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भोजशाला मामले में सुनवाई का चौथा दिन, हिंदू पक्ष ने ASI रिपोर्ट से अपने तर्कों को किया मजबूत

धार  इंदौर हाई कोर्ट में धार भोजशाला विवाद मामले की सुनवाई चौथे दिन भी जारी रही. सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार की ओर से अधिवक्ता विष्णु जैन ने भोजशाला को मंदिर साबित करने के लिए कई अहम तर्क कोर्ट के समक्ष रखे।  हिंदू पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला परिसर से जुड़े कई तथ्यों का हवाला दिया. अधिवक्ता विष्णु जैन ने कोर्ट को बताया कि सर्वे रिपोर्ट में ऐसे कई संकेत मिले हैं, जो इस स्थल के मंदिर स्वरूप की ओर इशारा करते हैं।  सुनवाई के दौरान रिपोर्ट के अलग-अलग बिंदुओं को विस्तार से कोर्ट के सामने पेश किया गया. इनमें परिसर में मिली मूर्तियों, स्तंभों (पिलर), संस्कृत श्लोकों और अन्य स्थापत्य अवशेषों का उल्लेख किया गया।  हिंदू पक्ष ने यह भी दलील दी कि किसी मंदिर परिसर में दो अलग-अलग शैली और बनावट वाली दीवारों का होना कई ऐतिहासिक बदलावों की ओर संकेत करता है. वहीं, हिंदू पक्ष की इन दलीलों पर ASI ने आपत्ति दर्ज कराई।  हिंदू पक्ष ने दी दलील सुनवाई के दौरान रिपोर्ट के विभिन्न बिंदुओं को विस्तार से पेश किया गया. हिंदू पक्ष ने यह भी दलील दी कि किसी परिसर में अलग-अलग शैली और बनावट वाली दीवारों का होना ऐतिहासिक परिवर्तनों और संरचनात्मक बदलावों का संकेत देता है, जो मंदिर से जुड़े इतिहास की पुष्टि कर सकता है।  ASI ने जताई आपत्ति हालांकि, हिंदू पक्ष के इन तर्कों पर ASI ने आपत्ति जताई। ASI की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उसकी सर्वे रिपोर्ट पर फिलहाल किसी अन्य पक्ष द्वारा तर्क प्रस्तुत नहीं किए जाने चाहिए। संस्था ने स्पष्ट किया कि जब रिपोर्ट पर औपचारिक सुनवाई होगी, तभी सभी पक्ष अपने-अपने तर्क विस्तार से रख सकेंगे। आज की सुनवाई में हिंदू पक्ष द्वारा दाखिल एक याचिका पर बहस पूरी हो गई है. कोर्ट अब अगली सुनवाई में हिंदू पक्ष की दूसरी याचिका पर विचार करेगा, जिसमें मामले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर दलीलें दी जाएंगी. धार की Bhojshala को लेकर यह विवाद लंबे समय से संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व का विषय बना हुआ है. ऐसे में हाई कोर्ट की कार्यवाही पर सभी पक्षों और आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।  ASI की ओर से कोर्ट से कहा गया कि फिलहाल उसकी सर्वे रिपोर्ट पर किसी अन्य पक्ष की ओर से तर्क पेश न किए जाएं. ASI ने स्पष्ट किया कि जब उसकी रिपोर्ट पर औपचारिक सुनवाई होगी, तब सभी पक्ष अपने-अपने तर्क विस्तार से रख सकेंगे।  आज की सुनवाई में हिंदू पक्षकार की ओर से दाखिल एक याचिका पर बहस पूरी हो गई. अब शुक्रवार से हिंदू पक्ष की दूसरी पिटीशन पर सुनवाई शुरू होगी, जिसमें मामले से जुड़े अन्य बिंदुओं पर दलीलें रखी जाएंगी।  धार भोजशाला विवाद लंबे समय से संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व का मामला बना हुआ है, ऐसे में हाई कोर्ट की सुनवाई पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। 

उज्जैन में आकार ले रहा सांस्कृतिक एकता का प्रतीक पी.एम. एकता मॉल

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना को साकार करने मध्यप्रदेश का 'पी.एम. एकता मॉल' उज्जैन के हरिफ़ाटक रोड पर तीव्र गति से आकार ले रहा है। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित किया जा रहा यह मॉल न केवल व्यापारिक केंद्र होगा, बल्कि भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और कलात्मक विविधता का जीवंत प्रतीक भी बनेगा। साथ ही श्री महाकाल महालोक की वास्तुकला और आधुनिक सुविधाओं का अदभुत संगम भी होगा। प्रमुख विशेषताएं और स्थापत्य कला लागत और क्षेत्रफल: इस भव्य मॉल का निर्माण ₹284 करोड़ की लागत से लगभग 3.2 हैक्टेयर भूमि पर किया जा रहा है, जिसका कुल निर्माण क्षेत्र 5.50 लाख वर्गफुट है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक झलक: मॉल का डिज़ाइन उज्जैन की पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें श्री महाकाल महालोक की वास्तुकला की झलक दिखाई देगी। भव्य प्रवेश द्वार: मॉल का मुख्य प्रवेश द्वार 60 फीट ऊँचा होगा, जिसे जैसलमेर येलो सैंड स्टोन से बनाया जा रहा है। प्रवेश द्वार पर पिंक सैंड स्टोन से निर्मित 12 फीट ऊँची और 12 फीट लंबी दो नंदी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। अशोक स्तंभ और विविधता के स्तंभ: मुख्य द्वार पर 28 फीट ऊँचा ब्राँज़ धातु का अशोक स्तंभ स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही देश के प्रत्येक राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विशिष्ट स्तंभ भी बनाए जाएंगे। एक ही छत के नीचे पूरा भारत राज्यों की भागीदारी: देश के प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों की बिक्री के लिए 1050 वर्गफुट की 36 दुकानें बनाई जा रही हैं। मध्यप्रदेश के जिलों का प्रतिनिधित्व: प्रदेश के सभी जिलों के स्थानीय उत्पादों (ODOP) को बढ़ावा देने के लिए 300 वर्गफुट की 55 दुकानें आवंटित की जाएंगी। कलात्मक साज-सज्जा: मॉल के कन्वेंशन सेंटर की फाल्स सीलिंग में मधुबनी, कलमकारी, पिछवाई और बंगाल पट्टचित्र जैसी प्रसिद्ध पारंपरिक चित्रकला शैलियों का उपयोग किया जाएगा। आधुनिक सुविधाएं और मनोरंजन कन्वेंशन सेंटर: मॉल में 1500 सीट क्षमता वाला विशाल हॉल, 53 सुसज्जित कमरे, एक कॉन्फ्रेंस हॉल और 3 मीटिंग हॉल उपलब्ध होंगे। मनोरंजन और खान-पान: परिसर में 2 मल्टीप्लेक्स (250 क्षमता), 27 फूड जोन शॉप्स, 3 रेस्टोरेंट, 2 गेम जोन और एक मिलेट लोक (1200 वर्ग फीट) विकसित किया जा रहा है। पार्किंग और सुगमता: आगंतुकों की सुविधा के लिए 400 चार पहिया और 200 दो पहिया वाहनों की बेसमेंट पार्किंग, 12 एस्केलेटर और 13 लिफ्ट की व्यवस्था की गई है। लक्ष्य और वर्तमान स्थिति वर्तमान में एकता मॉल का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है और लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। प्राधिकरण द्वारा शेष कार्य को जुलाई 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद यह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा।  

इंदौर में बड़ा गणपति चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण में देरी, सीवर शिफ्टिंग और ट्रैफिक डायवर्टेशन बनीं बड़ी बाधा

इंदौर। इंदौर के व्यस्त बड़ा गणपति चौराहे पर प्रस्तावित फ्लाईओवर का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। करीब डेढ़ साल पहले इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीन पर काम शुरू होने में तकनीकी और यातायात से जुड़ी बाधाएं सामने आ रही हैं। लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस फ्लाईओवर के लिए सबसे बड़ी चुनौती सीवर और पानी की लाइनों को शिफ्ट करना है। एक साल से इसकी प्रक्रिया जारी है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पा रहा है। फ्लाईओवर निर्माण के लिए चौराहे पर करीब 800 मीटर लंबी ट्रांजिट सीवर लाइन और 500 मीटर पानी की लाइन हटाई जानी है। इसके लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए आइडीए ने करीब छह माह पहले दो करोड़ रुपये के करीब राशि नगर निगम को हस्तांतरित कर दी है। 15 दिनों में लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू होगा संभावना है कि अगले 15 दिनों में लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू हो जाएगा। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वर्षाकाल से पहले सीवरेज और पानी की लाइनों का काम पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें और संसाधन लगाए जाएं, ताकि निर्माण कार्य समय पर पूरा हो सके और सिंहस्थ से पहले फ्लाईओवर तैयार किया जा सके। यातायात परिवर्तन चुनौती चौराहा पर लाइन शिफ्टिंग के साथ ही निर्माण कार्य शुरू करना मुश्किल होगा, क्योंकि इससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। बड़ा गणपति चौराहा शहर का महत्वपूर्ण ट्रैफिक पाइंट है, जहां से महू नाका, पश्चिमी रिंग रोड से एयरपोर्ट की ओर जाने वाले वाहन गुजरते हैं। इस यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करना भी बड़ी चुनौती है। अधिकारियों का मानना है कि चंदन नगर से कालानी नगर तक बनने वाली सड़क पूरी होने के बाद ट्रैफिक को वहां डायवर्ट किया जा सकता है। गत दिनों हुई बैठक में भी इसका सुझाव दिया गया है कि इस सड़क के तैयार होने के बाद ही फ्लाईओवर निर्माण शुरू किया जाए।

रायपुर की बैंक सखी आशा एक्का ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की, 5 करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन

रायपुर : बैंक सखी बन आशा एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत, 5 करोड़ से अधिक का किया ट्रांजेक्शन बुजुर्गों और असहाय के लिए सहारा बनीं बैंक सखी आशा एक्का ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डिजिटल क्रांति से जोड़ रही बिहान की दीदीयां रायपुर ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण और डिजिटल बैंकिंग को घर-घर पहुंचाने में 'बिहान' की दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम कांति प्रकाशपुर की रहने वाली आशा एक्का आज जिले की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो घर की चारदीवारी से निकलकर आर्थिक आजादी की राह चुनना चाहती हैं। बैंक सखी और बैंक मित्र के रूप में सेवा वर्ष 2017 से 'बिहान' (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ी आशा एक्का ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा का सदुपयोग करते हुए बैंक सखी और बैंक मित्र की जिम्मेदारी संभाली। वे न केवल एक गृहिणी हैं, बल्कि गाँव की बैंकिंग व्यवस्था की मुख्य कड़ी बन चुकी हैं। आशा बताती हैं कि उनके पति छोटे किसान हैं और घर पर किराना दुकान चलाते हैं, लेकिन बिहान से जुड़ने के बाद उनकी पहचान और आमदनी दोनों में बड़ा बदलाव आया है। बुजुर्गों और असहाय के लिए बनीं सहारा आशा का कार्य केवल ट्रांजेक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सेवा भाव से भी कार्य कर रही हैं। गाँव की बुजुर्ग महिलाएँ जिन्हें पेंशन लेने दूर जाना पड़ता है या मनरेगा के मजदूर जिन्हें मजदूरी भुगतान के लिए बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं, आशा उन सभी का भुगतान गाँव में ही सुनिश्चित करती हैं। वे कहती हैं, "जो लोग बैंक आने-जाने में असमर्थ हैं, मैं उनके घर जाकर बैंकिंग सेवा प्रदान करती हूँ। जब वे खुशी से दुआएं देते हैं, तो काम की थकान मिट जाती है।" 5 करोड़ का ट्रांजेक्शन और आत्मनिर्भरता श्रीमती आशा एक्का अब तक लगभग 5 करोड़ रुपये का वित्तीय ट्रांजेक्शन कर चुकी हैं। इस कार्य से उन्हें हर  महीने 10 से 12 हजार रुपये की सम्मानजनक आय हो रही है। इस आर्थिक संबल से वे अपने दो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला पा रही हैं।  शासन की योजनाओं का जताया आभार अपनी सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को देते हुए आशा ने कहा कि बिहान योजना ने हम जैसी गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार करते हुए कहा कि आज हम जैसी हजारों ग्रामीण महिलाएं महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण पेश कर रही हैं, जो न केवल अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डिजिटल क्रांति से भी जोड़ रही हैं।

नवीन शिक्षा नीति विद्यार्थियों को रोजगारमूलक शिक्षा प्रदान करने और संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का कर रही है कार्य : स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह

भोपाल.  स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने गुरुवार को शाजापुर जिले में 58 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सरदार वल्लभ भाई पटेल सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्कूल की अरूण एवं उदय कक्षा का अवलोकन कर विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को नए भवन की शुभकामनाएं दी। छोटे-छोटे बच्चों ने अपने हाथों से बनाए पुष्पगुच्छ भेंटकर मंत्री सिंह का स्वागत किया। इसके उपरांत मंत्री सिंह ने प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में सहभागिता की। नवीन भवन के शुभारंभ अवसर पर मंत्री सिंह ने कहा कि यह दिन विद्यालय परिवार के लिए ऐतिहासिक है। आने वाले अनेक दशकों तक विद्यार्थी इस नवीन सांदीपनि विद्यालय में अध्ययन कर अपने भविष्य का निर्माण करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से शिक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है। मध्यप्रदेश इस नीति के क्रियान्वयन में अग्रणी राज्य रहा है। नवीन शिक्षा नीति विद्यार्थियों को रोजगारमूलक शिक्षा प्रदान करने के साथ ही उन्हें अपनी संस्कृति एवं पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। प्रदेश में शासकीय विद्यालयों के परिणाम निरंतर बेहतर हो रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में सांदीपनि विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही विद्यालयों में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, साइकिल वितरण, विद्युत व्यवस्था, भवन निर्माण एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं निर्धारित समयावधि में उपलब्ध कराई जा रही हैं। मंत्री सिंह ने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और व्यक्ति जीवनभर सीखता रहता है। विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए मंत्री सिंह ने कहा कि वे भविष्य में वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़कर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। कार्यक्रम के दौरान विधायक अरूण भीमावद की मांग पर मंत्री सिंह ने नवीन सांदीपनि विद्यालय भवन के लिए पानी की टंकी निर्माण, बहुउद्देशीय हॉल के लिए आधुनिकीकरण, सरदार वल्लभ भाई पटेल की 25 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना, कक्षाओं के लिए शेष फर्नीचर उपलब्ध करने सहित  जिले के अन्य विद्यालयों के विकास के लिए करोड़ों रुपए की राशि देने की घोषणा की। गरीबी रेखा के नीचे और मध्यम वर्गीय परिवार का सपना पूरा कर रही सरकार कार्यक्रम के दौरान विधायक अरूण भीमावद ने कहा कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले एवं मध्यम वर्गीय परिवार का सपना था कि निजी विद्यालय की तर्ज पर शासकीय स्कूल भवन हो, अच्छी शिक्षा और अच्छे शिक्षक मिले, यह सपना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के नेतृत्व में साकार हुआ हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिले में और भी सांदीपनि विद्यालय भवन बनेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में अमूलचूल परिवर्तन जिले में दिखाई दे रहा हैं। इस नवीन विद्यालय भवन में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के विद्यार्थी अध्ययन करेंगे। क्षेत्रीय सांसद महेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शाजापुर सहित प्रदेश के सभी जिले शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहे हैं।  प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल रहा है। उन्होंने शिक्षकों एवं अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दें। बच्चों को देश सेवा की भावना, नशे से दूर रहने, यातायात नियमों एवं कानून का पालन करने के प्रति जागरूक बनाएं। उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करें। बच्चों का सर्वांगीण विकास भारतीय संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए। जब बच्चे अपनी संस्कृति और मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे तभी उनमें से श्रेष्ठ डॉक्टर, वकील, इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रतिभाएं विकसित होंगी। जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र शिप्रे ने जिले की शिक्षण व्यवस्था की प्रगति एवं उपलब्धियों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। विद्यार्थियों को पाठयपुस्तकों का किया वितरण कार्यक्रम के दौरान मंत्री सिंह एवं अन्य अतिथियों द्वारा विद्यार्थियों को नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। साथ ही कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने साइबर जागरूकता की शपथ ली। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया, नगर पालिका उपाध्यक्ष संतोष जोशी, विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सविता सोनी, डॉ. रवि पाण्डे, योगेन्द्र सिंह जादौन (बंटी बना), विजय सिंह बैस, शीतल भावसार, आशीष नागर, राय सिंह मालवीय, उमेश टेलर, गोविंद नायक, हरिओम गोठी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, पालक एवं शिक्षक उपस्थित थे। 

भोपाल में छोटे तालाब और शाहपुरा तालाब के सुंदरीकरण के लिए नगर निगम ने 11.5 करोड़ रुपये की व्यापक योजना बनाई

भोपाल  छोटे तालाब और शाहपुरा तालाब को सुरक्षित करने और सुंदरीकरण के लिए नगर निगम ने व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के बाद काम भी शुरू करा दिया है। दोनों ही तालाबों के सुंदरीकरण पर नगर निगम का झील प्रकोष्ठ द्वारा करीब साढ़े 11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तालाबों में दशकों से जमा कचरे और मिट्टी के कारण तालाबों की गहराई कम हो गई थी, जिसे निकाला जाएगा। निगम प्रशासन ने वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाने का निर्णय लिया है। तालाबों को संरक्षित करने के लिए पिचिंग का काम भी किया जाना है, लेकिन छोटे तालाब को वेटलैंड का हिस्सा होने की वजह से यहां पक्का निर्माण न करते हुए निगम पत्थरों को बिछाकर पिचिंग करा रहा है। तालाबों में मिलने वाले सीवेज के गंदे पानी को उपचारित करने के बाद ही तालाबों में छोड़ा जाएगा। छोटा तालाब के 1.4 किमी में होगी पिचिंग छोटे तालाब पर करीब 4.97 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। करीब 1.4 किलोमीटर एरिया में कई जगह पर पुरानी पिचिंग उखड़ गई है, उसकी जगह पर नई पिचिंग बनाई जा रही है। डीसिल्टिंग कर तालाब के तल में जमी गाद को बाहर निकाला जाएगा। पांच नए फव्वारे भी लगाए जाएंगे। प्रोफेसर कॉलोनी वाले एरिया में नया पाथवे बनाया जाएगा और उसके किनारे पर पौधे लगेंगे। वर्तमान में बाणगंगा नाले से सीवेज सीधे मिलकर पानी को गंदा कर रहे पानी को उपचारित करने के लिए सीवेज प्रकोष्ठ 10 एमएलडी का एसटीपी लगाएगा। शाहपुरा तालाब के पास नया पार्क होगा विकसित शाहपुरा तालाब में भी इसी तरह डीसिल्टिंग कर गाद निकाली जाएगी और किनारों पर पिचिंग की जाएगी। यहां एक फव्वारा पहले से लगा हुआ है, जबकि सात नए फव्वारे लगाने का प्रस्ताव है। पंचशील नाला और चूनाभट्टी नाला के पानी के उपचार की व्यवस्था की जाएगी। तालाब के आसपास पाथवे का निर्माण, पौधरोपण और विद्युत व्यवस्था की जाएगा। बंसल अस्पताल के पास एक नया पार्क भी विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब साढ़े छह करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनका कहना है     शहर के तालाबों के सुंदरीकरण के लिए कार्य किए जा रहे हैं। तालाबों को सुरक्षित करने के लिए पिचिंग और उनकी गाद भी निकालने का काम किया जा रहा है।तालाबों में नए फव्वारे लगाए जाएंगे- तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अपर आयुक्त।  

रायपुर: बंजर डंप क्षेत्र से हरा-भरा जंगल बनाने की दिशा में गेवरा की अनूठी पहल

रायपुर : बंजर डंप क्षेत्र से हरा-भरा जंगल बनने की ओर गेवरा की अनूठी पहल मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण कर बंजर भूमि को हरियाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। कोरबा जिले के गेवरा परिक्षेत्र में स्थित 12.45 हेक्टेयर के डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण कर बंजर भूमि को हरियाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की इस पहल की सराहना की है। जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां उगा जंगल           कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है, जबकि ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष और अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्र आमतौर पर बंजर हो जाते हैं और वहां पौधों का उगना बेहद कठिन होता है। लेकिन वन विकास निगम के प्रयासों से यही बंजर भूमि अब धीरे-धीरे हरियाली से ढकती जा रही है। वैज्ञानिक पद्धति से किया गया वृक्षारोपण           डंप क्षेत्र में जल स्तर कम होने और पोषक तत्वों की कमी को ध्यान में रखते हुए विशेष उपाय किए गए। वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग कर मिट्टी को उर्वर बनाया गया, जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए, 3–4 फीट ऊंचाई के स्वस्थ पौधों का चयन कर रोपण किया गया। मिश्रित प्रजातियों से बढ़ेगी जैव विविधता            इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, सहतूत, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनसे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों, गिलहरी और अन्य वन्य जीवों के लिए अनुकूल आवास बन सकेगा। निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता           रोपण के बाद पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है, जिसमें सिंचाई, निंदाई- गुड़ाई,खाद डालना, सुरक्षा और घास कटाई मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन जैसे कार्य शामिल हैं। वर्ष 2025 से 2029 तक 5 वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को एसईसीएल गेवरा को सौंपा जाएगा। प्रेरणादायक परिणाम          यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, तकनीक और सतत प्रयासों से पत्थरीली व अनुपजाऊ भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता हैl गेवरा का यह डंप क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक सघन, हरित और जैव विविधता से भरपूर मानव-निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक पहल बन चुकी है।

नर सेवा-नारायण सेवा के मूलमंत्र को साकार कर रही है सरकार : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल.  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि नर सेवा-नारायण सेवा मध्यप्रदेश की सरकार का मूलमंत्र है। मंत्री तोमर ने रेसकोर्स रोड स्थित सरकारी कार्यालय पर सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के 722 लाभार्थियों को हित लाभ के प्रमाण पत्र वितरित किए। ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि आपका यह सेवक जिस मुकाम पर है, यह आपके आशीर्वाद का ही प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि आज जिन 722 लाभार्थियों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, यह उनका हक है, जो मध्य प्रदेश की कर्मशील सरकार द्वारा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर जरुरतमंद के चेहरे पर खुशहाली लाना प्रदेश सरकार का संकल्प है। इसकी पूर्ति के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। हमारा उद्देश्य सिर्फ विकास के सपने दिखाना या सिर्फ बातें करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य करना है। उन्होंने दोहराया कि हर जरुरतमंद के चेहरे पर खुशहाली लाना ही हमारा लक्ष्य है। मंत्री तोमर ने कहा कि विकास का यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर के प्रत्येक नागरिक को अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना ही शासन की प्राथमिकता है। हम जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने जीवन में स्वच्छता को अपनाएंगे और एक नया स्वस्थ, हरा-भरा, नशा मुक्त समाज बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें अपने शहर को साफ और सुंदर बनाने के लिए साथ मिलकर अपना सहयोग देना होगा। ऊर्जा मंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत प्रमाण पत्र प्रदान किए। इसमें 209 पेंशन प्रमाण पत्र, 205 राशन पात्रता पर्ची, 244 कामकाजी महिला कार्ड तथा 64 आयुष्मान कार्ड शामिल हैं।  

एम्स भोपाल से मातृ मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों की पहचान, बिना किसी झंझट के फ्री पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी

भोपाल  प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) की स्थिति को सुधारने और प्रसव के दौरान होने वाली मौतों के वास्तविक कारणों की पहचान के लिए एम्स भोपाल में अब मातृ मृत्यु के मामलों में मुफ्त पैथोलॉजिकल (क्लिनिकल) ऑटोप्सी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह सेवा उन परिवारों के लिए मददगार साबित होगी जो अपनी प्रियजन की असामयिक मृत्यु के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझना चाहते हैं। खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पुलिस हस्तक्षेप से मुक्त है और पूरी तरह गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न की जाती है। आमतौर पर ऑटोप्सी या पोस्टमार्टम का नाम आते ही पुलिस और कानूनी कार्यवाही का विचार आता है, लेकिन एम्स की यह सुविधा इससे पूरी तरह अलग है। यह एक क्लिनिकल ऑटोप्सी है, जो केवल परिवार के लिखित अनुरोध और सहमति पर की जाती है। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा विज्ञान की मदद से मृत्यु के उन कारणों को खोजना है, जो सामान्य जांच में स्पष्ट नहीं हो पाते। एम्स प्रबंधन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया लगभग डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है। विशेषज्ञों द्वारा केवल जांच के लिए आवश्यक सूक्ष्म ऊतक ही लिए जाते हैं और सभी अंगों को पुनः शरीर में सुरक्षित स्थापित कर दिया जाता है। चेहरे को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई जाती और शरीर को टांकों से सुरक्षित कर ससम्मान परिवार को सौंपा जाता है। इसलिए जरूरी है जांच     हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट के जरिए परिवार को पता चलता है कि मृत्यु के वास्तविक कारण क्या थे।     इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सी मौतें रोकी जा सकती थीं।     प्रमाणिक डेटा के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे। इनका कहना है     मातृ मृत्यु के मामलों को कम करना हमारी प्राथमिकता है। पैथोलाजिकल आटोप्सी के माध्यम से हम मृत्यु के उन सूक्ष्म कारणों तक पहुंच सकते हैं, जो भविष्य में अन्य महिलाओं की जान बचाने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने में मदद करेंगे- प्रो. डा. माधवानन्द कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।  

मोहला : पीएम-आशा योजना में किसानों को राहतः चना, मसूर और सरसों पंजीयन की तिथि 20 अप्रैल तक बढ़ी

मोहला : पीएम-आशा योजना में किसानों को राहतः चना, मसूर और सरसों पंजीयन की तिथि 20 अप्रैल तक बढ़ी – रबी फसल उपार्जन हेतु पंजीयन जारी, नेफेड खरीदेगा एमएसपी पर चना, मसूर और सरसों – किसानों को 20 अप्रैल तक करना होगा पंजीयन, समर्थन मूल्य पर होगी फसलों की खरीदी मोहला  प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान पीएमआशा योजना के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत दलहनी एवं तिलहनी फसलों चनाए मसूर और सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर अब 20 अप्रैल 2026 कर दी गई है। पहले यह तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित थी। रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल  https://kisan.cg.nic.in/ पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा, जिसके लिए वे अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से सेवा सहकारी समितियों में आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के साथ ऋण पुस्तिका बी-1, पी-II आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति देना आवश्यक है।          राज्य शासन के निर्देशानुसार, जिन किसानों की गिरदावली या डीसीएस अपूर्ण है, उनके फसल और रकबे के सत्यापन हेतु पटवारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी प्रमाण पत्र मान्य किया जाएगा। इसके आधार पर अधिसूचित सहकारी समितियां उपार्जन की प्रक्रिया पूरी करेंगी। जिले में उपार्जन कार्य के लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ नेफेड को केंद्रीय एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है, जो पंजीकृत किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज खरीदेगी।         सरकार द्वारा रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है, जिसमें चना 5875  रुपए प्रति क्विंटल, मसूर 7000 रुपए प्रति क्विंटल और सरसों 6500 रुपए प्रति क्विंटल शामिल हैं। उपार्जन के लिए जिले में विकासखंड मोहला की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति गोटाटोला और विकासखंड चौकी की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति आमाटोला को अधिकृत केंद्र बनाया गया है। किसानों से सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार तक उपज खरीदी जाएगी। योजना के तहत प्रति एकड़ चना 6 क्विंटल, मसूर 2 क्विंटल और सरसों 5 क्विंटल की सीमा तक समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी।