चार पंचायत क्षेत्रों ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्र के हजारों उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।  मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि शासन द्वारा मनाए जा रहे सेवा पर्व के दौरान ऊर्जीकृत हुए इस महत्वपूर्ण मठमठ सब स्टेशन से वनवासी क्षेत्र के उपभोक्ताओं को विशेष रूप से लाभ मिलेगा। इस ग्रिड को मिलाकर झाबुआ बिजली सर्कल में पांच सब स्टेशन सेमलिया, रजला, रंभापुर, बड़ागुड़ा तैय़ार हुए है। झाबुआ के अलावा इंदौर जिले में 11, धार 4, खंडवा में 8, बड़वानी में 4, खरगोन में 5, बुरहानपुर में 6 सब स्टेशन तैयार होकर सेवारत हैं। प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि मठमठ के सब स्टेशन तैयार करने में झाबुआ के अधीक्षण यंत्री श्री डीएस राजपूत, कार्यपालन यंत्री श्री महेंद्र पंवार, श्री सुखदेव मंडलोई की सराहनीय भूमिका रही।