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जूनियर ने बदला था बयान, अब IET में रैगिंग के दोषी 4 सीनियर्स पर सख्त कार्रवाई

इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) के हॉस्टल में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग मामले में एंटी रैगिंग कमेटी ने बुधवार को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। मामले में चार सीनियर स्टूडेंट्स दोषी पाए गए।  विवि ने बताया था आपसी विवाद मामले में पीड़ित जूनियर छात्र ने पहले विवि प्रबंधन को शिकायत की थी। यह बात भी सामने आई की सीनियर ने उसका मुंह कमोड में घुसा दिया था और फ्लश चालू कर दिया था। मामले में विवि ने इसे आपसी विवाद बताया था जबकि छात्र पलट गया था। फिर उसने सीनियर स्टूडेंट आदर्श मकवाना के खिलाफ भंवरकुआ थाने में बदसलूकी और मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें साफ बताया था कि वह मेडिकल नहीं कराना चाहता। इसके अगले दिन बाद पीड़ित स्टूडेंट ने यूजीसी को शिकायत की थी। इसमें चार-पांच सीनियर्स द्वारा मारपीट किए जाने की शिकायत की थी। बताया था कि इन लोगों ने मेरी रैगिंग ली और अमानवीय व्यवहार किया। इस पर यूजीसी ने इसे रैगिंग माना और एंटी रैगिंग कमेटी को सौंपकर जल्द रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद कमेटी ने मंगलवार को पीड़ित स्टूडेंट, सीनियर्स और संबंधित लोगों के बयान लिए। एंटी रैगिंग कमेटी ने पेश की रिपोर्ट बुधवार को एंटी रैगिंग कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें सीनियर स्टूडेंट आदर्श मकवाना सहित अन्य को दोषी पाया गया। मामले में आदर्श को छह माह के लिए इंस्टिट्यूट और होस्टल से निष्कासित किया गया है। साथ ही उस पर 25 हजार रु. का फाइन किया है। इसके साथ ही तीन अन्य सीनियर्स को तीन-तीन माह के लिए इंस्टिट्यूट और होस्टल से निष्कासित किया है। इन पर 15-15 हजार रु. का फाइन किया है। ‌‌विवि ने पुलिस को सौंपी रिपोर्ट, जल्द ही होगी FIR इस मामले में एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद विवि ने सीनियर स्टूडेंट्स पर सख्त कार्रवाई तो की ही है साथ ही मामले की रिपोर्ट भी भंवरकुआ थाने को सौंपी है। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार रैगिंग मामलों में संबंधित आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की जाती है। इस मामले में भी अब एफआईआर की तैयारी है।  

स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और कलेक्टर को दिए निर्देश

नवजात शिशुओं की मृत्यु की उच्च स्तरीय जांच के साथ की जाएगी कार्रवाई स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और कलेक्टर को दिए निर्देश पीएम-मित्र पार्क मालवा निमाड़ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों एवं व्यवसायियों के लिए होगी बड़ी उपलब्धि  इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर प्रवास के दौरान प्रदेशवासियों को डोलग्यारस की शुभकामनाएं और धार जिले के बदनावर में स्थापित होने वाले पीएम मित्रा पार्क की बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस पार्क से एक लाख रोजगार प्रत्यक्ष रूप से तथा दो लाख रोजगार अप्रत्यक्ष रूप से निर्मित होंगे। इस दृष्टिकोण से यह अत्यंत महत्वपूर्ण उद्योग होगा। इससे मालवा निमाड़ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों सहित इससे जुड़े व्यवसायियों के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पीएम मित्रा पार्क दो हजार एकड़ क्षेत्र का बड़ा प्रोजेक्ट है। यह जनजातीय अंचल के धार, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खण्डवा आदि समूचे कपास उत्पादक क्षेत्र की दृष्टि से बड़ा वस्त्र उद्योग का केंपस बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वयं की योजना है, जिसको मध्यप्रदेश सरकार ने बाकी राज्यों की तुलना में सबसे तेज गति से भूमिपूजन लायक बनाया है। उन्होंने बताया कि आज नई दिल्ली में देश और दुनिया के वस्त्र उद्यमियों के साथ इस योजना को शेयर भी किया गया है। इससे बड़े पैमाने पर उद्यमी यहां आएंगे और मध्यप्रदेश से जुड़ेंगे। स्थानीय नागरिकों को रोजगार देंगे। युवा, गरीब, मजदूर किसान इन सभी की जिंदगी की बेहतरी के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जो अभियान चलाया जा रहा है, यह उसी सिलसिले की एक बड़ी कड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारा समय अब वापस लौट रहा है, हमारे चारों ओर कारखानों की बयार आ रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टेट प्रेस क्लब की एआई पर केन्द्रित स्मारिका का विमोचन भी किया। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर एमवाय अस्पताल में नवजात शिशुओं की हुई मृत्यु को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। इस तरह की घटनाएं न हो इसके लिए समस्या का स्थाई समाधान किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस गंभीर घटना एवं लापरवाही के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, कलेक्टर को निर्देश दिए है कि इस प्रकरण में उच्च स्तरीय जाँच करायी जाये और दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैरवा समाज के फूल डोल चल समारोह में दी सहभागिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बैरवा समाज के फूल ङोल चल समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैरवा समाज के फूल डोल चल समारोह में दी सहभागिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैरवा समाज के प्रत्येक अखाड़े को 11-11 हजार की राशि और सभी झाकियों को 25-25 हजार की राशि देने की घोषणा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन में ङोल ग्यारस पर आयोजित बैरवा समाज के फूल ङोल चल समारोह में शामिल हुए। समारोह में जगह जगह लगाए गए स्वागत मंचों पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्पमाला और साफा पहनाकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर बैरवा समाज के प्रत्येक अखाड़े को 11-11 हजार की राशि और सभी झाकियों को 25-25 हजार की राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चल समारोह में वृंदावन जैसा आनंद बाबा श्रीमहाकाल की नगरी उज्जैन में हो रहा है। उन्होंने कहा की इस जुलूस का आनंद प्रतिवर्ष बढ़ता जाये यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को ङोल ग्यारस की शुभकामनायें दी | इस अवसर पर विधायक अनिल जैन कालूहेडा, महापौर मुकेश टटवाल,नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव,संजय अग्रवाल और बैरवा समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रीगणेश उत्सव में हुए शामिल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार रात खजूर मस्जिद चौराहे पर नगर गणेश, पटनी बाजार स्थित स्वर्ण से श्रृंगारित श्रीगणेश और श्रीवरुण देव अखंड ज्योति मंदिर स्थित गणेश और गीता कॉलोनी के गणेश उत्सव में शामिल हुए और पूजन कर आरती की। वरुण देव अखंड ज्योति मंदिर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान का पूजन कर लाड़ली बहनों से चर्चा कर उन्हें डोल ग्यारस की मंगलकामनाएं दी। इस अवसर पर लाड़ली बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ फोटो भी खिंचवाई।  

बाढ़ त्रासदी: मौतों का आंकड़ा 394, हजारों घर उजड़े

भोपाल इस साल प्रदेश के 21 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है। अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण 394 जनहानि हुई, वहीं पांच हजार मकान क्षतिग्रस्त हुए। 1814 पशुहानि भी हुई। शिवपुरी, बुरहानपुर, दमोह, अशोकनगर, धार, छतरपुर, रायसेन, उमरिया, बड़वानी, मंडला और कटनी जिलों में 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर फसलें प्रभावित हुई हैं। 17,500 किसानों को अब तक 20 करोड़ रुपये से अधिक की राहत राशि स्वीकृत की गई है। सीएम ने दिए राहत कार्य बढ़ाने के निर्देश यह जानकारी अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव द्वारा बुधवार को की गई समीक्षा में सामने आई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन-जिन क्षेत्रों में भी अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को क्षति हुई है, वहां राहत की कार्रवाई आरंभ की जाए। जनहानि और पशु हानि की स्थिति में 24 घंटे में राहत उपलब्ध कराई जाए। आगामी दिनों में भी भारी वर्षा की संभावना है। ऐसे में जिलों में प्रशासन सक्रिय रहे। पुल-पुलिया में बैरिकेटिंग और बाढ़ की स्थिति में पुल पार न करने की चेतावनी की व्यवस्था की जाए। अस्थायी कैम्प, राशन एवं भोजन वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सामग्री संभावित स्थानों पर सुनिश्चित होनी चाहिए। इन जिलों में हुई औसत से अधिक बारिश प्रदेश में एक जून से दो सितंबर तक 38.24 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से 21 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के 21 जिलों में भिण्ड, छतरपुर, श्योपुर, ग्वालियर, नीमच, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, अलीराजपुर, सिंगरौली, राजगढ़, मंडला, सीधी, टीकमगढ़, गुना, नरसिंहपुर, दतिया, रतलाम, उमरिया, रायसेन और सिवनी में सामान्य से अधिक तो गुना, मंडला, श्योपुर, रायसेन और अशोकनगर में सर्वाधिक वर्षा दर्ज हुई।

स्वच्छता में इंदौर की अंतरराष्ट्रीय पहचान, विदेशी प्रतिनिधियों को दी गई ट्रेनिंग

 इंदौर  देश में लगातार आठ वर्षों से स्वच्छता में शीर्ष स्थान पर रहने वाले इंदौर की प्रसिद्धि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैल चुकी है। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल इंदौर की स्वच्छता के रहस्यों को जानने के लिए यहां आ चुके हैं। कचरा प्रबंधन के तौर-तरीके जानने पहुंचा संयुक्त प्रतिनिधि मंडल यह जानना उनके लिए दिलचस्प है कि आठ वर्ष पूर्व जिस शहर की सड़कों पर कचरे के ढेर लगे रहते थे, वहां अब स्वच्छता का ऐसा माहौल कैसे बना। इंदौर की सफलता का यह मॉडल लैटिन अमेरिकी देशों ब्राजील, कोलंबिया, इक्वाडोर और ग्वाटेमाला के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने दो दिवसीय दौरे के दौरान देखा। दल के सदस्य ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचे दल के सदस्य ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचे, जहां उन्होंने कचरे से सीएनजी बनाने वाले संयंत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पहले यहां कचरे के पहाड़ थे, लेकिन अब हरियाली है।प्रतिनिधिमंडल ने इंदौर के कचरा प्रबंधन के तरीकों को समझने के लिए नगर निगम के अधिकारियों से सवाल किए। उन्होंने डोर टू डोर कचरा कलेक्शन सिस्टम, अनुपयोगी वस्तुओं के पुन: उपयोग और सीवेज प्लांट से निकलने वाले उपचारित जल के उपयोग के तरीकों को भी जाना। इंदौर का स्वच्छता माडल न्यूनतम खर्च में अधिकतम स्वच्छता को दर्शाता है। यह मॉडल न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी आदर्श माना जा रहा है। अब तक 40 से अधिक देशों के 850 से ज्यादा प्रतिनिधिमंडल इंदौर आकर यहां से स्वच्छता का पाठ सीख चुके हैं।  

सिंहपुर सीवरेज परियोजना अंतिम चरण में, सफल परीक्षणों से बढ़ी उम्मीदें

नरसिंहपुर मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी लिमिटेड द्वारा जर्मन विकास बैंक केएफडब्ल्यू के सहयोग से नरसिंहपुर में संचालित सीवरेज परियोजना का कार्य अब अंतिम चरण में पहुँच चुका है। इस अत्याधुनिक परियोजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्र में सुनियोजित मलजल प्रबंधन सुनिश्चित कर नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करना है। इस परियेाजना का सफल प्रायोगिक परीक्षण जारी है। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत कार्यरत है। उल्लेखनीय है कि परियोजना के अंतर्गत नरसिंहपुर में दो आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जिनकी क्षमता क्रमशः 6.25 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) और 2.75 एमएलडी है। परियोजना में 6 इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन का निर्माण भी किया गया है। इसके साथ ही नगर में लगभग 122 किलोमीटर लंबी सीवरेज पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिससे पूरे नेटवर्क को सुव्यवस्थित रूप से जोड़ा गया है। नरसिंहपुर सीवरेज परियोजना 105 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित है। इस परियोजना के माध्यम से 15 हजार 4 सौ से अधिक घरों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जाना है, इस परियोजना में अभी तक 13 हजार से अधिक कनेक्शन दिए जा चुके है। परियोजना के पूरा होने पर इससे नगरवासियों को बेहतर स्वच्छता सेवाएं प्राप्त होने के साथ बीमारियों के खतरे में उल्लेखनीय कमी होगी। परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन से नदी, नालों और जल स्रोतों में गंदे जल के प्रवाह पर नियंत्रण होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और जल प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।  

18 से 45 साल के बेरोजगार युवाओं को मिलेगा फायदा, उद्यम क्रांति योजना से शुरू कर सकेंगे बिज़नेस

भोपाल  छोटे-छोटे कारोबार को बढ़ावा देने और युवाओं को जॉब मांगने की बजाए रोजगार देने वाला बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार प्रयासरत है. सरकार छोटे उद्यमियों को बढ़ाकर देश और मध्य प्रदेश को आर्थिक तरक्की पर ले जाना चाहती है. सरकार बिजनेस करने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता के तौर पर बिना गारंटी लोन मुहैया करा रही है. सरकार 10 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का लोन दे रही है. इसके लिए आपको चयन करना होगा कि आप किस तरह का लोन लेना चाहते हैं. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अब रीवा जिले के बेरोजगारों के लिए एक मजबूत सहारा बनती जा रही है. 10 जनवरी 2022 को शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक जिले में सैकड़ों युवाओं ने लाभ लेकर अपना खुद का व्यवसाय खड़ा किया है. योजना के तहत उद्योग क्षेत्र में अधिकतम ₹50 लाख और सर्विस या बिज़नेस सेक्टर में अधिकतम ₹25 लाख तक का ऋण बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है. मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 3% ब्याज सब्सिडी अधिकतम 7 वर्षों तक मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दी जाती है. यह सब्सिडी सीधे हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे युवाओं को लोन चुकाने में राहत मिलती है. कैसे उठाएं फायदा? मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. आवेदक की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए और वह मध्यप्रदेश का निवासी होना चाहिए. इसके अलावा परिवार की वार्षिक आय ₹12 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए और आवेदक बैंक डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए. मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना बेरोजगारों को सिर्फ आर्थिक मदद नहीं दे रही, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित कर रही है. स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में यह योजना कारगर साबित हो रही है. अगर आप भी कोई बिजनेस शुरू करने का सपना देखते हैं, तो यह योजना आपके लिए एक सुनहरा अवसर हो सकती है. MSME लोन योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम वर्गीय और छोटे कारोबार को बढ़ावा देने के लिए यह लोन दिया जाता है. यह लोन कारोबारी को बिना किसी गारंटी के 1 करोड़ रुपये तक का लोन दिया जाता है. इस योजना के तहत 8% का ब्याज दर चुकाना पड़ता है. 12 दिन के भीतर यह लोन उद्यमी के खाते में प्राप्त हो जाता है. यह उन कारोबारियों के लिए जो अपना व्यवस्या शुरू करना चाहते हैं. इस लोन की अच्छी बात यह है कि इसमें उम्र का लिमिट नहीं है. आधार कार्ड: पहचान प्रमाण के रूप में आधार कार्ड अनिवार्य है. जाति प्रमाण पत्र: पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित होने का प्रमाण. मूल निवास प्रमाण पत्र: आवेदक का मध्य प्रदेश का निवासी होना आवश्यक है. आय प्रमाण पत्र: आर्थिक स्थिति का सत्यापन करने के लिए आय प्रमाण पत्र अनिवार्य है. फोटो: हाल ही की पासपोर्ट आकार की फोटो. बैंक खाता विवरण: ऋण की राशि सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित की जाएगी, इसलिए बैंक खाता जानकारी अनिवार्य है. योजना रिपोर्ट: जिस व्यवसाय को शुरू करना है, उसकी संक्षिप्त योजना रिपोर्ट. पैन कार्ड: कर मामलों के लिए पैन कार्ड का विवरण अनिवार्य है. कोटेशन: जिस व्यवसाय को आप शुरु करने जा रहे हैं कहां से कौन सा सामान लेंगे उसकी जानकारी. बाद में बदला भी जा सकता है.

मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली में सम्मानित

मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर उल्लेखनीय कार्य के लिये नई दिल्ली में होंगे सम्मानित मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली में सम्मानित शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा सम्मान भोपाल प्रदेश के 2 शिक्षकों को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया जायेगा। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों में दमोह जिले की प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल शासकीय प्राथमिक शाला देवरान टपरिया में पदस्थ हैं। आगर-मालवा जिले के भेरूलाल ओसारा माध्यमिक शिक्षक शासकीय ईपीईएस माध्यमिक शाला खेरिया सुसनेर में पदस्थ हैं। प्रदेश के समस्त 55 जिलों में से 45 जिलों में 145 शिक्षकों द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 के लिये अपना पंजीयन कराया गया था। इसके बाद राज्य स्तरीय चयन समिति ने 6 शिक्षकों की अनुशंसा केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को भेजी थी। इस प्रक्रिया के बाद प्रदेश के 2 शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिये हुआ है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय पुरस्कार के लिये चयनित शिक्षकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय कार्यों के लिये सम्मानित होने वाले शिक्षक प्रदेश के अन्य शिक्षकों के लिये भी प्रेरणा का कार्य करेंगे। शीला पटेल प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल ने अपनी शाला में बच्चों को खेल-खेल में आनंदमयी शिक्षा दी है। उन्होंने गीत, कविता, कहानी और अभिनय के माध्यम से फाउण्डेशन लिटरेसी मिशन (एफएलएन) का क्रियान्वयन किया है। इसी के साथ उन्होंने अवकाश के दिनों में महिला साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये विशेष कक्षाओं का संचालन किया। श्रीमती शीला पटेल ने अवकाश के दिनों में समर कैम्प एवं विंटर कैम्प का आयोजन किया। उन्होंने अपनी पदस्थापना के शाला के गाँव की हर गली व मोहल्लों में जगह-जगह पर बच्चों को सिखाने के उद्देश्य से शैक्षिक पटल व लर्निंग प्लेस तैयार करवाया। शिक्षिका श्रीमती पटेल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये शून्य लागत पर टीचिंग लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) तैयार किया। बच्चों में समझ को बढ़ावा देने के लिये समूह में आपस में चर्चा और उनकी सहभागिता को बढ़ाने का काम प्रमुख रूप से किया। प्राथमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा प्राथमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा ने अपनी पदस्थ शाला में विषय-वस्तु की गहन समझ के साथ शिक्षण कार्य किया और बच्चों में नैतिकता और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित किया। विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिये ईको क्लब और क्लैप क्लब के संयोजन से ठोस कार्य किया। बच्चों को स्वच्छता, जल संरक्षण, पौधरोपण, प्लास्टिक उन्मूलन और हरित जीवन-शैली के बारे में नवाचार करते हुए शिक्षा दी। शिक्षक भेरूलाल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये नुक्कड़ नाटक, रैलियों, पोस्टर, निबंध प्रतियोगिता के साथ लेखन की वर्कशॉप भी निरंतर आयोजित की। उन्होंने डिजिटल युग की महत्ता को समझते हुए विद्यार्थियों में ऑनलाइन सुरक्षा जागरूकता फैलाने के लिये महत्वपूर्ण काम किया। बच्चों को साइबर अपराध के खतरों, सोशल मीडिया का सुरक्षित रूप से उपयोग, पासवर्ड की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी दी। उनके इस कार्य से आसपास के अनेक शिक्षकों ने भी प्रेरणा ली है।  

टाइगर सफारी के बाद अब चीता सफारी का रोमांच, कूनो में करें बुकिंग

भोपाल   टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश अब चीता स्टेट भी बन गया है. मध्यप्रदेश में अब पर्यटक खुले जंगलों में चीता सफारी का मजा ले सकेंगे. दरअसल, मध्यप्रदश के कूनो नेशनल पार्क में रोमांचक चीता सफारी शुरू होने जा रही है. इसमें पर्यटक खुली जीप में बैठकर कूनो के खुले जंगल में घूम रहे चीतों को देख सकेंगे. कूनो में हीरा गेट और टिक्टोली गेट से 1 अक्टूबर के बाद से सफारी शुरू होगी. कूनो में चीता सफारी 1 अक्टूबर के बाद कूनो पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए कूनो सफारी यादगार बनाने के लिए पर्यटन विभाग 5 अक्टूबर से कूनो नेशनल पार्क के पास कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल और 12 सितंबर से गांधी सागर फॉरेस्ट रिट्रीट शुरू करने जा रहा है. इसमें पर्यटकों के लिए टेंट सिटी, एडवेंचर गेम्स जैसी की सुविधाएं मिलेंगी. खुली जीप में बैठकर नजदीक से देखें चीते मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में कूनो को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं. 17 सितंबर 2022 को 8 चीते नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे. इसके बाद 18 फरवरी 2023 के 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से भारत आए थे. अब कूनो नेशनल पार्क में पर्यटक खुले जंगल में चीतों का दीदार कर सकेंगे. चीतों के दीदार के साथ प्राकृतिक सुंदरता का मजा ले सकेंगे टूरिस्ट  पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया, '' कूनो में चीतों के दीदार होने की उम्मीद अब बहुत ज्यादा है. चीतों की संख्या भी अब बढ़ गई है. कूनो के हीरा गेट और टिक्टोली गेट से 1 अक्टूबर के बाद से सफारी शुरू होगी. टूरिज्म जोन इस बार ओपन रहेगा. इस बार जो भी कूनो जाएंगे वह चीता देख पाएंगे. भारत में चीता देखना अपने आप में सपने जैसा है, जो अब संभव हो सकेगा.'' कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर हुई 30 कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है. हालांकि, पिछले तीन सालों के दौरान कई बार कूनो से दुखद खबरें भी आईं, लेकिन अब कूनो में चीतों के कुनबे में संख्या 30 पहुंच गई है. कूनो नेशनल पार्क में 9 वयस्क सहित कुल 26 चीते मौजूद हैं. 9 वयस्क चीतों में 6 मादा और 3 नर हैं. खासबात यह है कि इनमें 17 भारत में ही जन्मे शावक हैं और खुले जंगल में घूम रहे हैं. कूनो में पर्यटन बढ़ाने पर वन विभाग व पर्यटन विभाग का जोर कूनो में 16 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं. बाकी दो मादा चीता वीरा और नीरवा अपने नन्हें शावकों के साथ हैं, जबकि बाकी दो नर चीतों को गांधी सागर में शिफ्ट किया गया है. इस तरह मध्यप्रदेश में कुल 30 चीता मौजूद हैं. कूनो और गांधी सागर में कर रहे डेवलपमेंट अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया, '' चीता आने के पहले कूनो टूरिज्म के मैप पर नहीं था, लेकिन अब कूनो टूरिज्म साइट के मैप पर प्रमुखता से आ गया है. इसी उद्देश्य के लिए कूनो और गांधीसागर साइट को डेवलप किया गया है. दूसरे प्रदेश जो नहीं कर पा रहे, वह मध्यप्रदेश कर रहा है. दूसरे राज्यों में उनके प्रचलित स्थान है, जहां लगातार पर्यटकों की भीड़ बढ़ती जा रही है, जबकि मध्यप्रदेश में नए 50 स्थानों को टूरिज्म के लिए डेवलप किया जा रहा है.'' अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इससे मध्यप्रदेश का पर्यटन में विविधता बढ़ रही है और पर्यटक अलग-अलग स्थानों पर पहुंच रहे हैं. कूनो और बांधवगढ़ भी तेजी से पर्यटन स्थल के रूप में अपना स्थान तेजी से बना रहे हैं.  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जिलों में उर्वरक वितरण में अव्यवस्था के लिए कलेक्टर होगें उत्तरदायी

जिला प्रशासन, उर्वरक उपलब्धता और वितरण के संबंध में किसान संगठनों से निरंतर सम्पर्क और संवाद बनाए रखें उर्वरक वितरण व्यवस्था की हो सघन मॉनीटरिंग और अनुचित गतिविधियों पर करें कठोर कार्यवाही अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत के लिए हो तत्काल कार्यवाही जनहानि और पशुहानि की स्थिति में 24 घंटे में राहत उपलब्ध कराई जाए राज्य शासन हर स्थिति में किसानों के साथ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जिलों में उर्वरक वितरण के संबंध में जिला प्रशासन आवश्यक व्यवस्था बनाए। उपलब्ध उर्वरक की उचित वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से निरंतर संवाद और संपर्क में रहे। उर्वरक वितरण की व्यवस्था में किसान संगठन के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाए। जिलों में यदि उर्वरक वितरण को लेकर अव्यवस्था होती है तो उसके लिए जिला कलेक्टर उत्तरदायी होंगे। राज्य सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों और जिलों में उर्वरक वितरण की स्थिति की बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना सहित अधिकारी उपस्थित थे। सभी जिले के कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारी वर्चुअली जुड़े। किसानों को जिले में उपलब्ध उर्वरक की वास्तविक स्थिति से निरंतर करावाये अवगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों में उर्वरक उपलब्धता की सघन समीक्षा की जाए। साथ ही जिले में उपलब्ध उर्वरक के स्टॉक की जानकारी जनप्रतिनिधियों से भी साझा करें, इससे किसानों को जिले में उर्वरक उपलब्धता की वास्तविक स्थिति से अवगत कराने में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन डबल लॉक, पैक्स और निजी विक्रय केंद्रों का आकस्मिक सत्यापन और उनकी मॉनिटरिंग अनिवार्य रूप से करें। अतिरिक्त विक्रय केन्द्र की आवश्यकता होने पर उनका संचालन तत्काल आरंभ किया जाए। कृषि, सहकारी बैंक, विपणन संघ के अधिकारी निरंतर सम्पर्क में रहें। उर्वरक से संबंधित अवैध गतिविधियों के लिए हुईं 53 एफ.आई.आर और 88 लायसेंस किए निरस्त बैठक में खरीफ 2025 के लिए यूरिया, डी.ए.पी, एन.पी.के, एस.एस.पी, एम.ओ.पी तथा डी.ए.पी + एन.पी.के की उपलब्धता, ट्रांजिट की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही नेनो एवं जैविक उर्वरक वितरण कार्यक्रम के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बताया गया कि उर्वरक की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अवैध परिवहन और नकली उर्वरक आदि से संबंधित प्रकरणों पर कार्यवाही करते हुए 53 एफ.आई.आर दर्ज की गई और 88 लायसेंस निरस्ती, 102 लायसेंस निलंबन सहित 406 विक्रय प्रतिबंधित की कार्यवाही की गई। उर्वरक की बेहतर वितरण व्यवस्था में हुए नवाचारों का करें अनुसरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उर्वरक वितरण व्यवस्था के संबंध में धार, दमोह, जबलपुर और रीवा जिले के कलेक्टरों से चर्चा की। दमोह कलेक्टर ने बताया कि किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से सतत् सम्पर्क और संवाद सुनिश्चित करते हुए वितरण व्यवस्था में उनका सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही टोकन वितरण और उर्वरक वितरण को अलग-अलग किया गया है। टोकन तहसील कार्यालय से बांटे जा रहे हैं और वितरण विक्रय केन्द्रों से किया जा रहा है। जबलपुर कलेक्टर ने बताया कि किसानों के लिए टोकन वितरण की व्यवस्था फोन कॉल द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। उर्वरक वितरण केन्द्रों पर डिस्पले बोर्ड लगाए गए हैं। बोर्ड न पर टोकन नंबर प्रदर्शित कर उर्वरक वितरण किया जा रहा है। डिस्पले बोर्ड पर जिले में उपलब्ध उर्वरकों की मात्रा भी प्रदर्शित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य जिलों को भी इस प्रकार के नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। बाढ़ और अतिवृष्टि की स्थिति में सजग और सक्रिय रहे पुलिस प्रशासन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जिन-जिन क्षेत्रों में भी अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को क्षति हुई है, वहां राहत के लिए तत्काल कार्रवाई आरंभ की जाए। साथ ही जनहानि और पशु हानि की स्थिति में 24 घंटे में राहत उपलबध कराई जाए। बाढ़ के दौरान अस्थाई कैम्प व्यवस्था, राशन वितरण, भोजन वितरण आदि की त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सामग्री सभी संभावित स्थानों पर उपलब्ध हो। आगामी दिनों में भी भारी वर्षा की संभावना है। सभी जिलों में पुलिस प्रशासन सक्रिय और सजग रहते हुए पुल-पुलिया में बैरिकेटिंग और बाढ़ की स्थि‍ति में पुल क्रास न करने की चेतावनी की व्यवस्था जैसी सभी आवश्यक सावधानियां सुनिश्चित करें। प्रदेश में दर्ज की गई औसत से 21 प्रतिशत अधिक वर्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1 जून से 2 सितम्बर तक 971.5 एमएम अर्थात् 38.24 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जो औसत से 21 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के 21 जिलों में भिण्ड, छतरपुर, श्योपुर, ग्वालियर, नीमच, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, अलीराजपुर, सिंगरौली, राजगढ़, मण्डला, सीधी, टीकमगढ़, गुना, नरसिंहपुर, दतिया, रतलाम, उमरिया, रायसेन और सिवनी में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। सर्वाधिक वर्षा गुना, मण्डला, श्योपुर, रायसेन और अशोकनगर में दर्ज हुई। प्रदेश के प्रमुख बांधों में जलभराव की स्थित की जानकारी भी प्रस्तुत की गई।