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पंजाब में सब्सिडी योजनाएं जारी रखने का वित्तमंत्री हरपाल चीमा का बड़ा ऐलान

 चंडीगढ़  वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक बार फिर से स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की दी जा रही सब्सिडी वापस नहीं होगी और सभी सब्सिडियां जारी रहेंगी। वीरवार को यहां अपने निवास पर कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार की एक सामाजिक जिम्मेवारी भी होती है जो समाज के सभी वर्गों को एक समान लाने के लिए निभानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी सब्सिडी की जरूरत को पूरा करने के लिए आमदनी को लगातार बढ़ा रही है। मार्च के महीने में जीएसटी की ग्रोथ 12.5 प्रतिशत बढ़ने का उदाहरण देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राजस्व के हर सेक्टर के निर्धारित लक्ष्यों को हमने पूरा किया है। विपक्षी पार्टियों की ओर से पंजाब की आर्थिक हालत को लेकर की जा रही आलोचना का जवाब देते हुए वित्तमंत्री ने पूर्व वित्तमंत्रियों को पंजाब के वित्तीय हालात पर बहस करने की खुली चुनौती दी। चीमा ने दावा किया कि देश में वित्तीय सुधारों के मामले में पंजाब ने कई पहलकदमियां की हैं की है, जिसके चलते राज्य को हाल ही में संपन्न हुए वित्त वर्ष में 400 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। मां-बेटी सत्कार योजना के तहत जनरल कैटेगरी की महिलाओं को 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये देने के लिए रजिस्ट्रेशन 13 अप्रैल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स देने वालों, सरकारी कर्मचारियों, सांसदों, विधायकों आदि की पत्नियों को इस योजना से बाहर रखा गया है, जबकि आंगनवाड़ी, मिड-डे मील वर्कर और प्राइवेट जाब करने वाली महिलाओं को इस योजना का फायदा मिलेगा। सरकारी कर्मचारियों को डीए की किस्त देने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान लंबित 14,191 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं और सरकार अपनी सरकार के दौरान डीए देने और पुरानी पेंशन स्कीम पर विचार कर रही है। सरकार की ओर से कर्ज लेने पर चीमा ने कहा कि दूसरे राज्य भी लगातार कर्ज ले रहे हैं। केंद्र सरकार पर 2014 में 55 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था जो अब बढ़कर 212 लाख करोड़ रुपये हो गया है। चीमा ने कहा कि जब आप सरकार सत्ता में आई थी, तो कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड में 2,980 करोड़ रुपये थे और अब यह 10,738 करोड़ रुपये हो गया है। चीमा ने कहा कि आप सरकार के दौरान खजाना कभी बंद नहीं हुआ।

बिजली ऑफिस के चक्करों से मिलेगी मुक्ति, रक्सौल में हर सोमवार और शुक्रवार को दर्ज करा सकेंगे अपनी समस्याएं

रक्सौल रक्सौल जिले में लोगों की बिजली बिल से जुड़ी समस्याएं सिर्फ तीन दिनों में ही निपटा दिए जायेंगे. इसके लिए कैंप लगाया जाएगा, जहां कंज्यूमर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. कैंप सुबह के 11 बजे से दोपहर के 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा.  बिजली बिल से जुड़ी काफी समस्याएं लोगों को झेलनी पड़ रही है. इस बीच रक्सौल जिले में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) ने खास पहल की है. इसके साथ ही कंज्यूमर्स की समस्या के समाधान के लिए कैंप लगाए जाने का फैसला लिया है. कंज्यूमर्स के लिए यह कैंप सुबह के 11 बजे से दोपहर के 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा. हफ्ते में 2 दिन लगाए जायेंगे कैंप जानकारी के मुताबिक, हफ्ते में दो दिन सोमवार और शुक्रवार को कैंप लगाए जायेंगे. इसके बाद तय समय पर कंज्यूमर्स कैंप में पहुंच कर अपनी-अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. रक्सौल विद्युत प्रमंडल के सभी ऑफिसों में अप्रैल महीने से यह सुविधा कंज्यूमर्स के लिए शुरू की गई है. इस कैंप का उद्देश्य बिजली बिल से जुड़ी गलतियों या फिर शिकायतों को जल्द से जल्द का निपटारा करना है. ये सभी शिकायतें करा सकेंगे दर्ज इलेक्ट्रिकल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की माने तो, कैंप में नया कनेक्शन, बिजली बिल में सुधार, स्मार्ट प्री-पेड मीटर, ‘पीएम सूर्य घर योजना’ से जुड़े एप्लीकेशन समेत कई अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतें कंज्यूमर्स दर्ज करा सकते हैं. खास बात यह भी है कि सिर्फ 3 दिनों में ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा. लेकिन कुछ ऐसे मामले, जिसके लिए किसी जगह पर जाकर जांच करने की जरुरत होगी, वैसे मामलों में तीन दिन से ज्यादा का समय लग सकता है. लोगों से की गई ये अपील जानकारी के मुताबिक, कैंप से जुड़ी प्रोग्रेस रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी. ऐसे में स्थानीय लोगों से कैंप में आने और शिकातय दर्ज कराने की अपील की है. इससे कंज्यूमर्स को भी यह फायदा हो सकेगा कि उन्हें बार-बार ऑफिस का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा. साथ ही राजस्व वसूली में भी तेजी आ सकती है.

जयपुर में विदेशी इन्फ्लुएंसर के फोटोशूट पर बवाल, हथिनी ‘चंचल’ की मौत से उठा रंगों पर सवाल

जयपुर जयपुर की पहचान ‘पिंक सिटी’ के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसी पहचान को दर्शाने के लिए किया गया एक फोटोशूट अब बड़े विवाद का कारण बन गया है। एक विदेशी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर द्वारा हाथी और एक महिला मॉडल को गुलाबी रंग में रंगकर किया गया फोटोशूट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। शुरुआत में यह वीडियो आकर्षण का केंद्र बना, लेकिन कुछ ही समय बाद उसी हाथी की मौत की खबर सामने आने से मामला गंभीर हो गया है। जानकारी के मुताबिक, यह फोटोशूट जयपुर के पास स्थित हाथी गांव में किया गया था। जानकारी के अनुसार, रूस की इनफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा ने ‘पिंक सिटी’ की थीम पर यह शूट कराया था। इसमें 65 वर्षीय हथिनी ‘चंचल’ और मॉडल यशस्वी को गुलाबी रंग से रंगा गया था। यह वीडियो करीब तीन महीने पहले पोस्ट किया गया था, लेकिन डेढ़ महीने पहले हाथी की मौत के बाद यह मामला दोबारा चर्चा में आ गया। पशु प्रेमियों और पशु अधिकार संगठनों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि हाथी जैसे संवेदनशील जानवर को किसी भी तरह के रंग या केमिकल से रंगना उसकी त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। कई कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यह रंग ही हाथी की मौत का कारण हो सकता है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विवाद बढ़ने के बाद वन विभाग हरकत में आया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि बिना अनुमति या नियमों के खिलाफ जाकर जानवर के साथ क्रूरता की गई है, तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बबलू खान ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि हाथी को केवल कुछ समय के लिए ही रंगा गया था और इसमें किसी भी हानिकारक केमिकल का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हथिनी पहले से ही वृद्ध थी और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। दूसरी ओर, इनफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा ने भी सोशल मीडिया पर सफाई दी है। उन्होंने दावा किया कि शूट के दौरान ऑर्गेनिक और स्थानीय पेंट का इस्तेमाल किया गया था, जो त्योहारों में भी प्रयोग होता है और जानवरों के लिए सुरक्षित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने जयपुर में कई सप्ताह बिताए और सभी प्रक्रियाओं का ध्यान रखा। इस बीच, पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राजस्थान में पर्यटकों का स्वागत है, लेकिन सभी को नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक स्तर तक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ पशु अधिकार संगठनों की सख्ती की मांग है।  

डीडीसी का बड़ा एक्शन,घोषी नगर पंचायत की निविदा रद्द, कार्यपालक पदाधिकारी से मांगा जवाब

जहानाबाद जहानाबाद जिले में सैरात (हाट-बाजार) की बंदोबस्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। “माल महाराज के, मिर्जा खेले होली” वाली कहावत यहां चरितार्थ होती नजर आ रही है, जहां एक ही जमीन पर नगर पंचायत और जिला परिषद दोनों ने बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है और दोनों निकायों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। एक ही जमीन पर दो-दो बंदोबस्ती मामला घोषी नगर पंचायत का है, जहां जिला परिषद जहानाबाद की सैरात की जमीन पर नगर पंचायत द्वारा भी निविदा निकालकर बंदोबस्ती कर दी गई। वहीं, जिला परिषद पहले से ही उसी सैरात की बंदोबस्ती के लिए प्रक्रिया चला रहा था। ऐसे में एक ही जमीन पर दो अलग-अलग बंदोबस्ती होने से स्थिति असाधारण हो गई और विवाद गहरा गया। DDC प्रीति एक्शन मोड में मामला सामने आते ही जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और उप विकास आयुक्त (DDC) डॉ. प्रीति एक्शन मोड में आ गईं। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए नगर पंचायत घोषी द्वारा की गई बंदोबस्ती को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। साथ ही, 24 घंटे के भीतर नगर पंचायत घोषी के कार्यपालक पदाधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। जिला परिषद की जमीन पर वर्षों से लग रहा सैरात जानकारी के मुताबिक, घोषी नगर पंचायत मुख्यालय में जिला परिषद की खतियानी जमीन पर कई वर्षों से सैरात लगता आ रहा है। हर साल की तरह इस वित्तीय वर्ष में भी जिला परिषद ने विधिवत विज्ञापन निकालकर बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन इसी बीच नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी ने भी उसी जमीन पर सैरात के लिए निविदा जारी कर दी, जिसे नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है। कानून क्या कहता है? जिला परिषद के अधिकारियों का कहना है कि बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 100 के अनुसार, जिला परिषद की परिसंपत्ति नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत के अधीन नहीं होती। इसका साफ मतलब है कि जिला परिषद की स्वामित्व वाली जमीन पर नगर निकाय किसी भी तरह का बाजार या सैरात की बंदोबस्ती नहीं कर सकते। वहीं, नगर पंचायत घोषी के मुख्य पार्षद का कहना है कि नगर पंचायत क्षेत्र के अंदर जो भी खाली जमीन है, वह नगर पंचायत की मानी जाती है और इस संबंध में पहले से आदेश भी जारी है।  

नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन, लोगों के स्वास्थ्य पर डाल रहा विपरीत प्रभाव

मिलावटखोरों का सरदार जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके सोनी  नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री के उपयोग से लोगों के पूरे स्वास्थ्य पर पड रहा विपरीत प्रभाव  गांधी के फेर में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ जिम्मेदारों ने मूंदी आंख सबसे सरोकार खबरें धारदार। ब्योहारी ब्यूरो चीफ वेदप्रकाश बेदांति ब्योहारी नगरीय क्षेत्र में मिलावट खोरों की चांदी, यहां कभी नहीं होती जांच और कार्यवाही। मिलावटखोरों को संरक्षण दे रहा खाद्य सुरक्षा विभाग का तथाकथित अधिकारी आर के सोनी, सूत्रों की मानें तो जिले में बैठकर यहां खाद्य सुरक्षा विभाग का प्रभार देख रहे साहब के द्वारा हर महीने यहां के होटल रेस्टोरेंट डेयरी नमकीन फैक्ट्री किराना दुकानों व पानी सप्लाई फैक्ट्री बर्फ आइसक्रीम फैक्ट्री व अन्य एजेंसियों से मासिक वसूली की जाती है। जिससे खाद्य सुरक्षा अधिकारी यहां कभी किसी पर कोई कार्यवाही नहीं करते और न कभी किसी का फोन उठाते हैं।  ब्योहारी-नगरीय क्षेत्र में दिनांक 27/03/2026 को विनायक पैलेस में आयोजित विवाह समारोह  बब्बू खान के लड़की की शादी में राजू गुप्ता की दुकान से पताजंली कम्पनी का सरसों तेल खरीदा गया जिसे सब्जी बनाने के लिए जब कड़ाही में डालकर गर्म किया तभी वह पूरा तेल हरे रंग में बदल गया जैसे डाबर आंवला का तेल हो। आनन फानन आयोजक दूसरी कम्पनी का तेल लाकर दावत का खाना बनाया गया।यदि उस तेल का उपयोग कर खाना बनाया जाता तो निसंदेह अनेक लोग  फ्रूडप्वाजिनिंग के शिकार हो सकते थे। गनीमत रही कि खाना बनाने वाले मिस्त्री ने तत्काल तेल के कलर बदलने से उसकी गुणवत्ता परख तेल ही बदलवा दिया।पतांजली कम्पनी का सरसों तेल जिसे गर्म करने पर उसका पूरा रंग ही बदल कर गाढ़ा हरे रंग का हो  जाता है। जिससे यह साफ है कि इसमें किसी तेज कैमिकल का उपयोग किया जाता है। जब इसे उपयोग के लिए कड़ाही में डालकर गर्म किया जाता है तो पूरा तेल ही हरे कलर में बदल जाता है। जैसे डाबर आंवला का तेल हो। पतांजली का कमाल सरसों तेल गरम करते ही बन गया डाबर आंवला का तेल  खाद्य पदार्थों में इतनी मिलावट खोरी से लोगों की जान जोखिम में बनी रहती है। मिलावटखोरों को लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की यहां खुली छूट खाद्य सुरक्षा अधिकारी सोनी द्वारा दी गई है। जिसके बदले साहब हर महीने अपनी जेब खूब गर्म करते हैं।  यहां नकली मावा,दूध,पनीर, सहित ज्यादातर खाद्य पदार्थ नकली और मिलावटी रहता है।खाद्य सुरक्षा कानून लागू है। लेकिन जिले में बैठे ज़िला खाद्य अधिकारी आरके सोनी के बारे में यहां चर्चा है कि उनका एजेंट यहां की लगभग सभी होटल डेयरी रेस्टोरेंट एजेंसी कारखाने और अन्य खाद्य पदार्थ सप्लाई बाली जगहों से हर महीने एक निश्चित तय राशि की बसूली करता है।जिससे यहां का ज्यादातर बाजार नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री से पटा हुआ है। कार्यवाही से बेखबर व्यापारी लोगों के जीवन से खिलवाड़ करते हुए ब्रांडेड कम्पनी का लेबल लगा मनमानी दाम पर बाजार में खुलेआम नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री बेंच रहे हैं। जिससे जिले में बैठे खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके सोनी पर लोग तमाम तरह के गम्भीर आरोप लगा रहे हैं। जबसे साहब ने जिले का प्रभार संभाला है तब से केवल साल में एकाध बार अपने स्थानीय एजेंटों के साथ नगरीय क्षेत्र के सभी व्यापारी बंधुओं से मिलकर मिलावटखोरी तेजकर जेब का बजन बढ़ाने की मिन्नत करने यहां जरुर आते हैं। जांच और कार्यवाही के नाम यहां हो रही केवल बसूली! ऐसा यहां के कुछ लोगों का कहना है। दिखाबा के लिए मात्र कागजी कार्यवाही कार्यालय में बैठकर ही साहब पूरी करते हैं। खाद्य सुरक्षा के नाम पर विभाग में बैठा अमला केवल बसूली ही करता है। नाम न छापने की शर्त पर एक रेस्टोरेंट के संचालक ने बताया कि जिलाखाद्य विभाग केवल ब्योहारी में हर महीने लाखों रुपए की बसूली करता है। लोगों का कहना है कि शहडोल जिले में जबसे जिला खाद्य विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके. सोनी पदस्थ हुए हैं। तबसे स्थानीय व्यापारियों पर इनकी बसूली का दबाव कुछ अधिक ही बढ़ गया है।  यहां के कई व्यापारी इनकी इस अबैध बसूली से बहुत परेशान हैं। और सरकार से अंकुश लगाने की मांग कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी शहडोल आरके सोनी कथन -इस सम्बन्ध में जब इनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया लेकिन फोन नहीं उठा।

स्प्रिट पीने से मची चीख-पुकार,4 की मौत, SHO सस्पेंड और चौकीदार गिरफ्तार

मोहतिहारी मोतिहारी रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में जहरीली स्प्रिट (शराब) पीने से लोगों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। कल एक व्यक्ति की मौत हुई थी, वहीं दो अन्य गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इसके अलावा एक व्यक्ति की आंखों की रोशनी चले जाने की खबर ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। मृतकों की संख्या बढ़ी, कई लोग अभी भी बीमार मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों की संख्या दो से बढ़कर चार हो गई है। कल जहरीली शराब पीने से चंदू की मौत हुई थी। वहीं आज सुबह तुरकौलिया थाना क्षेत्र के शंकर सरैया परसौना निवासी प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी और हीरालाल महतो की मौत हो गई। उनका इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो जहरीली शराब पीने से बीमार हैं और चोरी-चुपके इलाज करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांव के कुछ लोगों ने शराब समझकर स्प्रिट का सेवन कर लिया। सेवन के कुछ ही देर बाद सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों ने उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान अबतक दो लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अन्य कई पीड़ितों का इलाज जारी है। आंखों की रोशनी प्रभावित, मामले की गंभीरता बढ़ी डॉक्टरों के अनुसार, इस जहरीली शराब के सेवन से पहले आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है। गांव में भय और आक्रोश, अवैध शराब पर सवाल घटना के बाद पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब और स्प्रिट का कारोबार चल रहा है, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। साथ ही अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में लागू शराबबंदी कानून और उसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौकीदार भरत रॉय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तुरकौलिया थाना के SHO उमाशंकर मांझी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रघुनाथपुर में हुई हत्या के मामले में भी केस दर्ज कर लिया गया है. हीरालाल भगत के परिजनों के आवेदन पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।  

एमपी की पूर्व आइएएस अधिकारी की अवैध संपत्ति में संलिप्तता, ईडी ने दायर किया पूरक अभियोग

भोपाल   मध्यप्रदेश के आइएएस पति पत्नी अवैध संपत्ति मामले में ऐसे फंसे हैं कि सालों बाद भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एमपी कैडर के पूर्व आइएएस दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ ईडी ने पूरक अभियोग पेश किया है। पूर्व आइएएस दंपत्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यह कार्यवाही की गई है। ईडी ने दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ दूसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (SPC) दाखिल की। भोपाल स्थित विशेष PMLA न्यायालय में 31 मार्च को इस संबंध में शिकायत पेश की गई थी। ईडी का आरोप है कि जोशी दंपत्ति ने 41.87 करोड़ रुपए की अवैध चल अचल संपत्ति जुटाई। दिवंगत आइएएस अधिकारी अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके आधार पर सन 2002 में ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की जांच की शुरुआत की। ईडी ने जांच में पाया कि दोनों अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति बनाई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आइएएस दंपती अरविंद जोशी और टीनू जोशी के खिलाफ दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर की है। ईडी ने लोकायुक्त में जोशी दंपति के खिलाफ दर्ज मामले के आधार पर जांच शुरू की थी। इसमें उन पर 41.87 करोड़ की चल- अचल संपत्ति रखने का आरोप था। जो उनकी वैध आय से कई गुना ज्यादा थी। इसके बाद ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि अरविंद जोशी और टीनू जोशी ने अपने नाम और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों की चल और अचल संपत्ति जमा कर रखी थी। इससे पहले ईडी ने अवैध रूप से अर्जित करीब 8.60 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए ईडी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया था कि अरविंद जोशी ने कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी संपत्तियां बनाई। इस दौरान संपत्ति के स्वामित्व को छिपाने के लिए जानबूझकर तीसरे पक्ष को शामिल किया। बता दें इससे पहले ईडी ने अरविंद जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की अवैध रूप से अर्जित करीब 8.60 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए थे। इसके बाद 28 जनवरी को एक और अंतरिम कुर्की आदेश जारी किया गया। जिसमें जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की लगभग 5 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की गईं।

लुधियाना एयरपोर्ट से एक टिकट पर विदेश यात्रा, Air India दिल्ली से करेगा कनेक्टिंग फ्लाइट की सुविधा

लुधियाना लुधियाना के हलवारा से एक ही टिकट पर विदेश का सफर किया जा सकेगा। एयर इंडिया ने लुधियाना एयरपोर्ट से फ्लाइट्स का टाइम ऐसे शेड्यूल किया है ताकि विदेश जाने वाले दिल्ली एयरपोर्ट से कनेक्टिंग फ्लाइट ले सकें। एयर इंडिया ने विदेश जाने वाले यात्रियों को सलाह दी है कि वो लुधियाना से सुबह की फ्लाइट पकड़ें और कनेक्टिंग फ्लाइट में अपनी टिकट साथ ही करवा दें। ऐसा करने से उन्हें बैगेज का बार-बार चेकइन करवाने की जरूरत नहीं होगी। तीन से चार घंटे में सारी फॉर्मेलिटी होगी पूरी एयर इंडिया ने तर्क दिया है कि विदेश जाने वालों को दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन व अन्य फॉर्मेलिटी को पूरा करने के लिए तीन से चार घंटे का समय लग जाता है। अगर लुधियाना एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले यात्री सुबह की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचते हैं तो उन्हें एयरपोर्ट पर फार्मेलिटीज पूरी करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा। सुबह और दोपहर दो फ्लाइट्स जाएगी दिल्ली हलवारा से सुबह और दोपहर दो फ्लाइट्स दिल्ली के लिए उपलब्ध होंगी, लेकिन इंटरनेशनल यात्रा के लिए सुबह वाली फ्लाइट सबसे बेहतर मानी जा रही है। यह फ्लाइट यात्रियों को सुबह दिल्ली पहुंचा देती है, जिससे वे उसी दिन शाम की अंतरराष्ट्रीय उड़ान आसानी से पकड़ सकते हैं। एयरलाइन ने शेड्यूल इस तरह तैयार किया है कि यात्रियों को दिल्ली में 4 से 8 घंटे का ट्रांजिट टाइम मिल सके। यह समय इमिग्रेशन, सिक्योरिटी और बोर्डिंग के लिए पर्याप्त होता है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें बैगेज को लेकर भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। लुधियाना फ्लाइट से कंपनी बैगेज को अपने आप कनेक्टिंग फ्लाइट में ट्रांसफर हो जाएगा और यात्री आसानी से एयरपोर्ट पर अपनी बाकी फॉर्मेलिटीज पूर कर सकेगा। किन-किन देशों के लिए मिलेगी सुविधा एयर इंडिया का कहना है कि इस कनेक्टिविटी के जरिए यात्री यूनाइटेड किंगडम और यूरोप के प्रमुख शहरों तक सफर कर सकेंगे। इनमें लंदन, बरमिंगम,रोम, मिलन और पैरिस शामिल हैं।इसके अलावा अन्य देशों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी ली जा सकेगी। एक टिकट पर पूरी यात्रा कर सकेंगे एयर इंडिया ने बताया है कि यात्री हलवारा से अपने अंतिम विदेशी गंतव्य तक एक ही टिकट (सिंगल PNR) पर यात्रा कर सकते हैं। इस सुविधा में सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्री का बैगेज सीधे अंतिम गंतव्य तक चेक-इन हो जाता है और दिल्ली में दोबारा चेक-इन की जरूरत नहीं पड़ती। अगर यात्री अलग-अलग टिकट बुक करते हैं, तो उन्हें दिल्ली में बैगेज लेकर फिर से चेक-इन करना होगा, जिससे समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं। दिल्ली से मिलेंगी एयर इंडिया की फ्लाइट कनेक्टिंग यात्रा में दिल्ली से आगे की उड़ान भी एयर इंडिया की ही होती है। हालांकि, कुछ रूट्स पर एयर इंडिया की पार्टनर एयरलाइंस (कोडशेयर) भी ऑपरेट कर सकती हैं। ऐसे मामलों में टिकट एक ही रहता है, लेकिन फ्लाइट दूसरी एयरलाइन की हो सकती है। इसके बावजूद, यदि बुकिंग एक ही टिकट पर है तो यात्रा सहज बनी रहती है और बैगेज सीधे अंतिम गंतव्य तक पहुंचता है। वेबसाइट, मोबाइल ऐप व ट्रैवल एजेंट के जरिए करें टिकट बुक यात्री एयर इंडिया की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या ट्रैवल एजेंट के जरिए टिकट बुक कर सकते हैं। बुकिंग के समय लुधियाना से फाइनल डेस्टिनेशन डालना होगा। ताकि आपको कनेक्टिंग फ्लाइट का विकल्प मिल जायेंगे। टिकट एक ही बुकिंग में लिया जाए, ताकि यात्रा आसान और बिना परेशानी के हो सके। दिल्ली एयरपोर्ट पर कितना इंतजार हलवारा से सुबह पहुंचने वाले यात्रियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर औसतन 4 से 8 घंटे का इंतजार करना पड़ सकता है। यह इंटरनेशनल कनेक्शन के लिए सामान्य और सुरक्षित समय माना जाता है। दिल्ली से किसी भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए यात्रियों को कम से कम 3 से 4 घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना जरूरी होता है। हालांकि, कनेक्टिंग यात्रियों के लिए यह प्रक्रिया आसान हो जाती है क्योंकि वे पहले से चेक-इन रहते हैं। यात्रियों के लिए बड़ा फायदा इस नई सेवा से लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को अब सड़क या रेल से दिल्ली जाने की जरूरत कम होगी। हलवारा एयरपोर्ट से सीधी उड़ान और दिल्ली से कनेक्टिविटी के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा तेज, सुविधाजनक और कम झंझट वाली हो जाएगी। यह पहल लुधियाना को ग्लोबल एयर नेटवर्क से जोड़ देगी। एयर इंडिया लुधियाना से दिल्ली के लिए चलाएगा A320 फेमिली क्राफ्ट एयर इंडिया लुधियान से दिल्ली के बीच A320 फेमिली एयर क्राफ्ट चलाएगा। यह मुख्य रूप से घरेलू और शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल रूट्स पर इस्तेमाल होते हैं। इन विमानों को हाल के वर्षों में अपग्रेड किया गया है ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके। इनके प्रमुख फीचर्स इस प्रकार हैं A320 फेमिली एयरक्राफ्ट की मुख्य विशेषताएं 1. शॉर्ट-हॉल और हाई-फ्रीक्वेंसी रूट्स के लिए डिजाइन किया गया है। 2. तीन क्लास की केबिन, बिजनेस क्लास में आरामदायक और ज्यादा स्पेस, प्रीमियम इकोनमी में अतिरिक्त लेगरूम और बेहतर सीटिंग और इकोनमी में किफायती और आरामदायक यात्रा। इसमें कुल 160 से 180 सीटें हैं जिसमें से 8 बिजनेस क्लास, 24 प्रीमियम और बाकी इकोनमी सीट होंगी। 3. USB चार्जिंग और डिजिटल सुविधा है। यात्री अपने मोबाइल/लैपटॉप चार्ज कर सकते हैं। इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट मोबाइल पर देख सकते हैं। 4. इन-फ्लाइट इंटरटेनमेंट के लिए वाइफाई की सुविधा मिलेगी।

रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स में नया इतिहास रचा

रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय लिखा वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट बन गए हैं, जिन्होंने लंबी कूद में 7 मीटर की दूरी तय की लक्षद्वीप में कोई सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक नहीं है, इसलिए अब्दुल मिट्टी के गड्ढों में अपनी लंबी कूद का अभ्यास करते हैं रायपुर अब्दुल फताह ज़्यादातर रातों को समुद्र में होते हैं, जहां वे मछुआरे बनकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी कमाने में मदद करते हैं। जैसे ही सुबह होती है, वे सीधे ट्रेनिंग ग्राउंड की ओर निकल पड़ते हैं और एक एक अलग सपने का पीछा करते हुए लक्षद्वीप को 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' 2026 में पहला मेडल दिलाया। कवरत्ती और कदमत द्वीपों के बीच स्थित, दूरदराज के अमीनी द्वीप जो लगभग 2.7 किमी लंबा और 1.2 किमी चौड़ा है, और जिसका कुल भू-क्षेत्रफल 2.60 वर्ग किमी है के 18 वर्षीय लॉन्ग जम्पर ने जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। केंद्र शासित प्रदेश के खेल अधिकारी अहमद जावेद हसन ने मुस्कुराते हुए कहा, वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने 7 मीटर की दूरी पार की है और यह वाकई एक खास बात है।''  मछुआरे परिवार में जन्मे फताह भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और घर की बड़ी ज़िम्मेदारी संभालते हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। इसके बजाय, उन्होंने अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बँटाने और खेल को अपने जुनून के तौर पर अपनाने का फ़ैसला किया। फताह ने कहा, '' कोई और चारा नहीं है, आपको चीज़ों में संतुलन बनाना ही पड़ता है। जब मैं स्कूल में था, तभी से मैं अपने पिता की मछली पकड़ने के काम में मदद करता आ रहा हूँ। यही हमारी आमदनी का एकमात्र ज़रिया है। हमारे परिवार में छह लोग हैं। सुबह मैं अपनी ट्रेनिंग के लिए जाता हूँ; मेरे परिवार को इस बारे में पता है, भले ही वे इस खेल के बारे में बहुत कम समझते हों।''  दिलचस्प बात यह है कि एथलेटिक्स उनका पहला प्यार नहीं था। फताह शुरू में फुटबॉल खेलते थे, जैसा कि द्वीप के कई दूसरे युवा करते थे। हालांकि, कुछ साल पहले एक स्थानीय इंटर-आइलैंड प्रतियोगिता के दौरान उनकी यात्रा में एक अहम मोड़ आया। कोच मोहम्मद कासिम ने इस युवा की दौड़ने की ज़बरदस्त काबिलियत को पहचाना और उन्हें एथलेटिक्स में आने का सुझाव दिया। तब से, फताह ने लॉन्ग जंप और 100-मीटर स्प्रिंट में ट्रेनिंग शुरू कर दी। लगभग उसी समय, अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन का गठन होने लगा, जिससे इस क्षेत्र में खेलों के विकास को एक सही ढाँचा मिला। फताह और कई अन्य युवा एथलीटों को धीरे-धीरे कोचिंग की मदद दी गई, जिससे उन्हें ज़्यादा व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग करने में मदद मिली। सिर्फ़ दो सालों में, एसोसिएशन ने लगभग 384 एथलीटों को तैयार किया। इस समूह में से, 17 एथलीटों को गेम्स में लक्षद्वीप का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। जगदलपुर में फत्ताह की 7.03 मीटर की गोल्ड-विनिंग जंप, वहां के हालात को देखते हुए, खास तौर पर संतोषजनक थी। ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने बताया था कि उनकी जंप आमतौर पर 6.5 से 6.7 मीटर के आस-पास रहती है। उन्होंने कहा. '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आने से पहले, मैंने अपने लिए 7.15 मीटर तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया था। मुझे खुशी है कि मैं सात मीटर का आँकड़ा पार कर पाया, और यह गोल्ड मेडल मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा,”  लक्षद्वीप धीरे-धीरे भारत के एथलेटिक्स के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश की सबसे जानी-मानी एथलीटों में से एक हैं मुबस्सिना मोहम्मद, जो 19 साल की लॉन्ग जंपर और हेप्टाथलीट हैं। कुवैत में हुए 2022 एशियन U18 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतकर वह लक्षद्वीप की पहली इंटरनेशनल मेडलिस्ट बनीं। उन्होंने महिलाओं की लॉन्ग जंप में 6.30 मीटर के अपने पर्सनल बेस्ट के साथ जूनियर नेशनल टाइटल भी जीता। मुबस्सिना की तरह, फताह भी बिना किसी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा के ट्रेनिंग करते हैं। लक्षद्वीप, जो सिर्फ़ 32 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जिसकी आबादी 70,000 से भी कम है, वहां अभी तक कोई ठीक-ठाक सिंथेटिक ट्रैक या एथलेटिक्स स्टेडियम नहीं है। नतीजतन, कई एथलीट मिट्टी के ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं, जबकि फत्ताह अक्सर अपने स्प्रिंट इवेंट्स की ट्रेनिंग के लिए पास के एक फुटबॉल मैदान का इस्तेमाल करते हैं।   उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और दूसरे नेशनल लेवल के मुकाबलों में हमारी सफलता को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि हमारे लिए हालात बदलेंगे। हो सकता है कि हमें कुछ नौकरियाँ और ट्रेनिंग की सुविधाएँ मिल जाएं.''

मरुधरा में पश्चिमी विक्षोभ का असर, जैसलमेर से डीडवाना तक ओलों की सफेद चादर

जयपुर राजस्थान में एक बार फिर से मौसम ने अचानक करवट ले ली। शुक्रवार को प्रदेश के पश्चिमी व मध्य इलाकों में बारिश का दौर शुरू हो गया। जैसलमेर, नागौर, सीकर, डीडवाना और जालोर सहित कई जिलों में कहीं मूसलाधार तो कहीं हल्की बूंदाबांदी ने मौसम को एकदम खुशनुमा बना दिया। तेज हवाओं और बारिश ने प्रदेश के तापमान में गिरावट ला दी और फिलहाल लू का असर पूरी तरह खत्म हो गया है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने 3 अप्रैल को 8 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और बाकी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला नजारा जैसलमेर जिले में देखने को मिला,  जहां ग्रामीण इलाकों में बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि भी हुई। जिले के पिथोडाई गांव में सुबह साढ़े सात से आठ बजे के बीच करीब 15 मिनट तक जोरदार ओले गिरे। ओलों की सफेद चादर बिछते ही तापमान तेज़ी से लुढ़क गया। वहीं, डीडवाना में सुबह साढ़े पांच से छह बजे के बीच तेज बारिश हुई जिसने ठंडी हवाओं के साथ मिलकर लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दिलाई। जालोर में भी बादलों ने सुबह से डेरा जमाया और रुक-रुककर बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। क्यों बदला मौसम का मिजाज? मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश में लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से यह बदलाव आया है। इस सिस्टम के असर से अरब सागर की नमी राजस्थान तक पहुंच रही है, जिससे बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है। अप्रैल का पहला सिस्टम गुरुवार से ही सक्रिय हो चुका था और इसका असर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में साफ नज़र आया। कई जगहों पर तूफानी बारिश के साथ ओले भी गिरे। उमस से मिली राहत मौसम विभाग के मुताबिक, 4 अप्रैल के बाद यह सिस्टम कमजोर पड़ सकता है, लेकिन राहत ज्यादा देर टिकने वाली नहीं है। 6 अप्रैल की शाम से एक और मजबूत सिस्टम दस्तक देगा। जिसके चलते 7 और 8 अप्रैल को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की आशंका जताई जा रही है। साथ ही विभाग ने यह भी चेताया है कि इस सिस्टम के गुजरने के बाद 10 अप्रैल तक हीटवेव की वापसी हो सकती है।