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मेहनत रंग लाई पर मुनाफा गायब: फरीदाबाद में गेंदा किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम

फरीदाबाद  हरियाणा में फरीदाबाद के खेतों में इन दिनों गेंदे के पीले-नारंगी फूल दूर-दूर तक चमक रहे हैं. खेतों को देखकर कोई भी यही कहेगा कि इस बार किसान की मेहनत रंग लाई है. लेकिन इन खूबसूरत फूलों के पीछे एक किसान की चिंता छिपी है. जिस फसल से हर साल घर चलता था बच्चों की पढ़ाई होती थी और परिवार की जरूरतें पूरी होती थीं. वही फसल इस बार किसानों के लिए परेशानी बन गई है. खेतों में फूलों की भरमार है लेकिन मंडियों में इनके दाम इतने कम मिल रहे हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. किसान दिन-रात मेहनत कर रहा है लेकिन बाजार में उसकी मेहनत की कीमत नहीं मिल रही. फरीदाबाद के साहुपुरा गांव में गेंदे की खेती करने वाले किसान लक्ष्मण सिंह सैनी ने  अपनी परेशानी साझा की. लक्ष्मण ने बताया मैं पीछे से बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव का रहने वाला हूं और पिछले 30 सालों से गेंदे की खेती कर रह रहा हूं. इस बार मैंने एक एकड़ जमीन में कोलकाता की खास वैरायटी का गेंदा लगाया. बेहतर उत्पादन और अच्छे मुनाफे की उम्मीद में मैंने कोलकाता से पौधे मंगवाए. एक पौधा 70 पैसे का पड़ा और एक एकड़ में करीब 25 हजार पौधे लगाए गए. डबल लाइन में रोपाई की गई ताकि उत्पादन ज्यादा हो सके. लक्ष्मण ने बताया गेंदे की खेती आसान नहीं है. पौधे लगाने से पहले खेत की छह बार जुताई करनी पड़ी. इसके बाद डोलियां तैयार की गईं. पौध रोपाई के लिए 7 से 8 मजदूर लगाए गए जिनकी मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन रही. दिसंबर में पौधे लगाए गए थे और अब खेत फूलों से भर चुके हैं. फसल को रोज पानी देना पड़ता है. हर चौथे दिन सिंचाई करनी होती है. इतनी मेहनत और खर्च के बाद मुझे उम्मीद थी कि इस बार अच्छी कमाई होगी. लेकिन जब फूल मंडी पहुंचे तो दाम सुनकर मेरे होश उड़ गए. फरीदाबाद से लेकर दिल्ली तक गेंदे का भाव केवल 5 से 6 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. लक्ष्मण ने बताया इतने कम दाम में तो ढुलाई का खर्च भी नहीं निकलता. बाजार में यही फूलों की मालाएं 20 से 30 रुपये में बिकती हैं लेकिन खेत में पसीना बहाने वाले किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलता. इस बार गेंदे की बुवाई ज्यादा होने के कारण बाजार में आवक बढ़ गई है. मांग तो सालभर रहती है लेकिन आपूर्ति अधिक होने से दाम गिर गए हैं. कई बार यही गेंदा 200 रुपये किलो तक बिक चुका है लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं. उत्तर प्रदेश में तो कई किसानों ने फूल खेतों में ही छोड़ दिए हैं क्योंकि मंडी तक ले जाने का किराया भी नहीं निकल रहा. लक्ष्मण ने बताया मेरे मामा ने भी उत्तर प्रदेश में गेंदा लगाया था. वहां हालात और भी खराब हैं. लेकिन मैंने अपनी फसल खेत में नहीं छोड़ी. मैं रोज फूल तोड़कर मंडी ले जा रहा हूं. कुछ न कुछ तो मिल ही जाएगा. आखिर परिवार इसी खेती पर निर्भर है. सात लोगों का परिवार है और सभी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है. लक्ष्मण ने बताया इस मुश्किल समय में एक और हादसे ने मेरी परेशानी बढ़ा दी. मैं सुबह चार बजे ओल्ड फरीदाबाद मंडी फूल लेकर जा रहा था तभी रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया. पूरे शरीर में चोट आई. इसके बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी. आज भी मैं अपनी फसल मंडी पहुंचा रहा हूं. लक्ष्मण ने बताया जब उत्पादन ज्यादा होता है तो मैं दिल्ली की गाजीपुर मंडी भी लेकर जाता हूं. खेती ही मेरा जीवन है और इसी से मेरा परिवार चलता है. 30 साल के खेती के अनुभव में मैने ऐसा नुकसान पहली बार देखा है. खेतों में फूल जरूर खिले हैं लेकिन किसान के चेहरे पर मुस्कान गायब है. यही आज के किसान की सबसे बड़ी विडंबना है.

अतिक्रमण कार्रवाई पर Supreme Court of India ने हस्तक्षेप से किया इनकार

गुरुग्राम गुरुग्राम में अतिक्रमण के खिलाफ चल रही तोड़फोड़ कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या हो रही है, तो वहीं उचित मंच है जहां इस पर तत्काल सुनवाई कराई जा सकती है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के समक्ष वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने दलील दी कि गुरुग्राम में स्थानीय प्रशासन बिना नोटिस दिए तोड़फोड़ कर रहा है और यह कार्रवाई सुबह 9 बजे से जारी है. उन्होंने कोर्ट से कम से कम चार दिन के लिए यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘अगर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है तो उसे वहीं चुनौती दी जानी चाहिए. यह मांग सीधे यहां क्यों लाई गई?’ कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर निर्माण अनाधिकृत हैं और हाईकोर्ट अपने संवैधानिक दायित्व को निभा रहा है, तो सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत क्यों होनी चाहिए. याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित निर्माण पूरी तरह वैध हैं और मौके पर परिवार व बच्चे मौजूद हैं, ऐसे में तत्काल राहत जरूरी है. हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को दिन में ही हाईकोर्ट के समक्ष मेंशनिंग करने की स्वतंत्रता दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से दोपहर 1 बजे या लंच के तुरंत बाद सुनवाई का अनुरोध किया जा सकता है. अब इस पूरे मामले में अगली अहम सुनवाई हाईकोर्ट में होने की संभावना है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं.  

Haryana News: ग्रामीण जल संरक्षण को बढ़ावा, पंचायतों को मिलेगा दोगुना बजट

चंडीगढ़. हरियाणा की ग्रामीण जल व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने 'ग्रामीण जल संरक्षण अभियान' के तहत पेयजल आपूर्ति और उसके बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी सीधे ग्राम पंचायतों के हवाले कर दी है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की नई ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के साथ ही अब गांवों में पानी कब आएगा, मोटर कब चलेगी और पाइपलाइन की मरम्मत कैसे होगी, यह सब पंच-सरपंच तय करेंगे। इस कदम का सबसे क्रांतिकारी पहलू वित्तीय प्रोत्साहन है। सरकार ने ऐलान किया है कि पंचायतें जल शुल्क (Water Tax) के रूप में जितना पैसा इकट्ठा करेंगी, सरकार उतनी ही 'मैचिंग ग्रांट' उनके खाते में अलग से डालेगी। यानी गांव के विकास के लिए पंचायतों के पास अब पानी के जरिए दोहरा फंड जमा होगा। इस नई व्यवस्था में प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार से जोड़ा गया है। सरकार ने बिल वसूली के काम में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्राथमिकता दी है। अब गांव की महिलाएं घर-घर जाकर पानी के बिल कलेक्ट करेंगी। प्रोत्साहन राशि के तौर पर, वसूली गई कुल रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा सीधे इन महिलाओं के बैंक खातों में जाएगा। इससे जहां एक ओर विभाग की वर्षों से लंबित रिकवरी में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को उनके गांव में ही आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। यह मॉडल न केवल आर्थिक रूप से टिकाऊ है, बल्कि इससे जल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी भी बढ़ेगी। पंचायतों को अब केवल जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि कानूनी शक्तियां भी दी गई हैं। नए नियम के मुताबिक, किसी भी घर में नया पानी या सीवर कनेक्शन देना हो, तो अब बिस्वास (BISWAS) पोर्टल के जरिए पंचायतों के पास ही आवेदन करना होगा। इसके अलावा, गांव में चल रहे अवैध कनेक्शनों को काटने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए जुर्माना लगाने का अधिकार भी पंचायत के पास होगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर ग्रामीण को प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर स्वच्छ पेयजल मिले। शिकायतों के निपटारे के लिए अब ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंचायत स्तर पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

दुकानदारों के लिए खुशखबरी: हरियाणा सरकार ने ड्राई फ्रूट, किराना और इलेक्ट्रिकल व्यापारियों को दिया बड़ा लाभ

अमृतसर. एकतरफ जहां अमृतसर की ड्राईफ्रूट व करियाना होल सेल मंडी (मजीठ मंडी व ढाब बस्ती राम) में कारोबारी सरकार की गलत नीतियों के कारण पलायन कर रहे हैं तो वहीं भाजपा शासित हरियाणा सरकार की तरफ से अमृतसर व दिल्ली के ड्राईफ्रूट-करियाना एवं इलैक्ट्रिकल दुकानदारों को 250 से ज्यादा दुकानों की अलाटमैंट की जा रही है, जिसमें व्यापारियों को हर प्रकार की सुविधा मिलेगी। जानकारी के अनुसार भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ पंजाब के उप-प्रधान एवं द फैडरेशन ऑफ करियाना एंड ड्राइफ्रूट कमर्शियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मेहरा की तरफ से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुलाकात की गई और व्यापारियो को दरपेश आ रही समस्याओं के बारे में अवगत करवाया गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अमृतसर के ड्राईफ्रूट व करियाना कारोबारियों को हरियाणा में दुकानें अलॉट करने का ऐलान किया। बकायदा एच.एच.आई.आई.डी.सी. (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्टक्चर डिवैल्पमैंट कार्पोरेशन) की तरफ से अप्रूवल भी जारी किया गया है। 300 एकड़ से ज्यादा भूमि पर मिलेगा इंफ्रास्टक्चर हरियाणा सरकार की तरफ से 300 एकड़ से ज्यादा भूमि पर कारोबारियों के लिए इंफ्रास्टक्चर उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिसमें व्यापारियों की दुकानों के अलावा, लेबर के रहने के लिए क्वार्टर, खाना खाने के लिए हाल, सिक्योरिटी गार्डर्स व हर प्रकार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। अफगानिस्तान से आयात बंद होने के कारण आई.सी.पी. बंद ड्राईफ्रूट मंडी मजीठ मंडी की बात करें तो आई.सी.पी. अटारी बार्डर के जरिए अफगानिस्तान से भारी मात्रा में अमृतसर व उत्तर भारत के कारोबार ड्राईफ्रूट का आयात करते रहे हैं, लेकिन पहले पुलवामा हमले व फिर पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के साथ कारोबारी रिश्ते बिल्कुल खत्म हो चुके हैं और पाकिस्तान के रास्ते आई.सी.पी. अटारी पर आने वाले ड्राईफ्रूट के ट्रकों को भी पाकिस्तान रास्ता नहीं देता है, जिससे व्यापारियों को भारी नुक्सान हो रहा है और दुबई के रास्ते ड्राईफ्रूट आयात किया जा रहा है, जिससे खर्च बहुत ज्यादा आता है और इसका असर ग्राहक पर भी पड़ता है, क्योंकि जितना ज्यादा खर्च आएगा उतनी ज्यादा कीमत पर ग्राहकों को ड्राईफ्रूट बेचा जाएगा। वॉल्ड सिटी के अन्दर होने के कारण मजीठ मंडी में रास्ते तंग ढाब बस्ती राम व ड्राईफ्रूट की मजीठ मंडी की बात करें तो इस ऐतिहासिक मंडियों को वॉल्ड सिटी के अन्दर बसाया गया था और जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गई, वैसे-वैसे वाल्ड सिटी के अन्दर बसी इन मंडियों में आना-जाना आसान नहीं रहा और लेबर को मंडी में जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि यह व्यापारियों पर निर्भर करता है कि वह अमृतसर में ही काम करना चाहते हैं या फिर हरियाणा में दुकानें खरीदकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसका नाकारात्मक पक्ष यह भी जरुरी है कि यदि व्यापारियों को दूसरे राज्य में पलायन होता है तो शहर की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है, क्योंकि पहले ही सरकार की गलत नीतियों के कारण अमृतसर की इंडस्ट्री हिमाचल व अन्य राज्यों में पलायन कर चुकी हैं। मोदी सरकार व्यापारी हितैशी : अनिल मेहरा अनिल मेहरा ने कहा कि मोदी सरकार व्यापारी हितैषी है और व्यापारियों के हितों के लिए लगातार काम कर रही है। केन्द्र सरकार सबका साथ और सबका विकास के लक्षय पर काम कर रही है।

कांग्रेस पर बरसे Nayab Singh Saini, बोले—पंचर तर्क देने वाले पार्किंग में ही नजर आते हैं

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा के आज बुलाए गए विशेष सत्र में कांग्रेस ने कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। कांग्रेस विधायकों की बैठक में सदन में शामिल न होने का निर्णय लिया गया, जिसके बाद पार्टी ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने और 'समांतर सदन' चलाने की घोषणा की है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पार्टी के तमाम विधायकों के साथ विधानसभा की मीडिया गैलरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस आज की सदन की कार्यवाही का पूरी तरह से बायकॉट कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार सदन में जिन विषयों को लेकर आ रही है, उनका विधानसभा से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह से राजनीतिक विषय हैं। क्रॉस वोटिंग वाले विधायकों की सदन में मौजूदगी कांग्रेस द्वारा बायकॉट के इस फैसले के बीच एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। क्रॉस वोटिंग करने वाले तीन कांग्रेस विधायक – रेणु वाला, जरनैल सिंह और शैली चौधरी – विधानसभा सदन में पहुंचे। वे कुछ देर वहां बैठे भी, लेकिन बाद में वापस चले गए। लेकिन फिर दोबारा आकर बैठ गए। सदन में शोक प्रस्ताव और सरकार की प्रतिक्रिया सदन के अंदर कार्यवाही जारी रही, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शोक प्रस्ताव पेश किया। सदन में यह शोक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। वहीं, कांग्रेस के इस रवैये पर कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पवार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "जब देश हित की बात आती है, तो कांग्रेस अक्सर वॉकआउट करके बाहर चली जाती है।" मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महिलाओं को समान अवसर दिए बिना समाज का विकास अधूरा है। उन्होंने हरियाणा में पिछले साढ़े 11 वर्षों में लिंगानुपात के 871 से बढ़कर 923 होने और महिलाओं की खेल में उपलब्धियों का जिक्र किया। साथ ही, 'लखपति दीदी', 'ड्रोन दीदी' योजनाओं और 33 महिला थानों के जरिए महिलाओं को सशक्त करने की बात कही। उन्होंने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत महिलाओं को 33% आरक्षण मिलना था, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध कर महिलाओं के प्रति अपना चेहरा उजागर किया है। आज के विशेष सत्र में भी विपक्ष ने वॉकआउट कर वैसा ही रवैया अपनाया, जैसा केंद्र में है। मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की। विधानसभा के बाहर पार्किंग में सदन चला रही कांग्रेस हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र का कांग्रेस ने बहिष्कार कर दिया है और विधानसभा परिसर की पार्किंग में ही 'समानांतर सदन' शुरू कर दिया है। पूर्व स्पीकर रघुवीर कादियान इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे हैं। इस समानांतर सदन में कांग्रेस विधायक महिला आरक्षण बिल 2023, एसवाईएल (SYL) और नशा जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। सदन की स्पीकर गैलरी में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। सरकार पर असंवैधानिक काम का आरोप कांग्रेस विधायक भारत भूषण बतरा ने सरकार पर संसदीय परंपराओं का मजाक बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर ऐसे मुद्दे उठा रही है जो केंद्र के अधीन आते हैं। बतरा ने दावा किया कि महिला आरक्षण बिल का गिरना पहले से तय था क्योंकि सरकार के पास बहुमत नहीं था। वहीं, विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि बीजेपी द्वारा लाया जा रहा निंदा प्रस्ताव उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और यह पूरी तरह से असंवैधानिक है, जिसके विरोध में कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार किया है। बिल को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस किसी भी असंवैधानिक काम का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जो बिल 2023 में पास हो चुका है, सरकार उस पर अब क्यों झगड़ा कर रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना जनगणना के संशोधन बिल लाकर इसे 10 साल तक लटकाना चाहती है। हुड्डा ने कहा कि अगर बीजेपी की नीयत ठीक है तो इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। राव नरेंद्र सिंह ने भी तर्क दिया कि अगर बीजेपी चाहे तो मौजूदा 543 विधायकों में से ही आरक्षण देकर कानून लागू कर सकती है, लेकिन उनकी नीयत ठीक नहीं है। महिलाओं का सम्मान और कांग्रेस का इतिहास भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि महिलाओं का वास्तविक सम्मान कांग्रेस ने किया है। उन्होंने याद दिलाया कि देश की पहली महिला मुख्यमंत्री, महिला स्पीकर और राष्ट्रपति कांग्रेस ने ही बनाईं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सीटों में उलझाने की बजाय उन्हें उनका वाजिब हिस्सा मिलना चाहिए। हुड्डा ने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि 1996 में देवगौड़ा सरकार के समय से ही वे बिल पर चर्चाओं का हिस्सा रहे हैं। अन्य राजनीतिक मुद्दों पर कांग्रेस की राय सत्र के दौरान कांग्रेस ने अन्य मुद्दों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जेजेपी को बीजेपी की 'बी-टीम' करार दिया। वहीं, ग्रुप डी के प्रमोशन के मुद्दे पर कांग्रेस ने कहा कि वे इसके खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि अगर सरकार कौशल रोजगार निगम के जरिए लगे 1 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को नियमित करने का बिल लाएगी, तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। अंत में, कांग्रेस ने सदन से निष्कासित विधायकों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर वे बीजेपी के पक्ष में बोलना चाहते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए। कांग्रेस से निलंबित विधायक जरनैल सिंह ने क्या कहा? कांग्रेस से निलंबित विधायक जरनैल सिंह ने पार्टी द्वारा महिला आरक्षण से जुड़े निंदा प्रस्ताव के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जरनैल सिंह ने कहा कि कांग्रेस का इस प्रस्ताव का विरोध करना गलत है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि पार्टी ऐसा क्यों कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सदन के बाहर चर्चा करने के बजाय अपनी बात सदन के भीतर रखनी चाहिए थी। उनके अनुसार, कांग्रेस पार्टी को इस बिल का विरोध नहीं करना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि अब वे किस मुंह से महिलाओं से वोट मांगने जाएंगे। जरनैल सिंह ने स्पष्ट किया कि वे 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर आए निंदा प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। अपने निलंबन के मुद्दे पर खुलकर बात करते हुए जरनैल … Read more

बच्चों की सेहत से खिलवाड़! मिड-डे-मील में परोसी जा रही खराब पिन्नी पर उठे सवाल

हिसार. नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है लेकिन मिड डे मील के तहत स्कूलों में दिए जाने वाले खाद्य सामग्री के खराब हालात आज भी ज्यों-की-त्यों हैं। ताजा मामला गांव बुगाना स्थित राजकीय हाई स्कूल, गांव खेड़ी बरखी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित अन्य सरकारी स्कूलों का है, जहां नए सत्र के प्रथम माह में ही मिड-डे-मील के तहत फफूंदी युक्त पिन्नी पहुंचाई जा रही है। जिले के पहली से आठवीं कक्षा के कुल सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 61,065 बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लग गया है। जिला के मौलिक शिक्षा अधिकारी रामरतन ने कहा कि संबंधित बीईओ से मामले की जानकारी ली जाएगी। अगर फफूंदी युक्त पीनी स्कूलों में आ रही है तो मुख्यालय को मामले से अवगत कराया जाएगा। किसी भी हाल में बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जाएगा। पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों का आंकड़ा कक्षा     विद्यार्थियों की संख्या पहली     5,296 दूसरी     6,346 तीसरी     6,182 चौथी     5,943 पांचवीं     8,772 छठी     7,123 सातवीं     10,453 आठवीं     10,950 कुल     61,065 कंपनियों से टेंडर नहीं किए रद बीते सत्र में हरियाणा एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन लिमिटेड व हरहित स्टोर के खिलाफ खराब गुड़ वितरित करने और स्कूलों में जरूरत से ज्यादा खाद्य सामग्री बांटने की घटनाएं सामने आई। लेकिन निदेशालय ने बिना परवाह किए हरहित स्टोर से सामान लेने के आदेश जारी रखें। न कोई कार्रवाई हुई और न ही बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए टेंडर रद किए। खास बात है कि बीते शैक्षणिक सत्र में उपरोक्त को लोकल मार्केट से गुड़ खरीदने की छूट दी। जबकि शेष सामग्री हरियाणा एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन लिमिटेड व हरहित स्टोर से लेने के लिए ही आदेश दिए गए। लेकिन दोनों कंपनियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। जिसका परिणाम इस बार भी स्कूलों में देखने को मिल रहा है।

भारत के Sujit Kalkal ने रचा इतिहास, वर्ल्ड नंबर-1 बनकर ओलंपिक की राह की मजबूत दावेदारी

चरखी दादरी. जिले के गांव इमलोटा निवासी पहलवान सुजीत कलकल लगातार सफलता के नए अध्याय लिखते जा रहे हैं। वे एक के बाद एक सफलता हासिल कर देश के लिए मेडल हासिल कर रहे हैं। उनके इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की नई रैंकिंग में वे टॉप पर पहुंचे है और दुनिया के नंबर वन पहलवान बन गए हैं। खेल प्रेमियों में उनकी इस उपलब्धि से खुशी का माहौल है। उन्होंने इसे जिला दादरी व देश-प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया। उल्लेखनीय है कि भारतीय युवा पहलवान सुजीत कलकल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड रेसलिंग रैंकिंग में नंबर-वन स्थान हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। 65 किलोग्राम भारवर्ग में खेलते हुए सुजीत कलकल ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर बड़े नामी पहलवानों को मैट पर पछाड़ते हुए अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित बड़ी प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए। नंबर वन पहलवान बने सुजीत उसी का परिणाम है, जिसने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचा दिया। उनकी इस खेल उपलब्धि पर खेल प्रेमियों और कुश्ती जगत से जुड़े लोगों ने खुशी जाहिर की है। कोचों और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुजीत इसी तरह प्रदर्शन करते रहे, तो आने वाले दिनों में देश की झोली में अनेक गोल्ड मेडल डालने का काम करेंगे। सुजीत कलकल का नंबर-वन बनना न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारतीय कुश्ती के बढ़ते स्तर और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मजबूती का भी प्रतीक है। उनकी इस उपलब्धि से देशभर के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। लगातार जीत चुके हैं 6 गोल्ड मेडल: कोच सुजीत कलकल के पिता एवं कोच दयानंद कलकल ने बताया कि सुजीत शानदार लय में चल रहे हैं। उन्होंने बीते करीब एक साल के दौरान जिस भी इंटरनेशनल चैंपियनशिप में शिरकत की है उसमें गोल्ड मेडल हासिल किया है। उन्होंने बताया कि डबल लेग होल्ड, फीतले बांधना व भारंदाज उनके प्रमुख दांव-पेंज हैं। जिनके दम पर वे लगातार जीत हासिल करते हुए लगातार छह गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि 2025 में सीनियर वर्ल्ड रैंकिंग में दो बार गोल्ड मेडल, अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड, वर्ल्ड सीनियर रैंकिंग चैंपियनशिप में दो गोल्ड और अब सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड सहित लगातार छह गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। उम्मीद है कि वे जीत के इस सफर को जारी रखेंगे और अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए मेडल हासिल कर देश, प्रदेश व दादरी जिले का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि सुजीत ने अपने खेल प्रदर्शन से साबित कर दिया है कि वे ओलिंपिक में मेडल जीतने का मादा रखते हैं। देश को सुजीत से बड़ी उम्मीदें: योगेश जिला कुश्ती संघ के सचिव योगेश इमलोटा ने कहा कि सुजीत कलकल ने जिस प्रकार का प्रदर्शन किया है उससे देश के खेल प्रेमियों को इस युवा पहलवान से बड़ी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार जीत हासिल कर जिस लय में आगे बढ़ रहे हैं उसको देखकर कहा जा सकता है कि ओलिंपिक का पदक अब उनसे दूर नहीं हैं। उन्होंने जिला कुश्ती संघ की ओर से सुजीत को नंबर वन रैंकिंग हासिल करने पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह देश, प्रदेश व जिले के लिए गर्व की बात है।

1857 की क्रांति को डिजिटल रूप में दिखाएगा भव्य शहीद स्मारक

अंबाला  मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से 1857 की क्रांति और अंबाला के शहीद स्मारक के जिक्र ने इस परियोजना की जिज्ञासा को बढ़ा दिया है। 600 करोड़ रुपये की लागत से अंबाला-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंतरराष्ट्रीय शहीदी स्मारक बनाया जा रहा है। यह स्मारक आजादी की पहली लड़ाई को प्रदर्शित करेगा और अनसंग नायकों के बारे में बताएगा। शहीद स्मारक का कार्य पूर्ण हो चुका है और अब आधिकारिक रूप से उद्घाटन के लिए यह तैयार है। अहम बात है कि इस स्मारक की परिकल्पना कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने की थी। स्मारक का सही से संचालन हो इसके लिए अनिल विज के कहने पर यहां पर करीब 27 कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। इनकी भर्ती परियोजना की नोडल एजेंसी कर रही है। डिजिटल माध्यम से दिखेगी क्रांति की गाथा  स्मारक के भीतर वीरों की गाथा को डिजिटल फिल्मों और ऑडियो के माध्यम से हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यहां पर्यटकों के लिए इंटरप्रेटेशन सेंटर, म्यूजियम, ओपन एयर थिएटर, मेमोरियल टावर और हेलीपैड जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। निर्माण एजेंसी उद्घाटन के बाद तीन साल तक स्मारक का रखरखाव करेगी।  

बदले पैटर्न ने बढ़ाई मुश्किल, अभ्यर्थियों ने बताया पेपर रहा कठिन

अंबाला  हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को हुई। परीक्षा देकर केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। बातचीत में अधिकांश परीक्षार्थियों ने स्वीकार किया कि इस बार का पेपर न सिर्फ कठिन था बल्कि सवालों का पैटर्न पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। वहीं एलाइड सर्विस के प्रश्नपत्र से विद्यार्थी खुश नजर आए। इस परीक्षा के लिए दोनों पालियों में 8712 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। यह आया कठिन अभ्यर्थियों के मुताबिक, सामान्य अध्ययन के पेपर में सीधे सवाल पूछने के बजाय कथन और निष्कर्ष और जोड़े मिलाओ वाले सवालों की भरमार थी। भूगोल में महासागरीय धाराओं और खनिज क्षेत्रों कुद्रेमुख, बालाघाट पर आधारित सवालों ने अभ्यर्थियों को परेशानी में डाला। रसायन विज्ञान में मेथनॉल की विषाक्तता और कोलाइड्स से जुड़े तकनीकी सवालों का स्तर काफी ऊंचा रहा। वहीं राज्य की संस्कृति से जुड़े सवालों में लूर नृत्य और झाड़ू फिरी जैसी रचनाओं के मिलान ने भी परीक्षार्थियों को उलझाए रखा। पेपर काफी विस्तृत था। खासकर कथन-1 और कथन-2 वाले सवालों में बहुत समय बर्बाद हुआ। अगर कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं है, तो तुक्का लगाना नामुमकिन था।  अमित कुमार, अभ्यर्थी उकलाना एचपीएससी अब पूरी तरह यूपीएससी के पैटर्न को फॉलो कर रहा है। इकोनॉमिक्स में बेरोजगारी और जीडीपी से जुड़े सवाल बेसिक लग रहे थे लेकिन उनके विकल्प बहुत उलझाने वाले थे।  स्नेहा, अभ्यर्थी पिंजौर नेगेटिव मार्किंग का डर परीक्षा में 0.25 अंकों की नेगेटिव मार्किंग और पांचवें विकल्प (ई) की अनिवार्यता ने भी छात्रों पर मानसिक दबाव बनाए रखा। कई छात्रों ने बताया कि समय कम होने के कारण वे भूगोल और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कुछ सवाल हल नहीं कर पाए। वहीं कोचिंग विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने बताया कि पेपर का स्तर काफी कठिन श्रेणी में था। ऐसे में इस बार सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ पिछली बार के मुकाबले कम रहने का अनुमान है। कुल 100 सामान्य अध्ययन के प्रश्नों के उत्तर के लिए 2 घंटे का समय निर्धारित किया गया था। इस बार की परीक्षा में हरियाणा की संस्कृति और वैश्विक पर्यावरण समझौतों पर अधिक ध्यान दिया गया। प्रशासन ने की थी हाई-टेक व्यवस्था जिले के 31 केंद्रों पर रविवार को एचसीएस की प्रारंभिक परीक्षा तकनीक के चक्रव्यूह में संपन्न हुई। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार हाई-टेक व्यवस्था अपनाई। केंद्रों के गेट पर अभ्यर्थियों का पहले फेस स्कैन किया गया, फिर बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान मिलने के बाद ही एंट्री दी गई। केंद्रों के पास धारा 163 लागू रही और फोटोस्टेट की दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस बल और कंट्रोल रूम के जरिए परीक्षा पर नजर रखी गई। एलाइड सर्विसीज की प्रारंभिक परीक्षा रही आसान जिले में रविवार को आयोजित एलाइड सर्विसीज की प्रारंभिक परीक्षा उम्मीद से कहीं ज्यादा सरल रही। प्रश्नपत्र का स्तर आसान होने के कारण अधिकतर अभ्यर्थियों ने निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले ही अपनी ओएमआर शीट जमा कर दी। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते ही युवा अपने साथियों के साथ उत्तरों का मिलान करने और अंकों का गणित जोड़ने में व्यस्त हो गए। अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रश्नपत्र काफी संतुलित था। विशेषकर इतिहास और डाक विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों ने परीक्षार्थियों को बड़ी राहत दी। बंगाल का विभाजन और सुभाष चंद्र बोस के नारे जैसे सीधे सवालों ने स्कोरिंग को आसान बना दिया। वहीं, डाक नियमों से जुड़े तकनीकी सवाल भी विभागीय तैयारी करने वाले छात्रों के लिए सरल रहे।  

नारी शक्ति वंदन विधेयक पर सियासी संग्राम, भाजपा लाएगी निंदा प्रस्ताव

चंडीगड़ हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शोक प्रस्ताव पढ़ रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार कर दिया है।  नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई। हुड्डा साढ़े 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। भाजपा नारी शक्ति वंदन विधेयक पर कांग्रेस की भूमिका के खिलाफ सदन में निंदा प्रस्ताव लेकर आएगी। कांग्रेस ने इसे नियमानुसार गलत बताते हुए विरोध करने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामा तय है। कांग्रेस विधायक आफताब अहमद के मुताबिक पार्टी देशभर में लोकसभा की 543 सीटों में से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने और यही व्यवस्था सभी राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने का प्रस्ताव लाएगी। भाजपा सरकार कांग्रेस की इसी भूमिका को लेकर निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। सरकार का तर्क है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले ही महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का रास्ता साफ कर चुका है इसलिए कांग्रेस का रुख विरोधाभासी है। सत्र में एक अहम विधेयक भी पेश किया जाएगा। हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 को कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए क्लर्क पद पर प्रमोशन का कोटा 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी किया जाएगा। साथ ही 5 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति का पात्र माना जाएगा और 5 फीसदी एक्स-ग्रेशिया पद भी अनिवार्य होंगे। निलंबित विधायकों पर नजर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप में निलंबित पांचों विधायक शैली चौधरी, रेनू बाला, मोहम्मद इसराइल, मोहम्मद इलियास और जरनैल सिंह को भी विधायक दल की बैठक में शामिल होने का संदेश भेजा गया है। इन पांचों विधायकों पर बैठक में शामिल होने से लेकर सदन तक में सभी नजर रहेंगी।