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देर या नीयत? मंदसौर में दो लाख रुपये सिंचाई पर खर्च, ट्रैक्टर विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें

मंदसौर गरोठ वन परिक्षेत्र में अफसरों-कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार का नया उदाहरण पेश किया है। हनुमंतिया बीट में पौधे लगाने के बाद उनकी सिंचाई पर दो लाख चार हजार 48 रुपये खर्च किए गए। लगाए गए बिलों के मुताबिक, इनमें 1 लाख 53 हजार 600 रुपये का भुगतान टैंकर के लिए किया गया, वहीं सिंचाई की मजदूरी का भुगतान 50,448 रुपये रहा। खास बात यह है कि बिल में जो नंबर ट्रैक्टर के बताए गए, वह परिवहन विभाग में बाइक, मोपेड व स्कूटर के नाम पर पंजीकृत हैं, जबकि एक नंबर का तो परिवहन विभाग की वेबसाइट पर भी कोई रिकार्ड नहीं मिल रहा। बता दें मंदसौर वन मंडल के अंतर्गत गरोठ वन परिक्षेत्र की हनुमंतिया बीट में 95.382 हेक्टेयर वन भूमि है। आरोप है कि यहां पदस्थ रहे वनरक्षक, परिक्षेत्र सहायक और वन परिक्षेत्र अधिकारी की मिलीभगत के चलते अभी तक वन क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया है, जबकि कागजों में बिल भी लग रहे हैं। शिकायतकर्ता बालू सिंह निवासी किलगारी ने सूचना के अधिकार के तहत 15 फरवरी 2019 से 22 अप्रैल 2019 के बीच लगाए गए बिलों की पड़ताल की, तो धांधली सामने आई। 8 अप्रैल 2023 को शिकायत के दो साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत का निराकरण नहीं किया गया।

सपनों की नौकरी का मौका: MP पुलिस भर्ती सात साल बाद, जल्द देखें कैसे करें आवेदन

भोपाल पुलिस में उप निरीक्षक या सब इंस्पेक्टर (एसआई) और सूबेदार के पद पर चयन की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) इन पदों के लिए अगले सप्ताह विज्ञापन जारी करने जा रहा है। सात वर्ष बाद इन पदों पर भर्ती होने जा रही है। इसके पहले वर्ष 2018 में इन पदों पर भर्ती हुई थी। सात साल तक भर्ती नहीं होने पर एसआई बनने का सपना देख रहे कई युवा अधिकतम उम्र सीमा पार कर चुके हैं। परीक्षा में पहली बार बड़ा बदलाव किया गया है कि शारीरिक दक्षता परीक्षा के अंकों को जोड़कर प्रावीण्य सूची तैयार की जाएगी।   इसके भर्ती नियम इसी वर्ष जनवरी में शासन ने जारी कर दिए थे। सरकार ने भर्ती नियम तैयार करने में लगभग एक वर्ष लगा दिए, नहीं तो इन पदों पर वर्ष 2024 में ही भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हो सकती थी। नियमों में शासन ने प्रारंभिक और लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम भी जारी किया है। चुनौतियों से जुड़े विषयों को दी गई प्राथमिकता पुलिस के सामने नई चुनौतियों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी गई है। उदाहरण के तौर पर प्रारंभिक और लिखित परीक्षा में साइबर अपराध, संचार तकनीक के साथ आने वाली चुनौतियां, इंटरनेट मीडिया, रोबोटिक्स, एआई, जीआइएस, जीपीएस आदि के बारे में भी प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके अतिरिक्त लोकतंत्र और पुलिस, गरीबी और भूख, संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। ऐसी होगी परीक्षा योजना सबसे पहले 100 अंकों की प्रारंभिक परीक्षा होगी जो क्वालिफाइंग होगी। इसमें कुल पदों के 10 प्रतिशत अभ्यर्थियों को चयनित किया जाएगा। इसके बाद 600 अंकों की लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। प्रावीण्य सूची में आने वालों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा जो 100 अंकों की होगी। आखिर में 50 अंकों का साक्षात्कार होगा। इस तरह कुल 750 अंकों के प्राप्तांक के आधार पर प्रावीण्य सूची तैयार की जाएगी।

वन्यजीव संरक्षण में नई पहल: मध्य प्रदेश से 10 टाइगर की ट्रांसलोकेशन शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के 10 टाइगर उड़ीसा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भेजे जाएंगे। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के निर्देश पर मध्य प्रदेश के टाइगर की अनुवांशिकता और कुनबा बढ़ाने यह निर्णय लिया गया। मध्य प्रदेश ने उड़ीसा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ टाइगर भेजने की तैयारी तेज कर दी है। इन राज्यों के अधिकारियों को टाइगरों की सुरक्षा और प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के लिए पत्र लिखा है। बांधवगढ़, पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व से करीब 10 टाइगरों का चयन कर छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा भेजा जाएगा। इनमें नर-मादा टाइगरों की जोड़ी भी शामिल होगी, ताकि इन राज्यों में टाइगरों की संख्या बढ़ने के साथ ही जीन पूल भी सशक्त हो सके। बांधवगढ़, पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व में टाइगर की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में संख्या बढ़ने से क्षेत्र कम पढ़ रहा है, जिससे टाइगरों का टेरेटरी को लेकर संघर्ष भी बढ़ रहा हैं।  एनटीसीए के निर्देश पर हो रहा है ट्रांसलोकेशन नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। खास बात यह है कि ट्रांसलोकेशन पर आने वाला पूरा खर्च संबंधित राज्य ही वहन करेंगे। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश एक साथ इतने बड़े स्तर पर टाइगरों को बाहर भेजेगा। वर्तमान में प्रदेश में 785 टाइगर हैं, जो देश में सबसे अधिक है और यही कारण है कि यहां से अन्य राज्यों को टाइगर उपलब्ध कराना संभव हो पाया है।  चयनित टाइगरों को अत्याधुनिक वाहनों में सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में अधिकृत पशु चिकित्सक मौजूद रहेंगे और हर चरण पर निगरानी रखी जाएगी, ताकि बाघों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। एमपी में होगी अधिकारियों की ट्रेनिंग ट्रांसलोकेशन को सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश अक्टूबर 2025 में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। इसमें छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा के वन अधिकारी मध्य प्रदेश आकर टाइगरों की देखभाल, ट्रैकिंग और संरक्षण से जुड़ी बारीकियां सीखेंगे। यह ट्रेनिंग सेशन भविष्य में भी इन राज्यों को अपने बाघों के बेहतर प्रबंधन में मददगार साबित होगा।

चौंकाने वाले आंकड़े: MP में बच्चों की दिल की बीमारी से मौतें 403% से 2250% तक बढ़ीं

भोपाल  देश के दिल कहलाने वाले मध्य प्रदेश के लोगों का दिल लगातार कमजोर होता जा रहा है। यह बात मह नहीं कह रहे हैं, बल्कि केंद्रीय महापंजीयक कार्यलय की एमसीसीडी की 2022 तक की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।  राज्य में खेल-कूद की उम्र के बच्चों और युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। जून 2025 में जारी भारत के महापंजीयक की रिपोर्ट-2022 के अनुसार, कोविड-19 के बाद दिल की बीमारियों से मौतों में अचानक वृद्धि देखी गई है। यह आंकड़ा राज्य में चिंता का विषय बन चुका है, क्योंकि पहले के मुकाबले इन मौतों की संख्या में भारी वृद्धि हो रही है कोविड से पहले वर्ष 2018 में 1 से 4 आयु वर्ग में ऐसी मौतें केवल 0.6% थीं, जो कोविड बाद 2022 में 14.1% हो गईं। इन चार वर्षों में 2250% की अविश्वसनीय वृद्धि दर्ज हुई। 5 से 14 आयु वर्ग में इन्हीं चार साल में यह आंकड़ा 3.7 से बढ़कर 18.6 हो गया, यानी 403% की वृद्धि। 15 से 24 आयु वर्ग में ऐसी मौतें 39.64% बढ़ी हैं। प्रदेश में हर तीसरी मेडिकल सर्टिफाइड मौत दिल संबंधी बीमारियों से हो रही है। संकेत है- दिल को संभालिए। कोरोना के बाद से युवा पीढ़ी में भी बढ़ी हार्ट संबंधी समस्या -डॉ.गौरव कवि भार्गव, कार्डियोलॉजिस्ट, जेएएच ग्वालियर और चंबल संभाग के मरीजों में यह देखने में आ रहा है कि युवा पीढ़ी में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। कोरोना से पहले युवाओं में हार्ट संबंधी परेशानी 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखने आती है, लेकिन कोरोना के बाद युवा पीढ़ी में इन मामलों भी तेजी से देखी जा रही है। स्थिति यह है कि अब 18 वर्ष के युवा में भी देखने में आ रही है। इसके बचाव के लिए नियमित व्यायाम करें,ध्रूम्रपान नहीं करें। सीने में दर्द और घबराहट हो तो विशेषज्ञ को दिखाएं।  मध्य प्रदेश में कोविड के बाद आयु-वर्ग के अनुसार मृत्यु दर (प्रति लाख) मेडिकल सर्टिफाइड प्रति 100 के हिसाब से प्रतिशत में आयु वर्ग 2018 2022 वृद्धि/कमी (%) 1-4 0.6 14.1 +2250% 5-14 3.7 18.6 +403% 15-24 16.9 23.6 +39.64% 25-34 32.8 28.7 -12.8% 35-44 48.2 32.2 -33.19% 45-54 56.4 38.5 -31.73% 55-64 62.3 43.3 -30.39% 65-69 66.3 48.3 -27.15% 70+ 65.7 48.6 -26.03% कुल 42 33.9 -19.28% हृदय रोगों से होने वाली मौतों का प्रतिशत (राज्य और वर्ष के अनुसार) राज्य 2008 2013 2022 मध्य प्रदेश 19.2% 24.6% 33.9% छत्तीसगढ़ 20.7% 50.7% 27.2% बिहार 34.8% 29.7% 44.9% गुजरात 21.2% – 45.2% हरियाणा 28.3% – 26.3% राजस्थान 20.6% 18.5% 24.4% पंजाब 23.9% 24.7% 40.8% देश में कुल औसत 27% 29% 47.1% मप्र में हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि  मध्यप्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में युवा पीढ़ी में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से पहले 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोग हार्ट अटैक का शिकार होते थे, लेकिन कोविड के बाद अब 18 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। रिपोर्ट से साफ हो गया है कि एमपी में कोविड के बाद दिल की बीमारी से मौतें बढ़ीं हैं। बच्चे को हार्ट अटैक आना बढ़ा है। साथ ही, युवाओं में हार्ट अटैक के केस बढ़े हैं।  जेएएच कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. गौरव कवि भार्गव ने कहा कि यह स्थिति अब चिंता का विषय बन चुकी है। युवाओं में बढ़ती दिल की समस्याओं के कारण नियमित व्यायाम, धूम्रपान से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जा रही है। हार्ट अटैक के कारण और जोखिम  हार्ट अटैक का मुख्य कारण जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं जैसे गलत आहार, मानसिक तनाव, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी हो सकती है। कोविड-19 के बाद की स्थिति में मानसिक तनाव और अनियमित जीवनशैली ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल से जुड़ी बीमारियों का पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। कई बार इसके कुछ दिनों पहले कोई संकेत नहीं मिलता और अचानक ही यह समस्या उत्पन्न हो जाती है।  दिल की बीमारियों से बचाव के उपाय नियमित व्यायाम: शारीरिक गतिविधि दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है और रक्त संचार को बेहतर बनाती है। स्वस्थ आहार: दिल को स्वस्थ रखने के लिए सही आहार जैसे फल, हरी सब्जियां, ओमेगा-3 से भरपूर आहार और कम वसा वाला आहार लेना चाहिए। धूम्रपान से बचाव: धूम्रपान दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है, इसलिए इससे बचना चाहिए। मानसिक तनाव से बचना: मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग, प्राणायाम और ध्यान जैसी गतिविधियां अपनानी चाहिए।  बच्चों और युवाओं के लिए सुझाव विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और युवाओं को अपनी जीवनशैली को सुधारने की जरूरत है। कोविड-19 ने हमें यह सिखाया है कि सही आहार और व्यायाम से हम कई बीमारियों से बच सकते हैं। बच्चों को खेलने और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इसके अलावा मानसिक तनाव को कम करने के लिए बच्चों को खेलों में हिस्सा लेने और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।  एम्स भोपाल के कार्डियोलॉजिस्ट ने क्या कहा एम्स भोपाल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह ने कहा कि 2023 से 2024 के बीच कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और चलते-चलते गिरने के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। हालांकि, अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं और अब सामान्य आयु के मरीज भी सामने आ रहे हैं। डॉ. शाह के अनुसार, हार्ट अटैक का पूर्वानुमान लगाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसके एक या दो दिन पहले कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिलते। उन्होंने बताया कि यदि किसी को सीने में दर्द महसूस हो और यह दर्द गले तथा हाथों तक फैल जाए, तो तुरंत जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी होता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हार्ट अटैक से बचाव के लिए सही जीवनशैली और पूरी नींद लेना सबसे प्रभावी तरीका है।  विभिन्न राज्यों में हृदय रोग से मृत्यु का प्रतिशत (2022) स्त्रोत- केंद्र के महापंजीयक कार्यलय की एमसीसीडी की 2022 तक की रिपोर्ट राज्य प्रतिशत (%) लक्षद्वीप 70.3 असम 62.7 आंध्र प्रदेश 60.3 तमिलनाडु 52.9 उत्तर प्रदेश … Read more

कम खेती, ज्यादा रासायनिक खाद: मध्यप्रदेश में 4.29 लाख टन बढ़ा उपयोग

भोपाल मध्य प्रदेश में खेती का रकबा हर साल घटने के बावजूद रासायनिक खाद की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। जैविक खेती के मामले में देश में पहले स्थान पर होने के बाद भी किसानों की रासायनिक खाद पर बढ़ती निर्भरता चिंताजनक है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि जिस तरह से अधिक उत्पादन के लिए मृदा की गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है, वह खतरनाक है। रासायनिक खाद के बढ़ते उपयोग से हर फसल सीजन में खाद की किल्लत की सूचनाएं आम हो चली हैं। वर्ष 2022-23 में 149.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलें बोई गई थीं जो 2025-26 में 146 लाख हेक्टेयर रह गईं। इससे उलट इस अवधि में खाद का उपयोग 29 लाख टन से बढ़कर 33.29 लाख टन (सितंबर प्रथम सप्ताह) पहुंच चुका है। जैविक फसल उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत देश में जैविक खेती के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। कुल जैविक उत्पादन में 40 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश से आता है। देश में 65 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती होती है जिसमें 16 लाख हेक्टेयर मध्य प्रदेश का है फिर भी विरोधाभास यह है कि किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच खरीफ फसल का क्षेत्र साढ़े तीन लाख हेक्टेयर घट गया लेकिन खाद की खपत 4.29 लाख टन बढ़ गई। रासायनिक खाद-कीटनाशकों के नुकसान को देखते हुए वर्ष 2011 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने जैविक खेती को प्रोत्साहित करने विशेष नीति बनाई थी। इसका लाभ यह हुआ कि मध्य प्रदेश जैविक उत्पादन के मामले में नंबर एक पर पहुंच गया। विशेषज्ञों की राय : दूरगामी परिणाम ठीक नहीं     उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान अधिक खाद का उपयोग करता है। तात्कालिक रूप से भले ही इससे लाभ मिलता है लेकिन दूरगामी परिणाम ठीक नहीं होते। मृदा की उर्वरा शक्ति तो प्रभावित होती ही है, भूजल पर भी असर पड़ता है। जो उपज होती है, उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती। – डॉ. जीएस कौशल, पूर्व कृषि संचालक, मध्य प्रदेश शरीर का हर अंग होता है प्रभावित     रासायनिक खाद के माध्यम से एक सीमा से अधिक रसायन मानव शरीर में पहुंचने पर हर सिस्टम पर असर होता है। सबसे अधिक दुष्प्रभाव पेट पर पड़ता है। पेट संबंधी कई बीमारियों के बाद इसका प्रभाव अन्य अंगों पर भी होने लगता है। पोषक तत्व घटने से शरीर में विटामिन व मिनरल्स की कमी होती है। किडनी पर भी असर होता है। कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। – डॉ. आर.आर. वर्डे, सह प्राध्यापक, मेडिसिन  

इंदौर पुलिस की नई पहल: विजय नगर और लसुड़िया थानों में दो-दो प्रभारी तैनात

इंदौर  शहर में लगातार हो रहीं आपराधिक घटनाओं को देखते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर ने एक थाने में 2 थाना प्रभारियों की पोस्टिंग की है. इसको लेकर एक आदेश में जारी किया गया है ताकि शहर में आपराधिक गतिविधियों पर रोकथाम लगाई जा सके. इंदौर में कमिश्नर सिस्टम लागू हुए 2 साल से अधिक हो चुके हैं. लेकिन अभी भी शहर में आपराधिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. जिससे एक थाने में 2 थाना प्रभारियों की पोस्टिंग की गई है. 2 थानों में 2 टीआई की नियुक्ति इंदौर शहर में अपराध के ग्राफ को कम करने के लिए करीब 2 साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया गया था. लेकिन 2 साल बीतने के बाद भी इंदौर में अपराध के ग्राफ में लगातार इजाफा हो रहा है. इसी कड़ी में इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने आपराधिक घटनाओं पर लगाम कसने के लिए इंदौर के 2 स्थानों पर 2 थाना प्रभारी की नियुक्ति की है. काफी बड़ा है इन दोनों थाना क्षेत्र का एरिया इसको लेकर एक आदेश भी जारी किया गया है कि, शहर में अपराध पर रोक लगाने के लिए 2 थाना प्रभारी नियुक्त किए गए हैं. जिसमें इंदौर के लसूडिया और विजयनगर थाने पर 2 थाना प्रभारी को तैनात किया गया है. इंदौर के विजय नगर और लसुड़िया थाने का एरिया काफी बड़ा है. इन क्षेत्रों में काफी रहवासी क्षेत्र आते हैं. इसी के चलते दोनों थानों पर सबसे पहले 2 थाना प्रभारी को इंदौर पुलिस कमिश्नर के द्वारा तैनात किया गया है. इन थानों के टीआई बदले गए इंदौर के विजय नगर और लसुड़िया थाना के अलावा द्वारकापुरी, आजाद नगर, हीरानगर, छत्रीपुरा, और सराफा समेत कई थानों के टीआई बदले गए हैं. विजयनगर में टीआई चंद्रकांत पटेल की पोस्टिंग है. वहीं, उनकी मदद के लिए मीना बौरासी को भी विजयनगर थाने में नियुक्त किया गया है. वहीं, लसूड़िया थाना में नीतू सिंह की नियुक्ति हुई है. तारेफ सोनी पहले से यहां टीआई हैं. लॉ एंड ऑर्डर पर रखेंगे निगरानी इन दोनों थाने का मूल काम क्षेत्र में लॉ एंड ऑर्डर पर निगरानी रखने और आपराधिक घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से करवाई करना रहेगा. 2 थाना प्रभारी की तैनाती होने के बाद क्षेत्र में अपराध के ग्राफ में कमी आने की पूरी संभावना है. इसके साथ ही इंदौर प्रदेश का ऐसा जिला बन गया है, जहां एक थाने पर 2 थाना प्रभारियों को नियुक्त किया गया है.  

भोपाल मेट्रो सेवा शुरू: पहले 7 दिन फ्री यात्रा, फिर ₹20 से शुरू होगा किराया

भोपाल  अगला स्टेशन है…दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों। इंदौर को मेट्रो की सौगात मिलने के बाद भोपाल के यात्रियों के मन में भी कुछ इस तरह के ख्यालात आ रहे होंगे। लोग पिछले एक साल से मेट्रो ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। अब ऐसे लोगों के लिए अक्टूबर का महीना खुशखबरी लेकर आ सकता है। दरअसल, मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चरण की मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को पहले 7 दिन तक फ्री में सफर करने का मौका मिलेगा। वहीं, कुछ दिनों तक किराए में डिस्काउंट में टिकट मिलने के बाद 20 रुपये की शुरूआती कीमत में लोग यात्रा कर पाएंगे। सीएमआरएस टीम पहुंची भोपाल मेट्रो ट्रेन शुरू करने से पहले कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी। मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे खास होता है। इसकी 'ओके' रिपोर्ट मिलने के बाद कमर्शियल रन शुरू होती है। यह टीम डिपो और गाड़ी को जांचेगी। साथ ही ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल तक देखेगी। यह टीम 25 और 26 सितंबर को निरीक्षण करेगी। यह शेड्यूल आने के बाद एमपी मेट्रो के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। इस जांच के बाद एक और केंद्रीय टीम भी आएगी। फाइनल रिपोर्ट के बाद मेट्रों को दौड़ाया जा सकता है। ऐसा रहेगा मेट्रो किराया भोपाल मेट्रो के अफसरों के अनुसार शुरुआती 7 दिन तक यात्री मेट्रो में फ्री सफर कर पाएंगे। इसके बाद 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। यह छूट खत्म होते ही 20 रुपए का टिकट लेकर लोग मेट्रो का सफर कर पाएंगे। भोपाल के सभी चरण प्रारंभ होने के बाद अधिकतम किराया 80 रुपए रखने का विचार है। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। फिलहाल यह बाधा बताया जाता है कि जिस लाइन पर पहले मेट्रो चलेगी उसके एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम अधूरे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट तय किया गया है। पहला चरण ही पूरा हुआ आपको बता दें कि राजधानी भोपाल में पहले चरण के तहत ऑरेंज लाइन में एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी की लाइन बनाई गई है। इसके बाद दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक के लिए कार्य चल रहा है। इसमें करीब 2 से 3 वर्ष लगने का अनुमान है। फिलहाल भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन ट्रैक पर मेट्रो दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। आनलाइन नहीं मिलेगा टिकट भले ही दिल्ली सहित कई शहरों में टिकट प्रणाली आनलाइन हो गई है। लेकिन भोपाल में आपको मैन्युअल टिकट से यात्रा करना पड़ेगा। बता दें कि ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ का टेंडर सरकार ने निरस्त कर दिया है। इसकी वजह है तुर्किए ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन देकर मदद की थी।

मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा, नौरादेही से बांधवगढ़ तक बनेगा टाइगर कॉरिडोर

सागर  वन्यजीव संरक्षण के लिए तरह-तरह के संरक्षित वन स्थापित किए जाते हैं. जिनमें टाइगर रिजर्व, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और नेशनल पार्क जैसे संरक्षित वन क्षेत्र की स्थापना की जाती है. लेकिन वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नये आयाम के तौर पर तेजी से उभरा है. वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि वन्य प्राणियों के संतति विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें लंबे समय तक संरक्षित वन क्षेत्र में न रखा जाए. किसी भी प्राकृतिक क्षेत्र को लंबे समय तक बांधकर नहीं रखा जा सकता है. क्योंकि इससे कई तरह के नुकसान होते हैं. ऐसे में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का नया कॉन्सेप्ट सामने आया है. इसके तहत संरक्षित वन क्षेत्र को आपस में इस तरह से जोड़ा जाता है कि वन्य प्राणी एक दूसरे संरक्षित वन में आसानी से आ जा सकते हैं. मध्य प्रदेश में पिछले 2 सालों के भीतर 2 नए टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आने से वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनने की संभावना बढ़ी है. दरअसल नौरादेही, रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद 4 टाइगर रिजर्व को जोड़कर वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की संभावना है. जिसमें रातापानी, नौरादेही, पन्ना और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व शामिल हैं. संरक्षित वन क्षेत्र की समस्याएं वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बांध के रखने से उसमें रहने वाले वन्यजीवों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. साथ ही साथ वन्य जीव संरक्षण के उद्देश्य भी फलीभूत नहीं हो पाते हैं. क्योंकि लंबे समय तक एक ही तरह के माहौल और वातावरण में रहने के कारण वन्य जीवों की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है. वन्य जीवों के बीच में जेनेटिक फ्लो रुकता है, जिससे वन्य जीव की संतति विकास पर असर पड़ता है. इसके साथ ही वन्य जीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आने के साथ-साथ वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष बढ़ता है.  वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नया आयाम संरक्षित वन क्षेत्र की इन समस्याओं के चलते वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का तेजी से नाम सामने आया है. विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित वन क्षेत्र को इस तरह है आपस में जोड़ा जाए कि उनमें रहने वाले वन्य जीव एक दूसरे संरक्षित वन क्षेत्र में आसानी से विचरण कर सके. एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में जाने से जहां वन्य क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ रही संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा, वहीं वन जीवन की संतति विकास में मदद मिलने के साथ-साथ एक संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों के बीच होने वाले आपकी संघर्ष को रोकने में मदद मिलती है. जानकारों की मानें तो वाइल्ड लाइफ लाइफ कॉरिडोर से इन समस्याओं पर काबू करने में मदद मिलती है. अंतः प्रजनन अवसाद दूर करता है कॉरिडोर  कोई भी जीव लगातार निकट संबंधियों से प्रजनन करके अपनी संतति का विकास करता है तो भावी पीढ़ी पर कई तरह के दुष्परिणाम को देखने मिलते हैं. उनके जीवन जीने की क्षमता पर असर पड़ता है. उनसे जो संतति पैदा होती है, वह कमजोर होती है. इसके अलावा प्रजनन क्षमता भी गिरती है. लेकिन अगर जीव एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में विचरण करते हैं, तो अपने ही तरह के दूसरे अनुवांशिक गुणों वाले जीवों से प्रजनन करके संतति विकास करते हैं. कॉरिडोर जीन प्रवाह में करता है मदद  अनुवांशिकी में जेनेटिक फ्लो यानि जीन प्रवाह का विशेष महत्व है. कोई भी जीव जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करता है तो भले ही एक ही संतति के जीव हो लेकिन उनकी आनुवंशिकी में अंतर पाया जाता है. ऐसे में जब वन्य जीव दूसरे वन क्षेत्र में जाकर प्रजनन करते हैं, तो उनकी संतति विविधता लिए होती है और नई पीढ़ी अच्छी और तंदुरुस्त नस्ल की होती है. वन्यजीव संघर्ष पर काबू  संरक्षित वन क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आती है और वन्यजीवों के बीच में आपसी संघर्ष बढ़ता है. ऐसी स्थिति में वाइल्डलाइफ कॉरिडोर काफी मददगार साबित होता है. क्योंकि किसी संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ती है तो उन्हें दूसरे संरक्षित क्षेत्र में वहां विस्थापित किया जा सकता है. जहां उनके लिए जीवन यापन की पर्याप्त व्यवस्था हो. 'कॉरिडोर बनाने की कोशिश में लगा है वन विभाग' नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए ए अंसारी कहते हैं कि "ये वन्य जीव संरक्षण का नया आयाम है. वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से वन्यजीवों को कई तरह के फायदे हैं और उनके संरक्षण में काफी मदद मिलती है. क्योंकि किसी संरक्षित क्षेत्र को अनंत काल तक बांधकर नहीं रख सकते हैं. जब जानवर एक संरक्षित क्षेत्र से दूसरे संरक्षित क्षेत्र में आसानी से बिना बाधा के आ जा सकते हैं तो पॉपुलेशन मैनेजमेंट में आसानी होती है और जेनेटिक फ्लो में मदद मिलती है. इसके अलावा इनब्रीडिंग डिप्रेशन कम होता है. अच्छे और तंदुरुस्त नस्ल के जानवर हमें मिलते हैं. सबसे बड़ा फायदा ये है कि वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष कम होता है. यदि हमारे संरक्षित वन क्षेत्र आपस में जुड़े रहेंगे तो जानवर इधर से उधर प्राकृतिक तरीके से आ जा सकेंगे. लेकिन किसी संरक्षित वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बंद रखा जाएगा तो एक समय के बाद डिप्रेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आएगी." उन्होंने आगे कहा, "नौरादेही टाइगर रिजर्व के कारण संभावित कॉरिडोर अस्तित्व में आया है. नौरादेही के एक तरफ रातापानी, दूसरी तरफ पन्ना टाइगर रिजर्व हैं. इसके अलावा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भी कनेक्टिविटी है. वन विभाग इसको आईडेंटिफाई करने में लगा हुआ है. जब यह अस्तित्व में आ जाएगा तो वन्यजीव प्रबंधन आसान हो जाएगा."

मध्यप्रदेश को मिलेगा सड़क विकास का बड़ा तोहफा, 2 लाख करोड़ में सुधरेंगी 35,000 KM सड़कें

भोपाल   प्रदेश में करीब ढाई करोड़ की आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। राज्य में लगभग 35 हजार किलोमीटर सड़कें हैं। शहर की सड़कें हाइवेज से अलग हैं। उन पर यातायात का काफी दबाव होता है। इसलिए जरूरी है कि नगरीय सड़कों को बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाया जाए। नगरीय विकास विभाग अगले 5 वर्षों में 2 लाख करोड़ से सड़क विकास के काम कराएगा। यह जानकारी आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे ने  सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर आयोजित कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा, इंजीनियर्स सड़क निर्माण तकनीकों को समझें, इसलिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 600 इंजीनियर्स जुड़े सड़क निर्माण तकनीक पर आधारित कार्यशाला में प्रदेशभर की निकायों के 600 इंजीनियर्स जुड़े। इसमें आइआइटी इंदौर और रुड़की के अलावा अन्य रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने सड़क की गुणवत्ता को लेकर नई तकनीकों और सुधार पर जानकारी दी। शहर में बिछेगा नया सीवेज नेटवर्क वहीं बारिश में पूरा भोपाल शहर जल प्लावन ग्रस्त होने के बाद नगर निगम ने शहर में नया सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए 545 करोड रुपए का फंड मंजूर किया है। इससे नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जाएंगे ताकि बड़ा तालाब, छोटा तालाब, शाहपुरा झील जैसे जल स्रोत में गंदा पानी मिलने से बचाया जा सके। गुरुवार को महापौर परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर किया गया है।

पर्यावरण सुरक्षा का संदेश: गांवों में लोगों को दी जा रही प्लास्टिक उपयोग की समझाइश

राज्यमंत्री हिरवार ने किया वृक्षारोपण भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में 2 अक्टूबर 2025 तक ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। अभियान की 17 सितम्बर को शुरूाआत हुई थी। सेवा पखवाड़ा अभियान में मैदानी अधिकारी, कर्मचारी नागरिकों और ग्रामवासियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। शहडोल जिले में अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़ार के गांव गिरवा में ग्रामवासियों को सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नही करने की समझाइश दी गई। स्वच्छता का संदेश देने के लिए गांव में जागरूकता रैली भी निकाली गई। जनपद पंचायत के स्वच्छता समन्वयक श्री सचिन श्रीवास्तव ने व्यापारियों को सिंगल यूज प्लास्टिक से पर्यावरण को हो रहे नुकसान के प्रति जागरुक बनाकर इसका उपयोग बंद करने की अपील की। जैतपुर और चरखरी गांवों में स्वच्छता मित्रों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। गोहपारू जनपद पंचायत के उप स्वास्थ्य केन्द्र लफदा में ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान के अंतर्गत 8 महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाईयां प्रदान की गईं। ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान के तहत शहडोल जिले मे 19 सितम्बर तक 4627 से अधिक महिलाओं एवं बच्चों की हीमोग्लोबिन की जांच की गई है। अनूपपुर के प्रभारी मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के प्रांगण में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने आह्वान कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के नाम एक पेड़ अवश्य रोपे, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ मातृ सम्मान का संदेश समाज में प्रसारित हो सके। जैविक खेती को अपनाएं किसान, हुई एकदिवसीय कार्यशाला अनूपपुर के पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस शासकीय तुलसी महाविद्यालय में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत जैविक खेती पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के सेमीनार हॉल में आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रुप में श्री चन्दन कुमार यादव ने जैविक खेती और इसके प्रशिक्षण कार्य का अपना लंबा अनुभव साझा किया। महाविद्यालय के रसायन विभागाध्यक्ष प्रो. ऋषिकेश चंद्रवंशी ने विद्यार्थियों को जैविक खेती की महत्ता और इसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। छतरपुर में स्वच्छता की शपथ छतरपुर जिले में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत ग्राम एवं निकाय स्तर पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान में स्वच्छता कार्य किए जा रहे हैं। नागरिकों से अपने घरों, दुकानों के आस-पास साफ सफाई बनाए रखने एवं घरों एवं प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को पृथक पृथक गीला एवं सूखा कचरा रखकर कचरा गाड़ी में डालने की अपील के साथ ही उपस्थित नागरिकों को स्वच्छता बनाए रखने और गंदगी न फैलाने की शपथ भी दिलाई गई। गांवों को साफ-सुथरा रखने के लिये श्रमदान नर्मदा पुरम में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान एवं ‘स्वच्छ भारत’ मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जिले की 49 ग्राम पंचायतों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता के कार्य किये जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के साथ व्यक्ति की आदतों में परिवर्तन करना है, जिससे स्वच्छता स्थायी रूप से बना रहे। अभियान के अंतर्गत नर्मदापुरम जिले के सभी गांवों में प्रचार-प्रसार कर ग्रामवासियों से साफ-सफाई के लिये श्रमदान का आह्वान किया गया। हरदा जिले में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत जिले के ग्राम आमसागर, प्रताप पुरा, जूना पानी, मकड़ई, रिजगांव, अबगाव खुर्द और बाला गांव कई गांवो में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। शिविर में स्वास्थ्य विभाग के दल ने निशुल्क स्वास्थ्य परामर्श दिया, आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी निर्माण और असंचारी रोग स्कैनिंग, एनीमिया और सिकल सेल रोगों समेत विभिन्न रोगों के लिए की गई।। इस अवसर पर रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया। बैतूल जिले में स्वछता टीम द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत स्कूलों में नशा मुक्ति अभियान चलाया गया। अभियान में बच्चों को नशा संबंधी सभी चीजों से दूर रहने एवं जागरूक बनाने के लिए रैली निकाली गई।